Category: National

  • विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध

    विदेश मंत्री जयशंकर का बड़ा बयान, बोले- बदलती परिस्थितियों में और गहरे हुए भारत-रूस के संबंध


    नई दिल्ली।
    विदेश मंत्री एस जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने भारत और रूस के संबंधों (India-Russia relations) को लेकर सोमवार को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘आज की बदलती परिस्थितियों में हमारी भागीदारी और गहरी होती जा रही है।’ जयशंकर ने कहा कि 2030 तक दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। उन्होंने रूस के साथ दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। विदेश मंत्री ‘भारत और रूस: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ शीर्षक वाले ऑनलाइन सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

    वहीं, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की सराहना की। उन्होंने कहा कि रूस इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे का स्वागत करने के लिए उत्सुक है। एस जयशंकर ने कहा कि विकसित हो रही बहुध्रुवीय व्यवस्था के लिए भारत और रूस के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है, जिसमें ब्रिक्स, शंघाई सहयोग संगठन (SCO), जी20 और संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सहयोग शामिल है। उन्होंने कहा कि भारत, रूस के साथ मिलकर साझा चुनौतियों का संतुलित और समावेशी तरीके से समाधान करने के लिए तत्पर है।


    भारत-रूस के मजबूत होते रिश्ते

    जयशंकर ने कहा, ‘भारत और रूस के बीच विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित एक विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी है। दशकों से हमारे पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग ने क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और प्रगति को आगे बढ़ाया है।’ विदेश मंत्री ने पिछले वर्ष दिसंबर में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से निकले नतीजों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘दोनों पक्ष वर्तमान वार्षिक व्यापार को 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक संतुलित और सतत तरीके से पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।’

    विदेश मंत्री ने कहा, ‘हमें भारत-यूरेशियन आर्थिक संघ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने और गैर-टैरिफ बाधाओं व विनियामक अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। साथ ही, कुशल भारतीय कार्यबल का उपयोग करने के प्रयासों को जारी रखना चाहिए।’ पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनजर विदेश मंत्री की ये टिप्पणियां अहम हैं। दिसंबर में पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई वार्ता के बाद भारत और रूस ने कई उपायों की घोषणा की, जिनमें एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने व 2030 तक वार्षिक व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने के लिए 5 वर्षीय खाका शामिल है।


    रूस की ओर से क्या कहा गया

    जयशंकर ने रूस को नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भारत का सर्वोत्तम भागीदार बताया। उन्होंने कहा, ‘चूंकि भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 गीगावॉट तक बढ़ाना है, मुझे विश्वास है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए रूस में उसे एक विश्वसनीय भागीदार मिलेगा।’ लावरोव ने कहा कि रूस-भारत की समय-परीक्षित मित्रता आपसी विश्वास और सम्मान पर आधारित अंतरदेशीय संबंधों का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा, ‘रणनीतिक स्वायत्तता की दिशा में अपनी राह के तहत स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने और राष्ट्रीय हितों को लगातार प्राथमिकता देने के लिए भारत अत्यंत सम्मान का पात्र है। रूस और भारत की सदियों पुरानी मित्रता इस बात का आदर्श उदाहरण है कि समानता, आपसी विश्वास, सम्मान और एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए अंतरराज्यीय संबंध कैसे बनाए जा सकते हैं और बनाए जाने चाहिए।’

  • Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई

    Inter-Religious विवाह में महिलाओं की धार्मिक पहचान के मामले में SC कर रहा सुनवाई


    नई दिल्ली।
    क्या अंतर-धार्मिक विवाह (Inter-Religious Marriage) करने पर महिलाओं को उनकी धार्मिक पहचान से वंचित किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस मामले पर सुनवाई कर रहा है। ताजा केस पारसी समुदाय से जुड़ा है, जहां याचिकाकर्ता दीना बुढ़राजा ने नागपुर पारसी पंचायत के नियम 5(2) को चुनौती दी है। इस नियम के अनुसार, अगर कोई पारसी महिला गैर-पारसी से विवाह करती है तो उसकी धार्मिक पहचान समाप्त कर दी जाती है और उसे अगियारी जैसे धार्मिक स्थलों में प्रवेश से वंचित कर दिया जाता है। वहीं, पारसी पुरुषों पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है।

    याचिका में दावा किया गया कि यह नियम लिंग आधारित भेदभावपूर्ण है। साथ ही, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता), 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) तथा 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई की। इसने केंद्र सरकार, नागपुर पारसी पंचायत, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, महाराष्ट्र सरकार और चैरिटी कमिश्नर को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने तर्क दिया कि यह नियम असंवैधानिक है क्योंकि यह केवल महिलाओं को लक्षित करता है और समुदाय की परंपराओं के नाम पर लैंगिक असमानता को बढ़ावा देता है।


    कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा

    अदालत ने माना कि यह मामला महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाता है और पारसी समुदाय में ऐसे मुद्दे पहले भी बार-बार अदालत में आए हैं। यह नियम नागपुर अगियारी के प्रबंधन से संबंधित है, जो पारसी धार्मिक स्थल है। यह मामला पारसी व्यक्तिगत कानूनों से जुड़ा है, जहां समुदाय की परंपराएं विवाह और धार्मिक पहचान को नियंत्रित करती हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि अंतर-धार्मिक विवाह करने वाली महिला को उसकी जन्मजात धार्मिक पहचान से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के खिलाफ है।

    विशेष विवाह अधिनियम जैसे कानून अंतर-धार्मिक विवाह की इजाजत देते हैं, जहां दोनों पक्ष अपनी धार्मिक पहचान बनाए रख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसे मामलों में कहा है कि विवाह से महिला की धार्मिक पहचान स्वतः पति की धर्म में विलय नहीं होती, जब तक वह स्वेच्छा से परिवर्तन न करे। इस मामले में भी समान सिद्धांत लागू हो सकता है। वर्तमान में मामला प्रारंभिक चरण में है, जहां नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया है। सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल पारसी समुदाय बल्कि पूरे देश में अंतर-धार्मिक विवाहों और लैंगिक समानता के मुद्दे पर प्रभाव डालेगा।

  • पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार

    पाकिस्तानी जासूसी नेटवर्क का खुलासा, दिल्‍ली-हरियाणा रेलवे स्टेशनों पर लगाए थे कैमरे, अब तक 22 आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली। पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एक और अहम खुलासा किया है। गाजियाबाद पुलिस ने फरीदाबाद से नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है, जो पेट्रोल पंप पर पंचर की दुकान चलाने की आड़ में जासूसी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

    पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरोह के सरगना सुहेल समेत अब तक कुल 22 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। नौशाद के अलावा मथुरा की एक महिला और एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उन्हें इस नेटवर्क से सुहेल ने जोड़ा था। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह रेलवे स्टेशनों और सुरक्षा बलों के ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बनाकर WhatsApp ग्रुप के जरिए पाकिस्तान भेजता था। इसके बदले उन्हें हर फोटो के लिए 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे।

    सबसे चौंकाने वाली जानकारी यह सामने आई कि गिरोह ने दिल्ली और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों पर गुप्त कैमरे लगा रखे थे। इन कैमरों की लाइव स्ट्रीमिंग का एक्सेस पाकिस्तान में बैठे लोगों को दिया गया था, जिससे वे सीधे संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर रहे थे।

    50 सोलर कैमरे लगाने की थी साजिश

    पुलिस ने बताया कि यह नेटवर्क देशभर में करीब 50 सोलर कैमरे लगाने की योजना बना रहा था। कुछ स्थानों पर कैमरे पहले ही लगाए जा चुके थे। दिल्ली और सोनीपत में लगाए गए कैमरों को बरामद कर फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

    जांच में यह भी पता चला कि नौशाद मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर का रहने वाला है और उसे कोलकाता से बुलाकर फरीदाबाद में दुकान खुलवाई गई थी। फिलहाल पुलिस इस जासूसी नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश जारी है कि इसके तार देश और विदेश में किन-किन जगहों से जुड़े हैं।

  • लंबा कार्यकाल और निर्णायक नेतृत्व: पीएम मोदी पर महंत भक्ति चरण दास महाराज की प्रशंसा

    लंबा कार्यकाल और निर्णायक नेतृत्व: पीएम मोदी पर महंत भक्ति चरण दास महाराज की प्रशंसा


    नई दिल्ली:भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने हाल ही में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए देश में चुनी हुई सरकार के सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता बनकर नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उन्होंने अपने कार्यकाल के 8931 दिन पूरे कर लिए हैं, जिससे उन्होंने पूर्व रिकॉर्डधारक Pawan Kumar Chamling का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।

    इस उपलब्धि को लेकर संत समाज और विभिन्न आध्यात्मिक संगठनों ने प्रधानमंत्री की जमकर सराहना की है। महंत भक्ति चरण दास महाराज ने इस मौके पर प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि उनका नेतृत्व स्थिरता, समर्पण और निर्णायकता का प्रतीक है। उन्होंने इस उपलब्धि को केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण अध्याय बताया।

    महंत भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लगातार देश की सेवा में समर्पित रहे हैं और बिना थके विकास के कार्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इसे एक संत की तरह सेवा भावना से जोड़ा और कहा कि यह नेतृत्व राष्ट्र निर्माण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उनके अनुसार, यह 8931 दिनों की यात्रा केवल समय का आंकड़ा नहीं, बल्कि निरंतर कार्य और समर्पण का प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक सफर भी काफी व्यापक रहा है। वे पहले Gujarat Chief Minister के रूप में लंबे समय तक सेवा कर चुके हैं, जहां उन्होंने विकास और सुशासन के कई मॉडल पेश किए। उनके नेतृत्व में गुजरात को विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए एक आदर्श राज्य के रूप में देखा गया।

    इसके बाद जब उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली, तो उन्होंने शासन को केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे परिवर्तन का माध्यम बनाया। डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास जैसे कई बड़े कार्यक्रम उनके कार्यकाल में आगे बढ़े।

    संत समाज का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। भारतीय संस्कृति, धर्म और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत पहचान दिलाने में भी उनका योगदान रहा है। इस कारण देश की सांस्कृतिक छवि और अधिक सुदृढ़ हुई है।

    महंत भक्ति चरण दास महाराज ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत आगे भी विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहेगा। साथ ही देश अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों को भी संरक्षित रखेगा।

    यह उपलब्धि न केवल एक राजनीतिक मील का पत्थर है, बल्कि यह भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है।

  • उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..

    उत्तर प्रदेश में सौर क्रांति, पीएम सूर्य घर योजना से घर-घर पहुंची स्वच्छ ऊर्जा..


    नई दिल्ली: पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति करते हुए खुद को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा राज्यों में शामिल कर लिया है वर्ष 2017 से पहले जहां राज्य की सौर क्षमता लगभग 400 मेगावाट तक सीमित थी वहीं आज यह बढ़कर 5000 मेगावाट से अधिक हो चुकी है यह बदलाव राज्य की मजबूत नीतियों बड़े निवेश और जनभागीदारी का परिणाम है

    इस बदलाव में PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इस योजना के तहत सरकार ने लोगों को अपने घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित किया है जिससे आम नागरिक भी स्वच्छ ऊर्जा के इस अभियान का हिस्सा बन सके हैं

    रूफटॉप सोलर कार्यक्रम की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में 4 लाख से अधिक सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं इससे न केवल बिजली की लागत कम हुई है बल्कि लोगों को हर महीने हजारों रुपये की बचत भी हो रही है साथ ही नेट मीटरिंग के जरिए अतिरिक्त बिजली बेचकर आम लोग अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं

    वर्ष 2017 के बाद लागू की गई सौर ऊर्जा नीतियों ने इस क्षेत्र को नई दिशा दी है उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति 2017 और 2022 के तहत बड़े सोलर पार्क और ग्राउंड माउंटेड प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा दिया गया जिससे राज्य में निवेश भी बढ़ा और क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई

    सरकार ने सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं जिसमें 22000 मेगावाट सौर क्षमता हासिल करने का लक्ष्य शामिल है इसके लिए सरकारी भवनों का सौरकरण बड़े प्रोजेक्ट्स और नई तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है

    इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों में भी उत्तर प्रदेश ने कदम बढ़ाए हैं गोरखपुर और रामपुर में पायलट प्रोजेक्ट्स स्थापित किए जा रहे हैं जो भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प प्रदान करेंगे यह पहल राज्य को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत बनाती है

    सौर ऊर्जा के विस्तार से पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिला है इसके साथ ही हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं खासकर सोलर इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस के क्षेत्र में

    घरेलू स्तर पर भी सौर ऊर्जा ने लोगों की जीवनशैली को बदल दिया है अब सौर ऊर्जा का उपयोग केवल लाइट और पंखे तक सीमित नहीं है बल्कि इंडक्शन कुकटॉप इलेक्ट्रिक वाहन और अन्य उपकरणों के संचालन में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है इससे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है

     उत्तर प्रदेश की यह प्रगति दर्शाती है कि सही नीतियों और योजनाओं के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकता है और यह राज्य को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है
  • मिडिल ईस्ट तनाव पर संसद में बोले PM मोदी, "भारत के सामने भी चुनौतियां, लेकिन संकट से निपटने सरकार तैयार"

    मिडिल ईस्ट तनाव पर संसद में बोले PM मोदी, "भारत के सामने भी चुनौतियां, लेकिन संकट से निपटने सरकार तैयार"

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी जंग का असर अब सीधे भारत पर भी दिखने लगा है। सोमवार को संसद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि इस युद्ध ने भारत के सामने कई अप्रत्याशित और गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय सभी स्तरों पर इस संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी के साथ काम कर रही है।

    युद्ध से खड़ी हुई चुनौतियां

    प्रधानमंत्री ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति चिंताजनक है और यह संकट तीन हफ्तों से ज्यादा समय से जारी है। इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह आसान नहीं है और कई मोर्चों पर चुनौतियां सामने आई हैं।

    खाड़ी में 1 करोड़ भारतीय, सुरक्षा प्राथमिकता

    पीएम मोदी ने बताया कि युद्ध क्षेत्र वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और करीब 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। उनकी सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी चिंता है।

    3.75 लाख भारतीय सुरक्षित लौटाए गए

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक 3 लाख 75 हजार से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित घर लाया गया है। सिर्फ ईरान से ही करीब 1 हजार भारतीयों को निकाला गया, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल थे। उन्होंने दुख जताया कि कुछ लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबरें भी आई हैं।

    पेट्रोल-डीजल और गैस की आपूर्ति सुरक्षित

    पीएम मोदी ने बताया कि भारत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, गैस और फर्टिलाइजर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते आता है, जो संकट में है। सरकार ने पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए खास रणनीति तैयार की है। देश अपनी घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है और उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है।

    ऊर्जा सुरक्षा के बड़े कदम
    – भारत अब पहले 27 देशों की बजाय 41 देशों से ऊर्जा आयात कर रहा है।
    – देश के पास 53 लाख मैट्रिक टन से अधिक तेल का भंडार मौजूद है।
    – पिछले सालों में इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने से पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाया जा रहा है।
    – रेलवे के बिजलीकरण से ऊर्जा पर दबाव कम हुआ है।

    खेती और खाद पर नजर

    प्रधानमंत्री ने कहा कि युद्ध का असर कृषि पर भी पड़ सकता है, लेकिन देश में खाद्यान्न की पर्याप्त उपलब्धता है। किसानों के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है और 6 नए यूरिया प्लांट शुरू किए गए हैं, ताकि खेती पर असर न्यूनतम हो।

    भारत हर स्थिति के लिए तैयार

    पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि सरकार वैश्विक सहयोगियों के संपर्क में है ताकि समुद्री रास्ते सुरक्षित रहें। उन्होंने कहा कि भारत इस संकट का मजबूती से सामना करेगा और देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

  • भारत में Indane सबसे बड़ा LPG ब्रांड है, लेकिन पाकिस्तान में कौन सी है सबसे बड़ी गैस एजेंसी? जानिए वहां का LPG सिस्टम कैसे काम करता है और किन कंपनियों का दबदबा है।

    भारत में Indane सबसे बड़ा LPG ब्रांड है, लेकिन पाकिस्तान में कौन सी है सबसे बड़ी गैस एजेंसी? जानिए वहां का LPG सिस्टम कैसे काम करता है और किन कंपनियों का दबदबा है।


    नई दिल्ली।  भारत में Indane, Bharat Gas और HP Gas जैसे बड़े ब्रांड LPG सप्लाई करते हैं। लेकिन पाकिस्तान का सिस्टम इससे काफी अलग है। वहां LPG सेक्टर किसी एक कंपनी के हाथ में नहीं है, बल्कि सरकारी और निजी कंपनियों में बंटा हुआ है।

    पाकिस्तान में कौन सी कंपनी है सबसे बड़ी?
    पाकिस्तान में Pakistan State Oil को सबसे बड़ा और प्रमुख LPG प्लेयर माना जाता है। यह Pak Gas ब्रांड के तहत पूरे देश में गैस सप्लाई करती है। इसके 250 से ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर हैं, जो शहरों से लेकर दूरदराज इलाकों तक गैस पहुंचाते हैं। Pakistan State Oil खासकर उन इलाकों में LPG पहुंचाती है जहां पाइपलाइन की सुविधा नहीं है, जैसे गिलगित, स्कार्दू, चित्राल इन क्षेत्रों में LPG ही लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का मुख्य साधन है।

    निजी कंपनियां भी हैं मजबूत
    पाकिस्तान का LPG बाजार पूरी तरह सरकारी कंपनी पर निर्भर नहीं है। कई निजी कंपनियां भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं, जैसे Parko Pearl Gas, Burshane LPG ये कंपनियां बड़े स्तर पर काम करती हैं और बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखती हैं।

    गैस सप्लाई का तरीका
    पाकिस्तान में गैस दो तरीकों से सप्लाई होती है रिफाइनरी में गैस तैयार होती है उसे तरल रूप में बदलकर सिलेंडर में भरा जाता है फिर डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है पाइप गैस की सप्लाई Sui Northern Gas Pipelines Limited जैसी कंपनियां करती हैं, जो मुख्य रूप से शहरों में सक्रिय हैं।

    कैसे काम करती है पाइप गैस?
    पाइपलाइन के जरिए गैस शहरों तक लाई जाती है। इसके बाद दबाव कम करके घरों तक सप्लाई की जाती है हर घर में मीटर लगा होता है इस्तेमाल के हिसाब से बिल बनाया जाता है पाकिस्तान का LPG सिस्टम भारत के मुकाबले ज्यादा बिखरा हुआ है। यहां Pakistan State Oil सबसे बड़ा खिलाड़ी जरूर है, लेकिन निजी कंपनियों की भी बड़ी भूमिका है। यही वजह है कि पाकिस्तान में गैस सप्लाई एक मल्टी-कंपनी सिस्टम के तहत चलती है, जबकि भारत में यह ज्यादा संगठित और केंद्रीकृत है।

  • वीआईपी कल्चर पर जया बच्चन की सख्त टिप्पणी लोकतंत्र और जनता की गरिमा पर उठाए सवाल

    वीआईपी कल्चर पर जया बच्चन की सख्त टिप्पणी लोकतंत्र और जनता की गरिमा पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली:
    राज्यसभा में वीआईपी संस्कृति को लेकर एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाते हुए Jaya Bachchan ने अपनी तीखी आपत्ति दर्ज कराई उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे महानगरों में वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है और यह स्थिति लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है

    जया बच्चन ने बताया कि जब भी किसी वीआईपी का आवागमन होता है तो सड़कों को बंद कर दिया जाता है ट्रैफिक को डायवर्ट किया जाता है और आम लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है उन्होंने इस व्यवस्था को जनता के अधिकारों का उल्लंघन बताया

    अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में संसद के बाहर उन्हें भी वीआईपी मूवमेंट के कारण रोका गया जो उनके लिए बेहद अपमानजनक अनुभव था उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें इस तरह की असुविधा का सामना करना पड़ा जो स्वीकार्य नहीं है

    उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली में कई इलाकों में जहां बड़े राजनीतिक नेता रहते हैं वहां अक्सर सड़कों को बंद कर दिया जाता है जिससे सांसदों को भी संसद पहुंचने में देरी होती है कई बार उन्हें आधे घंटे तक इंतजार करना पड़ता है और अपनी यात्रा पहले से योजना बनानी पड़ती है ताकि वे समय पर सदन में पहुंच सकें

    जया बच्चन ने एक और उदाहरण देते हुए कहा कि एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उन्हें एक घंटे तक ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ा जिसका कारण वीआईपी मूवमेंट था उन्होंने कहा कि इस तरह की स्थिति से आम जनता में नाराजगी बढ़ती है और यह असंतोष पैदा करती है

    उन्होंने विशेष रूप से चिंता जताई कि वीआईपी संस्कृति के कारण आपातकालीन सेवाएं भी प्रभावित होती हैं कई बार एम्बुलेंस को भी रास्ते में रोक दिया जाता है जो बेहद गंभीर और खतरनाक स्थिति है यदि समय पर इलाज नहीं मिलता तो लोगों की जान तक जा सकती है

    अंतरराष्ट्रीय तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कई देशों में वीआईपी मूवमेंट देखा है लेकिन वहां आम लोगों को इस तरह परेशान नहीं किया जाता भारत में यह समस्या अधिक गंभीर है और इसे तत्काल सुधारने की आवश्यकता है

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभापति से आग्रह किया कि इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाया जाए और वीआईपी संस्कृति को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी नागरिक समान हैं और किसी को भी विशेषाधिकार के नाम पर दूसरों को परेशान करने का अधिकार नहीं होना चाहिए

    जया बच्चन की यह टिप्पणी एक बार फिर इस बहस को सामने लाती है कि क्या वीआईपी संस्कृति आज के लोकतांत्रिक भारत में उचित है या नहीं और क्या इसे बदलने की जरूरत है

  • योगी सरकार की किसानों को सौगात, गेहूं पर MSP बढ़ी, कैबिनेट ने 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को दी मंजूरी

    योगी सरकार की किसानों को सौगात, गेहूं पर MSP बढ़ी, कैबिनेट ने 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को दी मंजूरी

    लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में 35 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस बैठक में किसानों, ऊर्जा, नगर विकास और औद्योगिक विकास से जुड़े कई अहम फैसले लिए गए।

    गेहूं पर MSP और अतिरिक्त भत्ता

    खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़े फैसलों के अनुसार, इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो पिछले वर्ष से 160 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। साथ ही किसानों को गेहूं की उतराई, सफाई और छनाई के लिए 20 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त भुगतान भी मिलेगा। इसका मतलब है कि किसानों के खातों में प्रति क्विंटल अतिरिक्त राशि भेजी जाएगी।

    खरीद लक्ष्य और प्रक्रिया


    इस सीजन में गेहूं की खरीद का प्रारंभिक लक्ष्य 30 लाख टन रखा गया है, जबकि अधिकारी अनुमान लगा रहे हैं कि यह 50 लाख टन तक पहुंच सकता है। राज्य में खरीद 30 मार्च 2026 से 15 जून 2026 तक होगी। पूरे प्रदेश के 75 जिलों में लगभग 6500 क्रय केंद्र स्थापित किए जाएंगे। भुगतान DBT के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा। खरीद व्यवस्था आठ एजेंसियों के माध्यम से की जाएगी, जिनमें भारतीय खाद्य निगम, उत्तर प्रदेश मंडी परिषद, प्रांतीय और प्रादेशिक सहकारी संघ, उत्तर प्रदेश राज्य भंडारण निगम, राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ शामिल हैं।

    ऊर्जा क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट

    घाटमपुर पावर प्लांट में 660 मेगावॉट की तीन यूनिटों में से दो यूनिट चालू हैं और तीसरी जल्द शुरू होगी। झारखंड के दुमका में आवंटित पछवारा कोल माइन के विकास के लिए 2242.90 करोड़ रुपये की मंजूरी कैबिनेट ने दी। यह प्लांट केंद्र और राज्य सरकार का संयुक्त उपक्रम है।

    गोरखपुर सोलर सिटी में विकसित होगा

    अयोध्या के बाद गोरखपुर को सोलर सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा। चिलुआताल में 20 मेगावॉट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर प्लांट कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा स्थापित किया जाएगा। प्रदेश में पहले से ही औरैया (20 मेगावॉट, NTPC) और खुर्जा (11 मेगावॉट, THDC) में फ्लोटिंग सोलर प्लांट मौजूद हैं।

    नगर विकास और स्मार्ट शहर

    नवयुग पालिका योजना को मंजूरी दी गई है। इसके तहत 75 जिलों में से 17 नगर निगम को छोड़कर बाकी 58 जिला मुख्यालयों के नगर पालिकाओं को स्मार्ट बनाने का काम किया जाएगा।

    औद्योगिक और अवस्थापना विकास

    उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना 2025 को मंजूरी दी गई। इसके तहत सरकार भूमि निशुल्क उपलब्ध कराएगी और निजी निवेशक आमंत्रित किए जाएंगे। निवेश पर 45 साल में भूमि की कीमत वसूली जाएगी। संभल में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक सेंटर की स्थापना के लिए 242.42 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई। यह परियोजना गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे संभल पॉकेट में विकसित होगी।

  • मोबाइल डेटा पर संसद में बहस में राघव चड्ढा ने उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा उठाया..

    मोबाइल डेटा पर संसद में बहस में राघव चड्ढा ने उपभोक्ता अधिकारों का मुद्दा उठाया..


    नई दिल्ली:
    राज्यसभा में मोबाइल डेटा प्लान्स को लेकर एक अहम बहस देखने को मिली जब Raghav Chadha ने देश में करोड़ों मोबाइल उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे को उठाया उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में टेलीकॉम कंपनियां उपभोक्ताओं से पूरे डेटा का पैसा लेती हैं लेकिन उपयोग न होने वाले डेटा को समाप्त कर देती हैं जिससे ग्राहकों को आर्थिक नुकसान होता है

    सांसद ने कहा कि जब कोई यूजर अपने मोबाइल प्लान के लिए भुगतान करता है तो उसे पूरे डेटा का उपयोग करने का अधिकार होना चाहिए लेकिन मौजूदा सिस्टम में डेटा को प्रतिदिन एक निश्चित सीमा में बांट दिया जाता है जैसे 1.5 जीबी या 2 जीबी और यदि उपयोग नहीं किया गया तो वह डेटा रात 12 बजे खत्म हो जाता है यह व्यवस्था उपभोक्ता के साथ अन्याय है

    उन्होंने इस स्थिति को समझाने के लिए एक उदाहरण दिया जिसमें पेट्रोल की तुलना मोबाइल डेटा से की गई उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 20 लीटर पेट्रोल खरीदता है और केवल 15 लीटर ही उपयोग करता है तो क्या बचा हुआ पेट्रोल पंप वाला वापस ले लेगा नहीं इसी तरह मोबाइल डेटा भी उपभोक्ता का अधिकार होना चाहिए

    राघव चड्ढा ने आगे कहा कि टेलीकॉम कंपनियां जानबूझकर ऐसे प्लान को बढ़ावा देती हैं जिनमें दैनिक डेटा लिमिट होती है जबकि मासिक डेटा प्लान कम उपलब्ध कराए जाते हैं क्योंकि मासिक प्लान में उपभोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार डेटा का उपयोग कर सकता है जिससे कंपनियों का लाभ कम होता है

    उन्होंने इंटरनेट को आज के समय में डिजिटल ऑक्सीजन’ बताते हुए कहा कि यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि शिक्षा कामकाज बैंकिंग और संचार जैसे सभी क्षेत्रों में आवश्यक हो चुका है ऐसे में डेटा का यूं ही समाप्त हो जाना गंभीर चिंता का विषय है

    इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने तीन प्रमुख सुझाव दिए पहला यह कि डेटा कैरी फॉरवर्ड की सुविधा दी जाए ताकि बचा हुआ डेटा अगले दिन में जुड़ सके दूसरा यह कि महीने के अंत में बचे हुए डेटा की वैल्यू को अगले रिचार्ज में समायोजित किया जाए जिससे उपभोक्ता को आर्थिक लाभ मिल सके और तीसरा यह कि अनयूज्ड डेटा को एक डिजिटल एसेट के रूप में माना जाए जिसे जरूरत पड़ने पर किसी अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर किया जा सके

    उन्होंने सरकार से अपील की कि वह इस दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाए ताकि डिजिटल युग में उपभोक्ताओं को उनका पूरा अधिकार मिल सके उनका कहना था कि यह मुद्दा केवल डेटा का नहीं बल्कि उपभोक्ता अधिकार और डिजिटल न्याय से जुड़ा हुआ है

    यह मामला अब एक व्यापक बहस का विषय बन गया है जहां एक ओर उपभोक्ताओं के हितों की बात हो रही है वहीं दूसरी ओर टेलीकॉम इंडस्ट्री के व्यापार मॉडल पर भी सवाल उठ रहे हैं आने वाले समय में इस पर नीतिगत निर्णय इस पूरे सिस्टम को बदल सकते हैं

    English Tags

    Mobile data issue India, Raghav Chadha speech, Telecom consumer rights, Data rollover India, Digital rights India