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  • असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    असम के तिनसुकिया में स्वच्छता नियम तोड़ने वालों पर सख्ती, खुले में पेशाब और गंदगी फैलाने वालों के वीडियो अब LED स्क्रीन पर होंगे प्रदर्शित

    नई दिल्ली । असम के तिनसुकिया शहर में सार्वजनिक स्वच्छता बनाए रखने के उद्देश्य से नगर प्रशासन ने एक नई पहल शुरू की है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। तिनसुकिया नगर बोर्ड ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने और खुले में पेशाब करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए ‘हॉल ऑफ शेम’ अभियान लागू किया है। इस अभियान के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों की पहचान सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से की जाती है और उनके वीडियो फुटेज शहर के प्रमुख स्थानों पर लगी बड़ी एलईडी स्क्रीन पर प्रदर्शित किए जाते हैं। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से लोगों में स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी और सार्वजनिक स्थानों पर अनुशासन बढ़ेगा।

    नगर बोर्ड ने शहर के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क स्थापित किया है। इन कैमरों की सहायता से ऐसे लोगों की निगरानी की जा रही है जो सड़कों, दीवारों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकते हैं या खुले में पेशाब करते हैं। कैमरों में रिकॉर्ड हुई घटनाओं को डिजिटल स्क्रीन पर दिखाकर लोगों को नियमों के पालन के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बार-बार जागरूकता अभियान चलाने और जुर्माना लगाने के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा था, इसलिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

    नगर निकाय के अधिकारियों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अपमानित करना नहीं, बल्कि नागरिक जिम्मेदारी को मजबूत करना है। उनका मानना है कि जब लोगों को यह एहसास होगा कि नियमों की अनदेखी सार्वजनिक रूप से सामने आ सकती है, तो वे स्वच्छता नियमों का अधिक गंभीरता से पालन करेंगे। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे शहर में गंदगी फैलाने की घटनाओं में कमी आएगी और सार्वजनिक स्थान अधिक साफ-सुथरे बने रहेंगे।

    हालांकि इस पहल ने सामाजिक और कानूनी स्तर पर नई बहस को भी जन्म दिया है। कई नागरिकों ने इसे स्वच्छ भारत की दिशा में एक प्रभावी कदम बताते हुए समर्थन दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थानों की सफाई केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है। ऐसे में यदि कठोर उपायों से लोगों की आदतों में सुधार आता है तो इससे पूरे शहर को लाभ मिलेगा।

    वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों ने इस अभियान पर गंभीर सवाल भी उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करना निजता के अधिकार से जुड़ा संवेदनशील विषय है। उनका तर्क है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और जागरूकता अभियान जैसे उपाय पर्याप्त हो सकते हैं, जबकि सार्वजनिक प्रदर्शन से व्यक्तिगत सम्मान और गोपनीयता प्रभावित हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग प्रभावी साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ नागरिकों के अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। यदि तकनीक का उपयोग पारदर्शिता, स्पष्ट नियमों और उचित निगरानी के साथ किया जाए तो ऐसे अभियान बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

    तिनसुकिया नगर बोर्ड की यह पहल अब अन्य शहरों के लिए भी चर्चा का विषय बन गई है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि यह अभियान सार्वजनिक स्वच्छता में कितना बदलाव ला पाता है और साथ ही निजता एवं नागरिक अधिकारों से जुड़े उठ रहे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है। फिलहाल यह पहल देश में स्वच्छता प्रबंधन और तकनीक के उपयोग को लेकर एक नई बहस का केंद्र बन चुकी है।

  • राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    राहुल गांधी की गैरमौजूदगी से कांग्रेस की रणनीति पर असर, पटना का कार्यक्रम टला, अब देहरादून में होगा छात्रों से संवाद

    नई दिल्ली । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की पिछले कुछ समय से सार्वजनिक गतिविधियों में अनुपस्थिति को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी ने बिहार की राजधानी पटना में 15 जुलाई को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को स्थगित कर दिया है। अब यह कार्यक्रम 17 जुलाई को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित किए जाने की तैयारी की जा रही है। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ‘छात्रों की गूंज’ अभियान कांग्रेस द्वारा शिक्षा से जुड़े मुद्दों और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राहुल गांधी को विभिन्न राज्यों में छात्रों के साथ संवाद करना था। पटना में होने वाला कार्यक्रम भी इसी श्रृंखला का हिस्सा था, लेकिन अंतिम समय में इसके स्थगित होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम को पटना से देहरादून स्थानांतरित करने के पीछे बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही संगठनात्मक चुनौतियां एक प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में प्रदेश इकाई के भीतर बढ़ी आंतरिक खींचतान को देखते हुए नेतृत्व ने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव का निर्णय लिया। इसके बाद उत्तराखंड में आयोजन की तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

    इसी बीच राहुल गांधी की सार्वजनिक अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पिछले करीब 20 दिनों से उनकी ओर से कोई सार्वजनिक कार्यक्रम, प्रेस संबोधन या सोशल मीडिया गतिविधि सामने नहीं आई है। पार्टी के भीतर से यह जानकारी सामने आई है कि वह विदेश यात्रा पर हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक यात्रा कार्यक्रम या विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उनकी वापसी को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर अलग-अलग संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।

    सूत्रों का यह भी कहना है कि राहुल गांधी की अनुपस्थिति के कारण कांग्रेस को पहले से निर्धारित कई कार्यक्रमों में बदलाव करना पड़ा है। पटना के अलावा प्रयागराज में प्रस्तावित एक कार्यक्रम भी स्थगित किए जाने की चर्चा है। पार्टी अब आगामी आयोजनों की नई रूपरेखा तैयार कर रही है ताकि अभियान की गति प्रभावित न हो और विभिन्न राज्यों में निर्धारित कार्यक्रम समय पर आयोजित किए जा सकें।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी राज्यों में कांग्रेस के लिए संगठनात्मक एकजुटता और नेतृत्व की सक्रिय मौजूदगी महत्वपूर्ण होगी। ऐसे समय में किसी भी बड़े कार्यक्रम के स्थगित होने से राजनीतिक संदेश पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर पार्टी का कहना है कि अभियान जारी रहेगा और आवश्यक परिस्थितियों के अनुसार कार्यक्रमों में बदलाव करना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है।

    फिलहाल कांग्रेस की ओर से देहरादून में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं। पार्टी का उद्देश्य छात्रों से संवाद के माध्यम से शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना है। वहीं राहुल गांधी की वापसी के बाद उनके आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों पर भी सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में पार्टी की ओर से आधिकारिक कार्यक्रमों की नई रूपरेखा सामने आने की संभावना है।

  • 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में टिकट पर बड़ा संदेश, सांसद आनंद भदौरिया बोले- उम्मीदवार तय करेंगे सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

    2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा में टिकट पर बड़ा संदेश, सांसद आनंद भदौरिया बोले- उम्मीदवार तय करेंगे सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी में टिकट वितरण को लेकर चल रही चर्चाओं पर पार्टी सांसद आनंद भदौरिया ने स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों का अंतिम निर्णय केवल पार्टी नेतृत्व और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही करेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं और टिकट के दावेदारों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की सिफारिश या व्यक्तिगत अपेक्षाओं के बजाय पार्टी की आधिकारिक प्रक्रिया पर भरोसा रखें।

    धौरहरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद आनंद भदौरिया ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी तय करने का अधिकार पूरी तरह पार्टी नेतृत्व के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार किसी व्यक्ति की सिफारिश या व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर टिकट मिलने की संभावना नहीं है। पार्टी जिस उम्मीदवार को अधिक उपयुक्त समझेगी, उसी को चुनाव मैदान में उतारा जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होगी कि वे उसे विजयी बनाने के लिए पूरी निष्ठा से काम करें।

    उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत पसंद का कोई उम्मीदवार नहीं है। सांसद होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अपने लोकसभा क्षेत्र की सभी विधानसभा सीटों के प्रति है। इसलिए पार्टी यदि किसी भी विधानसभा क्षेत्र में किसी भी नेता को उम्मीदवार बनाती है तो वह पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ उसके समर्थन में चुनाव प्रचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी के निर्णय के खिलाफ जाना उनके सिद्धांतों में नहीं है और संगठन सर्वोपरि है।

    आनंद भदौरिया ने टिकट की उम्मीद रखने वाले नेताओं को सलाह दी कि यदि वे चुनाव लड़ना चाहते हैं तो अपना पक्ष सीधे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने रखें। उन्होंने कहा कि कई बार कुछ लोग आवश्यकता पड़ने पर उनकी प्रशंसा करते हैं, लेकिन अपेक्षाएं पूरी नहीं होने पर वही लोग आलोचना करने लगते हैं। इस प्रकार का दोहरा व्यवहार राजनीतिक कार्यशैली के अनुरूप नहीं माना जा सकता और पार्टी के भीतर अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा चुनाव के दौरान जिन कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका सहयोग किया था, उनसे उन्होंने कभी टिकट दिलाने का कोई वादा नहीं किया था। वर्तमान में भी उन्होंने किसी को टिकट दिलाने का आश्वासन नहीं दिया है। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि जिन लोगों ने उनके साथ मेहनत की है, उनके योगदान को वह सम्मान देते हैं और समय-समय पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर उनका सहयोग करने का प्रयास करते रहेंगे।

    उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। विभिन्न दलों में संभावित उम्मीदवारों की सक्रियता भी लगातार बढ़ रही है। समाजवादी पार्टी के भीतर भी टिकट को लेकर चर्चाएं तेज हैं, लेकिन आनंद भदौरिया के बयान को संगठनात्मक अनुशासन और नेतृत्व की भूमिका को स्पष्ट करने वाले संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट संकेत मिलने से कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम की स्थिति कम हो सकती है। साथ ही यह संदेश भी जाता है कि उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया संगठन के स्तर पर तय मानकों के अनुसार होगी। आने वाले समय में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ विभिन्न दलों में टिकट वितरण और चुनावी रणनीति को लेकर गतिविधियां और अधिक बढ़ने की संभावना है।

  • वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली । वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के निकट हुए दर्दनाक पर्यटक नौका हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि सभी शव रविवार शाम तक हो ची मिन्ह सिटी पहुंच जाएंगे। वहां आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय दूतावास और वियतनामी प्रशासन लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने पार्थिव शरीरों को शीघ्र भारत भेजने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास की टीमें संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो और मृतकों के परिजनों तक उनके प्रियजनों के पार्थिव शरीर जल्द पहुंचाए जा सकें।

    शवों की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए एक अधिकृत एजेंसी को नियुक्त किया गया है। यह एजेंसी मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक अनुमति, दस्तावेज और अन्य औपचारिकताओं को पूरा कराएगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही पार्थिव शरीर विशेष व्यवस्था के तहत भारत भेज दिए जाएंगे।

    हादसे में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की हालत में लगातार सुधार बताया गया है। उनका इलाज वियतनाम के एक सरकारी अस्पताल में चल रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य पहले से बेहतर हो रहा है। वहीं, दुर्घटना में सुरक्षित बचाए गए अन्य भारतीय पर्यटकों की स्वदेश वापसी की भी व्यवस्था की गई है। सभी यात्रियों को रविवार को उनके-अपने गृह राज्यों के लिए रवाना किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

    अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित पर्यटकों की यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि वे सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें। भारतीय दूतावास लगातार सभी यात्रियों और उनके परिवारों के संपर्क में है तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत एवं सहायता कार्य पूरी तरह सक्रिय हैं।

    यह हादसा शनिवार को उस समय हुआ था जब भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक पर्यटन नौका फु क्वोक द्वीप के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में भ्रमण के दौरान पलट गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नौका में लगभग 32 भारतीय सवार थे। इनमें तमिलनाडु के पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक थी, जबकि अन्य यात्री आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल से थे।

    स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस दुर्घटना में 15 भारतीयों की मृत्यु हुई, जबकि अन्य यात्रियों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और आवश्यक देखभाल की गई। हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने राहत एवं समन्वय कार्यों को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार कार्रवाई जारी रखी है।

    इस घटना ने विदेश यात्रा पर गए भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मृतकों के पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक भारत पहुंचाने, घायलों के उपचार और सभी प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

  • राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग

    राम मंदिर में 40 दिन में 70 बार हुई चढ़ावे की चोरी, 50 बार अविनाश ने उड़ाई नकदी, अनुकल्प-लवकुश करते थे प्लानिंग


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, पूरे गिरोह में चोरी की मुख्य जिम्मेदारी अविनाश शुक्ला को सौंपी गई थी। सीसीटीवी फुटेज में वह सबसे अधिक बार चढ़ावे की रकम निकालते हुए दिखाई दिया, जबकि अन्य आरोपी उसे कवर देने के लिए आसपास मौजूद रहते थे।

    एसआईटी की जांच में सामने आया था कि 40 दिनों के दौरान चढ़ावे की रकम करीब 70 बार चोरी की गई। इनमें लगभग 50 बार अविनाश शुक्ला को नकदी निकालते हुए कैमरों में देखा गया। पुलिस ने भी अपनी विवेचना में सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य के रूप में शामिल किया है। फुटेज के विश्लेषण में एसआईटी की रिपोर्ट की पुष्टि हुई कि अधिकांश मामलों में रकम अविनाश ने ही पार की।

    पुलिस रिमांड के दौरान पूछताछ में अविनाश शुक्ला ने स्वीकार किया था कि अधिकतर मौकों पर चोरी की जिम्मेदारी उसी को दी जाती थी। हालांकि एसआईटी की विस्तृत जांच अंतिम चरण में है, जबकि पुलिस की विवेचना अभी जारी रहेगी।

    अनुकल्प और लवकुश बनाते थे पूरी रणनीति
    जांच में यह भी सामने आया कि टिन्नू यादव और गणनाकर्मी सुभाष श्रीवास्तव की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता था। दोनों का काम यह सुनिश्चित करना था कि किसी अन्य कर्मचारी या व्यक्ति की नजर आरोपियों की गतिविधियों पर न पड़े। कब और किस तरह रकम निकालनी है, इसकी पूरी योजना अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा तैयार करते थे। योजना के अनुसार सबसे पहले अविनाश शुक्ला रकम निकालता था, जबकि कई मौकों पर मनीष और रमाशंकर ने भी नकदी चोरी की। बाद में सभी आरोपियों के बीच रकम का बंटवारा कर दिया जाता था।

    लगभग हर दिन दो बार की जाती थी चोरी
    सीसीटीवी फुटेज और पूछताछ से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आरोपी लगभग हर दिन दो बार चढ़ावे की रकम पार करते थे। रिमांड के दौरान अविनाश, अनुकल्प और लवकुश ने बताया था कि अधिकांश दिनों में दो बार चोरी की जाती थी, जबकि अवसर मिलने पर तीन बार भी नकदी निकाल ली जाती थी। कभी-कभी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने पर चोरी करना संभव नहीं हो पाता था। जांच के अनुसार, यह पूरा खेल आरोपियों के काम पर लगाए जाने के समय से ही लगातार चल रहा था।

  • पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी

    पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी


    चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने एक बार फिर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। नेताओं ने अपनी आपत्तियां कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी।

    हालांकि बैठक के बाद भूपेश बघेल ने विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अलग-अलग नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, कोई भी नेता हाईकमान के फैसले का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं और संगठन से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक में राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठी, तो उन्होंने इससे इनकार किया।

    चन्नी और वड़िंग को साथ नहीं ला सके बघेल
    पंजाब में पिछले छह दिनों से संगठनात्मक विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। इस दौरान वह चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को एक मंच पर लाने में भी सफल नहीं हो सके।

    बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सभी मांगें भूपेश बघेल के सामने रख दी गई हैं। उनका कहना था कि पार्टी की प्राथमिकता 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है और इसके लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, न कि समझौता करने वाले नेता की।

    रंधावा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने फैसलों में बदलाव करते हैं और कांग्रेस भी ऐसा कर सकती है।

    गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब संगठन की नई सूची जारी करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर दो स्पष्ट खेमे दिखाई दे रहे हैं और चन्नी समर्थक नेता लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

    बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
    भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ओपी सोनी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    रंधावा के बयान पर राजा वड़िंग का पलटवार
    सुखजिंदर सिंह रंधावा के “समझौता करने वाला नेता नहीं चाहिए” वाले बयान पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी का नाम नहीं लिया गया, तो इशारा उनकी ओर क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्लीपर सेल या समझौता करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    राजा वड़िंग ने कहा कि वह और रंधावा करीब साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौता करने वाले नेता होते तो रंधावा उनके साथ काम नहीं करते। वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जाखड़ लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि यहां हिंदुओं की नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि “असली गद्दार तो वही हैं।”

  • राम मंदिर दान हेराफेरी पर नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान, बोले- यह कलंक है, हम क्षमाप्रार्थी हैं, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    राम मंदिर दान हेराफेरी पर नृपेंद्र मिश्रा का बड़ा बयान, बोले- यह कलंक है, हम क्षमाप्रार्थी हैं, दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से गहरा खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की घटना मंदिर की प्रतिष्ठा पर एक कलंक के समान है और इससे जुड़े सभी लोग स्वयं को क्षमाप्रार्थी, शर्मिंदा और निराश महसूस कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि यह मामला मंदिर प्रशासन और प्रबंधन से जुड़ा है तथा इसे पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। उनके अनुसार, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसे बनाए रखने के लिए पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

    उन्होंने मंदिर प्रबंधन से जुड़े प्रशासनिक ढांचे पर भी जानकारी देते हुए बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चयन करेगी और अंतिम निर्णय उसी के माध्यम से लिया जाएगा। उनका कहना था कि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था मंदिर संचालन को और अधिक प्रभावी बनाएगी।

    मंदिर निर्माण कार्य की प्रगति पर जानकारी देते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि मुख्य निर्माण कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि पुराने मंदिर परिसर को स्मारक के रूप में विकसित करने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और केवल कुछ अंतिम व्यवस्थाएं शेष हैं। उनका अनुमान है कि मंदिर निर्माण का अंतिम चरण इस महीने के अंत तक पूरा कर लिया जाएगा।

    इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर से जुड़ी अन्य विकास परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है। इनमें विस्तृत चहारदीवारी का निर्माण और मंदिर परिसर के बाहर प्रस्तावित ऑडिटोरियम जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। इन कार्यों के वर्ष के अंत तक पूर्ण होने की संभावना जताई गई है, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

    राम कथा संग्रहालय परियोजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं की विषय-वस्तु तैयार कर ली गई है। अब डिजिटल प्रस्तुति, ऑडियो-विजुअल सामग्री और आधुनिक तकनीकी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भगवान राम के जीवन, भारतीय संस्कृति और मंदिर आंदोलन से जुड़ी जानकारी आधुनिक और आकर्षक तरीके से उपलब्ध कराई जा सके।

    नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर को भारतीय आस्था और सांस्कृतिक विरासत का विशिष्ट प्रतीक बताते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भविष्य में लगातार बढ़ती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लंबे सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन का परिणाम है। उनके अनुसार, सनातन परंपरा से जुड़े श्रद्धालुओं के लिए अयोध्या का यह मंदिर विशेष महत्व रखता है और देश-विदेश से आने वाले भक्तों का विश्वास बनाए रखना ट्रस्ट और प्रबंधन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

  • राष्ट्रीय मुद्दों पर DMK को साथ लाने की कवायद तेज, TVK-कांग्रेस समीकरण के बीच विपक्षी एकता की राह बनी चुनौतीपूर्ण

    राष्ट्रीय मुद्दों पर DMK को साथ लाने की कवायद तेज, TVK-कांग्रेस समीकरण के बीच विपक्षी एकता की राह बनी चुनौतीपूर्ण


    नई दिल्ली ।
    संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी दलों के बीच नए समीकरणों की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। विशेष रूप से द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK), तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) और कांग्रेस के बीच संभावित राजनीतिक सहयोग को लेकर विभिन्न नेताओं के बयान सामने आए हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा कोई भी समझौता आसान नहीं होगा, क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने प्रमुख दलों के बीच विश्वास की दूरी बढ़ा दी है।

    लोकसभा के मानसून सत्र से पहले विपक्षी दल सरकार की संभावित रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष का मानना है कि कुछ महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर सरकार दोबारा प्रयास कर सकती है। ऐसे में विपक्षी एकजुटता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता बन गई है। इसी संदर्भ में राष्ट्रीय स्तर पर DMK की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ी है और कई विपक्षी नेताओं ने उसे साझा मुद्दों पर साथ आने की आवश्यकता बताई है।

    तमिलनाडु की राजनीति में हाल के महीनों में हुए बदलावों ने राजनीतिक समीकरणों को काफी प्रभावित किया है। कांग्रेस और वीसीके के TVK के साथ जाने के बाद DMK ने इसे अपने साथ राजनीतिक प्रतिबद्धता के उल्लंघन के रूप में देखा। इसके बाद दोनों दलों के संबंधों में तनाव बढ़ा और राष्ट्रीय स्तर पर भी उनके बीच पहले जैसी सहजता दिखाई नहीं दी। यही कारण है कि संभावित सहयोग की चर्चाओं के बावजूद व्यावहारिक स्तर पर कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

    कुछ विपक्षी नेताओं का मानना है कि विचारधारात्मक मुद्दों पर मतभेदों से ऊपर उठकर साझा राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग संभव है। उनका तर्क है कि संसद के भीतर संविधान, संघीय ढांचे और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर समान दृष्टिकोण रखने वाले दलों को साथ मिलकर रणनीति बनानी चाहिए। इसी सोच के तहत कई नेताओं ने DMK को विपक्षी बैठकों में फिर से शामिल करने की वकालत की है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं ने भी संकेत दिए हैं कि राष्ट्रीय मुद्दों पर संवाद और सहयोग की संभावनाएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि अतीत में कई महत्वपूर्ण संसदीय विषयों पर विभिन्न विपक्षी दलों ने एकजुट होकर अपनी भूमिका निभाई थी और भविष्य में भी आवश्यकता पड़ने पर ऐसा सहयोग संभव है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्य स्तर की राजनीतिक परिस्थितियां और गठबंधन की वास्तविकताएं इस प्रक्रिया को जटिल बनाती हैं।

    दूसरी ओर, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि DMK की ओर से अभी तक इस प्रकार के प्रस्तावों पर कोई स्पष्ट सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में केवल अन्य दलों की ओर से दिए गए बयानों के आधार पर किसी संभावित गठबंधन की संभावना तय करना जल्दबाजी होगी। आने वाले दिनों में दलों की आधिकारिक रणनीति और नेतृत्व स्तर पर होने वाली बातचीत से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष अपने भीतर अधिकतम समन्वय बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक परिस्थितियां इस प्रयास की सबसे बड़ी परीक्षा बन सकती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में किसी प्रकार का साझा मंच तैयार होता है, तो उसके लिए सबसे पहले आपसी विश्वास बहाल करना और हाल के मतभेदों को दूर करना आवश्यक होगा। इसी आधार पर आगे की राजनीतिक दिशा और विपक्षी एकता की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

  • आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर योगी सरकार का एक्शन, दोषी अस्पतालों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना

    आयुष्मान योजना में अनियमितताओं पर योगी सरकार का एक्शन, दोषी अस्पतालों पर 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (साचीज) ने प्रदेशभर में विशेष गुणवत्ता सुधार अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य लाभार्थियों को सुरक्षित और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

    साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त प्रदेश के 800 अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया है। यह प्रशिक्षण राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, लखनऊ द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें अस्पतालों को डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

    प्रशिक्षण के दौरान अस्पतालों की तकनीकी समस्याओं और शिकायतों का भी मौके पर समाधान किया गया, ताकि उनकी कार्यप्रणाली और सेवा गुणवत्ता में सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की ओर से एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पतालों को गुणवत्ता मानकों के पालन के लिए प्रोत्साहन राशि देने का भी प्रावधान है। इसी व्यवस्था के तहत साचीज अस्पतालों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे मरीजों को सुरक्षित, मानक आधारित और सम्मानजनक उपचार मिल सके।

    गड़बड़ी करने वाले अस्पतालों पर कड़ी कार्रवाई

    साचीज ने योजना में वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आयुष्मान योजना के तहत अवैध नकद वसूली, अपकोडिंग और अन्य वित्तीय गड़बड़ियों के मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति लागू की गई है।

    सीईओ अर्चना वर्मा के अनुसार, जिन अस्पतालों के खिलाफ जांच में शिकायतें सही पाई गईं, उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक ऐसे अस्पतालों पर करीब 1.16 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है। इनमें से लगभग 60 लाख रुपये की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अस्पतालों के भुगतान पर रोक लगा दी गई है।

    उन्होंने बताया कि जो अस्पताल लगातार नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उन्हें आयुष्मान भारत योजना के पैनल से निलंबित भी किया जा रहा है। साचीज का उद्देश्य केवल अस्पतालों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करना है जो गुणवत्ता, पारदर्शिता और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों पर खरा उतरे।

    इसके साथ ही केंद्र सरकार के अस्पतालों को भी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नेटवर्क से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। इससे प्रदेश के लाभार्थियों को भविष्य में और अधिक विशेषज्ञ एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।

  • आषाढ़ अमावस्या मेले के लिए रेलवे की तैयारी, 13 से 15 जुलाई तक चित्रकूट रूट पर चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

    आषाढ़ अमावस्या मेले के लिए रेलवे की तैयारी, 13 से 15 जुलाई तक चित्रकूट रूट पर चलेंगी दो स्पेशल ट्रेनें

    झांसी। आषाढ़ अमावस्या के अवसर पर चित्रकूट में लगने वाले मेले में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलवे ने 13 से 15 जुलाई तक दो मेला स्पेशल ट्रेनों के संचालन का निर्णय लिया है। इसके अलावा, यात्रियों की संख्या बढ़ने पर झांसी-बांदा मेमू ट्रेन को आवश्यकता के अनुसार चित्रकूटधाम कर्वी तक बढ़ाया जाएगा।

    रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) मनोज कुमार सिंह ने बताया कि पहली मेला स्पेशल ट्रेन झांसी से सुबह 10:10 बजे रवाना होगी और शाम 5:45 बजे चित्रकूटधाम कर्वी पहुंचेगी। वापसी में यही ट्रेन शाम 7:25 बजे कर्वी से चलेगी और रात 1:00 बजे झांसी पहुंचेगी।

    दूसरी मेला स्पेशल ट्रेन झांसी से रात 8:10 बजे प्रस्थान करेगी और तड़के 3:05 बजे चित्रकूटधाम कर्वी पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रेन सुबह 4:40 बजे कर्वी से रवाना होकर 11:10 बजे झांसी पहुंचेगी।

    रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही तो झांसी-बांदा मेमू ट्रेन की अप और डाउन दोनों सेवाओं का विस्तार कर उन्हें चित्रकूटधाम कर्वी तक संचालित किया जाएगा, ताकि यात्रियों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।