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  • PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?

    PM मोदी ने पश्चिम एशिया संकट पर श्रीलंका के राष्ट्रपति से की फोन पर बात, जानें किन मुद्दों पर हुई चर्चा?


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके (Sri Lankan President Anura Kumara Dissanayake) से मंगलवार को फोन पर बातचीत की। इस चर्चा में पश्चिम एशिया (West Asia.) की बदलती स्थिति पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। खासतौर पर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ रहे असर को लेकर गहरी चिंता जताई गई। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। बातचीत के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऊर्जा सहयोग से जुड़ी प्रमुख पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई।

    दोनों देशों ने ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी को और मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने का फैसला किया। क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी। यह सहयोग दोनों देशों के हितों को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाया जाएगा। भारत और श्रीलंका को निकट और विश्वसनीय साझेदार बताया गया। दोनों नेताओं ने साझा चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


    एनर्जी सप्लाई पर हुई चर्चा

    वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में हो रही बाधाओं से निपटने के लिए रणनीतिक सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। यह साझेदारी दोनों देशों की सुरक्षा और विकास के लिए अहम है। इस चर्चा से भारत-श्रीलंका संबंधों में नई ऊर्जा मिली है। दोनों पक्षों ने भविष्य में भी नियमित संपर्क बनाए रखने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। क्षेत्रीय शांति और प्रगति के लिए यह साझा प्रयास महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    भारत और श्रीलंका के संबंध बेहद पुराने हैं, जो सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत पर आधारित हैं। श्रीलंकाई गृहयुद्ध और भारतीय शांति सेना (IPKF) के हस्तक्षेप से तनाव बढ़ा, लेकिन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने आर्थिक सहयोग को मजबूत किया। बीते वर्षों में, श्रीलंकाई आर्थिक संकट में भारत ने लगभग 4 अरब डॉलर की सहायता (क्रेडिट लाइन, करेंसी स्वैप, ईंधन और खाद्य सामग्री) देकर पड़ोस प्रथम नीति का सबूत दिया। कोविड महामारी में ऑक्सीजन और वैक्सीन सहायता भी प्रदान की गई। हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय यात्राओं, रक्षा समझौते, ऊर्जा कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और व्यापार से संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं।

  • एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई स्थिर, घबराने की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली। सरकार ने बताया है कि देश में सभी गैस रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और एलपीजी की सप्लाई लगातार सुचारू बनी हुई है। अब तक 18,700 टन कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति की जा चुकी है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी हुई है

    अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं

    सरकार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दे रही है। इसके तहत स्कूलों, कॉलेजों और आंगनवाड़ी किचन में पीएनजी कनेक्शन तेजी से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल सके

    देशभर में पीएनजी कनेक्शन बढ़ाने के प्रयासों के चलते केवल एक दिन में हजारों नए कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि मार्च के पहले तीन हफ्तों में 3.5 लाख से अधिक कनेक्शन जोड़े गए हैं

    सरकार का कहना है कि एलपीजी की सप्लाई को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है और सप्लाई चैन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। साथ ही, घबराहट में खरीदारी न करने की अपील भी की गई है, क्योंकि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है

    वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भी सरकार ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू और आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो सरकार का दावा है कि देश में ईंधन और गैस की आपूर्ति स्थिर है और आने वाले समय में भी इसे और मजबूत किया जाएगा

  • दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    दिल्ली बजट 2026 इंफ्रास्ट्रक्चर स्वास्थ्य शिक्षा और ग्रीन पहल को बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पेश किए गए बजट में विकास और जनकल्याण की बड़ी तस्वीर सामने आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1,03,700 करोड़ रुपए का बजट पेश करते हुए इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि राजधानी के भविष्य का रोडमैप बताया। इस बजट में खास बात यह रही कि विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर जोर देते हुए कुल बजट का 21 प्रतिशत हिस्सा ग्रीन बजट के रूप में रखा गया है

    सरकार के अनुसार दिल्ली की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और जीएसडीपी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया गया है। लोक निर्माण विभाग को 5,921 करोड़ और शहरी विकास विभाग को 7,887 करोड़ रुपए देने का प्रस्ताव है। यमुनापार, अनधिकृत कॉलोनियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए भी अलग से बजट निर्धारित किया गया है

    राजधानी में सड़कों और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 750 किलोमीटर सड़कों का पुनर्विकास, नए फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही बारापुल्ला कॉरिडोर को जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है

    बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पावर सेक्टर के लिए 3,942 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने और बिजली लाइनों को भूमिगत करने की योजना शामिल है

    जल और सीवर व्यवस्था को सुधारने के लिए 9,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता को बढ़ाकर 1,500 एमजीडी तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे स्वच्छता और जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 12,645 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए सरकार ने अधूरे अस्पतालों को पूरा करने, आईसीयू सुविधाओं के विस्तार और नई स्वास्थ्य योजनाओं की घोषणा की है। आयुष्मान योजना का दायरा बढ़ाया गया है और 750 नए आरोग्य केंद्र खोले जाएंगे। नवजात शिशुओं के लिए नई जांच सुविधाएं भी शुरू की जाएंगी

    शिक्षा क्षेत्र को भी इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। 19,148 करोड़ रुपए के आवंटन के साथ हजारों स्मार्ट क्लासरूम बनाए जाएंगे, छात्राओं को मुफ्त साइकिल और मेधावी छात्रों को लैपटॉप देने की योजना है। नई आईटीआई, एडुसिटी और खेल विश्वविद्यालय जैसे प्रोजेक्ट्स भी प्रस्तावित हैं

    महिला और बाल विकास के लिए 7,406 करोड़ रुपए का बजट रखते हुए महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा पर जोर दिया गया है। मुफ्त बस यात्रा, गैस सिलेंडर और नई योजनाएं जारी रहेंगी। साथ ही शहर में 50,000 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और वन स्टॉप सेंटर बनाए जाएंगे

    परिवहन क्षेत्र में 8,374 करोड़ रुपए के बजट के साथ इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा दिया जाएगा। 2027 तक 7,500 बसें और 2029 तक 12,000 ई बसों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा मेट्रो और नमो भारत कॉरिडोर पर भी निवेश बढ़ाया जाएगा

    एमएसएमई सेक्टर और उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए नई नीतियां लाई जाएंगी, जिसमें वेयरहाउसिंग, सेमीकंडक्टर और ड्रोन पॉलिसी शामिल हैं। वहीं पर्यटन बजट में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है और पहली बार इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल आयोजित करने की योजना है

    पर्यावरण संरक्षण के लिए 822 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण, वेस्ट टू एनर्जी प्लांट और कार्बन क्रेडिट जैसी योजनाएं शामिल हैं। कचरा निपटान क्षमता को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया गया है

  • पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बयान भारत ने दिया संवाद से समाधान का संदेश..

    पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बयान भारत ने दिया संवाद से समाधान का संदेश..

    नई दिल्ली:  नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि यह युद्ध केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि इस संकट ने दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिसका प्रभाव भारत पर भी देखने को मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन भारत लगातार कूटनीतिक प्रयासों के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। भारत ने हमेशा शांति और संवाद का समर्थन किया है और इसी नीति के तहत सभी संबंधित देशों के साथ संपर्क बनाए रखा है। उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने क्षेत्र के कई राष्ट्राध्यक्षों से दो बार बातचीत की है और ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ लगातार संवाद जारी है

    पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में उत्पन्न स्थिति पर भी चिंता जताई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बड़ी संख्या में जहाजों के फंसे होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इनमें भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में बाधा और व्यापारिक जहाजों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और भारत अपने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है

    उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ढांचों पर हो रहे हमलों का कड़ा विरोध करता है। किसी भी प्रकार का हिंसक संघर्ष मानवता के हित में नहीं है और सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांति के रास्ते पर लौटना चाहिए

    विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस संकट के दौरान अब तक 3 लाख 75 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया गया है। खास तौर पर ईरान से 1,000 से अधिक भारतीयों की वापसी हुई है, जिनमें 700 से ज्यादा मेडिकल छात्र शामिल हैं

    प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि इस दौरान कुछ भारतीयों की जान गई है और कुछ लोग घायल हुए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जा रही है और घायलों के इलाज की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है

    ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर भी सरकार सक्रिय है। प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल के दिनों में कई देशों से तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं और सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि देश की जरूरतों से जुड़ी आवश्यक आपूर्ति बाधित न हो

    प्रधानमंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत इस वैश्विक संकट के बीच संतुलित कूटनीति, संवाद और मानवीय दृष्टिकोण के साथ स्थिति को संभालने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है

  • योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    योगी सरकार के 9 साल यूपी बना हेल्थकेयर में नंबर वन डिजिटल से इमरजेंसी सेवाओं तक बड़ा बदलाव

    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिला है। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हेल्थकेयर सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं, जिससे प्रदेश आज कई स्वास्थ्य मानकों पर देश में अग्रणी बनकर उभरा है।

    सरकार ने इस दौरान केवल अस्पतालों के निर्माण तक ही ध्यान सीमित नहीं रखा, बल्कि डिजिटल हेल्थ, आपातकालीन सेवाएं, मातृ और शिशु देखभाल जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय सुधार किए हैं। डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में प्रदेश ने 5.76 करोड़ से अधिक इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड तैयार कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इसके साथ ही यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल के जरिए रोगों की निगरानी और नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाया गया है

    मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई है। गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क अल्ट्रासाउंड ई-वाउचर की सुविधा दी गई है, जबकि जननी सुरक्षा योजना और बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लाखों लोगों को लाभ मिला है। दस्तक अभियान के माध्यम से एईएस और जेई जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ भी सघन अभियान चलाया गया है

    प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हजारों की संख्या में आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हो रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच मिला है और लाखों परिवारों को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को बड़ी राहत मिली है

    स्वास्थ्य अवसंरचना के क्षेत्र में भी राज्य ने तेजी से प्रगति की है। जन औषधि केंद्रों की संख्या में वृद्धि के साथ सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। वहीं, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों के नेटवर्क के मामले में भी प्रदेश देश में अग्रणी बना हुआ है

    आपातकालीन सेवाओं में सुधार करते हुए 108 एम्बुलेंस सेवा के जरिए करोड़ों लोगों को मदद पहुंचाई गई है। एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई गई है और उनकी पहुंच को दोगुना किया गया है। इसके अलावा मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए दूरदराज के इलाकों में भी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई है

    योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में निशुल्क डायलिसिस और सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं शुरू की हैं। टेलीमेडिसिन और टेली कंसल्टेशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हुई हैं

    दवाओं की गुणवत्ता और सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉर्पोरेशन की स्थापना की गई है, जिससे पारदर्शिता और दक्षता दोनों में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कई स्वास्थ्य इकाइयों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट भी प्राप्त हुआ है

    खाद्य सुरक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी राज्य ने कदम बढ़ाए हैं। मोबाइल लैब और माइक्रोबायोलॉजी लैब के जरिए खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी की जा रही है। साथ ही फार्मास्युटिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए नई संस्थाओं की स्थापना की गई है

     उत्तर प्रदेश ने स्वास्थ्य सेवाओं में बुनियादी ढांचे से आगे बढ़कर एक समग्र और आधुनिक सिस्टम विकसित किया है, जो न केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करता है बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार है

  • जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर

    जल जीवन मिशन 2.0 से खुलेगा 3 लाख करोड़ का बड़ा बाजार अब फोकस होगा सेवा और मेंटेनेंस पर


    नई दिल्ली:देश में हर घर तक साफ पानी पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सरकार केवल पाइपलाइन और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि अब फोकस पानी की निरंतर सप्लाई और उसके बेहतर रखरखाव पर किया जा रहा है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव से ऑपरेशन और मेंटेनेंस यानी ओएंडएम सेक्टर में करीब 3 लाख करोड़ रुपये के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं

    रिपोर्ट में बताया गया है कि इस योजना का कुल बजट बढ़कर 8.69 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसके साथ ही मिशन को अब सर्विस-डिलीवरी मॉडल में बदला जा रहा है, जिससे इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन यानी EPC सेक्टर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अब सिर्फ प्रोजेक्ट बनाने तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि उन्हें लंबे समय तक सेवाएं भी देनी होंगी

    इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण असर भुगतान व्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है। अभी कई राज्यों में कंपनियों को भुगतान मिलने में 6 महीने से ज्यादा का समय लग जाता है, लेकिन सरकार ने इसे सुधारते हुए सितंबर 2026 तक भुगतान अवधि को घटाकर 60 दिन से कम करने का लक्ष्य तय किया है। इससे सेक्टर में कैश फ्लो बेहतर होगा और कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी

    सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन देने की समयसीमा को भी 2024 से बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना को जल्दबाजी में पूरा करने के बजाय गुणवत्ता और स्थायित्व पर ज्यादा ध्यान दिया जाए

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन से पीवीसी और एचडीपीई पाइप बनाने वाली संगठित कंपनियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, जिन कंपनियों के पास मजबूत तकनीक, बेहतर सर्विस नेटवर्क और ऊर्जा दक्ष समाधान हैं, वे इस बदलाव का ज्यादा फायदा उठा पाएंगी

    हालांकि, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 2025-26 के बाद बजट आवंटन और वास्तविक खर्च के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि योजना के क्रियान्वयन में अभी भी कुछ चुनौतियां मौजूद हैं। इसी कारण अब सरकार टिकाऊ और प्रभावी सेवा देने वाले मॉडल पर जोर दे रही है

    गौरतलब है कि इस योजना की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंचाना था। अब तक इस योजना के तहत नल कनेक्शन वाले घरों की संख्या में करीब पांच गुना वृद्धि हुई है और फरवरी 2026 तक ग्रामीण कवरेज 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है

    फिर भी कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता और नियमित सप्लाई को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब इस योजना को अपग्रेड कर सेवा आधारित मॉडल अपनाने का फैसला किया है

    जल जीवन मिशन 2.0 के तहत डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम जैसे सुजलम भारत प्लेटफॉर्म के जरिए पानी की सप्लाई और गुणवत्ता पर नजर रखी जाएगी। साथ ही ग्राम पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भूमिका को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि जल आपूर्ति को एक स्थायी और विश्वसनीय सार्वजनिक सेवा के रूप में विकसित किया जा सके

    यह बदलाव न केवल देश के जल प्रबंधन सिस्टम को मजबूत करेगा, बल्कि उद्योगों और कंपनियों के लिए भी एक बड़े आर्थिक अवसर के रूप में सामने आ रहा है
  • भारतीय बाजार में रिकवरी के संकेत रुपया 91- तक मजबूत हो सकता है रिपोर्ट..

    भारतीय बाजार में रिकवरी के संकेत रुपया 91- तक मजबूत हो सकता है रिपोर्ट..

    नई दिल्ली:भारतीय शेयर बाजार में आने वाले महीनों में मजबूत वापसी के संकेत मिल रहे हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और शेयरों के वैल्यूएशन में कमी के चलते बाजार में सुधार की संभावना बन रही है। रिपोर्ट के अनुसार डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी मजबूती दिखाते हुए 91 के स्तर तक पहुंच सकता है।

    एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा 6.83 प्रतिशत से घटकर लगभग 6.65 प्रतिशत तक आ सकती है। यह बदलाव अगले दो से तीन महीनों में देखने को मिल सकता है, जब बाजार सामान्य स्थिति में लौटने लगेगा।

    हालांकि, पिछले कुछ समय में बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव साफ दिखाई दिया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी पिछले तीन कारोबारी सत्रों में करीब 5 प्रतिशत तक गिरा, जिसकी मुख्य वजह विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। इसके बावजूद उम्मीद जताई गई है कि यह ट्रेंड जल्द बदल सकता है और भारत निवेश के लिए आकर्षक बाजार बनकर उभर सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वित्त वर्ष 2027 में अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत औसतन 80 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर लगभग 6.6 प्रतिशत रह सकती है। इसके साथ ही मुद्रास्फीति बढ़कर 4.3 प्रतिशत और चालू खाता घाटा जीडीपी के 1.7 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    अगर वैश्विक परिस्थितियों के कारण तेल की कीमतें और बढ़ती हैं और ब्रेंट 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चला जाता है, तो भारत के लिए आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में चालू खाता घाटा 2.5 प्रतिशत से अधिक हो सकता है और व्यापार घाटा 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि मौजूदा तेल कीमतों के स्तर पर सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में लगभग 19.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती करनी पड़ सकती है। साथ ही एलपीजी पर करीब 1 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी का भार भी सरकार को उठाना पड़ सकता है।

  • बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?

    बदलेगा संसद का स्वरूप…! लोकसभा में महिलाओं के लिए 273 सीटें बढ़ाने की तैयारी… 409 होगा बहुमत का आंकड़ा?


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में महिला आरक्षण (Women’s Reservation) को लागू करने के लिए कम से कम दो विधेयक (Bills) (संविधान संशोधन सहित) पेश करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत अगले लोकसभा (Lok Sabha) और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटें आरक्षित की जाएंगी। इस कदम से देश का राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से बदलने की उम्मीद है।


    लोकसभा की सीटों में 50% का इजाफा

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की योजना के अनुसार लोकसभा की कुल सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जा सकती हैं। यानी 273 नई सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें से अधिकांश महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़कर 409 हो जाएगा।

    यह वृद्धि पिछले पांच दशकों में पहली बार होगी। इससे मौजूदा पुरुष सांसदों की राजनीतिक स्थिति पर कोई खतरा नहीं मंडराएगा। राज्यसभा और राज्यों की विधान परिषदों की सदस्य संख्या पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।


    परिसीमन और 2011 की जनगणना का इस्तेमाल

    2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिला आरक्षण को नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से जोड़ा गया था। अब सरकार इस प्रावधान को अलग कर रही है। नई जनगणना के आंकड़ों में समय लग सकता है, इसलिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही नया परिसीमन कराने पर विचार कर रही है ताकि 31 मार्च 2029 के बाद होने वाले चुनावों में यह कोटा लागू किया जा सके।


    राज्यों और SC/ST सीटों पर असर

    दक्षिण भारतीय राज्यों की यह चिंता थी कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के कारण संसद में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर राज्य की सीटों में 50% की वृद्धि होगी, जिससे उनका आनुपातिक प्रतिनिधित्व बरकरार रहेगा।
    उत्तर प्रदेश: सीटें 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी।
    बिहार: सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी।
    केरल: सीटें 20 से बढ़कर 30 हो जाएंगी।

    इसी अनुपात में अनुसूचित जाति (SC) की सीटें 84 से बढ़कर 126 और अनुसूचित जनजाति (ST) की सीटें 47 से बढ़कर 70 हो जाने का अनुमान है। छोटे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (जहां केवल 1 या 2 सीटें हैं) में हर तीसरे चुनाव में महिलाओं के लिए रोटेशन के आधार पर सीट आरक्षित की जाएगी।


    राजनीतिक सरगर्मी और आगे की राह

    सरकार 4 अप्रैल को समाप्त हो रहे बजट सत्र में ही इन विधेयकों को पारित कराने की इच्छुक है। यदि सहमति बनाने में कुछ और दिन लगते हैं, तो बजट सत्र को बढ़ाया जा सकता है या महिलाओं के कोटे के लिए एक विशेष छोटा सत्र भी बुलाया जा सकता है।


    अमित शाह की बैठकें

    संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है, जो NDA के पास अकेले नहीं है। इसलिए गृह मंत्री अमित शाह समर्थन जुटाने के लिए बैठकें कर रहे हैं। उन्होंने NDA के सहयोगियों के साथ-साथ सपा, शिवसेना (UBT), बीजेडी और YSR कांग्रेस जैसे विपक्षी और गैर-गठबंधन दलों के साथ भी चर्चा की है।

    कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अमित शाह की बैठक से किनारा कर लिया। वहीं, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां महिला कोटे के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से आरक्षण की मांग कर रही हैं।

  • UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात

    UPA सरकार ने नहीं की देश की चिंता… कांग्रेस पर बरसे PM मोदी, मिडिल ईस्ट तनाव पर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक निजी न्यूज चैनल के शिखर सम्मेलन में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार (UPA Government) ने देश की चिंता नहीं, बल्कि अपनी सत्ता बचाने की फिक्र में रहकर गलत फैसले लिए। पीएम मोदी ने विशेष रूप से यूपीए काल में जारी किए गए तेल बांडों का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस ने अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए आने वाली पीढ़ियों पर भारी वित्तीय बोझ डाला। वहीं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव की चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने अपने पत्ते खोले और साफ-साफ बताया कि वे किसके साथ हैं।


    कांग्रेस पर जमकर बरसे

    प्रधानमंत्री ने बताया कि 2004 से 2010 के बीच कांग्रेस सरकार ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के तेल बांड जारी किए थे। उन्होंने कहा कि उस समय पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें संकट में थीं, लेकिन कांग्रेस देश की नहीं, अपनी सत्ता की चिंता कर रही थी। पीएम मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के हवाले से कहा कि उन्होंने खुद स्वीकार किया था कि यह फैसला गलत था और इससे आने वाली पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ पड़ेगा।

    पीएम मोदी ने ‘रिमोट कंट्रोल’ से सरकार चलाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग दूर से सरकार चला रहे थे, उन्होंने सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय लिया, क्योंकि उस समय कोई जवाबदेही नहीं थी। उन्होंने खुलासा किया कि इन बांडों का भुगतान 2020 के बाद शुरू हुआ और ब्याज सहित कुल राशि 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। उन्होंने जोर देकर कहा कि पिछले 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस के इस ‘पाप’ को धोने का काम किया है, जिसकी कीमत कम नहीं रही।


    कई गुटों में बंटी है दुनिया

    वैश्विक परिदृश्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया कई गुटों में बंटी हुई है, लेकिन भारत ने मजबूत और व्यापक साझेदारियां बनाई हैं। पश्चिम एशिया में संघर्ष के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति में बाधाओं के बीच भारत ने खाड़ी देशों से लेकर वैश्विक पश्चिम और दक्षिण तक सभी के साथ विश्वसनीय साझेदारी कायम की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम किसके साथ हैं? मेरा जवाब है- हम भारत के साथ हैं। हम भारत के हितों, शांति और संवाद के साथ हैं।

    पीएम मोदी ने आगे कहा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला लड़खड़ा रही है, लेकिन भारत ने विविधीकरण और लचीलेपन का मॉडल पेश किया है। ऊर्जा, उर्वरक और आवश्यक वस्तुओं के मामले में सरकार ने नागरिकों को न्यूनतम परेशानी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। कोरोना महामारी के बाद से लगातार चुनौतियां आईं, लेकिन 140 करोड़ भारतीयों के एकजुट प्रयास से देश हर विपदा से पार पा रहा है।

    उन्होंने हाल की 23 दिनों की उथल-पुथल का जिक्र करते हुए कहा कि युद्ध जैसी स्थिति में भी भारत ने अपनी कूटनीति, निर्णय क्षमता और संकट प्रबंधन की ताकत दिखाई है। दुनिया भारत की नीति और रणनीति से आश्चर्यचकित है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि भारत प्रगति, विकास और विश्वास के साथ मजबूती से आगे बढ़ रहा है।

  • बंगाल के भवानीपुर-नंदीग्राम में हुमायूं की एंट्री ने बढ़ाई राजनीतिक गर्माहट, वोट बिखराव से सियासी खेल होगा जटिल

    बंगाल के भवानीपुर-नंदीग्राम में हुमायूं की एंट्री ने बढ़ाई राजनीतिक गर्माहट, वोट बिखराव से सियासी खेल होगा जटिल


    कोलकाता। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में भवानीपुर और नंदीग्राम सीटों पर हुमायूं कबीर की एंट्री ने मुकाबले को और जटिल बना दिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी एजेयूपी के उम्मीदवार इन दोनों हाईप्रोफाइल सीटों पर चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना रहे हैं, जिससे वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ गई है।

    नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी की सभा के बाद तृणमूल कांग्रेस के पवित्र कर के घर के बाहर ‘चोरचोर’ के नारे लगने से सियासी तापमान और बढ़ गया है। वहीं, मतदाता सूची संशोधन एसआईआर की सप्लीमेंट्री लिस्ट जारी होने से पहले लाखों नामों के जोड़-घटाव को लेकर चुनाव आयोग अलर्ट मोड पर है। इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि जमीनी तनाव, वोटिंग गणित और प्रशासनिक सतर्कता के बीच तय होगा।

    हाईवोल्टेज सीटें: भवानीपुर और नंदीग्राम

    भवानीपुर और नंदीग्राम हमेशा से तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच प्रत्यक्ष मुकाबले की सीट रही हैं। अब हुमायूं कबीर ने भवानीपुर में पूनम बेगम और नंदीग्राम में शाहिदुल हक को उतारकर इन सीटों को त्रिकोणीय संघर्ष का मैदान बना दिया है।

    भवानीपुर में मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट निर्णायक

    भवानीपुर में ममता बनर्जी की प्रतिष्ठा दांव पर है। इस सीट पर मुस्लिम और अल्पसंख्यक वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभाता है, जो अब तक तृणमूल के साथ रहा है। एजेयूपी की एंट्री से इस वोट बैंक में सेंध लग सकती है। यदि हुमायूं का प्रभाव स्थानीय स्तर पर मजबूत नहीं रहा, तो तृणमूल को बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन मामूली वोट कटाव भी करीबी मुकाबले में भाजपा के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

    नंदीग्राम में बहुकोणीय मुकाबला

    नंदीग्राम में पहले से शुभेंदु अधिकारी और ममता बनर्जी के बीच सीधी टक्कर रही है। अब एजेयूपी की एंट्री विपक्षी वोटों के बिखराव की संभावना बढ़ा रही है। मुस्लिम और ग्रामीण वोट बैंक पहले ही विभाजित है, और हुमायूं का उम्मीदवार इसे और जटिल बना सकता है, जिससे भाजपा को अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है, खासकर तब जब तृणमूल विरोधी वोट एकजुट न हों।

    विश्लेषकों का कहना है कि छोटी पार्टियों का प्रभाव सीधे जीत पर कम होता है, लेकिन 2-5% वोट शेयर के जरिए वे चुनाव के नतीजों की दिशा बदल सकते हैं। भवानीपुर में यह तृणमूल के लिए चुनौती और नंदीग्राम में भाजपा के लिए अप्रत्यक्ष लाभ साबित हो सकता है।