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  • भारतीय रेलवे के इतिहास का नया अध्याय अगले साल से शुरू होगी बुलेट ट्रेन जानिए किस रूट पर पहले मिलेगी सौगात

    भारतीय रेलवे के इतिहास का नया अध्याय अगले साल से शुरू होगी बुलेट ट्रेन जानिए किस रूट पर पहले मिलेगी सौगात


    नई दिल्ली । भारत का बहुप्रतीक्षित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है और देश को अगले वर्ष एक ऐतिहासिक सौगात मिलने जा रही है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि 15 अगस्त 2027 से भारत की पहली बुलेट ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। शुरुआत मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण सूरत से बिलिमोरा के बीच होगी। इसके बाद परियोजना को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाते हुए वापी अहमदाबाद ठाणे और अंत में पूरे मुंबई अहमदाबाद मार्ग तक विस्तार दिया जाएगा।

    यह परियोजना केवल एक नई ट्रेन की शुरुआत नहीं बल्कि भारत के परिवहन इतिहास में तकनीकी बदलाव का सबसे बड़ा कदम मानी जा रही है। पूरी तरह तैयार होने के बाद यह बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इससे यात्रियों का सफर पहले की तुलना में कई गुना तेज और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। रेल मंत्रालय के अनुसार परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुंबई अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है। इस परियोजना में आधुनिक तकनीक अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग किया जा रहा है। बुलेट ट्रेन के शुरू होने से दोनों महानगरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा जिससे व्यापार उद्योग पर्यटन और निवेश को भी नई गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।

    रेल मंत्री ने रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास कार्यों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देशभर में 261 रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प तेजी से किया जा रहा है। सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ट्रेन संचालन को बिना रोके आधुनिक सुविधाओं से लैस स्टेशन तैयार करना बड़ी चुनौती है लेकिन भारतीय रेलवे इसे सफलतापूर्वक पूरा कर रही है। नए स्टेशन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं और आधुनिक यात्री सेवाओं से लैस होंगे।

    रेल मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद क्षेत्र के लिए तीन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर की मंजूरी दी है। इनमें पुणे से हैदराबाद हैदराबाद से चेन्नई और हैदराबाद से बेंगलुरु तक हाई स्पीड रेल परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दक्षिण भारत में तेज रफ्तार रेल नेटवर्क विकसित होगा जिससे उद्योग व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हैदराबाद को भविष्य का प्रमुख हाई स्पीड रेल हब बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    भारत में बुलेट ट्रेन परियोजना केवल तेज यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आधुनिक भारत की नई पहचान बनने जा रही है। इससे रेलवे तकनीक में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी निर्माण क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और हजारों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। आने वाले वर्षों में यदि अन्य हाई स्पीड रेल कॉरिडोर भी इसी गति से विकसित होते हैं तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहां अत्याधुनिक बुलेट ट्रेन नेटवर्क उपलब्ध होगा। यह परियोजना देश के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के साथ विकास और प्रगति की नई रफ्तार भी तय करेगी।

  • आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल

    आंध्र प्रदेश के नागप्पा परिवार में हैं 83 सदस्य और 6 पीढ़ियां, लेकिन रसोई एक, बना संयुक्त परिवार की मिसाल


    नई दिल्‍ली । आजकल संयुक्त परिवार धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं. लोग अब न्यूक्लियर फैमिली की तरफ बढ़ रहे हैं. नौकरी, पढ़ाई और बेहतर सुविधाओं की तलाश में लोग अलग-अलग शहरों में बस जाते हैं. ऐसे समय में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के कुरलपल्ली गांव का नागप्पा परिवार लोगों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है.

    इस परिवार में कुल 83 सदस्य रहते हैं. खास बात यह है कि परिवार छह पीढ़ियों तक फैला हुआ है और आज भी सभी लोग मिल-जुलकर एक परिवार की तरह रहते हैं. भले ही वे चार अलग-अलग मकानों में रहते हों, लेकिन उनकी जिंदगी पूरी तरह एक ही परिवार की तरह चलती है.

    परिवार में कौन-कौन हैं?
    इस बड़े परिवार की अगुवाई हनुमंतरायुडु और मुथ्यालप्पा करते हैं. परिवार में छह सास, 14 बहुएं, 20 बच्चे, दादा-दादी, नाना-नानी और कई बुजुर्ग सदस्य शामिल हैं. इतने बड़े परिवार को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन यहां हर सदस्य की अपनी जिम्मेदारी तय है. घर के छोटे-बड़े सभी लोग एक-दूसरे का सहयोग करते हैं. यही वजह है कि इतने सारे लोगों के साथ रहने के बावजूद परिवार में अनुशासन और तालमेल बना रहता है.

    हर सुबह होती है परिवार की मीटिंग
    इस परिवार की सबसे खास बात इसकी हर रोज की दिनचर्या है. हर सुबह घर के बड़े सदस्य एक साथ बैठकर चाय या कॉफी पीते हैं और पूरे दिन की योजना बनाते हैं. इसी बैठक में तय होता है कि कौन खेत में जाएगा, कौन घर के काम संभालेगा और उस दिन खाने में क्या बनेगा. सभी जिम्मेदारियां पहले ही बांट दी जाती हैं, जिससे किसी पर जरूरत से ज्यादा बोझ नहीं पड़ता. परिवार के लोग मानते हैं कि दिन की शुरुआत अगर मिलकर की जाए तो बाकी काम भी आसानी से पूरे हो जाते हैं.

    चार घर, लेकिन रसोई सिर्फ एक
    आज के समय में हर घर की अपनी अलग रसोई होती है, लेकिन नागप्पा परिवार में ऐसा नहीं है. यहां चार मकानों में रहने के बावजूद पूरे परिवार का खाना एक ही रसोई में तैयार होता है. राशन खरीदने से लेकर सब्जियां लाने तक की जिम्मेदारी बड़े सदस्य निभाते हैं. वहीं परिवार की बहुएं मिलकर पूरे परिवार के लिए खाना बनाती हैं. एक साथ बैठकर खाना खाना इस परिवार की पुरानी परंपरा है. उनका मानना है कि साथ बैठकर खाना खाने से रिश्तों में अपनापन बना रहता है.

    खेती के साथ बसों का भी कारोबार
    इस परिवार की कमाई का जरिया सिर्फ खेती नहीं है. खेती के अलावा परिवार मिलकर ट्रांसपोर्ट का कारोबार भी करता है. परिवार के पास चार बसें हैं, जो कल्याणदुर्गम से कर्नाटक के कई इलाकों के बीच चलती हैं. खेती और बसों से होने वाली पूरी कमाई एक ही जगह जमा होती है. इसके बाद जरूरत के हिसाब से खर्च किया जाता है. इसका मतलब यहां कोई अपनी अलग कमाई नहीं रखता. परिवार की आर्थिक व्यवस्था पूरी तरह सामूहिक है.

    इतने बड़े परिवार में कैसे नहीं होते झगड़े?
    83 लोगों के साथ रहने पर मतभेद होना स्वाभाविक है. परिवार के सदस्य भी मानते हैं कि कभी-कभी अलग-अलग राय सामने आती हैं. हालांकि, उनका नियम साफ है कि कोई भी विवाद अगले दिन तक नहीं जाना चाहिए. अगर किसी बात पर बहस होती है तो उसी दिन बैठकर उसका समाधान निकाल लिया जाता है. बुजुर्गों का कहना है कि आपसी सम्मान, धैर्य और बातचीत ही इतने बड़े परिवार को एक साथ जोड़े रखने का सबसे बड़ा कारण है.

    बच्चों को भी मिलती है परिवार की सीख
    इस संयुक्त परिवार में बड़े-बुजुर्ग सिर्फ फैसले नहीं लेते, बल्कि बच्चों को परिवार की परंपराएं और संस्कार भी सिखाते हैं. बच्चे अपने दादा-दादी और अन्य बुजुर्गों के साथ समय बिताते हैं. उन्हें बचपन से ही मिलकर रहने, जिम्मेदारियां निभाने और बड़ों का सम्मान करने की सीख दी जाती है. परिवार के लोगों का मानना है कि यही वजह है कि नई पीढ़ी भी संयुक्त परिवार की अहमियत समझ रही है.

    सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ
    इस परिवार की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने लिखा कि आज के समय में जहां छोटी-छोटी बातों पर परिवार टूट जाते हैं, वहां 83 लोगों का एक साथ रहना किसी मिसाल से कम नहीं है. कुछ लोगों ने कहा कि यह परिवार बताता है कि अगर आपसी भरोसा और सहयोग हो तो बड़ा परिवार भी खुशी-खुशी रह सकता है.

    बदलते दौर में भी कायम है परंपरा
    संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार घट रही है. ऐसे समय में नागप्पा परिवार यह साबित करता है कि अगर रिश्तों को महत्व दिया जाए तो पीढ़ियां भी एक साथ रह सकती हैं. यह परिवार सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि सहयोग, अनुशासन और भरोसे की ऐसी मिसाल है, जो आज के दौर में बहुत कम देखने को मिलती है. 83 लोगों का यह परिवार दिखाता है कि खुशहाल जिंदगी सिर्फ बड़े घर से नहीं, बल्कि बड़े दिल और मजबूत रिश्तों से बनती है.

  • PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’

    PM मोदी ने विदेशी नेताओं को दिए भारतीय विरासत से जुड़े उपहार, झलकी अनोखी ‘कल्चरल डिप्लोमेसी’


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शिल्प को विशेष स्थान मिलता रहा है। विदेश दौरों के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं को दिए गए उनके उपहार न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का परिचय कराते हैं, बल्कि देश के हस्तशिल्प, लोक कलाओं और पारंपरिक कारीगरी को वैश्विक मंच पर भी पहचान दिलाते हैं।

    इंडोनेशियाई संसद की स्पीकर पुआन महारानी को प्रधानमंत्री मोदी ने ओडिशा की प्रसिद्ध इकट (बंधा) कला से तैयार रेशमी वस्त्र भेंट किया। संबलपुर, नुआपटना और बरगढ़ के बुनकरों द्वारा तैयार यह हैंडलूम कला अपनी जटिल टाई-एंड-डाई तकनीक, आकर्षक डिजाइनों और जीवंत रंगों के लिए प्रसिद्ध है और ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने वहां के गवर्नर-जनरल को बिहार के मिथिला क्षेत्र की प्रसिद्ध मधुबनी पेंटिंग भेंट की। प्राकृतिक रंगों से तैयार इस लोक कला में मोर, वृक्ष और प्रकृति के विविध रूपों का चित्रण है, जो समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश देता है।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की पत्नी को कश्मीर की पारंपरिक कढ़ाई से सजी शुद्ध ऊन की स्टोल भेंट की गई। घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित महीन फूलों की कढ़ाई वाली यह स्टोल कश्मीर की सदियों पुरानी वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एंथनी अल्बनीज को दो विशेष उपहार भी दिए। पहला, जनजातीय ढोकरा कला से निर्मित धातु की नाव, जिसे प्राचीन ‘लॉस्ट वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार किया गया है। आदिवासी जीवन को दर्शाने वाली यह कलाकृति एकता, सहयोग और सामूहिक प्रगति का संदेश देती है।

    दूसरे उपहार के रूप में उन्हें इंडियन प्रीमियम कॉफी बॉक्स भेंट किया गया, जिसमें भारत के प्रमुख कॉफी उत्पादक क्षेत्रों की चुनिंदा प्रीमियम कॉफी शामिल है। यह भारतीय कॉफी उद्योग की गुणवत्ता और वैश्विक स्तर पर उसकी बढ़ती पहचान को दर्शाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के विपक्ष के नेता को प्रधानमंत्री ने राजस्थान की पारंपरिक लकड़ी नक्काशी कला से तैयार हस्तनिर्मित जालीदार हाथी भेंट किया। एक ही लकड़ी के टुकड़े से बनाई गई यह कलाकृति भारतीय शिल्पकारों की बारीक कारीगरी का बेहतरीन उदाहरण है। भारतीय संस्कृति में हाथी बुद्धिमत्ता, समृद्धि और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

    ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर-जनरल को प्रधानमंत्री मोदी ने संगमरमर पर अर्ध-कीमती पत्थरों की जड़ाई से तैयार मार्बल इनले वर्क बॉक्स भेंट किया। यह भारत की प्रसिद्ध पीएत्रा ड्यूरा (Pietra Dura) कला का उत्कृष्ट नमूना है, जो भारतीय कारीगरों की सूक्ष्म शिल्पकला को प्रदर्शित करता है।

    न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन को प्रधानमंत्री मोदी ने दो खास उपहार दिए। पहला, हिमालयी संस्कृति और सम्मान का प्रतीक पारंपरिक उत्तराखंडी (पहाड़ी) टोपी, जबकि दूसरा भारतीय महिला हॉकी टीम के सभी खिलाड़ियों के हस्ताक्षर वाली हॉकी स्टिक, जिसे न्यूजीलैंड में आयोजित एफआईएच हॉकी महिला नेशंस कप में भारत की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में भेंट किया गया।

    इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने उन्हें छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र की प्रसिद्ध ढोकरा ‘ट्री ऑफ लाइफ’ (जीवन वृक्ष) मूर्ति भी भेंट की। ‘लॉस्ट-वैक्स कास्टिंग’ तकनीक से तैयार यह कलाकृति भारत की प्राचीन धातु शिल्प परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

    न्यूजीलैंड के विपक्ष के नेता क्रिस हिपकिंस को उत्तर प्रदेश के लखनऊ की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी वॉल हैंगिंग भेंट की गई। धातु के तारों, मोतियों, सीक्विन और अन्य सजावटी तत्वों से सजी यह कलाकृति भारतीय कढ़ाई कला की समृद्ध विरासत, रचनात्मकता और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को दर्शाती है।

    प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी नेताओं को दिए गए ये उपहार केवल औपचारिक स्मृति चिह्न नहीं हैं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, लोक कलाओं और देश के कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।

  • पूर्व CEC कुरैशी ने किताब में साझा किया मनमोहन सिंह से जुड़ा प्रसंग, कहा था- 'तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…'

    पूर्व CEC कुरैशी ने किताब में साझा किया मनमोहन सिंह से जुड़ा प्रसंग, कहा था- 'तो मैं आत्महत्या कर लूंगा…'


    नई दिल्‍ली । पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एस.वाई. कुरैशी ने अपनी आगामी किताब ‘इंडिया एंड आई: ए हंड्रेड मेमोरीज, नॉट ए मेमॉयर’ में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा एक भावुक प्रसंग साझा किया है. यह किताब जल्द ही प्रकाशित होने वाली है, जिसमें उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के अपने लंबे करियर से जुड़े 100 महत्वपूर्ण अनुभवों और घटनाओं का जिक्र किया है.

    एस.वाई कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि साल 2012 में चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर कुछ केंद्रीय मंत्रियों की टिप्पणियों से नाराज होकर वह तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास पहुंचे थे और उनसे शिकायत की थी. उनकी बात सुनने के बाद मनमोहन सिंह ने कहा था, ‘अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.’ एस.वाई. कुरैशी के मुताबिक, यह घटना 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव दौरान हुई थी.

    उस समय तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने चुनावी रैली में वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो मुसलमानों के लिए सरकारी नौकरियों में 4.5 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया जाएगा. इस बयान पर भाजपा ने चुनाव आयोग से शिकायत करते हुए इसे आदर्श आचार संहिता (MCC) का उल्लंघन बताया था. कुरैशी अपनी किताब में लिखते हैं कि चुनाव आयोग ने इस मामले में चार दिनों तक सुनवाई की.

    सलमान खुर्शीद के खिलाफ EC पहुंची थी बीजेपी
    कांग्रेस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी और भाजपा की ओर से अरुण जेटली ने पक्ष रखा. सुनवाई के बाद चुनाव आयोग ने सलमान खुर्शीद की निंदा (Censure) की, जो आचार संहिता के तहत उपलब्ध सबसे कड़ी कार्रवाई थी. इसके बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग पर ‘अहंकारी’ और ‘मनमाना’ होने के आरोप लगाए. एस.वाई. कुरैशी के अनुसार, आलोचना से उन्हें कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन ऐसी टिप्पणियां चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की साख को नुकसान पहुंचा रही थीं.

    भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने अपनी किताब में लिखा है कि उसी दौरान ईद के अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के प्रेस सचिव हरीश खरे से अपनी नाराजगी जाहिर की. हरीश खरे ने पूछा कि क्या वह यह बात प्रधानमंत्री तक पहुंचा दें, जिस पर कुरैशी ने हामी भर दी. किताब के मुताबिक, अगले ही दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें फोन आया और शाम को प्रधानमंत्री आवास पर मनमोहन सिंह के साथ उनकी मुलाकात तय हुई.

    मनमोहन सिंह खुद दरवाजे पर कर रहे थे इंतजार
    एस.वाई. कुरैशी लिखते हैं कि जब वह पहुंचे तो मनमोहन सिंह स्वयं दरवाजे पर उनका इंतजार कर रहे थे. बैठते ही उन्होंने भावुक होकर कहा, ‘हरीश ने मुझे बताया कि आपने क्या कहा. अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा.’ कुरैशी के अनुसार, वह यह सुनकर स्तब्ध रह गए. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी शिकायत प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि कुछ मंत्रियों के बयानों को लेकर थी. इस पर मनमोहन सिंह ने कहा कि अगर उन्हें इस बारे में पहले जानकारी होती तो वह संबंधित मंत्रियों को कड़ी फटकार लगाते. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी कोई बात हो तो वह सीधे उन्हें फोन करें.

    अपनी किताब में एस.वाई. कुरैशी ने लिखा है कि मनमोहन सिंह ने उनसे कहा, ‘चुनाव आयोग सिर्फ भारत का गौरव नहीं है, बल्कि हमारे लोकतंत्र की आत्मा है. अगर हमने इसे खो दिया, तो हम सब कुछ खो देंगे.’ पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने लिखा कि इस मुलाकात ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उनके मुताबिक, यह किसी राजनेता से मुलाकात नहीं, बल्कि ऐसे नेता से सामना था, जिसके लिए संवैधानिक मर्यादा केवल भाषण का विषय नहीं, बल्कि जीवन का सिद्धांत थी. उन्होंने बताया कि इस मुलाकात के बाद चुनाव आयोग को लेकर की जा रही बयानबाजी भी थम गई.

  • आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, कडप्पा में बढ़े मामलों के बीच सरकार ने मास्क और निगरानी व्यवस्था की सख्ती बढ़ाई

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोविड-19 संक्रमण से दो मरीजों की मौत और आठ सक्रिय मामलों की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन ने संक्रमण की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने, अस्पतालों को तैयार रखने और सार्वजनिक स्थानों पर एहतियाती उपायों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार हाल के दिनों में कडप्पा जिले में सामने आए मामलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। अधिकारियों ने बताया कि एक 52 वर्षीय व्यक्ति को तेज बुखार और खांसी की शिकायत के बाद कोविड-19 संक्रमित पाया गया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। वहीं 43 वर्षीय एक अन्य मरीज, जो पहले से अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे, कोविड संक्रमण की पुष्टि के बाद अस्पताल में उपचार के दौरान नहीं बच सके। अधिकारियों के अनुसार दोनों मामलों की विस्तृत चिकित्सीय समीक्षा भी की जा रही है।

    संक्रमण का असर स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों तक भी पहुंचा है। कडप्पा मेडिकल कॉलेज के एक मेडिकल छात्र के संक्रमित मिलने के बाद उसे होम आइसोलेशन में रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है और निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का पालन कराया जा रहा है ताकि संक्रमण के प्रसार को सीमित रखा जा सके।

    मामलों में वृद्धि के बाद प्रभावित क्षेत्रों में विशेष रैपिड रिस्पॉन्स टीमों को तैनात किया गया है। संक्रमित व्यक्तियों के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनके नमूने जांच के लिए लिए जा रहे हैं। कई लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, जबकि शेष नमूनों की जांच जारी है। प्रशासन का कहना है कि संपर्क में आए सभी लोगों पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आइसोलेशन में रखा जाएगा।

    संक्रमण के स्वरूप की जानकारी प्राप्त करने के लिए मरीजों के नमूने जीनोम सीक्वेंसिंग हेतु राष्ट्रीय प्रयोगशाला, पुणे भेजे गए हैं। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य यह पता लगाना है कि संक्रमण किस वेरिएंट से जुड़ा है और उसकी प्रकृति क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीनोम सीक्वेंसिंग के परिणाम आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने अस्पतालों, बस स्टैंडों और भीड़-भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनने की अनिवार्यता लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही बुखार, खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण वाले लोगों की शीघ्र पहचान, आवश्यक होने पर आइसोलेशन, संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की जांच तथा प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान तेज करने को कहा गया है। सरकारी और निजी अस्पतालों को पर्याप्त बेड, आइसोलेशन वार्ड, ऑक्सीजन, दवाओं और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय सतर्क रहें और कोविड से बचाव के सामान्य उपायों का पालन करें। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सावधानी बरती जाए, हाथों की स्वच्छता बनाए रखी जाए और यदि बुखार, खांसी या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सकीय परामर्श लिया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समय पर जांच, निगरानी और एहतियाती उपाय संक्रमण की रोकथाम में सबसे प्रभावी साधन हैं।

  • 13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    13 जुलाई को उत्तर भारत में गर्मी और उमस का डबल अटैक, दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में तेज धूप के आसार, पूर्वी क्षेत्रों में भारी बारिश की चेतावनी

    नई दिल्ली । 13 जुलाई को देश के मौसम में क्षेत्रवार बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने के कारण लोगों को तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं पूर्वी भारत के कुछ राज्यों में मानसून सक्रिय रहने से भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहेगा।

    दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के अधिकांश मैदानी क्षेत्रों में सोमवार को तेज धूप निकलने की संभावना है। हवा की गति कम रहने और वातावरण में नमी अधिक होने से उमस का असर काफी बढ़ सकता है। दोपहर के समय तापमान सामान्य से अधिक महसूस होगा और लोगों को लंबे समय तक खुले में रहने से बचने की सलाह दी गई है। नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे शहरों में भी गर्म और उमस भरा मौसम बने रहने का अनुमान है।

    उत्तर प्रदेश में मौसम दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धूप और उमस का प्रभाव अधिक रहेगा, जबकि पूर्वी जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा होने की संभावना है। लखनऊ और नोएडा में दिनभर गर्मी और उमस बनी रह सकती है, जबकि गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में बारिश से तापमान में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    बिहार में मानसून पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है। राज्य के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। पटना, भागलपुर, पूर्णिया और आसपास के क्षेत्रों में तेज बारिश के साथ जलभराव जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। लोगों को आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलने और मौसम से जुड़ी स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी गई है।

    पश्चिम बंगाल के उप-हिमालयी क्षेत्रों, विशेषकर दार्जिलिंग और सिलीगुड़ी में भारी वर्षा का अनुमान है। वहीं कोलकाता और दक्षिणी जिलों में हल्की बारिश के साथ उमस बनी रह सकती है। लगातार नमी के कारण लोगों को गर्मी का अधिक अहसास होगा, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और जलभराव जैसी स्थितियों पर भी प्रशासन नजर रख सकता है।

    मध्य प्रदेश में मौसम मिला-जुला रहने की संभावना है। भोपाल और इंदौर में दिन के समय उमस अधिक रह सकती है, जबकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी से राहत मिल सकती है। ग्वालियर में तेज धूप और बढ़ते तापमान का असर देखने को मिल सकता है, जबकि जबलपुर के आसपास हल्की वर्षा की संभावना बनी हुई है।

    उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मैदानी इलाकों में भी उमस का असर बना रह सकता है, हालांकि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहेगा। देहरादून और हरिद्वार में हल्की बारिश के बावजूद उमस महसूस हो सकती है, जबकि शिमला, मनाली और मसूरी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंडी हवाओं और हल्के बादलों के कारण मौसम आरामदायक रहने का अनुमान है।

    कुल मिलाकर 13 जुलाई को देश में मौसम का प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग रहेगा। जहां उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ सकता है, वहीं पूर्वी राज्यों में भारी बारिश जनजीवन को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में मौसम के बदलते हालात को देखते हुए लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार आवश्यक सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी।

  • मीरवाइज को दिल्ली बुलाने के फैसले पर कायम रहे उमर अब्दुल्ला, राज्य का दर्जा बहाली की मांग से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

    मीरवाइज को दिल्ली बुलाने के फैसले पर कायम रहे उमर अब्दुल्ला, राज्य का दर्जा बहाली की मांग से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रस्तावित दिल्ली रैली के लिए मीरवाइज उमर फारूक को भेजे गए निमंत्रण का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से विवाद का रूप देकर राज्य का दर्जा बहाल करने की उनकी पार्टी की मांग से लोगों का ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रैली का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है।

    जम्मू में आयोजित ‘दिल्ली चलो’ रैली को संबोधित करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दिल्ली में होने वाले प्रदर्शन के लिए 50 से अधिक लोगों को आमंत्रण भेजा था, लेकिन केवल एक नाम को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतने लोगों को निमंत्रण भेजा गया, तब केवल मीरवाइज उमर फारूक के नाम को ही प्रमुखता से क्यों उठाया गया। उनके अनुसार यह पूरी बहस वास्तविक राजनीतिक मुद्दे से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    मुख्यमंत्री ने भाजपा और मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मंचों पर इस निमंत्रण को इस तरह प्रस्तुत किया गया, मानो पार्टी ने किसी अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने का प्रयास किया हो। उन्होंने कहा कि यह व्याख्या तथ्यों के अनुरूप नहीं है और इससे केवल भ्रम पैदा किया जा रहा है। उनके अनुसार राज्य का दर्जा बहाल करने जैसे महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होने के बजाय राजनीतिक विमर्श को दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ा जा रहा है।

    उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार के उन दावों का भी उल्लेख किया, जिनमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां अब समाप्त हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह दावा सही है, तो फिर उसी आधार पर किसी व्यक्ति को अलगाववादी बताकर विवाद खड़ा करना विरोधाभासी प्रतीत होता है। उनका कहना था कि दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं और इस विषय पर स्पष्टता आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उनकी पार्टी का प्रमुख लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है, ताकि इस मांग को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा सके। उनके अनुसार यह अभियान किसी व्यक्ति विशेष के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक अपेक्षाओं से जुड़ा हुआ है।

    उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। उनके अनुसार जनता इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और राजनीतिक दलों को भी इसी विषय पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक माध्यमों से उठाई जा रही यह मांग आगे भी मजबूती के साथ जारी रहेगी।

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले इस निमंत्रण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर नेशनल कॉन्फ्रेंस इसे राज्य का दर्जा बहाल करने के अभियान का हिस्सा बता रही है, वहीं विपक्षी दल इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श में भी महत्वपूर्ण बना रह सकता है।

  • कर्नाटक का PRC सर्टिफिकेट बना सियासी विवाद का केंद्र, SIR से पहले कांग्रेस सरकार के फैसले पर बीजेपी ने उठाए संवैधानिक सवाल

    कर्नाटक का PRC सर्टिफिकेट बना सियासी विवाद का केंद्र, SIR से पहले कांग्रेस सरकार के फैसले पर बीजेपी ने उठाए संवैधानिक सवाल

    नई दिल्ली । कर्नाटक सरकार द्वारा राज्य के निवासियों को स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने की नई व्यवस्था ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू होने से पहले इस पहल के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस सरकार इसे प्रशासनिक और कल्याणकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का माध्यम बता रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी इसके अधिकार क्षेत्र और संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े कर रही है।

    राज्य सरकार का कहना है कि इस प्रमाणपत्र का उद्देश्य लंबे समय से कर्नाटक में रह रहे पात्र लोगों की पहचान सुनिश्चित करना और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक अवसरों तथा अन्य लाभों तक आसानी से पहुंच उपलब्ध कराना है। सरकार के अनुसार इससे वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान होगी और योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा। इसी उद्देश्य से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

    सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए कई पात्रता मानदंड भी निर्धारित किए हैं। इनमें राज्य में जन्म, लंबे समय से निवास, शिक्षा, पारिवारिक संबंध, संपत्ति और सरकारी दस्तावेजों में दर्ज रिकॉर्ड जैसे आधार शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन मानकों के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा ताकि पात्र व्यक्तियों की पहचान पारदर्शी तरीके से हो सके।

    वहीं बीजेपी ने इस पहल को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि नागरिकता और निवास से जुड़े विषयों पर अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है। उनका तर्क है कि यदि कोई राज्य सरकार ऐसे प्रमाणपत्रों को नागरिकता या विशेष अधिकारों से जोड़ने की कोशिश करती है तो यह संवैधानिक प्रश्न खड़े कर सकता है। विपक्ष का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया से पहले इस तरह की पहल राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित हो सकती है।

    हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र और नागरिकता प्रमाणपत्र दोनों अलग-अलग विषय हैं। भारतीय नागरिकता का निर्धारण केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और यह नागरिकता कानूनों के तहत संचालित होता है। दूसरी ओर, राज्य सरकारें प्रशासनिक जरूरतों और स्थानीय योजनाओं के संचालन के लिए निवास या डोमिसाइल से जुड़े प्रमाणपत्र जारी कर सकती हैं। ऐसे दस्तावेज किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक घोषित नहीं करते, बल्कि केवल उसके राज्य में निवास से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करते हैं।

    कर्नाटक सरकार का दावा है कि पीआरसी का उपयोग केवल राज्य की योजनाओं, शैक्षणिक सुविधाओं, रोजगार अवसरों और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं में किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रमाणपत्र किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। इसके बावजूद राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है और आने वाले दिनों में यह राज्य की राजनीति का महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे विवाद का केंद्र प्रमाणपत्र की प्रकृति से अधिक उसके समय और संभावित प्रभाव को लेकर है। एसआईआर की प्रक्रिया, मतदाता सूची के अद्यतन और राज्य सरकार की नई पहल के बीच संबंधों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं। ऐसे में इस विषय पर कानूनी, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा आगे भी जारी रहने की संभावना है।

  • अलवर पेट्रोल पंप फायरिंग का खुलासा, प्रेम प्रसंग में रची गई थी पूरी साजिश, बाइक चोरी कर हथियार खरीदा और सेल्समैन पर कर दी गोलीबारी

    अलवर पेट्रोल पंप फायरिंग का खुलासा, प्रेम प्रसंग में रची गई थी पूरी साजिश, बाइक चोरी कर हथियार खरीदा और सेल्समैन पर कर दी गोलीबारी


    नई दिल्ली । राजस्थान के अलवर जिले में पेट्रोल पंप पर दिनदहाड़े सेल्समैन को गोली मारने की घटना का पुलिस ने खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह वारदात व्यक्तिगत विवाद और प्रेम प्रसंग से जुड़ी थी। पुलिस के अनुसार आरोपी ने घटना को अंजाम देने से पहले पूरी योजना बनाई, बाइक चोरी की, हथियार का इंतजाम किया और फिर पहचान सुनिश्चित करने के बाद फायरिंग की।

    घटना सदर थाना क्षेत्र के बुर्जा स्थित एक पेट्रोल पंप की है, जहां कार्यरत सेल्समैन पर दिन के समय गोली चलाई गई थी। गोली लगने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद उसे स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया। दिनदहाड़े हुई इस घटना से इलाके में दहशत का माहौल बन गया था और पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी थी।

    जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारियों के आधार पर आरोपी जगत गुर्जर को गिरफ्तार किया। पूछताछ में सामने आया कि घायल सेल्समैन कथित रूप से आरोपी की परिचित महिला को लगातार फोन कर रहा था। महिला ने इसकी जानकारी आरोपी को दी, जिसके बाद उसने गुस्से में आकर पूरी वारदात की योजना बनाई।

    पुलिस के अनुसार आरोपी पहले कठूमर क्षेत्र से एक मोटरसाइकिल चोरी करके अलवर पहुंचा। इसके बाद वह संबंधित पेट्रोल पंप पर गया और वहां मौजूद सेल्समैन की तस्वीर लेकर अपनी परिचित महिला को भेजी। पहचान की पुष्टि होने के बाद उसने सेल्समैन से संपर्क किया और मौके पर ही देसी कट्टे से गोली चला दी। गोली सेल्समैन के कंधे में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि वारदात में इस्तेमाल किया गया हथियार आरोपी ने पहले से जुटाया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त हथियार और आठ कारतूस बरामद किए हैं। इनमें से एक कारतूस फायरिंग में इस्तेमाल हुआ था जबकि शेष कारतूस बरामद कर लिए गए। आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत भी अलग से मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिस मोटरसाइकिल का उपयोग वारदात में किया गया, उसके चोरी होने की पुष्टि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से हुई है। इस संबंध में संबंधित थाने में अलग से मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि आरोपी ने हथियार कहां से प्राप्त किया और इस वारदात में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।

    आरोपी की गिरफ्तारी के दौरान उसने पुलिस टीम का विरोध करने का प्रयास किया और हाथापाई भी की, जिसमें उसे मामूली चोटें आईं। इसके बाद उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया और नियमानुसार गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब उसके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह पहले किसी अन्य आपराधिक मामले में शामिल रहा है या नहीं।

    पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच में मामला व्यक्तिगत विवाद और प्रेम प्रसंग से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, लेकिन पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच अभी जारी है। अधिकारी सभी उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी तथ्यों के आधार पर मामले की प्रत्येक कड़ी की पड़ताल कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद संबंधित धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    भेष बदलकर बस में पहुंचे परिवहन मंत्री, कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने पर उतारने को कहा, औचक निरीक्षण में सामने आई बड़ी लापरवाही

    नई दिल्ली । कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायराथी सुरेश ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने आम यात्री का भेष धारण कर बेंगलुरु महानगर परिवहन निगम (बीएमटीसी) की बसों में सफर किया और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं तथा कर्मचारियों के व्यवहार का प्रत्यक्ष रूप से निरीक्षण किया। करीब दो घंटे तक चले इस औचक निरीक्षण के दौरान उन्होंने दस से अधिक बसों में यात्रा की और कई महत्वपूर्ण खामियां सामने आने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान मंत्री ने देखा कि एक यात्री द्वारा निर्धारित बस स्टॉप पर उतरने का स्पष्ट संकेत देने के बावजूद संबंधित बस के चालक और परिचालक ने वाहन नहीं रोका। इस लापरवाही के कारण यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ा। मंत्री ने इसे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित ड्राइवर और कंडक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। उनका कहना था कि सार्वजनिक परिवहन में ऐसी अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।

    इस निरीक्षण के दौरान स्वयं मंत्री को भी यात्रियों जैसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा। यात्रा के दौरान उन्होंने किराया देने के लिए 100 रुपये का नोट दिया, लेकिन कंडक्टर ने छुट्टे पैसे न होने की बात कहते हुए उन्हें बस से उतर जाने के लिए कहा। मंत्री ने इस घटना को यात्रियों के साथ होने वाले व्यवहार का वास्तविक उदाहरण बताते हुए कहा कि ऐसी समस्याएं रोजाना सफर करने वाले लोगों के लिए गंभीर असुविधा का कारण बनती हैं और इनका समाधान किया जाना आवश्यक है।

    बसों के निरीक्षण के अलावा मंत्री ने शहर में ऑटो-रिक्शा सेवाओं का भी जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने एक ऐसे मामले में हस्तक्षेप किया, जहां मीटर पर निर्धारित किराए से अधिक राशि यात्रियों से वसूली जा रही थी। उन्होंने मौके पर ही संबंधित चालक को नियमों का पालन करने और निर्धारित किराए से अधिक वसूली नहीं करने की हिदायत दी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परिवहन से जुड़े सभी साधनों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

    बायराथी सुरेश ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक यात्रा उपलब्ध कराना है। यदि चालक, परिचालक या अन्य कर्मचारी अपने दायित्वों का सही ढंग से पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि यात्रियों की शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए और सेवा की गुणवत्ता में लगातार सुधार लाया जाए।

    मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इस तरह के औचक निरीक्षण नियमित रूप से जारी रहेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को समय-समय पर आम नागरिक की तरह सेवाओं का अनुभव करना चाहिए, ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद कमियों की सही जानकारी मिल सके। उन्होंने कहा कि यात्रियों के हितों की रक्षा, कर्मचारियों में अनुशासन और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने के लिए सरकार लगातार निगरानी रखेगी और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाती रहेगी।