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  • झांसी की आबादी 125 साल में छह गुना बढ़ी, बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ा दबाव, तैयार हो रहा नया मास्टर प्लान

    झांसी की आबादी 125 साल में छह गुना बढ़ी, बुनियादी सुविधाओं पर बढ़ा दबाव, तैयार हो रहा नया मास्टर प्लान

    झांसी। विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई) के अवसर पर सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 125 वर्षों में झांसी जिले की आबादी लगभग छह गुना बढ़ चुकी है। हालांकि जनसंख्या के अनुपात में शहर का बुनियादी ढांचा विकसित नहीं हो सका, जिससे पेयजल, सीवर, सड़क, बिजली, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है, जिसके तहत करीब 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास किया जाएगा।

    अर्थ एवं संख्यायिकी विभाग के अनुसार वर्ष 1901 में झांसी जिले की आबादी 4.27 लाख थी, जबकि वर्ष 2026 तक इसके लगभग 25 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। यानी 125 वर्षों में जिले की आबादी में 20.73 लाख लोगों की बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि में जनसंख्या 485.65 प्रतिशत यानी करीब 5.86 गुना बढ़ी। औसतन हर वर्ष लगभग 16,585 लोग जिले की आबादी में जुड़े हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या वृद्धि का कारण केवल प्राकृतिक वृद्धि नहीं है, बल्कि बेहतर शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं की तलाश में ग्रामीण क्षेत्रों से शहर की ओर लगातार बढ़ते पलायन ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है।

    वर्तमान अनुमान के मुताबिक जिले की 58.3 प्रतिशत आबादी, यानी करीब 14.58 लाख लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 41.7 प्रतिशत आबादी, यानी लगभग 10.42 लाख लोग शहरी क्षेत्रों में निवास कर रहे हैं। शहरी आबादी तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में सड़क, सीवर, पेयजल, सार्वजनिक परिवहन और आवास जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है।

    सीवर नेटवर्क सबसे बड़ी चुनौती
    बढ़ती आबादी के बीच झांसी की सबसे बड़ी समस्या सीवर व्यवस्था को माना जा रहा है। शहर का बड़ा हिस्सा आज भी सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य की जरूरतों को देखते हुए समय पर निवेश नहीं किया गया, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

    जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी (डीएसटीओ) अर्चना सिंह के अनुसार, वर्ष 1901 की तुलना में जिले की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि वर्ष 2001 से 2011 के बीच जनसंख्या वृद्धि दर में कमी दर्ज की गई, जिसका प्रमुख कारण परिवार नियोजन के प्रति बढ़ती जागरूकता है।

    500 वर्ग किलोमीटर में होगा नियोजित विस्तार
    तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए झांसी विकास प्राधिकरण ने मास्टर प्लान-2031 तैयार किया है। जेडीए के टाउन प्लानर विजय कुमार सिंह के अनुसार यह योजना लगभग 13 लाख की प्रस्तावित शहरी आबादी को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इसके तहत शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर करीब 500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का नियोजित विकास किया जाएगा। इनमें लगभग 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को शहरीकरण के लिए चिह्नित किया गया है।

    योजना के तहत निजी क्षेत्र में 250-250 एकड़ की दो टाउनशिप विकसित की जाएंगी, जबकि जेडीए स्वयं 1000 एकड़ में एक एकीकृत टाउनशिप विकसित करेगा। यह परियोजना ग्वालियर-कानपुर हाईवे और ग्वालियर रोड स्थित अंबावाय क्षेत्र में प्रस्तावित है।

    मास्टर प्लान के साथ जोनल प्लान भी तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से नई कॉलोनियों और विकसित होने वाले क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, सीवर, बिजली, अस्पताल, स्कूल, पार्क तथा अन्य नागरिक सुविधाओं का योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

  • हैदराबाद से स्विट्जरलैंड तक बढ़ी गुमशुदगी की गुत्थी, कारोबारी दंपती की तलाश के बीच करोड़ों रुपये के निवेश लेनदेन की भी जांच शुरू

    हैदराबाद से स्विट्जरलैंड तक बढ़ी गुमशुदगी की गुत्थी, कारोबारी दंपती की तलाश के बीच करोड़ों रुपये के निवेश लेनदेन की भी जांच शुरू

     हैदराबाद के एक कारोबारी दंपती के स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब जांच के दौरान दंपती पर कई लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने के आरोप भी सामने आए। फिलहाल पुलिस गुमशुदगी और वित्तीय लेनदेन, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

    पुलिस के अनुसार लापता दंपती की पहचान 51 वर्षीय पब्बा चंद्रशेखर और उनकी 42 वर्षीय पत्नी स्वप्ना के रूप में हुई है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों 22 जून को स्विट्जरलैंड की यात्रा पर गए थे। यात्रा के शुरुआती दिनों में उनका परिजनों से नियमित संपर्क बना रहा, लेकिन 8 जुलाई के बाद अचानक दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। इसके बाद परिवार को उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका, जिससे चिंता बढ़ गई।

    लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर दंपती की 23 वर्षीय बेटी श्रेया ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दंपती ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्विट्जरलैंड में प्रवेश किया था या नहीं। इसके लिए यात्रा से जुड़े दस्तावेज, इमिग्रेशन रिकॉर्ड, एयरलाइन विवरण और अन्य आधिकारिक सूचनाओं की जांच की जा रही है। साथ ही उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों और हाल के वित्तीय लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे लोगों की शिकायतें भी मिली हैं, जिन्होंने दावा किया है कि चंद्रशेखर और स्वप्ना ने पिछले कुछ वर्षों में 60 से अधिक लोगों से करीब 50 करोड़ रुपये जुटाए थे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुछ लोगों को अधिक लाभ का भरोसा देकर निवेश कराया गया, जबकि कुछ से व्यक्तिगत जरूरतों और व्यावसायिक निवेश के नाम पर धन लिया गया। इन आरोपों के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

    हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस समय दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों की सत्यता की जांच की जा रही है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी कहा है कि प्राथमिकता फिलहाल दंपती का पता लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है तथा आवश्यक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का भी पालन किया जा रहा है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास दंपती की यात्रा, वर्तमान ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई भी विश्वसनीय जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस को उपलब्ध कराए। जांच एजेंसियों का कहना है कि गुमशुदगी और वित्तीय शिकायतों से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

    संक्षिप्त सार:
    हैदराबाद का एक कारोबारी दंपती स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान लापता हो गया है। पुलिस गुमशुदगी के साथ-साथ उन आरोपों की भी जांच कर रही है, जिनमें दंपती पर निवेशकों से करीब 50 करोड़ रुपये जुटाने का दावा किया गया है।

    English Keywords:
    Chandrasekhar, Switzerland, HyderabadPolice, InvestmentFraud, Investigation

    नई दिल्ली । हैदराबाद के एक कारोबारी दंपती के स्विट्जरलैंड यात्रा के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। इस घटना ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया, जब जांच के दौरान दंपती पर कई लोगों से करोड़ों रुपये जुटाने के आरोप भी सामने आए। फिलहाल पुलिस गुमशुदगी और वित्तीय लेनदेन, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की विस्तृत जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

    पुलिस के अनुसार लापता दंपती की पहचान 51 वर्षीय पब्बा चंद्रशेखर और उनकी 42 वर्षीय पत्नी स्वप्ना के रूप में हुई है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि दोनों 22 जून को स्विट्जरलैंड की यात्रा पर गए थे। यात्रा के शुरुआती दिनों में उनका परिजनों से नियमित संपर्क बना रहा, लेकिन 8 जुलाई के बाद अचानक दोनों के मोबाइल फोन बंद हो गए। इसके बाद परिवार को उनसे किसी प्रकार का संपर्क नहीं हो सका, जिससे चिंता बढ़ गई।

    लंबे समय तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर दंपती की 23 वर्षीय बेटी श्रेया ने स्थानीय पुलिस से संपर्क कर गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दंपती ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार स्विट्जरलैंड में प्रवेश किया था या नहीं। इसके लिए यात्रा से जुड़े दस्तावेज, इमिग्रेशन रिकॉर्ड, एयरलाइन विवरण और अन्य आधिकारिक सूचनाओं की जांच की जा रही है। साथ ही उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों और हाल के वित्तीय लेनदेन का भी विश्लेषण किया जा रहा है।

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को कई ऐसे लोगों की शिकायतें भी मिली हैं, जिन्होंने दावा किया है कि चंद्रशेखर और स्वप्ना ने पिछले कुछ वर्षों में 60 से अधिक लोगों से करीब 50 करोड़ रुपये जुटाए थे। शिकायतकर्ताओं के अनुसार कुछ लोगों को अधिक लाभ का भरोसा देकर निवेश कराया गया, जबकि कुछ से व्यक्तिगत जरूरतों और व्यावसायिक निवेश के नाम पर धन लिया गया। इन आरोपों के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

    हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस समय दंपती के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों की सत्यता की जांच की जा रही है और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक गतिविधि के प्रमाण मिलते हैं, तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    पुलिस ने यह भी कहा है कि प्राथमिकता फिलहाल दंपती का पता लगाना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है तथा आवश्यक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं का भी पालन किया जा रहा है। अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के पास दंपती की यात्रा, वर्तमान ठिकाने या गतिविधियों से जुड़ी कोई भी विश्वसनीय जानकारी हो तो वह तुरंत पुलिस को उपलब्ध कराए। जांच एजेंसियों का कहना है कि गुमशुदगी और वित्तीय शिकायतों से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच की जाएगी, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके और आवश्यकता पड़ने पर उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

  • उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    उपभोक्ता शिकायतों पर एफएसएसएआई की बड़ी कार्रवाई, स्विगी इंस्टामार्ट को 9 नोटिस जारी, एक्सपायर्ड और असुरक्षित खाद्य उत्पादों की सप्लाई पर मांगा जवाब

    नई दिल्ली । उपभोक्ताओं से प्राप्त शिकायतों के आधार पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्विगी इंस्टामार्ट के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए नौ अलग-अलग नोटिस जारी किए हैं। इन शिकायतों में ग्राहकों को एक्सपायर्ड, खराब, दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्य उत्पादों की आपूर्ति किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। नियामक ने इन मामलों को गंभीर मानते हुए कंपनी से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

    जांच के दौरान खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कई कथित अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है। इनमें एक प्रमुख मामला ऐसे अंडों की बिक्री का बताया गया है, जिन्हें उस ब्रांड नाम के तहत बेचा जा रहा था जो कंपनी के मौजूदा खाद्य लाइसेंस में स्वीकृत उत्पाद श्रेणी के अंतर्गत शामिल नहीं था। नियामक ने निर्देश दिया है कि वैध अनुमति प्राप्त होने तक ऐसे उत्पादों की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर लाइसेंस में संशोधन के लिए आवेदन किया जाए।

    शिकायतों में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ पैक्ड खाद्य उत्पाद एक्सपायरी तिथि समाप्त होने के बाद भी ग्राहकों तक पहुंचाए गए। इनमें प्रोटीन सप्लीमेंट और नमकीन जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार एक्सपायर्ड उत्पादों की बिक्री या आपूर्ति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है। इसी कारण नियामक ने इस मामले को विशेष रूप से गंभीरता से लिया है।

    एक अन्य शिकायत में ऑर्गेनिक अंडों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि ग्राहकों को ऐसे अंडे उपलब्ध कराए गए जिनमें सड़न, दुर्गंध और संक्रमण जैसे संकेत मौजूद थे, जिससे वे मानव उपभोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हो गए थे। इसी प्रकार एक तैयार खाद्य उत्पाद के खराब और बदबूदार होने की भी शिकायत दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी गुणवत्ता और भंडारण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे हैं।

    जांच के दौरान यह आरोप भी सामने आया कि शिकायत दर्ज होने और संबंधित मामले की जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी सुधारात्मक कदम समय पर नहीं उठाए गए। इसके अतिरिक्त शिशुओं के लिए तैयार एक खाद्य उत्पाद के खराब और असुरक्षित स्थिति में मिलने की शिकायत भी दर्ज हुई। इतना ही नहीं, एक मामले में ग्राहक द्वारा दोषपूर्ण उत्पाद लौटाने के बाद वही उत्पाद दोबारा आपूर्ति किए जाने का भी आरोप लगाया गया है, जिसे नियामक ने गंभीर लापरवाही की श्रेणी में माना है।

    एफएसएसएआई ने कंपनी से उसके खाद्य सुरक्षा प्रबंधन तंत्र, गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया, शिकायत निवारण व्यवस्था और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों की विस्तृत जानकारी मांगी है। साथ ही प्रत्येक शिकायत पर की गई कार्रवाई और सुधारात्मक कदमों का पूरा विवरण भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    नियामक ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब और अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाती है तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। यह कार्रवाई उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

  • यूपी में जल्द लागू होगी नई एग्रीगेटर पॉलिसी, ड्राइवर ने राइड कैंसिल की तो देना होगा किराया

    यूपी में जल्द लागू होगी नई एग्रीगेटर पॉलिसी, ड्राइवर ने राइड कैंसिल की तो देना होगा किराया

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कैब सेवाओं को लेकर नई एग्रीगेटर पॉलिसी तैयार हो गई है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कैब कंपनियां यात्रियों से मनमाने तरीके से किराया नहीं वसूल सकेंगी। परिवहन विभाग ने किराया तय कर दिया है और पीक आवर के दौरान भी कंपनियां निर्धारित किराए से अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही बढ़ोतरी कर सकेंगी।

    नई पॉलिसी के तहत यदि ड्राइवर बुकिंग रद्द करता है तो उसे संबंधित ट्रिप का किराया स्वयं वहन करना होगा। वहीं, यदि यात्री अपनी ओर से राइड कैंसिल करता है तो उस पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। परिवहन विभाग का कहना है कि अब तक एग्रीगेटर पॉलिसी नहीं होने के कारण कैब कंपनियां मनमाने तरीके से किराया वसूल रही थीं, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    परिवहन विभाग ने पॉलिसी का प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसके लागू होने के बाद राज्य में एग्रीगेटर के रूप में वाहन संचालन के लिए परिवहन विभाग से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, बुकिंग स्वीकार करने के बाद ड्राइवर को निर्धारित समय पर पहुंचना होगा। तय समय का पालन नहीं करने पर कम से कम 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।

    डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (एसटीए) सगीर अहमद अंसारी के अनुसार, नई पॉलिसी में यात्रियों की सुविधाओं और शिकायतों का विशेष ध्यान रखा गया है। तय सीमा से अधिक वाहन संचालित करने पर जुर्माना लगाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर लाइसेंस भी रद्द किया जा सकेगा।

    नई व्यवस्था के तहत सभी एग्रीगेटर कंपनियों को राज्य सरकार से लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पांच लाख रुपये का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए 25 हजार रुपये शुल्क और 50 लाख रुपये तक की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करनी होगी।

    पॉलिसी में ड्राइवरों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। प्रत्येक ड्राइवर को कम से कम पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, ड्यूटी के दौरान नशे की हालत में पाए जाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • UP: रामपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, उत्तराखंड जा रहे आईटी कंपनी मालिक समेत 4 दोस्तों की मौत, 3 गंभीर

    UP: रामपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, उत्तराखंड जा रहे आईटी कंपनी मालिक समेत 4 दोस्तों की मौत, 3 गंभीर


    रामपुर।
    उत्तर प्रदेश के रामपुर में शनिवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे में नोएडा की एक आईटी कंपनी के मालिक सहित चार युवकों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी दोस्त और कर्मचारी उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क घूमने जा रहे थे। सुबह करीब 5 बजे उनकी तेज रफ्तार ईको कार सड़क किनारे खड़ी डीसीएम में पीछे से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए।

    हादसे का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कार में फंसा एक घायल युवक खून से लथपथ हालत में लोगों से मदद की गुहार लगाता दिखाई दे रहा है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गैस कटर की मदद से कार को काटकर शवों व घायलों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को अस्पताल पहुंचाया गया।

    पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि चालक को झपकी आने के कारण यह हादसा हुआ। मृतकों की पहचान दिल्ली निवासी अभिषेक अग्निहोत्री (30), नीरज (24), गुलबुद्दीन उर्फ सोनू (35) और बागपत निवासी कार्तिक (24) के रूप में हुई है। अभिषेक अग्निहोत्री नोएडा में ‘इंडियन शॉप’ नाम से आईटी कंपनी संचालित करते थे और अपने कर्मचारियों व दोस्तों के साथ वीकेंड ट्रिप पर निकले थे।

    अभिषेक के मित्र पदम धीमान ने बताया कि शुक्रवार रात करीब 9 बजे दो कारों से सभी लोग जिम कॉर्बेट के लिए रवाना हुए थे। अभिषेक अपनी ईको कार में पांच कर्मचारियों और छोटे भाई विशाल के साथ थे, जबकि पदम अपने चार दोस्तों के साथ दूसरी कार में सफर कर रहे थे। रास्ते में ईको कार का टायर पंचर हो गया, जिसे ठीक कराने में समय लगने के कारण दोनों गाड़ियां अलग हो गईं। काफी देर तक संपर्क नहीं होने पर अभिषेक के मोबाइल पर कॉल किया गया, लेकिन बाद में किसी अन्य व्यक्ति ने फोन उठाकर हादसे की सूचना दी।

    पदम ने बताया कि मौके पर पहुंचने पर अभिषेक समेत चार लोगों की मौत हो चुकी थी। हादसे में जतिन, कमल और अभिषेक के भाई विशाल गंभीर रूप से घायल हुए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें मेरठ रेफर किया गया, लेकिन परिजन बाद में उन्हें इलाज के लिए दिल्ली ले गए।

    हादसे में जान गंवाने वाले कार्तिक राजपूत बागपत के निवासी थे। उन्होंने बीसीए की पढ़ाई करने के बाद नोएडा के सेक्टर-2 स्थित एक कंपनी में नौकरी शुरू की थी। उनके परिवार में पत्नी भारती और एक वर्ष की बेटी काशवी है। दो वर्ष पहले ही उनकी शादी हुई थी। हादसे के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    वहीं, दिल्ली निवासी गुलबुद्दीन उर्फ सोनू अविवाहित थे और अभिषेक की कंपनी में कार्यरत थे। उनके बड़े भाई सद्दाम हुसैन के अनुसार, गुलबुद्दीन ने इंटरमीडिएट तक पढ़ाई की थी और परिवार में माता-पिता के साथ रहते थे।

    थाना प्रभारी संदीप मिश्रा ने बताया कि सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। परिजन मौके पर पहुंच चुके हैं। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और चालक को आई झपकी को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

  • नोएडा में खुले नाले ने ली युवा इंजीनियर की जान, आर्यन की मौत के बाद फिर कठघरे में प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही

    नोएडा में खुले नाले ने ली युवा इंजीनियर की जान, आर्यन की मौत के बाद फिर कठघरे में प्राधिकरण की सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही


    नई दिल्ली ।
    नोएडा में एक बार फिर बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं में कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। सेक्टर-58 में जलभराव के बीच खुले नाले में गिरने से 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की मौत ने शहर में सार्वजनिक सुरक्षा, जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह के कई हादसे हो चुके हैं और प्रत्येक घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दावे किए गए थे।

    मूल रूप से फर्रुखाबाद निवासी आर्यन रोज की तरह अपने कार्यालय जा रहे थे। रातभर हुई बारिश के कारण सड़क पर काफी जलभराव था, जिससे नाले के ऊपर बने स्लैब पूरी तरह पानी में छिप गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक स्थान पर स्लैब पहले से टूटा हुआ था, लेकिन पानी भरे होने के कारण वह दिखाई नहीं दे रहा था। जैसे ही आर्यन वहां से गुजरे, उनका संतुलन बिगड़ा और वे सीधे गहरे नाले में गिर गए। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें सुरक्षित नहीं निकाला जा सका और बाद में उनका शव बरामद हुआ।

    घटना के बाद परिजनों ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते टूटे स्लैब बदले गए होते, खुले नालों को सुरक्षित किया गया होता और जलभराव की समस्या का प्रभावी समाधान किया गया होता, तो इस दुर्घटना से बचा जा सकता था। परिजनों ने मामले में उचित कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी की है।

    यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। इसी वर्ष सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन परियोजना के पास बारिश के पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से युवा इंजीनियर युवराज की मौत हुई थी। उस समय भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवाल उठे थे। घटना के बाद जांच समिति गठित करने, खुले गड्ढों की बैरिकेडिंग करने और नियमित निरीक्षण कराने जैसे निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर लगातार सवाल बने रहे।

    इसके कुछ समय बाद एक अन्य हादसे में एमिटी विश्वविद्यालय के एक छात्र की भी निर्माणाधीन स्थल पर पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबने से जान चली गई थी। उस घटना के बाद भी निर्माण स्थलों पर चेतावनी बोर्ड लगाने, सुरक्षा घेराबंदी सुनिश्चित करने और जलभराव वाले गड्ढों को तत्काल भरने की बात कही गई थी। इसके बावजूद ताजा घटना यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार अभी भी दिखाई नहीं दे रहा है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में खुले नाले, क्षतिग्रस्त स्लैब, निर्माणाधीन स्थलों पर असुरक्षित गड्ढे और बारिश के दौरान गंभीर जलभराव आज भी आम समस्या बने हुए हैं। उनका आरोप है कि शिकायतें दर्ज होने के बावजूद कई स्थानों पर समय पर मरम्मत और रखरखाव नहीं किया जाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। उनका मानना है कि केवल हादसों के बाद निर्देश जारी करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित निगरानी और प्रभावी अमल भी उतना ही आवश्यक है।

    आर्यन की मौत ने एक बार फिर यह प्रश्न सामने ला दिया है कि बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं के बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा के मौसम में संवेदनशील स्थानों की पहचान, नियमित निरीक्षण, क्षतिग्रस्त संरचनाओं की तत्काल मरम्मत और प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं मजबूत किए बिना ऐसे हादसों को रोकना कठिन होगा। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन से ठोस कदम उठाए जाते हैं।

  • यूपीएससी ने निकाली 48 पदों पर भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर लीगल और साइंटिफिक पदों तक आवेदन शुरू

    यूपीएससी ने निकाली 48 पदों पर भर्ती, असिस्टेंट प्रोफेसर से लेकर लीगल और साइंटिफिक पदों तक आवेदन शुरू

    नई दिल्ली । संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने वर्ष 2026 की चयन आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में कुल 48 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। भर्ती प्रक्रिया 11 जुलाई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक एवं पात्र उम्मीदवार 31 जुलाई की शाम 6 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती स्वास्थ्य, कृषि, कॉर्पोरेट मामलों, गृह तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में की जाएगी।

    जारी अधिसूचना के अनुसार सबसे अधिक रिक्तियां स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत स्पेशलिस्ट ग्रेड-III असिस्टेंट प्रोफेसर के विभिन्न विषयों में निकाली गई हैं। इनमें एंडोक्रिनोलॉजी, नियोनेटोलॉजी, क्लिनिकल हेमेटोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, पल्मोनरी मेडिसिन, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी जैसे विशेषज्ञ चिकित्सा विषय शामिल हैं। इसके अलावा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में असिस्टेंट सॉइल केमिस्ट, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस में प्रॉसिक्यूटर तथा अन्य तकनीकी और प्रशासनिक पदों पर भी भर्ती की जाएगी।

    भर्ती में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र के अंतर्गत डिप्टी असिस्टेंट डायरेक्टर (कीट विज्ञान) और एंटोमोलॉजिस्ट के पद भी शामिल हैं। वहीं गृह मंत्रालय के अधीन केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर (टॉक्सिकोलॉजी) तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय में अधीक्षक (कानूनी) के पदों पर भी योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा।

    आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित पद के अनुसार मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से स्नातक, स्नातकोत्तर अथवा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता होना आवश्यक है। अधिकांश पदों के लिए संबंधित क्षेत्र में एक से तीन वर्ष का कार्यानुभव भी अनिवार्य रखा गया है। अभ्यर्थियों को आवेदन से पहले प्रत्येक पद की योग्यता और अनुभव संबंधी शर्तों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करने की सलाह दी गई है।

    आयु सीमा पद के अनुसार अलग-अलग निर्धारित की गई है। अधिकतम आयु 30 वर्ष से 43 वर्ष के बीच रखी गई है, जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमानुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा। हालांकि किसी भी श्रेणी के उम्मीदवार के लिए अधिकतम आयु 56 वर्ष से अधिक नहीं हो सकती।

    चयन प्रक्रिया में भर्ती परीक्षा अथवा संयुक्त भर्ती परीक्षा, व्यक्तिगत साक्षात्कार और दस्तावेज सत्यापन शामिल होंगे। अंतिम चयन सभी चरणों में उम्मीदवारों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-7 से लेवल-11 के तहत वेतन दिया जाएगा। इसके साथ केंद्र सरकार के नियमानुसार विभिन्न भत्तों और अन्य सेवा लाभों का भी प्रावधान रहेगा।

    आवेदन शुल्क सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों के लिए 25 रुपये निर्धारित किया गया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और सभी वर्गों की महिला उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क से छूट प्रदान की गई है। इच्छुक अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने और संबंधित पदों की विस्तृत पात्रता, अनुभव तथा अन्य शर्तों की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना में सावधानीपूर्वक जांचने की सलाह दी गई है।

  • CM योगी गोरखपुर से शुरू कल करेंगे 35 करोड़ पौधे लगाने के अभियान का शुभारंभ

    CM योगी गोरखपुर से शुरू कल करेंगे 35 करोड़ पौधे लगाने के अभियान का शुभारंभ


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे ‘पौधरोपण महायज्ञ-2026’ का शुभारंभ 12 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से करेंगे। प्रदेशव्यापी अभियान के तहत मुख्यमंत्री भगवानपुर टोल प्लाजा लिंक एक्सप्रेसवे के समीप और आरकेबीके के पास ताल रिंग रोड किनारे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत पौधरोपण करेंगे।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के इस महाअभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील करेंगे। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना भी उपस्थित रहेंगे।

    त्रिवेणी और मौलश्री के पौधों से होगी शुरुआत
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के पास त्रिवेणी—नीम, पीपल और बरगद—का पौधा रोपकर अभियान का शुभारंभ करेंगे। इसके बाद वह ताल रिंग रोड के किनारे मौलश्री का पौधा लगाएंगे। राज्य सरकार ने इस वर्ष पूरे उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    गोरखपुर को मिला 55.28 लाख पौधरोपण का लक्ष्य
    राज्य सरकार के इस अभियान को सफल बनाने के लिए वन विभाग के समन्वय में कुल 27 विभाग मिलकर कार्य कर रहे हैं। प्रदेश के कुल लक्ष्य में गोरखपुर जिले को 55 लाख 28 हजार 600 पौधे लगाने की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें सबसे अधिक योगदान वन विभाग का रहेगा।

    पौधों की सुरक्षा और संरक्षण के पूरे इंतजाम
    प्रभागीय वनाधिकारी शुभम सिंह के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए सभी सरकारी पौधशालाओं में उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। साथ ही पौधों की बेहतर वृद्धि और उनकी उत्तरजीविता (सर्वाइवल) दर बढ़ाने के लिए चयनित स्थलों पर गड्ढों की खुदाई, ऊपरी मिट्टी (टॉप सॉयल) की उपलब्धता और पौधों के संरक्षण से जुड़े सभी आवश्यक इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए गए हैं।

  • कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा

    कुशीनगर में CM योगी ने विपक्ष पर बोला जमकर हमला, कहा- अब नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा


    कुशीनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुशीनगर, रामकोला हाटा विधानसभा क्षेत्र की 525 करोड़ की 464 परियोजनाओं का शनिवार को लोकार्पण व शिलान्यास करते हुए विपक्ष को विकास और कानून व्यवस्था पर घेरते हुए सीधा हमला बोला। कहा कि, पहले की सरकार के पास नीयत थी न नीति थी। सोच ही लकवाग्रस्त थी, ऐसे में विकास की बात ही बेमानी थी।

    इस दौरान टेकुआटार में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने सपा पर हमला बोला और कहा कि, पहले उत्तर प्रदेश में त्योहारों पर दंगे होते थे, अब नो कर्फ्यू , नो दंगा, यूपी में सब चंगा। बिना राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि मंदिरों पर कब्जा करने वाले अयोध्या, काशी और मथुरा के बारे में कैसे सोच सकते हैं। धर्म आस्था पर आज हमें आइना दिखाने वाले अपना चेहरा देखें।

    मुख्यमंत्री योगी ने कुशीनगर की इंसेफेलाइटिस से मासूमो के बचपन छिनने व मुसहरों की मौत का उदाहरण देते पूर्व की सरकारों को कठघरे में खड़ा किया तो कहा कि, अब इंसेफेलाइटिस से बचपन छिनता है और न कोई प्रदेश में भूख से मरता है। अब आवास, बिजली, गैस कनेक्शन, उपचार व रोजगार संग विकास की बात होती है।

    कुशीनगर से शीघ्र शुरू होगी उड़ान, गया और जेवर से जुड़ेगा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि, पश्चिम एशिया संकट से दुनिया में मची उथल-पुथल के चलते नए नए एयरक्राफ्ट नहीं आ सके, जिससे कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान शुरू नहीं हो सकी। शीघ्र ही यहां से उड़ान शुरू होगी और गया और जेवर को जोड़ जाएगा। सरकार पूरी तरह संजीदा है।

    दियारा को मिलेगा 800 करोड़ का पुल
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नारायणी उस पार दियारा के गांवों की दुर्दशा के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि डीपीआर बन रहा है। शीघ्र ही नारायणी पर 800 करोड़ का पुल बनेगा। दियारा के सभी गांव विकास की मुख्य धारा से जुड़ेगें। अंतिम व्यक्ति का विकास ही हमारी सरकार की सोच है। इस पर हम इमानदारी से कार्य भी कर रहे हैं।

  • 32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

    32 हजार किताबें, 5 लाख से अधिक ई-बुक्स और आधुनिक सुविधाएं, राजधानी में खुली जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी, पढ़ने की संस्कृति पर अमित शाह का बड़ा संदेश

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली को आधुनिक शिक्षा और ज्ञान संसाधनों के क्षेत्र में एक नई सौगात मिली है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को नई दिल्ली नगरपालिका परिषद द्वारा विकसित अत्याधुनिक जयप्रकाश नारायण लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। आधुनिक तकनीक और डिजिटल सुविधाओं से सुसज्जित यह बहुमंजिला पुस्तकालय पारंपरिक पुस्तकों और डिजिटल ज्ञान संसाधनों का समन्वित केंद्र होगा। इसका उद्देश्य छात्रों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और आम पाठकों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है, जहां वे आधुनिक सुविधाओं के साथ अध्ययन और शोध कर सकें।

    उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के बौद्धिक विकास से मापी जाती है। उन्होंने कहा कि जिस समाज में पुस्तकालयों में अधिक संख्या में लोग अध्ययन करने आते हैं, वह समाज ज्ञान, नवाचार और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ता है। उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम पर इस पुस्तकालय को समर्पित किए जाने को गौरव का विषय बताते हुए कहा कि यह संस्थान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

    नई लाइब्रेरी में 32 हजार से अधिक भौतिक पुस्तकों का समृद्ध संग्रह उपलब्ध कराया गया है। इसके साथ ही पाठकों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से 5 लाख से अधिक ई-बुक्स तक पहुंच की सुविधा भी दी गई है। आधुनिक डिजिटल कैटलॉग, अध्ययन कक्ष, शोध सुविधाएं और तकनीक आधारित सेवाएं इसे राजधानी के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में शामिल करती हैं। इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक ही स्थान पर विविध विषयों की अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो सकेगी।

    अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने पुस्तकालयों की सामाजिक भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय केवल किताबों का संग्रह नहीं होते, बल्कि वे विचारों, ज्ञान और रचनात्मकता के विकास के महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। पढ़ने की संस्कृति मजबूत होने से समाज में जागरूकता, वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना विकसित होती है, जो किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान होती है।

    अमित शाह ने अपने संसदीय क्षेत्र गांधीनगर में लागू किए गए पुस्तकालय मॉडल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि गांवों में छोटी-छोटी लाइब्रेरियों को एक केंद्रीय पुस्तकालय से जोड़ने की व्यवस्था की गई, जिससे जरूरत के अनुसार किताबें नियमित रूप से गांवों तक पहुंचाई जाती हैं। इस मॉडल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल से शिक्षा के अवसरों का विस्तार होता है और ज्ञान संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सकती है।

    उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डिजिटल माध्यमों के साथ-साथ पुस्तकों के अध्ययन की परंपरा को भी बनाए रखें। उनका कहना था कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, तार्किक सोच और जीवन मूल्यों को भी मजबूत करती हैं। नई दिल्ली के मध्य स्थित यह पुस्तकालय आने वाले समय में शिक्षा, शोध और बौद्धिक विमर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की क्षमता रखता है। आधुनिक सुविधाओं और व्यापक डिजिटल संसाधनों के साथ यह पहल राजधानी में ज्ञान आधारित समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।