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  • चार घंटे चली मोदी सरकार की बड़ी बैठक: विकसित भारत 2047, रिफॉर्म्स और वैश्विक संकट पर गहन मंथन

    चार घंटे चली मोदी सरकार की बड़ी बैठक: विकसित भारत 2047, रिफॉर्म्स और वैश्विक संकट पर गहन मंथन

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की एक महत्वपूर्ण और विस्तृत बैठक में देश के भविष्य की दिशा को लेकर गहन विचार-विमर्श किया गया। करीब चार से साढ़े चार घंटे तक चली इस बैठक में ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य, प्रशासनिक सुधारों, आम नागरिकों के जीवन को सरल बनाने तथा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों से निपटने की रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में प्रधानमंत्री के साथ सभी केंद्रीय मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री भी उपस्थित रहे, जिससे यह बैठक नीति निर्माण और समीक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम मानी जा रही है।

    बैठक में 9 प्रमुख मंत्रालयों ने अपने-अपने कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया, जिसमें उनके कामकाज का रिपोर्ट कार्ड भी शामिल था। सबसे पहले वाणिज्य मंत्रालय ने अपनी प्रस्तुति दी, जिसके बाद पेट्रोलियम, गृह, वित्त और विदेश मंत्रालय सहित अन्य महत्वपूर्ण विभागों ने अपने-अपने क्षेत्र में किए गए सुधारों और उपलब्धियों को सामने रखा। सभी मंत्रालयों को पहले से निर्देश दिया गया था कि वे अपने कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों में विभाजित कर प्रस्तुत करें—कानूनी सुधार, नियामक बदलाव, नीतिगत परिवर्तन और कार्य प्रणाली में सुधार। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इन सुधारों का सीधा असर आम जनता के जीवन पर किस प्रकार पड़ा है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का मुख्य लक्ष्य 2047 तक भारत को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने मंत्रियों से अपील की कि वे अपने-अपने विभागों में ऐसे सुधारों को प्राथमिकता दें, जिनसे ‘ईज ऑफ लिविंग’ यानी नागरिकों के दैनिक जीवन को अधिक सरल और सुविधाजनक बनाया जा सके। इसके साथ ही ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को और मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि आर्थिक विकास की गति को और तेज किया जा सके।

    बैठक में पश्चिम एशिया में चल रहे संकट और उसके वैश्विक प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर इसके संभावित प्रभावों का आकलन किया गया। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को निर्देश दिया कि इस स्थिति के मद्देनज़र ऐसे कदम उठाए जाएं जिससे आम नागरिकों पर इसका न्यूनतम प्रभाव पड़े। ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, शिपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों को विशेष रूप से संवेदनशील मानते हुए उन पर सतत निगरानी रखने पर जोर दिया गया।

    बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट संकेत दिया गया कि सरकार आने वाले वर्षों में नीति निर्माण और क्रियान्वयन के स्तर पर बड़े सुधारों की दिशा में आगे बढ़ेगी। तकनीक आधारित प्रशासन, पारदर्शिता और तेज निर्णय प्रक्रिया को प्राथमिकता देने की बात दोहराई गई। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक कल्याण, सुशासन और नागरिक संतुष्टि भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

    इस बैठक को सरकार के तीसरे कार्यकाल की शुरुआत में एक महत्वपूर्ण समीक्षा और दिशा निर्धारण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भविष्य की नीतियों और प्राथमिकताओं की स्पष्ट रूपरेखा उभरकर सामने आई है।

  • भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका

    भारत-अमेरिका रिश्तों में नई ऊर्जा की बात, मार्को रूबियो बोले-भारत को जितना तेल चाहिए, देने को तैयार अमेरिका


    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा सहयोग के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को लेकर एक अहम बयान सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में ध्यान खींचा है। क्वाड देशों की आगामी बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत को लेकर सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए कहा है कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि भारत एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार है और दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिका भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है और जितनी मात्रा में भारत तेल या ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता महसूस करेगा, उसे उपलब्ध कराने की दिशा में अमेरिका तैयार है। उनके इस बयान को दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती देने वाले संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    रूबियो ने यह टिप्पणी अपनी आगामी विदेश यात्रा से पहले मियामी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ सहयोग कई क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है और दोनों देश वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत को एक ऐसा साझेदार बताया जिसके साथ अमेरिका लंबे समय से विश्वास और सहयोग के आधार पर संबंध बनाए हुए है।

    ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच अमेरिका अपनी उत्पादन और निर्यात क्षमता को लगातार बढ़ा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा सुरक्षा आज दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और अमेरिका इस दिशा में सहयोगी देशों, खासकर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है।

    नई दिल्ली। आगामी क्वाड बैठक को लेकर भी उन्होंने उत्साह व्यक्त किया। यह बैठक 26 मई को आयोजित होने जा रही है, जिसमें भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री शामिल होंगे। भारत इस बैठक की अध्यक्षता करेगा और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इस महत्वपूर्ण मंच का नेतृत्व करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।

    रूबियो ने यह भी बताया कि उनका भारत दौरा कई मायनों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उन्हें चार प्रमुख देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और करीब से समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्वाड सहयोग वैश्विक स्थिरता और आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है और इसमें भारत की भूमिका अत्यंत अहम है।

    नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री का यह दौरा 23 मई से 26 मई तक प्रस्तावित है, जिसमें वे नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, आगरा और जयपुर जैसे शहरों का भी दौरा करेंगे। कोलकाता यात्रा विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि कई वर्षों बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री वहां पहुंचने वाला है, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    कुल मिलाकर मार्को रूबियो का यह बयान और आगामी भारत यात्रा ऐसे समय में सामने आए हैं जब वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता सहयोग न केवल ऊर्जा क्षेत्र में बल्कि व्यापक रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहा है।

  • गोवा की बेकरी परंपरा को नई उड़ान, GI टैग से बढ़ेगा पारंपरिक ब्रेड्स का अंतरराष्ट्रीय बाजार

    गोवा की बेकरी परंपरा को नई उड़ान, GI टैग से बढ़ेगा पारंपरिक ब्रेड्स का अंतरराष्ट्रीय बाजार

    नई दिल्ली । गोवा की समृद्ध पाक परंपरा में शामिल पारंपरिक ब्रेड्स पोई, पाओ और उंडो को जल्द ही भौगोलिक संकेतक यानी GI टैग मिलने की संभावना है। यह कदम न केवल इन पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि इससे स्थानीय बेकरी उद्योग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद ने इन ब्रेड्स के लिए संयुक्त रूप से GI टैग के लिए आवेदन प्रस्तुत किया है, जिससे गोवा की सदियों पुरानी बेकरी परंपरा को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

    गोवा की इन पारंपरिक ब्रेड्स की जड़ें पुर्तगाली शासनकाल से जुड़ी हुई मानी जाती हैं, जब पाओ बनाने की तकनीक राज्य में आई थी। समय के साथ यह परंपरा गोवा की स्थानीय संस्कृति में इस तरह रच-बस गई कि आज यह वहां के दैनिक भोजन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। पोई, पाओ और उंडो न केवल स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि इनकी खास सुगंध और बनावट इन्हें अन्य ब्रेड्स से अलग पहचान देती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग मिलने से इन उत्पादों की पारंपरिक विधियों को कानूनी संरक्षण मिलेगा और इनके असली स्वरूप को बनाए रखने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे मार्केटिंग और ब्रांडिंग को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे इन ब्रेड्स की मांग राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़ सकती है।

    स्थानीय बेकरी उद्योग लंबे समय से कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें पारंपरिक सामग्री की कमी और बदलती उत्पादन प्रक्रियाएं प्रमुख हैं। पहले जहां इन ब्रेड्स को पारंपरिक तरीकों और प्राकृतिक खमीर जैसी विधियों से तैयार किया जाता था, वहीं अब कई जगहों पर व्यावसायिक खमीर का उपयोग बढ़ गया है, जिससे इनके मूल स्वाद और गुणवत्ता में बदलाव देखा जा रहा है।

    इसके बावजूद गोवा में आज भी सैकड़ों बेकरी इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं और पीढ़ियों से चली आ रही विधियों का पालन कर रही हैं। अनुमान है कि राज्य की अधिकांश बेकरी अभी भी इन पारंपरिक ब्रेड्स का उत्पादन करती हैं, जो स्थानीय लोगों के दैनिक भोजन का हिस्सा हैं।

    GI टैग मिलने के बाद इन उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ने की उम्मीद है, खासकर उन देशों में जहां गोवा के प्रवासी समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं। इससे न केवल स्थानीय उत्पादकों को बेहतर मूल्य मिलेगा बल्कि गोवा की सांस्कृतिक पहचान भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूत होगी।

    राज्य पहले से ही कई कृषि और खाद्य उत्पादों के लिए GI टैग प्राप्त कर चुका है और अब पारंपरिक ब्रेड्स का यह कदम इस सूची को और समृद्ध कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल गोवा की खाद्य विरासत को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।

  • यूपी पंचायतों में बड़ा बदलाव या राजनीतिक रणनीति? कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाने की तैयारी से सियासी हलचल तेज

    यूपी पंचायतों में बड़ा बदलाव या राजनीतिक रणनीति? कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रधानों को प्रशासक बनाने की तैयारी से सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली  /उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक ढांचे को लेकर एक नए संभावित प्रयोग ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में गहरी बहस छेड़ दी है। राज्य सरकार इस विकल्प पर विचार कर रही है कि कार्यकाल खत्म होने के बाद मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में जिम्मेदारी दी जा सकती है। अगर यह फैसला लागू होता है तो यह प्रदेश के पंचायत इतिहास में एक अभूतपूर्व कदम माना जाएगा, क्योंकि अब तक इस तरह की व्यवस्था कभी नहीं अपनाई गई है।

    परंपरागत रूप से पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने और नए चुनाव होने तक की अवधि में प्रशासनिक जिम्मेदारी सरकारी अधिकारियों के पास रहती रही है, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती नजर आ रही है। प्रस्ताव के तहत पंचायतों का कामकाज उन्हीं चुने हुए प्रतिनिधियों के हाथ में रहने की संभावना है, जिनका कार्यकाल पूरा हो चुका होगा। इस संभावित बदलाव को लेकर जहां एक ओर इसे प्रशासनिक निरंतरता का कदम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे ग्रामीण राजनीति में सत्ता संतुलन से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल प्रशासनिक सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्रामीण स्तर पर संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की रणनीति भी हो सकती है। उत्तर प्रदेश में हजारों की संख्या में ग्राम प्रधान होते हैं, जो स्थानीय स्तर पर जनता और शासन के बीच सबसे अहम कड़ी माने जाते हैं। गांवों में विकास कार्यों से लेकर जनकल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन तक में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इनका प्रशासनिक रूप से सक्रिय रहना ग्रामीण राजनीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।

    इस पूरे मुद्दे के केंद्र में पंचायत चुनावों की संभावित देरी भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। ओबीसी आरक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं और आयोग की रिपोर्ट के चलते पंचायत चुनावों के समय पर होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह से यह संभावना जताई जा रही है कि मौजूदा व्यवस्था को कुछ समय तक जारी रखने के लिए प्रशासनिक विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

    वहीं विपक्ष इस संभावित फैसले पर सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव टालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है और इससे ग्रामीण स्तर पर सत्ता का संतुलन प्रभावित हो सकता है। उनका तर्क है कि अगर चुने हुए प्रतिनिधियों को ही प्रशासक बना दिया गया तो निष्पक्ष प्रशासन की अवधारणा पर असर पड़ सकता है और यह राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा कानून में सरकार को असाधारण परिस्थितियों में प्रशासक नियुक्त करने का अधिकार जरूर दिया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह जिम्मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों को दी जा सकती है या नहीं। इसी कारण इस प्रस्ताव को लेकर भविष्य में कानूनी चुनौती की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

    प्रशासनिक स्तर पर यह भी चर्चा है कि अगर ग्राम पंचायतों में यह मॉडल लागू होता है तो इसका असर क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत स्तर तक भी जा सकता है, जहां पहले से ही सरकारी अधिकारियों को प्रशासक बनाया जाता रहा है। ऐसे में पूरे पंचायत ढांचे में एक नया प्रशासनिक और राजनीतिक मॉडल आकार ले सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक प्रशासनिक निर्णय के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ग्रामीण राजनीति की दिशा तय करने वाले संभावित कदम के रूप में भी समझा जा रहा है। गांवों में राजनीतिक पकड़ और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को देखते हुए यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक चर्चा में रहने की संभावना है।

  • ‘कुर्बानी पर रोक बर्दाश्त नहीं’: हुमायूं कबीर के बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति..

    ‘कुर्बानी पर रोक बर्दाश्त नहीं’: हुमायूं कबीर के बयान से गरमाई बंगाल की राजनीति..

    नई दिल्ली । बकरीद से पहले पश्चिम बंगाल में कुर्बानी को लेकर राजनीतिक माहौल अचानक गरमा गया है। राज्य सरकार की ओर से पशु वध को लेकर जारी किए गए नए निर्देशों के बाद अब इस मुद्दे ने सियासी रंग पकड़ लिया है। आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर के तीखे बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा और कुर्बानी की परंपरा पहले की तरह जारी रहेगी।

    दरअसल राज्य सरकार ने हाल ही में पशु वध नियंत्रण कानून के तहत एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया है। इसमें बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के गाय और भैंस के वध पर सख्त रोक लगाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि किसी भी बैल, बछड़े, गाय या भैंस का वध निर्धारित नियमों और प्रमाण पत्र के बिना नहीं किया जा सकेगा। बकरीद से ठीक पहले जारी इस निर्देश के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

    इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने सरकार पर धार्मिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी की परंपरा सदियों पुरानी है और इसे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम समुदाय अपने धार्मिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कबीर ने कहा कि सरकार प्रशासन चलाने तक सीमित रहे और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने से बचे।

    हुमायूं कबीर ने अपने बयान में यह भी कहा कि कुर्बानी केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं बल्कि आस्था और परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि समाज में पहले से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को राजनीतिक मुद्दा बनाना ठीक नहीं है। उनके अनुसार किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कदम सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए।

    इस विवाद के बीच राज्य की राजनीति में माहौल और अधिक गर्म हो गया है। विपक्षी दल जहां सरकार के फैसले को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वहीं कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर संतुलित रवैया अपनाने की अपील की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बकरीद से पहले उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।

    हुमायूं कबीर पहले भी कई विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। पिछले वर्षों में भी उनके कुछ बयान राजनीतिक बहस का कारण बने थे। हालांकि इस बार उनका बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे मामले का असर आगामी चुनावी समीकरणों पर भी देखने को मिल सकता है।

    फिलहाल राज्य में प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सरकार की ओर से लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की जा रही है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • कश्मीर के बहादुर आदिल शाह की याद में बड़ा कदम: सरकार ने स्कूल को दिया नया नाम

    कश्मीर के बहादुर आदिल शाह की याद में बड़ा कदम: सरकार ने स्कूल को दिया नया नाम

    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले वर्ष हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की जान बचाते हुए अपनी जान गंवाने वाले आदिल हुसैन शाह को राज्य सरकार ने विशेष सम्मान दिया है। उनके साहस और बलिदान को याद रखते हुए अनंतनाग जिले के एक सरकारी हाई स्कूल का नाम बदलकर उनके नाम पर रखा गया है। इस निर्णय को उनकी वीरता और मानवता के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, आदिल हुसैन शाह पहलगाम क्षेत्र में पोनी चलाने का कार्य करते थे और पर्यटकों की सेवा से जुड़े रहते थे। 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले के दौरान उन्होंने कई पर्यटकों की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन इस दौरान वे स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए और उनकी मृत्यु हो गई। उनकी इस बहादुरी ने पूरे क्षेत्र में गहरी छाप छोड़ी थी।

    राज्य सरकार द्वारा लिए गए निर्णय के तहत अनंतनाग जिले के हापतनगर स्थित एक सरकारी हाई स्कूल का नाम बदलकर शहीद आदिल मेमोरियल हाई स्कूल कर दिया गया है। इस फैसले को सरकार की ओर से आयोजित एक विशेष समारोह में औपचारिक रूप से लागू किया गया, जिसमें शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि आदिल शाह का बलिदान केवल एक व्यक्ति की बहादुरी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों को अक्सर गलत नजरिए से देखा जाता है, लेकिन आदिल शाह ने अपने कार्य से यह साबित किया कि यहां के लोग अपने मेहमानों की सुरक्षा और सम्मान के लिए हमेशा आगे रहते हैं।

    परिवार के सदस्यों ने इस फैसले पर सरकार का आभार व्यक्त किया और इसे गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्कूल का नाम उनके नाम पर रखे जाने से आने वाली पीढ़ियां भी आदिल शाह के साहस और बलिदान को याद रखेंगी। स्थानीय लोगों ने भी इस कदम का स्वागत किया और इसे एक प्रेरणादायक निर्णय बताया, जिससे क्षेत्र में शांति और मानवता का संदेश और मजबूत हुआ है।

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  • देशभर में मौसम का डबल अटैक: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लू का कहर, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट

    देशभर में मौसम का डबल अटैक: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं लू का कहर, IMD ने जारी किया हाई अलर्ट

    नई दिल्ली ।देशभर में भीषण गर्मी के बीच अब मौसम ने अचानक करवट ले ली है। 22 मई को देश के कई हिस्सों में तेज आंधी, भारी बारिश और तूफान को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत तक कई राज्यों में मौसम बेहद खराब रहने की संभावना है। तेज हवाओं की रफ्तार 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। कई इलाकों में बिजली गिरने, पेड़ उखड़ने और फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई गई है। मौसम में इस अचानक बदलाव की वजह से लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन तेज तूफान और बारिश नई परेशानियां भी खड़ी कर सकते हैं।

    मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हो गया है, जिसका असर कई राज्यों में दिखाई देगा। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर मणिपुर तक मौसम प्रणाली मजबूत हो रही है। इसी कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, असम, तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में बारिश और तेज आंधी की चेतावनी जारी की गई है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश का असर देखने को मिल सकता है। गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया, आजमगढ़ और आसपास के इलाकों में मौसम खराब रहने की संभावना है। वहीं बिहार के गया, दरभंगा, पूर्णिया, किशनगंज, सुपौल और भागलपुर जैसे जिलों में भारी बारिश और तूफान का खतरा बना हुआ है। झारखंड में भी रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर समेत कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान लगाया गया है। पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में भी मौसम बिगड़ सकता है और कई जिलों में तेज आंधी चलने की चेतावनी दी गई है।

    पहाड़ी राज्यों में भी मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड के नैनीताल, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, कुल्लू, मंडी और कांगड़ा में भी तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि खराब मौसम के कारण भूस्खलन और सड़क बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    राजधानी दिल्ली में भी 22 मई की शाम मौसम अचानक बदल सकता है। यहां तेज धूलभरी आंधी चलने की संभावना जताई गई है। हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। हालांकि तापमान अभी भी काफी ऊंचा बना रहेगा और अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अभी भी भीषण गर्मी और लू का असर जारी रहेगा। जयपुर, ग्वालियर, उज्जैन और इंदौर जैसे शहरों में गर्म हवाएं लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

    दक्षिण भारत के राज्यों में भी मौसम सक्रिय हो गया है। तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कई स्थानों पर तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। वहीं अंडमान-निकोबार क्षेत्र में भी मौसम खराब रह सकता है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून आगे बढ़ सकता है, जिसके कारण बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं।

    मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है क्योंकि तेज आंधी और बारिश से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

  • लखनऊ में पिता ने ही रची अपनी मासूम बेटी के कत्ल की खौफनाक साजिश, सिरविहीन टुकड़ों में मिला किशोरी का शव

    लखनऊ में पिता ने ही रची अपनी मासूम बेटी के कत्ल की खौफनाक साजिश, सिरविहीन टुकड़ों में मिला किशोरी का शव


    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रिश्तों को तार-तार कर देने वाली एक ऐसी खौफनाक वारदात सामने आई है, जिसने ऑनर किलिंग के काले सच को एक बार फिर समाज के सामने लाकर खड़ा कर दिया है। गोमतीनगर रेलवे स्टेशन पर खड़ी छपरा-गोमती एक्सप्रेस के स्लीपर कोच की एक सीट के नीचे लावारिस हालत में रखे बक्से से जब पुलिस ने एक किशोरी का सिरविहीन शव बरामद किया, तो पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। बक्से को खोलने पर सुरक्षाकर्मियों के होश उड़ गए क्योंकि उसके भीतर मासूम बच्ची के शरीर को छह अलग-अलग टुकड़ों में काटकर बेरहमी से छुपाया गया था। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड का खुलासा करने के लिए प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए कई विशेष जांच टीमों का गठन किया और सुरागों की तलाश तेज कर दी।

    जांचकर्ताओं ने जब रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया, तो कुशीनगर जिले के तमकुही रेलवे स्टेशन के कैमरों से एक बेहद महत्वपूर्ण और संदिग्ध सुराग हाथ लगा। इस सुराग के जरिए जब कड़ियों से कड़ियां जोड़ी गईं, तो हत्या के पीछे किसी बाहरी का नहीं बल्कि मृतिका के सगे पिता, उसकी सगी बुआ और फूफा का हाथ होने की बात सामने आई। कानून के हाथ जैसे ही इन आरोपियों तक पहुंचे, इस खौफनाक साजिश का पूरा सच खुलकर सामने आ गया। गिरफ्त में आए आरोपियों की पहचान मृतिका शब्बा के पिता विग्गन अंसारी, बुआ नूरजहां और फूफा मोजीबुल्ला अंसारी के रूप में हुई है, जिन्हें पुलिस ने कुशीनगर जिले से घेराबंदी करके दबोच लिया।

    इस दर्दनाक वारदात के पीछे की मुख्य वजह पारिवारिक प्रतिष्ठा और रूढ़िवादी सोच से उपजा आक्रोश बताया जा रहा है। जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी पिता अपनी दो बड़ी बेटियों द्वारा परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर अपनी पसंद से शादी करने के फैसले से लंबे समय से बेहद परेशान और समाज में अपमानित महसूस कर रहा था। इसी बीच जब उसे पता चला कि उसकी सोलह वर्षीय सबसे छोटी बेटी भी किसी से फोन पर बातचीत करती है और उसका प्रेम प्रसंग चल रहा है, तो उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। घर में इस बात को लेकर आए दिन विवाद, तनाव और कलह का माहौल रहने लगा था।

    अपनी दो बड़ी बेटियों के कदम से आहत पिता किसी भी कीमत पर अपनी तीसरी बेटी को अपनी मर्जी के खिलाफ जाते नहीं देखना चाहता था। इसी जिद और सनक के कारण उसने अपनी बहन और बहनोई के साथ मिलकर अपनी ही नाबालिग बेटी को हमेशा के लिए खामोश करने की योजना बना डाली। आरोपियों ने मिलकर पहले किशोरी को मौत के घाट उतारा और फिर पकड़े जाने के डर से शव को बेरहमी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया। फिलहाल इस पूरे मामले में आरोपियों को जेल भेज दिया गया है, जबकि मृतिका के गायब सिर को ढूंढने के लिए बिहार सीमा और कुशीनगर के आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।

  • पीएम मोदी की उच्चस्तरीय मंत्रिपरिषद बैठक शुरू, पश्चिम एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर नजर

    पीएम मोदी की उच्चस्तरीय मंत्रिपरिषद बैठक शुरू, पश्चिम एशिया संकट और कैबिनेट फेरबदल पर नजर



    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में दिल्ली के सेवा तीर्थ में मंत्रिपरिषद की अहम बैठक शुरू हो गई है। यह इस साल की पहली बड़ी कैबिनेट बैठक मानी जा रही है, जो ऐसे समय पर हो रही है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक हालात को लेकर चिंता बढ़ी हुई है।

    सूत्रों के अनुसार, इस उच्चस्तरीय बैठक में सभी कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य राज्य मंत्री शामिल हुए हैं। सरकार ने पहले ही सभी मंत्रियों को राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद रहने के निर्देश दिए थे। बैठक शाम 5 बजे शुरू हुई और इसमें शासन के प्रदर्शन, नीतियों के क्रियान्वयन और विभिन्न मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जा रही है।

    किन मुद्दों पर चर्चा संभव
    बैठक में सरकार की प्रमुख योजनाओं की प्रगति, उनके प्रभाव और जनता तक पहुंच को लेकर विस्तृत समीक्षा होने की संभावना है। साथ ही विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन और अब तक लिए गए नीतिगत फैसलों के नतीजों पर भी चर्चा की जा रही है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात खासकर तेल कीमतों और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों पर भी सरकार की नजर बनी हुई है। इसी वजह से आर्थिक स्थिरता और ईंधन आपूर्ति जैसे मुद्दे बैठक के एजेंडे में शामिल बताए जा रहे हैं।

    विदेश यात्रा के बाद अहम बैठक
    यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब प्रधानमंत्री हाल ही में अपनी पांच देशों की कूटनीतिक यात्रा पूरी कर लौटे हैं। इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा की। इस यात्रा का उद्देश्य ऊर्जा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना बताया गया है।