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  • अमित शाह से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तोड़ी चुप्पी

    अमित शाह से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तोड़ी चुप्पी


    नई दिल्ली ।
    पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या रंधावा कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि स्वयं रंधावा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी मुलाकात का उद्देश्य केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना था।

    रंधावा की इस मुलाकात का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सभी दल अपनी राजनीतिक रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी बीच कांग्रेस संगठन में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद रंधावा को मिली नई जिम्मेदारी को लेकर उनकी नाराजगी की चर्चा भी लगातार सामने आती रही है। ऐसे माहौल में गृह मंत्री से हुई उनकी मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी।

    हाल ही में गठित पंजाब कांग्रेस की नई टीम में रंधावा को कोर कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वह संगठन में अधिक प्रभावशाली भूमिका की उम्मीद कर रहे थे। उनके करीबी नेताओं का भी मानना है कि नई जिम्मेदारी को लेकर वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि रंधावा ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है।

    बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए रंधावा ने साफ कहा कि उनकी मुलाकात पूरी तरह प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब के सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गतिविधियों, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर मामलों की जानकारी दी थी। इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया।

    रंधावा के अनुसार उन्होंने बैठक में गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार गैंगस्टर गिरोह, अवैध वसूली, सीमा पार से होने वाली गतिविधियां और अपराधी नेटवर्क राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के इस्तेमाल और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई।

    बैठक के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। रंधावा का कहना है कि यदि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इन परिस्थितियों को गंभीर मानती है तो आवश्यक कार्रवाई करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और देश की सुरक्षा किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर है और इसी भावना के साथ उन्होंने अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखा।

    फिलहाल रंधावा ने भाजपा में शामिल होने की सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, लेकिन उनकी अमित शाह से मुलाकात ने पंजाब की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। चुनावी माहौल में यह घटनाक्रम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा पर इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की रणनीतियों पर भी अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।

  • करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

    करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । तमिलनाडु के बहुचर्चित करूर भगदड़ मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री थलपति विजय, उनके मंत्रियों और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों को मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए।

    करूर में 27 सितंबर 2025 को एक राजनीतिक जनसभा के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इसकी जांच CBI को सौंप दी थी। जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे।

    DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक टिप्पणियां गवाहों और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। याचिका में विशेष रूप से 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन के उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने करूर घटना को लेकर राजनीतिक जवाब देने जैसी टिप्पणी की थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के बयान जांच की दिशा बदलने और गवाहों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का माध्यम बन सकते हैं।

    याचिका में मुख्यमंत्री विजय के प्रस्तावित करूर दौरे का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य लाभ देने के लिए वहां जाने वाले हैं। DMK ने स्पष्ट किया है कि उसे पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन परिवारों को सहायता दी जानी है, वे CBI जांच में महत्वपूर्ण गवाह भी हैं। ऐसे में आरोपियों अथवा राजनीतिक कार्यपालिका का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा कर सकता है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में, जब मामला न्यायालय में लंबित था, तब भी मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये तथा घायलों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। पार्टी का कहना है कि भविष्य में भी यदि ऐसी सहायता दी जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप और CBI को पूर्व सूचना देकर ही दी जानी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    DMK ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मंत्री आधव अर्जुन के हालिया बयान की जांच कराई जाए और यदि उसमें जांच को प्रभावित करने का प्रयास पाया जाता है तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। साथ ही मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सी.टी.आर. निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पूरी होने तक मामले पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख तय करेगा कि जांच के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी और पीड़ित परिवारों से संपर्क को लेकर आगे क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

  • अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प

    अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प


    नई दिल्ली ।
    पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के औपचारिक शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिवभक्तों और तीर्थयात्रियों के नाम एक प्रेरणादायी संदेश जारी करते हुए सुरक्षित, अनुशासित और राष्ट्रहित से जुड़ी यात्रा का आह्वान किया। उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन को सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र अवसर बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का भी सशक्त प्रतीक है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े लाखों श्रद्धालु एक ही आस्था के सूत्र में बंधकर इस कठिन यात्रा में शामिल होते हैं। यही विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने सभी यात्रियों की सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए यात्रा को सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का आग्रह किया।

    प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने की अपील की। पहला संकल्प स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि हिमालय का प्राकृतिक वातावरण और अमरनाथ यात्रा मार्ग देश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में प्रत्येक श्रद्धालु का दायित्व है कि यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखे, प्लास्टिक और अन्य कचरे का उचित निस्तारण करे तथा प्रकृति को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाए।

    दूसरे संकल्प में उन्होंने यात्रियों से सुरक्षा नियमों का पूरी गंभीरता से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का मौसम तेजी से बदलता है और यात्रा मार्ग चुनौतीपूर्ण है। इसलिए प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और चिकित्सा दलों द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक यात्री की जिम्मेदारी है।

    तीसरे संकल्प के तहत प्रधानमंत्री ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान अपने कुल खर्च का एक हिस्सा स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और पारंपरिक उत्पादों की खरीद पर अवश्य खर्च करें। उनका कहना था कि इससे जम्मू-कश्मीर के स्थानीय परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।

    चौथे संकल्प में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा के बाद अपने घर लौटकर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें। उनके अनुसार प्रकृति संरक्षण प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारी जिम्मेदारी है।

    पांचवें और अंतिम संकल्प में प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक कर्तव्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रहित को भी समान महत्व देना चाहिए। यही भावना देश की निरंतर प्रगति और एकता को मजबूत करती है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में अमरनाथ यात्रा को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत उदाहरण बताया। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने में जुटे सुरक्षा बलों, प्रशासन, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों, सफाई कर्मियों तथा स्थानीय नागरिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और सेवा भाव से ही लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो पाती है। अंत में उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और राष्ट्र की निरंतर उन्नति की प्रार्थना की।

  • रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान

    रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान


    नई दिल्ली।
    रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश करना कई लोगों की आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। रेलवे प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता है कि फाटक बंद होने पर धैर्य रखें और ट्रेन गुजरने तक इंतजार करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जा रही है।

    रेलवे फाटक तभी बंद किया जाता है जब किसी ट्रेन के आने का निर्धारित समय होता है। इस दौरान फाटक के नीचे से बाइक, कार या अन्य वाहन निकालने की कोशिश न केवल अपनी जान बल्कि दूसरे लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कुछ सेकंड की लापरवाही भी गंभीर हादसे में बदल सकती है। यही वजह है कि रेलवे ने इस तरह की हरकत को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है।

    रेलवे नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बंद फाटक के नीचे से ट्रैक पार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और परिस्थितियों के आधार पर छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति की वजह से फाटक पर तैनात कर्मचारी के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी संभव है।

    ऐसे मामलों में केवल आर्थिक दंड या जेल ही नहीं, बल्कि वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभाग गंभीर मामलों में लाइसेंस को निलंबित करने या रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है। सड़क सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई करती हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

    रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब कई लेवल क्रॉसिंग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति मौके पर नहीं पकड़ा जाता, तब भी वाहन के नंबर के आधार पर बाद में चालान जारी किया जा सकता है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में रेलवे सुरक्षा बल वाहन को जब्त करने की कार्रवाई भी करता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मिनट बचाने की कोशिश कभी-कभी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। रेलवे ट्रैक पार करने की जल्दबाजी केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी समान रूप से खतरनाक है। ट्रेन की गति और दूरी का सही अनुमान लगाना अक्सर संभव नहीं होता, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

    रेलवे प्रशासन लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि बंद फाटक को किसी भी स्थिति में पार करने का प्रयास न करें। फाटक खुलने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार विकल्प है। थोड़ी सी सावधानी न केवल जीवन की रक्षा करती है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानियों से भी बचाती है। रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका भी।

  • सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार

    सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनमर्ग अटल टनल के समीप शुक्रवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सभी घायल जवानों को आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए निकटवर्ती सीआरपीएफ कैंप भेज दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ का वाहन श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमित आवाजाही के दौरान सोनमर्ग सुरंग के पास सड़क से फिसलकर पलट गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा सड़क की स्थिति, मौसम अथवा किसी तकनीकी कारण से हुआ। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी।

    हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया गया। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से घायलों को बिना किसी देरी के चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों की निगरानी में सभी जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी भी जवान को गंभीर जीवन-घातक चोट नहीं आई है, हालांकि सभी का आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा रहा है।

    श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीतिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। इसी मार्ग के जरिए लद्दाख क्षेत्र तक सैन्य और नागरिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। सोनमर्ग अटल टनल के आसपास का इलाका भी सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही बनी रहती है और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाती है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सीआरपीएफ ने वर्ष 2026 की पहली छमाही में अभियानों के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में बल को किसी भी अभियान के दौरान जवानों की शहादत का सामना नहीं करना पड़ा। लगातार चल रहे आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के बीच यह उपलब्धि सुरक्षा बल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में आए सुधार के बाद अभियान संबंधी हताहतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

    देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बलों में शामिल सीआरपीएफ के जिम्मे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियान तथा विभिन्न राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व हैं। ऐसे में जवानों की सुरक्षित आवाजाही और परिचालन क्षमता बनाए रखना बल की प्राथमिकताओं में शामिल है। सोनमर्ग के निकट हुई यह दुर्घटना सुरक्षा संचालन के दौरान सड़क सुरक्षा और वाहन संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित करती है। फिलहाल घायल सभी जवानों का उपचार जारी है और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हैं।

  • स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार

    स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार

    नई दिल्ली । देशभर में स्पीड पोस्ट और निजी कूरियर सेवाओं का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से गांजा सप्लाई करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह 21 राज्यों तक अपना नेटवर्क फैला चुका था और ऑनलाइन ऑर्डर मिलने के बाद पार्सल के माध्यम से ग्राहकों के घरों तक मादक पदार्थ पहुंचाए जाते थे। मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े कई अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। शुरुआती जांच में करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार और सुनियोजित तस्करी तंत्र के संचालन के संकेत मिले हैं।

    पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब डाक के माध्यम से भेजे जा रहे एक संदिग्ध पार्सल की जांच की गई। इसके बाद दूसरे पार्सलों की पड़ताल शुरू हुई और धीरे-धीरे एक ऐसे नेटवर्क का पता चला, जो लंबे समय से अलग-अलग राज्यों में छोटे-छोटे पैकेटों के जरिए गांजे की आपूर्ति कर रहा था। जांच एजेंसियों ने इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली का विश्लेषण किया तो सामने आया कि पार्सलों में मादक पदार्थों को सामान्य घरेलू सामान या दवाइयों के रूप में दर्शाकर भेजा जाता था, ताकि किसी को संदेह न हो।

    प्रारंभिक जांच के अनुसार गिरोह प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहकों के ऑर्डर पूरा करता था। रोजाना कई स्पीड पोस्ट और कूरियर पार्सलों के जरिए 50 से 250 ग्राम तक गांजा विभिन्न राज्यों में भेजा जाता था। प्रत्येक पार्सल की कीमत उसकी मात्रा के अनुसार तय होती थी और पूरे कारोबार से प्रतिदिन लाखों रुपये का लेनदेन होने का अनुमान है। मासिक और वार्षिक स्तर पर यह अवैध कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच चुका था।

    जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों से संपर्क करता था। ऑर्डर प्राप्त होने के बाद डिजिटल भुगतान के जरिए रकम ली जाती थी और फिर पैकेज तैयार कर अलग-अलग स्थानों पर भेज दिए जाते थे। नेटवर्क में शामिल प्रत्येक सदस्य की अलग जिम्मेदारी तय थी। कोई पैकेजिंग करता था, कोई पार्सल बुक कराता था, जबकि अन्य सदस्य मादक पदार्थों की खरीद, भंडारण और वितरण का काम संभालते थे। इससे पूरे नेटवर्क का संचालन व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।

    पुलिस के अनुसार गिरोह अपनी गतिविधियों को छिपाने के लिए कोड वर्ड का भी इस्तेमाल करता था। मादक पदार्थ की मात्रा और गुणवत्ता बताने के लिए सामान्य शब्दों का प्रयोग किया जाता था, जिससे बातचीत के दौरान संदेह की संभावना कम रहे। अवैध कमाई को छिपाने के लिए विभिन्न बैंक खातों और यूपीआई आईडी का उपयोग किया जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि अवैध आय का एक हिस्सा सोने, महंगी गाड़ियों और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

    कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो स्थानीय खरीदारों को भी गिरफ्तार किया, जिनके कब्जे से गांजा बरामद किया गया। अधिकारियों का कहना है कि नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं और इसके माध्यम से लंबे समय से मादक पदार्थों की आपूर्ति की जा रही थी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं और डिजिटल लेनदेन, बैंक खातों, मोबाइल रिकॉर्ड तथा पार्सल बुकिंग से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच जारी है।

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल एक तस्करी गिरोह तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे व्यापक अंतरराज्यीय नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। ऐसे में वित्तीय लेनदेन, सप्लाई चेन और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई से संगठित ड्रग्स तस्करी के ऐसे तरीकों पर प्रभावी अंकुश लगाने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी और भविष्य में इस तरह के नेटवर्क के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा।

  • चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष का बड़ा हमला, 23 दलों ने मुख्य न्यायाधीश को लिखा संयुक्त पत्र, चुनाव आयोग की निष्पक्षता और एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों ने एक बार फिर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी गठबंधन से जुड़े 23 राजनीतिक दलों और एक निर्दलीय सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को संयुक्त पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, चुनाव आयोग की निष्पक्षता तथा चुनावी व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है। अब इस पत्र को सार्वजनिक किए जाने के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    संयुक्त पत्र में विपक्षी दलों ने दावा किया है कि देश की चुनावी प्रक्रिया के संबंध में कई गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव अनिवार्य हैं तथा इस व्यवस्था की रक्षा करना न्यायपालिका का महत्वपूर्ण संवैधानिक दायित्व है। विपक्ष का कहना है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तब न्यायपालिका से अपेक्षा की जाती है कि वह संविधान की भावना के अनुरूप आवश्यक हस्तक्षेप करे।

    पत्र में चुनाव आयोग की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग की निष्पक्षता को लेकर जनता के बीच संदेह की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी प्रक्रियाओं के दौरान आयोग का रवैया कई अवसरों पर पक्षपातपूर्ण प्रतीत हुआ है। विपक्ष का यह भी कहना है कि आदर्श आचार संहिता के कथित उल्लंघनों पर समान रूप से कार्रवाई नहीं होने के कारण चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है।

    विपक्षी दलों ने अपने पत्र में यह भी आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक संस्थागत तंत्र अपेक्षित स्तर पर प्रभावी दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बना रहना आवश्यक है और यदि किसी संस्था की निष्पक्षता पर प्रश्न उठते हैं तो उसका समाधान संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।

    पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विपक्ष न्यायपालिका की भूमिका और स्वतंत्रता का सम्मान करता है तथा उसका उद्देश्य किसी संस्था की गरिमा पर प्रश्न उठाना नहीं है। इसके विपरीत, विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब विभिन्न स्तरों पर मतभेद या विवाद उत्पन्न होते हैं, तब न्यायपालिका अंतिम संवैधानिक मंच के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी आधार पर मुख्य न्यायाधीश से चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया है।

    विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनके अनुसार यदि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर संदेह बढ़ता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी कारण उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

    इस घटनाक्रम के बाद चुनावी सुधार, निर्वाचन आयोग की भूमिका और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जाएगी। फिलहाल विपक्ष का यह संयुक्त पत्र देश की चुनावी व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर जारी बहस का एक अहम राजनीतिक दस्तावेज बनकर सामने आया है।

  • ब्रिटिश महिला के दिमाग में मिले 38 परजीवी सिस्ट; 19 साल पुराने भारत दौरे पर मढ़ा आरोप, तो सोशल मीडिया पर भड़के भारतीय यूजर्स

    ब्रिटिश महिला के दिमाग में मिले 38 परजीवी सिस्ट; 19 साल पुराने भारत दौरे पर मढ़ा आरोप, तो सोशल मीडिया पर भड़के भारतीय यूजर्स

    नई दिल्ली । पश्चिमी मीडिया में हाल ही में सुर्खियां बटोरने वाली एक खबर को लेकर भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स और इंटरनेट जगत में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। दरअसल, एक 42 वर्षीय ब्रिटिश महिला लोरी डेनमैन के मस्तिष्क में 38 परजीवी सिस्ट पाए गए हैं। महिला और कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों का दावा है कि साल 2007 में अपनी दो महीने की भारत यात्रा के दौरान वे सूअर के फीताकृमि से होने वाले एक दुर्लभ संक्रमण ‘न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस’ का शिकार हुई थीं। इस दावे के सामने आते ही भारतीय नेटिजन्स ने इसे पूरी तरह से एक ‘भारत विरोधी एजेंडा’ और देश की वैश्विक छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास करार दिया है।

    भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स इस बात को लेकर बेहद हैरान और क्रोधित हैं कि करीब 19 वर्ष पहले की गई एक संक्षिप्त यात्रा को बिना किसी पुख्ता वैज्ञानिक और प्रयोगशाला साक्ष्यों के इस तरह वैश्विक मंचों पर उछाला जा रहा है। इंटरनेट पर लोगों का आरोप है कि विदेशी मीडिया संस्थान अक्सर भारत को एक अस्वच्छ और असुरक्षित पर्यटन स्थल के रूप में चित्रित करने की फिराक में रहते हैं। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि इतने लंबे अंतराल के बाद अचानक इस मामले को तूल देकर वैश्विक पर्यटकों के मन में भारत के प्रति भय पैदा करने का एक प्रोपेगेंडा चलाया जा रहा है, जो पूरी तरह से तर्कहीन है।

    इस गंभीर विवाद के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तीखे तंज और मीम्स की भी बाढ़ आ गई है। भारतीय यूजर्स ब्रिटिश महिला के इस दावे के वैज्ञानिक तर्क पर सवाल उठाते हुए ब्रिटेन की दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का उदाहरण दे रहे हैं। लोग लिख रहे हैं कि महारानी एलिजाबेथ भी वर्ष 1997 में भारत दौरे पर आई थीं और उनका निधन वर्ष 2022 में हुआ, तो क्या अब उनके निधन का उत्तरदायित्व भी उनके दशकों पुराने भारत दौरे पर मढ़ दिया जाएगा। यूजर्स का कहना है कि 2007 से लेकर अब तक के लंबे समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने, खाने-पीने और यात्रा करने के बाद किसी भी बीमारी के लिए केवल भारत को दोष देना पूरी तरह से हास्यास्पद और बेतुका है।

    चिकित्सीय इतिहास के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब भारत से लौटने के चार वर्ष बाद यानी 2011 में लोरी डेनमैन को स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जटिलताओं का अहसास हुआ। चिकित्सीय परीक्षण के दौरान उनके शरीर से एक मीटर लंबा टेपवर्म प्राप्त हुआ, जिसके बाद कराए गए एमआरआई स्कैन में उनके मस्तिष्क के भीतर 38 परजीवी सिस्ट होने की पुष्टि हुई। ‘न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस’ नामक यह दुर्लभ बीमारी सूअर के फीताकृमि ‘टीनिया सोलियम’ के कारण होती है, जो मानव के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करती है और दुनिया भर में मिर्गी के दौरों का एक प्रमुख कारण मानी जाती है। इस संक्रमण के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए महिला को अब जीवन भर चिकित्सीय दवाओं पर निर्भर रहना पड़ेगा।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुरक्षा मानकों के अनुसार, यह संक्रमण केवल दूषित या अधपके सूअर का मांस खाने से ही नहीं, बल्कि दूषित पानी और संक्रमित व्यक्ति द्वारा बिना स्वच्छता के छुए गए कच्चे फलों तथा सब्जियों के सेवन से भी इंसानी शरीर में प्रवेश कर सकता है। पेट में जाने के बाद ये सूक्ष्म अंडे लार्वा का रूप ले लेते हैं और रक्त प्रवाह के माध्यम से मस्तिष्क की मांसपेशियों तक पहुंच जाते हैं। हालांकि, ब्रिटेन के संक्रामक रोग विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि ब्रिटेन में सख्त खाद्य सुरक्षा कानूनों के कारण इसके मामले अत्यंत दुर्लभ हैं और भारत में इसके मरीजों की संख्या अधिक है, इसलिए मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री को आधार बनाकर ही इस तरह की चिकित्सकीय संभावना व्यक्त की गई है, क्योंकि यह परजीवी बिना कोई लक्षण दिखाए वर्षों तक मस्तिष्क में निष्क्रिय पड़ा रह सकता है।

  • मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा

    मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा


    पटना। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े गबन मामले के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों और मठों की वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। परिषद ने अब सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों से हर तीन महीने में आय-व्यय और खातों का विवरण लेने की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।

    परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने बताया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन करीब 4,500 मंदिर और मठ आते हैं। अब तक इन सभी संस्थानों का वर्ष में एक बार ऑडिट कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत त्रैमासिक स्तर पर भी खातों की समीक्षा की जाएगी, ताकि दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

    अब हर तिमाही होगी वित्तीय निगरानी
    प्रो. रणवीर नंदन के अनुसार, वार्षिक ऑडिट में मंदिरों और मठों को प्राप्त दान, उसके उपयोग और खर्च का विस्तृत रिकॉर्ड जांचा जाता है। परिषद यह सुनिश्चित करती है कि दान की राशि का उपयोग केवल मंदिरों और मठों के रखरखाव, विकास और आवश्यक कार्यों पर ही किया जाए।

    उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर तीन महीने में खातों का विवरण लेने से किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता की समय रहते पहचान की जा सकेगी और निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी।

    प्रत्येक मंदिर की अपनी न्यास समिति
    परिषद अध्यक्ष ने बताया कि परिषद के अधीन आने वाले प्रत्येक मंदिर और मठ की अपनी अलग न्यास समिति होती है। यही समिति स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों और खर्च से जुड़े निर्णय लेती है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निर्माण और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने तथा प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की होती है।

    पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहल
    परिषद का मानना है कि नियमित वित्तीय समीक्षा से दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मंदिरों और मठों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

    अयोध्या मामले के बाद बढ़ी सतर्कता
    अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला इन दिनों जांच के दायरे में है। शिकायत के आधार पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संबंधित ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

  • आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

    आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील


    नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

    पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदा
    संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था।

    दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए।

    प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांग
    संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया।

    साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया।

    आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपील
    भारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया।

    रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेश
    यह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।