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  • अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    अमित शाह का ऐलान, 2027 में तीसरी बार भाजपा सरकार बनते ही यूपी में लागू होगी UCC..

    नई दिल्ली ।केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारियों का एजेंडा स्पष्ट कर दिया है। लखनऊ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि राज्य में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने पर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की जाएगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से आगामी विधानसभा चुनाव को लक्ष्य बनाकर संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच सक्रिय रहने का आह्वान किया। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मौजूद रहे।

    डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित इस बैठक में अमित शाह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार मजबूत स्थिति में है और उसे कोई ताकत सत्ता से हटा नहीं सकती। उन्होंने पार्टी की स्थिति को अंगद के पैर से जोड़ते हुए कहा कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अर्जुन की तरह लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और 2027 के चुनाव की तैयारियों में जुटने को कहा।

    शाह ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता को लेकर पार्टी की आगामी योजना भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि 2027 में जनता के समर्थन से भाजपा की तीसरी बार सरकार बनने के बाद उत्तर प्रदेश में UCC लागू की जाएगी। इस घोषणा के साथ उन्होंने इसे आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल कर दिया। हालांकि, बैठक में इसके लागू करने की विस्तृत प्रक्रिया, समयसीमा और प्रस्तावित प्रावधानों का विवरण सामने नहीं आया।

    अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई गोलीबारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दिन निहत्थे रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलाई गई थीं। शाह ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया कि कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले दल अब किस आधार पर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं।

    उन्होंने राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि एक ओर कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी, जबकि दूसरी ओर भाजपा ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कराया। उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम को देश की जनता याद रखेगी। इस मुद्दे के जरिए उन्होंने विपक्ष और भाजपा के बीच राजनीतिक अंतर को सामने रखने की कोशिश की।

    बैठक में वोट चोरी के आरोपों को लेकर भी अमित शाह ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष के आरोपों की तुलना मैच हारने के बाद अंपायर पर सवाल उठाने से की। शाह ने कहा कि यदि विपक्ष को मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई सवाल है, तो वह संसद में चर्चा करे।

    गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर सरकार की ओर से संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा कराने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष के सवालों का बिंदुवार जवाब देने के लिए तैयार है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।

    अमित शाह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य में कठोर और पारदर्शी शासन के कारण माफिया गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई है और उत्तर प्रदेश माफिया मुक्त हुआ है। उन्होंने योगी सरकार के कामकाज को भाजपा की राजनीतिक उपलब्धियों से जोड़ते हुए उसकी सराहना की।

    गृहमंत्री ने वर्ष 2014 से पहले उत्तर प्रदेश में भाजपा की कमजोर संगठनात्मक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी ने संगठन को मजबूत किया और जनता का विश्वास हासिल किया। इसी आधार पर भाजपा ने राज्य में बड़ी चुनावी सफलता प्राप्त की। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पूर्ण बहुमत हासिल करेगी। बैठक के जरिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को चुनावी लक्ष्य स्पष्ट करते हुए संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने का संदेश दिया।

  • रिश्ता टूटने के बाद सहमति से बने संबंध रेप नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर स्पष्ट किया कानून

    रिश्ता टूटने के बाद सहमति से बने संबंध रेप नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने शादी के झूठे वादे पर स्पष्ट किया कानून

    नई दिल्ली ।लिव-इन रिलेशनशिप और शादी के वादे के आधार पर बने शारीरिक संबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दो बालिग व्यक्तियों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध केवल इस वजह से दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आ सकते कि बाद में उनका रिश्ता टूट गया। हालांकि, यदि शुरुआत से ही शादी करने का इरादा नहीं था और झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाए गए, तो कानूनी स्थिति अलग होगी। ऐसे मामलों में आरोपी की शुरुआती मंशा और सहमति हासिल करने की परिस्थितियां महत्वपूर्ण होंगी।

    यह टिप्पणी जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने शादी का झूठा वादा करके दुष्कर्म करने के आरोप से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने संबंधित मामले में आरोपी को आरोपों से मुक्त कर दिया। पीठ ने सुनवाई के दौरान सहमति से बने रिश्तों और उनके बाद समाप्त होने की परिस्थितियों के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट किया।

    अदालत के अनुसार, किसी रिश्ते का समाप्त हो जाना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि शुरुआत से ही शादी का वादा धोखे से किया गया था। दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से बना संबंध यदि बाद में किसी कारण से समाप्त हो जाता है, तो उसे केवल इसी आधार पर आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह देखना आवश्यक है कि संबंध बनाते समय दोनों पक्षों की सहमति किन परिस्थितियों में बनी थी।

    पीठ ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें आपसी सहमति से बने रिश्ते के खत्म होने के बाद आपराधिक कानून का सहारा लिया जाता है। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि संबंध टूटने और शुरुआत से धोखाधड़ी करने के इरादे के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी व्यक्ति का बाद में शादी करने से इनकार करना और शुरुआत से ही शादी का झूठा आश्वासन देना, दोनों परिस्थितियां कानूनी रूप से एक जैसी नहीं हैं।

    शादी के झूठे वादे से जुड़े मामलों में आरोपी की मंशा का आकलन संबंध की शुरुआत के समय से किया जाना चाहिए। यदि यह साबित होता है कि व्यक्ति ने शुरू से ही शादी करने का इरादा नहीं रखा था और केवल शारीरिक संबंध बनाने के उद्देश्य से झूठा वादा किया था, तो इसे सहमति से जुड़ा सामान्य मामला नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    सुनवाई के दौरान पीठ ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता के पहलू पर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा से रिश्ता समाप्त करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। यदि संबंध खत्म करने के डर से किसी व्यक्ति को उसे जारी रखने के लिए मजबूर महसूस करना पड़े, तो इससे उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित होगी। अदालत के मुताबिक, किसी रिश्ते को जारी रखना या समाप्त करना व्यक्तिगत निर्णय का विषय है। केवल अलग होने के फैसले को धोखाधड़ी या दुष्कर्म का आधार नहीं बनाया जा सकता।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यौन अपराधों की गंभीरता को भी रेखांकित किया। अदालत ने माना कि यौन हिंसा, दबाव या धोखे के माध्यम से सहमति प्राप्त करने के मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई जरूरी है। सामाजिक बदनामी और अन्य कारणों से कई महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से पीछे रह जाती हैं। इसलिए ऐसी शिकायतों को संवेदनशीलता और गंभीरता से देखना आवश्यक है।

    अदालत की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि सहमति से बने रिश्ते का टूटना और शुरुआत से शादी का झूठा वादा करके संबंध बनाना अलग-अलग कानूनी परिस्थितियां हैं। किसी मामले में अपराध तय करने के लिए केवल रिश्ते के अंत को आधार नहीं बनाया जा सकता, बल्कि शुरुआत से आरोपी की मंशा, सहमति की प्रकृति और उपलब्ध तथ्यों की जांच जरूरी है।

  • लखनऊ ट्रिपल मर्डर का खौफनाक वीडियो वायरल, पहले बेटे को मारी गोली फिर पिता और चाचा पर बरसाईं गोलियां, दो बार लोड की पिस्टल

    लखनऊ ट्रिपल मर्डर का खौफनाक वीडियो वायरल, पहले बेटे को मारी गोली फिर पिता और चाचा पर बरसाईं गोलियां, दो बार लोड की पिस्टल


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए सनसनीखेज ट्रिपल मर्डर मामले ने पूरे इलाके को दहला दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े नेता शिवा तिवारी उनके बेटे सुयश और भाई शिवेंद्र की हत्या का खौफनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। करीब दो मिनट 56 सेकेंड के इस वीडियो में आरोपी ऋषभ शुक्ला की पूरी वारदात कैमरे में कैद दिखाई दे रही है। वीडियो में आरोपी जिस तरह बेखौफ होकर एक के बाद एक गोलियां चलाता नजर आ रहा है उससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इस हत्याकांड के सामने आने के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।

    वायरल वीडियो के मुताबिक वारदात की शुरुआत पड़ोसियों के बीच हुए विवाद से हुई थी। शिवा तिवारी और उनके पड़ोसी ऋषभ शुक्ला के बीच पेड़ के चबूतरे के निर्माण और वहां कार खड़ी करने को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी बात को लेकर पहले ऋषभ और शिवा के बेटे सुयश के बीच कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। इसी दौरान ऋषभ ने पिस्टल निकालकर फायरिंग शुरू कर दी। वीडियो में दिखाई देता है कि उसने सबसे पहले सुयश को गोली मारी। गोली लगने के बाद सुयश जमीन पर गिर पड़ा।

    बेटे को गोली लगते देख शिवा तिवारी उसे बचाने के लिए दौड़े लेकिन आरोपी ने उन पर भी फायरिंग कर दी। शिवा के सिर में गोली लगी और वे जमीन पर गिर पड़े। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुका और उन पर दोबारा गोलियां चलाईं। घटनास्थल पर मौजूद परिवार की महिलाओं की चीख पुकार के बीच आरोपी लगातार आक्रामक बना रहा। वीडियो में उसकी हरकतों से साफ दिखाई देता है कि वह किसी को भी अपने सामने आने देने के लिए तैयार नहीं था।

    इसी बीच शिवा तिवारी के भाई शिवेंद्र भी मौके पर पहुंचे। आरोपी ने उन्हें भी निशाना बनाया और उन पर कई गोलियां चलाईं। इस दौरान शिवेंद्र की बेटी सुमेधा अपने पिता को बचाने के लिए आरोपी के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाती रही। वह लगातार रहम की गुहार लगाती रही लेकिन आरोपी ने उसकी बात नहीं मानी। वीडियो में परिवार के लोगों की बेबसी और आसपास मौजूद महिलाओं की चीखें सुनाई देती हैं। यह दृश्य पूरे घटनाक्रम को और भी भयावह बना देता है।

    वीडियो में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। फायरिंग के दौरान आरोपी की पिस्टल की मैगजीन खाली हो गई थी। इसके बाद उसने दोबारा मैगजीन लोड की और फिर से गोलियां चलानी शुरू कर दीं। तीन लोगों पर हमला करने के बाद भी उसका गुस्सा शांत नहीं हुआ। आसपास के कुछ लोग जब घायलों की मदद के लिए आगे बढ़े तो आरोपी ने उन्हें भी पिस्टल दिखाकर पीछे हटने की धमकी दी। गोलियों की आवाज सुनते ही मोहल्ले में अफरा तफरी मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर भागने लगे।

    घटना का एक दूसरा वीडियो भी सामने आया है जिसमें पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचकर आरोपी ऋषभ को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने उसे हिरासत में लिया और उसके परिवार के कुछ सदस्यों को भी पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। इस हत्याकांड के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।

    एक मामूली पड़ोसी विवाद का इस तरह तीन लोगों की हत्या में बदल जाना कई सवाल खड़े करता है। पेड़ के चबूतरे और कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद आखिर इतना हिंसक कैसे हो गया इसकी जांच की जा रही है। वायरल वीडियो ने इस घटना की भयावहता को सामने ला दिया है और अब सभी की नजर पुलिस की जांच तथा आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।

  • 100 फीसदी एथनॉल वाले ईंधन को मंजूरी देने पर SC ने सरकार से पूछा-कैसे करेंगे सप्लाई?

    100 फीसदी एथनॉल वाले ईंधन को मंजूरी देने पर SC ने सरकार से पूछा-कैसे करेंगे सप्लाई?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को सरकार (Government) से पूछा कि अगर 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों (ई-100) को अनुमति दी गई है, तो ईधन (100% Ethanol Fuel) की सप्लाई कैसे की जाएगी। ‘एथनॉल सप्लाई ईयर’ (ईएसवाई) 2025-26 (‘Ethanol Supply Year’ (ESY) 2025-26) के लिए एथेनॉल आवंटन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मुद्दे पर हाल ही में आई मीडिया रिपोर्टों का जिक्र किया।

    इस दौरान जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने कहा कि हाल ही में हमने कुछ अखबारों की रिपोर्ट देखीं, जिनमें कहा गया है कि 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है। पीठ ने पूछा कि हम बस यह जानना चाहते हैं कि अगर 100 प्रतिशत एथनॉल से चलने वाले वाहनों को अनुमति दी गई है, तो आप इनकी सप्लाई कैसे करेंगे?


    ई-100 को मिली है मंजूरी

    इस पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा है कि इसके लिए बड़े पैमाने पर विनिर्माण व्यवस्था में बदलाव करने होंगे। गौरतलब है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन अधिसूचित किया था। इसके तहत ई100 यानी लगभग शुद्ध एथनॉल से चलने वाले वाहनों को भी नियमों में शामिल किया गया है। इससे पहले ई-85 जैसे अधिक एथनॉल मिश्रण वाले ईंधन से चलने वाले वाहनों का प्रावधान था।


    क्या कह रही सरकार?

    हालांकि, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 27 अक्टूबर को कहा था कि सरकार की पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण मौजूदा 20 प्रतिशत से तत्काल आगे बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने किसानों को सशक्त बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इस मुद्दे को व्यापक जनहित और पर्यावरण के नजरिये से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश की बड़ी आबादी, खासकर गांवों में रहने वाले किसानों के हितों पर भी ध्यान देना होगा।


    किसानों से की जाएगी बात

    जस्टिस सुंदरेश ने कहा, ”देश की बड़ी आबादी के नजरिये से तीसरा पहलू, जो मुझे सबसे महत्वपूर्ण लगता है, वह किसान हैं। हमें इस पहलू पर ध्यान देना होगा कि किसानों को किस तरह सशक्त बनाया जाए। इस पर कोई भी बात नहीं कर रहा है।” इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वह मामले में अपनी दलीलों के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दे पर भी बात करेंगे। शीर्ष अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए टाल दी गई। बता दें कि उच्चतम न्यायालय 2025-26 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए आवंटन बढ़ाने से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा है।

  • SC कोर्ट बोला- डिजिटल ठगी के मामलों में तय हो बैंकों की जवाबदेही….गलती पाए जाने पर भरपाई करवाएं

    SC कोर्ट बोला- डिजिटल ठगी के मामलों में तय हो बैंकों की जवाबदेही….गलती पाए जाने पर भरपाई करवाएं


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और साइबर धोखाधड़ी (Cyber ​​fraud) के मामलों में यदि वित्तीय संस्थानों (Financial Institutions) की लापरवाही सामने आती है तो पीड़ितों के नुकसान की भरपाई बैंकों को ही करनी होगी। ऐसे मामलों में बैंकों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह ऐसे कड़े निर्देश जारी करने पर विचार कर रही है, जिनके तहत बैंक अधिकारियों की चूक से हुई ठगी में बैंक पीड़ितों को गंवाई गई रकम के बराबर मुआवजा दें और उन पर मुकदमा भी चलाया जाए। अदालत ने जोर देकर कहा कि बैंकों को संभावित शिकार बन सकने वाले खाताधारकों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करना चाहिए।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से तीखा सवाल किया कि किसी सेवानिवृत्त व्यक्ति के खाते से असामान्य रूप से भारी रकम निकाले जाने पर समय रहते लेन-देन क्यों नहीं रोका जाता?


    रिपोर्ट तैयार करना केवल पोस्टमॉर्टम जैसा

    पीठ ने कहा कि घटना के बाद रिपोर्ट तैयार करना केवल पोस्टमॉर्टम जैसा है। रोकथाम का क्या? जैसे ही संदिग्ध लेन-देन दिखे, उसे फौरन रोका क्यों नहीं जाता? मुख्य न्यायाधीश ने यह भी रेखांकित किया कि इस तरह की धोखाधड़ी के कई मामलों में बैंक अधिकारियों की कथित संलिप्तता ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।


    केवाईसी के नियमों में संशोधनों की समीक्षा होगी

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रस्तावित ‘अपने ग्राहक को जानिए’ (केवाईसी) संशोधन निर्देश, 2026 की समीक्षा करेगी, जिसके 30 नवंबर तक अधिसूचित और 31 दिसंबर तक लागू होने की उम्मीद है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस नियामक ढांचे में डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हुए लोगों को हर्जाना देने का ठोस प्रावधान होना चाहिए। पीठ ने माना कि बैंकों की जवाबदेही तय करने के साथ ‘म्यूल अकाउंट्स’ (ऐसे फर्जी खाते जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने के लिए किया जाता है) पर नकेल कसना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।


    मामले घटे, फिर भी हर साल अरबों की चपत

    सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि अदालती हस्तक्षेप, मंत्रालयों के समन्वित प्रयासों और जन-जागरूकता से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों में करीब 50 प्रतिशत की कमी आई है। इस पर सीजेआई ने ध्यान दिलाया कि इसके बावजूद इस साल देश को लगभग 800 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है।नागरिकों के लगातार ठगी का शिकार होने पर हैरानी जताते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि व्यापक अभियानों, मीडिया रिपोर्टों और अदालती आदेशों के बाद भी पढ़े-लिखे लोग जालसाजों के झांसे में आ रहे हैं। सीजेआई ने टिप्पणी की कि एक लोकतांत्रिक देश में कोई नागरिक यह कैसे मान लेता है कि उसे मोबाइल पर गिरफ्तार किया जा रहा है? मोबाइल को दीवार पर दे मारिए, गिरफ्तारी खत्म हो जाएगी।


    सीधी देनदारी तय करने का विरोध जताया

    सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने न्यायिक निर्देशों के जरिए बैंकों पर सीधी देनदारी तय करने का विरोध किया और दलील दी कि यह विषय नियामक के रूप में आरबीआई के दायरे में आता है। इस पर जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत वित्तीय संस्थानों पर कड़े नियम लागू कर सकती है और इसके लिए प्रत्येक बैंक को अलग से पक्षकार बनाने की आवश्यकता नहीं है।

  • रोहिणी आचार्य ने दिया बिहार में भाजपा और एनडीए को हराने का फॉर्मूला, सोशल मीडिया पर किया पोस्‍ट

    रोहिणी आचार्य ने दिया बिहार में भाजपा और एनडीए को हराने का फॉर्मूला, सोशल मीडिया पर किया पोस्‍ट


    पटना। बिहार (Bihar) में हाल ही में हुए विधान परिषद (MLC) चुनावों के नतीजों के बाद नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) की बेटी रोहिणी आचार्य (Rohini Acharya) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए भाजपा (BJP) और एनडीए (NDA) को हराने का नया फॉर्मूला पेश किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर तेजस्वी यादव और जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर एक साथ आ जाएं, तो बिहार में भाजपा और एनडीए को शून्य पर समेटा जा सकता है।

    रोहिणी ने पोस्ट में लिखा- TJ + PK = BJP/NDA ZERO
    रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “बिहार में हुए एमएलसी चुनावों ने बीजेपी/एनडीए को हराने का फॉर्मूला दे दिया है। TJ + PK = BJP/NDA ZERO. राजद और जन सुराज को मिले वोट को अगर जोड़ दिया जाए तो बीजेपी/एनडीए सभी आठ सीटों पर प्रथम चरण में ही हार जाएगी। आगे-आगे देखिए होता है क्या!”

    इस पोस्ट के जरिए रोहिणी ने तेजस्वी यादव (TJ) और प्रशांत किशोर (PK) के बीच संभावित राजनीतिक तालमेल की ओर इशारा किया है। उनके संदेश का मुख्य संकेत विपक्षी वोटों का बंटवारा रोकने और उन्हें एकजुट करने की रणनीति पर है।

    MLC चुनाव के नतीजों से निकाला सियासी गणित
    हाल ही में हुए विधान परिषद चुनावों में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने एक सीट पर जीत दर्ज की, जबकि लालू प्रसाद यादव की राजद को दो सीटें मिलीं। रोहिणी आचार्य का तर्क है कि दोनों दलों को मिले वोटों को जोड़ दिया जाए तो एनडीए के लिए सभी आठ सीटों पर जीत हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

    हालांकि, अलग-अलग उम्मीदवारों, क्षेत्रों और चुनावी परिस्थितियों में मिले वोटों को जोड़कर संभावित नतीजों का अनुमान लगाना एक राजनीतिक गणित है। इससे वास्तविक चुनाव में नतीजे की पुष्टि नहीं होती।

    तेजस्वी और प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया का इंतजार
    रोहिणी आचार्य की इस टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीति में राजद और जन सुराज के संभावित गठजोड़ को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उनके बयान को विपक्षी वोटों को एकजुट करने की जरूरत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    अब निगाहें तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर पर हैं कि वे रोहिणी आचार्य के इस सुझाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल दोनों दलों के बीच किसी संभावित राजनीतिक गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

  • दिल्ली में 16 नवंबर तक तैनात रहेंगे 27 हजार पैरामिलिट्री जवान, INDIA ब्लॉक की रैली के चलते बढ़ाई गई सुरक्षा

    दिल्ली में 16 नवंबर तक तैनात रहेंगे 27 हजार पैरामिलिट्री जवान, INDIA ब्लॉक की रैली के चलते बढ़ाई गई सुरक्षा


    नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर 27 हजार पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती 16 नवंबर तक बढ़ा दी गई है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली INDIA ब्लॉक की रैली और कुछ संगठनों की ओर से अचानक विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है। त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है।

    गृह मंत्रालय ने गुरुवार को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 270 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर से 16 नवंबर तक बढ़ाने का आदेश जारी किया। दिल्ली में इन जवानों की तैनाती की अवधि तीसरी बार बढ़ाई गई है। इससे पहले भी इसी महीने दो बार ऐसा निर्णय लिया जा चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर गृह मंत्रालय ने तैनाती जारी रखने की मंजूरी दी है।

    दिल्ली पुलिस के साथ मोर्चा संभालेंगे 27 हजार जवान
    सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए 270 कंपनियों को दिल्ली पुलिस के साथ तैनात किया गया है। इन जवानों की तैनाती और उनके कामकाज में समन्वय की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस को सौंपी गई है।

    इन कंपनियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 125 कंपनियां शामिल हैं। इनमें 17 महिला यूनिट भी हैं। इसके अलावा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 20, सीमा सुरक्षा बल (BSF) की 46, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 39, सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 31 और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की 12 कंपनियां तैनात हैं।

    एक कंपनी में स्वीकृत संख्या 100 जवानों की होती है, लेकिन ड्यूटी के लिए सामान्यत: 70 से 72 जवान ही उपलब्ध रहते हैं। इसी आधार पर 270 कंपनियों में करीब 27 हजार जवानों की तैनाती बताई जा रही है।

    1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली
    कांग्रेस ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर INDIA ब्लॉक के बैनर तले ‘चलो दिल्ली मार्च’ का ऐलान किया है। यह मार्च 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली के साथ संपन्न होगा। इसमें विपक्षी दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की संभावना है। रैली को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं।

    गृह मंत्रालय को कुछ संगठनों की ओर से अचानक विरोध प्रदर्शन किए जाने की आशंका भी है। ऐसे में रैली के अलावा अन्य संभावित प्रदर्शनों और त्योहारों के मद्देनजर भी सुरक्षा बलों की तैनाती जारी रखने का फैसला किया गया है।

    CJP के प्रदर्शनों के बाद दिल्ली बुलाए गए थे जवान
    अक्टूबर की शुरुआत में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों के बाद पैरामिलिट्री बलों को दिल्ली बुलाया गया था। 9 अक्टूबर को राजधानी के कुछ इलाकों में प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में गड़बड़ियां हुई हैं।

    इसके बाद विपक्षी दलों ने भी इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए थे। CJP ने 16 अक्टूबर को ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन किया था। इस संगठन ने INDIA ब्लॉक की रैली को समर्थन देने का भी ऐलान किया है। इन गतिविधियों और त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब दिल्ली में पैरामिलिट्री बलों की तैनाती 16 नवंबर तक जारी रहेगी।

  • लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    लेक्चरर से IAS बनने तक सौम्या मिश्रा का सफर, तीन असफलताओं के बाद चौथे प्रयास में हासिल की 18वीं रैंक

    नई दिल्ली । सफलता की राह में आने वाली असफलताएं कई बार इंसान के धैर्य और संकल्प की परीक्षा लेती हैं। मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी सौम्या मिश्रा की कहानी इसी बात का उदाहरण है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कॉलेज में लेक्चरर के रूप में की थी, लेकिन उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में पहुंचना था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की और शुरुआती तीन प्रयासों में असफल रहने के बाद भी तैयारी जारी रखी। आखिरकार चौथे प्रयास में उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 18वीं रैंक हासिल की।

    सौम्या मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली हैं। शिक्षा के क्षेत्र में लेक्चरर के रूप में काम करने के दौरान उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की दिशा में कदम बढ़ाया। उनका सफर बताता है कि करियर की शुरुआत किसी एक क्षेत्र से होने के बावजूद व्यक्ति अपने लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ सकता है। इसके लिए निरंतर प्रयास और कठिन परिस्थितियों में भी तैयारी जारी रखना महत्वपूर्ण होता है।

    सौम्या ने वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी UPPSC की परीक्षा पास की थी। इस परीक्षा में उन्होंने दूसरा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि उनके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव रही। हालांकि, उनका प्रयास यहीं तक सीमित नहीं रहा। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की, जिसे देश की प्रमुख और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में गिना जाता है।

    UPSC की तैयारी के दौरान सौम्या को लगातार तीन प्रयासों में सफलता नहीं मिली। किसी भी अभ्यर्थी के लिए बार-बार असफल होना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर तब जब परीक्षा की तैयारी में लंबा समय और निरंतर मेहनत लगती हो। इसके बावजूद सौम्या ने अपने लक्ष्य से दूरी नहीं बनाई। उन्होंने चौथे प्रयास में परीक्षा पास करते हुए ऑल इंडिया रैंक 18 हासिल की। इस उपलब्धि ने उन्हें प्रशासनिक सेवा तक पहुंचाया और उनकी मेहनत को एक नई पहचान मिली।

    वर्तमान में सौम्या मिश्रा मध्य प्रदेश के सिंगरौली में पदस्थ IAS अधिकारी हैं। उनकी यात्रा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो शुरुआती नाकामी के बाद अपने लक्ष्य को लेकर असमंजस में पड़ जाते हैं। उनकी उपलब्धियों से यह स्पष्ट होता है कि असफलता के बाद तैयारी जारी रखना और अपने प्रयासों में सुधार करते रहना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सौम्या मिश्रा की कहानी की एक और खास बात यह है कि उनकी छोटी बहन सुमेघा मिश्रा ने भी सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की है। सुमेघा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2024 में 253वीं रैंक प्राप्त की। दोनों बहनों की उपलब्धियां परिवार के लिए गौरव का विषय हैं। एक ओर सौम्या ने कई प्रयासों के बाद देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की, वहीं सुमेघा ने भी अपनी मेहनत से परीक्षा में स्थान बनाया।

    दोनों बहनों की सफलता यह दिखाती है कि बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए नियमित मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास का महत्व बना रहता है। सौम्या का लेक्चरर से IAS अधिकारी बनने तक का सफर खास तौर पर उन युवाओं को प्रेरित कर सकता है, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार प्रयास कर रहे हैं। उनकी कहानी का मुख्य संदेश यही है कि शुरुआती असफलताओं को अंतिम परिणाम मानने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जनता का महाभियोग’ की तैयारी, खड़गे के आवास पर जुटे इंडिया गठबंधन के नेता

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की ‘जनता का महाभियोग’ की तैयारी, खड़गे के आवास पर जुटे इंडिया गठबंधन के नेता


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी इंडिया गठबंधन ने ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम की तैयारी तेज कर दी है। इसी सिलसिले में गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा सहित गठबंधन के कई नेता शामिल हुए। बैठक में आगामी विरोध कार्यक्रम और 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर चर्चा की गई। विपक्षी दल चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंकाओं को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।

    कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने और चुनावी व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी मांग के तहत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए।

    कांग्रेस नेता जयराम रमेश के अनुसार, 30 अक्टूबर को दोपहर 3:30 बजे नई दिल्ली स्थित 10 राजाजी मार्ग पर ‘जनता का महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। यह स्थान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का आवास है। कार्यक्रम के जरिए विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच उठाने और चुनावी व्यवस्था से जुड़े अपने आरोपों को सामने रखने की तैयारी कर रहा है। इसके अगले दिन यानी 1 नवंबर को रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली प्रस्तावित है। बैठक को इस रैली से पहले विपक्षी दलों की रणनीति तय करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।

    झारखंड मुक्ति मोर्चा की सांसद महुआ माजी ने प्रस्तावित कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए इसके सफल होने की उम्मीद जताई। उनके मुताबिक, इसमें सांसदों, राजनीतिक दलों के नेताओं, नागरिक समाज के सदस्यों, बुद्धिजीवियों और उन मतदाताओं की भागीदारी हो सकती है, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित लोग अपने विचार रखेंगे और यह लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का माध्यम बनेगा।

    दिल्ली के व्यापारियों की ओर से गठबंधन की रैली को लेकर जताई जा रही चिंता पर भी महुआ माजी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें कार्यक्रम को लोकतंत्र की रक्षा और लोगों की आवाज उठाने के उद्देश्य से आयोजित बताया गया है। महुआ माजी ने कहा कि यदि केंद्र सरकार व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग स्वीकार कर लेती है, तो उनके अनुसार विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में समाप्त हो सकता है। यह उनकी ओर से दिया गया राजनीतिक बयान है।

    बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ गौरव गोगोई ने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गौरव गोगोई ने भाजपा पर कथित अनियमितताओं से जुड़ी सच्चाई सामने आने से रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष जनता के सामने यह मुद्दा रखना चाहता है कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां किस तरह हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान की भावना का उल्लंघन करने और चुनावी लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, ये विपक्ष के आरोप हैं। फिलहाल, 30 अक्टूबर के प्रस्तावित कार्यक्रम और 1 नवंबर की रैली पर राजनीतिक गतिविधियां केंद्रित हैं। इन आयोजनों के जरिए विपक्ष एसआईआर, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

  • ट्रेन के टॉयलेट में पानी नहीं मिलने से बीच सफर उतर गया परिवार, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर लगाया 16 हजार रुपये का भुगतान

    ट्रेन के टॉयलेट में पानी नहीं मिलने से बीच सफर उतर गया परिवार, उपभोक्ता आयोग ने रेलवे पर लगाया 16 हजार रुपये का भुगतान

    नई दिल्ली । ट्रेन में बुनियादी सुविधाओं की कमी यात्रियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। कर्नाटक में एक परिवार को यात्रा के दौरान शौचालयों में पानी नहीं मिलने के कारण अपना सफर बीच में ही छोड़ना पड़ा। परिवार का आरोप था कि तुमकुरु रेलवे स्टेशन पर मदद मांगने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद यात्रियों को दूसरी ट्रेन से आगे की यात्रा करनी पड़ी, जिसके लिए उन्हें अतिरिक्त टिकट खरीदने पड़े। अब जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मामले में रेलवे को मूल किराया ब्याज सहित लौटाने और मुआवजे के साथ मुकदमे का खर्च देने का आदेश दिया है।

    यह मामला ट्रेन नंबर 66575 से जुड़ा है। शिवमोगा के बसवनगुडी स्थित पीडब्ल्यूडी क्वार्टर्स में रहने वाले नागेंद्र अपने 23 परिवारजनों और रिश्तेदारों के साथ यशवंतपुर से शिवमोगा जा रहे थे। समूह में कुल 24 लोग शामिल थे। सभी यात्रियों ने यात्रा के लिए कुल 1,000 रुपये के जनरल टिकट खरीदे थे।

    यात्रा के दौरान परिवार के सदस्यों ने शिकायत की कि ट्रेन के शौचालयों में पानी उपलब्ध नहीं था। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने तुमकुरु रेलवे स्टेशन पर स्टेशन मास्टर से संपर्क कर सहायता मांगी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। समस्या दूर नहीं होने पर परिवार ने ट्रेन से उतरकर दूसरी ट्रेन पकड़ने का फैसला किया।

    दूसरी ट्रेन से आगे जाने के लिए परिवार को नए टिकट खरीदने पड़े। इस वजह से उन्हें 1,760 रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़े। यात्रियों का कहना था कि यदि ट्रेन में जरूरी सुविधा उपलब्ध होती और समय पर सहायता मिल जाती, तो उन्हें बीच रास्ते में यात्रा बदलने की जरूरत नहीं पड़ती।

    इस घटना के बाद नागेंद्र ने रेलवे अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। हालांकि, नोटिस का जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने शिवमोगा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में ट्रेन के शौचालयों में पानी नहीं होने, स्टेशन पर मदद नहीं मिलने और दूसरी ट्रेन से यात्रा करने के कारण हुए अतिरिक्त खर्च का मुद्दा उठाया गया।

    मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने 23 अक्टूबर को अपना आदेश सुनाया। आयोग के अध्यक्ष टी. शिवन्ना और सदस्य बीडी योगानंद भंड्या की पीठ ने दक्षिण पश्चिम रेलवे के बेंगलुरु और तुमकुरु स्टेशन मास्टरों को मूल टिकट किराया लौटाने का निर्देश दिया। आदेश के अनुसार, रेलवे को नागेंद्र को 1,000 रुपये का मूल किराया 15 अप्रैल 2025 से छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करना होगा।

    इसके अतिरिक्त, परिवार को हुई परेशानी के लिए 10,000 रुपये मुआवजा और मुकदमे पर हुए खर्च के लिए 5,000 रुपये देने होंगे। इस प्रकार मूल किराये की वापसी, मुआवजे और कानूनी खर्च को मिलाकर रेलवे को कुल 16,000 रुपये का भुगतान करना होगा। मूल किराये पर निर्धारित ब्याज की राशि इसके अतिरिक्त होगी।

    आयोग ने भुगतान के लिए रेलवे को 45 दिन का समय दिया है। निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं होने पर देय राशि पर 10 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा, जो पूरा भुगतान होने तक लागू रहेगा। इस मामले में आयोग ने ट्रेन में पानी जैसी बुनियादी सुविधा की कमी और स्टेशन पर सहायता नहीं मिलने से यात्रियों को हुई परेशानी को सेवा में कमी के रूप में देखा।