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  • वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका

    वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट ने मतदान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक नागरिकों का मतदान केंद्र तक पहुंचना जरूरी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वोटिंग को अनिवार्य बनाने जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोग अपने मताधिकार का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें।

    यह टिप्पणी उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई है कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार ही मैदान में हो, तब भी उसे निर्विरोध विजयी घोषित करने के बजाय चुनाव कराया जाए, ताकि मतदाता “इनमें से कोई नहीं” (NOTA) का विकल्प चुन सकें।


    अदालत ने पूछा—क्या NOTA से बदली है स्थिति?

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि NOTA लागू होने के बाद क्या वास्तव में:

    • मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है?

    • उम्मीदवारों की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है?

    अदालत ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि कोई प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए—बहुत कठोर नहीं, लेकिन ऐसी कि नागरिक मतदान के लिए प्रेरित हों।


    ग्रामीण बनाम शहरी मतदान पर भी चर्चा

    सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को अक्सर एक उत्सव की तरह देखा जाता है। लोग समूह में मतदान करने जाते हैं, जबकि अनुभव बताता है कि शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग कई बार मतदान में अपेक्षाकृत कम भागीदारी करता है।


    किस प्रावधान को दी गई है चुनौती?

    याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की उस धारा को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यदि चुनाव मैदान में केवल एक उम्मीदवार रह जाता है, तो उसे बिना मतदान के निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस स्थिति में मतदाताओं को NOTA का विकल्प प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिलता, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति सीमित हो जाती है।


    याचिकाकर्ताओं का पक्ष

    याचिका में कहा गया कि यदि NOTA के परिणामों को वास्तविक प्रभाव दिया जाए, तो अधिक मतदाता मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वर्तमान व्यवस्था में NOTA चुनने का कोई प्रत्यक्ष परिणाम नहीं निकलता, जिससे मतदाताओं का उत्साह कम होता है।


    व्यापक बहस की शुरुआत

    अदालत की इन टिप्पणियों ने अनिवार्य मतदान, मतदाता सहभागिता और NOTA की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। मामला अभी विचाराधीन है और आगे की सुनवाई में इस पर विस्तृत कानूनी विमर्श होने की संभावना है।

  • सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'

    सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रोड एक्सीडेंट्स में तुरंत मदद देने और पीड़ितों की जान बचाने के मकसद से ‘राह-वीर योजना’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत, जो भी नागरिक किसी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करेगा और उसे अस्पताल पहुंचाएगा, उसे सरकार ₹25,000 कैश प्राइज के साथ एक सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्कीम का ऐलान करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य समाज में अच्छे काम करने वालों का मनोबल बढ़ाना और लोगों को तुरंत मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

    गोल्डन आवर में जान बचाने का मकसद
    ‘राह-वीर योजना’ का सबसे बड़ा लक्ष्य एक्सीडेंट के तुरंत बाद के शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ का सही इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घायल व्यक्ति को एक्सीडेंट के तुरंत बाद मेडिकल मदद मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि लोग पुलिसिया कार्रवाई या कानूनी झंझटों के डर को भूलकर मानवीय आधार पर मदद के लिए आगे आएं और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाएं।

    ईनाम की धनराशि और राष्ट्रीय सम्मान
    स्कीम के नियमों के अनुसार, एक ही एक्सीडेंट में अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक पीड़ितों की सहायता करता है, तो भी उसे अधिकतम ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि ही दी जाएगी। इसके अलावा, साल भर में चुने गए 10 सबसे बेहतरीन ‘राह-वीरों’ को केंद्र सरकार की ओर से1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्रमाण पत्र देकर विशेष सम्मानित किया जाएगा।
    कानूनी डर को खत्म करने की पहल
    ‘राह-वीर योजना’ केवल वित्तीय मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि एक्सीडेंट पीड़ितों की मदद करना अब किसी कानूनी जोखिम का कारण नहीं बनेगा। अक्सर लोग पूछताछ और अदालती प्रक्रिया के डर से मदद करने से कतराते हैं, लेकिन इस स्कीम के तहत मददगारों को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें समाज के रक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
  • भारत इजराइल साझेदारी आपसी फायदे के साथ दुनिया को स्थिर और खुशहाल बनाने में दे रही योगदान : PM मोदी

    भारत इजराइल साझेदारी आपसी फायदे के साथ दुनिया को स्थिर और खुशहाल बनाने में दे रही योगदान : PM मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को इजराइली संसद (नेसेट) (Israeli Parliament (Knesset) को संबोधित किया और कहा कि दोनों देशों की मजबूत साझेदारी आपसी फायदे के साथ ही दुनिया भर में स्थिरता और खुशहाली में भी योगदान देती है। हमें पक्का करना चाहिए कि भारत और इजराइल के बीच दोस्ती अनिश्चित दुनिया में ताकत का जरिया बनी रहे।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने इजराइल में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और गाजा शांति योजना का समर्थन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि इजराइली संसद को संबोधित करना उनके लिए गरिमा और सम्मान की बात है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत ने जिस दिन इजराइल को देश के रूप में मान्यता दी थी उसी दिन (17 सितंबर 1950) उनका जन्म हुआ था।

    अपने भाषण में आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए मोदी ने इजराइल के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवाद का लक्ष्य समाज को अस्थिर करना, विकास को रोकना और भरोसा खत्म करना है। इस पर किसी भी तरह से दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। साथ ही समन्वय और सतत प्रयास के साथ आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत गाजा शांति योजना को पूर्ण समर्थन देता है।

    प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उन्हें “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मोदी यह मेडल पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जो नेसेट का सबसे बड़ा सम्मान है।

    भारत और इजराइल के बीच के हजारों साल पुराने सभ्यगत संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक संबंध दोनों देशों की दोस्ती का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि यहूदी भारत में ना सताए गए और ना ही उनके साथ कभी भेदभाव हुआ। इस दौरान भारत की विकास यात्रा में योगदान देने वाले प्रमुख यहूदी के नाम भी उन्होंने उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदले जाने के बाद से इसका स्तर और दायरा बहुत बढ़ा है। भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है ऐसे में नवाचार और तकनीकी में आगे इजराइल के साथ उसके संबंध स्वभावी तौर पर भविष्य उन्मुख साझेदारी के संकेत हैं। प्रधानमंत्री ने क्वांटम कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया।

    प्रधानमंत्री ने इजराइल में योग को मिलते विस्तार और आयुर्वेद में बढ़ती रुचि का जिक्र करते हुए इजराइली युवाओं को भारत आने और चिकित्सा प्रणाली से जोड़ने का आह्वान किया।

    इससे पहले, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की बिना कोई इधर-उधर की बात किये इजराइल के साथ खड़े रहने की सराहना की। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने नरेन्द्र मोदी के दोनों देशों के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने में योगदान की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसके चलते दोनों देशों का व्यापार दो गुना, सहयोग तीन गुना और समझ चार गुना हुई है।

    इजराइली प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की विश्व नेताओं के साथ गले लगने की विशेष अभिवादन शैली की तारीफ करते हुए कहा कि इस दुनिया में मोदी हग के रूप में जाना जाता है।

    नेतन्याहू ने इस बात को रेखांकित किया कि यहूदी दुनिया में केवल भारत में ही भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।

  • कौन हैं 8 वर्षीय टेक्नोलॉजिस्ट रणवीर सचदेवा? AI समिट में छाए नन्हे स्पीकर के मुरीद हुए दिग्गज

    कौन हैं 8 वर्षीय टेक्नोलॉजिस्ट रणवीर सचदेवा? AI समिट में छाए नन्हे स्पीकर के मुरीद हुए दिग्गज


    नई दिल्ली ।नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट में उस वक्त सभी की नजरें एक आठ वर्षीय बच्चे पर टिक गईं जब उसने मंच संभालते हुए खुद को टेक्नोलॉजिस्ट के रूप में परिचित कराया। यह बच्चा है रणवीर सचदेवा जो अपनी कम उम्र में ही कोडिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पब्लिक स्पीकिंग के लिए चर्चा में हैं। देश-दुनिया के बड़े टेक लीडर्स और सीईओ के बीच रणवीर ने जिस आत्मविश्वास से अपनी बात रखी उसने सभी को प्रभावित किया।

    समिट के दौरान रणवीर ने प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़ने का अपना विजन साझा किया। वे इस कार्यक्रम में संबोधित करने वाले सबसे कम उम्र के स्पीकर रहे। खास बात यह रही कि रणवीर केवल कीनोट स्पीकर ही नहीं बल्कि एक ग्लोबल ऑथर के रूप में भी पहचान बना चुके हैं।

    कार्यक्रम में उनकी मुलाकात सुंदर पिचाई और सैम ऑल्टमैन से हुई। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में रणवीर सैम ऑल्टमैन के साथ बातचीत करते नजर आए। बताया जा रहा है कि दोनों टेक लीडर्स रणवीर के आत्मविश्वास और समझ से काफी प्रभावित हुए और उनसे संपर्क भी साझा किया।

    रणवीर का सफर केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। वे पिछले वर्ष जेनेवा में आयोजित AI अच्छे वैश्विक शिखर सम्मेलन के लिए में भी शामिल हो चुके हैं। वहां उनकी मुलाकात मार्क बेनिओफ़ और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन की महासचिव डोरेन बोगदान-मार्टिन से हुई थी। इतना ही नहीं वर्ष 2024 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की थी।

    रणवीर इससे पहले भी कई बड़े मंचों पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। वर्ष 2023 में दिल्ली में एप्पल स्टोर के उद्घाटन के दौरान उन्होंने एप्पल के सीईओ Tim Cook से मुलाकात की थी और मात्र पांच साल की उम्र में अपने कोडिंग अनुभव साझा किए थे। साल 2022 में वे ग्लोबल रीडिंग चैलेंज में सुपर प्रेजेंटर के रूप में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं।

    छह वर्ष की आयु में वे टेडएक्स  स्पीकर भी बन गए थे। कम उम्र में वैश्विक मंचों पर अपनी पहचान बना रहे रणवीर सचदेवा आज कई बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा बनते जा रहे हैं। तकनीक की दुनिया में उनका आत्मविश्वास और विजन यह दिखाता है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती।

  • स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट

    स्वदेशी फ्रिगेट और एएसडब्ल्यू शिप: भारतीय नौसेना के लिए साल 2026 का खास स्टार्ट


    नई दिल्ली ।साल 2026 की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए बेहद खास होने जा रही है। नए साल के पहले तीन महीनों में नेवी में दो नई स्वदेशी वॉरशिप शामिल होने वाली हैं। यह कदम भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को बढ़ाने और 2047 तक पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

    इस क्रम में 27 फरवरी को चेन्नई पोर्ट पर स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘आईएनएस अंजदीप’ नेवी का हिस्सा बनेगा। यह शिप एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, लाइटवेट टॉरपीडो, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है और 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है। अंजदीप की एक बार में लगभग 3,300 किलोमीटर तक की क्षमता इसे एंटी-सबमरीन ऑपरेशन के लिए बेहद प्रभावी बनाती है।

    इसी के साथ 14 मार्च को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के नीलगिरी क्लास का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरि नौसेना में शामिल होगा। यह फ्रिगेट ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप वारफेयर में सक्षम है। इसके अलावा एयर डिफेंस के लिए लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल बराक-8 और एयर डिफेंस गन लगी हैं। एंटी-सबमरीन वारफेयर के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर मौजूद हैं।

    आईएनएस तारागिरि लंबी दूरी से आने वाले हमलों को डिटेक्ट, ट्रैक और इंटरसेप्ट करने के लिए सोनार, मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम से लैस है। इसमें दो हेलिकॉप्टरों के लिए हैंगर की सुविधा भी मौजूद है। 6,700 टन वजनी इस फ्रिगेट की रफ्तार 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे है।

    प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स में से अब तक चार मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा बनाए जा चुके हैं। पहले आईएनएस नीलगिरी, हिमगिरि और उदयगिरि को नौसेना में शामिल किया जा चुका है। इन फ्रिगेट्स में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से प्राप्त किए गए हैं। इनकी नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत और अत्याधुनिक क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।

    नीलगिरी क्लास के सभी वॉरशिप का डिजाइन नेवल डिजाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है और इनके नाम भारत की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं पर रखे गए हैं जैसे शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरि, तारागिरि, उदयगिरि, दूनागिरि, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।

    चीन और पाकिस्तान की सबमरीन क्षमता से निपटने के लिए एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) शैलो वॉटर क्राफ्ट परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इससे भारतीय नौसेना को तेज रफ्तार, मजबूती और रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साल 2026 के पहले तीन महीनों में इन दो वॉरशिप के शामिल होने से नौसेना की तैयारी और शक्ति में और मजबूती आएगी।
  • Beechcraft C90A King Air एयर एंबुलेंस हादसा: 39 साल पुराना विमान, 6600 घंटे की उड़ान के बाद झारखंड में क्रैश

    Beechcraft C90A King Air एयर एंबुलेंस हादसा: 39 साल पुराना विमान, 6600 घंटे की उड़ान के बाद झारखंड में क्रैश


    नई दिल्ली । झारखंड की राजधानी रांची के पास हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मंगलवार शाम क्रैश हुआ सात सीटों वाला बीचक्राफ्ट सी90ए किंग एयर विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक 6 600 घंटे से अधिक उड़ान भर चुका था। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई।

    यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे।

    विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला।

    तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था।

    गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

    झारखंड की राजधानी रांची के पास हुई एयर एंबुलेंस दुर्घटना को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। मंगलवार शाम क्रैश हुआ सात सीटों वाला बीचक्राफ्ट सी90ए (किंग एयर) विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक 6 600 घंटे से अधिक उड़ान भर चुका था। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर फैल गई।

    यह विमान रेडबर्ड एयरवेज द्वारा संचालित किया जा रहा था और रांची से दिल्ली के लिए उड़ान पर था। जानकारी के अनुसार विमान एक मरीज को लेकर दिल्ली जा रहा था। मृतकों में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार एक डॉक्टर एक पैरामेडिक दो परिचारक पायलट-इन-कमांड विवेक विकास भगत और फर्स्ट ऑफिसर सवराजदीप सिंह शामिल थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास लगभग 1 400 घंटे का उड़ान अनुभव था जबकि सह-पायलट सवराजदीप सिंह करीब 450 घंटे की उड़ान पूरी कर चुके थे।

    विमान ने 23 फरवरी की शाम करीब 7:11 बजे बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी और इसे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचना था। उड़ान भरने के तुरंत बाद चालक दल ने मौसम संबंधी कारणों से मार्ग बदलने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार टेकऑफ के लगभग 23 मिनट बाद विमान का एटीसी से संपर्क और रडार सिग्नल दोनों टूट गए। बाद में यह विमान चतरा जिले के सिमरिया क्षेत्र के पास एक वन क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मिला।

    तकनीकी विवरण के मुताबिक यह ट्विन-टर्बोप्रॉप विमान पी एंड डब्ल्यू पीटी6ए-21 इंजनों से लैस था। दुर्घटना के समय तक बाएं इंजन ने करीब 2 900 घंटे और दाएं इंजन ने लगभग 2 800 घंटे की उड़ान भरी थी। दोनों प्रोपेलर भी लगभग 2 500 घंटे उपयोग में आ चुके थे। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर विमान का अत्यधिक उपयोग नहीं किया गया था। इसका नवीनतम एयरवर्थनेस रिव्यू सर्टिफिकेट 21 जनवरी को जारी हुआ था जो एक वर्ष के लिए वैध था।

    गौरतलब है कि इस विमान में ब्लैक बॉक्स यानी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर स्थापित नहीं था। नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं के अनुसार 1987 में मूल प्रमाणीकरण के समय ऐसे उपकरण अनिवार्य नहीं थे इसलिए इसमें यह प्रणाली नहीं लगाई गई थी। अधिकतम 4 583 किलोग्राम उड़ान भार क्षमता वाले इस विमान के क्रैश की जांच अब संबंधित एजेंसियां कर रही हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

  • NCERT की 8वीं क्लास की किताब में ज्यूडिशियरी करप्शन पर CJI सूर्यकांत भड़के, बोले न्यायपालिका को बदनाम

    NCERT की 8वीं क्लास की किताब में ज्यूडिशियरी करप्शन पर CJI सूर्यकांत भड़के, बोले न्यायपालिका को बदनाम


    नई दिल्ली । दिल्ली में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग की 8वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में पहली बार ज्यूडिशियरी करप्शन नामक चैप्टर शामिल किया गया है। इस चैप्टर में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार लंबित मुकदमों की बड़ी संख्या और जजों की पर्याप्त कमी जैसे मुद्दों को समझाया गया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने इस कदम पर कड़ा विरोध जताया और इसे न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री देश में वकीलों और जजों के बीच चिंता का कारण बन रही है और वे न्यायपालिका की गरिमा को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं होने देंगे।

    CJI सूर्यकांत ने यह प्रतिक्रिया बुधवार 25 फरवरी 2026 को तब दी जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने मामले को उनके समक्ष उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका की छवि को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को मंजूरी नहीं दी जाएगी। न्यायपालिका में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार के मामलों को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही ठोस तंत्र मौजूद हैं और इनकी जानकारी बच्चों तक पहुंचाना इस तरह के ढंग में सही नहीं है।

    NCERT की नई किताब में हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका शीर्षक वाले चैप्टर में अदालतों के पदानुक्रम न्याय तक पहुंच और न्यायिक प्रणाली की चुनौतियों के समाधान का उल्लेख किया गया है। इस चैप्टर में यह भी बताया गया है कि जज एक आचार संहिता Code of Conduct के तहत बंधे होते हैं जो न केवल अदालत के भीतर बल्कि बाहर भी उनके आचरण को नियंत्रित करती है। गंभीर मामलों में जज को हटाने के संवैधानिक नियम पार्लियामेंट के इंपीचमेंट मोशन और केंद्रीय एवं राज्य स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों का भी जिक्र है।

    किताब में CPGRAMS सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रिवांस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए 2017 से 2021 के बीच लगभग 1,600 से अधिक शिकायतें प्राप्त होने का आंकड़ा भी साझा किया गया है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट में 81,000 हाईकोर्ट्स में 62.40 लाख और जिला तथा अधीनस्थ न्यायालयों में 4.70 करोड़ लंबित मामले होने का विवरण भी दिया गया है।

    सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार का सामना करने वाले मामले सही रूप में और संतुलित तरीके से प्रस्तुत किए जाने चाहिए। गरीब और वंचित वर्ग के लिए न्याय तक पहुंच का मुद्दा गंभीर है लेकिन इसे पाठ्यपुस्तक में इस तरह से दर्शाना न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी है और वे किसी भी कदम को रोकने या संशोधित करने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

    इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों को शिक्षा में वास्तविकता और संवेदनशील विषयों को कैसे प्रस्तुत किया जाए ताकि उन्हें जानकारी मिल सके लेकिन संस्थाओं की छवि को बदनाम किए बिना। NCERT ने इस एडिशन में मुख्य रूप से सिस्टम की कमजोरियों और सुधार प्रयासों को उजागर किया है लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे संवेदनशील मानते हुए आगे कार्रवाई की संभावना जताई है।

  • दिल्ली सरकार ने बढ़ाया आयुष्मान भारत योजना का दायरा, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को मिलेगा कैशलेस स्वास्थ्य कवच

    दिल्ली सरकार ने बढ़ाया आयुष्मान भारत योजना का दायरा, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को मिलेगा कैशलेस स्वास्थ्य कवच


    नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना का दायरा बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि राजधानी के विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जोड़ा जाएगा। इस कदम से लगभग 3.96 लाख विधवा महिलाओं और 1.31 लाख दिव्यांग व्यक्तियों के परिवार अब स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ उठा सकेंगे।

    इस योजना के तहत ये लाभार्थी राजधानी के 208 सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार करा सकेंगे। राजधानी में योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है ताकि इलाज के खर्च का बोझ कम हो सके और गरीब नागरिक किसी बीमारी के चलते वंचित न रहें।

    रेखा गुप्ता ने बताया कि कैबिनेट के इस फैसले के बाद करीब 5.5 लाख अतिरिक्त परिवार अब आयुष्मान भारत योजना की सुरक्षा की छतरी के नीचे आ जाएंगे। ये परिवार पहले से योजना का लाभ ले रहे अंत्योदय अन्न योजना और प्राथमिकता PRS श्रेणी के परिवारों के अतिरिक्त होंगे। साथ ही 70 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक आशा कार्यकर्ता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और हेल्पर्स भी इस योजना के दायरे में शामिल रहेंगे।

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि दिल्ली का कोई गरीब कमजोर या जरूरतमंद नागरिक इलाज के अभाव में वंचित न रहे। योजना लागू होने के बाद लाभार्थियों को निजी या सरकारी अस्पतालों में बिना किसी अग्रिम भुगतान के इलाज की सुविधा प्राप्त होगी।

    अब तक दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना के तहत 7,23,707 कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 2,74,620 कार्ड वरिष्ठ नागरिकों को प्रदान किए गए हैं। राजधानी में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 208 अस्पतालों का नेटवर्क तैयार किया गया है जिसमें 156 निजी और 53 सरकारी अस्पताल शामिल हैं। दिल्ली राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के माध्यम से अब तक 29,120 से अधिक लाभार्थियों ने मुफ्त इलाज का लाभ प्राप्त किया है।

    इस योजना के विस्तार से न केवल विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को सीधे लाभ मिलेगा बल्कि यह उनके परिवारों के लिए भी आर्थिक राहत का साधन बनेगी। कैबिनेट के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य सुरक्षा को उच्च प्राथमिकता देती है और जरूरतमंद वर्ग तक इलाज की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कदम उठा रही है।

    इस पहल से राजधानी के गरीब और कमजोर वर्ग को मुफ्त और विश्वसनीय स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त होगी। योजना के तहत लाभार्थी सूचीबद्ध अस्पतालों में अस्पताल में भर्ती इलाज और आपातकालीन सेवाओं के लिए कैशलेस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इससे स्वास्थ्य सुरक्षा का व्यापक जाल तैयार हुआ है और दिल्ली की स्वास्थ्य प्रणाली और अधिक समावेशी और प्रभावी बन रही है।

    इस तरह दिल्ली सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के दायरे में विधवा और दिव्यांग पेंशनधारियों को जोड़कर लगभग 5.5 लाख नए परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच प्रदान किया है। यह कदम राजधानी के कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

  • PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता

    PM मोदी के इजरायल दौरे से पहले FTA पर नई पहल, भारत-इजरायल के बीच फिर शुरू हुई व्यापार वार्ता


    नई दिल्ली। भारत और इजरायल के बीच मुक्त व्यापार समझौते FTA को लेकर एक बार फिर सकारात्मक हलचल शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार को दो दिवसीय इजरायल दौरे से ठीक पहले दोनों देशों ने FTA पर औपचारिक चर्चा का पहला दौर शुरू कर दिया है।

    मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में पुष्टि की गई कि द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने और निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से वार्ता आगे बढ़ाई जा रही है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में दोनों देशों ने इस समझौते के लिए संदर्भ की शर्तों टीओआर पर हस्ताक्षर किए थे।

    23 फरवरी से नई दिल्ली में शुरू हुई वार्ता

    वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार भारत-इजरायल FTA के लिए बातचीत का पहला दौर 23 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ जो 26 फरवरी तक चलेगा। इससे पहले दोनों देशों के बीच आठ दौर की बातचीत हो चुकी थी लेकिन अक्टूबर 2021 के बाद यह प्रक्रिया ठप पड़ गई थी। अब एक बार फिर इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

    तकनीकी स्तर पर गहन चर्चा

    इस दौर में दोनों देशों के तकनीकी विशेषज्ञ अलग-अलग सत्रों में समझौते के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव अजय भादू कर रहे हैं जबकि इजरायल की ओर से वरिष्ठ निदेशक यिफ़ात अलोन पेरेल वार्ता की अगुवाई कर रही हैं।

    व्यापार में गिरावट समझौते से उम्मीद

    ऐसे मुक्त व्यापार समझौतों में आमतौर पर अधिकतम वस्तुओं पर आयात शुल्क में भारी कटौती या पूरी तरह समाप्ति की व्यवस्था की जाती है। साथ ही सेवाओं और निवेश से जुड़े नियमों को भी आसान बनाया जाता है।

    वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत से इजरायल को निर्यात 52% घटकर 2.14 अरब डॉलर रह गया जबकि आयात भी 26.2% की गिरावट के साथ 1.48 अरब डॉलर पर आ गया। ऐसे में FTA से दोनों देशों के व्यापार को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

  • तमिलनाडु में चुनाव से पहले बड़ा सियासी ऐलान, शशिकला बनाएंगी नई द्रविड़ पार्टी

    तमिलनाडु में चुनाव से पहले बड़ा सियासी ऐलान, शशिकला बनाएंगी नई द्रविड़ पार्टी

    चेन्नई। वी.के. शशिकला ने तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा करते हुए नई द्रविड़ पार्टी बनाने की घोषणा की है। यह ऐलान पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता की जयंती के मौके पर किया गया, जिससे राज्य में चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    जयललिता की विरासत के नाम पर नई शुरुआत

    शशिकला ने पार्टी का झंडा भी जारी किया, जिसमें द्रविड़ आंदोलन के प्रमुख नेताओं—सी. एन. अन्नादुरै, एम. जी. रामचंद्रन और जयललिता—की तस्वीरें शामिल हैं।

    उन्होंने कहा कि पार्टी का नाम जल्द घोषित किया जाएगा और यह फैसला अंतिम है।

    9 साल की चुप्पी तोड़ने का दावा

    शशिकला ने कहा कि पिछले नौ वर्षों तक सार्वजनिक रूप से सक्रिय न रहना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन अब जनता और कार्यकर्ताओं के हित में नई राजनीतिक शुरुआत जरूरी हो गई है। उन्होंने दावा किया कि नई पार्टी द्रविड़ विचारधारा को “मूल स्वरूप” में आगे बढ़ाएगी।

    AIADMK नेतृत्व पर लगाए गंभीर आरोप

    उन्होंने AIADMK के मौजूदा नेतृत्व, खासकर महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी पर तीखे आरोप लगाए। शशिकला ने कहा कि उन्होंने ही पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया, लेकिन बाद में उन्हें ही पार्टी से बाहर कर दिया गया।
    उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जेल में रहते समय उनकी पैरोल अवधि सीमित करने जैसे कदम उठाए गए।

    2016 की घटनाओं का किया जिक्र

    शशिकला ने कहा कि 2016 में जयललिता के निधन के बाद कई विधायक उन्हें मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने परंपरा और स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए ओ. पन्नीरसेल्वम को पद पर बने रहने दिया।

    उन्होंने दावा किया कि उस दौर में सरकार को गिरने से बचाने के लिए भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    चुनाव से पहले बदलेगा सियासी गणित?

    यह घोषणा 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले आई है, जब राज्य में राजनीतिक मुकाबला पहले से ही तेज है।
    वर्तमान में DMK की सरकार, जिसका नेतृत्व एम. के. स्टालिन कर रहे हैं, “द्रविड़ मॉडल” को आगे बढ़ा रही है। वहीं AIADMK अन्य दलों के साथ नए समीकरण बनाने की कोशिश में है।
    राजनीतिक मैदान में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम भी सक्रिय हो चुकी है।

    जनता से किए ये वादे

    शशिकला ने कहा कि उनकी नई पार्टी गरीबों, महिलाओं और आम लोगों के कल्याण, रोजगार सृजन और सामाजिक समानता पर फोकस करेगी। उन्होंने इसे “द्रविड़ आंदोलन की मूल भावना को पुनर्जीवित करने का प्रयास” बताया।

    संकेत साफ: चुनाव से पहले शशिकला की वापसी तमिलनाडु में एंटी-DMK वोटों के बंटवारे या नए ध्रुवीकरण की संभावना बढ़ा सकती है, जिससे आगामी चुनाव दिलचस्प होने की उम्मीद है।