Category: National

  • कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम की छत भरभराकर गिरी, 5 मजदूरों की मौत; 50 से अधिक लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला क्षेत्र में बुधवार को एक बड़ा औद्योगिक हादसा सामने आया, जब निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई। इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि बड़ी संख्या में मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय निर्माण कार्य जारी था और कई श्रमिक गोदाम के भीतर काम कर रहे थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    हादसा तारातला स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर ब्रेस ब्रिज के समीप हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोपहर के समय अचानक तेज आवाज के साथ निर्माणाधीन ढांचे का एक बड़ा हिस्सा धराशायी हो गया। छत गिरते ही वहां मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला और कई लोग मलबे के नीचे दब गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपातकालीन सेवाओं की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं।

    पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दुर्घटना के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया गया। शुरुआती चरण में कई लोगों को मलबे से बाहर निकालने में सफलता मिली, जबकि बड़ी संख्या में श्रमिकों के अभी भी फंसे होने की आशंका बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि मलबे के नीचे दबे लोगों की सही संख्या का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना को भी राहत कार्य में शामिल किया गया है। सेना के जवानों ने स्थानीय प्रशासन और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान की कमान संभाली है। इसके अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा इकाइयों और पुलिस की विशेष टीमें लगातार मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। भारी लोहे के ढांचे और बीम हटाने के लिए क्रेन तथा अन्य मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।

    अधिकारियों का कहना है कि राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है क्योंकि ढहे हुए हिस्से में बड़ी मात्रा में लोहे और निर्माण सामग्री का मलबा फैला हुआ है। ऐसे में फंसे हुए लोगों तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने के लिए सावधानी बरती जा रही है। कई घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती घंटों में बचाव कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मलबे में दबे श्रमिकों को निकालने का प्रयास किया और राहत एजेंसियों के पहुंचने तक प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई। घटना के बाद इलाके में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

    प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि निर्माणाधीन संरचना की छत अचानक क्यों गिरी और क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जा रहा था। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल का निरीक्षण कर रही है।

    फिलहाल बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मलबे के नीचे अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं, इसलिए राहत कार्य देर रात तक जारी रह सकता है। इस हादसे ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दुर्घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

  • भारतीय नौसेना में अफसर बनने का सुनहरा अवसर, पायलट समेत 275 पदों पर भर्ती, 25 जून से शुरू होंगे आवेदन

    भारतीय नौसेना में अफसर बनने का सुनहरा अवसर, पायलट समेत 275 पदों पर भर्ती, 25 जून से शुरू होंगे आवेदन


    नई दिल्ली ।
    भारतीय नौसेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर सामने आया है। नौसेना ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के तहत विभिन्न शाखाओं में कुल 275 पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती इंडियन नेवल एकेडमी, एझिमाला में जून 2027 से शुरू होने वाले कोर्स के लिए की जा रही है। इसके तहत योग्य अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। भर्ती अभियान का उद्देश्य नौसेना की विभिन्न तकनीकी और गैर-तकनीकी शाखाओं में योग्य अधिकारियों की नियुक्ति करना है।

    नौसेना द्वारा जारी रिक्तियों में एक्जीक्यूटिव ब्रांच, पायलट, नेवल एयर ऑपरेशन्स ऑफिसर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स, नेवल आर्मामेंट इंस्पेक्टोरेट कैडर, एजुकेशन, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल और नेवल कंस्ट्रक्टर जैसी महत्वपूर्ण शाखाएं शामिल हैं। सबसे अधिक पद एक्जीक्यूटिव ब्रांच के लिए निर्धारित किए गए हैं, जबकि पायलट, एयर ऑपरेशन्स और तकनीकी शाखाओं में भी बड़ी संख्या में रिक्तियां उपलब्ध हैं। इससे इंजीनियरिंग, विज्ञान, प्रबंधन और तकनीकी शिक्षा प्राप्त युवाओं को नौसेना में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

    भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 जून से शुरू होंगे। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने के बाद ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 27 जुलाई निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग योग्यता निर्धारित की गई है। अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषयों में प्रथम श्रेणी के साथ बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, एमएससी, एमए, एमबीए, बीकॉम, बीएससी, एमसीए या अन्य निर्धारित डिग्रियां होना आवश्यक है। कुछ पदों के लिए फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और मटीरियल मैनेजमेंट जैसे विषयों में विशेषज्ञता या स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी अनिवार्य रखा गया है। पात्रता से संबंधित विस्तृत जानकारी उम्मीदवारों को आधिकारिक अधिसूचना में उपलब्ध कराई गई है।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन और शैक्षणिक योग्यता के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों को सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (एसएसबी) इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। एसएसबी प्रक्रिया में सफल होने वाले उम्मीदवारों को मेडिकल परीक्षण से गुजरना होगा। अंतिम मेरिट सूची प्रदर्शन और पात्रता के आधार पर तैयार की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए इंडियन नेवल एकेडमी भेजा जाएगा।

    नौसेना में चयनित अधिकारियों को आकर्षक वेतन और भत्तों का लाभ मिलेगा। प्रशिक्षण और नियुक्ति के बाद सब-लेफ्टिनेंट के पद पर शुरुआती ग्रॉस सैलरी लगभग 1.20 लाख रुपये प्रतिमाह तक हो सकती है। इसके अलावा पायलट, नेवल एयर ऑपरेशन्स ऑफिसर और सबमरीन से जुड़े पदों पर नियुक्त अधिकारियों को विशेष भत्ते भी प्रदान किए जाएंगे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद पात्र अधिकारियों को अतिरिक्त अलाउंस के रूप में 31,250 रुपये तक का लाभ मिल सकेगा।

    रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए यह भर्ती अभियान एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। नौसेना में सेवा न केवल प्रतिष्ठा और सम्मान प्रदान करती है, बल्कि आधुनिक तकनीक, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों के साथ एक मजबूत करियर भी उपलब्ध कराती है। ऐसे में पात्र अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती अभियान भविष्य को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकता है।

  • एयरफोर्स जॉइन करने का मौका: MTS पदों के लिए आवेदन 27 जून से, जानें योग्यता और प्रक्रिया

    एयरफोर्स जॉइन करने का मौका: MTS पदों के लिए आवेदन 27 जून से, जानें योग्यता और प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।भारतीय वायुसेना में सेवा देने का सपना देख रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। भारतीय वायु सेना ने मल्टी टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 6 रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें 3 पद अनारक्षित वर्ग के लिए, 2 पद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और 1 पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित किया गया है।

    इस भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया 27 जून 2026 से शुरू होगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों को ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि विज्ञापन प्रकाशित होने की तारीख से 30 दिन निर्धारित की गई है। ऐसे में अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें ताकि अंतिम समय की किसी परेशानी से बचा जा सके।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या विश्वविद्यालय से मैट्रिक यानी 10वीं पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों के पास वॉचमैन, लस्कर, गेस्टेटनर ऑपरेटर या माली के रूप में किसी संस्था में कम से कम एक वर्ष का कार्य अनुभव होगा, उन्हें चयन प्रक्रिया में प्राथमिकता दी जा सकती है।

    आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 25 वर्ष निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाएगी। सबसे पहले प्राप्त आवेदन पत्रों की जांच की जाएगी। इसके बाद पात्र उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा के लिए बुलाया जाएगा। लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा और अंत में अंतिम मेरिट सूची जारी की जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे मैट्रिक्स लेवल-1 का वेतनमान प्रदान किया जाएगा, साथ ही अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को भारतीय वायुसेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबंधित भर्ती का नोटिफिकेशन डाउनलोड करना होगा। नोटिफिकेशन में दिए गए आवेदन पत्र का प्रिंट निकालकर उसमें मांगी गई सभी जानकारी सावधानीपूर्वक भरनी होगी। इसके बाद आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां आवेदन पत्र के साथ संलग्न करनी होंगी।

    पूरी तरह भरे हुए आवेदन पत्र को एक लिफाफे में रखकर निर्धारित पते पर डाक के माध्यम से भेजना होगा। आवेदन भेजने का पता है – कमांडेंट, आईएएम, आईएएफ विमानपुरा पीओ, बैंगलोर-560017।

    सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे 10वीं पास युवाओं के लिए यह भर्ती एक बेहतरीन अवसर है। कम शैक्षणिक योग्यता के साथ प्रतिष्ठित भारतीय वायुसेना में नौकरी पाने का यह सुनहरा मौका है, इसलिए योग्य उम्मीदवार समय सीमा के भीतर आवेदन करना न भूलें।

  • युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    युवा के पत्र का पीएम मोदी ने दिया जवाब, राष्ट्रहित और ऊर्जा संरक्षण पर विचारों की सराहना; आशुतोष यादव ने जताया गौरव और आभार

    नई दिल्ली । लोकतांत्रिक व्यवस्था में आम नागरिक और देश के सर्वोच्च नेतृत्व के बीच संवाद का एक प्रेरक उदाहरण उस समय सामने आया जब कानपुर के प्रतियोगी छात्र आशुतोष यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से व्यक्तिगत पत्र प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में आशुतोष द्वारा व्यक्त किए गए विचारों और राष्ट्रहित से जुड़े उनके दृष्टिकोण की सराहना करते हुए उन्हें देश के जागरूक युवाओं का प्रतिनिधि बताया। पत्र मिलने के बाद आशुतोष ने इसे अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देशवासियों से मिलने वाले आत्मीय और सकारात्मक विचार उन्हें राष्ट्रहित में लगातार कार्य करने की नई ऊर्जा प्रदान करते हैं। उन्होंने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा व्यक्त भावनाओं की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संदेश लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाते हैं। प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण के विषय को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

    पत्र में प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देशभर में ऊर्जा संरक्षण को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ रही है और विभिन्न स्तरों पर सकारात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने, ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाने और ऊर्जा बचत को जनभागीदारी से जुड़े अभियान का रूप देने के लिए निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री ने आशुतोष और उनके परिवार द्वारा आवश्यक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग के संकल्प को सराहनीय बताया।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका को भी विशेष महत्व दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय और वैश्विक विषयों के प्रति जागरूकता, सकारात्मक सोच और समस्याओं के समाधान के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। उनके अनुसार आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और यही वर्ग भविष्य की दिशा तय करेगा।

    प्रधानमंत्री का पत्र मिलने के बाद आशुतोष यादव ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह उनके लिए बेहद सम्मानजनक और प्रेरणादायक क्षण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि एक सामान्य नागरिक भी अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकता है और उसे गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके पत्र का उत्तर मिलना स्वयं में एक बड़ी उपलब्धि है।

    आशुतोष ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी चिंता और सुझाव साझा किए थे। उनका मानना है कि देश के नागरिकों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखने और रचनात्मक सुझाव देने चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके विचारों को महत्व दिया जाना युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

    आशुतोष ने पिछले कुछ वर्षों में देश में हुए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल तकनीक के विस्तार ने आम नागरिकों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था, सड़क और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार तथा आधारभूत ढांचे के विकास को महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया। उनके अनुसार तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को नई गति प्रदान की है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय अभियान या सरकारी योजना की सफलता में जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब नागरिक स्वयं किसी उद्देश्य से जुड़ते हैं, तब उसके परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। आशुतोष का मानना है कि युवाओं में नई सोच, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता होती है, जो देश को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। प्रधानमंत्री द्वारा युवाओं पर व्यक्त किया गया विश्वास देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

    म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


    नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

    डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

    अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

    गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

    साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।

  • इंजीनियरों के लिए सुनहरा मौका! EPI में 70 हजार रुपये तक की नौकरी, आवेदन प्रक्रिया शुरू

    इंजीनियरों के लिए सुनहरा मौका! EPI में 70 हजार रुपये तक की नौकरी, आवेदन प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली ।इंजीनियरिंग क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार अवसर सामने आया है। सार्वजनिक क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स (इंडिया) लिमिटेड (EPI) ने विभिन्न तकनीकी और प्रबंधकीय पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। कंपनी ने निश्चित अवधि के अनुबंध के आधार पर कुल 14 रिक्तियों को भरने के लिए योग्य और अनुभवी उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक अभ्यर्थी 3 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

    जारी अधिसूचना के अनुसार असिस्टेंट मैनेजर (सिविल) के 9 पद असिस्टेंट मैनेजर (इलेक्ट्रिकल) का 1 पद असिस्टेंट मैनेजर (मैकेनिकल) के 2 पद और सीनियर मैनेजर (सिविल) के 2 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। आवेदन प्रक्रिया 24 जून 2026 की सुबह 9:30 बजे से शुरू हो चुकी है और उम्मीदवार 3 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

    इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित विषय में बीई बीटेक एएमआईई या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य है। साथ ही न्यूनतम 55 प्रतिशत अंक प्राप्त होना भी जरूरी है। उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम दो वर्ष का पोस्ट क्वालिफिकेशन कार्य अनुभव होना चाहिए।

    आयु सीमा की बात करें तो पदों के अनुसार अधिकतम आयु 32 वर्ष से 42 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। आयु की गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट का लाभ मिलेगा।

    चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। सबसे पहले उम्मीदवारों के आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसमें शैक्षणिक योग्यता प्राप्त अंकों का प्रतिशत और कार्य अनुभव जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

    सफल उम्मीदवारों को पद के अनुसार 40 हजार रुपये से 70 हजार रुपये प्रतिमाह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा कंपनी की ओर से अन्य भत्ते और सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इंटरव्यू का आयोजन मुंबई स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय में किया जाएगा। इंटरव्यू की तिथि समय और विस्तृत जानकारी जल्द जारी की जाएगी।

    उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि इंटरव्यू में शामिल होते समय सभी आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां और उनकी फोटोकॉपी अपने साथ अवश्य लेकर जाएं ताकि सत्यापन प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सके। इंजीनियरिंग क्षेत्र के अनुभवी और योग्य अभ्यर्थियों के लिए यह एक बेहतरीन अवसर माना जा रहा है।

  • नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज

    नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज


    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण विवाद मंगलवार को भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके बाद एक नए विवाद और जनआक्रोश की आशंका पैदा हो गई है। गुरुद्वारे में डटे निहंग सिखों को पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद वापस भेज दिया गया, लेकिन स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, पत्थरबाजी और तनाव की घटनाएं हुईं, इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

    मंगलवार सुबह से ही गुरुद्वारे में गतिविधियां तेज हो गई थीं। सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे पंजाब से आए धार्मिक प्रतिनिधियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई। लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा घेरे में पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंग जयकारे लगाते और उत्साह जताते दिखाई दिए। कुछ निहंग मोटरसाइकिलों पर जबकि एक अन्य वाहन से रवाना हुआ।

    आनंदपुर साहिब से पहुंचे जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी पक्ष शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के भय से वे छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और प्रशासन जो भी उचित कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार होगी।

    हालांकि स्थानीय लोगों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात थे तो विवाद का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। वहीं युवा नेता मोहित डिमरी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने की कोशिश हुई और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ। सोमवार रात को हाईवे पर पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निहंगों को उकसाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुद्वारा प्रबंधन ने तोड़फोड़ और अव्यवस्था के आरोप लगाए थे तो उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।

    अब स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तहरीर देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि चार दिनों तक चले घटनाक्रम में कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल प्रशासन राहत की सांस ले रहा है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • बारिश बनी आफत: झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मौत, मौसम विभाग का अलर्ट जारी

    बारिश बनी आफत: झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मौत, मौसम विभाग का अलर्ट जारी


    नई दिल्ली ।झारखंड में मानसून की बारिश के साथ आकाशीय बिजली लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में हुई बारिश के दौरान वज्रपात की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। अलग-अलग इलाकों में बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलसकर घायल हो गए। मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है तथा लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

    खूंटी जिले में वज्रपात की दो दर्दनाक घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पहली घटना कर्रा प्रखंड के कच्चाबारी पंचायत क्षेत्र के पतराटोली गांव में हुई, जहां क्रिकेट मैच के दौरान अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। बताया जा रहा है कि पतराटोली और लोधमा गांव की टीमों के बीच मैच खेला जा रहा था। मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मैदान में मौजूद थे।

    खेल के दौरान मौसम अचानक खराब होने लगा। आसमान में काले बादल छा गए और तेज गर्जना होने लगी, लेकिन इसके बावजूद मैच जारी रहा। इसी दौरान अचानक तेज चमक और गर्जना के साथ आकाशीय बिजली मैदान में गिरी और वहां मौजूद खिलाड़ियों तथा दर्शकों को अपनी चपेट में ले लिया।

    इस दर्दनाक हादसे में पतराटोली निवासी 22 वर्षीय प्रेम बाखला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मैदान में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्रा पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्रेम बाखला को मृत घोषित कर दिया।

    हादसे में अंकित बाखला और जवकीम मिंज गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए खूंटी से रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर किया गया है। अन्य घायलों का भी इलाज जारी है।

    खूंटी जिले में ही दूसरी घटना तोरपा थाना क्षेत्र के हूसीर पंचायत अंतर्गत रोन्हे गांव में हुई। यहां बारिश के दौरान खेत में काम कर रहे निस्तार टोपनो नामक ग्रामीण पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। बिजली की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में झारखंड के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। विभाग ने 27 जून तक कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और खेतों में काम करने से बचें। साथ ही गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

    बारिश जहां किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं आकाशीय बिजली जैसी घटनाएं गंभीर खतरा भी पैदा करती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

  • राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग

    राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग


    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के मामले में चल रही जांच के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका मानना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है।

    गाजियाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में यदि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं तो निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पदाधिकारियों को स्वयं आगे आकर नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि न्याय होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि न्याय होता हुआ दिखाई दे। यदि जांच के दौरान पदाधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं तो लोगों के मन में संदेह की स्थिति बनी रह सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए।

    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी अपील की कि ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश कम होगी।

    बिहार के चर्चित भरत तिवारी प्रकरण पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया से बाहर जाकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कानून के शासन वाले लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो।

    लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा योजनाएं और निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने तेजी से हो रहे शहरी विकास पर भी चिंता जताई और कहा कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है तो ऐसी त्रासदियां बार-बार सामने आती रहेंगी। उनके अनुसार प्रशासन, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

    राम मंदिर से जुड़े मामले पर दिए गए आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।

  • शिक्षा की नई उड़ान गुजरात में स्कूल ऑन व्हील्स की शुरुआत, गांव-गांव पहुंचेगी पढ़ाई

    शिक्षा की नई उड़ान गुजरात में स्कूल ऑन व्हील्स की शुरुआत, गांव-गांव पहुंचेगी पढ़ाई


    नई दिल्ली । गुजरात में शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने स्कूल प्रवेश महोत्सव के साथ स्कूल ऑन व्हील्स योजना की शुरुआत की है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य दूरदराज और छोटे कस्बों में रहने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मंगलवार को गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत तैयार की गई 28 विशेष बसों का लोकार्पण किया।

    इन बसों को चलते-फिरते स्कूल के रूप में विकसित किया गया है ताकि उन क्षेत्रों के बच्चों को भी शिक्षा का लाभ मिल सके जहां स्थायी स्कूलों तक पहुंचना कठिन है। गुजरात राज्य मार्ग वाहन व्यवहार निगम द्वारा तैयार की गई ये बसें विशेष रूप से अगरिया विस्तार और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाएंगी।

    स्कूल ऑन व्हील्स बसों को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया गया है। बसों में स्मार्ट टीवी, डिश टीवी, एफएम पोर्टेबल रेडियो, योग गतिविधियों के लिए विशेष स्थान तथा डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।

    इन बसों की सबसे बड़ी विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। प्रत्येक बस की छत पर उच्च क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से बसों को संचालित करने में मदद करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इन सोलर पैनलों में ऐसी तकनीक का उपयोग किया गया है जिससे बिजली से जुड़े उपकरण लंबे समय तक संचालित रह सकें। बसों में लगाए गए सोलर सिस्टम की वारंटी भी दी गई है, जिससे यह परियोजना लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चल सकेगी।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य में 23वें प्रवेश उत्सव की शुरुआत के साथ शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि गुजरात राज्य मार्ग वाहन निगम ने 28 विशेष बसें शिक्षा विभाग को सौंपी हैं। इन बसों में बच्चों के लिए ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं जो कई बार पारंपरिक कक्षाओं से भी बेहतर अनुभव प्रदान करती हैं।

    उन्होंने कहा कि हर बस में लगभग 20 बच्चों के बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिश टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर भी मिलेगा जिससे उनकी रुचि शिक्षा के प्रति बढ़ेगी।

    हर्ष संघवी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसी और बसों को भी शामिल किया जाएगा ताकि राज्य के अधिक से अधिक बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जा सके। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक और नवाचार का यह प्रयोग भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है। गुजरात सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के प्रसार में मदद करेगी बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जोड़कर उनके भविष्य को नई दिशा देने का काम भी करेगी।