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  • दिल्ली में राशन सिस्टम का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: QR स्मार्ट कार्ड लागू, हर शनिवार लगेगा समाधान कैंप

    दिल्ली में राशन सिस्टम का डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन: QR स्मार्ट कार्ड लागू, हर शनिवार लगेगा समाधान कैंप

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    नई दिल्ली| Delhi में राशन वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सरकार ने QR कोड से लैस स्मार्ट राशन कार्ड लागू करने का फैसला किया है, जिससे न सिर्फ फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजनाओं का फायदा सीधे और सही तरीके से पहुंचेगा। यह पहल डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने के साथ-साथ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में भरोसा बढ़ाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

    इस नई व्यवस्था के तहत जारी होने वाले QR स्मार्ट राशन कार्ड में डिजिटल फीचर्स शामिल होंगे, जिनकी मदद से लाभार्थियों की पहचान तुरंत और सटीक तरीके से हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे डुप्लीकेट कार्ड, गलत एंट्री और अनधिकृत लाभ लेने जैसी समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। साथ ही, राशन वितरण की प्रक्रिया अधिक यूजर-फ्रेंडली और तेज हो जाएगी।

    इस योजना को तेजी से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के साथ समीक्षा बैठक कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी न हो। सरकार का फोकस है कि तकनीक के जरिए सिस्टम को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।

    इसके साथ ही, आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 1 मई से हर शनिवार ‘जन शिकायत समाधान कैंप’ आयोजित किए जाएंगे। ये कैंप सुबह 9 बजे से 11 बजे तक चलेंगे, जहां राशन कार्ड से जुड़ी लंबित शिकायतों का मौके पर ही निपटारा किया जाएगा। इन कैंपों में असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि जिम्मेदारी तय रहे और लोगों को तुरंत राहत मिल सके। संभावना है कि मुख्यमंत्री खुद भी इन कैंपों का औचक निरीक्षण करेंगी, जिससे व्यवस्था पर निगरानी और सख्ती बनी रहे।

    सरकार ने राशन वितरण में गड़बड़ियोंजैसे कम तौल, देरी या अवैध कटौतीपर कड़ा रुख अपनाया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई डीलर या सप्लायर दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पात्र लाभार्थियों की सही पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कमेटी बनाने की योजना भी है, जिससे केवल जरूरतमंद लोगों को ही योजना का लाभ मिल सके।

    इस पहल के साथ ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ योजना को भी मजबूती दी जाएगी। कैंपों के जरिए लोगों को इस योजना के बारे में जागरूक किया जाएगा, ताकि वे देश में कहीं भी अपना राशन प्राप्त कर सकें। हालांकि, नियम के अनुसार एक समय में केवल एक ही स्थान से राशन लिया जा सकेगा।

    कुल मिलाकर, QR स्मार्ट राशन कार्ड और साप्ताहिक समाधान कैंप दिल्ली के राशन सिस्टम में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकते हैं, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और जनसंतोष तीनों में सुधार की उम्मीद है।

  • साबरकांठा में भीषण सड़क हादसा लग्जरी बस की टक्कर से 8 जिंदगियां खत्म कई घायल

    साबरकांठा में भीषण सड़क हादसा लग्जरी बस की टक्कर से 8 जिंदगियां खत्म कई घायल


    साबरकांठा । गुजरात के साबरकांठा जिला में बुधवार को एक भयावह सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार लग्जरी बस और कार के बीच हुई जोरदार टक्कर में 7 महिलाओं समेत 8 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए इस हादसे के बाद पूरे इलाके में चीख पुकार और अफरा तफरी का माहौल बन गया

    यह दर्दनाक दुर्घटना हिम्मतनगर के पास जसवंतगढ़ पाटिया के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग 48 पर हुई जहां शामलाजी से हिम्मतनगर की ओर जा रही एक निजी बस ने आगे चल रही कार को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला

    हादसे में जिन लोगों की मौत हुई उनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं मृतकों में नायक अंजू बेन भोई नीता बेन नायक मीनाक्षी बेन पटेल कामिनी बेन नायक कंचन बेन प्रजापति नीता बेन गोस्वामी रेखा बेन और कार चालक रावल अनिल कुमार शामिल हैं बताया जा रहा है कि ये सभी एक कैटरिंग टीम का हिस्सा थे और अरावली जिले के मोडासा से हिम्मतनगर के हुंज गांव में एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे

    हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोग और राहगीर मदद के लिए दौड़ पड़े घायलों को तत्काल 108 एंबुलेंस की मदद से हिम्मतनगर सिविल अस्पताल और गंभोई अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां कई की हालत गंभीर बनी हुई है घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बस तेज रफ्तार में थी और चालक ने नियंत्रण खो दिया जिसके कारण यह हादसा हुआ पुलिस उपाधीक्षक ए के पटेल ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी हादसे के बाद अस्पताल परिसर में मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी अपने प्रियजनों को खोने का दर्द हर चेहरे पर साफ नजर आ रहा था माहौल पूरी तरह गमगीन हो गया है

    यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरनाक परिणामों की ओर इशारा करता है जरूरत है कि सड़क सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन किया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके

    फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है वहीं घायलों के इलाज का सिलसिला जारी है प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानीपूर्वक वाहन चलाएं और यातायात नियमों का पालन करें

  • बंगाल चुनाव 2026 में सितारों की सियासी जंग रूपा गांगुली से सायंतिका बनर्जी तक कई चेहरे मैदान में

    बंगाल चुनाव 2026 में सितारों की सियासी जंग रूपा गांगुली से सायंतिका बनर्जी तक कई चेहरे मैदान में


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में इस बार राजनीति और सिनेमा का दिलचस्प संगम देखने को मिल रहा है जहां एक ओर राजनीतिक दलों के बीच कड़ी टक्कर है वहीं दूसरी ओर कई फिल्मी और टीवी सितारे भी चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं 29 अप्रैल को दूसरे चरण का मतदान जारी है और अब सबकी नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों पर टिकी हुई हैं

    भारतीय राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रवेश कोई नई बात नहीं है लेकिन हर चुनाव में यह आकर्षण और भी बढ़ जाता है इस बार बंगाल चुनाव में भी कई चर्चित चेहरे मैदान में उतरे हैं जो अपने अभिनय के साथ साथ अब जनता का भरोसा जीतने की कोशिश कर रहे हैं

    इन्हीं में एक बड़ा नाम रूपा गांगुली का है जिन्होंने लोकप्रिय धारावाहिक महाभारत में द्रौपदी का किरदार निभाकर घर घर में पहचान बनाई थी अब वे भारतीय जनता पार्टी की ओर से सोनारपुर दक्षिण सीट से चुनाव लड़ रही हैं रूपा गांगुली पहले भी राज्यसभा सांसद रह चुकी हैं और राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं

    वहीं दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भी कई फिल्मी चेहरों पर भरोसा जताया है अभिनेत्री सायंतिका बनर्जी बारानगर सीट से चुनाव मैदान में हैं वे इससे पहले उपचुनाव जीतकर विधायक बन चुकी हैं और एक बार फिर जनता के बीच पहुंची हैं

    एक्टर रुद्रनील घोष भी इस चुनाव में भाजपा के टिकट पर शिबपुर सीट से किस्मत आजमा रहे हैं उनका नाम भी बंगाल की राजनीति में चर्चित रहा है इसके अलावा अभिनेता और निर्देशक राज चक्रवर्ती तृणमूल कांग्रेस की ओर से बैरकपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं

    अभिनेत्री जून मालिया भी इस चुनाव में फिर से मैदान में उतरी हैं वे टीएमसी के टिकट पर मेदिनीपुर से चुनाव लड़ रही हैं और पहले भी इस सीट से जीत दर्ज कर चुकी हैं इसी तरह हिरन चटर्जी भाजपा के उम्मीदवार के रूप में श्यामपुर सीट से मैदान में हैं उन्होंने पिछला चुनाव भी जीता था और इस बार अपनी जीत दोहराने की कोशिश में हैं

    इसके अलावा पापिया अधिकारी टॉलीगंज से भाजपा की उम्मीदवार हैं वहीं सोहम चक्रवर्ती करीमपुर सीट से टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं इनके साथ ही कुछ और टीवी और फिल्मी कलाकार भी चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं

    बंगाल में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है और इन स्टार उम्मीदवारों की मौजूदगी ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है जनता के बीच इन सितारों की लोकप्रियता किस हद तक वोट में बदलती है यह देखना बेहद अहम होगा अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं जब यह साफ हो जाएगा कि सिनेमा के ये सितारे राजनीति के मंच पर कितने सफल साबित होते हैं और बंगाल की सत्ता किसके हाथ में जाती है

  • भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी

    भारत में आग बरसा रहा सुपर अल नीनो….IMD ने दी इस राज्य में भारी बारिश की चेतावनी


    नई दिल्ली।
    मौसम के बदलते मिजाज (Changing Weather patterns) और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने इस साल चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सबसे बड़ा कारण ‘अल नीनो’ (Super El Nino) का वह खतरनाक रूप है, जो इस साल पूरी दुनिया के मौसम चक्र को प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय हिस्से में समुद्र की सतह का पानी जब असामान्य रूप से गर्म हो जाता है, तो उस मौसमी घटना को ‘अल नीनो’ कहते हैं। इसका असर भारत (India) पर अभी से देखने को मिल रहा है।

    हालांकि दक्षिणी राज्य केरल के लिए अच्छी खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल के कई हिस्सों में आगामी दिनों में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए अगले 5 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम में हो रहे अचानक बदलाव को देखते हुए अधिकारियों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


    इन जिलों में जारी हुआ ‘येलो अलर्ट’

    IMD के 5-दिवसीय पूर्वानुमान के अनुसार, 29 अप्रैल, 2026 के लिए केरल के चार प्रमुख जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है:- पथानामथिट्टा, इडुक्की, कुन्नूर, कासरगोड।

    मौसम विभाग के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ है कि लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इन क्षेत्रों में 24 घंटों के भीतर 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच भारी बारिश होने की पूरी संभावना है।


    ‘सुपर अल नीनो’ क्या है?

    जब समुद्र की सतह का तापमान अपने दीर्घकालिक औसत से 2°C (या उससे अधिक) ऊपर चला जाता है, तो यह एक असाधारण और विनाशकारी रूप ले लेता है, जिसे वैज्ञानिक ‘सुपर अल नीनो’ कहते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और कई ग्लोबल क्लाइमेट मॉडल्स ने चेतावनी दी है कि 2026 में मई-जुलाई तक यह स्थिति हावी हो सकती है। कुछ विशेषज्ञ इसे पिछले 140 सालों के सबसे ताकतवर चक्रों में से एक मान रहे हैं। इसका सीधा असर वैश्विक तापमान में वृद्धि और मौसम के चरम रूप के तौर पर सामने आता है।

    मॉनसून और अल नीनो (El Nino) से इसका संबंध

    गर्मियों के मौसम में अचानक होने वाली यह भारी बारिश जलवायु परिवर्तन और विशेष रूप से अल नीनो प्रभाव का परिणाम है, जिसका सीधा असर भारत के मॉनसून चक्र पर पड़ता है। इसे ऐसे समझा जा सकता है।

    प्री-मॉनसून गतिविधियां: अल नीनो में प्रशांत महासागर के पानी का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। भले ही अल नीनो आमतौर पर भारत में मुख्य ‘दक्षिण-पश्चिम मॉनसून’ (जून से सितंबर) को कमजोर कर देता है, लेकिन मॉनसून से ठीक पहले (प्री-मॉनसून) के चरण में यह बहुत ही अस्थिर मौसम उत्पन्न कर सकता है।

    ला नीना से अल नीनो का संक्रमण: साल 2026 की शुरुआत में ‘ला नीना’ का प्रभाव कमजोर हुआ है और यह ‘अल नीनो’ की तरफ बढ़ रहा है। समुद्र के बढ़ते तापमान और स्थानीय वायुमंडलीय दबाव के इस जटिल टकराव के कारण ही केरल में एकाएक बेमौसम भारी बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं।

    मॉनसून के मौसम पर ‘छाया’: यह अप्रत्याशित बारिश इस बात का संकेत है कि इस साल मुख्य मॉनसून चक्र में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। मॉनसून की शुरुआत से पहले ही कहीं अचानक तीव्र बारिश तो कहीं लू (हीटवेव) चलने जैसी स्थितियां बन रही हैं।


    भारत में अभी से इतनी ‘आग’ क्यों बरस रही है?

    अप्रैल 2026 में ही उत्तर प्रदेश (बांदा, फतेहपुर, इटावा जैसे जिले), मध्य प्रदेश और कई अन्य हिस्सों में तापमान 45-46°C को पार कर गया है। इसके पीछे कई भौगोलिक और मौसमी कारण एक साथ काम कर रहे हैं। साल की शुरुआत में ला नीना (ठंडा चरण) खत्म हो गया है और पृथ्वी तेजी से ‘अल नीनो’ के गर्म चरण में जा रही है। इससे वायुमंडल में गर्माहट काफी तेजी से बढ़ रही है।

    उत्तर और मध्य भारत के ऊपर बादलों का कोई कवर नहीं है। साफ आसमान के कारण सूरज की किरणें बिना किसी रुकावट के सीधे धरती पर पड़ रही हैं, जिससे हवा का एक ‘गर्म गुंबद’ बन गया है जो गर्मी को बाहर नहीं निकलने दे रहा। उत्तर-पश्चिमी मैदानी इलाकों की मिट्टी पूरी तरह सूख चुकी है। हवा में नमी न के बराबर है और वहां से आने वाली सूखी महाद्वीपीय हवाएं तापमान को सीधे बढ़ा रही हैं, जिससे शहरों का माहौल किसी भट्टी जैसा हो गया है।


    इस साल कैसा रहेगा मॉनसून और कब होगी बारिश?

    भारत में कृषि और अर्थव्यवस्था की धुरी माने जाने वाले मॉनसून पर इस साल ‘अल नीनो’ की स्पष्ट छाया मंडरा रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने लंबी अवधि के पूर्वानुमान में यह तस्वीर साफ कर दी है। IMD के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (जून से सितंबर) के “सामान्य से नीचे” रहने की संभावना सबसे अधिक है। देश भर में इस बार औसतन मात्र 92% बारिश (LPA का) होने का अनुमान है।

    कब आएगा मॉनसून?

    आमतौर पर मॉनसून 1 जून को केरल तट से टकराता है। हालांकि मानसून अपने समय पर दस्तक दे सकता है, लेकिन जुलाई-अगस्त तक अल नीनो पूरी तरह हावी हो जाएगा। इससे मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बारिश के वितरण में भारी असमानता देखने को मिल सकती है। बारिश कम होने और तापमान अधिक रहने से धान, दलहन और गन्ने जैसी खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो एक बड़ी आर्थिक चिंता का विषय है।

  • बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    बंगाल चुनाव: सुबह 9 बजे तक 18% मतदान, खरगे की अपील- बिना डर के करें वोट; TMC-BJP में जुबानी जंग तेज

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को 142 सीटों पर मतदान जारी है। सुबह 9 बजे तक राज्य में करीब 18 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इस चरण में कुल 1,448 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होना है। राज्य की सियासत में इस समय मुकाबला बेहद दिलचस्प है एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है।

    शुभेंदु अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया पर उठाए सवाल
    भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मतदान केंद्रों के आसपास मौजूद रहने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहां धारा 163 लागू है, वहां मुख्यमंत्री का इस तरह घूमना नियमों पर सवाल खड़ा करता है। शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि इस तरह की गतिविधियां चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रभाव डाल सकती हैं।

    खरगे की अपील- बिना डर लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करें
    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लोग बिना किसी डर या दबाव के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग करें। खरगे ने कहा कि यह समय उन ताकतों के खिलाफ खड़े होने का है जो जनता के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों से विशेष रूप से सक्रिय भागीदारी की अपील की। खरगे ने अपने संदेश में कहा कि मतदाता विकास, प्रगतिशील मूल्यों, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव के लिए मतदान करें। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल हमेशा बदलाव और लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र रहा है और यह चुनाव भी उसी दिशा में महत्वपूर्ण अवसर है।

    मिथुन चक्रवर्ती का बड़ा दावा
    भाजपा नेता और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती ने मतदान के दौरान दावा किया कि इस बार मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत से अधिक जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो चुनाव के नतीजे बड़े बदलाव का संकेत देंगे।

    अभिषेक बनर्जी का भाजपा पर हमला
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।
    तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी ने भवानीपुर सीट पर मतदान के बाद भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि इस चुनाव में टीएमसी की जीत तय है और भाजपा 50 से भी कम सीटों पर सिमट सकती है। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा हर चुनाव में बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन नतीजे हमेशा टीएमसी के पक्ष में आते हैं। उन्होंने पिछले चुनावों के आंकड़े गिनाते हुए अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताया।

    4 मई को आएंगे नतीजे
    राज्य में दूसरे और अंतिम चरण का मतदान जारी है। इससे पहले पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है। सभी सीटों के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

  • बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण की वोटिंग के बीच हिंसा, नादिया में BJP प्रत्याशी पर हमला, हावड़ा में बवाल

    बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण की वोटिंग के बीच हिंसा, नादिया में BJP प्रत्याशी पर हमला, हावड़ा में बवाल


    नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान हालात कई जगहों पर तनावपूर्ण हो गए। जहां एक ओर 142 सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ इलाकों से हिंसा और हंगामे की खबरों ने माहौल गरमा दिया है।

    सबसे गंभीर घटना नादिया जिले से सामने आई, जहां मतदान के बीच एक बीजेपी प्रत्याशी पर हमले की सूचना मिली है। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।

    वहीं हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र में स्थित डॉन बॉस्को लिलुआ सहनलाल विद्यालय के एक मतदान केंद्र पर EVM में तकनीकी खराबी आ गई। मशीन खराब होने के कारण कुछ समय के लिए मतदान प्रक्रिया बाधित हो गई, जिससे मतदाताओं में नाराजगी फैल गई।

    स्थिति बिगड़ने पर लोगों ने हंगामा शुरू कर दिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हालात को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज किया गया और दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। प्रशासन ने आसपास के बूथों पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार, 152, 153 और 154 नंबर बूथों पर भी EVM से जुड़ी शिकायतें और गड़बड़ी की घटनाएं सामने आई हैं, जिन्हें लेकर चुनाव अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है।

     राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

    घटनाओं के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि केंद्रीय सुरक्षा बल चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं और उनके कार्यकर्ताओं को परेशान किया जा रहा है।

    वहीं सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि इस बार राज्य में बीजेपी की सरकार बनने जा रही है और लोगों से बड़ी संख्या में मतदान करने की अपील की है। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने भी दावा किया है कि उनकी पार्टी को इस बार भारी जनसमर्थन मिल रहा है और सत्ता में वापसी तय है।

    कई सीटों पर हाई-प्रोफाइल मुकाबला

    चुनाव के इस चरण में कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। कोलकाता, हावड़ा, नदिया और अन्य जिलों में मतदान प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

    स्थिति पर नजर

    हालांकि अधिकांश जगहों पर मतदान सामान्य रूप से जारी है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में हुई हिंसा और तकनीकी गड़बड़ियों ने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन घटनाओं का असर अंतिम नतीजों पर कितना पड़ता है।

  • जम्मू-कश्मीर में बड़ी कार्रवाई, 17 पूर्व छात्रों के आतंकी संगठनों से जुड़े होने पर मदरसा अवैध घोषित

    जम्मू-कश्मीर में बड़ी कार्रवाई, 17 पूर्व छात्रों के आतंकी संगठनों से जुड़े होने पर मदरसा अवैध घोषित


    जम्मू-कश्मीर।
    राज्य में सुरक्षा एजेंसियों ने एक मदरसे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। शोपियां जिले के इमाम साहिब स्थित दारुल उलूम जामिया सिराजुल उलूम को गैरकानूनी गतिविधियों के आरोप में प्रतिबंधित कर दिया गया है। यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत की गई है।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, इस संस्थान के 17 पूर्व छात्र अलग-अलग आतंकी संगठनों में शामिल हो गए थे और बाद में विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए। अधिकारी का कहना है कि यह मामला विचारधारा के प्रभाव और भर्ती के एक पैटर्न की ओर इशारा करता है।

    कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने शोपियां के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर यह आदेश जारी किया। जांच में मदरसे की गतिविधियों को संदिग्ध बताते हुए उसके प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी से कथित संबंधों के प्रमाण होने का दावा किया गया है। इस संगठन पर केंद्र सरकार ने 2019 में प्रतिबंध लगाया था।

    आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोगों का संस्थान के प्रशासन और शैक्षणिक ढांचे पर प्रभाव था। आरोप है कि संस्थान में समय के साथ ऐसा माहौल विकसित हुआ, जिसने कट्टरपंथ को बढ़ावा दिया और कई छात्र आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित हुए। हालांकि, संस्थान के अध्यक्ष मोहम्मद शफी लोन ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि संस्थान का किसी भी प्रतिबंधित संगठन से कोई संबंध नहीं है और यह पूरी तरह कानून का पालन करने वाला शिक्षण संस्थान है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यहां 814 छात्र अध्ययनरत हैं और संस्थान स्कूल शिक्षा बोर्ड तथा कश्मीर स्कूल फेडरेशन से संबद्ध है।

    लोन के अनुसार, संस्थान को पहले कारण बताओ नोटिस मिला था, जिसका जवाब दिया जा चुका है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार को संदेह है तो एक स्वतंत्र जांच समिति बनाकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि समय-समय पर मिली रिपोर्टों में संस्थान की गतिविधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा और राज्य की अखंडता के लिए खतरा बताया गया है। साथ ही यह भी आरोप है कि प्रतिबंधित संगठन से जुड़े लोग बिचौलियों के माध्यम से गुप्त रूप से सक्रिय थे और संस्थान के जरिए अपना प्रभाव बनाए हुए थे। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और एजेंसियां सभी पहलुओं की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

  • बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण की वोटिंग शुरू, 142 सीटों पर जनता कर रही फैसला

    बंगाल चुनाव 2026: दूसरे चरण की वोटिंग शुरू, 142 सीटों पर जनता कर रही फैसला


    नई दिल्ली | पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण शुरू होते ही सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। मंगलवार सुबह से पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर मतदान जारी है, जहां करीब 3.21 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस चरण में 1448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनकी किस्मत का फैसला आज जनता के हाथ में है।
    चुनाव आयोग ने इस बड़े मतदान प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए 41 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोका जा सके। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं और प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
    वोटर लिस्ट पर जारी विवाद
    इस चुनाव में मतदाता सूची को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 12.90 लाख से ज्यादा आवेदन लंबित थे, लेकिन अब तक बेहद कम आवेदनों को ही मंजूरी मिल सकी है। इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
    पहले चरण में भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई थीं, जहां बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। विपक्षी दलों ने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।
    क्यों अहम है दूसरा चरण?
    दूसरे चरण को चुनाव का सबसे निर्णायक चरण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कई शहरी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके शामिल हैं। कोलकाता, हावड़ा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हुगली और नदिया जैसे जिलों में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है।
    इन्हीं क्षेत्रों को चुनावी परिणामों का “गेम चेंजर” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां के नतीजे अक्सर सत्ता की दिशा तय करते हैं।
    सियासी दावे और आरोप-प्रत्यारोप
    चुनाव के इस चरण में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दावा है कि यह उसका मजबूत गढ़ है और यहां से उसे बड़ी जीत मिलेगी। वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का कहना है कि दक्षिण बंगाल में मजबूत प्रदर्शन के बिना सत्ता तक पहुंचना संभव नहीं है।
    मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भी विवाद गहरा गया है। कई जिलों में लाखों नाम हटाए जाने का दावा किया गया है, जिस पर टीएमसी ने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यकों और प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाया गया है। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह कार्रवाई फर्जी और अवैध नामों को हटाने के लिए की गई है।
    निर्णायक साबित हो सकता है यह चरण
    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल चुनाव का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बड़े पैमाने पर मतदान, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और सियासी घमासान के बीच यह चरण चुनाव के अंतिम परिणामों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    कश्मीर में शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर के समर्थन में लगे पोस्टर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क, जांच शुरू

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में संदिग्ध पोस्टर सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुल डोडा क्षेत्र की एक दीवार पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के समर्थन में पोस्टर चिपकाए जाने का मामला सामने आया है।

    इससे जुड़ी एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई, जिसके बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत जांच शुरू कर दी। वीडियो में दावा किया गया है कि ‘जम्मू कश्मीर यूथ मूवमेंट’ नाम के एक आजादी समर्थक संगठन ने यह पोस्टर लगाया है। पोस्टर में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की गई है और कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के मुद्दे पर पाकिस्तान के समर्थन के लिए आभार जताया गया है।

    मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। एक रिपोर्ट के अनुसार, डोडा पुलिस ने BNS की धारा 353(1) के तहत केस (FIR नंबर 95/2026) दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डोडा के डीएसपी कृष्ण रतन ने बताया कि वीडियो में आपत्तिजनक सामग्री है, जिससे क्षेत्र में तनाव या अफरा-तफरी फैल सकती है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल वीडियो असली है या फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से तैयार किया गया है।

    अब तक किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया है, क्योंकि मौके से ऐसा कोई पोस्टर बरामद नहीं हुआ है। पुलिस वीडियो की जियो-टैग लोकेशन की भी जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना वास्तव में वहीं हुई या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की गहन जांच जारी है और जल्द ही सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है।

  • छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड पर संकट: 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं तो नवंबर से बंद होगा मुफ्त राशन

    छत्तीसगढ़ में 32 लाख राशन कार्ड पर संकट: 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं तो नवंबर से बंद होगा मुफ्त राशन

    नई दिल्ली|Chhattisgarh के राशन कार्डधारकों के लिए एक बेहद अहम और सतर्क करने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन लोगों ने अभी तक अपने राशन कार्ड की E-KYC प्रक्रिया पूरी नहीं कराई है, उन्हें 31 अक्टूबर के बाद बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के मुताबिक, यदि निर्धारित समय सीमा तक E-KYC नहीं कराई गई, तो नवंबर से ऐसे लाखों परिवारों को मिलने वाला मुफ्त राशन पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 32 लाख राशन कार्डधारकों ने अब तक E-KYC नहीं कराई है। विभाग को आशंका है कि इनमें बड़ी संख्या में फर्जी या डुप्लीकेट कार्ड शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ देने की दिशा में काम कर रही है। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद जो लोग इस प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रहे हैं, उन्हें राशन वितरण प्रणाली से बाहर किया जा सकता है।

    E-KYC की प्रक्रिया को अनिवार्य बनाने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है। कई मामलों में यह सामने आया है कि एक ही व्यक्ति के नाम पर कई राशन कार्ड बने होते हैं या ऐसे लोग भी लाभ उठा रहे होते हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। इससे असली जरूरतमंदों को नुकसान होता है। E-KYC के जरिए आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल सही लोगों को ही सरकारी सहायता मिले।

    E-KYC कराने की प्रक्रिया काफी सरल रखी गई है। इसके लिए राशन कार्डधारकों को अपने परिवार के सभी सदस्यों के आधार कार्ड के साथ नजदीकी राशन दुकान पर जाना होगा। वहां बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाएगा, जिसमें फिंगरप्रिंट या अन्य पहचान के जरिए मिलान किया जाता है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होती है, आपकी E-KYC सफल मानी जाती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि परिवार के हर सदस्य का सत्यापन जरूरी है, तभी राशन कार्ड पूरी तरह सक्रिय रहेगा।

    यदि कोई व्यक्ति 31 अक्टूबर तक E-KYC नहीं कराता है, तो उसका राशन कार्ड निष्क्रिय (Inactive) कर दिया जाएगा। ऐसे में नवंबर से उसे मुफ्त राशन जैसे चावल, नमक और शक्करका लाभ नहीं मिल पाएगा। इतना ही नहीं, बाद में कार्ड को दोबारा सक्रिय कराने के लिए नई प्रक्रिया से गुजरना पड़ सकता है, जो समय लेने वाली हो सकती है।

    खाद्य विभाग ने सभी राशन कार्डधारकों से अपील की है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार न करें और जल्द से जल्द E-KYC की प्रक्रिया पूरी कर लें। यह कदम न सिर्फ उनके राशन को सुरक्षित रखेगा, बल्कि पूरे सिस्टम को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने में भी मदद करेगा।