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  • सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    सात सीटों में से अधिकांश पर भाजपा की बढ़त, कुछ जगह मुकाबला रोमांचक…

    नई दिल्ली।देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा उपचुनावों की मतगणना जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजनीतिक माहौल लगातार बदलता हुआ दिखाई दे रहा है। शुरुआती रुझानों ने कई जगहों पर स्पष्ट बढ़त और कुछ स्थानों पर कड़े मुकाबले की तस्वीर पेश की है। कुल मिलाकर सात विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है, जहां हर अपडेट के साथ समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं।

    महाराष्ट्र की बारामती सीट इस पूरे चुनावी परिदृश्य का सबसे अहम केंद्र बनी हुई है। यहां से सुनेत्रा पवार आगे चल रही हैं और मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं। इस सीट पर मतदाताओं का रुझान शुरुआत से ही खास चर्चा में रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र राज्य की राजनीति में लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाता आया है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार यहां मुकाबला एक तरफ झुकता हुआ दिखाई दे रहा है, जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी इसके संभावित परिणामों पर नजर बनाए हुए हैं।

    इसी राज्य की राहुरी सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार अक्षय कर्डिले ने बढ़त हासिल कर ली है। वे लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए हैं और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी पीछे चलते नजर आ रहे हैं। इस सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान दोनों प्रमुख दलों ने पूरी ताकत लगाई थी, लेकिन शुरुआती रुझानों में भाजपा का पलड़ा भारी दिखाई दे रहा है।

    कर्नाटक की दावणगेरे साउथ सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार ने बढ़त बना रखी है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार पीछे चल रहे हैं। वहीं इसी राज्य की बागलकोट सीट पर स्थिति इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार आगे चल रहे हैं और भाजपा उम्मीदवार दूसरे स्थान पर हैं। यह स्थिति कर्नाटक में चुनावी प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना रही है, क्योंकि दोनों दल अलग-अलग सीटों पर बढ़त और नुकसान का सामना कर रहे हैं।

    त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। यहां मतगणना के शुरुआती चरण से ही पार्टी को बढ़त मिलती दिख रही है। इसी तरह गुजरात की उमरेठ सीट पर भी भाजपा ने मजबूत पकड़ बनाई हुई है और उम्मीदवार ने बड़ी बढ़त दर्ज की है। नागालैंड की कोरिडांग सीट पर भी भाजपा उम्मीदवार मामूली अंतर से आगे हैं, जिससे यहां मुकाबला अभी पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।

    इन सभी सीटों के शुरुआती रुझानों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि कई राज्यों में सत्तारूढ़ दल का प्रभाव अभी भी मजबूत बना हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर विपक्षी दलों ने भी कड़ा संघर्ष किया है। हालांकि अभी अंतिम परिणाम आना बाकी है, इसलिए कई सीटों पर स्थिति बदलने की संभावना भी बनी हुई है।

    कुल मिलाकर इन उपचुनावों ने राजनीतिक माहौल को और अधिक सक्रिय और रोचक बना दिया है। हर राउंड की गिनती के साथ बढ़त और हार का अंतर बदल रहा है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि अंतिम नतीजे तक किसी भी तरह का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। अब सभी की नजरें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं, जो यह तय करेंगे कि राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।

  • त्यागराज जयंती पर विरासत बचाने का संकल्प, पवन कल्याण ने संगीत संरक्षण पर उठाए बड़े कदम

    त्यागराज जयंती पर विरासत बचाने का संकल्प, पवन कल्याण ने संगीत संरक्षण पर उठाए बड़े कदम

    नई दिल्ली। संत त्यागराज की 259वीं जयंती के अवसर पर देशभर में उनके योगदान को याद किया जा रहा है। कर्नाटक शास्त्रीय संगीत को नई दिशा देने वाले इस महान संत-संगीतकार की विरासत आज भी भारतीय संस्कृति की आत्मा मानी जाती है। इस विशेष अवसर पर पवन कल्याण ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी संगीत परंपरा को संरक्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    उन्होंने अपने संदेश में कहा कि संत त्यागराज ने भक्ति और संगीत को जिस तरह एक साथ पिरोया, वह भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में अद्वितीय है। उनकी रचनाएं केवल संगीत नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का माध्यम भी हैं। माना जाता है कि उन्होंने हजारों कृतियों की रचना की थी, जिनमें से आज केवल सीमित रचनाएं ही उपलब्ध हैं, जो इस विरासत के संरक्षण की आवश्यकता को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।

    पवन कल्याण ने इस बात पर चिंता जताई कि इतनी समृद्ध संगीत परंपरा के बावजूद कई रचनाएं समय के साथ विलुप्त होती जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कलाकार या समुदाय की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का कर्तव्य है कि इस धरोहर को सुरक्षित रखा जाए और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए।

    उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि त्यागराज की रचनाओं ने न केवल भारत में बल्कि विश्व स्तर पर संगीत प्रेमियों को प्रभावित किया है। उनकी भक्ति आधारित रचनाएं आज भी संगीतकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं। कई महान कलाकारों ने उनकी कृतियों को मंच पर प्रस्तुत कर इसे वैश्विक पहचान दिलाई है।

    इस अवसर पर उन्होंने दो महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने रखे। पहला सुझाव यह है कि आंध्र प्रदेश में एक राज्य स्तरीय त्यागराज आराधना उत्सव का आयोजन किया जाए, जिसमें देश-विदेश के कलाकारों और विद्वानों को शामिल किया जाए ताकि इस परंपरा को और मजबूती मिले। दूसरा सुझाव यह है कि उनकी सभी उपलब्ध रचनाओं, पांडुलिपियों और मौखिक परंपराओं का डिजिटल संरक्षण किया जाए ताकि यह ज्ञान आधुनिक तकनीक के माध्यम से सुरक्षित रह सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार, सांस्कृतिक संस्थान और समाज मिलकर प्रयास करें, तो इस अमूल्य धरोहर को न केवल संरक्षित किया जा सकता है, बल्कि इसे नई पीढ़ी तक और अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है।

     यह अवसर केवल एक जयंती नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की उस परंपरा को याद करने और उसे भविष्य के लिए सुरक्षित करने का संकल्प लेने का अवसर बन गया है, जिसे संत त्यागराज ने अपनी साधना और भक्ति से समृद्ध किया था।

  • 5 राज्यों के चुनावी नतीजों में हाई-वोल्टेज ड्रामा: कहीं जश्न, कहीं सन्नाटा; भाजपा-कांग्रेस-TVK की जीत के बीच बदला सियासी माहौल

    5 राज्यों के चुनावी नतीजों में हाई-वोल्टेज ड्रामा: कहीं जश्न, कहीं सन्नाटा; भाजपा-कांग्रेस-TVK की जीत के बीच बदला सियासी माहौल


    नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनाव मतगणना के बीच राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम हो गया है। शुरुआती रुझानों ने जहां कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन के संकेत दिए हैं, वहीं अलग-अलग दलों के दफ्तरों में जश्न और सन्नाटे का अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है।

    कोलकाता में All India Trinamool Congress (TMC) कार्यालय के बाहर सुबह से ही सन्नाटा पसरा रहा। कार्यकर्ताओं की कम मौजूदगी और शांत माहौल ने राजनीतिक हलचल को साफ दिखा दिया। वहीं दूसरी ओर दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय पर जश्न का माहौल देखने को मिला, जहां कार्यकर्ताओं ने पूरी और जलेबी बनाकर खुशी जताई।

    भाजपा कार्यालय में जश्न का माहौल
    दिल्ली स्थित Bharatiya Janata Party (BJP) मुख्यालय में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। असम में पार्टी की बढ़त और बंगाल में मजबूत प्रदर्शन के चलते कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया। बैंड-बाजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी भी शुरू हो गई।

    बंगाल में टकराव और सन्नाटा
    पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़त के बीच कोलकाता और सिलिगुड़ी जैसे इलाकों में अलग-अलग माहौल देखने को मिला। जहां एक ओर भाजपा समर्थकों ने भगवा रंग के अबीर-गुलाल के साथ जश्न मनाया, वहीं TMC कार्यालय शांत नजर आया।

    केरल में कांग्रेस का जश्न
    केरल में Indian National Congress के नेतृत्व वाला UDF गठबंधन बढ़त बनाए हुए है। इस बढ़त के बाद तिरुवनंतपुरम स्थित कांग्रेस कार्यालय में केक काटकर जश्न मनाया गया। इसमें वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल, शशि थरूर और अन्य नेता शामिल हुए।

    तमिलनाडु में TVK का उभार
    तमिलनाडु में सबसे बड़ा राजनीतिक सरप्राइज Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) का प्रदर्शन रहा। एक्टर Vijay की पार्टी ने शुरुआती रुझानों में 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाकर सभी को चौंका दिया। चेन्नई में TVK समर्थकों ने मिठाई बांटकर और जश्न मनाकर खुशी जाहिर की।

    दूसरी ओर DMK कार्यालय में पहले जहां उत्साह था, वहीं रुझान बदलने के बाद टेंट हटाए जाने और माहौल शांत होने की खबरें सामने आईं।

    असम और पुडुचेरी का हाल
    असम में भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है, जबकि कांग्रेस कुछ सीटों पर पीछे चल रही है। वहीं पुडुचेरी में भी भाजपा गठबंधन बढ़त बनाए हुए है।

    कुल मिलाकर तस्वीर
    इन पांच राज्यों के शुरुआती रुझानों ने देश की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। कहीं सत्ता की वापसी की तैयारी है, तो कहीं नई राजनीतिक ताकतें उभरती नजर आ रही हैं। हालांकि अंतिम नतीजों का इंतजार अभी जारी है।

  • दक्षिण भारत में सियासी भूचाल: तमिलनाडु में TVK का ऐतिहासिक उभार, केरल में कांग्रेस की वापसी, असम में BJP की सत्ता बरकरार; पुडुचेरी में भी NDA आगे

    दक्षिण भारत में सियासी भूचाल: तमिलनाडु में TVK का ऐतिहासिक उभार, केरल में कांग्रेस की वापसी, असम में BJP की सत्ता बरकरार; पुडुचेरी में भी NDA आगे


    नई दिल्ली। दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के चार राज्यों तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी की 2026 विधानसभा चुनावों की मतगणना ने शुरुआती रुझानों में बड़ा राजनीतिक उलटफेर दिखाया है। कई दिग्गज दल पीछे होते नजर आ रहे हैं, जबकि नई और क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत स्थिति में उभरकर सामने आई हैं।

    तमिलनाडु में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) को लगा है। यहां 234 सीटों में से DMK केवल 41 सीटों पर आगे है, जबकि अभिनेता विजय की नई पार्टी तमिलागा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 108 सीटों पर बढ़त बना ली है और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभर रही है। वहीं अन्नाद्रमुक 63 सीटों पर आगे चल रही है। शुरुआती रुझानों के बाद चेन्नई स्थित DMK कार्यालय में गतिविधियां शांत पड़ गईं और कई तैयारियां रोक दी गईं।

    द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी सीट कोलाथुर से पीछे बताए जा रहे हैं, जिससे पार्टी के भीतर चिंता बढ़ गई है। दूसरी ओर टीवीके  कार्यकर्ताओं में कोयंबटूर सहित कई शहरों में जश्न का माहौल देखा गया।

    केरल में कांग्रेस की बड़ी वापसी
    केरल में 140 सीटों के रुझानों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन 93 सीटों पर आगे है, जबकि सीपीआई(एम)  के नेतृत्व वाला LDF 44 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। यह रुझान राज्य में सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहे हैं। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई मंत्री पीछे चल रहे हैं।कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे “बदलाव की लहर” बताया और कहा कि मतदाताओं ने नई राजनीतिक दिशा चुनी है।

    असम में फिर BJP की मजबूत पकड़
    असम की 126 सीटों में से भारतीय जनता पार्टी (BJP) 95 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस 29 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपनी जालुकबारी सीट से आगे हैं, जबकि अधिकांश मंत्री भी मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं। गुवाहाटी में BJP कार्यालय में जश्न की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।

    पुडुचेरी में भी NDA की बढ़त
    पुडुचेरी की 30 सीटों में से भाजपा गठबंधन 22 सीटों पर आगे है, जबकि कांग्रेस गठबंधन 6 सीटों पर सिमटता दिख रहा है। मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी अपनी सीट पर मिश्रित स्थिति में हैं।

    विजय और TVK का राजनीतिक उभार
    टीवीके प्रमुख विजय की राजनीति में एंट्री अब बड़ा फैक्टर बनती दिख रही है। शुरुआती रुझानों में उनकी पार्टी सबसे आगे चल रही है, जिससे तमिलनाडु की राजनीति में नया समीकरण बन गया है।

    कुल मिलाकर तस्वीर
    शुरुआती रुझानों ने साफ संकेत दिया है कि दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। जहां तमिलनाडु में नया राजनीतिक उभार दिख रहा है, वहीं केरल में सत्ता परिवर्तन के संकेत और असम में मौजूदा सरकार की पकड़ मजबूत नजर आ रही है। हालांकि अंतिम नतीजों के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी

  • बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा उलटफेर: भाजपा 194 सीटों पर आगे, वोट शेयर में 6% उछाल से बढ़ी जीत की लहर; TMC को भारी नुकसान का अनुमान

    बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा उलटफेर: भाजपा 194 सीटों पर आगे, वोट शेयर में 6% उछाल से बढ़ी जीत की लहर; TMC को भारी नुकसान का अनुमान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की 293 विधानसभा सीटों पर जारी मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा हलचल मचा दिया है। एक सीट फालता पर 21 मई को पुनर्मतदान होना है, जबकि बाकी सीटों की गिनती जारी है।

    ताजा रुझानों के अनुसार Bharatiya Janata Party (भाजपा) 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि All India Trinamool Congress (TMC) 94 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को लगभग 45% और टीएमसी को करीब 42% वोट मिलते दिख रहे हैं।

    वोट शेयर में बड़ा बदलाव
    पिछले चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा के वोट शेयर में करीब 6% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी बदलाव का असर सीटों पर भी दिख रहा है, जहां भाजपा को लगभग 117 सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है, जबकि टीएमसी को उतना ही नुकसान होने का अनुमान है।

    हाई-प्रोफाइल सीटों पर कड़ा मुकाबला
    राज्य की सबसे चर्चित भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee आगे चल रही हैं। चौथे राउंड की गिनती के बाद वह लगभग 8400 वोटों से आगे बताई जा रही हैं।

    वहीं नंदीग्राम सीट से भाजपा नेता Suvendu Adhikari पहले राउंड के बाद करीब 3100 वोटों से आगे चल रहे हैं, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।

    कई सीटों पर रोचक बढ़त
    काकद्वीप में टीएमसी उम्मीदवार मंतूराम पाखीरा 2750 वोटों से आगे हैं, जबकि हावड़ा की अमता सीट पर भाजपा उम्मीदवार अमित सामंत 734 वोटों से बढ़त बनाए हुए हैं।

    आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले से जुड़ी भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ भी अपने क्षेत्र में 2763 वोटों से आगे चल रही हैं।

    जश्न और राजनीतिक माहौल
    नादिया और अन्य कई जिलों में भाजपा समर्थकों के जश्न की तस्वीरें सामने आई हैं। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जताई और इसे “बड़े बदलाव का संकेत” बताया।

    प्रशासन की निगरानी और सफाई
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कंट्रोल रूम से पूरे राज्य की मतगणना पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। वहीं कूड़े में मिली VVPAT पर्चियों को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये मॉक पोल की थीं और वास्तविक मतदान से उनका कोई संबंध नहीं है।

    कुल मिलाकर स्थिति
    शुरुआती रुझानों ने बंगाल चुनाव को बेहद रोमांचक मोड़ पर ला दिया है। भाजपा की बढ़त और वोट शेयर में उछाल ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, हालांकि अंतिम नतीजों का इंतजार अभी जारी है।

  • बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा सियासी उलटफेर: भाजपा बहुमत की ओर, 192 सीटों पर बढ़त; वोट शेयर में 6% उछाल से बदला पूरा समीकरण

    बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा सियासी उलटफेर: भाजपा बहुमत की ओर, 192 सीटों पर बढ़त; वोट शेयर में 6% उछाल से बदला पूरा समीकरण


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। 293 विधानसभा सीटों पर जारी मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। एक सीट फालता पर 21 मई को पुनर्मतदान होना है, जबकि बाकी सीटों की गिनती जारी है।

    ताजा रुझानों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 192 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सत्ताधारीअखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 92 सीटों पर आगे चल रही है। शुरुआती आंकड़ों में भाजपा को लगभग 45% और टीएमसी को करीब 42% वोट शेयर मिलता दिख रहा है।

    रुझानों ने इस बार चुनावी तस्वीर को काफी बदल दिया है। पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा के वोट प्रतिशत में लगभग 6% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी बढ़त का सीधा असर सीटों पर भी पड़ा है, जहां भाजपा को लगभग 115 सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है, जबकि टीएमसी को उतना ही नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    हाई-प्रोफाइल सीटों पर कांटे की टक्कर
    राज्य की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगे चल रही हैं। यह सीट हमेशा से बंगाल की राजनीति का केंद्र मानी जाती रही है और इस बार भी यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा।वहीं, नंदीग्राम से जुड़े प्रमुख नेता सुवेंदु अधिकारी पीछे बताए जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    इसके अलावा झाड़ग्राम, बिनपुर, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम जैसी सीटों पर भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है। इन इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन खासा चर्चा का विषय बना हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं और रैलियों का असर माना जा रहा है।

    जश्न का माहौल और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
    कई जगहों से भाजपा कार्यकर्ताओं के जश्न की तस्वीरें सामने आई हैं। नादिया और दुर्गापुर जैसे इलाकों में समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जताई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह परिणाम “बदलाव की शुरुआत” है और जनता ने इस बार बड़ा संदेश दिया है।कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि पहले जहां चुनावी माहौल तनावपूर्ण होता था, अब वहां जीत की खुशी दिखाई दे रही है।

    प्रशासनिक सफाई भी सामने आई
    इस बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना के दौरान कूड़े में मिलीं VVPAT पर्चियों पर सफाई दी है। उन्होंने बताया कि ये पर्चियां मॉक पोल की थीं और इनका वास्तविक मतदान से कोई संबंध नहीं है। साथ ही जांच की प्रक्रिया भी जारी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।

    एक और बड़ा अपडेट
    आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले से जुड़ी भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ भी अपने क्षेत्र में 2763 से अधिक वोटों से आगे चल रही हैं। यह नतीजा भी इस चुनावी रुझान को और ज्यादा सुर्खियों में ला रहा है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
    भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता का रुझान स्पष्ट है और वोट शेयर में बढ़ोतरी इसका प्रमाण है। वहीं टीएमसी खेमे में अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बेहद अहम और निर्णायक रुझान मान रहे हैं।

    कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव के शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। हालांकि अंतिम नतीजों तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है, लेकिन फिलहाल मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का बना हुआ है।

  • शराब पीकर पंजाब चला रहे भगवंत मान, इन्हें हटाएं; भाजपा की राज्यपाल से मांग

    शराब पीकर पंजाब चला रहे भगवंत मान, इन्हें हटाएं; भाजपा की राज्यपाल से मांग

    नई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटाए जाने की मांग की है। राज्यपाल से मुलाकात के दौरान भाजपा की पंजाब इकाई के अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री मान शराब पीकर पंजाब चला रहे हैं।
    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के विधानसभा में क​थित तौर पर शराब पीकर आने पर सियासत अभी भी गर्म है। पंजाब भाजपा के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल के सामने मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने राज्य का मुख्यमंत्री बदलने की मांग की। उन्होंने कहा कि शराबी आदमी को कोई कार नहीं चलाने देता, भगवंत मान पंजाब चला रहे हैं। यह ऐसा है जैसे किसी ने कलंक के ऊपर मुहर लगाई है। आप विधायकों द्वारा विधानसभा में विश्वासमत पर बाबा साहिब और संविधान की बेअदबी की जाखड़ ने कहा कि असली फ्लोर टेस्ट राज्यपाल के पास ही होगा, क्योंकि ‘आप’ के कई विधायक अपनी सरकार के खिलाफ जल्द ही राजभवन आएंगे।

    भाजपा ने मांग की कि पंजाब के मुख्यमंत्री को इलाज के लिए डी-एडिक्शन सेंटर भेज देना चाहिए। जाखड़ ने आरोप लगाया कि विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान का आचरण उन्हें पंजाब जैसे संवेदनशील सीमावर्ती राज्य का नेतृत्व करने के लिए अयोग्य बनाता है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे सत्ताधारी पार्टी के नेतृत्व से बात कर नया नेता चुनने के लिए कहें, क्योंकि भगवंत मान ने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो दिया है।

    मीडिया से बातचीत करते हुए जाखड़ ने कहा कि पार्टी ने राज्यपाल से पंजाब के मुख्य सचिव को बुलाकर यह पता लगाने की मांग की है कि कहीं वे किसी दबाव में तो काम नहीं कर रहे। 1 मई को विधानसभा सत्र से पहले हुई कैबिनेट बैठक में दो मंत्रियों के अलावा मुख्य सचिव को भी कथित रूप से धमकाया और अपमानित किया गया। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को बुलाकर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे बिना किसी डर के, कानून के अनुसार काम कर सकें और उन्हें यह भरोसा दिलाया जाए कि नियमों के तहत काम करने पर संविधान और केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा करेगी।

    जाखड़ ने कहा कि मजदूर दिवस के अवसर पर बुलाया गया विधानसभा सत्र केवल एक बहाना था और वास्तव में मुख्यमंत्री ने इसे अपनी कुर्सी बचाने के लिए बुलाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्र के बाद भ्रष्टाचार के मामले में जेल जा चुके विधायक रमन अरोड़ा को पुलिस सुरक्षा दी गई, जो यह दर्शाता है कि सरकार भ्रष्टाचारियों को संरक्षण दे रही है और अपने विधायकों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट दे रही है। उन्होंने इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति बताया और कहा कि मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी खोने के डर में फैसले ले रहे हैं, जो उनकी शपथ के विपरीत है।
    विधायकों पर एफआईआर का डर दिखाकर डरा रहे

    जाखड़ ने आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि केजरीवाल खुद शराब नीति मामले में जेल रहकर आए हैं, ऐसे में वह भगवंत भगवंत मान को कैसे बदलेंगे? उन्होंने आरोप लगाया कि संदीप पाठक के जरिए विधायकों पर एफआईआर का डर दिखाकर उन्हें डराने की कोशिश की जा रही है ताकि वो पार्टी न छोड़ें। सांसद संदीप पाठक के खिलाफ दर्ज एफ.आई.आर. के सवाल पर जाखड़ ने कहा कि भाजपा ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाली नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला सत्ताधारी पार्टी के भीतर लोगों को डराने और उन्हें पार्टी छोड़ने से रोकने के लिए दर्ज किया गया है।

  • राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार

    राष्ट्रपति के पास जा रहे राघव चड्ढा समेत 3 सांसद, 5 मई को होगी मुलाकात; निशाने पर पंजाब सरकार


    नई दिल्‍ली। आम आदमी पार्टी (AAP) से हाल ही में नाता तोड़ने वाले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब अपनी पुरानी पार्टी और पंजाब सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। सांसद चड्ढा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगा था, जिसे राष्ट्रपति भवन द्वारा मंजूर कर लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, यह अहम मुलाकात 5 मई को सुबह 10:40 बजे होगी। इस दौरान राघव चड्ढा के साथ तीन अन्य सांसद भी मौजूद रहेंगे, जिन्होंने हाल ही में AAP का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है।
    क्या है मुलाकात का मुख्य एजेंडा?

    समाचार एजेंसी के हवाले से लिखा है कि इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति को पंजाब की भगवंत मान सरकार की कथित ‘बदले की राजनीति’ से अवगत कराना है। राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों का आरोप है कि पंजाब सरकार अपनी शक्तियों और सरकारी मशीनरी का घोर दुरुपयोग कर रही है। उनका दावा है कि जिन नेताओं ने हाल ही में AAP से इस्तीफा देकर BJP के साथ विलय किया है, पंजाब सरकार अब उन्हें जानबूझकर ‘टार्गेट’ कर रही है और उन पर अनुचित कार्रवाई कर रही है। इस मुलाकात में ये सांसद राष्ट्रपति से पंजाब सरकार की इन कथित दमनकारी नीतियों और राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
    आप छोड़ भाजपा में गए राघव चड्ढा

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब में राजनीतिक घमासान चरम पर है। 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत सात AAP राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा में विलय का ऐलान किया था। इनमें छह पंजाब से चुने गए सांसद शामिल हैं। AAP ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताते हुए इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है, जबकि चड्ढा गुट ने पंजाब सरकार पर दमनकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया है।

    AAP छोड़ने वालों में राघव चड्ढा के अलावा, संदीप पाठक, अशोक कुमार मित्तल, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी तथा स्वाति मालीवाल शामिल हैं। चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि AAP मूल सिद्धांतों से भटक गई है। दो-तिहाई बहुमत होने के कारण इन सांसदों का भाजपा में विलय राज्‍यसभा सभापति ने स्वीकार भी कर लिया है।
    संदीप पाठक के खिलाफ मुकदमा

    बता दें कि आम आदमी पार्टी छोड़कर हाल ही में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुए राज्यसभा सदस्य संदीप पाठक के खिलाफ पंजाब पुलिस ने प्राथमिकियां दर्ज की हैं। सूत्रों ने बताया कि पाठक के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।

    हालांकि, प्राथमिकी के बारे में अब तक कोई अन्य जानकारी सामने नहीं आई है। पाठक उन सात राज्यसभा सदस्यों में शामिल हैं, जिन्होंने ‘आप’ छोड़कर भाजपा का दामन थामा है।

    पंजाब पुलिस की एक टीम दिल्ली गई लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही पाठक एक एसयूवी (स्पोर्ट्स यूटिलिटी व्हीकल) में सवार होकर अपने घर से निकल चुके थे। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में पाठक अपने घर से निकलते हुए दिख रहे हैं और कुछ संवाददाता उनसे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया के बारे में संपर्क करने की कोशिश रहे हैं।

    दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्व प्रोफेसर पाठक को आम आदमी पार्टी (आप) की चुनाव एवं प्रचार रणनीति तैयार करने और पार्टी संगठन को मजबूत करने का श्रेय दिया जाता है। कभी ‘आप’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले पाठक ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    यह घटनाक्रम 30 अप्रैल को पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ट्राइडेंट लिमिटेड के परिसर पर की गई छापेमारी के तुरंत बाद सामने आया है। राज्यसभा सदस्य राजेंद्र गुप्ता इस कंपनी के मानद चेयरमैन हैं। गुप्ता उन सात सांसदों में से एक हैं जिन्होंने पिछले महीने ‘आप’ छोड़ दी थी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए थे। इससे पहले पंजाब पुलिस ने सांसद और पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस ले ली थी।
  • Delhi AC Blast Alert: कब एयर कंडीशनर बन सकता है ‘मौत का बम’? जानें कारण और बचाव के उपाय

    Delhi AC Blast Alert: कब एयर कंडीशनर बन सकता है ‘मौत का बम’? जानें कारण और बचाव के उपाय

    नई दिल्ली। दिल्ली के विवेक विहार में इमारत में लगी भीषण आग की घटना ने राजधानी को झकझोर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस हादसे पर गहरा दुख जताते हुए पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस कठिन समय में प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है।

    घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, डीडीएमए, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में जुट गईं। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधि भी प्रभावित लोगों की मदद में सक्रिय हैं।

    कब और क्यों फट सकता है एसी?
    विशेषज्ञों के अनुसार एयर कंडीशनर में ब्लास्ट की सबसे बड़ी वजह कंप्रेसर के अंदर अत्यधिक प्रेशर बनना होता है। जब सिस्टम सही तरीके से काम नहीं करता—जैसे ओवरहीटिंग, एयरफ्लो बाधित होना या तकनीकी खराबी—तो यूनिट के भीतर दबाव खतरनाक स्तर तक पहुंच सकता है। यदि यह दबाव समय पर रिलीज न हो, तो विस्फोट का खतरा बढ़ जाता है।

    एसी ब्लास्ट से बचाव के 11 जरूरी उपाय
    – हर 6 से 12 महीने में एसी की सर्विस जरूर कराएं।
    – एक ही पावर लाइन में कई भारी उपकरण न चलाएं।
    – आउटडोर यूनिट के आसपास हवा का अच्छा प्रवाह सुनिश्चित करें।
    – जलने की गंध, स्पार्क या अजीब आवाज आने पर तुरंत बंद करें।
    – लंबे समय तक घर से बाहर रहने पर मेन स्विच या एमसीबी बंद रखें।
    – एसी को लगातार 8–10 घंटे से ज्यादा न चलाएं।
    – तापमान 24–26 डिग्री सेल्सियस पर रखना सुरक्षित माना जाता है।
    – आउटडोर यूनिट को ढके हुए या बंद स्थान में न रखें।
    – कमजोर एक्सटेंशन बोर्ड या ढीली वायरिंग से एसी न चलाएं।
    – गैस लीकेज को नजरअंदाज न करें, यह ब्लास्ट का बड़ा कारण हो सकता है।
    – नियमित सर्विसिंग न कराने से धूल जमकर कंप्रेसर पर दबाव बढ़ाती है।

    तकनीकी सावधानी बेहद जरूरी
    विशेषज्ञों का कहना है कि एसी को समय-समय पर प्रोफेशनल तकनीशियन से जांच कराना जरूरी है। साथ ही हर 4–5 घंटे के उपयोग के बाद 15–20 मिनट का ब्रेक देना कंप्रेसर के लिए सुरक्षित माना जाता है। वोल्टेज स्टेबलाइजर का उपयोग भी जरूरी है ताकि बिजली के उतार-चढ़ाव से नुकसान न हो। अगर एसी से लगातार जलने की गंध, असामान्य आवाज या बार-बार ट्रिपिंग जैसी समस्या दिखे तो तुरंत उसे बंद कर तकनीकी जांच करानी चाहिए।

  • ग्रामीण योजनाओं को मजबूत बनाने की कवायद तेज, पंचायत विकास योजना पर बड़ा राष्ट्रीय मंथन

    ग्रामीण योजनाओं को मजबूत बनाने की कवायद तेज, पंचायत विकास योजना पर बड़ा राष्ट्रीय मंथन

    नई दिल्ली।
    ग्रामीण विकास और जमीनी स्तर पर शासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रही है। इसके तहत पंचायत विकास योजनाओं को और अधिक सशक्त और परिणाम आधारित बनाने के उद्देश्य से एक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन राजधानी में होगा, जहां देशभर से जुड़े विशेषज्ञ, अधिकारी और संबंधित हितधारक एक साथ मिलकर ग्रामीण योजनाओं की नई रूपरेखा पर चर्चा करेंगे।

    इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पंचायत स्तर पर योजना निर्माण की प्रक्रिया को अधिक डेटा आधारित और सहभागिता पर आधारित बनाना है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहकर वास्तविक परिणाम दे सकें। सरकार का मानना है कि मजबूत पंचायत प्रणाली ही विकसित भारत की नींव है, इसलिए इस स्तर पर सुधार बेहद जरूरी हैं।

    कार्यशाला में आगामी वित्तीय वर्ष के लिए पंचायत विकास योजनाओं की तैयारियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने पर भी चर्चा होगी कि ये योजनाएं वित्तीय मानकों और आवश्यक शर्तों के अनुरूप हों, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को सही दिशा मिल सके।

    इस आयोजन में विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। तकनीकी सत्रों और समूह अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक रूप से योजना निर्माण की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष फोकस रहेगा।

    कार्यशाला के दौरान पंचायत स्तर पर डिजिटल प्रणाली को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन अधिक पारदर्शी और प्रभावी हो सके। इसके लिए नए पोर्टल और दिशानिर्देशों की भी जानकारी साझा की जाएगी, जिससे पंचायतें आधुनिक तकनीक के साथ अपने विकास कार्यों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ा सकें।