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  • मानसूनी बादल हुए कमजोर, मध्य भारत से लेकर उत्तर भारत तक सूखे जैसे हालात; मौसम विभाग की निगाह अगले कुछ दिनों पर

    मानसूनी बादल हुए कमजोर, मध्य भारत से लेकर उत्तर भारत तक सूखे जैसे हालात; मौसम विभाग की निगाह अगले कुछ दिनों पर

    नई दिल्ली । देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के बाद जिस तेज प्रगति की उम्मीद की जा रही थी, वह फिलहाल थमती हुई दिखाई दे रही है। मानसून के आगमन को कई दिन बीत जाने के बावजूद देश के बड़े हिस्से में अपेक्षित वर्षा नहीं हो पाई है। मौसम संबंधी ताजा आंकड़ों और उपग्रह चित्रों से संकेत मिल रहे हैं कि मानसूनी गतिविधियां अचानक कमजोर पड़ गई हैं, जिसके कारण कई राज्यों में बारिश का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसून वर्तमान में महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों के आसपास ठहराव की स्थिति में है। पूर्वोत्तर राज्यों में पहुंचने के बाद इसकी प्रगति बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल क्षेत्र में भी धीमी हो गई है। परिणामस्वरूप मध्य भारत, उत्तर भारत और पूर्वी भारत के कई हिस्से अब भी पर्याप्त वर्षा से वंचित हैं।

    देश के लगभग 17 राज्यों में सामान्य मानसूनी गतिविधियां अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हो सकी हैं। इनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य शामिल हैं। इन क्षेत्रों में किसानों, जल प्रबंधन एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ने लगी है क्योंकि खरीफ फसलों की बुआई का समय धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार मानसून के आगमन के बाद शुरुआती अवधि में सामान्य रूप से 53.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज होती है, जबकि इस बार अब तक केवल 19.2 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह सामान्य से लगभग 64 प्रतिशत कम है। इतनी बड़ी कमी ने कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियों की आशंका को जन्म दिया है, हालांकि विशेषज्ञ फिलहाल इसे स्थायी संकट मानने के बजाय अस्थायी मौसमीय व्यवधान बता रहे हैं।

    उपग्रह चित्रों में भी मानसूनी बादलों की सक्रियता सामान्य वर्षों की तुलना में काफी कम दिखाई दे रही है। आमतौर पर जून के मध्य तक मध्य और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से घने बादलों से ढके रहते हैं, लेकिन इस बार कई क्षेत्रों में बादलों की उपस्थिति सीमित नजर आई है। इससे वर्षा की तीव्रता और विस्तार दोनों प्रभावित हुए हैं।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को मानसून का अस्थायी ठहराव माना जा रहा है। इसके पीछे ऊपरी वायुमंडल में चल रही हवाओं के पैटर्न को प्रमुख कारण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी हवाओं की जेट स्ट्रीम सामान्य स्थिति से अधिक दक्षिण की ओर खिसक गई है, जिसके कारण मानसून को आगे बढ़ाने वाली पूर्वी हवाओं की प्रणाली प्रभावित हुई है। यही कारण है कि मानसून की गति कमजोर पड़ गई है।

    हालांकि मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में कई राज्यों में वर्षा गतिविधियों में सुधार की संभावना जताई है। पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों, विशेषकर बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी भारी वर्षा के संकेत हैं। वहीं राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ क्षेत्र में गरज-चमक के साथ वर्षा और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी सप्ताह में मानसून दोबारा सक्रिय होता है तो वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। फिलहाल कृषि क्षेत्र, जलाशयों के जलस्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसके संभावित प्रभावों को देखते हुए मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले कुछ दिन मानसून की दिशा और उसकी तीव्रता तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • प्रेम विवाह की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, घंटों तक चला तनावपूर्ण घटनाक्रम, प्रशासन की समझाइश के बाद उतरा नीचे

    प्रेम विवाह की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ा युवक, घंटों तक चला तनावपूर्ण घटनाक्रम, प्रशासन की समझाइश के बाद उतरा नीचे

    नई दिल्ली । झारखंड के गढ़वा जिले में रविवार को एक असामान्य घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आम नागरिकों की चिंता बढ़ा दी। प्रेम विवाह की मांग को लेकर एक युवक मोबाइल टावर पर चढ़ गया और घंटों तक नीचे उतरने से इनकार करता रहा। घटना के कारण क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हो गए और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को विशेष प्रयास करने पड़े।

    जानकारी के अनुसार, गढ़वा जिले के खरौंधी थाना क्षेत्र स्थित बाजार इलाके में रहने वाला एक युवक अचानक एक मोबाइल टावर पर चढ़ गया। टावर की ऊंचाई पर पहुंचने के बाद उसने नीचे उतरने से साफ इनकार कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक लगातार अपनी कथित प्रेमिका को मौके पर बुलाने और उससे विवाह कराने की मांग कर रहा था। उसकी इस हरकत से बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में लोग वहां जुटने लगे।

    स्थानीय लोगों ने प्रारंभिक स्तर पर युवक को समझाने का प्रयास किया। लोगों ने उसे सुरक्षित नीचे उतरने और बातचीत के माध्यम से अपनी बात रखने की सलाह दी। हालांकि युवक अपनी मांगों पर अड़ा रहा। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब उसने कथित तौर पर टावर से कूदकर जान देने की चेतावनी दी। इसके बाद मामले की सूचना तत्काल पुलिस और प्रशासन को दी गई।

    सूचना मिलने पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने युवक से संवाद स्थापित करने की कोशिश की। पुलिसकर्मियों और स्थानीय नागरिकों ने संयम बरतते हुए उसे लगातार समझाया कि किसी भी प्रकार का आत्मघाती कदम समस्या का समाधान नहीं हो सकता। प्रशासन की प्राथमिकता युवक की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उसे बिना किसी नुकसान के नीचे उतारना थी।

    घटना के दौरान बाजार क्षेत्र में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती रही। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए बचाव प्रक्रिया को प्रभावित न होने देने की कोशिश की। कई घंटों तक चली बातचीत और समझाइश के बावजूद युवक तुरंत नीचे उतरने के लिए तैयार नहीं हुआ।

    बताया गया कि युवक अपनी कथित प्रेमिका की उपस्थिति की मांग कर रहा था। बाद में प्रशासन और स्थानीय लोगों के सहयोग से युवती को मौके पर बुलाया गया। इसके बाद युवक के साथ दोबारा बातचीत की गई और उसे शांतिपूर्वक नीचे उतरने के लिए राजी किया गया। लंबे प्रयासों के बाद युवक सुरक्षित रूप से टावर से नीचे उतर आया, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।

    घटना के दौरान किसी प्रकार की शारीरिक क्षति या अप्रिय हादसे की सूचना सामने नहीं आई। पुलिस ने युवक को सुरक्षित संरक्षण में लेकर आवश्यक पूछताछ की और पूरे मामले की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और धैर्य के साथ कार्रवाई करना आवश्यक होता है, ताकि किसी भी व्यक्ति की जान को खतरा न पहुंचे।

    यह घटना एक बार फिर सामाजिक और व्यक्तिगत विवादों के सार्वजनिक रूप लेने की प्रवृत्ति को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि भावनात्मक परिस्थितियों में लोगों को संयम बनाए रखने और कानूनी व सामाजिक माध्यमों से समाधान तलाशने की आवश्यकता होती है। समय रहते पुलिस, प्रशासन और स्थानीय नागरिकों की सक्रियता ने इस मामले में संभावित दुर्घटना को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • ‘वंदे मातरम’ और सरकारी योजनाओं पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, लाभार्थियों की पात्रता पर उठाए सवाल

    ‘वंदे मातरम’ और सरकारी योजनाओं पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बड़ा बयान, लाभार्थियों की पात्रता पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में आयोजित एक जनकल्याण कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष पर तीखे आरोप लगाए। अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रभक्ति, सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता, सीमा सुरक्षा, सामाजिक कल्याण योजनाओं में कथित अनियमितताओं तथा सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान के मुद्दे का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान देश के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कुछ लोगों को ‘वंदे मातरम’ बोलने या राष्ट्रगान के प्रति सम्मान व्यक्त करने में आपत्ति है, तो सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर भी चर्चा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार लाभार्थियों की पात्रता और प्रक्रियाओं को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक दस्तावेजी व्यवस्थाओं पर काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सीमा सुरक्षा और जनसंख्या संबंधी विषयों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में केंद्र और राज्य स्तर पर निगरानी को मजबूत किया जा रहा है। उनके अनुसार सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक और पात्र नागरिकों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध रूप से आने वाले लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर जांच और सत्यापन की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है।

    अपने संबोधन में शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती प्रशासन पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां वास्तविक पात्रता की जांच किए बिना लाभ वितरित किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार कुछ क्षेत्रों में ऐसे लाभार्थियों की पहचान हुई है, जिन्हें नियमों के अनुरूप सहायता नहीं मिलनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मामलों की समीक्षा कर रही है और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

    उन्होंने छात्रवृत्ति वितरण और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कथित फर्जी खातों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री का कहना था कि लाभार्थी डेटा के सत्यापन के दौरान कई संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आई हैं, जिनकी जांच जारी है। उनका दावा है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक सीमित रखने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक सुधार किए जा रहे हैं।

    रोजगार और ग्रामीण विकास के मुद्दे पर भी मुख्यमंत्री ने महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार नए विकल्पों पर काम कर रही है और कार्यदिवसों को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए बजटीय प्रावधान भी सुनिश्चित किए गए हैं ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों का विस्तार किया जा सके।

    सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर भी मुख्यमंत्री ने नई व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में अभ्यर्थियों को परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों तक अधिक पहुंच दी जाएगी। उनका मानना है कि इससे भर्ती प्रक्रिया पर विश्वास बढ़ेगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता की आशंका कम होगी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य केवल व्यवस्था को पारदर्शी बनाना ही नहीं, बल्कि युवाओं के विश्वास को मजबूत करना भी है।

    मुख्यमंत्री के इन बयानों के बाद राज्य की राजनीति में बहस तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले कदम इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला सकते हैं।

  • तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

    तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

    नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले केश दान ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी इस प्रथा ने न केवल श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी दर्ज की है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी साबित हुई है। मई 2026 के दौरान रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा केश दान किए जाने के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को मानव बालों की नीलामी से अब तक की सबसे अधिक आय मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मई माह के पहले 27 दिनों में 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना मुंडन कराया। यह संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि मंदिर में केश दान की धार्मिक परंपरा के प्रति लोगों की आस्था पहले की तुलना में और मजबूत हुई है।

    इस रिकॉर्ड केश दान का सीधा प्रभाव मंदिर की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने चालू वित्त वर्ष में मानव बालों की ई-नीलामी से लगभग 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार संचित मानव बालों का भंडार अब कई लाख किलोग्राम तक पहुंच चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मांग बनी हुई है।

    मानव बालों की ई-नीलामी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। तिरुमला मंदिर में प्राप्त बालों को गुणवत्ता और लंबाई के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। लंबे और उच्च गुणवत्ता वाले बालों की बाजार में विशेष मांग होती है, जिनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और विभिन्न सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। यही कारण है कि मंदिर को इस माध्यम से हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय प्राप्त होती है।

    धार्मिक दृष्टि से केश दान को समर्पण, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में बाल अर्पित करने से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसी विश्वास के कारण देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेते हैं।

    पौराणिक कथाओं में भी इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी एक प्राचीन कथा के कारण भक्त अपने बाल अर्पित करते हैं। समय के साथ यह धार्मिक परंपरा मंदिर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई और आज यह श्रद्धा तथा आर्थिक प्रबंधन दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखती है।

    पिछले कुछ वर्षों में मंदिर को मानव बालों की बिक्री से होने वाली आय में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक मानव बालों की बढ़ती मांग और उच्च गुणवत्ता के कारण तिरुमला मंदिर की नीलामी को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इससे मंदिर प्रशासन को अपनी धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होते हैं।

    केश दान की यह परंपरा आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गई है, बल्कि आस्था और आर्थिक प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और वैश्विक बाजार में मानव बालों की मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में भी इस आय स्रोत के और मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

  • ईरान-अमेरिका समझौते के बहाने कांग्रेस का मोदी सरकार पर प्रहार, जयराम रमेश ने विदेश नीति और पाकिस्तान पर उठाए सवाल

    ईरान-अमेरिका समझौते के बहाने कांग्रेस का मोदी सरकार पर प्रहार, जयराम रमेश ने विदेश नीति और पाकिस्तान पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों के बीच देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए कांग्रेस ने एक ओर जहां क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार के लिए इसे सकारात्मक कदम बताया, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए हैं।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य रूप से खुलने की संभावना भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। उनका मानना है कि इस समुद्री मार्ग के सुचारु संचालन से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले दबाव में कमी आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था के सामने पहले से मौजूद संरचनात्मक चुनौतियां स्वतः समाप्त नहीं हो जाएंगी।

    उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कई ऐसे मुद्दों का सामना कर रही है जो पश्चिम एशिया में हालिया तनाव शुरू होने से पहले से मौजूद थे। उनके अनुसार रुपये पर लंबे समय से दबाव बना हुआ है और विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग तथा उपलब्धता के बीच अंतर लगातार बढ़ता गया है। ऐसे हालात में केवल वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से घरेलू आर्थिक चुनौतियों का समाधान संभव नहीं माना जा सकता।

    कांग्रेस नेता ने निवेश के मोर्चे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निवेश की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उनके अनुसार वास्तविक मजदूरी वृद्धि में ठहराव, विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन से होने वाले आयात पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण व्यापार घाटा बढ़ा है, जिसका असर घरेलू उद्योगों पर भी पड़ा है।

    जयराम रमेश ने कारोबारी माहौल को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उनका कहना था कि नियामकीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि उद्योग जगत को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद वातावरण की आवश्यकता है ताकि दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सके।

    विदेश नीति के मुद्दे पर कांग्रेस ने पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सामरिक संबंधों का उल्लेख किया। जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान, जिसे वर्षों पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की दिशा में भारत को सफलता मिली थी, अब क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रणनीतिक संरचना में चीन की गहरी भागीदारी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है।

    कांग्रेस नेता ने पश्चिम एशिया के संदर्भ में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति की मांग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस दिशा में अपेक्षित संतुलन प्रदर्शित नहीं कर सकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति, मानवीय सरोकारों और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी बड़ी शक्ति के लिए आवश्यक होता है।

    ईरान-अमेरिका समझौते की संभावनाओं के बीच कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस समझौते के वास्तविक प्रभाव और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके परिणामों को लेकर देश के भीतर भी बहस जारी रह सकती है।

  • अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की मौत पर घिरी सरकार, उधर ट्रंप से पीएम मोदी की होनी है मुलाकात, क्या-क्या होगा?

    अमेरिकी हमले में 3 भारतीयों की मौत पर घिरी सरकार, उधर ट्रंप से पीएम मोदी की होनी है मुलाकात, क्या-क्या होगा?

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 17 जून को होने वाली प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक ऐसे समय में आयोजित होने जा रही है, जब ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत का मामला राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा के केंद्र में है। इस घटना के बाद देश के भीतर सरकार पर दबाव बढ़ा है और विपक्ष लगातार अमेरिका से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। ऐसे में दोनों नेताओं की यह मुलाकात सामान्य राजनयिक बैठक से कहीं अधिक महत्व रखती है।

    फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रस्तावित इस बैठक पर अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों स्तरों पर नजरें टिकी हुई हैं। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने द्विपक्षीय संबंधों के सामने एक संवेदनशील चुनौती भी खड़ी कर दी है।

    ओमान की खाड़ी में हुई सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय नागरिकों की मौत के बाद विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से अधिक सक्रिय और स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। राजनीतिक दलों का कहना है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मामलों में सरकार को ठोस जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। विपक्ष का तर्क है कि यह केवल विदेश नीति का नहीं बल्कि भारतीय नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा का भी प्रश्न है।

    इस बीच भारत की ओर से राजनयिक स्तर पर इस मुद्दे को उठाए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अमेरिकी पक्ष की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक खेद या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसी वजह से मोदी-ट्रंप वार्ता में इस विषय के शामिल होने की संभावना को लेकर व्यापक चर्चा हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नेतृत्व इस मामले को संवेदनशीलता और संतुलन के साथ उठाने का प्रयास कर सकता है।

    बैठक का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों से जुड़ा हुआ है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है। उम्मीद की जा रही है कि दोनों नेता वार्ता की प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के आर्थिक सहयोग की दिशा पर चर्चा करेंगे। हालांकि तत्काल किसी अंतिम समझौते की संभावना कम मानी जा रही है, फिर भी यह बैठक आगे की रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

    रक्षा सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी संभावित एजेंडे का हिस्सा मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया की बदलती स्थिति, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे भी दोनों देशों के बीच चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। विशेष रूप से ओमान की खाड़ी और उससे जुड़े समुद्री मार्गों का महत्व वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल विदेश नीति का विषय नहीं है, बल्कि इसका घरेलू राजनीतिक प्रभाव भी पड़ सकता है। विपक्ष पहले से ही सरकार के रुख पर सवाल उठा रहा है और वह इस बैठक के परिणामों को बारीकी से देखेगा। यदि भारतीय नागरिकों की मौत का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाता है, तो यह सरकार के लिए राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण संदेश माना जाएगा।

    आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि दोनों देशों के बीच वार्ता किन ठोस निष्कर्षों तक पहुंचती है। फिलहाल इतना तय है कि जी-7 सम्मेलन के दौरान होने वाली मोदी-ट्रंप बैठक भारत-अमेरिका संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा और भारतीय नागरिकों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के कारण विशेष महत्व रखती है।

  • आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने सामाजिक और वैचारिक संपर्क को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर होने वाली इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भारतीय मूल के लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं।

    संघ इस समय अपने 100वें वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संगठन देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने कार्य, विचार और सामाजिक अभियानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में संघ प्रमुख की संभावित विदेश यात्रा को संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इन आयोजनों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार अमेरिका के प्रमुख शहरों में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विशेष रूप से न्यूयॉर्क में एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जहां भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति हो सकती है। हालांकि कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और आधिकारिक कार्यक्रम सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

    इस प्रस्तावित यात्रा में हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। यह संगठन विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति, योग, सेवा कार्यों और पारिवारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है। विदेशों में भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के लिए यह संगठन लंबे समय से सक्रिय है।

    मोहन भागवत इससे पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पूर्व में ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है, जहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया था। ऐसे अनुभवों के आधार पर इस बार के प्रस्तावित दौरे को भी व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक संवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़े संगठनों द्वारा उनके साथ नियमित संवाद स्थापित करना रणनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के कार्यों, सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी है। इसी कारण विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है तो इससे प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद को नई गति मिल सकती है। साथ ही भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बीच भारतीय नाविकों का मुद्दा उठा, एफएसयूआई बोली- मृतकों के परिवारों को मिले उचित मुआवजा

    अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बीच भारतीय नाविकों का मुद्दा उठा, एफएसयूआई बोली- मृतकों के परिवारों को मिले उचित मुआवजा

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने होर्मुज क्षेत्र में जान गंवाने वाले चार भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि क्षेत्र में हुई सैन्य घटनाओं और सुरक्षा संकट के कारण भारतीय नागरिकों की जान गई, इसलिए प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।

    यूनियन ने अमेरिकी प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि मृतक भारतीय नाविकों के परिजनों को कम से कम 50 लाख डॉलर का मुआवजा दिया जाए। संगठन का तर्क है कि यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं बल्कि उन परिवारों के प्रति नैतिक और मानवीय दायित्व का मामला भी है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया।

    एफएसयूआई ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी नई समझ क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम है। हालांकि संगठन का मानना है कि स्थायी शांति तभी सार्थक होगी जब संघर्ष और सैन्य कार्रवाई से प्रभावित निर्दोष नागरिकों तथा समुद्री कर्मियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए। इसी संदर्भ में भारतीय नाविकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है।

    यूनियन के अनुसार, चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरेसिया की मौत मिसाइल हमले से जुड़ी घटना में हुई थी। वहीं दूसरे अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मृत्यु के लिए संगठन ने समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिल पाने और क्षेत्रीय नाकेबंदी से उत्पन्न परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।

    घटना जून माह में ओमान तट के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुई थी। उस समय एमटी सेटेबेलो नामक तेल टैंकर क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच प्रभावित हुआ था। जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हादसे में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था।

    इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक नौवहन पर भी देखा गया था। भारतीय समुद्री समुदाय ने उस समय चालक दल की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को लेकर चिंता व्यक्त की थी।

    घटना के बाद भारत सरकार ने भी संबंधित पक्षों के समक्ष अपनी चिंता दर्ज कराई थी और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया था। भारत का मानना रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिक कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

    एफएसयूआई का कहना है कि मृतक नाविक किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे पेशेवर दायित्व निभाते हुए अपने परिवारों के लिए काम कर रहे थे। ऐसे में उनकी मृत्यु को केवल एक आकस्मिक घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। संगठन ने मांग की है कि जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक सहायता और न्याय उपलब्ध कराया जाए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा व्यवस्था, संघर्ष क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में इस विषय पर होने वाली कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

  • क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क

    क्या सचमुच धरती पर आते हैं एलियन? जानिए क्यों अब तक नहीं हो पाया दूसरे ग्रहों के जीवों से संपर्क


    नई दिल्ली । क्या ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा भी कहीं जीवन मौजूद है? यह सवाल विज्ञान की दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक बना हुआ है। एलियन यानी पृथ्वी के बाहर रहने वाले संभावित जीवों को लेकर वर्षों से दावे और कहानियां सामने आती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो उनके अस्तित्व या पृथ्वी पर आने की पुष्टि कर सके।

    हाल के वर्षों में अमेरिका सहित कई देशों ने अनआइडेंटिफाइड एरियल फिनोमेना (UAP) से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इसके बावजूद वैज्ञानिक समुदाय का मानना है कि अभी तक किसी भी घटना को एलियन गतिविधि से जोड़ने वाला पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सर्वेक्षणों में बड़ी संख्या में लोग यह मानते हैं कि ब्रह्मांड में कहीं न कहीं जीवन अवश्य मौजूद होगा।

    हमारी कल्पना से कहीं अधिक विशाल है ब्रह्मांड
    विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मांड इतना विशाल है कि उसकी पूरी सीमा का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। पृथ्वी के सबसे नजदीकी तारों में से एक Proxima Centauri लगभग 40 ट्रिलियन किलोमीटर दूर स्थित है। इतनी दूरी तय करने में प्रकाश को भी करीब 4.3 वर्ष लग जाते हैं।

    आज तक मानव द्वारा विकसित अंतरिक्ष यान प्रकाश की गति के बेहद छोटे हिस्से तक ही पहुंच पाए हैं। मौजूदा तकनीक के अनुसार किसी अंतरिक्ष यान को प्रॉक्सिमा सेंटॉरी तक पहुंचने में हजारों वर्ष लग सकते हैं। ऐसे में दूसरे ग्रहों तक यात्रा करना या वहां से किसी सभ्यता का पृथ्वी तक पहुंचना बेहद कठिन माना जाता है।

    अंतरिक्ष यात्रा की सबसे बड़ी चुनौती है ऊर्जा
    वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरतारकीय यात्रा के लिए अकल्पनीय मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होगी। यदि कोई यान प्रकाश की गति के करीब पहुंचना चाहता है, तो उसे ऊर्जा का ऐसा स्रोत चाहिए होगा जो वर्तमान विज्ञान की पहुंच से बहुत आगे है।

    इसके अलावा अंतरिक्ष पूरी तरह खाली नहीं है। वहां गैसों और सूक्ष्म कणों की मौजूदगी होती है। अत्यधिक गति से यात्रा करने पर इन कणों से टकराव भी विनाशकारी साबित हो सकता है। यही कारण है कि लंबी दूरी की अंतरिक्ष यात्राओं को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं।

    क्या एलियन पृथ्वी पर आना चाहेंगे?
    कुछ वैज्ञानिक यह भी सवाल उठाते हैं कि यदि कोई सभ्यता इतनी उन्नत है कि वह तारों के बीच यात्रा कर सकती है, तो उसे पृथ्वी पर आने की आवश्यकता क्यों होगी? संभव है कि ऐसी सभ्यता अपनी जरूरत की लगभग हर चीज अपने ग्रह या तकनीक की मदद से हासिल कर सकती हो। इसी वजह से कई वैज्ञानिक मानते हैं कि एलियन सभ्यताओं के होने की संभावना और उनके पृथ्वी तक पहुंचने की संभावना दो अलग-अलग बातें हैं।

    पृथ्वी का वातावरण हर जीव के लिए उपयुक्त नहीं
    पृथ्वी का जैवमंडल यहां मौजूद जीवन के लिए अनुकूल है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी दूसरे ग्रह के जीव भी इसी वातावरण में जीवित रह सकें। पृथ्वी पर जीवन के विकास में ऑक्सीजन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन संभव है कि किसी अन्य ग्रह पर जीवन पूरी तरह अलग रासायनिक परिस्थितियों में विकसित हुआ हो। ऐसी स्थिति में यदि कोई बाहरी जीव पृथ्वी पर आए भी, तो उसे विशेष सुरक्षा उपकरणों या अलग वातावरण की आवश्यकता पड़ सकती है।

    अरबों ग्रहों में जीवन की तलाश जारी
    वैज्ञानिकों ने अब तक हजारों एक्सोप्लैनेट यानी सौरमंडल के बाहर मौजूद ग्रहों की खोज की है। केवल हमारी आकाशगंगा में ही अरबों तारे और उनसे जुड़े असंख्य ग्रह मौजूद होने का अनुमान है। ऐसे में यह मानना कठिन है कि पूरे ब्रह्मांड में पृथ्वी ही जीवन का एकमात्र केंद्र हो।

    फिर भी आज तक किसी एलियन सभ्यता या पृथ्वी पर उनके आगमन का प्रमाण नहीं मिला है। विज्ञान लगातार नए ग्रहों और संभावित जीवन की तलाश में जुटा है, लेकिन फिलहाल एलियन का अस्तित्व एक रोमांचक संभावना है, सिद्ध तथ्य नहीं।

  • राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला लंबे समय दबाए रखने पर उठे सवाल…..SIT ने शुरू की जांच


    लखनऊ ।
    श्रीराम मंदिर (Shri Ram Temple) के चंदा गबन करने के मामले में अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज न कराना सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो ट्रस्ट ने केस दर्ज नहीं कराया है। गबन के साक्ष्य मिल चुके हैं, बड़ी रकम भी बरामद हुई और संदिग्ध भी पकड़े गए, उसके भी रिपोर्ट न करना गंभीर सवाल खड़े करता है। सीधेतौर पर अब ट्रस्ट के बड़े जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

    प्रकरण सामने आने के बाद ट्रस्ट ने मामला दबाए रखा था। जब मीडिया में उजागर हुआ तो ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने चुप्पी साध ली। जो पदाधिकारी आएदिन तमाम बयान देते रहते थे वह अब सामने आने को तैयार नहीं हैं। इस बीच ट्रस्ट ने खुद ही संदिग्ध पकड़े। उनकी निशानदेही पर रकम बरामद की। मतलब इससे साबित हो चुका है कि चंदा राशि चोरी की गई। ऐसे में ट्रस्ट को मामले में केस दर्ज करवाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। एफआईआर अब तक क्यों नहीं दर्ज कराई जा रही है? इसकी वजह नहीं पता चल रही है। हालांकि ऐसे में कयास है कि किसी न किसी को बचाने के लिए पर्दा डाला जा रहा है।


    अब एसआईटी आगे, सब पीछे

    मामले में भले ही एसआईटी (SIT) गठित कर दी गई हो लेकिन मामला आपराधिक है। इसलिए केस दर्ज होना चाहिए थे। उसके साथ एसआईटी की भी जांच जारी रहती। चूंकि अब एसआईटी गठित हो चुकी है तो पूरा मामला पीछे छूट जाएगा, खासकर एफआईआर न दर्ज करवाने वाला। अब हर सवाल पर यही होगा कि एसआईटी जांच कर रही है, उसके बाद ही कुछ कार्रवाई की जाएगी।

    ये किसी ट्रस्ट का काम नहीं
    जिस तरह से अब तक संदिग्ध पकड़े गए और फिर नकदी बरामद की गई, ये कार्य करना किसी ट्रस्ट या निजी संस्था आदि का नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि चोरी हुई है तो पहले एफआईआर करवानी चाहिए। फिर पुलिस या अन्य जांच एजेंसी आगे की कार्रवाई करते हुए आरोपियों से पूछताछ, बरामदगी आदि की कार्रवाई करती।


    एसआईटी जुटाएगी ब्योरा, संदिग्धों से पूछताछ भी करेगी

    राम मंदिर के चढ़ावे में गबन के मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र भी सक्रिय हो गया है। रविवार को पीएमओ की तरफ से एक बड़े अफसर के मंदिर पहुंचने की चर्चा है। अफसर अपने स्तर से जांच पड़ताल के बाद जानकारी जुटाकर पीएमओ को देंगे। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

    वहीं, मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (विशेष जांच दल) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। ट्रस्ट की ओर से की गई अब तक की जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाएगी।

    इस बीच एक सप्ताह पहले उजागर हुए इस मामले में गबन के साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला बीते सप्ताह उजागर हुआ था। ट्रस्ट के पदाधिकारी तब से खुद ही गोपनीय जांच में जुटे हैं। ट्रस्ट के ऑफिस के पास किसी भी बाहरी शख्स के जाने पर रोक है।

    इन सबके बीच शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन शामिल हैं।

    चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू करेगी। टीम केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं की जांच ही नहीं, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता या प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलने पर उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।


    चंपत राय बीमार, अनिल मिश्रा चिकित्सकीय जांच के लिए केरल गए

    राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण की जांच के लिए गठित एसआईटी के अयोध्या पहुंचने की तैयारी के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय अस्वस्थ बताए जा रहे हैं। ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य अनिल मिश्रा चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।

    सूत्रों के अनुसार चंपत राय को जुकाम के साथ शुगर बढ़ने की शिकायत है, जिसके चलते वह स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। अनिल मिश्रा आंखों की जांच और चिकित्सकीय परामर्श के लिए केरल गए हैं।