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  • मुसीबत में बचाने वाला गाइड! जानें 20–50 की उम्र के लिए टॉप 5 इंश्योरेंस विकल्प

    मुसीबत में बचाने वाला गाइड! जानें 20–50 की उम्र के लिए टॉप 5 इंश्योरेंस विकल्प

    नई दिल्ली। जवानी में इंश्योरेंस लेना सिर्फ टैक्स बचाने की बात नहीं, बल्कि परिवार और सेविंग्स की सुरक्षा का सबसे बड़ा जरिया है। 25 की उम्र में लिया गया प्लान 45-50 की उम्र में लेने के मुकाबले करीब 50% तक सस्ता पड़ सकता है। सही पॉलिसी का चयन जीवन की अनिश्चितताओं में ढाल का काम करता है।

    20s: ‘अर्ली बर्ड’ का फायदा
    20 के दशक में जिम्मेदारियां कम और हेल्थ अच्छी होती है। इस उम्र में टर्म इंश्योरेंस लेना सबसे फायदेमंद होता है। कम प्रीमियम में कवर लॉक हो जाता है और वेटिंग पीरियड भी जल्दी कट जाता है। हेल्थ इंश्योरेंस के लिए कंपनी पर भरोसा कम रखें और ₹5-10 लाख का बेसिक पर्सनल कवर लें।

    30s: परिवार और लोन का सुरक्षा कवच
    इस उम्र में शादी, बच्चे और होम लोन जैसी जिम्मेदारियां बढ़ती हैं। बेस हेल्थ प्लान के साथ कैंसर या हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के लिए टॉप-अप कवर लेना चाहिए। अगर बेस प्लान ₹5 लाख का है, तो ₹20 लाख का टॉप-अप सस्ता पड़ता है और बड़ी सर्जरी में काम आता है।

    40s-50s: रिटायरमेंट और एसेट प्रोटेक्शन
    इस उम्र में फोकस होना चाहिए कि जमा पूंजी किसी बीमारी या एक्सीडेंट में खर्च न हो। पर्सनल एक्सीडेंट कवर और टर्म प्लान लेना महत्वपूर्ण है। रिकवरी में समय ज्यादा लगता है, इसलिए परिवार और सेविंग्स दोनों को सुरक्षित रखने के लिए सही कवर जरूरी है।

    लाइफ के Big-5 इंश्योरेंस प्लान
    इंश्योरेंस प्रकार क्यों जरूरी लाभ
    टर्म इंश्योरेंस गैर-मौजूदगी में परिवार की आर्थिक सुरक्षा कर्ज मुक्त और भविष्य सुरक्षित रखता है
    हेल्थ इंश्योरेंस मेडिकल खर्च से बचाव सेविंग्स को हॉस्पिटल बिल से सुरक्षित रखता है
    एक्सीडेंट कवर दुर्घटना से विकलांगता या आय रुकने पर काम न कर पाने पर भी आय का सहारा देता है
    क्रिटिकल इलनेस कवर कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों में इलाज के दौरान एकमुश्त राशि देता है
    मोटर इंश्योरेंस गाड़ी से जुड़े नुकसान और कानूनी जोखिम से बचाव थर्ड पार्टी क्लेम और मरम्मत खर्च से राहत

    इंश्योरेंस लेने से पहले ध्यान दें
    हमेशा 95%+ CSR वाली कंपनी चुनें।

    पुरानी बीमारियां या सिगरेट की आदत साफ बताएं, झूठ बोलने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

    बेस पॉलिसी में ‘प्रीमियम वेवर’ जैसे राइडर जरूर जोड़ें, ताकि मुसीबत में आगे के प्रीमियम माफ हो जाए।

    इंश्योरेंस के प्रकार और फायदे
    टर्म इंश्योरेंस – परिवार को आर्थिक सुरक्षा और कर्ज मुक्त रखता है।

    हेल्थ इंश्योरेंस – मेडिकल महंगाई से बचाव और कैशलेस सुविधा।

    क्रिटिकल इलनेस कवर – गंभीर बीमारी में इलाज के खर्च के लिए एकमुश्त राशि।

    पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस – दुर्घटना में आय का सहारा।

    मोटर इंश्योरेंस – सड़क दुर्घटना या चोरी से कानूनी और वित्तीय सुरक्षा।

  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।

  • दिल्ली: BJP विधायक हरीश खुराना ने AAP पर कसा तंज, कहा- सौरभ भारद्वाज खुद ही कर रहे 'सेल्फ गोल'

    दिल्ली: BJP विधायक हरीश खुराना ने AAP पर कसा तंज, कहा- सौरभ भारद्वाज खुद ही कर रहे 'सेल्फ गोल'

    नई दिल्ली। दिल्ली में बीजेपी विधायक हरीश खुराना ने आम आदमी पार्टी (आप) और उसके नेताओं पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में रेखा गुप्ता सरकार के कामकाज को अरविंद केजरीवाल और उनकी टीम हजम नहीं कर पा रही है. इसी वजह से आप के नेता लगातार बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.

    हरीश खुराना ने कहा कि दिल्ली को राहुल गांधी की तरह एक नया नेता मिल गया है, जो अब सौरभ भारद्वाज के रूप में सामने आ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि सौरभ भारद्वाज खुद ही ‘सेल्फ गोल’ कर रहे हैं और हर मामले में बीजेपी को दोषी ठहराने की कोशिश कर रहे हैं.

    इस मामले में सेल्फ गोल कर रहे सौरभ भारद्वाज- हरीश खुराना
    बीजेपी विधायक हरीश खुराना ने कहा कि जिस मामले को लेकर सौरभ भारद्वाज सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि भारद्वाज सेल्फ गोल कर रहे है. यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि साल 2020 से जुड़ा हुआ है. उस समय दिल्ली में आप की सरकार थी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल थे. इसके अलावा जिस एपीजे स्कूल का जिक्र किया जा रहा है. उसमें 2025 में बच्चों के रोल नंबर रोके गए थे. उस वक्त भी दिल्ली में आप की ही सरकार थी और मुख्यमंत्री आतिशी थीं.

    ‘आप नेताओं ने मैनेजमेंट कोटे के तहत कराए बड़े पैमाने पर एडमिशन’
    हरीश खुराना ने साफ कहा कि अब बीजेपी सरकार ने नया कानून बनाया है, जिसके तहत किसी भी बच्चे का रोल नंबर नहीं रोका जा सकता. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार जो नया बिल लेकर आई है. उसका विरोध कौन-सी एनजीओ कर रही है और उस एनजीओ का संबंध सौरभ भारद्वाज से क्यों जुड़ा हुआ है. उन्होंने उस एनजीओ का नाम जस्टिस फॉर ऑल बताया.

    बीजेपी विधायक ने आरोप लगाया कि आप के नेताओं ने मैनेजमेंट कोटे के तहत बड़े पैमाने पर एडमिशन कराए हैं. उन्होंने पूछा कि जब आपकी सरकार थी, तब आपने ऐसा कानून क्यों नहीं बनाया, जिससे इन गड़बड़ियों पर रोक लगती है.

    एडमिशन की सूची सार्वजनिक करेंगी सीएम- खुराना
    हरीश खुराना ने यह भी कहा कि जल्द ही रेखा सरकार मैनेजमेंट कोटे से कराए गए सभी एडमिशन की सूची सार्वजनिक करेगी. इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि जस्टिस फॉर ऑल एनजीओ का आप से क्या रिश्ता है. इसकी जांच होनी चाहिए और इस एनजीओ को मिलने वाली फंडिंग कहां से आ रही है, इसकी भी दिल्ली सरकार द्वारा पूरी जांच कराई जाए.

  • चाहत पांडे ने ठुकराया सपना चौधरी का ऑफर, कहा रजत दलाल के पास दिल नहीं है, सोशल मीडिया पर ट्रेंड

    चाहत पांडे ने ठुकराया सपना चौधरी का ऑफर, कहा रजत दलाल के पास दिल नहीं है, सोशल मीडिया पर ट्रेंड


    नई दिल्ली । रियलिटी शो द 50 के लेटेस्ट एपिसोड ने दर्शकों को हंसने और रोमांचित होने का पूरा मौका दिया। इस बार चाहत पांडे और रजत दलाल की जोड़ी ने सबका ध्यान खींचा। टास्क के दौरान सपना चौधरी ने चाहत से कहा कि वो रजत के घर जाएँगी लेकिन चाहत ने तुरंत मना कर दिया। उनका कहना था मैंने रजत को बहुत पहले ही मना कर दिया था। रजत के पास दिल नहीं है। इस मजेदार पल के बाद सोशल मीडिया पर दोनों का नाम #Rahat के साथ ट्रेंड करने लगा।

    एपिसोड में कंटेस्टेंट्स को सिर पर किताबें रखकर शेल्फ तक जाना था। इस दौरान रजत ने चाहत की मदद की। दोनों को साथ देख कंटेस्टेंट अरबाज पटेल फैजू और दिग्विजय राठी ने हम आपके हैं कौन फिल्म का गाना वाह वाह राम जी जोड़ी क्या बनाई गाकर उन्हें चिढ़ाया। इसके बाद जब द लायन ने टीम बनाने का टास्क दिया तो रजत ने मजाक में अरबाज और निक्की तंबोली से कहा मेरी चाहत को डेंजर जोन में मत डालना। इन छोटे-छोटे पल ने शो में हंसी और मस्ती का माहौल बनाए रखा।

    एपिसोड की शुरुआत में प्रिंस नरूला और सिवेत तोमर को डेयर और नो डेयर टास्क दिया गया। उन्हें 75 लाख के इनाम के बदले तीन कंटेस्टेंट्स को अनसेफ जोन में भेजने का विकल्प मिला। प्रिंस और सिवेत ने फैजू रजत दलाल और अदनान खान को अनसेफ जोन में भेजा। इसके अलावा एपिसोड के अंत में चार वाइल्ड कार्ड कंटेस्टेंट्स ने एंट्री ली जिससे खेल और रोमांच और बढ़ गया।  स पूरे एपिसोड ने चाहत और रजत के बीच मजेदार बॉन्ड दिखाया और दर्शकों को ड्रामा हंसी और रोमांच का पूरा डोज दिया।

  • आपकी कथनी-करनी में अंतर, आप कुर्सी पर बैठने के लायक नहीं, राहुल गांधी पर भड़कीं नवजोत कौर

    आपकी कथनी-करनी में अंतर, आप कुर्सी पर बैठने के लायक नहीं, राहुल गांधी पर भड़कीं नवजोत कौर

    नई दिल्ली। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन वहां पर सियासी हलचल अभी से तेज होती जा रही है. लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के लिए स्थिति खराब होती जा रही है. कुछ दिन पहले पार्टी छोड़ने वाली नवजोत कौर सिद्धू ने राहुल गांधी पर करारा प्रहार किया. नवजोत कौर ने अपने हमले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पर ‘जमीनी हकीकत से पूरी तरह कटे’ होने और पंजाब इकाई में अंदरूनी भ्रष्टाचार को दूर करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है.

    कोयंबटूर में बोलते हुए, नवजोत कौर ने यह दावा किया कि राहुल गांधी की ओर से किसी तरह की कार्रवाई नहीं किए जाने की वजह से “पंजाब में कांग्रेस खत्म हो रही है.” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके करीबी लोग चुनाव टिकट बेचने में व्यस्त हैं, जबकि उन्हें वहां की स्थिति का पता ही नहीं है.

    ‘आपका आदमी पंजाब के साथ न्याय नहीं कर रहा’
    उन्होंने कहा, “राहुल गांधी अच्छी बातें करते हैं. वह समझदारी की बात करते हैं. लेकिन वह जो करते हैं और जो कहते हैं उसमें बहुत अंतर है. पिछले 8 महीनों से, मैं उनसे यह कहने के लिए समय मांग रही हूं कि आपके लोग, आपके अध्यक्ष या पंजाब में नियुक्त आपका आदमी पंजाब के साथ न्याय नहीं कर रहा है. वे लोग पंजाब में कांग्रेस को खत्म कर रहे हैं. मैं आपसे बस यह बताने के लिए मुलाकात करने का समय मांग रही हूं कि आपकी पार्टी पंजाब में खत्म हो रही है. उन्होंने पहले ही टिकट बेच दिए हैं.”

    नवजोत कौर ने आगे कहा, “अगर आपको मालूम नहीं है कि आपके नीचे क्या हो रहा है, तो मुझे इसका खेद है. ऐसे में आप उस कुर्सी के लायक नहीं हैं. आप जो कर रहे हैं उसके लिए आप ही जिम्मेदार हैं. हमने पंजाब के लिए सब कुछ छोड़ दिया, आपने हमसे 7 विभाग और मुझे सांसद बनाने के साथ-साथ उपमुख्यमंत्री पद देने का वादा किया था. लेकिन आपने हमें कुछ नहीं दिया.”

    ‘आप पंजाब में जीत हासिल नहीं करने जा रहे’
    उन्होंने आगे कहा, “आपने हमें स्थानीय निकाय और पर्यटन विभाग दिया, और आप चाहते थे कि वे मुख्यमंत्री के हिसाब से चलें. जब आपके अपने लोग ही भ्रष्ट हैं तो आप भ्रष्टाचार के खिलाफ क्यों बात कर रहे हैं? और आप अपने आस-पास भ्रष्ट लोगों को ही पसंद कर रहे हैं, जबकि आपके आस-पास के लोग पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं.”

    राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर ने कहा, “आपके पास उन ईमानदार लोगों से मिलने के लिए वक्त नहीं है जो आकर आपको बताना चाहते हैं कि यह सब गलत हो रहा है, आप पंजाब नहीं जीतने वाले हैं.” उन्होंने आगे कहा, “शायद आपने उन्हें यह गिफ्ट में दे दिया है. वह असल में जमीनी स्तर पर काम नहीं कर रहे हैं. मुझे ऐसा लगता है कि जमीन से जुड़े रहना बहुत ही जरूरी है. ग्राउंड ज़ीरो पर क्या हो रहा है, यह किसी के लिए भी बहुत जरूरी है.”

    कांग्रेस नेता को नसीहत देते हुए नवजोत कौर ने कहा, “आपको हकीकत जानने के लिए ग्राउंड रियलिटी से जुड़े रहना होगा. आप सपनों की दुनिया में नहीं जी सकते.” पीएम नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा से ठीक पहले नवजोत कौर ने 30 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया. हालांकि पार्टी के खिलाफ अपने बागी तेवर की वजह से उन्हें कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था.

  • UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

    UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इस बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं. सपा और कांग्रेस जहां भारतीय राष्ट्रीय समावेशी विकास गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं तो वहीं बीजेपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के साथ मैदान में उतरेगी. उधर, बसपा अभी भी अकेले ही मैदान में उतरने का मूड बना रही है.

    इन सबके बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी यूपी चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. अगर पार्टी चुनाव में उतरती है तो यह उसका चौथा चुनाव होगा.

    वर्ष 2017, 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाया था. यह मोर्चा सपा चीफ के पीडीए फॉर्मूले के मुकाबले के तौर पर पीडीएम बनाया गया था. जिसमें पिछड़ा, दलित मुसलमान की बात की गई थी. इस मोर्चे ने 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इसमें AIMIM का एक भी प्रत्याशी नहीं था.

    अब 2027 के चुनाव के लिए दावा है कि एआईएमआईएम, बसपा के साथ अलायंस कर सकती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में गठबंधन करने के लिए आतुर AIMIM का इस संदर्भ में पुराना इतिहास क्या रहा है? इसके साथ ही यह भी बात हो रही है कि जो एआईएमआईएम, बसपा के हाथी की सवारी कर राज्य में एंट्री की कोशिश में उसकी क्या स्थिति है?

    बता दें AIMIM ने वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा का चुनाव 38 सीटों पर लड़ा था. 37 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी.इस चुनाव में AIMIM को 2,04,142 वोट मिले थे. AIMIM ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वो मुख्यतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटें थीं. उधर, 2022 में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ .49% वोट मिले थे.

    2024 के चुनाव कितना कारगर रहा ओवैसी का अलायंस?

    2024 चुनाव में पीडीएम मोर्चा बनाने वाली एआईएमआईएम ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा लेकिन उसके साथ का फायदा अन्य दल को भी नहीं मिला. इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने प्रत्याशी उतारे और उन्हें कुल मतदान में से सिर्फ .4 फीसदी वोट मिले और नतीजा सिफर रहा. ऐसे में यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम के साथ का लाभ अपना दल कमेरावादी को नहीं हुआ.

    बसपा के साथ कितना फिट होंगे ओवैसी?
    वहीं बसपा की बात करें तो लोकसभा चुनाव में उसे कुल वोट का 9.46 फीसदी मत मिले थे. हालांकि लोकसभा में उसका खाता नहीं खुला था. विधानसभा में भी बसपा का सिर्फ 1 ही विधायक है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एआईएमआईएम और बसपा साथ आते भी हैं तब भी किसी बड़े जादू की उम्मीद फिलहाल नहीं है.

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी में एआईएमआईएम की आगामी रणनीति क्या होगी और वह धरातल पर कितनी मजबूती के साथ उतरेगी.

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक महीने के लिए कैंपस में प्रोटेस्ट पर लगाया बैन, लॉ एंड ऑर्डर की चिंता बताई वजह

    दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक महीने के लिए कैंपस में प्रोटेस्ट पर लगाया बैन, लॉ एंड ऑर्डर की चिंता बताई वजह

    नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी से एक बड़ी खबर सामने आई है। DU ने लॉ एंड ऑर्डर की चिंता का हवाला देते हुए एक महीने के लिए कैंपस में प्रोटेस्ट पर बैन लगा दिया है। एक माह के लिए यूनिवर्सिटी ने कैंपस में किसी भी तरह की पब्लिक मीटिंग, जुलूस, प्रदर्शन और विरोध पर रोक लगाई है। इस संबंध में एक ऑर्डर जारी किया गया है। 17 फरवरी के एक ऑर्डर में, DU के प्रॉक्टर ऑफिस ने कहा कि यह रोक इस इनपुट के बाद लगाई गई है कि “बिना रोक-टोक के पब्लिक गैदरिंग” से हालात बिगड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    जारी किए गए आदेश में सिविल लाइंस के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के पहले के एक निर्देश का भी जिक्र किया गया है, जिसमें पब्लिक मीटिंग, टॉर्च या ऐसी ही कोई चीज ले जाने, नारे लगाने और ऐसे भाषण देने पर रोक लगाई गई थी, जिनसे पब्लिक शांति या ट्रैफिक फ्लो पर असर पड़ सकता है।

    DU के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने क्या कहा
    DU के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने अपने एक बयान में कहा कि पहले, ऑर्गनाइज़र अक्सर ऐसे प्रोटेस्ट को कंट्रोल करने में नाकाम रहे जो बढ़ते गए और बड़े पैमाने पर फैल गए, जिससे यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ गया।

    आदेश में लिखा है, “पांच या उससे अधिक लोगों का इकट्ठा होना, नारे लगाना और भाषण देना, मशाल, बीकन/टॉर्च वगैरह जैसी कोई भी खतरनाक चीज ले जाना मना है।” इसमें आगे यह भी कहा गया है, “यह बैन तुरंत लागू होगा और एक महीने तक लागू रहेगा, अगर इसे पहले नहीं हटाया जाता है।”

    इसलिए आया ऑर्डर
    बता दें कि यह आदेश हाल के विवादों के बाद आया है, जहां पिछले वीक एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दो स्टूडेंट ग्रुप के बीच हाथापाई के बाद दिल्ली पुलिस ने दो FIR दर्ज की थीं। 12 फरवरी को, हिस्टोरियन इरफान हबीब पर एक बाल्टी पानी फेंका गया था, जब वह एक सोशल जस्टिस प्रोग्राम में बोल रहे थे। (इनपुट- पीटीआई)

  • इलैयाराजा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सारेगामा के कॉपीराइट दावे पर लगी अंतरिम रोक

    इलैयाराजा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सारेगामा के कॉपीराइट दावे पर लगी अंतरिम रोक


    नई दिल्ली । दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने म्यूजिक कंपनी सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में एकतरफा अंतरिम आदेश पारित करते हुए इलैयाराजा को उन गानों और साउंड रिकॉर्डिंग्स के इस्तेमाल या उन्हें किसी तीसरे पक्ष को लाइसेंस देने से रोक दिया है जिन पर कंपनी ने अपना कॉपीराइट होने का दावा किया है। यह आदेश एक वाणिज्यिक वाद की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

    न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज और असाइनमेंट समझौते यह संकेत देते हैं कि संबंधित साउंड रिकॉर्डिंग्स और म्यूजिकल वर्क्स पर अधिकार वादी कंपनी के पास हैं। अदालत ने माना कि वर्ष 1976 से 2001 के बीच विभिन्न फिल्म निर्माताओं और सारेगामा के बीच हुए असाइनमेंट समझौतों के तहत कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों के संगीत और रिकॉर्डिंग्स के अधिकार कंपनी को सौंपे गए थे।

    सारेगामा की ओर से दलील दी गई कि इन समझौतों के जरिए कंपनी को संबंधित सिनेमैटोग्राफ फिल्मों का हिस्सा बनने वाले संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग्स को दोबारा बनाने लाइसेंस देने और व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के विशेष विश्वव्यापी और निरंतर अधिकार प्राप्त हुए। कंपनी ने आरोप लगाया कि फरवरी 2026 से इलैयाराजा ने इन रिकॉर्डिंग्स को तीसरे पक्ष को लाइसेंस देना शुरू कर दिया और उन्हें अमेजॉन म्यूजिक आईट्यून्स तथा जियो सावन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया साथ ही उन पर मालिकाना हक का दावा भी किया।

    कंपनी का कहना है कि यह कदम उसके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। सारेगामा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कॉपीराइट कानून के तहत फिल्म के लिए तैयार किए गए संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग का प्रथम स्वामी फिल्म निर्माता होता है जब तक कि अनुबंध में कुछ और प्रावधान न हो। चूंकि निर्माताओं ने अपने अधिकार विधिवत असाइनमेंट के माध्यम से कंपनी को हस्तांतरित कर दिए थे इसलिए कंपनी ही वैध अधिकारधारी है।

    पीठ ने शिकायत प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों की समीक्षा के बाद कहा कि वादी ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला स्थापित किया है। अदालत ने यह भी माना कि यदि कथित उल्लंघन जारी रहा तो वादी को ऐसा अपूरणीय नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं होगी। साथ ही सुविधा का संतुलन भी वादी के पक्ष में पाया गया।

    अदालत ने प्रतिवादियों को समन जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे समन प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर अपना लिखित बयान दाखिल करें। अंतरिम रोक से संबंधित आवेदन का जवाब चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

    यह आदेश संगीत उद्योग में कॉपीराइट असाइनमेंट समझौतों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संगीत के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। अब निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं जहां इस विवाद के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार होगा।

  • असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज

    असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज


    नई दिल्ली
    । कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के लिए सोमवार का दिन उलझनों भरा रहा। मणिशंकर अय्यर (Mani Shankar Aiyar.) जैसे नेता ने पार्टी हाई कमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, तो वहीं असम के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Bora) ने भी पार्टी को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने पार्टी हाई कमान पर उन्हें नजर अंदाज करने का आरोप लगाया था। इस उठा पटक के बीच भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व के ऊपर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भाजपा की तरफ से राहुल गांधी को एक ‘असफल वंशज’ करार देते हुए कहा गया कि उन पर न तो उनकी पार्टी के नेताओं को भरोसा है और न ही उनके सहयोगियों को भरोसा है।

    दिन भर से कांग्रेस पार्टी के अंदर जारी घमासान पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस कहती है राहुल को हटाओ, ममता को लाओ, ‘इंडी-गठबंधन’ को बचाओ। असम के कांग्रेस नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा दिया। मणिशंकर अय्यर कहते हैं कि कांग्रेस केरल हारेगी और विजयन जीतेंगे।” भाजपा नेता ने सवाल किया कि क्या यह समझने के लिए और सबूतों की जरूरत है कि न तो गांधी की अपनी पार्टी के नेता और न ही उनके सहयोगी उन्हें गंभीरता से लेते हैं। भाजपा नेता ने अपने हमले को और भी तीखा करते हुए कहा, “राहुल गांधी के पास न तो जनमत है और न ही संगत… वह बस एक असफल विशेषाधिकार प्राप्त वंशवादी हैं।”

    आपको बता दें, खबर लिखे जाने तक असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया था। इसके अलावा मणिशंकर अय्यर को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह अब पार्टी में नहीं है, ऐसे में उनके बयान को पार्टी से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है। दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पद पर बने रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने प्रवक्ता पवन खेड़ा और शशि थरूर पर भी निशाना साधा था। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। पार्टी की तरफ से कांग्रेस से संबंध न होने की बात पर पूर्व सांसद ने कहा कि उन्हें केवल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही पार्टी से निकाल सकते हैं।

    कांग्रेस पार्टी ने भले ही खुद को इस बयान से दूर कर लिया हो लेकिन भाजपा ने हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ा। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “कांग्रेस नेताओं द्वारा राहुल गांधी को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। राहुल गांधी को कांग्रेस के कट्टर वफादार मणिशंकर अय्यर ने खुलेआम नकार दिया।”

    भंडारी ने कहा, ”अय्यर हों या तृणमूल कांग्रेस या भूपेन बोरा सब जानते हैं। राहुल गांधी राजनीतिक ‘पप्पू’ हैं। कांग्रेस में अपना पूरा जीवन बिताने वाले वफादार अब खुलेआम राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं।”

    दरअसल, यह पूरा मामला कांग्रेस के पूर्व सांसद मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर को भी अपने निशाना पर लिया। इसके अलावा असम से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन के इस्तीफे ने भी कांग्रेस पार्टी के दिन को बर्बाद करने की कोशिश की। मणिशंकर के मामले पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीखी टिप्पणी आई, जिसमें कहा गया कि मणिशंकर अय्यर अब पार्टी में नहीं है, तो उस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह नेहरू वादी और राजीववादी हैं लेकिन राहुलवादी नहीं है। इतना ही नहीं अय्यर ने कहा कि उन्हें पार्टी से निकालने का अधिकार केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को है।

  • Uttarakhand : चारधाम यात्रा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर अब देना पड़ेगा शुल्क…

    Uttarakhand : चारधाम यात्रा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर अब देना पड़ेगा शुल्क…


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) को अब और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण (Online Registration) प्रक्रिया में शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। यह कदम मुख्य रूप से फर्जी रजिस्ट्रेशन और यात्रियों की वास्तविक संख्या का सही अनुमान लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस सप्ताह पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। शुल्क तय करने के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा।

    सोमवार को ट्रांजिट कैंप में होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन, संयुक्त रोटेशन और डंडी-कंडी संचालकों के साथ बैठक में आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण पर शुल्क लगाने के लिए अपर आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है, जो शुल्क की राशि तय करेगी।


    फर्जी रजिस्ट्रेशन की समस्या

    होटल संचालकों ने बैठक में बताया कि कई बार यात्रियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया होता है, लेकिन वे यात्रा पर नहीं आते। इससे फर्जी रजिस्ट्रेशन बन जाते हैं और वास्तविक यात्री कई बार होटलों में ठहरने के बावजूद पंजीकरण नहीं पा पाते। होटल एसोसिएशन ने इसके समाधान के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर न्यूनतम शुल्क लगाने का सुझाव दिया।

    आयुक्त पांडेय ने कहा, “अपर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश मिलने के बाद एक-दो दिन में आवश्यक निर्णय लेते हुए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यात्रियों की संख्या सीमित नहीं की जाएगी, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य होगा। फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के लिए न्यूनतम शुल्क तय किया जाएगा।”


    पंजीकरण प्रक्रिया कब शुरू होगी?

    सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया इसी सप्ताह शुरू होने की संभावना है। यात्रियों को पहले अपना पंजीकरण सुनिश्चित करना होगा, ताकि यात्रा और होटल बुकिंग के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अधिकारियों का कहना है कि शुल्क और पंजीकरण लागू होने से यात्रा के दौरान भीड़ और व्यवस्थाओं में सुधार आएगा। इससे चारधाम यात्रा में प्रवासी पर्यटकों और स्थानीय व्यवस्थाओं पर दबाव कम होगा।