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  • मुंबई में मोदी मैक्रों शिखर वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी, ‘नवाचार वर्ष 2026’ का होगा शुभारंभ

    मुंबई में मोदी मैक्रों शिखर वार्ता: रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी, ‘नवाचार वर्ष 2026’ का होगा शुभारंभ


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 फरवरी 2026 को मुंबई के दौरे पर रहेंगे जहां वे फ्रांस गणराज्य के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। राष्ट्रपति मैक्रों 17 से 19 फरवरी तक भारत की औपचारिक यात्रा पर रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा भारत फ्रांस संबंधों के लिए विशेष महत्व रखती है और इसे रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा जिससे इस मुलाकात की प्रतीकात्मक और कूटनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।

    मुंबई प्रवास के दौरान लगभग दोपहर 3:15 बजे दोनों नेता लोक भवन में द्विपक्षीय बैठकों में भाग लेंगे। इन बैठकों में भारत फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न आयामों की व्यापक समीक्षा की जाएगी। रक्षा समुद्री सुरक्षा अंतरिक्ष परमाणु ऊर्जा जलवायु परिवर्तन शिक्षा प्रौद्योगिकी और इंडो पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे। दोनों नेता साझेदारी को नए और उभरते क्षेत्रों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता साइबर सुरक्षा हरित ऊर्जा और डिजिटल नवाचार तक विस्तारित करने की संभावनाओं पर भी विचार करेंगे। साथ ही वे क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर अपने दृष्टिकोण साझा करेंगे जिनमें बदलता भू राजनीतिक परिदृश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने जैसे विषय शामिल रह सकते हैं।

    राष्ट्रपति मैक्रों अपनी यात्रा के दौरान भारत में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भी हिस्सा लेंगे जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण मंच है। इस संदर्भ में दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग और अनुसंधान साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने पर बल दिए जाने की संभावना है।

    शाम लगभग 5:15 बजे प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से भारत फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर दोनों देश व्यवसायिक नेताओं स्टार्ट अप प्रतिनिधियों वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों के एक विशेष सम्मेलन को संबोधित करेंगे। नवाचार वर्ष का उद्देश्य उभरती प्रौद्योगिकियों स्टार्ट अप पारिस्थितिकी तंत्र अनुसंधान एवं विकास तथा युवा उद्यमिता के क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को नई गति देना है। इससे दोनों देशों के उद्योग जगत और अकादमिक संस्थानों के बीच साझेदारी को सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह शिखर वार्ता न केवल पारंपरिक रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करेगी बल्कि भविष्य की प्रौद्योगिकियों और सतत विकास के क्षेत्रों में भी साझा दृष्टि को आगे बढ़ाएगी। मुंबई में होने वाली यह उच्चस्तरीय मुलाकात भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊर्जा देने और वैश्विक मंच पर दोनों देशों की साझी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।

  • PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना

    PM मोदी ने US ट्रेड डील को बताया अहम… पूर्ववर्ती UPA सरकार पर जमकर साधा निशाना


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार (UPA Government) पर निशाना साधा। उन्होंने कहाकि यूपीए सरकार के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत व्यापार वार्ताओं (India Trade Negotiations) में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका। इस वजह से एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी।‘एक इंटरव्यू में मोदी ने कहाकि भारत ने ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ (ईयू) और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं।

    प्रधानमंत्री कहाकि इन व्यापार समझौतों पर भले ही हाल ही में मुहर लगी हो, लेकिन ये अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। ये आज की दुनिया में पाए जाने वाले दुर्लभ गुण हैं। हाल के वर्षों में भारत की ओर से किए गए व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि हम एक दशक पहले कहां खड़े थे। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार ने अपने शासनकाल में कछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा अनिश्चितता और अस्थिरता से भरी रही।

    मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (Manmohan Singh) के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहाकि मुख्यतः उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती। अंत में लंबी बातचीत के बावजूद कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।

    उन्होंने कहा कि लेकिन सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान का नेतृत्व किया, हमारे आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई।

    मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास से भरपूर, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उभार के कारण कई देशों को नई दिल्ली के साथ व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने में फायदा दिखा।

    मोदी ने लिखित साक्षात्कार में कहाकि पूर्व की सरकार के रुख और हमारे दृष्टिकोण में मौजूद अंतर को समझने के लिए यूरोपीय संघ के साथ हुए व्यापार समझौते पर गौर करें। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी इस पर चर्चा और बातचीत हुई थी। लेकिन अंततः हमारी सरकार में दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी समझौते पर मुहर लगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में उनकी सरकार ने मुक्त व्यापार समझौतों का एक रणनीतिक और उद्देश्यपूर्ण नेटवर्क बनाया है।

  • तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    तारिक रहमान का शपथग्रहण कल…. ओम बिरला होंगे शामिल, PM मोदी नहीं जाएंगे बांगलादेश

    ढाका। बांग्लादेश (Bangladesh.) के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tariq Rahman.) के शपथग्रहण समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi.) नहीं जाएंगे। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) को भारत बांग्लादेश भेज रहा है। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी होंगे। यह समारोह 17 फरवरी को ढाका के राष्ट्रीय संसद भवन के साउथ प्लाजा में आयोजित होगा।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया कि यह प्रतिनिधिमंडल भारत-बांग्लादेश के गहरे और स्थायी दोस्ती को रेखांकित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रण मिला था, लेकिन वे मुंबई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से द्विपक्षीय वार्ता और दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट की तैयारी के कारण नहीं जा पा रहे।

    हाल ही में बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी जीत दर्ज की। तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में लंदन से वापस लौटे थे, अब प्रधानमंत्री पद संभालने जा रहे हैं। उनके पिता जिया उर रहमान बीएनपी के संस्थापक थे और मां खालिदा जिया पूर्व प्रधानमंत्री रही हैं। 2008 में भ्रष्टाचार के आरोपों में देश छोड़ने वाले रहमान ने चुनाव में दो-तिहाई बहुमत हासिल कर इतिहास रच दिया। यह चुनाव 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद पहला था। रहमान ने जीत के बाद राष्ट्रीय एकता का आह्वान किया और कहा कि वे लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेंगे।


    भारत के साथ कैसे होंगे रिश्ते

    प्रधानमंत्री मोदी ने 13 फरवरी को तारिक रहमान को फोन पर बधाई दी और उन्हें लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सभी बलिदानों को याद किया। अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस ने 13 देशों के नेताओं को आमंत्रित किया, जिसमें चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देश शामिल हैं। भारत की ओर से उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला दोनों देशों के बीच नई शुरुआत का प्रतीक है। बीएनपी ने हमेशा भारत के साथ संतुलित संबंधों पर जोर दिया है और रहमान ने कहा है कि वे किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता नहीं रखेंगे, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाएंगे।

    यह शपथ ग्रहण समारोह बांग्लादेश में लोकतंत्र की वापसी का प्रतीक माना जा रहा है। तारिक रहमान ने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने, भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती और रोजगार सृजन का वादा किया है। भारत के लिए बांग्लादेश एक अहम पड़ोसी है और दोनों देश साझा इतिहास, संस्कृति व सीमा से जुड़े हैं। ओम बिरला और विक्रम मिस्री की उपस्थिति से व्यापार, सुरक्षा, जल संसाधन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलने की उम्मीद है। दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि के लिए काम करेंगे, जो दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए अहम है।

  • 2026 Holiday: भारत में मिलती है सबसे ज्यादा छुट्टियां…. 190 देशों की सूची में सबसे शीर्ष पर

    2026 Holiday: भारत में मिलती है सबसे ज्यादा छुट्टियां…. 190 देशों की सूची में सबसे शीर्ष पर


    नई दिल्ली।
    दुनिया भर में छुट्टियों का कैलेंडर (Holiday Calendar) बताता है कि कोई देश अपनी संस्कृति, धर्म और काम के बीच कैसे संतुलन बनाता है। 2026 में छुट्टियों को लेकर जारी नए इंडेक्स में भारत (India) दुनिया के 190 देशों की सूची में सबसे शीर्ष (Top) पर है। अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के कारण भारत 42 सार्वजनिक छुट्टियों के साथ पहले स्थान पर है। वहीं दुनिया का औसत मात्र 13 छुट्टियां हैं। इस सूची में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश अमेरिका (America) छुट्टियों के मामले में वैश्विक औसत से भी नीचे है। यह रिपोर्ट दुनिया भर के सांस्कृतिक, धार्मिक और राष्ट्रीय त्योहारों के आधार पर तैयार की गई है।


    भारत में ज्यादा छुट्टियां क्यों

    भारत की रैंकिंग इतनी अधिक होने का मुख्य कारण यहां की धार्मिक विविधता है। भारत इकलौता ऐसा देश है, जहां हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन सभी प्रमुख धर्मों के त्योहारों पर राष्ट्रीय या क्षेत्रीय अवकाश दिया जाता है। वहीं भारत में केंद्र सरकार की लगभग 17 राजपत्रित छुट्टियों के अलावा विभिन्न राज्यों के अपने स्थानीय अवकाश से मिलने के बाद यह संख्या 42 के पास हो जाती है।


    न्यू ईयर पर कई देशों में अवकाश

    रिपोर्ट में बताया गया कि न्यू ईयर डे (1 जनवरी) दुनिया में सबसे ज्यादा मनाई जाने वाली छुट्टी है, जो कम से कम 169 देशों में आधिकारिक अवकाश है। वहीं 187 देशों में अपने स्वतंत्रता दिवस या राष्ट्रीय दिवस पर अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश रखा जाता है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि अधिक छुट्टियाँ काम और जीवन संतुलन में सुधार करती हैं, वहीं भारत में बिजनेस प्रोडक्टिविटी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं।


    अनेक धर्मों के त्योहार

    कई देश राष्ट्रीय स्तर पर अनेक धर्मों के प्रमुख पर्व मनाते हैं। उदाहरण के लिए, कम से कम 52 देशों में क्रिसमस और ईद के लिए सार्वजनिक अवकाश होते हैं। इनमें से आधे से अधिक देश (30) अफ्रीका में हैं।


    सबसे अधिक छुट्टियों वाले शीर्ष देश

    रैंक देश कुल छुट्टियां (2026)
    1. भारत – 42
    2. नेपाल – 35
    3. म्यांमार – 30
    4. ईरान – 26
    5. श्रीलंका – 25


    इन देशों में छुट्टियां सीमित :

    – वियतनाम: 6 अवकाश हैं, दुनिया में सबसे कम
    – मेक्सिको: 8 छुट्टियां
    – ब्रिटेन : 8-10 बैंक हॉलिडे
    – नीदरलैंड: 9 छुट्टियां

  • UN महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था को सराहा… बोले- AI Summit के लिए यह उपयुक्त स्थान

    UN महासचिव ने भारत की अर्थव्यवस्था को सराहा… बोले- AI Summit के लिए यह उपयुक्त स्थान

    UN Secretary-General

    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस (UN Secretary-General Antonio Guterres) ने कहा है कि भारत (India0 वैश्विक मामलों में प्रभाव रखने वाली एक ‘बेहद सफल’ उभरती अर्थव्यवस्था है और यह एआई शिखर सम्मेलन (AI Summit) के लिए उपयुक्त स्थान है। ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ (‘India-AI Impact Summit 2026’) से गुतारेस ने इस बात पर जोर दिया कि कृत्रिम मेधा (AI) से पूरी दुनिया को लाभ होना चाहिए, न कि यह केवल विकसित देशों या दो महाशक्तियों के लिए आरक्षित विशेषाधिकार हो।

    उन्होंने कहा, ‘मैं इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत को हार्दिक बधाई देता हूं। यह अत्यंत आवश्यक है कि एआई का विकास हर किसी के लाभ के लिए हो और ‘ग्लोबल साउथ’ के देश भी एआई के लाभ का हिस्सा बनें।’ ‘ग्लोबल साउथ’ से तात्पर्य उन देशों से है जिन्हें अक्सर विकासशील, कम विकसित अथवा अविकसित के रूप में जाना जाता है और ये मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लातिन अमेरिका में स्थित हैं।

    यह उच्च स्तरीय कार्यक्रम 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला है जो ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में आयोजित होने वाला पहला एआई शिखर सम्मेलन होगा और यह ‘लोग, धरती और प्रगति’ के तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है। गुतारेस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा कि ”यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि एआई केवल सर्वाधिक विकसित देशों का विशेषाधिकार हो’।

    गुतारेस की इस टिप्पणी को स्पष्ट रूप से अमेरिका और चीन पर केन्द्रित माना जा रहा है। गुतारेस ने कहा, ”यह बेहद आवश्यक है कि कृत्रिम मेधा मानव जाति के लाभ के लिए एक सार्वभौमिक साधन बने।’ उन्होंने कहा, ‘भारत की भूमिका आज एक बेहद सफल उभरती हुई अर्थव्यवस्था के रूप में है और यह न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था में बल्कि वैश्विक मामलों में भी लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत बिल्कुल उपयुक्त जगह है और यह सुनिश्चित करने के लिए भी कि एआई की अपार संभावनाओं एवं इसके सभी जोखिमों के साथ इस पर गहराई से चर्चा हो क्योंकि एआई पूरी दुनिया से संबंधित है, न कि केवल कुछ लोगों से।’


    सम्मेलन में कौन से नेता लेंगे हिस्सा

    विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जिन नेताओं ने शिखर सम्मेलन में अपनी भागीदारी की पुष्टि कर दी है, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा, स्पेन के राष्ट्रपति पेड्रो सांचेज पेरेज-कास्टेजोन, अबू धाबी के युवराज शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे और क्रोएशिया के प्रधानमंत्री आंद्रेज प्लेनकोविक शामिल हैं।

    मंत्रालय के अनुसार, एस्टोनिया के राष्ट्रपति अलार कारिस, फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो, यूनान के प्रधानमंत्री क्यारियाकोस मित्सोटाकिस, कजाकिस्तान के प्रधानमंत्री ओलझास बेक्टेनोव और मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम ने भी ‘एआई इंपैक्ट समिट’ में शामिल होने की पुष्टि की है।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं

    प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के पर्व ‘हेराथ पोश्ते’ पर दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कश्मीरी पंडित समुदाय के समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाने वाले पवित्र त्योहार हेराथ पोश्ते के अवसर पर शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी समुदाय के सदस्यों के जीवन में स्वास्थ्य, खुशहाली और समृद्धि की कामना की।प्रधानमंत्री मोदी ने संदेश में कहा, इस पवित्र अवसर पर, मैं सभी के जीवन में स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूं। यह नए सफलता के मार्ग खोले और हर घर को खुशियों और संतोष से भर दे। उन्होंने इस त्योहार के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कश्मीरी पंडित समुदाय की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

    हेराथ पोश्ते का पर्व कश्मीरी पंडित समुदाय में धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। यह उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों, सांस्कृतिक प्रथाओं और ऐतिहासिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है। इस अवसर पर परिवार और समुदाय के लोग मिलकर पूजा-अर्चना और उत्सव आयोजित करते हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक बंधन मजबूत होते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश ने इस पर्व के अवसर पर समुदाय में उत्साह और आनंद की भावना बढ़ा दी है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के लिए खुशियों और सफलता का संदेश लेकर आए। उनके संदेश ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय समाज में सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं का सम्मान सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

    हेराथ पोश्ते के अवसर पर कश्मीरी पंडित समुदाय देशभर में अपने घरों और मंदिरों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजन करता है। इस पर्व के माध्यम से युवा पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शुभकामना संदेश के माध्यम से समाज में भाईचारे और सामूहिक कल्याण की भावना को भी उजागर किया। उनके संदेश ने न केवल कश्मीरी पंडित समुदाय, बल्कि पूरे देश में सांस्कृतिक और धार्मिक सौहार्द्र की भावना को बल दिया।

  • चार दशक बाद फिर से शुरू होगी वुलर बैराज परियोजना, भारत-पाकिस्तान जल विवाद के बीच बड़ा कदम

    चार दशक बाद फिर से शुरू होगी वुलर बैराज परियोजना, भारत-पाकिस्तान जल विवाद के बीच बड़ा कदम

    नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद भारत-पाकिस्तान संबंधों में आई गिरावट के बीच भारत ने वुलर बैराज परियोजना को चार दशक बाद पुनः सक्रिय करने का फैसला किया है। यह परियोजना झेलम नदी के पानी का भंडारण और प्रवाह नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

    भारत ने लंबे समय तक मानवता के नाम पर निभाई गई सिंधु जल संधि को मानते हुए इस परियोजना को ठंडे बस्ते में रखा था। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद अब जम्मू-कश्मीर सरकार और केंद्र सरकार मिलकर वुलर बैराज पर काम फिर से शुरू करने जा रही हैं।

    वुलर झील की वर्तमान स्थिति
    झेलम नदी के प्रवाह के अनुसार वुलर झील का आकार बदलता रहता है। न्यूनतम आकार लगभग 20 वर्ग किलोमीटर है, जबकि अधिकतम आकार करीब 190 वर्ग किलोमीटर तक पहुंच जाता है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर दो बड़ी परियोजनाओं—अखनूर में चेनाब नदी से जम्मू शहर के लिए जलापूर्ति और झेलम पर तुलबुल (वुलर) परियोजना पर काम कर रही है।

    इस परियोजना के पहले एशियाई बैंक से फंडिंग ली गई थी, लेकिन सिंधु जल संधि के कारण इसे रोक दिया गया था। अब जबकि संधि निलंबित हो गई है, परियोजना पर काम फिर से शुरू होगा।

    स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका
    वुलर बैराज के निर्माण से स्थानीय लोगों की आजीविका में सुधार होने की उम्मीद है। सर्दियों में झेलम नदी के जल का प्रवाह कम हो जाता है, जिससे झील के ज्यादातर हिस्से सूख जाते हैं। बांदीपोरा से लेकर सोपोर तक स्थानीय लोग मछली पकड़ने, सिंघाड़ा और कमल ककड़ी निकालने के लिए नावों का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन झील सिकुड़ने के कारण पारंपरिक आजीविका प्रभावित हुई थी। परियोजना के पूरा होने से यह संकट कम होने की संभावना है।

    पाकिस्तान की प्रतिक्रिया
    सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान ने लगातार बयान जारी किए और चेतावनी दी कि अगर पानी रोका गया तो इसे युद्ध का कदम माना जाएगा। भारत ने अपना फैसला कायम रखा है और केंद्र व राज्य सरकार मिलकर परियोजना पर जल्द ही काम शुरू करने जा रही हैं।

  • J&K में तेज हुआ आतंकवाद रोधी अभियान…जगहृ-जगह चप्पा किए आतंकियों के पोस्टर

    J&K में तेज हुआ आतंकवाद रोधी अभियान…जगहृ-जगह चप्पा किए आतंकियों के पोस्टर


    जम्मू।
    जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu and Kashmir Police) ने आतंकवाद रोधी अभियान (Anti-Terrorism Operations) तेज करते हुए डोडा जिले (Doda district) में सक्रिय आतंकवादियों के बारे में सूचना देने के संबंध में कई अहम स्थानों पर पोस्टर चस्पा किए हैं। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इनमें प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी कमांडर सैफुल्लाह का नाम भी शामिल है।

    हालिया मुठभेड़ और क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज कर दिए गए हैं। इसी क्रम में यह कदम उठाया गया है।पोस्टर डोडा के प्रवेश बिंदु पर गणपत पुल, नागरी, डेसा और ठाठरी समेत प्रमुख चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए हैं।

    अधिकारियों ने बताया कि जनसहभागिता बढ़ाने के लिए संवेदनशील इलाकों में और भी नोटिस लगाए जा रहे हैं। इस बीच, शनिवार सुबह सुरक्षा बलों ने डोडा के गांदो क्षेत्र के चिल्ली जंगल में आंतकवादियों के एक ठिकाने का भंडाफोड़ किया। वहां से खाने-पीने का सामान और कंबल बरामद किए गए। अधिकारियों के अनुसार आसपास के जंगलों में तलाशी अभियान और तेज कर दिया गया है।

    उन्होंने कहा कि संदिग्धों की तस्वीरों और संक्षिप्त विवरण वाले पोस्टरों के जरिये आम लोगों से कोई भी विश्वसनीय सूचना को पुलिस के साथ साझा करने की अपील की गई है। साथ ही सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दिया गया है।

    अधिकारियों ने बताया कि यह पोस्टर अभियान चेनाब घाटी क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। डोडा और पड़ोसी किश्तवाड़ जिलों में हाल के वर्षों में कई मुठभेड़ हुई हैं, क्योंकि आतंकियों ने जम्मू क्षेत्र के उन हिस्सों में फिर से गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश की है, जहां पहले आतंकवाद पर काफी हद तक काबू पा लिया गया था।

    पिछले एक महीने से डोडा, किश्तवाड़, कठुआ, उधमपुर, राजौरी और पुंछ जिलों के ऊंचाई वाले इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान जारी है। इस दौरान 10 से अधिक मुठभेड़ हुई हैं। इनमें से ज्यादातर किश्तवाड़, उधमपुर और कठुआ में हुई हैं, जिनमें जेईएम के चार पाकिस्तानी आतंकवादी ढेर हो गए और सेना का एक जवान शहीद हो गया। चार फरवरी को उधमपुर के रामनगर वन क्षेत्र और किश्तवाड़ के छत्रू इलाके में मुठभेड़ में दो आतंकवादी ढेर हो गए, जबकि 23 जनवरी को कठुआ के परेहतर इलाके में एक अन्य आतंकी मारा गया। वहीं, 18 जनवरी को छत्रू में हुई मुठभेड़ में सेना का एक ‘पैरा ट्रूपर’ शहीद हो गया।

  • पूर्वोत्तर को बड़ी सौगात… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी देश की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग

    पूर्वोत्तर को बड़ी सौगात… ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगी देश की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने असम में ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) के नीचे भारत (India) की पहली सड़क-सह-रेल सुरंग (Road-Cum-Rail Tunnel) के निर्माण को मंजूरी दे दी है। यह परियोजना गोहपुर (NH-15) से नुमालीगढ़ (NH-715) तक 33.7 किलोमीटर लंबे चार-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का हिस्सा है, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 किलोमीटर लंबी ट्विन-ट्यूब सुरंग शामिल है। कुल लागत 18,662 करोड़ रुपये है और इसे इंजीनियरिंग-प्रोक्योरमेंट-कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

    यह भारत की पहली अंडरवाटर सड़क-सह-रेल सुरंग होगी, जो विश्व में अपनी तरह की दूसरी ऐसी संरचना होगी। वर्तमान में गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी 240 किलोमीटर है, जो कालियाभम्भोरा पुल और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरती है। छह घंटे लगते हैं। नई सुरंग से यह दूरी मात्र 34 किलोमीटर रह जाएगी और यात्रा समय 20-30 मिनट तक कम हो जाएगा।

    इस परियोजना के प्रमुख फायदे पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगे। यह असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और अन्य राज्यों को सीधे लाभ पहुंचाएगी। माल ढुलाई की दक्षता बढ़ेगी, रसद लागत में भारी कमी आएगी और क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी। सुरंग में एक ट्यूब में सड़क (4 लेन) और दूसरी में रेलवे की व्यवस्था होगी, जो मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देगी। इससे चार प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो अंतर्देशीय जलमार्गों से बेहतर जुड़ाव होगा। काजीरंगा जैसे पर्यटन स्थलों, आर्थिक केंद्रों और रसद हब्स की पहुंच आसान हो जाएगी, जिससे पर्यटन, उद्योग और व्यापार में नई संभावनाएं खुलेंगी।


    एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती

    रणनीतिक दृष्टि से यह परियोजना एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूत करेगी और सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाएगी। पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से जोड़ने में यह मील का पत्थर साबित होगी। निर्माण से लगभग 80 लाख मानव-दिवसों का रोजगार सृजन होगा, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल देगा। सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी, क्योंकि प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन केंद्र निर्बाध रूप से जुड़ेंगे।


    पूर्वोत्तर भारत के लिए ऐतिहासिक कदम

    कुल मिलाकर, ब्रह्मपुत्र सुरंग परियोजना पूर्वोत्तर भारत के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह न केवल यात्रा और परिवहन को तेज व सुरक्षित बनाएगी, बल्कि क्षेत्र में औद्योगिक विकास, व्यापार वृद्धि और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। केंद्रीय सरकार की इस पहल से असम और पूरे पूर्वोत्तर का परिदृश्य बदल जाएगा, जो सबका साथ, सबका विकास के संकल्प को साकार करेगा।

  • देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    देशभर में महाशिवरात्रि पूर्व की धूम…. जानिए पूजा-जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि


    नई दिल्ली।
    देश भर में आज रविवार को फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर महाशिवरात्रि का पर्व (Mahashivratri festival) धूमधाम से मनाया जा रहा है। महाशिवरात्रि में त्रयोदशी-चतुर्दशी का मेल होता है, त्रयोदशी समाप्त होकर चतुर्दशी शुरू होती है, वही समय महाशिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल (Special Auspicious time.) माना जाता है। ज्योतिषचार्यों के अनुसार 15 फरवरी को दिन में त्रयोदशी तिथि रहेगी, लेकिन शाम 5:04 बजे चतुर्दशी तिथि आरंभ हो जाएगी। ऐसे में पूरी रात्रि में चतुर्दशी ही व्याप्त रहेगी। इसलिए महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को मनाया जा रहा है।

    इस वर्ष महाशिवरात्रि पर व्यतिपात, वरियान व अमृत नामक महा औदायिक योग व निशीथ काल भी बन रहा है। पं. शरद चंद मिश्र के अनुसार, इस दिन सूर्योदय प्रातः 6 बजकर 25 मिनट पर होगा। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी सायं 4 बजकर 23 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर रात्रि भर रहेगी। उत्तराषाढ़ नक्षत्र सायं 7 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, इसके बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। व्यतिपात योग दोपहर 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा, इसके पश्चात वरियान योग लगेगा। साथ ही अमृत सिद्धि योग पूरे दिन-रात्रि विद्यमान रहेगा। निशीथ काल रात्रि 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक रहेगा, जो भगवान शिव की विशेष पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना गया है। प. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग प्रातः 6:25 से सायं 7:26 तक रहेगा। व्यतिपात योग साधना और जप-तप के लिए विशेष फलदायी माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर में रहेगा, जिसमें पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।

    महाशिवरात्रि का महत्त्व : पौराणिक कथाओं के अनुसार सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि में भगवान शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसलिए इसे महाशिवरात्रि या कालरात्रि भी कहा गया है। पौराणिक व्याख्यानों के अनुसार इसे शिव विवाह महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है।

    मुहूर्त
    ● चतुर्दशी तिथि उपस्थित : 15 फरवरी शाम 5:04 से 16 फरवरी शाम 5:34 बजे
    ● शिवरात्रि का विशष पुण्यकाल : 15 की शाम 5:04 से आरम्भ
    ● जलाभिषेक का समय : 15 को प्रातःकाल से आरम्भ
    ● विशेष पुण्यकाल : शाम 5:04 के बाद विशेष पुण्यकाल का अभिषेक होगा

    शिव पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त-
    निशिता काल पूजा समय – 12:37 ए एम से 01:32 ए एम, फरवरी 16
    अवधि – 55 मिनट
    शिवरात्रि पारण समय – 16 फरवरी को 07:57 ए एम से 01:04 पी एम तक।
    रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:11 पी एम से 09:38 पी एम
    रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:38 पी एम से 01:04 ए एम, फरवरी 16
    रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 01:04 ए एम से 04:31 ए एम, फरवरी 16
    रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 04:31 ए एम से 07:57 ए एम, फरवरी 16

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि (घर और मंदिर में कैसे करें पूजा)-
    महाशिवरात्रि की पूजा विधि: घर में कैसे करें पूजा- महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर में पूजा करने से पहले पूजा की जगह अच्छे से साफ कर लें। शिवलिंग को भी पानी से धोकर साफ जगह पर रखें। सबसे पहले शिवलिंग पर साफ जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, घी और शहद से एक-एक करके अभिषेक किया जा सकता है। अभिषेक करते समय मन में “ॐ नमः शिवाय” का जप करते रहें। अगर सब चीजें उपलब्ध न हों तो सिर्फ जल और दूध से भी पूजा पूरी मानी जाती है। अभिषेक के बाद शिवलिंग पर बेलपत्र जरूर चढ़ाएं। साथ में धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ा सकते हैं। फूल चढ़ाते समय मन में अपनी इच्छा रखें और शिवजी को याद करें। इसके बाद धूप-दीप जलाएं और थोड़ी देर शांत बैठकर शिव मंत्रों का जप करें। मन की बात भगवान शिव से कहें। शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ भी कर सकते हैं। जो लोग रात में जागकर पूजा कर पाते हैं, वे घर पर ही सरल तरीके से रुद्राभिषेक कर सकते हैं।

    घर में शिवलिंग रखने की सही बात-
    घर में बहुत बड़ा शिवलिंग रखने की परंपरा नहीं है। आमतौर पर मिट्टी, पत्थर, पीतल या चांदी का छोटा शिवलिंग घर के लिए ठीक माना जाता है। शिवलिंग के साथ गणेश जी, माता पार्वती और नंदी की छोटी मूर्ति रखकर पूजा करना अच्छा माना जाता है।

    महाशिवरात्रि की पूजा विधि: मंदिर में कैसे करें पूजा-
    अगर मंदिर जाकर पूजा कर रहे हैं तो सुबह स्नान करके साफ कपड़ों में मंदिर जाएं। मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाएं। कई जगहों पर दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक की व्यवस्था होती है, वहां श्रद्धा से अभिषेक करें। “ॐ नमः शिवाय” का मन ही मन जप करते रहें।शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और सफेद फूल चढ़ाएं। पुजारी जी के बताए नियमों का पालन करें। धूप-दीप दिखाकर भगवान शिव का ध्यान करें। अगर संभव हो तो रात में मंदिर जाकर रुद्राभिषेक या विशेष पूजा में शामिल हों। मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात की पूजा का खास फल मिलता है।

    महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जप-
    महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की कृपा पाने के लिए कुछ आसान और असरदार मंत्रों का जप किया जा सकता है। सबसे पहले “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें। यह शिव जी का सबसे सरल और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस पावन दिन महामृत्युंजय मंत्र का जप भी किया जाता है–
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
    उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

    शिवलिंग पर क्या चढ़ाएं और क्या नहीं- महाशिवरात्रि या रोज की पूजा में शिवलिंग पर चढ़ाने के लिए जल, दूध, दही, घी और शहद से अभिषेक किया जाता है और इसके बाद बेलपत्र जरूर अर्पित करें, क्योंकि यह शिवजी को सबसे प्रिय माना जाता है। साथ में सफेद फूल, आक और धतूरा भी चढ़ाए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर सादे मन से पूजा करें। वहीं शिवलिंग पर केतकी का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार यह शिव पूजा में वर्जित माना गया है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते, इन्हें विष्णु पूजा के लिए रखा जाता है। लाल रंग के तेज खुशबू वाले फूल, टूटे या मुरझाए फूल, बासी फूल और चढ़ाया हुआ प्रसाद दोबारा शिवलिंग पर अर्पित नहीं करना चाहिए।