Category: National

  • लियोनल मेसी ने GOAT इंडिया टूर के समापन पर भारत को धन्यवाद कहा फुटबॉल के भविष्य के प्रति जताई उम्मीद

    लियोनल मेसी ने GOAT इंडिया टूर के समापन पर भारत को धन्यवाद कहा फुटबॉल के भविष्य के प्रति जताई उम्मीद


    नई दिल्ली । फुटबॉल जगत के महानतम खिलाड़ियों में शामिल लियोनल मेसी ने अपने भारत दौरे के समापन पर एक भावुक संदेश साझा किया। अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर ने भारत के विभिन्न शहरों में अपने शानदार अनुभवों को साझा करते हुए देशवासियों का आभार व्यक्त किया। “नमस्ते इंडिया इस शब्द के साथ मेसी ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश की शुरुआत की और भारत में बिताए गए समय को अविस्मरणीय बताया।

    दौरे की खासियतें

    लियोनल मेसी का GOAT इंडिया टूर भारत के चार प्रमुख शहरों – दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कोलकाता में हुआ। इस दौरे ने भारत में फुटबॉल प्रेमियों के बीच एक नया उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। इन शहरों में मेसी को जहां जबरदस्त स्वागत मिला, वहीं उनकी यात्रा ने क्रिकेट और फुटबॉल के बीच एक अनोखा संबंध भी स्थापित किया। मेसी ने अपने दौरे के दौरान भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों से भी मुलाकात की, जिनमें क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सचिव जय शाह और भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील छेत्री शामिल थे। इन मुलाकातों ने मेसी के इस दौरे को और भी खास बना दिया।

    भारत में फुटबॉल का भविष्य

    मेसी ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बहुत उज्ज्वल है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत में फुटबॉल के प्रति बढ़ता प्यार और फुटबॉल के प्रति लोगों का जुनून देखकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने भारत के फुटबॉल प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा यहां मिले प्यार और समर्थन को कभी नहीं भूलूंगा। मुझे यकीन है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।

    भारत में फुटबॉल का महत्व

    भारत में फुटबॉल का इतिहास काफी लंबा और समृद्ध है लेकिन हाल के वर्षों में इस खेल के प्रति लोगों की रुचि में तेजी से वृद्धि हुई है। मेसी का दौरा इस बात का प्रतीक था कि भारत में फुटबॉल अब सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि एक जुनून बन चुका है। भारतीय फुटबॉल प्रेमियों का उत्साह और मेसी के प्रति प्यार इसे साबित करता है। मेसी ने इस दौरे के दौरान भारतीय फुटबॉल का समर्थन करने और इसे बढ़ावा देने का वादा किया।

    भारत की मेहमाननवाजी ने किया भावुक

    मेसी ने अपनी यात्रा को एक व्यक्तिगत अनुभव के रूप में भी देखा, जहां उन्हें न सिर्फ फुटबॉल के प्रति भारतीयों का प्यार मिला बल्कि भारतीय संस्कृति और मेहमाननवाजी का भी खास अनुभव हुआ। उन्होंने कहा, भारत में जितना प्यार और अपनापन मुझे मिला, वह किसी और देश में नहीं मिला। यह मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रहेगा।

    लियोनल मेसी का GOAT इंडिया टूर भारत के फुटबॉल प्रेमियों के लिए एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक घटना बन गया। मेसी का भारत में आना न केवल फुटबॉल के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कारण बना बल्कि इसने फुटबॉल और क्रिकेट के बीच की दूरी को भी खत्म किया। मेसी के इस दौरे से यह स्पष्ट है कि भारत में फुटबॉल का भविष्य मजबूत और उज्ज्वल है और अब भारत में इस खेल को लेकर और भी ज्यादा उत्साह देखने को मिलेगा।

  • हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले– यह शर्मनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाता है

    हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का नीतीश कुमार पर तीखा हमला, बोले– यह शर्मनाक और पिछड़ी सोच को दर्शाता है

    नई दिल्ली/श्रीनगर।एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम युवती का हिजाब हटाने को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार विवादों में घिरे हुए हैं। इस मामले ने अब राष्ट्रीय राजनीति में भी तूल पकड़ लिया है। जम्मूकश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नीतीश कुमार की आलोचना की है और इसे शर्मनाकअस्वीकार्य और पिछड़ी सोच का प्रतीक बताया है। श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक और सभ्य समाज में किसी महिला के पहनावे को लेकर सार्वजनिक तौर पर दखल देना गलत है। उन्होंने कहा कि यह घटना न केवल महिला की गरिमा के खिलाफ हैबल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और धार्मिक आज़ादी पर भी सीधा हमला है।

    पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं

    उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि इस तरह की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती से जुड़ी एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कहा कि राजनीति में सत्ता के दौरान ऐसी सोच पहले भी सामने आती रही है।उन्होंने कहा मेरे चुनाव के समय भी एक घटना सामने आई थीजब एक वैध महिला वोटर का पोलिंग स्टेशन के अंदर बुर्का हटवाया गया था। यह उसी मानसिकता का हिस्सा है। तब जो हुआवह दुर्भाग्यपूर्ण था और आज जो नीतीश कुमार के मामले में हुआ हैवह भी उतना ही शर्मनाक है।

    महिला का सार्वजनिक अपमान अस्वीकार्य

    नीतीश कुमार पर सीधे निशाना साधते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में किसी महिला का सार्वजनिक रूप से अपमान नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री खुद नियुक्ति पत्र नहीं देना चाहते थेतो वे ऐसा करने से इनकार कर सकते थेलेकिन किसी महिला को मंच पर इस तरह अपमानित करना पूरी तरह गलत है।उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को लंबे समय तक एक धर्मनिरपेक्षसंवेदनशील और समझदार नेता के रूप में देखा गयालेकिन इस तरह की घटनाएं उनकी छवि पर सवाल खड़े करती हैं।उन्होंने कहा धीरेधीरे नीतीश कुमार की असली सोच सामने आ रही हैजिसे अब तक लोग अलग नजरिए से देखते थे।

    लोकतंत्र और व्यक्तिगत आज़ादी पर सवाल
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसारयह विवाद केवल एक घटना तक सीमित नहीं हैबल्कि यह महिलाओं के अधिकारधार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत पसंद जैसे मुद्दों से जुड़ा हुआ है। उमर अब्दुल्ला का बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि देश में सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं से संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। वित्तीय मुद्दों पर केंद्र सरकार को भी घेराइस दौरान उमर अब्दुल्ला ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की राज्यों के वित्तीय अनुशासन पर की गई टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जम्मूकश्मीर को विरासत में मिली आर्थिक चुनौतियों के साथ काम करना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य का दर्जा खत्म होने के बाद जम्मूकश्मीर को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी नहीं मिल रही हैजिससे बजट पर दबाव बढ़ा है।उमर अब्दुल्ला ने कहाहम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हैं और केंद्र सरकार पर निर्भर हैं। इसके बावजूद हमने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है।

    वित्तीय जिम्मेदारी का दावा
    मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछले 15–16 महीनों में उनकी सरकार ने किसी भी तरह की वित्तीय लापरवाही नहीं की है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का एक भी मामला सामने आता हैतो वह खुद जवाबदेही लेने को तैयार हैं। हिजाब विवाद पर उमर अब्दुल्ला का बयान न केवल नीतीश कुमार की आलोचना हैबल्कि यह महिलाओं की गरिमाव्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन में एक मजबूत राजनीतिक संदेश भी है। यह मामला आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है।

  • परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश की राह खुलेगी, संसद में पेश हुआ SHANTI बिल; मोदी सरकार के लक्ष्यों पर नजर

    परमाणु ऊर्जा में निजी निवेश की राह खुलेगी, संसद में पेश हुआ SHANTI बिल; मोदी सरकार के लक्ष्यों पर नजर


    नई दिल्ली
    /भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी है। मोदी सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नाभिकीय ऊर्जा का सतत दोहन तथा उन्नयन विधेयक, 2025 या SHANTI बिल पेश किया। इस बिल के माध्यम से सरकार ने देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है, जिसे 1962 के बाद परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। इस बिल को लोकसभा की पूरक कार्यसूची में शामिल कर राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में पेश किया।

    सरकार का कहना है कि SHANTI बिल का मुख्य उद्देश्य नाभिकीय ऊर्जा के सुरक्षित और सतत उपयोग को बढ़ाना है, ताकि इसका लाभ न केवल विद्युत उत्पादन में बल्कि स्वास्थ्य, कृषि, जल शुद्धिकरण, उद्योग, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी मिल सके। बिल में निजी कंपनियों -घरेलू और विदेशी को नाभिकीय ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश की अनुमति देने की बात की गई है। इससे 2047 तक भारत में 100 गीगावाट परमाणु क्षमता हासिल करने का लक्ष्य संभव हो सकेगा, विशेष रूप से छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर SMR के माध्यम से।

    बिल में प्रमुख प्रावधान

    SHANTI बिल पुराने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 और नागरिक नाभिकीय क्षति दायित्व अधिनियम, 2010 को निरस्त कर एक नया, एकीकृत कानून बनाने जा रहा है। इसमें शामिल प्रमुख प्रावधान इस प्रकार हैं:स्वतंत्र परमाणु सुरक्षा नियामक की स्थापना।दायित्व नियमों में संशोधन, ताकि निजी निवेशकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बने। किसी भी विवाद या दुर्घटना के निपटारे के लिए विशेष ट्रिब्यूनल की व्यवस्था।परमाणु दुर्घटना या क्षति पर दावे प्रस्तुत करने का प्रावधान। सरकार का यह भी कहना है कि बिल विकसित भारत 2047 के विजन का हिस्सा है और यह परमाणु प्रौद्योगिकी को स्वच्छ, स्थिर और आधारभूत ऊर्जा स्रोत के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। SHANTI बिल के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और यह भारत के नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य -2070 में योगदान देने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

    विपक्ष का रुख

    कांग्रेस ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया है। उनका कहना है कि यह विधेयक नाभिकीय ऊर्जा क्षेत्र में मानकों का उल्लंघन कर रहा है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कांग्रेस का दावा है कि सरकार को इसे पेश नहीं करना चाहिए था और इस पर व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

    सरकार के लक्ष्य 
    SHANTI बिल के जरिए सरकार तीन बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती है: निजी निवेश को प्रोत्साहित करना: घरेलू और विदेशी कंपनियों के लिए नए अवसर। सतत और सुरक्षित ऊर्जा उत्पादन: स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और पर्यावरण में परमाणु ऊर्जा का बहुआयामी उपयोग। पर्यावरण और जलवायु अनुकूल विकास: जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन की दिशा में योगदान।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिल को पारित किया जाता है, तो यह न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि नवाचार और औद्योगिक विकास को भी गति देगा।SHANTI बिल के साथ भारत की परमाणु ऊर्जा नीति में एक नया युग शुरू हो सकता है, जिसमें निजी क्षेत्र, तकनीकी नवाचार और पर्यावरण संरक्षण तीनों का संतुलित मिश्रण होगा।

  • कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'

    कांग्रेसी पूर्व मुख्यमंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित बयान दिया कहा 'पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे'


    नई दिल्ली । कांग्रेसी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने ऑपरेशन सिंदूर पर एक विवादित बयान दिया है जिसके बाद राजनीति में हलचल मच गई है। चव्हाण का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय वायु सेना ने अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया क्योंकि उस दिन भारतीय विमानों के पाकिस्तान द्वारा मार गिराए जाने की संभावना बहुत अधिक थी।

    पृथ्वीराज चव्हाण ने एक इंटरव्यू में कहा ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन अगर ग्वालियर बठिंडा या सिरसा से कोई विमान उड़ान भरता तो उसे पाकिस्तान द्वारा बहुत आसानी से मार गिराया जा सकता था। यही कारण था कि एयर फोर्स को पूरी तरह से ग्राउंडेड रखा गया था। चव्हाण ने आगे कहा कि पहले दिन हम बुरी तरह हार गए थे लेकिन ऑपरेशन के अगले चरणों में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने अपनी ताकत दिखाई।

    यह बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायु सेना के एक्शन को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के प्रयास के रूप में देखा जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर जो कि 1999 में कारगिल युद्ध के बाद भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान के खिलाफ किया गया था एक बड़ा सैन्य अभियान था जिसमें भारतीय वायु सेना और सेना ने एकजुट होकर पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया था। चव्हाण के बयान के बाद विपक्षी दलों और रक्षा विशेषज्ञों ने उनकी टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

    चव्हाण का यह बयान एक ऐसे समय में आया है जब भारतीय वायु सेना और सेना के संचालन पर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय सेना और वायु सेना की कार्यप्रणाली को गलत तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि चव्हाण ने अपनी बात तथ्यों पर आधारित रखते हुए रखी है और ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारतीय विमानों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त उपाय किए गए थे।

    इससे पहले भारतीय वायु सेना और सेना के कई अधिकारियों ने भी माना था कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले दिन कुछ फैसले धीमे थे क्योंकि पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों को निशाना बनाने का खतरा बहुत ज्यादा था। हालांकि बाद में स्थिति में सुधार हुआ और भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया।

    चव्हाण के बयान ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि क्या भारतीय वायु सेना के लिए ऐसे ऑपरेशनों में निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई कमजोरी रही थी। कुछ रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बयानों से भारतीय सेना की रणनीतिक क्षमता पर सवाल उठते हैं जो एक संवेदनशील मामला हो सकता है।

    यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव हमेशा बना रहता है और ऐसे बयान से दोनों देशों के सैन्य इतिहास और रणनीति पर चर्चा और विवाद दोनों का सामना करना पड़ सकता है। चव्हाण के बयान को लेकर भारतीय रक्षा मंत्रालय और वायु सेना से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन इस बयान ने राजनीतिक और रक्षा हलकों में हंगामा मचा दिया है। ऑपरेशन सिंदूर के बारे में चव्हाण का यह बयान भारतीय राजनीति में एक नई बहस का कारण बन सकता है और अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी

    मणिपुर में फिर बढ़ा तनाव गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों को किया गया अलर्ट; सरकार बनाने की कयावद जारी


    नई दिल्ली । मणिपुर में मंगलवार रात हुई गोलीबारी के बाद एक बार फिर राज्य में तनाव का माहौल बन गया है। बिष्णुपुर जिले के बाहरी इलाकों में खासकर चूड़ाचांदपुर जिले की सीमा से लगे तोरबंग और फौगाकचाओ इखाई इलाकों के पास कई बार गोलीबारी हुई जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई है। अधिकारियों के मुताबिक गोलीबारी के कारणों और इसके मकसद का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

    घटना के बाद सुरक्षा बलों को घटनास्थल पर भेजा गया और एहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में ताजा गोलीबारी ने पहले से भड़क चुके जातीय संघर्ष को और उग्र बना दिया है। मणिपुर में 3 मई 2023 से जारी हिंसा के बाद यह पहली बार नहीं है जब गोलीबारी की घटना सामने आई है।

    इस बीच राज्य में सरकार गठन की कवायद भी जारी है। बीजेपी नेतृत्व ने मणिपुर में स्थिरता लाने के लिए राज्य के बीजेपी विधायकों के साथ कई दौर की बातचीत की है। इनमें कुकी और मैतेई समुदाय के बीजेपी विधायक भी शामिल हैं। मणिपुर विधानसभा के स्पीकर सत्यब्रत और पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत 34 विधायक हाल ही में पार्टी नेतृत्व से मिलने के लिए एक साथ बैठे थे। यह मुलाकातें हिंसा के बाद पहली बार हुई थीं जब दोनों समुदायों के विधायक एक साथ बातचीत में शामिल हुए थे।

    राज्य में जातीय हिंसा के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है और सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बीजेपी नेतृत्व का उद्देश्य मणिपुर में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करते हुए राज्य में एक मजबूत और समावेशी सरकार का गठन करना है।बीजेपी के नेताओं का कहना है कि विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाली और समझौते के आधार पर ही राज्य में शांति की स्थिति बहाल की जा सकती है। हालांकि मणिपुर में संघर्ष की जड़ें गहरी हैं और हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा कई बार सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई जा चुकी है। मणिपुर में बढ़ती हिंसा और राजनीतिक अस्थिरता के बीच राज्य के लिए आगामी समय में स्थिरता लाना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के

    हिजाब हटाने को लेकर विवाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से माफी की मांग इमारत-ए-शरिया के सचिव भड़के


    पटना । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला आयुष चिकित्सक के चेहरे से हिजाब हटाने का विवाद तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना पर अब इमारत-ए-शरिया के सचिव मौलाना मुफ्ती मोहम्मद सईदउर रहमान कासमी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था और इस कदम की सख्त निंदा करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार से माफी की मांग की है।

    घटना उस समय की है जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक कार्यक्रम में नवनियुक्त आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दे रहे थे। कार्यक्रम के दौरान जब नुसरत परवीन नामक महिला चिकित्सक की बारी आई तो वह हिजाब पहने हुए थीं। मुख्यमंत्री ने यह देखकर कहा यह क्या है और फिर महिला के चेहरे से हिजाब हटा दिया। इससे महिला असहज हो गई और एक अधिकारी ने जल्दी से उन्हें एक और कर दिया। इस घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिस पर इमारत-ए-शरिया के सचिव ने तीखी प्रतिक्रिया दी।

    मौलाना रहमान कासमी ने कहा कि पर्दा महिलाओं और समाज की इज्जत है और हिजाब को हटाना महिला का अपमान है। मुख्यमंत्री को ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि यह महिलाओं की इज्जत और गरिमा की तौहीन है। उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को माफी मांगनी चाहिए क्योंकि उन्होंने महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाई है।

    मुख्यमंत्री कार्यालय ने हालांकि इस घटना पर कोई खास प्रतिक्रिया नहीं दी है लेकिन यह मामला अब राजनीति में भी गहरे विवाद का कारण बन गया है। विपक्षी दलों खासकर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस ने इस वीडियो को साझा करते हुए इसे मुख्यमंत्री की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाया है। राजद ने एक्स पर पोस्ट किया नीतीश जी का क्या हो गया है अब उनकी मानसिक स्थिति पूरी तरह से अस्थिर हो गई है।

    मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने हाल ही में 685 आयुर्वेद 393 होम्योपैथी और 205 यूनानी पद्धति के चिकित्सकों को नियुक्त किया था जिनमें से कुछ को मंच से नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे। हालांकि यह घटना और इसके बाद की प्रतिक्रिया राज्य की राजनीति में नई बहस का कारण बन गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे नीतीश कुमार के विचारधारा परिवर्तन के रूप में भी देखा है और इसपर तीखे हमले किए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद आने वाले समय में बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है।

  • NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी

    NDA में भी 'G Ram G' विधेयक पर विरोध TDP और कांग्रेस ने किया प्रदर्शन की तैयारी


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025’ को लेकर अब एनडीए में भी विरोध की स्थिति बन गई है। जहां एक ओर विपक्ष ने इस विधेयक को महात्मा गांधी का अपमान मानते हुए उसका विरोध किया है वहीं एनडीए का एक प्रमुख सहयोगी दल तेलुगु देशम पार्टी  भी सरकार के खिलाफ खड़ा हो गया है।

    यह विधेयक मनरेगा योजना के स्थान पर लाया गया है लेकिन विपक्ष और सरकार के सहयोगी दलों में इसके नाम को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने विधेयक के तहत राज्यों पर वित्तीय बोझ डालने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश जैसे राज्य पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं और इस नए बदलाव से उन्हें और ज्यादा बोझ पड़ेगा।

    देवरयालु ने आगे कहा “कुछ सालों से मनरेगा में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी और यह विचार संसद के बाहर और अंदर कई बार उठाए गए थे। हाल ही में काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 किया गया जो एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इस योजना का खर्च राज्यों पर डालने का प्रस्ताव खासकर आंध्र प्रदेश जैसे राज्य के लिए सही नहीं है।
    टीडीपी के प्रवक्ता एन विजय कुमार ने इस नए वर्जन का स्वागत तो किया लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार से 40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर पुनः विचार करने की अपील की। उनका कहना था कि इस भुगतान व्यवस्था से राज्यों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है।

    वहीं कांग्रेस ने भी इस विधेयक पर विरोध जताया है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि मनरेगा में महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके अपमान के समान है। कांग्रेस ने इसे एक “राजनीतिक कदम बताया है और दावा किया कि मोदी सरकार गांधी के विचारों से मुंह मोड़ रही है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की योजना बनाई है।

    ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को संसद में पेश करते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते हैं और उनका नाम किसी योजना से हटाना उनका अपमान नहीं है। यह सरकार गांधीजी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों पर आधारित कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस सरकार के समय भी ‘जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला गया था और तब क्या यह पंडित नेहरू का अपमान था?

    चौहान ने कहा कि सरकार ने मनरेगा पर 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं और अब इस नए विधेयक के तहत 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि इस योजना के लिए प्रावधानित की गई है जो गांवों के समग्र विकास के लिए उपयोग की जाएगी।

    यह विधेयक ध्वनिमत से पास हुआ है लेकिन इसके बावजूद विपक्ष और एनडीए के भीतर ही इसकी वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। खासकर उन राज्यों के लिए यह विधेयक एक चुनौती बन सकता है जो पहले से ही वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं। सरकार की योजना है कि इस विधेयक से ग्रामीण भारत का समग्र विकास होगा और विकसित भारत की दिशा में एक ठोस कदम उठाया जाएगा। लेकिन इसके नाम उद्देश्य और वित्तीय बोझ को लेकर बढ़ते विवाद से यह साफ है कि आगामी दिनों में इस पर और भी राजनीतिक बहस होने की संभावना है।

  • NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत

    NCR में अपराध पर लगाम के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सुझाव, एक ही पुलिस और विशेष अदालत की वकालत


    नई दिल्ली /राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में बढ़ते संगठित अपराध और अपराधियों की बदलती रणनीतियों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक अहम सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि दिल्ली नोएडा गुरुग्राम फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे NCR के अलग-अलग इलाकों में अपराध करने वाले गिरोह अक्सर राज्य सीमाओं का फायदा उठाकर पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को कमजोर करते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे NCR में एक समान पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत की व्यवस्था पर विचार करने की सलाह दी है।यह टिप्पणी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ ने की जिसमें मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। अदालत का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों की पुलिस और अदालतों के अधिकार क्षेत्र के चलते संगठित अपराधियों को अनुचित लाभ मिल जाता है।

    अपराधियों की रणनीति पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NCR में सक्रिय अपराधी गिरोह अक्सर दिल्ली में वारदात को अंजाम देने के बाद तुरंत उत्तर प्रदेश या हरियाणा के इलाकों-जैसे नोएडा गुरुग्राम या फरीदाबाद-में भाग जाते हैं। इस तरह वे गिरफ्तारी से बचने या जांच और ट्रायल में देरी करने में सफल हो जाते हैं। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि कोई गैंगस्टर या संगठित गिरोह कई राज्यों में अपराध करता है तो उसके खिलाफ एक ही एजेंसी द्वारा कार्रवाई और एक ही अदालत में मुकदमा चलाया जाना ज्यादा प्रभावी होगा।

    NIA जैसी एजेंसी को अधिकार देने का सुझाव

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि संगठित अपराध से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी को पूरे NCR में जांच और ट्रायल का अधिकार दिया जा सकता है। इससे अपराधी यह तर्क नहीं दे पाएंगे कि अपराध अलग-अलग राज्यों में हुआ है और इसलिए अलग-अलग अदालतों में मुकदमा चले।अदालत ने माना कि एकीकृत व्यवस्था से जांच तेज होगी और न्यायिक प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी बनेगी।

    विशेष अदालत बनाने की वकालत

    मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने केंद्र की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ASG ऐश्वर्य भाटी से सवाल किया कि क्यों न NCR के लिए एक विशेष अदालत बनाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह यूएपीए पीएमएलए और एनडीपीएस जैसे केंद्रीय कानूनों के तहत विशेष अदालतें बनाई गई हैं उसी तर्ज पर NCR में संगठित अपराध के मामलों के लिए भी एक सक्षम और केंद्रीकृत अदालत हो सकती है।ऐसी अदालत में यह मायने नहीं रखेगा कि अपराध किस राज्य में हुआ है बल्कि पूरा मामला एक ही जगह सुना और निपटाया जा सकेगा।

    कानूनी खामियों से अपराधियों को फायदा

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वर्तमान व्यवस्था में क्षेत्राधिकार जूरिस्डिक्शन की जटिलता संगठित अपराधियों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। अलग-अलग राज्यों में एफआईआर जांच और ट्रायल होने से मामलों में देरी होती है। इसका नतीजा यह होता है कि कई कुख्यात अपराधी जमानत पाने में सफल हो जाते हैं जो समाज और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।
    समाज और जनहित के लिए जरूरी कदम
    पीठ ने जोर देकर कहा कि NCR जैसे संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्र में अपराध नियंत्रण के लिए मजबूत और प्रभावी कानूनी ढांचे की जरूरत है। एक ही पुलिस एजेंसी और विशेष अदालत से न केवल त्वरित कार्रवाई संभव होगी बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय मिल सकेगा।सुप्रीम कोर्ट ने इसे जनहित और समाज की सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस दिशा में गंभीरता से विचार करना चाहिए।फिलहाल यह एक सुझाव है लेकिन अगर इसे लागू किया जाता है तो NCR में अपराध से निपटने की रणनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। आने वाले समय में केंद्र सरकार इस पर क्या फैसला लेती है इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

  • पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी

    पश्चिम बंगाल में SIR के दूसरे चरण के बाद 58 लाख मतदाताओं के नाम कटे 1.9 करोड़ को नोटिस जारी


    कोलकाता । पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव हुए हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक राज्य में अब कुल 7.1 करोड़ मतदाता रह गए हैं जबकि 29 अक्टूबर 2025 तक 7.6 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम मृत स्थानांतरित अनुपस्थित या डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए हैं। इसके अलावा 1.9 करोड़ मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा क्योंकि उनकी पंजीकरण जानकारी में तार्किक विसंगतियां पाई गईं हैं जिन्हें चुनाव अधिकारियों के अनुसार अगले चरण में स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।

    इन विसंगतियों में मुख्य रूप से ‘पिता के नाम में गड़बड़ी’ एक ही अभिभावक से छह या उससे अधिक संतान का नामांकन और असामान्य उम्र के अंतर की प्रविष्टियां शामिल हैं। कुछ मामलों में ऐसे व्यक्ति भी पंजीकृत पाए गए हैं जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक थी लेकिन उनका पहले कभी मतदाता सूची में नामांकन नहीं हुआ था। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR के दूसरे चरण में दस्तावेज़ जमा करना अनिवार्य नहीं था जिससे कई अधूरे या गलत विवरण सामने आए। इस दौरान 28 लाख गणना फॉर्म पिछली SIR सूची से मेल नहीं खा पाए जबकि 1.65 करोड़ फॉर्म में तार्किक विसंगतियां पाई गईं। इन मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें सुनवाई के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिलेगा। यदि वे अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाते हैं तो उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा।

    जिला स्तर पर मतदाता सूची में कटौती की दर में भी बड़ा अंतर देखने को मिला। कोलकाता उत्तर में 25.9 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण में 23.8 प्रतिशत मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए जबकि पूर्व मेदिनीपुर में यह दर सबसे कम रही केवल 3.3 प्रतिशत। पश्चिम बर्दवान में भी 13.1 प्रतिशत नाम सूची से हटाए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश सीमा से सटे जिलों में नाम कटने की दर राज्य औसत से कम रही। हालांकि इन जिलों में ‘पिता के नाम में असंगति’ की दर अधिक पाई गई। मालदा उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों में इस दर की 12 से 16 प्रतिशत के बीच वृद्धि हुई जो अन्य जिलों से कहीं अधिक है।

    सभी विसंगतियों और गलत नामांकन के बाद चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को मृत स्थानांतरित और डुप्लीकेट मतदाताओं की सूची सौंपी है। साथ ही ये जानकारी सार्वजनिक वेबसाइटों पर भी उपलब्ध कराई गई है। आयोग के अनुसार 15 जनवरी 2026 तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकती हैं जबकि सत्यापन प्रक्रिया 7 फरवरी 2026 तक चलेगी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों और अन्य चुनावों की पारदर्शिता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विशेष गहन पुनरीक्षण से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि केवल योग्य और वास्तविक मतदाता ही मतदान में हिस्सा लें।

  • दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा पिकअप गाड़ी में लगी आग 3 की जलकर मौत

    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भीषण सड़क हादसा पिकअप गाड़ी में लगी आग 3 की जलकर मौत


    अलवर । राजस्थान के अलवर जिले में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ जिसमें तीन लोग जिंदा जलकर मारे गए। यह हादसा रैणी थाना क्षेत्र के चैनल नंबर 131 के पास हुआ जब एक पिकअप गाड़ी दिल्ली से जयपुर जा रही थी और दूसरे वाहन से टकरा गई। टक्कर के बाद पिकअप गाड़ी में आग लग गई और इसमें सवार तीनों लोग अंदर फंसे रह गए। आग लगने के बाद मौके पर पहुंचे लोग पिकअप में फंसे लोगों को बचाने का प्रयास करते रहे लेकिन सब बेकार गया।

    हादसा इतना भीषण था कि पिकअप गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया था जिससे सवार लोग अंदर फंस गए और बाहर नहीं निकल सके। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि तीनों लोग जलकर मारे गए। हादसे में पिकअप का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया जिसे प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर कर दिया गया है। मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है और पुलिस ने शवों को रैणी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतकों की पहचान के लिए काम चल रहा है और यह जांच की जा रही है कि ये लोग कहाँ के निवासी थे और किस स्थान से आ रहे थे।

    हादसा बुधवार तड़के करीब 300 बजे हुआ। दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर अचानक हुई इस घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया। हादसे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल विभाग ने आग बुझाने की कोशिश की लेकिन पिकअप पूरी तरह से जल चुकी थी। स्थानीय लोगों ने बताया कि यह हादसा बेहद दर्दनाक था और उन्होंने पिकअप में सवार लोगों को बाहर निकालने के लिए अपनी ओर से मदद की कोशिश की। लेकिन जलती हुई गाड़ी में फंसे हुए लोगों को बचाना संभव नहीं हो सका।

    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर यह हादसा एक बड़ी दुर्घटना का रूप ले लिया। दुर्घटना की वजह से मार्ग पर कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हो गया था लेकिन पुलिस ने जल्द ही रास्ते को साफ कर दिया।पुलिस अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि टक्कर के कारण क्या था और दुर्घटना के वक्त पिकअप गाड़ी के ड्राइवर की क्या स्थिति थी। हादसा इतना भीषण था कि स्थानीय लोग भी दंग रह गए और कुछ समय के लिए समझ ही नहीं पाए कि क्या हो रहा है।अलवर और रैणी पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और साथ ही मृतकों के परिवारों को सूचना दी जा रही है।