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  • मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई

    मुंबई मेयर की गाड़ी से हटाईं लाल-नीली फ्लैश लाइट, वीआईपी कल्चर विवाद पर BMC ने दी कार्रवाई


    नई दिल्ली। मुंबई में हाल ही में हुए विवाद के बाद मेयर ऋतु तावड़े की आधिकारिक गाड़ी और उनके साथ चलने वाली एस्कॉर्ट वाहन से लाल-नीली फ्लैश लाइटें हटा दी गई हैं। यह मामला सबसे पहले सोशल मीडिया पर तब सुर्खियों में आया जब एक पोस्ट में सवाल उठाया गया कि क्या मेयर की गाड़ी को पुलिस जैसी फ्लैश लाइट लगाने की अनुमति है। इस विवाद के बाद आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र लिखकर इस विषय पर आपत्ति जताई और केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार ऐसी लाइटों का उपयोग केवल आपातकालीन सेवाओं के लिए ही किया जा सकता है, इसलिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए, यह स्पष्ट किया।

    विवाद का केंद्र मेयर की गाड़ी के बोनट पर लगी लाल-नीली फ्लैशिंग लाइट थी, जबकि उनके साथ चल रही एस्कॉर्ट स्कॉर्पियो वाहन में भी ऐसी लाइटें थीं। इस वाहन में मेयर के निजी सहायक और प्रोटोकॉल अधिकारी मौजूद थे। लाइटें देखकर लोगों ने यह सवाल उठाया कि क्या मेयर की गाड़ी को विशेष अधिकार दिया गया है।

    इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मेयर ऋतु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन या फ्लैश लाइट लगाने में कोई रुचि नहीं है और यह प्रशासन की गलती थी। उन्होंने बताया कि जब उन्हें आधिकारिक वाहन दिया गया, तब प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए था कि किन लाइटों का प्रयोग किया जा सकता है और किनका नहीं।

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस विवाद पर कहा कि जांच में पता चला कि लाल-नीली फ्लैश लाइट गाड़ी की छत पर नहीं बल्कि बोनट पर लगी थी। उन्होंने मेयर को दोषी नहीं ठहराया और कहा कि बिना वजह उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है।

    नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि इसी तरह की फ्लैशिंग लाइटें मेयर, डिप्टी मेयर और हाउस लीडर की गाड़ियों पर भी लगी थीं, जिन्हें शनिवार को हटा दिया गया। इस विवाद के बाद विपक्ष की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने सवाल उठाया कि यह कदम वीआईपी कल्चर के खिलाफ है और केंद्र सरकार ने 2017 में ही सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और विशेष प्रतीकों का उपयोग रोक दिया था।

    2017 में केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों पर लाल बत्ती और वीआईपी कल्चर के प्रतीकों के उपयोग पर रोक लगाई थी। तब से मुंबई की मेयर की गाड़ी से लाल बत्ती हटा दी गई थी। इस विवाद ने शहर में फिर से चर्चा छेड़ दी है कि क्या नए नियमों का सही पालन किया जा रहा है और क्या मेयर अपने पद का अनुचित लाभ उठा रही हैं।

    कुल मिलाकर, मुंबई मेयर की गाड़ी पर लगी लाल-नीली फ्लैश लाइट हटाने के बाद विवाद समाप्त हुआ, लेकिन यह मुद्दा वीआईपी कल्चर, प्रशासनिक नियमों और पारदर्शिता पर एक बार फिर ध्यान खींचता है।

  • बलरामपुर में विकास को रफ्तार: सड़क-पुल और डैम समेत कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे 1.85 अरब रुपये

    बलरामपुर में विकास को रफ्तार: सड़क-पुल और डैम समेत कई परियोजनाओं पर खर्च होंगे 1.85 अरब रुपये



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में ग्रामीण विकास और रोजगार बढ़ाने के लिए बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया गया है। विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में करीब 1 अरब 85 करोड़ 93 लाख रुपये खर्च कर सड़क, पुल, डैम सहित कई विकास कार्य कराए जाएंगे। इस योजना से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलने के साथ-साथ हजारों मजदूरों को रोजगार भी मिलेगा।

    जिला प्रशासन द्वारा तैयार की गई कार्ययोजना को युक्तधारा पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है। इस योजना के माध्यम से करीब 44 लाख 26 हजार 910 मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण मजदूरों को काम मिल सकेगा और पलायन पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    793 ग्राम पंचायतों में होगा विकास
    इस योजना के तहत जिले की 793 ग्राम पंचायतों में विभिन्न विकास कार्य कराए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे गांवों में बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

    इसके अलावा ग्रामीणों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन विकसित करने पर भी जोर दिया गया है।

    मजदूरों को मिलेगा 125 दिन तक रोजगार
    योजना के तहत इस बार मजदूरों को एक वर्ष में 125 दिन तक रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में करीब 1 लाख 49 हजार सक्रिय श्रमिकों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और उन्हें गांव में ही रोजगार मिल सकेगा।

    इन कार्यों पर होगा विशेष फोकस
    कार्ययोजना के अनुसार कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम कराया जाएगा, जिनमें शामिल हैं:

    जल संरक्षण और जल संग्रहण से जुड़े प्रोजेक्ट

    पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधरोपण अभियान

    पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कैटल शेड निर्माण

    जरूरतमंदों के लिए आवास संबंधी कार्य

    गांवों में सड़क, पुल और छोटे निर्माण कार्य

    कुछ योजनाएं सीधे लाभार्थियों को व्यक्तिगत लाभ देने के उद्देश्य से

    इन कार्यों के जरिए गांवों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

    40% बजट निर्माण सामग्री पर
    कुल बजट का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी खरीद पर खर्च किया जाएगा, जबकि बाकी राशि मजदूरी के रूप में श्रमिकों को दी जाएगी।

    ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर प्रस्ताव तैयार कर उन्हें स्वीकृति दी जाएगी। इसके बाद 1 अप्रैल से ग्राम पंचायतों में विकास कार्य जमीन पर शुरू होने की तैयारी है।

    प्रशासन का मानना है कि इस योजना से न केवल ग्रामीण इलाकों में विकास की गति तेज होगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने से आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।

    बलरामपुर में विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन के तहत 2026-27 में 1.85 अरब रुपये से सड़क, पुल और अन्य विकास कार्य कराए जाएंगे। योजना से 44 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित होंगे और हजारों ग्रामीण मजदूरों को रोजगार मिलेगा।

  • गैस सिलेंडर की किल्लत ने बदल दी रसोई, पहाड़ों में फिर जगा पारंपरिक चूल्हों का भरोसा

    गैस सिलेंडर की किल्लत ने बदल दी रसोई, पहाड़ों में फिर जगा पारंपरिक चूल्हों का भरोसा


    नई दिल्ली:  उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इन दिनों गैस सिलेंडर की किल्लत ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सप्लाई में देरी और बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों के सामने रसोई चलाना मुश्किल हो गया है। लेकिन इस संकट के बीच पहाड़ों के गांवों ने एक बार फिर अपने पुराने और भरोसेमंद तरीके को याद कर लिया है। कई घरों में अब पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे दोबारा जलने लगे हैं। यह दृश्य एक तरह से उस जीवनशैली की वापसी है, जो कभी पहाड़ों की पहचान हुआ करती थी।

    पहले के समय में पहाड़ों के लगभग हर घर में मिट्टी और पत्थर से बना चूल्हा होता था। यही चूल्हा रसोई का मुख्य साधन था और पूरे परिवार के मेलजोल का भी केंद्र माना जाता था। सुबह से लेकर शाम तक चूल्हे की आंच के आसपास ही घर की दिनचर्या चलती थी। धीरे-धीरे गैस सिलेंडर आने के बाद इन चूल्हों का इस्तेमाल कम हो गया, लेकिन आज गैस की किल्लत ने लोगों को फिर उसी पुराने रास्ते की ओर मोड़ दिया है।

    पहाड़ों में ईंधन के लिए लोगों को ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता था। जंगलों और खेतों के आसपास आसानी से मिलने वाली सूखी लकड़ियां, पिरूल यानी चीड़ के सूखे पत्ते और गोबर के उपले ही ईंधन का काम करते थे। गांव की महिलाएं रोजमर्रा के काम के साथ-साथ इन चीजों को इकट्ठा कर लेती थीं और घर की रसोई आसानी से चल जाती थी। इस व्यवस्था में जहां खर्च लगभग शून्य होता था, वहीं चूल्हे पर धीमी आंच में पकने वाले खाने का स्वाद भी अलग ही होता था। आज भी कई लोग मानते हैं कि लकड़ी के चूल्हे पर बने भोजन की खुशबू और स्वाद गैस पर बने खाने से कहीं ज्यादा अच्छा होता है।

    मौजूदा समय में कई परिवारों ने एक नया तरीका अपनाया है, जिसे गांवों में लोग डबल सिस्टम कह रहे हैं। यानी घर में गैस सिलेंडर भी है और साथ ही पारंपरिक चूल्हा भी जलाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर गैस का इस्तेमाल किया जाता है और बाकी समय चूल्हे पर खाना बनाकर गैस की बचत की जाती है। इससे एक फायदा यह भी है कि अगर सिलेंडर खत्म हो जाए या समय पर न मिले, तो घर की रसोई बंद नहीं होती। इस तरह यह तरीका पहाड़ों के लोगों के लिए सस्ता और सुरक्षित विकल्प बन गया है।

    गांव की बुजुर्ग महिला नर्वदा देवी बताती हैं कि पुराने समय के तरीके आज भी उतने ही कारगर हैं जितने पहले थे। उनका कहना है कि पहले गैस का कोई सवाल ही नहीं था। लोग जंगल से सूखी लकड़ी और पिरूल लेकर आते थे और उसी से खाना बनाते थे। अब जब गैस महंगी हो गई है और समय पर नहीं मिल रही है, तो फिर से चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। उनके अनुसार पहाड़ों में रहने वाले लोगों के लिए ये पुराने तरीके आज भी बेहद उपयोगी हैं।

    दरअसल पहाड़ों की पारंपरिक जीवनशैली सिर्फ पुरानी यादें नहीं हैं, बल्कि संकट के समय वही सबसे बड़ा सहारा बन जाती हैं। बदलते दौर में भले ही आधुनिक तकनीक ने लोगों की जिंदगी को आसान बनाया हो, लेकिन पहाड़ों में पूर्वजों की समझ और आत्मनिर्भरता आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। गैस सिलेंडर की इस समस्या ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति के साथ तालमेल ही पहाड़ी जीवन की असली ताकत है।

  • पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस थोड़ी देर में

    पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान आज, चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस थोड़ी देर में


    नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान आज किया जाएगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के लिए भारत निर्वाचन आयोग थोड़ी देर में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा। इसके साथ ही इन सभी राज्यों में आचार संहिता भी लागू हो जाएगी।

    चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस **विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित की जाएगी। इस दौरान ज्ञानेश कुमार (मुख्य चुनाव आयुक्त), सुखबीर सिंह संधू और राजीव कुमार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेंगे।

    संभावना जताई जा रही है कि पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में चुनाव दो-दो चरणों में कराए जा सकते हैं, जबकि केरल और पुडुचेरी में एक चरण में मतदान हो सकता है। पांचों विधानसभाओं का कार्यकाल मई 2026 तक समाप्त हो रहा है, इसलिए उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    पिछली बार कैसे हुए थे चुनाव
    साल 2021 के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग ने 26 फरवरी को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। उस समय पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान कराया गया था, जबकि असम में 3 चरण और तमिलनाडु, केरल तथा पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान हुआ था।

    मतदाता सूची में बदलाव
    इस बार चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया गया है। इसमें तमिलनाडु में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

    चुनाव आयोग के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के समय राज्य में 6,41,14,587 मतदाता पंजीकृत थे। लगभग चार महीने चली इस प्रक्रिया के बाद 74,07,207 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता रह गए हैं।

    इसके अलावा पश्चिम बंगाल में लगभग 58 लाख, केरल में करीब 8 लाख, असम में करीब 2 लाख और पुडुचेरी में लगभग 77 हजार मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।

    चुनाव से पहले सियासी हलचल
    चुनाव तारीखों की घोषणा से कुछ घंटे पहले ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में दो अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने पुरोहितों और मुअज्जिनों के मासिक मानदेय में 500 रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके साथ ही राज्य सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) बकाया चुकाने की भी घोषणा की।

    राज्यों में राजनीतिक चुनौती
    पांचों राज्यों में चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल काफी सक्रिय है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार के सामने भारतीय जनता पार्टी मुख्य चुनौती मानी जा रही है। अगर इस बार भी उनकी पार्टी जीतती है, तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाली पहली महिला नेता बन सकती हैं।

    भाषा, केंद्र की योजनाएं, विचारधारा और केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई जैसे मुद्दे इन चुनावों में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • चित्तौड़गढ़ में योगी का अभिभूत संबोधन, मातृभूमि और नारी शक्ति का संदेश..

    चित्तौड़गढ़ में योगी का अभिभूत संबोधन, मातृभूमि और नारी शक्ति का संदेश..


    नई दिल्ली /चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक किले पर आयोजित जौहर श्रद्धांजलि समारोह में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मातृभूमि की वीरता और नारी शक्ति को नमन किया। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने मेवाड़ की पावन मिट्टी को शीश नवाते हुए कहा कि वे केवल इतिहास का स्मरण करने नहीं आए हैं, बल्कि उस महान भूमि से साक्षात्कार करने आए हैं जिसने अपने खून से देश के लिए बलिदान किया। सीएम ने कहा कि चित्तौड़गढ़ की जौहर भूमि देश की आत्मा है और यह युगों-युगों तक राष्ट्रभक्ति और समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।

    योगी आदित्यनाथ ने विशेष रूप से नारी शक्ति और मातृ शक्ति के अदम्य साहस पर बल दिया। उन्होंने जौहर की ज्वाला को याद करते हुए झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान का उल्लेख किया और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। सीएम ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश महिलाओं के दृष्टिकोण से पूरी तरह सुरक्षित राज्य बन चुका है और यह आयोजन यह दर्शाता है कि देश की हर नारी और बेटी को सुरक्षा और सम्मान की गारंटी मिलनी चाहिए। उनका कहना था कि मातृ शक्ति का साहस अतीत में अजय था और भविष्य में भी अजय बना रहेगा। चुनौतियों का डटकर सामना करना ही सनातन की मर्यादा है।

    देश की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए योगी आदित्यनाथ ने जातिवाद की राजनीति पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जातिवाद की राजनीति देश की नींव को कमजोर कर रही है और राष्ट्र की प्रगति के लिए काम न करने वाले लोग समाज को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। सीएम ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे इस प्रकार के मतभेदों से ऊपर उठें और देश की एकता और सुरक्षा के लिए एकजुट हों।

    संबोधन के दौरान योगी आदित्यनाथ ने सनातन संस्कृति और उसकी मर्यादा को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सनातन की परंपराएं अमर हैं और दुनिया की कोई भी शक्ति इन्हें मिटा नहीं सकती। मेवाड़ के वीर और वीरांगनाओं के बलिदान को याद करते हुए उन्होंने बताया कि यह इतिहास हमें सिखाता है कि आत्मसम्मान के लिए कैसी भी कुर्बानी दी जा सकती है। सीएम ने कालिका माता मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद कहा कि यह उनके लिए सौभाग्य की बात है और इस पावन भूमि से उन्हें नई ऊर्जा मिली।

    अपने उद्बोधन के अंत में योगी आदित्यनाथ ने चित्तौड़गढ़ के हर वीर और वीरांगना को नमन किया जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि जौहर मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का माध्यम है। कार्यक्रम के दौरान हजारों लोग ‘जय जौहर’ और ‘जय श्री राम’ के नारों के साथ सीएम का स्वागत करते दिखे। यह समारोह एक बार फिर मेवाड़ की धरती पर राष्ट्रीय गौरव और वीरता की भावना को प्रज्वलित करने वाला रहा।

  • गया: CM के बेटे निशांत और मैथिली ठाकुर की 'आपत्तिजनक AI फोटो' वायरल करने वाला गिरफ्तार

    गया: CM के बेटे निशांत और मैथिली ठाकुर की 'आपत्तिजनक AI फोटो' वायरल करने वाला गिरफ्तार



    नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का सहारा लेकर मशहूर हस्तियों को बदनाम करने का एक बड़ा मामला बिहार के गया जिले में उजागर हुआ है। पुलिस ने विकास कुमार यादव (35) नामक युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार और प्रसिद्ध लोक गायिका व विधायक मैथिली ठाकुर की मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाली एआई-जनित (AI Generated) तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की थीं। आरोपी ने सोशल मीडिया पर रातों-रात लोकप्रियता और फॉलोअर्स पाने की सनक में इस गंभीर अपराध को अंजाम दिया।

    साजिश: AI की मदद से तैयार की ‘फर्जी’ तस्वीरें
    पुलिस की साइबर सेल और स्थानीय थाने की जांच में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं:

    डीपफेक का इस्तेमाल: आरोपी विकास यादव (निवासी: शब्दों गांव, फतेहपुर) ने करीब एक सप्ताह पहले एआई टूल की मदद से निशांत और मैथिली ठाकुर की चेहरे वाली आपत्तिजनक और भ्रामक तस्वीरें तैयार कीं।

    सोशल मीडिया पर वायरल: इन फर्जी तस्वीरों को उसने अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट कर दिया, जिससे तेजी से अफवाहें फैलने लगीं और दोनों हस्तियों की छवि को नुकसान पहुँचा।

    बयान: आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने केवल लाइक और फॉलोअर्स बढ़ाने की लालच में यह काम किया था, उसे अंदाजा नहीं था कि वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं पाएगा।

    पुलिसिया कार्रवाई: आईटी एक्ट की धाराओं में केस दर्ज
    गया पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की:

    साइबर सर्विलांस: सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की निगरानी कर रही टीम ने आईपी एड्रेस और लोकेशन के आधार पर आरोपी को ट्रेस किया।

    गिरफ्तारी: फतेहपुर पुलिस ने दबिश देकर विकास कुमार यादव को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब उसके मोबाइल और कंप्यूटर की जांच कर रही है ताकि यह पता चल सके कि उसने और किन हस्तियों को निशाना बनाया है।

    निष्कर्ष
    “एआई तकनीक का यह दुरुपयोग समाज के लिए एक नया और खतरनाक खतरा बन गया है। महज कुछ लाइक पाने की चाह में किसी की प्रतिष्ठा को सरेराह नीलाम करने की कोशिश करने वाला यह अपराधी अब जेल की सलाखों के पीछे है। यह मामला उन सभी के लिए चेतावनी है जो सोशल मीडिया को अपनी मनमानी का जरिया समझते हैं।”

  • दरोगा भर्ती परीक्षा विवाद: ‘पंडित’ विकल्प पर राजनीति, सीएम योगी ने जताई नाराजगी

    दरोगा भर्ती परीक्षा विवाद: ‘पंडित’ विकल्प पर राजनीति, सीएम योगी ने जताई नाराजगी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में विकल्प में ‘पंडित’ दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को पूछे गए सवाल में पूछा गया था कि “अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?” इसके विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ थे। सवाल सामने आते ही विरोध शुरू हो गया, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय में।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि जाति, धर्म या किसी समाज के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में नियमों का पालन किया जाए और बार-बार गलती करने वालों पर प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

    विवाद के बाद पुलिस भर्ती बोर्ड ने रविवार सुबह निर्देश जारी किया। इसमें कहा गया कि एग्जाम सेंटर में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों से कलावा, मंगलसूत्र आदि न उतारवाए जाएं, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। इसके बाद दूसरे दिन परीक्षा केंद्रों पर नरमी बरती गई; महिला अभ्यर्थियों से मंगलसूत्र नहीं उतरवाए गए और पुरुषों के कलावा नहीं काटे गए, जबकि सामान्य सुरक्षा उपाय जैसे जूते, बेल्ट और हाथ के कड़े उतारवाए गए।

    इस भर्ती परीक्षा में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1,090 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा दो दिन में पूरी की जा रही है और इसमें कुल 4,543 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। भर्ती के लिए 15,75,760 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें 11,66,386 पुरुष और 4,09,374 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं।

    पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि पुलिस परीक्षाओं के प्रश्नपत्र गोपनीय तरीके से तैयार किए जाते हैं। हजारों प्रश्नों में से कुछ ही चुनकर प्रश्नपत्र में शामिल किए जाते हैं। उन्होंने सवाल के विवाद को गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि ‘पंडित’ का अर्थ विद्वान होता है, जाति विशेष के लिए नहीं। उनका मानना है कि यह मुद्दा केवल ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया।

    भाजपा के तीन ब्राह्मण विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, प्रकाश द्विवेदी और रमेश मिश्र ने भी इस पर सीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। साथ ही, सहारनपुर के पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने भी लिखा कि परीक्षा में विकल्प के इस प्रयोग से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

    ब्राह्मण समाज उत्तर प्रदेश में 9–11 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और कई जिलों में राजनीतिक रूप से प्रभावी भूमिका निभाता है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ब्राह्मण मतदाता चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डालते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ब्राह्मण मतदाता भाजपा के लिए महत्वपूर्ण स्विंग वोटबैंक रहे हैं।

    इस विवाद ने भर्ती परीक्षा में निष्पक्षता, प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक संवेदनशीलता की जरूरत को उजागर किया है। अधिकारियों ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और किसी भी जाति विशेष के प्रति अनुचित टिप्पणी से बचने की अपील की है।

  • गैस सिलेंडर की कमी, कतारों में खड़े उपभोक्ता, रविवार को बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट

    गैस सिलेंडर की कमी, कतारों में खड़े उपभोक्ता, रविवार को बंद रहेंगे बाटलिंग प्लांट

    नई दिल्ली: रायपुर समेत छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में एलपीजी गैस सिलेंडरों की किल्लत बढ़ती जा रही है। तेल कंपनियों ने इस संकट के बीच गैस एजेंसियों को आपूर्ति पर 20 से 25 प्रतिशत तक का कोटा निर्धारित कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब सिलेंडर की आपूर्ति मांग के अनुसार नहीं होगी बल्कि तय कोटे के आधार पर ही होगी। इस स्थिति का असर आम आदमी की रसोई तक सीधे पहुंच रहा है और घरेलू बजट पर दबाव बढ़ गया है।

    सूत्रों के अनुसार, जिन एजेंसियों की मासिक बिक्री औसतन 10,000 सिलेंडर होती थी, उन्हें अब केवल 7,500 सिलेंडर ही उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, कई वितरण केंद्रों पर जहां रोजाना लगभग 2,500 सिलेंडरों की मांग होती है, वहां अब आपूर्ति घटकर महज 500 सिलेंडर तक रह गई है। इस भारी अंतर के कारण उपभोक्ताओं को रिफिल के लिए पांच से सात दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

    राजधानी रायपुर में एलपीजी एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें बन गई हैं। लोग सिलेंडरों के लिए कई घंटों तक इंतजार कर रहे हैं, जिससे रोजमर्रा की घरेलू गतिविधियों पर असर पड़ा है। इस संकट का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति है, जिसका सीधा असर तेल कीमतों और गैस आपूर्ति पर पड़ा है।

    इस बीच स्थिति और गंभीर हो सकती है क्योंकि रविवार को बाटलिंग प्लांट बंद रहेंगे। इससे सिलेंडरों की आपूर्ति और कम हो जाएगी और दबाव और बढ़ने की संभावना है। तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को यह सलाह दे रही हैं कि आपात स्थिति के लिए बचत सिलेंडर का उपयोग करें और गैर-जरूरी सिलेंडर का उपयोग टालें।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक राजनीतिक तनाव के कारण पैदा हुआ है। घरेलू स्तर पर तेल कंपनियां कोटा प्रणाली लागू कर रही हैं ताकि सीमित आपूर्ति को अधिकतम संख्या में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।

    गृहिणियों और आम नागरिकों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। रसोई के रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं और सिलेंडर रिफिल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि सिलेंडर के लिए किसी एक वितरण केंद्र पर लगातार न रहें और अपने नजदीकी एजेंसी से समय-समय पर जानकारी लेते रहें।

    इस संकट से निपटने के लिए प्रशासन और तेल कंपनियां लगातार उपाय कर रही हैं। बैकअप आपूर्ति सुनिश्चित करने और आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन रविवार को बाटलिंग प्लांट बंद रहने से स्थिति अस्थायी रूप से और गंभीर हो जाएगी।

     रायपुर में एलपीजी सिलेंडर संकट उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। तेल कंपनियों द्वारा कोटा लागू करने के बाद भी सिलेंडरों की उपलब्धता सीमित है और घरेलू रसोई के बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं को सतर्क रहने और आपूर्ति की स्थिति के अनुसार योजना बनाने की आवश्यकता है।

  • गाजियाबाद से 6 संदिग्ध जासूस पकड़े, PAK भेजते थे लाइव वीडियो; दिल्ली में लगा रखा था IP सोलर कैमरा

    गाजियाबाद से 6 संदिग्ध जासूस पकड़े, PAK भेजते थे लाइव वीडियो; दिल्ली में लगा रखा था IP सोलर कैमरा

    नई दिल्‍ली। दिल्ली-एनसीआर के संवेदनशील स्थानों के वीडियो और फोटो बनाकर पाकिस्तान भेजने वाले छह संदिग्ध जासूसों को गाजियाबाद के कौशांबी थानाक्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों में एक महिला शामिल है। शनिवार को पकड़े गए ये छह आरोपी देश के खिलाफ बड़ी साजिश रच रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी एक साल में 50 से अधिक वीडियो पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं को भेज चुके हैं।

    पुलिस ने शनिवार सुबह गुप्त सूचना पर भोवापुर तिराहा के पास से मेरठ के परतापुर निवासी सुहेल मलिक, भोवापुर निवासी प्रवीन, राज, शिवा और रितिक को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ के बाद आनंद विहार बॉर्डर से संभल निवासी साने इरम उर्फ महक को पकड़ लिया।
    दिल्ली में आईपी सोलर कैमरे लगा पाक भेजते थे लाइव वीडियो

    आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन मिले हैं। इनमें दिल्ली के रेलवे स्टेशनों और सैन्य ठिकानों के फोटो, वीडियो हैं। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि इन लोगों ने दिल्ली में कुछ स्थान पर आईपी सोलर कैमरे भी लगा रखे थे और वहां की लाइव वीडियो पाकिस्तान भेजते थे। सूत्रों के अनुसार, अभी तक दिल्ली में सिर्फ एक स्थान पर ऐसे कैमरे के बारे में आरोपियों ने बताया है। इसकी सूचना दिल्ली पुलिस को दे दी गई है। आगे की जांच में पता चलेगा कि और कितनी जगहों पर आरोपियों ने ऐसे कैमरे लगाए थे।
    पाकिस्तान से आई डिमांड पर आरोपी संबंधित जगह जाकर फोटो-वीडियो बनाकर भेजते थे। लोकेशन के हिसाब से इन्हें पांच से आठ हजार रुपये तक एक जगह के मिलते थे। आरोपियों के मोबाइलों से पुलिस को अब तक एक ही पाकिस्तानी नंबर मिला है। जांच में सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल से पाकिस्तान में बैठे सरगना के संपर्क में थे। बातचीत सिर्फ वॉट्सऐप चैट के जरिये होती थी। पाकिस्तान में बैठा मास्टरमाइंड गिरोह से जुड़ने वाले हर सदस्य से सीधे संपर्क में रहता था। वह सभी से अलग-अलग स्थानों के फोटो और वीडियो की मांग करता था और आरोपी उसका आदेश को पूरा करते थे। हालांकि, अब तक की जांच में सुहेल के खाते में ही पाकिस्तान से रकम भेजने की बात सामने आई है। बाकी आरोपियों के बैंक खातों की जानकारी भी जल्द पुलिस को मिलेगी। शनिवार शाम सभी आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने सभी को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है।
    दिल्ली के कई स्थानों पर थी नजर

    मोबाइल से दिल्ली स्थित आनंद विहार रेलवे स्टेशन, दिल्ली कैंटोनमेंट, बीएसएफ व सीआरपीएफ के मुख्यालय समेत कई संवेदनशील स्थानों के फोटो-वीडियो मिले हैं। इन्हें पाकिस्तानी नंबर पर भेजा गया है। आरोपियों के मोबाइल से 20 से अधिक स्थानों के 50 वीडियो और इससे भी अधिक फोटो मिले हैं। सभी वीडियो और फोटो दिल्ली में ही अलग-अलग संवेदनशील स्थानों के हैं। पुलिस इन चैट और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आशंका है कि दिल्ली में घटना को अंजाम देने साजिश की जा रही थी। दिल्ली में बीते साल लाल किला के पास हुए धमाके से भी इसे जोड़कर देखा जा रहा है।
    सुहेल-इरम मिलने आते थे

    मेरठ में रहने वाले गिरोह का सरगना सुहेल बिजनौर के नरगढ़ी का मूल निवासी है। राज वाल्मीकि औरैया कोतवाली क्षेत्र, शिवा बदायूं के उझियानी और रितिक शाहजहांपुर के कटरा का है। सुहेल और इरम के अलावा बाकी चारों भोवापुर में किराये के मकान में रहते थे। चारों साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियों में कर्मचारी के पद पर काम करते थे। कानून-व्यवस्था एवं यातायात के एडिशनल सीपी राजकरन नैय्यर ने बताया कि सभी छह आरोपियों के मोबाइल से पाकिस्तानी नंबर पर बातचीत और संवेदनशील ठिकानों के फोटो और वीडियो मिले हैं। आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच की जा रही है।
    नाहल में पकड़े गए आरोपियों से भी संबंध होने की आशंका

    गाजियाबाद के नाहल क्षेत्र से एटीएस ने भी छह संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। आशंका है कि इनका एटीएस द्वारा पकड़े गए आरोपियों से भी संपर्क था। हालांकि, अभी तक पुलिस जांच में यह तथ्य नहीं आया है। नाहल के किसी भी आरोपी या उनसे जुड़े पाकिस्तानी नंबर पुलिस को आरोपियों के फोन से नहीं मिले। आरोपियों के सभी आठ मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे तभी पता चल पाएगा कि आरोपी कब से पाकिस्तान के संपर्क में थे।
    गिरोह में कुछ और युवतियां शामिल

    सुहेल के बाद इरम गिरोह में दूसरे नंबर पर थी। दोनों समय-समय पर मेरठ और संभल से आकर चारों से मिलते थे। इरम मुख्य रूप से गिरोह में शामिल करने के लिए युवाओं को चिह्नित कर उनसे संपर्क करती थी। शुरुआत में कंटेंट के लिए फोटो व वीडियो के लिए बात करते। पहली बार आरोपियों को रुपये मिल जाते, जिसके बाद वे सवाल पूछे बिना आरोपियों की कही बात मानते रहते थे। अंदेशा है कि गिरोह में कुछ और युवतियां भी शामिल हो सकती हैं।
    एजेंसियों ने पूछताछ की

    आरोपियों के पकड़े जाते ही इसकी सूचना खुफिया एजेंसियों को दी गई। तुरंत एटीएस और आईबी के साथ स्थानीय खुफिया इकाई पहुंची और आरोपियों से लंबी पूछताछ की। सभी के बयान दर्ज किए गए। पाकिस्तान में कितने लोगों से संपर्क हैं, कितने समय से काम कर रहे हैं, गिरोह में कितने लोग, कहां-कहां के शामिल हैं। फोटो-वीडियो क्यों मंगाए गए, क्या साजिश है, इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ के बाद खुफिया टीम कौशांबी थाने से लौट गई।
    स्थानीय लोगों की सजगता से पकड़े गए

    आरोपी दिल्ली के अलावा आसपास के इलाकों के भी फोटो और वीडियो बनाते थे। आरोपियों ने पड़ोसियों को बताया था कि इसके लिए रुपये मिलते हैं और वे रुपयों का लालच देकर अन्य लोगों को भी इससे जोड़ने के प्रयास में थे। आसपास के लोगों को इनकी गतिविधि पर शक हुआ और इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस के मुताबिक स्थानीय लोगों की सजगता से बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है।

  • मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अल्लू सिरिश-नयनिका रेड्डी से की मुलाकात, नवविवाहित जोड़े को दी हार्दिक शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अल्लू सिरिश-नयनिका रेड्डी से की मुलाकात, नवविवाहित जोड़े को दी हार्दिक शुभकामनाएं


    नई दिल्ली:साउथ फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता अल्लू सिरिश और उनकी लॉन्गटाइम गर्लफ्रेंड नयनिका रेड्डी की शादी की खुशियों के बीच हाल ही में एक और खास मौका आया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने नवविवाहित जोड़े से मुलाकात की और उन्हें वैवाहिक जीवन के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस मुलाकात की तस्वीरें अल्लू सिरिश ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा की और मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

    अल्लू सिरिश ने इंस्टाग्राम पर तस्वीरों के साथ लिखा कि यह उनके लिए बहुत बड़ा सम्मान और यादगार पल था। उन्होंने आगे कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू एक ऐसे नेता हैं जिनकी वह बहुत इज्जत करते हैं। मुख्यमंत्री उनके घर आए और शादी के लिए उन्हें और नयनिका को शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के साथ एक घंटे की बातचीत में उन्हें कई नई बातें सीखने का मौका मिला।

    अल्लू सिरिश और नयनिका रेड्डी ने 6 मार्च 2026 को हैदराबाद में अपने करीबी दोस्तों और परिवार के बीच एक निजी समारोह में शादी की थी। इस खास अवसर पर साउथ फिल्म इंडस्ट्री और राजनीति की कई हस्तियां भी शामिल हुईं। इनमें चिरंजीवी, राम चरण, सूर्या, पवन कल्याण, और राशी खन्ना प्रमुख थे। इसके अलावा तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी इस शादी में उपस्थित रहे।

    इस शादी को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी उत्साह देखा गया। अल्लू सिरिश और नयनिका रेड्डी के फैंस ने भी अपने-अपने तरीके से नवविवाहित जोड़े को बधाई दी। अल्लू सिरिश ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए फैंस का धन्यवाद भी किया। उन्होंने लिखा कि इस खास दिन को और भी यादगार बनाने में उनके परिवार और दोस्तों ने बड़ी भूमिका निभाई।

    मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के साथ मुलाकात का यह पल अल्लू सिरिश के लिए बेहद खास रहा। उन्होंने बताया कि इस मुलाकात ने उन्हें न केवल प्रेरित किया बल्कि कई नई बातें सीखने का अवसर भी दिया। उन्होंने कहा कि एक नेता के साथ सीधे बातचीत करना और उनके अनुभव सुनना उनके लिए एक सम्मान की बात थी।

    अल्लू सिरिश साउथ फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता अल्लू अर्जुन के छोटे भाई हैं। उनके फिल्मी करियर और निजी जीवन दोनों ही फैंस के बीच काफी चर्चा में रहते हैं। वहीं नयनिका रेड्डी लंबे समय से अल्लू सिरिश के साथ हैं और उनकी शादी ने दोनों के फैंस के बीच काफी उत्साह पैदा किया।

    इस मुलाकात के साथ ही नवविवाहित जोड़े की खुशी और बढ़ गई है। फैंस अब उनके आने वाले पलों और अपडेट्स का इंतजार कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में जोड़े की खुशी साफ दिखाई दे रही है और मुख्यमंत्री का आशीर्वाद इस खास दिन को और भी यादगार बना गया है।