Category: National

  • 100 कुत्तों को दिया जहरीला इंजेक्शन और फिर नदी किनारे दफनाया, तेलंगाना से आई दिल दहला देने वाली घटना; जांच में जुटे अधिकारी

    100 कुत्तों को दिया जहरीला इंजेक्शन और फिर नदी किनारे दफनाया, तेलंगाना से आई दिल दहला देने वाली घटना; जांच में जुटे अधिकारी

    नई दिल्ली /तेलंगाना के मनचेरिल जिले से पशु क्रूरता की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जिले के एक गांव में करीब 100 आवारा कुत्तों को बेरहमी से जहर देकर मार डाला गया और बाद में उनके शवों को पास की ही एक नदी के किनारे दफना दिया गया। इस सामूहिक कत्लेआम का खुलासा तब हुआ जब ‘स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ नामक एनजीओ के कार्यकर्ता ए. गौतम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह पूरी बर्बरता गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के इशारे पर की गई है, जिन्होंने दो लोगों को काम पर रखकर कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन लगवाए।

    पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरपंच और पंचायत सचिव के खिलाफ ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ और ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि तेलंगाना में आवारा कुत्तों के साथ इस तरह की हिंसा पहली बार नहीं हुई है। आधिकारिक आंकड़ों और कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी और पिछले साल दिसंबर के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 1,300 आवारा कुत्तों को मारा गया है। इन घटनाओं में भी कई जगह स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों के शामिल होने की आशंका जताई गई थी।

    इस सामूहिक हत्या के पीछे एक राजनीतिक एंगल भी सामने आ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि पिछले वर्ष दिसंबर में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान कई प्रत्याशियों ने गांवों को आवारा कुत्तों की समस्या से मुक्त करने का वादा किया था। इसी तथाकथित ‘चुनावी वादे’ को पूरा करने के लिए बेजुबान जानवरों को मौत के घाट उतारने का खौफनाक रास्ता चुना गया। कार्यकर्ता ए. गौतम का कहना है कि समस्या का समाधान नसबंदी और टीकाकरण है, न कि इस तरह का क्रूर हत्याकांड। फिलहाल पुलिस खुदाई कर दफनाए गए अवशेषों की जांच करने और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने में लगी है।

    यह मामला एक बार फिर उस राष्ट्रव्यापी बहस को हवा दे रहा है जिसमें समाज दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। जहां पशु प्रेमी और कार्यकर्ता इन बेजुबानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग आवारा कुत्तों को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में यह मामला अदालतों तक भी पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में इन्हें सड़कों से हटाने की अर्जी से लेकर कोर्ट के स्टे तक, कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन तेलंगाना की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जागरूकता के अभाव में क्रूरता किस हद तक जा सकती है।

  • 500 किमी की अविरल-निर्मल यमुना यात्रा का समापन, जल संरक्षण का दिया संदेश

    500 किमी की अविरल-निर्मल यमुना यात्रा का समापन, जल संरक्षण का दिया संदेश

    जालौन । बुंदेलखंड की जल सहेलियों द्वारा यमुना नदी को अविरल और निर्मल बनाने के संकल्प के साथ निकाली गई लगभग 500 किलोमीटर लंबी अविरल निर्मल यमुना यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह पदयात्रा नदी संरक्षण और जल जागरूकता का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी जिसमें बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया।

    सोमवार को जालौन में आयोजित भेंट वार्ता के दौरान जन जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि यह पदयात्रा 29 जनवरी को पंचनद धाम से शुरू हुई थी। यह स्थान क्षेत्र का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है।स्थल है जहां से जल सहेलियों ने यमुना नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने का संकल्प लेकर यात्रा प्रारंभ की थी।

    उन्होंने बताया कि यह यात्रा कई जिलों और सैकड़ों गांवों से होकर गुजरी। पदयात्रा के दौरान लोगों को जल संरक्षण नदी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। यात्रा के माध्यम से ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि नदियों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी से ही संभव है।

    करीब डेढ़ महीने तक चली इस पदयात्रा का समापन अंततः दिल्ली में स्थित वासुदेव घाट पर हुआ। यहां यात्रा से जुड़े लोगों ने यमुना नदी की स्वच्छता और संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।

    आयोजकों के अनुसार इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि यमुना जैसी जीवनदायिनी नदी को प्रदूषण से बचाने और उसकी अविरल धारा बनाए रखने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर सभाएं संवाद कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए।

    बुंदेलखंड क्षेत्र की जल सहेलियों द्वारा की गई इस पहल को स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिला और इसे नदी संरक्षण के लिए जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की जयंती, गडकरी, योगी और अन्य नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    देश के पहले सीडीएस जनरल बिपिन रावत की जयंती, गडकरी, योगी और अन्य नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

    नई दिल्ली : भारत अपने पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) पद्म विभूषण जनरल बिपिन रावत को उनकी जयंती पर याद कर रहा है। देशभर के नेता और अधिकारी इस अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

    केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, देश के प्रथम रक्षा प्रमुख पद्म विभूषण जनरल बिपिन रावत की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन।

    केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा, “जनरल बिपिन रावत ने अपना पूरा जीवन देश की रक्षा को मजबूत करने और सशस्त्र बलों के बीच तालमेल बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया। उनका दूरदर्शी नेतृत्व और देशभक्ति पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

    केंद्रीय राज्य मंत्री और उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लिखा, देश के प्रथम चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद्म विभूषण जनरल बिपिन रावत की जयंती पर सादर नमन। उन्होंने अपने जीवन का प्रत्येक क्षण देश की आन-बान-शान और सेनाओं को मजबूत करने में लगाया।

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा,मां भारती के वीर सपूत, देश के प्रथम सीडीएस और ‘पद्म विभूषण’ जनरल बिपिन रावत की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्र की सुरक्षा और सैन्य सुदृढ़ता में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उन्हें याद करते हुए कहा, “अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक जनरल बिपिन रावत की जयंती पर उन्हें कोटिशः नमन। राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनका समर्पण हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिखा, जनरल बिपिन रावत जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन। अदम्य साहस और अद्वितीय सैन्य कौशल के प्रतीक के रूप में उन्होंने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण में अतुलनीय योगदान दिया।

    दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति आपका समर्पण, साहस और अदम्य नेतृत्व सदैव हम सभी को प्रेरित करता रहेगा।

    बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी लिखा, राष्ट्र की रक्षा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा, अद्भुत नेतृत्व क्षमता और साहसिक व्यक्तित्व हर भारतवासी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। देश सेवा में उनके अमूल्य योगदान और बलिदान को देश सदैव गर्व के साथ याद रखेगा।

    देशभर के नेताओं की यह श्रद्धांजलि न केवल जनरल बिपिन रावत के साहस और नेतृत्व को याद करती है बल्कि भारतीय सेना और राष्ट्र सेवा में उनके योगदान को भी सम्मानित करती है।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता का चौका या कमल का कमाल? घुसपैठ और एसआईआर के मुद्दों के बीच दिलचस्प जंग

    पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता का चौका या कमल का कमाल? घुसपैठ और एसआईआर के मुद्दों के बीच दिलचस्प जंग


    कोलकाता। West Bengal में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी माहौल गर्म हो गया है। पिछली बार आठ चरणों में हुए मतदान के विपरीत इस बार केवल दो चरणों में चुनाव होने की संभावना ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचेगी या Bharatiya Janata Party पहली बार सत्ता का दरवाजा खोल पाएगी।

    मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पहले से ही सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। भाजपा कानून-व्यवस्था, घुसपैठ और 15 साल की कथित एंटी-इन्कम्बेंसी को बड़ा मुद्दा बनाकर मैदान में उतरी है, जबकि ममता बनर्जी मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में जुटी हैं। राज्य में मुस्लिम आबादी करीब 28 प्रतिशत मानी जाती है, जो चुनावी समीकरण में अहम भूमिका निभाती है।

    भाजपा की नजर सत्ता पर

    तीन देशों—Bhutan, Nepal और Bangladesh—से घिरे इस राज्य में भाजपा पिछले ढाई दशक से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। पिछले चुनाव में पार्टी ने Communist Party of India (Marxist) सहित वाम दलों और Indian National Congress को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था, लेकिन सरकार बनाने का सपना अधूरा रह गया।
    इस बार भाजपा ने घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है। साथ ही पिछले चुनाव से सबक लेते हुए पार्टी ने दलबदल कर आए नेताओं की जगह पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट देने की रणनीति अपनाई है।

    36 सीटों पर कांटे की टक्कर

    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पिछले चुनाव में करीब 36 सीटों पर जीत का अंतर 5,000 वोट से भी कम था। कई सीटों पर तो हार-जीत कुछ सौ वोटों से तय हुई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि इन सीटों पर थोड़ा सा भी वोटों का झुकाव बदला तो सत्ता का गणित पूरी तरह बदल सकता है।

    उत्तर बंगाल और जंगलमहल पर फोकस

    भाजपा खासतौर पर उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। Cooch Behar, Alipurduar, Jalpaiguri और Darjeeling जैसे जिलों में पिछले चुनाव में उसे अच्छी सफलता मिली थी।
    वहीं ममता बनर्जी की सरकार महिलाओं, किसानों और गरीब वर्ग के लिए चलाई गई कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मैदान में अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रही है।

    मुस्लिम वोट बैंक पर नजर

    मुस्लिम वोट बैंक बंगाल की राजनीति में निर्णायक माना जाता है। इसे साधे रखने के लिए ममता बनर्जी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क और संसद तक विरोध जताना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
    दूसरी ओर, भाजपा आदिवासी, मतुआ और महिला मतदाताओं को एकजुट कर पिछली बार के लगभग सात प्रतिशत वोट अंतर को कम करने की कोशिश में है। राज्य में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari भी घुसपैठ के मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।

    नए समीकरण भी बना सकते हैं असर

    इस बार मुस्लिम वोटों के नए समीकरण पर भी सबकी नजर है। मुर्शिदाबाद क्षेत्र में Humayun Kabir की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी, Asaduddin Owaisi की All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (एआईएमआईएम) और Abbas Siddiqui की Indian Secular Front (आईएसएफ) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि यह समीकरण तृणमूल के लिए कुछ इलाकों में चुनौती बन सकता है।

    राष्ट्रीय राजनीति पर भी नजर

    विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तृणमूल अपना किला बचा पाएगी या भाजपा पहली बार बंगाल की सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होगी।

  • बेंगलुरु कैफे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ का सनसनीखेज बिल, लेमनेड पर भी 5% अतिरिक्त शुल्क, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

    बेंगलुरु कैफे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ का सनसनीखेज बिल, लेमनेड पर भी 5% अतिरिक्त शुल्क, सोशल मीडिया पर मचा बवाल



    नई दिल्ली। बेंगलुरु के थियो कैफे का एक बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने लोगों का ध्यान रेस्टोरेंट बिलिंग प्रैक्टिस और बढ़ती लागत की तरफ खींचा है। इस बिल में दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज जोड़ा गया, जो ग्राहकों के लिए चौंकाने वाला रहा। ग्राहक ने दो मिंट लेमनेड ऑर्डर किए, जिनकी कीमत 179 रुपये प्रत्येक थी। कुल सबटोटल 358 रुपये बनी, जिसमें पहले 5% डिस्काउंट (17.90 रुपये) लागू किया गया। इसके बाद स्टैंडर्ड GST (CGST 2.5% + SGST 2.5%) जोड़ा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिल में अतिरिक्त 5% गैस क्राइसिस चार्ज (17.01 रुपये) भी शामिल किया गया, जिससे अंतिम बिल 374 रुपये तक पहुंच गया।

    सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
    सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बिल पर जमकर मज़ाक उड़ाया। कई ने टिप्पणी की कि “लेमनेड बनाने में कौन सी गैस लगी?” और “शायद लेमनेड को फिज़्जी बनाया गया होगा।” कुछ ने इसे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक प्रथा बताते हुए चेताया कि यदि ऐसे चार्ज अनिवार्य हैं, तो 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अन्य यूजर्स ने कहा कि यदि यह वैकल्पिक होता, तो ग्राहक इसे समझ सकते थे, लेकिन अनिवार्य चार्ज अधिकारहीन और अनुचित माना जा रहा है।

    पृष्ठभूमि: LPG संकट और बढ़ती लागत
    देश के कई हिस्सों में LPG सिलेंडर की कमी ने रेस्टोरेंट्स और कैफे की लागत बढ़ा दी है। बेंगलुरु में भी कई स्थानों पर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे होटल और कैफे ग्राहकों से अलग से गैस चार्ज वसूल रहे हैं। हालांकि लेमनेड जैसी ड्रिंक आमतौर पर गैस पर नहीं बनाई जाती, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कुछ कैफे ने गैस क्राइसिस चार्ज लागू किया।

    मिश्रित प्रतिक्रिया और बहस
    कुछ लोगों ने कैफे का समर्थन किया, कहा कि गैस की कमी में यह समझदारी भरा कदम हो सकता है। वहीं, अधिकांश यूजर्स ने इसे ग्राहक हित और पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सोशल मीडिया पर यह घटना कंज्यूमर राइट्स, बिलिंग पारदर्शिता, महंगाई और व्यवसाय की चुनौतियों पर बहस छेड़ने का कारण बनी है।

    बेंगलुरु के थियो कैफे ने दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज लगाया।

    बिल की कुल राशि 374 रुपये तक पहुंची, जिसमें डिस्काउंट और GST शामिल हैं।

    सोशल मीडिया पर इसे अनुचित व्यापारिक प्रथा और मज़ाक बताया गया।

    बढ़ती LPG कमी और लागत ने रेस्टोरेंट्स को नए चार्ज लगाने पर मजबूर किया।

    घटना ने कंज्यूमर राइट्स और बिलिंग पारदर्शिता पर बहस को जन्म दिया।

    इस तरह, बेंगलुरु की यह घटना दिखाती है कि महंगाई, गैस संकट और सप्लाई चेन की चुनौतियाँ आम ग्राहकों तक कैसे सीधे असर डाल रही हैं, और व्यवसायों को अपने बिलिंग मॉडल में बदलाव करने पर मजबूर कर रही हैं।

  • EC ने चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव बदले

    EC ने चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव बदले


    कोलकाता।
    विधानसभा चुनाव (Assembly Elections.) की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal ) के मुख्य सचिव (Bengal Chief Secretary) और गृह सचिव (Home Secretary) को बदलने का फैसला किया है। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद रविवार रात आयोग ने यह आदेश जारी किया। आयोग के निर्देश के अनुसार राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब दुष्यंत नारियावाला को नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है।


    हटाए जा सकते हैं डीपीपी और सीपी भी

    इस बीच, सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी हटाए जा सकते हैं। चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इस दौरान चुनाव आयोग को प्रशासनिक स्तर पर कई विशेष अधिकार मिल जाते हैं। आयोग जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक पदों पर तैनात अफसरों के तबादले या बदलाव का आदेश दे सकता है।

    पिछले चुनावों में भी आयोग ने कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों को बदला था। कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित कई वरिष्ठ पदों पर भी चुनाव से पहले तबादले के उदाहरण मिलते रहे हैं। हालांकि इस स्तर के शीर्ष पदों पर बदलाव हाल के वर्षों में बहुत कम देखने को मिला है।


    दुश्यंत नरियाला बने नए मुख्य सचिव

    नए मुख्य सचिव बनाए गए दुश्यंत नारियावाला वर्ष 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह राज्य सरकार के उत्तर बंगाल विकास विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली है। अतिरिक्त प्रभार के रूप में वह पहले सिंचाई विभाग का कामकाज भी देख चुके हैं। अब नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटाकर आयोग ने दुष्यंत नारियावाला को ही राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। चुनाव आयोग ने उन्हें सोमवार दोपहर तीन बजे तक अपना पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है।


    संघमित्रा घोष को मिली गृह सचिव की जिम्मेदारी

    वहीं राज्य के नए गृह सचिव के रूप में संघमित्रा घोष को नियुक्त किया गया है। गृह विभाग चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए यह पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।


    23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा मतदान

    गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव की तारीखों का एलान रविवार (15 मार्च) को चुनाव आयोग ने कर दिया। निर्वाचन आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चरणबद्ध तरीके से अधिसूचना जारी होने से लेकर नामांकन दाखिल करने और मतदान की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख जारी कर दी। इसके मुताबिक, बंगाल में इस बार सिर्फ दो चरणों में ही चुनाव कराया जाएगा। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को राज्य में मतदान होगा। वहीं, चार मई को मतगणना तय की गई है।

    चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को जारी की जाएगी, जबकि दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी। पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय की गई है, वहीं दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल तक नामांकन किया जा सकेगा। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच क्रमशः 7 अप्रैल और 10 अप्रैल को होगी। वहीं उम्मीदवार पहले चरण के लिए 9 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।


    आदर्श आचार संहिता क्या है?

    आदर्श आचार संहिता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए निर्धारित किए गए मानकों का एक ऐसा समूह है जिसे राजनैतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों का आयोजन चुनाव आयोग का सांविधानिक कर्तव्य है।


    आदर्श आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहती है?

    चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है। लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे देश में, जबकि विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे राज्य में लागू होती है।

  • यूपी में LPG गैस की किल्लत का असर, 250 छोटे उद्योग बंद, 40% स्ट्रीट फूड ठेले ठप

    यूपी में LPG गैस की किल्लत का असर, 250 छोटे उद्योग बंद, 40% स्ट्रीट फूड ठेले ठप



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में लखनऊ समेत कई जिलों में एलपीजी गैस की किल्लत का असर साफ दिख रहा है। घरेलू सिलेंडरों के लिए गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं, जबकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति न होने से छोटे और मझोले उद्योग बंद होने की कगार पर हैं। स्ट्रीट फूड दुकानों का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा बंद हो गया है और गैस आधारित उद्योगों की उत्पादन क्षमता भी प्रभावित हुई है।

    घरेलू गैस संकट

    लखनऊ में कई दिनों से लोग सिलेंडर बुक कराने के बाद भी गैस प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। मोबाइल बुकिंग से भी सिलेंडर नहीं मिल रहा। जिनके पास सिर्फ एक सिलेंडर बचा है, उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

    उद्योगों और स्ट्रीट फूड पर असर

    करीब 250 छोटे उद्योग पूरी तरह बंद हो गए हैं। प्लास्टिक, पैकेजिंग और दवा उद्योग भी प्रभावित हुए हैं। ब्रज मंडल के स्कूलों में अब मिड-डे मील लकड़ी के चूल्हों पर बनाना पड़ रहा है। फिरोजाबाद में बंद होने वाले चूड़ी कारखानों की संख्या 90 से बढ़कर 112 हो गई। एटा और कासगंज में सिलेंडर के लिए लंबी कतारें लगी रहीं।

    वाराणसी और पूर्वांचल में औद्योगिक क्षेत्रों में गैस संकट के कारण लगभग 30 प्रतिशत उत्पादन ठप रहा। पैकेजिंग इकाइयों में एक सप्ताह से उत्पादन रुक चुका है। रेलवे स्टेशनों के बेस किचन, फूड प्लाजा और जन-आहार संचालन के लिए भी सिलेंडर की आपूर्ति जरूरी हो गई।

    प्रशासन की कार्रवाई और सुरक्षा

    जौनपुर में एक एजेंसी पर तोड़फोड़ की कोशिश की गई, बलिया में गैस गोदाम के मैनेजर को धमकी दी गई। मुरादाबाद में एजेंसी पर छापेमारी की गई और अमरोहा में चार दिन गैस न मिलने पर गजरौला मार्ग पर जाम लग गया। हमीरपुर में जिला पूर्ति विभाग ने सुमेरपुर ब्लॉक में छापेमारी कर चार जगहों से 18 सिलेंडर जब्त किए।

    होटल-रेस्टोरेंट भी प्रभावित

    गोरखपुर में कमर्शियल सिलेंडर की कमी से होटल और रेस्टोरेंट संचालक कोयला, लकड़ी और डीजल भट्ठी का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद 87 एजेंसियों ने 25,000 से अधिक उपभोक्ताओं को सिलेंडर उपलब्ध कराया।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया

    एलपीजी संकट को लेकर सपा और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोला है। सपा सांसद डिंपल यादव ने कहा कि नोटबंदी के बाद अब सिलेंडरों के लिए भी मारामारी हो रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि सिलेंडरों की कमी से कोविड-जैसे हालात बन रहे हैं और कारोबार प्रभावित हो रहा है।

  • बिहार राज्यसभा चुनाव: पटना में रातभर ‘होटल पॉलिटिक्स’, 4 कांग्रेस विधायक नॉट रीचेबल

    बिहार राज्यसभा चुनाव: पटना में रातभर ‘होटल पॉलिटिक्स’, 4 कांग्रेस विधायक नॉट रीचेबल


    नई दिल्ली। बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदान से पहले पटना के होटल पनाश में महागठबंधन के विधायकों को एकत्रित किया गया, जहां कांग्रेस के चार विधायकों के पहुंचने का देर रात तक इंतजार होता रहा। सूत्रों के मुताबिक इन चार विधायकों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिससे राजनीतिक हलकों में सस्पेंस की स्थिति बन गई है।

    बिहार विधानसभा में कांग्रेस के छह विधायक हैं। इनमें से अभी तक केवल दो विधायक किशनगंज से कमरूल होदा और चनपटिया से अभिषेक रंजन ही होटल पनाश पहुंचे हैं। कमरूल होदा ने दावा किया कि बाकी चार विधायक भी जल्द पहुंच जाएंगे और कांग्रेस के सभी विधायक महागठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं।

    जिन विधायकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है उनमें मनिहारी से मनोहर सिंह, फारबिसगंज से मनोज विश्वास, अररिया सदर से अब्दुर रहमान और वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र कुशवाहा शामिल हैं। महागठबंधन खासकर राजद के नेता इन विधायकों से संपर्क साधने में जुटे हुए हैं।

    राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को एक जगह रोककर रखना महागठबंधन की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, ताकि किसी संभावित क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक दबाव से बचा जा सके। इसी क्रम में राजद नेता तेजस्वी यादव भी होटल पनाश पहुंचे और विधायकों के साथ बैठक की।

    राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने दावा किया कि महागठबंधन के पक्ष में कुल 48 विधायक समर्थन में आ सकते हैं। उन्होंने विपक्ष के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पास कुछ नहीं है, लेकिन बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महागठबंधन का मौजूदा संख्या बल 41 है, जिसे बढ़ाकर 48 तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

    इस बीच पटना के एसएसपी कार्तिकेय कुमार शर्मा ने बताया कि राज्यसभा चुनाव को लेकर प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। उन्होंने कहा कि मतदान प्रक्रिया निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    होटल पनाश में AIMIM के सभी पांच विधायक और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान भी मौजूद हैं, जो इस चुनाव में महागठबंधन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में उनकी भूमिका भी अहम मानी जा रही है।

    आज होगा मतदान
    बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान कराया जा रहा है। वोटिंग सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी और परिणाम भी आज ही घोषित किए जाएंगे।

    इस चुनाव के लिए कुल छह उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था, जिनके नामांकन वैध पाए गए हैं। जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार के दो और रामनाथ ठाकुर के तीन नामांकन सेट दाखिल किए गए हैं, जबकि भाजपा ने नितिन नबीन को उम्मीदवार बनाया है।

    बिहार विधानसभा में कुल 243 विधायक हैं और राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 41 वोट जरूरी होते हैं। वर्तमान स्थिति में एनडीए के पास 202 विधायक हैं, जिससे उसके लिए चार सीटें जीतना आसान माना जा रहा है। वहीं महागठबंधन के पास कुल 41 विधायक हैं, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका राजद की है और वह एक सीट पर मजबूत स्थिति में है।

    हालांकि पांचवीं सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना हुआ है। इस सीट पर AIMIM और BSP जैसे छोटे दलों के विधायकों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। AIMIM के पास 5 और BSP के पास 1 विधायक है, जिससे इस सीट के नतीजे पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

  • दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

    दत्तात्रेय होसबाले बोले- ईरान युद्ध पर भारत का रुख सही, दुनिया में शांति चाहता है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ


    नई दिल्ली। हरियाणा में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कई अहम मुद्दों पर संघ का पक्ष रखा। उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और ईरान को लेकर भारत के रुख पर कहा कि उन्हें विश्वास है कि भारत सरकार देशहित में सही कदम उठा रही है।

    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा दुनिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान संवाद और संतुलित कूटनीति से होना चाहिए।

    पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध जरूरी
    होसबाले ने कहा कि संघ हमेशा पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों पर जोर देता है। उन्होंने बांग्लादेश और नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में शांति और स्थिरता बनी रहना पूरे एशिया के विकास और सुरक्षा के लिए जरूरी है।

    हालांकि उन्होंने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता भी जताई और कहा कि वहां सामाजिक संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

    भारतीयता और हिंदुत्व पर क्या बोले
    होसबाले ने कहा कि भारतीयता और हिंदुत्व को लेकर स्पष्ट समझ होना जरूरी है। उनके अनुसार हिंदुत्व केवल एक विचार या मानसिकता नहीं बल्कि एक जीवनशैली है, जो समाज में समरसता और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करती है।

    संघ में मुस्लिम और महिलाओं की भूमिका
    संघ में सदस्यता को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति संघ से जुड़ सकता है और भगवा ध्वज को प्रणाम कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ में पहले से ही कई मुस्लिम कार्यकर्ता सक्रिय हैं।

    महिलाओं की भागीदारी पर उन्होंने कहा कि शाखा की कार्यप्रणाली में महिलाएं शामिल नहीं होतीं, लेकिन संघ की कई अन्य गतिविधियों और संगठनों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्य कर रही हैं।

    बेसहारा गोवंश पर भी बोले
    बेसहारा गोवंश के मुद्दे पर होसबाले ने कहा कि सरकार और नगर निगम इस दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि गायों को केवल दूध के लिए उपयोगी न समझें, क्योंकि गोबर और गौमूत्र भी कई तरह से उपयोगी होते हैं, इसलिए उन्हें सड़कों पर छोड़ना उचित नहीं है।

    बीजेपी से संबंध पर दिया जवाब
    राजनीति में संघ की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि देश में कई विचारधाराएं हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने संघ की विचारधारा को अपनाया। इसी वजह से संघ से जुड़े कई लोग राजनीति में सक्रिय होकर देशहित के विचारों को आगे बढ़ा रहे हैं।

    हरियाणा में बड़ा RSS केंद्र बनाने की तैयारी
    सभा के दौरान उत्तर भारत में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने के लिए पानीपत (हरियाणा) में बड़ा केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यहां पट्टीकल्याणा स्थित माधव दृष्टि साधना केंद्र को नागपुर स्थित मुख्यालय की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।

    करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इस केंद्र को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यहां से उत्तर भारत के कई राज्यों में संघ के कार्यों को समन्वित किया जा सकेगा।

    तीन दिवसीय सभा की प्रमुख बातें
    RSS की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन के भविष्य की योजनाओं और गतिविधियों पर चर्चा हुई। रिपोर्ट के अनुसार देशभर में संघ की 88,949 शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5,820 अधिक हैं।

    सभा में दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर राज्यों में संगठन विस्तार की रणनीति पर भी चर्चा हुई। साथ ही अगले वर्षों में केरल, तमिलनाडु, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संघ की गतिविधियों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

  • लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया

    लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता और धैर्य की PM मोदी ने की सराहना, बिरला ने कहा- शुक्रिया


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद उनके धैर्य, संयम और निष्पक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि सदन के संचालन के दौरान बिरला ने संसदीय मर्यादा और नियमों का पालन करते हुए संतुलित भूमिका निभाई। इस पत्र पर ओम बिरला ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भी लिखकर कहा कि सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को अस्वीकार करके लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और संसदीय परंपराओं के प्रति स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने बिरला के उस वक्तव्य की भी प्रशंसा की, जिसमें उन्होंने संसदीय इतिहास, अध्यक्ष की जिम्मेदारियों और नियमों की सर्वोच्चता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री ने इसे संतुलित और धैर्यपूर्ण बताया।

    प्रधानमंत्री ने पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान में अंतर होना चाहिए। संसद संवाद, तर्क और विचार-विमर्श का सर्वोच्च मंच है और यहां युवाओं, महिलाओं और सभी वर्गों की आवाज को स्थान मिलना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने बिरला की कार्यशैली और सार्वजनिक जीवन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की भी सराहना की। उन्होंने राजस्थान के कोटा में एयरपोर्ट परियोजना के शिलान्यास में उनकी सक्रिय भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि वह अपने संसदीय क्षेत्र और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाकर काम कर रहे हैं।

    प्रधानमंत्री के पत्र पर ओम बिरला ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी में संसदीय लोकतंत्र के नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह पत्र सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिक मूल्यों का उदाहरण है और सभी सांसदों के लिए प्रेरणादायक है।

    उन्होंने कहा कि आपका यह संदेश दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर संसद, राज्य विधानमंडल तथा स्थानीय निकायों के सभी जनप्रतिनिधियों को प्रेरित करेगा और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों तथा संविधान सभा के सदस्यों द्वारा स्थापित लोकतंत्र के सशक्त नैतिक आधार को और सुदृढ़ करेगा।

    उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया। इसे 50 से अधिक विपक्षी सांसदों का समर्थन प्राप्त था। विपक्ष का आरोप था कि अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही के दौरान पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और विपक्षी सदस्यों को पर्याप्त अवसर नहीं दिया। 11 मार्च को लोकसभा में इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने की। ओम बिरला ने नैतिक आधार पर स्वयं को चर्चा से अलग रखा था। अंत में ध्वनिमत से अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया और सदन स्थगित कर दिया गया। इसके अगले दिन ओम बिरला ने फिर से अध्यक्ष की कुर्सी संभाली और सदन को संबोधित किया।