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  • उत्तराखंड धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल ने दी ब्रेक सरकार को वापस लौटा बिल

    उत्तराखंड धर्मांतरण कानून पर राज्यपाल ने दी ब्रेक सरकार को वापस लौटा बिल


    नई दिल्ली । उत्तराखंड की धामी सरकार ने जबरन धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान रखने वाले संशोधित उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को राज्यपाल को मंजूरी के लिए भेजा था। हालांकि राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह सेनि ने विधेयक को मंजूरी देने के बजाय तकनीकी आधार पर पुनर्विचार के लिए सरकार को लौटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक लोकभवन ने विधेयक के ड्राफ्ट में कुछ तकनीकी गलतियों की वजह से यह कदम उठाया है।

    अब राज्य सरकार के सामने दो विकल्प हैं। पहला सरकार इस विधेयक को अगले विधानसभा सत्र में फिर से पारित कराए या दूसरा राज्यपाल की मंजूरी के बिना अध्यादेश लाकर इसे तत्काल लागू किया जाए। अगर सरकार अध्यादेश लाती है तो यह विधेयक तत्काल प्रभाव से लागू हो सकता है लेकिन विधानसभा में इसे फिर से पारित करना अधिक सुरक्षित रास्ता हो सकता है।

    यह विधेयक उत्तराखंड में जबरन धर्मांतरण पर सजा को और भी कड़ा करता है। इसे पहले 2018 में लागू किया गया था और 2022 में इसमें कुछ संशोधन किए गए थे। 13 अगस्त 2025 को राज्य सरकार ने एक बार फिर इस कानून में बदलाव करते हुए उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता संशोधन विधेयक 2025 को मंजूरी दी थी। इस बिल के तहत धर्मांतरण के मामलों में सजा को और सख्त किया गया है जिससे राज्य में इस पर पूरी तरह से अंकुश लगाने की कोशिश की जा रही है।

    नए विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति छल-बल से धर्मांतरण कराता है तो उसे कड़ी सजा दी जाएगी। पहले यह सजा तीन से 10 साल तक थी जिसे अब बढ़ाकर तीन से 20 साल तक किया गया है। इसके अलावा अगर कोई धर्मांतरण के लिए नाबालिगों का शोषण करता है या महिला को विवाह के झांसे में फंसा कर धर्म परिवर्तन कराता है तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही ऐसे मामलों में जुर्माना भी 10 लाख रुपये तक हो सकता है।

    इसके अलावा अब किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण के मामलों की शिकायत करने का अधिकार होगा जबकि पहले यह केवल खून के रिश्तेदारों तक सीमित था। इस विधेयक में एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि जिलाधिकारी को गैंगस्टर एक्ट के तहत आरोपी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार दिया गया है।

    हालांकि राज्यपाल ने विधेयक को तकनीकी गलतियों के कारण वापस कर दिया है लेकिन यह स्पष्ट है कि धामी सरकार धर्मांतरण के मामलों में कठोर कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस विधेयक को फिर से कैसे पारित करती है और इसे लागू करने के लिए कौन सा रास्ता अपनाती है।

  • दिल्ली में शराब खरीदने का बदलेगा तरीका, मोबाइल ऐप से बुकिंग और पिकअप की सुविधा..

    दिल्ली में शराब खरीदने का बदलेगा तरीका, मोबाइल ऐप से बुकिंग और पिकअप की सुविधा..


    नई दिल्ली /दिल्ली में शराब खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। राजधानी में अक्सर लोगों को अपनी पसंदीदा शराब ढूंढने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर लगाने पड़ते हैं। खासकर वीकेंड त्योहारों या शादी के सीजन में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है। अब इस समस्या का समाधान निकालते हुए दिल्ली आबकारी विभाग ने एक नया मोबाइल ऐप तैयार किया है जिसका नामई-आबकारी दिल्ली रखा गया है। इस ऐप के जरिए शराब खरीदने की प्रक्रिया को न सिर्फ आसान बनाया जाएगा बल्कि इसे ज्यादा पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल भी बनाया जाएगा। विभाग का कहना है कि ऐप फिलहाल ट्रायल मोड में है और जल्द ही इसे आम लोगों के लिए आधिकारिक रूप से लॉन्च किया जाएगा।

    ऐप से मिलेगी शराब की पूरी जानकारी

    ई-आबकारी दिल्ली ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए उपभोक्ता घर बैठे यह जान सकेंगे कि उनकी पसंदीदा शराब किस दुकान पर उपलब्ध है। ऐप पर ब्रैंड का नाम उपलब्ध स्टॉक और संबंधित दुकान की लोकेशन जैसी जानकारी रियल-टाइम में दिखाई जाएगी।अब ग्राहकों को यह जानने के लिए अलग-अलग दुकानों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी कि किसी खास ब्रैंड की बोतल उपलब्ध है या नहीं। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि बेवजह की भागदौड़ भी खत्म होगी।

    प्री-बुकिंग और पिकअप की सुविधा

    इस ऐप में प्री-बुकिंग का विकल्प भी प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत ग्राहक अपनी पसंद की शराब को पहले से बुक कर सकेंगे। बुकिंग के बाद दुकानदार ग्राहक के लिए उस ब्रैंड को एक तय समय तक रिजर्व रखेगा।प्रस्तावित नियमों के अनुसार ग्राहक को बुकिंग के बाद एक घंटे के भीतर दुकान पर पहुंचकर अपना ऑर्डर पिकअप करना होगा। यदि तय समय में ग्राहक नहीं पहुंचता है तो दुकानदार उस शराब को किसी अन्य ग्राहक को बेचने के लिए स्वतंत्र होगा।इस व्यवस्था से दुकानों पर भीड़ कम होगी और स्टॉक मैनेजमेंट भी बेहतर तरीके से हो सकेगा। हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि प्री-बुकिंग पर कोई अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा या नहीं। इस पर अंतिम फैसला ऐप लॉन्च के समय लिया जा सकता है।

    मिलावटी शराब और ओवरचार्जिंग पर लगेगी लगाम

    ई-आबकारी ऐप का एक अहम उद्देश्य मिलावटी शराब और अधिक कीमत वसूलने जैसी शिकायतों पर नियंत्रण करना भी है। ऐप के जरिए उपभोक्ता सीधे आबकारी विभाग तक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।यदि किसी दुकान पर तय कीमत से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं या शराब की गुणवत्ता को लेकर संदेह होता है तो ग्राहक ऐप के माध्यम से तुरंत शिकायत कर सकता है। इसके अलावा शराब की प्रमाणिकता से जुड़ी जानकारी भी ऐप पर उपलब्ध होगी जिससे नकली और मिलावटी शराब पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

    ग्राहकों और दुकानदारों-दोनों को फायदा

    यह ऐप न केवल उपभोक्ताओं के लिए फायदेमंद साबित होगा बल्कि दुकानदारों के लिए भी राहत लेकर आएगा। ग्राहकों को सही जानकारी मिलने से दुकानों पर अनावश्यक भीड़ कम होगी और दुकानदार बेहतर तरीके से अपने स्टॉक का प्रबंधन कर सकेंगे।साथ ही डिजिटल सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर भी नजर रखना आसान होगा।

    कब होगा लॉन्च?

    दिल्ली आबकारी विभाग के अधिकारियों के अनुसार ई-आबकारी दिल्ली ऐप फिलहाल ट्रायल मोड में है। तकनीकी खामियों को दूर करने और फीडबैक लेने के बाद इसे जल्द ही आम जनता के लिए लॉन्च किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में यह ऐप दिल्ली में शराब खरीदने के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा। कुल मिलाकर यह पहल दिल्ली के लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकती है। मोबाइल ऐप के जरिए शराब की जानकारी बुकिंग और शिकायत की सुविधा मिलने से खरीदारी आसान तेज और पारदर्शी हो जाएगी।

  • CM योगी का सख्त संदेश: नकली डीएपी-यूरिया बेचने वालों पर लगेगा NSA, किसानों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त

    CM योगी का सख्त संदेश: नकली डीएपी-यूरिया बेचने वालों पर लगेगा NSA, किसानों से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त


    नई दिल्ली /उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नकली, मिलावटी खाद और उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि डीएपी, यूरिया या किसी भी प्रकार की खाद में मिलावट कर किसानों के साथ धोखा करने वालों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम NSA जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह निर्देश एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए, जिसमें प्रदेश में खाद की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाता किसानों की मेहनत और फसलों के साथ खिलवाड़ करने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है।

    खाद की उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खाद की समुचित उपलब्धता और उसका पारदर्शी वितरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सहकारिता और कृषि विभाग को निर्देश दिए कि वे प्रतिदिन खाद की उपलब्धता और वितरण की समीक्षा करें। मुख्यमंत्री कार्यालय से सभी जिलों की सीधी निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी को तुरंत पकड़ा जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डीएपी, यूरिया और पोटाश केवल निर्धारित सरकारी दरों पर ही किसानों को उपलब्ध कराए जाएं। ओवर रेटिंग, जबरन टैगिंग या खाद के साथ अन्य सामान बेचने जैसी शिकायतें बिल्कुल भी स्वीकार नहीं की जाएंगी।

    औचक निरीक्षण और सख्त जवाबदेही

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और उप जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे खाद की दुकानों, सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों पर नियमित और औचक निरीक्षण करें। यदि किसी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या कालाबाजारी सामने आती है तो तुरंत जिम्मेदार अधिकारियों और दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर खुले रूप से विजिलेंस जांच कराई जाए और दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा दी जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि कृत्रिम खाद संकट पैदा करने या किसानों को गुमराह करने वालों के खिलाफ सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करेगी।

    प्रदेश में खाद की वर्तमान स्थिति

    बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रदेश में खाद की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। बताया गया कि 16 दिसंबर 2025 तक उत्तर प्रदेश में कुल 9.57 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 3.77 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 3.67 लाख मीट्रिक टन एनपीके उपलब्ध है।यूरिया की बात करें तो सहकारी क्षेत्र में 3.79 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 5.78 लाख मीट्रिक टन का भंडार मौजूद है। डीएपी में सहकारी क्षेत्र के पास 1.47 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र के पास 2.30 लाख मीट्रिक टन उपलब्ध है। वहीं एनपीके उर्वरक में सहकारी क्षेत्र में 0.88 लाख मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 2.79 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक है।

    किसानों को न हो कोई परेशानी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि रबी फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है और इस समय गेहूं की फसल में टॉप ड्रेसिंग के लिए यूरिया की सबसे अधिक जरूरत होती है। वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 54,249 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया जा रहा है।उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े और समय पर उन्हें जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

  • प्रदूषण पर चीन की भारत को नसीहत, बीजिंग–दिल्ली की तुलना कर बोला-अनुभव साझा करने को तैयार

    प्रदूषण पर चीन की भारत को नसीहत, बीजिंग–दिल्ली की तुलना कर बोला-अनुभव साझा करने को तैयार

    नई दिल्ली/दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण ने एक बार फिर लोगों की सांसें मुश्किल कर दी हैं। घना स्मॉगजहरीली हवा और बेहद खराब एयर क्वालिटी के बीच अब चीन ने भी इस मुद्दे पर भारत को सलाह दी है। चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने दिल्ली के प्रदूषण को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए न सिर्फ चिंता जताईबल्कि बीजिंग और नई दिल्ली की तुलना करते हुए चीन को एक उदाहरण के तौर पर पेश किया।

    यू जिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि चीन और भारत दोनों ही तेजी से शहरीकरण की प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और इसी कारण प्रदूषण एक साझा चुनौती बन चुका है। उन्होंने बीजिंग और दिल्ली की हवा की गुणवत्ता की तुलना करते हुए तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में बीजिंग का एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI 68 दिखाया गयाजो संतोषजनक श्रेणी में आता हैजबकि दिल्ली का AQI 447 दर्ज किया गयाजिसे गंभीर स्तर माना जाता है।अपने पोस्ट में यू जिंग ने लिखाचीन भी कभी गंभीर स्मॉग से जूझता था। लेकिन पिछले एक दशक में लगातार और सख्त प्रयासों से हमने स्थिति में बड़ा सुधार किया है। आने वाले दिनों में हम अपने अनुभवों को छोटी-छोटी सीरीज के जरिए साझा करेंगे। इस बयान के बाद भारत और चीन के बीच प्रदूषण को लेकर तुलना और चर्चा तेज हो गई है।

    दिल्ली में हालात बेहद गंभीर

    दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति इस समय चिंताजनक बनी हुई है। हवा में PM2.5 और PM10 जैसे खतरनाक कण कई गुना ज्यादा दर्ज किए जा रहे हैं। हालात को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट-CAQM ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान-GRAP का स्टेज-4 लागू कर दिया है। इसके तहत निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोकडीजल वाहनों पर पाबंदीट्रकों की एंट्री पर नियंत्रण और अन्य आपातकालीन कदम उठाए गए हैं। इसके बावजूद लोगों को साफ हवा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

    चीन ने प्रदूषण से निपटने के लिए क्या किया?
    चीन की प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत 2008 के बीजिंग ओलंपिक के दौरान अस्थायी उपायों से हुई थी। इसके बाद 2013 में प्रदूषण को राष्ट्रीय संकट मानते हुए एक व्यापक एक्शन प्लान लागू किया गया।चीन ने कोयला आधारित बिजली संयंत्रों पर निर्भरता कम कीफैक्ट्रियों के लिए सख्त उत्सर्जन मानक लागू किए और पुराने उद्योगों को बंद या अपग्रेड किया। नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दिया गया और इलेक्ट्रिक वाहनों तथा पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया गया। इसके साथ ही बीजिंगतियानजिन और हेबेई जैसे पड़ोसी इलाकों के साथ मिलकर साझा लक्ष्य तय किए गएताकि क्षेत्रीय स्तर पर प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण पर भारी निवेश भी किया। 2013 से 2017 के बीच इस क्षेत्र में खर्च कई गुना बढ़ाजिससे नीतियों को जमीन पर उतारने में मदद मिली।

    चीन को क्या नतीजे मिले?

    इन सख्त कदमों का असर साफ दिखाई दिया। 2013 से 2017 के बीच बीजिंग में PM2.5 का स्तर करीब 35% तक कम हुआ। हालिया आंकड़ों के अनुसारपिछले साल बीजिंग में करीब 290 दिन अच्छी हवा वाले दर्ज किए गएजो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिकचीन ने दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषण कम करने वाले देशों में अहम स्थान बनाया है।

    दिल्ली के लिए क्या सबक?

    चीन का अनुभव बताता है कि प्रदूषण से लड़ने के लिए सख्त नीतियांक्षेत्रीय सहयोगपारदर्शी डेटालगातार फंडिंग और मजबूत अमल जरूरी है। भारत में भी नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम-NCAP चल रहा हैलेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई की जरूरत है।चीन का यह बयान ऐसे समय में आया हैजब दिल्ली के लोग साफ हवा के लिए जूझ रहे हैं। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच पर्यावरण सहयोग की संभावनाओं को भी दिखाता हैहालांकि भारत में इस नसीहत को लेकर राजनीतिक और कूटनीतिक बहस भी तेज हो सकती है।

  • Rajasthan: दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भिड़ंत के बाद पिकअप में लगी आग, 3 लोग जिंदा जले

    Rajasthan: दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर भिड़ंत के बाद पिकअप में लगी आग, 3 लोग जिंदा जले


    अलवर।
    राजस्थान (Rajasthan) के अलवर (Alwar) में दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पर बुधवार तड़के हुए एक भीषण सड़क हादसे (Terrible Road Accident) में 3 लोग जिंदा जलकर मर गए, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति को इलाज के लिए जयपुर रेफर किया गया है। मृतकों की अभी पहचान नहीं सकी है। हादसे की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। हादसे के वक्त मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसा बेहद दर्दनाक था।

    जानकारी के अनुसार, बुधवार तड़के दिल्ली से जयपुर की और जा रही एक पिकअप गाड़ी दूसरे वाहन से जा टकराई। इसके बाद देखते ही देखते पिकअप में आग लग गई। गाड़ी में बैठे लोगों को निकालने का प्रयास किया गया लेकिन सब बेकार गया। पिकअप गाड़ी में सवार तीनों लोग जिंदा जल गए। भीषण सड़क हादसे में पिकअप ड्राइवर भी गम्भीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया है।

    रैणी पुलिस ने तीनों शवों को रैणी अस्पताल की मोर्चरी मे रखवाया दिया है। मृतकों की अभी पहचान नहीं हो पाई है। पिकअप गाड़ी दिल्ली से जयपुर जा रही थी। यह हादसा रैणी थाना क्षेत्र के दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे के चैनल नंबर 131 पर हुआ।

    धू-धू कर जली पिकअप गाड़ी
    दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेसवे पर हुई जबर्दस्त टक्कर के बाद पिकअप गाड़ी धू-धू कर जलती रही। उसमें सवार तीनों लोगों अपनी जान बचाने का मौका तक नहीं मिला। टक्कर के बाद पिकअप गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह से छतिग्रस्त हो गया था, जिसके कारण गाड़ी में सवार तीनों लोग बुरी तरह से फंस गए थे और बाहर नहीं निकल पाए। वहीं पुलिस मृतकों के बारे के जानकारी जुटा रही है कि वो कहां के रहने वाले थे ओर कहां जा रहे थे।

  • सीमा हैदर का वायरल वीडियो: जान से खतरे का दावा, सरकार दे रही सुरक्षा, सोशल मीडिया पर बंटे रिएक्शन्स

    सीमा हैदर का वायरल वीडियो: जान से खतरे का दावा, सरकार दे रही सुरक्षा, सोशल मीडिया पर बंटे रिएक्शन्स


    नई दिल्ली
    /पाकिस्तान से भारत आकर सचिन मीणा से शादी करने वाली सीमा हैदर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह जान से मारने की धमकियों का आरोप लगा रही हैं। वीडियो में सीमा कहती हैं कि उन्हें और उनके बच्चों को लगातार खतरे की चेतावनी मिल रही है लेकिन सरकार और सुरक्षा की वजह से वह सुरक्षित हैं।

    इंस्टाग्राम पर @seema-sachin10 अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में सीमा एक व्यक्ति के साथ बैठी दिखाई देती हैं। वह स्पष्ट करती हैं कि उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा सरकार के सहयोग से बनी हुई है। उन्होंने कहा, अगर आज मैं सुरक्षित हूं तो इसके पीछे सरकार की भूमिका अहम है। कुछ लोग हमें डराने की कोशिश करते हैं, लेकिन हम किसी दबाव में नहीं आएंगे।इस बयान ने सोशल मीडिया पर चर्चा को तेज कर दिया है।

    सीएम योगी की तारीफ में नहीं कंजूसी

    वीडियो में सीमा हैदर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी खुलकर तारीफ करती नजर आती हैं। वह कहती हैं कि उनके घर में योगी जी की कई तस्वीरें लगी हैं और वह उन्हें एक सच्चा, खरा और निर्भीक नेता मानती हैं। सीमा का यह भी कहना है कि योगी जी बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों के लोगों के लिए काम करते हैं और किसी से डरते नहीं हैं। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।



    सोशल मीडिया पर मिली मिली प्रतिक्रियाएँ

    सीमा का यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स के अलग-अलग रिएक्शन देखने को मिले। कुछ लोगों ने सीमा और सचिन की जोड़ी की सराहना की और उनकी सुरक्षा के लिए सरकार की भूमिका की तारीफ की। वहीं, कई यूजर्स ने उनकी नागरिकता और पाकिस्तान से जुड़े अतीत पर सवाल उठाए। कुछ ने तंज कसा कि कानून बदलते ही उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाएगा, जबकि कुछ ने आरोप लगाया कि सीमा सुरक्षा की बात आने पर बचने की कोशिश कर रही हैं।

    इस वायरल वीडियो ने सीमा हैदर को फिर विवादों के केंद्र में ला दिया है। उनके समर्थन और विरोध दोनों ही वर्ग सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। वीडियो ने राजनीतिक सामाजिक और व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ी बहस को भी गति दी है। विशेष रूप से, वीडियो ने यह संदेश दिया कि सीमा हैदर अपने परिवार की सुरक्षा और अपने अधिकारों के लिए सरकार पर भरोसा कर रही हैं जबकि सोशल मीडिया पर अलग-अलग दृष्टिकोण और प्रतिक्रिया सामने आई है।

  • टेस्‍ट खबर – Embed Code

    टेस्‍ट खबर – Embed Code

    श्रमवीरों की मेहनत से ही विकास की मजबूत नींव रखी जाती है। उनके कल्याण के लिए राज्य सरकार ने ‘श्रमणा’ पहल शुरू की है और नए श्रम कानूनों को प्राथमिकता से लागू किया जा रहा है। आज मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल) योजना के तहत 7,227 श्रमिक भाई-बहनों के खातों में ₹160 करोड़ की अनुग्रह सहायता राशि अंतरित की।
    यशस्वी प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का धन्यवाद, जिन्होंने श्रमिकों के लिए ₹5 लाख तक आयुष्मान बीमा को इस योजना में जोड़ा है। गर्भवती बहनों को काम पर न जाना पड़े, इसके लिए ₹16,000 की आर्थिक राशि देने का भी प्लान है।

  • NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल

    NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल


    नई दिल्ली । चर्चित जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मामले में अपनी चार्जशीट दायर की है जिसमें सात आरोपियों का नाम शामिल है। इन आरोपियों में प्रमुख पाकिस्तानी आतंकवादी साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकवादी संगठनों का नाम भी शामिल है जो पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। चार्जशीट में यह बताया गया है कि पाकिस्तान से इस हमले की साजिश रची गई और इसमें लश्कर और TRF की भूमिका अहम रही। एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों ने धर्म आधारित टार्गेट हत्याएं की थीं और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय था।

    एनआईए द्वारा दायर 1597 पन्नों की चार्जशीट में पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी शामिल हैं जिनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। इन तीन आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षा बलों ने जुलाई में श्रीनगर के दाचीगाम में ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया था।

    कौन है साजिद जट्ट

    चार्जशीट में लश्कर के टॉप कमांडर साजिद जट्ट को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। उनका पूरा नाम सैफुल्लाह साजिद जट्ट है और वह पाकिस्तान के पंजाब राज्य के कसूर जिले का रहने वाला है। साजिद जट्ट लश्कर-ए-तैयबा का तीसरा सबसे बड़ा कमांडर माना जाता है और हाफिज सईद के बाद वह इस संगठन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक हैं।

    साजिद जट्ट को द रेजिस्टेंस फ्रंट का चीफ भी बताया जाता है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है। TRF ने ही पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था। भारत सरकार ने साल 2023 में TRF को यूएपीए के तहत बैन कर दिया था। एनआईए ने साजिद जट्ट पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।

    चार्जशीट में साजिद जट्ट के अलावा अन्य चार आतंकवादियों पर भी आरोप लगाए गए हैं जिनमें भारतीय न्याय संहिता शस्त्र अधिनियम 1959 और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम 1967 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों को आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में 22 जून को एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

    एनआईए ने अपनी जांच में यह पुष्टि की कि दोनों स्थानीय कश्मीरी आरोपियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान की और यह भी बताया कि ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इसके अलावा एनआईए ने पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है।

    इस चार्जशीट से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय सीमा में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित कर रहा है और ऐसे आतंकवादियों की मदद करने में स्थानीय कश्मीरी भी शामिल हो रहे हैं। एनआईए की यह कार्रवाई इस बात को भी उजागर करती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है।

  • उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल क्या है? जानिए इससे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा और क्यों मचा है सियासी विवाद

    उच्च शिक्षा अधिष्ठान बिल क्या है? जानिए इससे शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा और क्यों मचा है सियासी विवाद


    नई दिल्ली/केंद्र सरकार ने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए लोकसभा में ‘विकसित भारत शिक्षा बिल 2025’ पेश किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा लाया गया यह बिल उच्च शिक्षा के लिए एक नए उच्च शिक्षा अधिष्ठान Higher Education Authority के गठन का प्रस्ताव करता है। सरकार का दावा है कि इससे देश की कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रणाली अधिक पारदर्शी, गुणवत्ता-आधारित और छात्र-केंद्रित बनेगी, जबकि विपक्ष और शिक्षा विशेषज्ञ इसे संस्थानों की स्वायत्तता पर खतरा बता रहे हैं। इस प्रस्तावित कानून के तहत एक केंद्रीय आयोग बनाया जाएगा, जिसे देश की पूरी उच्च शिक्षा व्यवस्था की निगरानी का अधिकार होगा। इस आयोग को मुख्य रूप से यह तय करने की जिम्मेदारी दी जाएगी कि कॉलेज और विश्वविद्यालय किस स्तर की पढ़ाई करा रहे हैं, वे नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं और उन्हें कितनी शैक्षणिक स्वतंत्रता दी जानी चाहिए।

    आयोग की संरचना कैसी होगी?
    प्रस्तावित अधिष्ठान में एक अध्यक्ष, एक वरिष्ठ शिक्षाविद या विषय विशेषज्ञ, केंद्र सरकार का प्रतिनिधि और एक सचिव शामिल होंगे। इसके अलावा, आयोग के अंतर्गत तीन अलग-अलग परिषदें बनाई जाएंगी ताकि नियमन, मान्यता और मानक तय करने के काम आपस में टकराएं नहीं।

    तीन परिषदों की भूमिका क्या होगी?

    पहली है नियामक परिषद Regulatory Council । यह परिषद कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के संचालन पर नजर रखेगी। यह सुनिश्चित करेगी कि संस्थान शिक्षा को केवल मुनाफे का जरिया न बनाएं, फंड का सही इस्तेमाल हो और छात्रों व शिक्षकों की शिकायतों का समाधान समय पर हो।

    दूसरी है मान्यता परिषद Accreditation Council । इसका काम यह तय करना होगा कि कौन-सा संस्थान तय शैक्षणिक मानकों पर खरा उतरता है। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मान्यता देना या वापस लेना इसी परिषद की जिम्मेदारी होगी। मान्यता से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक की जाएंगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    तीसरी है मानक परिषद Standards Council। यह परिषद पढ़ाई के स्तर, सिलेबस, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम और शिक्षकों की योग्यता से जुड़े मानक तय करेगी। इसका मकसद यह होगा कि छात्रों को एक संस्थान से दूसरे संस्थान में जाने में दिक्कत न हो और शिक्षा की गुणवत्ता समान बनी रहे।

    किन संस्थानों पर लागू होगा यह कानून?

    यह बिल सभी केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों, डीम्ड यूनिवर्सिटी, IIT, NIT, कॉलेजों, ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि मेडिकल, कानून, फार्मेसी और नर्सिंग जैसे पेशेवर कोर्स सीधे इस कानून के दायरे में नहीं आएंगे, लेकिन उन्हें भी नए शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा।

    केंद्र सरकार की भूमिका क्या होगी?
    केंद्र सरकार इस अधिष्ठान को दिशा-निर्देश दे सकेगी, प्रमुख पदों पर नियुक्तियां करेगी और विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में काम करने की मंजूरी देगी। जरूरत पड़ने पर आयोग या उसकी परिषदों को भंग करने का अधिकार भी सरकार के पास रहेगा। साथ ही, आयोग को हर साल संसद और ऑडिट के सामने जवाबदेह होना होगा।

    इससे क्या बदलाव और फायदे होंगे?
    सरकार का दावा है कि इससे उच्च शिक्षा अधिक छात्र-केंद्रित बनेगी, नए कॉलेज और कोर्स खोलना आसान होगा और रोजगार से जुड़ी स्किल्स पर जोर दिया जाएगा। शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी और छोटे संस्थानों को भी गुणवत्ता सुधार का मौका मिलेगा।

    लेकिन विवाद क्यों है?

    आलोचकों का कहना है कि यह बिल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कमजोर कर सकता है। उन्हें डर है कि शिक्षा पर केंद्र सरकार का नियंत्रण बढ़ेगा और अकादमिक फैसलों में शिक्षकों व छात्रों की भूमिका घट जाएगी। यह भी आशंका जताई जा रही है कि ग्रामीण और छोटे कॉलेज सख्त नियमों का पालन नहीं कर पाएंगे और बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।

    विपक्ष की आपत्ति क्या है?
    कांग्रेस, टीएमसी और वाम दलों ने इस बिल का विरोध किया है। उनका कहना है कि इतना बड़ा शिक्षा सुधार वाला बिल बिना पर्याप्त चर्चा के पेश किया गया। विपक्षी सांसदों ने इसे संयुक्त संसदीय समिति JPC को भेजने की मांग की थी, जिसे सरकार ने स्वीकार कर लिया है। अब इस बिल पर विस्तृत जांच और चर्चा होगी।

  • कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम  बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है

    कांग्रेस में अनबन की अटकलों पर शशि थरूर का विराम बोले मेरी तरफ से सब कुछ बिल्कुल ठीक है


    नई दिल्ली । कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और आंतरिक खींचतान को लेकर चल रही अटकलों के बीच वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से लोकसभा सांसद शशि थरूर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि पार्टी के साथ उनके रिश्ते पूरी तरह सामान्य हैं। हाल ही में दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस की रैली में उनकी गैरमौजूदगी और कुछ अहम बैठकों में शामिल न होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

    इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने चर्चित समाचार एजेंसी  से बातचीत में साफ कहा कि उनकी तरफ से किसी भी तरह की नाराजगी या असंतोष नहीं है। रैली में शामिल न हो पाने के सवाल पर उन्होंने कहा मैं जरूर अटेंड करता क्यों नहीं करता? लेकिन उस दिन मैं विदेश में था। यह कार्यक्रम मैंने करीब छह महीने पहले तय किया था। थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी गैरहाजिरी को पार्टी से दूरी या असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

    जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक है तो थरूर ने दो टूक जवाब दिया बिल्कुल ठीक है। मुझे यह कहने की जरूरत क्यों पड़े? मेरी तरफ से सब कुछ ठीक है। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व के प्रति भरोसे और प्रतिबद्धता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

    इस बीच सोशल मीडिया मंच ‘एक्स पर एक यूजर द्वारा किए गए विश्लेषण ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा बटोरी। यूजर ने अपने लंबे पोस्ट में शशि थरूर और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के बीच कथित वैचारिक विरोधाभास की बात कही थी। पोस्ट में यह तर्क दिया गया था कि यह विरोधाभास दरअसल कांग्रेस पार्टी के भीतर मौजूद दो अलग-अलग वैचारिक प्रवृत्तियों को दर्शाता है।

    यूजर के अनुसार समस्या थरूर और राहुल गांधी के सह-अस्तित्व में नहीं है बल्कि कांग्रेस की उस अक्षमता में है जिसमें पार्टी अलग-अलग विचारधाराओं को चुनने एकजुट करने और उन्हें व्यवस्थित तरीके से लागू करने में सफल नहीं हो पा रही है। इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए शशि थरूर ने इसे विचारशील विश्लेषण करार दिया।

    थरूर ने लिखा इस विचारशील विश्लेषण के लिए धन्यवाद। कांग्रेस पार्टी में हमेशा एक से अधिक प्रवृत्तियां रही हैं। आपका आकलन निष्पक्ष है और वर्तमान वास्तविकता की एक निश्चित धारणा को प्रतिबिंबित करता है। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वे पार्टी के भीतर वैचारिक विविधता को एक स्वाभाविक और ऐतिहासिक प्रक्रिया मानते हैं न कि टकराव का कारण।

    गौरतलब है कि इससे पहले राहुल गांधी की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस सांसदों की एक अहम बैठक में भी शशि थरूर शामिल नहीं हुए थे। इस पर भी सवाल उठे थे। हालांकि चर्चित सूत्रों के हवाले से बताया कि थरूर ने बैठक में शामिल न हो पाने की जानकारी पहले ही पार्टी को दे दी थी। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय वह कोलकाता में प्रभा खैतान फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मौजूद थे।

    कुल मिलाकर शशि थरूर के हालिया बयानों और स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच किसी बड़े टकराव की बात फिलहाल केवल अटकलों तक सीमित है। थरूर ने न सिर्फ अपनी गैरहाजिरी के कारण गिनाए बल्कि यह भी जताया कि पार्टी के भीतर विभिन्न विचारधाराओं का होना कांग्रेस की परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में उनके बयान कांग्रेस के भीतर एकता और संवाद के महत्व को रेखांकित करते हैं।