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  • 'घुटनों के बल पर लागू करेगी बीजेपी', यूजीसी बिल को लेकर पल्लवी पटेल ने सरकार को दी चुनौती

    'घुटनों के बल पर लागू करेगी बीजेपी', यूजीसी बिल को लेकर पल्लवी पटेल ने सरकार को दी चुनौती

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा में यूजीसी बिल को लेकर अपना दल कमेरावादी पार्टी नेता और सिराथू सीट से विधायक पल्लवी ने भारतीय जनता पार्टी पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने जानबूझकर यूजीसी बिल को कोर्ट के दांवपेंच में फंसा दिया है. लेकिन, एक दिन यहीं सरकार घुटनों पर आकर इसे लागू करेगी.
    पल्लवी पटेल ने राज्यपाल के अभिभाषण पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी से पूछना चाहती हूं कि आपकी दृष्टि बदलाव, सुधार और रिफॉर्म क्या है? क्या आपकी नजर मे रिफॉर्म सिर्फ आंकड़ों तक सीमित है या सत्ता प्राप्ति तक सीमित है. क्योंकि, झूठे आंकड़े पेश करके सुधार विकास के दावे करके छवि नहीं सुधार सकते हैं.

    यूजीसी बिल को लेकर सरकार को घेरा
    सिराथू विधायक ने कहा कि जिस बदलाव, सुधार और रिफॉर्म की हम बात कर रहे हैं उसका उद्देश्य है न्याय, समानता और दक्षता है लेकिन, बीजेपी की सरकार ने इस विचार के उद्देश्य की धज्जियां उड़ा दी है.

    उन्होंने कहा कि अगर ऐसा नहीं है तो क्या कारण था कि देश के उच्च संस्थानों में समानता के भाव को उजागर करने के लिए जिस यूजीसी एक्ट 2026 को संसदीय समिति की संस्तुति के बाद और कोर्ट के निर्देशानुसार लाया गया क्यों आपने उसे लाकर पिछड़ा वंचित समाज को खुश होने का अवसर दिया और फिर सोची समझी रणनीति के तहत सड़कों पर तनाव पैदा करने का काम किया. इसके बाद इसे न्यायपालिका के पेचीदा घुमाव में फंसा दिया.

    भारतीय जनता पार्टी पर उठाए सवाल
    पल्लवी पटेल ने सवाल किया आपको ये करके क्या मिला? यूजीसी समानता अधिनियम के लागू होने के बाद यहां सालों से चले आ रहे वंचित और अगड़ा समाज की खाई को पाटा जा सकता था लेकिन आपने इस खाई को और गहरा कर दिया. ये तो वहीं बात हुई चित भी अपनी और पट भी अपनी.

    जितना सवाल आज इस सरकार पर उठ रहा है उतना है सवाल आज हम जन प्रतिनिधियों पर भी उठ रहा है. क्योंकि वंचित समाज आज उच्च शिक्षा और सम्मान के लिए अपने जनप्रतिनिधियों की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहा है. ये हम सबकी जिम्मेदारी है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस पर चर्चा की जाए..

    ‘घुटनों पर आकर लागू करेगी सरकार’
    उन्होंने रामधारी सिंह दिनकर की कविता पढ़ते हुए कहा कि ‘जो तटस्थ है समय लिख देगा उसका भी अपराध..’ पल्लवी ने कहा कि मैं भविष्य वक्ता तो नहीं लेकिन याद रखिए जिस बीजेपी सरकार ने इस यूजीसी बिल को कोर्ट में फंसाकर का काम किया वहीं घुटनों पर आकर इस बिल को लागू करेगी. बीजेपी का हर कदम रिफॉर्म नहीं होता है.

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  • फिच रिपोर्ट: भारत इस साल भी बना रहेगा एशिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था… 6.4% रहेगी रफ्तार

    फिच रिपोर्ट: भारत इस साल भी बना रहेगा एशिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्था… 6.4% रहेगी रफ्तार


    नई दिल्ली।
    फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत (India) 2026 में एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था (Asia’s Fastest-Growing Major Economy) बना रहेगा। एजेंसी को उम्मीद है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2026 में 6.4 प्रतिशत की दर से विस्तार करेगी, जो फिलीपींस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे क्षेत्रीय देशों से आगे होगी।

    फिच ने कहा कि भारत, इंडोनेशिया और फिलीपींस की इकनॉमिक ग्रोथ पर ट्रेड पैटर्न में बदलाव का फिलहाल कम असर पड़ेगा, क्योंकि ये अपेक्षाकृत बंद अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनका मैन्यूफैक्चरिंग एक्सपोर्ट्स कम है। भारत अमेरिकी टैरिफ के जोखिम को कम करने के लिए कई व्यापार समझौतों के जरिए अमेरिका के अलावा दूसरे देशों के साथ अपने व्यापार संबंध बढ़ा रहा है। हाल ही में उसने यूरोपीय संघ के साथ भी समझौता किया है।

    पिछले दो महीनों में भारत ने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ सौदे किए हैं। अमेरिका के साथ यह समझौता 6 फरवरी को घोषित किया गया था। रेटिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि अमेरिकी टैरिफ का वास्तविक असर अभी स्पष्ट नहीं है।


    नीति और वित्तीय सुधार: मजबूत बुनियाद की ओर

    नीतिगत मोर्चे पर फिच का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा। दिसंबर में दर में कटौती के बाद अब RBI नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बनाए रख सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाई है और बजट में अधिक खर्च मदों को शामिल किया है। वहीं, तेज वृद्धि और वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू होने से राजस्व भी मजबूत हुआ है, जिससे मध्यम अवधि में सरकारी कर्ज में मामूली गिरावट की संभावना बढ़ी है। हालांकि, एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि कर्ज का जीडीपी अनुपात अभी भी उच्च स्तर पर बने रहने का अनुमान है।

    7.3 ट्रिलियन का सपना: कैसे बदल रही है इंडियन इकनॉमी
    भारत का इकनॉमिक ग्रोथ लगातार दुनिया का ध्यान खींच रहा है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, देश 2030 तक 7.3 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विकास की यह रफ्तार निर्णायक नीति-निर्माण, संरचनात्मक सुधारों और वैश्विक स्तर पर बढ़ते एकीकरण की मजबूती को दर्शाती है।

    तेज वृद्धि के साथ भारत ने एक बार फिर वैश्विक साथियों को पीछे छोड़ दिया है। यह उछाल मजबूत घरेलू मांग, नियंत्रित महंगाई और बढ़ती श्रम भागीदारी पर टिकी है। घरेलू निवेश में आई तेजी और निवेशकों के मजबूत विश्वास से स्थिर और व्यापक आधार वाली अर्थव्यवस्था की झलक मिलती है।


    जीडीपी आंकड़े: तेज छलांग का सबूत

    कुछ दिन पहले पीआईबी पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में मुद्रास्फीति-समायोजित वास्तविक जीडीपी 8.2% बढ़ने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह 5.6% थी। वहीं, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8% की दर से बढ़ी, जो पिछले साल की समान तिमाही में 6.5% थी। सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) के आंकड़े भी बताते हैं कि दूसरी तिमाही में प्राथमिक क्षेत्र में 3.1%, द्वितीयक क्षेत्र में 8.1% और सेवा क्षेत्र में 9.2% की वृद्धि दर्ज की गई।


    पहली छमाही में 8% की रफ्तार

    वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में वास्तविक जीडीपी 8% की दर से बढ़ी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 6.1% थी। इस दौरान प्राथमिक क्षेत्र में 2.9% की मध्यम वृद्धि हुई, जबकि द्वितीयक (7.6%) और तृतीयक क्षेत्र (9.3%) ने लगातार शानदार विस्तार किया।

  • रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीदी करेगा भारत… DAC ने दी मंजूरी…

    रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीदी करेगा भारत… DAC ने दी मंजूरी…


    नई दिल्ली।
    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रूस (Russia) से 288 S-400 मिसाइलों (S-400 Missiles) की खरीद को आवश्यक स्वीकृति (AoN) प्रदान कर दी है। इन मिसाइलों की अनुमानित लागत 10,000 करोड़ है। यह निर्णय मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor)’ के दौरान इस्तेमाल की गई मिसाइलों के स्टॉक को फिर से भरने और देश की हवाई रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए लिया गया है। सूत्रों के अनुसार, DAC द्वारा मंजूर की गई AoN में 120 छोटी दूरी वाली और 168 लंबी दूरी वाली मिसाइलें शामिल हैं। इन मिसाइलों की खरीद फास्ट ट्रैक प्रोसीजर के माध्यम से की जाएगी।

    इसके अतिरिक्त, भारत को पहले से अनुबंधित दो और S-400 सिस्टम इसी साल जून और नवंबर में मिलने वाले हैं। वायुसेना S-400 के साथ-साथ पैंटसिर छोटी दूरी वाली प्रणाली को खरीदने का प्रस्ताव भी रख रही है, जो ड्रोन और कामिकेज़ ड्रोन से निपटने में प्रभावी है।


    ऑपरेशन सिंदूर में S-400 की भूमिका

    S-400 मिसाइलों का स्टॉक बढ़ाना इसलिए जरूरी समझा गया क्योंकि भारतीय सशस्त्र बलों ने मई 2025 में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इनका व्यापक उपयोग किया था। इन मिसाइलों ने पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों, अर्ली वार्निंग एयरक्राफ्ट और सशस्त्र ड्रोन को मार गिराया था।

    खास बात यह है कि जब भारत ने S-400 मिसाइल का उपयोग करके पाकिस्तान के पंजाब में 314 किमी की दूरी पर एक बड़े विमान को मार गिराया, तो पाकिस्तान ने अपने लगभग सभी ऑपरेशनल विमानों को अफगानिस्तान और ईरान के पास के हवाई अड्डों पर स्थानांतरित कर दिया था। अदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 सिस्टम के डर से 9-10 मई को पाकिस्तानी वायुसेना ने कोई कार्रवाई नहीं की।


    रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया

    भारत की रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए कई चरणों से गुजरती है। ‘स्टेटमेंट ऑफ केस’ से शुरू होकर, यह प्रस्ताव रक्षा खरीद बोर्ड और फिर DAC तक जाता है, जिसके बाद कीमत पर बातचीत होती है। अंतिम मंजूरी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) द्वारा दी जाती है।

    गुरुवार को, रक्षा मंत्री ने कुल ₹3.60 लाख करोड़ से अधिक के विभिन्न प्रस्तावों को AoN दी। इसमें राफेल फाइटर जेट, कॉम्बैट मिसाइल और हाई एल्टीट्यूड स्यूडो-सैटेलाइट की खरीद। अधिकांश लड़ाकू विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। एंटी-टैंक माइन्स (विभव) और टैंकों व लड़ाकू वाहनों (BMP-II) का ओवरहाल। मरीन गैस टर्बाइन-आधारित इलेक्ट्रिक पावर जनरेटर और P-8I लंबी दूरी के समुद्री टोही विमान।

  • PMO का पता बदला… 'तीर्थ भवन परिसर का अनावरण', अब यहीं से चलेगी सरकार

    PMO का पता बदला… 'तीर्थ भवन परिसर का अनावरण', अब यहीं से चलेगी सरकार


    नई दिल्ली।
    दशकों तक केंद्रीय सरकार (Central Government) के अहम फैसलों का गवाह रहा साउथ ब्लॉक (South Block) अब इतिहास बनने जा रहा है। आज यानी शुक्रवार 13 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) नए सरकारी कार्यालयों के एरिया ‘तीर्थ भवन परिसर’ (‘Tirtha Bhavan Complex’) का अनावरण करेंगे। इस एरिया में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय स्थित हैं, जो पहले अलग-अलग भवनों में थे। बाद में प्रधानमंत्री सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन-1 तथा कर्तव्य भवन-2 का औपचारिक उद्घाटन करेंगे और शाम को सेवा तीर्थ में एक जनसभा को संबोधित भी करेंगे।

    प्रधानमंत्री कार्यालय से सामने आई जानकारी के मुताबिक इन भवनों के उद्घाटन से देश की प्रशासनिक शासन संरचना में बदलाव होगा। यह परिसर आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

    आज होने वाले उद्घाटन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने सेवा तीर्थ के उद्घाटन की तारीख को दिल्ली के इतिहास से भी जोड़ा। उन्होंने लिखा, “आज यानी 13 फरवरी 2026 को, स्वतंत्र भारत का इतिहास एक नया मोड़ लेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ब्रिटिश काल के साउथ ब्लॉक से अपने नए पते,सेवातीर्थ में स्थानांतरित हो रहा है। संयोगवश, ठीक इसी दिन 13 फरवरी 1931 को अंग्रेजों ने नई दिल्ली को औपनिवेशिक भारत की राजधानी घोषित किया था। उस औपनिवेशिक घोषणा से लेकर इस निर्णायक परिवर्तन तक का सफर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औपनिवेशिक विरासत को त्यागने और वास्तव में आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी नए भारत के निर्माण के संकल्प को दर्शाता है।”

    आपको बता दें, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत सरकारी कार्यालयों का विकास किया जा रहा था। इस प्रोजेक्ट के पहले यह कार्यालय दशकों तक इस क्षेत्र में कई जगहों पर फैले हुए थे। प्रमुख कार्यालयों के इस फैलाव के कारण संचालन में अक्षमताएं, समन्वय संबंधी चुनौतियां, रखरखाव की बढ़ती लागत और काम करने के लिए अनुपयुक्त वातावरण जैसी समस्याएं उत्पन्न होती थीं, इसी के चलते सरकार ने इन्हें एक जगह पर करने का फैसला लिया।

    कर्तव्य भवन-1 और कर्तव्य भवन-2 में वित्त मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, विधि एवं न्याय मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय सहित कई प्रमुख मंत्रालय स्थित हैं।

    दोनों भवन परिसरों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, सुव्यवस्थित सार्वजनिक संपर्क क्षेत्र और केंद्रीकृत स्वागत सुविधाएं मौजूद हैं। ये सुविधाएं सहयोग, दक्षता, सुचारू संचालन, नागरिकों की बेहतर भागीदारी और कर्मचारियों के कल्याण को बढ़ावा देंगी। चार-स्टार जीआरआईएचए मानकों के अनुसार डिज़ाइन किए गए इन परिसरों में नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियां, जल संरक्षण उपाय, अपशिष्ट प्रबंधन समाधान और उच्च-प्रदर्शन वाली भवन संरचनाएं शामिल हैं। इन उपायों से परिचालन दक्षता बढ़ेगी और पर्यावरणीय प्रभाव को काफी हद तक कम किया जाएगा। भवन परिसरों में स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल सिस्टम, निगरानी नेटवर्क और उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया अवसंरचना जैसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्थाएं भी शामिल हैं, जिनसे अधिकारियों और आगंतुकों के लिए एक सुरक्षित और सुलभ वातावरण सुनिश्चित होगा।

  • महाशिवरात्रि पूजा पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दरगाह कमेटी, CJI ने जताई नाराजगी

    महाशिवरात्रि पूजा पर रोक की मांग लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंची दरगाह कमेटी, CJI ने जताई नाराजगी


    नई दिल्ली । कर्नाटक के कलबुर्गी जिले के आलंद स्थित लाडले मशाइक दरगाह एक बार फिर धार्मिक विवाद के केंद्र में आ गई है। दरगाह कमेटी ने महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रस्तावित पूजा-अर्चना पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कमेटी का कहना है कि दरगाह परिसर में किसी भी तरह की पूजा या निर्माण गतिविधि से उसकी मूल धार्मिक पहचान प्रभावित हो सकती है, इसलिए शीर्ष अदालत हस्तक्षेप करे और यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दे।

    यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया गया। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, दरगाह कमेटी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा ने अदालत से अनुरोध किया कि 15 फरवरी, यानी महाशिवरात्रि से पहले इस याचिका पर त्वरित सुनवाई की जाए। उन्होंने अदालत को बताया कि दरगाह परिसर में शिवरात्रि मनाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई का आश्वासन देने के बजाय इस पर विचार करने की बात कही। साथ ही अदालत ने इस बात पर नाराजगी जताई कि ऐसे मामलों में सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जा रहा है, जबकि पहले संबंधित हाई कोर्ट में जाना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, सब कुछ अनुच्छेद 32 के तहत क्यों आ रहा है? इससे यह धारणा बनती है कि याचिकाएं इसलिए दायर की जा रही हैं क्योंकि कानून सुविधाजनक है। इससे यह संदेश जाता है कि हाई कोर्ट निष्क्रिय हो चुका है। हम इसकी जांच करेंगे।”

    दरअसल, यह विवाद उस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ा है जो 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी, जिन्हें लाडले मशाइक के नाम से जाना जाता है, और 15वीं शताब्दी के हिंदू संत राघव चैतन्य से संबंधित है। दोनों संतों के अवशेष इसी परिसर में बताए जाते हैं। परिसर में राघव चैतन्य शिवलिंग नामक एक संरचना भी मौजूद है। वर्षों से यहां हिंदू श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते रहे हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय दरगाह में अकीदत पेश करता रहा है।

    साल 2022 में यह मामला तब गरमा गया जब कुछ उपद्रवियों द्वारा कथित रूप से शिवलिंग पर आपत्तिजनक कृत्य किए जाने की घटना सामने आई, जिसके बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया। इसके बाद पूजा-अधिकार को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

    फरवरी 2025 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने हिंदू समुदाय के 15 सदस्यों को राघव चैतन्य शिवलिंग पर महाशिवरात्रि के दिन पूजा करने की अनुमति दी थी। यह पूजा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई थी और किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई थी। एक वर्ष पूर्व भी अदालत के आदेश के आधार पर सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को प्रवेश और अनुष्ठान की अनुमति दी गई थी, जो शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई थी।

    अब दरगाह कमेटी की नई याचिका ने इस संवेदनशील मामले को फिर से कानूनी और सामाजिक बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट इस विवाद में क्या रुख अपनाता है और महाशिवरात्रि से पहले क्या कोई अंतरिम आदेश जारी होता है।

  • अलीगढ़ में रिश्तों का अजब मोड़, बेटी की शादी से पहले मां दामाद संग फरार, फिर जीजा के साथ जाने का आरोप

    अलीगढ़ में रिश्तों का अजब मोड़, बेटी की शादी से पहले मां दामाद संग फरार, फिर जीजा के साथ जाने का आरोप


    नई दिल्ली। अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के मडराक क्षेत्र से सामने आया एक पारिवारिक घटनाक्रम रिश्तों की परिभाषा पर सवाल खड़े कर रहा है। जिस घर में बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं वहां अचानक ऐसा मोड़ आया जिसने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया। शादी की तारीख 16 अप्रैल 2025 तय थी। घर में जेवर नकदी और रिश्तेदारों की आवाजाही शुरू हो चुकी थी। उत्साह और खुशियों के माहौल के बीच किसी को अंदाजा नहीं था कि 12 दिन पहले सब कुछ बदल जाएगा।

    परिजनों के अनुसार लड़की की मां अनीता उर्फ अपना देवी की होने वाले दामाद राहुल से नजदीकियां बढ़ने लगीं। दोनों के बीच लगातार फोन पर बातचीत होती रही और धीरे धीरे यह संपर्क कथित रूप से प्रेम संबंध में बदल गया। जब परिवार को इसकी जानकारी हुई तो आपत्ति जताई गई लेकिन बातचीत बंद नहीं हुई।

    आरोप है कि अप्रैल की शुरुआत में अनीता घर से नकदी और जेवर लेकर राहुल के साथ चली गई। परिवार ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों को बरामद कर थाने लाया। चूंकि दोनों बालिग थे इसलिए अनीता ने अपनी मर्जी से राहुल के साथ जाने की बात कही। कानूनी स्थिति को देखते हुए पुलिस ने ज्यादा हस्तक्षेप नहीं किया और दोनों साथ रहने लगे।

    बताया जाता है कि वे बिहार के सीतामढ़ी जिले के एक गांव में जाकर रहने लगे जहां राहुल फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करने लगा। कुछ समय तक मामला शांत नजर आया और परिवार ने भी स्थिति को किसी तरह स्वीकार कर लिया।

    हालांकि घटनाक्रम ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया जब राहुल हाल ही में अलीगढ़ पहुंचा और पुलिस को शिकायत दी कि अनीता अब उसे छोड़कर अपने जीजा देवेंद्र के साथ चली गई है। राहुल का दावा है कि वह लगभग दो लाख रुपये नकद और जेवरात भी साथ ले गई।

    पुलिस का कहना है कि जिस स्थान से महिला के जाने की बात कही जा रही है वह क्षेत्र बिहार में आता है इसलिए वहां की स्थानीय पुलिस को सूचना दी जाएगी। फिलहाल अलीगढ़ पुलिस ने मामले की जानकारी दर्ज कर ली है और तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।

    पूरे घटनाक्रम में कई परतें हैं। पहले बेटी की शादी से पहले मां का होने वाले दामाद के साथ जाना फिर उसके साथ रहना और अब जीजा के साथ जाने का आरोप लगना इस मामले को जटिल बना रहा है। नकदी और जेवर ले जाने के दावे भी जांच के दायरे में हैं।

    फिलहाल पुलिस का कहना है कि सभी पक्षों के बयान और परिस्थितियों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। अलीगढ़ से शुरू हुई यह कहानी अब कई राज्यों तक फैल चुकी है और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। शादी का घर जो खुशियों से भरा था वह अचानक विवाद और कानूनी उलझनों में घिर गया है। आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष पर सभी की नजर टिकी है।

  • 'रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई', CM योगी का त्योहारों को लेकर सख्त आदेश

    'रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई', CM योगी का त्योहारों को लेकर सख्त आदेश

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को होली, महाशिवरात्रि और रमजान सहित विभिन्न त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश करने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्ती से निपटने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने यहां लोक भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रदेश की कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक की.

    बैठक में सभी मंडलों, पुलिस जोन, रेंज और जनपदों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े. एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने कहा कि दो से चार मार्च तक होली का पर्व मनाया जाएगा और ब्रज क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में उत्सव का माहौल रहेगा.

    रंग में भंग डालने वालों के खिलाफ हो कार्रवाई- सीएम योगी

    उन्होंने निर्देश दिए कि शोभायात्राओं में उपद्रवी तत्वों की घुसपैठ किसी भी स्थिति में न होने पाए और रंग में भंग डालने या उन्माद फैलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. सीएम योगी ने कहा कि विगत वर्षों की घटनाओं से सीख लेते हुए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप सतर्कता, निगरानी और प्रबंधन को और मजबूत किया जाए. उन्होंने कहा कि होलिका दहन केवल परंपरागत स्थलों पर ही कराया जाए और सड़क के बीच किसी भी स्थिति में न किया जाए.

    इसके साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वाली पोस्ट पर भी सतत निगरानी रखने के निर्देश दिये गये. मुख्यमंत्री ने महाशिवरात्रि, होली और रमजान के साथ ही माध्यमिक शिक्षा परिषद की बोर्ड परीक्षाओं, जनगणना और अन्य महत्वपूर्ण आयोजनों को देखते हुए शांति, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए.

    कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित- सीएम योगी

    उन्होंने कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की दुर्घटना रोकने के लिए पुलिस व प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा. पुलिस महानिदेशक ने बताया कि संबंधित दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने वाराणसी, मेरठ, लखीमपुर खीरी और बाराबंकी के जिलाधिकारियों से महाशिवरात्रि की तैयारियों की जानकारी ली.

    उन्होंने कहा कि 14 और 15 फरवरी को प्रमुख शिवधामों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे, इसलिए सुगम दर्शन, यातायात, पार्किंग, महिला सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें 24 घंटे सक्रिय रहें. सीएम योगी ने कहा कि मंदिर परिसरों में पर्याप्त महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती भी सुनिश्चित की जाए.

    बोर्ड परीक्षाएं नकलविहीन हों- सीएम योगी

    मुख्यमंत्री ने यातायात जाम के स्थायी समाधान, रात्रि 10 बजे के बाद डीजे व तेज ध्वनि उपकरणों पर पूर्ण प्रतिबंध के कड़ाई से पालन और धर्मस्थलों के आसपास भिक्षावृत्ति पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि 18 फरवरी से शुरू हो रही 10वीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं नकलविहीन हों और परीक्षा की शुचिता से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए.

    किसी नई परंपरा की शुरुआत न हो- सीएम योगी

    सीएम योगी ने रमजान और संभावित रूप से 21 मार्च को ईद के मद्देनजर धर्मगुरुओं से संवाद बनाए रखने और किसी नई परंपरा की शुरुआत न होने देने के निर्देश भी दिए. मुख्यमंत्री ने बताया कि 19 मार्च से नवरात्र और इसके बाद रामनवमी का पर्व आएगा तथा इन सभी आयोजनों की तैयारियां समय से पूरी की जाएं व जनगणना के प्रथम चरण के लिए भी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं.

  • लाडली से लखपति बिटिया: अब नई योजना में दोबारा आवेदन अनिवार्य

    लाडली से लखपति बिटिया: अब नई योजना में दोबारा आवेदन अनिवार्य


    नई दिल्ली । दिल्ली सरकार ने बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। वर्ष 2008 से चल रही लाडली योजना को 31 मार्च 2026 को बंद कर दिया जाएगा और 1 अप्रैल 2026 से उसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना लागू होगी, जिसका उद्देश्य बेटियों को जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक सहायता देना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि नई योजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है और इसे पूरी तरह डिजिटल मोड में लागू किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता और सहजता बनी रहे।

    नई लखपति बिटिया योजना के तहत सरकार बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा तक अलग-अलग शैक्षणिक पड़ावों पर कुल 56,000 रुपये जमा करेगी, जो समय के साथ मिलकर ब्याज सहित 1 लाख रुपये से अधिक हो सकते हैं। यह राशि सीधे बेटी के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। राशि निकासी की शर्तों के अनुसार, यह 18 वर्ष की आयु पूरी होने और 12वीं पास करने पर या 21 वर्ष की आयु में ग्रेजुएशन/डिप्लोमा पूरा करने के बाद की जा सकेगी।

    इस योजना में राशि चरणबद्ध रूप से दी जाएगी। जन्म के समय 11,000 रुपये, कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश पर 5,000-5,000 रुपये, कक्षा 10 पास करने पर 5,000 रुपये, कक्षा 12 में प्रवेश पर 5,000 रुपये और ग्रेजुएशन या डिप्लोमा के दौरान 20,000 रुपये दिए जाएंगे। कुल मिलाकर 56,000 रुपये की सरकारी सहायता बेटियों के खाते में जमा होगी, जो मैच्योरिटी पर बढ़कर करीब एक लाख रुपये बन सकती है।

    योजना का लाभ केवल उन्हीं बेटियों को मिलेगा जिनका जन्म दिल्ली में हुआ है और जिनका परिवार कम से कम तीन साल से राजधानी में रह रहा है। परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए और हर परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही योजना के लिए पात्र होंगी। लाभार्थी को मान्यता प्राप्त संस्थान से पढ़ाई करनी होगी और पूरा टीकाकरण अनिवार्य है। 18 साल से पहले शादी हो जाने पर लाभ निरस्त कर दिया जाएगा; यदि निर्धारित शर्तों पर क्लेम समय पर नहीं किया गया तो राशि सरकार को वापस चली जाएगी।

    सबसे अहम सवाल यह है कि क्या नई योजना में दोबारा आवेदन करना होगा? सरकार ने स्पष्ट कहा है कि लाडली योजना 31 मार्च 2026 को बंद होगी और नई लखपति बिटिया योजना 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगी, इसलिए पात्र लाभार्थियों को इसके लिए अलग से आवेदन करना होगा। आवेदन की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी, जिससे किसी सरकारी दफ्तर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। नई पात्र बेटियों को तय शर्तों के अनुसार आवेदन करना होगा।

    सरकार ने यह भी बताया है कि लाडली योजना के कई खाते मैच्योरिटी के बाद भी क्लेम नहीं किए गए थे। ऐसे लंबित मामलों में भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और बड़ी राशि लाभार्थियों को जारी की जा चुकी है। योजना के लिए शुरुआती तौर पर लगभग 160 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और लाडली योजना की अप्रयुक्त राशि को भी नई लखपति बिटिया योजना में समायोजित किया जाएगा ताकि बेटियों के भविष्य के लिए आर्थिक सहयोग निरंतर जारी रह सके।

  • सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन

    सीएम पद को लेकर कर्नाटक कांग्रेस में बवाल, डीके शिवकुमार को मिल रहा व्यापक समर्थन


    नई दिल्ली। कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर सियासी घमासान खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के विधायक इकबाल हुसैन ने दावा किया कि कांग्रेस के करीब 80 से 90 विधायक उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं। हुसैन ने कहा कि कई विधायक मानते हैं कि शिवकुमार के संघर्ष और मेहनत को सम्मानित करना चाहिए और आने वाले चुनावों की रणनीति के लिहाज से भी यह सही कदम होगा।

    रामनगर में पत्रकारों से बातचीत में हुसैन ने बताया कि सभी 140 विधायक बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं और करीब 80-90 विधायक नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सभी डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह नहीं पता कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ कौन खड़ा है और शिवकुमार के साथ कौन।

    विदेश यात्रा ने बढ़ाई हलचल
    सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले कुछ विधायकों की विदेश यात्रा को गंभीरता से लिया है। पार्टी के कर्नाटक प्रभारी और एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने उन विधायकों के नाम मांगे हैं जो इस यात्रा में शामिल थे। यह यात्रा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को शांत करने के लिए आयोजित की गई मानी जा रही है।

    राज्य पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश ने कहा कि कुछ नेताओं ने उन्हें इस यात्रा में शामिल होने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा उनके मंत्रालय द्वारा आयोजित नहीं की गई थी। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी कहा कि विधायक और एमएलसी अपने खर्च पर विदेश जा रहे हैं।

    दिल्ली में डीके शिवकुमार की बैठक
    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर बैठक की, जो नेतृत्व परिवर्तन की अफवाहों को और मजबूत करती है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा या राहुल गांधी से मुलाकात की, तो शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात की और सभी चर्चा पूरी हो गई।

    शिवकुमार ने यह भी कहा कि वे सड़क पर खड़े होकर राजनीति नहीं कर रहे हैं और सब कुछ पार्टी नेतृत्व के मार्गदर्शन में हो रहा है।

    आगे क्या होगा
    कर्नाटक कांग्रेस में यह घमासान अभी जारी है। 80-90 विधायक डीके शिवकुमार के समर्थन में हैं और पार्टी हाईकमान की बैठकें और विदेश यात्रा इस सियासी समीकरण को और जटिल बना रही हैं। अब नजर यह है कि नेतृत्व परिवर्तन की दिशा में अगला कदम कब और कैसे उठाया जाएगा और क्या डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह संकट राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।

  • अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, BMC को चेतावनी कमिश्नर को घोड़े पर ऑफिस आना पड़ेगा

    अतिक्रमण पर हाईकोर्ट की कड़ी फटकार, BMC को चेतावनी कमिश्नर को घोड़े पर ऑफिस आना पड़ेगा



    नई दिल्ली । मुंबई में सड़क अतिक्रमण की समस्या को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC ब्रॉम्बे म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को कड़ी फटकार लगाई है। पवई के एक स्कूल की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रविंद्र घुघे और न्यायमूर्ति अभय मंत्री की पीठ ने कहा कि शिकायतों के बावजूद अतिक्रमण हटाने में लापरवाही चिंताजनक है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो कमिश्नर को ‘घोड़े पर’ दफ्तर आना पड़ सकता है।

    पवई के हीरानंदानी इलाके की लगभग 90 फीट चौड़ी सड़क पर अतिक्रमण की तस्वीरें कोर्ट में पेश की गईं। अदालत ने देखा कि फुटपाथ पर कई झुग्गियां बन गई हैं जिससे स्कूली बच्चों और आम जनता को चलने-फिरने में भारी परेशानी हो रही है। सड़क की चौड़ाई घटकर लगभग एक लेन रह गई है जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है।

    जस्टिस घुघे ने कहा देखा जाए तो इस सड़क से चार कारें एक साथ गुजर सकती हैं लेकिन अब देखिए क्या हाल हो गया है यह घटकर सिर्फ एक लेन की रह गई है। मुझे तो यह सोचकर हैरानी होती है कि आने वाले सालों में क्या होगा लोगों को मोटरसाइकिल छोड़नी पड़ेगी और साइकिल अपनानी होगी या फिर सबसे अच्छा विकल्प घोड़ा है घोड़ा भीड़-भाड़ में भी अच्छी तरह रास्ता निकाल लेता है। कल्पना कीजिए कि आपके BMC के कमिश्नर घोड़े पर बैठकर अपने ऑफिस आ रहे हैं तो वह कैसे लगेंगे।

    उन्होंने आगे कहा मुंबई को आखिर क्या होता जा रहा है? जैसे ही कोई सड़क बनती है लोग वहां आकर कब्जा जमा लेते हैं देखिए आप अपने ही शहर का क्या हाल कर रहे हैं। इतनी खूबसूरत सड़क है और आपने इसका क्या बना दिया है? हम नगर निगम के प्रमुख कमिश्नर या किसी भी अन्य अधिकारी को कोर्ट बुला सकते हैं और उनसे इस पर जवाब मांग सकते हैं।

    याचिका में आरोप लगाया गया कि अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कई बार शिकायतें और बैठकें की गईं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। साथ ही कहा गया कि कुछ सिविक अथॉरिटीज अतिक्रमण को टैंकर से पानी सप्लाई और टॉयलेट की सुविधा देकर बढ़ावा दे रहे हैं। क्षेत्र में चार स्कूल होने के कारण माता-पिता के आने-जाने से वाहन अधिक होते हैं और अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ जाती है।

    हाईकोर्ट ने BMC की ओर से पेश वकील को निर्देशों के पालन के लिए समय दिया है और कार्रवाई की जानकारी अदालत में देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाया जाए और सड़क को सामान्य रूप से खुला सुनिश्चित किया जाए।