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  • कर्नाटक में गन कल्चर का 'विवादित' शो: कांग्रेस विधायक का पिस्टल संग वीडियो वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच, उठ रहे गंभीर सवाल

    कर्नाटक में गन कल्चर का 'विवादित' शो: कांग्रेस विधायक का पिस्टल संग वीडियो वायरल, पुलिस ने शुरू की जांच, उठ रहे गंभीर सवाल


    नई दिल्ली। डिजिटल युग में ‘रील’ बनाने का शौक अब जनप्रतिनिधियों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। ताजा मामला कर्नाटक के कलबुर्गी जिले से सामने आया है, जहाँ एक पारिवारिक समारोह के दौरान कांग्रेस विधायक मतीन पटेल का कथित तौर पर हथियार लहराते हुए डांस करने का वीडियो चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैली इस रील ने न केवल विधायक की कार्यशैली पर उंगलियां उठाई हैं, बल्कि सार्वजनिक आयोजनों में हथियार प्रदर्शन और बढ़ती गन कल्चर पर भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    सामने आई वायरल वीडियो क्लिप किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगती। इसमें विधायक मतीन पटेल एक चमचमाती काली एसयूवी से टशन में उतरते दिखाई देते हैं। इसके बाद वे फिल्म ‘धुरंधर’ के एक लोकप्रिय गाने पर पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु हाथ में लेकर थिरकते नजर आते हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि वीडियो में उनके पीछे खड़े कुछ समर्थक भी हाथों में बंदूक जैसी वस्तुएं थामे हुए हैं। जैसे ही यह क्लिप इंटरनेट पर आई, नेटिजन्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना आचरण करार देते हुए विधायक की जमकर क्लास लगा दी। लोगों का तर्क है कि एक जनप्रतिनिधि, जिसका काम कानून की रक्षा और समाज को सही दिशा देना है, उसका इस तरह हथियारों का सार्वजनिक प्रदर्शन करना बेहद खतरनाक संदेश देता है।

    मामला जब सियासी गलियारों में गर्म हुआ और चौतरफा घिरने लगे, तो विधायक मतीन पटेल ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने दावा किया कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तु कोई असली हथियार नहीं, बल्कि एक ‘खिलौना बंदूक’ थी। उनके अनुसार, यह पूरी प्रस्तुति एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम का हिस्सा थी, जहाँ उन्होंने बच्चों की जिद पर फिल्म के एक काल्पनिक किरदार की तरह कपड़े पहने और एक्ट किया था। पटेल ने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो को गलत संदर्भ में फैलाकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है और वे इस बारे में पुलिस को अपना पक्ष रख चुके हैं।

    हालांकि, पुलिस इस दलील को आसानी से स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रही है। कलबुर्गी शहर के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए औपचारिक जांच के आदेश दे दिए हैं। पुलिस अब इस बात का वैज्ञानिक सत्यापन कर रही है कि वीडियो में इस्तेमाल हुए हथियार असली थे या वाकई खिलौने। साथ ही, उस स्थान और क्षेत्र की भी शिनाख्त की जा रही है जहाँ यह वीडियो शूट हुआ था।

    पुलिस आयुक्त ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया है कि यदि जांच में हथियार असली पाए जाते हैं, तो उनके लाइसेंस की वैधता और नियमों के उल्लंघन की गहनता से पड़ताल की जाएगी। यदि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या सार्वजनिक सुरक्षा के नियमों की अनदेखी पाई गई, तो संबंधित धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ गई है कि क्या सोशल मीडिया पर चंद लाइक्स और फेम के लिए जनप्रतिनिधियों को अपनी मर्यादा और कानूनी सीमाओं को ताक पर रख देना चाहिए? फिलहाल, सबकी निगाहें पुलिस की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।

  • वंदे मातरम के छह छंद अनिवार्य -जिसने जलाई स्वतंत्रता की ज्वाला, अब उसे मिला औपचारिक सम्मान

    वंदे मातरम के छह छंद अनिवार्य -जिसने जलाई स्वतंत्रता की ज्वाला, अब उसे मिला औपचारिक सम्मान

    नमो मात्रे पृथिव्ये, नमो मात्रे पृथिव्या:।
    माता पृथ्वी (मातृभूमि) को नमस्कार है, मातृभूमि को नमस्कार है।
    भारत की आत्मा में यदि कोई सबसे पवित्र भाव प्रवाहित होता है, तो वह है, मातृभूमि का भाव। यह भाव आज की राजनीति से नहीं, सहस्राब्दियों पुरानी सांस्कृतिक चेतना से जन्मा है। सिंधु घाटी सभ्यता में मातृदेवी की मूर्तियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि हमारे पूर्वज धरती को उर्वरता और जीवनदायिनी शक्ति के रूप में पूजते थे।अथर्ववेद के पृथ्वी सूक्त (12.1.12) में उद्घोष है , माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः। अर्थात-धरती मेरी माता है और मैं पृथ्वी का पुत्र हूँ। यह केवल मंत्र नहीं, भारतीय अस्मिता का मूल स्वर है। यस्यां वेदाः प्रतिष्ठिताः-जिस भूमि पर ज्ञान और संस्कृति प्रतिष्ठित हुई, वह केवल मिट्टी नहीं, चेतना है।

    भारत की हर परंपरा इस भाव की साक्षी है ,निर्माण से पहले भूमि-पूजन, किसान का बोआई से पहले मिट्टी को प्रणाम, गृहप्रवेश से पूर्व भूमि स्पर्श। यह सब बताता है कि जो हमें अन्न, जल और वायु देती है, वह पूज्य है।
    इसी मातृभाव को शब्द दिए बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने, अपने उपन्यास आनंदमठ में। वंदे मातरम् कोई कविता नहीं थी, यह राष्ट्रीय पुनर्जागरण का बिगुल था। 1905 के बंग-भंग आंदोलन में यह स्वदेशी क्रांति का घोष बना। क्रांतिकारी फाँसी के फंदे पर झूलते हुए यही कहते थे , वंदे मातरम्! अरविंद घोष से लेकर भगत सिंह तक, इस गीत ने अनगिनत हृदयों में ज्वाला जलाई। यह जन-जन के कंठ की आवाज बन गया।
    औपनिवेशिक काल में सांप्रदायिक संवेदनशीलता और राजनीतिक संतुलन के कारण गीत के कुछ अंशों को सीमित किया गया। परंतु प्रश्न आज भी वही है-क्या मातृभूमि की वंदना किसी एक पंथ का विषय है? अनेक देशों के राष्ट्रगानों में भूमि और राष्ट्र की स्तुति है। यदि जन्मदात्री माँ का सम्मान स्वाभाविक है, तो धात्री माँ-जो हमें जीवन देती है-उसका सम्मान विवाद क्यों बने?
    दीनदयाल उपाध्याय ने कहा था यदि ‘भारत माता’ में से ‘माता’ निकाल दें, तो ‘भारत’ का अर्थ ही नहीं रह जाता। यह कथन आज और भी प्रासंगिक प्रतीत होता है।
    आज की ऐतिहासिक घोषणा
    केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 वंदे मातरम् के संबंध में स्पष्ट और औपचारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति सम्मान, एकरूपता और गरिमा सुनिश्चित करना बताया गया
    नए दिशा-निर्देश : क्या-क्या अनिवार्य है?
    जब भी राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण का गायन या वादन होगा, सभी उपस्थित व्यक्तियों को सावधान मुद्रा में खड़ा होना होगा। यदि फिल्म, समाचार-फीचर या वृत्तचित्र के हिस्से के रूप में बजाया जाए, तो खड़े होना अनिवार्य नहीं है।
    अब वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाए/बजाए जाएंगे। जिसकी अवधि 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) जो पहले प्रायः केवल पहले दो छंद (लगभग 65 सेकंड) उपयोग में आते थे। यदि किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों हों, तो पहले वंदे मातरम् उसके बाद जन गण मन होगा। वन्दे मातरम का गायन राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर, राष्ट्रपति/राज्यपाल के आगमन-प्रस्थान पर , नागरिक सम्मान समारोह (जैसे पद्म पुरस्कार) , औपचारिक सरकारी कार्यक्रम , विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों में और अन्य सार्वजनिक अवसर (सरकार के निर्देशानुसार) पर होगा। विद्यालयों में शुरुआत सामूहिक राष्ट्रगीत से की जा सकती है। इस हेतु ध्वनि-प्रसारण की उचित व्यवस्था हो। गीत के शब्द प्रतिभागियों में वितरित किए जा सकते हैं। गायन सामूहिक और सम्मानपूर्ण हो।
    वंदे मातरम के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी
    वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह मूल रूप से संस्कृत और बंगाली भाषा के मिश्रण में लिखा गया था। बंकिम चंद्र ने यह गीत हुगली नदी के किनारे, चिनसुरा (Chinsurah) में लिखा था, जो वर्तमान पश्चिम बंगाल में स्थित है। यह माना जाता है कि वंदे मातरम् की कल्पना बंकिम चंद्र को लगभग 1876 के आसपास तब हुई, जब वे ब्रिटिश शासन में जिला अधिकारी (डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर) के पद पर कार्यरत थे। यह गीत बंकिम चंद्र के उपन्यास आनंदमठ (प्रकाशित: 1882) से लिया गया है। गीत लिखे जाने के तुरंत बाद जदुनाथ भट्टाचार्य से इसे संगीतबद्ध (धुन तैयार करने) का अनुरोध किया गया। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे जन गण मन (राष्ट्रीय गान) के साथ समान सम्मान प्रदान करते हुए राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया। 1896 में कलकत्ता (कोलकाता) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में इसे पहली बार सार्वजनिक रूप से गाया गया। यह प्रस्तुति रवीन्द्रनाथ टैगोर ने दी थी।इसका गद्य रूप में अंग्रेज़ी अनुवाद श्री अरविंद ने 20 नवंबर 1909 को अपनी पत्रिका कर्मयोगिन में प्रकाशित किया।
    1896 – पहली सार्वजनिक प्रस्तुति दी गई 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में रवीन्द्रनाथ टैगोर ने वंदे मातरम् को सार्वजनिक रूप से गाया।
    1937 – सीमित उपयोग का निर्णय लिया गया, 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति (कोलकाता/फैजपुर संदर्भ) ने निर्णय लिया कि आधिकारिक कार्यक्रमों में केवल पहले दो छंद गाए जाएँ।
    प्रख्यात शास्त्रीय गायक ओंकारनाथ ठाकुर ने इस सीमित संस्करण का विरोध किया। उन्होंने कांग्रेस अधिवेशन में गाने से इंकार कर दिया, परंतु अपने निजी संगीत समारोहों में पूरा वंदे मातरम् गाना जारी रखा।
    15 अगस्त 1947 – ऐतिहासिक रेडियो प्रसारण इस दिन स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 1947) की सुबह आल इंडिया रेडियो से पंडित ओंकारनाथ ठाकुर ने वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाया।
    प्रसिद्ध गायिका हीराबाई बड़ोदेकर ने इसे राग तिलक कामोद में प्रस्तुत किया (AIR दिल्ली) , दिलीपकुमार रॉय ने इसे ध्रुपद-धमार शैली में गाया। विष्णुपंत पागनीस ने ग्रामोफोन रिकॉर्ड में इसे राग सारंग में प्रस्तुत किया। केशवराव भोले ने इसे राग देशकार में रिकॉर्ड किया।
    वंदे मातरम् भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा रहा है। यह गीत केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि राष्ट्रचेतना का प्रवाह है। नए दिशा-निर्देश इसे संस्थागत सम्मान देने का प्रयास हैं। पर एक मूल प्रश्न भी उठता है क्या अपनी ही धरा-माता के सम्मान के लिए कानून बनाना पड़े? सच यह है कि मातृभूमि का सम्मान हमारा जन्मजात कर्तव्य है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर तौलना उचित नहीं। स्वतंत्रता का अर्थ अनुशासनहीनता नहीं होता। माँ का सम्मान बहस का विषय नहीं, संस्कार का विषय है।
    वंदे मातरम् भारत की आत्मा का स्वर है। वंदे मातरम् केवल गीत नहीं-भारतीयता का चिरंतन स्पंदन है। सिंधु सभ्यता से वेदों तक, स्वतंत्रता संग्राम से आज तक मातृभूमि का सम्मान हमारी संस्कृति का मूल तत्व रहा है। आज जब छहों अंतरों के साथ इसे औपचारिक सम्मान मिला है, तो यह केवल एक घोषणा नहीं-यह उस ऐतिहासिक ऋण की आंशिक भरपाई है, जो उन शहीदों के प्रति है जिन्होंने इसी गीत के साथ प्राण न्यौछावर किए। जब हम वंदे मातरम् कहते हैं, तो हम राजनीति नहीं करते-हम अपनी माँ को प्रणाम करते हैं। जब यह गीत गूँजे, तो वह केवल औपचारिकता न हो वह हमारे अंतर्मन की श्रद्धा का उद्घोष हो।
    वंदे मातरम्।
  • बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, BNP या जमात? नई दिल्ली के सामने भरोसे और ‘तिहरे संकट’ की चुनौती

    बांग्लादेश चुनाव पर भारत की नजर, BNP या जमात? नई दिल्ली के सामने भरोसे और ‘तिहरे संकट’ की चुनौती


    नई दिल्ली । बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाला आम चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का मामला नहीं है बल्कि यह दक्षिण एशिया की भू-राजनीति की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव भी है। इस बार चुनाव के साथ जनमत संग्रह भी कराया जा रहा है जिससे मतदाता दो वोट डालेंगे एक सरकार के लिए और दूसरा जनमत संग्रह के मुद्दे पर। संकेत मिल रहे हैं कि चुनावी परिणाम इस्लामवादी दलों की ओर झुक सकते हैं जो भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय है।

    अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश राजनीतिक अस्थिरता से गुजर रहा है। सड़कों पर प्रदर्शन हिंसा हड़तालें और प्रशासनिक फेरबदल ने माहौल को अनिश्चित बना दिया है। भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है क्योंकि लंबी साझा सीमा पूर्वोत्तर की सुरक्षा व्यापार कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय स्थिरता सीधे तौर पर ढाका की राजनीति से जुड़ी हैं।

    अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद मुकाबला मुख्य रूप से तीन संभावनाओं तक सिमट गया है बीएनपी के नेतृत्व वाली सरकार बीएनपी-जमात गठबंधन या जमात-ए-इस्लामी का प्रभुत्व। कुछ सर्वेक्षणों में बीएनपी को बढ़त दिखाई गई है। इनोविजन कंसल्टिंग के आंकड़ों के अनुसार बीएनपी को 52.8% वोट शेयर मिल सकता है हालांकि अन्य सर्वे इसे कांटे की टक्कर बता रहे हैं। निर्णायक भूमिका अवामी लीग के पारंपरिक मतदाताओं की होगी।

    भारत के नीति-निर्माताओं का आकलन है कि बीएनपी नेता तारिक रहमान के साथ काम करना अपेक्षाकृत व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। हालांकि अतीत में बीएनपी सरकारों पर पाकिस्तान समर्थक रुख और भारत के पूर्वोत्तर में उग्रवाद को हवा देने के आरोप लगे थे फिर भी उसे एक मध्यमार्गी-दक्षिणपंथी और व्यवहारिक दल माना जाता है। भारत की प्राथमिकता स्थिर और निर्वाचित सरकार है भले ही वह पूर्णतः अनुकूल न हो।

    दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी का उभार नई दिल्ली के लिए तिहरे संकट की आशंका पैदा करता है। पहला सीमापार उग्रवाद और कट्टरपंथ के फिर से सक्रिय होने का खतरा; दूसरा पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी से कथित समीकरण; और तीसरा चीन के साथ बढ़ती नजदीकी जिसमें रणनीतिक बुनियादी ढांचे तक पहुंच की चर्चा शामिल है। विश्लेषकों का मानना है कि हालिया अस्थिरता के दौरान जमात ने प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों में अपनी पकड़ मजबूत की है जो चुनावी लाभ में बदल सकती है।

    भारत की चिंता यह भी है कि 2024 की उथल-पुथल के बाद कुछ ऐसे तत्व रिहा हुए जिन पर पहले कट्टरपंथी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि क्षेत्रीय अस्थिरता का असर सीमाओं के पार भी पड़ सकता है।

    फिर भी भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से व्यवहारिक रही है। नई दिल्ली ने ढाका में हर तरह की सरकार के साथ काम किया है और आगे भी ऐसा करने की संभावना है। लेकिन पिछले 18 महीनों में जिस धैर्य और संतुलन के साथ भारत ने स्थिति संभाली है उसकी परीक्षा इस चुनाव के नतीजों के बाद हो सकती है।

    अंततः बांग्लादेश का यह चुनाव केवल ढाका की सत्ता का फैसला नहीं करेगा बल्कि यह तय करेगा कि भारत-बांग्लादेश संबंध सहयोग स्थिरता और संतुलन की राह पर आगे बढ़ेंगे या नई रणनीतिक चुनौतियों का सामना करेंगे।

  • पंजाब-दिल्ली में बड़े हमले की साजिश नाकाम, अमृतसर में पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश

    पंजाब-दिल्ली में बड़े हमले की साजिश नाकाम, अमृतसर में पाकिस्तान समर्थित आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश


    नई दिल्ली । पंजाब और दिल्ली को दहलाने की साजिश को सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दिया है। अमृतसर में स्टेट स्पेशल ऑपरेशंस सेल ने पाकिस्तान समर्थित एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान एक रिमोट कंट्रोल आईईडी विदेशी निर्मित पिस्तौल और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस विस्फोटक खेप का इस्तेमाल पंजाब और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में बड़े हमलों के लिए किया जाना था।

    पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस ऑपरेशन की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जांच में स्पष्ट हुआ है कि बरामद आतंकी सामग्री सीमा पार से पाकिस्तान की ओर से भेजी गई थी। गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित अपने हैंडलर के सीधे संपर्क में था जो एक आतंकी नेटवर्क के इशारे पर काम कर रहा था।

    जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी को इंटरनेट कॉलिंग और सोशल मीडिया ऐप्स के जरिए निर्देश दिए जा रहे थे। वह एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने की कोशिश कर रहा था। बरामद रिमोट कंट्रोल आईईडी इस बात का संकेत देता है कि किसी भीड़भाड़ वाले इलाके या महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की योजना थी। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से संभावित बड़ा हमला टल गया।

    पुलिस अब आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है ताकि इस मॉड्यूल से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके। यह भी जांच की जा रही है कि फंडिंग लॉजिस्टिक्स और हथियारों की सप्लाई की पूरी श्रृंखला कैसे संचालित हो रही थी। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क के तार सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े हो सकते हैं।

    हाल के दिनों में पंजाब में हथियारों और विस्फोटकों की बरामदगी की घटनाएं बढ़ी हैं। एक दिन पहले भी आरडीएक्स से बने एक आईईडी को बरामद कर बड़ी साजिश को विफल किया गया था। उस मामले में भी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था जिसके आतंकी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले थे। इसके अलावा अमृतसर क्षेत्र में सीमा पार से भेजे गए दो हैंड ग्रेनेड भी जब्त किए गए थे।

    सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के जरिए ड्रोन और अन्य माध्यमों से हथियारों की तस्करी की कोशिशें की जा रही हैं। पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान चला रही हैं। फिलहाल गिरफ्तार आरोपी के नेटवर्क की परतें खोलने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि राज्य और देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा और साजिश रचने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत

    दिल्ली मेट्रो अपडेट: T20 वर्ल्ड कप मैच के लिए DMRC ने बढ़ाई आखिरी ट्रेन की टाइमिंग, यात्रियों को राहत


    नई दिल्ली। 12 फरवरी, 2026 को अरुण जेटली स्टेडियम में होने वाले ICC T20 वर्ल्ड कप मैच के मद्देनजर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने मेट्रो समय सारिणी में खास बदलाव किया है। मैच के कारण स्टेडियम और आसपास भारी भीड़ के मद्देनजर DMRC ने प्रमुख मेट्रो लाइनों पर आखिरी ट्रेन का समय लगभग 90 मिनट तक बढ़ा दिया है, ताकि दर्शक और सामान्य यात्री आसानी से घर लौट सकें।

    रेड लाइन (लाइन 1) पर शहीद स्थल से रिठाला रूट की आखिरी ट्रेन अब रात 12:10 से 12:15 बजे तक चलेगी। येलो लाइन (लाइन 2) पर समयपुर बादली से गुरुग्राम के मिलेनियम सिटी सेंटर तक ट्रेन 12:20 बजे तक उपलब्ध रहेगी। ब्लू लाइन (लाइन 3 और 4) की नोएडा इलेक्ट्रॉनिक सिटी से द्वारका सेक्टर 21 तक की आखिरी ट्रेनें 11:35 और 11:45 बजे तक चलेंगी। ग्रीन लाइन (लाइन 5) की कुछ ट्रेनें 1:00 बजे तक उपलब्ध रहेंगी। वायलेट, पिंक, मैजेंटा, ग्रे लाइन और एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर भी ट्रेन समय में बदलाव किया गया है।

    DMRC ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव केवल 12 फरवरी के लिए है। 13 फरवरी से मेट्रो टाइमिंग पहले की तरह सामान्य हो जाएगी। इस निर्णय से न केवल मैच देखने वाले दर्शकों को सुविधा मिली है, बल्कि देर रात सफर करने वाले यात्रियों को भी राहत मिली है।

    DMRC के इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि मैच खत्म होने के बाद भी लोग सुरक्षित और समय पर घर पहुंच सकें। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना नई टाइमिंग के अनुसार बनाएं और भीड़भाड़ वाले समय में अतिरिक्त समय रखें।

  • मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…

    मोबाइल उत्पादन में नोएडा देश में नंबर वन… यहां बन रहे कई नामी कंपनियों के फोन…


    नोएडा।
    यूपी सरकार (UP Government) के बजट में कहा कि देश के 65 प्रतिशत मोबाइल का उत्पादन (Mobile Production) उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में हो रहा है। मोबाइल उत्पादन (Mobile Production) में गौतमबुद्ध नगर (Gautam Buddha Nagar) पूरे देश में पहले नंबर पर है। देश के 55 फीसदी से अधिक मोबाइल फोन यहीं बनते हैं।


    इन कंपनियों के फोन नोएडा में बन रहे

    सैमसंग का यहां सबसे बड़ा मोबाइल प्लांट है, जो सालाना 12 करोड़ यूनिट तक उत्पादन क्षमता रखता है। ओप्पो, वीवो, और डिक्सन टेक्नोलॉजीज जैसी अन्य कंपनियां भी यहां पर बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के खजाने को जीएसटी से भरने में गौतमबुद्ध नगर जिले का योगदान सबसे अधिक है।


    मेक इन इंडिया का सपना हो रहा साकार

    जानकारी के मुताबिक, सैमसंग के गौतमबुद्ध नगर स्थित संयंत्र में दुनिया के लगभग 25 फीसदी फोन का निर्माण होता है। मोबाइल फोन के निर्माण के साथ ही यहां पर बड़ी संख्या में रोजगार सृजित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में मोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र होने के कारण यह क्षेत्र मेक इन इंडिया पहल का प्रमुख हिस्सा बना हुआ है।


    रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

    यमुना सिटी के सेक्टर-24ए में वीवो कंपनी मोबाइल बना रही है। कंपनी को 169 एकड़ भूमि का आंवटन वर्ष 2018 में हुआ था। इसमें 156.32 एकड़ भूमि के लिए चेकलिस्ट जारी की गई थी। प्रथम चरण में कंपनी प्रति वर्ष छह करोड़ स्मार्ट मोबाइल तैयार कर रही है। दो चरणों में कंपनी का निर्माण पूरा होगा। दूसरा चरण पूरा होने के बाद शहर में हर साल करीब 14.40 करोड़ मोबाइल का उत्पादन किया जाएगा। वर्तमान में यहां पर 800 लोग काम कर रहे हैं।

    दूसरा चरण पूरा होने के बाद एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। यहां की मोबाइल कंपनियों ने निर्यात का ग्राफ बढ़ाने के साथ जीएसटी चुकाने में भी टॉप रैंक हासिल की है। जीएसटी महकमे ने राज्य जीएसटी देने वाली जिन टॉप 100 कंपनियों की सूची जारी की थी, उसमें सबसे ऊपर ग्रेटर नोएडा की ओप्पो मोबाइल कंपनी का नाम है। वर्ष 2023-24 में ओप्पो मोबाइल इंडिया ने 1945. 87करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था। वर्ष 2024-25 में 1141.47 करोड़ रुपये जीएसटी जमा किया था।

  • US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट

    US से ट्रेड डील से कश्मीर से हिमाचल तक टेंशन में किसान…. 10,000 CR की इंडस्ट्री पर संकट


    नई दिल्ली।
    भारत-अमेरिका ट्रेड डील (India-US Trade Deal) को लेकर कश्मीर (Kashmir) से लेकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) तक के सेब किसानों में चिंता बढ़ गई है। किसानों को डर है कि अगर अमेरिकी सेब (American Apple) सस्ते दाम पर भारतीय बाजार में आने लगे, तो स्थानीय सेब की मांग और कीमत दोनों गिर सकती हैं। इस डील के तहत कई देशों से आने वाले सेब पर आयात शुल्क कम किया जा रहा है। पहले ज्यादा कीमत होने के कारण विदेशी सेब कम मात्रा में आते थे, लेकिन अब ड्यूटी कम होने से आयात बढ़ने का डर है।

    कश्मीर की अर्थव्यवस्था में सेब उद्योग बहुत अहम है। हजारों परिवार सीधे या परोक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। ऐसे में अगर विदेशी सेब ज्यादा आए, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर असर पड़ सकता है। जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि अगर बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के आयात बढ़ा, तो स्थानीय बागवानी उद्योग को नुकसान हो सकता है।


    अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो टेंशन बढ़ेगी

    हालांकि सरकार का कहना है कि अमेरिकी सेब के लिए केवल सीमित (कोटा आधारित) रियायत दी जा रही है और किसानों की सुरक्षा के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) जैसी व्यवस्था रखी गई है, ताकि बहुत सस्ते सेब बाजार में न आ सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आयात ज्यादा बढ़ता है, तो घरेलू किसानों पर कीमत का दबाव बढ़ सकता है। वहीं कुछ लोग इसे अवसर भी मानते हैं—कहते हैं कि इससे भारतीय किसान गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दे सकते हैं।


    फल मंडी के नेता क्या कह रहे?

    घाटी के सबसे बड़े फल मार्केट, सोपोर फ्रूट मंडी के प्रेसिडेंट फैयाज अहमद मलिक ने बताया, “यह (इंडिया-US डील) हमारे लिए बहुत बुरा होगा।” वे कहते हैं, “हम US में फल उगाने वालों से मुकाबला नहीं कर सकते। उन्हें खेती के हर स्टेज पर सरकार से मदद मिलती है। उन्हें अच्छी-खासी सब्सिडी और कैश ट्रांसफर मिलते हैं, जबकि हमारे पास फसल बीमा तक नहीं है।” मलिक का कहना है कि इस ट्रेड डील का कश्मीर घाटी की इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ेगा। वे कहते हैं, “जब हम अपने सेब बांग्लादेश भेजते हैं, तो हमें 100% से ज़्यादा टैक्स देना पड़ता है। सरकार अमेरिकन सेब पर टैक्स कैसे कम कर सकती है? इससे लोकल इंडस्ट्री और इकॉनमी बर्बाद हो जाएगी।”


    10,000 करोड़ रुपये की है सेब इंडस्ट्री

    बता दें कि सेब इंडस्ट्री जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) की अर्थव्यवस्था, खासकर कश्मीर घाटी की इकॉनमी का आधार और रीढ़ है। घाटी देश के कुल सेब उत्पादन का 75% पैदा करती है। आधिकारिक आंकड़ों के के मुताबिक घाटी में करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होते हैं और इस सेब इंडस्ट्री की कीमत 10,000 करोड़ रुपये है। अधिकारियों का कहना है कि इस इंडस्ट्री में सीधे या अप्रत्यक्ष करीब 50 लाख लोग जुड़े हुए हैं। फिलहाल किसान संगठन सरकार से सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में सेब किसानों ने भारत-US डील में खेती की उपज, खासकर सेब को शामिल करने के खिलाफ 12 फरवरी को बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। कश्मीर के किसान भी अब इसी तरह के प्रदर्शन का प्लान बना रहे हैं।

  • ट्रेनों में यात्रियों को अब सीट पर मिलेगा गर्म-ताजा खाना…. नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा शुरू

    ट्रेनों में यात्रियों को अब सीट पर मिलेगा गर्म-ताजा खाना…. नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा शुरू


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने यात्रियों (Passengers) के खाने-पीने के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए E-Pantry (ई-पैंट्री) नाम से एक नई ऑनलाइन भोजन बुकिंग सेवा (New Online Food Booking Service) शुरू कर दी है। यह सुविधा 25 Mail और Express ट्रेनों में उपलब्ध कराई गई है, जिससे यात्री अपनी पसंद का भोजन टिकट बुकिंग के समय या बाद में ऑनलाइन ही बुक कर सकते हैं और ट्रेन में बैठे-बिठाए उनकी सीट पर भोजन मिल सकता है। E-Pantry सर्काविस लक्ष्य यात्रा को अधिक सुविधाजनक, साफ-सुथरा बनाना है। पहले यात्रियों को स्टेशन पर उतरकर खाना खरीदना पड़ता था या अनजाने वेंडरों पर निर्भर रहना होता था। लेकिन अब इस नई डिजिटल सेवा से टिकट बुक करते समय या बाद में IRCTC की वेबसाइट/ऐप पर आप भोजन और पानी को पहले से बुक कर सकते हैं और ट्रेन में बैठे-बिठाए वही खाना आपकी सीट तक डिलीवर हो जाएगा।

    बुकिंग के बाद आपको एक Meal Verification Code (MVC) मिलता है, जिसे यात्रा के दिन साझा करने पर भोजन सीधे आपकी सीट पर डिलीवर किया जाता है। यह सेवा उन Mail/Express ट्रेनों के लिए खास है जिनमें टिकट में भोजन शामिल नहीं होता। जिसमें अगर भोजन नहीं मिला तो refund भी मिलता है।


    E-Pantry बुकिंग कैसे करें?

    E-Pantry से भोजन बुक करना बिल्कुल आसान है:
    Step 1: IRCTC वेबसाइट या ऐप पर लॉग-इन करें।
    Step 2: ट्रेन टिकट बुक करते समय (या बाद में “Booked Ticket History” सेक्शन से भी) E-Pantry ऑप्शन चुनें।
    Step 3: अपनी पसंद का डिश/भोजन और Rail Neer का चयन करें।
    Step 4: ऑनलाइन पेमेंट पूरा करें।
    Step 5: आपको एक Meal Verification Code (MVC) SMS/Email के जरिए मिलेगा।
    Step 6: यात्रा के दिन उस MVC को ट्रेन में भोजन देने वाले स्टाफ को दिखाएं और भोजन अपनी सीट पर पाएं।


    E-Pantry सर्विस इन ट्रेनें में शामिल

    E-Pantry सेवा को शुरुआत में 25 प्रमुख Mail और Express ट्रेनों में लाया गया है। इसमें ऐसे लंबे रास्तों वाली ट्रेनें शामिल हैं जिनमें यात्रियों को खाने-पीने की जरूरत अधिक होती है। Vivek Express, Swatantra Senani Express, Swarnajayanti Express, Karnataka Sampark Kranti, Mangaldweep Express, Kalinga Utkal Express, Pushpak Express, Paschim Express, Grand Trunk Express, Poorva Express में यह सर्विस शुरू हो गई है। जल्द ही अन्य ट्रेनों फीडबैक के आधार पर इसे शुरू किया जाएगा।

  • Bharat Bandh: भारत बंद 12 फरवरी 2026 जानें क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा

    Bharat Bandh: भारत बंद 12 फरवरी 2026 जानें क्या खुलेगा, क्या बंद रहेगा


    नई दिल्ली। गुरुवार, 12 फरवरी 2026 को पूरे देश में भारत बंद का असर दिखाई दे सकता है। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC), संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और 10 से अधिक राष्ट्रीय ट्रेड यूनियनों के समर्थन से यह हड़ताल आयोजित की गई है। इसे कृषि, ग्रामीण और अनौपचारिक श्रमिकों के प्रतिनिधियों ने समर्थन दिया है।

    कौन-कौन से सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं
    यातायात: बसें, टैक्सियां और लोकल ट्रेनें प्रभावित हो सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में “चक्का जाम” की संभावना।
    बैंकिंग: AIBEA, AIBOA और BEFI के कर्मचारियों की हड़ताल के चलते सार्वजनिक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी।
    बाजार और दुकानें: अधिकतर थोक और खुदरा दुकानें, रेस्तरां बंद रहने की संभावना।
    हवाई यात्रा: एयरपोर्ट खुले रहेंगे, लेकिन ट्रैफिक जाम के कारण अतिरिक्त समय लेने की सलाह।

    स्कूल और कॉलेज
    आधिकारिक अवकाश नहीं: भारत भर में स्कूल और कॉलेज खुलेंगे।
    स्थानीय असर: केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हड़ताल के कारण कुछ संस्थान बंद रह सकते हैं।

    यात्रियों के लिए सलाह
    सड़क अवरोध और विरोध प्रदर्शन के कारण यात्रा में विलंब की संभावना।
    रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त समय रखें।
    प्रभावित क्षेत्रों में राज्य संचालित बसें और ऑटो-रिक्शा सीमित हो सकते हैं।

    हड़ताल के पीछे कारण और मांगे
    नवंबर 2025 में लागू चार नए श्रम संहिता को वापस लेने की मांग।
    बीज विधेयक, विद्युत संशोधन विधेयक और पशु-अधिनियम को रद्द करने की मांग।
    MGNREGA की बहाली।
    विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 का विरोध।इस हड़ताल में INTUC, AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, TUCC, SEWA, AICCTU, LPF और UTUC जैसे प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने SKM के समर्थन में देशभर के श्रमिकों, कर्मचारियों और किसानों को शामिल किया है।

  • राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले

    राघव चड्ढा का संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ पर जोर, बोले- मतदाता को नेता हटाने का अधिकार मिले


    नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ यानी जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरते, तो मतदाताओं को उनका कार्यकाल पूरा होने से पहले उन्हें हटाने का अधिकार होना चाहिए।

    शून्यकाल के दौरान बोलते हुए चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाता को चुनाव में हिस्सा लेने का अधिकार है, उसी तरह अगर नेता काम नहीं करता तो उसे हटाने का अधिकार भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ मतदाताओं को सशक्त बनाएगी और नेताओं को जवाबदेह बनाएगी।”

    ‘राइट टू रिकॉल’ क्या है?
    राघव चड्ढा ने इसे एक ऐसी प्रक्रिया बताया है जिसमें वोटर किसी चुने हुए नेता को उनके कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार रखते हैं। आसान शब्दों में, अगर जनता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं है, तो वह उसे जल्दी हटाने का विकल्प रख सकती है।

    राष्ट्रपति और जज हैं हटाए जा सकते हैं, नेताओं को क्यों नहीं?
    चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में पहले ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए महाभियोग की व्यवस्था है। सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकता है। ऐसे में निर्वाचित नेताओं के लिए भी सुरक्षित और कानूनी प्रक्रिया के जरिए हटाने की सुविधा होना चाहिए।

    दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा उपाय
    सांसद ने कहा कि ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत करेगा, इसे नेताओं के खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कम से कम 35-40% मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी हों। नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके। इस तरह काम करने वाले नेताओं को पार्टी टिकट देंगी और लोकतंत्र मजबूत होगा।

    किन देशों में लागू है?
    राघव चड्ढा के अनुसार, दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में यह व्यवस्था मौजूद है। उदाहरण- अमेरिका, स्विट्जरलैंड, कनाडा, ब्रिटेन, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान। इसके अलावा भारत में यह व्यवस्था कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में लागू है।