Category: National

  • कांग्रेस नेता का रील के लिए 'धुरंधर स्‍टाइल', रहमान डकैत के अंदाज में लहराई गन, पुलिस ने शुरू की जांच

    कांग्रेस नेता का रील के लिए 'धुरंधर स्‍टाइल', रहमान डकैत के अंदाज में लहराई गन, पुलिस ने शुरू की जांच

    नई दिल्ली । कर्नाटक के कलबुर्गी में एक कांग्रेस नेता ने ब्‍लॉकबस्‍टर फिल्‍म धुरंधर के बेहद लोकप्रिय गाने Fa9la पर रील बनाकर विवाद खड़ा कर दिया है. इस रील में कांग्रेस विधायक के बेहद करीबी मतीन पटेल वीडियो में पिस्तौल और बंदूक लहराते नजर आते हैं. अब इस मामले में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.

    कलबुर्गी के पुलिस कमिश्‍नर शरणप्पा एसडी ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति हथियार लहराता दिख रहा है. हम वीडियो में दिख रहे व्यक्ति को जानते हैं. मैंने अधिकारियों को यह पता लगाने के लिए कहा है कि वीडियो कहां बनाया गया और यह किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है.

    पुलिस कमिश्‍नर ने दिए निर्देश
    साथ ही पुलिस कमिश्‍नर ने कहा कि उन्होंने पुलिस को निर्देश दिया है कि पता लगाएं कि किस हथियार का इस्तेमाल किया गया था और क्या वह असली है या नहीं. साथ ही कहा कि अगर यह असली है तो हम देखेंगे कि क्या यह लाइसेंसी था या नहीं. अगर यह लाइसेंसी था तो हम जांच करेंगे कि क्या शर्तों का उल्लंघन हुआ था. शरणप्पा ने कहा कि अगर यह अवैध पाया गया, तो शस्त्र अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी.

    रहमान डकैत के अंदाज में डांस

    वीडियो में मतीन अपनी काली एसयूवी से उतरते हैं और फिर अपने दोस्तों के साथ डांस करते हुए आगे बढ़ते हैं यह ठीक बिलकुल वैसा ही है, जैसा फिल्‍म धुरंधर में रहमान डकैत अक्षय खन्ना बलूचिस्तान में एक हथियार डीलर के कैंप में घुसते वक्‍त करते हैं.

  • देश में पांच साल में गड्ढों में गिरने से 9 हजार 109 लोगों की मौत… रोजाना 6 लोगों ने गंवाई जान

    देश में पांच साल में गड्ढों में गिरने से 9 हजार 109 लोगों की मौत… रोजाना 6 लोगों ने गंवाई जान


    नई दिल्ली।
    सड़क परिवहन मंत्रालय (Ministry of Road Transport) के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2019 से 2023 के बीच देश में सड़कों पर बने गड्ढों (Potholes Roads) के कारण हुए सड़क हादसों (Road Accidents) में 9,109 लोगों की मौत हुई थी.यह आंकड़ा साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है.वर्ष 2022 में जहां ऐसे हादसों में 1,856 लोगों की मौत हुई, वहीं 2023 में यह आंकड़ा बढ़ कर 2,161 तक पहुंच गया.यानी उस साल रोजाना औसतन छह लोगों की मौत हुई थी.उसके बाद का आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

    यह गड्ढे दोपहिया वाहनों और पैदल चलने वालों के लिए सड़क हादसे की सबसे प्रमुख वजह बन गए हैं.मानसून में यह समस्या बेहद गंभीर हो जाती है.बीते सप्ताह दिल्ली के जनकपुरी इलाके में जल बोर्ड की ओर से खोदे गए गड्ढे में गिरकर कमल नामक 25 वर्ष के एक युवक की मौत हो गई थी।

    अदालतों की फटकार भी बेअसर

    बंबई हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने बीते साल अक्तूबर में इन मौतों से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद ऐसे मामलों में मृतकों के परिजनों को कम से कम छह लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया था.इससे पहले जुलाई 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की थी कि सड़कों पर बने गड्ढों के कारण होने वाले हादसों से साफ है कि इनके लिए जिम्मेदार अधिकारी सही तरीके से अपनी ड्यूटी नहीं निभा रहे हैं. शीर्ष अदालतों की टिप्पणी और फटकार के बावजूद यह समस्या कम होने की बजाय बढ़ती ही जा रही है।

    परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि सड़कों पर बने गड्ढे दोपहिया वाहनों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं.सड़कों की मरम्मत के लिए जिम्मेदार नगर निगम, लोक निर्माण विभाग या नगरपालिकाएं अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाती.क्यों बनते हैं सड़कों पर गड्ढे?लेकिन आखिर सड़कों पर ऐसे गड्ढे क्यों हो जाते हैं और समय पर इनकी मरम्मत के उपाय क्यों नहीं किए जाते?

    इस सवाल पर लोक निर्माण विभाग के एक पूर्व इंजीनियर समरेश भट्टाचार्य डीडब्ल्यू से कहते हैं, “मानसून के सीजन में सड़कों पर पानी भरना और रिसना इसका एक प्रमुख कारण है.ज्यादातर मामलों में सड़कों पर भरे पानी को निकालने के लिए ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं होता. उस दौरान भारी वाहनों के गुजरने के कारण सड़कों पर गड्ढे बन जाते हैं.इसके अलावा सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल भी दूसरी बड़ी वजह है”समरेश का कहना है कि कई बार बिजली और जल निगम जैसे विभाग भी सड़कों पर गड्ढे खोदकर उनको जस का तस छोड़ देते हैं.विभिन्न विभागों के बीच तालमेल की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है.उनके मुताबिक, कोई बड़ा हादसा होने के बाद राजनीतिक तौर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है और तमाम विभाग अपना पल्ला झाड़ने लगते हैं.

    मुआवजे की कोई गारंटी नहीं

    एक गैर-सरकारी संगठन के संयोजक मोहम्मद तस्लीम डीडब्ल्यू से कहते हैं, “हाल की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि गड्ढों के कारण रोजाना 19 सड़क हादसे होते हैं और इनमें औसतन छह लोगों की मौत हो जाती है.इसके अलावा कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं.ऐसे लोगों का कोई आंकड़ा नहीं है” उनके मुताबिक, ऐसे हादसों में वाहनों को होने वाले नुकसान का भी कोई आंकड़ा कहीं नहीं मिलता. क्या ऐसे हादसों से प्रभावित लोगों को कानूनी तौर पर मुआवजा मिल सकता है?

    कलकत्ता हाईकोर्ट के एक एडवोकेट दीपक कुमार डीडब्ल्यू से कहते हैं, “सैद्धांतिक तौर पर प्रभावित लोग या उनके परिजन मुआवजे के हकदार हैं.लेकिन न्याय का रास्ता लंबा और जटिल है और उसके बाद भी जीत की कोई गारंटी नहीं है.कानूनी खामियों का फायदा उठा कर अक्सर तमाम विभाग एक-दूसरे पर अंगुली उठा कर बच निकलते हैं”हादसों को कैसे रोका जाएपरिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ जगह एआई तकनीक वाले कैमरे से सड़कों पर बने गड्ढों का पता लगा कर उनकी मरम्मत का काम जरूर किया जा रहा है लेकिन यह नाकाफी है.समरेश कहते हैं कि ऐसे हादसों पर अंकुश लगाने के लिए विभागों की जवाबदेही तय करनी होगी और तय समय सीमा के भीतर गड्ढों की मरम्मत नहीं करने की स्थिति में उन पर भारी जुर्माना लगाना होगा.वहीं मोहम्मद तस्लीम का कहना है कि समस्या तकनीक या पैसों की नहीं बल्कि इच्छाशक्ति और सोच की है.जब तक संबंधित विभागों का रवैया लापरवाह रहेगा, ऐसे हादसे बढ़ते ही रहेंगे.सड़क जैसे आधारभूत ढांचे के प्रबंधन पर गंभीरता से ध्यान दिया जाने की जरूरत है।

  • टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार

    टीना अंबानी ने 40 हजार करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस ED के सामने पेश होने से किया इन्कार


    मुम्बई।
    बिजनेसमैन अनिल अंबानी (Businessman Anil Ambani) की पत्नी टीना अंबानी (Tina Ambani) ने आज प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश होने से इनकार कर दिया है। ईडी लगभग 40,000 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामलों (Money laundering cases) की जांच कर रही है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में टीना अंबानी को नया समन जारी करेगी। प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ADAG) और उससे जुड़ी संस्थाओं से जुड़े 40,000 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग और कॉर्पोरेट घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।

    एक खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि SIT का नेतृत्व संघीय जांच एजेंसी की मुख्यालय जांच इकाई (HIU) में अतिरिक्त निदेशक स्तर के अधिकारी कर रहे हैं और इसमें आधा दर्जन अन्य जांचकर्ता शामिल हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा ADAG के खिलाफ मामलों की समीक्षा करने के बाद उठाया गया है। पिछले सप्ताह, सर्वोच्च न्यायालय ने ईडी को एक SIT गठित करने का निर्देश दिया था जो मामले में निष्पक्ष, स्वतंत्र, त्वरित और निष्पक्ष जांच करेगी। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को कथित सांठगांठ, मिलीभगत और साजिश की जांच करने और अपनी जांच को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने के लिए कहा था।

    ईडी पिछले साल से अनिल अंबानी और उनकी रिलायंस समूह की कंपनियों की जांच कर रहा है। अब तक एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत तीन प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIRs) दर्ज की हैं। इसके अलावा, 12,000 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क भी की गई है। अनिल अंबानी से पिछले साल उनकी समूह की कंपनियों के कथित बैंक ऋण अनियमितताओं के लिए ईडी द्वारा पूछताछ की गई थी। कंपनी के एक पूर्व शीर्ष कार्यकारी और RCOM के पूर्व अध्यक्ष, पुनीत गर्ग को हाल ही में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है। अनिल अंबानी समूह की कंपनियों ने अतीत में किसी भी गलत काम से इनकार किया है।

  • भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा

    भ्रष्टाचार के मामले में सुधरी भारत की रैकिंग, 185 देशों की लिस्ट में 5 स्थान की छलांग… 91वें स्थान पर पहुंचा


    नई दिल्ली।
    भारत (India) मंगलवार को जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (Corruption Perceptions Index.-CPI) 2025 में 182 देशों और क्षेत्रों में से 91वें स्थान पर पहुंच गया। यह पिछली रैंकिंग की तुलना में पांच स्थान बेहतर है। वैश्विक गैर-सरकारी संगठन (Global Non-Governmental Organizations) ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल (Transparency International) के नवीनतम सीपीआई के अनुसार, भारत का स्कोर पिछले साल की तुलना में एक अंक बढ़ा है। वहीं, उसकी रैंक बेहतर हुई है। बर्लिन स्थित भ्रष्टाचार विरोधी निगरानी संस्था की रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया प्रशांत इलाके में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति की वृद्धि धीमी रही है। वजह, कई देशों में पिछले साल जनता का गुस्सा देखा गया।


    दुनिया के हर हिस्से में खतरा

    2025 भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक दिखाता है कि भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में एक गंभीर खतरा बना हुआ है। हालांकि इसकी प्रगति की रफ्तार जरूर प्रभावित हुई है। रिपोर्ट में कहा गया कि नेताओं को सत्ता के दुरुपयोग और इस गिरावट को प्रेरित करने वाले व्यापक कारकों, जैसे लोकतांत्रिक जांच और संतुलन की वापसी और स्वतंत्र नागरिक समाज पर हमलों से निपटने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। इसमें आगे कहा गया है कि दुनिया भर में सरकार विरोधी प्रदर्शन यह दिखाते हैं कि लोग अक्षम नेतृत्व से उकता चुके हैं। यह लोग अब सुधार की मांग कर रहे हैं।


    पत्रकारों के लिए खतरनाक

    सीपीआई दुनिया के 182 देशों और क्षेत्रों को उनके सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनुमानित स्तर के अनुसार रैंक करता है। परिणाम जीरो (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (बहुत साफ) के पैमाने पर दिए जाते हैं। रिपोर्ट में भारत को उन देशों में भी सूचीबद्ध किया गया है जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जब पत्रकारों पर भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए हमला किया जाता है या उन्हें मार दिया जाता है, तो सत्ता को प्रभावी ढंग से जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता और भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। 2012 से, वैश्विक स्तर पर गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है। इन हत्याओं में से 90 फीसदी से अधिक उन देशों में हुई हैं, जहां भ्रष्टाचार सूचकांक 50 से कम है। इनमें ब्राजील (35), भारत (39), मैक्सिको (27), पाकिस्तान (28) और इराक (28) शामिल हैं। यह विशेष रूप से उन पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करते हैं।


    भ्रष्टाचार की कीमत

    रिपोर्ट में कहा गया है कि 2012 के बाद से 31 देशों ने अपने भ्रष्टाचार के स्तर में काफी कमी की है। बाकी इस समस्या से निपटने में विफल रहे हैं। इस अवधि के दौरान या तो वह स्थिर रहे हैं या बदतर हो गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक औसत गिरकर 42 के नए निचले स्तर पर आ गया है, जबकि दो-तिहाई से अधिक देश 50 से नीचे स्कोर कर रहे हैं। लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं, क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण अस्पताल की सुविधाओं में कमी आती है। बाढ़ से निपटने की क्षमता पर असर पड़ता है। कुल मिलाकर यह युवाओं के सपनों पर खत्म कर देता है। इस सूचकांक में डेनमार्क 89 प्वॉइंट्स के साथ टॉप पर है। वह फिनलैंड और सिंगापुर से आगे है। वहीं, दक्षिण सूडान और सोमालिया की हालत भ्रष्टाचार के मामले में काफी खराब है। दोनों के नौ-नौ प्वॉइंट्स हैं। इनके बाद वेनेजुएला है।

  • Research : उत्तराखंड में मामूली बारिश भी मचा सकती है भारी तबाही… वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

    Research : उत्तराखंड में मामूली बारिश भी मचा सकती है भारी तबाही… वैज्ञानिकों ने जताई चिंता


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand.) के पहाड़ी क्षेत्रों (Hilly Areas) में अतिवृष्टि या बादल फटने (Heavy Rainfall or Cloudburst) से ही नहीं, बल्कि लगातार हल्की बारिश (Light Rain) से भी धराली जैसी आपदा आ सकती है। पहाड़ों पर जगह-जगह जमा मलबे के ढेर मामूली बारिश (Light Rain) में ही आपदा के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं।

    दून विश्वविद्यालय ने देश के छह नामी संस्थानों के वैज्ञानिकों के साथ किए अध्ययन में ये चिंता जताई है वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहाड़ों पर यदि 15 से 30 दिन तक रोज छह से सात मिलीमीटर बारिश होती है तो मलबा जानलेवा हो सकता है। मलबे के ढेर पानी सोखने के बाद दस किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति से खिसक सकते हैं और ये स्थिति निचले क्षेत्रों में रह रही आबादी के लिए कहर साबित हो सकती है।


    धराली जैसी आपदा का डर

    उत्तरकाशी का धराली इसका ताजा और डरावना उदाहरण है। धराली में पांच अगस्त को आई आपदा एक-दो दिन की नहीं बल्कि पूरे एक माह की बारिश का नतीजा थी। इस इलाके में पांच जुलाई से पांच अगस्त तक 195 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। बारिश के रूप में धीरे-धीरे आए पानी को मलबे ने सोखा और बाद में खीरगंगा के बहाव के साथ धराली में तबाही मचा दी। दून विवि के भूगर्भ विज्ञान के एचओडी डॉ.विपिन कुमार के अनुसार, धराली में बारिश के बाद मलबा 60 किलो पास्कल का दबाव बनाकर दस किमी प्रति सेकेंड की गति से नीचे आकर तबाही का कारण बना था।


    मलबे का निस्तारण और निरंतर निगरानी जरूरी

    शोध रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने राज्य की प्रमुख नदियों, ग्लेशियरों के मुहाने, नाले-धारों और ऊंचाई वाले पहाड़ों पर जमा मलबे का पता लगाने की सलाह दी है, ताकि उसे निस्तारित किया जा सके। इसके अलावा ऐसे इलाकों की लगातार निगरानी और पूर्व चेतावनी तंत्र विकसित करने की भी सलाह दी है।


    भविष्य के लिए सिफारिश

    सेडिमेंट सोर्स मैपिंग अनिवार्य की जाए, जिससे गिलेशियर व हिमालयी जलग्रहण क्षेत्रों में मलबे के स्रोतों की निरंतर पहचान और निगरानी की जा सके। सरकार की आपदा प्रबंधन नीतियों में क्वांटिटेटिव हजार्ड साइंस को शामिल किया जाए, ताकि जोखिम का वैज्ञानिक आकलन कर समय रहते टोस और प्रभावनी निर्णय लिए जा सके।


    एक नजर चेतावनी पर

    रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड राज्य में हर वर्ष औसतन 2 हजार आपदाएं आथी हैं। 2025 में उत्तराखंड राज्य ने 2100 से ज्यादा छोटी-बड़ी आपदाएं झेली। इन आपदाओं में 263 लोगों की जान चली गई थी।

  • बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी

    बुड्ढा लड़का लोफर है…', RJD ने सोशल मीडिया पर नीतीश कुमार पर की अभद्र टिप्पणी


    नई दिल्ली । बिहार में विधान परिषद में सत्र की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पूर्व सीएम राबड़ी देवी को लड़की कहे जावने के मामले पर विवाद बढ़ता चला जा रहा है। पहले रोहिणी आचार्य ने इस मामले को लेकर सीएम नीतीश पर निशाना साधा था। इसके बाद तेजस्वी यादव ने सीएम नीतीश को डिमेंशिया और अल्जाइमर का शिकार बता दिया था। वहीं अब राजद ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है। राजद ने सीएम नीतीश को लोफर और बुड्ढा तक कह दिया था।

    RJD ने क्या ट्वीट किया?
    राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए विवादित टिप्पणी की। राजद ने कहा संवैधानिक पद पर बैठ महिलाओं के लिए अश्लील बातें करने वाला बिहार का बुड्ढा लड़का लोफर है।
    आज विधान परिषद में मार्शल बुलाए गए
    मंगलवार को बिहार विधानसभा में लगातार हंगामा देखने को मिला। इसके बाद विपक्ष के लगातार हंगामे के बाद सभापति ने हंगामा कर रहे विपक्षी सदस्यों को मार्शल से दिन भर के लिए बाहर करवा दिया। सभापति ने बार बार कहा कि प्रश्नकाल को बाधित नहीं करें सदन की कार्यवाही में व्यवधान न डालें बावजूद विपक्ष के सदस्य बेल तक पहुंचकर नारेबाजी और हंगामा करते रहे। इसके बाद सभापति ने कड़ी कार्रवाई करते हुए विपक्षी सदस्यों को पूरे दिन के लिए सदन से बाहर करने का आदेश दे दिया। बाहर भी विपक्ष का हंगामा जारी रहा।
    सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक
    सभापति के आदेश से मार्शल बुलाए गए जिन्होंने बीच-बचाव करते हुए सदस्यों को अलग किया। सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। मंत्री अशोक चौधरी काफी गुस्से में दिखाई दिए वहीं विपक्ष के नेता भी आक्रोशित नजर आए। इस दौरान अशोक चौधरी ने सुनील सिंह से कहा तुम क्या हो जिस पर सुनील सिंह ने जवाब देते हुए उन्हें नौटंकीबाज तक कह दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान सदन में भारी शोर-शराबा और हंगामे का माहौल बना रहा।

  • Air Taxi in Delhi-NCR: दिल्ली-NCR में चलेगी एयर टैक्सी, 10 मिनट में तय होगा डेढ़ घंटे वाला सफर; इस रूट पर सबसे पहले मिलेगी सुविधाा

    Air Taxi in Delhi-NCR: दिल्ली-NCR में चलेगी एयर टैक्सी, 10 मिनट में तय होगा डेढ़ घंटे वाला सफर; इस रूट पर सबसे पहले मिलेगी सुविधाा


    नई दिल्ली । अगर आप दिल्ली-एनसीआर में रहते हैं और रोज ऑफिस जाने के लिए लंबा सफर तय करते हैं तो यह खबर आपके लिए है. दरअसल, दिल्ली-एनसीआर में भी एयर टैक्सी चलाने का प्लान है और इसक ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया गया है. एयर टैक्सी चलने के बाद दिल्ली में हर रोज लगने वाले जाम से लोगों को बड़ी निजात मिलेगी. ऐसे में चलिए जानते हैं कि किस रूट के लोगों को सबसे पहले एयर टैक्सी की सुविधा मिलेगी और इसका पूरा प्लान क्या है.

    इस रूट पर 10 मिनट में तय होगा सफर

    अब वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली से गुरुग्राम जाने के लिए सड़क नहीं आसमान का रास्ता लिया जाएगा. ट्रैफिक में फंसे रहने की जगह लोग सीधे हवा में उड़ती टैक्सी से सफर करेंगे. बता दें, भारतीय उद्योग परिसंघ CII की नई रिपोर्ट में दिल्ली-एनसीआर में एयर टैक्सी सेवा शुरू करने का प्लान सामने आया है. इस प्लान के तहत दिल्ली, गुरुग्राम और जेवर एयरपोर्ट को हवाई रास्ते से जोड़ा जाएगा. मतलब जिस गुरुग्राम से कनॉट प्लेस पहुंचने में आज एक-डेढ़ घंटा लग जाता है वही सफर सिर्फ 7 से 10 मिनट में पूरा हो सकेगा.

    कैसी होगी एयर टैक्सी?

    प्लान के मुताबिक, ये एयर टैक्सी असल में छोटी इलेक्ट्रिक उड़ने वाली गाड़ियां होंगी जो हेलिकॉप्टर की तरह सीधी ऊपर उठेंगी और सीधे तय जगह पर उतर जाएंगी. CII की रिपोर्ट कहती है कि पहले इसे ट्रायल के तौर पर चलाया जाएगा, अगर सब कुछ ठीक रहा तो धीरे-धीरे आम लोगों के लिए इसे शुरू किया जा सकता है.इससे फायदा यह होगा कि ट्रैफिक से छुटकारा मिलेगा, वक्त बचेगा और इलेक्ट्रिक तकनीक होने की वजह से प्रदूषण भी कम होगा.

    आसान नहीं है एयर टैक्सी का रास्ता

    दिल्ली-एनसीआर में एयर टैक्सी का रास्ता इतना आसान नहीं है. दरअसल, दिल्ली का आसमान पहले से ही विमानों से भरा रहता है. ऐसे में एयर टैक्सी उड़ाने के लिए नए नियम, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और खास लैंडिंग जगहें बनानी होंगी. सरकार और विमानन एजेंसियों की मंजूरी के बिना ये सपना हकीकत नहीं बनेगा. रिपोर्ट के मुताबिक 2026 से 2028 के बीच इसका ट्रायल शुरू हो सकता है और अगर सब कुछ प्लान के मुताबिक चला तो आने वाले सालों में दिल्ली से गुरुग्राम जाना कुछ वैसा हो जाएगा, जैसे आज मेट्रो पर बस फर्क इतना होगा कि मेट्रो जमीन पर चलती है और ये टैक्सी आसमान में उड़ती दिखेगी.

  • संभल के पूर्व सीओ अनुज चौधरी को उच्च न्यायालय से राहत, FIR के आदेश पर रोक

    संभल के पूर्व सीओ अनुज चौधरी को उच्च न्यायालय से राहत, FIR के आदेश पर रोक


    नई दिल्ली । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने संभल के पूर्व पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) अनुज कुमार चौधरी समेत कई अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने संबंधी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी। चौधरी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति समित गोपाल ने यह आदेश पारित किया। चौधरी ने संभल के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) द्वारा नौ जनवरी को पारित आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

    उच्च न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 24 फरवरी की तारीख निर्धारित की। चौधरी की याचिका के अलावा, राज्य सरकार ने भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है। दोनों ही याचिका पर अदालत एक साथ सुनवाई कर रही है।

    क्या था मामला?
    तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने आलम नाम के युवक के पिता यामीन द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 173 (4) के तहत दायर अर्जी स्वीकार कर ली थी।
    अर्जी में, यामीन ने आरोप लगाया था कि 24 नवंबर 2024 को सुबह करीब पौने नौ बजे आलम जामा मस्जिद के पास ठेले पर ’रस्क’ और बिस्कुट बेच रहा था, तभी कुछ पुलिस कर्मियों ने अचानक भीड़ पर गोली चलानी शुरू कर दी।

    चौधरी और कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर को इस अर्जी में नामजद किया गया था। सीजेएम सुधीर ने अपने 11 पन्नों के आदेश में कहा था कि पुलिस आपराधिक कृत्यों के लिए आधिकारिक कर्तव्य की आड़ नहीं ले सकती।

    उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का संदर्भ लेते हुए सीजेएम ने कहा था कि किसी व्यक्ति पर गोलीबारी को आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं माना जा सकता। प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध होने को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा था कि उपयुक्त जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है।

  • '80-90 MLA ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को CM पद का मौका देने का किया अनुरोध', दिल्ली रवाना हुए डिप्टी सीएम

    '80-90 MLA ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को CM पद का मौका देने का किया अनुरोध', दिल्ली रवाना हुए डिप्टी सीएम


    नई दिल्ली । कर्नाटक में सीएम की कुर्सी को लेकर बयानबाजी तेज है। कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन ने कहा कि पार्टी के कम से कम 80 विधायकों ने मुख्यमंत्री पद के लिए उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का नाम हाई कमांड को दिया है। इस बीच, कर्नाटक के डिप्टी CM D K शिवकुमार दो दिनों की नई दिल्ली की यात्रा के लिए रवाना हो चुके हैं, दिल्ली में उनका पार्टी के शीर्ष नेताओं से मिलने का कार्यक्रम है।
    खुलकर नहीं बोल रहे डीके शिवकुमार
    उनके इस दौरे ने एक बार फिर राज्य में सीएम की कुर्सी में बदलाव की अटकलों को हवा दे दी है। हालांकि, डीके शिवकुमार इस दौरे के बारे में कुछ भी खुलकर नहीं बोल रहे हैं। नई दिल्ली जाने से पहले इतना ही कहा कि डिप्टी सीएम होने के साथ-साथ वो प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। उस नाते हाई कमांड से मिलने का अवसर मिलता रहता है।
    डीके शिवकुमार को देना चाहिए मौका- हुसैन
    डीके शिवकुमार को सीएम बनाए जाने के सवाल पर कांग्रेस विधायक हुसैन ने कहा, ‘हमने यह मामला हाई कमांड पर छोड़ दिया है। 80-90 विधायकों ने हाई कमांड से डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद के लिए मौका देने का अनुरोध किया है। हम एक अनुशासित पार्टी हैं और हमें शालीनता से व्यवहार करना होगा।

    राजनीति में अनुशासन से लेना होता है काम
    इसके साथ ही कांग्रेस विधायक ने कहा, ‘हमें यह पसंद नहीं है कि वह (यतींद्र सिद्धारमैया) बार-बार अपने पिता के पक्ष में बोलकर हाई कमांड को शर्मिंदा कर रहे हैं। हर पिता अपने बेटे से प्यार करता है और बेटा अपने पिता से, लेकिन राजनीति में हमें अनुशासन से काम लेना होता है। इस तरह के बयानों से दूसरों को उकसाना नहीं चाहिए।

    डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में दिया जाए मौका

    इकबाल हुसैन ने कहा, ‘हम सभी के मन में यही इच्छा है कि डीके शिवकुमार को मौका दिया जाए। हर कोई यही चाहता है, लेकिन हमें बयानबाजी से कोई भ्रम पैदा नहीं करना चाहिए, इसीलिए सब चुप हैं और कुछ लोग आपस में बात कर रहे हैं। मैं खुले दिल से, जैसा कि मैंने पहले दिन से कहा है कि यही मेरी इच्छा है कि डीके शिवकुमार को इसी कार्यकाल में मौका दिया जाए।’

    जानिए क्या बोले दूसरे विधायक
    कांग्रेस एमएलसी चन्नाराज हट्टीहोली ने भी कहा, ‘मेरी इच्छा है कि डीके शिवकुमार इस कार्यकाल में जल्द ही मुख्यमंत्री बनें।’ पिछले हफ्ते, यतींद्र सिद्धारमैया ने कहा था कि कांग्रेस हाई कमांड ने सिद्धारमैया को पूरे कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री बने रहने की हरी झंडी दे दी है।

    यतींद्र द्वारा अपने पिता के पक्ष में दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए डीके शिवकुमार ने कहा, ‘मैं उनकी हर बात का सम्मानपूर्वक स्वागत करता हूं। चूंकि उन्होंने इस तरह से बात की है जैसे वे हाई कमांड के प्रमुख हों, तो आइए हम उन्हें उसी रूप में स्वीकार करें।

    सीएम की कुर्सी को लेकर नवंबर 2025 से चालू है खींचतान
    कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर खींचतान नवंबर 2025 में शुरू हुई, जब सरकार ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ-साथ गृह मंत्री जी परमेश्वर भी शीर्ष पद की दौड़ में शामिल हैं।

  • लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी

    लिटान गांव में तंगखुल नागा पर हमला, विवाद पारंपरिक तरीके से सुलझा पर बैठक रद्द; हिंसा की आशंका बढ़ी


    नई दिल्ली । मणिपुर के उखरुल जिला में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है। सोमवार दोपहर लिटान सारेइखोंग गांव में हथियारबंद बदमाशों द्वारा कई घरों में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। अधिकारियों के मुताबिक,पहाड़ी इलाकों के आसपास सशस्त्र समूहों ने हवा में कई राउंड गोलियां भी चलाईं जिससे इलाके में दहशत फैल गई।स्थिति बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण जरूरी सामान लेकर पड़ोसी कांगपोकपी जिला के सुरक्षित इलाकों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए। तंगखुल समुदाय से जुड़े कई ग्रामीणों के भी अपने घर छोड़ने की सूचना है।

    शनिवार रात से हुई थी हिंसा की शुरुआत

    अधिकारियों के अनुसार,हिंसा की शुरुआत शनिवार रात को लिटान गांव में हुई,जब तंगखुल नागा समुदाय के एक सदस्य पर सात से आठ लोगों द्वारा कथित हमला किया गया। शुरुआत में पीड़ित पक्ष और लिटान सारेइखोंग के मुखिया के बीच मामला सुलझ गया था और पारंपरिक तरीकों से समाधान पर सहमति बनी थी। रविवार को इस संबंध में बैठक प्रस्तावित थी,लेकिन वह नहीं हो सकी।इसके बजाय,पास के सिकिबुंग गांव के कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर लिटान सारेइखोंग के मुखिया के आवास पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने लिटान थाने के पास से गुजरते हुए फायरिंग भी की।

    रविवार को लागू की गई निषेधाज्ञा

    रविवार शाम को दो आदिवासी समूहों के बीच पथराव की घटना के बाद प्रशासन को निषेधाज्ञा लागू करनी पड़ी। इसके बाद मध्यरात्रि के आसपास तंगखुल नागा समुदाय के कई घरों में कथित तौर पर आग लगा दी गई जबकि पास के इलाके में कुकी समुदाय के कुछ मकानों को भी नुकसान पहुंचा।

    हालात अभी भी तनावपूर्ण अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात

    जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नुकसान का आकलन किया जा रहा है और हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए महादेव लंबुई शांगकाई और लिटान की ओर जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। रविवार शाम को सुरक्षा बलों ने हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे।

    सीएम खेमचंद सिंह ने की शांति की अपील

    इस बीच वाई. खेमचंद सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए सभी समुदायों से संयम बरतने और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने बताया कि वे आरआईएमएस अस्पताल पहुंचे और घायलों से मुलाकात कर उनके इलाज के लिए हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

    कर्फ्यू जैसी पाबंदियां लागू

    उखरुल जिले के मजिस्ट्रेट द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि तंगखुल नगा और कुकी समुदायों के सदस्यों के बीच तनाव के कारण गांव में शांति और व्यवस्था भंग होने की आशंका है। जिला मजिस्ट्रेट आशीष दास ने अधिसूचना में कहा कि रविवार शाम सात बजे से अगले आदेश तक किसी भी व्यक्ति का अपने निवास स्थान से बाहर निकलना प्रतिबंधित है। इसमें कहा गया है कि यह आदेश सरकारी अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों पर लागू नहीं होगा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हथियारबंद लोग मकानों और वाहनों को आग लगाते तथा अत्याधुनिक हथियारों से फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं,हालांकि इन फुटेज की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।