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  • मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू

    मजदूरों को राहत: न्यूनतम वेतन में 1000 से 3000 रुपये तक इजाफा, नई दरें लागू


    नई दिल्ली। नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन और तनाव के बीच Yogi Adityanath सरकार ने मजदूरों के हित में बड़ा फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में 1000 रुपये से 3000 रुपये तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। यह नया शासनादेश 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में लागू होगा।

    नए वेतन दर क्या हैं?
    सरकार द्वारा तय किए गए नए वेतन के अनुसार Gautam Buddh Nagar और Ghaziabad में अकुशल मजदूरी ₹11,313 से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दी गई है। अर्धकुशल मजदूरी 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल मजदूरी 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये कर दी गई है। वहीं अन्य नगर निगम क्षेत्रों में अकुशल मजदूरी 13,006, रुपये अर्धकुशल 14,306 रुपये और कुशल रुपये 16,025 तय की गई है। अन्य जिलों में अकुशल मजदूरी रुपये 12,356, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल रुपये 15,224 निर्धारित की गई है।

    मजदूरों को मिली अंतरिम राहत
    सरकार का कहना है कि यह फैसला श्रमिकों और उद्योगों के बीच संतुलन बनाकर लिया गया है और इससे मजदूरों को फिलहाल अंतरिम राहत मिलेगी। आगे वेज बोर्ड के माध्यम से मजदूरी की व्यापक समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम वेतन ₹20,000 किए जाने की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं, जिनका कोई आधिकारिक आधार नहीं है। सरकार ने बताया कि केंद्र स्तर पर नए लेबर कोड के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम ‘फ्लोर वेज’ तय करने की प्रक्रिया जारी है।

    20,000 रुपये न्यूनतम वेतन की खबरें गलत
    मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने जनता से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। साथ ही नियोक्ताओं से कहा गया है कि वे श्रमिकों को समय पर वेतन, ओवरटाइम का भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा के सभी अधिकार सुनिश्चित करें, साथ ही महिला श्रमिकों की सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखें।

  • दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर

    दिल्ली से देहरादून अब मात्र ढाई घंटे में, आधुनिक एक्सप्रेसवे के शुभारंभ से बदली उत्तर भारत की सड़क यात्रा की तस्वीर


    नई दिल्ली:देश के सड़क नेटवर्क को नई दिशा देते हुए दिल्ली और देहरादून को जोड़ने वाले आधुनिक एक्सप्रेसवे का शुभारंभ किया गया है। लगभग 210 किलोमीटर लंबी यह ग्रीनफील्ड परियोजना राजधानी दिल्ली को उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से जोड़ने वाली सबसे तेज और आधुनिक सड़क सुविधाओं में से एक बन गई है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दोनों शहरों के बीच का सफर, जो पहले छह से सात घंटे में पूरा होता था, अब घटकर लगभग ढाई से तीन घंटे का रह गया है। इससे यात्रियों को समय की बड़ी बचत के साथ-साथ आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

    इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका अत्याधुनिक एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो राजाजी नेशनल पार्क के ऊपर से गुजरता है। लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीव जैसे हाथी, बाघ और तेंदुए बिना किसी बाधा के सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें। यह संरचना आधुनिक इंजीनियरिंग और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है और इसे देश की सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का प्रभाव केवल इन दो शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के आर्थिक और पर्यटन विकास के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा। इस मार्ग से हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। इससे पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। यह एक्सप्रेसवे कई प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों को जोड़ता है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत हो गई है।

    सुरक्षा और तकनीक के स्तर पर इस एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है। पूरे मार्ग पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और यातायात नियंत्रण के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया गया है। रात के समय बेहतर दृश्यता के लिए सौर ऊर्जा आधारित लाइटिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। इसके अलावा तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी के लिए विशेष तकनीक लागू की गई है ताकि सड़क दुर्घटनाओं को कम किया जा सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    इस परियोजना को ग्रीन कॉरिडोर मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। इसे घनी आबादी वाले क्षेत्रों से दूर डिजाइन किया गया है ताकि यात्रा निर्बाध और तेज बनी रहे। लगभग बारह हजार करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे आधुनिक भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

    यात्रियों की सुविधा के लिए मार्ग पर आधुनिक रेस्ट एरिया, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग पॉइंट और हरियाली से भरपूर विश्राम स्थल बनाए गए हैं। यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में उत्तर भारत के विकास और पर्यटन को भी नई दिशा देगा।

  • अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव

    अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में भड़की राजनीतिक हिंसा, बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़प में दो घायल, पूरे इलाके में तनाव


    नई दिल्ली :पश्चिम बंगाल  अमित शाह के रोड शो के बाद दुर्गापुर में बीजेपी और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच भड़की हिंसक झड़प, राजनीतिक तनाव के बीच दो लोग घायल, इलाके में भारी पुलिस बल तैनात

    पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो के बाद राजनीतिक माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के बीच तीखी झड़प हो गई। यह घटना बांकुरा मोड़ इलाके में हुई, जहां दोनों दलों के समर्थकों के बीच पहले कहासुनी हुई और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। इस झड़प में दोनों पक्षों के एक एक कार्यकर्ता घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच हल्की नोकझोंक हुई थी, लेकिन कुछ ही समय में स्थिति बेकाबू हो गई और हाथापाई शुरू हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय लोगों ने स्थिति को शांत करने की कोशिश की। हालांकि तब तक दोनों पक्षों को चोटें लग चुकी थीं।

    घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया गया। इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की आगे की हिंसा को रोका जा सके। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।

    घायलों को तुरंत दुर्गापुर के सब डिविजनल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद राजनीतिक स्तर पर भी आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक पक्ष ने दूसरे पर हमले का आरोप लगाते हुए कहा कि रोड शो के बाद बढ़ी भीड़ से विपक्षी दल असहज हो गया था, जिसके कारण यह झड़प हुई। वहीं दूसरे पक्ष की ओर से भी इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

    घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक नेताओं ने अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल जाना और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान दोनों दलों के समर्थकों के बीच तनाव का माहौल बना रहा। इलाके में फिलहाल स्थिति सामान्य लेकिन संवेदनशील बनी हुई है।

    पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में जुटा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि झड़प की शुरुआत किस कारण से हुई और इसमें कौन कौन शामिल थे। अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • कितनी पढ़ाई की डॉ. अंबेडकर ने? जानिए उनके जीवन के ऐतिहासिक योगदान

    कितनी पढ़ाई की डॉ. अंबेडकर ने? जानिए उनके जीवन के ऐतिहासिक योगदान


    नई दिल्ली। Dr. BR Ambedkar भारतीय इतिहास के सबसे शिक्षित और प्रभावशाली नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्होंने न सिर्फ उच्च शिक्षा हासिल की, बल्कि अपने ज्ञान और संघर्ष से देश के सामाजिक और संवैधानिक ढांचे को मजबूत किया।

    डॉ. अंबेडकर ने भारत के साथ-साथ विदेशों में भी पढ़ाई की। उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया और इसके बाद अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री हासिल की। इसके अलावा उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से भी डॉक्टरेट और कानून की पढ़ाई (Barrister-at-Law) पूरी की। उस दौर में इतनी उच्च शिक्षा हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि थी।

    डॉ. अंबेडकर जयंती के मौके पर पीएम मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    Dr. BR Ambedkar ने कितनी पढ़ाई की और क्यों माने जाते हैं सबसे शिक्षित नेता
    डॉ. अंबेडकर ने कुल मिलाकर कई उच्च डिग्रियां हासिल की थीं, जिनमें अर्थशास्त्र, कानून और राजनीति जैसे विषय शामिल थे। वे पहले भारतीयों में से थे जिन्होंने विदेश जाकर इतनी ऊंची शिक्षा प्राप्त की।

    उनकी पढ़ाई सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने समाज को समझने और सुधारने के लिए अपने ज्ञान का इस्तेमाल किया। शिक्षा को वे सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा हथियार मानते थे और उन्होंने दलितों व पिछड़े वर्गों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    संविधान निर्माण से लेकर सामाजिक सुधार तक योगदान
    डॉ. अंबेडकर का सबसे बड़ा योगदान भारतीय संविधान के निर्माण में रहा। उन्हें संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था और उन्होंने देश को एक मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा दिया।

    इसके अलावा उन्होंने दलितों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए लंबा संघर्ष किया। उन्होंने छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और समाज में समानता की नींव रखी।

    उन्होंने श्रम कानूनों, महिलाओं के अधिकार और शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण काम किए। रिजर्वेशन नीति और सामाजिक न्याय की अवधारणा को मजबूत करने में उनका योगदान बेहद अहम रहा।

    कुल मिलाकर, डॉ. भीमराव अंबेडकर न सिर्फ एक महान विद्वान थे, बल्कि ऐसे समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने अपने ज्ञान और संघर्ष से भारत को नई दिशा दी।

  • 1 घाटकोपर में डॉ. बीआर आंबेडकर जयंती पर भव्य आयोजन, हजारों लोगों की भागीदारी से गूंजा पूरा मैदान

    1 घाटकोपर में डॉ. बीआर आंबेडकर जयंती पर भव्य आयोजन, हजारों लोगों की भागीदारी से गूंजा पूरा मैदान

    नई दिल्ली : डॉ. बीआर आंबेडकर की 135वीं जयंती पर घाटकोपर में भव्य आयोजन, हजारों लोगों की भागीदारी से गूंजा पूरा मैदान घाटकोपर स्थित पुलिस ग्राउंड में डॉ. बीआर आंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर एक विशाल और भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें मुंबई के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यह आयोजन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामूहिक सहभागिता का एक प्रभावशाली उदाहरण बनकर सामने आया। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया और बाबासाहेब के विचारों को सम्मान देने के लिए एकजुटता का प्रदर्शन किया।

    कार्यक्रम का उद्देश्य डॉ. आंबेडकर के समानता, न्याय और सामाजिक सशक्तिकरण के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा। आयोजन को विभिन्न सामाजिक संगठनों और समितियों के सहयोग से संपन्न किया गया, जिसमें कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका रही। पूरे स्थल को विशेष रूप से सजाया गया था और हर ओर उत्साह और ऊर्जा का वातावरण दिखाई दे रहा था।

    इस अवसर पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने लोगों को विशेष रूप से आकर्षित किया। मंच पर प्रस्तुत गीतों और लोकनृत्यों ने माहौल को भावनात्मक और ऊर्जावान बना दिया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया और पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया। इसके साथ ही विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें शतरंज और क्रिकेट जैसे खेल शामिल रहे और बड़ी संख्या में युवाओं ने भाग लिया।

    कार्यक्रम में तकनीक आधारित प्रस्तुतियों को भी शामिल किया गया, जिनके माध्यम से डॉ. आंबेडकर के जीवन और ऐतिहासिक घटनाओं को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को उनके संघर्ष और सामाजिक योगदान से जोड़ने का कार्य किया और कार्यक्रम को एक आधुनिक दृष्टिकोण भी प्रदान किया।

    इस आयोजन में 135 किलोग्राम का विशाल केक भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिसे जयंती के प्रतीक के रूप में काटा गया। इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही, जिन्होंने बाबासाहेब के विचारों और उनके सामाजिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए। पूरे कार्यक्रम के दौरान अनुशासन और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।पूरे परिसर को सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया गया था। यहां भोजन स्टॉल, पुस्तक प्रदर्शनी, सामाजिक जागरूकता केंद्र और उद्यमिता से जुड़े कियोस्क लगाए गए थे, जिससे लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ ज्ञानवर्धन का अवसर भी मिला।

    इस आयोजन में युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। उन्होंने न केवल कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई बल्कि पूरे आयोजन को सफल बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता और जागरूकता का मजबूत संदेश दिया और डॉ. आंबेडकर के विचारों को एक बार फिर व्यापक स्तर पर जीवंत किया।

  • नोएडा प्रदर्शन के बाद यूपी सरकार का बड़ा फैसला, पूरे राज्य में बढ़ी न्यूनतम मजदूरी, श्रमिकों को मिला सीधा फायदा

    नोएडा प्रदर्शन के बाद यूपी सरकार का बड़ा फैसला, पूरे राज्य में बढ़ी न्यूनतम मजदूरी, श्रमिकों को मिला सीधा फायदा


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिक वर्ग के हित में एक महत्वपूर्ण और बड़ा निर्णय लेते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन को लागू कर दिया है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में हाल ही में हुए श्रमिक प्रदर्शनों और लगातार बढ़ती महंगाई को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उन्हें महंगाई के दबाव से राहत प्रदान करना है। संशोधित वेतन दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे राज्य में प्रभावी हो गई हैं।

    इस निर्णय की पृष्ठभूमि में औद्योगिक क्षेत्रों में हुए श्रमिक आंदोलनों को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। मजदूरों की मांगों और मौजूदा परिस्थितियों का गहन अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही यह संशोधन लागू किया गया है। प्रशासन का मानना है कि यह कदम श्रमिकों और उद्योग जगत दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा और आर्थिक स्थिरता पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

    गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे प्रमुख औद्योगिक जिलों में मजदूरी दरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। यहां अकुशल श्रमिकों का वेतन बढ़ाकर 13690 रुपये कर दिया गया है, जबकि अर्धकुशल श्रमिकों को 15059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16868 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलेगा। इस वृद्धि से श्रमिकों को लगभग 2000 से 3000 रुपये तक का प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है, जिससे उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में काफी राहत मिलेगी।

    प्रदेश के अन्य नगर निगम क्षेत्रों में भी मजदूरी दरों में संशोधन किया गया है। इन क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों का वेतन अब 13006 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों का 14306 रुपये और कुशल श्रमिकों का 16025 रुपये निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव संतुलित तरीके से लागू किया गया है ताकि सभी श्रेणियों के श्रमिकों को समान लाभ मिल सके और किसी भी वर्ग पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव न पड़े।

    इसके अलावा अन्य जिलों में भी न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की गई है। इन जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12356 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 13591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15224 रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। यह संशोधन पूरे राज्य में समान रूप से लागू किया गया है, जिससे श्रमिक वर्ग को व्यापक राहत मिलने की उम्मीद है।

    सरकार ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि उद्योग जगत पहले से ही बढ़ती उत्पादन लागत और कच्चे माल की कीमतों के दबाव का सामना कर रहा है, इसके बावजूद श्रमिकों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का दावा है कि इस कदम से श्रमिकों को राहत मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों पर किसी बड़े नकारात्मक प्रभाव की संभावना नहीं है।

    हालांकि सरकार ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन अफवाहों को भी खारिज कर दिया है, जिनमें न्यूनतम मजदूरी को 20000 रुपये तक बढ़ाने की बात कही जा रही थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल आधिकारिक रूप से जारी आदेश ही मान्य होंगे और वर्तमान में घोषित संशोधित दरें ही लागू रहेंगी।

    आगे की योजना के तहत सरकार ने संकेत दिए हैं कि यह बढ़ोतरी फिलहाल एक अंतरिम कदम है। भविष्य में वेज बोर्ड के माध्यम से व्यापक समीक्षा कर एक स्थायी और संतुलित वेतन संरचना तैयार की जाएगी, जिससे श्रमिकों को दीर्घकालिक लाभ सुनिश्चित हो सके।

  • ‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

    ‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) के अनोखे ऑफर ने राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। डॉक्टर ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनके क्लिनिक में आकर ‘जय श्री राम’ कहेगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की भारी छूट दी जाएगी। डॉक्टर ने अपने इस कदम को राज्य में ‘राजनीतिक बदलाव’ की उम्मीद से जोड़ा है।
    इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने यह छूट केवल दक्षिण कोलकाता स्थित अपने निजी चेंबर पर लागू की है। वे एक प्राइवेट अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक भी हैं, लेकिन वहां यह छूट लागू नहीं होगी।

    डॉ. हाजरा ने अपने क्लिनिक पर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दुपट्टा पहने नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर की है। डॉक्टर के मुताबिक, यह पोस्टर उनके ही एक मरीज ने तैयार किया था।
    डॉ. हाजरा ने कहा कि यह पूरी तरह से उनके दिमाग की उपज है। उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा: पिछले कई वर्षों में एक डॉक्टर के तौर पर मैंने मरीजों के सवाल झेले हैं कि आखिर उन्हें इलाज के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाना पड़ता है। जब भी मैं बंगाल के मरीजों को इलाज के लिए असम, ओडिशा या दक्षिण भारत जाते देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। इसके विपरीत दूसरे राज्यों से लोग यहां नहीं आते। मुझे लगता है कि इस चलन को बदलने की जरूरत है। डॉक्टर ने आगे कहा कि वह सीधे तौर पर भाजपा से नहीं जुड़े हैं, लेकिन वह भाजपा शासित अन्य राज्यों की प्रगति के प्रशंसक हैं।
    डॉ. हाजरा ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने गृह जिले पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला से भाजपा का टिकट मिलने की उम्मीद थी। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने लोगों को राज्य में बदलाव के लिए वोट करने हेतु प्रेरित करने का यह अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम की तारीफ भी की, लेकिन कहा कि अन्य राज्यों की विकास गति को देखते हुए बंगाल पिछड़ रहा है। उनके अनुसार, केंद्र और टीएमसी सरकार के बीच चल रही “खींचतान” का सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा है।
    तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पेशे से चिकित्सक डॉ. निर्मल माझी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया: डॉ. हाजरा अपनी जुटाई गई अपार संपत्ति की रक्षा करने के लिए भाजपा का पक्ष लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह खुद को बचाने के लिए भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ में घुसकर अपनी छवि साफ करना चाहते हैं। माझी ने यह भी दावा किया कि ऐसे कदमों से भाजपा को चुनाव जीतने में कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि जनता का समर्थन टीएमसी के साथ है।
    भाजपा के राज्यसभा सांसद और बंगाल के पूर्व भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने डॉ. हाजरा के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा: मुझे लगता है कि यह पहल अन्य डॉक्टरों को भी आगे आने और ऐसे फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की बेहतरी के लिए बदलाव लाया जा सके। बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

  • फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर घूम रहे दो आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार और जाली दस्तावेज किए बरामद

    फर्जी न्यायिक अधिकारी बनकर घूम रहे दो आरोपी गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने अवैध हथियार और जाली दस्तावेज किए बरामद


    नई दिल्ली:   राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें दो व्यक्तियों को फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि इनमें से एक व्यक्ति ने खुद को न्यायिक अधिकारी बताकर न केवल सरकारी पहचान का दुरुपयोग किया बल्कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था को गुमराह करने की कोशिश भी की। यह कार्रवाई राजधानी में बढ़ती सुरक्षा सतर्कता के बीच की गई है, जहां संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी।

    गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान झांसी जिले के रहने वाले 31 वर्षीय सूर्या अग्रवाल और 21 वर्षीय निखिल यादव के रूप में हुई है। दोनों पर आरोप है कि वे फर्जी पहचान और अवैध हथियारों के सहारे खुद को प्रभावशाली और आधिकारिक पदों से जुड़ा दिखाने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई संसद मार्ग थाना क्षेत्र में उस समय की गई जब एक संदिग्ध वाहन की गतिविधियों पर शक हुआ और उसे रोककर जांच शुरू की गई।

    जानकारी के अनुसार, एक एसयूवी वाहन बिना पंजीकरण नंबर प्लेट के चल रही थी और उस पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी, जो नियमों के खिलाफ है। वाहन पर न्यायिक अधिकारी से जुड़ा एक स्टिकर भी लगा हुआ था, जिससे संदेह और गहरा गया। इसी आधार पर पुलिस ने वाहन को रोककर तलाशी ली। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया।

    तलाशी में निखिल यादव के पास से एक पिस्तौल और चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए, जबकि सूर्या अग्रवाल के पास से पांच जिंदा कारतूस मिले। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया कि अग्रवाल खुद को वकील और एक सिविल जज के रूप में पेश कर रहा था। उसने एक न्यायिक पहचान पत्र और दिल्ली में हथियार ले जाने की अनुमति से जुड़ा एक दस्तावेज भी दिखाया, जिसे बाद में फर्जी पाया गया।

    पुलिस की सत्यापन प्रक्रिया में यह स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत किए गए पहचान पत्र और अनुमति पत्र पूरी तरह से जाली और डिजिटल रूप से बदले गए थे। हालांकि अग्रवाल के पास उत्तर प्रदेश में जारी एक वैध हथियार लाइसेंस था, लेकिन यह केवल उसी राज्य तक सीमित था और उसे दिल्ली में हथियार ले जाने की कोई अनुमति नहीं देता था। इस गंभीर अनियमितता के बाद दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

    इस पूरे प्रकरण में पुलिस ने न केवल अवैध हथियार बल्कि फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध स्टिकर और संबंधित वाहन को भी जब्त कर लिया है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे थे और खुद को प्रभावशाली पदों से जोड़कर पेश कर रहे थे।

    पुलिस अब इस बात की जांच में जुटी है कि इन फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में और कौन लोग शामिल हो सकते हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है। सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं ताकि इस तरह की घटनाओं को भविष्य में रोका जा सके।

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    संक्षिप्त विवरण

  • किन्नर समाज की आस्था का अनोखा केंद्र: जहां माता करती हैं मुर्गे की सवारी

    किन्नर समाज की आस्था का अनोखा केंद्र: जहां माता करती हैं मुर्गे की सवारी

    मेहसाणा। देश में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं जिनके लिए भक्तों की आस्था गहरी है. कुछ मंदिर रहस्‍यों से भरे है तो कुछ मंदिर आश्चर्य का कारण बनते हैं. इस कड़ी में हम गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित देवी बहुचरा माता मंदिर के बारे में जानेंगे जहां से किन्नर समाज की गहरी आस्था जुड़ी है. देश के कोने-कोने से यहां किन्नर पहुंचते हैं और बहुचरा माता को अर्धनारीश्वर के रूप में पूजकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें. आइए बहुचरा माता मंदिर के बारे में विस्तार से जानते हैं.

    बहुचरा देवी मंदिर की मान्यता
    स्‍थानीय मान्यताओं के अनुसार बहुचरा माता ने एक साथ बहुत सारे राक्षसों का अंत किया था जिसके कारण देवी का नाम बहुचरा पड़ा. मंद‍िर में बहुत सारे मुर्गे घूमते है जिसके कारण मंदिर को मुर्गों वाली देवी के रूप में भी जाना जाता है. माता बहुचरा मुर्गे की सवारी करती है. यह मंदिर किन्नरों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. मंदिर को लेकर मान्‍यता है क‍ि जो भी व्यक्ति इस मंदिर में पूजा कर माता का आशीर्वाद लेता है उसे अगले किसी भी जन्म में क‍िन्‍नर के रूप में नहीं जन्‍म लेना पड़ता. वहीं, संतान प्राप्ति की इच्छा भी देवी बहुचरा पूरी करती है. मान्यता है कि जब माता के आशीर्वाद से संतान प्राप्ति हो जाती है तो बच्चे के केश मंदिर में छोड़े जाती है और मंदिर में मुर्गों के दान भी किया जाता है.
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  • भीषण गर्मी पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्रहार, दोपहर 12 से 4 बजे तक आउटडोर काम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू

    भीषण गर्मी पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा प्रहार, दोपहर 12 से 4 बजे तक आउटडोर काम पर पूर्ण प्रतिबंध लागू


    नई दिल्ली:   महाराष्ट्र में बढ़ती गर्मी और लगातार तेज हो रही हीटवेव के खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने श्रमिकों और आम जनता की सुरक्षा के लिए बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राज्य में तापमान लगातार सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है और कई क्षेत्रों में लू की स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है। इसी को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले आउटडोर श्रमिकों के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP लागू करने की घोषणा की गई है, ताकि गर्मी के सबसे खतरनाक समय में लोगों की जान और स्वास्थ्य की रक्षा की जा सके।

    नई व्यवस्था के अनुसार ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक सभी बाहरी कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। यह समय दिन का सबसे अधिक गर्म हिस्सा माना जाता है, जब लू लगने और शरीर में पानी की कमी जैसी समस्याओं का खतरा सबसे अधिक होता है। इसके अलावा कामकाजी समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब श्रमिक सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से 8 बजे तक ही काम कर सकेंगे। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रमिक अत्यधिक गर्मी के संपर्क में न आएं और सुरक्षित वातावरण में अपना काम पूरा कर सकें।

    सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, बाजारों और ठेला वेंडिंग जोन में इन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। स्थानीय प्रशासन को निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके। प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल एक अस्थायी व्यवस्था नहीं बल्कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए जरूरी सुरक्षा उपाय है।

    राज्य के कई हिस्सों में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित बताए जा रहे हैं, जहां तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है। वहीं मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक जैसे बड़े शहरों में शहरी ताप द्वीप प्रभाव के कारण तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। इस कारण शहरी क्षेत्रों में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है।

    मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार कुछ इलाकों में तापमान 47 से 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जो स्वास्थ्य के लिहाज से बेहद खतरनाक स्थिति मानी जाती है। ऐसे हालात में सरकार ने पहले से ही तैयारी तेज कर दी है ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

    राज्य सरकार ने 15 जिलों को हाई रिस्क जोन घोषित किया है, जिनमें लातूर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, जलगांव, नंदुरबार, धुले और नांदेड़ शामिल हैं। इन जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और जरूरत पड़ने पर इस SOP को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है।

    गर्मी से राहत देने के लिए प्रशासन ने कई स्तरों पर तैयारी शुरू की है। प्रमुख बाजारों, ट्रैफिक जंक्शनों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से ओआरएस और इलेक्ट्रोलाइट्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि लोगों को डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। इसके साथ ही श्रमिक क्षेत्रों में अस्थायी छाया, आराम स्थल और ठंडक की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है।

    महिला कामगारों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपातकालीन एंबुलेंस सेवाओं को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्थिति में तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    सरकार का मानना है कि यह SOP न केवल तत्काल राहत प्रदान करेगी बल्कि लंबे समय में हीटवेव से होने वाले जोखिमों को भी कम करने में मदद करेगी। बदलते मौसम के इस दौर में यह कदम श्रमिक वर्ग की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।