Category: National

  • भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, टैरिफ में कटौती और सहयोग बढ़ाने पर जोर

    भारत-अमेरिका रिश्तों को नई गति, टैरिफ में कटौती और सहयोग बढ़ाने पर जोर


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच आर्थिक व रणनीतिक सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (American President Donald Trump) से हुई हालिया फोन वार्ता को उपयोगी और सौहार्दपूर्ण बताया है। सोशल मीडिया पर साझा संदेश में उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान द्विपक्षीय व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।

    प्रधानमंत्री ने खुशी जताई कि “मेक इन इंडिया” उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18% किए जाने की घोषणा भारतीय निर्यात के लिए फायदेमंद होगी। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम बताया और इसके लिए अमेरिकी नेतृत्व का आभार व्यक्त किया।

    संदेश में यह भी रेखांकित किया गया कि जब दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और प्रमुख लोकतंत्र साथ मिलकर काम करते हैं तो इससे जनता को लाभ और आपसी सहयोग के नए अवसर पैदा होते हैं। भारत ने वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रयासों में अमेरिका के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

    प्रधानमंत्री ने भविष्य में द्विपक्षीय साझेदारी को “अभूतपूर्व ऊंचाइयों” तक ले जाने की उम्मीद जताई। विश्लेषकों का मानना है कि टैरिफ में संभावित राहत और बढ़ता आर्थिक सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और निवेश के क्षेत्रों में नए अवसर खोल सकता है।

  • अनंत सिंह कल लेंगे विधायक पद की शपथ, एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली अनुमति

    अनंत सिंह कल लेंगे विधायक पद की शपथ, एमपी-एमएलए कोर्ट से मिली अनुमति


    नई दिल्ली । 2025 के विधानसभा चुनाव में मोकामा सीट से जीत दर्ज करने वाले विधायक अनंत सिंह कल मंगलवार, 03 फरवरी, 2026 11 बजे विधानसभा में विधायक पद की शपथ लेंगे. इसके लिए उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट से अनुमति मिल गई है. वर्तमान में वह दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में बेउर जेल में बंद हैं. शपथ के लिए उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच विधानसभा लाया जाएगा.

    खारिज हो चुकी है जमानत याचिका

    बता दें कि जिस दुलारचंद यादव के केस में अनंत सिंह जेल में हैं जिनकी हत्या विधानसभा चुनाव के दौरान 30 अक्टूबर को हुई थी. इस कांड में उनकी गिरफ्तारी हुई और तब से वे जेल में हैं. हालांकि जमानत के लिए सिविल कोर्ट में याचिका दायर की गई थी लेकिन वह खारिज हो गई.

    चुनाव में प्रचार भी नहीं कर सके थे अनंत सिंह
    मोकामा सीट से अनंत सिंह की जीत होगी ये पार्टी और समर्थक जान रहे थे. वे जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़े थे. जब दुलारचंद यादव की हत्या हुई तो आरोप लगने के बाद अनंत सिंह जेल चले गए थे और ऐसे में वे प्रचार नहीं कर पाए थे. उनके लिए ललन सिंह जैसे नेताओं ने क्षेत्र में जनसभा की थी. नतीजा आया तो बंपर अंतर से अनंत सिंह की जीत हुई.

    अनंत सिंह से पहले उनकी पत्नी मोकामा से विधायक थीं. उपचुनाव में उन्हें जीत मिली थी. 2025 के चुनाव के दौरान जब अनंत सिंह जेल से बाहर थे तो उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला लिया. जेडीयू से टिकट मिला तो उनके सामने आरजेडी की ओर से वीणा देवी को पार्टी ने उतार दिया. हालांकि वह जीत नहीं पाईं. अब अनंत सिंह को शपथ के लिए मौका मिल गया है. नतीजे आने के बाद जेल में रहने के चलते वे शपथ नहीं ले पाए थे. अनंत सिंह हमेशा चर्चा में रहते हैं. अभी कुछ दिनों पहले सिगरेट पीते हुए उनका एक वीडियो सामने आया था जिसके बाद विपक्ष ने घेरा भी था.

  • UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र

    UP SIR के इन आंकड़ों ने बढ़ाई अखिलेश यादव की टेंशन! इस वजह से अब कर रहे फॉर्म 7 का जिक्र


    नई दिल्ली । समाजवादी पार्टी के प्रमुख और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने चुनावी रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन SIR के दौरान फॉर्म-7 के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने मांग की है कि उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए, जिनके बारे में उनका दावा है कि वे गैर-कानूनी तरीके से वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहे हैं.

    1 फरवरी और 2 फरवरी को जारी बयानों में कन्नौज सांसद ने आरोप लगाया कि PDA और अल्पसंख्यक वोटरों के नाम हटाने के लिए नकली दस्तखत के साथ फॉर्म-7 के आवेदन जमा किए जा रहे हैं. उन्होंने इस मुद्दे को एक बड़ा धोखा बताया, न्यायिक संज्ञान लेने की मांग की और वोटर्स से मतदाता लिस्ट में अपने नाम वेरिफाई करने को कहा. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों से भी संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई करने की अपील की.अखिलेश ने कहा कि नामों को गलत तरीके से हटाने में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए. लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी को इस मुद्दे पर मिला अखिलेश यादव का साथ, जमकर हुआ हंगामा

    किस ओर इशारा कर रहे यूपी एसआईआर के आंकड़े?

    इन आरोपों के बीच, 6 जनवरी से 31 जनवरी 2026 के बीच फॉर्म-7 जमा करने का दिन-वार डेटा दिखाता है कि पूरे महीने में नाम हटाने और आपत्ति के आवेदनों में कैसे बढ़ोतरी हुई. 6, 7, और 8 जनवरी को कोई फॉर्म दर्ज नहीं किया गया. 9 जनवरी को 175 आवेदनों के साथ शुरू हुई, जबकि 10 जनवरी को कोई अतिरिक्त बढ़ोतरी नहीं हुई. 11 जनवरी को 2,236 नए आवेदनों के साथ इसमें अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई. इसके बाद 12 जनवरी (677), 13 जनवरी (734), 14 जनवरी (736), 15 जनवरी (889), और 16 जनवरी (906) फॉर्म जमा हुए.

    महीने के दूसरे आधे हिस्से में यह गति और तेज हो गई. 17 जनवरी को 1,970 नए आवेदन दाखिल किए गए, इसके बाद 18 जनवरी को 3,865 आवेदन आए. 19 जनवरी से रोज़ाना के आंकड़े ज़्यादा रहे: 19 जनवरी (2,674), 20 जनवरी (2,670), 21 जनवरी (2,848), 22 जनवरी (2,787), 23 जनवरी (2,318), 24 जनवरी (2,861), 25 जनवरी (2,797), और 26 जनवरी (2,947). आखिरी दिनों में और बढ़ोतरी देखी गई-27 जनवरी (3,317), 28 जनवरी (3,424), 29 जनवरी (3,551), 30 जनवरी (4,288), और 31 जनवरी (8,503), जो एक दिन में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी थी. 31 जनवरी तक कुल मिलाकर 57,173 फॉर्म-7 एप्लीकेशन जमा हो चुके थे.

    क्या है फॉर्म 7?

    फॉर्म 7 भारत के चुनाव आयोग द्वारा उपलब्ध कराया गया आवेदन पत्र है जिसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाने या वोटर लिस्ट में किसी का नाम शामिल करने पर आपत्ति जताने के लिए किया जाता है. इसे तब भरा जाता है जब अमुक लगता है कि किसी मतदाता का नाम लिस्ट में नहीं होना चाहिए. ऐसा तब हो सकता है जब मतदाता की मौत हो गई हो, वह हमेशा के लिए दूसरी जगह चला गया हो, उसका नाम दो बार दर्ज हो, या वह किसी और वजह से बतौर मतदाता पंजीकृत होने के योग्य न हो. कोई मतदाता, सूची से अपना नाम हटवाने के लिए भी फॉर्म 7 का इस्तेमाल कर सकता है.

  • महाराष्ट्र: NCP के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद! 'पटेल' का विरोध, इस नाम की चर्चा तेज

    महाराष्ट्र: NCP के अध्यक्ष पद को लेकर मतभेद! 'पटेल' का विरोध, इस नाम की चर्चा तेज


    नई दिल्ली । उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं. उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक दल का नेता सर्वसम्मति से चुना गया. इसके बाद सुनेत्रा पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. राष्ट्रवादी कांग्रेस के दिवंगत नेता अजित पवार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे. अब उनके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर किसे नियुक्त किया जाएगा, इस पर चर्चा शुरू हो गई है. पिछले दो दिनों से राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रफुल्ल पटेल का नाम सामने आ रहा था. कुछ खबरों में दावा किया गया कि उनकी नियुक्ति हो चुकी है. लेकिन इसके बाद पार्टी में विवाद खड़ा हो गया और प्रफुल्ल पटेल को खुद इन खबरों का खंडन करना पड़ा.

    प्रफुल्ल पटेल के नाम की थी चर्चा

    प्रफुल्ल पटेल राष्ट्रवादी कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष हैं. अजित पवार के बाद उनके अध्यक्ष बनने की चर्चा थी, लेकिन पार्टी के अंदर विरोध के बाद पटेल ने इस पर विराम लगाने की कोशिश की. इसके बावजूद पार्टी की कमान किसके हाथ जाएगी, इस पर नेताओं में मतभेद साफ नजर आ रहे हैं.

    राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ सुनेत्रा पवार होंगी- कोकाटे

    राष्ट्रवादी कांग्रेस के विधायक और पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे ने इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाया. उन्होंने कहा, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिर्फ और सिर्फ सुनेत्रा पवार ही होंगी. दूसरा-तीसरा कोई नहीं. दोनों राष्ट्रवादी एक साथ आ जाएं, तब भी अध्यक्ष पद सुनेत्रा वहिनी के पास ही रहेगाजब उनसे पूछा गया कि क्या उनके समर्थन में विधायकों और पदाधिकारियों के हस्ताक्षर जुटाए जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा, हस्ताक्षर हों या न हों, अध्यक्ष पद पर सुनेत्रा पवार ही आएंगी. कोकाटे ने यह भी कहा कि सुनेत्रा पवार अजित पवार की राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगी और पार्टी की सर्वेसर्वा बनेंगी.

    पदाधिकारियों ने भी पत्र लिखकर मांग की

    अब केवल विधायक ही नहीं, बल्कि पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों ने भी सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई है. एनसीपी के सांस्कृतिक सेल के अध्यक्ष बाबासाहेब पाटील के नेतृत्व में 30 से अधिक पदाधिकारियों ने पत्र लिखकर सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त करने की मांग की. यह पत्र वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को भेजा गया है. पत्र में कहा गया, अजित पवार के निधन से पार्टी पर दुख का साया है. ऐसे कठिन समय में पार्टी को मजबूत, संयमी और सभी को साथ रखने वाला नेतृत्व चाहिए. सुनेत्रा पवार ने प्रतिकूल परिस्थितियों में उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालकर अपनी प्रतिबद्धता सिद्ध की है. उनके अनुभव, निष्ठा और कार्यकर्ताओं के प्रति अपनापन को देखते हुए वे राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए उपयुक्त हैं. इसलिए पार्टी के विभिन्न सेल के पदाधिकारी एकमत से मांग करते हैं कि सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया जाए.

    पटेल के नाम पर विरोध?

    वहीं प्रफुल्ल पटेल ने अध्यक्ष पद की खबरों का खंडन करते हुए कहा, मेरे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की खबरें पूरी तरह निराधार हैं. एनसीपी एक लोकतांत्रिक संस्था है. इतना बड़ा निर्णय वरिष्ठ नेतृत्व, विधायकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए ही लिया जाएगा. पार्टी की स्थापित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा

    प्रफुल्ल पटेल को करना चाहिए सुनेत्रा पवार का समर्थन

    इसके बाद सुनेत्रा पवार को अध्यक्ष बनाने की मांग और तेज हो गई. पार्टी प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने कहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद अजित दादा का था. उनके बाद यह जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को ही स्वीकार करनी चाहिए. प्रफुल्ल पटेल का विरोध नहीं है, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुनेत्रा पवार का समर्थन करते हुए काम करना चाहिए.

    एनसीपी अध्यक्ष को लेकर विपक्ष ने क्या कहा?
    वहीं इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी टिप्पणी की.मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा, राष्ट्रवादी कांग्रेस मराठी मिट्टी से उभरा हुआ संघर्षशील कार्यकर्ताओं का पक्ष है. ऐसे पक्ष का अध्यक्ष मराठी चेहरा होना चाहिए. वहपाटील हो सकता है, लेकिनपटेल नहीं. उनके अलावा शिवसेना उद्धव गुट सांसद संजय राउत ने भी कहा कि पार्टी की कमान प्रफुल्ल पटेल के हाथ में नहीं जानी चाहिए.
  • मैं आपका सलाहकार नहीं हूं; राहुल गांधी के तंज पर भड़के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

    मैं आपका सलाहकार नहीं हूं; राहुल गांधी के तंज पर भड़के लोकसभा स्पीकर ओम बिरला

    नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा में हो रही चर्चा के दौरान नेता विपक्ष राहुल गांधी ने जब पूर्व सेना प्रमुख मनोज नरवणे का जिक्र करते हुए डोकलाम में चीनी सेना के टैंक की उपस्थिति का उल्लेख किया तो सदन में हंगामा मच गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उनके बयान पर आपत्ति जताई। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल के बयान पर आपत्ति जताई। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के निमय संख्या 349 का जिक्र किया और कहा कि नेता प्रतिपक्ष इसका उल्लेख नहीं कर सकते हैं।
    सदन में इस पर हंगामा चलता रहा। स्पीकर ने कई बार राहुल गांधी को नियम 349 का हवाला देते हुए जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला नहीं देने की हिदायत दी लेकिन राहुल गांधी बार-बार वैसा ही करते रहे।इस दौरान बवाल इतना बढ़ा कि राहुल गांधी ने स्पीकर ओम बिरला से कहा कि तो फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना है। इस पर स्पीकर ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि मैं आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बात करनी चाहिए जिस पर यहां चर्चा हो रही है।

    ये भी पढ़ें:चीन पर राहुल गांधी के दावे से लोकसभा में हंगामा राजनाथ सिंह ने कर दिया चैलेंज
    आखिर कौन सा नियम हमें चीन पर चर्चा से रोक रहा?

    राहुल गांधी ने सवाल किया कि आखिर कौन सा नियम हमें भारत और चीन के संबंधों पर बात करने से रोकता है। इस पर स्पीकर ने कहा कि आप ऐसी पुस्तक का जिक्र कर रहे हैं जो रक्षा मंत्री के अनुसार प्रकाशित ही नहीं हुई है। इसके अलावा आप जिस मुद्दे की बात कर रहे हैं उसका यहां चल रहे विषय से कोई संबंध ही नहीं है। राहुल गांधी फिर भी अड़े रहे और स्पीकर से कहा कि आप यह कहना चाहते हैं कि राष्ट्रपति के अभिभाषण का विदेश नीति से कोई लेना-देना ही नहीं है। स्पीकर ने इस पर जवाब दिया कि आप विषय पर बात करें। आपको इस संबंध में कई बार नियम से अवगत कराया जा चुका है।
    अखिलेश ने दिया राहुल का साथ
    राहुल गांधी ने इसके बाद एक मैग्जिन में छपे आर्टिकल का उल्लेख करते हुए फिर से जनरल नरवणे की बात उठाई। इस पर भी ट्रेजरी बेंच ने हंगामा करना शुरू कर दिया। रक्षा मंत्री ने इस पर भी आपत्ति जताई और कहा कि ऐसा करने की इजाजत नेता प्रतिपक्ष को नहीं दी जानी चाहिए। इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में उठ खड़े हुए।
    उन्होंने चीन के सवाल को सेंसिटिव बताते हुए कहा कि अगर कोई सुझाव देशहित में है तो विपक्ष के नेता को पढ़ने देना चाहिए। अखिलेश ने डॉक्टर लोहिया से लेकर मुलायम सिंह यादव तक का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें चीन से सावधान रहना है। इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेण रिजिजू ने कहा कि हम सुनने के लिए बैठे हैं लेकिन आसन द्वारा व्यवस्था दिए जाने के बाद भी ये फिर से वही चीज पढ़ रहे हैं ऐसे सदन कैसे चलेगा। इसके बाद भी सदन में बहुत देर तक गतिरोध बना रहा। यह देखते हुए स्पीकर ने सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक स्थगित कर दी।

  • गोरखपुर में रामकथा के बीच 'युद्धघोष': टीम को मिली धमकी पर भड़के राजन जी महाराज, मंच से दी खुली चुनौती किसने मां का दूध पिया है?

    गोरखपुर में रामकथा के बीच 'युद्धघोष': टीम को मिली धमकी पर भड़के राजन जी महाराज, मंच से दी खुली चुनौती किसने मां का दूध पिया है?


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित चंपा देवी पार्क में चल रही भव्य रामकथा के दौरान सोमवार को एक ऐसी घटना घटी, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया। प्रसिद्ध कथावाचक राजन जी महाराज अपनी टीम के सदस्यों को मिली ‘गोली मारने की धमकी’ पर इस कदर आहत और क्रोधित हुए कि उन्होंने व्यासपीठ की मर्यादा के साथ साथ एक साहसी योद्धा की तरह मंच से ही चुनौती दे डाली। महाराज का यह बयान कौन मारेगा गोली, किसने मां का दूध पिया है अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    विवाद की जड़: मंच पर चढ़ने की होड़ और अभद्रता जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत बेहद मामूली बात से हुई थी। कथा के दौरान कुछ लोग बार-बार मंच पर चढ़ने का प्रयास कर रहे थे। अव्यवस्था को देखते हुए जब महाराज की टीम के सदस्यों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो बहस बढ़ गई। आरोप है कि इस दौरान कुछ अराजक तत्वों ने न केवल बदतमीजी की, बल्कि राजन जी महाराज के सहयोगियों और उनके परिवार तक को जान से मारने की धमकी दे डाली।

    16 साल के सफर में पहली बार मिली ऐसी चुनौती मंच से अपनी व्यथा सुनाते हुए राजन जी महाराज भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि अपने 16 वर्षों के कथावाचन के सफर में उन्होंने आज तक ऐसी मर्यादाहीन स्थिति का सामना नहीं किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से खुलासा किया कि उनके एक सहयोगी को गोली मारने की धमकी दी गई है। महाराज ने कड़े शब्दों में कहा, “हम यहाँ प्रेम और श्रद्धा की गंगा बहाने आए हैं, लेकिन अगर कोई हमारे सहयोगियों को डराने की कोशिश करेगा, तो हम पीछे नहीं हटेंगे। गोली मारकर दिखाओ, किसने मां का दूध पिया है!

    आयोजकों की समझाइश के बाद शुरू हुई कथा धमकी और अव्यवस्था से आहत होकर राजन जी महाराज ने शुरुआत में कथा आगे बढ़ाने से मना कर दिया था। कार्यक्रम में तनावपूर्ण स्थिति देख आयोजकों और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप किया। काफी मान मनौव्वल और सुरक्षा के पुख्ता आश्वासन के बाद महाराज दोबारा व्यासपीठ पर बैठे। उन्होंने श्रोताओं से मर्यादा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि वे केवल भक्ति का संदेश देने आए हैं, किसी विवाद का हिस्सा बनने नहीं।

    फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है और मंच के पास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। सोशल मीडिया पर लोग राजन जी महाराज के इस साहसी स्टैंड की सराहना कर रहे हैं, तो कुछ लोग धार्मिक आयोजनों में ऐसी अव्यवस्था पर चिंता जता रहे हैं।

  • बजट सत्र के पहले दिन तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे, जानिए वजह

    बजट सत्र के पहले दिन तेजस्वी यादव व्हीलचेयर पर पहुंचे, जानिए वजह


    नई दिल्ली। बिहार विधानसभा का बजट सत्र आज 2 फरवरी 2026 से शुरू हो गया और पहले दिन ही चर्चा का केंद्र बने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। उन्हें व्हीलचेयर पर विधानसभा परिसर में आते देखा गया।  RJD ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि तेजस्वी यादव के पैर में चोट लगी है। पार्टी के अनुसार यह चोट 25 जनवरी को लगी थी, जिससे उनके पैर के अंगूठे का नाखून उखड़ गया। चोट के कारण उन्हें चलने और लंबे समय तक खड़े रहने में कठिनाई हो रही है। तेजस्वी यादव फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं और धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं। यही वजह है कि उन्होंने विधानसभा में व्हीलचेयर का इस्तेमाल किया।

    बजट सत्र का पहला दिन
    सत्र के पहले दिन राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने दोनों सदनों के सदस्यों को संयुक्त रूप से सेंट्रल हॉल में संबोधित किया। वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव 3 फरवरी को वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। इस बजट सत्र में न केवल वित्तीय मुद्दों पर चर्चा होगी बल्कि विकास योजनाओं और विभिन्न विभागों के बजट पर भी बहस होगी। यह सत्र 27 फरवरी तक चलेगा।

    विपक्ष की एकजुटता पर रहेगी नजर

    तेजस्वी यादव को शीतकालीन सत्र में नेता प्रतिपक्ष चुना गया था, लेकिन कांग्रेस ने RJD से दूरी बनाकर अलग रणनीति अपनाई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बजट सत्र में विपक्ष एकजुट होकर मुद्दों पर आवाज उठाता है या अलग-अलग रुख अपनाता है। AIMIM पहले ही विपक्ष से अलग हो चुकी है।

  • कैसा होता है टाइप-8 सरकारी बंगला, जिसमें शिफ्ट होंगे नितिन नवीन? जानें इसकी खासियत

    कैसा होता है टाइप-8 सरकारी बंगला, जिसमें शिफ्ट होंगे नितिन नवीन? जानें इसकी खासियत


    नई दिल्‍ली । दिल्ली के लुटियंस जोन में बने कुछ सरकारी बंगले सिर्फ घर नहीं होते, वे सत्ता, जिम्मेदारी और व्यवस्था का प्रतीक माने जाते हैं. इन्हीं में शामिल है टाइप-8 सरकारी बंगला, जिसकी चर्चा इन दिनों तेज है. सवाल है कि ऐसा क्या खास होता है इस बंगले में, जिसे हर किसी को नहीं बल्कि चुनिंदा संवैधानिक और राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों को ही मिलता है? आइए जानते हैं उस घर की कहानी के बारे में, जिसमें नितिन नवीन शिफ्ट होने जा रहे हैं.

    नितिन नवीन को मिला नया सरकारी आवास

    भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन नए साल में दिल्ली शिफ्ट होने जा रहे हैं. उन्हें लुटियंस दिल्ली के सुनेहरी बाग रोड पर स्थित बंगला नंबर 9 आवंटित किया गया है. यह बंगला टाइप-8 श्रेणी में आता है, जिसे केंद्र सरकार के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित सरकारी आवासों में गिना जाता है. जिसमें वे औपचारिक रूप से इस आवास में प्रवेश करेंगे.

    क्या होता है टाइप-8 सरकारी बंगला?

    टाइप-8 बंगला केंद्र सरकार की आवासीय व्यवस्था की सबसे ऊंची श्रेणी मानी जाती है. यह बंगला आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों, पूर्व राष्ट्रपतियों, राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के अध्यक्षों और बेहद वरिष्ठ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को ही दिया जाता है. इन बंगलों का कुल क्षेत्रफल करीब 8000 से 8500 वर्ग फुट तक होता है, जो इसे बेहद विशाल बनाता है.

    अंदर से कैसा होता है यह बंगला?

    टाइप-8 बंगले में आम तौर पर 8 बड़े कमरे होते हैं. इनमें 5 से 6 बेडरूम, एक विशाल ड्राइंग रूम, अलग डाइनिंग एरिया, स्टडी रूम और आधुनिक किचन शामिल होती है. इसके अलावा निजी गैराज, स्टोर रूम और स्टाफ क्वार्टर की भी अलग व्यवस्था होती है. बंगले के चारों ओर फैला हरा-भरा लॉन इसे और खास बनाता है.

    सुरक्षा व्यवस्था रहती है बेहद मजबूत

    टाइप-8 बंगलों की सुरक्षा आम सरकारी आवासों से कहीं ज्यादा कड़ी होती है. यहां 24 घंटे सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. पूरे परिसर में आधुनिक CCTV कैमरे लगे होते हैं और निगरानी के लिए कंट्रोल रूम की व्यवस्था भी होती है. मेहमानों और कर्मचारियों के लिए अलग प्रवेश और ठहरने की जगह बनाई जाती है, ताकि गोपनीयता और सुरक्षा बनी रहे.

    ब्रिटिश दौर की वास्तुकला की पहचान

    लुटियंस दिल्ली में बने टाइप-8 बंगले ब्रिटिश काल की स्थापत्य शैली को आज भी जीवित रखते हैं. ऊंची छतें, चौड़े बरामदे, मजबूत दीवारें और बड़े दरवाजे इनकी पहचान हैं. इन बंगलों के आसपास पुराने पेड़, खुली जगह और शांत वातावरण होता है, जो दिल्ली के बाकी हिस्सों से इन्हें अलग बनाता है.

    लुटियंस जोन में कहां-कहां हैं ये बंगले?

    दिल्ली का लुटियंस जोन देश का सबसे वीआईपी इलाका माना जाता है. टाइप-8 बंगले जनपथ, अकबर रोड, मोतीलाल नेहरू मार्ग, सुनेहरी बाग रोड, सफदरजंग रोड, कृष्ण मेनन मार्ग, त्यागराज मार्ग और तुगलक रोड जैसे इलाकों में स्थित हैं. ये सभी जगहें संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और प्रमुख मंत्रालयों के बेहद करीब हैं.

    कितने हैं टाइप-8 बंगले?

    लुटियंस दिल्ली में कुल तीन हजार से ज्यादा सरकारी आवास मौजूद हैं, जिनमें अलग-अलग श्रेणियों के फ्लैट और बंगले शामिल हैं. इनमें से टाइप-8 बंगले सबसे कम संख्या में हैं. जानकारी के अनुसार, ऐसे बंगलों की संख्या करीब 100 से कुछ अधिक है, यही वजह है कि इन्हें मिलना अपने आप में खास माना जाता है.

  • हम रेड कारपेट बिछाते हैं, वो ब्लैक से कर रहे स्वागत…', दिल्ली पहुंचते ही गुस्से से लाल हुईं ममता बनर्जी

    हम रेड कारपेट बिछाते हैं, वो ब्लैक से कर रहे स्वागत…', दिल्ली पहुंचते ही गुस्से से लाल हुईं ममता बनर्जी


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दिल्ली पहुंचते ही केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि वह चाणक्यपुरी स्थित बंग भवन जा रही हैं, जहां बंगाल से आए लोगों से मिलेंगी और दिल्ली पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए जा रहे अत्याचारों की जानकारी लेंगी. ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है और केंद्रीय एजेंसियां बीजेपी के इशारे पर काम कर रही हैं.

    रेड कार्पेट बनाम ब्लैक कार्पेट का आरोप

    ममता बनर्जी ने कहा कि जब केंद्रीय गृह मंत्री पश्चिम बंगाल आते हैं तो राज्य सरकार उनका रेड कार्पेट से स्वागत करती है, लेकिन जब बंगाल के लोग या जनप्रतिनिधि दिल्ली आते हैं तो उनके साथ ‘ब्लैक कार्पेट’ जैसा व्यवहार किया जाता है. उन्होंने इसे अपमानजनक और पक्षपातपूर्ण बताया.

    दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप
    मुख्यमंत्री ने दिल्ली पुलिस पर बंगाल के लोगों के साथ ज्यादती करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पुलिस को संयम बरतना चाहिए और बंगाल से आए लोगों को परेशान करना बंद करना चाहिए. ममता ने दावा किया कि कई मामलों में निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है.

    बीजेपी के टूल की तरह काम कर रहीं एजेंसियां

    ममता बनर्जी ने कहा कि दिल्ली पुलिस और देश की अन्य जांच एजेंसियां निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहीं, बल्कि बीजेपी के राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक स्थिति है.

    जरूरत पड़ी तो मैं खुद लड़ूंगी

    मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि अगर देश में कोई अन्याय के खिलाफ खड़ा नहीं होता, तो वह खुद लड़ेंगी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस भी पूरी ताकत से मुकाबला करेगी. उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों के सम्मान और अधिकारों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

    बंग भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस

    ममता बनर्जी ने बताया कि बंग भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें पूरे मामले की जानकारी साझा की जाएगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग यह नहीं जानते कि बंगाल में और बंगाल के लोगों के साथ क्या हो रहा है.

  • सुनेत्रा पवार को काबिलियत के आधार पर…', जल्दबाजी में डिप्टी CM बनाए जाने पर उद्धव गुट का तंज!

    सुनेत्रा पवार को काबिलियत के आधार पर…', जल्दबाजी में डिप्टी CM बनाए जाने पर उद्धव गुट का तंज!


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र में इन दिनों बारामती प्लेन हादसे में डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन के बाद से ही राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है. सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद के शपथ लेने के बाद से ही विपक्ष लगातार हमलावर हैखासकर शिवसेना यूबीटी. शिवसेना UBT ने तो अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में BJP और NCP अजित पवार गुट पर तीखा हमला बोल दिया है. सामना के मुताबिकयह शपथ समारोह जल्दबाजी और राजनीतिक साजिश का नतीजा है. लेख में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस को इसके पीछे की मुख्य ताकत बताया गया है. UBT के माउथपीस ने मौजूदा राजनीतिक हालात को घटिया राजनीति बताया है.

    शोक में था महाराष्ट्रदिखाई गई जल्दबाजी- सामना
    सामना के संपादकीय में कहा गया है कि डिप्टी CM शपथ समारोह महाराष्ट्र के राजनीतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ है. आरोप लगाया गया कि अजित पवार के निधन के बाद राज्य शोक में थालेकिन इसी दौरान सत्ता की जल्दबाजी दिखाई गईUBT का कहना है कि यह फैसला संवेदनशीलता और परंपराओं की अनदेखी का उदाहरण है.लेख में यह भी कहा गया कि BJP हिंदुत्व और संस्कृति की बात करती हैलेकिन व्यवहार में अपने ही रीति-रिवाजों का पालन नहीं करती. शोक काल में सत्ता प्रदर्शन को सामना ने बेहद घटिया राजनीति करार दिया है.

    सुनेत्रा पवार की नियुक्ति पर सवाल
    संपादकीय में सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं. सामना का कहना है कि यह पद उनकी व्यक्तिगत काबिलियत या राजनीतिक अनुभव के आधार पर नहीं दिया गया. लेख में तंज कसते हुए लिखा गया है कि यह नियुक्ति पूरी तरह सत्ता संतुलन और अंदरूनी जोड़तोड़ का परिणाम है. सामना के अनुसारशरद पवार और सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि परिवार को भी इस शपथ की पूर्व जानकारी नहीं थी. इससे पूरे घटनाक्रम पर संदेह और गहराता है.

    NCP की स्थिति और फडणवीस का नियंत्रण
    UBT के मुखपत्र ने NCP की मौजूदा हालत पर तीखी टिप्पणी की है. संपादकीय में कहा गया है कि पार्टी की नाव का कैप्टन अब नहीं रहा और फिलहाल इसे देवेंद्र फडणवीस नियंत्रित कर रहे हैं. सामना का आरोप है कि NCP अब स्वतंत्र राजनीतिक इकाई नहीं रह गई है.लेख में यह भी कहा गया है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर भ्रम है. खुले तौर पर यह संकेत दिया गया कि सत्ता में बने रहने के लिए समझौते किए जा रहे हैंजिससे पार्टी की वैचारिक पहचान कमजोर हो रही है.

    बेहद घटिया राजनीति’ का आरोप
    संपादकीय के अंत में UBT ने मौजूदा राजनीतिक हालात को बेहद घटिया राजनीति बताया है. सामना का कहना है कि सत्ता की लालसा ने संवेदनशीलतासंस्कृति और नैतिकता को पीछे छोड़ दिया है. यह स्थिति महाराष्ट्र की राजनीति के लिए खतरनाक संकेत है.UBT ने इशारों में कहा है कि आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर दिखेगा. सामना के मुताबिकयह पूरा घटनाक्रम केवल पद और नियंत्रण की लड़ाई हैजिसमें जनता और मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया है.