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  • BMC मेयर पद पर सस्पेंस खत्म? आरक्षण के बाद इस महिला उम्मीदवार की दावेदारी मजबूत

    BMC मेयर पद पर सस्पेंस खत्म? आरक्षण के बाद इस महिला उम्मीदवार की दावेदारी मजबूत

    नई दिल्ली। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में मेयर पद को लेकर तस्वीर साफ हो गई है। गुरुवार को लॉटरी प्रक्रिया के जरिए यह तय किया गया कि बीएमसी मेयर की कुर्सी सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित होगी। जैसे ही यह फैसला सामने आया, मुंबई की राजनीति में हलचल तेज हो गई। सभी दलों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि देश की सबसे अमीर नगर निगम की कमान किस महिला नेता को मिलेगी।

    बीजेपी सबसे मजबूत दावेदार

    आरक्षण की घोषणा के बाद राजनीतिक गलियारों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि इस बार बीएमसी मेयर की कुर्सी पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा हो सकता है। नगर निगम चुनावों में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसके पास पर्याप्त संख्याबल मौजूद है। ऐसे में पार्टी की ओर से महिला मेयर उम्मीदवार तय करने की कवायद तेज हो गई है।

    तेजस्वी घोसालकर का नाम सबसे आगे

    बीजेपी खेमे में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है, वह है तेजस्वी घोसालकर। उन्होंने वार्ड नंबर 2 से जीत दर्ज की है और फिलहाल मेयर पद की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही हैं। तेजस्वी का राजनीतिक सफर भी चर्चा का विषय रहा है। वह पहले उद्धव ठाकरे गुट से जुड़ी थीं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुईं और जीत हासिल कर पार्टी नेतृत्व का भरोसा जीता।

    तेजस्वी घोसालकर, पूर्व पार्षद अभिषेक घोसालकर की पत्नी हैं। फरवरी 2024 में अभिषेक घोसालकर की फेसबुक लाइव के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिसने पूरे महाराष्ट्र की राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। इस दुखद घटना के बावजूद तेजस्वी ने राजनीतिक मैदान में मजबूती से कदम रखा और खुद को एक सशक्त नेता के रूप में स्थापित किया।

    तेजस्वी घोसालकर का राजनीतिक सफर

    तेजस्वी घोसालकर ने 2017 में अविभाजित शिवसेना के टिकट पर बीएमसी के वार्ड नंबर 1 से चुनाव जीतकर नगर राजनीति में प्रवेश किया था। समय के साथ राजनीतिक हालात बदले और दिसंबर 2025 में उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद हुए चुनाव में उन्होंने उद्धव गुट की उम्मीदवार धनश्री कोलगे को हराकर अपनी राजनीतिक पकड़ और मजबूत कर ली।

    संख्याबल के दम पर बीजेपी आगे

    बीएमसी में मौजूदा गणित पर नजर डालें तो बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने मिलकर चुनाव लड़ा था। बीजेपी ने 89 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि शिवसेना को 29 सीटें मिलीं। दोनों के पास कुल 118 सीटें हैं, जो बहुमत के आंकड़े 114 से ज्यादा हैं। ऐसे में गठबंधन के पास स्पष्ट बहुमत है।

    हालांकि दिलचस्प यह है कि विपक्ष में बैठी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने 65 सीटें जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन बीजेपी का संख्याबल सबसे ज्यादा होने के कारण मेयर पद पर उसकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।

    अब निगाहें अंतिम फैसले पर

    महिला आरक्षण तय होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी किस नाम पर अंतिम मुहर लगाती है। तेजस्वी घोसालकर फिलहाल सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं, लेकिन राजनीति में आखिरी फैसला वक्त और रणनीति तय करती है। बीएमसी मेयर की कुर्सी को लेकर आने वाले दिनों में सियासी सरगर्मी और तेज होने के आसार हैं।

  • प्रधानमंत्री मोदी का केरल दौरा : तिरुवनंतपुरम में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन

    प्रधानमंत्री मोदी का केरल दौरा : तिरुवनंतपुरम में विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को केरल दौरे पर तिरुवनंतपुरम पहुंचेंगे और सुबह करीब 10:45 बजे विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर वे सभा को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार इस दौरे का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, शहरी आजीविका, विज्ञान, नवाचार और स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।

    रेल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी चार नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाएंगे। इनमें तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। इन नई ट्रेन सेवाओं से केरल, तमिलनाडु कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच लंबी दूरी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी। बेहतर कनेक्टिविटी से पूरे दक्षिण भारत में पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी मजबूती मिलेगी।

    प्रधानमंत्री मोदी शहरी आजीविका को मजबूत करने के लिए ‘पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड’ लॉन्च करेंगे। यह स्ट्रीट वेंडरों को वित्तीय समावेशन का अगला चरण उपलब्ध कराएगा। यूपीआई से लिंक्ड ब्याज-मुक्त रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा तत्काल लिक्विडिटी प्रदान करेगी, डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देगी और लाभार्थियों को औपचारिक क्रेडिट इतिहास बनाने में मदद करेगी। इस दौरान प्रधानमंत्री एक लाख लाभार्थियों को ‘पीएम स्वनिधि लोन’ भी वितरित करेंगे। 2020 में शुरू हुई इस योजना ने शहरी अनौपचारिक श्रमिकों को पहली बार औपचारिक क्रेडिट तक पहुंच दिलाई है और आजीविका सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई है।

    विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी सीएसआईआर-एनआईआईएसटी इनोवेशन टेक्नोलॉजी और एंटरप्रेन्योरशिप हब का शिलान्यास करेंगे। यह हब जीवन विज्ञान और बायो-इकोनॉमी पर ध्यान केंद्रित करेगा। आयुर्वेद जैसी पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी, सस्टेनेबल पैकेजिंग और ग्रीन हाइड्रोजन के साथ जोड़ा जाएगा। हब स्टार्टअप निर्माण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देगा और अनुसंधान को बाजार तैयार समाधानों और उद्यमों में बदलने का प्लेटफॉर्म बनेगा।

    स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेस एंड टेक्नोलॉजी में अत्याधुनिक रेडियोसर्जरी सेंटर की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही तिरुवनंतपुरम में नए पूजापुरा हेड पोस्ट ऑफिस का उद्घाटन भी किया जाएगा।इस दौरे के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने केरल में रेल कनेक्टिविटी, शहरी आजीविका, विज्ञान नवाचार और स्वास्थ्य क्षेत्र को एक साथ बढ़ावा देने का संदेश दिया है। इस प्रकार यह दौरा क्षेत्रीय विकास, डिजिटल समावेशन और आधुनिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में अहम साबित होगा।

  • Chandigarh Municipal Polls Update: AAP-Congress ने अलग होकर जारी की उम्मीदवारों की सूची

    Chandigarh Municipal Polls Update: AAP-Congress ने अलग होकर जारी की उम्मीदवारों की सूची

    नई दिल्ली।  चंडीगढ़ में मेयर पद के लिए होने वाले नगर निगम चुनावों में इंडिया गठबंधन के सहयोगी दल, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस, अब अलग-अलग मैदान में हैं। गठबंधन टूटने के बाद दोनों ही पार्टियों ने मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों के लिए अपने-अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। यह ऐलान नगर निगम चुनाव की तैयारियों को और रोचक बना रहा है और राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू कर दी है।

    कांग्रेस के उम्मीदवार

    कांग्रेस ने इस चुनाव में मेयर पद के लिए गुरप्रीत गाबी को मैदान में उतारा है। पार्टी ने सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए सचिन गालव और डिप्टी मेयर पद के लिए निर्मला देवी को उम्मीदवार घोषित किया है। कांग्रेस का मानना है कि उनके उम्मीदवारों के अनुभव और नगर निगम में सक्रिय भूमिका के कारण वे जनता का भरोसा जीत सकते हैं।

    AAP के उम्मीदवार

    वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। AAP की ओर से मेयर पद के लिए योगेश ढींगरा (वार्ड नं. 25) को उतारा गया है। सीनियर डिप्टी मेयर पद के लिए पार्टी ने मुन्नवर खान (वार्ड नं. 29) और डिप्टी मेयर पद के लिए जसविंदर कौर (वार्ड नं. 1) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। AAP का मानना है कि उनके युवा और सक्रिय उम्मीदवार जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे।

    गठबंधन क्यों नहीं बना?

    इस बार AAP और कांग्रेस ने गठबंधन न बनाने का निर्णय लिया है। इसका मुख्य कारण यह है कि अगले साल पंजाब विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। अगर नगर निगम चुनाव में दोनों दल गठबंधन करते, तो पंजाब विधानसभा चुनाव में रणनीतिक रूप से उनकी स्थिति कमजोर हो सकती थी। इसलिए कम पार्षद होने के बावजूद दोनों दल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह निर्णय दोनों पार्टियों के लिए अगली रणनीति तय करने में अहम साबित होगा।

    बीजेपी की स्थिति मजबूत

    नगर निगम में कुल 35 पार्षद और 1 सांसद हैं। बीजेपी के पास 18 पार्षद हैं, जबकि AAP के पास 11 और कांग्रेस के पास 6 पार्षद + 1 सांसद है। इन आंकड़ों के आधार पर राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि बीजेपी के लिए मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों पर जीत हासिल करना अपेक्षाकृत आसान होगा। बीजेपी की मजबूत स्थिति और पार्षद संख्या का संतुलन इसे इस चुनाव का बड़ा दावेदार बनाता है।

    चुनाव की राजनीतिक चुनौतियां

    विश्लेषकों का मानना है कि इस बार का चुनाव केवल मेयर पद तक सीमित नहीं रहेगा। यह पंजाब विधानसभा चुनाव के पूर्वाभ्यास के रूप में भी देखा जा रहा है। AAP और कांग्रेस दोनों ही अपने उम्मीदवारों के जरिए स्थानीय जनता का भरोसा हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, बीजेपी अपने मजबूत पार्षदों और संगठनात्मक नेटवर्क के बल पर सत्ता में बने रहने की रणनीति पर काम कर रही है।

    AAP और कांग्रेस ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में गठबंधन तोड़कर अलग उम्मीदवार घोषित किए हैं, जबकि बीजेपी की मजबूत स्थिति से मेयर पद पर उनकी जीत की संभावना प्रबल है।

    कुल मिलाकर, चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव 2026 न केवल मेयर, डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर पदों के लिए, बल्कि पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक संकेत देने वाले चुनाव के रूप में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल ने बिना स्पीच पढ़े किया बहिर्गमन, सरकार-राज्यपाल के बीच टकराव तेज

    कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल ने बिना स्पीच पढ़े किया बहिर्गमन, सरकार-राज्यपाल के बीच टकराव तेज



    नई दिल्ली। 22 जनवरी 2026 कर्नाटक विधानसभा में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने स्पीच पढ़ना शुरू किया, लेकिन 2-4 लाइन के बाद कागज रख दिया और सदन से बाहर निकल गए। इस घटना से राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच अनबन का विवाद कर्नाटक तक पहुंच गया है।

    संसद में स्पीकर यूटी खादर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, मंत्री एचके पाटिल, प्रियांक खरगे, सलीम अहमद और बसवराज होरट्टी सहित कई नेता राज्यपाल का इंतजार कर रहे थे।

    लेकिन गहलोत ने भाषण पूरा नहीं पढ़ा और सदन छोड़ दिया। बीके हरिप्रसाद ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे वापस नहीं आए।

    क्या है वजह?
    राज्यपाल और सरकार के बीच संवैधानिक परंपरा और भाषण के कंटेंट को लेकर विवाद चल रहा है। गहलोत का कहना है कि सरकार के तैयार किए गए भाषण के 11 पैराग्राफ में बदलाव जरूरी हैं। इनमें केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना वाले हिस्से शामिल हैं। गहलोत ने इन हिस्सों को पूरी तरह हटाने की मांग की, जबकि सरकार केवल भाषा में सीमित बदलाव करने को तैयार थी।

    सरकार ने भी की थी कोशिश
    कर्नाटक के लॉ और संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने राज्यपाल से मुलाकात की और कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176(1) के तहत राज्यपाल का संयुक्त सत्र को संबोधित करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि अगर भाषण में आपत्तिजनक भाषा है तो सरकार संशोधन कर सकती है, लेकिन पूरा पैराग्राफ हटाना स्वीकार्य नहीं।

    ये मामला और बड़ा हो सकता है
    कर्नाटक की घटना के पहले तमिलनाडु में भी 20 जनवरी को राज्यपाल आरएन रवि विधानसभा सत्र बीच में छोड़कर बाहर चले गए थे। दोनों राज्यों में राज्यपाल-सरकार की टकराहट राजनीतिक और संवैधानिक बहस को तेज कर रही है।

  • धार्मिक बदलाव: गायत्री परिवार ने महिलाओं को दिया मंत्र का अधिकार, अमित शाह ने सराहा

    धार्मिक बदलाव: गायत्री परिवार ने महिलाओं को दिया मंत्र का अधिकार, अमित शाह ने सराहा

    नई दिल्ली। उत्तराखंड के हरिद्वार में गुरुवार को ‘अखिल विश्व गायत्री परिवार’ द्वारा माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी और अखंड दीप शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘शताब्दी वर्ष समारोह 2026’ में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए। उन्होंने पारंपरिक दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया और उपस्थित जनों को दिव्य ऊर्जा का अनुभव कराया।

    अमित शाह ने दी आध्यात्मिक संदेश

    केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी ने अपने जीवनकाल में कई युगों का काम किया। उनके आंदोलन के तहत 15 करोड़ से अधिक अनुयायी आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल रहे हैं। आज अखंड ज्योति की शताब्दी मनाई जा रही है, और इन लाखों लोगों की जिम्मेदारी है कि वे नई ऊर्जा और उत्साह के साथ अगले सौ सालों तक इसे आगे बढ़ाएं।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और इतिहास को जानते हैं, वे विश्वास करते हैं कि विश्व की समस्याओं का समाधान भारतीय परंपरा में ही निहित है।

    हरिद्वार: आस्था और संस्कृति का संगम

    अमित शाह ने हरिद्वार को आध्यात्म और संस्कृति का संगम बताते हुए कहा कि यह भूमि हजारों वर्षों से तपस्या, साधना और कुंभ की महिमा से ओत-प्रोत है। उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा द्वारा गायत्री ऊर्जा को जागृत करने के कार्य को सराहा और कहा कि इसने व्यक्ति-निर्माण के मार्ग को नया जीवन दिया।

    गायत्री मंत्र और सामाजिक बदलाव

    गृह मंत्री ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा ने कठोर परंपराओं को तोड़ते हुए महिलाओं और समाज के हर वर्ग को गायत्री मंत्र के माध्यम से आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने बताया कि इससे जाति, समुदाय या लिंग की परवाह किए बिना हर व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक लाभ संभव हुआ।

    पतंजलि योगपीठ अस्पताल का उद्घाटन

    कार्यक्रम के दौरान अमित शाह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योग गुरु रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के एमडी आचार्य बालकृष्ण की उपस्थिति में महर्षि दयानंद ग्राम, हरिद्वार में पतंजलि आपातकालीन और क्रिटिकल केयर अस्पताल का उद्घाटन भी किया गया।

    हरिद्वार में शताब्दी वर्ष समारोह में अमित शाह ने अखंड ज्योति और गायत्री मंत्र के माध्यम से आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देते हुए महिलाओं और समाज के लिए नए आध्यात्मिक मार्ग की अहमियत बताई।

  • मत्स्य पालन में भारत की बड़ी छलांग: जलीय कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान, केंद्रीय मंत्री का दावा

    मत्स्य पालन में भारत की बड़ी छलांग: जलीय कृषि क्षेत्र में वैश्विक पहचान, केंद्रीय मंत्री का दावा

    नई दिल्ली। भारत ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि के क्षेत्र में बड़ी वैश्विक पहचान बना ली है। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी एवं पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा है कि मजबूत सरकारी नीतियों, आधुनिक प्रोसेसिंग क्षमता और बेहतर लॉजिस्टिक व्यवस्था के चलते भारत अब दुनिया के प्रमुख मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर देशों में शामिल हो चुका है। बीते 10 वर्षों में भारत के सीफूड निर्यात का मूल्य दोगुना हो गया है, जो इस क्षेत्र में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

    नई नीतियों से पारदर्शिता और टिकाऊ विकास पर जोर

    मंत्री ललन सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क-2025, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) नियम-2025 और अपडेटेड हाई सी फिशिंग गाइडलाइंस-2025 के जरिए नियमों के अनुपालन और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा रहा है। इन नीतियों का मकसद टिकाऊ, जिम्मेदार और निर्यात आधारित विकास को बढ़ावा देना है। खासतौर पर अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे द्वीप क्षेत्रों में मत्स्य संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

    आधुनिक तकनीक और निजी भागीदारी के बड़े अवसर

    ललन सिंह ने कहा कि भारत में आधुनिक एक्वाकल्चर और मैरीकल्चर तकनीक, प्रोसेसिंग यूनिट्स, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, मछली पकड़ने वाले जहाजों की आधुनिक डिजाइन, डिजिटल निगरानी प्रणाली और संयुक्त अनुसंधान के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता विकसित करने, टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन और तकनीक हस्तांतरण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका हो सकती है। निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी सरकार लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

    40 देशों के राजनयिकों की मौजूदगी में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा

    मंत्री यह बातें एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कह रहे थे, जिसमें 40 देशों के राजदूत, उच्चायुक्त और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस सम्मेलन में भारत और अन्य देशों के बीच मत्स्य पालन और सीफूड सेक्टर में बढ़ती साझेदारी को रेखांकित किया गया।
    सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और महासागरों का स्वास्थ्य, टिकाऊ विकास, जिम्मेदार मत्स्य पालन, हरित नवाचार, क्षमता निर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने जैसे मुद्दों को सहयोग के प्रमुख स्तंभ बताया गया। इसके साथ ही सजावटी मछली पालन और समुद्री शैवाल की खेती जैसे नए क्षेत्रों में भी साझेदारी की संभावनाओं पर जोर दिया गया।

    सीफूड से पोषण, रोजगार और अर्थव्यवस्था को मजबूती

    केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने कहा कि सीफूड पोषण का अहम स्रोत है और वैश्विक खाद्य सुरक्षा में इसकी बड़ी भूमिका है। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करता है और देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है। उन्होंने बताया कि मत्स्य पालन विभाग उत्पादन से लेकर निर्यात तक पूरी वैल्यू-चेन आधारित रणनीति पर काम कर रहा है।

    निर्यात को 1 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य

    केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि भारत में एक्वाकल्चर का तेजी से विस्तार हो रहा है और उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। विभाग का लक्ष्य सीफूड निर्यात को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है। उन्होंने बताया कि पिछले सात महीनों में निर्यात मूल्य में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो इस क्षेत्र की मजबूत प्रगति का संकेत है।

    मजबूत नीतियों और आधुनिक तकनीक के सहारे भारत वैश्विक सीफूड हब बनता जा रहा है, जहां पिछले 10 वर्षों में निर्यात दोगुना हुआ और सरकार का लक्ष्य इसे 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का है।

  • माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी

    माघ मेले में बग्घी विवाद: मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, जमीन आवंटन रद्द और आजीवन प्रतिबंध की धमकी



    प्रयागराज।माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच तनातनी बढ़ती जा रही है। मेला प्रशासन ने अब दूसरी बार नोटिस जारी करते हुए उनकी संस्था को दी गई भूमि आवंटन रद्द करने और उन्हें मेले से आजीवन प्रतिबंधित करने की बात कही है।
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।

    नोटिस में क्या लिखा है?
    प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने नोटिस में कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन पुलिस ने संगम क्षेत्र में सभी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। इसी दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बग्घी लेकर संगम नोड पर जाने का प्रयास किया, जिससे भगदड़ की संभावना बढ़ गई और मेला प्रबंधन की व्यवस्था प्रभावित हुई।

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि उन्होंने मेले में अपने आप को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगवाए, जो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के दायरे में आता है।

    इसलिए प्राधिकरण ने पूछा है कि उनकी संस्था का भूमि आवंटन और सुविधाएं निरस्त कर उन्हें माघ मेले में हमेशा के लिए प्रतिबंधित क्यों न किया जाए।

    शंकराचार्य ने क्या जवाब दिया?
    मेला प्रशासन के नोटिस पर शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने प्रेस नोट जारी कर इसे बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि नोटिस बैक डेट में चस्पा किया गया और प्रशासन अब कह रहा है कि जवाब नहीं दिया गया।

    शैलेन्द्र योगिराज सरकार ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण, भ्रामक और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि जिस बग्घी का उल्लेख किया जा रहा है, वह उनके शिविर में कभी नहीं थी।

    उनका दावा है कि यह आरोप CCTV फुटेज से भी आसानी से गलत साबित किया जा सकता है।

    उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि धार्मिक कार्यों में मेला प्रशासन का दखल अस्वीकार्य है और यदि यह जारी रहा तो अंजाम बुरा हो सकता है।

    क्यों बढ़ रहा है विवाद?
    माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन संगम पर स्नान को लेकर पहले ही तनाव देखने को मिला था। इस विवाद ने शंकराचार्य और मेला प्राधिकरण के बीच रिश्तों में और खटास ला दी है। अब प्रशासन द्वारा भूमि आवंटन रद्द करने और आजीवन प्रतिबंध की धमकी से यह मामला और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

    अगला कदम क्या हो सकता है?
    प्रशासन ने नोटिस का जवाब 24 घंटे में मांगा है।
    यदि शंकराचार्य की संस्था द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो मेला प्राधिकरण भूमि आवंटन रद्द और प्रतिबंध जैसे कदम उठा सकता है। इससे माघ मेले के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के मुद्दे और भी अधिक बढ़ सकते हैं।

  • बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की 11 साल की यात्रा: पीएम मोदी के गुजरात मॉडल ने कैसे बदला एजुकेशन सिस्टम

    बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की 11 साल की यात्रा: पीएम मोदी के गुजरात मॉडल ने कैसे बदला एजुकेशन सिस्टम

    नई दिल्ली। भारत में बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए शुरू किया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान आज एक मजबूत जन आंदोलन का रूप ले चुका है। 22 जनवरी 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की थी। अभियान के 11 साल पूरे होने पर ‘मोदी आर्काइव’ ने इसे लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक प्रयास बताया है।

    गुजरात से तैयार हुआ था राष्ट्रीय अभियान का खाका

    ‘मोदी आर्काइव’ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा पोस्ट में बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने से पहले इस अभियान की नींव गुजरात में रखी गई थी। गुजरात में चलाए गए ‘कन्या केलवणी’ और ‘शाला प्रवेशोत्सव’ जैसे कार्यक्रमों ने आंकड़े बदलने से पहले समाज की सोच बदली। खराब महिला साक्षरता, स्कूल छोड़ने की ऊंची दर और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे राज्य में इन योजनाओं ने बड़ा बदलाव लाया।

    2001 की सच्चाई और बदलाव का संकल्प

    वीडियो में बताया गया कि साल 2001 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला, तब महिला साक्षरता दर केवल 57.80 प्रतिशत थी। लगभग 38.92 प्रतिशत लड़कियां स्कूल बीच में छोड़ देती थीं, जबकि 42 हजार स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय तक नहीं थे। इन हालातों को बदलने के लिए मुख्यमंत्री मोदी ने ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया।

    गांव-गांव जाकर बदली सोच

    मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी खुद गांव-गांव पहुंचे। भीषण गर्मी में तीन दिन तक चलने वाले अभियानों में मुख्यमंत्री, मंत्रिमंडल और सैकड़ों वरिष्ठ अधिकारी शामिल होते थे। हर साल 634 अधिकारी 18 हजार से अधिक गांवों में जाकर माता-पिता से अपील करते थे “अपनी बेटियों को स्कूल भेजिए।” इस अभियान का एक ही लक्ष्य था हर लड़की को स्कूल तक पहुंचाना।

    इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर आर्थिक सहायता तक

    इस दौरान सिर्फ बेटियों के लिए 42,371 शौचालय, 58,463 नई कक्षाएं और 22,758 स्कूलों में बिजली पहुंचाई गई। ‘कन्या केलवणी’ योजना के तहत 55 हजार से अधिक लड़कियों को आर्थिक सहायता दी गई। सरस्वती साइकिल योजना, विद्या लक्ष्मी बॉन्ड और छात्राओं को टैबलेट देने जैसे प्रयासों से शिक्षा को प्रोत्साहन मिला।

    आंकड़ों में दिखा असर

    इन प्रयासों का नतीजा यह रहा कि महिला साक्षरता दर 57.80 प्रतिशत से बढ़कर 70.73 प्रतिशत हो गई। स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या 38.92 प्रतिशत से घटकर 7.08 प्रतिशत रह गई। ‘मोदी आर्काइव’ के अनुसार, इस तरह राष्ट्रीय नारा बनने से पहले ही ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ एक सफल जमीनी आंदोलन बन चुका था।

  • अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद चारों शंकराचार्य एक मंच पर? दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है बड़ा आयोजन

    अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच 19 साल बाद चारों शंकराचार्य एक मंच पर? दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है बड़ा आयोजन



    नई दिल्ली। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के विवाद के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। कहा जा रहा है कि 19 साल बाद चारों चतुष्पीठों के शंकराचार्य एक मंच पर आ सकते हैं। यह आयोजन 10 मार्च 2026 को दिल्ली में गो रक्षा को लेकर हो सकता है, जिसमें ‘गो माता राष्ट्र माता अभियान’ के मंच पर चारों शंकराचार्य शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।अगर ऐसा होता है तो यह न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा, बल्कि ज्योतिषपीठ विवाद में नया मोड़ भी ला सकता है।

    क्या है खास बात?
    ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को पहले से दो पीठों का समर्थन मिल चुका है। उनके अनुसार द्वारका शारदा पीठ और शृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य उन्हें ज्योतिषपीठ के वैध शंकराचार्य के रूप में मान्यता देते हैं।
    उन्होंने यह भी कहा कि पिछले माघ मेले के दौरान इन दोनों पीठों के शंकराचार्यों ने उनके साथ संगम में स्नान किया था, जो उनकी मान्यता का प्रतीक माना जाता है।

    अब यदि तीसरी पीठ का समर्थन भी मिल जाता है, तो विवाद में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    हालांकि अभी तक पूरी पीठ की ओर से निश्चलानंद (और अन्य शंकराचार्यों) के नाम पर खुली सहमति सामने नहीं आई है, लेकिन माघ मेले में दो दिन पहले अविमुक्तेश्वरानंद को अपना ‘लाडला’ कहने की चर्चा ने संकेत दिया कि माहौल नरम पड़ रहा है।

    गो रक्षा आंदोलन और शंकराचार्यों की सक्रियता
    गो रक्षा आंदोलन को लेकर चारों शंकराचार्य पहले से ही सक्रिय हैं।
    गाय की रक्षा के व्रत के लिए शंकराचार्य निश्चलानंद ने सिंहासन और छत्र का त्याग भी कर रखा है। ऐसे में चारों शंकराचार्यों का एक मंच पर आना यह संकेत होगा कि अविमुक्तेश्वरानंद पर सभी शंकराचार्यों की सहमति बनती जा रही है।
    आयोजन के लिए सभी शंकराचार्यों को आमंत्रण भेजने की तैयारी भी बताई जा रही है।

    इतिहास में तीसरी बार होगा ऐसा दृश्य
    चारों शंकराचार्यों का एक मंच पर दिखना धार्मिक इतिहास में तीसरी बार होगा।
    पहली बार 1779 में श्रृंगेरी में पहला चतुष्पीठ सम्मेलन हुआ था।
    दूसरी बार 19 मई 2007 को बेंगलुरु में रामसेतु मुद्दे पर सम्मेलन में चारों शंकराचार्य एक साथ थे।
    इसके बाद जून 1993 में भी शृंगेरी में एक ऐतिहासिक बैठक हुई थी, जिसमें राष्ट्रीय अखंडता और शांति के लिए चारों शंकराचार्यों ने संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया था।

    अगर दिल्ली में 10 मार्च 2026 का यह आयोजन सफल होता है, तो इसे सनातन परंपरा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जाएगा।

    क्या है आगे का परिदृश्य?
    हाल ही में महाकुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान शंकराचार्यों के एक साथ आने की चर्चा रही है, जो इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। गो रक्षा आंदोलन को लेकर पहले भी कई बड़े आंदोलन हुए हैं, और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी इस विषय पर कई बार खुलकर बोल चुके हैं।
    इसलिए दिल्ली में होने वाले संभावित आयोजन पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह न केवल धार्मिक एकता का संदेश देगा, बल्कि ज्योतिषपीठ विवाद में भी संतुलन और समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
  • Weather Alert: दिल्ली-यूपी से राजस्थान तक बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी, यात्रा में रखें सावधानी

    Weather Alert: दिल्ली-यूपी से राजस्थान तक बारिश का अलर्ट, IMD ने जारी की चेतावनी, यात्रा में रखें सावधानी



    नई दिल्ली। देश के मौसम में बदलाव की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सक्रिय होने के कारण 22 और 23 जनवरी 2026 को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी हो सकती है।

    उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों जैसे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी 23 जनवरी को हल्की से मध्यम बारिश के संकेत हैं।

    इस दौरान तेज हवाओं, ओलावृष्टि और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की चेतावनी भी जारी है।

    प्रमुख शहरों का हाल:
    दिल्ली: 23 जनवरी को बारिश, तेज हवाएं (30–40 किमी/घंटा), गरज-चमक की संभावना।
    लखनऊ: 23–24 जनवरी हल्की बारिश, बादलों की आवाजाही, बिजली चमक सकती है।
    जयपुर: 23 जनवरी को हल्की बारिश, मौसम ठंडा और बदला-बदला रहेगा।

    तापमान में उतार-चढ़ाव:
    26–28 जनवरी तक उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में 2–4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि, इसके बाद फिर गिरावट।
    मध्य भारत और गुजरात में अगले दो दिनों तक न्यूनतम तापमान लगभग स्थिर, फिर थोड़ी बढ़ोतरी या गिरावट हो सकती है।
    महाराष्ट्र में रात का तापमान अगले दो दिनों में 2–4 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है।
    कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में देश के उत्तर-पश्चिम और मध्य हिस्सों में मौसम में उतार-चढ़ाव, बारिश और तेज हवाओं के साथ ठंड बनी रहेगी।