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  • पर्यावरण संरक्षण और समाजिक जिम्मेदारी पर बल, उद्योग और शासन के बीच सहयोग का उदाहरण बना अभियान

    पर्यावरण संरक्षण और समाजिक जिम्मेदारी पर बल, उद्योग और शासन के बीच सहयोग का उदाहरण बना अभियान


    नई दिल्ली। भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निवास पर हाल ही में आयोजित विशेष वृक्षारोपण अभियान में विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड VTDS के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक साहिल लुथरा आमंत्रित अतिथि के रूप में शामिल हुए। यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में श्री चौहान की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का प्रतीक हैजिन्होंने वर्षों से व्यक्तिगत स्तर पर भी वृक्षारोपण को एक सतत आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाया है।

    शिवराज सिंह चौहान देशभर में हरित आवरण बढ़ानेजलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता फैलाने और नागरिकों को प्रकृति से जोड़ने के लिए जाने जाते हैं। उनके एक पेड़ मां के नाम जैसे अभियानों से यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों तक सीमित नहींबल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए।इस अवसर पर साहिल लुथरा ने कहायह मेरे लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है कि मैं ऐसे वृक्षारोपण अभियान का हिस्सा बनाजो न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है बल्कि समाज में सामूहिक जिम्मेदारी का भी एहसास कराता है। ऐसे प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

    साहिल लुथरा ने VTDS में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पर भी प्रकाश डाला और बताया कि यह केवल विचार नहींबल्कि कंपनी की संरचित नीतियों और कार्यप्रणालियों का हिस्सा है। उन्होंने कहाराष्ट्र-निर्माण केवल रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने तक सीमित नहीं हैबल्कि प्रकृति और संसाधनों के संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

    VTDS ने साहिल लुथरा के नेतृत्व में भारत में स्वदेशी लघु हथियारों और गोला-बारूद के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली हैजिनमें लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में यंग लीडरविज़नरी इन डिफेन्स लीडरशिप 2025और ईटी एज 40 अंडर 40 जैसे सम्मान शामिल हैं।यह वृक्षारोपण अभियान उद्योगशासन और पर्यावरण संरक्षण के बीच सहयोग का एक सशक्त उदाहरण है। यह दिखाता है कि राष्ट्र की सुरक्षाआर्थिक प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण एक साझा दृष्टि के अंतर्गत एक साथ आगे बढ़ सकता है।

  • फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के बाद एयरलाइन पर सवाल, DGCA की कार्रवाई पर यात्रियों की राय मिली-जुली

    फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के बाद एयरलाइन पर सवाल, DGCA की कार्रवाई पर यात्रियों की राय मिली-जुली


    नई दिल्ली। दिसंबर 2025 की शुरुआत में इंडिगो एयरलाइंस द्वारा बड़े पैमाने पर फ्लाइट कैंसिलेशन और लेटलतीफी ने देशभर के हवाई यात्रियों को भारी असुविधा में डाल दिया। 3 से 5 दिसंबर के बीच नए संचालन नियमों के कारण इंडिगो की 2,507 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि 1,852 फ्लाइट्स देरी से संचालित हुईं। इन घटनाओं से करीब 3 लाख से अधिक  यात्री प्रभावित हुए।
    DGCA ने एयरलाइन पर कुल ₹22.20 करोड़ का जुर्माना लगाया। इसमें मूल जुर्माना ₹1.80 करोड़ और फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन FDTLनियमों का 68 दिनों तक पालन न करने पर प्रतिदिन ₹30 लाख के हिसाब से अतिरिक्त ₹20.40 करोड़ की पेनाल्टी शामिल थी।

    हालांकि लोकलसर्कल्स के ताजा सर्वे में यह सामने आया है कि देश के 292 जिलों से 31,000 से अधिक हवाई यात्रियों ने हिस्सा लिया। इसमें 61% यात्रियों का मानना था कि यह जुर्माना भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है और एयरलाइन की जवाबदेही तय नहीं करता। वहीं 21% यात्रियों ने DGCA की कार्रवाई को सही ठहराया, जबकि 18% ने कोई स्पष्ट राय नहीं दी।

    सर्वे में यात्रियों ने केवल फ्लाइट रद्द होने तक की परेशानी ही नहीं बताई, बल्कि एयरलाइन के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। कई यात्रियों का आरोप था कि फ्लाइट कैंसिल होने के बाद उन्हें नियमों के तहत मिलने वाला कैश रिफंड नहीं दिया गया, बल्कि ट्रैवल वाउचर थमाए गए। यात्रियों का कहना है कि वाउचर उनकी तत्काल जरूरतों को पूरा नहीं करते और सभी के लिए उपयोगी नहीं हैं।इंडिगो एयरलाइंस ने कहा कि वह DGCA के सभी निर्देशों का पालन करेगी और हालिया घटनाओं के बाद आंतरिक स्तर पर संचालन, सिस्टम और प्रक्रियाओं की विस्तृत समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके।

    एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल आर्थिक जुर्माने से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जब तक यात्रियों के अधिकारों को सख्ती से लागू नहीं किया जाता और नियामक निगरानी मजबूत नहीं होती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।यह मामला एयरलाइन संचालन और नियामक जवाबदेही के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करता है, साथ ही हवाई यात्रियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में सुधार की मांग को भी उजागर करता है।

  • नई टैक्स व्यवस्था, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत टैक्स में बदलाव: वित्त मंत्रालय ने अपडेट दी

    नई टैक्स व्यवस्था, कॉरपोरेट और व्यक्तिगत टैक्स में बदलाव: वित्त मंत्रालय ने अपडेट दी


    नई दिल्ली। बजट 2026-27 के पेश होने से ठीक पहले वित्त मंत्रालय ने पिछले बजट और वित्त अधिनियम 2025 के तहत किए गए अहम सुधारों का ब्योरा दिया। मंत्रालय ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि न्यू टैक्स रिजीम एनटीआरके तहत व्यक्तिगत और कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव किए गए हैं।वित्त मंत्रालय के अनुसार नई व्यवस्था का मकसद टैक्स देने के बाद लोगों के हाथ में अधिक पैसा बचाना है। यह बदलाव वित्त वर्ष 2025-26 से लागू हो चुके हैं यानी आकलन वर्ष 2026-27 से इसका असर दिखेगा।

    इनकम टैक्स बिल 2025 को भी वित्त मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम बताया। छह दशक पुराने प्रत्यक्ष कर कानून को बदलने के लिए यह बिल लाया गया है। इसका उद्देश्य टैक्सपेयर्स को राहत देना निवेशकों का भरोसा बनाए रखना और टैक्स व्यवस्था को आसान बनाना है।कॉरपोरेट टैक्स में बदलाव के तहत जो कंपनियां तय की गई छूट और कटौतियों का लाभ नहीं लेती हैं उनके लिए टैक्स दर 22 प्रतिशत रखी गई है। वहीं नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए एक निश्चित अवधि तक टैक्स दर 15 प्रतिशत तय की गई है।

    व्यक्तिगत आयकर के मामले में भी नए टैक्स सिस्टम में स्लैब आसान और टैक्स दर कम कर दी गई हैं। छूट बढ़ाई गई है जिसके तहत 12 लाख रुपए तक की आय वाले लोगों को टैक्स नहीं देना होगा। सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपए तक बढ़ाई गई है क्योंकि उन्हें 75000 रुपए की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगी।फाइनेंस एक्ट 2025 के तहत धारा 10 23एफई के फायदे भी बढ़ाए गए हैं। इसके अनुसार योग्य सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड अब 31 मार्च 2030 तक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर सकते हैं और उन्हें डिविडेंड ब्याज और लंबी अवधि के पूंजीगत लाभ एलटीसीजीपर टैक्स से छूट मिलेगी।

    इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर आईएफएससीसे जुड़े नियमों और अतिरिक्त कामकाज की तारीख भी फाइनेंस एक्ट 2025 के जरिए लागू कर दी गई हैं जो 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी हैं। इसके अलावा अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स एआईएफके लिए कराधान की स्पष्टता भी सुनिश्चित की गई है। अब प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर टैक्स नियम स्पष्ट हैं जिससे निवेशकों को भरोसा मिलेगा।कुल मिलाकर वित्त मंत्रालय ने यह संदेश दिया है कि सरकार ने पिछले वित्त वर्ष में टैक्स सुधार निवेश प्रोत्साहन और सरल वित्तीय नियमों के जरिए आम नागरिक और निवेशकों दोनों को लाभ पहुंचाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। बजट 2026-27 के दौरान इन नीतियों को और विस्तार मिलने की उम्मीद है।

  • नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष

    नितिन नबीन: पटना से गुजरात तक मोदी के भरोसे का सफर, बने भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष


    नई दिल्ली। नितिन नबीन का नाम इन दिनों भाजपा और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है। 45 वर्षीय नितिन नबीन निर्विरोध राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। बिहार के पथ निर्माण मंत्री रह चुके नितिन की राजनीतिक यात्रा लंबी और भरोसेमंद रही है। पांच विधानसभा चुनाव जीतने, भाजपा युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यसमिति में शामिल होने और छत्तीसगढ़ प्रभारी बनने के बाद भी यह निर्णय कई लोगों के लिए चौंकाने वाला है।

    असल में नितिन नबीन पीएम नरेंद्र मोदी के करीब दो दशक पुराने विश्वासपात्र हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते मोदी से मिलने के लिए वह पटना से उड़कर जाते थे। बिहार में मोदी की आंख और कान बने नितिन नबीन ने पार्टी में कई अहम फैसलों और लोकसभा अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई।2009 में लुधियाना रैली इसका प्रमाण है। एनडीए द्वारा एलके आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के दौरान आयोजित विशाल जनसभा में नीतीश कुमार की हिचकिचाहट के बावजूद नितिन नबीन के प्रयास से भाजपा के वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने में सफल हुए। रैली में मंच पर नरेंद्र मोदी ने नीतीश का हाथ उठाकर सबके सामने दिखाया, जिससे नीतीश असहज हो गए।

    पटना में 2010 के बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सत्र के दौरान भी नितिन नबीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मोदी के प्रति आभार जताने के लिए पटना की दीवारों पर बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए, जिसमें स्थानीय बीजेपी यूनिट के नितिन और रामेश्वर चौरसिया की सक्रियता देखने को मिली। इस अभियान ने मोदी की लोकप्रियता बढ़ाई, लेकिन नीतीश कुमार इस पर नाराज हुए। अखबारों में छपी तस्वीरों ने उन्हें परेशान कर दिया और उन्होंने डिनर का कार्यक्रम रद्द कर दिया।

    इस पूरी कहानी से यह साफ है कि नितिन नबीन न केवल पार्टी के अंदर बल्कि मोदी के भरोसे के मामले में भी वर्षों से मजबूत स्थिति में रहे हैं। उनकी यह यात्रा पटना से गुजरात तक मोदी के विश्वास और भाजपा के संगठनात्मक काम में गहरे जुड़े रहने का उदाहरण है।आज राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर नितिन नबीन भाजपा में युवाओं और संगठनात्मक मजबूती दोनों के लिए बड़ी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। उनकी राजनीतिक समझ, मोदी के साथ लंबे समय से चलती मित्रता और बिहार में उनके अनुभव ने उन्हें यह बड़ा मंच दिलाया है।

  • राजपत्र के बाद शिंदे गुट ने खेला नया कार्ड, नगरसेवक होटल से निकले, गुट गठन रद्द!

    राजपत्र के बाद शिंदे गुट ने खेला नया कार्ड, नगरसेवक होटल से निकले, गुट गठन रद्द!


    मुंबई। नगर विकास विभाग की राजपत्र अधिसूचना के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की राजनीतिक रणनीति में अचानक बदलाव देखने को मिला है। अधिसूचना जारी होते ही शिंदे गुट के नगरसेवकों की एंट्री और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया टल गई।
    सूत्रों के अनुसार, सोमवार को नवनिर्वाचित नगरसेवकों को कोंकण भवन जाकर अपने गुट के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन राजपत्र अधिसूचना के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। इसके बाद शिंदे गुट ने फिलहाल इस प्रक्रिया से दूरी बनाना उचित समझा है।

    दस्तावेज पार्टी के पासक्या है संकेत?
    इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है कि शिंदे गुट ने अपने सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों के मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए हैं।

     शिंदे गुट किसी बड़े राजनीतिक मोड़ या नई चाल की तैयारी कर रहा है।

    ताज लैंड्स एंड होटल से चेकआउट
    इसी बीच, बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरे सभी शिवसेना नगरसेवकों को चेकआउट करने के निर्देश दिए गए। चौथे दिन आखिरकार सभी 29 नगरसेवकों को होटल से छुट्टी मिल गई। ये सभी पार्षद 17 जनवरी से होटल में ठहरे हुए थे, लेकिन अब अचानक उन्हें वापस बुला लिया गया। राजनीतिक गलियारों में इसे रणनीतिक वापसी के रूप में देखा जा रहा है।

    बेलापुर में गुट गठन कार्यक्रम भी रद्द
    नवी मुंबई के बेलापुर में गुट गठन (ग्रुप फॉर्मेशन) के लिए जो कार्यक्रम तय था, वह भी फिलहाल रद्द कर दिया गया।

    इस फैसले से स्पष्ट है कि शिंदे गुट अंदरखाने अपनी रणनीति पर फिर से विचार-विमर्श कर रहा है और किसी भी घोषणा से पहले सभी विकल्पों को परख रहा है।

    अब सबकी नजरें दिल्ली बैठक पर
    अब सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद शिवसेना की आगे की राजनीतिक दिशा और रणनीति साफ हो सकती है। पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, लेकिन आने वाले घंटों में कोई बड़ा फैसला सामने आने की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
    राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को बड़ी चाल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या शिंदे गुट किसी नए मोड़ पर जाएगा या यह सिर्फ रणनीतिक इंतजार हैयह सवाल अब दिल्ली बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा।

  • महंगे शौक की सनक: कार के लिए जमीन बेचने की जिद, पिता ने किया इनकार तो बेटे ने लगा ली फांसी

    महंगे शौक की सनक: कार के लिए जमीन बेचने की जिद, पिता ने किया इनकार तो बेटे ने लगा ली फांसी

    नई दिल्ली।
    उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जो आधुनिक दौर में युवाओं की बेलगाम होती महत्वाकांक्षाओं और उनके घातक परिणामों की ओर इशारा करती है। जिले के रायपुर गांव में 20 वर्षीय रोहित यादव ने केवल इसलिए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली क्योंकि उसके माता-पिता उसकी महंगी मांगों को पूरा करने में असमर्थ थे। यह घटना न केवल एक परिवार के उजड़ने की कहानी है बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है कि कैसे ‘दिखावे की संस्कृति’ युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर हावी हो रही है।

    जमीन बेचकर कार खरीदने का था दबाव मृतक रोहित के पिता बीरेंद्र यादव के अनुसार उनका बेटा पिछले काफी समय से घर वालों पर अनुचित दबाव बना रहा था। उसकी मांग थी कि पुश्तैनी जमीन को बेचकर उसे एक लग्जरी चार पहिया गाड़ी और एक नई मोटरसाइकिल दिलाई जाए। इतना ही नहीं वह अपने लिए एक नई दुकान भी खुलवाना चाहता था। एक मध्यमवर्गीय ग्रामीण परिवार के लिए खेती की जमीन बेचकर ऐशो-आराम के साधन जुटाना मुमकिन नहीं था जिसके चलते परिजन लगातार उसे समझाने की कोशिश कर रहे थे।

    हिंसक व्यवहार और पुरानी चेतावनी रोहित के व्यवहार में जिद और हताशा का मेल इस कदर था कि वह अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता था। परिजनों ने बताया कि यह पहली बार नहीं था जब उसने ऐसा कदम उठाया हो। साल 2025 में भी उसने कार की मांग को लेकर आत्महत्या का प्रयास किया था। उस वक्त परिवार ने डरकर और उसकी खुशी की खातिर उसे एक नई मोटरसाइकिल दिला दी थी। लेकिन सनक का आलम यह था कि कुछ समय बाद उसने उसी मोटरसाइकिल को आग के हवाले कर दिया था।

    सूने घर में मौत को लगाया गले घटना वाले दिन घर के अन्य सदस्य अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त थे और कुछ लोग बाहर गए हुए थे। रोहित घर में अकेला था। इसी बीच अपनी मांग पूरी न होने से आहत और गुस्से में उसने कमरे के भीतर फंदा लगाकर जान दे दी। जब घर वाले वापस लौटे तो रोहित का शव लटका देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण इकट्ठा हुए और पुलिस को सूचना दी गई।

    पुलिस की कार्रवाई और जांच सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का ही लग रहा है जिसका कारण पारिवारिक अनबन और युवक की जिद बताया जा रहा है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या युवक किसी मानसिक तनाव या गलत सोहबत का शिकार तो नहीं था।यह घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया और दिखावे की दुनिया युवाओं को वास्तविकता से दूर ले जा रही है जहां धैर्य की कमी उन्हें ऐसे आत्मघाती मोड़ पर खड़ा कर देती है।

  • दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता पर बड़ा संकट: CAG रिपोर्ट में भारी चूक, 55% सैंपल फेल

    दिल्ली में पीने के पानी की गुणवत्ता पर बड़ा संकट: CAG रिपोर्ट में भारी चूक, 55% सैंपल फेल


    नई दिल्ली । दिल्ली में पीने के पानी की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा ऑडिट रिपोर्ट में दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की पानी की सप्लाई, निगरानी और ट्रीटमेंट प्रणाली में बड़े स्तर की कमी उजागर हुई है। यह रिपोर्ट 7 जनवरी 2026 को विधानसभा में पेश की गई थी। इसके बाद जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) ने तत्काल सुधार और कार्रवाई की मांग की है।

    ऑडिट रिपोर्ट में क्या मिला?
    CAG की जांच में यह खुलासा हुआ कि 16,234 भूजल सैंपलों में से लगभग 55% पानी पीने योग्य नहीं था।

    अलग-अलग वर्षों में यह अनुपात 49% से 63% के बीच रहा है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि जिन इलाकों में सैंपल फेल हुए हैं, वहां की पानी की सप्लाई सीधे जनता के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।

    दिल्ली में पानी की कमी और कमजोर जांच व्यवस्था
    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली को रोजाना लगभग 1,680 मिलियन यूनिट पानी की जरूरत है, लेकिन सप्लाई में करीब 25% की कमी है।
    जिन इलाकों में पानी पहुंच रहा है, उसकी गुणवत्ता की सही निगरानी नहीं हो पा रही है। जांच और मॉनिटरिंग सिस्टम इतने कमजोर हैं कि यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो गया है कि पानी स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित है या नहीं।

    BIS मानकों के अनुसार जांच नहीं
    CAG रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि दिल्ली जल बोर्ड की प्रयोगशालाओं में BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के नियमों के अनुसार पानी की जांच नहीं हुई।

    BIS मानकों के अनुसार 43 तरह की जांच आवश्यक है, लेकिन DJB केवल 12 मानकों पर ही पानी की जांच कर रहा था। इसमें आर्सेनिक, लेड और बैक्टीरिया की जांच भी शामिल नहीं थी।

    बिना ट्रीटमेंट पानी की सप्लाई
    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पिछले पांच वर्षों में 80-90 मिलियन गैलन पानी रोजाना बिना ट्रीटमेंट के सीधे बोरवेल और रैनी वेल से लोगों तक सप्लाई किया गया।विशेषज्ञों का कहना है कि बिना शुद्धिकरण का पानी देने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

    पानी की सप्लाई का सही आंकड़ा नहीं
    CAG ने यह भी कहा कि दिल्ली के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, जलाशयों और बोरवेल्स पर फ्लो मीटर नहीं लगाए गए।

    इस कारण यह पता नहीं चल पाता कि कितना पानी ट्रीट हो रहा है और कितना बिना जांच के सीधे नागरिकों तक पहुंच रहा है।

    स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे
    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि दूषित पानी पीने से डायरिया, पीलिया, टायफाइड, कैंसर, किडनी-लीवर की समस्याएं हो सकती हैं।आर्सेनिक और लेड जैसे जहरीले तत्व लंबे समय में गंभीर बीमारियां पैदा कर सकते हैं।

    JSAI ने सरकार से मांगा कड़ा एक्शन
    जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया ने कहा कि साफ और सुरक्षित पेयजल हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
    JSAI ने सरकार से मांग की है कि पानी की गुणवत्ता में लापरवाही करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो और हर घर तक सुरक्षित पानी पहुंचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही प्रयोगशालाओं को आधुनिक उपकरणों से लैस किया जाए।

    राजनीतिक मुद्दा बन सकता है पानी का संकट
    यह रिपोर्ट सामने आने के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष ने पिछली सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि AAP ने इसे केंद्र सरकार की राजनीति बताया है।

    विशेषज्ञों का समाधान
    विशेषज्ञों का कहना है कि:सभी प्रयोगशालाओं को BIS मानकों के अनुसार आधुनिक बनाना होगा। पर्याप्त स्टाफ और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।हर ट्रीटमेंट प्लांट में फ्लो मीटर लगें, पानी की नियमित और व्यापक गुणवत्ता जांच हो,बिनाट्रीटमेंट पानी की सप्लाई तुरंत बंद हो।

  • करूर भगदड़ मामला: CBI ने विजय से की 6 घंटे तक पूछताछ, अब होगा फैसला ?

    करूर भगदड़ मामला: CBI ने विजय से की 6 घंटे तक पूछताछ, अब होगा फैसला ?

    नई दिल्ली । केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने करूर भगदड़ मामले के सिलसिले में तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) प्रमुख विजय से सोमवार को एजेंसी मुख्यालय में लगभग छह घंटे तक पूछताछ की। अधिकारियों ने बताया कि विजय पूर्वाह्न 10:20 बजे लग्जरी एसयूवी के काफिले में लोधी रोड स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में बैरिकेड लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि पूछताछ के बाद विजय शाम को लगभग पांच बजे अपनी एसयूवी से सीबीआई मुख्यालय से बाहर आए, गाड़ी से उतरे, हाथ हिलाकर समर्थकों एवं मीडियाकर्मियों का अभिवादन किया और फिर वापस एसयूवी में बैठकर उस पांच सितारा होटल के लिए रवाना हो गए, जहां वह ठहरे हुए हैं। इससे पहले, विजय से 12 जनवरी को यहां सीबीआई मुख्यालय में छह घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की गई थी।

    अधिकारियों के मुताबिक, टीवीके प्रमुख को 13 जनवरी को फिर से आने के लिए कहा गया था, लेकिन अभिनेता ने पोंगल का हवाला देते हुए दूसरी तारीख मांगी थी, जिसके बाद सीबीआई ने उन्हें सोमवार को दूसरे दौर की पूछताछ के लिए तलब किया था।

    विजय से पूछताछ पूरी होने के बाद टीवीके के संयुक्त महासचिव सीटी निर्मल कुमार ने सीबीआई मुख्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा कि बहुत सारी अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जो सच नहीं हैं। हम सभी जानते हैं कि करूर में क्या हुआ था। जब गृह मंत्री पिछले दिनों तमिलनाडु आए थे, तब प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने खुले तौर पर कहा था कि करूर से मौजूदा विधायक सेंथिल बालाजी 41 लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार हैं और उन्हें तलब किए जाने तथा उनसे पूछताछ किए जाने की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि हम जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। कृपया किसी भी तरह की गलत सूचना न फैलाएं। विजय को आगे की पूछताछ के लिए कोई समन जारी नहीं किया गया है। निर्मल कुमार ने कहा कि हम जानते हैं कि इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है, किसने ऐसा किया है और इसके पीछे क्या कारण है। इसलिए हमें कोई अपराधबोध नहीं है…

    हमारे नेता सहयोग करना चाहते थे। हम चाहते हैं कि असली अपराधी को न्याय के कटघरे में लाया जाए… हमें जांच के लिए उपस्थित होने में कोई संकोच नहीं है।

    अधिकारियों के अनुसार, विजय से सीबीआई की भ्रष्टाचार विरोधी इकाई से चुने गए उप अधीक्षक रैंक के एक अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम ने पूछताछ की। उन्होंने बताया कि टीवीके प्रमुख से रैली से जुड़े फैसलों, उनके देर से पहुंचने और भाषण जारी रखने के कारणों, मौके पर मची अफरा-तफरी की जानकारी होने, भीड़ की संख्या और भीड़ प्रबंधन में हुई चूक से संबंधित कई सवाल पूछे गए। अधिकारियों ने कहा कि आरोपपत्र में व्यक्तियों की भूमिका तय करने का फैसला विजय, उनकी पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और रैली की अनुमति देने तथा उसके प्रबंधन में शामिल पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों के बयानों के गहन विश्लेषण के बाद ही लिया जाएगा।

    गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सीबीआई ने करूर भगदड़ मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) से अपने हाथ में ली थी। केंद्रीय जांच एजेंसी 27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ की घटना से जुड़े सबूत जुटा रही है, जिसमें 41 लोगों की जान चली गई थी और 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
  • कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

    कोर्ट रूम में ही भिड़ गए कपिल सिब्बल और ASG राजू, जानिए पूरा मामला

    नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार (19 जनवरी) को बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व रेल मंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की कथित लैंड-फॉर-जॉब्स स्कैम मामले को रद्द करने की एक याचिका पर सुनवाई हो रही थी। लालू यादव की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल मामले में पैरवी कर रहे थे, जबकि सीबीआई की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू पक्ष रख रहे थे लेकिन कोर्ट रूम कुछ ऐसा हुआ कि दोनों आपस में ही उलझ गए और दोनों के बीच खूब बीच तीखी बहस हुई। लालू यादव ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कथित लैंड-फॉर-जॉब्स घोटाले के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

    किस बात पर हुआ विवाद?
    इस दौरान कपिल सिब्बल ने दलील दी कि इस मामले में मुकदमा चलाने के लिए पूर्व अनुमति (सैंक्शन) जरूरी है, जो नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने खुद पहले इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, ऐसे में अब उसी के खिलाफ दलील देना गलत है।

    इस पर सीबीआई की ओर से पेश ASG एसवी राजू ने सिब्बल की दलीलों पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि वह नए मुद्दे उठा रहे हैं और कानून की गलत व्याख्या कर रहे हैं। ASG राजू ने कहा, “सिब्बल ने नए मुद्दे पर बहस की है। मुझे सही कानून बताना है। मिस्टर सिब्बल गुमराह करने वाली दलीलें देते हैं और मुझे बहस नहीं करने देते।”

    कोर्ट में बढ़ा तनाव, तीखी बहस
    ASG राजू के इस आरोप पर कपिल सिब्बल नाराज हो गए और उन्होंने तपाक के कहा, “आपने ऐसा कहने की हिम्मत कैसे की कि मैंने अदालत को गुमराह किया है। मैंने कभी किसी कोर्ट को गुमराह नहीं किया।

    आप होंगे एडिशनल सॉलिसिटर जनरल, लेकिन जज नहीं हैं।” इसके जवाब में ASG राजू ने कहा, “हां, आपने कोर्ट को गुमराह किया है, यह मेरी दलील है और मैं बताऊंगा कि आपने कैसे गुमराह किया और आप मुझे बताने नहीं दे रहे हैं।” उन्होंने कहा कि अदालत के सामने सही कानून रखना उनका कर्तव्य है और वह अपनी बात पर कायम हैं।
    जज ने किया हस्तक्षेप
    बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने राजू की पेशेवर मर्यादा पर भी सवाल उठाए, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया। हालांकि, ASG राजू ने अपेक्षाकृत शांत लहजे में कहा कि वह सिब्बल का सम्मान करते हैं, लेकिन कानूनी स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस ररविंदर डुडेजा ने कोर्ट रूम में स्थिति को संभालते हुए कहा, “माहौल को थोड़ा शांत होने दीजिए।” इसके बाद कोर्ट ने दिन की सुनवाई समाप्त कर दी।
    आगे क्या फैसला हुआ?

    हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे अपनी-अपनी संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करें। ये दलीलें अधिकतम पांच पन्नों की होंगी और एक सप्ताह के भीतर जमा करनी होंगी। इसके बाद मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
    क्या है लैंड-फॉर-जॉब्स मामला?

    सीबीआई का आरोप है कि 2004 से 2009 के बीच, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे, तब रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उनके परिवार और करीबी लोगों के नाम पर जमीन ली गई। सीबीआई ने इस मामले में 2022 में केस दर्ज किया और बाद में लालू यादव, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। लालू यादव ने हाई कोर्ट में दलील दी है कि यह जांच भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जरूरी पूर्व अनुमति के बिना शुरू की गई, इसलिए पूरा मामला रद्द किया जाना चाहिए।

  • शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई

    शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम में स्नान से नहीं…. वाहन से जाने से रोका,,,प्रशासन ने दी सफाई


    प्रयागराज।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के प्रयागराज (Prayagraj) में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwaranand) को संगम जाने से रोके जाने को लेकर अब प्रशासन ने सफाई दी है। मेला प्राधिकरण के आईसीसीसी सभागार में आयोजित प्रेसवार्ता में अफसरों ने स्पष्ट किया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को संगम स्नान से नहीं रोका गया था, यह भ्रम फैलाया जा रहा है। उनसे वाहन से उतरकर स्नान के लिए पैदल जाने का अनुरोध किया गया था। तीन घंटे तक लगातार आग्रह करने के बाद भी वह अपनी जिद पर अड़े रहे। बिना अनुमति के मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya) जैसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व की व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास किया।

    मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो वाहनों की अनुमति मांगी थी लेकिन मेला प्रशासन ने अत्यधिक भीड़ व सुरक्षा का हवाला देते हुए मना कर दिया था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम नोज के करीब तक पहुंच गए। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बताया कि पीपा पुल नंबर दो को एक दिन पहले से बंद रखा गया था। एएसपी कल्पवासी थाना प्रभारी ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थकों ने बैरिकेड तोड़ दिया। सीसीटीवी फुटेज के साक्ष्य के आधार पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। साधु-संतों की पिटाई के जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उसकी जांच कराई जाएगी।

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि मौनी स्नान पर्व पर किसी तरह के वाहन का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी गई थी। वहीं, डीएम मनीष वर्मा ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा प्राथमिकता थी। इसी कड़ी में अविमुक्तेश्वरानंद को वाहन लेकर संगम नोज तक जाने से रोका गया था। ताकि किसी तरह की भगदड़ की स्थिति उत्पन्न न हो सके।


    शंकराचार्य का प्रोटोकॉल देने पर है रोक: मेलाधिकारी

    मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तहत प्रोटोकॉल देने पर रोक लगाने का आदेश दिया है। न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए मेला में उन्हें शंकराचार्य ज्योतिषपीठ नहीं बल्कि बद्रिका आश्रम सेवा शिविर के नाम पर जमीन आवंटित की गई है। प्रेसवार्ता के दौरान अफसर अविमुक्तेश्वरानंद को स्वामी के नाम से ही संबोधित करते रहे।