Category: National

  • Holi 2026: MP समेत देश के विभिन्न राज्यों में कब रहेगी होली की छुट्टी… 3 या 4 मार्च को? देखें लिस्ट

    Holi 2026: MP समेत देश के विभिन्न राज्यों में कब रहेगी होली की छुट्टी… 3 या 4 मार्च को? देखें लिस्ट


    भोपाल।
    रंगों का त्योहार होली (Holi) हर साल खुशियां लेकर आता है, लेकिन इस बार त्योहार की तारीख को लेकर अलग अलग राज्यों में अंतर होने से छात्रों और अभिभावकों के बीच थोड़ा भ्रम बन गया था। कहीं होली 3 मार्च को मनाई जा रही है तो कहीं 4 मार्च को। अब कई राज्य सरकारों (State Governments) और शैक्षणिक संस्थानों (Educational Establishments) ने स्थिति साफ कर दी है, जिसके बाद स्कूलों की छुट्टियों का कार्यक्रम भी सामने आने लगा है। होली भारत का ऐसा पर्व है जिसे पूरे देश में बेहद उत्साह और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। लोग एक दूसरे को रंग लगाते हैं, घरों में मिठाइयां बनती हैं, खास तौर पर गुजिया और पारंपरिक पकवानों का स्वाद लिया जाता है। परिवार और रिश्तेदार एक साथ मिलकर त्योहार की खुशियां बांटते हैं।


    उत्तर प्रदेश में तीन दिन की छुट्टी का ऐलान

    उत्तर प्रदेश सरकार (Uttar Pradesh Government) ने होली के मौके पर तीन दिन का सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के अनुसार 2 मार्च से 4 मार्च तक सरकारी दफ्तरों और शिक्षण संस्थानों में अवकाश रहेगा। साथ ही सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि फरवरी महीने का वेतन और पेंशन त्योहार से पहले जारी कर दिया जाए ताकि कर्मचारियों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए 28 फरवरी 2026, जो शनिवार है, उसे कार्य दिवस रखा गया है जबकि 3 मार्च को अवकाश रहेगा।


    दिल्ली में परीक्षा कार्यक्रम के कारण अलग व्यवस्था

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इस समय अधिकतर स्कूलों में परीक्षाएं चल रही हैं। इसलिए परीक्षा कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए होली के दिन कोई भी परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। सीबीएसई ने भी निर्णय लिया है कि 4 मार्च को कोई बोर्ड परीक्षा नहीं रखी जाएगी, ताकि विद्यार्थी बिना किसी तनाव के त्योहार मना सकें।


    किन राज्यों में 3 मार्च को मनाई जाएगी होली

    देश के कई राज्यों में होली 3 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इन राज्यों में उसी दिन स्कूलों के बंद रहने की संभावना है।
    महाराष्ट्र
    मध्य प्रदेश
    उत्तराखंड
    असम
    तेलंगाना
    राजस्थान
    पश्चिम बंगाल
    गोवा
    झारखंड
    केरल
    आंध्र प्रदेश

    इन राज्यों में स्थानीय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन द्वारा अवकाश की औपचारिक सूचना जारी की जा रही है।


    बिहार में दो दिन बंद रहेंगे स्कूल

    बिहार शिक्षा विभाग के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार राज्य में 3 और 4 मार्च दोनों दिन स्कूल बंद रहेंगे। यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि यहां होली का उत्सव दो दिनों तक अलग अलग परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।


    इन राज्यों में 4 मार्च को मनाई जाएगी होली

    कुछ राज्यों में पंचांग और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर होली 4 मार्च 2026 को मनाई जाएगी। इन क्षेत्रों में उसी दिन स्कूलों में अवकाश रहेगा।
    गुजरात
    मिजोरम
    ओडिशा
    चंडीगढ़
    मणिपुर
    अरुणाचल प्रदेश
    जम्मू और कश्मीर
    उत्तर प्रदेश
    दिल्ली
    बिहार
    छत्तीसगढ़
    मेघालय
    हिमाचल प्रदेश
    छुट्टी को लेकर स्कूल अलग से जारी करेंगे नोटिस

    हालांकि राज्य स्तर पर अवकाश घोषित किए जा रहे हैं, लेकिन अंतिम निर्णय संबंधित स्कूल प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना पर निर्भर करेगा। कई निजी स्कूल अपने परीक्षा कार्यक्रम, वार्षिक गतिविधियों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार छुट्टी की तारीख तय करते हैं। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने स्कूल से जारी नोटिस जरूर जांच लें और केवल सोशल मीडिया की जानकारी पर भरोसा न करें।


    क्यों अलग अलग तारीखों पर पड़ रही है होली

    दरअसल होली की तारीख फाल्गुन पूर्णिमा की तिथि और स्थानीय पंचांग गणना पर आधारित होती है। देश के विभिन्न हिस्सों में सूर्योदय और तिथि परिवर्तन के समय में अंतर होने से त्योहार की तारीख में एक दिन का फर्क आ जाता है। यही कारण है कि हर साल कुछ राज्यों में होली अलग दिन मनाई जाती है।


    त्योहार के साथ परीक्षाओं का भी ध्यान

    मार्च का महीना स्कूलों के लिए परीक्षा का समय होता है। ऐसे में शिक्षा विभाग इस बात का विशेष ध्यान रख रहे हैं कि त्योहार और परीक्षा एक ही दिन न पड़ें। इसी वजह से कई बोर्ड और स्कूलों ने परीक्षा तिथियों में बदलाव किया है या उस दिन परीक्षा नहीं रखने का निर्णय लिया है।

  • मध्य पूर्व में संघर्ष के बीच एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के 11 देशों में उड़ान न भरने की सलाह

    मध्य पूर्व में संघर्ष के बीच एयरलाइंस को पश्चिम एशिया के 11 देशों में उड़ान न भरने की सलाह


    नई दिल्ली।
    ईरान-इजरायल के बीच जारी संघर्ष और मध्य पूर्व में बढ़ते टकराव के मद्देनजर विमानन नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने बड़ा फैसला लिया है। डीजीसीए ने शनिवार को भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को ईरान, सऊदी अरब और यूएई सहित 11 देशों के हवाई क्षेत्रों का उपयोग 2 मार्च तक न करने की सलाह दी है।

    डीजीसीए ने भारतीय एयरलाइंस कंपनियों को जारी निर्देश में कहा कि वे 11 देशों के ऊपर से उड़ान भरने से बचें। विमानन नियामक का जारी आदेश सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। डीजीसीए के निर्देश वाले इन 11 देशों में ईरान, इजराइल, लेबनान, यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, इराक, जॉर्डन, कुवैत और कतर शामिल हैं। यह नया सुरक्षा परामर्श (एडवायजरी) तुरंत लागू कर दिया गया है।

    फिलहाल यह रोक 2 मार्च तक प्रभावी रहेगी। इस पाबंदी के कारण भारतीय एयरलाइंस ने मध्य पूर्व जाने वाली अपनी कई उड़ानें कुछ समय के लिए निलंबित कर दी है। वहीं, कई फ्लाइट्स के रास्ते बदले गए हैं, जबकि कुछ को रद्द करना पड़ा है। सीधे रास्ते बंद होने से विमानों को घूमकर जाना होगा, जिससे सफर का समय बढ़ जाएगा। उड़ान के समय बढ़ने से तेल का खर्च बढ़ेगा, जिसका सीधा बोझ यात्रियों की जेब पर पड़ सकता है।

    उल्लेखनीय है कि विमानन कंपनियां प्रभावित यात्रियों को टिकट के पैसे वापस करने यानी दूसरी तारीख पर यात्रा करने का विकल्प दे रही हैं। डीजीसीए ने एयरलाइंस को लगातार पल-पल की जानकारी (नोटम) पर नजर रखने को कहा है, ताकि किसी भी तरह के खतरे से बचा जा सके। इसके साथ ही यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी एयरलाइन की वेबसाइट पर उड़ान का स्टेटस जरूर चेक कर लें।

  • आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव

    आंध्र प्रदेश में भीषण हादसा: पटाखा फैक्ट्री में धमाके से दहल उठा काकीनाडा, 20 की मौत, दूर-दूर तक बिखरे शव


    नई दिल्ली । काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: शनिवार की दोपहर आंध्र प्रदेश का काकीनाडा जिला एक ऐसे हृदयविदारक हादसे का गवाह बना, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। जिले के वेटलापलेम गांव स्थित एक पटाखा निर्माण इकाई में हुए भीषण विस्फोट ने हंसते खेलते परिवारों की खुशियां पल भर में मातम में बदल दीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 6 अन्य कर्मचारी जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

    धमाका दोपहर करीब 2 बजे उस वक्त हुआ जब फैक्ट्री के भीतर 20 से अधिक कर्मचारी अपने काम में मशगूल थे। विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी गूंज 5 किलोमीटर के दायरे में सुनाई दी। स्थानीय निवासियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि आसपास की धरती डोल गई और आसमान में धुएं का गुबार छा गया। जैसे ही ग्रामीण मौके पर पहुंचे, वहां का मंजर किसी डरावने सपने जैसा था। फैक्ट्री का ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका था और चारों ओर चीख पुकार मची थी।

    पुलिस और चश्मदीदों ने बताया कि धमाके के दबाव के कारण कर्मचारियों के शव पास के धान के खेतों में जाकर गिरे। हरे भरे खेतों के बीच बिखरे हुए अंग और जली हुई लाशें सुरक्षा मानकों की अनदेखी की भयावह कहानी बयां कर रही थीं। स्थिति इतनी विकट थी कि स्थानीय लोगों को शवों को इकट्ठा करने के लिए ‘बाराकालू’ खाद की बोरियों से बनी चादरें का सहारा लेना पड़ा। पुलिस प्रशासन ने खेतों में दूर तक छिटके शरीर के हिस्सों को खोजने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन कैमरों की मदद ली है, ताकि शिनाख्त की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    काकीनाडा सरकारी अस्पताल के सुपरिटेंडेंट के अनुसार, अस्पताल लाए गए घायल 90 से 100 प्रतिशत तक झुलस चुके हैं, जिससे उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई है। डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने का भरसक प्रयास कर रही है, लेकिन गृह मंत्री वंगालपुडी अनीता ने आशंका जताई है कि हताहतों की संख्या अभी और बढ़ सकती है।

    मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने तत्काल संबंधित मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों को घटनास्थल पर पहुंचने और राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि फैक्ट्री के पास आवश्यक लाइसेंस थे या नहीं और वहां सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। फिलहाल, पूरा गांव शोक में डूबा है और अपनों को खोने वाले परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है।

  • समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉर्डेलिया क्रूज केस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी हरी झंडी

    समीर वानखेड़े की मुश्किलें बढ़ीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने कॉर्डेलिया क्रूज केस में अनुशासनात्मक कार्रवाई को दी हरी झंडी


    नई दिल्ली। कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग्स केस के चर्चित और विवादित चेहरा रहे आईआरएस IRS अधिकारी समीर वानखेड़े की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2021 के इस हाई-प्रोफाइल मामले में वानखेड़े के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण कैट के उस पुराने फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने वानखेड़े को बड़ी राहत दी थी। कोर्ट के इस ताजा आदेश के बाद अब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड CBIC द्वारा जारी चार्जशीट के आधार पर जांच का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

    समीर वानखेड़े, जो 2008 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं, उस समय वैश्विक सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने मुंबई एनसीबी NCB के जोनल डायरेक्टर रहते हुए अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्य खान को ड्रग्स केस में गिरफ्तार किया था। हालांकि, बाद में उन पर गंभीर आरोप लगे कि उन्होंने आर्यन खान को फंसाने की धमकी दी और मामले को रफा-दफा करने के बदले उनके परिवार से कथित तौर पर 25 करोड़ रुपये की मांग की थी। इसके अलावा, उन पर यह भी आरोप है कि उन्होंने जांच की दिशा मोड़ने की कोशिश की और एनसीबी से कार्यमुक्त होने के बावजूद विभाग के विधिक अनुभाग से गोपनीय जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया था।

    गौरतलब है कि इससे पहले ‘कैट’ ने 18 अगस्त 2025 को वानखेड़े को जारी किए गए आरोपपत्र चार्जशीट को रद्द कर दिया था, जिसे केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार का तर्क था कि अधिकारी के आचरण की गहन जांच जरूरी है। हाई कोर्ट की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि अनुशासनात्मक कार्यवाही को रोकना उचित नहीं है। इस फैसले से साफ हो गया है कि सरकारी संस्थानों की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर के अधिकारी के खिलाफ आरोपों की जांच अनिवार्य है। अब वानखेड़े को इन गंभीर विभागीय आरोपों का सामना करना होगा, जो उनके करियर के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

  • नई दिल्ली दौरे पर CM मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की अहम मुलाकात

    नई दिल्ली दौरे पर CM मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की अहम मुलाकात


    नई दिल्ली। मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को राजधानी दिल्ली के दौरे पर हैं। इस यात्रा को प्रशासनिक और संगठनात्मक लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाम तक उनके भोपाल लौटने की संभावना है।

    दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान प्रदेश के विकास कार्यों चल रही योजनाओं और केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बताया जा रहा है कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और इसमें समसामयिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस भेंट को अहम माना जा रहा है।
    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी सौजन्य भेंट की।

  • किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा

    किन मुस्लिम देशों में नहीं खेली जाती होली? रंग दिखने पर मिलती है इतनी कड़ी सजा


    नई दिल्ली । होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

    होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों हंसी मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है. भारत में होली को खुले मैदानों गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है जहां बड़े बड़े जुलूस रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है.

    कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है. कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है. तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है.

    किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है

    अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है. रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है. त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है. इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है.

    इसके अलावा सऊदी अरब में गैर इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है. भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं. वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है. सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं. इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है. अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है.

    रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है

    कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है. सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है. जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है. उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

    विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है. वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है. वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है. उल्लंघन करने पर जुर्माना प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं.

  • उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर

    उपराष्ट्रपति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में 1.2 लाख विद्यार्थियों को दी उपाधियां, महिला शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर दिया जोर


    नई दिल्ली । दिल्ली उपराष्ट्रपति एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज दिल्ली विश्वविद्यालय के 102वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और 1.2 लाख से अधिक स्नातकों को उपाधियां प्रदान कीं। समारोह में उन्होंने विश्वविद्यालय की 104 वर्षों की शैक्षणिक यात्रा की सराहना करते हुए इसे भारत के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक बताया।

    उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की शुरुआत मात्र तीन कॉलेजों दो संकायों आठ विभागों और 750 विद्यार्थियों से हुई थी वहीं आज यह 16 संकाय 86 विभाग 90 कॉलेज और छह लाख से अधिक विद्यार्थियों वाला एक विशाल शैक्षणिक संस्थान बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार का भी उल्लेख किया और कहा कि यह शिक्षा में निरंतरता और उत्कृष्टता का प्रतीक है।

    उन्होंने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं है बल्कि समाज की सेवा राष्ट्र के कल्याण और राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत को निभाने की प्रतिबद्धता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि विकसित भारत @2047 को साकार करने की कुंजी युवाओं में निहित है और हर विद्यार्थी चाहे वह वैज्ञानिक शिक्षक कलाकार उद्यमी या नवोन्मेषक बने वह इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

    विशेष रूप से उन्होंने महिला शिक्षा में हुई प्रगति की सराहना की। उपराष्ट्रपति ने बताया कि स्नातकों में 50 प्रतिशत से अधिक और स्वर्ण पदक विजेताओं में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं जो देश में शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास का प्रतीक है।

    स्नातकों को सामाजिक जिम्मेदारी नवाचार और प्रौद्योगिकी अनुसंधान तथा उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान करते हुए उपराष्ट्रपति ने उन्हें नशीले पदार्थों से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने की सलाह दी।

  • पीएम मोदी ने राजस्थान से एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, नारीशक्ति सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

    पीएम मोदी ने राजस्थान से एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत की, नारीशक्ति सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

    नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान के अजमेर से सर्विकल कैंसर के खिलाफ राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया और पांच लड़कियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस टीका लगाया गया। इस अभियान का उद्देश्य हर साल लगभग 1.15 करोड़ 14 साल की लड़कियों को हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में टीका मुफ्त उपलब्ध कराना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पहल देश की नारीशक्ति को सशक्त करने की दिशा में एक अहम कदम है।

    पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसी कड़ी में अजमेर से राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि परिवार में जब मां बीमार होती है तो घर बिखर जाता है लेकिन मां स्वस्थ हो तो परिवार हर संकट का सामना करने में सक्षम रहता है। यही कारण है कि महिलाओं और लड़कियों के स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं।

    पीएम मोदी ने कहा कि 2014 से पहले शौचालय की सुविधा न होने के कारण लड़कियों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता था, यह किसी ने महसूस नहीं किया। उन्होंने बताया कि उस समय यह मुद्दा सत्ता के लिए छोटी बात था लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे संवेदनशीलता के साथ हल किया। इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान कुपोषण और माताओं की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया गया। सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत माताओं को पोषक आहार मुहैया कराया गया और पांच हजार रुपए उनके खातों में जमा किए गए।

    प्रधानमंत्री ने उज्ज्वला गैस योजना का भी उल्लेख करते हुए कहा कि घर में धुएं के कारण महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, लेकिन इस योजना से यह समस्या दूर हुई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल सत्ता के लिए नहीं बल्कि संवेदनशीलता के साथ काम करती है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर यह भी कहा कि इस अभियान के माध्यम से लड़कियों और महिलाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा, शिक्षा और अवसर मिले और वे आत्मनिर्भर बनें।

    उन्होंने आगे कहा कि एचपीवी टीकाकरण अभियान केवल एक स्वास्थ्य पहल नहीं है बल्कि यह नारीशक्ति सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। अभियान के तहत लड़कियों को टीका तय सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर मुफ्त मिलेगा और यह कार्यक्रम देशभर में समान रूप से लागू होगा। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से इस अभियान में सहयोग करने और इसे सफल बनाने की अपील भी की।

    इस अभियान के माध्यम से न केवल सर्विकल कैंसर की रोकथाम होगी बल्कि महिलाओं और लड़कियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब महिलाएं स्वस्थ, मजबूत और आत्मनिर्भर हों। उन्होंने युवाओं को भी प्रेरित किया कि वे इस तरह की पहलों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।

    इस तरह पीएम मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ राष्ट्रीय एचपीवी टीकाकरण अभियान न केवल लड़कियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करेगा बल्कि नारीशक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

  • दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित

    दिल्ली में सड़क हादसे: 2025 में 649 मौतें, 1,738 घायल, पैदल यात्री सबसे असुरक्षित


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी में सड़क हादसों ने 2025 में चिंताजनक स्थिति पैदा कर दी। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के जनवरी 2026 के न्यूजलेटर के अनुसार बीते साल 649 लोगों की मौत हुई और 1 738 लोग घायल हुए। इनमें पैदल यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रही। आंकड़े बताते हैं कि निजी कारों की चपेट में आने से 92 दोपहिया वाहनों से 75 और भारी वाहनों से 43 पैदल यात्रियों की मौत हुई।

    तेज रफ्तार लापरवाही यातायात नियमों का उल्लंघन और सुरक्षित पारपथों की कमी हादसों के मुख्य कारण हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने 13 जनवरी को दोपहिया वाहनों की जागरूकता रैली का आयोजन किया। इस रैली में 70 पुलिस कर्मियों और 200 से अधिक लोग शामिल हुए। रैली का उद्देश्य दोपहिया वाहन चालकों के बीच सड़क सुरक्षा नियमों और हेलमेट के इस्तेमाल के प्रति जागरूकता फैलाना था। अधिकारियों ने जोर दिया कि आईएसआई प्रमाणित हेलमेट पहनना अनिवार्य है।

    सड़क सुरक्षा सुधारने के लिए सख्ती भी बढ़ाई गई। दिसंबर 2025 में गलत दिशा में वाहन चलाने वालों के खिलाफ 42 945 चालान किए गए जो पिछले साल के 8 854 मामलों से कई गुना अधिक है। इनमें दोपहिया वाहन चालक सबसे आगे थे जिनके खिलाफ 30 224 चालान किए गए। जनवरी 2026 में पहली बार भारतीय न्याय संहिता की धारा 281 के तहत 173 FIR दर्ज की गईं। इस धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर छह महीने तक की कैद या 1 000 रुपये तक का जुर्माना और वाहन ज़ब्त किया जा सकता है।

    ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाना सड़क हादसों की बड़ी वजह है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे यातायात नियमों का पालन करें सतर्क रहें और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएं। सड़क पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ा चुनौती बन चुका है।
    यह आंकड़े और उपाय दर्शाते हैं कि दिल्ली में सड़क सुरक्षा में सुधार के लिए केवल कानून नहीं बल्कि जागरूकता और बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर भी उतना ही जरूरी है

  • युवाओं ने अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों से भारत को बना दिया स्टार्टअप का बड़ा केंद्र : ओम बिरला

    युवाओं ने अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों से भारत को बना दिया स्टार्टअप का बड़ा केंद्र : ओम बिरला


    भोपाल।
    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज हमारे नौजवानों ने स्टार्टअप की एक नई दुनिया खड़ी कर दी है। अपनी मेहनत, सोच और नए प्रयोगों के दम पर उन्होंने भारत को स्टार्टअप का बड़ा केंद्र बना दिया है। अब हमारे युवा सिर्फ सपने नहीं देख रहे, बल्कि अपने नए विचारों से दुनिया की समस्याओं का हल भी दे रहे हैं।

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला शुक्रवार को मध्य प्रदेश के इंदौर में वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम का प्रारंभ वंदे मातरम्, राष्ट्रगान, पारंपरिक दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना के साथ हुआ।

    लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वैष्णव ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे समाजहित के कार्यों ने उन्हें इस समारोह में आने के लिए प्रेरित किया। डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं अत्यंत सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत का प्रगतिशील भविष्य पूरी तरह से युवाओं की ऊर्जा और उनके विजन पर निर्भर करता है।

    उन्होंने कहा कि यह बदलते और विकसित भारत के निर्माण का कालखंड है। आज दुनिया के सभी देश भारत की ओर देख रहे हैं। हमारे नौजवानों की ताकत दुनिया में बढ़ रही है और हमारे जनसांख्यिकीय विभाजन (Demographic Dividend) पर दुनिया की नज़र है। हमारे नौजवानों ने स्टार्टअप की नई दुनिया शुरू कर दी है, भारत को स्टार्टअप बना दिया और और अपने नवाचार के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं।

    बिरला ने इंदौर की इस शिक्षा और संस्कार की पावन धरती से देशभर के विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी भारतीय संस्कृति, अपने मूल्यों और अपनी सोच को साथ लेकर आगे बढ़ें और देश को नई ऊंचाइयों तक पहुँचाने में अपना पूरा योगदान दें। विश्वविद्यालय कैंपस में आपने जो सीखा है, ज्ञानार्जन किया है, उसका सदुपयोग कर नवभारत के निर्माण में जुट जाएं।

    विश्वविद्यालय के कुलाधिपति पुरुषोत्तमदास पसारी ने विधिवत रूप से समारोह के उद्घाटन की घोषणा की। उन्होंने अपने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि सहित उपस्थित शिक्षकों, अभिभावकों और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का अभिनंदन किया।

    समारोह के दौरान कुलगुरु प्रो. (डॉ.) योगेश सी. गोस्वामी ने विश्वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने संस्थान की शैक्षणिक यात्रा, बीते वर्ष में किए गए महत्वपूर्ण शोध कार्यों, विद्यार्थियों के प्लेसमेंट के आंकड़ों और संस्थागत विकास की विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार विश्वविद्यालय निरंतर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

    सफल प्रोफेशनल बनने से पहले बेहतर इंसान बनें

    कार्यक्रम में मौजूद इंदौर सांसद शंकर लालवानी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सामाजिक सेवा गतिविधियों की प्रशंसा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि यह संस्थान विद्यार्थियों में स्वावलंबन की भावना विकसित करने का सराहनीय कार्य कर रहा है।

    प्रदेश के जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही हर वैश्विक समस्या का एकमात्र स्थायी समाधान है और जीवन में एक सफल प्रोफेशनल बनने से पहले एक बेहतर इंसान बनना अनिवार्य है।

    मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और उपाधियों से नवाजा

    इस दीक्षांत समारोह में कुल 2008 स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इसके अतिरिक्त 32 शोधार्थियों को उनकी पीएचडी की डिग्री सौंपी गई। शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 16 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से नवाजा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रूपा शिंदे ने किया और राष्ट्रगान के साथ इस शैक्षणिक उत्सव का समापन हुआ।

    मंत्री सिलावट ने लोकसभा अध्यक्ष का भव्य स्वागत किया

    लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला साधारण यात्रियों की तरह दिल्ली से ट्रेन में सवार होकर इंदौर पहुंचे। इंदौर पहुंचने पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने सतरंगी दुपटटा एवं पुष्पमाला पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी, जनपद पंचायत सांवेर अध्यक्ष प्रतिनिधि मानसिंह, विश्वजीतसिंह सिसौदिया, जिला उपाध्यक्ष भारतसिंह, दिलीप चौधरी, नगर परिषद अध्यक्ष संदीप चंगेडिया सहित सैकडों नागरिकों ने भी ओम बिरला का पुष्पमालाओं से भव्य स्वागत किया। इसके पश्चात वे उज्जैन रोड स्थित श्री वैष्णव विद्यापीठ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।