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  • ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त

    ED की पंजाब में बड़ी कार्रवाई… मनी लॉन्ड्रिंग केस में 3500 करोड़ की 160 संपत्तियां जब्त


    नई दिल्ली।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने पंजाब (Punjab) में PACL से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय एजेंसी ने गुरुवार को PACL और अन्य के मामले में चल रही जांच के सिलसिले में पंजाब के लुधियाना (Ludhiana, Punjab) में स्थित 3436.56 करोड़ रुपये की 169 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ईडी ने कहा कि उसकी जांच में पता चला है कि “लाखों निवेशकों से जुटाए गए फंड का एक हिस्सा PACL के नाम पर इन 169 अचल संपत्तियों को खरीदने में इस्तेमाल किया गया था, जिनकी मौजूदा कीमत 3436.56 करोड़ रुपये है।”

    प्रवर्तन निदेशालय के दिल्ली जोनल ऑफिस ने इन संपत्तियों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत जब्त किया है। यह कार्रवाई सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) द्वारा PACL लिमिटेड, PGF लिमिटेड, दिवंगत निर्मल सिंह भंगू और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 120-B और 420 के तहत दर्ज की गई FIR के आधार पर की गई जांच के बाद की गई है।


    क्या है पूरा मामला?

    बता दें कि यह मामला PACL द्वारा बड़े पैमाने पर चलाई गई धोखाधड़ी वाली पोंजी स्कीम और सामूहिक निवेश योजनाओं से संबंधित है। इन योजनाओं के जरिए PACL और उसकी सहयोगी कंपनियों ने धोखे से भोले-भाले निवेशकों से लगभग 48,000 करोड़ रुपये जुटाए और उसका गबन कर लिया। ईडी ने इस मामले में अब तक 5,602 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को जब्त किया है, जिसमें देश बार में स्थित पर्ल ग्रुप की घरेलू संपत्तियां और विदेशी संपत्तियां दोनों शामिल हैं। इसके अलावा, इस मामले में अब तक एक अभियोजन शिकायत और दो पूरक अभियोजन शिकायतें दायर की जा चुकी हैं।

  • एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश

    एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के घर पर आयकर विभाग छापा… इस मामले में दी दबिश


    मुम्बई।
    बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी (Bollywood actress Shilpa Shetty) के मुंबई वाले घर पर इनकम टैक्स अधिकारियों (Income Tax Officials) ने रेड (Raid) मारी है। ये मामला उनकी बेस्टियन हॉस्पिटैलिटी कंपनी (Bastian Hospitality Company) से जुड़ा है। वह इस कंपनी की को-ओनर हैं। इस कंपनी के मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और गोवा में ‘बेस्टियन’ नाम से क्लब्स और रेस्टोरेंट्स हैं। आयकर विभाग को संदेह है कि होटल व्यवसाय में निवेश, आय और टैक्स भुगतान को लेकर गड़बड़ियां। ऐसे में वह बैस्टियन रेस्टोरेंट (Bastian) से संबंधित वित्तीय लेन-देन और कथित टैक्स अनियमितताओं की जांच कर रहे हैं।


    इन जगहों पर मारे छापे

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, आयकर विभाग, कंपनी के आउटलेट और इसके प्रमोटरों के घर पर रेड मार रही है। ये छापेमारी बुधवार को शुरू हुई थी और अब जांच शिल्पा शेट्टी के घर तक पहुंच गई है।


    शिल्पा शेट्टी के साथ ये हैं को-ओनर

    बस्टियन पब की शुरुआत बिजनेसमैन रंजीत बिंद्रा की कंपनी बस्टियन हॉस्पिटैलिटी ने की थी। शिल्पा शेट्टी ने साल 2019 में इस वेंचर में 50% की हिस्सेदारी खरीदी और इसकी को-ओनर बन गईं।


    आरोपों पर शिल्पा का बयान

    शिल्पा शेट्टी ने आयकर विभाग की रेड से पहले इन आरोपों से इनकार किया था और इन्हें बेबुनियाद था। उन्होंने कहा था, “जांच में पूरा सहयोग करने के बाद, हमें पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा और हमें अपने देश की कानून प्रवर्तन एजेंसियों और न्यायपालिका पर पूरा विश्वास है। हम मीडिया से सम्मानपूर्वक आग्रह करते हैं कि इस मामले में संयम बरतें क्योंकि मामला अभी कोर्ट में है।”

  • पांच राज्यों के HC को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश

    पांच राज्यों के HC को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने गुरुवार को हुई बैठक में विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) में रिक्त होने वाले मुख्य न्यायाधीशों (Chief Justices) के पदों को भरने के लिए पांच न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है। ये रिक्तियां रिटायरि और ट्रांसफर के चलते उत्पन्न हो रही हैं। कॉलेजियम की सिफारिशों को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलना अभी शेष है। कॉलेजियम के निर्णय के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह पद वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    इसके अलावा, बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रेवती पी. मोहिते डेरे को मेघालय हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश मेघालय हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित ट्रांसफर के मद्देनजर की गई है।

    कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के ही एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की अनुशंसा की है। झारखंड हाईकोर्ट में यह पद 8 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने से रिक्त होगा।

    केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक को सिक्किम हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। वहीं, उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है।

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीस जस्टिस सौमेन सेन को केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह ट्रांसफर केरल हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद प्रभावी होगा।

  • रिटायरमेंट से पहले ‘छक्के’ मारने की प्रवृत्ति चिंताजनक: CJI सूर्यकांत की न्यायपालिका को सख्त चेतावनी

    रिटायरमेंट से पहले ‘छक्के’ मारने की प्रवृत्ति चिंताजनक: CJI सूर्यकांत की न्यायपालिका को सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली
    ।न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है। बुधवार, 17 दिसंबर 2025, को एक अहम सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत ने रिटायरमेंट से ठीक पहले कुछ न्यायिक अधिकारियों द्वारा पारित किए जा रहे विवादित आदेशों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने इस प्रवृत्ति की तुलना क्रिकेट के आखिरी ओवर में लगाए जाने वाले छक्कों से करते हुए इसे न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक करार दिया।

    यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है – CJ
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    सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मध्य प्रदेश के एक जिला जज की याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जिन्हें रिटायरमेंट से महज 10 दिन पहले दो विवादित आदेश पारित करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। इस मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ कर रही थी।

    CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा

    कुछ न्यायिक अधिकारी सेवानिवृत्ति से पहले ऐसे आदेश पारित करने लगते हैं मानो वे क्रिकेट मैच के आखिरी ओवर में छक्के मार रहे हों। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंता का विषय है।

    गलत आदेश बनाम बेईमानी – फर्क जरूरी

    हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हर गलत न्यायिक आदेश कदाचार नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में किसी जज को केवल इसलिए निलंबित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसका आदेश गलत पाया गया हो, क्योंकि ऐसे आदेशों को अपील या उच्च अदालत के जरिए सुधारा जा सकता है।

    लेकिन CJI ने एक अहम सवाल उठाया-

    अगर कोई आदेश स्पष्ट रूप से बेईमानी, पक्षपात या बाहरी हितों से प्रेरित हो, तो क्या उसे सिर्फ एक  गलती माना जा सकता है? यही सवाल इस पूरे मामले का केंद्र रहा।

    जज का पक्ष: बेदाग रिकॉर्ड का दावा

    मध्य प्रदेश के संबंधित जिला जज 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन 19 नवंबर को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के चलते राज्य में जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई, जिससे उनका कार्यकाल एक साल और बढ़ गया। जज की ओर से सीनियर एडवोकेट विपिन सांघी ने दलील दी कि उनका पूरा सेवा रिकॉर्ड बेदाग रहा है और उन्हें हमेशा सकारात्मक वार्षिक मूल्यांकन मिले हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ न्यायिक आदेशों के आधार पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करना न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ है।

    सुप्रीम कोर्ट का संतुलित रुख

    सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील से आंशिक सहमति जताई कि न्यायिक त्रुटि और कदाचार के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने सीधे तौर पर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और जज को पहले मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की सलाह दी।अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि निलंबन से जुड़ी जानकारियां RTI के जरिए मांगना उचित तरीका नहीं है, खासकर जब मामला वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी से जुड़ा हो। ऐसे मामलों में संस्थागत प्रक्रियाओं और अभ्यावेदन का सहारा लिया जाना चाहिए।

    न्यायपालिका की साख पर बड़ा संदेश

    CJI सूर्यकांत की यह टिप्पणी केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे न्यायिक तंत्र के लिए एक स्पष्ट संदेश है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि न्यायिक स्वतंत्रता जरूरी है, लेकिन उसके साथ ईमानदारी और जवाबदेही भी उतनी ही अहम है।यह फैसला और टिप्पणी न्यायपालिका के भीतर आत्ममंथन की जरूरत को रेखांकित करती है। रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके न्यायिक अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपने पद की गरिमा और निष्पक्षता को आखिरी दिन तक बनाए रखें, क्योंकि न्यायपालिका की साख किसी एक आदेश से भी प्रभावित हो सकती है।

  • लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी

    लोकसभा में हंगामे के बीच VB–G Ram G बिल पास, विपक्ष ने फाड़े कागज और किया नारेबाजी


    नई दिल्ली/18 दिसंबर 2025 को लोकसभा में एक बार फिर हंगामे का माहौल देखने को मिला। भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी VB–G Ram G बिल पर मतदान के दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया। विरोध के स्वर इतना तेज थे कि कई सांसद वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे और बिल से जुड़े कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। इसके चलते लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।

    विपक्ष का कड़ा विरोध
    विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस अहम बिल को पर्याप्त चर्चा और बहस के बिना जल्दबाजी में पास करवा दिया। उनका कहना था कि ग्रामीण रोजगार और आजीविका से जुड़े इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर व्यापक और खुली बहस आवश्यक थी। हंगामे के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी कर रहे थे और सदन की कार्यवाही बाधित होती रही।विपक्ष का मुख्य आरोप यह भी था कि विधेयक पारित करते समय लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और पारदर्शिता की अनदेखी की गई। विपक्ष ने कहा कि इस बिल का उद्देश्य भले ही ग्रामीण रोजगार सृजन और आजीविका बढ़ाना है, लेकिन इसे बिना पर्याप्त चर्चा के पास कराना संसद की गरिमा के खिलाफ है।

    कृषि मंत्री का जवाब
    बिल पर चर्चा के दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंत्री ने कहा, हम किसी से भेदभाव नहीं करते। बापू हमारी प्रेरणा और श्रद्धा हैं। हमारे लिए पूरा देश एक है। देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
    उन्होंने आगे बताया कि सरकार का उद्देश्य हर जरूरतमंद तक रोजगार और आजीविका के अवसर पहुंचाना है। इस बिल के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और लाखों ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार के अवसर मिलेंगे।

    सदन में बढ़ता हंगामा और स्थगन

    मंत्री के जवाब के बावजूद विपक्ष का विरोध कम नहीं हुआ। सांसदों ने नारेबाजी जारी रखी और कई ने कागज फाड़कर सदन में फेंक दिए। लगातार हंगामे के चलते स्पीकर ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक स्थगित करने का फैसला किया। यह स्थिति यह दर्शाती है कि बिल का पारित होना राजनीतिक तौर पर कितनी संवेदनशील स्थिति पैदा कर गया है।

    राजनीतिक सरगर्मी तेज

    VB–G Ram G बिल के पारित होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। जहां सरकार इसे ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी करार दे रहा है। आने वाले दिनों में इस बिल को लेकर संसद के बाहर भी राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।विशेषज्ञों का कहना है कि इस बिल के प्रभाव और इसके क्रियान्वयन की निगरानी भी महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, आजीविका के अवसर और आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बिल का क्रियान्वयन प्रभावी और पारदर्शी होना चाहिए।VB–G Ram G बिल न केवल ग्रामीण भारत के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाने का माध्यम है, बल्कि यह संसद में कानून बनाने की प्रक्रिया, बहस और राजनीतिक गतिशीलता का उदाहरण भी बन गया है। यह देखना रोचक होगा कि अगले हफ्तों में इस बिल को लेकर क्या नीति और क्रियान्वयन कदम उठाए जाते हैं।

  • बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख

    बीजिंग ने कैसे तोड़ा प्रदूषण का घेरा? ‘गैस चैंबर’ बनती दिल्ली के लिए चीन की स्टेप-बाय-स्टेप सीख


    नई दिल्ली /दिल्ली में वायु प्रदूषण एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। हालात ऐसे हैं कि सरकार को वर्क फ्रॉम होम निर्माण गतिविधियों पर रोक और बिना पीयूसी पेट्रोल-डीजल न मिलने जैसी सख्त पाबंदियां लागू करनी पड़ी हैं। गैस चैंबर बनती राजधानी के बीच अब चीन का उदाहरण चर्चा में है। चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने बताया है कि बीजिंग ने किस तरह प्रदूषण को मात दी और कैसे एक दशक में हवा की गुणवत्ता में ऐतिहासिक सुधार किया।यू जिंग ने दिल्ली और बीजिंग की तुलना करते हुए आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार वर्ष 2013 में बीजिंग में पीएम 2.5 का औसत स्तर 101.7 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। यह स्तर 2024 तक घटकर 30.9 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रह गया। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ जब चीन में तेज शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार जारी रहा। इसके बावजूद लगातार और कठोर नीतियों के कारण बीजिंग आज प्रदूषण नियंत्रण की मिसाल बन चुका है।

    वाहनों पर सबसे पहला वार

    चीन की रणनीति का पहला और सबसे अहम कदम था वाहन उत्सर्जन पर सख्त नियंत्रण। बीजिंग में यूरोपियन मानकों के बराबर कड़े उत्सर्जन नियम लागू किए गए। पुराने और ज्यादा धुआं छोड़ने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया गया। निजी वाहनों की संख्या सीमित करने के लिए लाइसेंस प्लेट लॉटरी सिस्टम ऑड-ईवन जैसी योजनाएं और सप्ताह के कुछ तय दिनों में गाड़ी चलाने पर रोक लगाई गई।इसके साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया गया। मेट्रो और बस नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ और इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से बढ़ावा दिया गया। आज बीजिंग में इलेक्ट्रिक बसों और टैक्सियों की संख्या लाखों में है जिससे प्रदूषण पर सीधा असर पड़ा।

    उद्योगों पर सख्त फैसला

    बीजिंग में प्रदूषण का बड़ा स्रोत भारी उद्योग भी थे। चीन ने इस मोर्चे पर भी कोई नरमी नहीं दिखाई। शहर से 3000 से अधिक बड़ी और प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों को या तो बंद कराया गया या फिर शहर से बाहर स्थानांतरित किया गया। देश की बड़ी स्टील कंपनी शौगांग को हटाने से ही हवा में खतरनाक कणों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।दिलचस्प बात यह है कि जिन इलाकों में पहले फैक्ट्रियां थीं वहां अब पार्क व्यावसायिक क्षेत्र और तकनीकी हब विकसित किए गए। शौगांग का पुराना औद्योगिक परिसर 2022 के शीतकालीन ओलंपिक का प्रमुख स्थल बना जो पर्यावरणीय बदलाव का प्रतीक बन गया।

    क्षेत्रीय सहयोग बना गेमचेंजर

    चीन ने सिर्फ बीजिंग तक सीमित रहकर कदम नहीं उठाए। आसपास के 26 शहरों को साथ लेकर साझा प्रदूषण नियंत्रण रणनीति अपनाई गई। कोयले का उपयोग न केवल उद्योगों में बल्कि घरों में भी चरणबद्ध तरीके से खत्म किया गया। स्वच्छ ईंधन और गैस आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

    भारत के लिए क्या सीख?

    भारत में भी स्वच्छ ईंधन निजी वाहनों पर नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर लंबे समय से चर्चा होती रही है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट की विशेषज्ञ अनुमिता रॉय चौधरी का कहना है कि फर्क नीति के इरादे और उसके पैमाने का है। चीन ने सालभर सख्ती बरती जबकि दिल्ली में अधिकतर कदम आपात स्थिति में ही उठाए जाते हैं।विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली में उद्योगों को पूरी तरह हटाना मुश्किल है लेकिन बेहतर तकनीक साझा प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और लगातार निगरानी से हालात सुधारे जा सकते हैं। बीजिंग का अनुभव बताता है कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो और नीतियां लंबी अवधि की हों तो प्रदूषण जैसे जटिल संकट पर भी काबू पाया जा सकता है।

  • प्रियंका और राहुल गांधी के बीच परिवारिक कलह केंद्रीय मंत्री ने झगड़े का दावा किया

    प्रियंका और राहुल गांधी के बीच परिवारिक कलह केंद्रीय मंत्री ने झगड़े का दावा किया


    नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही आंतरिक कलह को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच गंभीर विवाद चल रहा है जिससे राहुल गांधी ने परिवार और पार्टी से लड़कर विदेश जाने का निर्णय लिया। बिट्टू ने कहा राहुल गांधी का विदेश में होना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस परिवार में कुछ गहरे मतभेद हैं। राहुल गांधी पार्टी और परिवार से झगड़कर विदेश गए हैं जबकि उनकी बहन प्रियंका गांधी भी लगातार अपनी बात रख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के अंदर ‘टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल’ का झगड़ा अब खुलकर सामने आ चुका है।

    केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जर्मनी में हैं जहां उनकी तस्वीरें दिखाई दी हैं जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के लिए दुनिया भर में काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेताओं को महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है बल्कि वे अपनी आंतरिक लड़ाई में उलझे हुए हैं। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस की आंतरिक कलह का दावा किया था और इसे टीम प्रियंका बनाम टीम राहुल के रूप में पेश किया था। पूनावाला ने कहा था कांग्रेस की आंतरिक कलह अब बाहर आ गई है जो कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के लिए चिंता का विषय है।

    बिट्टू के बयान के बाद कांग्रेस से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह संकेत देता है कि पार्टी के भीतर कोई बड़ा विवाद चल रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की तरफ से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट बयान न आने से अटकलें और भी तेज हो गई हैं। इस आंतरिक कलह को लेकर भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल उठाए हैं जबकि कांग्रेस के नेताओं के बीच बढ़ते मतभेदों को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।

  • यात्रियों को होगा एक्स्ट्रा खर्च ज्यादा सामान लेकर ट्रेन यात्रा करने पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क

    यात्रियों को होगा एक्स्ट्रा खर्च ज्यादा सामान लेकर ट्रेन यात्रा करने पर देना होगा अतिरिक्त शुल्क


    नई दिल्ली । रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में एक महत्वपूर्ण जानकारी दी है जिसमें कहा गया है कि अब ट्रेन यात्रा करते समय यदि यात्री निर्धारित सीमा से अधिक सामान ले जाते हैं तो उन्हें अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करना होगा। यह नियम ट्रंक सूटकेस और बक्से जैसी वस्तुओं के लिए लागू होगा जिनका बाहरी माप निर्धारित सीमा से ज्यादा होगा। ऐसे सामान को यात्री के डिब्बों में नहीं बल्कि ब्रेकवैन एसएलआर/पार्सल वैन में बुक करके ले जाना होगा। वैष्णव ने यह जानकारी तेलुगु देशम पार्टी के सांसद वेमिरेड्डी प्रभाकर रेड्डी के सवाल के जवाब में दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न श्रेणियों में सामान ले जाने की अधिकतम सीमा तय की गई है।

    क्या हैं नए नियम

    द्वितीय श्रेणी 35 किग्रा तक सामान मुफ्त 70 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। स्लीपर श्रेणी 40 किग्रा तक मुफ्त 80 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। एसी थ्री टियर/चेयर कार 40 किग्रा तक सामान मुफ्त अधिकतम सीमा भी 40 किग्रा। प्रथम श्रेणी/एसी टू टियर 50 किग्रा तक मुफ्त 100 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। एसी प्रथम श्रेणी 70 किग्रा तक मुफ्त 150 किग्रा तक शुल्क देकर ले जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त अगर कोई यात्री 100 सेंटीमीटर लंबा 60 सेंटीमीटर चौड़ा और 25 सेंटीमीटर ऊंचा सामान लेता है तो उसे ब्रेकवैन या पार्सल वैन में बुक करना होगा। यह सामान यात्री डिब्बों में नहीं ले जाया जा सकेगा।

    मंत्री ने यह भी कहा कि कमर्शियल सामान को निजी सामान के रूप में डिब्बों में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इस नए नियम के लागू होने से यात्रियों को यात्रा के दौरान अधिक सामान ले जाने के मामले में ध्यान रखना होगा ताकि उन्हें अतिरिक्त शुल्क का सामना न करना पड़े।
     रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इन नियमों का उद्देश्य यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा प्रदान करना है और साथ ही रेलवे के संसाधनों का भी बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

  • सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं

    सरकार का सोनिया गांधी पर हमला नेहरू के दस्तावेज लौटाने की मांग कहा – ये निजी संपत्ति नहीं हैं


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से पंडित जवाहरलाल नेहरू से संबंधित 51 बक्सों में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय पीएमएमएल को वापस करने की मांग की है। यह दस्तावेज 2008 में तात्कालिक प्रधानमंत्री संग्रहालय से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया है। सरकार ने इन दस्तावेजों को निजी संपत्ति मानने से इनकार करते हुए कहा है कि ये सार्वजनिक अभिलेख हैं और इनकी सार्वजनिक पहुंच जरूरी है।

    केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस मुद्दे पर कहा यह कोई निजी पारिवारिक दस्तावेज नहीं हैं। ये भारत के पहले प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय अभिलेख हैं और इन्हें सार्वजनिक अभिलेखागार में होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की अदला-बदली को लेकर संसद में कई बार चर्चा हो चुकी है लेकिन अब तक इन्हें वापस नहीं किया गया।

    विवाद तब और बढ़ गया जब भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में एक सवाल उठाया कि क्या 2025 में पीएमएमएल के निरीक्षण के दौरान नेहरू के दस्तावेज गायब पाए गए थे। इसके जवाब में शेखावत ने साफ किया कि ये दस्तावेज लापता नहीं हैं बल्कि सोनिया गांधी के पास हैं और उनका स्थान पूरी तरह से ज्ञात है। उन्होंने कहा कि ये दस्तावेज 2008 में विधिवत तरीके से गांधी परिवार को सौंपे गए थे लेकिन वे अब भी वापस नहीं किए गए हैं।

    शेखावत ने आगे कहा सोनिया गांधी से यह पूछा जाना चाहिए कि क्यों ये दस्तावेज अब तक वापस नहीं किए गए जबकि कई बार पीएमएमएल की ओर से पत्र भेजे गए हैं। अगर कुछ छिपाया जा रहा है तो क्या यह सही है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि इतिहास को सही तरीके से समझने और उसमें सही दृष्टिकोण विकसित करने के लिए इन दस्तावेजों तक सभी को पहुंच मिलनी चाहिए। विपक्षी कांग्रेस ने इस मुद्दे पर जवाब देते हुए शेखावत से पूछा कि क्या अब वह माफी मांगेंगे क्योंकि यह स्पष्ट हो गया है कि दस्तावेज गायब नहीं थे। कांग्रेस ने सरकार पर यह आरोप भी लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए तूल दे रही है।

    कुल मिलाकर यह मामला अब एक गंभीर राजनीतिक मुद्दा बन गया है। जहां एक तरफ सरकार ने नेहरू के दस्तावेजों को सार्वजनिक अभिलेखागार में रखने की जरूरत जताई है वहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की ओर से इसे एक निजी और परिवारिक अधिकार बताया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर ममता बनर्जी और सोनिया गांधी किस तरह की प्रतिक्रिया देती हैं और सरकार इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।

  • राहुल–प्रियंका के बीच तकरार के दावे: विदेश दौरे पर गए राहुल गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री बिट्टू का बड़ा हमला

    राहुल–प्रियंका के बीच तकरार के दावे: विदेश दौरे पर गए राहुल गांधी को लेकर केंद्रीय मंत्री बिट्टू का बड़ा हमला


    नई दिल्ली/कांग्रेस पार्टी की आंतरिक राजनीति को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बाद अब केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा के बीच कथित विवाद का दावा किया है। बिट्टू का कहना है कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद चल रहे हैं और इसी वजह से राहुल गांधी परिवार और पार्टी से नाराज होकर विदेश चले गए हैं। रवनीत सिंह बिट्टू ने यह बयान एनडीटीवी से बातचीत के दौरान दिया। उनसे कांग्रेस द्वारा वीबी जी राम जी बिल को लेकर प्रस्तावित प्रदर्शन पर सवाल किया गया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिट्टू ने कांग्रेस नेतृत्व और गांधी परिवार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास अब न तो विचारधारा बची है और न ही जमीन पर प्रदर्शन करने के लिए लोग।

    केंद्रीय मंत्री ने कहाकांग्रेस का महात्मा गांधी से कोई लेना-देना नहीं है। इनके लिए गांधी का मतलब सिर्फ प्रियंका गांधीराहुल गांधीइंदिरा गांधीराजीव गांधी और संजय गांधी तक सीमित रह गया है। उन्हें उस गांधी से समस्या है जो देश और समाज के लिए खड़ा था। बिट्टू ने दावा किया कि जनता अब उस नाम वाले गांधी को नकार चुकी हैजबकि महात्मा गांधी का सम्मान देश में हमेशा बना रहेगा।राहुल गांधी के विदेश दौरे को लेकर बिट्टू ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश का नाम रोशन करने के लिए विदेश जाते हैंजबकि राहुल गांधी सैर-सपाटे के लिए विदेश रवाना हो जाते हैं। उन्होंने कहा मैंने अभी राहुल गांधी की तस्वीरें जर्मनी से देखीं। सवाल यह है कि राहुल गांधी हैं कहां? देश के अहम मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिएलेकिन वो विदेश में घूमते नजर आते हैं।

    इसके बाद बिट्टू ने राहुल और प्रियंका गांधी के बीच कथित टकराव को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि संसद में हाल के दिनों में दिए गए भाषणों को लेकर दोनों के बीच तुलना होने लगी है। बिट्टू के मुताबिककई लोगों ने प्रियंका गांधी के भाषणों की तुलना राहुल गांधी से कीजिससे राहुल नाराज हो गए। उन्होंने कहादोनों गांधी के बीच बड़ी भारी लड़ाई चल रही है। राहुल गांधी इसी नाराजगी में परिवार और पार्टी से झगड़ा कर विदेश चले गए हैं।केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और दिशा को लेकर गंभीर समस्याएं हैं। उनके अनुसारराहुल गांधी का विदेश जाना केवल व्यक्तिगत दौरा नहींबल्कि पार्टी और परिवार के अंदरूनी तनाव का नतीजा है। हालांकिइन आरोपों पर कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा नेताओं ने कांग्रेस में अंदरूनी कलह का दावा किया हो। इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला भी सोशल मीडिया पर कांग्रेस को लेकर ऐसे ही आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने लिखा था किटीम प्रियंका बनाम टीम राहुल अब खुलकर सामने आ गई है और कांग्रेस की आंतरिक कलह सार्वजनिक हो चुकी है।शहजाद पूनावाला ने ओडिशा से कांग्रेस के पूर्व नेता मोहम्मद मुकीम के पत्र का हवाला देते हुए कहा था कि पार्टी में नेतृत्व संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने दावा किया था कि मुकीम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मल्लिकार्जुन खरगे को हटाने और प्रियंका गांधी को आगे लाने की मांग की थी। साथ ही उन्होंने प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।

    भाजपा का कहना है कि कांग्रेस इस समय संगठनात्मक और वैचारिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असमंजस और आपसी खींचतान खुलकर सामने आ रही है। दूसरी ओरकांग्रेस की चुप्पी ने इन आरोपों को और हवा दे दी है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इन दावों पर सफाई आ सकती हैलेकिन फिलहाल भाजपा इन बयानों के जरिए विपक्ष को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रिश्तों को लेकर लगाए गए ये आरोप सियासी बयानबाजी का हिस्सा हैं या वास्तव में पार्टी के भीतर किसी बड़े बदलाव का संकेतयह आने वाला समय ही बताएगा।