यूरेनियम सप्लाई समझौता
व्यापार और निवेश में बढ़ावा
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
नवाचार और तकनीकी सहयोग
ऊर्जा और पर्यावरण

यूरेनियम सप्लाई समझौता
व्यापार और निवेश में बढ़ावा
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
नवाचार और तकनीकी सहयोग
ऊर्जा और पर्यावरण

नई योजनाओं का विवरण
दिल्ली लखपति बिटिया योजना: पुरानी लाडली योजना की तुलना में व्यापक और प्रभावी। इसमें बेटियों के लिए कुल 56,000 रुपये विभिन्न चरणों में जमा किए जाएंगे, जो 21 वर्ष की आयु तक ब्याज समेत 1 लाख रुपये से अधिक बन जाएंगे। इसका उद्देश्य बेटियों की शिक्षा और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है।महिला सशक्तिकरण और कल्याण कार्यक्रम: बेटियों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, उनकी शिक्षा और भविष्य को मजबूत करना, और समाज में उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।
पुरानी लाडली योजना से क्या अंतर

मिसाइल हमलों की दहशत
छात्र और युवा भी फंसे
यरुशलम में रिहायशी इलाकों की स्थिति गंभीर
खामेनेई की मौत के बाद यूपी में अलर्ट

कांग्रेस का हमला: नैतिक नेतृत्व पर प्रश्न
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया

होली पर शहर में लोग रंग और पानी के साथ उत्सव मनाते हैं और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होते हैं। ऐसे में मेट्रो सेवाओं के सामान्य संचालन में बाधा आने की संभावना रहती है। एनसीआरटीसी ने बताया कि यही कारण है कि नमो भारत और मेरठ मेट्रो को पूरे दिन अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया गया है।
मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि दिनभर चलने वाले रंग खेलने के कार्यक्रम और भीड़भाड़ को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। इस दौरान यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ ट्रेनों और स्टेशनों की सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
एनसीआरटीसी ने यात्रियों से अपील की है कि वे अपने यात्रा की योजना बनाते समय इस समय परिवर्तन को ध्यान में रखें। यात्रा में होने वाली असुविधा से बचने के लिए वैकल्पिक परिवहन का उपयोग करना बेहतर होगा। अधिकारीयों ने यह भी बताया कि शाम 5 बजे के बाद सेवाएं फिर से सामान्य रूप से शुरू कर दी जाएंगी और रात 10 बजे तक चलेंगी।
नमो भारत और मेरठ मेट्रो दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर संचालित होती हैं और रोजाना हजारों यात्रियों को सुविधा प्रदान करती हैं। त्योहार के मद्देनज़र यह अस्थायी बदलाव किया गया है ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना या संचालन में बाधा को रोका जा सके।
एनसीआरटीसी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा दृष्टिकोण से लिया गया है। रंग और पानी के उपयोग से मेट्रो ट्रेनों के संचालन में तकनीकी और सुरक्षा संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए अस्थायी बंद आवश्यक था।
यात्रियों के लिए सलाह दी गई है कि वे मेट्रो स्टेशन पर जाने से पहले समय का ध्यान रखें और यदि संभव हो तो सार्वजनिक या निजी वाहनों के विकल्प पर विचार करें। इसके अलावा, परिवार और दोस्तों के साथ होली के उत्सव में शामिल होने के लिए योजना बनाते समय मेट्रो की अस्थायी बंदी को ध्यान में रखें।
एनसीआरटीसी का यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि होली के रंगोत्सव का आनंद लेने वाले लोग सुरक्षित रहें और किसी अप्रत्याशित दुर्घटना का सामना न करें। इसके साथ ही ट्रेनों की देखभाल और संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आएगी।

मिनी ईरान में शोक की लहर
विरोध जुलूस और शोक प्रदर्शन
ईरान से ऐतिहासिक और व्यक्तिगत संबंध
खामेनेई का इस गांव से व्यक्तिगत संबंध 1986 से जुड़ा है जब वह ईरान के राष्ट्रपति के रूप में अलीपुर आए और एक स्थानीय अस्पताल का उद्घाटन किया। स्थानीय निवासी शफीक ने बताया उनका दौरा हमारे आध्यात्मिक संबंध को मजबूत करने वाला था। हमारा जुड़ाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि आस्था और धार्मिक मार्गदर्शन से भी जुड़ा है।
स्थानीय धर्मगुरुओं का बयान

पूरी घटना किसी फिल्मी सीन की तरह मंदिर के CCTV कैमरों में कैद हो गई, जिसे देखकर पुलिस भी हैरान रह गई। फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि आरोपी सबसे पहले एक सामान्य पुजारी की तरह मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करता है। वह अपनी हरकतों से खुद को एक सच्चा श्रद्धालु दिखाने की कोशिश करता है। उसने बड़ी ही सफाई से मुकुट को एक कपड़े से ढका, फिर भगवान के सामने हाथ जोड़े और कुछ देर के लिए बाहर निकल गया। यह उसकी रेकी का हिस्सा था ताकि वह देख सके कि आसपास कोई उसे देख तो नहीं रहा है। कुछ ही मिनटों के बाद वह दोबारा वापस लौटा और मौका पाते ही एक किलो वजनी चांदी का मुकुट समेटकर चंपत हो गया।
जब मंदिर प्रबंधन को मुकुट के गायब होने का पता चला, तो इलाके में हड़कंप मच गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पिंपरी-चिंचवड़ क्राइम ब्रांच यूनिट-1 ने तुरंत मोर्चा संभाला। पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती आरोपी की पहचान करना था क्योंकि वह पुजारी के भेष में था। हालांकि, आधुनिक तकनीकी जांच और सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने आरोपी के भागने के रूट को ट्रैक किया। पुलिस की मुस्तैदी का नतीजा यह रहा कि इस शातिर अपराधी को महज 48 घंटों के भीतर दबोच लिया गया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान नरेश अगरचंद जैन के रूप में हुई है। पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ वह और भी चौंकाने वाला था; नरेश कोई नौसिखिया चोर नहीं बल्कि एक आदतन अपराधी है, जिसके खिलाफ पहले से ही चोरी और सेंधमारी के करीब 12 आपराधिक मामले दर्ज हैं। फिलहाल पुलिस इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या उसने पहले भी धार्मिक स्थलों को अपना निशाना बनाया है और चोरी का माल वह किसे ठिकाने लगाता था। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने भक्तों के बीच खोई हुई सुरक्षा की भावना को फिर से जगाया है, लेकिन इस घटना ने मंदिरों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए है

– कैलाश चन्द्रवस्तुत: आज जो लोग होली, होलिका दहन और प्रह्लाद की कथा को “ब्राह्मणवाद द्वारा एक दलित नारी को जलाए जाने” की घटना बताकर प्रस्तुत करते हैं, वे न परंपरा जानते हैं और न कथा समझते हैं। वे सिर्फ भारत की सांस्कृतिक संचेतना को उसकी अपनी कहानी से काट देना चाहते हैं।
होलिका की वास्तविक कथा
होलिका की कथा जितनी सरल है, उतनी ही गहन भी। कश्यप ऋषि और दिति की पुत्री तथा दिति की संतानों को स्वभाव वैचित्र्य के कारण दैत्य कहा गया है। सम्पूर्ण कथा श्रीमद्भागवत पुराण में बहुत विस्तार से कही गई है। भारतवर्ष में होने वाली अधिकांश भागवत कथाओं में भागवताचार्य अपनी कथा का प्रारम्भ यहीं से करते हैं। इस आधार पर होलिका दैत्यकुल की राजकुमारी व प्रिचिति की पत्नी और स्वरभानु की माता थी। वह एक संपूर्ण दैत्यवंशी, राक्षसी चरित्र है। उसका भाई हिरण्यकश्यप न केवल राजा था बल्कि अत्याचारी, अहंकारी और असुर प्रवृत्ति वाला शासक भी था।
उसके सामने किसी “शोषित समुदाय” की कथा गढ़ना या उसे “दलित नारी उत्पीड़न” में बदल देना केवल अज्ञान नहीं एक सुनियोजित बौद्धिक छल है, जो भारतीय मिथकीय चेतना को वर्गीय, जातीय और जेंडरवादी चश्मे से दूषित करना चाहता है।
धर्म और अधर्म का स्पष्ट संदेश
यहां सत्य सरल है। होलिका किसी “अबला स्त्री” की कथा नहीं है। वह वरदान से सशक्त, छल से प्रेरित और अधर्म की सहायक थी। ब्रह्मा ने उसे अग्नि प्रतिरोध का वरदान दिया था, किन्तु वह वरदान धर्म विरोधी कर्मों के लिए नहीं था। जब वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठती है तो उसका जलना कर्मफल है। यह अन्याय के अंत, अधर्म की पराजय और सत्य की विजय का प्रतीक है।
यही पुराणों का स्वर है और यही भारतीय संस्कृति की जीवंतता का मूलाधार भी है। पर आज इस कथा को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने वाले “कल्चरल मार्क्सिज्म” के प्रशिक्षित कार्यकर्ता इसे “ब्राह्मणों द्वारा स्त्री दहन” का उदाहरण बताते हैं। ये उनकी चाल पुरानी है। हर परंपरा को उत्पीडन का प्रमाण बनाओ। हर कथा को वर्ग संघर्ष के ढांचे में फिट करो। हर मूल्य को अपराधबोध में बदलो।
वे राक्षसी को पीड़िता बना देते हैं, दैत्यकुल को जाति समूह कह देते हैं और धर्म-अधर्म की अनंत कथा को सत्ता विरोध के रंग में विकृत कर देते हैं। यही मानसिकता श्रीराम को साम्राज्यवादी, श्रीकृष्ण को चालबाज, माता दुर्गा को पीड़ित स्त्री और श्रीगणेश को उपहास का पात्र बना देती है।
होलिका दहन का सांस्कृतिक अर्थ
होलिका दहन का अर्थ किसी व्यक्ति, कुल या जाति का दमन नहीं है। यह जीवन की नकारात्मकता के दहन का संदेश है। यह नव वसंत, नवहर्ष, नई शुरुआत और सत्य के धारण एवं संरक्षण का पर्व है। इसमें प्रह्लाद की विजय, भक्ति की शक्ति और अधर्म के अंत का संदेश निहित है। इसे महिला विरोध, समाज विरोध या सत्ता विरोध की कहानी में बदलना हमारी परंपरा का नहीं बल्कि हमारी स्मृति का अपमान है।
इतिहास के नाम पर फैलाया गया भ्रम
भारतीय समाज को बांटने के लिए आज एक विचित्र वैचारिक नाटक रचा जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि ‘हिरण्यकश्यप’ शूद्र था, शूद्र तप नहीं कर सकते और गुरुकुल नहीं जा सकते। यह इतिहास नहीं बल्कि वैचारिक क्षुद्रता का प्रमाण है। जिन लोगों ने न शास्त्र पढ़े और न पुराण समझे, वे आज सोशल मीडिया की अधूरी जानकारी के आधार पर एक संपूर्ण सभ्यता को अपराधी सिद्ध करने में लगे हैं।
भारतीय चेतना का मूल सत्य
वास्तविकता यह है कि होलिका और हिरण्यकश्यप भारतीय चेतना में सदियों से अहंकार और अधर्म के प्रतीक रहे हैं। गुरुकुलों की शिक्षा में शस्त्र और शास्त्र का अध्ययन करने के बाद अहंकार के कारण वे अधर्म के मार्ग पर चले और भक्त प्रह्लाद सत्य के प्रतीक बने। जो लोग इस सरल सत्य को भी “सामाजिक न्याय” के चश्मे से विकृत करते हैं, वे न्याय के पक्षधर नहीं बल्कि भारतीय समाज को भीतर से तोड़ने वाले मानसिक उपनिवेशवाद के वाहक हैं।
स्मृति और परंपरा की पुनर्स्थापना
आज आवश्यकता किसी प्रतिक्रिया या प्रतिशोध की नहीं है। आवश्यकता है तथ्यों की पुनर्स्थापना की। हमें अपनी चेतना में सांस्कृतिक स्मृति को पुनः प्रखर करना होगा। परंपरा को आधुनिक राजनीतिक सिद्धांतों के ढांचे में कैद करने के स्थान पर उसके कालातीत संदेश को समझना होगा। यह संघर्ष एक कथा का न होकर भारतीय तत्वज्ञान, वांग्मय, दर्शन और वैचारिक संप्रभुता का है। इसलिए यह समझना सभी के लिए समान रूप से आवश्यक है कि ‘होलिका’ का जलना किसी स्त्री का दहन नहीं है। यह अत्याचार, असहिष्णुता, अधर्म, अनीति और असत्य के दहन का प्रतीक है। उसका अंत किसी समाज पर अत्याचार का नहीं बल्कि अधर्म की पराजय का उत्सव है।
आज भारत की सभ्यता इस वैचारिक आक्रमण को पहचान चुकी है। वह जानती है कि हमारी परंपराएं हिंसा की नहीं बल्कि समरसता की उपज हैं। होलिका दहन उसी समरसता का उत्सव है, अहंकार के अंत और सत्य के आरंभ का पर्व। अत: हमेशा ही अपने समय में वर्तमान काल की हमारी जिम्मेदारी है कि हम इस वैचारिक धुंध में भी स्पष्ट देख सकें और यह कह सकें कि भारतीय संस्कृति को समझने के लिए भारतीयता चाहिए, न कि वह वैचारिक चश्मा जो हर कथा को संघर्ष, हर पात्र को पीड़ित और हर पर्व को अपराध में बदल देता है।
अंत में यही कि होलिका दहन पर कलुष केवल परंपरा का नहीं बल्कि विवेक का अपमान है। इसे समझना और इस भ्रम को तोड़ना आज केवल सांस्कृतिक कर्तव्य नहीं यह हम सभी की राष्ट्रीय आवश्यकता है।
(लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ स्तम्भकार हैं)

एमओयू एक्सचेंज और सीईओ फोरम पर नजर
बैठक के बाद दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान प्रस्तावित है, जिसके बाद संयुक्त प्रेस बयान जारी किए जाएंगे। दोपहर 1:50 बजे Bharat Mandapam में भारत-कनाडा सीईओ फोरम की शुरुआत होगी, जिसमें दोनों प्रधानमंत्री उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। शाम छह बजे पीएम कार्नी अपने देश के लिए रवाना होंगे।
व्यापार से एआई तक-साझेदारी के प्रमुख स्तंभ
जयशंकर से भी हुई मुलाकात
रिश्तों के सामान्यीकरण की दिशा में अहम कदम
विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत-कनाडा संबंध सामान्य होने के अहम मोड़ पर हैं। दोनों देशों ने पहले ही आपसी सम्मान, संवेदनशील मुद्दों की समझ और आर्थिक सहयोग को आधार बनाकर संतुलित व रचनात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है।
हैदराबाद हाउस की यह बैठक केवल औपचारिक कूटनीति नहीं, बल्कि साझा दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में बदलने की कोशिश मानी जा रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सकारात्मक माहौल किस तरह द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाता है।

ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई में जोरदार तेजी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude के वायदा भाव बढ़कर 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। ब्रेंट 7.60 प्रतिशत चढ़कर 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं अमेरिकी West Texas Intermediate (डब्ल्यूटीआई) क्रूड के वायदा भाव 7.19 प्रतिशत उछलकर 71.86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट की आशंका
रिपोर्ट्स के मुताबिक, Iran ने रणनीतिक Strait of Hormuz से गुजरने वाले नौवहन को सीमित करने के संकेत दिए हैं। यह वही मार्ग है, जिससे दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल का आयात भी इसी रास्ते से होता है। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने बाजार में जोखिम प्रीमियम बढ़ा दिया है।
ओपेक का दांव, क्या थमेगी रफ्तार?
इसी बीच OPEC ने अगले महीने से उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई है। सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व में सदस्य देश प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन करेंगे। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक तनाव गहराता है तो यह बढ़ोतरी कीमतों को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।
भारत पर सीधा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। कीमतों में हर 1 डॉलर की वृद्धि से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है। इससे महंगाई, चालू खाते का घाटा और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। अधिक तेल कीमतें परिवहन लागत, समुद्री बीमा और ऊर्जा आधारित उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती हैं।
90 से 100 डॉलर का खतरा
बाजार जानकारों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान जारी रहता है तो ब्रेंट 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है। व्यापक क्षेत्रीय युद्ध की स्थिति में यह 100 डॉलर के स्तर को भी पार कर सकता है। फिलहाल बाजार का रुख कंपनियों की तिमाही आय से ज्यादा तेल की चाल पर निर्भर नजर आ रहा है। तनाव कम होने, नेतृत्व पर स्पष्टता आने और समुद्री मार्ग सुरक्षित रहने की ठोस गारंटी मिलने तक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।