Category: National

  • अयोध्या राम मंदिर में बढ़ेगी पुजारियों की संख्या, 70 नए पुजारियों की भर्ती को ट्रस्ट की मंजूरी, परकोटे में भी जल्द होंगे दर्शन

    अयोध्या राम मंदिर में बढ़ेगी पुजारियों की संख्या, 70 नए पुजारियों की भर्ती को ट्रस्ट की मंजूरी, परकोटे में भी जल्द होंगे दर्शन

    नई दिल्ली/अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना और दर्शन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित व सुचारू बनाने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर में 70 नए पुजारियों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के बाद रामलला, राम दरबार के साथ-साथ परकोटे और अन्य मंदिरों में नियमित पूजा और दर्शन की व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।राम मंदिर में पहले चरण के निर्माण की पूर्णता के उपलक्ष्य में ध्वजारोहण समारोह संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही जून 2025 में शेषावतार मंदिर और परकोटे में स्थित सभी छह मंदिरों में अलग-अलग देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठा भी पूरी कर ली गई थी। अब ट्रस्ट की योजना इन सभी मंदिरों को आम श्रद्धालुओं के लिए नियमित रूप से खोलने की है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित पुजारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।

    इसी जरूरत को देखते हुए 70 नए पुजारियों की भर्ती का प्रस्ताव तैयार किया गया, जिसे 13 दिसंबर को मणिराम छावनी पीठाधीश्वर महंत नृत्यगोपाल दास की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी बैठक में मंजूरी दी गई। ट्रस्ट का मानना है कि नए पुजारियों की नियुक्ति से मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना का क्रम बिना किसी बाधा के पूरे दिन संचालित किया जा सकेगा।वर्तमान स्थिति की बात करें तो राम मंदिर में इस समय कुल 20 पुजारी कार्यरत हैं। मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र नाथ शास्त्री के निधन के बाद चार वरिष्ठ पुजारी पहले से सेवाएं दे रहे थे। इसके बाद पुजारी प्रशिक्षण योजना के तहत 24 युवकों को प्रशिक्षित किया गया था, हालांकि नियुक्ति पत्र न मिलने और मानदेय से जुड़े विवादों के कारण यह मामला काफी समय तक उलझा रहा।

    बाद में ट्रस्ट ने प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र और निर्धारित मानदेय देकर मुक्त कर दिया, जिससे कई पुजारी निराश हो गए। कुछ महीनों बाद उन्हीं प्रशिक्षित पुजारियों में से पहले 10, फिर 6 को सशर्त नियुक्ति पत्र दिए गए, जबकि 4 को पूरी तरह बाहर कर दिया गया। इस तरह वर्तमान में कुल 20 पुजारी राम मंदिर परिसर में सेवाएं दे रहे हैं।इन 20 पुजारियों को रामलला और राम दरबार के अलावा शेषावतार मंदिर, परकोटे के छह मंदिरों, सप्त मंडपम, यज्ञमंडप और कुबेर टीला स्थित कुबेरेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। कार्यभार अधिक होने के कारण ड्यूटी को सुबह और शाम की पालियों में बांटा गया है।ड्यूटी व्यवस्था में अब हिंदी पंचांग के अनुसार अमावस्या और पूर्णिमा के आधार पर बदलाव किया जाता है। 10-10 पुजारियों की दो टीमें बनाई गई हैं, जिनमें से एक टीम रामलला में और दूसरी राम दरबार में पूजा करती है। अगले दिन रोस्टर के अनुसार दोनों टीमें अपनी जगह बदल लेती हैं।

    फिलहाल पुजारियों की कमी के कारण शेषावतार, परकोटा, सप्त मंडपम और कुबेर टीला में पूजा केवल सीमित समय के लिए ही हो पा रही है। यहां सुबह और शाम की आरती के बीच लंबे समय तक मंदिरों के पट बंद रहते हैं। ट्रस्ट का मानना है कि यदि पर्याप्त पुजारी उपलब्ध हो जाएं तो सभी मंदिरों में पूरे दिन दर्शन और पूजा संभव हो सकेगी।आकलन के अनुसार, राम मंदिर परिसर के सभी मंदिरों में नियमित पूजा और दर्शन के लिए कम से कम 50 पुजारियों की तत्काल जरूरत है। तीन शिफ्टों में आठ-आठ घंटे की ड्यूटी के हिसाब से यह संख्या और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में 70 नए पुजारियों की भर्ती का फैसला आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत साबित होगा।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर हंगामा: 7 साल की बच्ची के सामने यात्री से मारपीट, एअर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट पर गंभीर आरोप

    दिल्ली एयरपोर्ट पर हंगामा: 7 साल की बच्ची के सामने यात्री से मारपीट, एअर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट पर गंभीर आरोप


    नई दिल्ली।देश की राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर एक चौंकाने वाली घटना सामने आई हैजहां एअर इंडिया एक्सप्रेस के एक पायलट पर यात्री के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। यह विवाद इतना बढ़ गया कि कथित तौर पर यात्री को शारीरिक चोटें आईं और यह सब उसकी 7 साल की बेटी के सामने हुआजिससे पूरा परिवार मानसिक सदमे में है।पीड़ित यात्री की पहचान अंकित दीवान के रूप में हुई हैजिन्होंने सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा किए हैं। उनके मुताबिकयह घटना उस समय हुई जब वे अपने परिवार के साथ यात्रा कर रहे थे। उनके साथ एक चार महीने का शिशु भी थाजो स्ट्रोलर में था।

    अंकित का आरोप है कि सुरक्षा जांच के दौरान एयरपोर्ट स्टाफ ने उन्हें एक अलग लाइन से जाने के लिए कहाजो आमतौर पर स्टाफ के लिए आरक्षित रहती है। इसी दौरान कुछ कर्मचारी उनके आगे लाइन तोड़ते नजर आए। जब अंकित ने इसका विरोध कियातो वहां मौजूद एअर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट कैप्टन वीरेंद्र से उनकी बहस हो गई।पीड़ित यात्री के अनुसारपायलट ने उनसे बेहद अपमानजनक भाषा में बात की और कहा,क्या आप पढ़े-लिखे नहीं हैं? क्या साइन नहीं पढ़ सकते? बात बढ़ने पर कथित तौर पर पायलट ने उन पर हाथ उठा दिया। इस हमले में अंकित को चोटें आईं और खून तक निकल आयाजिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

    अंकित ने बताया कि इस पूरी घटना का सबसे गहरा असर उनकी 7 साल की बेटी पर पड़ा हैजिसने अपने पिता को अपनी आंखों के सामने पिटते देखा। बच्ची अब भी डरी हुई है और परिवार इस घटना के बाद मानसिक तनाव से गुजर रहा है। अंकित का कहना है कि इस विवाद के चलते उनकी पूरी छुट्टियां बर्बाद हो गईं।सोशल मीडिया पर मामला सामने आने के बाद यह तेजी से चर्चा में आ गया। यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइन स्टाफ के व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एअर इंडिया एक्सप्रेस ने तत्काल प्रतिक्रिया दी।

    एयरलाइन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि आरोपी पायलट को तुरंत प्रभाव से ड्यूटी से हटा दिया गया है और मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। कंपनी ने इस घटना पर खेद व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह का व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है।एयरलाइन के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि घटना के समय संबंधित कर्मचारी किसी अन्य एयरलाइन की फ्लाइट से यात्री के रूप में यात्रा कर रहा थालेकिन फिर भी उसका व्यवहार कंपनी की आचार संहिता के खिलाफ है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    एअर इंडिया एक्सप्रेस ने अपने बयान में यह दोहराया कि यात्रियों की सुरक्षासम्मान और विश्वास कंपनी की सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही यह भी कहा गया कि सभी कर्मचारियों से पेशेवर और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और एयरपोर्ट प्रशासन व एयरलाइन दोनों पर निगाहें टिकी हैं। यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों की सुरक्षा और एयरलाइन स्टाफ की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

  • उत्तराखंड में नए साल से एंट्री पर किस वाहन से कितना शुल्क  ग्रीन सेस के लेकर लिस्ट हुई जारी

    उत्तराखंड में नए साल से एंट्री पर किस वाहन से कितना शुल्क ग्रीन सेस के लेकर लिस्ट हुई जारी


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में 1 जनवरी से एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है जिसके तहत बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूला जाएगा। परिवहन विभाग के अधिकारियों का दावा है कि यह प्रणाली फास्टैग के माध्यम से लागू की जाएगी जिससे वाहन मालिकों को कोई भी असुविधा नहीं होगी। इस शुल्क का उद्देश्य राज्य में पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों को बढ़ावा देना है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में सचिवालय में आयोजित बैठक में ग्रीन सेस व्यवस्था को शीघ्र लागू करने के निर्देश दिए थे और अधिकारियों पर इससे जुड़ी देरी को लेकर नाराजगी भी जताई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस योजना की देरी के कारण राज्य को करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए अपने राजस्व संसाधनों को मजबूत करना सबसे अहम है और अगले वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 24,015 करोड़ रुपये का कर लक्ष्य तय किया गया है।

    वाहन श्रेणी के अनुसार ग्रीन सेस शुल्क भारी वाहनों 450 से 700 रुपये

    वाहन के एक्सल के अनुसार शुल्क लिया जाएगा। भारी निर्माण उपकरण वाहनों से 250 रुपये वसूले जाएंगे।

    मालवाहन

    7.5 से 18.5 टन के वाहनों पर 250 रुपये शुल्क लगेगा।
    3 से 7.5 टन तक के हल्के माल वाहनों पर 120 रुपये।
    तीन टन तक की डिलीवरी वैन से 80 रुपये शुल्क लिया जाएगा।

    पैसेंजर कार्स

    मोटर कैब मैक्सी कैब और पैसेंजर कार पर 80 रुपये शुल्क तय किया गया है। 12 सीटों से अधिक वाली बसों पर 140 रुपये शुल्क लागू होगा।

    ग्रीन सेस छूट मुक्त वाहन

    दूसरे राज्यों के दोपहिया वाहन केंद्र और राज्य सरकार के वाहन ट्रैक्टर ट्रेलर रोड रोलर कंबाइन हार्वेस्टर शव वाहन एंबुलेंस फायर टेंडर और सेना के वाहन इस शुल्क से मुक्त रहेंगे।

    इको-फ्रेंडली वाहन

    इलेक्ट्रिकसोलर हाइब्रिड और सीएनजी से चलने वाले वाहनों को भी छूट मिलेगी।आवश्यक जानकारी फास्टैग आधारित प्रणाली ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे के माध्यम से वाहनों की पहचान होगी जिससे फास्टैग से शुल्क कट जाएगा। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश की सीमाओं पर पूरी तरह से तैयार है जबकि छह अन्य बॉर्डर चेक पोस्ट पर काम जारी है। इस नई व्यवस्था से राज्य को सालाना लगभग 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है जिसे पर्यावरण संरक्षण और विकास कार्यों में खर्च किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री के निर्देश

    मुख्यमंत्री धामी ने बैठक में यह भी निर्देश दिए कि सभी जिलाधिकारी नियमित रूप से राजस्व की निगरानी करें और कर चोरी को रोकने के लिए एआई आधारित तकनीक का अधिकतम उपयोग किया जाए। उन्होंने पंजीकरण और रजिस्ट्रेशन प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया।

  • मायावती के जन्मदिन पर यूपी में मनाया जाएगा 'जनकल्याणकारी दिवस'  BSP ने बनाया बड़ा प्लान

    मायावती के जन्मदिन पर यूपी में मनाया जाएगा 'जनकल्याणकारी दिवस' BSP ने बनाया बड़ा प्लान


    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 19 दिसंबर 2025 को लखनऊ में पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। इस बैठक में मायावती ने महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं और आगामी चुनावी रणनीतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस बार भी उनकी पार्टी 15 जनवरी को अपने जन्मदिन को जनकल्याणकारी दिवस’के रूप में मनाएगी।

    ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के कार्यक्रम का आयोजन

    मायावती ने बैठक में यह साफ किया कि यूपी में यह कार्यक्रम मंडल स्तर पर मनाया जाएगा जबकि देश के अन्य राज्यों में यह जोन-स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में राज्य से जुड़े केंद्रीय कोऑर्डिनेटर और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी विभिन्न जोनों में शामिल होंगे और पार्टी के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाएंगे।

    चुनावों के लिए तैयारी पर जोर

    बैठक में मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगामी चुनावों के लिए पूरी तरह से तैयार रहने की हिदायत दी। उन्होंने खासतौर पर बिहार विधानसभा चुनाव के अनुभवों से सीख लेने का निर्देश दिया। मायावती ने कहा कि बिहार चुनाव में सरकारी धन के गलत तरीके से वितरण के कारण चुनाव परिणामों पर असर पड़ा जो लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला है। उन्होंने पार्टी को ऐसे नए चुनावी हालात के लिए पूरी तरह से तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    वोटर लिस्ट और मतगणना पर ध्यान

    मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा संचालित वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण एसआईआर की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता से करने का निर्देश दिया। इसके अलावा उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं को मतगणना के लिए सही ट्रेनिंग देने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि चुनाव परिणामों में कोई गड़बड़ी न हो।

    पदाधिकारियों का आभार

    बैठक के अंत में मायावती ने पार्टी के सभी छोटे और बड़े पदाधिकारियों का तहे दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए पूरे तन मन और धन से संघर्ष किया है और उनके नेतृत्व में काम करने का संकल्प लिया है।

  • दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर PUC को लेकर बढ़ा हड़कंप, एसोसिएशन ने उठाई आवाज

    दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर PUC को लेकर बढ़ा हड़कंप, एसोसिएशन ने उठाई आवाज


    नई दिल्ली । दिल्ली में पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र PUC को लेकर अब बढ़ती अव्यवस्था और भ्रम ने वाहन मालिकों और ट्रक ऑपरेटरों की चिंता बढ़ा दी है। ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशनके अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अस्पष्ट और उलझे हुए नियमों के कारण वाहन मालिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    ANPR व्यवस्था और मैन्युअल जांच में अंतर

    राजेंद्र कपूर ने यह भी बताया कि दिल्ली सरकार ने PUC प्रणाली को डिजिटल और सरल बनाने का प्रयास किया था लेकिन पेट्रोल पंपों पर अब भी मैन्युअल PUC जांच की जा रही है। ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन प्रणाली लागू होने के बावजूद मैन्युअल जांच जारी रहना नई डिजिटल व्यवस्था के उद्देश्य के विपरीत है। इससे वाहन मालिकों को असुविधा होती है और भ्रष्टाचार की संभावना भी बढ़ती है। कपूर ने उदाहरण देते हुए बताया कि जब वह अपनी निजी कार में पेट्रोल भरवाने गए तो उनकी 2024 में बनी कार के बावजूद PUC प्रमाणपत्र की मांग की गई जिससे और भी भ्रम पैदा हुआ।

    एसोसिएशन की मांग

    ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने संबंधित विभागों से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है। एसोसिएशन ने कहा कि पेट्रोल पंप संचालकों और कर्मचारियों को साफ निर्देश दिए जाएं कि ANPR प्रणाली लागू होने के बाद मैन्युअल PUC जांच न की जाए। कपूर ने कहा कि नियमों का उद्देश्य आम नागरिकों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को सुविधा और पारदर्शिता देना है लेकिन मैन्युअल जांच से यह उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।

    PUC प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

    राजेंद्र कपूर ने यह भी कहा कि अगर नियमों के कारण नई परेशानियां पैदा हो रही हैं तो उनकी समीक्षा और स्पष्टता बेहद जरूरी है। PUC प्रणाली में सुधार और नियमों की स्पष्टता से ही डिजिटल व्यवस्था का सही लाभ नागरिकों और वाहन मालिकों को मिलेगा। इससे सिस्टम का उद्देश्य पूरा होगा और वाहन संचालन में पारदर्शिता और सुविधा सुनिश्चित होगी।

  • .तो हम आपसे गठबंधन तोड़ देंगे', उद्धव ठाकरे गुट की शरद पवार की NCP को चेतावनी!

    .तो हम आपसे गठबंधन तोड़ देंगे', उद्धव ठाकरे गुट की शरद पवार की NCP को चेतावनी!

    नई दिल्ली/महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. राजनीतिक दल अपने-अपने समीकरण जोड़ने में लगे हैं. लेकिन इस बीच उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने शरद पवार की एनसीपी को साफ कह दिया है कि अगर उनकी पार्टी अजित पवार की एनसीपी से किसी भी तरह का गठबंधन करेगी तो शिवसेना यूबीटी शरद पवार गुट से अपना गठबंधन तोड़ देगी.

    दरअसल, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता सचिन अहीर ने गुरुवार 18 दिसंबर को कहा कि एनसीपी शरदचंद्र पवार को साफ कह दिया गया है कि अगर वे अजित पवार की एनसीपी के साथ नगर निकाय चुनाव में गठबंधन करती है तो हम उससे गठबंधन तोड़ देंगे.

    सचिन अहीर ने कहा कि शिवसेना यूबीटी पुणे नगर निगम चुनावों के लिए गठबंधन के वास्ते एनसीपी एसपी से बातचीत कर रही है. अहीर ने बताया हमने एनसीपी के साथ गठबंधन करने को लेकर अपना स्टैंड शरद पवार की पार्टी के सामने रख दिया है

  • पटना  झारखंड और अन्य हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस  SC कॉलेजियम ने की सिफारिश

    पटना झारखंड और अन्य हाईकोर्ट को मिलेंगे नए चीफ जस्टिस SC कॉलेजियम ने की सिफारिश


    नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुरुवार को हुई बैठक में 5 प्रमुख हाईकोर्ट के लिए नए मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर अपनी सिफारिशें की हैं। ये रिक्तियां रिटायरमेंट और ट्रांसफर के चलते उत्पन्न हो रही हैं और कॉलेजियम ने विभिन्न हाईकोर्ट में इन पदों को भरने के लिए न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की है। हालांकि इन सिफारिशों को केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी बाकी है।
    कॉलेजियम की सिफारिशों के अनुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस मनोज कुमार गुप्ता को उत्तराखंड हाईकोर्ट का नया मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। यह पद उत्तराखंड हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    बॉम्बे हाईकोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस रेवती पी. मोहिते डेरे को मेघालय हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की सिफारिश की गई है। यह सिफारिश मेघालय हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के प्रस्तावित ट्रांसफर के मद्देनजर की गई है। बॉम्बे हाईकोर्ट के ही एक अन्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक को झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है। झारखंड हाईकोर्ट में यह पद 8 जनवरी 2026 को वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के रिटायर होने के बाद रिक्त होगा।

    इसके अलावा केरल हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए. मुहम्मद मुस्ताक को सिक्किम हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की गई है जबकि उड़ीसा हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संगम कुमार साहू को पटना हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने का प्रस्ताव किया गया है। कॉलेजियम ने मेघालय हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सौमेन सेन को केरल हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की भी सिफारिश की है। यह ट्रांसफर केरल हाईकोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश के 9 जनवरी 2026 को रिटायर होने के बाद प्रभावी होगा।

  • भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला  एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार

    भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार


    नई दिल्ली । 2025 का वर्ष वैश्विक व्यापार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हुआ खासकर भारत के लिए जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट नीति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए भारत पर 50% आयात शुल्क लगा दिए। इस टैरिफ ने भारत के निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था। खासकर कपड़ा रत्न-आभूषण दवा समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों पर इस फैसले का असर पड़ा।

    लेकिन भारत ने इस चुनौती का सामना बड़े ही समझदारी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत करते हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सहारा लिया जिससे न केवल निर्यात में वृद्धि हुई बल्कि कई देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए। नतीजतन नवंबर 2025 में भारत के कुल निर्यात में 19.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अमेरिका को निर्यात में 22% से ज्यादा उछाल आया जो एक बड़ा आश्चर्य था।

    भारत ने एफटीए पर काम तेज किया

    अमेरिकी टैरिफ से जूझते हुए भारत ने तेजी से मुक्त व्यापार समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत इस समय यूरोपीय संघ न्यूजीलैंड और चिली के साथ उन्नत स्तर की एफटीए वार्ता कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने ओमान के साथ पहला एफटीए समझौता करने की योजना बनाई जिस पर नवंबर में हस्ताक्षर किए गए। यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने खासकर इंजीनियरिंग उत्पादों वस्त्र फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण था।

    एफटीए भारत की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा

    भारत की आर्थिक रणनीति में एफटीए अब एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। ये समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहरी हिस्सेदारी दिलाने निर्यात में निरंतर वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं। एफटीए के माध्यम से व्यापार टैरिफ में कटौती और स्थिर व्यापार नियम भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करते हैं साथ ही नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां

    अमेरिकी टैरिफ की चुनौती के बावजूद भारत ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं से बचने के लिए एफटीए पर तेजी से काम किया। व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव के मुताबिक भारत एफटीए को एक रणनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है जिससे निर्यात बाजारों में विविधता लाई जा सके और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम किया जा सके। भारत के पास फिलहाल 26 देशों के साथ 15 एफटीए हैं और 26 अन्य देशों के साथ प्राथमिकता व्यापार समझौते हैं।

    भारत की एफटीए नीति से बढ़ा भरोसा

    हाल के वर्षों में भारत ने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते किए हैं जिससे इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी साल मई में भारत और ब्रिटेन ने भी लंबे समय से लंबित एफटीए पर सहमति की घोषणा की थी जिसके तहत भारतीय खाद्य उत्पादों और मसालों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इन समझौतों ने तेज और स्पष्ट व्यापार ढांचे की जरूरत को और मजबूत किया है।

    सरकार का रुख और भविष्य की दिशा

    भारत सरकार वैश्विक व्यापार में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद एफटीए वार्ताओं को आगे बढ़ा रही है। व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि आगामी वर्ष में इन समझौतों से अच्छे नतीजे मिलेंगे। हालांकि भारत के व्यापारिक साझेदारों से ज्यादा बाजार पहुंच की मांग और छोटे किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

    भारत और अमेरिका के रिश्ते

    भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव आए हैं खासकर रूस से रियायती कच्चे तेल की निरंतर खरीद को लेकर। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नरमी के संकेत मिले हैं। पीएम मोदी ने ट्रंप की शांति योजना की सराहना की और दोनों नेताओं ने फोन पर व्यापार और अन्य मुद्दों पर बातचीत की।

    कई देशों से हाथ मिलाने का कारण

    वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के दौर में भारत अब एक स्थिर और आकर्षक पार्टनर के रूप में उभर रहा है। विकसित देशों जैसे ब्रिटेन यूरोपीय संघ और ईएफटीए के देशों के लिए भारत का बड़ा बाजार और सस्ते उत्पाद आकर्षण का कारण बन रहे हैं जबकि उभरते बाजार जैसे ओमान चिली क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग देख रहे हैं
    भारत की एफटीए नीति वैश्विक व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच उसके निर्यात और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम साबित हो रही है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।

  • शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा

    शशि थरूर का बदला रुख, कांग्रेस का खुला समर्थन, मनरेगा पर राहुल गांधी के संदेश को किया साझा


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल के दिनों में अपने राजनीतिक रुख में बदलाव दिखाया है और पार्टी नेतृत्व के साथ अपने संबंधों में सुधार के संकेत दिए हैं। बीते कुछ समय से थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच मतभेद की अटकलें आम रही हैं। विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर के बाद थरूर ने कई मौकों पर मोदी सरकार की तारीफ की थी जिससे राजनीतिक गलियारों में उनकी नाराजगी और पार्टी से दूरी की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
    हालांकि अब शशि थरूर ने अपने रुख में बदलाव किया है। उन्होंने पार्टी का खुलकर समर्थन करना शुरू कर दिया है और हाल ही में राहुल गांधी द्वारा मनरेगा योजना पर पोस्ट साझा किया है। थरूर ने इसे री-शेयर करते हुए लिखा कि मनरेगा देश की सबसे सफल विकास योजनाओं में शामिल रही है और ग्रामीण गरीबों के लिए यह एक अहम सामाजिक सुरक्षा कवच का काम करती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस योजना को खत्म करना पीछे की ओर उठाया गया कदम होगा जिसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। मनरेगा योजना को लेकर सियासी घमासान भी तेज हो गया है।
    मोदी सरकार ने मनरेगा की जगह VB-GRAM G बिल संसद में लाकर पारित किया जिसे विपक्षी दल ग्रामीण हितों के खिलाफ मान रहे हैं। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में कहा कि यह नया कानून मनरेगा की अधिकार और मांग पर आधारित गारंटी व्यवस्था को समाप्त करता है और इसे केंद्र से संचालित राशन-आधारित योजना में बदल देता है। शशि थरूर ने राहुल गांधी के इस संदेश को साझा कर इसे समर्थन दिया।राहुल गांधी ने पोस्ट में मनरेगा के ग्रामीण मजदूरों और महिलाओं पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस योजना ने ग्रामीणों को अपने काम का सही मूल्य दिलाने में मदद की मजदूरी में सुधार किया पलायन को कम किया और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया। उन्होंने चेतावनी दी कि VB-GRAM G इन उपलब्धियों को कमजोर करता है और कोविड काल में मनरेगा की उपयोगिता का उदाहरण देते हुए कहा कि इसने लाखों लोगों को भूख और कर्ज से बचाया।
    थरूर का रुख पहले मोदी सरकार की सराहना करने वाला था लेकिन अब वे पार्टी के समर्थन में खुलकर सामने आ रहे हैं। हाल ही में केरल निकाय चुनावों के दौरान उन्होंने भाजपा की तारीफ की थी लेकिन उसके बाद कई मौकों पर कांग्रेस का समर्थन किया। लोकसभा में भारत के रुपांतरण के लिए नाभिकीय ऊर्जा का संधारणीय दोहन और अभिवर्द्धन शांति विधेयक 2025 पर चर्चा में उन्होंने इसके खामियों को उजागर किया और कहा कि यह रेडियोधर्मी पदार्थों और परमाणु अपशिष्ट से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करता है। इसके अलावा थरूर ने केरल अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव IFFK में 19 फिल्मों के प्रदर्शन के लिए केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी न देने की आलोचना की। उन्होंने इसे सिनेमाई अशिक्षा और नौकरशाही की अत्यधिक सतर्कता करार दिया। थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से अनुमति देने का अनुरोध भी किया। साथ ही उन्होंने फिल्म अभिनेता देव आनंद की फिल्म हरे रामा हरे
  • पटना हिजाब विवाद: PDP ने नीतीश कुमार के खिलाफ FIR की मांग की, महिला सम्मान मुद्दा बना राजनीति का केंद्र

    पटना हिजाब विवाद: PDP ने नीतीश कुमार के खिलाफ FIR की मांग की, महिला सम्मान मुद्दा बना राजनीति का केंद्र


    नई दिल्ली
    ।पटना में हिजाब विवाद ने एक बार फिर राजनीति और सामाजिक चर्चा में उबाल ला दिया है। हाल ही में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब हटाने का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया है। विपक्षी दलों ने इसे महिला सम्मान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है।

    जम्मू-कश्मीर की प्रमुख विपक्षी पार्टी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी PDP ने इस घटना को गंभीर मानते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज कराने का फैसला किया है। PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने श्रीनगर पुलिस के पास जाकर शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की। PDP का कहना है कि यह केवल धार्मिक पहचान का मामला नहीं है बल्कि महिलाओं के सम्मान, गरिमा और निजता से जुड़ा है।

    दरअसल, विवाद तब शुरू हुआ जब पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे थे। इसी दौरान एक मुस्लिम महिला डॉक्टर जब मंच पर पहुंचीं, तो मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर उनके चेहरे से हिजाब हटा दिया। यह पूरी घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद देशभर में इस पर प्रतिक्रियाएं आईं और विपक्ष ने इसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।इस मामले पर PDP की इल्तिजा मुफ्ती ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि क्या बिहार सरकार महिलाओं के सम्मान और अपमान में फर्क नहीं समझती। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री का यह व्यवहार सत्ता के अहंकार का परिचायक है और महिलाओं की निजता पर चोट पहुंचाता है। PDP का यह भी कहना है कि संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति से इस तरह का व्यवहार अस्वीकार्य है।

    हिजाब विवाद तब और बढ़ गया जब केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार का समर्थन करते हुए बयान दिया कि नियुक्ति पत्र लेने के लिए चेहरा दिखाना अनिवार्य है और मुख्यमंत्री ने अभिभावक की तरह व्यवहार किया। इस बयान के बाद इल्तिजा मुफ्ती ने प्रतिक्रिया दी कि गिरिराज सिंह का बयान अपमानजनक और असंवेदनशील है।PDP का कहना है कि यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर उठाया जाएगा। FIR दर्ज होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। इस विवाद ने एक बार फिर से राजनीति, धर्म और महिला सम्मान के सवाल को केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर सियासी हलचल तेज रहने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला बिहार में आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला अधिकार संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि महिलाओं की निजता और धार्मिक पहचान का सम्मान करना हर नागरिक और पदाधिकारी की जिम्मेदारी है।इस विवाद ने साबित कर दिया है कि सोशल मीडिया और वायरल वीडियो अब किसी भी राजनीतिक घटना को राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बना सकते हैं। PDP का कहना है कि वह कानून के दायरे में रहते हुए सभी आवश्यक कार्रवाई करेगी और इस मामले को न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचाएगी।