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  • 4 राज्यों में 5 राज्यसभा सीट जीत सकती है कांग्रेस, इन उम्मीदवारों को मिल सकता है मौका

    4 राज्यों में 5 राज्यसभा सीट जीत सकती है कांग्रेस, इन उम्मीदवारों को मिल सकता है मौका


    नई दिल्ली। दस राज्यों में होने वाले राज्यसभा चुनावों में 37 सीटों के लिए दावेदारी तेज हो गई है। सबसे ज्यादा चुनौती कांग्रेस के सामने है क्योंकि उसके पास सीटें कम और दावेदार अधिक हैं। पार्टी को इस चुनाव में कुल पांच से छह सीटों की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस को छत्तीसगढ़ हिमाचल प्रदेश हरियाणा और तेलंगाना में कुल पांच सीटें मिल सकती हैं। इसके अलावा सहयोगी दलों के साथ तालमेल के जरिए तमिलनाडु में भी एक सीट पर दावेदारी संभव है।

    राज्यवार स्थिति

    छत्तीसगढ़: सत्ता से बाहर होने के कारण कांग्रेस को यहां दो की बजाय केवल एक सीट मिल सकती है। आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को मौका मिलने की संभावना है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव भी इस सीट के दावेदार हैं। हिमाचल प्रदेश: पार्टी सत्ता में होने के कारण यहां एक सीट जीतने की स्थिति में है। पिछली बार क्रॉस वोटिंग के कारण हार हुई थी। इस बार पार्टी स्थानीय नेता प्रतिभा सिंह को मैदान में उतार सकती है।

    हरियाणा: पार्टी को एक सीट मिलने की संभावना है। उम्मीदवार चयन में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अहम भूमिका रहेगी। इसके लिए पूर्व सांसद राजबब्बर और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान पर विचार चल रहा है। तेलंगाना: कांग्रेस सत्ता में है और यहां दो सीटें जीतने की संभावना है। इसके तहत उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी के लिए वादा पूरा किया जा सकता है। इसके साथ अभिषेक मनु सिंघवी को दोबारा राज्यसभा भेजने पर विचार है।

    तमिलनाडु: कांग्रेस ने डीएमके के साथ एक सीट पर चर्चा की है। सकारात्मक संकेत मिलने पर यहां भी पार्टी एक प्रत्याशी घोषित कर सकती है। असम: पार्टी अकेले कोई सीट जीतने में सक्षम नहीं है। एआईयूडीएफ का समर्थन मिलने पर एक सीट मिल सकती है लेकिन विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस अभी सावधानी बरत रही है।  कुल मिलाकर कांग्रेस के लिए इस बार का राज्यसभा चुनाव संतुलन बनाने और सहयोगियों के साथ तालमेल साधने की चुनौती लेकर आया है।

  • NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका पर अध्याय पर गुस्सा, सीजेआई सूर्यकांत ने डायरेक्टर को नोटिस जारी किया

    NCERT किताब विवाद: सुप्रीम कोर्ट में न्यायपालिका पर अध्याय पर गुस्सा, सीजेआई सूर्यकांत ने डायरेक्टर को नोटिस जारी किया


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग NCERT की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका पर जोड़ दिए गए अध्याय के विवाद पर सुनवाई गुरुवार को जारी रही। इस मामले में सीजेआई D.Y. Chandrachud / Surya Kant की बेंच के सामने एसजी Tushar Mehta ने बिना शर्त माफी मांगी।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस विवादित अध्याय को “कैलकुलेटेड मूव” बताते हुए कहा कि इससे भारतीय न्यायपालिका की प्रतिष्ठा पर गंभीर चोट लगी है। सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, आज न्यायपालिका लहूलुहान है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया तो आम जनता और युवाओं के मन में न्यायपालिका की पवित्रता प्रभावित होगी।

    तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि किताब की 32 प्रतियां बाजार में चली गई थीं, जिन्हें वापस लिया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे अध्याय की टीम दोबारा समीक्षा करेगी। सीजेआई ने कहा कि यह मामूली मामला नहीं है, बल्कि न्यायपालिका की संस्थागत स्थिति को चुनौती देने वाला कदम है।

    सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के डायरेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं कि क्या यह सोची-समझी चाल थी या संयोग, लेकिन न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का चित्रण संवैधानिक रूप से अनुचित है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने डिजिटल युग में हजारों प्रतियों के प्रसार को ध्यान में रखते हुए जांच की आवश्यकता बताई।

    सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने संविधान निर्माताओं की मेहनत का उल्लेख किया और कहा कि तीनों स्तंभों की स्वायत्तता सुनिश्चित करने में गहरी सजगता बरती गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह की सामग्री युवाओं तक पहुंचती रही तो न्यायिक पद की पवित्रता खतरे में पड़ जाएगी।

    सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि पूरे तंत्र की व्यापक समस्याओं का कोई जिक्र नहीं था, केवल एक व्यक्ति को चुन लिया गया। वहीं कपिल सिब्बल ने पूछा कि राजनेताओं और नौकरशाही का क्या जिक्र है। न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को सुरक्षित रखने और पाठ्यपुस्तक में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से NCERT पर गहन समीक्षा और जवाब देने का निर्देश दिया।

    इस सुनवाई में यह भी तय किया गया कि भविष्य में इस तरह की गलतियों से बचने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। SC ने कहा कि कार्रवाई सिर्फ पब्लिक रिप्रेसेंटेशन के लिए नहीं बल्कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और संस्थागत मूल्य के लिए भी जरूरी है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक, टैक्स विवाद खत्म, जाने क्‍या दिया फैसला?

    सुप्रीम कोर्ट ने माना रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक, टैक्स विवाद खत्म, जाने क्‍या दिया फैसला?


    नई दिल्ली। भारत में गर्मियों का लोकप्रिय पेय रूह अफ़जा अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्पष्ट रूप से फ्रूट ड्रिंक के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुका है। लंबे समय से चल रही टैक्स विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रूह अफ़जा को सिर्फ इसलिए उच्च टैक्स वाले ब्रैकेट में नहीं रखा जा सकता क्योंकि इसे शरबत के रूप में बेचा जाता है।

    जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा फलों से बनाया जाता है और इसे केवल पानी में मिलाकर पीया जाता है। इसलिए इसे टैक्स कानून के तहत फ्रूट ड्रिंक माना जाएगा।

    विवाद की जड़

    यह मामला हमदर्द वक्फ लैबोरेटरीज की अपील पर सुना गया। सवाल यह था कि रूह अफ़जा, जिसमें केवल 10% फ्रूट जूस होता है और जिसे इनवर्ट शुगर सिरप व हर्बल डिस्टिलेट के साथ मिलाया जाता है, कानूनी रूप से फ्रूट ड्रिंक कहलाया जा सकता है या नहीं।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट और टैक्स अधिकारियों के 2018 के फैसलों को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इन फैसलों में रूह अफ़जा को उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स एक्ट के तहत 12.5% टैक्सेबल अनक्लासिफाइड आइटम के रूप में देखा गया था।

    सुप्रीम कोर्ट का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि रूह अफ़जा UPVAT एक्ट की शेड्यूल II पार्ट A की एंट्री 103 के तहत फ्रूट ड्रिंक/प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट के रूप में आएगा। इस श्रेणी पर 1 जनवरी 2008 से 31 मार्च 2012 तक 4% रियायती VAT दर लागू होती थी।

    मामले में अधिकारियों ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन का हवाला देते हुए कहा था कि फ्रूट सिरप में कम से कम 25% फ्रूट जूस होना चाहिए। चूंकि रूह अफ़जा में केवल 10% जूस होता है, इसलिए इसे नॉन-फ्रूट सिरप बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि फूड सेफ्टी कानून टैक्सिंग कानून की व्याख्या को नियंत्रित नहीं कर सकता।

  • Delhi: लाल किला बम ब्लास्ट मामले में NIA ने 2 और आतंकियों को दबोचा, अब तक 11 गिरफ्तार

    Delhi: लाल किला बम ब्लास्ट मामले में NIA ने 2 और आतंकियों को दबोचा, अब तक 11 गिरफ्तार


    नई दिल्ली।
    एनआईए (NIA) ने दिल्ली (Delhi) के लाल किला (Red Fort) के पास हुए बम ब्लास्ट (Bomb Blast) के मामले में दो और आतंकियों (Two Another Terrorists) को दबोचा है। इन आतंकियों के नाम जमीर अहमद और तुफैल अहमद हैं। इसके साथ ही इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 11 हो गई है। जांच में सामने आया है कि इन दोनों ने मुख्य आरोपी उमर उन नबी को हथियार और गोला-बारूद सप्लाई किए थे। ये दोनों अंसार गजवत-उल-हिंद संगठन के सक्रिय सदस्य हैं। दोनों कई आतंकी साजिशों में शामिल रहे हैं।


    शाजिश में शामिल थे दोनों आरोपी

    एनआईए की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि जमीर अहमद अहंगर गांदरबल का रहने वाला है जबकि तुफैल अहमद भट श्रीनगर का निवासी है। आरोप है कि दोनों दिल्ली ब्लास्ट से जुड़ी साजिश में एक्टिव रूप से शामिल थे। इन आरोपियों ने मामले के मुख्य आरोपी डॉ. उमर को हथियार सप्लाई किए थे।


    अंसार गजवत-उल-हिंद के गुर्गे हैं दोनों आरोपी

    पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के पास हुए कार बम धमाके में कई लोग मारे गए थे और कई लोग घायल हुए थे। मुख्य आरोपी उमर उन नबी भी इस धमाके में मारा गया था। एनआईए इस हमले की जांच कर रही है। एनआईए ने अपनी जांच में पाया कि जमीर और तुफैल अंसार गजवत-उल-हिंद आतंकी संगठन के सक्रिय गुर्गे हैं।


    दिल्ली ब्लास्ट के साथ कई आतंकी साजिशों का रहे हैं हिस्सा

    बयान में कहा गया है कि एनआईए जम्मू-कश्मीर पुलिस, हरियाणा पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ कोऑर्डिनेशन के तहत काम कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि जमीर और तुफैल विस्फोट की साजिश के साथ कई अन्य आतंकी साजिशों का भी हिस्सा थे।


    आरोपी जुटा रहे थे गोला बारूद

    बयान में कहा गया है कि एनआईए ने व्यापक जांच और सबूतों की गहराई से छानबीन की। एनआईए ने पाया कि दोनों ही आरोपी देश के खिलाफ इस्तेमाल के लिए हथियारों और गोला-बारूद के संग्रह में लगे हुए थे।


    डॉ. उमर के साथ ये भी रहे हैं शामिल

    एनआईए ने कहा कि राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी एजेंसी की जांच से यह बात सामने आई कि दिल्ली बम विस्फोट की साजिश डॉ. उमर ने अन्य आरोपियों मुजम्मिल गनई, शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान, अदील अहमद राथर के साथ मिलकर रची थी। उसने कहा कि इसके अलावा 5 अन्य ने भी साजिशकर्ताओं को पनाह और रसद संबंधी सहायता प्रदान की थी। इन नौ लोगों को जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के विभिन्न स्थानों से पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त

    मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED की बड़ी कार्रवाई… अनिल अंबानी के मुम्बई स्थित घर 'अबोड' को किया जब्त


    मुम्बई।
    प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate- ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी कानून (Anti-Money Laundering Laws – PMLA) के तहत बड़ी कार्रवाई की है। रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने अनिल अंबानी (Anil Ambani) के मुंबई स्थित घर ‘अबोड’ को जब्त कर लिया है। जब्त घर की कीमत 3,716 करोड़ रुपये बताई जा रही है। ईडी के अनुसार, अनिल अंबानी और उनके ग्रप की कंपनियों के खिलाफ अब तक कुल अटैचमेंट की कार्रवाई 15000 करोड़ से अधिक हो चुकी है। बता दें कि 23 फरवरी को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने उद्योगपति अनिल अंबानी को झटका देते हुए एकल न्यायाधीश पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके एवं रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक खातों को ‘धोखाधड़ी’ वाला वर्गीकृत करने की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी।

    यह आदेश मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम ए अंखड की खंडपीठ ने बैंक ऑफ बड़ौदा, आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक और ऑडिटर बीडीओ इंडिया एलएलपी की याचिका पर पारित किया। पीठ ने ‘उल्टे’ और ‘गैर-कानूनी’ अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया और अंबानी की इसके अभियान पर रोक लगाने के निवेदन को भी ठुकरा दिया।

    पीठ ने कहा, “जैसा कि हम पहले ही सुन चुके हैं कि 24 दिसंबर, 2025 का अंतरिम फैसला गैर-कानूनी है और इस प्रक्रिया में गड़बड़ी है इसलिए अगले कुछ सप्ताह के लिए इस आदेश के लागू होने पर रोक लगाने का निवेदन गैर-कानूनी आदेश को जारी रखने और गैर-कानूनी काम को जारी रखने के बराबर होगी। इसलिए अनिल अंबानी की तरफ से इस फैसले के लागू होने पर रोक लगाने के निवेदन को खारिज किया जाता है।”

    दिसंबर 2025 में जब अनिल अंबानी के खिलाफ मामला विचाराधीन था, न्यायमूर्ति मिलिंद एन जाधव की एकल न्यायाधीश पीठ ने उनको कुछ समय के लिए राहत दी। इस आदेश ने तीनों बैंकों की सभी कार्रवाइयों पर रोक लगा दी और उन्हें कारण बताओ नोटिस और धोखाधड़ी आदेश पर आगे बढ़ने से रोक दिया, जिससे उन्हें दो-जजों की पीठ के सामने अपील करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

  • मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    मोदी की इजरायल यात्रा पर कांग्रेस का हमला, नेतन्याहू से मुलाकात को बताया …

    नई दिल्ली। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी ने कहा कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इजरायली नेतृत्व की आलोचना हो रही है, तब भारतीय प्रधानमंत्री की यह यात्रा कई नैतिक सवाल खड़े करती है।

    कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री की इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से प्रस्तावित मुलाकात को लेकर भी आपत्ति जताई और गाजा की स्थिति पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।

    जयराम रमेश ने ऐतिहासिक रुख का दिलाया हवाला
    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि भारत का इतिहास फिलिस्तीनी मुद्दे पर संतुलित और सिद्धांत आधारित रहा है, लेकिन मौजूदा कूटनीतिक रुख उस परंपरा से अलग दिखाई देता है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि गाजा में भारी तबाही और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार जैसे मुद्दों पर भारत को अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए।

    रमेश ने भारत के पुराने रुख की याद दिलाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के 1960 के गाजा दौरे और बाद के दशकों में फिलिस्तीन के समर्थन से जुड़े निर्णयों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने 1988 में फिलिस्तीन को औपचारिक मान्यता देकर वैश्विक मंच पर एक स्वतंत्र नीति का परिचय दिया था।

    प्रियंका गांधी ने गाजा का मुद्दा उठाने की अपील
    की

    कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री अपनी यात्रा के दौरान इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए गाजा पट्टी की मानवीय स्थिति का जिक्र करेंगे और निर्दोष नागरिकों के लिए न्याय की बात उठाएंगे।

    उन्होंने कहा कि भारत का ऐतिहासिक दायित्व रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति, न्याय और मानवीय मूल्यों की वकालत करता रहे।

    सरकार का फोकस: रणनीतिक और द्विपक्षीय सहयोग

    प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहयोग को और मजबूत करने के उद्देश्य से हो रही है।

    2017 में मोदी की पहली इजरायल यात्रा के दौरान संबंधों को “रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा दिया गया था, जिसके बाद कृषि, रक्षा तकनीक, जल प्रबंधन और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा है।

    राजनीतिक बनाम कूटनीतिक बहस

    इस मुद्दे ने एक बार फिर भारत की पश्चिम एशिया नीति को लेकर घरेलू राजनीतिक बहस तेज कर दी है—एक तरफ रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता देने की दलील है, तो दूसरी ओर मानवीय और ऐतिहासिक दृष्टिकोण को बनाए रखने की मांग उठ रही है।

  • मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब

    मेघालय विधानसभा में अनोखा दृश्य: विधायक पत्नी ने CM पति से ही पूछ लिया हिसाब


    नई दिल्ली।
    मेघालय विधानसभा में उस समय दिलचस्प स्थिति बन गई, जब सत्तारूढ़ नेशनल पीपल्स पार्टी (NPP) की विधायक मेहताब चांदी ए संगमा ने प्रश्नकाल के दौरान अपने ही पति और मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा से विकास योजनाओं की प्रगति पर सीधे सवाल कर दिए।

    सदन में नीतिगत मुद्दे पर हुई यह औपचारिक बहस चर्चा का विषय बन गई और इसे लोकतांत्रिक जवाबदेही का अनोखा उदाहरण माना जा रहा है।


    पशुपालन और मत्स्य शिक्षा परियोजनाओं पर उठाए सवाल

    गांबेग्रे क्षेत्र की विधायक ने वर्ष 2022 में स्वीकृत पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र से जुड़े शैक्षणिक संस्थानों की प्रगति पर जानकारी मांगी।



    उन्होंने पूछा कि प्रस्तावित एक वेटरनरी कॉलेज, दो फिशरीज कॉलेज और एक डेयरी कॉलेज की स्थापना में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

    इसके साथ ही उन्होंने राज्य के पशु चिकित्सा प्रशिक्षण केंद्रों में कर्मियों की कमी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे पशुधन आधारित आजीविका प्रभावित हो रही है।


    मुख्यमंत्री ने बताई देरी की वजह

    मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि परियोजनाएं राज्य के पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं, लेकिन भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और मानव संसाधन योजना जैसी प्रक्रियाओं के कारण समय लगा।

    उन्होंने बताया कि:

    • वेटरनरी कॉलेज की स्थापना पर लगभग 334 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है।

    • इसके लिए किर्डेमकुलाई (री-भोई जिला) में करीब 800 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है।

    • संस्थान में 19 विभाग प्रस्तावित किए गए हैं।


    सरकार का भरोसा—अब तेज होगी प्रक्रिया

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि 2022 में स्वीकृत इन संस्थानों की स्थापना की प्रक्रिया को अब गति दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी आबादी पशुपालन और इससे जुड़े व्यवसायों पर निर्भर है, इसलिए इन परियोजनाओं का समय पर पूरा होना अत्यंत आवश्यक है।

    मानव संसाधन की कमी को लेकर भी उन्होंने रिक्त पदों को शीघ्र भरने और प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने का भरोसा दिलाया।


    जवाबदेही की मिसाल बना घटनाक्रम

    सदन में यह मामला इसलिए सुर्खियों में रहा क्योंकि एक विधायक ने निजी संबंधों से अलग हटकर सरकार से सार्वजनिक रूप से जवाब मांगा। राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा और संस्थागत जवाबदेही का सकारात्मक संकेत बताया है।

  • वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका

    वोटिंग अनिवार्य बनाने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, NOTA की उपयोगिता पर जताई शंका


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट ने मतदान को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए अधिक से अधिक नागरिकों का मतदान केंद्र तक पहुंचना जरूरी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वोटिंग को अनिवार्य बनाने जैसे उपायों पर विचार किया जा सकता है, ताकि लोग अपने मताधिकार का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करें।

    यह टिप्पणी उस जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मांग की गई है कि यदि किसी निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक उम्मीदवार ही मैदान में हो, तब भी उसे निर्विरोध विजयी घोषित करने के बजाय चुनाव कराया जाए, ताकि मतदाता “इनमें से कोई नहीं” (NOTA) का विकल्प चुन सकें।


    अदालत ने पूछा—क्या NOTA से बदली है स्थिति?

    सुनवाई के दौरान पीठ ने यह सवाल उठाया कि NOTA लागू होने के बाद क्या वास्तव में:

    • मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है?

    • उम्मीदवारों की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है?

    अदालत ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि कोई प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए—बहुत कठोर नहीं, लेकिन ऐसी कि नागरिक मतदान के लिए प्रेरित हों।


    ग्रामीण बनाम शहरी मतदान पर भी चर्चा

    सुनवाई के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में मतदान को अक्सर एक उत्सव की तरह देखा जाता है। लोग समूह में मतदान करने जाते हैं, जबकि अनुभव बताता है कि शिक्षित और आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग कई बार मतदान में अपेक्षाकृत कम भागीदारी करता है।


    किस प्रावधान को दी गई है चुनौती?

    याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की उस धारा को चुनौती दी गई है, जिसके तहत यदि चुनाव मैदान में केवल एक उम्मीदवार रह जाता है, तो उसे बिना मतदान के निर्वाचित घोषित किया जा सकता है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस स्थिति में मतदाताओं को NOTA का विकल्प प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिलता, जिससे लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति सीमित हो जाती है।


    याचिकाकर्ताओं का पक्ष

    याचिका में कहा गया कि यदि NOTA के परिणामों को वास्तविक प्रभाव दिया जाए, तो अधिक मतदाता मतदान के लिए प्रेरित होंगे। वर्तमान व्यवस्था में NOTA चुनने का कोई प्रत्यक्ष परिणाम नहीं निकलता, जिससे मतदाताओं का उत्साह कम होता है।


    व्यापक बहस की शुरुआत

    अदालत की इन टिप्पणियों ने अनिवार्य मतदान, मतदाता सहभागिता और NOTA की प्रभावशीलता जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है। मामला अभी विचाराधीन है और आगे की सुनवाई में इस पर विस्तृत कानूनी विमर्श होने की संभावना है।

  • सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'

    सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों को दिल्ली सरकार देगी ₹25,000 कैश, शुरू हुई 'राह-वीर योजना'


    नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने रोड एक्सीडेंट्स में तुरंत मदद देने और पीड़ितों की जान बचाने के मकसद से ‘राह-वीर योजना’ की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत, जो भी नागरिक किसी सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति की मदद करेगा और उसे अस्पताल पहुंचाएगा, उसे सरकार ₹25,000 कैश प्राइज के साथ एक सम्मान पत्र भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्कीम का ऐलान करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य समाज में अच्छे काम करने वालों का मनोबल बढ़ाना और लोगों को तुरंत मदद के लिए प्रोत्साहित करना है।

    गोल्डन आवर में जान बचाने का मकसद
    ‘राह-वीर योजना’ का सबसे बड़ा लक्ष्य एक्सीडेंट के तुरंत बाद के शुरुआती समय यानी ‘गोल्डन आवर’ का सही इस्तेमाल करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि घायल व्यक्ति को एक्सीडेंट के तुरंत बाद मेडिकल मदद मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार चाहती है कि लोग पुलिसिया कार्रवाई या कानूनी झंझटों के डर को भूलकर मानवीय आधार पर मदद के लिए आगे आएं और घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाएं।

    ईनाम की धनराशि और राष्ट्रीय सम्मान
    स्कीम के नियमों के अनुसार, एक ही एक्सीडेंट में अगर कोई व्यक्ति एक से अधिक पीड़ितों की सहायता करता है, तो भी उसे अधिकतम ₹25,000 की प्रोत्साहन राशि ही दी जाएगी। इसके अलावा, साल भर में चुने गए 10 सबसे बेहतरीन ‘राह-वीरों’ को केंद्र सरकार की ओर से1 लाख का राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान प्रमाण पत्र देकर विशेष सम्मानित किया जाएगा।
    कानूनी डर को खत्म करने की पहल
    ‘राह-वीर योजना’ केवल वित्तीय मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को यह संदेश देती है कि एक्सीडेंट पीड़ितों की मदद करना अब किसी कानूनी जोखिम का कारण नहीं बनेगा। अक्सर लोग पूछताछ और अदालती प्रक्रिया के डर से मदद करने से कतराते हैं, लेकिन इस स्कीम के तहत मददगारों को परेशान नहीं किया जाएगा और उन्हें समाज के रक्षक के रूप में सम्मानित किया जाएगा।
  • भारत इजराइल साझेदारी आपसी फायदे के साथ दुनिया को स्थिर और खुशहाल बनाने में दे रही योगदान : PM मोदी

    भारत इजराइल साझेदारी आपसी फायदे के साथ दुनिया को स्थिर और खुशहाल बनाने में दे रही योगदान : PM मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) ने बुधवार को इजराइली संसद (नेसेट) (Israeli Parliament (Knesset) को संबोधित किया और कहा कि दोनों देशों की मजबूत साझेदारी आपसी फायदे के साथ ही दुनिया भर में स्थिरता और खुशहाली में भी योगदान देती है। हमें पक्का करना चाहिए कि भारत और इजराइल के बीच दोस्ती अनिश्चित दुनिया में ताकत का जरिया बनी रहे।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने इजराइल में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की और गाजा शांति योजना का समर्थन किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि इजराइली संसद को संबोधित करना उनके लिए गरिमा और सम्मान की बात है। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि भारत ने जिस दिन इजराइल को देश के रूप में मान्यता दी थी उसी दिन (17 सितंबर 1950) उनका जन्म हुआ था।

    अपने भाषण में आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए मोदी ने इजराइल के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता। आतंकवाद का लक्ष्य समाज को अस्थिर करना, विकास को रोकना और भरोसा खत्म करना है। इस पर किसी भी तरह से दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए। साथ ही समन्वय और सतत प्रयास के साथ आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत गाजा शांति योजना को पूर्ण समर्थन देता है।

    प्रधानमंत्री के भाषण के बाद उन्हें “स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल” से सम्मानित किया। प्रधानमंत्री मोदी यह मेडल पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जो नेसेट का सबसे बड़ा सम्मान है।

    भारत और इजराइल के बीच के हजारों साल पुराने सभ्यगत संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नागरिक संबंध दोनों देशों की दोस्ती का आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि यहूदी भारत में ना सताए गए और ना ही उनके साथ कभी भेदभाव हुआ। इस दौरान भारत की विकास यात्रा में योगदान देने वाले प्रमुख यहूदी के नाम भी उन्होंने उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इजराइल के बीच के संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदले जाने के बाद से इसका स्तर और दायरा बहुत बढ़ा है। भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है ऐसे में नवाचार और तकनीकी में आगे इजराइल के साथ उसके संबंध स्वभावी तौर पर भविष्य उन्मुख साझेदारी के संकेत हैं। प्रधानमंत्री ने क्वांटम कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं का जिक्र किया।

    प्रधानमंत्री ने इजराइल में योग को मिलते विस्तार और आयुर्वेद में बढ़ती रुचि का जिक्र करते हुए इजराइली युवाओं को भारत आने और चिकित्सा प्रणाली से जोड़ने का आह्वान किया।

    इससे पहले, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी की बिना कोई इधर-उधर की बात किये इजराइल के साथ खड़े रहने की सराहना की। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने नरेन्द्र मोदी के दोनों देशों के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने में योगदान की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इसके चलते दोनों देशों का व्यापार दो गुना, सहयोग तीन गुना और समझ चार गुना हुई है।

    इजराइली प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की विश्व नेताओं के साथ गले लगने की विशेष अभिवादन शैली की तारीफ करते हुए कहा कि इस दुनिया में मोदी हग के रूप में जाना जाता है।

    नेतन्याहू ने इस बात को रेखांकित किया कि यहूदी दुनिया में केवल भारत में ही भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा।