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  • अनिरुद्धाचार्य का विवादित हमला: मीडिया को बताया ‘मंथरा का अपडेट वर्जन’, साजिश और धमकी तक का आरोप

    अनिरुद्धाचार्य का विवादित हमला: मीडिया को बताया ‘मंथरा का अपडेट वर्जन’, साजिश और धमकी तक का आरोप


    नई दिल्ली। कथावाचक और धार्मिक वक्ता अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर अपने तीखे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से उन्होंने मीडिया के एक वर्ग पर जोरदार हमला बोलते हुए उसे मंथरा का अपडेट वर्जन और धृतराष्ट्र तक कह दिया। अनिरुद्धाचार्य का आरोप है कि कुछ मीडिया संस्थान और पत्रकार टीआरपी की दौड़ में उनके खिलाफ झूठी खबरें फैलाने और साजिश रचने का काम कर रहे हैं। अपने बयान में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आज का मीडिया सच दिखाने के बजाय सनसनी फैलाने में ज्यादा दिलचस्पी ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चैनल और पत्रकार लगातार उनके नाम को विवादों से जोड़कर पेश करते हैं, जबकि उनके सामाजिक और धार्मिक कार्यों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि वे सनातन धर्म के प्रचार के साथ-साथ वृद्धाश्रम, शिक्षा और गौसेवा जैसे कार्यों में वर्षों से सक्रिय हैं, लेकिन मीडिया इन पहलुओं को कभी प्रमुखता से नहीं दिखाती।

    अपनी उम्र और सेवा कार्यों का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने बताया कि वे 35 वर्ष के हैं और महज 25 साल की उम्र से ही समाजसेवा में लगे हुए हैं। उनका कहना है कि इसके बावजूद मीडिया उनके काम की बजाय उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह कभी-कभी मीडिया बिना पुष्टि के गलत खबरें चला देता है, उसी का नतीजा है कि एक बार अभिनेता धर्मेंद्र के जीवित रहते हुए उनकी मौत की खबर फैला दी गई थी। यह मीडिया की जल्दबाजी और गैर-जिम्मेदारी को दिखाता है। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर दिए गए अपने पुराने बयान का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि उन्होंने केवल भारतीय संस्कृति के संदर्भ में अपनी राय रखी थी। उनके अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का हिस्सा नहीं है। इस विषय पर राय रखने के बाद ही मीडिया का एक वर्ग उनके पीछे पड़ गया और लगातार उनके खिलाफ रिपोर्टिंग करने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीआरपी के लिए उनके बयान को गलत ढंग से पेश किया गया और जानबूझकर विवाद खड़ा किया गया।

    अनिरुद्धाचार्य ने यह भी दावा किया कि उनके खिलाफ झूठी एफआईआर और अफवाहें तक फैलाई गईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज तक किसी का नुकसान नहीं किया, न ही किसी को भड़काने का काम किया, इसके बावजूद उन्हें बार-बार विवादों में घसीटा जाता है। उनका आरोप है कि कुछ पत्रकार और मीडिया संस्थान सनातन धर्म के खिलाफ पूर्वाग्रह के साथ काम कर रहे हैं।अपने सबसे तीखे शब्दों में उन्होंने मीडिया की तुलना रामायण की मंथरा से करते हुए कहा कि जैसे मंथरा ने साजिश कर परिवारों में फूट डाली थी, वैसे ही आज का मीडिया समाज को बांटने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि पहले मंथरा हिंदुओं को आपस में लड़वाती थी और अब वही भूमिका मीडिया निभा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया को धृतराष्ट्र बताते हुए कहा कि यह सच देखने के बावजूद आंखें मूंद लेता है।

    अनिरुद्धाचार्य ने यहां तक कहा कि टीआरपी की होड़ में मीडिया किसी की जान को भी खतरे में डाल सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सनातन धर्म की सेवा करने वालों के खिलाफ साजिशें रची जा सकती हैं और उन्हें बदनाम करने या नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो सकती है। उनके इस बयान को कई लोग धमकी भरे लहजे के तौर पर भी देख रहे हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अनिरुद्धाचार्य अपने बयानों को लेकर विवादों में आए हों। इससे पहले भी उनके कुछ वक्तव्यों पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं और कुछ मामलों में कानूनी नोटिस तक की नौबत आई है। उनका ताजा बयान एक बार फिर सोशल मीडिया और मीडिया जगत में बहस का मुद्दा बन गया है। जहां उनके समर्थक इसे सच बोलने की हिम्मत बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे गैर-जिम्मेदाराना और भड़काऊ करार दे रहे हैं।

  • सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित

    सोनिया गांधी को पत्र लिखना पड़ा महंगा ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम कांग्रेस से निष्कासित


    नई दिल्ली । भुवनेश्वर कांग्रेस पार्टी ने ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मुकीम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया है। यह कदम पार्टी की अनुशासन समिति के निर्देश पर लिया गया क्योंकि मुकीम पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। यह फैसला पार्टी के भीतर नेतृत्व और कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ती असंतोष की स्थितियों के बीच आया है।

    सोनिया गांधी को पत्र लिखकर जताई थी नाराजगी

    मुकीम जो पहले बाराबती-कटक सीट से विधायक रह चुके हैं ने हाल ही में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने पार्टी की स्थिति और नेतृत्व पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की थी। पत्र में उन्होंने कांग्रेस की कमजोर स्थिति का उल्लेख करते हुए सोनिया गांधी से पार्टी के भविष्य के लिए मार्गदर्शन की अपील की थी। मुकीम ने लिखा था कि कांग्रेस वर्तमान में कठिन दौर से गुजर रही है और संगठन जमीनी स्तर पर कमजोर होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा था कि सोनिया गांधी का मार्गदर्शन पार्टी के लिए बेहद जरूरी है ताकि पार्टी को इस संकट से उबारा जा सके।

    खड़गे की उम्र और नेतृत्व पर सवाल

    पत्र का सबसे विवादास्पद हिस्सा मल्लिकार्जुन खड़गे की उम्र पर था। मुकीम ने खड़गे की उम्र 83 वर्ष का जिक्र करते हुए यह सवाल उठाया कि विपक्ष के नेता के रूप में इतनी उम्र में सक्रियता दौड़-भाग और जनसंपर्क करना संभव नहीं हो पा रहा है। उन्होंने खड़गे को सलाहकार की भूमिका में रखने की सलाह दी और युवा नेतृत्व को आगे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुकीम ने प्रियंका गांधी वाड्रा को केंद्रीय भूमिका में और राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष के नेता के रूप में प्रभावी बनाए जाने की बात भी की।

    युवा नेताओं को आगे लाने की वकालत

    मुकीम ने अपने पत्र में पार्टी में युवा नेताओं को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने सचिन पायलट डीके शिवकुमार ए रेवंत रेड्डी और शशि थरूर जैसे नेताओं को पार्टी की शीर्ष नेतृत्व टीम में शामिल करने की बात की। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को ज्योतिरादित्य सिंधिया मिलिंद देवड़ा और हिमंता बिस्वा सरमा जैसे नेताओं के पार्टी छोड़ने के कारणों को समझना चाहिए और इसे पार्टी की उपेक्षा और अनदेखी का परिणाम बताया।

    राहुल गांधी से मुलाकात न होने की शिकायत

    पत्र में मुकीम ने यह भी शिकायत की थी कि वे पिछले तीन वर्षों से राहुल गांधी से मुलाकात की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हें कभी समय नहीं मिल सका। उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत पीड़ा नहीं बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बताया।

    कांग्रेस की अनुशासनात्मक कार्रवाई

    कांग्रेस ने मुकीम के इस पत्र को पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना और उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अनुशासन बनाए रखना पार्टी की प्राथमिकता है।
    कांग्रेस पार्टी की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है लेकिन यह कदम संगठन में अनुशासन बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता के लिए कोई स्थान नहीं है।

    संघर्षपूर्ण समय में पार्टी का कदम

    यह घटना उस समय हुई है जब कांग्रेस पार्टी अपने संगठन और नेतृत्व को लेकर आंतरिक असंतोष का सामना कर रही है। मुकीम का पत्र इस असंतोष की गहराई को उजागर करता है और उनकी निष्कासन की कार्रवाई से यह भी साफ हो जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी में गहरी अंतर्विरोधों की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

  • दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा

    दिल्ली-NCR में प्रदूषण का कहर: GRAP 4 लागू, AAP ने केंद्र और दिल्ली सरकार को घेरा


    नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदूषण लगातार उच्च स्तर पर बना हुआ है। आज राजधानी में AQI 500 के पार पहुंच गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है और विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई है। स्थिति के मद्देनजर नेशनल कैपिटल में GRAP 4 लागू कर दिया गया है।

    AAP ने उठाया केंद्र और दिल्ली सरकार पर सवाल
    AAP के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि “यह सरकार लगभग एक साल से सत्ता में है, लेकिन प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बंद कमरे में भी धुंध दिखाई दे रही है। CM को यह नहीं पता कि AQI क्या होता है। एक्सपर्ट्स को आगे आना चाहिए और मुख्यमंत्री को पीछे हट जाना चाहिए।”

    GRAP 4: क्या है नियम
    GRAP-IV के तहत राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को NCR में हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

    बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्कूलों में क्लास 5 तक हाइब्रिड मोड में पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है।

    क्लास 6 से 11 तक फिजिकल क्लास बंद करने का विकल्प भी राज्य सरकारों को दिया गया है।

    प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर
    दिल्ली-NCR में लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और खांसी जैसी समस्याएं हो रही हैं।

    डॉक्टरों ने सलाह दी है कि अगर संभव हो तो अगले कुछ हफ्तों तक दिल्ली से बाहर जाने पर विचार किया जाए।

    दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण GRAP 4 लागू किया गया है, लेकिन विपक्ष और AAP का कहना है कि केंद्र और दिल्ली सरकार इस गंभीर समस्या को गंभीरता से नहीं ले रही हैं। राजधानीवासियों के लिए फिलहाल सफर और बाहरी गतिविधियों में सावधानी बरतना आवश्यक है।

  • सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

    सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई


    अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पड़ोसी राज्यों से सस्ते धान को अपने यहां खपाने की बिचौलियों की सुनियोजित साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्यप्रदेश की सीमाओं से लगे बलरामपुर जिले में प्रशासन की सख्ती के चलते अब तक 11,300 क्विंटल धान और 48 वाहन जब्त किए जा चुके हैं। जब्त किए गए धान की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि यह धान जब्त नहीं किया जाता तो इसे छत्तीसगढ़ के सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेच दिया जाता। इससे बिचौलियों को भारी मुनाफा होता और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।

    समर्थन मूल्य का अंतर बना वजह
    इस पूरे मामले की जड़ राज्यों के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP का अंतर है। झारखंड में धान की खरीद 2,450 रुपये प्रति क्विंटल उत्तर प्रदेश में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल जबकि छत्तीसगढ़ में सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है यानी छत्तीसगढ़ में प्रति क्विंटल लगभग 700 रुपये अधिक का लाभ मिल रहा है। इसी अंतर का फायदा उठाने के लिए बिचौलिये यूपी और झारखंड से धान खरीदकर छत्तीसगढ़ में बेचने की तैयारी कर रहे थे।

    सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी

    बलरामपुर जिला तीन राज्यों की सीमा से लगा होने के कारण बिचौलियों के लिए आसान रास्ता बनता रहा है। लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरतते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी। धान की अवैध ढुलाई में लगे ट्रकों, पिकअप वाहनों और ट्रैक्टरों की जांच की गई। इसी दौरान बड़ी मात्रा में धान जब्त किया गया और 48 वाहनों को कब्जे में लिया गया।

    किसानों के हक की रक्षा
    प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल सरकारी नुकसान रोकने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी थी। यदि बाहरी राज्यों का धान उपार्जन केंद्रों तक पहुंच जाता, तो असली किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत होती। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है कि समर्थन मूल्य का लाभ केवल राज्य के वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों या बाहरी धान की किसी भी सूरत में अनुमति नहीं दी जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सीमावर्ती जिलों में पुलिस, राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार गश्त और जांच करेंगी। उपार्जन केंद्रों पर भी सख्त सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है, ताकि बाहरी धान की पहचान की जा सके।सरकार का मानना है कि ऐसी सख्ती से न केवल बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों में भी भरोसा बढ़ेगा कि उनकी फसल सही दाम पर सुरक्षित रूप से खरीदी जाएगी।इस पूरे अभियान के जरिए छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ संदेश दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। MSP का फायदा गलत तरीके से उठाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • शिल्पा शेट्टी के पब में बिल चुकाने को लेकर जमकर हंगामा बेंगलुरु पुलिस ने VIDEO वायरल होने पर शुरू की जाँच

    शिल्पा शेट्टी के पब में बिल चुकाने को लेकर जमकर हंगामा बेंगलुरु पुलिस ने VIDEO वायरल होने पर शुरू की जाँच


    नई दिल्ली ।बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी के स्वामित्व वाले बेंगलुरु स्थित एक हाई-प्रोफाइल पब में देर रात ग्राहकों के बीच बिल को लेकर हुए हंगामे ने सुर्खियां बटोरी हैं। यह घटना बेंगलुरु के सेंट मार्क्स रोड पर स्थित बैस्टियन पब की है जिसे शिल्पा शेट्टी ने साल 2019 में रेस्टोरेंट बिजनेसमैन रंजीत बिंद्रा के साथ पार्टनरशिप में शुरू किया था।

    क्या है पूरा मामला

    जानकारी के अनुसार यह घटना 11 दिसंबर की देर रात लगभग 1:30 बजे की बताई जा रही है। पब के अंदर हुए इस हंगामे का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।वायरल फुटेज में ग्राहकों के एक गुट को आपस में तीखी बहस करते हुए साफ तौर पर देखा जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक यह बहस पब के बिल का भुगतान बिल चुकाने या किसी अन्य मामूली बात पर शुरू हुई थी जो जल्द ही एक बड़ी कहा-सुनी में बदल गई। हालांकि जो सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक हुआ है उसमें किसी भी तरह की शारीरिक हाथापाई या तोड़फोड़ की पुष्टि नहीं होती है लेकिन ग्राहकों के बीच हुई तीखी नोकझोंक और हंगामे ने पब के माहौल को प्रभावित किया।

    पुलिस ने शुरू की जाँच

    पब के अंदर हुए इस हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस ने औपचारिक रूप से कोई शिकायत दर्ज होने का इंतज़ार किए बिना ही वायरल फुटेज के आधार पर घटना की जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हंगामे का सटीक कारण क्या था और क्या यह मामला केवल तीखी बहस तक सीमित था या इसमें कोई अन्य गैरकानूनी गतिविधि शामिल थी। इस घटना ने एक बार फिर देर रात तक चलने वाले पब और रेस्टोरेंट में सुरक्षा और व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया है।

  • माओवादियों को बड़ा झटका: MMC ज़ोन कमांडर समेत दो ACM का सरेंडर 20 लाख का इनाम था घोषित

    माओवादियों को बड़ा झटका: MMC ज़ोन कमांडर समेत दो ACM का सरेंडर 20 लाख का इनाम था घोषित


    नई दिल्ली महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ MMC ज़ोन में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। दर्रेकसा एरिया कमेटी के कमांडर रोशन उर्फ मारा इरिया वेदजा और दो ACM एरिया कमेटी मेंबर ने गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। इन तीनों पर कुल ₹20 लाख का इनाम था।  महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ MMC ट्राई-जंक्शन पर सक्रिय माओवादी संगठन को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। दर्रेकसा एरिया कमेटी के कमांडर समेत कुल तीन प्रमुख माओवादी कैडरों ने महाराष्ट्र के गोंदिया पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं।
    आत्मसमर्पण करने वाले इन तीनों माओवादियों पर कुल ₹20 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित था जो इनकी संगठनात्मक महत्ता को दर्शाता है। यह आत्मसमर्पण तीनों राज्यों महाराष्ट्र मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी सफलता है जो लंबे समय से इन क्षेत्रों में शांति बहाली के लिए प्रयासरत थीं।आत्मसमर्पण करने वाले प्रमुख माओवादी कैडर समर्पण करने वाले माओवादी दर्रेकसा एरिया कमेटी के प्रमुख सदस्य थे। इनमें निम्नलिखित लोग शामिल हैं:

    रोशन उर्फ मारा इरिया वेदजा 35:

    पद: दर्रेकसा एरिया कमेटी का कमांडर।मूल निवास: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का मेंदरी गांव।इनाम राशि: ₹8 लाख रुपये घोषित। सुभाष उर्फ पोज्जा बंडू राववा 26: पद: एरिया कमेटी मेंबर ACM। मूल निवास: बीजापुर जिले की उसूर तहसील का वेरापल्ली गांव। इनाम राशि: ₹6 लाख रुपये घोषित। रतन उर्फ मनकू ओमा पोय्याम 25: पद: एरिया कमेटी मेंबर ACM। मूल निवास: नारायणपुर जिले का रेखापाल गांव। इनाम राशि: ₹6 लाख रुपये घोषित।तीनों माओवादियों ने गोंदिया में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विधिवत आत्मसमर्पण किया। अधिकारियों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि इन कैडरों ने माओवादी संगठन के भीतर बढ़ती असुरक्षा पुलिस और सुरक्षा बलों की लगातार और प्रभावी कार्रवाई तथा मुख्यधारा में लौटने की प्रबल इच्छा के कारण यह निर्णय लिया। सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर अब ये सामान्य जीवन जी सकेंगे।

    MMC ज़ोन में समर्पण की लहर
    यह आत्मसमर्पण MMC ज़ोन में चल रहे व्यापक आत्मसमर्पण अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। हाल के सप्ताहों में माओवादी कैडरों द्वारा मुख्यधारा में लौटने के मामलों में तेजी आई है जो सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव और सामुदायिक सहयोग का परिणाम है: 28 नवंबर का बड़ा सरेंडर: इससे पहले माओवादियों की एमएमएसी ज़ोन के प्रवक्ता और जेआरबी डिवीजन के इंचार्ज विकास नागपुरे उर्फ रमेश सय्याना भास्कर समेत दस अन्य माओवादियों ने भी गोंदिया पुलिस के सामने समर्पण किया था। 7 दिसंबर की कार्रवाई: 7 दिसंबर को भी 11 माओवादियों ने बालाघाट पुलिस मध्य प्रदेश के सामने हथियार डाले थे।

    8 दिसंबर की ऐतिहासिक सफलता: सबसे बड़ी कामयाबी 8 दिसंबर को छत्तीसगढ़ की सुरक्षा एजेंसियों को मिली जब माओवादियों के शीर्ष लीडर एक करोड़ पांच लाख रुपये के इनामी रामधेर और उनके 11 साथियों ने अविभाजित राजनांदगांव जिले में समर्पण किया। इन लगातार सफलताओं के बाद ऐसा प्रतीत होता है कि MMC ज़ोन में माओवादी हिंसकों के मुख्यधारा में लौटने का यह आखिरी दौर शुरू हो चुका है। पुलिस सूत्रों के अनुसार अब इस पूरे ज़ोन में केवल एक माओवादी रंजीत ही शेष बचा है और सुरक्षा एजेंसियां जल्द ही उसके भी समर्पण किए जाने का दावा कर रही हैं।यह घटना न केवल माओवादी संगठन की कमर तोड़ने का काम करती है बल्कि यह भी स्थापित करती है कि सरकार की पुनर्वास नीतियां माओवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं जिससे इन क्षेत्रों में विकास और शांति की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

  • लिंक्डइन पर निकली अनोखी ‘फुलटाइम हाइब्रिड गर्लफ्रेंड’ की जॉब! यूजर्स पूछ रहे- सैलरी कितनी मिलेगी

    लिंक्डइन पर निकली अनोखी ‘फुलटाइम हाइब्रिड गर्लफ्रेंड’ की जॉब! यूजर्स पूछ रहे- सैलरी कितनी मिलेगी


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आए दिन कुछ न कुछ नया और अजीब वायरल होता रहता है लेकिन इस बार एक शख्स ने प्रोफेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन को ही डेटिंग का मंच बना डाला है। एक यूजर ने लिंक्डइन पर गर्लफ्रेंड के पद के लिए बाकायदा एक आधिकारिक ‘वेकेंसी पोस्ट’ की है जो इंटरनेट पर तेज़ी से वायरल हो गई है।

    यह पोस्ट करने वाले यूजर का नाम दिनेश बताया जा रहा है जिनका प्रोफाइल बताता है कि वह पहले टेक महिंद्रा जैसी कंपनी में सीनियर एसोसिएट के तौर पर काम कर चुके हैं। दिनेश ने इस वेकेंसी को ‘फुलटाइम हाइब्रिड गर्लफ्रेंड’ का नाम दिया है जिसने प्रोफेशनल जगत में इस्तेमाल होने वाले शब्द हाइब्रिड वर्क मॉडल का इस्तेमाल व्यक्तिगत रिश्ते के लिए किया है।

    जॉब डिस्क्रिप्शन लंबी योग्यता लिस्ट

    दिनेश ने इस पोस्ट में गर्लफ्रेंड की भूमिका के लिए जरूरी योग्यताओं और खूबियों की एक लंबी-चौड़ी लिस्ट साझा की है। इस लिस्ट में संभावित रूप से ऐसे गुण शामिल हैं जो वे अपने आदर्श साथी में देखना चाहते हैं और जिसके आधार पर ‘सही उम्मीदवार’ का चुनाव किया जाएगा। यह पोस्ट किसी कॉर्पोरेट जॉब वेकेंसी की तरह डिज़ाइन की गई है जिससे इसकी हास्यास्पद अपील और बढ़ गई है।

    यूजर्स की प्रतिक्रिया और मुख्य सवाल
    यह अनोखी जॉब पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई और लिंक्डइन के साथ साथ अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी चर्चा का विषय बन गई। प्रोफेशनल यूजर्स ने इसे मज़ाकिया अंदाज़ में लिया और इस पर मजेदार प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया।

    सबसे ज़्यादा जो सवाल पूछा गया वह था इस फुलटाइम हाइब्रिड गर्लफ्रेंड की सैलरी कितनी मिलेगी यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि यूजर्स ने इस पोस्ट को एक ‘प्रोफेशनल’ ऑफर के रूप में लेते हुए इसके सबसे महत्वपूर्ण जॉब क्राइटेरिया’ यानी पारिश्रमिक के बारे में जानने की उत्सुकता दिखाई। कुछ यूजर्स ने यह भी पूछा कि क्या इस जॉब में वर्क फ्रॉम होम की सुविधा उपलब्ध है और इसमें ईयरली बोनस मिलेगा या नहीं।

    इस तरह की पोस्ट यह दिखाती है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की सीमाएं अब धुंधली हो रही हैं और लोग प्रोफेशनल साइट्स पर भी अपने व्यक्तिगत या मनोरंजक विचारों को खुलकर साझा कर रहे हैं। हालांकि दिनेश की इस वेकेंसी का उद्देश्य स्पष्ट रूप से मनोरंजन और ध्यान आकर्षित करना ही रहा होगा।

  • दिल्ली-NCR में दमघोंटू हवा, AQI 490 पार! रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ रैली, सचिन पायलट और अजय लल्लू ने साधा बीजेपी पर निशाना

    दिल्ली-NCR में दमघोंटू हवा, AQI 490 पार! रामलीला मैदान में कांग्रेस की ‘वोट चोरी’ रैली, सचिन पायलट और अजय लल्लू ने साधा बीजेपी पर निशाना


    नई दिल्‍ली । दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता (AQI) गंभीर स्तर पर पहुँच गई है और राजधानी में सांस लेना लोगों के लिए मुश्किल हो गया है। प्रदूषण की स्थिति इतनी खराब है कि विशेषज्ञ लोगों को मास्क पहनने और घर के भीतर रहने की सलाह दे रहे हैं। AQI 490 के पार पहुंचने से स्वास्थ्य के लिए चेतावनी जारी की गई है।

    इसी बीच दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस ने ‘वोट चोरी’ के खिलाफ बड़ी रैली आयोजित की। रैली को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि राहुल गांधी ने कई बार वोट चोरी के सबूत चुनाव आयोग को दिए, लेकिन आयोग ने इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया। पायलट ने कहा कि देश के कई हिस्सों में बीएलओ खुदकुशी कर रहे हैं, महंगाई और अन्य समस्याओं से जनता परेशान है, और कांग्रेस हर बूथ पर इस मुद्दे के खिलाफ लड़ाई लड़ने को तैयार है।

    ओडिशा कांग्रेस के इंचार्ज अजय कुमार लल्लू ने कहा कि बीजेपी सरकार लोकतंत्र को बंधक बना रही है और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हर वोटर और पोलिंग बूथ की जानकारी जनता और मीडिया के सामने रखी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

    रैली में कांग्रेस के अन्य नेता जैसे भूपेंद्र हुड्डा और गौरव गोगोई ने भी बीजेपी पर निशाना साधा। गौरव गोगोई ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग वोट चोरी की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता हर बूथ पर खड़े रहेंगे और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करेंगे। रैली में जनता को सेवा का अवसर देने और लोकतंत्र की रक्षा करने का संदेश दिया गया।

  • CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां

    CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां


    नई दिल्ली । देश में बढ़ते हुए संगठित साइबर अपराधों पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया है जिसका अनुमानित आकार ₹1 000 करोड़ से अधिक का है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन स्कीमों के माध्यम से आम जनता को निशाना बना रहा था। CBI ने इस मामले में गहन जांच के बाद 17 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोपपत्र चार्जशीट दाखिल किया है। इन आरोपियों में चार विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो इस रैकेट के अंतर्राष्ट्रीय आयामों को दर्शाते हैं।

    ठगी का तरीका और विदेशी कनेक्शन

    जांच में सामने आया है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। ठगों ने ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए फर्जी लोन ऑफर आकर्षक लेकिन झूठे लोन प्रस्तावों के ज़रिए प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर ठगी करना।
    नकली निवेश और पोंजी स्कीम मल्टी लेवल मार्केटिंग और पोंजी योजनाओं के झूठे वादे देकर लोगों से बड़ी पूंजी निवेश करवाना।
    फर्जी मोबाइल ऐप कई नकली मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देना।झूठे नौकरी प्रस्ताव अच्छी वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर सिक्योरिटी डिपॉजिट या रजिस्ट्रेशन फीस लेना।CBI सूत्रों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के संचालन में चीन से जुड़े ठगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी जो भारत में मौजूद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बड़े पैमाने की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।

    फर्जी कंपनियों का जाल

    धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को वैध दिखाने और उसे विदेश भेजने के लिए इस गिरोह ने कंपनियों का एक बड़ा जाल बिछाया था। प्रारंभिक जांच में 58 से लेकर 111 जैसा कि शीर्षक में बताया गया है तक फर्जी या शेल कंपनियों का पता चला है जिनका उपयोग केवल ठगी के पैसे को लेयरिंग करने के लिए किया जाता था।CBI ने इस मामले में अक्टूबर में गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
    आरोपपत्र में सभी 17 आरोपियों पर धोखाधड़ी आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।इस खुलासे से यह साफ होता है कि साइबर अपराधी अब छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क बनाकर संगठित रूप से काम कर रहे हैं जिससे निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को लगातार अपनी जांच तकनीकों को उन्नत करना पड़ रहा है। CBI की यह सफलता देश में साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

  • अबूझमाड़ में डिजिटल क्रांति की शुरुआत: केंद्र ने 513 नए 4G मोबाइल टावरों को दी मंजूरी

    अबूझमाड़ में डिजिटल क्रांति की शुरुआत: केंद्र ने 513 नए 4G मोबाइल टावरों को दी मंजूरी


    रायपुर/ छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ और बस्तर अंचल में लंबे समय तक माओवादी हिंसा और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की रफ्तार धीमी रही। लेकिन बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और प्रशासनिक प्रयासों के चलते हालात तेजी से बदले हैं। अब जब बस्तर के करीब 400 गांव हिंसा मुक्त हो चुके हैं, तो केंद्र सरकार ने इस क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

    513 नए 4G मोबाइल टावरों को मंजूरी
    केंद्र सरकार ने डिजिटल भारत निधि (Digital Bharat Nidhi) के तहत अबूझमाड़ क्षेत्र में बीएसएनएल के माध्यम से 513 नए 4G मोबाइल टावर लगाने की स्वीकृति दी है। इस फैसले से न केवल संचार व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यह माओवादी प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत भी लिखेगा। राज्य और केंद्र सरकार के अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला सुरक्षा और विकास—दोनों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

    सुरक्षा बलों को मिलेगी तकनीकी बढ़त

    अबूझमाड़ और आसपास के इलाकों में पहले से स्थापित 728 मोबाइल टावर बीते कुछ वर्षों में सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी ताकत साबित हुए हैं। मोबाइल नेटवर्क के विस्तार से सुरक्षा बलों को रियल टाइम कम्युनिकेशन, लोकेशन ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस इनपुट साझा करने में मदद मिली है।अधिकारियों का कहना है कि अगस्त 2025 में रायपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद पड़ोसी राज्यों के साथ रियल टाइम सूचना साझा करने की प्रणाली लागू की गई थी। इसके बाद से माओवादियों की गतिविधियों पर नजर रखना और भी आसान हो गया है।

    माओवादियों पर कसा शिकंजा
    सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, माओवादी आमतौर पर मोबाइल फोन के इस्तेमाल से बचते हैं, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सकती है। इसके बावजूद, नेटवर्क विस्तार के बाद किसी भी असामान्य सिग्नल पैटर्न या संदिग्ध गतिविधि को समय रहते पकड़ा जा रहा है।इससे माओवादी संगठनों की मूवमेंट की जानकारी पहले ही मिल जाती है और सुरक्षा बल उन्हें अपने रडार पर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान
    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 513 मोबाइल टावरों को मिली मंजूरी का स्वागत करते हुए इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी समान प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह फैसला छत्तीसगढ़ को डिजिटल रूप से सशक्त, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

    दुर्गम इलाकों में भी बजेगी मोबाइल की घंटी
    इन नए 4G मोबाइल टावरों की स्थापना से अबूझमाड़ जैसे सुदूर और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों को पहली बार भरोसेमंद मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं मिल सकेंगी। इससे-ऑनलाइन शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होंगी रोजगार और स्किल डेवलपमेंट के नए अवसर मिलेंगे आपातकालीन संचार व्यवस्था मजबूत होगी विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल विस्तार वित्तीय समावेशन को भी गति देगा।

    बैंकिंग और सरकारी सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा
    मजबूत मोबाइल नेटवर्क के चलते ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में-बैंकिंग सेवाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) UPI और डिजिटल पेमेंट बीमा और पेंशन योजनाएं आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

    सुरक्षा और विकास की संयुक्त रणनीति
    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। सरकार गठन के बाद अब तक-
    69 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए इनके आसपास के 403 गांवों में 9 विभागों की 18 सामुदायिक सेवाएं 11 विभागों की 25 व्यक्तिमूलक योजनाएं पहुंचाई जा रही हैं यह पहली बार है जब इन दुर्गम इलाकों में सरकारी योजनाओं की सीधी पहुंच सुनिश्चित हुई है।

    साझा प्रयासों का प्रतिफल
    मुख्यमंत्री साय ने कहा कि मोबाइल टावरों की स्वीकृति माओवादी हिंसा उन्मूलन और क्षेत्रीय विकास के साझा प्रयासों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में स्थायित्व स्थापित हुआ है, वहां अब डिजिटल कनेक्टिविटी और विकास को तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है।