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  • जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'

    जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'


    जयपुर । जयपुर(Jaipur) में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल (Chemical)और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां(green vegetables) और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

    अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

    स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
    जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

    काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी
    मीडिया की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

    ‘कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं’
    जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है.

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

  • दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…


    नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।

    प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता

    राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसी
    GRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।

    स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण

    प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।

    निजी दफ्तरों को निर्देश:
    निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।

    परिवहन पर पाबंदियां:
    भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

    आगे की राह
    प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके।

  • छात्र-अभिभावकों को राहत दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल फीस पर कसा शिकंजा

    छात्र-अभिभावकों को राहत दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल फीस पर कसा शिकंजा


    नई दिल्ली।दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ोतरी पर कड़ा कदम उठाते हुए नया कानून लागू किया है। दिल्ली स्कूल शिक्षा शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता धिनियम-2025 और इसके संबंधित नियम अब पूरी तरह से लागू हो गए हैं। इस कानून के तहत अब कोई भी निजी स्कूल बिना सरकारी मंजूरी और निर्धारित प्रक्रिया के अपनी फीस नहीं बढ़ा सकेगा।

    शिक्षा मंत्री आशीष सूद का बयान

    दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस नए कानून की जानकारी दी और इसे 27 साल बाद आया एक ऐतिहासिक सुधार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी रही है लेकिन पहले की सरकारें इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई थीं। मौजूदा सरकार ने इस मुद्दे पर जल्दी और प्रभावी कदम उठाया है जिससे यह साफ हो गया कि सरकार अभिभावकों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।

    आशीष सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा कोई कारोबार नहीं बल्कि यह बच्चों का अधिकार है। अब स्कूलों द्वारा फीस वृद्धि की जांच और वित्तीय स्थिति की समीक्षा शिक्षा विभाग करेगा और बिना मंजूरी फीस बढ़ाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य

    नए कानून में अभिभावकों को भी बड़ी ताकत दी गई है। फीस बढ़ाने की प्रक्रिया में अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य कर दी गई है। अब सभी निजी स्कूलों को अपनी फीस संरचना आय-व्यय का विवरण और वित्तीय जरूरतें सार्वजनिक रूप से घोषित करनी होंगी। इसके अलावा एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई जाएगी जिससे अभिभावक सीधे अपनी बात रख सकेंगे और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।

    निजी स्कूलों पर विशेष निगरानी और कठोर कार्रवाई

    दिल्ली में लंबे समय से निजी स्कूल हर साल ट्यूशन फीस एडमिशन फीस और अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोतरी कर रहे थे। 2007 और 2012 में फीस नियंत्रण के प्रयास जरूर किए गए थे लेकिन कानूनी खामियों के कारण वे ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाए। अब 2025 का यह नया कानून उन कमियों को दूर करने का दावा करता है।

    सरकार ने कहा है कि आने वाले महीनों में सभी निजी स्कूलों की विशेष निगरानी की जाएगी और जो स्कूल नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि स्कूलों की फीस वृद्धि में पारदर्शिता हो और अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

    इस कानून से दिल्ली के लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के मामले में पारदर्शिता होगी अभिभावकों का सक्रिय रूप से इसमें योगदान रहेगा और शिक्षा व्यवस्था अधिक जवाबदेह ईमानदार और सुरक्षित बनेगी। यह कदम निश्चित तौर पर प्राइवेट स्कूलों में मनमानी फीस बढ़ोतरी की समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में अहम साबित होगा।

  • दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी लगाम सरकार ने लागू किया नया कानून

    दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर लगेगी लगाम सरकार ने लागू किया नया कानून


    नई दिल्ली ।दिल्ली में निजी स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि पर अब दिल्ली सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा शुल्क निर्धारण एवं विनियमन में पारदर्शिता अधिनियम-2025 और उससे जुड़े नियमों को पूरी तरह से लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत अब कोई भी निजी स्कूल अपनी फीस बढ़ाने से पहले सरकारी मंजूरी और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा।

    शिक्षा मंत्री का बयान

    दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस निर्णय की जानकारी दी और इसे 27 साल बाद आया एक ऐतिहासिक सुधार बताया। उन्होंने कहा कि कई दशकों से निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी अभिभावकों के लिए सबसे बड़ी समस्या रही थी। हालांकि पहले की सरकारें इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठा सकीं लेकिन वर्तमान सरकार ने यह कानून जल्दी लागू कर यह साबित कर दिया है कि वह अभिभावकों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है।

    शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा शिक्षा कोई कारोबार नहीं बल्कि बच्चों का अधिकार है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोई भी निजी स्कूल बिना ठोस कारण के और बिना मंजूरी के फीस न बढ़ा सके। अब शिक्षा विभाग स्कूलों द्वारा प्रस्तावित फीस वृद्धि की जांच करेगा उनकी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करेगा और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। अगर कोई स्कूल बिना मंजूरी के फीस बढ़ाता है तो उस पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    अभिभावकों की भागीदारी अनिवार्य

    इस नए कानून के तहत अभिभावकों की भागीदारी भी अनिवार्य कर दी गई है। अब फीस बढ़ाने की प्रक्रिया में अभिभावकों को शामिल किया जाएगा। हर निजी स्कूल को अपनी फीस संरचना आय-व्यय का विवरण और वित्तीय जरूरतें सार्वजनिक रूप से घोषित करनी होंगी। इसके अलावा एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली भी बनाई जाएगी जिससे अभिभावक सीधे अपनी शिकायतें और सुझाव दे सकेंगे।

    निजी स्कूलों की निगरानी

    पिछले कई सालों से दिल्ली में निजी स्कूल हर साल ट्यूशन फीस एडमिशन फीस और अन्य शुल्कों में भारी बढ़ोतरी कर रहे थे। इस पर 2007 और 2012 में कुछ प्रयास जरूर किए गए थे लेकिन कानूनी खामियों के कारण वे ज्यादा प्रभावी नहीं हो पाए। अब 2025 का यह नया कानून उन सभी खामियों को दूर करने का दावा करता है।

    सरकार ने कहा है कि आने वाले महीनों में सभी निजी स्कूलों की विशेष निगरानी की जाएगी। जो स्कूल नियमों का उल्लंघन करेंगे उनके खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि निजी स्कूलों की फीस बढ़ोतरी में पारदर्शिता बनी रहे और अभिभावकों के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

    दिल्ली सरकार के इस नए कानून से लाखों अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है। अब निजी स्कूल अपनी फीस बढ़ाने से पहले पूरी पारदर्शिता और सरकारी मंजूरी हासिल करेंगे। इस कदम से दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था और भी जवाबदेह ईमानदार और पारदर्शी बनेगी। यह कानून न केवल अभिभावकों के लिए राहत का कारण बनेगा बल्कि यह शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

  • कोलकाता में मेसी के दौरे का शर्मनाक अंत: सुरक्षा चूक के कारण 10 मिनट में मैदान छोड़ा, ममता ने मांगी माफी

    कोलकाता में मेसी के दौरे का शर्मनाक अंत: सुरक्षा चूक के कारण 10 मिनट में मैदान छोड़ा, ममता ने मांगी माफी


    कोलकाता । के साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को फुटबॉल की एक ऐतिहासिक घटना की बजाय एक शर्मनाक कुप्रबंधन का दृश्य सामने आया। वैश्विक फुटबॉल सुपरस्टार लियोनेल मेसी को देखने के लिए आए हजारों दर्शकों को गहरा झटका तब लगा जब सुरक्षा कारणों से उन्हें महज 10 मिनट में मैदान छोड़ना पड़ा। इस अप्रत्याशित घटना के कारण फुटबॉल प्रेमियों में गुस्से की लहर दौड़ गई, और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

    दर्शकों का गुस्सा और विरोध प्रदर्शन
    साल्ट लेक स्टेडियम, जिसे ‘भारतीय फुटबॉल का मक्का’ माना जाता है, पर यह घटना कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों के लिए सबसे बड़े झटके के रूप में आई। प्रीमियम टिकटों पर मोटी रकम खर्च कर स्टेडियम पहुंचे दर्शकों को जब मेसी का कार्यक्रम समय से पहले समाप्त होता दिखाई दिया, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। गुस्साए दर्शकों ने विरोध प्रदर्शन किया, बोतलें फेंकीं और आयोजकों के खिलाफ नारेबाजी की। कई होर्डिंग्स और कुर्सियों को नुकसान भी पहुँचाया गया।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा, “आज साल्ट लेक स्टेडियम में जो कुप्रबंधन देखने को मिला, उससे मैं अत्यधिक व्यथित हूं। मैं लियोनेल मेसी, सभी खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों से दिल से माफी मांगती हूं।”

    जांच कमेटी का गठन
    इस शर्मनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तत्काल एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया। कमेटी की अध्यक्षता कलकत्ता हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आशिम कुमार रे करेंगे। जांच का उद्देश्य घटना की पूरी जाँच करना, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाना है।

    राजनीतिक हलचल और भाजपा का हमला
    यह घटना न केवल खेल जगत बल्कि राज्य की राजनीति में भी भूचाल ला गई है। भाजपा ने इस मामले को ममता सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम बताया और राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से इस्तीफे की मांग की। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इस घटना को “बड़ा अपमान” और “मेजर स्कैम” करार दिया। उनका आरोप था कि 70 फुट की प्रतिमा का अनावरण राजनीतिक उद्देश्य से किया गया और दर्शकों को गुमराह किया गया।

    मेसी का दौरा अधूरा
    यह घटना लियोनेल मेसी के ‘गोट इंडिया टूर 2025’ का पहला पड़ाव था, जो अब अधूरा रह गया है। सुरक्षा चिंताओं के कारण मेसी ने अपना दौरा समय से पहले ही समाप्त कर दिया। कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम, जैसे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली से मुलाकात, अब अधूरे रह गए हैं। मेसी अब अपने अगले कार्यक्रम के लिए हैदराबाद के लिए रवाना हो गए हैं।

    साल्ट लेक स्टेडियम में हुआ कुप्रबंधन फुटबॉल के प्रति कोलकाता की दीवानगी और उसके ऐतिहासिक महत्त्व के लिए एक काला धब्बा बनकर उभरा है। यह घटना न केवल फुटबॉल प्रशंसकों के लिए निराशाजनक थी, बल्कि राज्य सरकार और आयोजकों के लिए भी एक बड़ा कड़ा सबक साबित हुई है।

  • केरल निकाय चुनाव: तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, LDF का चार दशकों पुराना किला ढहा

    केरल निकाय चुनाव: तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, LDF का चार दशकों पुराना किला ढहा


    नई दिल्ली। तिरुवनंतपुरम, जो न केवल केरल की प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक राजधानी भी मानी जाती है, ने राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखा है। बीजेपी ने स्थानीय निकाय चुनावों में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में जबरदस्त जीत दर्ज की, और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) से सत्ता छीन ली। यह वही नगर निगम है जिस पर LDF ने पिछले चार दशकों से भी अधिक समय तक अपनी पकड़ बनाए रखी थी। इस सत्ता परिवर्तन को वाम मोर्चे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

    तिरुवनंतपुरम की राजनीतिक अहमियत
    तिरुवनंतपुरम न सिर्फ केरल की प्रशासनिक राजधानी है, बल्कि यहां का राजनीतिक माहौल भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर लगातार चार बार सांसद चुने गए हैं। यह क्षेत्र लंबे समय से कांग्रेस और वाम मोर्चे के प्रभाव वाला रहा है। ऐसे में नगर निगम में बीजेपी की जीत ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया है।

    BJP की जीत: बदलाव के संकेत
    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जीत विधानसभा चुनावों में 2-3 सीटें जीतने से कहीं ज्यादा प्रभावशाली है। नगर निगम जैसे बड़े शहरी निकाय में बीजेपी की जीत यह संकेत देती है कि शहरी मतदाता पारंपरिक राजनीतिक ध्रुवीकरण से बाहर निकल कर नए विकल्प की तलाश में हैं। खासतौर पर, यह बदलाव उस राज्य में महत्वपूर्ण है, जहां चुनावी मुकाबला अब तक मुख्य रूप से LDF और UDF के बीच ही सीमित रहा है।

    स्थानीय चुनावी रुझान यह दर्शाते हैं कि शहरी इलाकों में LDF के खिलाफ नाराजगी और असंतोष बढ़ा है। प्रशासन, शहरी बुनियादी ढांचे, पारदर्शिता और स्थानीय मुद्दों को लेकर मतदाताओं का असंतोष इस चुनाव में खुलकर सामने आया। तिरुवनंतपुरम जैसे LDF के मजबूत गढ़ में हार ने वाम मोर्चे की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    BJP का उत्साह और भविष्य की उम्मीदें
    बीजेपी ने अपनी जीत को ऐतिहासिक और निर्णायक जनादेश बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह परिणाम केरल में बीजेपी के बढ़ते संगठनात्मक आधार और जनता के बदलते रुख का प्रमाण है। पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह है, और इसे केरल में बीजेपी के लिए भविष्य की राजनीति का मजबूत आधार माना जा रहा है।

    वहीं, LDF ने नतीजों को गंभीरता से लिया है और आत्ममंथन की बात कही है। वाम नेताओं का कहना है कि चुनाव परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई
    तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहर की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर उन्होंने लिखा, “Thank you Thiruvananthapuram!” पीएम मोदी ने इसे केरल की राजनीति में एक ‘वॉटरशेड मोमेंट’ करार देते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम नगर निगम में बीजेपी-एनडीए को मिले समर्थन से यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य के लोग मानते हैं कि केवल बीजेपी ही केरल की विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा कर सकती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी तिरुवनंतपुरम जैसे जीवंत शहर के विकास के लिए काम करेगी और आम लोगों के लिए ‘Ease of Living’ को और बेहतर बनाएगी।

    तिरुवनंतपुरम में बीजेपी की जीत ने न केवल राज्य की राजनीतिक स्थिति को हिलाया है, बल्कि एक नए राजनीतिक समीकरण की शुरुआत भी की है। इस ऐतिहासिक जीत ने केरल में बीजेपी के बढ़ते प्रभाव को उजागर किया है, और भविष्य में राज्य की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है।

  • दिल्ली में प्रदूषण का कहर: AQI 700 के पार, GRAP-3 लागू, आपातकाल जैसी स्थिति

    दिल्ली में प्रदूषण का कहर: AQI 700 के पार, GRAP-3 लागू, आपातकाल जैसी स्थिति


    नई दिल्ली। दिल्ली की हवा एक बार फिर ‘गंभीर’ से भी ऊपर पहुंच गई है, और इसके परिणामस्वरूप वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई इलाकों में 700 तक पहुंच चुका है। इस खतरनाक प्रदूषण को देखते हुए, प्रशासन ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज 3 को लागू कर दिया है, जिससे दिल्ली में आपातकाल जैसी स्थिति बन गई है।

    प्रदूषण की गंभीरता और GRAP-3 का इमरजेंसी ऐलर्ट
    दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुँच चुका है। वायु गुणवत्ता में अचानक आई इस गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 13 दिसंबर की सुबह से तत्काल प्रभाव से GRAP-3 लागू कर दिया। इस स्थिति में दिल्ली के कई क्षेत्रों में AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कुछ इलाकों में तो AQI 700 तक पहुंच चुका है, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक हानिकारक साबित हो सकता है।

    GRAP-3 के तहत कड़े प्रतिबंधों की शुरुआत
    GRAP-3 लागू होने के बाद, प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर सीधे और कड़ी रोक लगा दी गई है। इनमें शामिल हैं:

    निर्माण और विध्वंस पर रोक: गैर-आवश्यक निर्माण कार्यों और विध्वंस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। साथ ही, पत्थर तोड़ने की मशीनों और ईंट भट्टों को भी बंद कर दिया गया है।

    डीजल जेनरेटर पर प्रतिबंध: डीजल जेनरेटर के उपयोग पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है, सिवाय आवश्यक सेवाओं के।

    वाहनों और औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण: गैर-जरूरी वाहनों की संख्या कम करने और औद्योगिक उत्सर्जन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

    सशर्त छूट
    कुछ आवश्यक सेवाओं को इस कड़े प्रतिबंध से छूट दी गई है, जैसे कि मेट्रो, रेलवे, हवाई अड्डे, स्वास्थ्य और स्वच्छता सेवाएं। विकलांगों के लिए विशेष छूट प्राप्त वाहन और कक्षा 5 तक की हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके साथ ही, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा दिया गया है।

    किस प्रकार के क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हुए?
    दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि 21 प्रमुख निगरानी केंद्रों पर AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया। इनमें से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में वजीरपुर (AQI 445), विवेक विहार (AQI 444), जहाँगीरपुरी (AQI 442), आनंद विहार (AQI 439) और अशोक विहार तथा रोहिणी (AQI 437) शामिल हैं।

    प्रदूषण के प्रमुख कारण: मौसम का बदला मिजाज
    विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। सबसे प्रमुख कारण पश्चिमी राज्यों में पराली जलाने से उठने वाला धुआं है, जो हवा के माध्यम से दिल्ली-NCR में पहुँच रहा है। इसके अलावा, बढ़ती हुई गाड़ियों की संख्या और लगातार चल रहे निर्माण कार्य भी PM 2.5 और PM 10 कणों की मात्रा को बढ़ा रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, क्लाइमेट चेंज के कारण मौसम का पैटर्न बदल चुका है, जिससे प्रदूषकों का शहर में जमाव अधिक हो रहा है।

    आगे की चुनौती: स्वास्थ्य पर ध्यान और सख्त उपाय
    दिल्ली में प्रदूषण की बढ़ती समस्या अब प्रशासन और नागरिकों के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। अधिकारियों को सख्त प्रतिबंधों के साथ प्रदूषण पर काबू पाना है, ताकि आम जनजीवन और स्वास्थ्य को बचाया जा सके। प्रदूषण से बचने के लिए नागरिकों को घर के अंदर रहने, मास्क पहनने और बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

  • कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह

    कैप्टन अमरिंदर सिंह का बीजेपी और कांग्रेस पर 'दमदार' हमला, सिद्धू को दी क्रिकेट कमेंट्री की सलाह


    नई दिल्‍ली । पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपने बयानों से राजनीतिक हलचल मचा दी है। उन्होंने बीजेपी के कार्यशैली पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं से कोई सलाह नहीं ली जाती। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने का दर्द अभी भी ताजा है, इसलिए कांग्रेस में लौटने का सवाल ही नहीं उठता।

    बीजेपी पर हमला:
    कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीजेपी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में बड़े फैसले दिल्ली से होते हैं और जमीनी नेताओं की राय की कोई अहमियत नहीं है, हालांकि उनके पास 60 साल का राजनीतिक अनुभव है। इस बयान के साथ उन्होंने कांग्रेस में वापसी की संभावना को पूरी तरह से नकारा किया।

    प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ, सिद्धू पर प्रहार:
    हालांकि, अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जमकर तारीफ की और कहा कि मोदी जी का पंजाब के प्रति विशेष स्नेह है। वहीं, नवजोत कौर सिद्धू पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि सिद्धू को राजनीति छोड़कर क्रिकेट कमेंट्री पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अमरिंदर ने सिद्धू और उनकी पत्नी को ‘अस्थिर’ करार दिया।

    अकाली दल से गठबंधन की जरूरत पर जोर:
    पंजाब की राजनीतिक स्थिति पर बोलते हुए, अमरिंदर सिंह ने बीजेपी को मजबूत बनाने के लिए शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन करने की सलाह दी। उनका मानना था कि बिना गठबंधन के पंजाब में सरकार बनाना मुश्किल है।

    ‘आप’ सरकार पर तीखा हमला:
    आम आदमी पार्टी (AAP) पर भी अमरिंदर सिंह ने करारा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब अब सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और मुख्यमंत्री भगवंत मान केवल टीवी पर चुटकुले सुनाते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में असली फैसले दिल्ली से किए जा रहे हैं और मान केवल नाममात्र के मुख्यमंत्री हैं। इसके अलावा, अमरिंदर ने पंजाब को ‘भिखारी राज्य’ करार दिया, जो मुफ्त योजनाओं की वजह से बर्बाद हो गया है।

    बीजेपी-अकाली गठबंधन पर प्रतिक्रिया:
    अमरिंदर सिंह के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन के सुझाव पर बीजेपी नेताओं ने खारिज कर दिया और कहा कि पार्टी अकेले पंजाब में चुनाव लड़ेगी। हालांकि, अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने इस सुझाव का समर्थन किया और कहा कि बीजेपी पंजाब में अकेले सरकार नहीं बना सकती।

    AAP का पलटवार:
    आम आदमी पार्टी ने अमरिंदर सिंह के ‘भिखारी राज्य’ वाले आरोपों पर तीखा पलटवार किया। ‘आप’ के नेताओं ने अमरिंदर सिंह पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए और कहा कि उनकी सरकार के दौरान खनन और केबल माफिया फल-फूल रहे थे। ‘आप’ ने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ने पिछले भ्रष्ट शासन के खिलाफ खड़े होकर ‘आप’ को बहुमत दिया।

    कांग्रेस और ‘आप’ का तंज:
    कांग्रेस और ‘आप’ ने कैप्टन के बीजेपी और अकाली दल के गठबंधन सुझाव पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दल अकेले ही इतने कमजोर हैं कि उनका गठबंधन भी किसी असरदार बदलाव का कारण नहीं बनेगा।

    इस तरह, कैप्टन अमरिंदर सिंह के हमले और उनके सुझावों पर विभिन्न दलों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं। पंजाब की राजनीतिक स्थिति में यह बयान एक नई बहस का आगाज कर सकते हैं।

  • उत्तर भारत में ठंड का कहर: राजस्थान-MP के 37 शहरों में पारा 10° से नीचे, यूपी-बिहार में घना कोहरा, उत्तराखंड में झरने जमे

    उत्तर भारत में ठंड का कहर: राजस्थान-MP के 37 शहरों में पारा 10° से नीचे, यूपी-बिहार में घना कोहरा, उत्तराखंड में झरने जमे


    नई दिल्ली /उत्तर भारत इन दिनों कड़ाके की सर्दी और घने कोहरे की चपेट में है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के 37 शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे पहुंच गया है। यूपी-बिहार में विजिबिलिटी 10 मीटर तक सिमट गई है जबकि उत्तराखंड में माइनस तापमान के कारण झरने और नाले जम गए हैं।उत्तर भारत में ठंड का कहर: राजस्थान-MP के 37 शहरों में पारा 10° से नीचे यूपी-बिहार में घना कोहरा उत्तराखंड में झरने जमे राजस्थान में सर्दी के बीच पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है। इसके असर से बीकानेर चूरू श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ और जैसलमेर सहित कई जिलों में बादल छाए रहे। इससे पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाएं कमजोर पड़ीं और दिन के तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि रात की ठंड अभी भी बरकरार है। शुक्रवार को राज्य के 18 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू में पारा 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया जो इस सीजन के सबसे कम तापमान में से एक है। बीकानेर में दिन का अधिकतम तापमान बढ़कर 31 डिग्री तक पहुंच गया जिससे दिन में हल्की राहत जरूर मिली।

    मध्य प्रदेश: पचमढ़ी जितना ठंडा इंदौर

    मध्य प्रदेश में इस बार सर्दी रिकॉर्ड तोड़ साबित हो रही है। राज्य के 19 शहरों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया। औद्योगिक शहर इंदौर में शुक्रवार रात तापमान 5.2 डिग्री रहा जो पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है।हैरानी की बात यह रही कि यही तापमान प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन और सबसे ठंडी जगह माने जाने वाले पचमढ़ी में भी दर्ज हुआ। राजधानी भोपाल में पारा 7 डिग्री से नीचे बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों तक प्रदेश में शीतलहर की संभावना नहीं है लेकिन ठंड का असर बना रहेगा।

    उत्तर प्रदेश और बिहार: कोहरे ने रोकी रफ्तार
    उत्तर प्रदेश और बिहार में घना कोहरा सबसे बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया है। यूपी के लखनऊ गोरखपुर सहित करीब 30 जिलों में विजिबिलिटी 10 मीटर तक सिमट गई। शनिवार सुबह सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर कोहरे के कारण कई वाहन आपस में भिड़ गए जिसमें एक महिला घायल हो गई। बिहार में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। समस्तीपुर में तापमान 7.9 डिग्री तक गिर गया जो इस सीजन का सबसे कम बताया जा रहा है। बेगूसराय और बक्सर में जीरो विजिबिलिटी दर्ज की गई जहां सड़कों पर 100 मीटर दूर देखना भी मुश्किल हो गया। पटना समेत 8 शहरों में शनिवार सुबह घना कोहरा छाया रहा।

    उत्तराखंड: माइनस तापमान झरने और नाले जमे
    पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में सर्दी ने सबसे कठोर रूप ले लिया है। चमोली जिले की नीती घाटी में तापमान माइनस 10 डिग्री तक पहुंच गया जिससे नदी-नाले और झरने जम गए हैं। मौसम विभाग ने रविवार से उत्तरकाशी चमोली और पिथौरागढ़ में बारिश के साथ हल्की बर्फबारी की संभावना जताई है।बर्फबारी के बाद इन इलाकों में तापमान 2 से 3 डिग्री और गिर सकता है। वहीं हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति चंबा और कुल्लू जिलों में भी बर्फबारी के आसार बने हुए हैं।उत्तर भारत में सर्दी कोहरा और बर्फबारी ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम विभाग की चेतावनियों के बीच लोगों को सतर्क रहने अनावश्यक यात्रा से बचने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

  • रांची एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, हार्ड लैंडिंग के दौरान इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया, 56 यात्री सुरक्षित

    रांची एयरपोर्ट पर टला बड़ा विमान हादसा, हार्ड लैंडिंग के दौरान इंडिगो विमान का पिछला हिस्सा रनवे से टकराया, 56 यात्री सुरक्षित


    नई दिल्ली/रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात उस समय अफरातफरी मच गई, जब इंडिगो एयरलाइंस का एक विमान लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। भुवनेश्वर से रांची आ रहा इंडिगो का विमान संख्या 6ई-7361 हार्ड लैंडिंग के दौरान रनवे से टकरा गया, जिससे विमान का पिछला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि विमान में सवार सभी 56 यात्री सुरक्षित हैं।

    जानकारी के अनुसार, विमान ने भुवनेश्वर एयरपोर्ट से शाम 7:55 बजे उड़ान भरी थी और इसे रात 8:30 बजे रांची पहुंचना था। मौसम सामान्य था, लेकिन लैंडिंग के समय अचानक तकनीकी समस्या उत्पन्न हो गई। पायलट को मजबूरी में हार्ड लैंडिंग करानी पड़ी। इसी दौरान विमान का पिछला हिस्सा रनवे से रगड़ खा गया, जिससे जोरदार झटका महसूस हुआ। जैसे ही विमान रनवे से टकराया, यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्रियों ने बताया कि उन्हें ऐसा लगा जैसे विमान नियंत्रण से बाहर हो गया हो। हालांकि पायलट की सूझबूझ और अनुभव के चलते विमान को संतुलित किया गया और उसे सुरक्षित रूप से एप्रन पर रोक दिया गया।

    विमान के रुकते ही एयरपोर्ट प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। सभी यात्रियों को एक-एक कर सुरक्षित विमान से बाहर निकाला गया। कुछ यात्रियों को हल्की चोटें आईं, जिनका मौके पर प्राथमिक उपचार किया गया।किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है। हादसे के बाद एयरपोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए तनाव और भ्रम की स्थिति बनी रही। यात्रियों और उनके परिजनों में चिंता का माहौल था। बाद में एयरपोर्ट प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लिया और यात्रियों को आश्वस्त किया।

    इंडिगो एयरलाइंस के इंजीनियरों द्वारा विमान की तकनीकी जांच की गई। प्रारंभिक जांच में विमान को उड़ान के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विमान को ग्राउंडेड कर दिया गया, ताकि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके।इस घटना का असर रांची से भुवनेश्वर जाने वाली अगली इंडिगो उड़ान पर भी पड़ा। उस उड़ान को रद्द कर दिया गया, जिससे यात्रियों में नाराजगी देखी गई। यात्रियों का कहना था कि उन्हें देर रात तक एयरपोर्ट पर इंतजार कराया गया और एयरलाइंस की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

    पहले विमान को रात 9:40 बजे ग्राउंडेड घोषित किया गया। बाद में एयरलाइंस ने बताया कि 6 से 7 घंटे बाद वैकल्पिक विमान की व्यवस्था की जा सकती है, लेकिन समय पर दूसरा विमान उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बाद इंडिगो एयरलाइंस ने यात्रियों के लिए होटल में ठहरने और भोजन की व्यवस्था की। रांची से भुवनेश्वर जाने वाले 77 यात्रियों को रात में ही होटल में ठहराया गया। एयरपोर्ट प्रशासन और इंडिगो एयरलाइंस ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।