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  • SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: जानिए आपका नाम है या नहीं, ऑनलाइन-ऑफलाइन चेक करने का तरीका

    SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी: जानिए आपका नाम है या नहीं, ऑनलाइन-ऑफलाइन चेक करने का तरीका


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, गोवा, राजस्थान और लक्षद्वीप में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने की समयसीमा पूरी हो चुकी है। चुनाव आयोग 16 दिसंबर को इन राज्यों की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी करेगा। आयोग के मुताबिक, केवल पश्चिम बंगाल में करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हो सकते हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में SIR फॉर्म में गड़बड़ियां पाई गई हैं।

    जिन मतदाताओं के फॉर्म अधूरे हैं या जिनका सत्यापन नहीं हो पाया है, उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं किए जाएंगे। ऐसे मामलों में मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है, जहां पासपोर्ट, डोमिसाइल सर्टिफिकेट और जन्म प्रमाणपत्र जैसे चुनाव आयोग द्वारा मान्य 12 दस्तावेजों के आधार पर जांच के बाद नाम जोड़ा जाएगा।

    मतदाता ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम देख सकते हैं। ऑनलाइन जांच के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट eci.gov.in पर नाम या EPIC नंबर डालकर सर्च किया जा सकता है। वहीं ऑफलाइन जांच के लिए हर पोलिंग स्टेशन पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के पास ड्राफ्ट लिस्ट उपलब्ध होगी।

    अगर किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं है, तो वह दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है। चुनाव आयोग ने इसके लिए एक महीने का समय दिया है। दावों की जांच और जरूरत पड़ने पर सुनवाई के बाद फाइनल वोटर लिस्ट जारी की जाएगी।

  • यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी: सैलरी, भत्ते, पेंशन और सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी: सैलरी, भत्ते, पेंशन और सुविधाओं का पूरा लेखा-जोखा


    नई दिल्‍ली । केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री और महाराजगंज से सात बार के सांसद पंकज चौधरी अब उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्वप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाहके करीबी माने जाने वाले पंकज चौधरी का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय है।

    राजनीतिक सफर और प्रोफाइल
    ओबीसी वर्ग की कुर्मी जाति से आने वाले पंकज चौधरी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत पार्षद के रूप में की थी। इसके बाद वे गोरखपुर के डिप्टी मेयर बने और वर्ष 1991 में पहली बार लोकसभा पहुंचकर राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा। अब तक वे सात बार सांसद चुने जा चुके हैं और दो बार केंद्र सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी निभा चुके हैं।

    पंकज चौधरी की कुल संपत्ति करीब 41 करोड़ रुपये बताई जाती है। वे राहत रूह तेल कंपनी के मालिक हैं और उनकी शैक्षणिक योग्यता 12वीं तक है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष को सैलरी मिलती है या नहीं?
    सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं है। यह पूरी तरह पार्टी का संगठनात्मक पद होता है।
    इस कारण इस पद के लिए सरकार की ओर से कोई तय वेतन, पे-स्केल या सैलरी स्लिप नहीं मिलती।

    फिर कमाई कैसे होती है?
    हालांकि औपचारिक सैलरी नहीं होती, लेकिन भाजपा अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को मानदेय और प्रशासनिक सहयोग देती है।

    भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये मासिक मानदेय मिलने की चर्चा रही है।

    राज्य अध्यक्षों के लिए कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार यूपी बीजेपी अध्यक्ष को भी करीब 1 से 1.5 लाख रुपये प्रति माह मानदेय मिल सकता है।

    इसके अलावा पार्टी कार्यों के लिए अलग से भत्ते और खर्च की व्यवस्था होती है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष को मिलने वाली सुविधाएं
    सैलरी तय न होने के बावजूद सुविधाओं के मामले में यह पद बेहद प्रभावशाली माना जाता है।

    पूरी तरह फर्निश्ड ऑफिस

    पर्सनल सेक्रेटरी, राजनीतिक सलाहकार और सपोर्ट स्टाफ

    आधिकारिक यात्राओं का पूरा खर्च पार्टी वहन करती है

    हवाई, रेल और सड़क यात्रा की सुविधा

    ड्राइवर सहित वाहन, होटल और भोजन का खर्च

    फर्निश्ड आवास की सुविधा

    निजी स्टाफ की सैलरी भी पार्टी फंड से

    मेडिकल सुविधाएं या तो पार्टी के माध्यम से मिलती हैं या फिर उनके मौजूदा सरकारी पद के नियमों के तहत।

    सांसद और मंत्री के तौर पर अलग आय
    पंकज चौधरी फिलहाल लोकसभा सांसद और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं, इसलिए उन्हें इन पदों से मिलने वाली सैलरी और भत्ते अलग से मिलते रहेंगे।

    सांसद के रूप में:
    मासिक वेतन: 1,24,000 रुपये

    निर्वाचन क्षेत्र भत्ता: 87,000 रुपये

    कार्यालय खर्च: 75,000 रुपये

    दैनिक भत्ता: 2,500 रुपये

    दिल्ली में मुफ्त सरकारी आवास या 2 लाख रुपये HRA

    इसके अलावा:

    150 टेलीफोन कॉल

    50,000 यूनिट बिजली

    24,000 लीटर पानी

    34 हवाई यात्राएं

    एसी ट्रेन यात्रा की सुविधा

    मंत्री पद का लाभ:
    राज्य मंत्री के रूप में उन्हें लगभग 2.30 लाख रुपये प्रतिमाह का वेतन और भत्ता मिलता है।

    पेंशन का क्या नियम है?
    मंत्री पद छोड़ने पर अलग से कोई पेंशन नहीं मिलती

    पेंशन केवल सांसद या विधायक के रूप में किए गए कार्यकाल पर आधारित होती है

    पूर्व सांसदों को वर्तमान में 31,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो लंबे कार्यकाल के साथ बढ़ती जाती है

    पंकज चौधरी को भविष्य में पेंशन का लाभ उनके लंबे संसदीय अनुभव के आधार पर मिलेगा, न कि मंत्री या पार्टी अध्यक्ष पद के कारण।

    कुल मिलाकर, यूपी बीजेपी अध्यक्ष का पद वेतन से ज्यादा ताकत, प्रभाव और राजनीतिक जिम्मेदारी का होता है। पंकज चौधरी के लिए यह भूमिका न सिर्फ संगठनात्मक रूप से अहम है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की रणनीति में भी निर्णायक मानी जा रही है।

  • सूरत में अजीब मामला, श्मशान में अंतिम संस्कार से रोका, शव लेकर अस्पताल लौटे परिजन

    सूरत में अजीब मामला, श्मशान में अंतिम संस्कार से रोका, शव लेकर अस्पताल लौटे परिजन


    नई दिल्‍ली । गुजरात(Gujarat) के सूरत में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न सिर्फ आम लोगों को बल्कि अस्पताल प्रशासन (Administration)और श्मशान घाट कर्मचारियों को भी हैरानी में डाल दिया. दरअसल एक महिला की मौत के बाद उसका शव अंतिम संस्कार के लिए श्मशान(crematorium) घाट ले जाया गया, लेकिन वहां से बिना दाह-संस्कार के ही शव को दोबारा अस्पताल वापस लाना पड़ा.

    अर्थी पर शव लेकर फिर अस्पताल पहुंचे परिजन
    मामला सूरत के पांडेसरा इलाके के शिव नगर में रहने वाली 57 साल की सुनीता देवी बृजनंदन तांती से जुड़ा है. परिजनों के अनुसार, सुनीता देवी लंबे समय से बीमार थीं और उन्हें पैरालिसिस की समस्या थी. 13 दिसंबर की सुबह करीब 10 बजे उन्होंने अपने घर में अंतिम सांस ली. मौत के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए उमरा श्मशान घाट लेकर पहुंचे.

    श्मशान घाट पहुंचने पर वहां के संचालकों ने मृतक महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे. परिजनों के पास ये कागजात मौजूद नहीं थे, जिसके कारण श्मशान घाट प्रशासन और परिजनों के बीच विवाद हो गया. नियमों के अनुसार कागजात के अभाव में अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया गया.

    मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना अस्पताल पहुंचे थे परिजन
    मामला बढ़ने पर पुलिस को भी सूचना दी गई. पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाया कि मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना अंतिम संस्कार संभव नहीं है. इसके बाद प्रशासन की सलाह पर परिजन शव को सूरत के न्यू सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां महिला की मौत हुई थी.

    न्यू सिविल अस्पताल में अर्थी के रूप में सजे शव को स्ट्रेचर पर लाया गया. शव पर अंतिम संस्कार के वस्त्र और फूल माला देख अस्पताल का स्टाफ, डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी भी चौंक गए. अस्पताल के इतिहास में यह शायद पहला मामला था जब शव श्मशान घाट से वापस जांच के लिए अस्पताल लाया गया.

    शव की दोबारा जांच
    अस्पताल में महिला डॉक्टर ने शव की दोबारा जांच की और औपचारिक रूप से मृत घोषित किया. इसके बाद मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात तैयार किए गए. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 8 से 10 घंटे का समय लग गया.

    दस्तावेज मिलने के बाद परिजन शव को फिर से उमरा श्मशान घाट लेकर पहुंचे, जहां विधिवत अंतिम संस्कार किया गया.. मृतका के पड़ोसी आनंद कुमार जायसवाल ने बताया कि नियमों और कागजी प्रक्रिया की जानकारी न होने के कारण यह स्थिति बनी.

  • स्मार्ट मीटर बैलेंस नेगेटिव रहने पर कटेगा बिजली कनेक्शन, फिर से चालू करने के लिए करना होगा ये काम

    स्मार्ट मीटर बैलेंस नेगेटिव रहने पर कटेगा बिजली कनेक्शन, फिर से चालू करने के लिए करना होगा ये काम


    रांची। स्मार्ट मीटर(Smart meter) का बैलेंस पाजिटिव(Balance is positive.) नहीं रहने पर बिजली कनेक्शन अब स्वतः कट रहा है। जिन उपभोक्ताओं (Consumers)का बिजली बिल बकाया है और स्मार्ट मीटर में बैलेंस नेगेटिव है, उनका कनेक्शन हर दिन ऑटोमैटिक डिस्कनेक्ट किया जा रहा है।

    शनिवार को रांची अंचल के विभिन्न आपूर्ति प्रमंडलों में बड़ी संख्या में बकायेदार उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे गए। रांची केंद्रीय आपूर्ति प्रमंडल में 1165, कोकर में 1331, डोरंडा में 853, रांची पश्चिमी में 921, रांची पूर्वी में 613 और न्यू कैपिटल क्षेत्र में 812 उपभोक्ताओं के कनेक्शन ऑटोमैटिक रूप से डिस्कनेक्ट किए गए।

    इनमें कई व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, जिनका स्मार्ट मीटर बैलेंस नेगेटिव पाया गया। बिजली विभाग के अनुसार, कनेक्शन डिस्कनेक्ट होने के बाद जैसे ही उपभोक्ता अपने पूरे बकाया बिजली बिल का भुगतान करते हैं, उनका कनेक्शन स्वतः चालू हो जाता है।

    किश्त में भी कर सकते हैं भुगतान
    जिन उपभोक्ताओं पर अधिक राशि बकाया है और वे एकमुश्त भुगतान करने में असमर्थ हैं, वे अपने क्षेत्र के विद्युत कार्यपालक अभियंता से संपर्क कर किश्त में भुगतान की सुविधा ले सकते हैं।

    उपभोक्ता अपने बकाया बिजली बिल का भुगतान एटीपी काउंटर या ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में कनेक्शन कटने के कारण एटीपी काउंटरों पर बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं की भीड़ बढ़ रही है।

    विभाग ने की अपील
    विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे भीड़ और लाइन से बचने के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान का उपयोग करें।

    विद्युत आपूर्ति क्षेत्र रांची के महाप्रबंधक मनमोहन कुमार ने सभी बकायेदार उपभोक्ताओं से अपील करते हुए कहा है कि स्मार्ट मीटर के माध्यम से अब रोजाना बकायेदारों का कनेक्शन ऑटोमैटिक डिस्कनेक्ट हो रहा है। इसलिए जिन उपभोक्ताओं का बिजली बिल बकाया है, वे शीघ्र भुगतान कर अपने स्मार्ट मीटर का बैलेंस नेगेटिव से पॉजिटिव कर लें।

    बैलेंस नेगेटिव रहने की स्थिति में कनेक्शन स्वतः कट जाएगा और बकाया राशि जमा करने के बाद ही दोबारा चालू होगा। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता कनेक्शन कटने का इंतजार न करें और समय रहते अपना बिजली बिल जमा कर दें।

    बिजली विभाग ने यह भी बताया है कि जिन उपभोक्ताओं को बिजली बिल से संबंधित जानकारी नहीं मिल पा रही है, वे अपने बिजली कनेक्शन में मोबाइल नंबर अपडेट कराएं। अब उपभोक्ताओं को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप के माध्यम से बिजली बिल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए हर उपभोक्ता के कनेक्शन में मोबाइल नंबर का अपडेट होना अनिवार्य है।

    मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए इन नंबरों पर करें संपर्क
    रांची केंद्रीय – 9508021323
    कोकर – 6201382424
    न्यू कैपिटल – 7970802909
    रांची पश्चिमी – 9341218831
    रांची पूर्वी – 9279943544
    डोरंडा – 8987716413

  • पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?

    पत्थर और धनुष-बाण से बेकाबू भीड़ ने गुजरात में 47 अधिकारियों पर किया हमला, जानिए क्या है मामला?


    नई दिल्‍ली । कभी-कभी ऐसे मामले सामने आते हैं जो लोगों के होश उड़ा देते हैं. गुजरात (Gujarat)के बनासकांठा (Banaskantha)जिले के पडालिया गांव(Padalia village) से भी ऐसा ही मामला सामने आया है. यहां पर दोपहर करीब 500 लोगों की भीड़ ने पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट(Revenue Department) के कम से कम 47 अधिकारियों पर हमला कर दिया. इसमें करीब 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. जानिए आखिर भीड़ कैसे उग्र हो गई?

    क्या है मामला
    मामले को लेकर बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने बताया कि यह घटना तब हुई जब पुलिस, फॉरेस्ट और रेवेन्यू अधिकारियों की एक जॉइंट टीम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के सर्वे नंबर 9 एरिया में नर्सरी और प्लांटेशन का काम कर रही थी. उन्होंने बताया कि अचानक करीब 500 लोगों की भीड़ ने उन पर हमला कर दिया, पत्थर फेंके और तीर-कमान का इस्तेमाल किया. इस हमले की वजह से कई अधिकारी घायल हो गए हैं हालांकि उनकी हालत स्थिर है.

    घायल हुए 36 अधिकारियों को अंबाजी सिविल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जबकि 11 को आगे के इलाज के लिए पालनपुर सिविल हॉस्पिटल रेफर किया गया, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि हमला किस वजह से हुआ. यह जगह दांता तालुका में है, जो अंबाजी तीर्थस्थल से 14 km दूर है. इस वारदात के बाद लोगों में अफरा-तफरी का माहौल है.

  • CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?

    CAA से बाबरी तक, बंगाल में ध्रुवीकरण का सियासी खेल; इस चुनौती से कैसे निपटेगी TMC?


    नई दिल्‍ली । सीएए से लेकर एनआरसी और एसआईआर से लेकर बाबरी तक पूरे पश्चिम बंगाल(West Bengal) का सियासी पारा हाई है. हिंदू-मुस्लिम (Hindu-Muslim)और बंगाली बनाम बाहरी(Bengalis versus outsiders) जैसे समीकरणों से इतर मुर्शिदाबाद जिले से निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)के बाबरी प्लान ने बंगाल के चुनावी समर को दिलचस्प मोड़ पर पहुंचा दिया है. इसी आधार पर दावा किया जा रहा है कि 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर होगी. 2019 में बीजेपी का मिशन बंगाल अधूरा रह गया था, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) हर हाल में सत्ता हासिल करना चाहती है.

    सीएए-एनआरसी और एसआईआर तक मुद्दे कई हैं…
    बीजेपी 10 सालों से आक्रामक होकर ममता बनर्जी को घेर रही है. एंटी इनकमबेंसी से इतर वो टीएमसी पर सनातन और हिंदुओं की अपेक्षा करने का आरोप लगाती आई है. ऐसे कुछ सवालों का जवाब ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी रणनीति से दे चुकी हैं. बंगाल में मुसलमानों पर करम और हिंदुओं पर सितम करने जैसे आरोपों से जूझ रही टीएमसी सुप्रीमों ने ऐसे आरोप खारिज करने के लिए दुर्गा माता के मंत्र पढ़कर सुना चुकी हैं.

    सीएए, एनआरसी और बेटियों के बलात्कार और हत्या जैसे अपराधों यानी लॉ एंड ऑर्डर के मुद्दे पर भी बीजेपी टीएमसी को घेर रही है. कुल मिलाकर लाख टके का सवाल ये है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस नए ध्रुवीकरण वाले मुद्दे से कैसे निपटेंगी. बंगाल में 30 फीसदी मुस्लिम मतदाता हैं जो वामदलों की सफाए के बाद से टीएमसी को वोट करते आए हैं.

    टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर अलग पार्टी बनाने का ऐलान कर चुके हैं. हुमायूं ओवीसी की पार्टी एआईएमआईएम और अन्य दलों संग अलायंस करके चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. ताकि बंगाल में किंग मेकर की भूमिका में आ सकें.

    पुराना कार्ड चलेगा?
    ध्रुवीकरण की कथित खेल को ध्यान में रखते हुए बीजेपी इस बार हर हाल में बंगाल में भगवा लहराना चाहती है. ये मुद्दा किसे फायदा करेगा और किसे बैकफायर करेगा इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है. ममता बनर्जी और TMC हुमायूं कबीर को BJP की बी पार्टी बताकर काउंटर कर सकती हैं. वो पहले भी दावा करती रही हैं कि बीजेपी असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमान वोटों का बंटवारा करने के लिए खड़ा करती है. ऐसे में चुनावी तारीखों का ऐलान होने से पहले ममता बनर्जी जनता से अपील कर रही हैं कि BJP को सत्ता से दूर रखने के लिए लोग केवल और केवल टीएमसी को चुने.

    SIR, पहचान की राजनीति और ‘बंगाली अस्मिता’
    TMC ध्रुवीकरण वाली चुनौती का सामना ‘बंगाली अस्मिता’ के कार्ड से कर सकती है. ये ‘ट्रंप’ कार्ड ‘दीदी’ का आजमाया हुआ नुस्खा है. 2019 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने बड़े प्रभावी ढंग से इसका इस्तेमाल किया. बंगाली बनाम बाहरी का मुद्दा उठाकर अपना किला बचा चुकीं ममता बनर्जी अब शाकाहार और मांसाहार की जंग के सहारे नया नैरेटिव देने की कोशिश कर रही हैं.

    कुछ समय पहले भगवद्गीता पाठ के आयोजन स्थल के पास नॉनवेज बेचने पर एक शख्स के साथ मारपीट हुई थी. तब नैरेटिव गढ़ा गया कि बीजेपी देश को शाकाहार की ओर धकेल रही है, जो बहुलतावाद और बंगाल की पहचान के खिलाफ है. सूत्रों के मुताबिक एसआईआर और अन्य मुद्दों से मुस्लिम समुदाय में नाराजगी बढ़ी है, जिससे उनके वोट टीएमसी के पक्ष में लामबंद हो सकते हैं. ऐसी खबरों के बीच सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा इसे लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगा.

  • कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात

    कर्नाटक में CM पद की खींचतान जारी, सिद्धारमैया और शिवकुमार दिल्ली में हाई कमान से करेंगे मुलाकात


    नई दिल्‍ली । कर्नाटक(Karnataka) में मुख्यमंत्री पद को लेकर मची खींचतान थमने का नाम नहीं ले रही है। हाई कमान के निर्देश पर मुख्यमंत्री के घर हुए दोनों नेताओं के नाश्ते के बाद ऐसा दावा किया जा रहा था कि अब सब ठीक है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से दोनों पक्षों की तरफ से की जा रही बयान बाजी के बाद यह साफ है कि कुछ ठीक नहीं है। हिन्दुस्तान (Hindustan)टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इसी खींचतान को लेकर अब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(Siddaramaiah) और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार(DK Shivakumar) 14 दिसंबर को नई दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर सकते हैं।

    कांग्रेस के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों के मुताबिक दिल्ली में इन दोनों नेताओं की बैठक सोनिया गांधी, राहुल गांधी या फिर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में से किसी एक से हो सकती है। पार्टी के करीबी सूत्र के मुताबिक इस बैठक के लिए समय बहुत कम है लेकिन अगर यह मुलाकात होती है, तो यह कर्नाटक के आगामी हालात के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी।

    कर्नाटक में कांग्रेस प्रभारी रणदीप सुरजेवाला ने एचटी से कहा, “सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। यदि वे हमारे किसी भी शीर्ष नेता से मिलना चाहते हैं, तो वह हमेशा ऐसा कर सकते हैं।” सूत्रों के मुताबिक कर्नाटक के नेताओं की कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से यह मुलाकात नई दिल्ली के ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ अभियान के तहत रामलीला मैदान में होने वाली रैली के बाद होगी।

    गौरतलब है कि कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व से दोनों नेताओं की मुलाकात की खबर ऐसे समय में सामने आई है, जब दोनों खेमों के बीच में पिछले कई दिनों से खींचतान मची हुई है। 2023 से सत्ता में आने के बाद से दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर तंज कसते रहे हैं। लेकिन 20 नवंबर को सरकार के ढाई साल पूरे होने पर इन हमलों की तीव्रता बढ़ गई। शिवकुमार समर्थकों का कहना है कि जीत के बाद सरकार के आधे पड़ाव पर सत्ता हस्तांतरण की बात हुई थी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका।

  • जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया

    जेल में सुरंग खोदने की विफल कोशिश पर मसूद अजहर ने खुद खोली पोल, बताया कैसे पीटा गया


    नई दिल्‍ली । पाकिस्तान(Pakistan) स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के सरगना मसूद अजहर ने 1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir)की जेल से भागने की अपनी कोशिश की विफलता पर पछतावा व्यक्त किया है। एक ऑडियो क्लिप में संभवतः पाकिस्तान में हुए एक कार्यक्रम में उसे जेल से सुरंग खोदकर भागने की अपनी असफल कोशिश का विवरण देते हुए सुना गया है। उसकी आवाज लाउडस्पीकर(Loudspeaker) में गूंज रही थी, जिससे संकेत मिलता है कि यह कार्यक्रम एक खुले क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

    खुफिया सूत्रों ने भारत के सबसे वांटेड आतंकवादी की इस ऑडियो क्लिप को प्रामाणिक बताया है। मसूद अजहर 2001 में संसद, 2008 में मुंबई और कई अन्य हमलों का मास्टरमाइंड है।

    ऑडियो में मसूद अजहर को यह याद करते हुए टूटते हुए सुना गया कि जम्मू-कश्मीर की कोट भलवाल जेल से सुरंग खोदकर भागने की उसकी योजना कैसे विफल हो गई। यह जेल जम्मू क्षेत्र में एक उच्च सुरक्षा वाली सुविधा है जो भारत द्वारा पकड़े गए कुछ सबसे वांटेड आतंकवादियों को रखने के लिए जानी जाती है।

    जैश सरगना ने ऑडियो क्लिप में बताया कि वह कोट भलवाल में कुछ उपकरणों का इस्तेमाल करके काफी समय से सुरंग खोद रहा था। जिस दिन उसने सुरंग के रास्ते भागने की योजना बनाई थी, उसी दिन जेल अधिकारियों ने उसकी इस गतिविधि का पता लगा लिया।

    मसूद अजहर ने कहा कि आज भी वह उन जेल अधिकारियों से डरता है, जिन्होंने भागने की योजना बनाने के लिए उसे और अन्य आतंकवादियों को पीटा था। उसने रोते हुए कहा, “भागने की मेरी योजना के आखिरी दिन उन्हें सुरंग के बारे में पता चल गया था।”

    भागने की नाकाम कोशिश के बाद जेल उसके और कुछ अन्य कैदियों के लिए एक कठिन जगह बन गई, क्योंकि नियमों को सख्ती से लागू किया गया, जिसमें उल्लंघन के लिए शारीरिक दंड भी शामिल था। मसूद अजहर को यह कहते हुए सुना गया कि उसे जंजीरों से बांधा गया था, और नियमित गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए थे।

    आतंकवादी द्वारा अपनी विफलता को स्वीकार करना एक बार फिर यह साबित करता है कि पाकिस्तान आतंकवाद को भारत को परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है।

    मसूद अजहर फरवरी 1994 में एक नकली पहचान और पुर्तगाली पासपोर्ट के साथ भारत आया था। उसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जिहाद फैलाना और आतंकवादियों की भर्ती करना था। उसी साल उसे अनंतनाग में गिरफ्तार कर लिया गया था। वह 1994 से 1999 तक जेल में रहा। हालांकि, दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 के अपहरण के बाद, भारत सरकार ने बंधकों के बदले में मसूद अजहर को रिहा कर दिया था। इसके बाद उसने आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की और तब से वह भारत में कई आतंकवादी हमलों से जुड़ा रहा है।

    मसूद अजहर ने यह भी बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर भारत के क्रूज मिसाइल हमलों में उसके परिवार के कम से कम 10 सदस्य और चार करीबी सहयोगी मारे गए थे। यह हमला जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जैश आतंकवादियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या के जवाब में किया गया था।

  • जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'

    जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'


    जयपुर । जयपुर(Jaipur) में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल (Chemical)और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां(green vegetables) और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

    अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

    स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
    जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

    काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी
    मीडिया की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

    ‘कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं’
    जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है.

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.

  • दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…

    दिल्ली-NCR में GRAP-4 लागू, प्रदूषण संकट के बीच स्कूल हाइब्रिड मोड पर शिफ्ट…


    नई दिल्ली/ दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र NCR में वायु गुणवत्ता AQI का स्तर एक बार फिर ‘बेहद खराब’ Severe श्रेणी में पहुंचने के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत कार्यरत वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग CAQM ने तत्काल प्रभाव से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान GRAP के सबसे सख्त चरण, यानी चरण 4 GRAP-4 को लागू करने का आदेश दिया है।

    प्रदूषण की स्थिति और GRAP-4 की आवश्यकता

    राजधानी दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक AQI 450 के आंकड़े को पार कर गया है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है, बल्कि इसे एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल के करीब माना जाता है। इस भयावह स्थिति से निपटने और प्रदूषण के खतरनाक स्रोतों पर तत्काल नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से प्रशासन ने ये कड़े कदम उठाए हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक वायुमंडलीय स्थिरता और हवा की कम गति के कारण प्रदूषण के स्तर में किसी बड़े सुधार की संभावना कम है, जिसने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    शिक्षा पर तत्काल प्रभाव: हाइब्रिड मोड की वापसी
    GRAP-4 के लागू होते ही, दिल्ली शिक्षा निदेशालय DoE ने छात्रों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए स्कूलों के लिए विस्तृत और सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। इन दिशानिर्देशों का मुख्य फोकस कक्षा 9वीं से लेकर 11वीं तक के छात्रों की शिक्षा पद्धति में परिवर्तन लाना है:हाइब्रिड मोड: कक्षा 9वीं, 10वीं और 11वीं के छात्रों के लिए पढ़ाई अब हाइब्रिड मोड में आयोजित की जाएगी। इसका अर्थ है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित होगी।

    स्कूलों पर लागू: यह नई व्यवस्था दिल्ली के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त Aided और निजी Private स्कूलों पर समान रूप से लागू होगी। स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो छात्र ऑनलाइन क्लास का विकल्प चुनते हैं, उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो। अन्य कक्षाएं: हालांकि, आदेश में 12वीं कक्षा के छात्रों और छोटी कक्षाओं 8वीं तक के लिए स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं, लेकिन यह संकेत है कि सबसे अधिक संवेदनशील आयु वर्ग को घर से पढ़ने का विकल्प दिया जा रहा है। यह कदम छात्रों को अत्यधिक प्रदूषित वातावरण में बाहर निकलने और स्कूल आने-जाने से रोकने के लिए उठाया गया है।

    कार्यालयों और परिवहन पर सख्त नियंत्रण

    प्रदूषण के स्रोतों को कम करने के लिए कार्यस्थलों और परिवहन क्षेत्र पर भी महत्वपूर्ण पाबंदियां लगाई गई हैं:सरकारी कार्यालयों में उपस्थिति पर सीमा:कर्मचारी सीमा: सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित कर दिया गया है। केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही भौतिक रूप से कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वर्क फ्रॉम होम: शेष 50 प्रतिशत कर्मचारी ‘वर्क फ्रॉम होम’ WFH मोड पर कार्य करेंगे। इस व्यवस्था का लक्ष्य सड़क पर वाहनों की संख्या को कम करना है।

    निजी दफ्तरों को निर्देश:
    निजी दफ्तरों और प्रतिष्ठानों को भी सक्रिय रूप से फ्लेक्सिबल टाइमिंग Flexible Timings अपनाने और कर्मचारियों को अधिकतम संभव सीमा तक घर से काम Work From Home करने के लिए प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया गया है। यह व्यवस्था भीड़भाड़ वाले समय में वाहनों के आवागमन को कम करने में सहायक होगी।

    परिवहन पर पाबंदियां:
    भारी वाहनों पर रोक: दिल्ली की सीमा में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों और अन्य भारी/मध्यम मालवाहक वाहनों आवश्यक सेवाओं को छोड़कर के प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। यह कदम भारी वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पर पाबंदी: GRAP-4 के तहत पहले से ही गैर-आवश्यक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

    आगे की राह
    प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए ये कदम अल्पकालिक राहत प्रदान करने के उद्देश्य से हैं। दिल्ली-NCR के नागरिकों को भी दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अत्यंत आवश्यक न होने पर घर से बाहर न निकलें और N-95 जैसे मास्क का उपयोग करें। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि वे निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करें और सार्वजनिक परिवहन, साइकिलिंग या पैदल चलने को प्राथमिकता दें, ताकि इस राष्ट्रीय संकट से मिलकर लड़ा जा सके।