Category: National

  • UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

    UP Politics: पल्लवी पटेल के साथ अलायंस फेल, अब बसपा का मिलेगा साथ! यूपी में क्या होगी ओवैसी की पॉलिटिक्स?

    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम का वक्त बचा है. इस बीच राज्य में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अपनी-अपनी रणनीतियां बनाने में जुट गए हैं. सपा और कांग्रेस जहां भारतीय राष्ट्रीय समावेशी विकास गठबंधन यानी इंडिया अलायंस के परचम तले चुनाव लड़ सकते हैं तो वहीं बीजेपी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) और निर्बल भारतीय शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के साथ मैदान में उतरेगी. उधर, बसपा अभी भी अकेले ही मैदान में उतरने का मूड बना रही है.

    इन सबके बीच हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) भी यूपी चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतरने की तैयारी कर रही है. अगर पार्टी चुनाव में उतरती है तो यह उसका चौथा चुनाव होगा.

    वर्ष 2017, 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद एआईएमआईएम ने कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मोर्चा बनाया था. यह मोर्चा सपा चीफ के पीडीए फॉर्मूले के मुकाबले के तौर पर पीडीएम बनाया गया था. जिसमें पिछड़ा, दलित मुसलमान की बात की गई थी. इस मोर्चे ने 25 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे. हालांकि इसमें AIMIM का एक भी प्रत्याशी नहीं था.

    अब 2027 के चुनाव के लिए दावा है कि एआईएमआईएम, बसपा के साथ अलायंस कर सकती है. ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि राज्य में गठबंधन करने के लिए आतुर AIMIM का इस संदर्भ में पुराना इतिहास क्या रहा है? इसके साथ ही यह भी बात हो रही है कि जो एआईएमआईएम, बसपा के हाथी की सवारी कर राज्य में एंट्री की कोशिश में उसकी क्या स्थिति है?

    बता दें AIMIM ने वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा का चुनाव 38 सीटों पर लड़ा था. 37 सीटों पर पार्टी की जमानत जब्त हो गई थी.इस चुनाव में AIMIM को 2,04,142 वोट मिले थे. AIMIM ने जिन सीटों पर चुनाव लड़ा था, वो मुख्यतौर पर पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम बहुल सीटें थीं. उधर, 2022 में एआईएमआईएम ने 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उसे सिर्फ .49% वोट मिले थे.

    2024 के चुनाव कितना कारगर रहा ओवैसी का अलायंस?

    2024 चुनाव में पीडीएम मोर्चा बनाने वाली एआईएमआईएम ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा लेकिन उसके साथ का फायदा अन्य दल को भी नहीं मिला. इस चुनाव में अपना दल कमेरावादी की नेता पल्लवी पटेल ने प्रत्याशी उतारे और उन्हें कुल मतदान में से सिर्फ .4 फीसदी वोट मिले और नतीजा सिफर रहा. ऐसे में यह स्पष्ट है कि एआईएमआईएम के साथ का लाभ अपना दल कमेरावादी को नहीं हुआ.

    बसपा के साथ कितना फिट होंगे ओवैसी?
    वहीं बसपा की बात करें तो लोकसभा चुनाव में उसे कुल वोट का 9.46 फीसदी मत मिले थे. हालांकि लोकसभा में उसका खाता नहीं खुला था. विधानसभा में भी बसपा का सिर्फ 1 ही विधायक है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर एआईएमआईएम और बसपा साथ आते भी हैं तब भी किसी बड़े जादू की उम्मीद फिलहाल नहीं है.

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यूपी में एआईएमआईएम की आगामी रणनीति क्या होगी और वह धरातल पर कितनी मजबूती के साथ उतरेगी.

  • दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक महीने के लिए कैंपस में प्रोटेस्ट पर लगाया बैन, लॉ एंड ऑर्डर की चिंता बताई वजह

    दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एक महीने के लिए कैंपस में प्रोटेस्ट पर लगाया बैन, लॉ एंड ऑर्डर की चिंता बताई वजह

    नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी से एक बड़ी खबर सामने आई है। DU ने लॉ एंड ऑर्डर की चिंता का हवाला देते हुए एक महीने के लिए कैंपस में प्रोटेस्ट पर बैन लगा दिया है। एक माह के लिए यूनिवर्सिटी ने कैंपस में किसी भी तरह की पब्लिक मीटिंग, जुलूस, प्रदर्शन और विरोध पर रोक लगाई है। इस संबंध में एक ऑर्डर जारी किया गया है। 17 फरवरी के एक ऑर्डर में, DU के प्रॉक्टर ऑफिस ने कहा कि यह रोक इस इनपुट के बाद लगाई गई है कि “बिना रोक-टोक के पब्लिक गैदरिंग” से हालात बिगड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    जारी किए गए आदेश में सिविल लाइंस के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर के पहले के एक निर्देश का भी जिक्र किया गया है, जिसमें पब्लिक मीटिंग, टॉर्च या ऐसी ही कोई चीज ले जाने, नारे लगाने और ऐसे भाषण देने पर रोक लगाई गई थी, जिनसे पब्लिक शांति या ट्रैफिक फ्लो पर असर पड़ सकता है।

    DU के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने क्या कहा
    DU के प्रॉक्टर मनोज कुमार ने अपने एक बयान में कहा कि पहले, ऑर्गनाइज़र अक्सर ऐसे प्रोटेस्ट को कंट्रोल करने में नाकाम रहे जो बढ़ते गए और बड़े पैमाने पर फैल गए, जिससे यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर लॉ एंड ऑर्डर बिगड़ गया।

    आदेश में लिखा है, “पांच या उससे अधिक लोगों का इकट्ठा होना, नारे लगाना और भाषण देना, मशाल, बीकन/टॉर्च वगैरह जैसी कोई भी खतरनाक चीज ले जाना मना है।” इसमें आगे यह भी कहा गया है, “यह बैन तुरंत लागू होगा और एक महीने तक लागू रहेगा, अगर इसे पहले नहीं हटाया जाता है।”

    इसलिए आया ऑर्डर
    बता दें कि यह आदेश हाल के विवादों के बाद आया है, जहां पिछले वीक एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दो स्टूडेंट ग्रुप के बीच हाथापाई के बाद दिल्ली पुलिस ने दो FIR दर्ज की थीं। 12 फरवरी को, हिस्टोरियन इरफान हबीब पर एक बाल्टी पानी फेंका गया था, जब वह एक सोशल जस्टिस प्रोग्राम में बोल रहे थे। (इनपुट- पीटीआई)

  • इलैयाराजा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सारेगामा के कॉपीराइट दावे पर लगी अंतरिम रोक

    इलैयाराजा को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, सारेगामा के कॉपीराइट दावे पर लगी अंतरिम रोक


    नई दिल्ली । दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा को दिल्ली उच्च न्यायालय से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने म्यूजिक कंपनी सारेगामा इंडिया लिमिटेड के पक्ष में एकतरफा अंतरिम आदेश पारित करते हुए इलैयाराजा को उन गानों और साउंड रिकॉर्डिंग्स के इस्तेमाल या उन्हें किसी तीसरे पक्ष को लाइसेंस देने से रोक दिया है जिन पर कंपनी ने अपना कॉपीराइट होने का दावा किया है। यह आदेश एक वाणिज्यिक वाद की सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

    न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज और असाइनमेंट समझौते यह संकेत देते हैं कि संबंधित साउंड रिकॉर्डिंग्स और म्यूजिकल वर्क्स पर अधिकार वादी कंपनी के पास हैं। अदालत ने माना कि वर्ष 1976 से 2001 के बीच विभिन्न फिल्म निर्माताओं और सारेगामा के बीच हुए असाइनमेंट समझौतों के तहत कई भारतीय भाषाओं की फिल्मों के संगीत और रिकॉर्डिंग्स के अधिकार कंपनी को सौंपे गए थे।

    सारेगामा की ओर से दलील दी गई कि इन समझौतों के जरिए कंपनी को संबंधित सिनेमैटोग्राफ फिल्मों का हिस्सा बनने वाले संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग्स को दोबारा बनाने लाइसेंस देने और व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के विशेष विश्वव्यापी और निरंतर अधिकार प्राप्त हुए। कंपनी ने आरोप लगाया कि फरवरी 2026 से इलैयाराजा ने इन रिकॉर्डिंग्स को तीसरे पक्ष को लाइसेंस देना शुरू कर दिया और उन्हें अमेजॉन म्यूजिक आईट्यून्स तथा जियो सावन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया साथ ही उन पर मालिकाना हक का दावा भी किया।

    कंपनी का कहना है कि यह कदम उसके वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है और इससे बाजार में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। सारेगामा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने तर्क दिया कि कॉपीराइट कानून के तहत फिल्म के लिए तैयार किए गए संगीत और साउंड रिकॉर्डिंग का प्रथम स्वामी फिल्म निर्माता होता है जब तक कि अनुबंध में कुछ और प्रावधान न हो। चूंकि निर्माताओं ने अपने अधिकार विधिवत असाइनमेंट के माध्यम से कंपनी को हस्तांतरित कर दिए थे इसलिए कंपनी ही वैध अधिकारधारी है।

    पीठ ने शिकायत प्रस्तुत दस्तावेजों और दलीलों की समीक्षा के बाद कहा कि वादी ने प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला स्थापित किया है। अदालत ने यह भी माना कि यदि कथित उल्लंघन जारी रहा तो वादी को ऐसा अपूरणीय नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई केवल आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं होगी। साथ ही सुविधा का संतुलन भी वादी के पक्ष में पाया गया।

    अदालत ने प्रतिवादियों को समन जारी करते हुए निर्देश दिया कि वे समन प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर अपना लिखित बयान दाखिल करें। अंतरिम रोक से संबंधित आवेदन का जवाब चार सप्ताह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।

    यह आदेश संगीत उद्योग में कॉपीराइट असाइनमेंट समझौतों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संगीत के अधिकारों को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। अब निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं जहां इस विवाद के कानूनी पहलुओं पर विस्तार से विचार होगा।

  • असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज

    असफल वंशज पर न पार्टी नेताओं को भरोसा, न सहयोगियों को… कांग्रेस के सियासी घमासान पर BJP का तंज


    नई दिल्ली
    । कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के लिए सोमवार का दिन उलझनों भरा रहा। मणिशंकर अय्यर (Mani Shankar Aiyar.) जैसे नेता ने पार्टी हाई कमान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, तो वहीं असम के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा (Bhupen Bora) ने भी पार्टी को अपना इस्तीफा भेज दिया। उन्होंने पार्टी हाई कमान पर उन्हें नजर अंदाज करने का आरोप लगाया था। इस उठा पटक के बीच भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के नेतृत्व के ऊपर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। भाजपा की तरफ से राहुल गांधी को एक ‘असफल वंशज’ करार देते हुए कहा गया कि उन पर न तो उनकी पार्टी के नेताओं को भरोसा है और न ही उनके सहयोगियों को भरोसा है।

    दिन भर से कांग्रेस पार्टी के अंदर जारी घमासान पर भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा, “तृणमूल कांग्रेस कहती है राहुल को हटाओ, ममता को लाओ, ‘इंडी-गठबंधन’ को बचाओ। असम के कांग्रेस नेता भूपेन बोरा ने इस्तीफा दिया। मणिशंकर अय्यर कहते हैं कि कांग्रेस केरल हारेगी और विजयन जीतेंगे।” भाजपा नेता ने सवाल किया कि क्या यह समझने के लिए और सबूतों की जरूरत है कि न तो गांधी की अपनी पार्टी के नेता और न ही उनके सहयोगी उन्हें गंभीरता से लेते हैं। भाजपा नेता ने अपने हमले को और भी तीखा करते हुए कहा, “राहुल गांधी के पास न तो जनमत है और न ही संगत… वह बस एक असफल विशेषाधिकार प्राप्त वंशवादी हैं।”

    आपको बता दें, खबर लिखे जाने तक असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने इस्तीफे को वापस ले लिया था। इसके अलावा मणिशंकर अय्यर को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से कहा गया कि वह अब पार्टी में नहीं है, ऐसे में उनके बयान को पार्टी से जोड़ने का कोई मतलब नहीं है। दरअसल, मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पद पर बने रहेंगे। इसके अलावा उन्होंने प्रवक्ता पवन खेड़ा और शशि थरूर पर भी निशाना साधा था। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी की तरफ से जबरदस्त विरोध देखने को मिला था। पार्टी की तरफ से कांग्रेस से संबंध न होने की बात पर पूर्व सांसद ने कहा कि उन्हें केवल अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ही पार्टी से निकाल सकते हैं।

    कांग्रेस पार्टी ने भले ही खुद को इस बयान से दूर कर लिया हो लेकिन भाजपा ने हमला बोलने का कोई मौका नहीं छोड़ा। प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा, “कांग्रेस नेताओं द्वारा राहुल गांधी को पूरी तरह से खारिज कर दिया गया है। राहुल गांधी को कांग्रेस के कट्टर वफादार मणिशंकर अय्यर ने खुलेआम नकार दिया।”

    भंडारी ने कहा, ”अय्यर हों या तृणमूल कांग्रेस या भूपेन बोरा सब जानते हैं। राहुल गांधी राजनीतिक ‘पप्पू’ हैं। कांग्रेस में अपना पूरा जीवन बिताने वाले वफादार अब खुलेआम राहुल गांधी के खिलाफ बोल रहे हैं।”

    दरअसल, यह पूरा मामला कांग्रेस के पूर्व सांसद मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेताओं के ऊपर निशाना साधा। उन्होंने पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और शशि थरूर को भी अपने निशाना पर लिया। इसके अलावा असम से पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन के इस्तीफे ने भी कांग्रेस पार्टी के दिन को बर्बाद करने की कोशिश की। मणिशंकर के मामले पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से तीखी टिप्पणी आई, जिसमें कहा गया कि मणिशंकर अय्यर अब पार्टी में नहीं है, तो उस पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि वह नेहरू वादी और राजीववादी हैं लेकिन राहुलवादी नहीं है। इतना ही नहीं अय्यर ने कहा कि उन्हें पार्टी से निकालने का अधिकार केवल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को है।

  • Uttarakhand : चारधाम यात्रा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर अब देना पड़ेगा शुल्क…

    Uttarakhand : चारधाम यात्रा के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराने पर अब देना पड़ेगा शुल्क…


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) को अब और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण (Online Registration) प्रक्रिया में शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है। यह कदम मुख्य रूप से फर्जी रजिस्ट्रेशन और यात्रियों की वास्तविक संख्या का सही अनुमान लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस सप्ताह पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। शुल्क तय करने के लिए कमेटी का गठन किया जाएगा।

    सोमवार को ट्रांजिट कैंप में होटल एसोसिएशन, टूर एंड ट्रेवल्स यूनियन, संयुक्त रोटेशन और डंडी-कंडी संचालकों के साथ बैठक में आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पंजीकरण पर शुल्क लगाने के लिए अपर आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है, जो शुल्क की राशि तय करेगी।


    फर्जी रजिस्ट्रेशन की समस्या

    होटल संचालकों ने बैठक में बताया कि कई बार यात्रियों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया होता है, लेकिन वे यात्रा पर नहीं आते। इससे फर्जी रजिस्ट्रेशन बन जाते हैं और वास्तविक यात्री कई बार होटलों में ठहरने के बावजूद पंजीकरण नहीं पा पाते। होटल एसोसिएशन ने इसके समाधान के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पर न्यूनतम शुल्क लगाने का सुझाव दिया।

    आयुक्त पांडेय ने कहा, “अपर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति की सिफारिश मिलने के बाद एक-दो दिन में आवश्यक निर्णय लेते हुए पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यात्रियों की संख्या सीमित नहीं की जाएगी, लेकिन पंजीकरण अनिवार्य होगा। फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के लिए न्यूनतम शुल्क तय किया जाएगा।”


    पंजीकरण प्रक्रिया कब शुरू होगी?

    सूत्रों के अनुसार, ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया इसी सप्ताह शुरू होने की संभावना है। यात्रियों को पहले अपना पंजीकरण सुनिश्चित करना होगा, ताकि यात्रा और होटल बुकिंग के दौरान किसी प्रकार की दिक्कत न हो। अधिकारियों का कहना है कि शुल्क और पंजीकरण लागू होने से यात्रा के दौरान भीड़ और व्यवस्थाओं में सुधार आएगा। इससे चारधाम यात्रा में प्रवासी पर्यटकों और स्थानीय व्यवस्थाओं पर दबाव कम होगा।

  • इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत दिखाएगा INS विक्रांत की ताकत, विदेशी जहाज भी पहुंचे विशाखापत्तनम

    इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में भारत दिखाएगा INS विक्रांत की ताकत, विदेशी जहाज भी पहुंचे विशाखापत्तनम


    विशाखापत्तनम। भारत अपनी समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का जोरदार प्रदर्शन करने के लिए तैयार है। विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR 2026) और एक्सरसाइज मिलन (MILAN 2026) में विदेशी नौसैनिक जहाजों का आगमन शुरू हो गया है। सोमवार को भारतीय नौसेना ने इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और बांग्लादेश के युद्धपोतों का स्वागत किया।

    विदेशी जहाजों का आगमन
    इंडोनेशियाई नौसेना का फ्रिगेट KRI Bung Tomo-357 पहले ही विशाखापत्तनम पहुंच चुका है। पूर्वी नौसेना कमान ने इसे “सेलामल दातंग” कहकर अभिनंदन किया। संयुक्त अरब अमीरात का नौसैनिक कोर्वेट Al-Emarat भी अभ्यास में शामिल हुआ, जो भारत और UAE के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रतीक है। वहीं, पड़ोसी बांग्लादेश का फ्रिगेट BNS Somudra Avijan भी बेड़े में शामिल हो गया।

    इससे पहले थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के जहाज भी पोर्ट में पहुँच चुके हैं, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक भव्य और विविधता पूर्ण बन गया है।

    IFR 2026: राष्ट्रपति करेंगी समीक्षा
    18 फरवरी को समुद्र में होने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू का निरीक्षण भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। यह स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े नौसैनिक आयोजनों में से एक माना जाता है। इस वर्ष कुल 71 जहाज इस आयोजन में हिस्सा लेंगे, जिनमें भारतीय नौसेना के 45 जहाज, 19 विदेशी युद्धपोत और शेष कोस्ट गार्ड, मर्चेंट नेवी और अनुसंधान जहाज शामिल हैं।

    मुख्य आकर्षण के रूप में भारतीय विमानवाहक पोत INS विक्रांत पहले ही विशाखापत्तनम में पहुंच चुका है। यह जहाज समारोह का केंद्रबिंदु होगा और दर्शकों का ध्यान सबसे अधिक खींचेगा। सभी जहाजों को छह पंक्तियों में व्यवस्थित किया जाएगा।

    मिलन अभ्यास: समुद्री सहयोग का बड़ा मंच
    1995 में महज चार देशों के साथ शुरू हुआ मिलन अभ्यास अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विशाल मंच बन गया है। इस साल 65 देशों की नौसेनाएं इसमें भाग ले रही हैं। इसका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना और मित्र देशों के बीच पेशेवर बातचीत को मजबूत करना है। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए ‘मिलन विलेज’ का उद्घाटन किया गया है, जो 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के लिए एक सांस्कृतिक और मैत्री केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

    इंटरनेशनल सिटी परेड
    उत्सव के रूप में 19 फरवरी की शाम को विशाखापत्तनम में रोड पर भव्य इंटरनेशनल सिटी परेड आयोजित की जाएगी। इसमें 45 सैन्य दल हिस्सा लेंगे। मनोरंजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए 7 से 8 विदेशी बैंड अपनी प्रस्तुति देंगे, जिससे यह न केवल सैन्य ताकत बल्कि दोस्ताना संबंधों का उत्सव भी साबित होगा।

  • शाहपुर कंडी बांध लगभग तैयार, रावी का पानी अब भारत की जमीन करेगा हरी-भरी, पाकिस्तान तरसेगा

    शाहपुर कंडी बांध लगभग तैयार, रावी का पानी अब भारत की जमीन करेगा हरी-भरी, पाकिस्तान तरसेगा


    नई दिल्‍ली। दशकों से बहते पानी की सियासत अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर बन रहे शाहपुर कंडी बांध का काम अंतिम चरण में है। इस परियोजना के शुरू होते ही रावी नदी का वह पानी, जो अब तक पाकिस्तान जाता था, अब जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सूखी जमीन को सींचने में इस्तेमाल होगा। जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद अहमद राणा ने बताया कि बांध का काम 31 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है। यह विशेष रूप से कठुआ और सांबा जिलों के लिए जीवनरेखा साबित होगा।

    सिंचाई और आर्थिक लाभ
    बांध से जम्मू-कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों की 32,173 हेक्टेयर से अधिक भूमि और पंजाब की लगभग 5,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। केंद्र सरकार ने इसके लिए 485.38 करोड़ रुपये की सहायता राशि मंजूर की है। बांध केवल पानी संचयन ही नहीं करेगा, बल्कि बिजली उत्पादन और कृषि विकास को भी नई दिशा देगा।

    सिंधु जल संधि और भारत की नई नीति
    1960 की सिंधु जल संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलज जैसी पूर्वी नदियों पर भारत का पूर्ण अधिकार है। तकनीकी बाधाओं और बांध न होने के कारण अब तक रावी का काफी पानी पाकिस्तान चला जाता था।

    जम्मू-कश्मीर के विधायक डॉ. रामेश्वर सिंह ने कहा कि बांध के काम पूरा होने के बाद, पानी अब पाकिस्तान नहीं जाएगा और कठुआ क्षेत्र की विशाल भूमि को हरा-भरा करेगा।

    अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति कड़ा रुख अपनाया और डेटा शेयर करना बंद कर दिया है। अब भारत पश्चिमी नदियों के पानी के अधिकतम उपयोग की संभावनाएं तलाश रहा है।

    दशकों का इंतजार
    2001: परियोजना को पहली बार मंजूरी मिली, लेकिन अंतर्राज्यीय विवादों के कारण काम रुका।

    2018: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच समझौता हुआ।

    वर्तमान: परियोजना मिशन मोड में है ताकि पाकिस्तान को जाने वाला पानी रोका जा सके।

    अधिकारियों का मानना है कि यह कदम न केवल कृषि के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत के रणनीतिक दबाव का भी हिस्सा है। पाकिस्तान पहले से ही जल संकट से जूझ रहा है। भारत द्वारा अपने हिस्से का पूरा पानी इस्तेमाल करने से पाकिस्तान के निचले इलाकों में पानी की भारी कमी होने की संभावना है।

  • दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता

    दिल्ली में नाबालिग अपराध बढ़ा, नई पीढ़ी क्यों भटक रही है? खेल-खेल से अपराध तक का रास्ता


    नई दिल्ली । दिल्ली में नाबालिगों द्वारा किए जा रहे अपराध अब गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं। खासकर झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 12 से 17 वर्ष के किशोर जघन्य वारदातों में अधिक शामिल पाए जा रहे हैं। चोरी लूट हिंसा और नशे से जुड़े अपराधों में नाबालिगों की बढ़ती संलिप्तता कानूनव्यवस्था के लिए चुनौती बन रही है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद अपराध का ग्राफ कम नहीं हो रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नाबालिग अपराध केवल व्यक्तिगत प्रवृत्ति नहीं बल्कि सामाजिक और पारिवारिक उपेक्षा का नतीजा है। दिल्ली में करीब 75% जुवेनाइल अपराध झुग्गी-झोपड़ी और पुनर्वास कॉलोनियों से आते हैं जबकि 22% निम्न मध्यम वर्ग और केवल 3% मध्यम वर्गीय परिवारों से जुड़े हैं।

    प्रमुख कारणों में शामिल हैं

    परिवारिक अस्थिरता और निगरानी की कमी: गरीब परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता या घरेलू हिंसा के कारण बच्चों पर ध्यान नहीं दिया जाता।शिक्षा से दूरी: स्कूल छोड़ने और पढ़ाई में रुचि कम होने से किशोर गलत संगत की ओर जाते हैं। गलत संगत और गैंग संस्कृति: स्थानीय गैंग के प्रभाव में जल्दी पैसा और दबदबा पाने की चाह में अपराध की राह अपनाई जाती है। नशे और डिजिटल प्रभाव: नशे की उपलब्धता और हिंसक कंटेंट किशोरों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं। सामाजिक उपेक्षा: खेल कौशल विकास और काउंसलिंग की कमी बच्चों की ऊर्जा गलत दिशा में ले जाती है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यह आंकड़े केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक ढांचे की कहानी हैं जहां बचपन धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।दिल्ली में लगातार नाबालिग अपराधों ने समाज और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कम उम्र में अपराध की ओर झुकाव केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक संकट का संकेत है। बार-बार अपराध में शामिल किशोरों के लिए पुनर्वास और सुधार चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।

    प्रमुख प्रवृत्तियां जो सामने आईं

    छोटी उम्र में गंभीर अपराधों में संलिप्तता जैसे लूट चाकूबाजी हत्या का प्रयास। गैंग का प्रभाव और बार-बार अपराध करना। नशे की लत और उससे जुड़े अपराध। जुवेनाइल कानून के कारण सख्त सजा का डर कम होना। मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता सुझाव देते हैं कि समाधान केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं आएगा। इसके लिए परिवार स्कूल समुदाय और सरकार को मिलकर शिक्षा कौशल विकास और पुनर्वास पर काम करना होगा तभी किशोर अपराध की प्रवृत्ति को रोका जा सकता है।

  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’

    निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर विवादित टिप्पणी पर सफाई दी, कहा- ‘जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है’


    नई दिल्ली । हाल ही में बजट सत्र के दौरान झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के भाषण ने राजनीतिक माहौल गरम कर दिया। विवादित किताबों और टिप्पणियों के कारण उनकी ओर से उठाए गए आरोपों ने विपक्षी दल कांग्रेस में हड़कंप मचा दिया। इंडिया टीवी के कार्यक्रम आप की अदालत में दुबे ने खुलकर अपने बयान की सफाई दी। दुबे ने कहा जब मैं संसद में खड़ा होता हूं तो कांग्रेस का पसीना छूट जाता है। प्रियंका गांधी कहीं भी होंगी तो सुनने आ जाएंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें किसी से डर नहीं है क्योंकि उनके साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हैं।

    नेहरू और इंदिरा गांधी पर विवादित टिप्पणियों के सवाल पर दुबे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने संसद में वही पढ़ा जो प्रकाशित किताबों में था। पंडित जवाहरलाल नेहरू को अय्याश कहे जाने के आरोप पर उन्होंने कहा कि यह शब्द उन्होंने खुद नहीं जोड़ा बल्कि यह किताब में लिखा था। इसी तरह इंदिरा गांधी के बारे में अश्लील टिप्पणी के आरोप पर दुबे ने बताया कि यह एमओ मथाई की किताब का संदर्भ था जिसमें उन्होंने कुछ भी नया नहीं जोड़ा।

    राहुल गांधी को किताब न पढ़ने देने के आरोप पर दुबे ने कहा कि उन्होंने उन्हें एक्सपोज़ होने से बचाया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर राहुल गांधी बिना टोके बोलते तो वे पांच मिनट भी प्रभावी ढंग से नहीं बोल पाएंगे। उनके अनुसार राहुल गांधी संसद में सिर्फ किताब और संविधान लेकर आते हैं और वास्तविक बहस में उनका योगदान सीमित रहता है।

    दुबे के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी उनके खिलाफ कई आरोप लगाए लेकिन सांसद ने साफ किया कि विपक्ष उन्हें डरता है और वे केवल प्रकाशित सामग्री पढ़कर अपनी बात रखते हैं। संसद में उनके भाषण और विवादित टिप्पणियों ने राजनीतिक बहस को जोरदार मोड़ दिया है।

  • हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा

    हरियाणा के छायंसा गांव में 15 दिनों में 12 मौतों से हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया डेरा


    नई दिल्ली । हरियाणा के पलवल जिले के छायंसा गांव में पिछले 15 दिनों में 12 मौतों ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। मृतकों में पांच स्कूली बच्चे भी शामिल हैं। लगातार हो रही मौतों ने गांववासियों को दहशत में डाल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 15 दिन पहले तीन लोगों की तबीयत बिगड़ी और उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद से मौतों का सिलसिला जारी है।

    ग्रामीणों के मुताबिक गांव में लगभग हर घर में मरीज हैं और कई की हालत गंभीर है। परिजन अस्पतालों के चक्कर काटकर भी अपने बीमार परिवारजनों को ठीक नहीं कर पा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कदम उठाते हुए गांव में टीम डेरा डाला है। विभाग की टीम लगातार लोगों की जांच कर रही है और ब्लड सैंपल जुटा रही है। अब तक 300 ब्लड सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं जबकि 400 से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है।

    स्वास्थ्य विभाग की डॉ. सतिंदर वशिष्ठ के मुताबिक मृतकों के मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट में 4 मामलों में हेपेटाइटिस B और C का पता चला जबकि 3 मामलों में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर और लिवर इंफेक्शन मिले। दो मरीजों को इलाज के लिए पलवल सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है।

    गांव मुस्लिम बाहुल्य है और करीब 5 हजार आबादी वाले इस गांव में पानी की सप्लाई तीन अलग-अलग स्रोतों से होती है। कुछ घरों में सरकारी पानी आता है जबकि कुछ घरों में अंडरग्राउंड टैंक बनाए गए हैं जिनमें पानी भरने के लिए टैंकर मंगाए जाते हैं। हथीन शहर से आरओ प्लांट का पानी लेने वाले भी हैं। अब तक लिए गए 107 पानी के सैंपलों में 23 फेल पाए गए हैं जिनमें बैक्टीरिया की वृद्धि और क्लोरीन की कमी देखी गई है।

    स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने के लिए ओपीडी लगाई है और घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही है। डॉ. वशिष्ठ ने बताया कि मृतकों के परिवारजनों और आसपास के लोगों के सैंपल भी लिए गए हैं ताकि बीमारी फैलने से रोकी जा सके। ग्रामीणों की मुख्य चिंता यह है कि यह हेपेटाइटिस B और C जैसी बीमारियां जल्द नियंत्रण में आएं और मौतों का सिलसिला थमे। यह स्थिति गांववासियों और अधिकारियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी और उपचार की प्रक्रिया में लगा हुआ है।