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  • Chhattisgarh: 6 महिला समेत 33 लाख के इनामी 10 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सौंपे हथियार

    Chhattisgarh: 6 महिला समेत 33 लाख के इनामी 10 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सौंपे हथियार


    सुकमा।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग (Naxal-affected Bastar region) में सुरक्षाबलों को शुक्रवार उस वक्त बेहद अहम कामयाबी मिली जब सुकमा में छह महिलाओं समेत कुल दस माओवादियों ने आत्मसमर्पण (10 Maoists including six women surrendered) करते हुए हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों पर कुल 33 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इस घटना के बाद बस्तर में शांति और स्थायी विकास स्थापित करने के लिए संचालित ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल को महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है।

    सरेंडर करने वाले कैडरों में से, माओवादियों के कंपनी प्लाटून कमांडर मिदियम भीमा (30) पर 8 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इसके अलावा गंगा कुंजम (22), लेकम रामा, ताती सोनी (32) और शांति सोढ़ी (21) पर 5-5 लाख रुपए का इनाम था, जबकि माडवी नवीन (20), माडवी रुकनी (24), ओयम मांगली (22), पोडियम मांगी (20) और माडवी गंगी (19) पर 1-1 लाख रुपए का इनाम था।

    सुकमा पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरेंडर करने के दौरान इन कैडरों ने सुरक्षा बलों के सामने 1 AK-47, 2 SLR राइफलें, 1 पॉइन्ट 303 राइफल, 1 स्टेन गन और 1 BGL लॉन्चर सहित कई हथियार जमा किए। पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने इसे क्षेत्र में विश्वास निर्माण और शांति स्थापना के लिए महत्वपूर्ण संकेत बताया।

    आत्मसमर्पण करने वालों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन नंबर 1 के प्लाटून कमांडर, दरभा डिवीजन के दो एरिया कमेटी सदस्य, PLGA की दो मिलिट्री प्लाटूनों के PPMC सदस्य, गोल्लापल्ली LOS के दो सदस्य और तीन पार्टी सदस्य शामिल हैं। सुकमा पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि केवल साल 2025 में ही अब तक जिले में 263 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह बढ़ता आत्मविश्वास बताता है कि क्षेत्र तेजी से शांति और विकास की ओर बढ़ रहा है।

    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पत्तिलिंगम ने कहा कि यह पुनर्वास दर्शाता है कि माओवादी विचारधारा अपना प्रभाव खो रही है और लोग शांति, सम्मान और प्रगति का मार्ग चुन रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11 महीनों में बस्तर रेंज में 1514 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान वायान वाटिका में आत्मसमर्पित कैडरों द्वारा पौधारोपण भी किया गया, जो उनके नए जीवन और शांतिपूर्ण भविष्य की प्रतीकात्मक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। स्थानीय समुदाय, प्रशासन और सुरक्षा बलों की उपस्थिति ने पुनर्वास प्रक्रिया को और सुदृढ़ किया।

  • असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान पैसा नहीं विचारधारा तय करती है वोट

    असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान पैसा नहीं विचारधारा तय करती है वोट


    नई दिल्ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में मतदान के पैटर्न को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि असम में वोट केवल सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर निर्भर नहीं होते.बल्कि यह विचारधारा और पहचान से तय होते हैं। उनका मानना है कि कई समुदाय अपने राजनीतिक निर्णय केवल आर्थिक प्रोत्साहन या सरकारी लाभ से नहीं.बल्कि अपनी विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर लेते हैं।

    एक निजी टीवी चैनल के कार्यक्रम में उन्होंने इस बारे में विस्तार से बात की। सरमा ने स्पष्ट किया कि असम के मुस्लिम मतदाता.जिनकी संख्या राज्य में महत्वपूर्ण है.अक्सर अपनी वोटिंग पसंद को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ते हैं। उनका कहना था कि चाहे सरकार 10 हजार रुपये दे या 1 लाख रुपये.कुछ समुदाय.खासकर मुस्लिम मतदाता.उसी सरकार को वोट नहीं देंगे यदि वह सरकार उनकी विचारधारा और पहचान से मेल नहीं खाती।

    नकद सहायता को नकारा

    एक सवाल के जवाब में.जब मुख्यमंत्री से पूछा गया कि क्या असम में महिलाओं को बिहार की तरह नकद सहायता दी जा सकती है.तो उन्होंने इसे साफ तौर पर खारिज कर दिया। उनका कहना था कि चुनाव में वोटिंग का आधार केवल वित्तीय लाभ नहीं है। वह मानते हैं कि हर समुदाय अपने राजनीतिक विकल्पों का चयन विचारधारा और पहचान के आधार पर करते हैं.न कि केवल आर्थिक प्रोत्साहन पर।

    जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता

    मुख्यमंत्री सरमा ने असम में जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि 2021 में राज्य की मुस्लिम आबादी लगभग 38% थी.और हर दशक में यह 4-5% बढ़ रही है। यदि यह वृद्धि दर जारी रही.तो 2027 तक मुस्लिम आबादी 40% तक पहुंच सकती है। सरमा ने कहा कि यदि मुस्लिम आबादी 50% से अधिक हो गई.तो अन्य समुदायों की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान पर दबाव बढ़ सकता है।

    व्यक्तिगत संबंध वोट में नहीं बदलते

    सीएम हिमंत सरमा ने कहा कि उनका व्यक्तिगत संबंध मिया समुदाय की महिलाओं और कई मुस्लिम परिवारों के साथ अच्छा है.लेकिन चुनाव में यह जुड़ाव वोट में तब्दील नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही मुस्लिम मतदाता कांग्रेस के पक्ष में वोट करें.भाजपा अपनी स्थिति असम में बनाए रख सकती है।

    सरमा ने अंत में कहा..असम में मेरे अपने वे लोग हैं.जो खुद को असमी और भारतीय पहचान से जोड़ते हैं।. उनका यह बयान इस बात को स्पष्ट करता है कि उनकी सरकार की प्राथमिकता राज्य के असमी और भारतीय पहचान के लोगों पर है.और उनकी राजनीतिक नीतियां इसी पर आधारित हैं।

    असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का यह बयान असम की राजनीति और वोटिंग पैटर्न को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने यह साफ किया कि असम में वोटिंग सिर्फ सरकारी योजनाओं या नकद सहायता पर नहीं.बल्कि विचारधारा और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित होती है। इसके साथ हीउन्होंने राज्य में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उसके प्रभाव पर भी चिंता जताई।

    उनका यह बयान असम की राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण है.क्योंकि यह दर्शाता है कि वह न केवल चुनावी रणनीतियों को बल्कि राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य को भी ध्यान में रखते हुए अपनी नीतियां बना रहे हैं।

  • दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, लखनऊ में डिप्टी सीएम के आवास से पकड़ा गया

    दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष के नाम पर ठगी करने वाला गिरफ्तार, लखनऊ में डिप्टी सीएम के आवास से पकड़ा गया


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बड़े ठग का पर्दाफाश हुआ है, जो खुद को दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का प्रतिनिधि बताकर लोगों से ठगी कर रहा था। आरोपी, नोएडा निवासी दशरथ पाल को शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के सरकारी आवास से गिरफ्तार किया गया। वह कई शहरों में सत्ता और संगठन के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने का काम कर चुका था।

    कैसे पकड़ा गया ठग?
    आरोपी दशरथ पाल ने उपमुख्यमंत्री के आवास पर शिष्टाचार भेंट देने का दावा करते हुए पहुंचने की कोशिश की। उपमुख्यमंत्री की टीम को पहले ही सूचना मिल गई थी कि एक संदिग्ध व्यक्ति उनके आवास तक पहुंचने की कोशिश कर रहा है। जब वह अंदर गया, तो सतर्कता टीम ने उसकी पहचान जांची और पाया कि वह दिल्ली बीजेपी नेतृत्व से कोई संबंध नहीं रखता। इसके बाद उसे तत्काल पुलिस के हवाले कर दिया गया।

    ठगी की वारदातें
    पूछताछ में सामने आया कि दशरथ पाल नोएडा, बुलंदशहर, मेरठ और लखनऊ जैसे शहरों में कई लोगों से ठगी कर चुका था। वह खुद को बीजेपी के बड़े नेताओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों को काम करने का वादा करता और बदले में पैसों की मांग करता था। अब पुलिस उसकी जांच कर रही है कि उसने कितने लोगों से ठगी की और उसके पीछे कोई गिरोह तो नहीं है।

    डिप्टी सीएम का कड़ा संदेश
    घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि इस तरह के लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन की छवि खराब करने की कोशिश करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। मौर्य ने इस मामले में कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

    पुलिस की जांच जारी
    पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि उसने किस-किस व्यक्ति से ठगी की और उसके पास कितने पैसे हैं। पुलिस आरोपी के नेटवर्क और पुराने मामलों की भी जांच कर रही है, ताकि उसकी अन्य ठगी की वारदातों का भी खुलासा हो सके।

  • दक्षिण दिल्ली को मिलेगी नई गोल्डन लाइन मेट्रो निर्माण कार्य की शुरुआत

    दक्षिण दिल्ली को मिलेगी नई गोल्डन लाइन मेट्रो निर्माण कार्य की शुरुआत


    नई दिल्ली । दक्षिण दिल्ली के यात्रियों को अब एक और शानदार मेट्रो कॉरिडोर की सुविधा मिलने जा रही है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने फेज़-IV के तहत एक नई ‘गोल्डन लाइन की शुरुआत की है जो साकेत जी ब्लॉक से लाजपत नगर तक विस्तारित होगी। यह नई एलिवेटेड मेट्रो लाइन दिल्ली के कुछ सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ते हुए यात्रियों को तेज़.सुरक्षित और जाम मुक्त यात्रा का अनुभव प्रदान करेगी।

    इस नई मेट्रो लाइन की शुरुआत साकेत के पास पुष्पा भवन में पहले टेस्ट पाइल और भूमिपूजन से हुई। इस परियोजना के साथ सिविल कार्यों की आधिकारिक शुरुआत भी हो चुकी है। इस लाइन का निर्माण करते हुए DMRC का उद्देश्य है कि वह दक्षिण दिल्ली के प्रमुख इलाकोंकनेक्टिविटी को बेहतर बनाए और यात्रियों को मेट्रो नेटवर्क के जरिए सहज यात्रा सुविधा प्रदान करे।

    गोल्डन लाइन विशेषताएँ

    एलिवेटेड कॉरिडोर

    यह नई मेट्रो लाइन पूरी तरह से एलिवेटेड होगी.जिससे ट्रैफिक जाम से बचने और तेज़ यात्रा की सुविधा मिलेगी। लाइन में कुल 8 स्टेशन होंगे.जो प्रमुख क्षेत्रों को आपस में जोड़ेंगे।

    सहज कनेक्टिविटी

    गोल्डन लाइन का उद्देश्य विभिन्न मेट्रो लाइनों से बेहतर कनेक्टिविटी देना है। इस लाइन के माध्यम से यात्रियों को लाजपत नगर और चिराग दिल्ली के इंटरचेंज हब से वायलेट.पिंक और मैजेंटा लाइनों तक आसानी से पहुंचने का अवसर मिलेगा। इससे दक्षिण दिल्ली के क्षेत्रों जैसे ग्रेटर कैलाश.साकेत.लाजपत नगर और पुष्प विहार में यात्रा और भी सुविधाजनक हो जाएगी।

    मुख्य स्टेशनों का नेटवर्क

    गोल्डन लाइन के प्रमुख स्टेशन होंगे साकेत जी ब्लॉक, पुष्पा भवन,साकेत डिस्ट्रिक्ट सेंटर, चिराग दिल्ली ,ग्रेटर कैलाश, लाजपत नगर,एंड्रूज़ गंज,पुष्प विहार,जाम से राहत यह मेट्रो लाइन दिल्ली के जाम से राहत प्रदान करेगी.खासकर उन क्षेत्रों में जहां ट्रैफिक का दबाव अधिक रहता है। स्कूलों.कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों के लिए यह यात्रा को और भी सुविधाजनक बना देगा।

    इंटीग्रेशन और इंटरचेंज हब

    इस परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण यह है कि यह तीन मेट्रो लाइनों से जुड़ने वाली है.जो यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह जाने में सुविधा प्रदान करेंगी।

    फेज़-IV के अन्य प्रोजेक्ट्स

    गोल्डन लाइन के अलावा.दिल्ली मेट्रो के फेज़-IV में दो और महत्वपूर्ण कॉरिडोरों पर भी कार्य चल रहा है। इनमें इंद्रलोक से रिठाला और इंद्रप्रस्थ से नरेला तक के कॉरिडोर शामिल हैं। इन विस्तारों से दिल्ली मेट्रो नेटवर्क और भी मजबूत होगा.जिससे शहरभर में सफर करना और भी सुविधाजनक हो जाएगा।
    नई गोल्डन लाइन मेट्रो कॉरिडोर दक्षिण दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या को हल करने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। यह मेट्रो लाइन न केवल यात्रियों को जाम मुक्त यात्रा का अनुभव देगी बल्कि दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क को और भी सशक्त बनाएगी। इसके साथ ही.दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से यात्रा करने वालों को नई सुविधाओं का लाभ मिलेगा।

  • 2025: 5 बड़ी राजनीतिक घटनाएँ जिन्होंने भारत की सियासत और समाज को बदल दिया

    2025: 5 बड़ी राजनीतिक घटनाएँ जिन्होंने भारत की सियासत और समाज को बदल दिया


    नई दिल्ली। साल 2025 भारतीय राजनीति के लिए कई बदलावों और महत्वपूर्ण घटनाओं का साल रहा। दिल्ली और बिहार के चुनावों से लेकर वक्फ संशोधन विधेयक और उपराष्ट्रपति चुनाव तक, इन घटनाओं ने न सिर्फ देश की राजनीतिक दिशा को प्रभावित किया, बल्कि विपक्ष और सरकार के बीच खींचतान को भी बढ़ावा दिया। आइए जानते हैं उन पांच अहम घटनाओं के बारे में, जिन्होंने भारतीय राजनीति का रंग और रुख बदल दिया।

    1. दिल्ली विधानसभा चुनाव (फरवरी 2025)

    2025 में दिल्ली की राजनीति में एक बड़े बदलाव ने सबको चौंका दिया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आम आदमी पार्टी (AAP) को हराकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया। इस जीत ने दिल्ली में 10 साल तक सत्ता में रही केजरीवाल सरकार को सत्ता से बाहर किया और बीजेपी ने नए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को चुना। बीजेपी की यह जीत न केवल दिल्ली की सियासत में बदलाव लेकर आई, बल्कि विपक्षी एकता को भी बड़ा झटका दिया।

    2. वक्फ संशोधन विधेयक (अप्रैल 2025)

    अप्रैल में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाने के लिए पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष और मुस्लिम संगठनों ने इसे मुस्लिम धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। सरकार का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना था, लेकिन इसे लेकर विवाद बढ़ गया। इस विधेयक को पारित कराकर सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया, लेकिन यह मुद्दा आगामी चुनावों में गर्माता रहेगा।

    3. पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर (अप्रैल-मई 2025)

    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पाकिस्तानी समर्थित आतंकवादियों द्वारा 27 पर्यटकों की हत्या ने देश को झकझोर दिया। भारत ने इस हमले का जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया, जिसमें भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के अंदर आतंकी ठिकानों को तबाह किया। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में भारत ने 10 मई को अचानक इस ऑपरेशन को रोक दिया, जिससे कूटनीतिक संकट पैदा हुआ। इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा और आरोप लगाया कि यह निर्णय अमेरिकी दबाव में लिया गया था।

    4. उपराष्ट्रपति चुनाव (सितंबर 2025)

    14वें उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए कार्यकाल के बीच इस्तीफा दे दिया, जिससे राजनीति में हलचल मच गई। सरकार ने सीपी राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया, और उन्होंने 452 वोट प्राप्त कर बी सुदर्शन रेड्डी को हराया। यह चुनाव न केवल उपराष्ट्रपति पद का अहम फैसला था, बल्कि सरकार की ताकत और विपक्ष की कमजोरी को भी दर्शाता है।

    5. बिहार विधानसभा चुनाव (अक्टूबर-नवंबर 2025)

    बिहार विधानसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति में एक नई दिशा तय की। एनडीए (नीतीश कुमार) और महागठबंधन (तेजस्वी यादव) के बीच यह मुकाबला था। एनडीए ने 202 सीटों के साथ भारी जीत हासिल की, जिसमें बीजेपी ने 89 सीटें और जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। वहीं, महागठबंधन को केवल 30 सीटें ही मिलीं, जिससे विपक्षी गठबंधन में गहरी दरारें पैदा हुईं। इस परिणाम ने न केवल बिहार में सत्ता को बनाए रखा, बल्कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में फिर से स्थापित किया और 2029 के लोकसभा चुनावों की दिशा तय कर दी।

    साल 2025 ने भारतीय राजनीति को कई अहम मोड़ों से गुजरते हुए नया आकार दिया। इन घटनाओं ने न केवल सत्तारूढ़ दलों को नई दिशा दी, बल्कि विपक्ष की रणनीति और एकजुटता को भी परख लिया। आगामी चुनावों में इन घटनाओं के प्रभाव को महसूस किया जाएगा, जो भारतीय राजनीति के अगले अध्याय का निर्धारण करेंगे।

  • मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर, किसानों को भी राहत

    मोदी सरकार का बड़ा फैसला: 2027 जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर, किसानों को भी राहत


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शुक्रवार (12 दिसंबर 2025) को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में तीन अहम फैसले लिए गए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन फैसलों का ऐलान करते हुए कहा कि सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है। इसके साथ ही कोल (कोयला) सेक्टर में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए एक बड़ा रिफॉर्म किया गया और किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया गया।

    डिजिटल जनगणना का ऐतिहासिक फैसला

    अश्विनी वैष्णव ने बताया कि 2027 की जनगणना पहली बार डिजिटल रूप में आयोजित की जाएगी, जिसमें डेटा सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह जनगणना दो चरणों में की जाएगी। पहले चरण में 1 अप्रैल से सितंबर 2026 तक हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस होगा, और दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जनसंख्या गणना की जाएगी। इस बार डिजिटल जनगणना में डेटा कलेक्शन के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो हिंदी, इंग्लिश और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। इस कदम से जनगणना प्रक्रिया में तेजी आएगी और डेटा संग्रहण को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाएगा।

    कोल सेक्टर में आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम

    मंत्री ने बताया कि कोल सेतु नामक योजना के तहत भारत अब कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है। इससे भारत की कोयला आयात पर निर्भरता खत्म हो रही है, जिससे 60 हजार करोड़ रुपये की बचत होगी। 2024-25 में भारत ने 1 बिलियन टन कोल प्रोडक्शन का लक्ष्य हासिल किया है, जो देश की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।

    किसानों के लिए राहत: एक और बड़ा फैसला

    सरकार ने किसानों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी ऐलान किया है, हालांकि इसके विवरण का अभी खुलासा नहीं किया गया है। इससे किसानों को फसल उगाने और उनकी आय को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। कृषि क्षेत्र में सुधार और किसानों की बेहतरी के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 2027 की डिजिटल जनगणना के लिए 11,718 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया है, जो जनगणना प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाएगा। साथ ही कोल सेक्टर में आत्मनिर्भरता के लिए उठाए गए कदम से देश की ऊर्जा सुरक्षा को नया आयाम मिलेगा। किसानों से जुड़े फैसले ने भी उनकी स्थिति में सुधार की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाया है।

  • CJI चंद्रचूड़: 'सोचना भी नहीं कोई मुझे डरा-धमका सकता है' – पूर्व सांसद की याचिका पर क्यों कहना पड़ा यह

    CJI चंद्रचूड़: 'सोचना भी नहीं कोई मुझे डरा-धमका सकता है' – पूर्व सांसद की याचिका पर क्यों कहना पड़ा यह


    नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सुर्यकांत ने कोर्ट में लंबित मामलों के दौरान हो रही टिप्पणियों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सुनवाई के दौरान जजों द्वारा किए गए सवालों और टिप्पणियों को अक्सर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है और सोशल मीडिया पर नैरेटिव बनाकर लोगों में भ्रम फैलाया जाता है।यह टिप्पणी उन्होंने पूर्व सांसद प्रज्जवल रेवन्ना की याचिका की सुनवाई के दौरान की। रेवन्ना ने अपने खिलाफ रेप मामलों के ट्रायल्स को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। उनके वकीलों सिद्धार्थ लूथरा और सिद्धार्थ दवे ने ट्रायल्स के दौरान जजों की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैंजिन्हें रिकॉर्ड से हटाना आवश्यक है। उन्होंने इसे पक्षपात का आधार बताते हुए ट्रायल ट्रांसफर की मांग की।

    सीजेआई सूर्यकांत के साथ सुनवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी मौजूद थे। जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि जज की टिप्पणियां पक्षपात का आधार नहीं बन सकतीं। बेंच ने कहा कि जज केवल वर्तमान मुकदमे में पेश सबूतों के आधार पर ही निर्णय देंगे और पहले मामले में दोषी पाए जाने का इससे कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट में पूछे गए सवाल केवल दोनों पक्षों की ताकत और दलीलों की जाँच के लिए होते हैं और ये अंतिम निर्णय को नहीं दर्शाते। लेकिन लोग बिना समझे इन सवालों या टिप्पणियों को आधार बनाकर नतीजे पर पहुँच जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहामैं सोशल मीडिया या किसी भी दबाव से प्रभावित नहीं होता। अगर किसी को लगता है कि वे मुझे डराकर प्रभावित कर सकते हैं तो वे गलत हैं। मैं बहुत मजबूत आदमी हूं।

    यह टिप्पणी उस ओपन लेटर पर उनकी प्रतिक्रिया के तौर पर भी देखी जा रही हैजिसमें पूर्व जजोंवकीलों और कार्यकर्ताओं ने उनके रोहिंग्या शरणार्थियों पर दिए गए बयान पर आपत्ति जताई थी। इस मामले में सीजेआई ने सवाल किया था कि क्या घुसपैठियों का रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत करना चाहिए। उन्होंने यह सवाल हिरासत में लिए गए रोहिंग्याओं के लापता होने के मामले पर सुनवाई के दौरान किया था।सीजेआई ने कहा था कि अगर कोई देश में घुसपैठ कर ले और नागरिकों जैसे अधिकार मांगने लगे तो इसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायिक सवाल और टिप्पणियां न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें गलत अर्थ न लगाया जाए।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की यह टिप्पणी दर्शाती है कि न्यायपालिका किसी बाहरी दबाव या सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया से प्रभावित नहीं होतीऔर जज केवल सबूत और कानून के आधार पर निर्णय लेते हैं।

  • दिल्ली में जिलों की संख्या 11 से बढ़कर 13: प्रशासनिक कामकाज होगा तेज, पारदर्शी और जनता-केंद्रित

    दिल्ली में जिलों की संख्या 11 से बढ़कर 13: प्रशासनिक कामकाज होगा तेज, पारदर्शी और जनता-केंद्रित

    नई दिल्ली में शासन-प्रशासन का ढांचा अब बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। राजधानी की बढ़ती आबादी बढ़ते प्रशासनिक बोझ और बदलते शहरी ढांचे को देखते हुए दिल्ली कैबिनेट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जिलों की संख्या 11 से बढ़ाकर 13 कर दी है। सरकार का दावा है कि इस बदलाव से सरकारी कामकाज में तेजी आएगी और जनता को सेवाओं तक आसान पहुँच मिलेगी। नई जिला संरचना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब जिलों की सीमाएं MCD के जोनों के अनुरूप होंगी। इससे पहले जिले और निगम जोनों की सीमाएं अलग होने के कारण आम लोगों को भ्रम होता था कि किसी काम की जिम्मेदारी किस विभाग की है। नए ढांचे से विभागों के बीच तालमेल बढ़ेगा प्रशासनिक कामकाज तेज होगा और नागरिकों को समय पर सेवाएं मिलेंगी।

    नए जिले और प्रशासनिक बदलाव

    पुरानी दिल्ली जिला अब ‘सदर जोन’ की जगह लेगी जिससे ऐतिहासिक और घनी आबादी वाले क्षेत्रों का प्रबंधन आसान होगा। ईस्ट और नॉर्थ ईस्ट जिलों का पुनर्गठन कर शाहदरा नॉर्थ और शाहदरा साउथ बनाए गए हैं। बड़े नॉर्थ दिल्ली जिले को सिविल लाइन्स और पुरानी दिल्ली में बांटा गया है। इसके अलावा नजफगढ़ को स्वतंत्र जिला घोषित किया गया है जो पहले साउथ वेस्ट दिल्ली का हिस्सा था। इस पुनर्गठन में जनसंख्या ट्रैफिक दबाव और प्रशासनिक कार्यभार को ध्यान में रखा गया है।

    जनता को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा

    नई जिला व्यवस्था से लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन लैंड रिकॉर्ड जाति/निवास/आय प्रमाणपत्र म्यूटेशन और शिकायत निवारण जैसी सेवाएं अब आसानी से नज़दीकी दफ्तरों से उपलब्ध होंगी। छोटे जिलों और मिनी सेक्रेटेरिएट के माध्यम से वन-स्टॉप सुविधा मिलेगी जिससे भीड़ कम होगी और काम तेजी से होगा।

    सर्विस डिलीवरी में सुधार और पारदर्शिता

    छोटे प्रशासनिक क्षेत्र और स्पष्ट जिम्मेदारियों से फाइलों का निपटारा तेज होगा भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और ऑनलाइन सेवाओं की दक्षता बढ़ेगी। नई संरचना में 33 सब-डिवीज़न बढ़कर 39 हो गए हैं जिससे लैंड रिकॉर्ड डिजिटाइजेशन और म्यूटेशन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी। मिनी सेक्रेटेरिएट में सब-रजिस्ट्रार ऑफिस राजस्व रिकॉर्ड विभाग और पब्लिक सर्विस सेंटर शामिल होंगे।

    पुरानी उलझन खत्म प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ी
    पहले विभागों और निगम जोनों की सीमाओं का मेल न होने से कई बार फाइलें कई दिनों तक अटकी रहती थीं। नए ढांचे में जिलों को MCD जोनों के अनुरूप जोड़कर अधिकार क्षेत्र स्पष्ट किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप विभागों के बीच तालमेल बढ़ा परियोजनाओं के अनुमोदन में तेजी आई और नागरिक समस्याओं का समाधान सरल हुआ।

    दिल्ली प्रशासन अब तेज पारदर्शी और जनता-केंद्रित

    जिलों की संख्या बढ़ाने से प्रशासनिक इकाइयाँ अधिक सटीक और प्रभावी हो गई हैं। सरकार का अनुमान है कि इससे सेवाएं समय पर मिलेंगी फाइलों का निपटारा तेज होगा और राजधानी का प्रशासन अधिक कुशल और जवाबदेह बनेगा। आने वाले वर्षों में यह सुधार दिल्ली को स्मार्ट गवर्नेंस मॉडल और आधुनिक प्रशासनिक ढांचे की दिशा में अग्रसर करेगा।

  • रोहिणी आचार्य के बयान पर राजनीति और समाज में हलचल, बेटियों की सुरक्षा पर जोर

    रोहिणी आचार्य के बयान पर राजनीति और समाज में हलचल, बेटियों की सुरक्षा पर जोर


    नई दिल्ली। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य द्वारा हाल ही में दिए गए एक बयान ने बिहार की राजनीति और समाज में नई बहस छेड़ दी है। रोहिणी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “हर बेटी का यह अधिकार है कि उसका मायका सुरक्षित और भरोसेमंद स्थान हो, जहां वह बिना डर, अपराधबोध या शर्म के वापस आ सके”। इस बयान में उन्होंने बिहार में बेटियों के अधिकार और परिवारों में सुरक्षा की अहमियत को उजागर किया, जो समाज में महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है।

    शांभवी चौधरी का बयान: बेटियों का सम्मान सर्वोपरि
    रोहिणी के बयान पर शांभवी चौधरी, जो लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) सांसद और जेडीयू नेता अशोक चौधरी की बेटी हैं, ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह किसी भी परिवार का निजी मामला हो सकता है, लेकिन बेटियों का सम्मान सर्वोपरि है।” शांभवी ने आगे कहा, “बेटों को जो अधिकार मिलते हैं, वही अधिकार बेटियों को भी मिलना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि समाज की एक बड़ी चुनौती है। शांभवी ने यह भी व्यक्त किया कि उन्हें खुशी है कि लालू यादव के परिवार के लोग भी अब राज्य सरकार से सुरक्षा की उम्मीद कर रहे हैं।

    सरकार की प्रतिक्रिया: महिला सुरक्षा पर संजीदगी
    इस बयान पर जेडीयू सांसद संजय झा ने कहा, “नीतीश कुमार हमेशा महिलाओं की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील रहे हैं। अगर रोहिणी ने अपनी चिंता जाहिर की है, तो सरकार इसे गंभीरता से संज्ञान में लेगी।” उन्होंने कहा कि बिहार सरकार की सक्रियता इस मामले में स्पष्ट है और “जनता देख रही है कि राजद की राजनीति कितनी खोखली हो चुकी है”।

    मायके की सुरक्षा और बेटियों के अधिकार की अहमियत
    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बेटियों का सम्मान और उनका मायका सुरक्षित होना किसी भी समाज की मजबूती और परिवार की प्रतिष्ठा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बिहार में इस मुद्दे पर चल रही बहस सामाजिक चेतना और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों को उजागर करती है, जिससे महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर राज्य सरकार की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होती है।

  • भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे

    भारत में लॉन्च हुई डायबिटीज की दवा ओज़ेम्पिक: जानें कीमत और फायदे


    नई दिल्ली। डेनमार्क की प्रमुख दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपनी बहुप्रतीक्षित दवा ओज़ेम्पिक (Ozempic) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह दवा टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प बन सकती है। ओज़ेम्पिक को 2017 में अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा अनुमोदित किया गया था और तब से यह दुनिया भर में सबसे ज्यादा बिकने वाली दवाओं में से एक बन गई है। भारत में इसकी कीमत 0.25 मिलीग्राम की खुराक के लिए ₹2,200 प्रति सप्ताह रखी गई है। वहीं, 0.5 मिलीग्राम और 1 मिलीग्राम की खुराक के लिए कीमत ₹10,170 और ₹11,175 प्रति माह होगी।

    यह दवा सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) नामक सक्रिय घटक से बनती है, जो शरीर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले GLP-1 हार्मोन की तरह काम करता है। यह हार्मोन शरीर को यह संकेत भेजता है कि पेट भरा हुआ है, जिससे भूख कम लगती है और व्यक्ति कम कैलोरी का सेवन करता है। इसके अतिरिक्त, ओज़ेम्पिक का असर पेट की पाचन क्रिया को धीमा करने पर भी पड़ता है, जिससे व्यक्ति लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है और बार-बार खाने से बचता है। इसके कारण यह दवा वजन घटाने में भी प्रभावी साबित हो रही है, जिससे यह डायबिटीज के मरीजों के अलावा अन्य लोगों के बीच भी लोकप्रिय हो रही है।

    भारत में सीडीएससीओ (केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन) ने अक्टूबर 2023 में ओज़ेम्पिक को टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। यह दवा अब ग्लाइसेमिक नियंत्रण में सुधार करने के साथ-साथ उन मरीजों में हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को भी कम करने में मदद करती है, जिन्हें पहले से हृदय रोग है। यह दवा खासतौर पर डाइट और एक्सरसाइज के साथ मिलकर काम करती है और मरीजों के रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है।

    हालांकि ओज़ेम्पिक की कीमतें कुछ उच्च हैं, लेकिन यह एक कारगर उपचार विकल्प हो सकती है। फिर भी, किसी भी नई दवा का उपयोग करने से पहले, मरीजों को अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह उनके लिए सही है और उन्हें इसके किसी साइड इफेक्ट का सामना नहीं करना पड़ेगा।