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  • इंडिगो संकटDGCA ने 4 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स को सस्पेंड किया सेफ्टी और नियमों की अनदेखी का आरोप

    इंडिगो संकटDGCA ने 4 फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स को सस्पेंड किया सेफ्टी और नियमों की अनदेखी का आरोप



    नई दिल्ली ।
    भारत की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो के लिए हालात मुश्किल होते जा रहे हैं क्योंकि भारतीय नागर विमानन महानिदेशालय DGCA ने चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स को सुरक्षा और नियमों की अनदेखी के कारण सस्पेंड कर दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब इंडिगो ने 5 दिसंबर को एक ही दिन में रिकॉर्ड 1600 फ्लाइट्स रद्द कर दी थीं जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। यह कदम इंडिगो द्वारा सुरक्षा और परिचालन अनुपालन में नाकामी के चलते उठाया गया है।

    सस्पेंड किए गए अधिकारी

    DGCA द्वारा सस्पेंड किए गए अधिकारियों में चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर्स शामिल हैं जो एयरलाइन के सुरक्षा और परिचालन नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार थे। DGCA ने इन अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने एयरलाइन के संचालन के लिए आवश्यक सुरक्षा मानकों और नियमों का पालन नहीं किया जिसके कारण विमानन क्षेत्र में व्यवधान उत्पन्न हुआ और यात्रियों को खासी दिक्कतें आईं।

    इंडिगो का संचालन प्रभावित

    इंडिगो ने हाल ही में पायलट और क्रू मेंबर की ड्यूटी से संबंधित नियमों का पालन करने में असफलता दिखाई थी जिसके परिणामस्वरूप कई फ्लाइट्स रद्द हो गईं। इससे न केवल यात्रियों को परेशानी हुई बल्कि टूरिज्म सेक्टर को भी करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। 5 दिसंबर को एयरलाइन द्वारा किए गए 1600 फ्लाइट रद्द किए जाने की घटना ने इस संकट को और बढ़ा दिया। हालांकि इंडिगो ने बाद में कहा कि अब उनका संचालन सामान्य हो गया है और वे सामान्य स्तर पर लौट आए हैं।

    डीजीसीए की कड़ी निगरानी

    इस मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करते हुए DGCA ने अब एयरलाइन के मुख्यालय पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है। डीजीसीए के अधिकारी अब इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन रिफंड और अन्य प्रक्रियाओं पर रोजाना रिपोर्ट पेश करेंगे। इसके अलावा डीजीसीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने 11 घरेलू एयरपोर्ट्स पर इंडिगो के संचालन का निरीक्षण करने का निर्णय लिया है। इन अधिकारियों का यह निरीक्षण अगले कुछ दिनों में होगा और वे हर हवाई अड्डे का दौरा करने के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

    इंडिगो CEO को DGCA के सामने पेश होना होगा

    इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स को डीजीसीए के सामने शुक्रवार को पेश होना होगा। डीजीसीए ने एक चार सदस्यीय पैनल का गठन किया था जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों जैसे संयुक्त महानिदेशक संजय ब्रह्मणे उप महानिदेशक अमित गुप्ता वरिष्ठ उड़ान संचालन निरीक्षक कपिल मंगलिक और लोकेश रामपाल शामिल हैं। इस पैनल का मुख्य कार्य घरेलू एयरलाइन में व्यापक परिचालन व्यवधानों के कारणों की पहचान करना है।

    धन वापसी और यात्री मुआवजा की निगरानी

    डीजीसीए ने अब एयरलाइन के संचालन में शामिल किसी भी प्रकार के वापसी मुआवजा और सामान के लौटने के मामलों को लेकर कड़ी निगरानी रखना शुरू कर दिया है। डीजीसीए के अधिकारियों ने इंडिगो के कॉरपोरेट कार्यालय में भी एक वरिष्ठ अधिकारी और उप निदेशक को तैनात किया है जो फ्लाइट रद्द होने पर यात्रियों को मुआवजा और समय पर धन वापसी सुनिश्चित करेंगे।

    निगरानी बढ़ी

    इंडिगो के संचालन पर हुई इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि DGCA अब फ्लाइट ऑपरेशंस की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए और कड़ी निगरानी रखेगा। इसके साथ ही एयरलाइन को अब परिचालन नियमों का सख्ती से पालन करना होगा ताकि भविष्य में ऐसे व्यवधानों से बचा जा सके।

    इंडिगो के लिए यह संकट सुरक्षा और संचालन के मानकों पर ध्यान केंद्रित करने का समय है। DGCA की सख्ती और निगरानी से एयरलाइन को सुधारने का एक अवसर मिलेगा लेकिन इसे अपनी प्रणाली में सुधार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

  • फर्जी रॉ अधिकारी ने बिहार की महिला जज सहित पांच महिलाओं से की करोड़ों की ठगी

    फर्जी रॉ अधिकारी ने बिहार की महिला जज सहित पांच महिलाओं से की करोड़ों की ठगी


    नई दिल्‍ली । नोएडा एसटीएफ(Noida STF) के द्वारा गिरफ्तार किए गए फर्जी रॉ अधिकारी (Fake RAW officer)सुनीत की जांच में हुए खुलासे से एसटीएफ के अधिकारी भी दंग हैं। एसटीएफ के अनुसार सुनीत ने बिहार की महिला जज से गृहमंत्रालय(Home Ministry) का अधिकारी बनकर शादी करने के अलावा चार अन्य महिलाओं के साथ भी करोड़ों की ठगी की है।

    आरोपी ने किसी महिला को उसने आईएएस अधिकारी तो किसी को सेना का अधिकारी और किसी को रॉ का अधिकारी बन कर अपने प्रेम जाल में फंसा रखा था। इन महिलाओं से भी वह करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। नोएडा एसटीएफ की टीम ने इस फर्जी अधिकारी को 19 नवंबर को ग्रेटर नोएडा की पैरामाउंट गोल्फ सोसाइटी से गिरफ्तार किया था। यहां पर वह फर्जी रॉ अधिकारी बनकर रह रहा था। एसटीएफ के अधिकारियों के अनुसार जांच में खुलासा हुआ है कि यह आरोपी फर्जी अधिकारी बनकर महिलाओं को भी ठग रहा था। वह महिला जज के अलावा चार अन्य महिलाओं के भी संपर्क में था। इन महिलाओं से भी उसने करोड़ों की ठगी की है। इसके साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। एक महिला ने ही शिकायत की है कि वह उससे 50 लाख रुपये से अधिक ठग चुका है।

    इसके अलावा भी अन्य महिलाओं ने जानकारी दी है, लेकिन वह बदनामी के चलते सामने नहीं आना चाहतीं। अभी संभव है कि आरोपी के द्वारा ठगी गई कुछ और अन्य महिलाएं भी सामने आएं। वह इन महिलाओं को प्रेमजाल में फंसाकर उनसे ठगी कर रहा था और सभी को वह स्वयं को उच्चाधिकारी और अविवाहित बताता था।

    महिला जज को झांसे में लेकर शादी रचाई
    एसटीएफ के अनुसार सुनीत कुमार ने करीब एक साल पहले बिहार के छपरा में कार्यरत महिला जज से शादी की थी। उसने महिला जज को बताया था कि वह गृह मंत्रालय में तैनात है। एसटीएफ ने जब महिला जज से बात की तो उन्होंने भी पति को गृह मंत्रालय में तैनात बताया और कहा कि वह इन दिनों गोपनीय मिशन पर गए हैं। एसटीएफ के अधिकारियों ने सुनीत के बारे में जब सारी सच्चाई महिला जज को बताई तो वह भी अचंभित रह गईं।

  • अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से अनशन का किया ऐलान, बोले- "कानून लागू होने तक अंतिम सांस तक करेंगे आंदोलन

    अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से अनशन का किया ऐलान, बोले- "कानून लागू होने तक अंतिम सांस तक करेंगे आंदोलन


    नई दिल्‍ली । समाजसेवी(social worker) अन्ना हजारे ने एक बार फिर देश को हिला देने वाला ऐलान कर दिया है। 30 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र(Maharashtra) के रालेगण सिद्धि में वे आमरण अनशन(Hunger Strike till death) पर बैठने जा रहे हैं और यह अनशन उनकी अंतिम सांस तक चलेगा। अन्ना ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस(Devendra Fadnavis) को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर कानून तुरंत लागू नहीं हुआ तो वे प्राण त्याग देंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। अन्ना के इस ऐलान से एक बार फिर महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 2011 में अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया था। उस वक्त आंदोलन का ऐसा असर हुआ था कि केंद्र के साथ-साथ दिल्ली की कांग्रेस सरकार की विदाई हो गई थी।

    फिर आंदोलन पर क्यों उतरे अन्ना हजारे?
    अब सवाल यह है कि अन्ना हजारे ने अचानक फिर आंदोलन की घोषणा क्यों की? दरअसल, इस बार अनशन का कारण महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू करने में हो रही देरी है। बता दें कि राज्य में लोकायुक्त कानून को मंजूरी मिले दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसी से नाराज समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं।

    रालेगण सिद्धि में होगा आमरण अनशन
    अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर साफ कहा है कि अगर लोकायुक्त कानून तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे 30 जनवरी 2026 से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू कर देंगे। पत्र में उन्होंने लिखा है कि हार्ट अटैक से मरने की बजाय देश और समाज के हित में प्राण त्यागना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। बता दें कि अन्ना हजारे लंबे समय से महाराष्ट्र में मजबूत लोकायुक्त कानून लागू करने की मांग करते आ रहे हैं।

    2024 में राज्यपाल ने दी थी मंजूरी
    अन्ना हजारे के मुताबिक, लोकायुक्त विधेयक 2022 में विधानसभा से और 2023 में विधान परिषद से पारित हो चुका है। 2024 में राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई, इसके बावजूद आज तक कानून लागू नहीं हुआ। अन्ना ने कहा कि राज्य सरकार ने यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र को भेज दिया है, पर एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है।

    मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि यह उनका निजी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का सवाल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति नजर नहीं आ रही। इसलिए उनके पास आमरण अनशन के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।

  • 1000 करोड़ का क्रिप्टो घोटाला: CBI ने चीनी मास्टरमाइंड सहित 30 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

    1000 करोड़ का क्रिप्टो घोटाला: CBI ने चीनी मास्टरमाइंड सहित 30 आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट


    नई दिल्‍ली । केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 1000 करोड़ रुपये से अधिक के क्रिप्टोकरेंसी(Cryptocurrency) निवेश घोटाले में दो चीनी नागरिकों वान जून और ली अनमिंग सहित कुल 30 आरोपियों के खिलाफ दिल्ली की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है। यह मामला कोविड लॉकडाउन(Covid Lockdown) के दौरान फर्जी ‘एचपीजेड टोकन’ (‘HPZ Token’)ऐप के जरिए लोगों को लुभाकर बिटकॉइन माइनिंग के नाम पर ठगने से जुड़ा है। जांच में पता चला है कि यह घोटाला विदेशी साइबर अपराधी गिरोह का हिस्सा था, जिसने भारत की नई-नई शुरू हुई पेमेंट एग्रीगेटर (Payment Aggregator)व्यवस्था का भी हेराफेरी कर बड़े पैमाने पर धन विदेश भेजा।

    दरअसल, यह पूरा घोटाला कथित तौर पर चीनी नागरिकों द्वारा नियंत्रित कंपनी शिगू टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड ने चलाया था। बताया गया कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान इस गिरोह ने बड़ी मात्रा में पैसा इकट्ठा किया और उसे हेराफेरी कर विदेश भेज दिया। कुछ ही महीनों में 150 से ज्यादा फर्जी कंपनियों के बैंक खातों में 1000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा हो गई थी। ये खाते अपराध से कमाए धन को इकट्ठा करने और उसे वैध दिखाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे।

    सीबीआई जांच में सामने आया है कि यह विदेशी नागरिकों द्वारा संचालित एक बड़े और सुनियोजित साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा था। यही गिरोह कोविड के बाद के समय में कई अन्य घोटालों के लिए भी जिम्मेदार था, जिनमें फर्जी लोन ऐप, फर्जी निवेश स्कीम और फर्जी ऑनलाइन जॉब ऑफर के जरिए भारतीय नागरिकों को ठगा गया। जांच में पता चला कि ठगों ने लोगों का विश्वास जीतने के लिए शुरुआती निवेश पर कुछ रिटर्न भी दिए, लेकिन बाद में पूरी राशि क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेज दी।

    सीबीआई जांच में ये भी पता चला कि मुख्य आरोपी चीनी नागरिक वान जून की पहचान जिलियन कंसल्टेंट्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एक चीनी संस्था की सहायक कंपनी) के प्रमुख निदेशक के तौर पर हुई। उसने डॉर्टसे नामक एक व्यक्ति की मदद से शिगू टेक्नोलॉजी सहित कई शेल कंपनियां बनाईं। बाद में सीबीआई में डॉर्टसे को भी गिरफ्तार कर लिया था।

    सीबीआई की चार्जशीट में मुख्य साजिशकर्ताओं समेत 27 व्यक्ति और 3 कंपनियों को जिम्मेदार ठहराया गया है। वहीं गिरोह के कई सदस्य अभी भी सीबीआई की पहुंच से बाहर हैं। फिलहाल उनकी तलाश और जांच जारी है। बता दें कि एजेंसी ने पिछले साल अप्रैल में इस मामले में FIR दर्ज की थी। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच शुरू की और विभिन्न बैंक खातों में जमा 91.6 करोड़ रुपये फ्रीज कर दिए थे।

  • पर्सनल लॉ बोर्ड ने किरेन रीजीजू से की मुलाकात, वक्फ संपत्तियों के 'उम्मीद' पोर्टल की दिक्कतों को दूर करने की मांग

    पर्सनल लॉ बोर्ड ने किरेन रीजीजू से की मुलाकात, वक्फ संपत्तियों के 'उम्मीद' पोर्टल की दिक्कतों को दूर करने की मांग


    नई दिल्‍ली । ऑल इंडिया (All India)मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बृहस्पतिवार (Thursday)को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रीजीजू(Kiren Rijiju) से मुलाकात कर आग्रह किया कि वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण से संबंधित ‘उम्मीद’ पोर्टल से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के साथ ही दस्तावेजों के अपलोड की समयसीमा एक साल के लिए और बढ़ाई जाए। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कुछ पदाधिकारियों के साथ ही सांसद असदुद्दीन ओवैसी, मोहम्मद जावेद और चंद्रशेखर भी रीजीजू से मिले।

    रीजीजू ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किया कि आज मेरे कार्यालय में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत हुई। हमने उम्मीद पोर्टल में वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की और विचारों का सुखद आदान-प्रदान किया।

    वहीं, बोर्ड ने एक बयान में कहा कि पंजीकृत वक्फ संपत्तियों को अपलोड करने के लिए निर्धारित छह महीने की समय सीमा बेहद कम थी। पोर्टल पर विवरण अपलोड करते समय कई तकनीकी समस्याओं और गड़बड़ियों का सामना करना पड़ा। इसलिए, सभी संपत्तियों को अपलोड करना बेहद कठिन और व्यावहारिक रूप से असंभव हो गया। नतीजतन, पंजाब वक्फ बोर्ड, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड, गुजरात वक्फ बोर्ड और राजस्थान वक्फ बोर्ड ने समय बढ़ाने की मांग करते हुए न्यायाधिकरण से संपर्क किया और न्यायाधिकरण ने समयसीमा बढ़ा दी।

    उसका कहना है कि इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि वक्फ बोर्ड भी छह महीने की समयसीमा का पालन करने में असमर्थ थे और उन्हें अधिक समय का अनुरोध करना पड़ा। उसने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने अनुरोध किया कि मुतवल्लियों के सामने आने वाली कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए अपलोड करने की समयसीमा एक वर्ष और बढ़ा दी जाए।

    कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने बताया कि हमने मंत्री के समक्ष उम्मीद पोर्टल से जुड़ी समस्याओं को रखा और उन्होंने आश्चासन दिया कि दिक्कतों को दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पोर्टल से संबंधित दिक्कतों को दूर किया जाना बहुत जरूरी है क्योंकि अब तक लाखों वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हो सका है।

  • मोदी राज में गरीबी लगभग खत्म, अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिंदू: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का रिसर्च

    मोदी राज में गरीबी लगभग खत्म, अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिंदू: नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष का रिसर्च


    नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi)के शासनकाल में बड़े पैमाने पर अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) खत्म हुई है। बड़ी बात यह है कि अत्यधिक गरीबी खत्म होने की दर हिन्दुओं से ज्यादा मुस्लिमों में रही है। यानी अब मुस्लिमों से ज्यादा गरीब हिन्दू हैं। नीति आयोग के पूर्व अध्यक्ष और सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया(Arvind Panagariya) ने अपने एक रिसर्च पेपर में यह दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-12 और 2023-24 के बीच भारत ने लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म कर दी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मुसलमानों में गरीबी दर (उनकी आबादी का) 1.5% रह गया है, जबकि हिंदुओं में यह 2.3% है जो कि तुलना में थोड़ा ज्यादा है।

    कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सोलहवें वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया और नई दिल्ली स्थित रिसर्च और कंसल्टिंग फर्म इंटेलिंक एडवाइजर्स के संस्थापक विशाल मोरे द्वारा लिखे गए एक नए पेपर में यह दावा किया गया है। पेपर इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित हुआ है। पेपर के अनुसार, वर्ष 2022-23 में भी दोनों समुदायों के बीच गरीबी का अंतर लगभग एक समान था। उस दौरान मुसलमानों में गरीबी दर उनकी आबादी का 4% था, जबकि हिंदुओं में यह 4.8% था, जो 0.8 प्रतिशत ज्यादा है।

    आंकड़े आम धारणा के विपरीत
    पेपर में यह भी दावा किया गया है कि ये आंकड़े उस आम धारणा के विपरीत हैं जिसके तहत कहा जाता रहा है कि मुसलमानों में हिंदुओं की तुलना में ज्यादा गरीबी है और इसमें सुधार की जरूरत है, कम से कम अत्यधिक गरीबी के संबंध में। बता दें कि विश्व बैंक क्रय शक्ति समानता (PPP) के संदर्भ में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 3 डॉलर से कम खरीद क्षमता को अत्यधिक गरीबी के रूप में परिभाषित किया जाता है। लेखकों के अनुसार, यह तेंदुलकर कमेटी की गरीबी रेखा के करीब है, जो आखिरी आधिकारिक तौर पर अपनाई गई गरीबी रेखा थी।

    देश से लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म
    एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह पेपर सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक समूहों, और ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी के स्तर का अनुमान लगाता है। इसमें लेखकों ने लिखा है, “अनुमान बताते हैं कि 2011-12 से 2023-24 तक 12 वर्षों में गरीबी में गिरावट काफी और व्यापक रही है, इस हद तक कि देश ने लगभग अत्यधिक गरीबी खत्म कर दी है।”

    लेखकों के अनुसार, तेंदुलकर पद्धति के आधार पर राष्ट्रीय (ग्रामीण+शहरी) गरीबी रेखा 2011-12 में प्रति व्यक्ति प्रति माह 932 रुपये, 2022-23 में 1,714 रुपये और 2023-24 में 1,804 रुपये निर्धारित की गई थी। इस पेपर में, हर घर को राज्य और इलाके (ग्रामीण या शहरी) के लिए गरीबी रेखा के आधार पर गरीब या गैर-गरीब माना गया है। जिन्हें गरीब के तौर पर क्लासिफाई किया गया है, उन्हें फिर ग्रुप के हिसाब से जोड़ा गया है।

    2011-2024 के बीच कुल गरीबी में तेज़ और लगातार गिरावट
    पेपर के अनुसार, 2011-2024 की अवधि में कुल गरीबी में तेज़ और लगातार गिरावट देखी गई है। पेपर में दावा किया गया है कि राष्ट्रीय गरीबी दर 2011-12 में 21.9% (आबादी का) से घटकर 2023-24 में 2.3% हो गई। यानी 12 सालों में गरीबी दर में 19.7 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई है, जो प्रति वर्ष के हिसाब से 1.64 प्रतिशत की गिरावट है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में गिरावट ज़्यादा तेज़ रही है। ररिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में जहां 2011-12 में शुरुआती गरीबी का स्तर राष्ट्रीय औसत से ज़्यादा था, उस अवधि में 22.5 प्रतिशत अंकों की कमी आई, या सालाना 1.87 प्रतिशत अंकों की कमी आई। इसके विपरीत, शहरी गरीबी में 12.6 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई, जो मोटे तौर पर प्रति वर्ष 1 प्रतिशत अंक के बराबर है। पेपर में ये भी कहा गया है कि वर्ग के हिसाब से भी, सभी प्रमुख सामाजिक समूहों – अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), और अगड़ी जाति के समूहों में भी गरीबी में काफी कमी आई है।

    ST समुदाय में भी गरीबी दर 8.7% रह गई
    लेखकों ने इस बात पर फोकस किया है कि समाज के सबसे निचले पायदान पर रहने वाले अनुसूचित जनजाति समुदाय के अंदर 2023-24 में गरीबी घटकर 8.7% रह गई है। पेपर में कहा गया है कि जहां हिंदुओं में गरीबी की दर 2.3% अनुमानित है, वहीं मुसलमानों में अब 1.5%, ईसाइयों में 5%, बौद्धों में 3.5%, और सिखों और जैनियों में 0% है। रिपोर्ट में यह दावा कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अत्यधिक गरीबी में अंतर लगभग खत्म हो गया है, हैरान करने वाला है।

    पेपर में कहा गया है कि ग्रामीण इलाकों में भी हिंदुओं की तुलना में मुसलमान कम ही गरीबी रेखा के नीचे हैं। यह आंकड़ा मुस्लिमों में 1.6% है जबकि हिन्दुओं में 2.8% है। हालांकि, शहरी इलाकों में 2011-12 में मुसलमानों में गरीबी दर 20.8% थी, जबकि हिंदुओं में यह 12.5% ​​थी, जो 2023-24 तक घटकर अब क्रमशः 1.2% और 1% रह गई है।

  • हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास

    हिमंत बिस्वा सरमा का तंज, कहा- मैं भूल गया कांग्रेस से आया हूं, कट्टर भाजपाई बनने का रहता है प्रयास


    नई दिल्‍ली । असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma)ने कांग्रेस पर एकबार फिर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि वह कट्टर भाजपाई (Hardcore BJP)बनने की कोशिश करते रहते हैं। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वह भूल गए हैं कि वह कांग्रेस से भाजपा (BJP)में आए थे। उन्होंने साल 2015 में कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

    सरमा से जब पूछा गया कि सिर्फ असम नहीं, बल्कि भारत के कई राज्यों में आप भाजपा के गो टू मैन बन गए हैं, अब तो कोई यकीन भी नहीं करता कि आप कांग्रेस से आए हैं। आज तक के कार्यक्रम में पूछे गए इस सवाल का जवाब मजाकिया अंदाज में दिया।

    उन्होंने कहा, ‘मैं भी भूल गया हूं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सबको भूल जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘बीजेपी से ज्यादा तो बीजेपी नहीं हो सकता पर अच्छा बीजेपी होने की कोशिश करता हूं। पूरा कट्टर बीजेपी बन जाऊं, उसका प्रयास तो होता रहता है।’

    क्यों छोड़ी कांग्रेस
    सरमा ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी। उन्होंने कांग्रेस पर परिवारवाद की राजनीति के आरोप लगाए थे। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तरुण गोगोई पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि जब से उनके बेटे गौरव गोगोई राजनीति में आए हैं, तब से वह मतलबी हो गए है। खास बात है कि वह कांग्रेस में रहते हुए मंत्री बने थे। वहीं, भाजपा में आने के बाद वह मंत्री बने और बाद में असम के मुख्यमंत्री का पद भी संभाला।

    असम की सुरक्षा के लिए सामुदायिक रक्षा तंत्र तैयार करें: हिमंत
    गुरुवार को सरमा ने लोगों से अपील की कि वे राज्य की सुरक्षा के लिए सामुदायिक स्तर पर मिलकर रक्षा तंत्र तैयार करें। सरमा ने लोगों से आग्रह किया कि वे उन लोगों का सामाजिक और आर्थिक रूप से बहिष्कार करें जो कथित तौर पर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करते हैं।

    मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमें उन्हें (जो लोग अतिक्रमण करते हैं) आने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। लेकिन अगर वे ऊपरी असम के कुछ स्थानों पर पहले से ही मौजूद हैं, तो हम उन्हें वहां से हटा देंगे, जैसा हमने उरीयमघाट में किया था।’

    राज्य सरकार ने नगालैंड के साथ राज्य की सीमा पर उरीयमघाट में रेंगमा संरक्षित वन में बड़े पैमाने पर बेदखली अभियान चलाया, जिसमें लगभग 11,000 बीघे (लगभग 1,500 हेक्टेयर) भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस अभियान में लगभग 1,800 परिवार प्रभावित हुए, जिनमें अधिकतर मुस्लिम समुदाय के थे। उन्होंने कहा कि सरकार अकेले असम को ‘सुरक्षित’ नहीं बना सकती है। सभी को उस प्रक्रिया में योगदान देना होगा।

  • बंगाल: बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को मिली जान से मारने की धमकियां, बढ़ाई गई निजी सुरक्षा

    बंगाल: बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को मिली जान से मारने की धमकियां, बढ़ाई गई निजी सुरक्षा


    नई दिल्‍ली । पश्चिम बंगाल(West Bengal) के मुर्शिदाबाद (Murshidabad)जिले में 6 दिसंबर को अयोध्या की बाबरी मस्जिद के मॉडल पर आधारित एक नई मस्जिद की नींव रखने वाले तृणमूल कांग्रेस(Trinamool Congress) (टीएमसी) के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर (Humayun Kabir)को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। राज्य के बाहर से आने वाले इन फोन कॉल्स ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। धमकियों के मद्देनजर हुमायूं ने तत्काल प्रभाव से अपनी निजी सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है और हैदराबाद से एक विशेष सुरक्षा टीम बुलाई है। इसके अलावा, वे कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं, जहां से केंद्रीय सुरक्षा बलों की मांग करेंगे।

    हैदराबाद से सुरक्षा टीम हायर करने को लेकर हुमायूं कबीर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा- मुझे सिक्योरिटी चाहिए क्योंकि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से मुझे धमकी भरे कॉल आए हैं। मैं डरा हुआ नहीं हूं लेकिन मेरे समर्थक सुरक्षा बढ़ाने के लिए कह रहे हैं। मैंने हैदराबाद से प्राइवेट सिक्योरिटी हायर कर ली है और जल्द ही कलकत्ता हाई कोर्ट में और सिक्योरिटी के लिए अपील भी करूंगा।

    इसके अलावा, हुमायूं कबीर ने मंगलवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा- मुझे राज्य के बाहर से लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि वे मुझे जान से मार देंगे। टीएमसी सरकार ने अभी तक मेरी सरकारी सुरक्षा नहीं हटाई है, लेकिन मैं पश्चिम बंगाल पुलिस पर भरोसा नहीं कर पा रहा हूं। इसलिए, तत्काल उपाय के तौर पर मैंने हैदराबाद से 8 निजी सुरक्षाकर्मियों की एक टीम बुलाई है। ये लोग कल से मेरी सुरक्षा संभालेंगे। कबीर ने यह भी बताया कि उन्होंने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और पुलिस को ईमेल के जरिए सुरक्षा बढ़ाने की गुहार लगाई है। अगर हाईकोर्ट नौशाद सिद्दीकी जैसे लोगों को 6-8 सुरक्षाकर्मी दे सकता है, तो मुझे क्यों नहीं? मैं अदालत जाकर केंद्रीय फोर्स की मांग करूंगा।

    बाबरी मस्जिद शिलान्यास और विवाद
    यह पूरा विवाद 6 दिसंबर को शुरू हुआ, जब 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी पर हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के रेजीनगर (बेलडांगा क्षेत्र) में एक नई मस्जिद का शिलान्यास किया। यह मस्जिद अयोध्या वाली बाबरी मस्जिद के डिजाइन पर आधारित बताई जा रही है, जिसका निर्माण तीन साल में पूरा होने का दावा किया गया है। कुल बजट करीब 300 करोड़ रुपये का है, जिसमें सऊदी अरब से आए मौलवियों की मौजूदगी और 60,000 पैकेट बिरयानी का इंतजाम भी शामिल था। समर्थकों ने सिर पर ईंटें रखकर जुलूस निकाला और ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाए।

    कार्यक्रम के दौरान इलाके में भारी सुरक्षा व्यवस्था थी। प्रशासन ने रेजीनगर और बेलडांगा को हाई-सिक्योरिटी जोन घोषित कर दिया था। लगभग 3,000 पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) तैनात किए गए थे। राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने शांति बनाए रखने की अपील की थी। कुछ लोगों ने कोलकाता हाईकोर्ट में निर्माण रोकने की याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार पर डाल दी।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और टीएमसी से निष्कासन
    शिलान्यास के ऐलान के बाद ही हुमायूं कबीर को टीएमसी ने 4 दिसंबर को निलंबित कर दिया था। भाजपा ने इसे ‘सांप्रदायिक ध्रुवीकरण’ का प्रयास बताते हुए ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। हुमायूं ने शुरुआत में विधानसभा से इस्तीफा देने की बात कही थी, लेकिन दो दिन बाद यू-टर्न ले लिया। उन्होंने कहा- मैं इस्तीफा नहीं दूंगा, लेकिन टीएमसी ने सदन में मेरी सीटिंग अरेंजमेंट बदल दिया है। टीएमसी ने आरोप लगाया कि कबीर मस्जिद निर्माण के लिए फंडिंग जुटाने के बहाने सांप्रदायिक तनाव फैला रहे हैं। कबीर ने इसका खंडन किया और कहा कि यह एक धार्मिक आयोजन है, जिसमें कोई राजनीति नहीं है।

  • SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?

    SIR को चुनौती…. SC बोला- वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर क्या आंखें मूंद ले चुनाव आयोग?


    नई दिल्ली।
    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने गुरुवार को कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (Special in-depth review-SIR) को लेकर जारी अधिसूचना में ‘माइग्रेशन’ शब्द की व्याख्या केवल देश के भीतर के प्रवासन तक सीमित नहीं मानी जा सकती, बल्कि इसमें सीमा पार प्रवासन भी शामिल हो सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान की जिनमें बिहार में SIR को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग (Election Commission- ECI) नागरिकता पर संदेह के आधार पर लोगों को मतदाता सूची से हटाकर मताधिकार छीन रहा है।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SIR कोई नियमित प्रक्रिया नहीं है और बिहार में यह 2003 के बाद पहली बार किया जा रहा है। कोर्ट ने पूछा, “क्या चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने के लिए किसी ‘शुद्धिकरण और छंटनी’ की प्रक्रिया नहीं अपना सकता? यदि गड़बड़ियां मिलें तो क्या आयोग को आंख मूंद लेनी चाहिए?”

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, “माइग्रेशन ट्रांस-कंट्री भी हो सकता है। यह केवल देश के भीतर का प्रवासन नहीं है। आजीविका और अन्य कारणों से लोग विदेशी सीमाएं पार करते हैं। ‘ब्रेन ड्रेन’ भी प्रवासन ही है।”

    पीठ की यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन के उस तर्क के जवाब में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चुनाव आयोग नागरिकता की जांच करना चाहता था, तो उसे 24 जून के आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख करना चाहिए था। आदेश में SIR का आधार केवल “तेजी से शहरीकरण” और “शिक्षा व आजीविका के लिए बार-बार होने वाला जनसंख्या का स्थानांतरण” बताया गया था।


    BLO के संदेह पर नाम हटाना खतरनाक— याचिकाकर्ता

    रामचंद्रन ने दलील दी कि SIR को विदेशी नागरिकों की पहचान से जोड़ना असंवैधानिक है, क्योंकि नागरिकता की जांच के लिए पहले से वैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। उन्होंने कहा, “सिर्फ बूथ लेवल ऑफिसर के संदेह पर किसी को मतदाता सूची से हटाना बेहद खतरनाक है।” कोर्ट ने जवाब दिया कि उनकी टिप्पणियां अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं बल्कि मुद्दे पर बेहतर तर्कों के लिए एक प्रयास हैं।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया ‘गलत संदेह’ पर आधारित है और बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अयोग्य घोषित करने की कोशिश है। रामचंद्रन ने कहा, “ECI का कर्तव्य मतदाता को सक्षम बनाना है, निष्क्रिय करना नहीं।” उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के बाद नौ राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR को लागू करना “कॉपी-पेस्ट” जैसा है, जो चुनाव आयोग की “मस्तिष्क-प्रक्रिया की कमी” दर्शाता है।

    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर के लिए तय की है, जब चुनाव आयोग अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देगा। अगले सप्ताह उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, पुदुचेरी और पश्चिम बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।

  • कर्नाटक के बाद अब पंजाब कांग्रेस में घमासान…. सक्रिए हुए राहुल गांधी

    कर्नाटक के बाद अब पंजाब कांग्रेस में घमासान…. सक्रिए हुए राहुल गांधी


    चंडीगढ़।
    कांग्रेस (Congress) में आंतरिक कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। कर्नाटक (Karnataka) के बाद अब पंजाब इकाई (Punjab Congress) में नेताओं के बीच तनातनी जारी है। खबर है कि हालात संभालने के लिए कांग्रेस आलाकमान सक्रिय हो गया है। कहा जा रहा है कि सांसद राहुल गांधी (MP Rahul Gandhi) ने भी इस संबंध में बैठक बुलाई थी। हालांकि, इस संबंध में कांग्रेस की तरफ से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

    कांग्रेस की निलंबित नेता नवजोत कौर सिद्धू के बयान के बाद कांग्रेस की पंजाब इकाई में तनाव बढ़ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि हालात काबू में करने के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। सूत्रों ने कहा है कि राहुल गांधी ने पंजाब मामलों के प्रभारी समेत कई बड़े नेताओं के साथ बैठक की है। उन्होंने बताया है कि कांग्रेस नेतृत्व जारी संसद सत्र के दौरान संकट बढ़ने नहीं देना चाहता।

    नवजोत कौर सिद्धू बनाम राजा अमरिंदर सिंह वडिंग
    नवजोत कौर ने बुधवार को कहा कि वह और उनके पति हमेशा पार्टी के साथ रहेंगे। कौर कांग्रेस की पंजाब इकाई के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी हैं। कौर ने कांग्रेस की पंजाब इकाई के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग पर भी तीखा हमला करते हुए उन पर पार्टी को ‘बर्बाद’ करने का आरोप लगाया। कौर ने बुधवार को ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘हम कांग्रेस के साथ हैं और हमेशा रहेंगे, और हम अपने पंजाब राज्य को जीतेंगे और इसे अपने विनम्र, प्रिय और त्याग के प्रतीक गांधी परिवार को उपहार स्वरूप देंगे।’

    कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा कि 70 ‘कुशल, ईमानदार और वफादार’ नेता उनके संपर्क में हैं, ‘जिन्हें आपने (वडिंग) कांग्रेस पार्टी से अलग कर दिया है और जो कांग्रेस टिकट के लिए योग्य विजयी उम्मीदवार हैं।’ उन्होंने अपने पोस्ट में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप पंजाब की 70 प्रतिशत सीटों को बर्बाद करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जहां आपने पहले ही अप्रभावी लोगों को फर्जी टिकट दे दिए हैं, इसके बावजूद कांग्रेस पंजाब में जीत हासिल करेगी।’

    कौर ने वडिंग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘टिकट बेचने के आरोप में आपको गुजरात से निकाल दिया गया था और आपने वहां महंगी गाड़ियां, जमीनें और मेट्रो खरीदीं। क्या आप आईटी की व्याख्या सुनने के लिए तैयार हैं? राजा वडिंग, अपने उन कुत्तों का इस्तेमाल मत करो जिन्हें आपकी वजह से टिकट मिले हैं।’ उन्होंने कहा, ‘आप लगातार कांग्रेस पार्टी के खिलाफ काम क्यों कर रहे हैं और उम्मीदवारों को हराकर उन्हें अन्य पार्टियों में शामिल होने के लिए मजबूर क्यों कर रहे हैं?’

    बड़े समर्थन का दावा
    नवजोत कौर ने मंगलवार को दावा किया कि उन्हें कांग्रेस की पंजाब इकाई के 70 प्रतिशत और AICC के 90 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त है। अपने निलंबन को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए कौर ने कहा कि नोटिस एक ऐसे व्यक्ति की ओर से आया है, जिनके पास कोई मान्यता नहीं है और ऐसे कई नोटिस जारी किए जाते रहे हैं।

    रंधावा बोले- कोर्ट में बात करेंगे
    500 करोड़ रुपए में सीएम की कुर्सी वाले बयान के बाद भी नवजोत कौर सिद्धू लगातार कांग्रेस नेताओं पर संगीन आरोप लगाती रही। उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा पर नशा तस्करों से संबंध होने और बेहिसाब प्रोपर्टी बनाने के आरोप लगाए हैं। रंधावा ने कहा कि अब हम कोर्ट में बात करेंगे। अब तो मेरी पगड़ी का सवाल है। राजनीति में ऐसी बातें होती रहती हैं, इसमें नया कुछ नहीं है। लेकिन यह सच है कि मेरे माता-पिता का नवजोत सिद्धू के माता-पिता से दोस्ताना रिश्ता था। इस तरह के आरोप लगाना शर्मनाक है। यह तो सिर्फ सिद्धू ही बता सकते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी से ऐसी बातें कही थीं या उनकी पत्नी खुद ही ऐसा कह रही हैं। उन्होंने कहा कि अब तो वो कोर्ट में ही सिद्धू को जवाब देंगे।