Category: Religious Astrology

  • सोमवार का अंक राशिफल: जानें सभी मूलांक के लिए दिन कैसा रहेगा..

    सोमवार का अंक राशिफल: जानें सभी मूलांक के लिए दिन कैसा रहेगा..

    नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2026 का दिन अंक ज्योतिष के दृष्टिकोण से विशेष माना जा रहा है, क्योंकि आज का भाग्यांक 5 है, जो बुध ग्रह से प्रभावित होता है। बुध ग्रह को बुद्धि, संवाद, व्यापार और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में आज का दिन कई लोगों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, जबकि कुछ को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जाती है।

    अंक ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति का मूलांक उसके जीवन की ऊर्जा और स्वभाव को दर्शाता है। आज मूलांक 1 से 9 तक के सभी जातकों पर अलग-अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है, जो उनके करियर, आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य और निजी जीवन को प्रभावित करेगा।

    मूलांक 1 के जातकों के लिए आज नेतृत्व और आत्मविश्वास बढ़ने के संकेत हैं। कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं, लेकिन अहंकार से बचना जरूरी रहेगा ताकि रिश्तों में संतुलन बना रहे।

    मूलांक 2 के लोगों के लिए दिन भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। दूसरों के साथ तालमेल बनाए रखना आवश्यक होगा और अनावश्यक बहस से बचना बेहतर रहेगा।

    मूलांक 3 वालों के लिए आज रचनात्मकता और नए विचारों का दिन है। अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने पर सफलता मिलने की संभावना है और कार्यस्थल पर प्रशंसा भी मिल सकती है।

    मूलांक 4 के जातकों को आज मेहनत और धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा। कुछ कार्यों में रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन निरंतर प्रयास से स्थिति धीरे-धीरे सुधरेगी।

    मूलांक 5 के लिए आज का दिन विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है। नए अवसर, यात्रा और बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। व्यापार और नौकरी दोनों में प्रगति की संभावना मजबूत है।

    मूलांक 6 वालों के लिए दिन संबंधों में संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने का है। पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी और पुराने संबंध मजबूत हो सकते हैं।

    मूलांक 7 के जातकों के लिए आज आत्मचिंतन और मानसिक शांति का समय है। कार्यों की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन योजना बनाने के लिए यह समय उपयोगी रहेगा।

    मूलांक 8 वालों के लिए जिम्मेदारियों का दबाव रह सकता है। कार्यक्षेत्र में अनुशासन बनाए रखना जरूरी होगा, हालांकि आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार के संकेत हैं।

    मूलांक 9 के जातकों के लिए दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। कार्यों में तेजी आएगी और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिल सकते हैं।

  • आज का राशिफल 27 अप्रैल 2026: मेष और सिंह के लिए सफलता के संकेत, वृषभ और कन्या रहें सतर्क

    आज का राशिफल 27 अप्रैल 2026: मेष और सिंह के लिए सफलता के संकेत, वृषभ और कन्या रहें सतर्क


    नई दिल्ली। 27 अप्रैल 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि चंद्रमा और अन्य ग्रहों की चाल कई राशियों के जीवन में बदलाव के संकेत दे रही है। आज का दिन कुछ लोगों के लिए सफलता, आत्मविश्वास और नए अवसरों का द्वार खोल सकता है, जबकि कुछ राशियों को धैर्य और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है। यह दिन खासकर करियर, आर्थिक स्थिति, प्रेम संबंध और स्वास्थ्य के मामलों में मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिल सकते हैं और नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। सिंह राशि वालों के लिए भी यह समय आत्मविश्वास बढ़ाने और सामाजिक प्रतिष्ठा हासिल करने का है। इन दोनों राशियों को अपने प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। दूसरी ओर वृषभ और कन्या राशि के जातकों को आज आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी होगी। अनावश्यक खर्च या जल्दबाजी में लिया गया निर्णय नुकसान दे सकता है, इसलिए सोच-समझकर आगे बढ़ना जरूरी होगा।

    मिथुन और तुला राशि के लिए दिन संतुलन बनाने का है। काम और निजी जीवन के बीच तालमेल बनाए रखना जरूरी रहेगा। छोटी-मोटी परेशानियां आ सकती हैं, लेकिन संवाद और समझदारी से उनका समाधान संभव है। कर्क राशि के जातकों को भावनात्मक रूप से थोड़ा संवेदनशील रहना पड़ सकता है, इसलिए परिवार और निजी संबंधों में धैर्य बनाए रखना बेहतर होगा।

    वृश्चिक और धनु राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। नए अवसर, यात्राएं और सीखने के मौके मिलने की संभावना है। यह समय आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और नई योजनाओं को शुरू करने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। मकर और कुंभ राशि के जातकों को आज संयम और सावधानी से काम लेना होगा, क्योंकि कार्यक्षेत्र में कुछ दबाव या चुनौतियां सामने आ सकती हैं। धैर्य और योजना के साथ काम करने से स्थिति बेहतर होगी।

    मीन राशि के लिए आज का दिन सहयोग और टीमवर्क पर आधारित रहेगा। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और पुराने संपर्क फिर से सक्रिय हो सकते हैं। यह समय भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकेत देता है।

  • सोना पहनने से बदल सकता है भाग्य? इन राशियों को लेकर ज्योतिष में कही गई अहम सावधानियां

    सोना पहनने से बदल सकता है भाग्य? इन राशियों को लेकर ज्योतिष में कही गई अहम सावधानियां

    नई दिल्ली। सोने के आभूषण भारतीय परंपरा और संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं। इसे केवल एक कीमती धातु नहीं बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहों से जुड़ा शक्तिशाली तत्व भी माना जाता है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार सोने का संबंध सूर्य और गुरु ग्रह से जोड़ा जाता है, जिन्हें जीवन में ऊर्जा, आत्मविश्वास और सम्मान का कारक माना जाता है।

    ज्योतिष के अनुसार सोना हर व्यक्ति के लिए समान परिणाम नहीं देता। इसका प्रभाव व्यक्ति की राशि, ग्रहों की स्थिति और जन्म कुंडली पर निर्भर करता है। यही कारण है कि कुछ परिस्थितियों में सोना अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि कुछ मामलों में इसे पहनने से पहले सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    मान्यताओं के अनुसार मेष, कन्या और धनु राशि के जातकों के लिए सोने की अंगूठी पहनने को लेकर विशेष सावधानी बताई जाती है। कहा जाता है कि इन राशियों पर सोने का प्रभाव कभी-कभी असंतुलित परिणाम दे सकता है। ऐसी धारणा है कि गलत तरीके से सोना पहनने पर जीवन में आर्थिक उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव या कार्यों में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।

    हालांकि यह सभी विचार पूरी तरह परंपरागत और मान्यताओं पर आधारित हैं, जिनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है। आधुनिक दृष्टिकोण में इन्हें आस्था और सांस्कृतिक विश्वास का हिस्सा माना जाता है।

    ज्योतिष में सोना पहनने को लेकर कुछ नियम भी बताए गए हैं। कुछ परंपराओं में कहा जाता है कि सोने की अंगूठी को तर्जनी उंगली में पहनना शुभ होता है, जबकि कुछ स्थितियों में बाएं हाथ में सोना पहनने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गले में सोने की चेन पहनने को सकारात्मक ऊर्जा और संबंधों में स्थिरता से जोड़ा जाता है।

    कुछ मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी समस्याओं में सोने के आभूषण सहायक माने जा सकते हैं, लेकिन यह पूरी तरह विश्वास पर आधारित है और चिकित्सा विज्ञान इसका समर्थन नहीं करता।

  • आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र 'गरुड़ घंटी': जानिए पूजा के दौरान इसे बजाने के पीछे छिपे गहरे रहस्य

    आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र 'गरुड़ घंटी': जानिए पूजा के दौरान इसे बजाने के पीछे छिपे गहरे रहस्य

    नई दिल्ली। सनातन संस्कृति में पूजा-पाठ के दौरान घंटी बजाने का विधान सदियों पुराना है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर के छोटे से मंदिर में इस्तेमाल होने वाली घंटी का भी अपना एक विशेष विज्ञान और महत्व है? हिंदू परिवारों में मुख्य रूप से ‘गरुड़ घंटी’ का उपयोग किया जाता है, जिसके ऊपरी भाग पर भगवान विष्णु के वाहन और संदेशवाहक गरुड़ देव की आकृति बनी होती है।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गरुड़ देव को भगवान विष्णु का द्वारपाल माना गया है, इसलिए घर में इस घंटी का होना और इसे बजाना साक्षात श्रीहरि और माता लक्ष्मी को आमंत्रित करने के समान है।

    धार्मिक ग्रंथों में इस विशेष घंटी की ध्वनि को ‘ब्रह्म नाद’ की संज्ञा दी गई है। माना जाता है कि जब सृष्टि का निर्माण हुआ था, तब जो पहली आवाज गूँजी थी, घंटी की ध्वनि उसी का सूक्ष्म रूप है। यही कारण है कि पूजा के दौरान इसे बजाने से वातावरण शुद्ध हो जाता है और व्यक्ति का मन संसार की मोह-माया से हटकर सीधे ईश्वर की ओर केंद्रित होने लगता है।

    गरुड़ घंटी बजाने से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तेज होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, जिन घरों में नियमित रूप से गरुड़ घंटी का नाद होता है, वहां कभी दरिद्रता का वास नहीं होता और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है।

    वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी घंटी बजाने के कई फायदे बताए गए हैं। घंटी से निकलने वाली विशेष तरंगें और सूक्ष्म कंपन वातावरण में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, इसकी सुरीली आवाज हमारे मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को सक्रिय कर देती है, जिससे मानसिक तनाव और थकान कम होती है।

    आरती के समय घंटी बजाना हमारे एकाग्रता स्तर को बढ़ाता है, जिससे भक्त पूरी तरह से पूजा में लीन हो जाता है। गरुड़ जी की उपस्थिति इस बात का भी प्रतीक है कि हमारी प्रार्थनाओं को भगवान तक पहुँचाने का कार्य स्वयं उनके संदेशवाहक कर रहे हैं।

    शास्त्रों के अनुसार, घंटियों के मुख्य रूप से चार प्रकार होते हैं। ‘गरुड़ घंटी’ का प्रयोग व्यक्तिगत पूजा और छोटे मंदिरों में किया जाता है। इसके अलावा ‘द्वार घंटी’ होती है जो घरों या मंदिरों के प्रवेश द्वार पर शुभता के लिए लगाई जाती है। ‘हाथ घंटी’ पीतल की एक गोलाकार प्लेट की तरह होती है जिसे लकड़ी के डंडे से बजाया जाता है, जबकि ‘बड़ा घंटा’ मंदिरों के विशाल प्रांगण में स्थापित किया जाता है जिसकी गूँज मीलों दूर तक सुनाई देती है।

    इन सभी में गरुड़ घंटी को घर की सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सबसे उत्तम और प्रभावी माना गया है। घर में नियमित इसका प्रयोग न केवल सौभाग्य लाता है बल्कि जीवन में अनुशासन और शांति का भी संचार करता है।

  • बुध गोचर 2026: अप्रैल के अंत में बनेगा बुधादित्य राजयोग, इन राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा

    बुध गोचर 2026: अप्रैल के अंत में बनेगा बुधादित्य राजयोग, इन राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा


    नई दिल्ली। अप्रैल 2026 के आखिरी दिनों में ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई ग्रह राशि परिवर्तन करता है तो उसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में पड़ता है।

    इस बार बुध गोचर मेष राशि में प्रवेश करने जा रहा है। बुध को बुद्धि, व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। इसी समय सूर्य पहले से ही मेष राशि में मौजूद रहेंगे, जिससे दोनों ग्रहों की युति बनकर बुधादित्य राजयोग का निर्माण होगा। यह योग ज्योतिष में अत्यंत शुभ माना जाता है और माना जाता है कि यह आर्थिक उन्नति और करियर में सफलता दिला सकता है। इस गोचर का प्रभाव कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहने की संभावना है।

    मेष राशि:-
    मेष राशि के जातकों के लिए यह समय बेहद अनुकूल माना जा रहा है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। निवेश से लाभ और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं।

    मिथुन राशि:-
    मिथुन राशि वालों के लिए यह गोचर आय में वृद्धि का संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। करियर में नए अवसर मिल सकते हैं और पारिवारिक जीवन में खुशहाली बढ़ सकती है।

    मकर राशि:-
    मकर राशि के लिए यह गोचर भाग्यवृद्धि लेकर आ सकता है। अटके हुए कार्य पूरे होंगे और कर्ज से राहत मिलने की संभावना है। संपत्ति से जुड़े मामलों में सफलता मिल सकती है और नौकरी में पदोन्नति के योग भी बन रहे हैं।

  • Astro Tips: घर में दरिद्रता ला सकती है आपकी ये 4 आदतें, ज्योतिष में बताया गया अलक्ष्मी का संकेत

    Astro Tips: घर में दरिद्रता ला सकती है आपकी ये 4 आदतें, ज्योतिष में बताया गया अलक्ष्मी का संकेत


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इंसान की दिनचर्या और उसकी कुछ सामान्य आदतें भी उसके जीवन, भाग्य और आर्थिक स्थिति पर असर डालती हैं। शास्त्रों में जहां कई आदतों को शुभ और लाभकारी बताया गया है, वहीं कुछ व्यवहार ऐसे भी माने जाते हैं जो घर की बरकत को प्रभावित कर सकते हैं और आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, अनजाने में की जाने वाली कुछ आदतें घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती हैं, जिसे अलक्ष्मी का प्रभाव माना जाता है। आइए जानते हैं ऐसी कुछ आदतें जिन्हें सुधारने की सलाह दी जाती है।

    बैठे-बैठे पैर हिलाने की आदत

    ज्योतिष के अनुसार बिना वजह लगातार पैर हिलाना अशुभ माना जाता है। इसे मानसिक अस्थिरता और चंद्रमा की कमजोरी से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि यह आदत आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकती है और अनावश्यक खर्च बढ़ा सकती है।

    नाखून चबाने की आदत

    नाखूनों को दांतों से चबाना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि इसे नकारात्मक आदत भी माना गया है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह आत्मविश्वास को प्रभावित करती है और करियर में बाधाएं उत्पन्न कर सकती है। इसे दरिद्रता को आकर्षित करने वाली आदतों में भी शामिल किया गया है।
    भोजन बनाते समय बार-बार चखना या खाना
    शास्त्रों में रसोई को पवित्र स्थान और मां अन्नपूर्णा का प्रतीक माना गया है। ऐसे में खाना बनाते समय बार-बार भोजन चखना या उसे जूठा करना अनुशासनहीन माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में अन्न और धन की कमी हो सकती है और बरकत प्रभावित होती है।

    दोनों हाथों से सिर खुजलाना

    ज्योतिष ग्रंथों में शरीर की गतिविधियों को लेकर भी कुछ संकेत बताए गए हैं। इनमें दोनों हाथों से एक साथ सिर खुजलाना अशुभ माना गया है। कहा जाता है कि यह आदत निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकती है और आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।

  • हथेली में सूर्य और भाग्य रेखा का संयोग दिला सकता है धन और प्रसिद्धि, जानिए हस्तरेखा के संकेत

    हथेली में सूर्य और भाग्य रेखा का संयोग दिला सकता है धन और प्रसिद्धि, जानिए हस्तरेखा के संकेत


    नई दिल्ली। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली की रेखाएं और पर्वत केवल हाथ की संरचना नहीं होतीं, बल्कि इन्हें व्यक्ति के भाग्य और जीवन की संभावनाओं का संकेत माना जाता है। मान्यता है कि कुछ लोगों को कड़ी मेहनत के बाद भी आर्थिक संघर्ष करना पड़ता है, जबकि कुछ लोग अपेक्षाकृत कम प्रयास में ही सफलता और धन प्राप्त कर लेते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, हथेली पर मौजूद भाग्य रेखा, सूर्य पर्वत, शनि पर्वत और बुध पर्वत की स्थिति यह तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि व्यक्ति के जीवन में धन, सफलता और स्थिरता कैसी रहेगी।

    भाग्य रेखा का महत्व

    धन और सफलता के योग में भाग्य रेखा को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह रेखा हथेली के निचले हिस्से से शुरू होकर मध्यमा उंगली के नीचे स्थित शनि पर्वत की ओर बढ़ती है। अगर यह रेखा गहरी, स्पष्ट और बिना टूटे शनि पर्वत तक पहुंचे तो व्यक्ति को जीवन में आर्थिक स्थिरता मिलने की संभावना मानी जाती है।

    यदि यह रेखा मस्तिष्क रेखा के पास जाकर दो भागों में बंट जाए और उसका एक हिस्सा बुद्धि रेखा से जुड़ जाए, तो इसे धन और समृद्धि का विशेष योग माना जाता है। ऐसे व्यक्ति अपनी समझ और निर्णय क्षमता के बल पर संपत्ति अर्जित करने में सफल होते हैं।

    सूर्य पर्वत का संकेत

    अनामिका उंगली के नीचे स्थित सूर्य पर्वत व्यक्ति की प्रतिष्ठा, सम्मान और सफलता को दर्शाता है। यदि यह पर्वत उभरा हुआ, साफ और गुलाबी हो, तो व्यक्ति को समाज में नाम और पहचान मिलने की संभावना मानी जाती है।

    इसके साथ ही यदि सूर्य पर्वत पर त्रिकोण या सीधी रेखाएं हों, तो यह व्यापार, नेतृत्व क्षमता और सफलता के अच्छे संकेत माने जाते हैं। अगर भाग्य रेखा का संपर्क सूर्य पर्वत से हो जाए, तो ऐसे व्यक्ति को कम प्रयास में भी बड़ी सफलता और प्रसिद्धि मिलने का योग माना जाता है।

  • ज्येष्ठ मास 2026 बड़ा मंगल का महासंयोग नौकरी कारोबार में सफलता और संकटों से मुक्ति का सुनहरा अवसर

    ज्येष्ठ मास 2026 बड़ा मंगल का महासंयोग नौकरी कारोबार में सफलता और संकटों से मुक्ति का सुनहरा अवसर


    नई दिल्ली। ज्येष्ठ मास 2026 इस बार अत्यंत विशेष और दुर्लभ संयोग लेकर आ रहा है क्योंकि इस वर्ष यह महीना लगभग साठ दिनों का होगा और इसमें अधिकमास का भी प्रभाव देखने को मिलेगा जिससे इसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है इस अवधि को भक्तजन विशेष पुण्य अर्जित करने और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का श्रेष्ठ अवसर मान रहे हैं

    शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ मास भगवान हनुमान की उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है इस महीने में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है मान्यता है कि इसी महीने के मंगलवार को हनुमान जी का श्रीराम से प्रथम मिलन हुआ था इसलिए इस दिन की पूजा का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है वर्ष 2026 में अधिकमास के कारण इस बार आठ बड़े मंगल का विशेष योग बन रहा है जिससे यह समय और भी शक्तिशाली और शुभ माना जा रहा है

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़ा मंगल के दिन किए गए उपाय जीवन में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं और व्यक्ति के करियर आर्थिक स्थिति तथा मानसिक शांति पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं ऐसा कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा हनुमान जी को शीघ्र प्रसन्न करती है और भक्तों के संकट दूर होते हैं

    यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी कर्ज या रुके हुए धन से परेशान है तो ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है श्रद्धा भाव से हनुमान मंदिर में बैठकर इस स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और आर्थिक बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं ऐसा विश्वास है कि इससे जीवन में स्थिरता आती है और कर्ज से मुक्ति के मार्ग खुलते हैं

    करियर और नौकरी में तरक्की के लिए बड़ा मंगल विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया है यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से प्रमोशन नहीं मिल रहा या मेहनत का उचित फल नहीं मिल रहा तो इस दिन हनुमान जी को मीठा पान अर्पित करना शुभ माना जाता है पान को सफलता और कार्य सिद्धि का प्रतीक माना जाता है इससे कार्यस्थल की बाधाएं दूर होती हैं और नए अवसर प्राप्त होते हैं

    विवाह में देरी या मांगलिक दोष से परेशान लोगों के लिए भी यह समय अत्यंत शुभ बताया गया है ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी को लाल चोला अर्पित करने से वैवाहिक बाधाएं दूर होने की मान्यता है इससे रिश्तों में सुधार आता है और जीवन में स्थिरता बढ़ती है

    मानसिक तनाव चिंता या शारीरिक पीड़ा से जूझ रहे लोगों के लिए भी बड़ा मंगल विशेष राहत देने वाला माना गया है इस दिन हनुमान जी को सुगंधित इत्र और केवड़े की माला अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है साथ ही लाल वस्त्र धारण करने की सलाह दी जाती है क्योंकि लाल रंग ऊर्जा साहस और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है

    इस प्रकार ज्येष्ठ मास 2026 का बड़ा मंगल भक्तों के लिए केवल धार्मिक अवसर ही नहीं बल्कि जीवन में नई दिशा देने वाला समय माना जा रहा है जिसमें श्रद्धा और भक्ति से किए गए कार्य कई गुना फल देने वाले माने गए हैं

  • ज्येष्ठ मास 2026 में 60 दिन का दुर्लभ संयोग ,दोगुना पुण्य और आस्था का महासंगम

    ज्येष्ठ मास 2026 में 60 दिन का दुर्लभ संयोग ,दोगुना पुण्य और आस्था का महासंगम


    नई दिल्ली। इस वर्ष ज्येष्ठ मास का विशेष संयोग देखने को मिल रहा है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास लगभग 60 दिन का होगा। ऐसा दुर्लभ योग कई वर्षों बाद बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय अत्यंत पुण्यदायी माना जा रहा है। इस बार अधिकमास के कारण ज्येष्ठ मास का महत्व और अधिक बढ़ गया है। भक्तजन इस अवधि को भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर मान रहे हैं।

    ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई 2026 से हो रही है और यह 29 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना अधिक माना जाता है। इसलिए इसे दोगुना पुण्य देने वाला महीना कहा जा रहा है।

    इस महीने में मंगलवार का विशेष महत्व होता है जिसे बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। इस बार ज्येष्ठ मास लंबे होने के कारण बड़े मंगल की संख्या बढ़कर आठ हो जाएगी। भक्त इस दिन हनुमान जी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इससे संकट दूर होते हैं और जीवन में सुख शांति आती है।

    ज्येष्ठ मास में दान पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान गर्मी चरम पर होती है इसलिए जल सेवा को सबसे बड़ा पुण्य कार्य माना जाता है। लोग राहगीरों को पानी पिलाते हैं। प्याऊ लगवाते हैं। पशु पक्षियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करते हैं। इससे सकारात्मक ऊर्जा और पुण्य प्राप्त होता है।

    इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान है। तिल अन्न और सत्तू का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ऐसा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख समृद्धि बढ़ती है। साथ ही इस महीने में सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है।

    भक्तजन इस पूरे महीने नियम संयम का पालन करते हैं। दिन में एक बार भोजन करना और सरल जीवन जीना पुण्यकारी माना जाता है। मंगलवार के दिन हनुमान मंदिरों में विशेष भंडारे और पूजा आयोजन किए जाते हैं। बूंदी के लड्डू का भोग लगाया जाता है।

    ज्येष्ठ मास में सूर्य की तीव्र गर्मी रहती है इसलिए दोपहर के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो सूती वस्त्र पहनकर शरीर को ढककर निकलना चाहिए। इससे स्वास्थ्य की रक्षा होती है।

    इस प्रकार यह ज्येष्ठ मास धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकमास के कारण इसका प्रभाव और भी बढ़ गया है। भक्तजन इसे जीवन में पुण्य अर्जित करने का श्रेष्ठ अवसर मान रहे हैं।

    यह अवधि भक्तों के लिए विशेष साधना और सेवा का समय मानी जाती है। इस दौरान किए गए छोटे से छोटे पुण्य कार्य का भी बड़ा फल मिलता है। इसलिए लोग इस मास को आध्यात्मिक उन्नति का सुनहरा अवसर मानते हैं और श्रद्धा के साथ इसका पालन करते हैं।

  • मई 2026 में गूंजेंगी सिर्फ कुछ ही दिन शहनाइयां जानिए पूरी विवाह मुहूर्त सूची

    मई 2026 में गूंजेंगी सिर्फ कुछ ही दिन शहनाइयां जानिए पूरी विवाह मुहूर्त सूची

    नई दिल्ली। भारत में शादी का मौसम हमेशा उत्सव जैसा माहौल लेकर आता है जहां हर गली मोहल्ले में ढोल नगाड़े और शहनाइयों की गूंज सुनाई देती है और परिवारों में खुशी का माहौल होता है लेकिन मई 2026 में यह खुशियों का सिलसिला कुछ ही दिनों तक सीमित रहने वाला है क्योंकि इसके बाद अधिकमास शुरू हो जाएगा

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिकमास को बहुत ही विशेष समय माना जाता है जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है इस दौरान सभी शुभ कार्यों जैसे विवाह सगाई गृह प्रवेश आदि पर रोक लग जाती है वर्ष 2026 में यह अधिकमास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा इस कारण मई के मध्य के बाद शादी विवाह के योग समाप्त हो जाएंगे

    इससे पहले मई महीने में कुछ ही दिन ऐसे रहेंगे जब विवाह के शुभ मुहूर्त बन रहे हैं जिनमें परिवार अपनी शादियों की तैयारियां पूरी कर सकते हैं और धूमधाम से विवाह समारोह आयोजित कर सकते हैं

    मई 2026 में विवाह के प्रमुख शुभ दिन इस प्रकार रहेंगे

    1 मई 2026 शुक्रवार को स्वाति नक्षत्र और पूर्णिमा तिथि का संयोग रहेगा यह दिन सुबह से रात तक विवाह के लिए बेहद अनुकूल रहेगा और मांगलिक कार्य किए जा सकेंगे

    3 मई 2026 रविवार को अनुराधा नक्षत्र के प्रभाव में पूरा दिन विवाह के लिए शुभ रहेगा और इस दिन कई परिवार अपने विवाह समारोह आयोजित कर सकते हैं

    5 मई 2026 मंगलवार की शाम से अगले दिन सुबह तक विवाह का अच्छा मुहूर्त बन रहा है जो रात के समय विवाह के लिए विशेष रूप से उपयुक्त रहेगा

    6 मई 2026 बुधवार को सुबह से दोपहर तक विवाह के लिए समय अनुकूल रहेगा हालांकि इस दिन मूल नक्षत्र होने के कारण कुछ लोग ज्योतिषीय सलाह लेकर ही कार्य करेंगे

    7 मई 2026 गुरुवार को उत्तरा आषाढ़ नक्षत्र रहेगा जिसे विवाह के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है और इस दिन शाम से अगले दिन तक विवाह हो सकते हैं

    8 मई 2026 शुक्रवार को सुबह से दोपहर तक विवाह के लिए शुभ समय रहेगा और यह दिन भी विशेष रूप से अच्छा माना जा रहा है

    13 मई 2026 बुधवार को रात से अगले दिन सुबह तक विवाह का मुहूर्त रहेगा और इस दिन उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव रहेगा

    14 मई 2026 गुरुवार को सुबह से शाम तक विवाह के लिए अनुकूल समय रहेगा और यह इस महीने के अंतिम बड़े शुभ मुहूर्तों में से एक होगा

    इसके बाद जैसे ही 17 मई से अधिकमास शुरू होगा वैसे ही विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा और लोगों को फिर 15 जून के बाद ही नए विवाह मुहूर्त का इंतजार करना पड़ेगा

    इस प्रकार मई 2026 शादी के इच्छुक परिवारों के लिए सीमित लेकिन महत्वपूर्ण अवसर लेकर आ रहा है जिसमें सही तिथि और समय का चयन करके शुभ विवाह संपन्न किए जा सकते हैं