Category: Religious Astrology

  • आज का पंचांग और होलिका दहन: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक आयोजन

    आज का पंचांग और होलिका दहन: राहुकाल, शुभ मुहूर्त और धार्मिक आयोजन

     
    नई दिल्ली :आज 3 मार्च 2026 मंगलवार को फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि है और पूरे देश में होलिका दहन का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि आज शाम 5:07 बजे तक रहेगी और इसके बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ होगी। सूर्योदय आज प्रातः 6:44 बजे होगा और सूर्यास्त सायं 6:22 बजे होगा।

    चंद्रमा आज सिंह राशि में मघा नक्षत्र में विराजमान हैं और यह नक्षत्र प्रातः 7:31 बजे तक रहेगा। मघा नक्षत्र के देवता पितृ माने गए हैं, इसलिए आज का दिन पूर्वजों के स्मरण, आशीर्वाद और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत फलदायी है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस दिन की पूजा और धार्मिक अनुष्ठान विशेष फलदायक होते हैं। चंद्रोदय सायं 6:21 बजे होगा और चंद्रास्त नहीं होगा, जिससे पूर्णिमा की रात विशेष महत्व रखती है।

    ग्रहों की स्थिति पर नजर डालें तो सूर्य, मंगल, बुध और राहु कुंभ राशि में स्थित हैं। गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में, जबकि शुक्र और शनि मीन राशि में विराजमान हैं और केतु सिंह राशि में हैं। इन ग्रहों की स्थिति सामाजिक सक्रियता और धार्मिक आयोजनों को बल देने वाली मानी जाती है।

    आज का योग ‘सुकर्मा’ है, जो प्रातः 10:25 बजे तक रहेगा। यह योग नए कार्यों की शुरुआत और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। करण बव आज सायं 5:07 बजे तक रहेगा और इसके बाद अगले दिन प्रातः 4:54 बजे तक अन्य करण प्रभावी रहेगा।

    शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:10 बजे से 12:56 बजे तक है। इस दौरान महत्वपूर्ण निर्णय लेना, पूजा-अर्चना करना और नए कार्य की शुरुआत करना लाभकारी माना जाता है। अमृत काल 4 मार्च की प्रातः 1:13 बजे से 2:49 बजे तक रहेगा।

    अशुभ समय में राहुकाल दोपहर 3:28 बजे से 4:55 बजे तक रहेगा, इस दौरान किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से बचना चाहिए। गुलिकाल दोपहर 12:33 बजे से 2:00 बजे तक है और यमगण्ड प्रातः 9:39 बजे से 11:06 बजे तक रहेगा। धार्मिक विशेषज्ञों का कहना है कि राहुकाल के समय किसी भी निर्णय या पूजा से बचना चाहिए और शुभ मुहूर्त का ही पालन करना चाहिए।

    देशभर में होलिका दहन की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। पूर्णिमा तिथि पर विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और रात्रि में होलिका दहन का आयोजन किया जाएगा। धार्मिक आस्थावानों को सलाह दी गई है कि इस दिन दान-पुण्य करें, पारिवारिक एकता बनाए रखें और आध्यात्मिक साधना में समय दें।

    पूर्णिमा और मघा नक्षत्र का यह संयोजन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी है। यह दिन न केवल धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयुक्त है बल्कि सामाजिक और पारिवारिक मेल-जोल के लिए भी महत्वपूर्ण है। पंचांग के जानकारों के अनुसार इस दिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करने से मनोकामना पूरी होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    आज का दिन आध्यात्मिक जागरूकता और धार्मिक गतिविधियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। राहुकाल में सतर्क रहने और शुभ मुहूर्त का लाभ उठाने से सभी कार्य सफल और फलदायी होंगे। होलिका दहन के साथ यह पूर्णिमा तिथि जीवन में अच्छाई और समृद्धि का संदेश लेकर आती है।

  • उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

    उज्जैन में चंद्र ग्रहण के कारण मंदिरों के पट बंद, श्रद्धालु करेंगे बाहर से पूजा; महाकाल मंदिर में रहेगी विशेष व्यवस्था!

     उज्जैनउज्जैन में मंगलवार को चंद्र ग्रहण के चलते शहर के कई प्रमुख मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। सुबह 6:47 बजे शुरू हुए सूतक काल के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के अलावा अन्य मंदिरों में दर्शन वर्जित रहे। सूतक शाम 6:47 बजे तक रहेगा, जिसके बाद मंदिरों में शुद्धिकरण और संध्या आरती के बाद दर्शन फिर से शुरू होंगे।

    महाकाल मंदिर के पट खुले रहने के बावजूद गर्भगृह में पुजारियों ने मंत्रोच्चार किया। श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर से ही भगवान के दर्शन कर रहे थे। इस दौरान मंदिर में केवल मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान चल रहे थे। शहर के अन्य प्रमुख मंदिर जैसे सांदीपनि आश्रम, मंगलनाथ मंदिर, अंगारेश्वर मंदिर और गोपाल मंदिर में सुबह 5 बजे तक नियमित पूजा हुई, उसके बाद सूतक लगते ही पट बंद कर दिए गए।

    सूतक के दौरान भक्तों ने मंदिर के बाहर ही भगवान के दर्शन किए। मंगलनाथ मंदिर में भी पट बंद रहने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अंगारेश्वर, गोपाल, चिंताहरण हनुमान और सिद्धेश्वर मंदिर सहित हजारों मंदिरों में दर्शन रोक दिए गए थे। मंदिर प्रशासन ने कहा कि शाम को सूतक समाप्त होने के बाद सभी मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद भगवान का स्नान, श्रृंगार और संध्या आरती की जाएगी।

    ज्योतिषाचारियों के अनुसार सूतक काल में पूजा, भोग और मूर्ति के स्पर्श वर्जित होते हैं। यही कारण है कि अधिकांश मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई। हालांकि महाकाल मंदिर में भक्त दर्शन कर सकते हैं, लेकिन गर्भगृह में पुजारियों ने ही मंत्रोच्चार और अनुष्ठान जारी रखा।

    सूतक से पहले होली का उत्सव भी मंदिरों में पारंपरिक रूप से मनाया गया। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के साथ हर्बल गुलाल और फूलों से होली खेली। इसके बाद विधि-विधान से मंदिरों के पट बंद कर दिए गए और दर्शन वर्जित कर दिए गए।

    मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अपील की कि वे सूतक के दौरान मंदिर परिसर में प्रवेश न करें और बाहर से ही पूजा करें। संध्या में पट खुलने के बाद सभी मंदिरों में धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से शुरू हो जाएंगी।

    इस तरह, चंद्र ग्रहण के दौरान उज्जैन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक परंपरा दोनों का ध्यान रखा गया। भक्तों ने मंदिरों के बाहर भी पूजा कर अपनी आस्था व्यक्त की। सूतक समाप्ति के बाद मंदिरों में संपूर्ण शुद्धिकरण और भव्य संध्या आरती के साथ दर्शन शुरू होंगे, जिससे शहर में धार्मिक माहौल पूरी तरह लौट आएगा।

  • चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां

    चैती छठ 2026: 22 मार्च से शुरू होगा महापर्व, जानिए नहाय खाय से पारण तक की सटीक तिथियां


    नई दिल्ली । चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही लोक आस्था का महापर्व चैती छठ आने वाला है। सूर्योपासना को समर्पित यह चार दिवसीय व्रत विशेष रूप से बिहार झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। छठ पर्व में भगवान Surya और Chhathi Maiya की उपासना की जाती है। मान्यता है कि यह व्रत संतान सुख दीर्घायु और परिवार की समृद्धि के लिए अत्यंत फलदायी होता है। पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होगी और 25 मार्च को उषा अर्घ्य व पारण के साथ इसका समापन होगा।

    चैती छठ 2026 की प्रमुख तिथियां

    नहाय खाय 22 मार्च 2026 पहला दिन इस दिन व्रती पवित्र नदी या घर में स्नान कर शुद्ध और सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। परंपरागत रूप से कद्दू भात कद्दू की सब्जी और चावल बनाया जाता है। इसी के साथ व्रत की औपचारिक शुरुआत होती है।

    खरना 23 मार्च 2026 दूसरा दिन

    व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखते हैं। शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है।

    संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026 तीसरा दिन

    इस दिन अस्ताचलगामी सूर्य को नदी तालाब या जलाशय के किनारे अर्घ्य अर्पित किया जाता है। यह छठ पर्व का सबसे भावनात्मक और भव्य दृश्य होता है जब घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    उषा अर्घ्य एवं पारण 25 मार्च 2026 चौथा दिन

    अगली सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही व्रत का समापन होता है और प्रसाद ग्रहण कर पारण किया जाता है।
    चैती छठ का धार्मिक महत्व
    यह पर्व शुद्धता संयम और अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। मान्यता है कि व्रत करने से संतान सुख और परिवार की खुशहाली प्राप्त होती है। चैत्र मास में होने के कारण इसे विशेष आध्यात्मिक फल देने वाला माना जाता है।छठ पूजा में बनाया जाने वाला ठेकुआ मुख्य प्रसाद होता है जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। चैती छठ प्रकृति सूर्य और जल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला यह व्रत आत्मसंयम भक्ति और पारिवारिक एकता का संदेश देता है।

  • फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026: इस विधि से रखें व्रत, बरसेगी विष्णु लक्ष्मी की असीम कृपा


    नई दिल्ली । फाल्गुन मास की पूर्णिमा सनातन परंपरा में अत्यंत पावन मानी गई है। इसे वसंत पूर्णिमा और होली पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष की अंतिम पूर्णिमा होती है और इस दिन भगवान Vishnu माता Lakshmi भगवान Narasimha तथा Radha Krishna की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से सुख समृद्धि सौभाग्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।

    फाल्गुन पूर्णिमा 2026 का शुभ मुहूर्त

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से प्रारंभ होकर 3 मार्च 2026 को शाम 5:07 बजे तक रहेगी। 3 मार्च को चंद्र ग्रहण और सूतक लगने के कारण पूजा में बाधा रहेगी इसलिए 2 मार्च 2026 को व्रत रखना अधिक शुभ माना गया है।

    फाल्गुन पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

    पूर्णिमा व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। इस दिन स्नान दान जप और पूजा करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे धन धान्य में वृद्धि होती है और कुंडली में चंद्र दोष होने पर मानसिक शांति मिलती है। व्रत करने वालों को अगले दिन स्नान दान अवश्य करना चाहिए तभी व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
    फाल्गुन पूर्णिमा व्रत विधि
    प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करें। संभव हो तो पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करें। सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। घर में स्वच्छ स्थान पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। तिलक पुष्प और वस्त्र अर्पित करें।  ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। भोग लगाकर पूर्णिमा व्रत कथा का पाठ करें और आरती करें। चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को जल में कच्चा दूध मिलाकर अर्घ्य दें। इसके बाद प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें। अगले दिन दान पुण्य अवश्य करें।

    विशेष मंत्र और महाउपाय

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र का 108 बार जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही जरूरतमंदों को अन्न वस्त्र या धन का दान करने से लक्ष्मी कृपा स्थायी होती है।यह दिन भक्ति श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। विधि विधान से श्री लक्ष्मीनारायण की आराधना करने पर जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

  • Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें

    Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ब्लड मून, जानिए ग्रहण से जुड़ी 15 जरूरी बातें


    नई दिल्ली । 3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह खगोलीय घटना इसलिए खास है क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे ब्लड मून कहा जाता है। भारत में भी यह ग्रहण देखा जा सकेगा। आइए ग्रहण से जुड़े 15 महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सरल भाषा में समझते हैं।

    चंद्र ग्रहण कब लगेगा?

    3 मार्च 2026 मंगलवार को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। भारत में ग्रहण का समय क्या रहेगा? भारतीय समयानुसार ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। भारत में यह मुख्यतः चंद्रोदय के समय दिखाई देगा।

    क्या यह पूरे भारत में दिखेगा?

    हाँ, पूरे भारत में देखा जा सकेगा, लेकिन अधिकांश जगहों पर इसका अंतिम आंशिक चरण ही दिखाई देगा। पूर्वोत्तर राज्यों में दृश्य अधिक स्पष्ट रहेगा।

    सूतक काल कब से लगेगा?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू होता है। यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक मान्य होगा।

    ब्लड मून क्या होता है?

    पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है। सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुँचती, बल्कि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर लाल प्रकाश चंद्रमा तक जाता है। इससे चंद्रमा तांबे या लाल रंग का दिखता है इसे ही ब्लड मून कहते हैं।

    क्या चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देख सकते हैं?

    हाँ, चंद्र ग्रहण को बिना किसी विशेष उपकरण के सुरक्षित रूप से देखा जा सकता है।

    क्या इसे देखने के लिए चश्मा जरूरी है?
    नहीं। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण देखने के लिए विशेष चश्मे की जरूरत नहीं होती।

    क्या गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखनी चाहिए?
    वैज्ञानिक रूप से कोई हानिकारक प्रभाव सिद्ध नहीं है। हालांकि, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    क्या ग्रहण के दौरान खाना खा सकते हैं?

    वैज्ञानिक दृष्टि से खाना खाने पर कोई रोक नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल में भोजन न करने की परंपरा है।

    मंदिर कब बंद होंगे?
    अधिकांश मंदिर सूतक काल से ही बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण के पश्चात खुलते हैं।

    क्या ग्रहण का असर राशियों पर पड़ता है?
    ज्योतिष के अनुसार कुछ राशियों पर प्रभाव बताया जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है।

    ग्रहण कितनी देर का होगा?
    कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट की रहेगी, लेकिन भारत में पूरा चरण दिखाई नहीं देगा।

    क्या यह साल का इकलौता चंद्र ग्रहण है?
    नहीं, 2026 में अन्य ग्रहण भी लग सकते हैं, लेकिन 3 मार्च का यह पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।

    ग्रहण क्यों लगता है?
    जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तब चंद्र ग्रहण होता है।

    यह घटना क्यों खास है?
    पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का लाल रंग में बदलना एक दुर्लभ और आकर्षक दृश्य होता है, जिसे देखने के लिए खगोल प्रेमी विशेष इंतजार करते हैं। 3 मार्च की शाम आसमान में दिखने वाला ब्लड मून विज्ञान और आस्था दोनों के लिए खास अनुभव होगा। यदि मौसम साफ रहा तो यह नजारा बेहद मनमोहक होगा।

  • 3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    3 मार्च का पंचांग: पूर्णिमा पर बन रहे शुभ संयोग, जानें कब करें महत्वपूर्ण काम

    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में पंचांग केवल तिथि बताने का माध्यम नहीं, बल्कि दिन की दिशा तय करने वाला मार्गदर्शक माना जाता है। 3 मार्च को फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि और मंगलवार का संयोग बन रहा है। मंगलवार का दिन आदि शक्ति और श्रीराम भक्त हनुमान को समर्पित होता है, ऐसे में इस दिन पूजा-पाठ और विशेष साधना का महत्व और बढ़ जाता है।

    तिथि, नक्षत्र और योग का पूरा ब्योरा
    3 मार्च को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 44 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। पूर्णिमा तिथि शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी, लेकिन उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन पूर्णिमा का ही मान रहेगा। नक्षत्र मघा सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगा, इसके बाद पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। सुकर्मा योग सुबह 10 बजकर 25 मिनट तक और बव करण शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगा।

    विजय मुहूर्त और अमृत काल का खास महत्व
    इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:05 से 5:55 बजे तक रहेगा, जो साधना और ध्यान के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:10 से 12:56 बजे तक और विजय मुहूर्त दोपहर 2:29 से 3:16 बजे तक रहेगा। विजय मुहूर्त में नए कार्य, महत्वपूर्ण निर्णय या यात्रा प्रारंभ करना विशेष फलदायी माना जाता है।

    गोधूलि मुहूर्त शाम 6:20 से 6:44 बजे तक रहेगा। अमृत काल रात 1:13 से 2:49 बजे तक है, जो मंत्र जप और विशेष पूजा के लिए अत्यंत शुभ है। निशीथ मुहूर्त रात 12:08 से 12:57 बजे तक रहेगा।

    राहुकाल और अन्य अशुभ समय
    शुभ समय के साथ अशुभ काल का ध्यान रखना भी आवश्यक है। राहुकाल दोपहर 3:28 से 4:55 बजे तक रहेगा। इस अवधि में नए और शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। यमगंड सुबह 9:39 से 11:06 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 12:33 से 2:00 बजे तक रहेगा।

    दुर्मुहूर्त सुबह 9:04 से 9:50 बजे तक है। गण्ड मूल सुबह 6:44 से 7:31 बजे तक रहेगा। वर्ज्य काल दोपहर 3:34 से 5:10 बजे तक रहेगा।

    पूर्णिमा और मंगलवार का यह संगम आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। यदि आप किसी नए कार्य की योजना बना रहे हैं या विशेष पूजा-अर्चना करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान रखकर शुरुआत करें।

  • साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग

    साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को… जानिए ग्रहण और सूतक काल की टाइमिंग


    नई दिल्ली।
    कल 3 मार्च 2026 को साल का पहला चंद्र ग्रहण (Chandra Grahan 2026) लगने जा रहा है. यह ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत (India) में दिखाई देगा, इसलिए यहां सूतक काल (Sutak Period) मान्य होगा और धार्मिक नियमों का पालन किया जाएगा. मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और पूजा-पाठ नहीं किया जाता. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिरों की सफाई कर गंगाजल का छिड़काव किया जाता है और फिर नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है।

    ज्योतिष के अनुसार, यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है. इसका प्रभाव खासतौर पर कुछ राशियों पर अधिक देखने को मिल सकता है।

    चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल टाइमिंग (Chandra Grahan 2026 Sutak kaal Timing)
    यह चंद्र ग्रहण भारत के पूर्वी हिस्सों में ज्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जबकि अन्य क्षेत्रों में आंशिक रूप से नजर आ सकता है. भारत के अलावा यह ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी दिखाई देगा.


    चंद्र ग्रहण का प्रभाव

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण का असर सबसे पहले मन और भावनाओं पर पड़ेगा. इस दौरान व्यक्ति को मानसिक अस्थिरता, चिंता या निर्णय लेने में भ्रम महसूस हो सकता है. इसलिए इस समय शांत रहना और बड़े फैसलों से बचना बेहतर माना जाता है. तो आइए पंडित प्रवीण मिश्र के द्वारा जानते हैं कि चंद्रग्रहण किन राशियों के लिए अशुभ रहेगा।


    कर्क राशि (Cancer)

    कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा होते हैं, इसलिए इस राशि के जातकों पर ग्रहण का प्रभाव अधिक महसूस हो सकता है. आर्थिक मामलों, निवेश और प्रॉपर्टी से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें. परिवार, खासकर माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें और वाणी में संयम बनाए रखें.
    उपाय: भगवान शिव को जल अर्पित करें और ”ऊं नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें.


    सिंह राशि (Leo)

    यह ग्रहण सिंह राशि में ही लग रहा है, इसलिए इस राशि के लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. आने वाले 15 दिनों तक बड़े फैसले टालें, खर्चों पर नियंत्रण रखें और रिश्तों में संतुलन बनाए रखें.
    उपाय: ग्रहण के बाद स्नान करें, दान करें और भगवान शिव का अभिषेक करें.


    कन्या राशि (Virgo)

    कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण खर्च और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है. अनावश्यक खर्च से बचें और नकारात्मक सोच से दूरी बनाए रखें. करियर से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी न करें.
    उपाय: भगवान शिव की पूजा करें, बेलपत्र अर्पित करें और नियमित मंत्र जाप करें.

  • इस सप्ताह का राशिफल: 1 मार्च – 7 मार्च 2026, मौका और सतर्कता दोनों साथ

    साप्ताहिक राशिफल 1 मार्च से 7 मार्च 2026
    यह सप्ताह मिश्रित परिणाम लेकर आया है। आर्थिक और करियर के मामलों में कुछ जातकों के लिए सफलता के योग हैं, जबकि स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में सतर्कता जरूरी है। धैर्य और समझदारी से उठाए गए कदम लाभकारी रहेंगे।

    मेष (Aries)
    स्वास्थ्य में गिरावट संभव है, सतर्क रहें। आर्थिक दृष्टि से लाभ के योग हैं और व्यापार या नौकरी में सफलता मिल सकती है। कार्यक्षेत्र में नई साझेदारियों और अवसरों के संकेत हैं। लव लाइफ में संवाद पर ध्यान दें, मतभेद को बिगड़ने न दें।

    वृषभ (Taurus)
    स्वास्थ्य में गिरावट और मानसिक तनाव संभव है। आर्थिक उतार-चढ़ाव रहेंगे, खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। कार्य में बदलाव और अधिक परिश्रम आवश्यक है। लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं, समझदारी से समाधान करें।

    मिथुन (Gemini)
    स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। आर्थिक लाभ और प्रॉपर्टी या शेयर निवेश में फायदा हो सकता है। करियर में नई जिम्मेदारियां और पदोन्नति के योग हैं। लव लाइफ में पार्टनर का सहयोग मिलेगा, यात्रा और सरप्राइज की संभावना है।

    कर्क (Cancer)
    स्वास्थ्य अच्छा है, योग और व्यायाम लाभकारी रहेंगे। आर्थिक दृष्टि से लाभ और व्यापार में वृद्धि संभव है। करियर में नए अवसर और विस्तार मिल सकते हैं। लव लाइफ और पारिवारिक तालमेल अच्छा रहेगा।

    सिंह (Leo)
    मानसिक तनाव और शारीरिक कष्ट के योग हैं। आर्थिक स्थिति सामान्य, बड़े रिस्क न लें। करियर में विरोधियों के बावजूद मेहनत जरूरी है। लव लाइफ में झगड़े से बचें और धैर्य रखें।

    कन्या (Virgo)
    स्वास्थ्य पर सतर्क रहें, बड़ी बीमारी का जोखिम है। आर्थिक लाभ कम है, व्यर्थ खर्चों पर नियंत्रण रखें। करियर में प्रतीक्षा आवश्यक, परिश्रम जारी रखें। लव लाइफ में मतभेद हो सकते हैं, व्यवहार सुधारें।

    तुला (Libra)
    स्वास्थ्य पर यात्रा और काम के दबाव से सतर्क रहें। निवेश में सोच-समझकर निर्णय लें। करियर में स्थिरता से लाभ और बड़ी सफलता संभव है। लव लाइफ में पार्टनर का सहयोग मिलेगा, समय आनंदमय रहेगा।

    वृश्चिक (Scorpio)
    स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, पुरानी बीमारियों में राहत मिलेगी। आर्थिक लाभ और निवेश में वृद्धि संभव है। कार्यक्षेत्र में प्रदर्शन और सम्मान प्राप्त होगा। लव लाइफ में पार्टनर के साथ समय व्यतीत करें और निर्णय साझा करें।

    धनु (Sagittarius)
    स्वास्थ्य अच्छा, परिवार का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। व्यापार और अन्य क्षेत्रों से लाभ संभव है। करियर में नई सफलता और अवसर मिल सकते हैं। लव लाइफ में मतभेद हैं, समझदारी से संभालें।

    मकर (Capricorn)
    मानसिक तनाव के योग हैं, सतर्क रहें। आर्थिक गिरावट संभव, खर्चों पर नियंत्रण रखें। करियर में अधिक परिश्रम की आवश्यकता है, सफलता धीरे मिलेगी। लव लाइफ में मतभेद खत्म होंगे, समय व्यतीत करें।

    कुंभ (Aquarius)
    स्वास्थ्य में सुधार और अच्छा समय। आर्थिक लाभ और बड़े निर्णय सफल होंगे। करियर में नई शुरुआत और सफलता संभव है। लव लाइफ में तालमेल अच्छा रहेगा, यात्रा और आनंद के योग हैं।

    मीन (Pisces)
    स्वास्थ्य सतर्कता मांगता है, तनाव से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। आर्थिक चुनौतियों से सावधान रहें। करियर में समर्थन मिलेगा, सफलता संभव है। लव लाइफ में मतभेद बढ़ सकते हैं, संवाद से समाधान करें। यह सप्ताह संतुलन, समझदारी और धैर्य से कदम उठाने का है। आर्थिक और करियर के क्षेत्र में अवसर हैं, पर स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों में सतर्कता जरूरी है।

  • 1 मार्च 2026 को मेष से मीन तक कैसा रहेगा दिन? पढ़ें रविवार का विस्तृत राशिफल

    1 मार्च 2026 को मेष से मीन तक कैसा रहेगा दिन? पढ़ें रविवार का विस्तृत राशिफल


    नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 1 मार्च 2026, रविवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की चाल के कारण कई राशियों के लिए खास रहने वाला है। रविवार को सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य उपासना से मान-सम्मान और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का हाल।

    मेष

    कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। मेहनत रंग लाएगी। आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। प्रेम संबंधों में संवाद बनाए रखें।

    वृषभ

    काम का दबाव रहेगा, लेकिन धैर्य से संभाल लेंगे। निवेश में सावधानी रखें। रिश्तों में ईगो से बचें।

    मिथुन

    आत्मविश्वास बढ़ेगा। नई जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। अतिरिक्त आय के संकेत हैं। प्रेम जीवन सुखद रहेगा।

    कर्क

    भावनाओं में बहकर निर्णय न लें। खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। सेहत को लेकर सतर्क रहें।

    सिंह

    नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। प्रमोशन के संकेत मिल सकते हैं। परिवार में खुशखबरी संभव है।

    कन्या

    जिम्मेदारियां बढ़ेंगी, पर सफलता मिलेगी। आय के साथ खर्च भी बढ़ सकते हैं। दिनचर्या संतुलित रखें।

    तुला

    भागदौड़ भरा दिन रहेगा। फिजूलखर्ची से बचें। रिश्तों में स्पष्टता रखें।

    वृश्चिक

    करियर में प्रगति के अवसर मिलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। पुराने मतभेद सुलझ सकते हैं।

    धनु

    नई योजना पर काम शुरू हो सकता है। निवेश से पहले सलाह लें। प्रेम जीवन सकारात्मक रहेगा।

    मकर

    मेहनत का फल मिलेगा। धन लाभ के योग हैं। भावनात्मक रिश्ते मजबूत होंगे।

    कुंभ

    काम के सिलसिले में यात्रा संभव है। निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

    मीन

    सोच-समझकर निर्णय लें। आर्थिक स्थिति सुधरेगी। धार्मिक या सकारात्मक माहौल रहेगा।

  • Holi: होली पर दो बड़े राजयोग, ये चार राशि के जातक बनेंगे धनवान, जीवन में आएगी खुशहाली

    Holi: होली पर दो बड़े राजयोग, ये चार राशि के जातक बनेंगे धनवान, जीवन में आएगी खुशहाली


    नई दिल्ली। इस बार होली सिर्फ रंग और खुशियां ही नहीं बल्कि चुनिंदा राशियों के लिए सुनहरी किस्मत भी लेकर आ रही है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होली के दिन कुंभ राशि में सूर्य बुध और शुक्र की दुर्लभ संगति देखने को मिलेगी। इस समय कुंभ राशि में बन रहे ‘बुधादित्य’ और ‘शुक्रादित्य’ नामक दो शक्तिशाली राजयोग होली के दिन अपने चरम पर होंगे। इन राजयोगों का प्रभाव चार राशियों के जातकों पर ऐसा पड़ेगा कि धन सफलता और सुख-समृद्धि की बौछार उनके जीवन में रंग भर देगी।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए यह होली आर्थिक समृद्धि और भाग्य का समय लेकर आ रही है। कहीं फंसा हुआ पैसा अचानक वापस मिल सकता है और पुराने निवेश अब मुनाफे के रूप में सामने आएंगे। संतान की ओर से कोई गौरवशाली समाचार मिलने की संभावना है। ससुराल पक्ष से रिश्तों में मधुरता आएगी और लंबे समय से सोचे हुए प्रोजेक्ट्स अब हकीकत में बदलने का समय है।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है। धन के नए स्रोत खुलेंगे और बैंक बैलेंस तेजी से बढ़ेगा। अगर कोई पुरानी बीमारी परेशान कर रही थी तो राहत मिलेगी। नई व्यावसायिक शुरुआत के लिए समय बेहद शुभ है साथ ही प्रॉपर्टी के लेन-देन में भी बड़ा लाभ मिल सकता है। घर का माहौल खुशहाल रहेगा और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों पर ‘शुक्रादित्य’ और ‘बुधादित्य’ दोनों राजयोग मेहरबान रहने वाले हैं। अटके हुए सरकारी या निजी काम अब गति पकड़ेंगे और नौकरी की तलाश में थके लोग मनचाहा अवसर प्राप्त करेंगे। बिजनेस में कोई बड़ी पार्टनरशिप या डील फाइनल हो सकती है। परिवार के साथ धार्मिक या मनोरंजक यात्रा के योग भी बन रहे हैं।

    धनु राशि

    धनु राशि वालों के लिए यह होली करियर में बड़ी उपलब्धि का संकेत देती है। वर्किंग प्रोफेशनल्स को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के प्रबल संकेत हैं। लंबे समय से चल रहा पैतृक संपत्ति का विवाद अब आपके पक्ष में सुलझ सकता है जिससे वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। मामा पक्ष से आर्थिक या मानसिक सहयोग मिलेगा और कानूनी मामलों में चल रही भागदौड़ समाप्त होगी। अंततः आपको मानसिक शांति का अनुभव होगा।