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  • क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम

    क्या आप जानते हैं…. देश की चारों दिशाओं में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है बड़ा चार धाम


    नई दिल्ली।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) के चार धाम की यात्रा (Char Dham Yatra) 19 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, जो कि हिंदू धर्म (Hinduism) में बहुत पवित्र मानी जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ‘बड़ा चार धाम’ (‘Big Four Dham’) भी होता है? यह भारत के चार अलग-अलग दिशा में स्थित प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और मोक्ष की ओर ले जाती है. इस यात्रा की स्थापना 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य ने की थी. उनका उद्देश्य पूरे भारत को आध्यात्मिक रूप से एकजुट करना था. इसके लिए उन्होंने देश के चार दिशाओं में चार प्रमुख धाम स्थापित किए-


    किन देवताओं से जुड़े हैं ये चार धाम?

    बड़ा चार धाम यात्रा में भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की उपासना का महत्व है.
    बद्रीनाथ- भगवान विष्णु को समर्पित
    रामेश्वरम- भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग
    द्वारका- भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर
    पुरी- भगवान जगन्नाथ (विष्णु अवतार)


    बद्रीनाथ धाम (उत्तर भारत)

    बद्रीनाथ उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है. यह भगवान विष्णु का प्रमुख धाम है. मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने तपस्या की थी और माता लक्ष्मी ने उन्हें बद्री वृक्ष बनकर बचाया था. महाभारत से भी इसका संबंध बताया जाता है, कहा जाता है कि पांडव स्वर्ग जाते समय यहां से गुजरे थे।


    रामेश्वरम धाम (दक्षिण भारत)

    रामेश्वरम तमिलनाडु में समुद्र के बीच स्थित एक पवित्र स्थान है. यहां का रामनाथस्वामी मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. मान्यता है कि भगवान राम ने लंका जाने से पहले यहां शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी. यही जगह राम सेतु से भी जुड़ी मानी जाती है.


    द्वारका धाम (पश्चिम भारत)

    द्वारका गुजरात में समुद्र किनारे बसा एक पवित्र शहर है. इसे भगवान श्रीकृष्ण की नगरी कहा जाता है. यहां का द्वारकाधीश मंदिर बहुत भव्य है और इसे मोक्ष प्राप्ति का स्थान भी माना जाता है.


    जगन्नाथ पुरी (पूर्व भारत)

    पुरी ओडिशा में स्थित है और यहां भगवान जगन्नाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. यह भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा निकलती है, जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं.


    क्यों खास है बड़ा चार धाम यात्रा?

    बड़ा चार धाम यात्रा सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि जीवन को समझने और आत्मिक शांति पाने का मार्ग है. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा से इस यात्रा को पूरा करता है, उसे पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह यात्रा हमें भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का सही संतुलन सिखाती है।


    चार धाम यात्रा और बड़ा चार धाम यात्रा में अंतर

    छोटा चार धाम, जिसे उत्तराखंड चार धाम भी कहा जाता है. इसमें बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा शामिल होती है. यह यात्रा लगभग 1600 किलोमीटर की होती है और आमतौर पर हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरू होती है। वहीं बड़ा चार धाम पूरे भारत में फैला हुआ है, जिसके उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पश्चिम में द्वारका और पूर्व में पुरी शामिल हैं. यह यात्रा करीब 6000 से 7000 किलोमीटर तक की होती है और भारत के चारों दिशाओं को जोड़ती है।

    दोनों यात्राओं में बद्रीनाथ धाम समान रूप से शामिल है, क्योंकि यह भगवान विष्णु का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम माना जाता है और मोक्ष का धाम भी माना जाता है. छोटा चार धाम यात्रा प्रकृति से जुड़ा हुआ है, जहां आप पहाड़, नदियां और हिमालय की सुंदरता का आसानी से दीदार कर सकते हैं. वहीं बड़ा चार धाम यात्रा पूरे भारत की धार्मिक एकता को दर्शाती है, जहां भगवान विष्णु, भगवान शिव, भगवान कृष्ण और जगन्नाथ जी की उपासना की जाती है।


    बड़ा चार धाम यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स

    1. पहले से प्लान करें
    यह यात्रा लंबी और लोकप्रिय है, इसलिए टिकट और होटल पहले ही बुक कर लें क्योंकि बड़ा चार धाम में पूरे साल भीड़ रहती है.


    2. सही समय चुनें

    रामेश्वरम, द्वारका और पुरी जाने का सही समय अक्टूबर से मार्च के बीच का है. वहीं, बद्रीनाथ धाम मई के आसपास जाना सही होता है.


    3. जरूरी पेपर रखें

    बड़े चार धाम की यात्रा पर जाने के लिए आईडी प्रूफ साथ रखें. जो होटल और मंदिर दर्शन के लिए जरूरी होता है.


    4. हल्का और जरूरी सामान ही पैक करें

    इस यात्रा पर जाने के लिए कॉटन कपड़े, हल्के ऊनी कपड़े, आरामदायक जूते और रेनकोट जरूर रखें.


    5. लोकल गाइड लें

    इस यात्रा पर जाने के लिए लोकल गाइड की मदद जरूर ले सकते हैं. आपको जगह की सही जानकारी और इतिहास समझने में मदद मिलेगी.

    6. कैश साथ रखें
    हर जगह डिजिटल पेमेंट नहीं चलता, इसलिए थोड़े पैसे कैश में रखें.

  • इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?

    इस साल 13 माह का रहेगा हिन्दू वर्ष… दो बार आएगा ज्येष्ठ, जानें कब से शुरू होगा अधिकमास?


    नई दिल्ली।
    हिंदू पंचांग (Hindu Calendar) के अनुसार, इस साल 2026 यानी विक्रम संवत 2083 (Vikram Samvat 2083) खास रहने वाला है, क्योंकि इस बार पूरे साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्येष्ठ मास (Jyeshtha month) इस साल दो बार आएगा. यही अतिरिक्त महीना ‘अधिक मास’ (Adhik Maas 2026) कहलाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास (Purushottam month) भी कहा जाता है. मान्यता है कि इस महीने के स्वामी भगवान विष्णु हैं, इसलिए इस समय उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है।


    कब पड़ेगा अधिकमास 2026?

    पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में पड़ेगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026 से होगी और समापन 15 जून 2026 को होगा। इस अतिरिक्त महीने की वजह से आगे आने वाले कई बड़े त्योहारों की तारीखें भी आगे खिसक जाएंगी. जैसे- रक्षाबंधन, जो आमतौर पर अगस्त के मध्य में आता है, 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा. दीपावली भी इस बार 8 नवंबर को पड़ेगी।


    अधिकमास क्यों आता है?

    – अधिकमास का सीधा संबंध सूर्य और चंद्र कैलेंडर के अंतर से है. एक सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है. वहीं चंद्र वर्ष करीब 354 दिन का। हर साल करीब 11 दिनों का फर्क रह जाता है. यही अंतर जब 3 साल में बढ़कर लगभग 32-33 दिन हो जाता है, तब उसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसी को अधिक मास कहा जाता है।


    अधिकमास में क्या करना शुभ माना जाता है?

    अधिकमास को भक्ति और साधना का विशेष समय माना जाता है. इस दौरान रोजाना भगवान विष्णु की पूजा करना और उनके मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है. साथ ही जप, तप और दान-पुण्य पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जरूरतमंद लोगों की मदद करना और अन्न दान करना भी इस महीने में बहुत पुण्यदायी होता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय श्रीमद्भगवद गीता का पाठ करने से भी विशेष फल प्राप्त होता है।


    इस दौरान ना करें ये काम

    अधिक मास में कुछ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. इस दौरान शादी, गृह प्रवेश, नामकरण और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. नए बिजनेस या किसी बड़े शुभ काम की शुरुआत भी टालना बेहतर माना जाता है. इसके अलावा मांसाहार और शराब का सेवन करने से बचना चाहिए और किसी गरीब या कमजोर व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए।


    क्या खास है पुरुषोत्तम मास?

    अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. मान्यता है कि इस महीने में की गई पूजा और भक्ति का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

  • बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें? जानिए गणेश कृपा पाने के अचूक नियम और चमत्कारी लाभ

    बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें? जानिए गणेश कृपा पाने के अचूक नियम और चमत्कारी लाभ

    नई दिल्ली| सनातन धर्म में सप्ताह का हर दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित होता है और बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान गणेश और बुध देव की पूजा के लिए शुभ माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति सच्चे मन से इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करता है, उसके जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। यही कारण है कि आज के समय में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बुधवार व्रत का पालन करते हैं।

    अगर आप बुधवार व्रत शुरू करने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए सबसे शुभ समय किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से माना जाता है। इस दिन विधिवत संकल्प लेकर व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। मान्यता है कि व्रत को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, इसलिए 7, 11 या 21 बुधवार का संकल्प लेकर ही व्रत शुरू करें। व्रत पूर्ण होने के बाद उद्यापन करना भी जरूरी माना गया है, तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।

    बुधवार व्रत की पूजा विधि भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के ईशान कोण में गंगाजल छिड़ककर एक स्वच्छ चौकी स्थापित करें और उस पर हरे रंग का कपड़ा बिछाएं। इस चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित कर पंचामृत से उनका अभिषेक करें और बुध देव का ध्यान करें। पूजा के दौरान कुमकुम, हल्दी, चंदन, फूल, सिंदूर आदि अर्पित करें और विशेष रूप से 11 दूर्वा चढ़ाना न भूलें। गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं, इसके बाद व्रत कथा सुनें और आरती करें। शाम के समय पुनः पूजा कर सात्विक भोजन ग्रहण करें।

    व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। इस दिन नमक का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल एक समय ही भोजन करना उचित होता है। व्रत में दही, हरी मूंग दाल का हलवा, फल और दूध का सेवन किया जा सकता है। साथ ही इस दिन किसी भी महिला या बेटी का अपमान करने से बचना चाहिए, अन्यथा गणेश जी की कृपा से वंचित रहना पड़ सकता है।

    बुधवार व्रत रखने से व्यक्ति को तीव्र बुद्धि, करियर में सफलता, आर्थिक मजबूती और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। इतना ही नहीं, कुंडली में बुध ग्रह के अशुभ प्रभाव भी धीरे-धीरे समाप्त होने लगते हैं। आस्था और नियमों के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है।

  • आज का राशिफल 28 अप्रैल: 4 राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा, 3 को रहना होगा सतर्क

    आज का राशिफल 28 अप्रैल: 4 राशियों पर बरसेगी हनुमान जी की कृपा, 3 को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है, क्योंकि आज ग्रहों की स्थिति कई राशियों के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत दे रही है। माना जा रहा है कि आज का दिन मंगल ग्रह की ऊर्जा और धार्मिक आस्था से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार विशेष प्रभाव लेकर आया है। चंद्रमा की चाल का असर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा।

    आज के दिन कुछ राशियों के लिए परिस्थितियां बेहद अनुकूल बनती दिख रही हैं। वृषभ, कन्या, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए समय सकारात्मक संकेत दे रहा है। इन लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता, आर्थिक लाभ और पारिवारिक जीवन में संतुलन मिलने की संभावना है। मेहनत का फल मिलने के योग बन रहे हैं और रुके हुए कार्य आगे बढ़ सकते हैं।

    इन राशियों पर मानसिक रूप से भी सकारात्मक प्रभाव रहेगा, जिससे निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होगी। कई मामलों में अचानक लाभ या नए अवसर मिलने की संभावना भी बन रही है। सामाजिक जीवन में सम्मान और पहचान बढ़ने के संकेत भी नजर आ रहे हैं।

    दूसरी ओर, कुछ राशियों को आज विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। मेष, तुला और कुंभ राशि के जातकों को आज अपने निर्णयों में सतर्क रहना होगा। आर्थिक मामलों में बिना सोच-समझ के कदम उठाने से नुकसान हो सकता है। साथ ही रिश्तों में गलतफहमी या वाद-विवाद की स्थिति भी बन सकती है, इसलिए संवाद में संयम रखना जरूरी है।

    इन राशियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी बड़े निर्णय से पहले अच्छी तरह विचार करें और भावनाओं में बहकर कोई कदम न उठाएं। कार्यस्थल पर भी धैर्य और समझदारी के साथ स्थिति को संभालना जरूरी होगा।

    बाकी राशियों के लिए आज का दिन मिश्रित परिणाम लेकर आया है। कुछ जगहों पर अवसर मिलेंगे, तो कुछ जगहों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में संतुलन बनाए रखना और परिस्थितियों को समझदारी से संभालना महत्वपूर्ण रहेगा।

    धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का दिन हनुमान जी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने और सच्चे मन से प्रार्थना करने से मानसिक शांति मिलती है और बाधाओं में कमी आती है। कई लोग इस दिन व्रत या पूजा के माध्यम से अपने दिन को शुभ बनाने का प्रयास करते हैं।

  • आज का अंक ज्योतिष: जानिए मूलांक 1-9 के लिए कैसा रहेगा 28 अप्रैल का मंगलवार..

    आज का अंक ज्योतिष: जानिए मूलांक 1-9 के लिए कैसा रहेगा 28 अप्रैल का मंगलवार..

    नई दिल्ली। 28 अप्रैल 2026 का मंगलवार अंक ज्योतिष की दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। इस दिन की ऊर्जा का केंद्र शुक्र ग्रह को बताया जा रहा है, जो प्रेम, संतुलन और सौंदर्य का प्रतीक है। इसी प्रभाव के कारण मूलांक 1 से 9 तक के लोगों के जीवन में अलग-अलग परिस्थितियाँ और अनुभव देखने को मिल सकते हैं। अंक ज्योतिष के अनुसार हर व्यक्ति का मूलांक उसके स्वभाव और जीवन की दिशा को प्रभावित करता है।

    मूलांक 1 वाले जातकों के लिए यह दिन आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करने वाला हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नई शुरुआत के संकेत मिल सकते हैं और जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, अहंकार से दूरी बनाए रखना आवश्यक रहेगा ताकि संबंधों में संतुलन बना रहे।

    मूलांक 2 के लोगों के लिए यह दिन भावनात्मक समझ और सहयोग का है। कामकाज में धीरे-धीरे प्रगति होगी और टीमवर्क से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहेगी और रिश्तों में सकारात्मकता देखने को मिलेगी।

    मूलांक 3 के जातकों के लिए आज का दिन रचनात्मकता और विचारों की अभिव्यक्ति का संकेत दे रहा है। शिक्षा, लेखन और संवाद से जुड़े क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन संभव है। सामाजिक जीवन में सक्रियता बढ़ सकती है और मित्रों के साथ समय आनंददायक रहेगा।

    मूलांक 4 वालों के लिए यह दिन मेहनत और अनुशासन पर केंद्रित रहने का है। कार्यक्षेत्र में कुछ चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन धैर्य और निरंतर प्रयास से स्थिति नियंत्रित रहेगी। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना बेहतर होगा।

    मूलांक 5 के लिए यह दिन बदलाव और नई संभावनाओं का संकेत देता है। यात्रा या नए अवसर मिलने की संभावना है। व्यापार और संचार से जुड़े क्षेत्रों में प्रगति देखने को मिल सकती है।

    मूलांक 6 के जातकों के लिए यह दिन प्रेम, संतुलन और सामंजस्य का है। पारिवारिक जीवन में खुशहाली बनी रहेगी और रिश्तों में मधुरता देखने को मिलेगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलने की संभावना है।

    मूलांक 7 वालों के लिए यह समय आत्मचिंतन और गहराई से सोचने का है। कार्यों की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन यह समय भविष्य की योजनाओं को मजबूत करने के लिए उपयुक्त है। मानसिक शांति के लिए ध्यान लाभकारी रहेगा।

    मूलांक 8 के लोगों के लिए यह दिन कर्म और परिणाम से जुड़ा हुआ है। पुराने प्रयासों का फल मिल सकता है और कार्यक्षेत्र में स्थिरता बनी रहेगी। सरकारी या प्रशासनिक कार्यों में सफलता के संकेत हैं।

    मूलांक 9 के लिए यह दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। लक्ष्य प्राप्त करने की प्रेरणा बढ़ेगी और नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। हालांकि, क्रोध पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा ताकि रिश्तों में संतुलन बना रहे।

  • बुधवार पूजा विधि: धन, सौभाग्य और सफलता के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम, वरना रुक सकती है किस्मत

    बुधवार पूजा विधि: धन, सौभाग्य और सफलता के लिए जरूर अपनाएं ये 5 नियम, वरना रुक सकती है किस्मत

    नई दिल्ली|  हिंदू धर्म में बुधवार का दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश और बुध ग्रह की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से न केवल बुद्धि का विकास होता है, बल्कि व्यापार, करियर और जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता के रास्ते खुलते हैं। लेकिन अगर पूजा के दौरान छोटी-सी भी गलती हो जाए, तो इसका प्रभाव आपके भाग्य पर पड़ सकता है। इसलिए बुधवार की पूजा पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ करना बेहद जरूरी है।

    बुधवार के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान गणेश की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित कर उन्हें दूर्वा, मोदक और हरी मूंग अर्पित करें। घी और गुड़ का भोग लगाना भी अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इन चीजों से गणेश जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि, बुद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं।

    हालांकि पूजा के दौरान कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। सबसे पहली बात, इस दिन काले वस्त्र पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। इसके अलावा भगवान गणेश को कभी भी तुलसी पत्र अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह पूजा में वर्जित माना गया है। साथ ही पूजा में टूटे हुए चावल यानी अक्षत का उपयोग न करें, बल्कि साबुत और स्वच्छ अक्षत ही चढ़ाएं।

    इसके अलावा चंदन, सफेद फूल या सफेद वस्त्र भी गणेश जी को अर्पित नहीं करने चाहिए। केतकी के फूल भी इस पूजा में निषिद्ध माने गए हैं। ध्यान रखें कि पूजा में कभी भी सूखे या मुरझाए फूलों का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे पूजा का प्रभाव कम हो सकता है। पूजा के बाद दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है, इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    बुधवार की पूजा का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि मानसिक, बौद्धिक और आर्थिक उन्नति भी है। कहा जाता है कि इस दिन की गई सच्चे मन से पूजा व्यक्ति की सोच, बोलचाल और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत बनाती है। साथ ही कुंडली में बुध ग्रह के दोष भी शांत होते हैं, जिससे जीवन में आने वाली बाधाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।

    अगर आप भी जीवन में सफलता, धन और सौभाग्य पाना चाहते हैं, तो बुधवार की पूजा को हल्के में न लें। सही विधि और नियमों के साथ की गई पूजा आपके जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

  • पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 भारत में नहीं दिखेगा फिर भी क्यों खास है यह खगोलीय घटना

    पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 भारत में नहीं दिखेगा फिर भी क्यों खास है यह खगोलीय घटना


    नई दिल्ली । साल 2026 में लगने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के रूप में सामने आ रहा है जिसे लेकर लोगों में काफी उत्सुकता देखी जा रही है यह ग्रहण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और वैज्ञानिक के साथ साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी इसे खास माना जा रहा है हालांकि भारत में रहने वाले लोग इस ग्रहण को अपनी आंखों से नहीं देख पाएंगे क्योंकि जिस समय यह ग्रहण लगेगा उस समय भारत में रात होगी

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक चलेगा इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा जिससे कुछ क्षेत्रों में दिन के समय भी अंधकार जैसा वातावरण बन जाएगा यह नजारा मुख्य रूप से आर्कटिक क्षेत्र ग्रीनलैंड और आइसलैंड में साफ तौर पर देखा जा सकेगा इसके अलावा उत्तरी स्पेन और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में भी इसका प्रभाव दिखाई देगा जबकि फ्रांस ब्रिटेन और इटली जैसे देशों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा

    भारत में इस ग्रहण के दिखाई न देने के कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिस ग्रहण का दृश्य प्रभाव किसी स्थान पर नहीं होता वहां सूतक काल लागू नहीं माना जाता इसलिए भारत के लोगों को इस दौरान किसी विशेष नियम का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी हालांकि परंपराओं और मान्यताओं के चलते कुछ लोग फिर भी सावधानी बरतना पसंद करते हैं

    भारतीय संस्कृति में ग्रहण को लेकर कई परंपराएं प्रचलित हैं जिनका पालन आज भी किया जाता है मान्यता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है इसलिए लोग इस समय भोजन से दूरी बनाते हैं और पूजा पाठ या ध्यान में समय बिताते हैं खासकर गर्भवती महिलाओं को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है उन्हें घर के अंदर रहने और किसी भी नुकीली वस्तु के उपयोग से बचने को कहा जाता है

    ग्रहण का समय आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है कई लोग इसे मंत्र जाप और ध्यान साधना के लिए शुभ मानते हैं ऐसा विश्वास है कि इस दौरान किया गया जाप और साधना अधिक फलदायी होता है ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करने की भी परंपरा है जिसे शुद्धि और पुण्य प्राप्ति से जोड़ा जाता है

    हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है जो सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी की विशेष स्थिति के कारण घटित होती है फिर भी इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व लोगों के जीवन में गहराई से जुड़ा हुआ है यही कारण है कि हर ग्रहण को लेकर लोगों में जिज्ञासा और आस्था दोनों बनी रहती हैं

  • चिलकुर के इस धाम में मन्नत मांगते ही दूर होती है विदेश यात्रा की हर बाधा..

    चिलकुर के इस धाम में मन्नत मांगते ही दूर होती है विदेश यात्रा की हर बाधा..

    नई दिल्ली। भारत अपनी विविधता और आस्था के अनगिनत केंद्रों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, लेकिन तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के निकट एक ऐसा मंदिर है जिसकी ख्याति आधुनिक युग की जरूरतों से जुड़ी हुई है। उस्मान सागर झील के किनारे बसे चिलकुर गांव में स्थित भगवान वेंकटेश्वर का पावन धाम ‘चिलकुर बालाजी’ के नाम से जाना जाता है, जिसे लोग प्यार से ‘वीजा मंदिर’ भी कहते हैं। यह मंदिर उन युवाओं और पेशेवरों के लिए आशा की एक बड़ी किरण बन चुका है, जो विदेश में पढ़ाई या नौकरी का सपना देखते हैं। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धापूर्वक माथा टेकने से वीजा मिलने की प्रक्रिया में आने वाली हर रुकावट जादुई रूप से दूर हो जाती है।

    इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसके पीछे एक अत्यंत भावुक पौराणिक कथा प्रचलित है। कहा जाता है कि 16वीं या 17वीं शताब्दी में भगवान तिरुपति बालाजी का एक अनन्य भक्त स्वास्थ्य कारणों से तिरुमाला की लंबी यात्रा करने में असमर्थ था। अपने भक्त की व्याकुलता और सच्ची भक्ति देख भगवान स्वयं चिलकुर के इसी स्थान पर प्रकट हुए थे। आज के दौर में इस स्थान ने एक अनूठी पहचान बना ली है। यहाँ की सबसे खास बात यह है कि यहाँ आने वाले भक्त अक्सर अपने हाथों में पेन और आवेदन पत्र जैसे दस्तावेज लेकर भगवान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं और विदेश यात्रा का सफल आशीर्वाद मांगते हैं।

    यहाँ मन्नत मांगने और उसे पूर्ण करने की परंपरा भी काफी दिलचस्प और अनुशासित है। जब कोई भक्त पहली बार अपनी मनोकामना लेकर आता है, तो वह मंदिर के गर्भगृह की 11 बार परिक्रमा करता है। जैसे ही उसकी विदेश जाने की मुराद पूरी हो जाती है और उसे वीजा प्राप्त हो जाता है, वह भगवान का धन्यवाद करने के लिए दोबारा मंदिर आता है और इस बार श्रद्धा भाव से 108 बार परिक्रमा करता है। चिलकुर बालाजी मंदिर की एक और बड़ी विशेषता इसकी सादगी है। यहाँ न तो कोई दान पेटी रखी गई है और न ही यहाँ किसी भी तरह का सशुल्क ‘वीआईपी’ दर्शन कराया जाता है। राजा हो या रंक, यहाँ सभी के लिए एक समान व्यवस्था है, जो इस मंदिर को आधुनिक समय में भी आध्यात्मिकता का एक सच्चा केंद्र बनाती है।

  • रविवार को जलदान और पूजन से मिलेगा अक्षय पुण्य, पितृ दोषों से मुक्ति का है यह सबसे शुभ समय

    रविवार को जलदान और पूजन से मिलेगा अक्षय पुण्य, पितृ दोषों से मुक्ति का है यह सबसे शुभ समय



    नई दिल्ली।
    सनातन परंपरा में सूर्य को जगत की आत्मा और प्रत्यक्ष देव माना गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना भगवान सूर्य नारायण की उपासना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इस दौरान सूर्य अपनी पूर्ण शक्ति और तेज के साथ विद्यमान होते हैं। प्रचंड गर्मी और तपती धूप वाले इस महीने में सूर्य देव की आराधना करने से न केवल व्यक्तित्व में निखार आता है, बल्कि जातक को आरोग्य शरीर और लंबी आयु का वरदान भी प्राप्त होता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ के प्रत्येक रविवार को नियमपूर्वक किए गए पूजन से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और जीवन के समस्त अंधकार दूर हो जाते हैं।

    शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ माह के रविवार को सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त होना चाहिए। पूजन के लिए लाल या केसरिया रंग के वस्त्रों का चुनाव करना श्रेष्ठ रहता है, जो सूर्य के तेज का प्रतीक हैं। अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करते हुए उसमें जल, लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाकर ‘ऊँ घृणि सूर्याय नम:’ मंत्र का जाप करते हुए भगवान भास्कर को अर्पित करें। अर्घ्य देते समय जल की गिरती धारा से सूर्य की किरणों को देखना आंखों के स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता के लिए बहुत लाभकारी माना जाता है। पूजन के अंत में आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और सूर्य के 12 नामों का स्मरण करने से अटके हुए कार्य पूर्ण होते हैं और पितृ दोषों से भी राहत मिलती है।

    ज्येष्ठ के रविवार को व्रत रखने के भी विशेष नियम बताए गए हैं। इस दिन नमक का सेवन वर्जित माना गया है, केवल फलाहार के माध्यम से ही व्रत पूर्ण किया जाता है। प्रचंड गर्मी के इस मौसम में दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जलदान को इस माह में सबसे बड़ा धर्म माना गया है; प्यासे राहगीरों के लिए शीतल जल की व्यवस्था करना, पशु-पक्षियों के लिए पानी रखना और जरूरतमंदों को छाता या चप्पल दान करना यज्ञ के समान फलदायी होता है। यह माह हमें प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने और सूर्य की असीमित ऊर्जा का उपयोग कर अपने जीवन को प्रकाशमान बनाने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

  • एक मई को बुद्ध पूर्णिमा पर अस्त होंगे बुध…. 27 दिनों तक इन राशियों पर पड़ेगा बुरा असर….

    एक मई को बुद्ध पूर्णिमा पर अस्त होंगे बुध…. 27 दिनों तक इन राशियों पर पड़ेगा बुरा असर….


    नई दिल्ली।
    एक मई को बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) का पर्व मनाया जाएगा. संयोगवश इसी दिन बुध (Budh Asta 2026) मेष राशि (Aries) में अस्त हो रहे हैं, जिससे बुध की स्थिति अगले 27 दिनों तक बहुत ही कमजोर हो जाएगी. ज्योतिष के अनुसार जब बुध ग्रह अस्त होते हैं, तो इसका असर खासतौर पर हमारी सोचने-समझने की क्षमता और बातचीत के तरीके पर पड़ता है.

    मई में बुध के अस्त होने से कुछ राशियों के लोगों को ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होगी. इस दौरान जल्दबाजी में लिए गए फैसले परेशानी बढ़ा सकते हैं. आइए जानते हैं किन राशियों को संभलकर रहने की सलाह दी जा रही है।

    वृषभ राशि: इस समय आपके खर्चों में अचानक बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ सकता है. पैसों के मामले में सतर्क रहें. बड़े निवेश या जोखिम लेने से बचें. छोटी-छोटी लापरवाही भी आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है।

    मिथुन राशि: आपकी योजनाएं इस दौरान पूरी तरह सफल नहीं हो पाएंगी. सेहत में उतार-चढ़ाव आ सकता है. कामकाज में भी अड़चनें आ सकती हैं. आत्मविश्वास ठीक है, लेकिन ओवरकॉन्फिडेंस से बचें, वरना गलत फैसले नुकसान दे सकते हैं.

    कन्या राशि: रिश्तों के मामले में सावधानी जरूरी है. छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमी बढ़ सकती है. मन में नकारात्मक सोच हावी हो सकती है, इसलिए बातचीत के जरिए चीजों को संभालने की कोशिश करें।

    वृश्चिक राशि: कार्यक्षेत्र में दबाव बढ़ सकता है. तनाव के कारण आपका ध्यान भटक सकता है. काम प्रभावित हो सकता है. सहकर्मियों के साथ बहस या टकराव से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा।

    मीन राशि: इस दौरान मन थोड़ा उलझा हुआ रह सकता है. किसी भी फैसले को लेने से पहले अच्छे से सोच-विचार करें. जल्दबाजी में लिया गया निर्णय बाद में परेशानी दे सकता है, इसलिए धैर्य रखना जरूरी है।