Category: Religious Astrology

  • मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व

    मंगल दोष के प्रभाव कम करने के उपाय: मंगलवार को हनुमान उपासना और दान का विशेष महत्व


    नई दिल्ली।वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को पराक्रम, ऊर्जा, साहस और भूमि का कारक माना गया है। यदि कुंडली में मंगल की स्थिति प्रतिकूल हो, तो इसे मंगल दोष या कुज दोष कहा जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार मंगलवार का दिन मंगल ग्रह की शांति और अनुकूलता के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन हनुमान उपासना, व्रत, दान और संयमित जीवनशैली को प्रभावी उपाय माना गया है।

    मंगल ग्रह को अनुकूल बनाने के धार्मिक उपाय
    ज्योतिषीय मान्यता है कि मंगलवार को श्रद्धा और नियमपूर्वक हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, बाधा और मानसिक अशांति में कमी आती है। प्रातः स्नान कर स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और भगवान हनुमान की पूजा करें। दीप प्रज्वलित कर सिंदूर, चोला तथा गुड़-चना का भोग अर्पित करना मंगल ग्रह के शुभ फल को बढ़ाने वाला माना गया है।

    मंगलवार का व्रत भी विशेष फलदायी बताया गया है। इस दिन सात्विक आहार ग्रहण करें और यथासंभव नमक का त्याग करें। दिनभर संयम, धैर्य और सेवा भाव बनाए रखना धार्मिक दृष्टि से मंगल शांति का साधन माना जाता है।

    दान और सेवा का महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान और सेवा मंगल कृपा प्राप्ति का श्रेष्ठ मार्ग है। जरूरतमंदों को लाल मसूर की दाल, गुड़, शहद या लाल वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना गया है।

    गौ सेवा भी मंगल शांति के उपायों में शामिल है। विशेषकर मंगलवार को गौमाता को गुड़ और रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन आने की मान्यता है।

    तांबा और मंत्र जाप
    ज्योतिष परंपरा में तांबा मंगल ग्रह की धातु मानी जाती है। इसलिए तांबे के पात्र का उपयोग करना या तांबे का कड़ा अथवा चेन धारण करना पारंपरिक उपायों में शामिल है।

    इसके साथ ‘ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः’ या ‘ॐ अंग अंगारकाय नमः’ मंत्र का नियमित जप मंगल ग्रह की शांति और कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। नियमित जप से मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की भी मान्यता है।

    मंगल दोष शांति के विशेष उपाय
    यदि कुंडली में मंगल दोष अधिक प्रबल हो, तो विवाह से पूर्व विशेष पूजा-अनुष्ठान कराने की परंपरा है। योग्य आचार्य के मार्गदर्शन में मंगल शांति अनुष्ठान, पीपल पूजन या मंगल यंत्र की स्थापना कर पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार तीन मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी मंगल के संतुलन का प्रतीक माना गया है। हालांकि, किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श करना उचित माना जाता है।

    आध्यात्मिक संदेश
    धार्मिक दृष्टि से ग्रहों की शांति केवल अनुष्ठानों से नहीं, बल्कि आचरण से भी जुड़ी मानी जाती है। संयमित जीवन, सेवा भाव, परिवार के प्रति सद्भाव और ईश्वर स्मरण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। श्रद्धा, नियम और सत्कर्म ही मंगल की कृपा का सच्चा आधार माने गए हैं।

  • चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट

    चंद्र ग्रहण की वजह से होली को तिथि को लेकर कंफ्यूजन की स्थिति, नोट कर लें होलिका दहन और रंग खेलने की सही डेट


    नई दिल्ली । Holi 2026: इस बार रंगों की होली और होलिका दहन को लेकर कंफ्यूजन देखने को मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्र ग्रहण। वाराणसी के प्रसिद्ध हृषिकेश पंचांग और जाने माने ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार इस ग्रहण ने होली की गणित को थोड़ा पेचीदा बना दिया है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं कि होलिका दहन कब होगा सूतक कब लगेगा और रंग कब खेला जाएगा तो जानिए यहां सबकुछ।

    2 मार्च: भद्रा पुच्छ में ही होगा होलिका दहन

    वैदिक पंचांग के अनुसार 2 मार्च 2026 सोमवार को चतुर्दशी तिथि शाम 5:18 बजे तक रहेगी उसके तुरंत बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। शास्त्रों का नियम है कि होलिका दहन हमेशा पूर्णिमा तिथि में ही किया जाता है लेकिन इस बार पूर्णिमा के साथ ही भद्रा का आगमन भी हो रहा है।

    भद्रा का लंबा साया 2 मार्च की शाम 5:18 बजे से लेकर पूरी रात और अगले दिन 3 मार्च की भोर सुबह 4:56 बजे तक भद्रा का वास रहेगा। शास्त्रों में भद्रा काल में होलिका दहन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे राज्य और व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव पड़ते हैं।

    शुभ मुहूर्त का चयन ऐसी स्थिति में जब पूरी रात भद्रा हो तो शास्त्रों में भद्रा पुच्छ भद्रा का पूंछ वाला भाग में कार्य करने का विधान है। पं. नरेंद्र उपाध्याय जी के अनुसार इस साल दहन का सबसे शुभ समय यह रहेगा

    शुभ मुहूर्त: रात 12:50 बजे से रात 02:02 बजे तक अवधि: 1 घंटा 12 मिनट

    इसी समय में दहन करना शास्त्रीय दृष्टि से सबसे उत्तम और कल्याणकारी है। 3 मार्च: होली पर चंद्र ग्रहण का पहरा 3 मार्च मंगलवार को पूर्णिमा तिथि के दिन ही साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण भारत के कई हिस्सों में दिखाई देगा इसलिए इसका धार्मिक प्रभाव सूतक भी पूरे देश में मान्य होगा। ग्रहण की टाइमिंग भारतीय समय के अनुसार यह ग्रहण दोपहर लगभग 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण के दौरान ब्लड मून का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

    सूतक काल और नियम चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। इसका मतलब यह है कि 3 मार्च को सुबह 06:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद हो जाएंगे। इस दौरान पूजा पाठ मूर्ति स्पर्श और खाना पीना वर्जित होता है। सूतक और ग्रहण के साये में होली का डंडा या रंग गुलाल खेलना अशुभ माना जाता है इसलिए 3 मार्च को रंग वाली होली नहीं मनाई जाएगी।

    4 मार्च: रंगों की होली धुलेंडी का असली उत्सव 3 मार्च की शाम को ग्रहण खत्म होने के बाद शुद्धिकरण और स्नान किया जाएगा। इसके अगले दिन यानी 4 मार्च 2026 बुधवार को सूर्योदय के समय चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि रहेगी। शास्त्रीय मर्यादा के अनुसार ग्रहण और सूतक से मुक्त होने के बाद इसी दिन पूरे देश में धूम धाम से धुलेंडी और रंगों का त्योहार मनाया जाएगा।

    होली 2026: पूरा कैलेंडर

    2 मार्च सोमवार होलिका दहन रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार चंद्र ग्रहण दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:47 बजे तक

    3 मार्च मंगलवार सूतक काल सुबह 06:20 बजे से शुरू

    4 मार्च बुधवार रंग वाली होली सुबह से धुलेंडी का असली दिन

    ग्रहण के दौरान सावधानियां और उपाय

    तुलसी का प्रयोग सूतक लगने से पहले 3 मार्च सुबह दूध दही और पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते जरूर डाल दें। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय बाहर न निकलें और न ही किसी नुकीली चीज़ सुई कैंची का इस्तेमाल करें। स्नान और दान ग्रहण खत्म होने के बाद 3 मार्च शाम 7 बजे के बाद स्नान करें और सफेद वस्त्र चावल या चीनी का दान करें। इससे ग्रहण का अशुभ प्रभाव कम होता है। मंत्र जाप ग्रहण के दौरान ॐ नमः शिवाय का जाप करना होली पर कई गुना फलदायी होता है।

  • 24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति

    24 फरवरी 2026 पंचांग: अभिजीत और अमृत काल में करें शुभ कार्य, जानें ग्रह-नक्षत्र की स्थिति


    नई दिल्ली।24 फरवरी 2026, मंगलवार का दिन विशेष खगोलीय संयोगों के कारण महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि प्रातः 7:01 बजे तक प्रभावी रहेगी, इसके बाद अष्टमी तिथि आरंभ हो जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज का दिन सामाजिक प्रतिष्ठा, प्रशासनिक कार्यों और व्यक्तिगत निर्णयों के लिहाज से प्रभावशाली रह सकता है।

    ग्रहों की स्थिति और नक्षत्र प्रभाव
    आज सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र और राहु का कुंभ राशि में संयोग बना हुआ है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह ग्रह स्थिति सामूहिक प्रयासों, सार्वजनिक जीवन और सरकारी गतिविधियों में सक्रियता बढ़ाने वाली मानी जाती है।

    वहीं चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेगा और कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। कृत्तिका नक्षत्र को ऊर्जा, स्पष्ट सोच और साहस का प्रतीक माना जाता है। पंचांग विशेषज्ञों का मानना है कि यह नक्षत्र अधूरे कार्यों को पूरा करने और नई योजनाओं को गति देने के लिए अनुकूल समय प्रदान करता है।

    योग और शुभ मुहूर्त
    दिन की शुरुआत इन्द्र योग से होगी, जो प्रातः 7:24 बजे तक प्रभावी रहेगा। इन्द्र योग को मान-सम्मान और सफलता प्रदान करने वाला योग माना जाता है। इसके पश्चात वैधृति योग प्रारंभ होगा। इस योग में धैर्य, संतुलन और सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।

    आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:12 बजे से 12:57 बजे तक रहेगा। इस अवधि को विशेष रूप से शुभ कार्यों, सरकारी प्रक्रियाओं और महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए अनुकूल माना गया है।

    इसके अतिरिक्त अमृत काल दोपहर 12:51 बजे से 2:22 बजे तक रहेगा। यह समय नए कार्य आरंभ करने, अनुबंध करने और सकारात्मक निर्णय लेने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।

    राहुकाल और सावधानियां
    पंचांग के अनुसार राहुकाल सायं 3:26 बजे से 4:52 बजे तक रहेगा। इस दौरान निवेश, विवाद या बड़े निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

    यमगण्ड और गुलिकाल के समय भी पारंपरिक रूप से सावधानी बरतने की परंपरा रही है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इन समयों का पालन केवल धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि मानसिक अनुशासन और समय प्रबंधन का भी एक हिस्सा है।

    सूर्योदय और चंद्रमा से जुड़ी जानकारी
    आज सूर्योदय प्रातः 6:51 बजे और सूर्यास्त सायं 6:18 बजे होगा। चंद्रोदय 10:58 बजे और चंद्रास्त अगले दिन 1:40 बजे निर्धारित है। यह जानकारी विशेष रूप से व्रत, पूजन और दैनिक धार्मिक अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    पंचांग का व्यापक महत्व
    ज्योतिष विश्लेषकों का कहना है कि पंचांग केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के आधार पर समय का सदुपयोग, निर्णय की दिशा और कार्यों की योजना बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है।

  • हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व: करियर और व्यक्तिगत विकास के संकेत..


    नई दिल्ली। हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत को केवल हथेली की एक विशेष आकृति नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शन का संकेतक माना जाता है। यह पर्वत अनामिका उंगली के आधार और हृदय रेखा के ऊपरी हिस्से में स्थित होता है और जातक के करियर, आर्थिक स्थिति और समाज में सम्मान का संकेत देता है। यदि सूर्य पर्वत पूर्ण और सुविकसित हो, तो यह व्यक्ति के जीवन में उच्च पद, प्रतिष्ठा और धन की प्राप्ति का संकेत देता है। वहीं, इसका अभाव या कमजोर स्थिति जीवन में सतर्क रहने और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का संदेश देती है।

    सूर्य पर्वत मुख्य रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जो करियर में ऊँचाई प्राप्त करना चाहते हैं या समाज में मान्यता पाना चाहते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि यह पर्वत गुलाबी रंग और उभार वाला हो, तो जातक स्वभाव से हंसमुख, उदार और मेहनती होता है। ऐसे लोग व्यापार, कला, संगीत और रचनात्मक क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। सूर्य पर्वत जन्म से ही अस्तित्व में होता है, लेकिन जीवन के अनुभव, शिक्षा और स्वभाव के अनुसार यह अधिक या कम विकसित हो सकता है।

    सूर्य पर्वत के आकार और स्थिति का अध्ययन जीवन में करियर और आर्थिक निर्णय लेने में भी सहायक है। यदि पर्वत अत्यधिक विकसित है, तो यह कभी-कभी अहंकार या खर्चीले स्वभाव की ओर इशारा कर सकता है। वहीं, कमजोर सूर्य पर्वत आत्मविश्वास में कमी, सम्मान की कमी और आर्थिक चुनौतियों का संकेत देता है। इसके झुकाव से भी जातक के व्यक्तित्व और सफलता की दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है। बुध की ओर झुके सूर्य पर्वत वाले व्यक्ति आमतौर पर व्यापार में कुशल और धन संचय करने में सक्षम होते हैं, जबकि शनि की ओर झुके पर्वत वाले लोग अधिकांतप्रिय होते हैं और उन्हें आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है।

    पहचान के लिए अनामिका उंगली के नीचे के हिस्से और हृदय रेखा के ऊपर के क्षेत्र को देखें। पूर्ण विकसित पर्वत गुलाबी, उभार वाला और स्पष्ट दिखता है। यदि यह सपाट, फीका या कमजोर प्रतीत होता है, तो इसे जीवन में चुनौतियों और सतर्क रहने की चेतावनी के रूप में समझा जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन केवल भविष्य जानने के लिए नहीं, बल्कि करियर योजना, आर्थिक प्रबंधन और व्यक्तिगत विकास के मार्गदर्शन के लिए भी किया जा सकता है। सुविकसित सूर्य पर्वत वाले जातक सामाजिक गतिविधियों और टीम वर्क में सफल रहते हैं। कमजोर सूर्य पर्वत वाले जातकों को आत्मविश्वास बढ़ाने, नेतृत्व कौशल विकसित करने और आर्थिक निर्णयों में सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

    हस्तरेखा विज्ञान में सूर्य पर्वत का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसे देखकर व्यक्ति अपने करियर में नई रणनीतियां अपना सकता है, धन प्रबंधन के उपाय कर सकता है और जीवन में सफलता और सम्मान के अवसरों को पहचान सकता है। यही कारण है कि सूर्य पर्वत का अध्ययन हर उम्र के लिए उपयोगी और मार्गदर्शक माना जाता है।

  • सोमवार के अचूक शिव उपाय, सुख शांति और मनोकामना पूर्ति का सरल आध्यात्मिक मार्ग..

    सोमवार के अचूक शिव उपाय, सुख शांति और मनोकामना पूर्ति का सरल आध्यात्मिक मार्ग..


    नई दिल्ली। सोमवार का दिन देवों के देव शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि विधान से की गई पूजा जीवन में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। नियमित रूप से सोमवार व्रत और शिव साधना करने से मानसिक तनाव कम होता है और बाधाएं दूर होने लगती हैं।

    सुबह स्नान के बाद मंदिर जाकर या घर में स्थापित शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल से अभिषेक करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा अर्पित करने से सुख समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया अभिषेक शिव कृपा को शीघ्र आकर्षित करता है।

    धन और आर्थिक स्थिरता की कामना रखने वाले श्रद्धालु सोमवार की शाम शिवलिंग के समीप देसी घी का दीपक जलाएं। शहद मिश्रित जल से अभिषेक करना भी आर्थिक कष्टों को दूर करने वाला प्रभावी उपाय माना जाता है। यह साधना घर में समृद्धि और सकारात्मक वातावरण को बढ़ाने में सहायक मानी गई है।

    मनोकामना पूर्ति के लिए लगातार पांच सोमवार तक नियमपूर्वक जल, दुर्वा और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। बेलपत्र पर शहद लगाकर अर्पण करने से इच्छित कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है। यह साधना धैर्य और अनुशासन के साथ की जाए तो अधिक फलदायी मानी जाती है।

    यदि कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो तो दूध, चावल, सफेद वस्त्र या भोजन का दान करना शुभ बताया गया है। ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा मन और भावनाओं का कारक है। ऐसे में यह दान मानसिक संतुलन और भावनात्मक स्थिरता प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

    मानसिक शांति और बाधा निवारण के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जप विशेष प्रभावी माना गया है।
    जप मंत्र
    ॐ नमः शिवाय
    ॐ नमो भगवते रुद्राय

    इन मंत्रों का नियमित जप आत्मविश्वास बढ़ाता है और भय तथा नकारात्मकता को दूर करता है। शिव चालीसा का पाठ भी आध्यात्मिक ऊर्जा को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।

    सोमवार की पूजा में सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना गया है। दूध, दही और चावल जैसी सफेद वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पूजा के समय शुद्धता, संयम और शांत मन बनाए रखना आवश्यक है।

    ध्यान रखें कि शिव पूजा में तुलसी, हल्दी और केतकी के फूल अर्पित नहीं किए जाते। साथ ही क्रोध, असत्य और अपवित्रता से बचना चाहिए। नियमित श्रद्धा और सरलता से की गई शिव उपासना जीवन में संतुलन, धैर्य और सकारात्मक परिणामों का मार्ग प्रशस्त करती है।

  • 23 फरवरी 2026 का पंचांग, फाल्गुन षष्ठी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग, अनुशासन और साधना का संदेश

    23 फरवरी 2026 का पंचांग, फाल्गुन षष्ठी पर ब्रह्म योग का शुभ संयोग, अनुशासन और साधना का संदेश


    नई दिल्ली। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर सोमवार 23 फरवरी 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व लेकर आया है। वैदिक पंचांग के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्म योग का प्रभाव रहा, जिसे शुभ कर्म, जप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। प्रातः लगभग 9 बजे तक षष्ठी तिथि रही और इसके पश्चात सप्तमी तिथि का आरंभ हुआ। धर्माचार्यों के अनुसार यह समय आत्मसंयम, दृढ़ संकल्प और धर्मपालन के लिए अनुकूल माना गया है।

    पंचांग गणना के अनुसार चंद्रमा मेष राशि में भरणी नक्षत्र पर स्थित हैं। यमराज को भरणी नक्षत्र का अधिष्ठाता माना जाता है। इस कारण यह दिन जीवन में अनुशासन, कर्तव्य पालन और आचरण की शुद्धता का संदेश देता है। धार्मिक परंपराओं में भरणी नक्षत्र को कर्मफल की स्मृति और आत्मनियंत्रण से जोड़ा गया है। विद्वानों का मत है कि आज लिया गया सकारात्मक संकल्प दीर्घकालिक फल प्रदान कर सकता है और व्यक्ति को नैतिक दृढ़ता की दिशा में अग्रसर करता है।

    ज्योतिषीय दृष्टि से आज ग्रहों की स्थिति भी विशेष मानी जा रही है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का संयोग विचार शक्ति और निर्णय क्षमता को प्रभावित करने वाला योग बना रहा है। इसे सामाजिक समन्वय, नई योजनाओं और बौद्धिक सक्रियता के लिए प्रेरक माना गया है। वहीं मकर राशि में स्थित मंगल को कर्मबल और साहस का कारक बताया गया है। यह स्थिति कठिन कार्यों को पूरा करने की ऊर्जा प्रदान करती है और लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता बढ़ाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आज मांगलिक कार्य, पूजन, जप और दान शुभ मुहूर्त में करना हितकारी रहेगा। राहुकाल के दौरान महत्वपूर्ण कार्यों से परहेज करने की परंपरा का पालन करने की सलाह दी गई है। श्रद्धालु मंदिरों में विशेष आराधना, दीपदान और प्रार्थना कर रहे हैं। कई स्थानों पर फाल्गुन मास के उपलक्ष्य में सामूहिक पाठ, भजन और अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं।

    धर्मशास्त्रों के जानकारों का कहना है कि फाल्गुन मास आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का काल माना जाता है। इस अवधि में संयमित जीवन, सेवा भावना और सत्कर्म को विशेष पुण्यदायी बताया गया है। आज का दिन व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और जीवन में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

    आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो ब्रह्म योग और भरणी नक्षत्र का यह संयोग साधना, आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्पों के लिए उपयुक्त समय माना गया है। पंचांग की यह जानकारी न केवल धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि दैनिक जीवन में शुभ-अशुभ समय के चयन के लिए भी मार्गदर्शक मानी जाती है।

  • Holi 2026 Date: 3 या 4 मार्च, कब मनाई जाएगी होली? जानें पंडित के द्वारा होली से जुड़े सभी पर्वों की सही तिथि व मुहूर्त

    Holi 2026 Date: 3 या 4 मार्च, कब मनाई जाएगी होली? जानें पंडित के द्वारा होली से जुड़े सभी पर्वों की सही तिथि व मुहूर्त

    नई दिल्ली । Holi 2026 Date: हर साल की तरह इस बार भी होली और होलिका दहन की तिथि को लेकर कंफ्यूजन बना हुआ है. कुछ लोगों के अनुसार, होली 3 मार्च को मनाई जाएगी और कुछ लोगों का मानना है कि 4 मार्च को मनाई जाएगी. तो आइए जानते हैं कि होली और होलिका दहन की सही तिथि क्या है.

    कब है होली, यहां से दूर करें तिथि का कंफ्यूजन
    होली का पर्व देशभर में बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. हिंदू धर्म में होली का पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण कहलाता है. पंचांग के अनुसार, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को होली का पर्व मनाया जाता है और इससे ठीक एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है. लेकिन, इस बार लोगों में होली और होलिका दहन की तारीख को लेकर काफी ज्यादा कंफ्यूजन बना हुआ है. तो आइए पंडित अरुणेश कुमार शर्मा जी से जानते हैं कि किस दिन रंगों का पर्व होली खेली जाएगी और किस दिन होलिका दहन होगा.

    3 मार्च या 4 मार्च, कब मनाई जाएगी होली?

    हर पंचांग में होली और होलिका दहन की तिथि व डेट अलग अलग लिखी है, कुछ लोगों का मानना है कि होली इस बार 3 मार्च को मनाई जाएगी तो कुछ लोगों का मानना है कि होली का पर्व 4 मार्च को मनाया जाएगा. वहीं, पंडित अरुणेश कुमार शर्मा से बात करते हुए बताया कि होली इस बार 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाई जाएगी. होलिका दहन 3 मार्च 2026, मंगलवार को अर्धरात्रि में किया जाएगा.

    पंडित अरुणेश कुमार शर्मा के अनुसार, फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 3 मार्च को शाम 4 बजकर 40 मिनट पर होगा. इसी के साथ भद्रा की भी शुरुआत हो जाएगी. यानी 2 मार्च 2026, सोमवार को भद्रा शाम 5 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो जाएगी, जिसका समापन 3 मार्च की सुबह 5 बजकर 32 मिनट पर होगा. ऐसे में होलिका दहन का सही समय 3 मार्च को किया जाएगा. 3 मार्च को होलिका दहन का मुहूर्त शाम 6 बजकर 22 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 50 मिनट के बीच होगा.

    क्या 4 मार्च को मनाई जाएगी होली?

    पंचांग की तिथि के अनुसार, 3 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा और उसी दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है. यह चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 06 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जो कि भारत में भी दृश्यमान होगा. 3 मार्च की शाम को लगने जा रहे इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 बजे तक रहेगा. ऐसे में रंगभरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को ही खेली जाएगी.

    क्या है होलाष्टक और रंगभरी एकादशी की तिथि

    पंडित अरुणेश कुमार शर्मा के मुताबिक, इस बार होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी 2026, मंगलवार से होगी और इसका समापन 3 मार्च 2026 को होगा. वहीं, रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी.

    कैसे किया जाता है होलिका दहन?

    फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन से पूर्व होलिका माई की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. शाम के समय पूजा की थाली लेकर होलिका दहन स्थल पर जाएं और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें. सबसे पहले होलिका को उपलों से बनी माला अर्पित करें. इसके बाद रोली, अक्षत, फल, फूल, माला, हल्दी, मूंग, गुड़, गुलाल, रंग, सतनाजा, गेहूं की बालियां, गन्ना और चना आदि अर्पित कर पूजा संपन्न करें.

  • Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू होलाष्टक, 8 दिनों तक वर्जित होंगे विवाह और मांगलिक कार्य

    Holashtak 2026: 24 फरवरी से शुरू होलाष्टक, 8 दिनों तक वर्जित होंगे विवाह और मांगलिक कार्य


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि यानी 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक का काल शुरू हो रहा है। यह अवधि होली पर्व से आठ दिन पूर्व की मानी जाती है और 3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा तक चलेगी। इस समय विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। ज्योतिषाचारियों के अनुसार इस आठ दिन के दौरान ग्रहों की स्थिति उग्र होती है, इसलिए इस समय शुभ कार्यों में सफलता नहीं मिलती।

    होलाष्टक के दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु जैसे प्रमुख ग्रह उग्र माने जाते हैं। इनके प्रभाव के कारण मांगलिक कार्य टाल दिए जाते हैं। हालांकि यह समय आत्मशुद्धि, संयम, जप-तप और ईश्वर आराधना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस अवधि में धार्मिक क्रियाओं, ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

    श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के पूर्व अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय के अनुसार, सभी पंचांगों में होलाष्टक का उल्लेख मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस समय किसी भी प्रकार के शुभ कार्य नहीं किए जाते। होलिका दहन के बाद वातावरण शुद्ध हो जाता है और इसके साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो सकती है। यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और इसे धार्मिक विश्वास के साथ निभाया जाता है।

    इस वर्ष होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा तिथि के अनुसार 3 मार्च 2026 को भोग 04:57 बजे किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 शाम 05:18 से 3 मार्च 2026 शाम 04:33 तक रहेगी। होलिका दहन के लिए लगभग 1 घंटा 4 मिनट का समय मिलेगा। इसके बाद 4 मार्च को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। होलाष्टक के आठ दिनों में कार्यों में बाधा और ग्रहों के उग्र प्रभाव के कारण मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय संयम और तपस्या को अपनाना चाहिए। इस दौरान घर की सफाई, पूजा, जप, ध्यान और दान-पुण्य के कार्य करने से परिवार में शांति और सौभाग्य आता है। इस काल में शुभ कार्यों को रोकना और साधना में समय देना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का माध्यम माना जाता है।

    इसलिए 24 फरवरी से 3 मार्च तक के होलाष्टक काल में विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य टालकर ध्यान, पूजा और आत्मशुद्धि पर ध्यान दें। होलाष्टक समाप्त होने के बाद ही मांगलिक कार्य करने से सफलता और शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

  • रविवार का अंक ज्योतिष राशिफल: 22 फरवरी को किस मूलांक को मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सतर्क

    रविवार का अंक ज्योतिष राशिफल: 22 फरवरी को किस मूलांक को मिलेगा लाभ, किसे रहना होगा सतर्क


    Mulank Rashifal 22 फरवरी 2026 के अनुसार आज का दिन अंक ज्योतिष की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। आज की तिथि 22/02/2026 के सभी अंकों को जोड़ने पर योग 16 बनता है और 1+6 करने पर मूल अंक 7 प्राप्त होता है। अंकशास्त्र में 7 का स्वामी केतु को माना गया है, जो आत्मचिंतन, रहस्य, आध्यात्मिकता और गहराई का प्रतीक है। इसी आधार पर आज का अंक राशिफल तैयार किया गया है। आप इसे अपने मूलांक के अनुसार पढ़ें।
    मूलांक 1
    आज नेतृत्व क्षमता उभरकर सामने आएगी। लंबे समय से लंबित कार्यों की शुरुआत के लिए दिन अनुकूल है। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों से प्रशंसा मिल सकती है। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निर्णय लें। परिवार में आपकी सलाह को महत्व मिलेगा।

    मूलांक 2
    भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी है। किसी करीबी से छोटी गलतफहमी हो सकती है, जिसे आप समझदारी से सुलझा सकते हैं। रचनात्मक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। मानसिक शांति के लिए ध्यान या प्रार्थना लाभकारी रहेगी।

    मूलांक 3
    ज्ञान और योजना बनाने के लिए उत्तम समय है। शिक्षा, लेखन या प्रशासन से जुड़े लोगों को सफलता मिल सकती है। मित्रों से विचार-विमर्श नई दिशा देगा। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी। सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी।

    मूलांक 4
    आत्मविश्लेषण और दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करने का दिन है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आप उन्हें कुशलता से निभाएंगे। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। परिवार में आपका निर्णय अहम रहेगा।

    मूलांक 5
    महत्वपूर्ण निर्णय में जल्दबाजी न करें। व्यापार में नई रणनीति बनाने का समय है। यात्रा की संभावना बन सकती है। संचार कौशल से लाभ होगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा।

    मूलांक 6
    पारिवारिक और सामाजिक जीवन में सामंजस्य रहेगा। प्रेम संबंधों में स्पष्टता आएगी। कला, फैशन या सजावट से जुड़े लोगों के लिए दिन लाभकारी है। आर्थिक स्थिति संतुलित रहेगी।

    मूलांक 7
    आज का दिन आत्मचिंतन और आध्यात्मिकता की ओर झुकाव बढ़ाएगा। शोध और अध्ययन में प्रगति होगी। एकांत में समय बिताना लाभदायक रहेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और पर्याप्त नींद लें।

    मूलांक 8
    कर्म और जिम्मेदारी का दिन है। कार्यक्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। कानूनी मामलों में प्रगति संभव है। निवेश सोच-समझकर करें। बुजुर्गों का आशीर्वाद लाभ देगा।

    मूलांक 9
    ऊर्जा और उत्साह से भरा दिन रहेगा। सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ेगी। पुराने विवाद सुलझ सकते हैं। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन क्रोध पर नियंत्रण रखना आवश्यक है।

  • Karthigai Deepam 2026: 23 फरवरी को मनाया जाएगा दीपों का भव्य त्योहार, जानें तिथि, पूजा और तिरुवन्नमलाई महादीपम की खासियत

    Karthigai Deepam 2026: 23 फरवरी को मनाया जाएगा दीपों का भव्य त्योहार, जानें तिथि, पूजा और तिरुवन्नमलाई महादीपम की खासियत


    नई दिल्ली । तमिल हिंदू समुदाय के लिए कार्तिगई दीपम त्योहार का विशेष महत्व है। इस साल यह पर्व सोमवार 23 फरवरी 2026 को मनाया जाएगा। कार्तिगई दीपम मासिक कार्तिकेई नक्षत्र यानी कृत्तिका नक्षत्र के समय आता है और भगवान शिव को समर्पित होता है। यह प्राचीन हिंदू त्योहार तमिल परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है जिसमें घर मंदिर और सड़कों को तेल के दीयों से रोशन किया जाता है। दीपों की यह कतार अंधकार पर दिव्य प्रकाश की विजय का प्रतीक मानी जाती है।

    कार्तिगई नक्षत्र हिंदू ज्योतिष के 27 चंद्र नक्षत्रों में से एक है। जब यह नक्षत्र चंद्र दिवस के साथ मेल खाता है भक्त घरों और दुकानों के बाहर दीपक जलाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। मासिक कार्तिगई नक्षत्र के दिन अनुष्ठान करना आध्यात्मिक रूप से पुण्यकारी होता है लेकिन साल का कार्तिगई दीपम पर्व विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    इस दिन पूजा में तेल के दीयों की कतारें लगाई जाती हैं पूजा स्थल सजाए जाते हैं और भक्त भगवान शिव की आराधना करते हैं। दीपक जलाने का अर्थ केवल रोशनी नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा शुभता और दिव्य आशीर्वाद को आमंत्रित करना है। इसके साथ ही भक्त शांति समृद्धि और आध्यात्मिक विकास की कामना करते हैं।

    कार्तिगई दीपम का भव्यतम उत्सव तमिलनाडु के तिरुवन्नमलाई में होता है। यहां अन्नमलैयार मंदिर के प्रांगण और तिरुवन्नमलाई पहाड़ी की चोटी पर महादीपम नामक विशाल दीपक प्रज्वलित किया जाता है। इसकी लौ कई किलोमीटर दूर तक दिखाई देती है और भगवान शिव के अनंत प्रकाश स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है। हजारों भक्त श्रद्धा और भक्ति भाव से इस अनुष्ठान में शामिल होते हैं। महादीपम प्रज्वलित करना तमिल हिंदू परंपरा में सबसे आध्यात्मिक और उत्थानकारी क्षणों में से एक माना जाता है।

    मासिक कार्तिक नक्षत्र भी हर महीने कृत्तिका नक्षत्र पर आता है लेकिन कार्तिगई दीपम का पर्व वर्ष में एक बार विशेष रूप से मनाया जाता है। भक्त इसे आध्यात्मिक शांति समृद्धि और जीवन में शुभता लाने का अवसर मानते हैं। इस दिन दीप जलाने पूजा करने और तिरुवन्नमलाई महादीपम देखने से भक्तों का मनोबल और भक्ति भाव बढ़ता है।

    इस प्रकार 23 फरवरी 2026 को कार्तिगई दीपम का त्योहार केवल दीपों का उत्सव नहीं बल्कि आध्यात्मिक उन्नति भगवान शिव के प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व है। यह दिन तमिल हिंदू समाज के लिए विशेष रूप से धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है।