Category: Religious Astrology

  • शनि साढ़ेसाती 2026-27: जिम्मेदारी और अनुशासन सिखाने वाला समय मेष कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए

    शनि साढ़ेसाती 2026-27: जिम्मेदारी और अनुशासन सिखाने वाला समय मेष कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए


    नई दिल्ली।वर्ष 2026-27 में शनि की साढ़ेसाती मेष कुंभ और मीन राशि पर अपना प्रभाव जारी रखेगी। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार यह समय इन राशियों के जातकों के लिए परीक्षा और परिपक्वता का दौर साबित हो सकता है। शनि की साढ़ेसाती जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में दबाव विलंब और अतिरिक्त परिश्रम की मांग करती है।

    साढ़ेसाती तब होती है जब शनि जन्म राशि से 12वें उसी और दूसरे भाव में गोचर करता है। वर्तमान में शनि की स्थिति मेष कुंभ और मीन राशि वालों पर प्रभाव डाल रही है और यह स्थिति वर्ष 2027 तक जारी रहने की संभावना है।

    मेष राशि वालों के लिए यह समय धैर्य की परीक्षा लेने वाला है। कार्यक्षेत्र में निर्णय लेने से पहले अनुभवी लोगों की सलाह लेना जरूरी है। अनियोजित खर्च और जल्दबाजी आर्थिक असंतुलन पैदा कर सकती है। पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों में खटास देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शॉर्टकट से बचें और नियमित मेहनत पर भरोसा रखें।

    कुंभ राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। विदेश यात्रा निवेश और व्यापार से जुड़े फैसलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। पारिवारिक गलतफहमियां और प्रेम संबंधों में बाधाएं मानसिक दबाव बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी से बचें और योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ें।

    मीन राशि वालों के लिए यह दौर चुनौतियों भरा रह सकता है। नए लोगों पर भरोसा करने से पहले सावधानी बरतने की जरूरत है। आर्थिक तंगी वाहन या संपत्ति से जुड़े फैसलों में देरी और सरकारी कार्यों में रुकावटें सामने आ सकती हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी मानसिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

    ज्योतिषियों के अनुसार साढ़ेसाती केवल कष्ट का काल नहीं बल्कि आत्ममंथन अनुशासन और जिम्मेदारी सिखाने का समय है। यह दौर व्यक्ति को जिम्मेदार बनाता है और लंबे समय में स्थायी परिणाम देता है। प्रभाव को संतुलित करने के लिए नियमित पूजा दान और संयमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाती है। शनिवार के दिन शनि से जुड़े उपाय मानसिक संतुलन और नकारात्मक प्रभाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

  • मंगल और शनि की शत्रुता से इन तीन राशियों में बढ़ सकती है झड़प और विवाद वृषभ वृश्चिक और कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क

    मंगल और शनि की शत्रुता से इन तीन राशियों में बढ़ सकती है झड़प और विवाद वृषभ वृश्चिक और कुंभ राशि के जातक रहें सतर्क


    नई दिल्ली। फरवरी 2026 के अंतिम सप्ताह में होने वाला मंगल गोचर ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार कई राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। 23 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजकर 33 मिनट पर मंगल ग्रह कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। कुंभ राशि शनि की मानी जाती है और मंगल और शनि के बीच शत्रुता का भाव होने के कारण यह गोचर वृषभ वृश्चिक और कुंभ राशि के जातकों के लिए सावधानी का संकेत दे रहा है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल साहस ऊर्जा पराक्रम और क्रोध का कारक ग्रह है जबकि शनि कर्म अनुशासन और धैर्य का प्रतिनिधित्व करता है। जब मंगल शनि की राशि में प्रवेश करता है तो स्वभाव में उग्रता और परिस्थितियों में टकराव की संभावना बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह गोचर व्यक्तिगत पेशेवर और पारिवारिक जीवन में असंतुलन ला सकता है।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए पेशेवर मोर्चे पर दबाव बढ़ सकता है। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों से मतभेद का सामना करना पड़ सकता है। जल्दबाजी में लिए गए निर्णय नुकसानदायक साबित हो सकते हैं। संयम और धैर्य से काम लेना जरूरी है नहीं तो गुस्से पर नियंत्रण न रखने से बनाए हुए कार्य बिगड़ सकते हैं।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए पारिवारिक और निजी रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है। मानसिक बेचैनी और चिड़चिड़ापन निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकता है। संपत्ति वाहन और साझेदारी से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। जीवनसाथी या व्यापारिक साझेदार के साथ मतभेद बढ़ने की संभावना है। छोटी बातों को तूल देने से रिश्तों में दूरी पैदा हो सकती है।

    कुंभ राशि में मंगल के गोचर से जातकों में ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ेगा लेकिन अत्यधिक आत्मविश्वास और जल्दबाजी टकराव और नुकसान का कारण बन सकती है। बिना सोच-समझे फैसले लेने से विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है इस समय शांत रहना और संवाद में संयम बरतना आवश्यक है।

    ज्योतिषियों के अनुसार यह गोचर अस्थायी है लेकिन प्रभाव को कम करने के लिए सोच-समझकर निर्णय लेना क्रोध पर नियंत्रण रखना और जोखिम भरे कदमों से बचना जरूरी है। इससे पेशेवर पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन में असंतुलन को रोका जा सकता है।

  • सकट चौथ पर इन चीजों का करें दान, मिलेगा पुण्य

    सकट चौथ पर इन चीजों का करें दान, मिलेगा पुण्य


    नई दिल्ली । माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के चतुर्थी व्रत को सकट चौथ का व्रत कहा जाता है।महिलाएं इस दिन व्रत रखकर संतान की दीर्घायु का वरदान मांगती है। साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसे माघी चतुर्थी, तिल चौथ, संकट चौथ के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा
    हिंदू धर्म सकट चौथ व्रत का काफी महत्व होता है। माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के चतुर्थी व्रत को सकट चौथ का व्रत कहा जाता है।महिलाएं इस दिन व्रत रखकर संतान की दीर्घायु का वरदान मांगती है। साथ ही इस दिन भगवान गणेश की पूजा अर्चना की जाती है। इसे माघी चतुर्थी, तिल चौथ, संकटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। नए साल में सकट चौथ व्रत 6 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। इस दिन दान का काफी महत्व होता है। माना जाता है कि इस किन कुछ चीजों का दान करने से

    तिल और गुड़ का दान

    सकट चौथ को कई जगहों पर तिलकुटा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में इस दिन तिल का दान बेहद शुभ फलदायी माना गया है। साथ ही इस दिन गुड़ का दान जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है।

    कपड़ों का दान
    शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या योग्य ब्राह्मण को कंबल, ऊनी वस्त्र या जूते-चप्पल का दान करने से पितृ दोष शांत होता है। साथ ही संतान से जुड़ी परेशानियों और कष्टों से भी राहत मिलती है।

    घी का दान
    सकट चौथ के दिन घी करना भी शुभ होता है। इससे सौभाग्य बढ़ता है। घी का दान घर में धन-धान्य लाता है जिससे समृद्धि आती है। इससे शुक्र की कृपा प्राप्ति होती है और स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिल सकता है।

    अन्न दान का महत्व

    सकट चौथ के अवसर पर अनाज का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती। धार्मिक मान्यता है कि इससे आर्थिक संकट दूर होता है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।

    तांबे के पात्र

    शास्त्रों में कहा गया है कि दक्षिणा के बिना कोई भी पूजा अधूरी रहती है। इसलिए सकट चौथ की पूजा संपन्न होने के बाद किसी ब्राह्मण को तांबे का पात्र और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें।

    अन्य चीजें

    इसके अलावा सकट चौथ पर नमक का दान, चांदी का दान, कंबल का दान करना भी शुभ फलदायी माना गया है।

    किन चीजों का दान ना करें

    सकट चौथ के दिन भूलकर भी नुकीली चीजों का दान नहीं करना चाहिए। इस दिन नुकीली चीजों का दान करने से व्यक्ति को नुकसान झेलना पड़ सकता है। सकट चौथ के दिन तेल का दान करना मना होता है और भूलकर भी तेल कर दान नहीं करना चाहिए। सकट चौथ के दिन हल्दी का दान नहीं करना चाहिए। इस दिन हल्दी दान करने से वैवाहिक जीवन में परेशानी आने का खतरा रहता है।

  • होली पर ब्लड मून का साया: भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग; जानें होलिका दहन का समय और सूतक काल के नियम

    होली पर ब्लड मून का साया: भद्रा और खग्रास चंद्र ग्रहण का दुर्लभ संयोग; जानें होलिका दहन का समय और सूतक काल के नियम

    उज्जैन/इंदौर। इस वर्ष होली के उल्लास के बीच भद्रा और चंद्र ग्रहण की स्थिति बन रही है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2 मार्च को होलिका दहन किया जाएगा लेकिन अगले ही दिन यानी 3 मार्चधुलेंडी को खग्रास चंद्र ग्रहण का प्रभाव रहेगा। इस दौरान आसमान में ब्लड मूनलाल चंद्रमा का अद्भुत नजारा भी दिखाई देगा। ग्रहण के कारण इस बार रंगपंचमी और धुलेंडी के उत्सव पर सूतक काल का असर देखने को मिलेगा।

    होलिका दहन और भद्रा का गणित

    ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से भद्रा काल शुरू होगा जो 3 मार्च की सुबह 4:28 बजे तक चलेगा। चूंकि इस बार भद्रा भूलोकसिंह राशि में है इसलिए प्रदोष काल में होलिका पूजन और दहन करना ही शास्त्रसम्मत और श्रेष्ठ माना गया है। भद्रा काल के दौरान भी दान-पुण्य किया जा सकता है जो फलदायी रहता है।

    3 मार्च: चंद्र ग्रहण और ब्लड मून

    धुलेंडी के दिन यानी 3 मार्च को खग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:समय: दोपहर 3:19 बजे से शाम 6:47 बजे तक।पूर्ण खग्रास: लगभग 17 मिनट तक चंद्रमा पूरी तरह ग्रहण की चपेट में रहेगा।ब्लड मून: शाम 6:00 बजे के बाद चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा जिसे खगोलीय भाषा में ब्लड मून कहा जाता है।सूतक काल: चंद्र ग्रहण का सूतक काल 3 मार्च को सुबह 9:30 बजे से शुरू हो जाएगा।

    सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?

    सूतक काल शुरू होने के बाद मंदिरों के पट बंद कर दिए जाते हैं और शुभ कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि आध्यात्मिक दृष्टि से यह समय बहुत महत्वपूर्ण है मंत्र सिद्धि: ग्रहण काल में इष्ट देव या गुरु मंत्र का जाप करने से मंत्र जल्दी सिद्ध होते हैं।भोजन: सूतक काल में भोजन बनाने और खाने से बचने की सलाह दी जाती हैबुजुर्गों और बीमारों को छोड़कर। दान: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर सफेद वस्तुओंचावल चीनी दूध का दान करना शुभ माना जाता है।

  • महाशिवरात्रि 2026 पर ग्रहों का महासंयोग: कुंभ राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत!

    महाशिवरात्रि 2026 पर ग्रहों का महासंयोग: कुंभ राशि में बनेगा चतुर्ग्रही योग, इन 4 राशियों की खुलेगी किस्मत!


    नई दिल्ली । आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से साल 2026 की महाशिवरात्रि बेहद खास होने जा रही है। 15 फरवरी 2026 को जब पूरा देश महादेव की भक्ति में लीन होगा, तब अंतरिक्ष में ग्रहों की एक ऐसी हलचल होगी जो कई राशियों के भाग्य को सुनहरे अक्षरों में लिख देगी। इस दिन कुंभ राशि में चार बड़े ग्रहों राहु, बुध, शुक्र और सूर्य का दुर्लभ चतुर्ग्रही योग बनने जा रहा है। वर्तमान में कुंभ में राहु और बुध पहले से ही मौजूद हैं, लेकिन शिवरात्रि के शुभ अवसर तक शुक्र और सूर्य भी इस राशि में प्रवेश कर जाएंगे। ज्योतिषविदों का मानना है कि शनि की स्वामित्व वाली इस राशि में ग्रहों का यह जमावड़ा न केवल भगवान शिव की असीम कृपा दिलाएगा, बल्कि शनि देव के आशीर्वाद से जातकों के जीवन में सकारात्मकता का संचार भी करेगा।

    इस महासंयोग का सबसे शक्तिशाली प्रभाव मेष राशि के जातकों पर देखने को मिलेगा। मेष राशि वालों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं है, जहाँ आर्थिक तंगी दूर होगी और धन की आवक के नए रास्ते खुलेंगे। निवेश की पुरानी योजनाएं अब फल देने लगेंगी और जो लोग लंबे समय से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं, उनके लिए रोजगार के बेहतरीन अवसर पैदा होंगे। इसी तरह कन्या राशि के जातकों के लिए भी यह महाशिवरात्रि खुशियों की सौगात लेकर आएगी। पैतृक संपत्ति के अटके हुए मामले सुलझ सकते हैं और नया वाहन या मकान खरीदने का सपना सच हो सकता है। इस दौरान किसी प्रभावशाली व्यक्तित्व से आपकी मुलाकात करियर की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।

    मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह समय किसी बड़े टर्निंग पॉइंट की तरह होगा। मकर राशि वालों को कोर्ट-कचहरी के पुराने विवादों से मुक्ति मिलेगी और कर्ज का बोझ कम होने से मानसिक शांति का अनुभव होगा। वहीं, चूंकि यह चतुर्ग्रही योग स्वयं कुंभ राशि में ही बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए लाभ की संभावनाएं सबसे अधिक हैं। कुंभ राशि के जो जातक नौकरी छोड़कर स्वयं का स्टार्टअप या कारोबार शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय सबसे अनुकूल है। सोने-चांदी में निवेश और संतान पक्ष से मिलने वाली खुशखबरी उनके उत्साह को दोगुना कर देगी। कुल मिलाकर, 15 फरवरी 2026 की यह महाशिवरात्रि आर्थिक सामाजिक और व्यक्तिगत विकास की दृष्टि से इन चार राशियों के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होने वाली है।

  • Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ!

    Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर भूलकर भी न करें ये गलतियां, वरना नाराज हो सकते हैं भोलेनाथ!


    नई दिल्ली । महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पावन पर्वों में से एक है. इस दिन भक्त व्रत रखकर रात्रि जागरण कर और शिवलिंग पर जल-अभिषेक कर भोलेनाथ की विशेष कृपा पाने की कामना करते हैं. पंचांग के अनुसार साल 2026 में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं लेकिन अगर पूजा-व्रत में कुछ गलतियां हो जाएं तो इसका फल उल्टा भी हो सकता है. आइए जानते हैं महाशिवरात्रि के दिन कौन-सी गलतियां भूलकर भी नहीं करनी चाहिए.

    महाशिवरात्रि के दिन न करें ये काम!

    केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने केतकी के फूल को अपनी पूजा से वर्जित कर दिया था. इसलिए भूलकर भी इसे शिवलिंग पर न अर्पित करें. सिंदूर या कुमकुम: शिवजी वैरागी हैं और सिंदूर सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है जिसे महादेव पर नहीं चढ़ाया जाता. उनकी पूजा में भस्म का उपयोग सही माना जाता है. तुलसी दल: भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है. इसकी जगह आप बेलपत्र का इस्तेमाल करें. हल्दी: हल्दी का संबंध स्त्री सौंदर्य से है जबकि शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है. इसलिए शिवजी को हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए.

    बेलपत्र चढ़ाते समय रखें ध्यान

    हमेशा तीन पत्तियों वाला बेलपत्र ही चढ़ाएं. पत्तियां कहीं से कटी-फटी या सूखी नहीं होनी चाहिए. वहीं बेलपत्र का चिकना हिस्सा शिवलिंग की तरफ होना चाहिए.

    शंख से जल अर्पित करना
    भगवान विष्णु की पूजा में शंख अनिवार्य है लेकिन शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग वर्जित है. शास्त्रों के अनुसार महादेव ने शंखचूड़ नामक असुर का वध किया था इसलिए शिवलिंग का अभिषेक शंख से नहीं करना चाहिए. इसके लिए तांबे या पीतल के लोटे का उपयोग करें.

    खान-पान और व्यवहार की सावधानियां

    तामसिक भोजन: महाशिवरात्रि के दिन प्याज लहसुन मांस या मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें. काले कपड़े: पूजा के दौरान काले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. इस दिन हरा सफेद या पीला रंग शुभ माना जाता है. अनुशासन: इस दिन किसी का अपमान न करें न ही घर में क्लेश करें. शिव भक्ति में मन को शांत रखें.

    शिवलिंग की आधी परिक्रमा न करें?

    अक्सर लोग जोश में आकर शिवलिंग की पूरी परिक्रमा कर लेते हैं लेकिन नियम के अनुसार शिवलिंग की पूरी परिक्रमा नहीं की जाती. जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है (जिसे जलाधारी या निर्मली कहते हैं) उसे लांघना अशुभ माना जाता है. हमेशा वहीं से वापस मुड़ जाना चाहिए.

  • मंगलवार का राशिफल

    मेष राशि :- कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। नवीन उद्योगों के अवसर बढ़ेंगे व अभिलाषाएं पूर्ण होंगी। कुछ भ्रामक धारणाओं का खंडन होगा। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। शुभांक-5-6-9

    वृष राशि :- अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करें। वैचारिक द्वन्द्व और असंतोष बना रहेगा। किसी सूचना से पूर्ण निर्णय सम्भव। सुख आरोग्य प्रभावित होगा। प्रतिष्ठा बढ़ाने वाले कुछ सामाजिक कार्य संपन्न होंगे। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। शुभांक-2-6-8

    मिथुन राशि :- यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। कामकाज में आ रही बाधा को दूर कर लेंगे। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम पर पैनी नजर रखिए। विरोधी नुकसान की कोशिश करेगा। शुभांक-4-7-9

    कर्क राशि :- लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। परिश्रम से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पर प्रपंच में ना पड़कर काम पर ध्यान दीजिए। यात्रा शुभ रहेगी। शुभांक-1-3-5

    सिंह राशि :- दुर्लभ स्वप्न साकार होंगे। आलस्य का त्याग करें। पुरुषार्थ का सहारा लें। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। कोई प्रिय वस्तु अथवा नवीन वस्त्राभूषण प्राप्त होंगे। भावनाओं का उद्वेग बढ़ेगा। शुभांक-2-6-8

    कन्या राशि :- विवाद समाप्त होंगे। शुभ संदेशों से मन खिला-खिला रहेगा। परेशानीयां स्वत: ही दूर होती प्रतीत होगी। अध्ययन में रुचि पैदा होगी। अभिभावकों के प्रति उत्तरदायित्व निभाने होंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। स्वविवेक से कार्य करे। जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शुभांक-3-7-8

    तुला राशि :- भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। बुरी संगति से बचें। नौकरी में सावधानीपूर्वक कार्य करें। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शुभांक-3-5-7

    वृश्चिक राशि :- आवेश में आना आपके हित में नही होगा इसलिए व्यवहार व वाणी पर नियत्रंण रखें। पठन-पाठन में स्थिति कमजोर रहेगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। बाहरी सहयोग की अपेक्षा रहेगी। सलाह उपयोगी सिद्घ होगी। विपरीत परीस्थितियों में भी हानि नहीं होगी। शुभांक-5-6-8

    धनु राशि :- व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। आलस्य का त्याग करें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। शुभांक-2-6-8

    मकर राशि :- समय पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करें। शुभांक-4-6-7

    कुंभ राशि :- मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। शुभांक-3-5-8

    मीन राशि :- जीवनसाथी अथवा दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। एकाकी वृत्ति त्यागें। हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। इच्छित कार्य सफल होंगे। शुभांक-2-5-7
  • आज का दिन कैसा रहेगा: पंचांग में जानिए शुभ मुहूर्त ग्रहों की चाल और दिनभर का प्रभाव

    आज का दिन कैसा रहेगा: पंचांग में जानिए शुभ मुहूर्त ग्रहों की चाल और दिनभर का प्रभाव


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार आज सोमवार 2 फरवरी 2026 को माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है। यह तिथि पूर्णिमा के बाद प्रारंभ होती है और इसे आत्मविश्लेषण संयम और मानसिक स्थिरता के लिए उपयुक्त माना जाता है। सोमवार का दिन होने के कारण आज भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। ग्रहों की स्थिति भी आज सकारात्मक संकेत दे रही है।

    आज कृष्ण प्रतिपदा तिथि रात्रि 1 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। दिन के प्रारंभ में आयुष्मान योग प्रभावी रहेगा जो स्वास्थ्य और दीर्घायु से जुड़ा शुभ योग माना जाता है। इसके बाद सौभाग्य योग का संयोग बनेगा जो सफलता सौभाग्य और सकारात्मक परिणामों का संकेत देता है। करण के रूप में दिन के पहले भाग में बालव और बाद में कौलव करण प्रभाव में रहेगा।

    ग्रहों की स्थिति की बात करें तो आज सूर्य मकर राशि में स्थित हैं। इससे कार्यक्षेत्र में अनुशासन जिम्मेदारी और स्थायित्व का प्रभाव देखने को मिल सकता है। वहीं चंद्रमा पूरे दिन कर्क राशि में संचरण करेंगे और रात्रि 10 बजकर 47 मिनट तक इसी राशि में रहेंगे। चंद्रमा की यह स्थिति भावनात्मक संतुलन पारिवारिक विषयों और घरेलू मामलों को प्राथमिकता देती है।

    आज सूर्य का उदय प्रातः 7 बजकर 9 मिनट पर और सूर्यास्त सायं 6 बजकर 1 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सायं 6 बजकर 33 मिनट पर और चंद्रास्त प्रातः 7 बजकर 27 मिनट पर होगा।नक्षत्र की बात करें तो आज चंद्रमा आश्लेषा नक्षत्र में स्थित रहेंगे। यह नक्षत्र तीव्र बुद्धि रणनीतिक सोच और गूढ़ विषयों से जुड़ा माना जाता है। इस नक्षत्र में किए गए कार्यों में सावधानी और विवेक की आवश्यकता होती है। आश्लेषा नक्षत्र के स्वामी बुध देव हैं जबकि इसके अधिष्ठाता देवता नाग माने गए हैं।

    आज के शुभ मुहूर्तों की बात करें तो धार्मिक कार्य पूजा पाठ ध्यान और जप के लिए दोपहर और रात्रि का समय अनुकूल माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। वहीं अमृत काल रात्रि 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। इन समयों में किए गए कार्यों से सकारात्मक फल मिलने की मान्यता है।

    अशुभ काल में राहुकाल प्रातः 8 बजकर 30 मिनट से 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड प्रातः 11 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक और गुलिकाल दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। इस दौरान नए कार्य शुरू करने से बचना उचित माना गया है।दिन के लिए विशेष सुझाव यह है कि सोमवार के कारण शिवलिंग पर जल अर्पित करना लाभकारी रहेगा। मन की शांति के लिए ध्यान जप और मौन साधना उपयुक्त रहेगी। हल्का सात्विक भोजन और सकारात्मक सोच अपनाने से दिन और भी शुभ बन सकता है।

  • भोलेनाथ की पूजा से मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों में मिलती है राहत

    भोलेनाथ की पूजा से मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों में मिलती है राहत


    नई दिल्ली। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन नियमपूर्वक और श्रद्धा भाव से की गई शिव पूजा से जीवन के कष्ट धीरे धीरे दूर होने लगते हैं मान्यता है कि भोलेनाथ की आराधना से न केवल मन को शांति मिलती है बल्कि नौकरी धन स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन से जुड़ी परेशानियों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है

    शास्त्रों के अनुसार सोमवार को शिवलिंग पर जल दूध या गंगाजल अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है पूजा के दौरान सफेद वस्त्र धारण करना मन को शांत रखना और शिव मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है संध्या समय दीपक प्रज्ज्वलित करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है

    सोमवार को प्रातः शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का अभिषेक करने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होने की धार्मिक मान्यता है जल के साथ दूध शहद घी या दही से अभिषेक करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैंभगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है तीन पत्तियों वाला बेलपत्र सफेद पुष्प अक्षत और धतूरा अर्पित करने से सुख समृद्धि और पारिवारिक शांति में वृद्धि मानी जाती है यह उपाय विशेष रूप से गृह क्लेश और मानसिक अशांति को दूर करने के लिए किया जाता है

    सोमवार की संध्या शिव मंदिर में देसी घी का दीपक जलाने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार के योग बनते हैं इसके साथ ही ॐ नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने से भय तनाव और रोगों से राहत मिलने की धार्मिक मान्यता है इस दिन दान का भी विशेष महत्व बताया गया है दूध दही चावल चीनी या रुद्राक्ष का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

    यदि नौकरी या कार्यक्षेत्र में लगातार बाधाएं आ रही हों तो शिवलिंग पर शहद अर्पित करना लाभकारी माना जाता है वहीं दांपत्य जीवन में मधुरता और वैवाहिक सुख के लिए शिव पार्वती की संयुक्त पूजा कर ॐ गौरी शंकराय नमः मंत्र का जप किया जाता हैधार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार की शिव आराधना व्यक्ति को धैर्य आत्मबल और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करती है नियमित रूप से की गई यह साधना जीवन में संतुलन और स्थिरता लाने में सहायक मानी जाती है

  • फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अंगारक योग, मेष तुला और कुंभ के लिए बढ़ेगी चुनौती..

    फरवरी में राहु–मंगल की युति से बनेगा अंगारक योग, मेष तुला और कुंभ के लिए बढ़ेगी चुनौती..


    नई दिल्ली। फरवरी महीने में ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा जिसका असर ज्योतिषीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है इस दौरान राहु और मंगल एक ही राशि में आकर युति बनाएंगे जिससे एक उग्र और अशुभ अंगारक योग का निर्माण होगा ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग जल्दबाजी गुस्सा मानसिक तनाव और अप्रत्याशित घटनाओं की संभावना को बढ़ाता है

    ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक 23 फरवरी को मंगल का गोचर कुंभ राशि में होगा जहां पहले से ही राहु विराजमान हैं इन दोनों ग्रहों की युति सामान्य तौर पर अशांति टकराव और गलत निर्णयों को जन्म देती है ऐसे में यह समय कई राशियों के लिए धैर्य और संयम की परीक्षा लेने वाला साबित हो सकता है

    मेष राशि के जातकों के लिए यह योग विशेष सावधानी का संकेत दे रहा है कार्यक्षेत्र में रुकावटें आ सकती हैं अधूरे कामों में देरी होगी और अचानक खर्च बढ़ सकता है सहकर्मियों या अधिकारियों से विवाद की स्थिति बन सकती है इस दौरान वाहन चलाते समय खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि जल्दबाजी दुर्घटना का कारण बन सकती है

    तुला राशि वालों के लिए यह समय मानसिक दबाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ा सकता है अनावश्यक चिंता नींद की कमी और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बनी रह सकती है पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी उत्पन्न हो सकती है व्यापार या निवेश से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है इसलिए सोच समझकर कदम उठाना जरूरी होगा

    कुंभ राशि के जातकों पर इस योग का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक बताया जा रहा है क्योंकि यह योग इसी राशि में बन रहा है आर्थिक मामलों में लापरवाही भारी पड़ सकती है लेनदेन दस्तावेजों और नए समझौतों में विशेष सावधानी की जरूरत होगी घर और कार्यस्थल पर छोटी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ सकता है इसलिए संयमित व्यवहार अपनाना लाभकारी रहेगाज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे अशुभ योग के दौरान घबराने की बजाय संतुलित दिनचर्या अपनाना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है नियमित पूजा पाठ ध्यान और सकारात्मक सोच से मानसिक स्थिरता बनी रहती है साथ ही इस दौरान जोखिम भरे फैसलों अनावश्यक बहस और क्रोध से दूरी बनाकर रखना चाहिए

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रह योग भविष्य के प्रति चेतावनी देते हैं न कि निश्चित संकट समय रहते सतर्कता आत्मनियंत्रण और समझदारी अपनाकर नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है फरवरी में बनने वाला यह अंगारक योग भी यही संदेश देता है कि धैर्य और विवेक से परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ा जा सकता है