Category: Religious Astrology

  • चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र

    चैत्र नवरात्रि 2026: दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानिए शुभ मुहूर्त, विधि और मंत्र


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन 20 मार्च 2026 को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तप संयम ज्ञान और वैराग्य की प्रतीक देवी हैं। उनका यह रूप हमें कठिन समय में भी संयम और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है। कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा और मंत्र जाप से मानसिक शांति आत्मविश्वास और जीवन में बाधाओं को दूर करने की शक्ति प्राप्त होती है।

    मां ब्रह्मचारिणी का नाम ही उनके स्वरूप का परिचायक है। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। यही कारण है कि उनका पूजन साधना और संयम का अभ्यास करवा कर व्यक्ति को अडिग बनाता है। जीवन या व्यवसाय में अगर कोई बड़ी बाधा बार-बार आती है तो इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा आपकी इच्छाओं को पूरा करने में मदद कर सकती है और आत्मविश्वास को नया बल देती है।

    इस दिन का शुभ-मुहूर्त सुबह का समय माना गया है लेकिन विशेष रूप से अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक है। इस समय में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और सफेद या हल्के पीले वस्त्र धारण करना शुभ होता है। इससे मन और शरीर दोनों में शुद्धता आती है।

    पूजन विधि सरल है लेकिन प्रभावशाली। मां की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं और अपने कृतज्ञता भाव व्यक्त करें। मां को चमेली या कमल के फूल अर्पित करें क्योंकि ये उनके प्रिय माने जाते हैं। भोग में चीनी मिश्री या पंचामृत चढ़ाना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान मंत्रों का जाप करना आवश्यक है जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। अंत में आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।

    मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान मंत्र है:

    “या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
    दधना करपद्याभ्यांक्षमालाकमण्डलू।
    देवीप्रसीदतु मयी ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”

    इस मंत्र का अर्थ है कि देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अद्भुत और दिव्य है। माता के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है। साधारण मंत्र भी है: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः जिसका जाप कर श्रद्धा और भक्ति से मां की आराधना की जाती है।

    इस प्रकार चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा न केवल आत्मविश्वास और संयम की शक्ति देती है बल्कि जीवन में सुख शांति और समृद्धि भी लाती है। इस दिन विधि-विधान और उचित मुहूर्त में पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

  • नवरात्रि स्पेशल: व्रत की थाली में शामिल करें ये सुपरफूड्स, नहीं होगी कमजोरी

    नवरात्रि स्पेशल: व्रत की थाली में शामिल करें ये सुपरफूड्स, नहीं होगी कमजोरी


    नई दिल्ली नवरात्रि के पावन पर्व में व्रत रखना सिर्फ आस्था ही नहीं, बल्कि शरीर और मन को बनाए रखने का भी एक तरीका है। ऐसे में सही खान-पान बेहद जरूरी हो जाता है, ताकि पूरे दिन ऊर्जा बनी रहे और कमजोरी महसूस न हो।

    व्रत की थाली में ये चीजें जरूर शामिल करें
    व्रत के दौरान प्रभाव, सुपाच्य और मोनसायटिक भोजन लेना चाहिए। थाली में मखाना, साबूदाना, कुट्टू और समुद्री फल जरूर शामिल करें। ये सभी शरीर को आवश्यक पोषक तत्व देते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं।

    मखाना: परमाणु बम का सबसे अच्छा विकल्प
    मखाना लो कैलोरी और हाई चॉकलेट वप्रोटीन से भरपूर होती है। इसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं। इसे भूनकर या खेडगेरे का खजाना पाया जा सकता है। यह ब्लड डीवीडी कंट्रोलर और किडनी को स्वस्थ रखने में भी मदद करता है।

    साबूदाना: तत्काल ऊर्जा का स्रोत
    साबूदाना कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। यह प्रभाव और आसानी से पचने वाला होता है। इसे वड़ा या खेड के रूप में खाया जाता है। बेहतर पोषण के लिए इसे दही या मूंगफली के साथ लेना खतरनाक होता है।

    कुट्टू: लंबे समय तक एनर्जी बनाए रखें
    कुट्टू का आटा प्रोटीन, आयरन और विविधता से भरपूर होता है। यह ब्लड शुगर को स्थिर रखने में मदद करता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। कुट्टू की रोटी, पूरी या चीला व्रत में अच्छे विकल्प हैं।

    चमत्कारी फल: ताजगी और इम्युनिटी का खजाना
    सेब, केला, सेंट्रा और अनार जैसे फलों को विटामिन और वस्तुएं दी जाती हैं। ये शरीर को बनाए रखते हैं, डिटॉक्स करते हैं और इम्युनिटी को मजबूत बनाते हैं।

    ध्यान में क्या रखें?
    व्रत के दौरान अधिकतर ताला-भुना खाने से अर्थव्यवस्था और पानी का ठहराव होता है। श्रेणी आहार लेने से शरीर पर प्रभाव, मन शांत और ऊर्जा संरक्षित रहता है।

  • चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन और हाथी पर प्रस्थान के संकेत..

    चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन और हाथी पर प्रस्थान के संकेत..

    नई दिल्ली: देशभर में मनाए जाने वाले पावन पर्व चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से माना जाता है। यह पर्व न केवल शक्ति की उपासना का प्रतीक है, बल्कि नए हिंदू वर्ष की शुरुआत और जीवन में आने वाले बदलावों के संकेत भी देता है। इस वर्ष 19 मार्च से नवरात्र की शुरुआत हुई है और श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना में लीन हैं।

    मान्यता है कि नवरात्र में माता दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी आने वाले समय के संकेत देती है। इस बार मां जगदम्बा का आगमन गुरुवार के दिन पालकी पर हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन को सामान्यतः शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसे प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक अस्थिरता या आर्थिक चुनौतियों का संकेत माना जाता है। गुरुवार के दिन आगमन को लेकर यह भी माना जाता है कि यह समय कुछ सावधानियों और सतर्कता की मांग करता है।

    हालांकि, इस वर्ष मां का प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। हाथी स्थिरता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, जब मां हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं, तो यह संकेत देता है कि आने वाला समय सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता लेकर आएगा। यह स्थिति जीवन में संतुलन और प्रगति का संकेत भी मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी सप्ताह के दिन के अनुसार बदलती रहती है और हर सवारी का अलग महत्व होता है। उदाहरण के लिए, रविवार और सोमवार को प्रस्थान होने पर मां की सवारी भैंसा मानी जाती है, जिसे अशुभ माना जाता है क्योंकि यह रोग और शोक का प्रतीक है। वहीं, मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान होने पर सवारी मुर्गा होती है, जो कुछ स्थानों पर महामारी या जनहानि का संकेत माना जाता है।

    इसके विपरीत, बुधवार और शुक्रवार को मां की सवारी हाथी मानी जाती है, जो बेहद शुभ संकेत देता है और जीवन में सुख-समृद्धि, स्थिरता और उन्नति का प्रतीक होता है। गुरुवार को प्रस्थान होने पर मां मनुष्य के कंधे पर सवार होकर जाती हैं, जिसे भक्त और देवी के बीच विशेष आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

    विगत वर्ष 2025 की शारदीय नवरात्रि में भी मां का आगमन हाथी पर हुआ था, जो शुभ संकेत था, लेकिन प्रस्थान गुरुवार को भक्तों के कंधे पर हुआ था, जो संतुलन और मिश्रित परिणामों का संकेत माना गया।

     नवरात्रि में मां के आगमन और प्रस्थान की सवारी को भविष्य के संकेत के रूप में देखा जाता है। इस वर्ष जहां पालकी पर आगमन कुछ सावधानी बरतने का संदेश देता है, वहीं हाथी पर प्रस्थान आने वाले समय में स्थिरता और सकारात्मकता की उम्मीद जगाता है। यह पर्व न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि जीवन में संतुलन और चेतना का संदेश भी देता है।

  • नवरात्र में पीली सरसों के उपाय: कर्ज से मिलेगी राहत, होगा धन लाभ और परेशानियों से पाएं छुटकारा

    नवरात्र में पीली सरसों के उपाय: कर्ज से मिलेगी राहत, होगा धन लाभ और परेशानियों से पाएं छुटकारा


    नई दिल्ली। मां दुर्गा की आराधना का पावन पर्व नवरात्र 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक चलेगा। इस दौरान की गई पूजा-अर्चना से देवी दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। साथ ही यह समय जीवन की विभिन्न समस्याओं से राहत पाने के लिए भी शुभ माना जाता है। आर्थिक तंगी, बीमारियों और कर्ज जैसी परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए नवरात्र में पीली सरसों से जुड़े कुछ उपाय किए जा सकते हैं। ज्योतिष और लाल किताब में पीली सरसों के कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को अधिक फलदायी बनाने के लिए इन्हें नवरात्र समाप्त होने से पहले, यानी 27 मार्च 2026 तक कर लेना बेहतर माना गया है।

    पीली सरसों के खास उपाय

    घर की नकारात्मकता दूर करने के लिए यदि घर में तनाव, कलह या आर्थिक परेशानी बनी रहती है, तो नवरात्र के दौरान थोड़ी पीली सरसों को लाल कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और उसे मुख्य द्वार पर टांग दें। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती।

    आर्थिक समस्याओं से राहत के लिए

    अगर मेहनत के बावजूद धन की वृद्धि नहीं हो रही है, तो रात के समय एक मुट्ठी पीली सरसों को सिर से सात बार उतारकर किसी सुनसान चौराहे या बहते जल में प्रवाहित कर दें। इससे धन प्राप्ति में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

    कर्ज मुक्ति के लिए उपाय

    कर्ज से परेशान लोगों को नवरात्र में पीली सरसों को लाल कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रखनी चाहिए। इसके साथ मां लक्ष्मी से प्रार्थना करने से लाभ मिलने की मान्यता है।

    पूजा का पूर्ण फल पाने के लिए

    नवरात्र की पूजा के दौरान एक चांदी की कटोरी में पीली सरसों रखकर उसे माता के चरणों में अर्पित करें। ऐसा करने से साधना पूर्ण मानी जाती है और देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    नौकरी और व्यापार में तरक्की के लिए

    यदि नौकरी या व्यापार में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, तो नवरात्र या मंगलवार और रविवार के दिन पीली सरसों को सिर से सात बार उतारकर घर के बाहर दक्षिण दिशा में या चौराहे पर डाल दें। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होने की मान्यता है। इन उपायों को करते समय मन में श्रद्धा रखना जरूरी है और ॐ दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। इससे उपायों का प्रभाव और बढ़ जाता है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं और ज्योतिषीय आधार पर दी गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं

  • 20 मार्च का राशिफल : जानिए कैसा रहेगा आज आपका दिन? पढ़ें राशिफल

    20 मार्च का राशिफल : जानिए कैसा रहेगा आज आपका दिन? पढ़ें राशिफल


    नई दिल्‍ली । आज 20 मार्च, शुक्रवार को नवरात्रि का दूसरा दिन है। इस दिन ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। ग्रह-नक्षत्रों की चाल से राशिफल का आंकलन किया जाता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, 20 मार्च का दिन कुछ राशि वालों के लिए बेहद शुभ रहने वाला है, तो कुछ राशि वालों को जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं, 20 मार्च को किन राशि वालों को होगा लाभ और किन को बरतनी होगी सावधानी।

    मेष
    20 मार्च के दिन को क्लियरिटी के साथ देखें। करीबियों के साथ अपने कनेक्शन को मजबूत करने के आपको अच्छे से उनके साथ बॉन्डिंग बनानी है। आपके लिए चैलेंज भी है और मैके भी, तो आप अपने हिसाब से फैसले लेकर आगे बढ़ें।

    वृषभ
    20 मार्च के दिन खुली बातचीत से आपका कनेक्शन मजबूत होगा। फालतू तनाव से बचने के लिए फाइनेंशियल स्थिति पर ध्यान दें, बजट को रिव्यू करें और सेहत के लिहाज से, हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखने से आपका एनर्जी लेवल अच्छा रहेगा।

    मिथुन
    20 मार्च के दिन बैलेंस और आगे बढ़ने पर फोकस करने का समय है। करियर और पर्सनल लाइफ में तरक्की के मौके खुद ही सामने आते हैं, लेकिन सोच-समझकर आपको आज फैसले लेने हैं। व्यक्तिगत संबंधों की बात करें तो खुद को सुनें।

    कर्क
    20 मार्च के दिन आराम करने के लिए प्राथमिकता दें। अपने पार्टनर के साथ भी समय बिताएं और उनको समझने की कोशिश करें। नई संभावनाओं के लिए खुले रहें, लेकिन डीसीजन लेने में जल्दबाजी न करें।

    सिंह
    20 मार्च के दिन हेल्दी रहने के लिए लाइफ स्टाइल अच्छा करें और खुद की केयर करें। आज का दिन आपको नए मौकों को तलाशने के लिए आमंत्रित करता है। आपका ध्यान वर्क लाइफ बैलेंस बनाए रखने पर होना चाहिए।

    तुला
    20 मार्च के दिन तनाव के लेवल के प्रति सचेत रहकर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। आज का दिन नए अवसर और विकास लेकर आएगा। पर्सनल और प्रोफेशनल जीवन को संतुलित करने पर ध्यान दें।

    धनु
    20 मार्च के दिन प्रोफेशनल रूप से, बदलावों के लिए तैयार रहें। नई स्किल्स सीखने के लिए तैयार रहें। वित्तीय रूप से, यह आपके खर्च और बचत की आदतों पर गौर करने का अच्छा समय है। अपनी आदतों को बदलाव करके हेल्दी रहें।

    मकर
    20 मार्च के दिन सेहत दुरुस्त रहने वाली है। आपको अपने पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में चीजों को अच्छे से रिव्यू करें। आप अपने करीबियों के साथ अपने कनेक्शन को मजबूत होते हुए पा सकते हैं।

    कुम्भ
    20 मार्च के दिन लव लाइफ में चल रही उथल पुथल को सुलझाना बेहतर रहेगा। ऑफिस में आपको ऐसे मौके मिलेगे, जहां आप समस्याओं के सटीक सोल्यूशन देने में कामयाब रहेंगे। छोटी-मोटी आर्थिक समस्याएं आ सकती हैं, जिनका के लिए बजट को रिव्यू करें।

    कन्या
    20 मार्च के दिन कुछ लोगों के रिश्तों में थोड़ी-बहुत नोक-झोक हो सकती हैं, लेकिन चीजों को तुरंत कंट्रोल करने की कोशिश करें। आपकी सेहत और आर्थिक स्थिति दोनों पहले से बहतर होंगी और आपके फेवर में होंगी। लाइफ में बैलेंस जरूरी है।

    वृश्चिक
    20 मार्च के दिन रिश्तों में छोटी-मोटी समस्याएं आ सकती हैं लेकिन बातचीत कर इन दिक्कतों को सुलझाना बेहतर रहेगा। ऑफिस में ईगो को छोड़ दें और ऑफिस रोमांस से भी तौबा करें। चुनौतियों का बखूबी सामना करें। आपको मेंटली स्ट्रांग रहना है।

    मीन
    20 मार्च के दिन आपकी लव लाइफ में हंसी-खुशी का माहौल रहेगा, पर्सनल लाइफ में खुशिायां मिलेगी। आपका पार्टनर आपके लिए कोई सरप्राइज प्लान कर सकता है। आपके लिए सावधान रहने की सलाह है।

  • Jhulelal Jayanti 2026: जल, ज्योति और आस्था का संगम, चेटीचंड पर सिंधी नववर्ष का भव्य आगाज

    Jhulelal Jayanti 2026: जल, ज्योति और आस्था का संगम, चेटीचंड पर सिंधी नववर्ष का भव्य आगाज


    नई दिल्ली । सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व चेटीचंड इस वर्ष 20 मार्च 2026 को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह दिन सिंधी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक होने के साथ साथ भगवान झूलेलाल की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में आने वाला यह पर्व चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन पड़ता है जिससे इसकी आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। सिंधी भाषा में चेट का अर्थ चैत्र और चंड का अर्थ चंद्रमा होता है इसलिए इसे चैत्र का चांद भी कहा जाता है।

    इस खास अवसर पर श्रद्धालु पूरे विधि विधान से पूजा करते हैं। वर्ष 2026 में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6:51 बजे से रात 8:12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इस दौरान भक्त भगवान झूलेलाल की आराधना कर सुख समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि सिंधी समाज की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं का जीवंत प्रतीक भी है।

    चेटीचंड का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण बेहराना साहिब की परंपरा होती है जिसे अत्यंत श्रद्धा के साथ तैयार किया जाता है। इसमें दीपक मिश्री फल इलायची और सूखे मेवे सजाए जाते हैं। साथ ही भगवान झूलेलाल की सुंदर प्रतिमा को सुसज्जित कर शोभायात्रा निकाली जाती है। यह शोभायात्रा किसी नदी या जल स्रोत तक पहुंचती है जहां विधिपूर्वक पूजा अर्चना के बाद बेहराना साहिब का विसर्जन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ यह आयोजन सामूहिक भक्ति का रूप ले लेता है।

    इस पर्व की एक और विशेष परंपरा ज्योति जागरण है जिसमें श्रद्धालु आटे के दीपक में पांच बत्तियां जलाकर भगवान की आराधना करते हैं। यह दीपक आस्था ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं और चालिहो के तहत लगातार प्रार्थना करने का संकल्प लेते हैं जो उनकी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है।

    चेटीचंड का पर्व जल ज्योति और भक्ति का अद्भुत संगम है जो जीवन में संतुलन शांति और समृद्धि का संदेश देता है। यह न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है बल्कि समाज में एकता प्रेम और भाईचारे की भावना को भी प्रोत्साहित करता है। सिंधी समुदाय के लिए यह दिन नई शुरुआत उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है जो आने वाले वर्ष को शुभ और सफल बनाने की प्रेरणा देता है।

  • गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त

    गुड़ी पड़वा पर आस्था का उत्सव: सिद्धिविनायक मंदिर में 2 करोड़ के गहनों की नीलामी, बाप्पा का प्रसाद पाने उमड़े भक्त


    नई दिल्ली । हिंदू नववर्ष और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर में श्रद्धा भक्ति और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस खास दिन मंदिर ट्रस्ट द्वारा बाप्पा को अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की भव्य नीलामी आयोजित की गई जिसमें देशभर से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। हर कोई इस पावन अवसर पर भगवान गणेश के चरणों से जुड़े किसी भी आभूषण को अपने घर ले जाकर उसे आशीर्वाद के रूप में प्राप्त करना चाहता था।

    इस वर्ष की नीलामी खास इसलिए भी रही क्योंकि इसमें कुल 234 बहुमूल्य गहनों को शामिल किया गया था जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये आंकी गई। नीलामी में सोने के सिक्कों से लेकर आकर्षक जंजीरें नक्काशीदार लॉकेट कंगन चांदी की पादुका और भगवान गणेश के प्रिय वाहन मूषक की प्रतिमाएं भी शामिल थीं। जैसे ही नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई मंदिर परिसर में उत्साह और भक्ति का माहौल और अधिक गहरा हो गया। भक्तों के बीच इन पवित्र वस्तुओं को प्राप्त करने की होड़ साफ दिखाई दी।

    भक्तों के लिए ये गहने केवल धातु के आभूषण नहीं बल्कि साक्षात बाप्पा का आशीर्वाद माने जाते हैं। मान्यता है कि गुड़ी पड़वा पर खरीदी गई कोई भी वस्तु विशेष शुभ फल देती है और यदि वह वस्तु सिद्धिविनायक मंदिर से जुड़ी हो तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। एक श्रद्धालु ने बताया कि ऐसे पावन गहनों को घर में रखने से सुख-समृद्धि शांति और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। यही वजह है कि लोग लाखों रुपये तक की बोली लगाने में भी पीछे नहीं हटते।

    इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहलू भी है। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार नीलामी से प्राप्त होने वाली करोड़ों रुपये की राशि का उपयोग केवल मंदिर के रखरखाव तक सीमित नहीं रहता बल्कि इसे समाजसेवा के विभिन्न कार्यों में भी लगाया जाता है। शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरतमंदों की सहायता के लिए यह धन एक मजबूत आधार बनता है। इस प्रकार भक्तों की आस्था से जुड़ी यह नीलामी समाज के कमजोर वर्गों के लिए आशा और सहयोग का माध्यम बन जाती है।

    गुड़ी पड़वा जैसे शुभ पर्व पर आयोजित यह नीलामी न केवल धार्मिक परंपराओं को जीवित रखती है बल्कि यह संदेश भी देती है कि भक्ति और सेवा का मेल समाज को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। सिद्धिविनायक मंदिर का यह अनूठा प्रयास आस्था को एक नई दिशा देता है जहां श्रद्धा केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न रहकर सामूहिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद

    चैत्र नवरात्रि 2026: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पाएँ सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज 19 मार्च 2026 से आरंभ हो चुका है जो 27 मार्च 2026 को राम नवमी के दिन संपन्न होगा। हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है क्योंकि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री और सौभाग्य की देवी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में स्थिरता सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

    ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष घटस्थापना यानी कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। पहला मुहूर्त सुबह 06:52 से 07:43 तक रहेगा जिसकी अवधि लगभग 50 मिनट है। यदि इस समय पूजा संभव न हो तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:05 से 12:53 तक विशेष फलदायी माना गया है। शुभ मुहूर्त में की गई पूजा घर में सुख-समृद्धि और बरकत लेकर आती है।

    पूजा की शुरुआत प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने से होती है। इसके बाद घर के पूजा स्थान पर लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा या मां शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। विधिपूर्वक कलश स्थापना की जाती है जो नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। इसके बाद मां शैलपुत्री का ध्यान करते हुए उन्हें सफेद फूल अर्पित किए जाते हैं क्योंकि सफेद रंग उन्हें अत्यंत प्रिय है।

    भोग के रूप में मां को गाय के दूध से बनी मिठाई या अन्य सफेद खाद्य पदार्थ अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान घी का अखंड दीपक जलाना शुभ माना जाता है जिससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक वातावरण का निर्माण होता है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मंत्रोच्चारण और प्रार्थना करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    पूजा के समापन पर आरती का विशेष महत्व होता है। सुबह की आरती सूर्योदय के समय और शाम की आरती सूर्यास्त के बाद करना शुभ माना जाता है। परिवार के सभी सदस्यों का एक साथ आरती में शामिल होना घर में प्रेम एकता और सामंजस्य को बढ़ाता है। मां शैलपुत्री की आरती के माध्यम से भक्त अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं और जीवन में सुख-संपत्ति की कामना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री की पूजा से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और मन के विकार दूर होते हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं उन्हें हर प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का आगमन होता है। इस प्रकार नवरात्रि का पहला दिन आध्यात्मिक ऊर्जा और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

  • चैत्र नवरात्रि में समय की कमी? दुर्गा सप्तशती के बराबर फल देगा यह छोटा मंत्र

    चैत्र नवरात्रि में समय की कमी? दुर्गा सप्तशती के बराबर फल देगा यह छोटा मंत्र


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती और दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत फलदायी बताया गया है। हालांकि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के लिए इनका पूरा पाठ करना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में शास्त्रों में कुछ सरल उपाय भी बताए गए हैं जिनसे समान फल की प्राप्ति संभव मानी गई है।

    दुर्गा सप्तशती में मां दुर्गा की महिमा शक्ति और उनकी महिषासुर पर विजय का वर्णन 13 अध्यायों में किया गया है। मान्यता है कि इसका पाठ करने से जीवन के कष्ट भय और बाधाएं दूर होती हैं तथा साधक को मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यही कारण है कि नवरात्रि में नवचंडी और शतचंडी यज्ञ जैसे अनुष्ठान भी किए जाते हैं।

    कम समय में भी करें प्रभावशाली पाठ

    अगर आपके पास पूरा पाठ करने का समय नहीं है तो आप दुर्गा सप्तशती के केवल रात्रि सूक्त प्रथम अध्याय और देवी सूक्त पंचम अध्याय का पाठ कर सकते हैं। इसे भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है और इससे माता की कृपा प्राप्त होती है।

    मंत्र जप से मिलेगा समान फल

    यदि इतना समय भी नहीं है तो शास्त्रों के अनुसार यह बीज मंत्र सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय माना गया है

    ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

    इस मंत्र का 108 या 1008 बार जप करने से दुर्गा सप्तशती के पाठ के समान फल मिलने की मान्यता है।

    इसके अलावा

    या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता
    का नियमित जप भी जीवन से भय बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। और यदि आप सबसे आसान उपाय चाहते हैं तो जय माता दी या दुर्गा-दुर्गा का सच्चे मन से स्मरण करना भी उतना ही फलदायी माना गया है। इस प्रकार समय की कमी होने पर भी श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए छोटे-छोटे मंत्र जप से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त की जा सकती है।

  • आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष

    आज तीन पर्वों का संगम: गुड़ी पड़वा, नवरात्रि और उगादी से शुभारंभ होगा हिंदू नववर्ष


    नई दिल्ली । आज हिंदू धर्म के लिए बेहद खास दिन है क्योंकि तीन महत्वपूर्ण पर्व गुड़ी पड़वा नवरात्रि और उगादी एक साथ मनाए जा रहे हैं। उत्तर भारत में यह दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जबकि दक्षिण भारत में आंध्र प्रदेश तेलंगाना और कर्नाटक में इसे उगादी के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में यह दिन गुड़ी पड़वा के रूप में नववर्ष की शुरुआत का पर्व है।

    उगादी का महत्व

    उगादी का अर्थ है युग की शुरुआत और इसे प्रकृति के श्रृंगार और नए जीवन का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी और समय की गणना भी इसी दिन से शुरू हुई थी। यह पर्व नए अवसर समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है।

    शुभ मुहूर्त

    चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आज यानी 19 मार्च को सुबह 6:52 से शुरू होकर कल 20 मार्च को शाम 5:52 तक रहेगी। नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना का विशेष महत्व है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:52 से 8:08 बजे तक है जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:22 से 1:11 बजे तक रहेगा।

    गुड़ी बांधने का समय

    महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के अवसर पर गुड़ी बांधने और ध्वज फहराने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:15 से 7:57 बजे तक है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं रंगोली बनाते हैं और विशेष पकवान तैयार करते हैं। गुड़ी पड़वा नई शुरुआत समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। आज का दिन तीनों पर्वों के संगम और नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक है जो पूरे देश में उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा।