Category: Religious Astrology

  • अघोरी बाबा बनने की कठिन साधना: 12 साल की तपस्या और 5 कठिन नियम

    अघोरी बाबा बनने की कठिन साधना: 12 साल की तपस्या और 5 कठिन नियम


    नई दिल्ली । अघोरी बाबा हिंदू धर्म के सबसे रहस्यमयी और कठिन आध्यात्मिक पंथों में से एक माने जाते हैं। भगवान शिव के भैरव रूप के उपासक अघोरी अपनी कठोर साधना भूत-प्रेत से संबंधित क्रियाओं और सनातन मार्ग से अलग हटकर जीवनशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। अघोर शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है जो घोर न हो यानी एक ऐसा व्यक्ति जो संसार की जटिलताओं से ऊपर उठकर अत्यधिक सरल और सहज जीवन जीता हो। हालांकि इस सहजता तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत कठिन है और इसके लिए एक कठोर साधना की आवश्यकता होती है।

    अघोरी बनने के लिए 12 वर्षों की कठिन तपस्या

    अघोरी बनने के लिए सबसे पहली शर्त है 12 वर्षों की तपस्या। यह तपस्या किसी साधारण साधना से कहीं अधिक कठोर होती है। अघोरी बनने के इच्छुक व्यक्ति को पहले अपने गुरु के पास जाकर उनका दीक्षा ग्रहण करना होता है। इस दौरान गुरु के मार्गदर्शन में शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर कठिन साधनाएं की जाती हैं। अघोरी बनने के इस रास्ते में व्यक्ति को अपने शरीर और आत्मा को नियंत्रित करने की अत्यधिक कठिन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। गुरु की उपस्थिति में 12 साल की साधना के दौरान, अघोरी ने अपनी चेतना को शुद्ध करने के लिए व्रत, उपवास और अन्य कठिन तपों का पालन करना होता है। यह तपस्या आत्मा को शुद्ध करने और शिव भक्ति में गहरे उतरने के लिए की जाती है।

    सांसारिक मृत्यु और नया जन्म

    अघोरी बनने से पूर्व व्यक्ति को एक मानसिक और शारीरिक मृत्यु का अनुभव करना होता है। इसका अर्थ है कि वह अपने परिवार और समाज के लिए पूरी तरह से मृत हो चुका है और उसे एक नए जन्म की आवश्यकता होती है। यह मृत्यु एक प्रकार का ‘पिंडदान’ होती है जिसमें व्यक्ति अपने पुराने अहंकार और सांसारिक आकर्षण को छोड़कर केवल शिव भक्ति की ओर अग्रसर होता है। अघोरी बनने के बाद उनका जीवन पूरी तरह से गुरु और शिव की सेवा में समर्पित हो जाता है। उनके द्वारा किए गए कार्यों और साधनाओं में कोई भी परंपरागत या सामाजिक बंधन नहीं होते। वे अपने मार्ग में जाने वाले हर कार्य को भैरव रूप में स्वीकार करते हैं।

    अघोरी जीवन के 5 कठिन नियम

    शरीर की तपस्या: अघोरी के लिए शरीर केवल एक माध्यम होता है, और इसे पूरी तरह से शुद्ध किया जाता है। शरीर को संयमित और तपस्वी जीवन जीने के लिए तैयार किया जाता है। सांसारिक मोह-माया से दूर रहना: अघोरी के लिए यह आवश्यक है कि वह सांसारिक सुख-साधनों से दूर रहे। उन्हें अपनी इच्छाओं और भौतिक सुखों से कोई आकर्षण नहीं होता। मृत्यु और जीवन के बीच की सीमा को समझना: अघोरी प्राचीन परंपराओं के अनुसार मृत्यु को एक प्राकृतिक प्रक्रिया मानते हैं और वे उसे शिव के रूप में स्वीकार करते हैं। इसके कारण वे शवों के पास बैठकर साधना करते हैं और शमशान भूमि को भी अपने साधना स्थल के रूप में चुनते हैं।

    नकारात्मक ऊर्जा से संवाद अघोरी अक्सर भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से संवाद करते हैं। इसका उद्देश्य आत्मा को शुद्ध करना और सच्चे शिव दर्शन को प्राप्त करना होता है। निर्विकल्प समर्पण: अघोरी बाबा के लिए समर्पण सबसे बड़ा साधना है। उन्हें अपने जीवन में कोई दुराव या स्वार्थ नहीं होता वे पूर्ण रूप से शिव की भक्ति में लीन रहते हैं। घोरी बनने की साधना को आम तौर पर एक अत्यंत कठिन और जोखिमपूर्ण प्रक्रिया माना जाता है, लेकिन इसके जरिए व्यक्ति अपनी आत्मा की शुद्धि और शिव के निकटता प्राप्त करने का प्रयास करता है। यह एक ऐसा मार्ग है जिसमें शरीर, मन, और आत्मा की पूरी तपस्या और बलिदान शामिल होता है।

  • मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति कब है 2026: जानें कब मनाई जाएगी और किन चीजों का करें दान


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति हिंदू धर्म में एक बेहद महत्वपूर्ण और खास त्योहार है, जो हर साल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से पौष माह में आता है और इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं जिसे देवताओं का दिन माना जाता है। इस दिन सूर्य की उपासना दान और विशेष रूप से गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान का महत्व होता है।

    मकर संक्रांति कब है 2026

    पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 जनवरी 2026, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शुरू होकर लगभग 2 घंटे 32 मिनट तक रहेगा। इस दौरान किए गए स्नान, दान, सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने और जप-तप का विशेष महत्व है।

    मकर संक्रांति पर किन चीजों का करें दान

    मकर संक्रांति का दिन विशेष रूप से दान के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस दिन दान करने से न केवल पुण्य मिलता है बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि भी आती है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन निम्नलिखित चीजों का दान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को खुशहाली मिलती है तिल: तिल का दान बहुत शुभ माना जाता है और यह शरीर को निरोगी बनाता है।

    गुड़: गुड़ का दान करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। खिचड़ी: खिचड़ी का दान करना और उसका सेवन करना विशेष रूप से इस दिन शुभ माना जाता है। चावल और उड़द: चावल और उड़द का दान करना भी मकर संक्रांति के दिन फलदायी होता है।हल्दी और नमक: हल्दी और नमक का दान भी पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। धान: धान का दान करने से अनर्थ और दरिद्रता का नाश होता है। इसके अलावा इस दिन दीन-हीन और गरीबों को वस्त्र, वस्तुएं, अन्न और अन्य जरूरी सामान दान करने का भी महत्व है।

    मकर संक्रांति का महत्व

    मकर संक्रांति का पर्व सूर्य देव के उत्तरायण होने के कारण विशेष रूप से महत्व रखता है। यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस दिन से सूर्य की किरणें पृथ्वी पर अधिक शक्ति और ऊर्जा लेकर आती हैं। यही कारण है कि इस दिन को शुभ कार्यों की शुरुआत और दान-पुण्य के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है।

    स्नान-दान का महत्व

    मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। साथ ही सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना और विशेष रूप से मंत्रों का जाप करना पुण्यदायी होता है। मकर संक्रांति का पर्व एक नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता लेकर आता है, जो जीवन को उज्जवल और समृद्ध बनाता है।

  • मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान

    मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। यह दिन विशेष रूप से तप ध्यान और आत्म-चिंतन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति कुछ राशियों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगी। खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए यह दिन एक वरदान साबित हो सकता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा उन पर बरसने वाली है।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए मौनी अमावस्या का दिन बेहद शुभ और लाभकारी रहेगा। भगवान शिव की कृपा से आपके रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होंगे और जो कार्य पहले कठिन लग रहे थे वे अब सुगमता से पूरे होंगे। इस दिन के दौरान खासकर बिजनेस और वित्तीय मामलों में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    लाभ

    व्यापार में लाभ के प्रबल योग हैं। निवेश के लिए यह समय उत्तम रहेगा और आपको अच्छा रिटर्न मिल सकता है।जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता और समृद्धि की संभावनाएं बन रही हैं।

    उपाय

    मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। यह उपाय आपके जीवन में शांति और समृद्धि लाएगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं और इनके आराध्य भगवान शिव हैं। मौनी अमावस्या पर यह दिन मकर राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ होगा। इस दिन आपको बड़ी उपलब्धियों की प्राप्ति हो सकती है जिनकी आप लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। इसके अलावा पार्टनर का सहयोग और समर्थन भी प्राप्त होगा जिससे आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों में गति आएगी।

    लाभ

    लंबे समय से अटके हुए काम अब गति पकड़ेंगे। मानसिक तनाव में कमी आएगी जिससे जीवन में शांति और संतुलन स्थापित होगा। पार्टनर और सहयोगियों से पूरी मदद मिलेगी।

    उपाय

    इस दिन काले तिल का दान करना आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। इससे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा और कार्यों में सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह मौनी अमावस्या बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। ग्रहों की स्थिति कुंभ राशि के लिए शुभ संकेत दे रही है। इस दिन महादेव की विशेष कृपा से आपके जीवन में आने वाली चुनौतियों से मुक्ति मिल सकती है और जो भी कष्ट चल रहे थे वे दूर हो सकते हैं। आप मानसिक शांति और संतुलन महसूस करेंगे जो आपके व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाएगा।

    लाभ

    किसी भी पुराने या लंबित कार्य में सफलता मिलने की संभावना है। इस दिन आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी और घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा कोई नई शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत अनुकूल रहेगा।

    उपाय

    इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने और धूप-दीप से पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। इससे आपके कार्यों में आ रही अड़चनें दूर होंगी और आपकी जिंदगी में सुख-समृद्धि आएगी। 18 जनवरी 2026 को होने वाली मौनी अमावस्या आपके जीवन में नए बदलाव ला सकती है खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए। इस दिन भगवान शिव की कृपा से आपकी मेहनत का फल मिलेगा रुके हुए कार्य पूरे होंगे और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। इन तिथियों पर शिव पूजा और दान का महत्व अधिक बढ़ जाता है और ये उपाय आपके जीवन में शांति समृद्धि और सफलता लाने में सहायक होंगे।

  • मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग

    मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान करना न केवल शरीर के शुद्धिकरण का तरीका है बल्कि यह आत्मा के उद्धार का मार्ग भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि विशेष तिथियों पर इन नदियों के जल में अमृत’ तत्व का संचार होता है और उस समय स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे खास अवसर आ रहे हैं जब गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख तिथियों के बारे में जब गंगा स्नान से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

    साल का पहला बड़ा स्नान सूर्य के उत्तरायण होने पर होता है। इस दिन विशेष रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन विशेष रूप से गंगा में स्नान करके दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

    मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026

    माघ महीने की यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन खासकर मौन रहकर जप और गंगा स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन आपके जीवन की समस्याओं को हल करने और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए बेहद शुभ है।

    माघी पूर्णिमा 1 फरवरी 2026

    माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और माघ स्नान के संकल्प से भक्त अपने व्रत का समापन करते हैं। यह समय स्वर्ग लोक की प्राप्ति के लिए अनुकूल होता है। माघी पूर्णिमा के दिन किए गए दान और पुण्य का फल लंबी अवधि तक मिलता है।
    गंगा दशहरा 25 मई 2026 गंगा दशहरा वह पर्व है जब मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की कथा सुनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप कायिक वाचिक और मानसिक का नाश होता है।

    गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है बल्कि यह पवित्रता भी प्रदान करता है जिससे जीवन में एक नवीनीकरण और आंतरिक शांति का अहसास होता है।कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दीपावली’ और ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान और दीपदान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। साथ ही इस दिन का स्नान व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    दान का महत्व

    इन विशेष तिथियों पर गंगा स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज वस्त्र तिल या अन्य सामग्री का दान जरूर करें। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के स्नान का पुण्य फल स्थिर नहीं माना जाता है। दान से स्नान के पुण्य में वृद्धि होती है और यह आपके जीवन में समृद्धि और शांति का कारण बनता है।इन प्रमुख तिथियों पर गंगा स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने से न केवल आत्मा का शुद्धिकरण होता है बल्कि जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। इन अवसरों का सही लाभ उठाकर आप अपने जीवन को पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।

  • घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका

    घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । गंगाजल को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र और शुद्ध माना जाता है। इसे देवी गंगा का स्वरूप माना जाता है, और यह घर में शुद्धता और आशीर्वाद लाने के लिए रखा जाता है। मगर गंगाजल को सही विधि से रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर इसे गलत तरीके से रखा जाए तो इसके आध्यात्मिक प्रभाव में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं कि घर में गंगाजल रखने का सही तरीका क्या है और कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

    सही पात्र का चयन करें

    गंगाजल को हमेशा तांबे, पीतल, चांदी या कांच के बर्तन में ही रखें। ये सामग्री पवित्रता को बनाए रखने में मदद करती हैं। प्लास्टिक और लोहे के बर्तनों में गंगाजल रखना अशुद्ध माना जाता है। साथ ही, बर्तन को हमेशा साफ और गंगाजल के लिए ही इस्तेमाल करें, ताकि उसमें कोई और अशुद्धता न घुले।

    गंगाजल रखने की सही जगह

    गंगाजल को घर के मंदिर या पूजा स्थल में ही रखना चाहिए। इसे कभी भी जमीन पर नहीं रखें। गंगाजल रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पूजा का स्थान है, जहां नियमित रूप से श्रद्धा भाव से पूजा होती हो। बाथरूम, रसोई या शयनकक्ष में गंगाजल रखना गलत माना जाता है, क्योंकि इन स्थानों को पवित्र नहीं माना जाता।

    ढककर रखें

    गंगाजल के पात्र को हमेशा ढककर रखें ताकि उसमें धूल या कोई भी अशुद्धता न जाए। ढक्कन साफ होना चाहिए और उसे नियमित रूप से धोकर रखना चाहिए। गंगाजल का शुद्धता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे बिना ढके रखने से बचें।

    गंगाजल का उपयोग केवल पवित्र कार्यों के लिए करें

    गंगाजल का इस्तेमाल केवल पूजा, हवन, व्रत, संस्कार और शुद्धिकरण के लिए ही करना चाहिए। इसे किसी आम कार्य के लिए इस्तेमाल करना अनुचित होता है। साथ ही अशुद्ध अवस्था में या बिना स्नान किए गंगाजल को छूने से बचें। यह गंगाजल की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है।

    बचा हुआ गंगाजल कैसे निपटान करें

    गंगाजल का नाली में बहाना कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह गंगाजल की पवित्रता के खिलाफ है। यदि गंगाजल बच जाए तो इसे पौधों की जड़ों में डाल सकते हैं, जो कि शुभ माना जाता है। इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पौधों की वृद्धि में भी मदद मिलती है। गंगाजल को घर में रखना एक पवित्र कार्य है और इसे सही तरीके से रखने से इसके आध्यात्मिक प्रभाव और शुद्धता में वृद्धि होती है। गंगाजल को सही पात्र में सही स्थान पर और सही तरीके से रखने से न केवल घर में शांति और सौभाग्य का वास होता है बल्कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है। इन सरल नियमों का पालन करके आप गंगाजल की महिमा और शक्ति का सही तरीके से अनुभव कर सकते हैं।

  • शुभ और अशुभ काल 07 जनवरी 2026 पंचांग – माघ माह की पंचमी तिथि

    शुभ और अशुभ काल 07 जनवरी 2026 पंचांग – माघ माह की पंचमी तिथि


    नई दिल्ली । आज, 07 जनवरी 2026 माघ माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि है। यह बुधवार का दिन है जो विशेष रूप से भगवान गणेश जी को समर्पित होता है। इस दिन की पूजा से बुद्धि सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है, साथ ही बुध दोष भी समाप्त होता है। इस दिन गणपति जी की पूजा के दौरान दूर्वा ,मोदक और शमी के पत्तों का अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का जाप भी विशेष लाभकारी होता है।

    शुभ काल, अमृत काल

    यह समय सबसे उत्तम माना जाता है, खासकर पूजा, अनुष्ठान और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए। आज के अमृत काल का समय है 0933 AM से 1108 AM तक और 0552 AM से 0730 AM तक।

    ब्रह्म मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त, जो कि सुबह का पवित्र समय होता है, वह 05:37 AM से 06:25 AM तक रहेगा। इस समय का प्रयोग साधना और पूजा के लिए सर्वोत्तम है।

    अशुभ काल ,राहू काल

    राहू काल, जो शुभ कार्यों के लिए मना होता है, आज दोपहर 12:33 PM से 1:52 PM तक रहेगा। इस समय के दौरान कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है।
    यम गण्ड
    यम गण्ड का समय सुबह 8:33 AM से 9:53 AM तक रहेगा। इस समय भी महत्वपूर्ण कार्यों से बचना चाहिए।
    कुलिक काल
    कुलिक काल का समय 11:13 AM से 12:33 PM तक रहेगा, जो किसी भी प्रकार के कार्य के लिए अशुभ माना जाता है।
    दुर्मुहूर्त
    दुर्मुहूर्त का समय 12:11 PM से 12:54 PM तक रहेगा, जो कार्यों के लिए निषेध काल है।
    वर्ज्यम्
    वर्ज्यम् काल 08:05 PM से 09:43 PM तक रहेगा, यह समय भी शुभ कार्यों से बचने का है।

    सूर्य और चंद्रमा का समय

    सूर्योदय
    आज सूर्योदय 7:13 AM पर होगा।

    सूर्यास्त
    सूर्यास्त 5:52 PM पर होगा।
    चन्द्रोदय
    आज चन्द्रोदय 10:04 PM पर होगा।
    चन्द्रास्त
    08 जनवरी को चन्द्रास्त 10:42 AM पर होगा।
    आज के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष रूप से बुध ग्रह से संबंधित दोषों का निवारण होता है। गणेश जी के आशीर्वाद से जीवन में सफलता और समृद्धि का वास होता है। साथ ही, इस दिन के शुभ और अशुभ काल का ध्यान रखते हुए महत्वपूर्ण कार्यों की योजना बनानी चाहिए।

  • मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत

    मकर संक्रांति 2026: सूर्य के मकर गोचर से बदलेगा भाग्य का चक्र, 12 महीने बाद नए अवसरों की शुरुआत


    नई दिल्ली ।मकर संक्रांति के पावन अवसर पर 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह खगोलीय घटना करीब 12 महीने बाद घटित हो रही है जिसे धार्मिक सामाजिक और ज्योतिषीय-तीनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही जहां मकर संक्रांति का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा वहीं खरमास की समाप्ति के बाद विवाह गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों की भी पुनः शुरुआत होगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सूर्य का यह गोचर कई राशियों के जीवन में करियर धन और मान-सम्मान के नए द्वार खोल सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र में सूर्य और शनि को स्वभाव से विपरीत ग्रह माना गया है लेकिन पिता-पुत्र के संबंध के कारण सूर्य का शनि की राशि मकर में प्रवेश विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए परिश्रम अनुशासन और निरंतर प्रयासों का फल अवश्य मिलता है। यह गोचर उन लोगों के लिए खास साबित हो सकता है जो लंबे समय से अपने लक्ष्य को पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर दशम भाव में होगा जो कर्म और करियर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इस अवधि में नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और पदोन्नति के योग भी बन सकते हैं। जो लोग नौकरी बदलने की योजना बना रहे हैं उनके लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। नेतृत्व क्षमता में वृद्धि होगी और वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है।वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव में गोचर करेंगे जिसे भाग्य और धर्म का भाव कहा जाता है। इस दौरान भाग्य का पूरा साथ मिलने के संकेत हैं। उच्च शिक्षा विदेश यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ सकती है। अचल संपत्ति या दीर्घकालिक निवेश से लाभ के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में वरिष्ठों का सहयोग और सम्मान प्राप्त हो सकता है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का गोचर तीसरे भाव में होगा जो पराक्रम और साहस का प्रतीक है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ेगा और नए काम शुरू करने की प्रेरणा मिलेगी। आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत हैं हालांकि व्यापार या निवेश में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है। पारिवारिक जीवन में भाई-बहनों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा।मकर राशि के लिए यह गोचर सबसे अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है क्योंकि सूर्य लग्न भाव में प्रवेश करेंगे। इससे व्यक्तित्व में निखार आएगा सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और करियर में उन्नति के मजबूत योग बनेंगे। संपत्ति और सरकारी मामलों में सफलता मिल सकती है लेकिन स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है इसलिए संतुलन जरूरी है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य द्वादश भाव में गोचर करेंगे। इस दौरान विदेश यात्रा विदेशी कंपनियों से जुड़े काम और आय के नए स्रोत बन सकते हैं। हालांकि खर्चों में वृद्धि संभव है और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रह सकता है।ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि सूर्य का मकर गोचर मेहनत अनुशासन और धैर्य का महत्व सिखाता है। यह समय उन्हीं लोगों को विशेष फल देगा जो लक्ष्य के प्रति समर्पित रहकर लगातार प्रयास करते हैं। कुल मिलाकर मकर संक्रांति 2026 कई राशियों के लिए बदलाव और उन्नति का संकेत लेकर आ रही है।

  • Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    Makar Sankranti पर सूर्य देव की कृपा पाने के लिए करें ये काम, होगी सुख-समृद्धि की बरसात

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर स्नान-दान से पुण्य फल मिलते हैं। इस दिन सूर्य देव की उपासना करने से साधक को सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में आप इस दिन पर कुछ विशेष कार्यों द्वारा सूर्य देव की कृपा के पात्र बन सकते हैं।

    ऐसा माना गया है कि मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) के दिन किए गए स्नान-दान और पूजा-पाठ करने से साधक को कई गुना फल मिलता है। इस साल मकर संक्रांति बुधवार, 14 जनवरी को है। मकर संक्रांति पर खरमास का समापन भी होता है, जिससे विवाह आदि जैसे शुभ कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं।

    जरूर करें ये काम
    मकर संक्रांति के दिन (Makar Sankranti 2025 Upay) सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी खासकर गंगा में स्नान जरूर करें। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव न हो, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इससे साधक के लिए सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।

    शनि दोष से मिलेगी राहत
    शनि दोष से राहत पाने के लिए मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2025) के दिन गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिव जी का अभिषेक करें। ऐसा करने से आपको अपनी स्थिति में लाभ देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही आप मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के बाद बहती जलधारा में काले तिल प्रवाहित कर सकते हैं, जिससे शनि दोष में राहत मिलती है।
    इस तरह करें सूर्य देव को प्रसन्न
    मकर संक्रांति के दिन स्नान-ध्यान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के मान-सम्मान में वृद्धि होती है। इस दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए सबसे पहले जल में लाल फूल, अक्षत (चावल) और रोली मिलाएं और इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें। इस दौरान ॐ सूर्याय नम: मंत्र का जप करते रहें।

    अंत में सूर्य देव को नमस्कार करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करें। साथ ही इस दिन पर सूर्य देव की कृपा के लिए अपनी क्षमता के अनुसार, अन्न, तिल, गुड़, कपड़े, कंबल और धन आदि का दान (Makar Sankranti Daan) करें व गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराएं।

  • क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग

    क्यों हनुमान जी थे लक्ष्मण से भी प्रिय प्रभु श्री राम के लिए? पढ़ें यह भावुक प्रसंग


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन विशेष रूप से शक्ति भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह दिन प्रभु श्री राम के परम भक्त हनुमान जी को समर्पित है। गोस्वामी तुलसीदास की काव्य कृति श्रीरामचरितमानस के किष्किंधा कांड में एक ऐसा भावुक प्रसंग मिलता हैजो श्री राम और हनुमान जी के अटूट प्रेम को दर्शाता है। इस प्रसंग में श्री राम ने हनुमान जी को अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी दोगुना प्रिय बताया है। आइए जानेंआखिर क्यों हनुमान जी थे श्री राम के लिए लक्ष्मण से भी अधिक प्रिय।

    ऋष्यमूक पर्वत पर हनुमान जी से पहली मुलाकात

    जब श्री राम और लक्ष्मण माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थेतो वे किष्किंधा के ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे। वहां वानरराज सुग्रीवजो पहले ही बाली से भयभीत थेउन्हें देखकर डर गए। उन्हें संदेह हुआ कि कहीं ये दोनों प्रभु श्री राम के विरोधी तो नहीं हैं। इस कारण सुग्रीव ने हनुमान जी को ब्राह्मण का रूप धारण कर भेजाताकि वह यह पता कर सकें कि ये दोनों व्यक्ति कौन हैं।हनुमान जी ने ब्राह्मण का रूप अपनाया और श्री राम से उनका परिचय पूछा। जब श्री राम ने कहा कि वे दशरथ के पुत्र हैं और माता सीता की खोज में निकले हैंतब हनुमान जी ने तुरंत अपना असली रूप प्रकट किया और श्री राम के चरणों में गिर पड़े। इस घटना ने श्री राम और हनुमान जी के बीच के अटूट प्रेम की शुरुआत की।

    मम प्रिय लक्ष्मण ते दूना – जब श्री राम भावुक हुए

    हनुमान जीजो अपने प्रभु से मिलकर अत्यधिक भावुक हो गए थेउन्होंने अपनी भूल के लिए श्री राम से क्षमा मांगी। हनुमान जी ने कहाहे भगवान! मैं मूर्ख हूंलेकिन आपने मुझे क्यों नहीं पहचाना? इस पर श्री राम ने हनुमान जी को गले से लगा लिया और कहा:सुनु कपि जियँ मानसि जनि ऊना। तैं मम प्रिय लछिमन ते दूना॥ समदरसी मोहि कह सब कोऊ। सेवक प्रिय अनन्य गति सोऊ॥अर्थ: श्री राम ने कहाहे हनुमान! अपने मन में कोई ग्लानि मत लाओ। तुम मुझे लक्ष्मण से भी दो गुने प्रिय हो। भले ही दुनिया मुझे समदर्शी कहेलेकिन मुझे वह सेवक सबसे प्रिय है जो पूरी तरह से मेरे शरण में रहता है और अनन्य भाव से समर्पित होता है।

    हनुमान जी क्यों थे श्री राम के लिए इतने प्रिय

    लक्ष्मण जीश्री राम के छोटे भाई थे और वे हमेशा उनके साथ रहते थेलेकिन हनुमान जी ने स्वयं को एक सेवक के रूप में पूरी तरह से समर्पित कर दिया था। शास्त्रों के अनुसारजो भक्त अपना अहंकार त्यागकर पूरी तरह से ईश्वर के शरण में रहता हैवह उनके लिए परिवार से भी बढ़कर होता है। यही कारण है कि हनुमान जी को श्री राम ने भरत सम भाई और लक्ष्मण से दूना प्रिय कहा।

    मंगलवार और हनुमान जी का विशेष संबंध

    यह मान्यता है कि हनुमान जी और श्री राम की पहली मुलाकात मंगलवार के दिन हुई थीइसलिए यह दिन हनुमान जी के साथ-साथ श्री राम की पूजा के लिए भी विशेष माना जाता है। बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल जैसे पर्व भी इसी दिन के साथ जुड़ी हुई हैंजो दर्शाते हैं कि प्रभु और भक्त का यह मिलन उसी समय हुआ था। इस प्रसंग से यह साफ होता है कि हनुमान जी का श्री राम के प्रति समर्पण और प्रेम अत्यधिक गहरा थाऔर इसीलिए श्री राम ने उन्हें अपने हृदय से लगाया और उन्हें लक्ष्मण से भी प्रिय माना।

  • घर की खिड़कियों में वास्तु की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए संतुलन बनाए रखने के आसान उपाय

    घर की खिड़कियों में वास्तु की अनदेखी पड़ सकती है भारी, जानिए संतुलन बनाए रखने के आसान उपाय


    नई दिल्ली। घर बनाते समय या रिनोवेशन के दौरान अक्सर लोग खिड़कियों को सिर्फ रोशनी, हवा और डिजाइन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन वास्तुशास्त्र में इनका महत्व कहीं अधिक गहरा बताया गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार खिड़कियां घर के भीतर ऊर्जा के प्रवेश का मुख्य माध्यम होती हैं और उनकी दिशा, बनावट व संख्या का सीधा असर घर के वातावरण के साथ-साथ वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और पारिवारिक संतुलन पर पड़ता है। यदि इस दौरान थोड़ी भी लापरवाही हो जाए तो उसका प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किसी भी घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का संतुलन बेहद जरूरी है। उत्तर और पूर्व दिशा से आने वाली रोशनी को विशेष रूप से शुभ माना गया है। इन दिशाओं में बनी खिड़कियां सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती हैं और घर में स्थिरता, शांति व सक्रियता बनाए रखने में मदद करती हैं। सुबह की धूप यदि पूर्व दिशा की खिड़की से घर में प्रवेश करे, तो यह मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती है।इसके विपरीत, कुछ दिशाओं में खिड़कियों की अधिकता वास्तु असंतुलन का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार दक्षिण दिशा की खिड़कियों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि इस दिशा में खिड़की हो, तो उसे हमेशा साफ-सुथरा और नियंत्रित रखना जरूरी माना जाता है। टूटी, गंदी या लंबे समय तक खुली रहने वाली खिड़कियां नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं, जिससे घर के सदस्यों के बीच तनाव और असहजता बढ़ सकती है।

    खिड़कियों के खुलने की दिशा भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी गई है। भीतर की ओर खुलने वाली खिड़कियां घर के अंदर सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का संकेत देती हैं, जबकि बाहर की ओर खुलने वाली खिड़कियां ऊर्जा के प्रवाह में बाधा पैदा कर सकती हैं। इसी तरह, खिड़कियों से आने वाली तेज हवा, शोर या असंतुलित प्रकाश भी घर के वातावरण को प्रभावित करता है। इसलिए खिड़कियों पर हल्के परदे या ब्लाइंड्स का उपयोग संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

    मुख्य प्रवेश द्वार के आसपास खिड़कियों की स्थिति को लेकर भी वास्तु में खास ध्यान देने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के दोनों ओर यदि समान आकार और समान ऊंचाई की खिड़कियां हों, तो इससे ऊर्जा का प्रवाह संतुलित बना रहता है। इसके अलावा, खिड़कियों की संख्या भी वास्तु संतुलन से जुड़ी होती है। मान्यताओं के अनुसार सम संख्या में खिड़कियां घर में स्थिरता और सामंजस्य को दर्शाती हैं।वास्तु विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली और फ्लैट संस्कृति में हर नियम का शत-प्रतिशत पालन संभव नहीं होता। ऐसे में सबसे जरूरी है संतुलन और साफ-सफाई। खिड़कियों की नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और सही दिशा में खुलने वाली संरचना घर के माहौल को सकारात्मक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। छोटे-छोटे सुधार भी लंबे समय में बड़े बदलाव ला सकते हैं।