Category: Religious Astrology

  • मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को रवि मौनी अमावस्या, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    मौनी अमावस्या 2026: 18 जनवरी को रवि मौनी अमावस्या, जानिए स्नान का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । मौनी अमावस्या 2026। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, लेकिन माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या को सभी अमावस्याओं में सर्वाधिक पुण्यदायी कहा गया है। इसे माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, पूजा, पितृ तर्पण और मौन व्रत करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति के मन को शुद्ध करते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं।

    इस वर्ष मौनी अमावस्या पर एक विशेष और दुर्लभ संयोग बन रहा है। अमावस्या तिथि 18 जनवरी को मध्य रात्रि 12:03 बजे से प्रारंभ होकर 19 जनवरी को मध्य रात्रि 1:21 बजे तक रहेगी। चूंकि यह अमावस्या रविवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे “रवि मौनी अमावस्या” कहा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि मौनी अमावस्या का संयोग अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

    मौनी अमावस्या का विशेष संबंध पवित्र स्नान से है। माघ मास में गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, शिप्रा जैसी नदियों में स्नान का अत्यधिक महत्व बताया गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया स्नान हजारों यज्ञों के बराबर फल देता है। वर्ष 2026 में मौनी अमावस्या के दिन स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक सबसे उत्तम माना गया है। जो लोग किसी कारणवश नदी स्नान नहीं कर सकते, वे घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

    मौनी अमावस्या पितृ तर्पण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण दिन मानी जाती है। इस दिन पूर्वजों की शांति के लिए जल अर्पण, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उनके लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया तर्पण पितृ दोष को शांत करता है और परिवार में सुख-शांति लाता है। स्नान और तर्पण के बाद सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। तांबे के लोटे में जल भरकर सूर्य को अर्घ्य देना, उसमें लाल फूल और अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से स्वास्थ्य लाभ होता है, आत्मबल बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु पूरे दिन मौन रखते हैं या बहुत कम बोलते हैं। मान्यता है कि मौन रहने से मन शांत होता है, नकारात्मक विचार दूर होते हैं और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। इस दिन जप, ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति होती है। कुल मिलाकर, मौनी अमावस्या 2026 न केवल स्नान और दान का पर्व है, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक जागरण का भी महत्वपूर्ण अवसर है।

  • 17 जनवरी 2026 का पंचांग: माघ कृष्ण चतुर्दशी आज, शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व

    17 जनवरी 2026 का पंचांग: माघ कृष्ण चतुर्दशी आज, शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व


    नई दिल्ली । 17 January 2026 Panchang। आज 17 जनवरी 2026, शनिवार का दिन है और माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। शनिवार का दिन न्याय के देवता शनि देव को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से शनि देव की पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में कमी आती है तथा जीवन में स्थिरता और शांति का वास होता है। आज के दिन पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि पर मूल नक्षत्र और पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में यह संयोग विशेष माना जाता है।
    मूल नक्षत्र को जहां एक ओर उग्र और तीव्र स्वभाव का माना जाता है, वहीं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र विजय और सफलता का प्रतीक है। ऐसे में आज का दिन कुछ कार्यों के लिए अनुकूल तो कुछ के लिए सावधानी बरतने वाला माना गया है। धार्मिक दृष्टि से माघ माह को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इस महीने में स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व होता है। चतुर्दशी तिथि पर शिव आराधना का भी विशेष फल प्राप्त होता है। आज शनिवार होने के कारण शिव और शनि दोनों की पूजा करने से विशेष लाभ मिल सकता है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और उड़द दाल का दान करना शुभ माना जाता है।

    आज के शुभ मुहूर्त

    आज के दिन कुछ विशेष समय ऐसे हैं, जिन्हें शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना गया है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:15 बजे से 12:58 बजे तक रहेगा। यह समय लगभग सभी प्रकार के शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं अमृत काल सुबह 5:05 बजे से 6:49 बजे तक रहेगा, जो पूजा-पाठ और ध्यान के लिए श्रेष्ठ है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:37 बजे से 6:25 बजे तक रहेगा, इस समय साधना और आत्मिक चिंतन से विशेष फल प्राप्त होता है।

    आज के अशुभ काल
    आज के दिन कुछ समय ऐसे भी हैं, जिनमें शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। राहु काल सुबह 9:55 बजे से 11:16 बजे तक रहेगा। यम गण्ड दोपहर 1:57 बजे से 3:18 बजे तक रहेगा, जबकि कुलिक काल सुबह 7:14 बजे से 8:35 बजे तक माना जाएगा। इसके अलावा दुर्मुहूर्त सुबह 8:40 बजे से 9:23 बजे तक रहेगा। वर्ज्यम काल दो समय में रहेगा—सुबह 6:25 बजे से 8:11 बजे तक और शाम 6:36 बजे से 8:20 बजे तक।

    सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
    आज सूर्य का उदय सुबह 7:14 बजे और सूर्यास्त शाम 5:59 बजे होगा। चंद्रमा का उदय सुबह 6:02 बजे और चंद्रास्त शाम 4:41 बजे होगा। कुल मिलाकर 17 जनवरी 2026 का दिन धार्मिक कार्यों, शनि पूजा, दान-पुण्य और आत्मिक साधना के लिए उपयुक्त है। शुभ मुहूर्त का ध्यान रखते हुए कार्य करने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

  • मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब

    मौनी अमावस्या पर माघ मेले का तीसरा शाही स्नान, संगम में उमड़ेगा आस्था का सैलाब


    नई दिल्ली/ प्रयागराज। माघ मेले का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण शाही स्नान मौनी अमावस्या के अवसर पर 18 जनवरी को संगम तट पर संपन्न होगा। इस पावन अवसर पर देशभर से लाखों श्रद्धालुओं साधु-संतों और कल्पवासियों के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी कारण इस स्नान पर्व को माघ मेले का सबसे पवित्र और प्रभावशाली स्नान माना जाता है।

    मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
    हिंदू पंचांग के अनुसार मौनी अमावस्या माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को आती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी की रात 12:03 बजे से 19 जनवरी की रात 1:21 बजे तक रहेगी। हालांकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार पर्व 18 जनवरी को ही मनाया जाएगा। इस दिन मौन व्रत रखने गंगा-यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।

    शुभ मुहूर्त और विशेष योग
    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 5:27 से 6:21 बजे तक संगम स्नान को अमृत स्नान माना गया है। इस दिन पंचग्रही योग पूरे समय प्रभावी रहेगा जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 10:14 बजे से अगले दिन तक रहेगा। वृंदावन के ज्योतिषाचार्य राधाकांत वत्स के अनुसार इन शुभ योगों में किया गया स्नान जप और दान अक्षय पुण्य प्रदान करता है।

    अखाड़ों का शाही स्नान
    परंपरा के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन सबसे पहले अखाड़ों के साधु-संत नागा साधु और ऋषि-मुनि गाजे-बाजे और शाही ठाठ-बाट के साथ संगम में डुबकी लगाएंगे। इसके बाद कल्पवासी और आम श्रद्धालु संगम स्नान करेंगे। मान्यता है कि अखाड़ों के स्नान के बाद संगम जल में विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

    प्रशासन की कड़ी तैयारियां
    श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मेला प्रशासन और जिला प्रशासन ने सुरक्षा यातायात और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल ड्रोन निगरानी मेडिकल कैंप अस्थायी पुल स्वच्छता कर्मी और दिशा-सूचक बोर्ड लगाए गए हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें भीड़ प्रबंधन के नियमों का पालन करें और अफवाहों से बचें।

    महाशिवरात्रि तक चलेगा माघ मेला
    माघ मेला महाशिवरात्रि के दिन संपन्न होगा। धार्मिक मान्यता है कि माघ माह में सभी देवी-देवता संगम तट पर वास करते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या का शाही स्नान पूरे माघ मेले का सबसे महत्वपूर्ण और फलदायी स्नान पर्व माना जाता है। आस्था श्रद्धा और अध्यात्म का यह महासंगम एक बार फिर संगम नगरी को दिव्य स्वरूप प्रदान करेगा।

  • भोलेनाथ पूजा : समस्याओं के अनुसार कौन सा फूल चढ़ाएं और क्या लाभ होगा

    भोलेनाथ पूजा : समस्याओं के अनुसार कौन सा फूल चढ़ाएं और क्या लाभ होगा

    नई दिल्ली। शिव पुराण में भगवान शंकर की पूजा में फूल और पत्ते दोनों चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है.भोलेबाबा के भक्त उन्हें प्रसन्न करने का कोई मौका नहीं छोड़ते. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो अपने भक्तों की पूजा से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं. तो आइए जानते हैं शिव को कौन से फूल प्रिय हैं और उनका धार्मिक महत्व क्या है.

    महादेव को सभी देवताओं ने भी अपना देव माना है और महादेव काल के देवता भी हैं,उनकी पूजा करने से सभी ग्रहों के साथ साथ बीमारी परेशानी के अलावा, चोट, एक्सीडेंट, मृत्यु आदि का भय भी इंसान के मन से दूर हो जाता है. आज हम आपको इस लेख के माध्यम से बताने जा रहे हैं कि भोलेनाथ पर किस फूल को चढ़ाने से क्या फल की प्राप्ति होती है. आइए विस्तार से जानते हैं.

    गुड़हल : गुड़हल के फूल को आप सबने देखा होगा, लाल रंग के गुड़हल के फूल को अड़हल का फूल भी कहते हैं. गुड़हल का फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, इसे आप भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं. मान्यता है कि भगवान शिव औऱ माता पार्वती को गुड़हल के फूल अर्पित करने से भक्त को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
    परिजात : परिजात हिंदु देवी देवताओं का पसंदीदा फूल है. यह फूल भगवान श्री राम जी को अत्यंत प्रिय है, लेकिन आप यह फूल भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं क्योंकि भगवान शिव सुंदर और महक वाले फूलों के बेहद शौकीन हैं. मान्यता है कि परिजात का फूल भगवान शिव को चढ़ाने से स्वास्थ्य लाभ होता मिलता है और व्यक्ति एक सुखी जीवन व्यतीत करता है.

    कमल का फूल : कमल का फूल माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय है, यह फूल मां वैभव लक्ष्मी को अवश्य चढ़ाया जाता है. लेकिन इस फूल के शौकीन भगवान शिव भी हैं. कमल का फूल भगवान शिव को अर्पित करने से भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है. इसलिए भगवान शिव को कमल का फूल अवश्य चढ़ाएं.

    गुलाब का फूल : गुलाब का फूल सभी देवी देवताओं समेत भगवान शिव को भी अत्यंत प्रिय है. मान्यता है कि भगवान शिव को गुलाब का फूल अर्पित करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. तथा व्यक्ति को अच्छी सेहत, लंबी आयु और खुशहाल जीवन के वरदान की प्राप्ति होती है.
    चमेली का फूल : भगवान शिव को चमेली का फूल बेहद प्रिय है. वेदों में किए गए जिक्र के अनुसार भगवान शिव को चमेली का फूल अर्पित करने से मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वाहन सुख की प्राप्ति होती है. साथ ही घर में कभी अनाज की कमी नहीं होती. आपके घर परिवार में अनाज का ढेर लगा रहता है.
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    धतूरे का फल और फूल : धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है. भगवान शिव की पूजा धतूरे के फल और फूल के बिना अधूरी मानी जाती है. जी हां भगवान शिव को धतूरे का फल औऱ फूल अवश्य चढ़ाएं. मान्यता है कि भगवान शिव को धतूरे का फल औऱ फूल चढ़ाने से महादेव जल्दी प्रसन्न होते हैं तथा भक्तों पर वह सदैव अपनी कृपा बनाए रखते हैं. वहीं वेदों में भी धतूरे के फल औऱ फूल की व्याख्या की गई है, कहा जाता है कि जो भी दंपत्ति भगवान शिव को धतूरे का फल औऱ फूल अर्पित करता है सकी संतान प्राप्ति की मनोकामना जल्द पूर्ण होती है.
  • 17 जनवरी से मकर में चतुर्ग्रही योग: मेष, वृषभ, कन्या और मकर राशियों के लिए करियर और धन में वृद्धि के संकेत

    17 जनवरी से मकर में चतुर्ग्रही योग: मेष, वृषभ, कन्या और मकर राशियों के लिए करियर और धन में वृद्धि के संकेत

    नई दिल्ली। जनवरी 2026 के मध्य से एक विशेष ज्योतिषीय संयोग बनने जा रहा है। 17 जनवरी 2026 से मकर राशि में सूर्य, मंगल, बुध और शुक्र की युति से चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा। यह योग 3 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा और चार राशियों-मेष, वृषभ, कन्या और मकर-के लिए विशेष लाभकारी माना जा रहा है।

    चतुर्ग्रही योग कैसे बन रहा है
    ज्योतिषाचारियों के अनुसार, 14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद ग्रहों की स्थिति क्रमशः मजबूत हुई। 16 जनवरी को मंगल का मकर में गोचर हुआ और 17 जनवरी सुबह 10:27 बजे बुध भी मकर राशि में प्रवेश करेगा। पहले से मकर में स्थित शुक्र के साथ चार ग्रहों की युति से चतुर्ग्रही योग बनेगा। यह योग प्रशासन, प्रबंधन, करियर और वित्तीय मामलों में निर्णायक भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है।

    किन राशियों को मिलेगा लाभ
    मेष: करियर में नई जिम्मेदारियां और अवसर सामने आएंगे। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई भूमिका मिल सकती है, जबकि व्यवसायी विस्तार के संकेत देख सकते हैं।

    वृषभ: भाग्य का साथ मिलेगा। धन लाभ, विदेश यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ने की संभावना है।

    कन्या: कार्यक्षेत्र में स्थिरता और सफलता के संकेत। रुके हुए काम पूरे होंगे और शिक्षा व प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

    मकर: यह योग मकर राशि वालों के लिए सबसे प्रभावशाली रहेगा। पद, प्रतिष्ठा और आर्थिक स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।

    क्यों खास है यह योग
    मकर राशि को कर्म और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। चार प्रमुख ग्रहों की एक साथ उपस्थिति निर्णय क्षमता, नेतृत्व और व्यावहारिक सोच को मजबूत करती है। इस अवधि में करियर और वित्तीय फैसलों के लिए योग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों की सलाह

    ज्योतिष विशेषज्ञों का कहना है कि यह योग अवसर देगा, लेकिन परिणाम व्यक्ति के कर्म और निर्णयों पर निर्भर होंगे। संतुलित सोच, योजनाबद्ध कार्य और अहंकार से दूरी लाभ को और बढ़ा सकती है।

  • आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, पढ़े शनिवार का राशिफल

    आज आपके जीवन में क्या-क्या परिवर्तन हो सकता है, पढ़े शनिवार का राशिफल

    मेष राशि :- स्त्री-संतान पक्ष का सहयोग मिलेगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। स्वास्थ्य
    उत्तम रहेगा। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बनेगी। सफलता मिलेगी। शुभांक-5-7-9



    वृष राशि :- विद्यार्थियों को लाभ। दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेेगा। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। परिवारजनों का सहयोग बना रहेगा। मेहमानों का आगमन होगा। शुभांक-1-3-5


    मिथुन राशि :- पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। धीरे-धीरे लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा उचित समय का इन्तजार करें। शुभांक-3-5-6

    कर्क राशि :- आय के अच्छे योग बनेंगे। संतान की उन्नति के योग हैं। मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। पुराने मित्र से मिलन होगा। स्वविवेक से कार्य करें। भाई-बहनों का प्रेम बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। कार्य सफल होंगे। दैनिक सुख-सुविधा में वृद्घि होगी। शुभांक-2-5-7

    सिंह राशि :- व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। सही समय का इंतजार करें। शुभांक-2-4-6

    कन्या राशि :- मेहमानों का आगमन होगा। राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। पुरानी गलती का पश्चाताप होगा। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। महत्वपूर्ण कार्य को समय पर बना लें तो अच्छा ही होगा। शुभ कार्यों में व्यय होगा। शुभांक-1-3-5

    तुला राशि :- लाभ में आशातीत वृद्घि तय है मगर नकारात्मक रुख न अपनाएं। आशा और उत्साह के कारण सक्रियता बढ़ेगी। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। विशिष्ट जनों से मेल-मुलाकात होगी। शुभांक-4-6-8

    वृश्चिक राशि :- जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। पर-प्रपंच में ना पड़कर अपने काम पर ध्यान दीजिए। शुभ कार्यों का लाभदायक परिणाम होगा। कामकाज की अधिकता रहेगी। व्यवसायिक अभ्युदय भी होगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। अर्थपक्ष मजबूत रहेगा। शुभ समाचारों मिलेगें। शुभांक-3-5-6

    धनु राशि :- प्रियजनों से समागम का अवसर मिलेगा। अवरुद्घ कार्य संपन्न हो जाएंगे। कामकाज की व्यस्तता से सुख-आराम प्रभावित होगा। श्रेष्ठजनों की सहानुभूतियां होगी। आत्मीय श्रेष्ठता बनेगी। यात्रा प्रवास का सार्थक परिणाम मिलेगा। बुजुर्गों का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। आत्मचिन्तन करें। शुभांक-4-6-8

    मकर राशि :- कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। आय-व्यय की स्थिति समान रहेगी। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। होश में रहकर कार्य करें। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। समय पर देनदार भी पैसे लौटाने में आनाकानी करेंगे। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-4-6-8

    कुंभ राशि :- राजकीय कार्यों से लाभ। पैतृक सम्पत्ति से लाभ। कारोबारी यात्रा को फिलहाल टालें। शैक्षणिक कार्य आसानी से पूरे होते रहेंगे। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। व्यापार व व्यवसाय में ध्यान देने से सफलता मिलेगी। श्रम साध्य कार्यों में सफल होंगे। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। शुभांक-2-4-5

    मीन राशि :- व्यापार में स्थिति नरम रहेगी। शत्रुभय, चिंता, संतान को कष्ट, अपव्यय के कारण बनेंगे। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। आय-व्यय समान रहेगा। स्वास्थ्य का पाया भी कमजोर बना रहेगा। कामकाज सीमित तौर पर ही बन पाएंगे। अभी सिर्फ आश्वासनों से संतोष करना बड़ेगा। शुभांक-1-3-5
  • शुक्रवार को करें महालक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर-परिवार में आएंगी खुशियाँ और समृद्धि

    शुक्रवार को करें महालक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर-परिवार में आएंगी खुशियाँ और समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में शुक्रवार को विशेष महत्व प्राप्त है। ज्योतिष और धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, यह दिन धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी और शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित माना गया है। इस दिन विशेष पूजन और मंत्रोच्चारण से परिवार में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। आज, 16 जनवरी को माघ माह के शुक्रवार पर शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का अनूठा संयोग बन रहा है, जिससे पूजा का महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। यह चालीसा मां लक्ष्मी के गुणों और उनके भक्तों पर उनकी कृपा के प्रभाव को बताती है। जो साधक श्रद्धा और भक्ति भाव से इस चालीसा का पाठ करते हैं, उनके घर से दरिद्रता दूर होती है और वैभव, संपन्नता और मानसिक शांति आती है।

    विशेष रूप से माघ माह के शुक्रवार को इस चालीसा का पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा अधिक मात्रा में प्राप्त होती है। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जीवन में समस्त प्रकार की बाधाएं और समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन करने से धन और सुख की वृद्धि होती है। पूजन का विधान सरल है। सुबह स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण के बाद पूजा स्थल पर दीपक, अगरबत्ती, अक्षत और फल अर्पित करना चाहिए। इसके बाद भक्त मन, वचन और क्रिया से महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करें। पाठ के दौरान पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव बनाए रखना आवश्यक है। इस दिन विशेष रूप से 108 बार या कम से कम एक बार पाठ करने से देवी लक्ष्मी की कृपा अधिक प्राप्त होती है।

    ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से न केवल वित्तीय समस्याएं कम होती हैं, बल्कि पारिवारिक संबंधों में भी प्रेम और सामंजस्य बढ़ता है। घर में सुख-शांति और मानसिक संतुलन आता है। साथ ही, जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।संक्षेप में, शुक्रवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। माघ माह के शुक्रवार पर महालक्ष्मी चालीसा का पाठ करना, शिव-पार्वती की पूजा और वैभव लक्ष्मी व्रत का पालन करना साधकों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। यह न केवल जीवन में खुशहाली लाता है, बल्कि व्यक्ति के आत्मिक और भौतिक दोनों पक्षों में संतुलन बनाए रखता है।

  • Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये दान, पितरों के साथ सूर्य देव भी हो सकते हैं नाराज

    Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये दान, पितरों के साथ सूर्य देव भी हो सकते हैं नाराज

    नई दिल्ली हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन साल की पहली अमावस्या यानी मौनी अमावस्या का महत्व और भी बढ़ जाता है। पंचांग के अनुसार हर वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मौनी अमावस्या मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह तिथि 18 जनवरी, रविवार को पड़ रही है। मान्यता है कि इस दिन मौन व्रत, पवित्र नदी में स्नान, दान-पुण्य और पितरों की शांति के लिए किए गए कर्म विशेष फलदायी होते हैं।

    रविवार और सूर्य देव का संयोग
    इस बार मौनी अमावस्या रविवार को पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित होता है। ऐसे में इस दिन किए गए गलत दान या अशुभ कर्म न सिर्फ पितरों को नाराज कर सकते हैं, बल्कि कुंडली में सूर्य की स्थिति को भी कमजोर कर सकते हैं। इसलिए शास्त्रों में इस दिन दान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मौनी अमावस्या पर किन चीजों का दान न करें
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन कुछ वस्तुओं का दान वर्जित होता है। इनमें तामसिक वस्तुएं, टूटी-फूटी चीजें, बासी या झूठा भोजन, कांच का सामान, काले रंग की वस्तुएं, चमड़े से बनी चीजें शामिल हैं।
    इसके अलावा नमक, सरसों का तेल, तिल, खट्टे फल और दही का दान भी इस दिन नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन वस्तुओं का दान करने से पितृ दोष बढ़ता है, जीवन में बाधाएं आती हैं और दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है।

    मौनी अमावस्या पर क्या करें दान
    यदि आप इस दिन दान करना चाहते हैं तो शुभ वस्तुओं का ही चयन करें। शास्त्रों के अनुसार अन्न, गुड़, वस्त्र, आंवला, कंबल, धन, जूते, झाड़ू, चांदी और तांबे से बनी वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इसके साथ ही गौ सेवा करना, गायों को चारा खिलाना और पशु-पक्षियों को भोजन कराना भी विशेष पुण्यदायी माना गया है। ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।

    स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
    मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। द्रिक पंचांग के अनुसार 18 जनवरी 2026 को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 08 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। इस समय पवित्र स्नान, पूजा-पाठ और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

    धार्मिक नियमों का पालन है जरूरी
    मौनी अमावस्या पर श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए दान-पुण्य से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। वहीं, शास्त्र-विरुद्ध दान करने से लाभ की जगह नुकसान भी हो सकता है। इसलिए इस दिन दान से पहले सही जानकारी जरूर रखें और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करें।

  • मकर संक्रांति के बाद सूर्य ग्रहण की चेतावनी: इन तीन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां..

    मकर संक्रांति के बाद सूर्य ग्रहण की चेतावनी: इन तीन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां..


    नई दिल्ली।  17 फरवरी 2026 को कुंभ राशि में लगने वाला सूर्य ग्रहण, स्वास्थ्य और धन को लेकर बरतनी होगी विशेष सतर्कता
    साल 2026 की शुरुआत खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मकर संक्रांति के लगभग एक महीने बाद, 17 फरवरी 2026 को वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। यह ग्रहण कुंभ राशि में धनिष्ठा नक्षत्र के दौरान होगा, जिसे ज्योतिष में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। सूर्य और चंद्रमा की यह युति न केवल प्राकृतिक ऊर्जा में बदलाव लाएगी, बल्कि मानव जीवन पर भी इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह सूर्य ग्रहण सुबह से लेकर दोपहर तक प्रभावी रहेगा। ग्रहण काल के दौरान मानसिक अस्थिरता निर्णय लेने में भ्रम और भावनात्मक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि ग्रहण का प्रभाव सभी राशियों पर किसी न किसी रूप में पड़ेगा लेकिन तीन राशियों के जातकों के लिए यह समय विशेष सावधानी और संयम की मांग करता है।सिंह राशि के जातकों के लिए यह सूर्य ग्रहण कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में सहयोगियों या वरिष्ठों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है। छोटी-सी बात बड़ा विवाद बन सकती है, इसलिए वाणी और व्यवहार पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया कोई भी फैसला नुकसानदेह साबित हो सकता है। पारिवारिक जीवन में भी तनाव के संकेत मिल रहे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से थकान सिरदर्द, अनिद्रा या मानसिक दबाव महसूस हो सकता है। इस दौरान आराम और आत्मसंयम सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए यह ग्रहण खासतौर पर आर्थिक मामलों में सतर्कता का संकेत दे रहा है। अचानक खर्चों में वृद्धि हो सकती है, जिससे बजट बिगड़ने का खतरा रहेगा। निवेश, उधार या किसी भी तरह के आर्थिक समझौते से इस समय दूरी बनाए रखना बेहतर होगा। मानसिक बेचैनी और तनाव महसूस हो सकता है। साथ ही यात्रा के दौरान या वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है क्योंकि छोटी लापरवाही भी परेशानी का कारण बन सकती है।

    कुंभ राशि, जिसमें यह सूर्य ग्रहण लग रहा है, उसके जातकों पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल सकता है। व्यक्तिगत और पारिवारिक रिश्तों में गलतफहमी पैदा हो सकती है। मित्रों या जीवनसाथी के साथ मतभेद बढ़ने की आशंका है। भावनाओं में बहकर लिए गए फैसले बाद में पछतावे का कारण बन सकते हैं। इस समय संवाद बनाए रखना और धैर्य से काम लेना बेहद जरूरी होगा। आत्ममंथन और संयम से कई समस्याओं को टाला जा सकता है।ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण काल में किसी भी शुभ कार्य, नई शुरुआत, खरीद-फरोख्त या बड़े निर्णय से बचना चाहिए। ध्यान, जप, प्रार्थना और सकारात्मक सोच इस दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद धीरे-धीरे परिस्थितियां सामान्य होने लगेंगी और नकारात्मक प्रभाव कम होता जाएगा।

  • आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

    आज आपके सितारे क्या कहते हैं, यह जानने के लिए पढ़ें आज का भविष्यफल।

    मेष राशि :- मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। धार्मिक कार्य में समय और धन व्यय होगा। अपना काम दूसरों के सहयोग से पूरा होगा। ले देकर की जा रही काम की कोशिश ठीक नहीं। पुराने मित्र से मिलन होगा। शुभांक-3-6-9

    वृष राशि :- समय नकारात्मक परिणाम देने वाला बन रहा है। अपने हितैषी समझे जाने वाले ही पीठ पीछे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे। परिवारजन का सहयोग व समन्वय काम को बनाना आसान करेगा। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। स्वविवेक से कार्य करें। समय का लाभ लें। शुभांक-4-7-9

    मिथुन राशि :– हित के काम में आ रही बाधा मध्याह्न पश्चात् दूर हो जाएगी। अपने काम आसानी से बनते चले जाएंगे। साथ ही आगे के लिए रास्ता भी बन जाएगा। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। जीवन साथी अथवा यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। मनोरथ सिद्घि का योग है। शुभांक-4-6-8

    कर्क राशि :- कहीं रुका हुआ पैसा वसूलने में मदद मिल जाएगी। व्यर्थ प्रपंच में समय नहीं गंवाकर अपने काम पर ध्यान दीजिए। कार्यक्षेत्र में आगे बढऩे में रुकावट का एहसास होगा। विरोधियों के सक्रिय होने की संभावना है। शुभकार्यों में अड़चनें व परिवार के बुुजुर्ग-जनों से मतभेद रहेगा। शुभांक-1-5-7

    सिंह राशि :- मेल-मिलाप से काम बनाने की कोशिश सफल होगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। अपने काम में सुविधा मिल जाने से प्रगति होगी। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा। नवीन जिम्मेदारी बढऩे के आसार रहेंगे। यात्रा शुभ रहेगी। अपने काम को प्राथमिकता से करें। शुभांक-1-3-5

    कन्या राशि :– अच्छे कार्य के लिए रास्ते बना लेंगे। कारोबारी काम में बाधा उभरने से मानसिक अशांति बनी रहेगी। यात्रा का दूरगामी परिणाम मिल जाएगा। सुविधा और समन्वय बना रहने से कामकाज में प्रगति बन जाएगी। आर्थिक हित के काम को साधने में मदद मिल जाएगी। मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। शुभांक-4-6-8

    तुला राशि :- अपने काम पर नजर रखिए। स्वास्थ्य लाभ में समय और धन व्यय होगा। लेन-देन में अस्पष्टता ठीक नहीं। मध्याह्न पूर्व समय आपके पक्ष का बना रहेगा। कारोबारी काम में प्रगति बनती रहेगी। लेन-देन में आ रही बाधा दूर करने का प्रयास होंगे। परिश्रम प्रयास से काम बनाने की कोशिश लाभ देगी। शुभांक-2-4-6

    वृश्चिक राशि :- पर-प्रपंच में ना पड़कर अपनेे काम पर ध्यान दीजिए। कल का परिश्रम आज लाभ देगा। आलस्य का त्याग करें। कारोबारी काम में नवीन तालमेल और समन्वय बन जाएगा। यार-दोस्तों के साथ साझे में किए जा रहे काम में लाभ मिल जाएगा। पूर्व नियोजित कार्यक्रम सरलता से संपन्न हो जाएंगे। शुभांक-4-6-8

    धनु राशि :– कार्यक्षेत्र में संतोषजनक सफलता मिलेगी। अपनों का सहयोग प्राप्त होगा। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। व्यापार व व्यवसाय में स्थिति उत्तम रहेगी। नौकरी में पदोन्नति की संभावना है। मान-सम्मान में वृद्घि होगी। मित्रों से सावधान रहें तो ज्यादा उत्तम है। यात्रा से लाभ। शुभांक-3-5-6

    मकर राशि :- आत्मविश्वास बढ़ेगा। पारिवारिक विवाद टालें। व्यापार व नौकरी में स्थिति अच्छी रहेगी। कामकाज में आ रहा अवरोध दूर होकर प्रगति का रास्ता मिल जाएगा। निष्ठा से किया गया कार्य पराक्रम व आत्मविश्वास बढ़ाने वाला होगा। संतान-स्त्री पक्ष से लाभ होगा। शुभांक-3-4-6

    कुंभ राशि :– खान-पान में सावधानी रखें। व्यापार में प्रगति होगी। अपने अधीनस्त लोगों से कम सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। भ्रातृपक्ष में विरोध होने की संभावना है। शिक्षा में आशानुकूल कार्य होने में संदेह है। स्वास्थ्य मध्यम रहेगा। आय के योग बनेंगे। यात्रा का योग है। शुभांक-3-5-6

    मीन राशि :– जीवनसाथी का परामर्श लाभदायक रहेगा। शारीरिक सुख के लिए व्यसनों का त्याग करें। आलस्य का त्याग करें। पुरुषार्थ का सहारा लें। कार्यसिद्घि होने में देर नहीं लगेगी। आर्थिक लाभ उत्तम रहेगा। शैक्षणिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। परिवार में किसी मांगलिक कार्य पर वार्ता होगी। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा। शुभांक-3-5-6