Category: Religious Astrology

  • विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । आज 24 दिसंबर को विघ्नेश्वर चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है जो विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व पौष माह की विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है और इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सारे विघ्न दूर होते हैं और समृद्धि सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का शुभ मुहूर्त चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त

    सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक वर्जित चंद्रोदय काल सुबह 10:16 बजे से रात 9:26 बजे तक इस दौरान चंद्र दर्शन न करें

    गणेश जी की पूजा विधि

    ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करके पंचामृत से भगवान गणेश का अभिषेक करें। इसके बाद वस्त्र जनेऊ चंदन दूर्वा फूल धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक गुड़ या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।

    गणेश जी के मंत्र:
    ॐ गण गणपतये नमः कम से कम 108 बार जाप करें श्री गणेशाय नम: ऊं गं गणपतये नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

    गणेश गायत्री मंत्र:

    ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
    गणेश जी की आरती
    जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
    एक दंत दयावंत चार भुजा धारी माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी। यह आरती भगवान गणेश के गुणों और उनकी कृपा के बारे में है जो भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का महत्व

    इस दिन का व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से नौकरी व्यापार शिक्षा और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। आज के दिन गणेश जी की पूजा विधि और मंत्रों के जाप से न केवल आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।

  • मंगल दोष उपाय मंगल दोष से मुक्ति पाने के आसान उपाय जीवन में आएगी सुख-समृद्धि

    मंगल दोष उपाय मंगल दोष से मुक्ति पाने के आसान उपाय जीवन में आएगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल दोष जीवन में कई प्रकार की समस्याएं पैदा कर सकता है जैसे कि वैवाहिक जीवन में तनाव शारीरिक परेशानियां मानसिक तनाव या करियर में विघ्न। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल दोष है तो समय रहते उसका निवारण करना बेहद जरूरी है। मंगल दोष के प्रभाव से मुक्ति पाने के लिए कुछ आसान उपाय हैं जिनका पालन करके आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इन उपायों को विशेष रूप से मंगलवार के दिन करना प्रभावी होता है क्योंकि मंगलवार को मंगल देव और हनुमान जी की पूजा का दिन माना जाता है।

    मंगल दोष और मंगल देव का महत्व

    मंगल देव को ज्योतिष में ऊर्जा साहस और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। वे मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी होते हैं और मकर राशि में उच्च के माने जाते हैं। मंगल दोष का प्रभाव व्यक्ति के जीवन में कई तरह की चुनौतियाँ उत्पन्न कर सकता है लेकिन हनुमान जी की पूजा से इस दोष का निवारण संभव है। हनुमान जी की आराधना से व्यक्ति को साहस आत्मबल और करियर में सफलता का आशीर्वाद मिलता है।

    मंगल दोष के निवारण के उपायहनुमान जी की पूजा और व्रत

    मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। हनुमान चालीसा का पाठ करें और शुद्ध मन से व्रत रखें। इससे मंगल दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

    चांदी के बर्तन में तांबे की छड़ी रखें

    अगर आपकी कुंडली में मंगल दोष है तो चांदी के बर्तन में तांबे की छड़ी रखें और उसे एक लाल कपड़े में बांधकर घर के पूजा स्थान पर रखें। यह उपाय मंगल दोष को नष्ट करने में सहायक होता है।

    तांबे का दान

    मंगल दोष से निवारण के लिए तांबे का दान करना बहुत फायदेमंद होता है। मंगलवार के दिन किसी मंदिर में तांबे के बर्तन तांबे की छड़ी या तांबे की वस्तुएं दान करें। इससे मंगल ग्रह की स्थिति मजबूत होती है और दोष समाप्त हो सकता है।

    राहु और मंगल के दोष को कम करने के लिए विशेष उपाय

    यदि आपके जीवन में मंगल दोष के कारण तनाव और परेशानी है तो मंगलवार को उबटन करें और हल्दी और तिल के साथ स्नान करें। यह उपाय मंगल दोष को दूर करने में मदद करता है और मन को शांति प्रदान करता है।

    लाल रंग का पहनावा

    मंगल ग्रह का रंग लाल होता है इसलिए मंगलवार के दिन लाल रंग के वस्त्र पहनने से मंगल दोष में कमी आ सकती है। इसके साथ ही आप अपने घर में लाल रंग के फूल भी रख सकते हैं।

    पानी में तांबे का सिक्का डालें
    मंगल दोष से मुक्ति पाने के लिए पानी में तांबे का सिक्का डालकर उस पानी को घर के हर सदस्य को पिलाएं। यह उपाय मंगल दोष से राहत पाने में मदद करता है।

    सच्चाई और ईमानदारी का पालन करें

    ज्योतिष के अनुसार यदि आप अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी का पालन करते हैं तो मंगल दोष का प्रभाव खुद-ब-खुद कम होने लगता है। मंगल देव को सच्चाई और कर्म के साथ जुड़ा हुआ माना जाता ह इसलिए आपके कार्यों में ईमानदारी से मंगल देव प्रसन्न होते हैंमंगल दोष के उपायों को अपनाकर आप अपने जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति पा सकते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि ला सकते हैं। मंगल दोष के निवारण के लिए बुधवार के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा और तांबे के दान से आप अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

  • जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार

    जनवरी 2026 व्रत त्यौहार मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक जानें जनवरी में मनाए जाने वाले प्रमुख व्रत और त्योहार


    नई दिल्ली ।जनवरी 2026 हिंदू पंचांग के अनुसार एक विशेष महीना है क्योंकि इस महीने माघ माह की शुरुआत होती है जो धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना विभिन्न व्रतों और त्योहारों से भरा होता है जिनका सामाजिक और धार्मिक जीवन में गहरा महत्व है। खासकर मकर संक्रांति से लेकर बसंत पंचमी तक इन दिनों का पालन लाखों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी

    मकर संक्रांति हिंदू कैलेंडर के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के दिन मनाया जाता है। इस दिन लोग तिल और गुड़ के साथ खिचड़ी बनाते हैं और दान पुण्य करते हैं। मकर संक्रांति का विशेष महत्व इस दिन सूर्य की उपासना और उत्तरायण के शुभारंभ के रूप में होता है।

    लोहड़ी 13 जनवरी

    लोहड़ी पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में धूमधाम से मनाया जाने वाला पर्व है। इसे सर्दी के मौसम के अंत और फसल के कटने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग आग जलाकर उस पर तिल गुड़ और मूंगफली डालते हैं और इसके साथ ही गाते-बजाते हैं।

    सकट चौथ 19 जनवरी

    सकट चौथ को विशेष रूप से महिलाएं व्रत रखकर संतान सुख और पारिवारिक सुख की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं व्रत करती हैं और घर-घर खास पकवान बनते हैं। व्रत का पालन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाता है।

    मौनी अमावस्या 20 जनवरी

    मौनी अमावस्या को विशेष रूप से उपवास और मौन रहने का दिन माना जाता है। इस दिन गंगा स्नान और तर्पण करने की परंपरा है। भक्तगण इस दिन उपवास रखते हुए अपनी बुराईयों और पापों से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

    बसंत पंचमी 25 जनवरी

    बसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है और यह विशेष रूप से सरस्वती पूजा के रूप में मनाई जाती है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है और नए ज्ञान की प्राप्ति के लिए लोग विशेष आयोजन करते हैं। पीले रंग की विशेषता के साथ यह दिन उल्लास और उत्सव का प्रतीक बन जाता है। जनवरी का महीना कई महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक अवसरों के साथ आता है। इस दौरान श्रद्धालु इन व्रतों और त्योहारों का पालन करके जीवन में सुख समृद्धि और पुण्य की कामना करते हैं।

  • साल की आखिरी एकादशी पर भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का दान, नहीं तो 2026 में भी रहेंगे परेशान

    साल की आखिरी एकादशी पर भूलकर भी न करें इन 5 चीजों का दान, नहीं तो 2026 में भी रहेंगे परेशान

    नई दिल्ली/सनातन धर्म के लोगों के लिए पौष पुत्रदा एकादशी का खास महत्व है, जिसका व्रत हर साल पौष माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. पंचांग के मुताबिक, इस बार 30 दिसंबर 2025 को पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. मान्यता है कि जो लोग सच्चे मन से पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत रखते हैं, उन्हें पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य मिलता है. इसके अलावा जगत के पालनहार भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.पूजा-पाठ के अलावा पौष पुत्रदा एकादशी पर दान करना भी शुभ होता है. हालांकि, कुछ चीजें ऐसी भी हैं, जिनका दान एकादशी पर करना अशुभ होता है. आज हम आपको शास्त्रों में बताई गई उन 5 चीजों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करने से व्यक्ति साल 2026 में भी परेशान रह सकता है.
    लोहा
    लोहे से बनी किसी भी वस्तु का दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करना अशुभ होता है. इससे न सिर्फ आपको पाप लगेगा, बल्कि पूजा का फल भी नहीं मिलेगा.
    नमक
    पौष पुत्रदा एकादशी पर नमक का दान करने से घर में अशांति फैलती है. साथ ही व्रत खंडित हो जाता है और पाप लगता है.ये भी पढ़ें- Mahayuti 2025 Rashifal: 2026 के शुरू से पहले ये 3 राशियां होंगी मालामाल; बनेगी मंगल, सूर्य, शुक्र और बुध की महायुति

    नुकीली चीजें

    यदि कोई व्यक्ति पौष पुत्रदा एकादशी पर किसी भी तरह की नुकीली चीज का दान करता है तो उससे भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं. इसके अलावा घर में लड़ाई-झगड़े होंगे और सेहत पर भी नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है.

    तेल

    पौष पुत्रदा एकादशी पर तेल का दान करने से ग्रह दोष लगता है. साथ ही घर में नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है. इसके अलावा धन हानि भी हो सकती है.

    अनाज

    गेहूं, चावल, मक्का, राई, जौ, जई, बाजरा और बीज आदि अनाज का दान पौष पुत्रदा एकादशी पर करना अशुभ होता है. इससे न सिर्फ व्रती को पाप लगता है बल्कि घरवालों को भी विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है.डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
  • नए साल 2026 में गुरु प्रदोष व्रतइन उपायों से महादेव होंगे प्रसन्न मिलेगी सुख-समृद्धि

    नए साल 2026 में गुरु प्रदोष व्रतइन उपायों से महादेव होंगे प्रसन्न मिलेगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । साल 2026 का आगमन धार्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। वैदिक पंचांग के अनुसार 1 जनवरी को गुरुवार के दिन प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि यह व्रत गुरु प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा। गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है और इस दिन श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा-पाठ करने से जीवन में सुख समृद्धि और खुशहाली आती है।

    गुरु प्रदोष व्रत और महादेव की कृपा

    गुरुवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है क्योंकि गुरु ग्रह का प्रभाव इस दिन अधिक रहता है। गुरु ग्रह ज्ञान शिक्षा समृद्धि और अच्छे भाग्य का कारक माना जाता है। इस दिन किए गए पूजा और उपायों से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। खासकर नौकरी व्यापार धन-संपत्ति से जुड़ी परेशानियां दूर हो सकती हैं और महादेव की कृपा से आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।

    ज्योतिषीय उपायों से मिल सकती है राहत

    गुरु प्रदोष व्रत के दिन कुछ खास ज्योतिषीय उपाय करने से जीवन में स्थिरता और समृद्धि का आशीर्वाद मिल सकता है। यहां कुछ विशेष उपाय दिए जा रहे हैं जो इस दिन किए जाने से महादेव की कृपा प्राप्त हो सकती है भगवान शिव की पूजाइस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा करें। शिवलिंग पर जल दूध शहद बेलपत्र और आंतरिक शुद्धता से अर्पित करें। इस दिन महादेव का स्मरण करने से जीवन में आ रही परेशानियों का समाधान हो सकता है।

    धन का संकलनइस दिन विशेष रूप से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए श्री लक्ष्मी यंत्र की पूजा करें। देवी लक्ष्मी की कृपा से धन-संपत्ति में वृद्धि हो सकती है। गुरुवार का व्रतइस दिन उपवासी रहकर केवल फलाहार करें और मानसिक शांति के लिए गुरु के मंत्र का जाप करें। इससे मानसिक शांति और संतुलन मिलेगा। शिव चालीसा का पाठइस दिन शिव चालीसा का पाठ करें और साथ ही ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। यह उपाय मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकता है भक्तिपूर्वक दर्शनइस दिन भगवान शिव के मंदिर में जाकर दर्शन करें और वहां दीप जलाकर पूजा अर्चना करें। इस दिन किए गए धार्मिक कर्मों का बहुत फल मिलता है।

    व्यापारिक उन्नति के लिएअगर आप व्यापार में वृद्धि चाहते हैं तो इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव से व्यापार में समृद्धि की प्रार्थना करें और पुराने उधारी या ऋण से छुटकारा पाने के लिए प्रयास करें। नए साल की शुरुआत गुरु प्रदोष व्रत से हो रही है जो विशेष रूप से धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन किए गए उपायों और पूजा से जीवन में सुख समृद्धि और सफलता प्राप्त हो सकती है। महादेव की कृपा से नौकरी व्यापार और धन-संपत्ति में वृद्धि हो सकती है और साल भर शांति और खुशहाली बनी रह सकती है।

  • कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर में पुरुष श्रद्धालुओं का अनोखा सोलह श्रृंगार देवी से मनचाही मुराद की परंपरा



    नई दिल्ली । केरल के कोल्लम जिले में स्थित कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर अपनी एक अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है जिसमें पुरुष श्रद्धालुओं को पूजा से पहले महिलाओं की तरह सोलह श्रृंगार करना अनिवार्य माना जाता है। इस परंपरा का पालन करने वाले श्रद्धालु देवी की आराधना से पहले साड़ी पहनते हैं चूड़ियां पहनते हैं बिंदी लगाते हैं और अन्य श्रृंगार सामग्री से खुद को सजाते हैं। इस अनूठी परंपरा के चलते यह मंदिर देश-विदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    परंपरा का महत्व

    कोट्टनकुलंगरा मंदिर की इस परंपरा को श्रद्धा और आस्था का प्रतीक माना जाता है। यह परंपरा सदियों पुरानी है और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे पूरे समर्पण के साथ निभाते हैं। पुरुष श्रद्धालु जब पूजा के लिए तैयार होते हैं तो वे स्वयं को पूरी तरह से सजाते हैं जैसे महिलाएं पारंपरिक रूप से सोलह श्रृंगार करती हैं। इस पूजा में श्रद्धालु देवी भाग्यवती से अच्छी नौकरी स्वास्थ्य विवाह और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा पूरी तरह से समाज में समर्पण और ईश्वर के प्रति श्रद्धा को बढ़ावा देने के लिए मानी जाती है। इस परंपरा के कारण मंदिर में हर साल श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भीड़ रहती है जो इस अनुभव को एक अलग ही रूप में अपनाते हैं।

    मंदिर के आकर्षण

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर के अद्वितीय रीति-रिवाज और परंपराओं ने इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित किया है। यहां पर लोग न केवल पूजा-अर्चना करने आते हैं बल्कि इस अनोखी परंपरा का पालन करने के लिए भी दूर-दूर से आते हैं। मंदिर का वातावरण बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धापूर्ण होता है जहां पर हर किसी को अपने व्यक्तिगत आस्थाओं का पालन करने का पूरा अवसर मिलता है।

    सोलह श्रृंगार

    सोलह श्रृंगार का पालन करने से जुड़े कई महत्व हैं जो महिलाओं के सौंदर्य और आंतरिक शक्ति के प्रतीक माने जाते हैं। इस परंपरा के तहत पुरुष श्रद्धालु स्वयं को साड़ी पहनकर सजाते हैं जो उन्हें पारंपरिक रूप से महिलाओं के साथ जोड़ता है और ईश्वर के साथ एक अद्वितीय संबंध स्थापित करता है। यह एक अद्भुत दृष्टिकोण है जो पुरुषों और महिलाओं के बीच समानता को बढ़ावा देने की कोशिश करता है साथ ही आस्था के द्वारा सभी को एकजुट करने का कार्य करता है।

    कोट्टनकुलंगरा श्रीदेवी मंदिर की यह परंपरा न केवल श्रद्धा का प्रतीक है बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि धार्मिक आस्थाएं और सांस्कृतिक परंपराएं समय के साथ बदल सकती हैं। पुरुषों द्वारा सोलह श्रृंगार करने की यह परंपरा एक नई सोच और धार्मिक समर्पण की दिशा में एक कदम है। इस मंदिर की विशेषता और परंपरा को देखकर यह कहा जा सकता है कि यहाँ आस्था और आचरण का अद्वितीय संगम है जो सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

  • पुत्रदा एकादशी 2025 30 और 31 दिसंबर को रखें व्रत जानें मुहूर्त और महत्व

    पुत्रदा एकादशी 2025 30 और 31 दिसंबर को रखें व्रत जानें मुहूर्त और महत्व


    नई दिल्ली । पुत्रदा एकादशी 2025 का व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति और घर में सुख-समृद्धि की कामना करने के लिए बहुत ही फलदायी माना जाता है। यह व्रत दो बार साल में होता है एक बार पौष माह में और दूसरा सावन महीने में। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान की उम्र भी लंबी होती है। साथ ही इस व्रत के द्वारा व्यक्ति को धन धान्य और ऐश्वर्य भी मिलता है।

    पुत्रदा एकादशी की तिथि और मुहूर्त 2025

    2025 में पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 और 31 दिसंबर को रखा जाएगा। यह असमंजस की स्थिति बना सकता है कि व्रत किस दिन किया जाए लेकिन बता दें कि दोनों दिन एकादशी का व्रत किया जाएगा। आरंभ तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट समाप्ति तिथि 31 दिसंबर 2025 को सुबह 5 बजे पारण का शुभ मुहूर्त 31 दिसंबर 2025 को दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 31 मिनट तक

    व्रत का महत्व

    पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले व्यक्तियों के लिए किया जाता है। यह व्रत संतान को सुंदर बुद्धिमान और स्वस्थ बनाने में मदद करता है। इसके अलावा जिनकी पहले से संतान है उनके संतान की उम्र लंबी होती है। इस व्रत से घर में धन और ऐश्वर्य भी बढ़ता है। यह व्रत दो दिनों तक रखा जाता है जहां गृहस्थ पहले दिन व्रत रखते हैं और दूसरे दिन वैष्णव संप्रदाय के लोग उपवासी रहते हैं।

    पारण का समय

    पुत्रदा एकादशी का पारण 31 दिसंबर 2025 को किया जाएगा और इसके लिए शुभ मुहूर्त 1 जनवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 14 मिनट से 9 बजकर 18 मिनट तक रहेगा पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान सुख की प्राप्ति आयु वृद्धि और समृद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। 2025 में यह व्रत 30 और 31 दिसंबर को रखा जाएगा और इसका पारण 1 जनवरी 2026 को शुभ मुहूर्त में होगा।

  • शनिवार को शनि पूजा और दान: जानें 5 महत्वपूर्ण उपाय जो लाएंगे समृद्धि और खुशहाली

    शनिवार को शनि पूजा और दान: जानें 5 महत्वपूर्ण उपाय जो लाएंगे समृद्धि और खुशहाली


    नई दिल्ली । शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है जो हर व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते हैं। शनि के प्रभाव से बचने के लिए शनिवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो तो शनि देव की पूजा और दान से उन अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है। इस दिन किए गए कुछ विशेष दान जीवन में सुख समृद्धि और मानसिक शांति का संचार करते हैं। आइए जानते हैं शनिवार को किए जाने वाले 5 प्रभावी दान के उपायों के बारे में:

    काली उड़द का दान

    शनिवार के दिन काली उड़द का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इसे किसी गरीब ब्राह्मण या मजदूर को दान में देने से नौकरी या व्यापार संबंधी परेशानियों का समाधान होता है। यह शनि देव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने का एक प्रभावशाली उपाय है। काली उड़द का दान शनि के प्रभाव को कम कर जीवन में खुशहाली और समृद्धि लाता है।

    काले तिल का दान

    काले तिल को शनि ग्रह से जोड़ा गया है। शनिवार के दिन काले तिल का दान करने से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और मानसिक शांति मिलती है। शनि दोष से राहत पाने के लिए काले तिल का दान विशेष रूप से प्रभावशाली माना जाता है। यह उपाय शनि के प्रकोप को कम करने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

     लोहे का दान

    शनि देव का धातु तत्व लोहा है। इसलिए शनिवार को लोहे की किसी भी उपयोगी वस्तु जैसे कटोरी कढ़ाई तवा या लोहे का सिक्का दान करना लाभकारी माना जाता है। ऐसा दान करने से शनि दोष शांत होता है और शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह उपाय जीवन में आर्थिक स्थिति सुधारने और शनि के कुप्रभाव को कम करने में सहायक है।

    काले जूते-चप्पल का दान

    काले जूते या चप्पल का दान शनि देव की कृपा को आकर्षित करने का एक और प्रभावशाली उपाय है। इससे न केवल शनि का प्रभाव कम होता है बल्कि आर्थिक उन्नति भी होती है। काले जूते या चप्पल का दान करने से जीवन के संघर्ष और नौकरी या यात्रा में आने वाली बाधाओं से राहत मिलती है। यह दान शनि प्रकोप को शांत करने और जीवन को आसान बनाने में मदद करता है।

    सरसों के तेल का दान

    शनिवार को लोहे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर उसे किसी जरूरतमंद को दान करना या पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी है। यह दान जीवन में आर्थिक स्थिरता सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण उपाय है। शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यह एक प्रमुख उपाय माना जाता है जो विशेष रूप से शनिदोष और आर्थिक संकट से उबरने में मदद करता है।

    यदि आप शनिवार को ऊपर बताए गए पांच उपायों को नियमित रूप से करते हैं तो शनि देव का प्रभाव आपके जीवन में सकारात्मक दिशा में बदल सकता है। शनि की पूजा और दान से न केवल शनि दोष कम होते हैं बल्कि व्यक्ति के घर स्वास्थ्य और व्यवसाय में सुख और समृद्धि का प्रवाह भी सुनिश्चित होता है। इसलिए शनि देव के प्रति श्रद्धा और समर्पण से जीवन में खुशहाली और समृद्धि आएगी।

  • Amavasya 2026: जानें साल 2026 में अमावस्या की सभी 13 तिथियां, मौनी और सोमवती अमावस्या सहित

    Amavasya 2026: जानें साल 2026 में अमावस्या की सभी 13 तिथियां, मौनी और सोमवती अमावस्या सहित


    नई दिल्ली/हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष 12 या कभी-कभी 13 अमावस्याएं होती हैं। अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा पूरी तरह लुप्त हो जाता है और कृष्ण पक्ष समाप्त हो जाता है। साल 2026 में कुल 13 अमावस्या पड़ने वाली हैं। इनमें मौनी अमावस्या और सोमवती अमावस्या विशेष महत्व रखती हैं। आइए जानते हैं 2026 में आने वाली सभी अमावस्याओं की तिथियां और उनके महत्व के बारे में।

    साल 2026 की पहली अमावस्या – मौनी अमावस्या

    साल की पहली अमावस्या माघ मास में पड़ रही है, जिसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मौनी अमावस्या पर व्रत रखने, दान देने और पितरों का तर्पण करना विशेष रूप से लाभकारी होता है। साथ ही भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा करने का भी खास महत्व है। मौनी अमावस्या पर मौन व्रत रखने की परंपरा प्रचलित है। इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को पड़ रही है।

    सोमवती अमावस्या 2026
    जब अमावस्या का दिन सोमवार को पड़ता है, उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। साल 2026 में दो बार सोमवती अमावस्या है। पहली सोमवती अमावस्या 15 जून 2026 को और दूसरी 9 नवंबर 2026 को है। इस दिन व्रत और विशेष पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और पितृ दोष से मुक्ति का लाभ माना जाता है।

    शनिश्चरी अमावस्या 2026
    शनिवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन शनिदेव की विशेष पूजा का विधान होता है। साल 2026 में शनिश्चरी अमावस्या दो बार पड़ रही है – 16 मई और 10 अक्टूबर 2026। इस दिन शनिदेव की पूजा और रुद्राभिषेक करने से कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

    अमावस्या का धार्मिक महत्व

    अमावस्या की रात चंद्रमा पूरी तरह गायब हो जाता है और इसे काली रात कहा जाता है। इस दिन किया गया दान, व्रत और पितरों के लिए तर्पण अत्यंत लाभकारी माना जाता है। कई बार अमावस्या तिथि दो दिन तक चलती है – पहला दिन स्नान-दान के लिए शुभ होता है और दूसरा दिन तर्पण, व्रत और पूजा-अर्चना के लिए।

    साल 2026 की सभी अमावस्या तिथियां:

    मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026 अग्रहायण अमावस्या: 16 फरवरी 2026 फाल्गुन अमावस्या: 18 मार्च 2026 चैत्र अमावस्या: 16 अप्रैल 2026 वैशाख अमावस्या: 16 मई 2026 शनिश्चरी ज्येष्ठ अमावस्या: 15 जून 2026 सोमवती  आषाढ़ अमावस्या: 15 जुलाई 2026 श्रावण अमावस्या: 13 अगस्त 2026 भाद्रपद अमावस्या: 12 सितंबर 2026 आश्विन अमावस्या: 10 अक्टूबर 2026 शनिश्चरी
    कार्तिक अमावस्या: 9 नवंबर 2026 सोमवती मार्गशीर्ष अमावस्या: 8 दिसंबर 2026 पौष अमावस्या: 6 जनवरी 2027

    विशेष सलाह:

    अमावस्या पर व्रत रखने, पितरों का तर्पण करने और दान देने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मौनी और सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व अधिक माना जाता है।साल 2026 में अमावस्या के दिन धार्मिक अनुष्ठान और पूजा के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।

  • मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    मौत के बाद क्या होता है? 10 प्रमुख धर्मों की रहस्यमय मान्यताएं

    नई दिल्ली/मौत के बाद क्या होता है? यह सवाल इंसान के अस्तित्व से जुड़ा सबसे गहरा रहस्य है। अलग-अलग धर्म इस पर अलग-अलग विचार रखते हैं। विश्व में हजारों धर्म हैं, और लगभग हर धर्म में मृत्यु और उसके बाद की जीवन यात्रा पर अलग मान्यता मिलती है। यहाँ 10 प्रमुख धर्मों के दृष्टिकोण पर नजर डालते हैं।

    1. ईसाई धर्म
    ईसाई धर्म में मौत को अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत माना जाता है। उनके अनुसार, हर जीव में आत्मा रहती है और मरने के बाद भगवान का न्याय होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और पापी नर्क में जन्म लेते हैं।

    2. इस्लाम
    इस्लाम में मृत्यु से डरने की बजाय इसे स्वीकार करना सिखाया जाता है। मुस्लिम मानते हैं कि अल्लाह मृत्यु के समय फरिश्ते भेजते हैं और आत्मा की परीक्षा लेते हैं। पाक आत्मा को बरजख भेजा जाता है, जहां वह कयामत के दिन का इंतजार करती है।

    3. हिंदू धर्म

    हिंदू धर्म में मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र को ‘संसार’ कहा जाता है। आत्मा कई जन्मों में नए शरीर में आती है- कभी इंसान तो कभी जानवर। मोक्ष प्राप्त करने पर पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।

    4. बौद्ध धर्म

    बौद्ध धर्म में जीवन और मृत्यु सतत प्रक्रिया है। आत्मा मृत्यु के बाद अन्य जन्मों में जाती है। पुनर्जन्म का स्वरूप व्यक्ति के कर्मों पर निर्भर करता है।

    5. सिख धर्म

    सिख धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा कर्मों के आधार पर पुनर्जन्म प्राप्त करती है। भगवान का ध्यान और अहंकार पर नियंत्रण पाने से आत्मा पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो सकती है।

    6. बहाई धर्म
    बहाई धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा जारी रहती है। शरीर मिट्टी में मिल जाता है, लेकिन आत्मा स्वतंत्र और खुश रहती है। आत्मा की तरक्की में भगवान की कृपा और जीवित लोगों के नेक कर्म मदद करते हैं। मृत्यु को भय की चीज नहीं माना जाता।

    7. जैन धर्म

    जैन धर्म में आत्मा हमेशा जीवित रहती है। मृत्यु और पुनर्जन्म का चक्र केवल कर्मों से तय होता है। अहिंसा और अच्छे कर्म के माध्यम से आत्मा पुनर्जन्म के बंधन से मुक्त होती है।

    8. जोरोस्ट्रियन धर्म

    जोरोस्ट्रियन धर्म में मृत्यु के बाद आत्मा का न्याय ‘चिनवट ब्रिज’ पर होता है। अच्छे कर्म करने वाले स्वर्ग जाते हैं और बुरे कर्म करने वाले नर्क में। अंततः सभी आत्माएं शुद्ध होकर भगवान के पास लौट जाती हैं।

    9. शिंटो धर्म जापान 

    शिंटो धर्म में आत्मा शरीर की मृत्यु के बाद जीवित रहती है और जिंदा लोगों की सहायता करती है। मरने के बाद व्यक्ति पवित्र आत्मा बन जाता है और परिवार और समुदाय की रक्षा करता है।

    10. अन्य प्राचीन और लोकधर्म

    अफ्रीकी, इंडिजिनस और अन्य लोकधर्मों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा विभिन्न रूपों में देखी जाती है। कुछ में आत्मा पूर्वजों के साथ मिलती है, कुछ में जीवन और प्रकृति के चक्र में सम्मिलित होती है।
    मृत्यु के बाद जीवन को लेकर इन सभी धर्मों की मान्यताएं भले ही अलग हों, लेकिन एक साझा संदेश है: मृत्यु अंत नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। चाहे स्वर्ग, नर्क या पुनर्जन्म हो, सभी धर्म आत्मा के महत्व और उसके कर्मों पर जोर देते हैं।