Category: Religious Astrology

  • खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान

    खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान


    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव किसी राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रांति कहा जाता है। विशेष रूप से जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास या मलमास लगता है। हिंदू धर्म में इस समय को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन पूजा पाठ, दान और जप तप के लिए इसे विशेष लाभकारी माना गया है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है और सूर्य के 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करने पर यह समाप्त होगा। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाएगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं और 20 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे।

    त्रिग्रही योग का प्रभाव
    मीन राशि में पहले से विराजमान शुक्र और शनि के साथ सूर्य के प्रवेश से त्रिग्रही योग बनता है। इसका सकारात्मक प्रभाव मिथुन, तुला, वृषभ, कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों पर आर्थिक लाभ, मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है।

    मांगलिक कार्य वर्जित

    खरमास के दौरान ग्रहों की शुभ दृष्टि का प्रभाव कम होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है। साथ ही नए व्यापार की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    खरमास में क्या ना करें

    भगवान, गुरु, माता पिता, गाय और स्त्री की निंदा न करें।

    जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाना अशुभ माना गया है।

    नए वाहन या घर खरीदने से परहेज करें।

    विवाद और झगड़ों से दूर रहें।

    खरमास में क्या करें

    दान पुण्य, पूजा और धार्मिक कार्य करें। 

    रामायण, गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ लाभकारी है।सूर्य देव, भगवान शिव और विष्णु की पूजा से घर परिवार में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

  • चैत्र अमावस्या 18 मार्च, फिर 15 दिन महोत्सवों की भरमार, नवरात्र से हनुमान जयंती तक उत्सवों का दौर

    चैत्र अमावस्या 18 मार्च, फिर 15 दिन महोत्सवों की भरमार, नवरात्र से हनुमान जयंती तक उत्सवों का दौर



    नई दिल्ली। हिंदू नववर्ष की शुरुआत करीब है। हर साल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नए विक्रम संवत की शुरुआत होती है। इस साल 18 मार्च को चैत्र अमावस्या है और इसके अगले दिन, 19 मार्च 2026 से विक्रम संवत 2083 का नया वर्ष प्रारंभ होगा, जिसे रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा।

    गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्र

    19 मार्च से हिंदू नववर्ष का स्वागत गुड़ी पड़वा पर्व के रूप में महाराष्ट्र में किया जाएगा, जबकि कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में इसे युगादी के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन से मां दुर्गा की आराधना का 9 दिवसीय पर्व, चैत्र नवरात्र, भी शुरू होगा। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना का आयोजन किया जाएगा।

    मार्च में प्रमुख व्रत-त्योहार

    20 मार्च 2026 (शुक्रवार): सिंधी समुदाय का प्रमुख पर्व झूलेलाल जयंती।

    21 मार्च 2026 (शनिवार): मत्स्य जयंती, गौरी पूजा और राजस्थान में धूमधाम से मनाया जाने वाला गणगौर पर्व।

    26 मार्च 2026 (गुरुवार): चैत्र नवरात्र की अष्टमी तिथि, हवन और कन्या पूजन का आयोजन।

    27 मार्च 2026 (शुक्रवार): रामनवमी का पर्व और नवरात्र का समापन, ज्वारों का विसर्जन भी इसी दिन।

    29 मार्च 2026 (रविवार): कामदा एकादशी व्रत।

    31 मार्च 2026 (मंगलवार): जैन धर्मावलंबियों का महापर्व महावीर जयंती।

    2 अप्रैल 2026 (गुरुवार): हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा व्रत। इस दिन चैत्र मास का समापन भी होगा।

  • विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी

    विश्व में उभर सकते हैं युद्ध, आपदाएं और नई बीमारियां: ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर दी चेतावनी


    नई दिल्ली। ज्योतिषाचार्य पं. गौतम ने रुद्र बीसी के शेष वर्षों को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। उनके अनुसार, आगामी वर्षों में विश्व स्तर पर कई संकट और अप्रत्याशित घटनाएं घटित हो सकती हैं। पं. गौतम का कहना है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और नई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहेगा, और इसे केवल भविष्यवाणी के रूप में ही नहीं, बल्कि सतर्क रहने के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जाना चाहिए।

    विशेष रूप से भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, मौसम संबंधी आपदाओं, महामारी और असामान्य प्राकृतिक घटनाओं की संभावना भी बनी रहेगी। ज्योतिषाचार्य ने जोर देकर कहा कि इस चेतावनी का उद्देश्य भय फैलाना नहीं है, बल्कि समाज को संभावित परिस्थितियों के प्रति सचेत करना है।

    पं. गौतम ने सभी लोगों से अपील की है कि वे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर तैयार रहें। उन्होंने बताया कि यदि सही समय पर सतर्कता और तैयारी रखी जाए, तो इन संभावित आपदाओं का प्रभाव काफी हद तक कम किया जा सकता है।

  • नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत: मैहर स्टेशन पर 14 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव

    नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत: मैहर स्टेशन पर 14 जोड़ी ट्रेनों का अस्थायी ठहराव



    नई  दिल्ली। नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल माता शारदा मंदिर मैहर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए मैहर रेलवे स्टेशन पर कई लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी ठहराव दिया जाएगा।

    रेल प्रशासन के अनुसार भारतीय रेलवे ने भोपाल मंडल से गुजरने वाली 14 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को मैहर स्टेशन पर 5 मिनट का अस्थायी ठहराव देने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था 19 मार्च 2026 से 1 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी।

    नवरात्रि के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मैहर पहुंचते हैं। ऐसे में यात्रियों को सीधे मैहर पहुंचने में सुविधा मिले, इसके लिए विभिन्न राज्यों से आने-जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों को अस्थायी हाल्ट दिया गया है। इससे खासतौर पर उत्तर भारत, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत से आने वाले भक्तों को काफी राहत मिलेगी।

    इन ट्रेनों का मैहर स्टेशन पर होगा अस्थायी ठहराव
    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गोरखपुर एक्सप्रेस

    गोरखपुर–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    चेन्नई–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–चेन्नई एक्सप्रेस

    वलसाड–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस

    मुजफ्फरपुर–वलसाड एक्सप्रेस

    कोल्हापुर–धनबाद एक्सप्रेस

    धनबाद–कोल्हापुर एक्सप्रेस

    एलएलटी–रक्सौल एक्सप्रेस

    रक्सौल–एलएलटी एक्सप्रेस

    पुणे–गोरखपुर एक्सप्रेस

    गोरखपुर–पुणे एक्सप्रेस

    पूर्णा–पटना एक्सप्रेस

    पटना–पूर्णा एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–अयोध्या कैंट एक्सप्रेस

    अयोध्या कैंट–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–रांची एक्सप्रेस

    रांची–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    बांद्रा टर्मिनस–पटना एक्सप्रेस

    पटना–बांद्रा टर्मिनस एक्सप्रेस

    पुणे–बनारस एक्सप्रेस

    बनारस–पुणे एक्सप्रेस

    लोकमान्य तिलक टर्मिनस–गुवाहाटी एक्सप्रेस

    गुवाहाटी–लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस

    सूरत–छपरा एक्सप्रेस

    छपरा–सूरत एक्सप्रेस

    रेलवे का कहना है कि नवरात्रि मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सके और यात्रा सुगम हो।

    दो लाइन का सारांश
    नवरात्रि मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मैहर रेलवे स्टेशन पर 19 मार्च से 1 अप्रैल 2026 तक 14 जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेनों को 5 मिनट का अस्थायी ठहराव दिया जाएगा। इससे माता शारदा मंदिर दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सीधी रेल सुविधा मिलेगी।

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  • चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर

    चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च से शुरू होंगे व्रत, जानें घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि और नौ दिनों का पूरा कैलेंडर


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस दौरान भक्त पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं और व्रत रखकर सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से होगी और इसका समापन 26 मार्च को होगा। इसी दिन महानवमी के साथ साथ राम नवमी का पावन पर्व भी मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी मानी जाती है।

    नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना की जाती है जिसे देवी पूजा का प्रारंभ माना जाता है। वर्ष 2026 में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह लगभग 6:23 बजे से 7:32 बजे तक रहेगा। इसके अलावा यदि किसी कारणवश इस समय स्थापना न हो सके तो अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक भी घटस्थापना की जा सकती है। इस समय विधि विधान से कलश स्थापना करके मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और नौ दिनों तक नियमित पूजा की जाती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि जिस वार से शुरू होती है उसी आधार पर माता दुर्गा के आगमन का वाहन तय होता है। वर्ष 2026 में नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है इसलिए मान्यता है कि माता दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। हाथी को समृद्धि अच्छी वर्षा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। विशेष बात यह है कि इस बार अष्टमी और नवमी तिथि का संयोग भी एक ही दिन पड़ रहा है। 26 मार्च को अष्टमी और नवमी का संयुक्त पूजन कन्या पूजन और हवन किया जाएगा। इसी दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाएगा जिससे यह दिन और भी अधिक शुभ माना जा रहा है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी सातवें दिन मां कालरात्रि आठवें दिन मां महागौरी और नवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों में अलग अलग भोग अर्पित करते हैं और मां से सुख समृद्धि की कामना करते हैं।

    नवरात्रि के अंतिम दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार छोटी कन्याओं में देवी का स्वरूप माना जाता है। इस दिन कन्याओं को भोजन कराया जाता है उन्हें उपहार और दक्षिणा दी जाती है तथा हवन भी किया जाता है।

    पूजा विधि के अनुसार घटस्थापना से पहले घर और पूजा स्थान की साफ सफाई की जाती है। मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं कलश में जल सुपारी और सिक्का रखा जाता है तथा ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है।

    नवरात्रि के दौरान भक्तों को सात्विक भोजन करना चाहिए रोज सुबह शाम मां दुर्गा की आरती करनी चाहिए और दान पुण्य करना चाहिए। वहीं मांस मदिरा का सेवन झूठ बोलना और क्रोध करने से बचने की सलाह दी जाती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया नवरात्रि पर्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है।

  • कन्या राशि साप्ताहिक राशिफल (16–22 मार्च 2026): यह सप्ताह बन सकता है गेम चेंजर

    कन्या राशि साप्ताहिक राशिफल (16–22 मार्च 2026): यह सप्ताह बन सकता है गेम चेंजर


    नई दिल्ली। इस सप्ताह कन्या राशि के जातकों के लिए समय जिम्मेदारी, आत्मविश्लेषण और प्रगति का संकेत दे रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति आपके जीवन के कई क्षेत्रोंखासकर करियर, रिश्तों और मानसिक संतुलनपर प्रभाव डाल सकती है। इस दौरान व्यक्तिगत और पेशेवर संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी रहेगा।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस सप्ताह चंद्रमा 16 मार्च को छठे भाव में, 18 मार्च को सातवें भाव में और 21 मार्च को आठवें भाव में गोचर करेंगे। वहीं सूर्य, शुक्र और शनि की युति मीन राशि में बनी हुई है, जबकि मंगल, राहु और वक्री बुध कुंभ राशि में स्थित हैं। इसके साथ ही बृहस्पति आपके दसवें भाव में मौजूद हैं, जो करियर और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों में सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।

    इन ग्रह स्थितियों के कारण व्यवसाय विस्तार और विदेशी संपर्कों से लाभ मिलने की संभावना बन रही है। हालांकि वक्री बुध की वजह से किसी भी बड़े फैसले या बातचीत में सावधानी रखना जरूरी होगा।

    स्वास्थ्य
    इस सप्ताह स्वास्थ्य के मामले में अनुशासन और संतुलित दिनचर्या बेहद जरूरी रहेगी। सप्ताह की शुरुआत में चंद्रमा का प्रभाव आपको अपने खान-पान और लाइफस्टाइल के प्रति जागरूक बनाएगा।
    मध्य सप्ताह में काम का दबाव बढ़ने से मानसिक तनाव या भावनात्मक संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। ऐसे में परिवार या दोस्तों के साथ समय बिताना आपको मानसिक शांति देगा।

    सप्ताहांत में ऊर्जा का स्तर थोड़ा ऊपर-नीचे हो सकता है, इसलिए अधिक काम से बचें। हल्का व्यायाम, योग और ध्यान आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    परिवार और संबंध
    रिश्तों के लिहाज से यह सप्ताह आत्मचिंतन और सुधार का अवसर लेकर आएगा। शुरुआत में व्यस्तता के कारण परिवार को समय कम दे पाएंगे, लेकिन जैसे ही चंद्रमा सातवें भाव में प्रवेश करेगा, रिश्तों में सुधार दिखाई देगा।

    जीवनसाथी या पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करने से पुरानी गलतफहमियां दूर हो सकती हैं। शुक्र का मजबूत प्रभाव रिश्तों में प्यार और अपनापन बढ़ाएगा।

    हालांकि सप्ताह के अंत में घर में किसी गंभीर विषय पर चर्चा हो सकती है, इसलिए अनावश्यक बहस से बचना ही बेहतर रहेगा।

    शिक्षा और करियर
    छात्रों के लिए यह सप्ताह मेहनत और सीखने का समय रहेगा। छठे भाव का चंद्रमा आपको अनुशासन में रखेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है।

    मध्य सप्ताह में ग्रुप स्टडी और शिक्षकों से मार्गदर्शन फायदेमंद साबित होगा। सप्ताहांत में शोध, विश्लेषण और गहराई से पढ़ाई करने वाले विषयों पर फोकस बढ़ेगा।एकाग्रता के साथ किया गया काम ही बेहतर परिणाम दिला सकता है।

    कुल मिलाकर यह सप्ताह कन्या राशि के जातकों के लिए धीरे-धीरे लेकिन स्थिर प्रगति का संकेत देता है। ग्रहों की स्थिति आपको जिम्मेदारी निभाने, आत्मविकास करने और सही फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी।

    बृहस्पति और उच्च के शुक्र की कृपा से नए अवसर और सहयोग मिलने की संभावना है। अगर आप धैर्य और स्पष्ट संवाद बनाए रखेंगे, तो यह सप्ताह आपके लिए सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

    उपाय
    रोजाना “ओम बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।

    बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।

    जरूरतमंद लोगों को हरी मूंग की दाल या हरी सब्जी दान करें।

    मानसिक शांति के लिए नियमित ध्यान और योग करें।

    सुबह पक्षियों को दाना डालें।

    संक्षेप में यह सप्ताह कन्या राशि के लिए जिम्मेदारी, रिश्तों में सुधार और करियर में नए अवसरों का संकेत दे सकता है। सही संवाद और धैर्य आपके लिए सफलता के रास्ते खोल सकते हैं।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: गुरुवार से शुरुआत, माता का वाहन बनेगी डोली; जानिए शास्त्रों में कैसे तय होता है आगमन का वाहन

    चैत्र नवरात्रि 2026: गुरुवार से शुरुआत, माता का वाहन बनेगी डोली; जानिए शास्त्रों में कैसे तय होता है आगमन का वाहन


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत जप पाठ तथा भक्ति के माध्यम से माता रानी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं के अनुसार नवरात्रि में माता दुर्गा का पृथ्वी पर आगमन किस वाहन से होता है इसका विशेष महत्व माना जाता है। यह वाहन घटस्थापना के दिन के आधार पर निर्धारित होता है और इसे उस वर्ष की समग्र ऊर्जा तथा संभावित परिस्थितियों का संकेत भी माना जाता है।

    साल 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से हो रही है। ज्योतिषीय नियमों के अनुसार यदि नवरात्रि की शुरुआत गुरुवार या शुक्रवार से होती है तो माता रानी का आगमन डोली यानी पालकी पर माना जाता है। इसी कारण इस वर्ष माता का वाहन डोली निर्धारित किया गया है। शास्त्रों में यह परंपरा इस विश्वास से जुड़ी है कि देवी का वाहन उस वर्ष के सामाजिक आर्थिक प्राकृतिक और राजनीतिक हालात के बारे में संकेत देता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सप्ताह के अलग-अलग दिनों के आधार पर माता का वाहन तय होता है। यदि नवरात्रि रविवार या सोमवार से शुरू हो तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। यह अच्छी वर्षा सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। वहीं शनिवार या मंगलवार से नवरात्रि शुरू होने पर माता का वाहन घोड़ा माना जाता है जो संघर्ष युद्ध या अशांति का संकेत देता है। यदि नवरात्रि बुधवार से प्रारंभ हो तो माता नाव पर सवार होकर आती हैं जिसे अत्यंत शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। गुरुवार या शुक्रवार से नवरात्रि शुरू होने पर माता का आगमन डोली पर माना जाता है।

    डोली या पालकी को ज्योतिषीय दृष्टि से सामान्यत शुभ संकेत नहीं माना जाता। मान्यता है कि ऐसे वर्ष में सामाजिक या आर्थिक चुनौतियां स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं महामारी प्राकृतिक असंतुलन या आर्थिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि विद्वान यह भी बताते हैं कि यह भविष्यवाणी किसी निश्चित घटना का संकेत नहीं बल्कि सामूहिक ऊर्जा का प्रतीकात्मक अर्थ है।

    धार्मिक आस्था के अनुसार माता की कृपा से सभी कठिनाइयों को दूर किया जा सकता है। इसलिए नवरात्रि के दौरान श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा-पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। भक्त इन दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ कन्या पूजन हवन और दान-पुण्य करके माता का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

    इस प्रकार 2026 की चैत्र नवरात्रि में माता का आगमन डोली पर माना जा रहा है जिसे सतर्कता और संयम का संकेत समझा जा सकता है। आस्था और भक्ति के साथ मनाई गई नवरात्रि न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है बल्कि जीवन में सकारात्मकता और संतुलन भी लाती है।

  • भक्ति और सात्विकता बनाए रखें, नवरात्रि में इन वस्तुओं से रहें दूर….

    भक्ति और सात्विकता बनाए रखें, नवरात्रि में इन वस्तुओं से रहें दूर….


    नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि 2026 का पर्व न केवल भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि यह आध्यात्मिक अनुशासन और सात्विक जीवनशैली को अपनाने का अवसर भी है। इन नौ दिनों के दौरान देवी मां दुर्गा की पूजा और आराधना के साथ-साथ जीवन में पवित्रता बनाए रखना अनिवार्य माना गया है। धार्मिक शास्त्रों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष वस्तुओं की खरीदारी वर्जित होती है, क्योंकि इन्हें अशुभता या नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

    सबसे पहले चमड़े के सामान की बात करें तो नवरात्रि के दौरान बेल्ट, वॉलेट, बैग या जूते जैसी चीज़ें खरीदना अशुभ माना जाता है। चूंकि ये उत्पाद जानवरों की खाल से बनते हैं, इसलिए यह त्योहार उनके उपयोग या खरीदारी के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। यह पर्व भक्ति, करुणा और आत्म-शुद्धि पर केंद्रित है, और चमड़े की वस्तुएं इस पवित्रता के सिद्धांत के विपरीत मानी जाती हैं।

    इसके अलावा शराब का सेवन या खरीदारी पूरी तरह वर्जित है। नवरात्रि का त्योहार आत्म-अनुशासन, भक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, इसलिए शराब जैसी चीज़ें घर के पवित्र माहौल को बिगाड़ सकती हैं। मांसाहारी भोजन, मछली या अंडे जैसी वस्तुओं से भी परहेज़ किया जाता है। इसके बजाय सात्विक और हल्का भोजन प्राथमिकता में रहता है, जो उपवास और प्रार्थना के दौरान शरीर को विषमुक्त करता है।

    काले रंग के कपड़े खरीदने से भी बचा जाता है, क्योंकि काला रंग नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के दौरान लाल, पीला, सफेद जैसे चमकीले और शुभ रंग पहनने की परंपरा है। इसी तरह, धारदार वस्तुएं जैसे चाकू, कैंची या अन्य तेज़ सामान खरीदने से भी बचा जाता है। शास्त्रों के अनुसार ये संघर्ष और नकारात्मकता का प्रतीक होती हैं, जो त्योहार के शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।

    लोहे की वस्तुएं भी नवरात्रि के दौरान खरीदने योग्य नहीं मानी जातीं। कुछ सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार लोहे की चीज़ों में भारी और कठोर ऊर्जा होती है, जो भक्ति और शुद्धि के माहौल के विपरीत होती हैं।

    प्याज और लहसुन से भी परहेज़ किया जाता है, क्योंकि इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। सात्विक सामग्री का सेवन न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, बल्कि यह पूजा और प्रार्थना के दौरान मानसिक और आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करता है।

    आख़िर में, तंबाकू, सिगरेट, गुटखा या तंबाकू युक्त पान जैसी चीज़ें भी नवरात्रि में वर्जित मानी जाती हैं। यह त्योहार शरीर और मन की शुद्धि, आत्म-अनुशासन और भक्ति की भावना को बढ़ावा देता है, और इन चीज़ों की खरीदारी इसे प्रभावित कर सकती है।

    इसलिए, चैत्र नवरात्रि के नौ पवित्र दिनों में इन वस्तुओं से दूर रहकर आप न केवल मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि अपने जीवन में सात्विकता और आध्यात्मिक शांति भी बनाए रख सकते हैं।

  • चैत्र नवरात्र के पहले दिन अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति, आम श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन

    चैत्र नवरात्र के पहले दिन अयोध्या आएंगी राष्ट्रपति, आम श्रद्धालु कर सकेंगे रामलला के दर्शन



    नई दिल्ली। वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर 19 मार्च से अयोध्या में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हो रहा है। इस दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राम मंदिर में श्रीराम यंत्र स्थापना के लिए अयोध्या आएंगी। वहीं, इसी तिथि से चैत्र रामनवमी मेला और वासंतिक नवरात्र का भी शुभारंभ होगा। प्रतिपदा का दिन हिंदी नववर्ष का पहला दिन भी है, जिससे रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

    भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में तय किया गया कि नवरात्र के प्रथम दिन वीआईपी पास धारकों के लिए दर्शन बंद रहेंगे। आम श्रद्धालु सामान्य दर्शन मार्ग से श्रीराम लला के दर्शन कर सकेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने बताया कि सुबह 6 बजे से शाम तक अनवरत दर्शन जारी रहेगा।

    समारोह और आमंत्रित अतिथि

    रंगमहल बैरियर यानी क्रॉसिंग वन से सिर्फ आमंत्रित अतिथियों को श्रीराम यंत्र स्थापना समारोह में प्रवेश दिया जाएगा। मंदिर आंदोलन के सहयात्रियों को इस अवसर पर आमंत्रित नहीं किया गया है। केवल राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान में शामिल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कार्यकर्ता (करीब 3,500) और विश्व हिन्दू परिषद के अखिल भारतीय टोली के 45 पदाधिकारी तथा 300 संतों को शामिल किया गया है।

    इसके अलावा मंदिर निर्माण में लगी विभिन्न एजेंसियों के कर्मयोगियों के पारिवारिक सदस्य समेत लगभग 1,800 लोगों को भी व्यक्तिगत आमंत्रण भेजा गया है। चंपतराय ने बताया कि आमंत्रण हस्तांतरणीय नहीं है और अतिथियों के साथ सुरक्षा कर्मियों या अंगरक्षकों का प्रवेश नहीं होगा। समारोह स्थल पर किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र या हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है। सिख परंपरा के आमंत्रित श्रद्धालुओं को कानूनी वैध हथियार और पांच पहचान चिन्हों सहित कटार ले जाने की अनुमति दी गई है। मोबाइल उपकरणों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। सभी अतिथि 18 मार्च तक अयोध्या पहुँच जाएंगे।

    ठहरने और भोजन की व्यवस्था

    श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपतराय ने बताया कि अतिथियों के ठहरने और भोजन-जलपान की पूरी व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की गई है। गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में लगभग 3,000 कमरे बुक किए गए हैं। अलग-अलग जोनों के अनुसार भोजनालय तय किए गए हैं और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए विशेष टोलियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। नगर निगम ने भी सभी अतिथि ठहराव स्थलों पर विशेष सजावट और तैयारियां कर दी हैं, जिसकी झलक भक्तों को 18 मार्च से दिखाई देने लगेगी।

  • कृतिका नक्षत्र में शुक्र के गोचर से इन 5 राशि वालों की खुलेगी किस्मत, बढ़ेगी संपत्ति और समृद्धि

    कृतिका नक्षत्र में शुक्र के गोचर से इन 5 राशि वालों की खुलेगी किस्मत, बढ़ेगी संपत्ति और समृद्धि



    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में शुक्र देव को सुख, ऐश्वर्य, सौंदर्य और भौतिक सुखों का कारक माना जाता है। जब भी शुक्र नक्षत्र बदलते हैं, तो इसका असर हमारे जीवन की विलासिता और आर्थिक स्थिति पर देखा जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 16 अप्रैल 2026 को शुक्र कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और 27 अप्रैल 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस दौरान कई राशि वालों के लिए भाग्य के द्वार खुलने की संभावना है।

    शुक्र के इस गोचर से सबसे अधिक लाभ इन 5 राशि वालों को मिलने वाला है:-

    मेष राशि (Aries)

    मेष राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक मजबूती लेकर आएगा। निवेश से लाभ के मजबूत संकेत हैं। लंबे समय से विचाराधीन वाहन या संपत्ति खरीदने की योजना सफल हो सकती है। कार्यक्षेत्र में रचनात्मकता की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।

    वृषभ राशि (Taurus)

    शुक्र के कृतिका नक्षत्र में प्रवेश से वृषभ राशि के जातकों के व्यक्तित्व में निखार आएगा। सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी और सुखद यात्राओं के योग बनेंगे। सिंगल लोगों के जीवन में नए प्रेम संबंध बनने की संभावना है। दांपत्य जीवन में मधुरता का अनुभव होगा।

    सिंह राशि (Leo)

    सिंह राशि वालों के लिए यह गोचर मान-सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि लाएगा। सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लंबित सरकारी कार्य पूरे होंगे। आमदनी के नए स्रोत विकसित होने से बैंक बैलेंस में सुधार होगा। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की संभावना भी है।

    तुला राशि (Libra)

    तुला राशि वालों के लिए यह समय करियर में बड़ी प्रगति का अवसर लाएगा। विदेश से जुड़े व्यापार में महत्वपूर्ण डील फाइनल होने की संभावना है। सुख-सुविधाओं और शौक पर खर्च बढ़ सकता है, लेकिन आमदनी भी अच्छी रहेगी। मानसिक शांति का अनुभव भी मिलेगा।

    धनु राशि (Sagittarius)

    धनु राशि वालों के लिए यह समय भाग्य के अनुकूल रहेगा। कार्यक्षेत्र में पदोन्नति और वेतन वृद्धि के संकेत हैं। परिवार के साथ मांगलिक अवसरों में शामिल होने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता के योग बन रहे हैं।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते है।)