Category: Religious Astrology

  • संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा

    संकष्टी चतुर्थी विघ्न विनाशन को प्रसन्न करने का अद्भुत दिन इस तरह करें पूजा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा और उपवास से जुड़ा हुआ है जिसे विघ्न विनाशक और सुख-समृद्धि के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश का पूजन करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

    सकट चौथ का महत्व

    सकट चौथ को खासतौर पर माताएं अपने पुत्रों की लंबी उम्र और कल्याण के लिए रखती हैं। यह दिन गणेश जी की कृपा प्राप्त करने और जीवन में खुशहाली लाने का प्रमुख अवसर होता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार इस दिन उपवास करने से न केवल घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है बल्कि हर प्रकार के संकटों से मुक्ति भी मिलती है।

    तिथि और समय
    दृक पंचांग के अनुसार इस साल संकष्टी चतुर्थी 6 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से शुरू होगी और 7 जनवरी को सुबह 6 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय रात 8 बजकर 54 मिनट पर होगा जो व्रत के पूर्ण होने का संकेत है।

    व्रत का तरीका

    सकट चौथ का व्रत सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखा जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं जबकि कुछ हल्का सात्विक भोजन करते हैं। व्रत के लिए सबसे पहले प्रात काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। दिनभर भगवान गणेश का स्मरण करते हुए उनका पूजन करें।

    पूजन विधि

    शाम के समय चंद्रमा के दर्शन से पहले भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक करें। सबसे पहले गणेश जी का पंचामृत से स्नान कराएं फिर घी और सिंदूर का लेप लगाएं। इसके बाद जनेऊ रोली इत्र दूर्वा फूल चंदन अबीर लौंग चढ़ाकर भगवान गणेश को धूप-दीप दिखाएं।गणेश जी को तिल-गुड़ के लड्डू मोदक और तिलकुट का भोग अर्पित करें। यह भगवान गणेश को अत्यधिक प्रिय है। पूजा के बाद गणेश जी के सामने गं गण गणपतये नमः मंत्र का जाप करें और गणेश स्तोत्र या अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

    चंद्रोदय पर अर्घ्य देना

    चंद्रमा के दर्शन के बाद चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध मिश्रित जल से अर्घ्य दें। इस समय दिए गए अर्घ्य से व्रत पूरा होता है और भक्तों को संकटों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके बाद व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

    पूजन से लाभ
    सकट चौथ का व्रत विशेष रूप से संतान सुख और परिवार की समृद्धि के लिए रखा जाता है। साथ ही इस दिन किए गए पूजा से भगवान गणेश की कृपा से घर में शांति और सुख-समृद्धि आती है। भक्तों का मानना है कि इस दिन किए गए व्रत से हर प्रकार के संकट दूर होते हैं और जीवन में सफलता और खुशी का वास होता है।

    व्रत कथा

    सकट चौथ पर पूजा के साथ-साथ व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। कथा में भगवान गणेश के अनेक भक्तों की श्रद्धा और उनकी आस्था के किस्से बताए जाते हैं जो संकटों से उबरकर भगवान गणेश की कृपा से जीवन में सुख-शांति लाए सकट चौथ जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है भगवान गणेश की पूजा करने और उपवास रखने का एक विशेष दिन है। इस दिन व्रत और पूजा करने से न केवल जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है बल्कि परिवार में खुशहाली और सुख-समृद्धि भी आती है। यह पर्व विशेष रूप से माताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है जो अपने पुत्रों की लंबी उम्र और सुख-शांति की कामना करती हैं।

  • मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति

    मकर संक्रांति 2026 पुण्यकाल 16 घंटे का. 15 जनवरी को मनाएं मकर संक्रांति


    नई दिल्ली । मकर संक्रांति 2026 के दिन सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:19 बजे होगा, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पुण्यकाल 16 घंटे तक रहेगा, जो 15 जनवरी तक जारी रहेगा। इस दिन विशेष रूप से स्नान, सूर्य पूजा और दान का महत्व है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति को विशेष दिन माना जाता है क्योंकि इस दिन सूर्य उत्तरायण की दिशा में प्रवेश करते हैं, जिससे पृथ्वी पर दिन-ब-दिन तापमान बढ़ता है और ऋतु परिवर्तन की शुरुआत होती है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है, क्योंकि सूर्यदेव का उत्तरायण में प्रवेश शुभ होता है।कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री और ज्योतिषाचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी के अनुसार, मकर संक्रांति का त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा।
    इस दिन, स्नान, सूर्यदेव की उपासना और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।मकर संक्रांति से जुड़ी एक पुरानी कथा भी है, जिसके अनुसार भगवान सूर्य, अपने पुत्र भगवान शनि से मिलने मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसी दिन से सूर्य उत्तर पथगामी होते हैं और पृथ्वी की ओर उनका रुख बदलता है।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से स्नान का महत्व है, खासकर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में। इस दिन को पुण्यकाल माना गया है, और इस दौरान दान करने से व्यक्ति के जीवन में शुभता आती है।
    धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन सूर्यदेव, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।मकर संक्रांति के दिन विशेष रूप से नया अन्न, तिल, कम्बल, घी और धार्मिक पुस्तकों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन भोजन में खासतौर पर तिल और खिचड़ी बनाई जाती है, जो प्राचीन परंपराओं के अनुसार भगवान को अर्पित की जाती है, फिर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

    धार्मिक आचार्यों का मानना है कि इस दिन तिल का दान करने से शनि से संबंधित सभी कष्ट समाप्त होते हैं। इसके अलावा, गरीबों को बर्तन, तिल और अन्य सामान दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती हैमौसम को लेकर भी मकर संक्रांति विशेष महत्व रखता है। हालांकि, इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अगर मौसम अनुकूल रहा तो गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या गंगा घाटों पर पहुंच सकती है। विशेष रूप से उत्तर भारत के कई इलाकों से लोग इस दिन गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं।

    इसके अलावा, मकर संक्रांति के बाद खरमास का समय समाप्त हो जाएगा, जिसके चलते मांगलिक कार्यों की शुरुआत होगी। 18 जनवरी को मौनी अमावस्या और 4 फरवरी को पहला वैवाहिक लग्न मुहूर्त भी शुरू होगा। 2026 में मकर संक्रांति का दिन धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं से भरपूर रहेगा। यह दिन सूर्य की उपासना, तिल दान, और अन्य शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त रहेगा। विशेष रूप से इस दिन की महत्वता को समझते हुए श्रद्धालु इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाएंगे।

  • 5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

    5 जनवरी का पंचांग भद्राकाल रहेगाआडल योग नहीं लगेगाजानें शुभ-अशुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । 5 जनवरी2026 का पंचांग अनुसारइस दिन कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि रहेगी और यह दिन सोमवार को पड़ेगा। सोमवार को भद्राकाल का साया रहेगाजो रात 8 बजकर 53 मिनट से लेकर अगले दिन 7 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस समय किसी भी शुभ कार्य को करने से बचना चाहिएक्योंकि भद्राकाल में किया गया शुभ काम भी अशुभ परिणाम दे सकता है। द्वितीया तिथि सुबह 9 बजकर 56 मिनट तक रहेगीइसके बाद तृतीया तिथि का आगमन होगा। आइए जानते हैं आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त के बारे में।
    शुभ मुहूर्त

    अभिजित मुहूर्त दोपहर 1206 से 1247 तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 536 से 603 तक, अमृत काल मुहूर्त शाम 729 से 858 तक, विजय मुहूर्त दोपहर 210 से 252 तक, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 526 से 620 तक।
    अशुभ मुहूर्त

    राहुकाल सुबह 833 से 951 तक, गुलिक काल दोपहर 145 से 302 तक, यमगण्ड काल सुबह 1109 से 1227 तक, दुर्मुहूर्त दोपहर 1247 से 129 तक।
    विशेष जानकारी
    5 जनवरी को आडल योग नहीं लगेगाजो कि एक शुभ योग माना जाता है। सूर्योदय और सूर्यास्त, सूर्योदय सुबह 715, सूर्यास्त शाम 538,।
    चन्द्रोदय

    चन्द्रोदय शाम 749 चन्द्रोदय की अवधि 6 जनवरी की सुबह 856 तक। 
    दिशाशूल

    रविवार के दिन दिशा शूल पूर्व दिशा में रहेगा। इसका मतलब है कि सोमवार को यदि आप यात्रा पर जाने का सोच रहे हैं तो पूर्व दिशा की यात्रा से बचें। यह दिशा वर्जित मानी जाती है। यदि यात्रा जरूरी होतो दही-जीरा खाकर और दर्पण देखकर यात्रा पर निकलने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।इस दिन पंचांग में दी गई जानकारी को ध्यान में रखकर अपने कार्यों की योजना बनाना शुभ रहेगा।

  • साल 2026 की शुरुआत सही दिशा में: पहले दिन करें ये 6 काम, मन और जीवन होंगे संतुलित

    साल 2026 की शुरुआत सही दिशा में: पहले दिन करें ये 6 काम, मन और जीवन होंगे संतुलित


    नई दिल्ली।नववर्ष 2026 की शुरुआत के साथ ही देशभर में लोग नए संकल्पों, उम्मीदों और योजनाओं के साथ अपने दिन की शुरुआत कर रहे हैं। परंपरा और सामाजिक मान्यताओं के अनुसार, साल के पहले दिन की गतिविधियां और मानसिक स्थिति पूरे वर्ष की ऊर्जा और जीवनशैली पर असर डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नए साल के पहले दिन छोटे-छोटे, लेकिन समझदारी भरे कदम अपनाना पूरे साल सकारात्मक माहौल बनाए रखने में मदद करता है।

    1. घर और वातावरण को शांत रखें
    साल के पहले दिन घर का वातावरण शांत और तनावमुक्त होना आवश्यक माना जाता है। अनावश्यक बहस, तेज आवाज़ और विवादजनक बातचीत से बचना चाहिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि पहले दिन की मानसिक स्थिति पूरे वर्ष की ऊर्जा को प्रभावित करती है। हल्का संगीत, भजन या ध्यान जैसी आदतें घर में संतुलन और मानसिक शांति बनाए रखने में मदद करती हैं।

    2. सकारात्मक भाषा और व्यवहार अपनाएं

    नए साल के पहले दिन गुस्सा, शिकायत या कटु शब्दों का प्रयोग टालना चाहिए। भाषा का संयम रिश्तों को मजबूत रखने के साथ-साथ मानसिक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। सकारात्मक और सौम्य भाषा से दिन की शुरुआत करना प्रतीकात्मक रूप से पूरे वर्ष के लिए सकारात्मकता का संदेश देता है।

    3. सुबह का समय शांतिपूर्ण बिताएं

    साल के पहले दिन सुबह उठकर कुछ समय अकेले या शांति में बिताना लाभकारी माना जाता है। सूर्य को जल अर्पित करना, खुले वातावरण में कुछ मिनट खड़े रहना या हल्का व्यायाम करना दिन की दिशा और ऊर्जा तय करने में मदद करता है। यह अनुशासन और जागरूकता से जुड़ी आदत मानी जाती है।

    4. पूजा और प्रार्थना के माध्यम से मानसिक संतुलन

    धार्मिक या पारिवारिक परंपराओं के अनुसार, पहले दिन की पूजा केवल व्यक्तिगत आस्था तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसमें परिवार और पूर्वजों के प्रति भावनात्मक संबंधों को भी स्मरण करना चाहिए। इससे मानसिक स्थिरता, भावनात्मक संतुलन और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    5. घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई
    घर और पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखना नए साल की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने का प्रतीक माना जाता है। स्वच्छता, साफ पानी और व्यवस्थित वातावरण मन को एकाग्र करने और दिनचर्या को सही दिशा देने में मदद करते हैं। पाठ या मंत्र का उच्चारण करना संभव न हो तो शांत भाव से सुनना भी पर्याप्त माना जाता है।

    6. पौधों और हरे-भरे स्थान की देखभाल

    घर में सूखे पौधे या खाली गमले रखना ठहराव और रुकी हुई स्थिति का प्रतीक माना जाता है। नए साल की शुरुआत में इन्हें हरे-भरे पौधों से बदलना ताजगी, विकास और सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है।कुल मिलाकर, नववर्ष 2026 का पहला दिन बड़े नियमों या जटिल उपायों के बजाय छोटे, जागरूक और सकारात्मक कदमों से खास बनाया जा सकता है। यह दिन न केवल उत्सव का अवसर है, बल्कि पूरे वर्ष के लिए मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुलन स्थापित करने का मौका भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि साल के पहले दिन अपनाई गई आदतें लंबे समय तक सकारात्मक असर छोड़ सकती हैं।

  • संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

    संगम स्नान से लेकर कल्पवास तक,जाने माघ मेले से जुड़ी हर जरूरी बात, प्रमुख तिथियां और धार्मिक मान्यताएं


    नई दिल्ली।माघ मेला के बारे में अक्सर लोगों के मन में ढ़ेरो सवाल होते हैं- जैसे कि माघ मेले में स्नान करने के फायदे, स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें, और कल्पवास क्या है और यह कितने समय तक चलता है. तो आइए इन्हीं सारे सावालों का जवाब जानते हैं.
    माघ मेला 2026 प्रयागराज
    मेला शुरू – 3 जनवरी, 2026शनिवार
    मेला समाप्त – 15 फरवरी, 2026रविवार
    माघ मेला कितने दिनों तक रहता है – 44 दिन
    माघ मेला कहा लगता है – त्रिवेणी संगम, प्रयागराज
    माघ मेला और कुंभ मेला में क्या अंतर है?
    माघ मेला हर साल प्रयागराज में आयोजित होता है,
    जबकि कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार और अर्ध कुंभ मेला
    हर 6 साल में एक बार आयोजित होता है.

    संगम स्नान का सबसे अच्छा समय क्या है?

    संगम स्नान के लिए सबसे अच्छा समय ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है. 2026 में महा माघ मेले के आस-पास घूमने की कुछ जगहें कौन सी हैं? संगम में स्नान करने के बाद, आप अक्षय वट, पातालपुरी मंदिर, हनुमान मंदिर और द्वादश माधव मंदिरों में जा सकते हैं.कल्पवास कितने दिनों तक चलता है?  आमतौर पर कल्पवास 30 दिनों तक चलता है, पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक. क्या माघ मेला में कल्पवास सबके लिए अनिवार्य होता है? नहीं, कल्पवास सभी के लिए अनिवार्य नहीं होता है.

    माघ मेला 2026 स्नान की महत्वपूर्ण तारीखें
    पौष पूर्णिमा स्नान – 3 जनवरी, 2026
    मकर संक्रांति स्नान – 14 जनवरी, 2026
    मौनी अमावस्या स्नान – 18 जनवरी, 2026
    बसंत पंचमी स्नान – 23 जनवरी, 2026
    माघी पूर्णिमा स्नान – 1 फरवरी, 2026
    महाशिवरात्रि स्नान – 15 फरवरी, 2026

    माघ मेले में स्नान करने से क्या फायदा होता है?
    ऐसा माना जाता है कि माघ मेले में स्नान करने से हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है.यह पवित्र स्नान पापों से मुक्ति दिलाता है और आत्मा को शुद्ध करता है.संगम में स्नान करने से तनाव से राहत मिलती है.माघ मेले में स्नान करना स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. माघ स्नान और दान से ग्रहों के कष्टों से भी मुक्ति मिलती है.
    कल्पवास क्या होता है? What is Kalpavas?
    कल्पवास एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अनुष्ठान और अभ्यास है. इस दौरान, भक्त एक महीने तक संगम के किनारे रहते हैं और नियमित रूप से पवित्र स्नान करते हैं. ये स्नान सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि दिन में तीन बार किए जाते हैं. इस दौरान केवल शुद्ध और सात्विक भोजन किया जाता है, और वह भी दिन में सिर्फ एक बार. कल्पवास के दौरान स्नान, ध्यान, पूजा और जप अनिवार्य हैं. कल्पवास के दौरान, भक्त केवल जमीन पर सोते हैं, जिसका मतलब है कि वे सांसारिक सुख-सुविधाओं से दूरी बनाते हैं. ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति कल्पवास करता है, उसके सभी पाप धुल जाते हैं.

     

  • 31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल

    31 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी का विशेष व्रत; अर्धरात्रि के बाद द्वादशी का आगमन, वृषभ राशि में चंद्रमा देंगे शुभ फल


    नई दिल्ली/काशी: वर्ष 2025 का समापन एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक संयोग के साथ हो रहा है। आज, बुधवार 31 दिसंबर 2025 को पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस एकादशी का विशेष महत्व है, क्योंकि इसे संतान प्राप्ति, संतान की उन्नति और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए अमोघ माना जाता है। वैष्णव परंपरा के अनुयायी आज पूरी निष्ठा के साथ भगवान विष्णु की आराधना कर रहे हैं।

    तिथि और नक्षत्रों की अनूठी गणना

    पंचांग के अनुसार, इस वर्ष की अंतिम एकादशी कई मायनों में खास है। आज एकादशी तिथि का क्षय हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप अर्धरात्रि के बाद द्वादशी तिथि का आरंभ हो जाएगा। ज्योतिषविदों के अनुसार, तिथि का यह परिवर्तन आध्यात्मिक ऊर्जा में वृद्धि करने वाला होता है।तिथि विवरण: एकादशी तिथि आज दिन भर व्याप्त रहेगी। रात 1 बजकर 48 मिनट पर द्वादशी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी।नक्षत्र और योग: आज रात 1 बजकर 30 मिनट तक कृतिका नक्षत्र रहेगा, जिसके बाद चंद्रमा के प्रिय रोहिणी नक्षत्र का आरंभ होगा। वहीं, योग की बात करें तो रात 9 बजकर 13 मिनट तक साध्य योग रहेगा, जो शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इसके उपरांत शुभ योग प्रारंभ होगा।

    चंद्रमा का गोचर: वृषभ राशि में उच्च के होंगे चंद्र

    आज ज्योतिषीय दृष्टि से एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सुबह 9 बजकर 23 मिनट तक चंद्रमा मेष राशि में रहेंगे, लेकिन इसके तुरंत बाद वे अपनी उच्च राशि वृषभ में प्रवेश कर जाएंगे। चंद्रमा का अपनी उच्च राशि में होना मन की एकाग्रता, मानसिक शांति और भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि का कारक बनता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थिति संकल्प शक्ति को मजबूत करने वाली होगी।

    आज के शुभ और अशुभ मुहूर्त Time Table

    किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या नए कार्य की शुरुआत के लिए सही समय का चयन करना अनिवार्य है।
    शुभ मुहूर्त Auspicious Timings:ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:24 से 6:19 तक ईश्वर चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ
    विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:49 तक किसी भी कार्य में सफलता हेतु निशिथ काल: रात 11:57 से 12:52 तक तांत्रिक पूजा और विशेष जप हेतु  गोधूलि बेला: शाम 5:32 से 6:00 तक आरती और दीपदान हेतु  अशुभ मुहूर्त Inauspicious Timings: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल जैसे समय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने या नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए:राहुकाल: दोपहर 12:00 से 1:30 तक  गुलिक काल: सुबह 10:30 से 12:00 तक  यमगंड: सुबह 7:30 से 9:00 तक

    पुत्रदा एकादशी का महत्व और उपाय

    पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन दंपत्तियों के लिए फलदायी माना गया है जो संतान सुख की कामना रखते हैं। भगवान विष्णु के ‘नारायण’ स्वरूप की पूजा आज के दिन की जाती है।विशेष उपाय: आज बुधवार का दिन है इसलिए भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा का भी विधान है। आज ‘श्री गणेश अथर्वशीर्ष’ का पाठ करना अत्यंत लाभकारी रहेगा। यह उपाय न केवल विघ्नों को दूर करता है बल्कि साल के अंतिम दिन भविष्य के लिए मानसिक स्पष्टता और कार्यों में सफलता सुनिश्चित करता है।सावधानी: पंचांग की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनटों के अंतर पर आधारित हो सकती है।अतः किसी भी बड़े अनुष्ठान से पूर्व अपने स्थानीय पंडित या पंचांग का परामर्श अवश्य लें।
  • साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन

    साल के अंतिम मंगलवार पर सिद्धि योग का संयोग, ज्योतिषाचार्यों ने बताया आस्था और सकारात्मकता से जुड़ा विशेष दिन


    नई दिल्ली: साल 2025 का अंतिम मंगलवार 30 दिसंबर को पड़ रहा है और इस दिन सिद्धि योग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह योग देर रात लगभग 1 बजे तक प्रभावी रहेगा। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं में सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत, मंत्र जाप और साधना के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है। इसी कारण मंगलवार और सिद्धि योग के मेल को लेकर श्रद्धालुओं और ज्योतिष से जुड़े लोगों के बीच खास चर्चा देखने को मिल रही है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से होता है, जिसे साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कर्म का प्रतीक माना जाता है। जब इसी दिन सिद्धि योग का निर्माण होता है, तो इसे प्रयासों को सफलता की ओर ले जाने वाला संयोग कहा जाता है। यही वजह है कि इस दिन किए गए धार्मिक और आध्यात्मिक उपायों को जीवन के विभिन्न पहलुओं-जैसे करियर, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक संतुलन और संतान सुख-से जोड़कर देखा जाता है।धार्मिक परंपराओं में मंगलवार को भगवान हनुमान और भगवान विष्णु की उपासना का विशेष महत्व बताया गया है। कई ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि इस दिन विष्णु मंत्रों का जप, पूजा-अर्चना और दान करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। विशेष रूप से संतान से जुड़े विषयों को लेकर किए जाने वाले उपायों की चर्चा अधिक रहती है, जिनमें पूजा-पाठ, दान और प्रतीकात्मक धार्मिक अनुष्ठान शामिल हैं।

    आस्था रखने वाले लोगों का यह भी मानना है कि साल के अंतिम मंगलवार को किए गए उपायों का प्रभाव आने वाले वर्ष तक बना रह सकता है। इसी विश्वास के चलते लोग 2026 को बेहतर और शुभ बनाने की कामना के साथ इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई परिवारों में यह परंपरा भी है कि मंगलवार को जरूरतमंदों को वस्त्र, भोजन या दान दिया जाए, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहे।हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ऐसे उपाय आस्था और परंपरा से जुड़े विषय हैं। इन्हें किसी वैज्ञानिक, चिकित्सकीय या व्यावहारिक समाधान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। समाज के एक वर्ग का मानना है कि पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाती हैं, जिससे वह अपने लक्ष्य के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ता है।

    सिद्धि योग और मंगलवार के संयोग को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में विशेष चहल-पहल देखने को मिल सकती है। कई स्थानों पर सुंदरकांड पाठ, विष्णु सहस्रनाम और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से भीड़ प्रबंधन को लेकर सामान्य इंतजाम किए जाते हैं।कुल मिलाकर, साल के अंतिम मंगलवार और सिद्धि योग का यह संयोग आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। लोग इसे आत्मविश्वास बढ़ाने, मानसिक शांति पाने और नए वर्ष के लिए सकारात्मक शुरुआत के रूप में देख रहे हैं।

  • हिंदू पंचांग 2026: मकर संक्रांति से दिवाली तक, जानें सालभर के प्रमुख पर्व और व्रत

    हिंदू पंचांग 2026: मकर संक्रांति से दिवाली तक, जानें सालभर के प्रमुख पर्व और व्रत


    नई दिल्ली।साल 2026 की शुरुआत के साथ ही लोगों में व्रत और त्योहारों की तारीखों को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। हिंदू धर्म में व्रत और पर्व न केवल धार्मिक अनुष्ठानों का हिस्सा हैं, बल्कि ये सामाजिक और सांस्कृतिक एकता के प्रतीक भी माने जाते हैं। मकर संक्रांति, होली, दिवाली जैसी प्रमुख खुशियों से जुड़ी तिथियों का जानना इसलिए जरूरी होता है, ताकि पारिवारिक आयोजनों और धार्मिक अनुष्ठानों की योजना पहले से बनाई जा सके।हिंदू पंचांग के अनुसार अधिकांश त्योहार सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होते हैं। इसी वजह से हर साल इनकी तिथियों में बदलाव होता है।

    मकर संक्रांति 2026

    साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। मकर संक्रांति को विशेष रूप से दान-पुण्य और उत्सव के रूप में माना जाता है। इसी दिन पोंगल, उत्तरायण और षटतिला एकादशी भी पड़ रही हैं। यह पर्व किसानों और सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर होता है।

    होली 2026

    फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर मनाई जाने वाली होली इस साल 4 मार्च, बुधवार को है। होली से एक दिन पहले, 3 मार्च को होलिका दहन होगा। यह पर्व रंगों का उत्सव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। पूरे देश में इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर और मिठाई बांटकर भाईचारे और प्रेम का संदेश देते हैं।

    दिवाली 2026

    दीपों का त्योहार दिवाली इस साल 8 नवंबर को है। इसके अगले दिन 9 नवंबर को दिवाली अमावस्या पड़ रही है। दिवाली से जुड़ी अन्य प्रमुख तिथियां इस प्रकार हैं: 6 नवंबर – धनत्रयोदशी, 10 नवंबर – बलिपद्यमी। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत और घर में खुशहाली लाने का प्रतीक माना जाता है।

    नवरात्रि और राम नवमी

    चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। इसी दिन घटस्थापना, उगाड़ी और गुड़ी पड़वा भी मनाए जाएंगे। 26 मार्च को राम नवमी और 27 मार्च को नवरात्रि पारणा होगी। वहीं शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को दशहरा के साथ समाप्त होगी।

    महाशिवरात्रि और अन्य प्रमुख व्रत

    साल 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी। इसके अलावा पूरे साल नियमित रूप से एकादशी, प्रदोष व्रत, संकष्टी चतुर्थी और पूर्णिमा-अमावस्या पड़ेंगे। ये व्रत न केवल धार्मिक जीवन में महत्वपूर्ण हैं, बल्कि परिवार और समाज में पारंपरिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मददगार हैं।धार्मिक विशेषज्ञों के अनुसार व्रत और त्योहार हमारे जीवन में आस्था, अनुशासन और सामाजिक संबंधों को बनाए रखने का मार्ग दिखाते हैं। इसलिए साल 2026 की व्रत-त्योहार सूची हर परिवार के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
  • 2026 में सफलता और सम्मान के लिए अपनाएं चाणक्य के ये 5 व्यवहारिक सिद्धांत

    2026 में सफलता और सम्मान के लिए अपनाएं चाणक्य के ये 5 व्यवहारिक सिद्धांत


    नई दिल्ली।नया साल केवल तारीख बदलने का अवसर नहीं है बल्कि यह सोचने-समझने के तरीके और जीवन की दिशा को सुधारने का भी अवसर है। इतिहास और नीति-दर्शन में ऐसे कई व्यवहारिक सूत्र मिलते हैं जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। चाणक्य के सिद्धांतों को अपनाने से 2026 में न सिर्फ व्यक्तिगत सफलता बल्कि सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा भी बढ़ाई जा सकती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि पांच मुख्य व्यवहारिक बिंदु इस लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
    1. आत्मसम्मान को प्राथमिकता दें
    व्यक्ति की पहचान और सामाजिक सम्मान उसके आत्मसम्मान से बनती है। आत्मसम्मान का मतलब अहंकार नहीं बल्कि अपने मूल्यों सीमाओं और योग्यताओं को समझना है। जो व्यक्ति अपने निर्णयों में ईमानदार होता है और खुद को कमतर नहीं आंकता वह समाज में गंभीरता से लिया जाता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आत्मसम्मान को बनाए रखना जीवन में स्थायी सफलता की नींव रखता है।

    2. विरोध और प्रतिस्पर्धा को हल्के में न लें
    जीवन में चुनौतियां और प्रतिस्पर्धा स्वाभाविक हैं। कार्यस्थल व्यवसाय या सामाजिक क्षेत्र-हर जगह प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इसे हल्के में लेने से नुकसान हो सकता है। चाणक्य के अनुसार हर चुनौती को पूरी तैयारी और गंभीरता से लेना व्यक्ति की दक्षता और अनुभव को बढ़ाता है। इससे जोखिम कम होता है और कौशल विकसित होते हैं।

    3. सही संगति का चुनाव करें

    इंसान की पहचान उसकी संगति से बनती है। जिन लोगों के साथ समय बिताया जाता है उनका प्रभाव विचारों व्यवहार और निर्णयों पर पड़ता है। सकारात्मक सोच वाले अनुशासित और ईमानदार लोगों के साथ रहने से व्यक्तित्व मजबूत होता है। इसके विपरीत गलत संगति न केवल छवि खराब करती है बल्कि भविष्य की संभावनाओं को भी कमजोर कर देती है।

    4. लक्ष्य तय करें और उस पर टिके रहें
    स्पष्ट लक्ष्य व्यक्ति को दिशा और फोकस देते हैं। लक्ष्य तय करने से कठिन समय में भी प्रेरणा मिलती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 2026 के लिए छोटे और बड़े दोनों प्रकार के लक्ष्य तय करें। परिस्थितियां बदलने पर रणनीति में बदलाव संभव है लेकिन मूल उद्देश्य से भटकना नुकसानदेह हो सकता है।

    5. ज्ञान को निरंतर बढ़ाते रहें


    ज्ञान ऐसा निवेश है जो कभी व्यर्थ नहीं जाता। नया कौशल सीखना नई जानकारी प्राप्त करना और अनुभव बढ़ाना व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाता है। निरंतर सीखना न केवल पेशेवर सफलता दिलाता है बल्कि समाज में भरोसा और सम्मान भी बढ़ाता है।विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पढ़ने या जानने तक ही सीमित रहने से परिवर्तन नहीं आता। इन सिद्धांतों को रोजमर्रा के व्यवहार में अपनाना जरूरी है। संतुलित सोच सही निर्णय और निरंतर सीखने की आदत-यही वे आधार हैं जिन पर 2026 में सफलता और सामाजिक प्रतिष्ठा की मजबूत इमारत खड़ी की जा सकती है।चाणक्य के ये पांच व्यवहारिक सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत विकास में मदद करेंगे बल्कि सामाजिक और पेशेवर जीवन में सम्मान बढ़ाने का मार्ग भी दिखाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि नए साल में इन्हें अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में स्थायित्व सफलता और संतुलन ला सकता है।

  • सोमवार व्रत: राशि अनुसार शिव पूजा से बढ़ती है विशेष कृपा, जानें कौन-सा उपाय किसके लिए लाभकारी

    सोमवार व्रत: राशि अनुसार शिव पूजा से बढ़ती है विशेष कृपा, जानें कौन-सा उपाय किसके लिए लाभकारी


    नई दिल्ली।सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया व्रत, अभिषेक और पूजा विशेष फल देती है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि यदि शिव पूजा राशि के अनुसार की जाए तो इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। सोमवार का दिन चंद्रमा से भी जुड़ा है, जिससे यह दिन भावनाओं, मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। यही कारण है कि कई लोग सोमवार व्रत को मनोकामना पूर्ति, शांति और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखते हैं।

    राशि अनुसार पूजा का महत्व
    ज्योतिष के अनुसार हर राशि पर अलग ग्रहों का प्रभाव होता है। जब पूजा सामग्री और मंत्र राशि के अनुरूप होते हैं, तो साधक का ध्यान केंद्रित रहता है और पूजा अधिक प्रभावी मानी जाती है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विशेष रूप से मेष, कर्क, सिंह, कन्या, मकर, कुंभ और मीन राशि के जातकों के लिए सोमवार व्रत अत्यंत फलदायी होता है।

    मेष से मिथुन राशि के उपाय

    मेष राशि: शिवलिंग पर जल में गुड़ या शहद मिलाकर अभिषेक करना शुभ माना जाता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और रुके कार्यों में गति आती है।

    वृषभ राशि: दूध, दही या चंदन से अभिषेक करना लाभकारी है। इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और पारिवारिक जीवन में संतुलन आता है।

    मिथुन राशि: गंगाजल में दूर्वा मिलाकर अभिषेक करने से मानसिक तनाव में कमी आती है और वाणी में मधुरता बढ़ती है।

    कर्क से कन्या राशि के उपाय
    कर्क राशि: दूध या घी से अभिषेक और  ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप मन को शांति देता है।

    सिंह राशि: गुड़ या शहद मिले जल से अभिषेक और दीपक जलाना मान-सम्मान और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है।

    कन्या राशि: गन्ने के रस या भांग के पत्तों से अभिषेक करना कार्यक्षेत्र में सफलता दिलाने वाला माना जाता है।

    तुला से मीन राशि के उपाय
    तुला राशि: इत्र मिले जल या शुद्ध घी से पूजा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।

    वृश्चिक राशि: सुगंधित दूध या गंगाजल से अभिषेक आत्मबल बढ़ाता है।

    धनु राशि: केसर युक्त दूध से अभिषेक करने से भाग्य पक्ष मजबूत होता है।

    मकर राशि: काले तिल मिले जल से अभिषेक और दान करने से शनि संबंधी बाधाओं में राहत मिलती है।

    कुंभ राशि: सफेद तिल या गन्ने के रस से शिव पूजन लाभकारी है।

    मीन राशि: दूध और भांग के पत्तों से अभिषेक शुभ माना जाता है।

    ध्यान रखने योग्य बातें
    धार्मिक जानकारों का कहना है कि पूजा और व्रत में श्रद्धा, संयम और नियमितता सबसे जरूरी हैं। किसी भी उपाय को अपनाने से पहले अपनी राशि, ग्रह स्थिति और आस्था के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।विशेषज्ञों का मानना है कि राशि अनुसार सोमवार व्रत और शिव पूजन करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में स्थिरता, सफलता और सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है। पूजा के साथ संयमित आहार और ध्यान का पालन करने से लाभ और अधिक बढ़ जाता है।सोमवार व्रत को नियमित रूप से करने से मानसिक संतुलन, पारिवारिक सुख और आर्थिक प्रगति में सहायक सिद्ध होता है। इसके अलावा, यह उपाय जीवन में अनुशासन और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करता है।