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  • बुध गोचर 2025: बुध ग्रह 29 दिसंबर को करेंगे धनु राशि में प्रवेश बनेगा बुधादित्य योग..

    बुध गोचर 2025: बुध ग्रह 29 दिसंबर को करेंगे धनु राशि में प्रवेश बनेगा बुधादित्य योग..


    ग्वालियर। वर्ष 2025 के अंतिम गोचर की घड़ी नजदीक आ रही है और इस बार बुध ग्रह 29 दिसंबर को धनु राशि में प्रवेश करने वाले हैं। बुध ग्रह का यह गोचर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बुधादित्य योग का निर्माण करेगा जो कई राशियों के लिए लाभकारी साबित होगा। बुध ग्रह को ग्रहों का राजकुमार कहा जाता है और इसका प्रभाव बुद्धि निर्णय क्षमता व्यापार और नौकरी पर गहरा असर डालता है।

    बुध ग्रह और उसका महत्व


    बुध ग्रह सौरमंडल का सबसे छोटा ग्रह है और सूर्य के सबसे करीब रहने वाला ग्रह है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुध का प्रभाव हमारे विचार संवाद व्यापार और निर्णय क्षमता पर पड़ता है। जब बुध अपनी वक्री गति में होता है या किसी विशेष राशि में प्रवेश करता है तो इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है। बुध का गोचर जीवन में नए अवसर ज्ञान और फैसले लेने की क्षमता में सुधार ला सकता है।इस बार बुध 29 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर गुरु की राशि धनु में प्रवेश करेंगे। धनु राशि एक अग्नि तत्व की राशि है जो ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरी होती है। बुध का इस राशि में प्रवेश बुधादित्य योग का निर्माण करेगा जो विशेष रूप से मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए शुभ रहेगा।

    बुधादित्य योग का प्रभाव
    बुधादित्य योग तब बनता है जब बुध और सूर्य एक ही राशि में होते हैं। इस योग के प्रभाव से बुध के सभी सकारात्मक गुण जैसे बुद्धिमत्ता व्यापारिक निर्णय की क्षमता संचार कौशल में वृद्धि होती है। इस योग के प्रभाव से विशेष रूप से मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों को नए अवसर और सफलता मिलने के योग हैं।

    राशियों पर प्रभाव

    मेष राशि:
    बुध का गोचर मेष राशि के जातकों के लिए शुभ साबित हो सकता है। यह समय आपकी सोच और निर्णय क्षमता को तेज़ करेगा जिससे कार्य में सफलता मिल सकती है। विशेष रूप से करियर और नौकरी के मामले में आप बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

    सिंह राशि:
    सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर लाभकारी रहेगा। बुधादित्य योग उनके लिए व्यवसाय और व्यापार में अच्छे अवसर लेकर आएगा। साथ ही यह समय शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में भी उन्नति का है।

    धनु राशि:
    धनु राशि के जातकों के लिए यह गोचर अपने आप में खास होगा क्योंकि बुध इसी राशि में प्रवेश कर रहे हैं। यह समय आपके जीवन में स्थिरता और सफलता का संकेत दे रहा है। करियर के लिहाज से यह समय अनुकूल रहेगा और आपको हर क्षेत्र में उन्नति के अवसर मिलेंगे।

    कुंभ राशि:
    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी बुध का गोचर एक सकारात्मक प्रभाव डालेगा। आपकी सोच में स्पष्टता आएगी और जो भी निर्णय आप लेंगे वे सही साबित होंगे। इसके अलावा यह समय आपके व्यक्तिगत जीवन में भी खुशी और संतुलन लाने वाला है।

    ज्योतिषाचार्य का परामर्श


    ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि बुध का गोचर सभी राशियों पर असर डालता है लेकिन मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय खास रूप से लाभकारी रहेगा। बुध के इस गोचर के दौरान यदि कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना है या नए व्यापार की शुरुआत करनी है तो यह समय शुभ रहेगा।

    इसके अलावा जो लोग शिक्षा और मानसिक विकास के क्षेत्र में प्रयासरत हैं उनके लिए भी यह समय अनुकूल होगा। बुध के इस गोचर के दौरान कुछ उपाय जैसे हरे रंग की वस्तुएं धारण करना या बुध ग्रह को प्रसन्न करने के लिए बुद्धि वर्धक मंत्रों का जाप करना फायदेमंद साबित हो सकता है।
    2025 के अंत में बुध ग्रह का गोचर न केवल ज्योतिषीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि यह विभिन्न राशियों के लिए नई संभावनाओं और अवसरों का संकेत भी है। मेष सिंह धनु और कुंभ राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से शुभ रहेगा। इस दौरान बुधादित्य योग से उन्हें न केवल मानसिक शांति मिलेगी बल्कि जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

  • दादी नानी के बाल धोने से जुड़ी पुरानी मान्यताएँ क्यों थे यह नियम आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण

    दादी नानी के बाल धोने से जुड़ी पुरानी मान्यताएँ क्यों थे यह नियम आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण


    नई दिल्ली । आजकल के समय में लोग अपने दैनिक जीवन में सुविधाजनक तरीके से जब चाहें बाल धोने की आदत बना चुके हैं लेकिन पुराने समय में दादी-नानी हमें कुछ खास दिन और समय पर बाल धोने से मना करती थीं। शुरू में यह बातें अंधविश्वास जैसी लग सकती थीं लेकिन इन नियमों के पीछे हमारी पुरानी सभ्यताओं की गहरी समझ और जीवन विज्ञान का संबंध था। इस रिपोर्ट में हम जानेंगे कि हमारे पूर्वजों ने बाल धोने के लिए ये कठोर नियम क्यों बनाए थे।

    प्राचीन सभ्यताओं में बाल धोने का कार्य केवल स्वच्छता से जुड़ा नहीं था बल्कि इसे आध्यात्मिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से भी देखा जाता था। मिस्र भारत और अन्य सभ्यताओं में बाल धोने के पीछे एक गहरी सोच और सिद्धांत था। उदाहरण के लिए हमारे पूर्वजों का मानना था कि बालों के साथ शरीर की ऊर्जा भी जुड़ी होती है और खास दिन जैसे पूर्णिमा अमावस्या या शनिवार को बाल धोने से शरीर की ऊर्जा में असंतुलन हो सकता है। इन दिनो को शुद्धता और मानसिक संतुलन के लिए अवकाश के रूप में देखा जाता था और इन दिनों को शरीर की ऊर्जा को पुनः संतुलित करने के लिए उपयोग किया जाता था।

    बाल धोने को लेकर धार्मिक दृष्टिकोण भी काफी महत्वपूर्ण था। हिन्दू धर्म में शास्त्रों में बताया गया है कि विशेष अवसरों पर बाल धोने से पुण्य मिलता है। इसके अलावा बाल धोते वक्त शरीर और मस्तिष्क की शुद्धि के साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा से बचने का भी ध्यान रखा जाता था। कई बार पुराने जमाने में बाल धोने को एक मानसिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाता था जिसे आंतरिक शांति और संतुलन प्राप्त करने के लिए अपनाया जाता था।

    मिस्र में भी बाल धोने के दौरान रचनात्मक और आध्यात्मिक विचारों का एक मिश्रण था। वहाँ के लोग मानते थे कि बालों में शरीर की पवित्रता और आत्मा की शक्ति को भी संजोया जाता है और इसलिए विशेष अवसरों पर बाल धोने से आत्मा की शुद्धि होती थी। इस तरह से बाल धोने को एक आध्यात्मिक अनुष्ठान समझा जाता था न कि केवल स्वच्छता का एक साधारण काम।

    यद्यपि आज के समय में इन नियमों को तर्कहीन या अंधविश्वास समझा जाता है फिर भी ये हमारे पूर्वजों की जीवन के साथ जुड़ी गहरी समझ और उनके ज्ञान का प्रतीक हैं। अब जबकि हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बहुत सी चीजों को समझने लगे हैं फिर भी हमें इन पारंपरिक मान्यताओं को सम्मान के साथ देखना चाहिए क्योंकि ये शारीरिक और मानसिक संतुलन के लिए एक रचनात्मक पहलू को प्रस्तुत करती हैं।

  • 14 जनवरी 2026मकर संक्रांति के साथ कई बड़े त्योहारों का महासंयोग जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

    14 जनवरी 2026मकर संक्रांति के साथ कई बड़े त्योहारों का महासंयोग जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली । 14 जनवरी 2026मकर संक्रांति और अन्य प्रमुख त्योहारों का महासंयोग 14 जनवरी 2026 एक विशेष दिन साबित होने वाला है क्योंकि इस दिन न केवल मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण व्रत और पर्व भी एक साथ पड़ रहे हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्व रखता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और साथ ही षटतिला एकादशी पोंगल और माघ बिहू जैसे प्रमुख त्योहारों का संगम भी होगा।

    मकर संक्रांति का महत्व और शुभ मुहूर्त

    मकर संक्रांति का पर्व खासतौर पर सूर्य देव की पूजा दान और पुण्य के लिए प्रसिद्ध है। 14 जनवरी 2026 को सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और यह दिन विशेष रूप से स्नान दान और पूजा के लिए उत्तम रहेगा। दान और पुण्य का समयदोपहर 0307 बजे से शाम 0602 बजे तक रहेगा।
    शुभ कार्यइस अवधि में तिल गुड़ अन्न और वस्त्र दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके अलावा मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करना तिल और गुड़ का दान करना तथा पितरों के लिए तर्पण करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

    षटतिला एकादशी

    माघ माह के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी 14 जनवरी को पड़ रही है जो भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन विशेष रूप से तिल का सेवन और तिल से संबंधित धार्मिक कार्य जैसे तिल का उबटन स्नान हवन और दान का महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और यह संयोग मकर संक्रांति के साथ बहुत लाभकारी माना जाता है।

    पोंगल और माघ बिहू

    14 जनवरी से पोंगल और माघ बिहू जैसे कृषि पर्वों का भी आरंभ होगा। ये पर्व भारत के विभिन्न हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। पोंगल तमिलनाडु यह चार दिनों तक चलने वाला एक प्रमुख कृषि पर्व है जिसमें सूर्य देव और इंद्र देव की पूजा की जाती है।माघ बिहू असम असम में यह पर्व अग्नि देव की पूजा और नई फसल के स्वागत के रूप में मनाया जाता है।

    इस महासंयोग पर क्या करें

    इस दिन के धार्मिक महत्व को देखते हुए इन कार्यों को करना विशेष लाभकारी माना जाता हैमहा-दानतिल गुड़ खिचड़ी अन्न और गर्म कपड़ों का दान करें। यह आपके पुण्य को बढ़ाता है और पुराने पापों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।पवित्र स्नान गंगा या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि संभव न हो तो घर में गंगाजल और तिल डालकर स्नान करें। तर्पणपितरों की शांति के लिए तिल से तर्पण करना भी अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। यह आपके परिवार के लिए आशीर्वाद का कारण बनता है।

  • साल का आखिरी शनिवार विशेष संयोग लेकर आया, छोटे उपायों से खुल सकते हैं सौभाग्य के द्वार

    साल का आखिरी शनिवार विशेष संयोग लेकर आया, छोटे उपायों से खुल सकते हैं सौभाग्य के द्वार


    नई दिल्ली।साल का आखिरी शनिवार ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, लेकिन जब यह दिन शनि से जुड़े उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव में आए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। 27 दिसंबर का यह शनिवार आत्मसंयम, कर्म और धैर्य से जुड़े कार्यों में सफलता की संभावनाओं को मजबूत करता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र स्थिरता, गहराई और दीर्घकालिक लाभ देने वाला माना जाता है। ऐसे में इस दिन किए गए सरल उपाय आने वाले समय में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
    शनिवार को कर्मफल से जुड़ा दिन माना जाता है। यह दिन हमें यह सिखाता है कि जल्दबाजी नहीं, बल्कि अनुशासन और निरंतर प्रयास से ही स्थायी परिणाम मिलते हैं। जब यही दिन शनि से जुड़े नक्षत्र में आता है, तो व्यक्ति के प्रयासों में मजबूती आती है और रुकी हुई परिस्थितियों में गति आने लगती है।

    आर्थिक स्थिरता के लिए उपाय

    धन संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोग शनिवार को साफ मन और शांत भाव से एक छोटा सा उपाय कर सकते हैं। एक सिक्के पर तेल की हल्की मात्रा लगाकर उसे किसी मंदिर या शांत स्थान पर अर्पित करना और मन में स्थिर आय की कामना करना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय धन के प्रति दृष्टिकोण को संतुलित करने में मदद करता है।

    तनाव और विरोध से राहत

    अगर जीवन में अनावश्यक विरोध, ईर्ष्या या मानसिक दबाव महसूस हो रहा है, तो शनिवार को किसी भारी वस्तु जैसे पत्थर के माध्यम से नकारात्मक विचारों को त्यागने का अभ्यास करें। यह प्रतीकात्मक क्रिया मानसिक बोझ कम करने में सहायक होती है।

    करियर और शिक्षा में बाधा

    जो लोग पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा या करियर से जुड़े निर्णयों में अटकाव महसूस कर रहे हैं, उनके लिए शनिवार को मंत्र या सकारात्मक शब्दों का जप फायदेमंद माना जाता है। सीमित संख्या में किया गया जप मन को केंद्रित करता है और निर्णय क्षमता को मजबूत बनाता है।

    व्यापार और कार्यक्षेत्र

    यदि नए कार्य या व्यापार में बार-बार रुकावट आ रही है, तो शनिवार को किसी पौधे या वृक्ष के पास समय बिताना उपयोगी होता है। यह प्रकृति के साथ जुड़ाव निर्णयों में स्थिरता और धैर्य लाने का प्रतीक माना जाता है।

    पारिवारिक और संपत्ति से जुड़े मामलों में

    जमीन-जायदाद या पारिवारिक विवादों से परेशान लोग शनिवार को दीपक जलाकर संयम और समाधान की भावना रख सकते हैं। यह उपाय मन को आक्रोश से दूर कर संवाद की दिशा में मदद करता है।
    न्याय और अटके कार्य
    लंबे समय से रुके सरकारी या कानूनी कामों के लिए शनिवार को दिशा विशेष की ओर मुख करके प्रार्थना या पाठ करना लाभकारी माना जाता है। यह अभ्यास आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ाने में सहायक है।

    वैवाहिक और व्यक्तिगत जीवन में संतुलन

    यदि रिश्तों में तनाव या भावनात्मक दूरी महसूस हो रही है, तो शनिवार को पुराने नकारात्मक भावों को त्यागने का संकल्प लें। प्रतीकात्मक रूप से किसी पुरानी वस्तु का त्याग करना मानसिक बोझ कम करने में मदद करता है और संबंधों में सामंजस्य लाता है।इस तरह का संयोग जीवन में स्थिरता, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा लाने में महत्वपूर्ण माना जाता है। छोटे लेकिन प्रभावशाली उपाय अपनाकर इस दिन के लाभ को बढ़ाया जा सकता है और आने वाले वर्ष के लिए सफलता और संतुलन की राह आसान हो सकती है।
  • शनिवार पूजा शनि देव की टेढ़ी दृष्टि से बचने के लिए अपनाएं यह नियम

    शनिवार पूजा शनि देव की टेढ़ी दृष्टि से बचने के लिए अपनाएं यह नियम


    नई दिल्ली । शनिवार पूजा शनि की टेढ़ी दृष्टि से बचने के नियम धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव की दृष्टि काफी महत्वपूर्ण होती है. शनि संतुलन और न्याय का ग्रह है. ऐसे में अक्सर शनि की शक्ति को ना पहचानने वाले लोग शनि देव की टेढ़ी दृष्टि का शिकार हो जाते हैं.कहा जाता है कि शनि देव की टेढ़ी नजर उन लोगों पर पड़ती है जो बुरे कर्मों से लिपटे रहते हैं चाहे वो काम जाने-अनजाने ही क्यों ना हुई हो. ऐसे में आइए जानते हैं
    शनि देव की टेढ़ी दृष्टि से बचने के नियम
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    शनिवार के दिन गलती से भी तामसिक भोजन ना करें. खासतौर पर इस दिन मदिरापान और नशीली चीजों से परहेज करें. जीवन में ईमानदार बनें सत्य बोलें और बड़े बुजुर्गों को सम्मान दें. इसके अलावा शनि देव को प्रसन्न करने के लिए किसी भी तरह का गलत कार्य नहीं करना चाहिए. क्योंकि बुरे कर्मों पर शनि कंगाल बना देंगे.
    मान्यता है कि अगर आप शनि देव कृपा की पाना चाहते हैं तो उनकी आराधना शाम के समय करें क्योंकि शाम के वक्त शनि देव की पूजा ज्यादा फलदायी मानी जाती है. शनिवार के दिन शाम को सरसों के तेल का दीपक पीपल के नीचे जलाएं और 7 बार उसकी परिक्रमा करें.
    खासतौर पर इस दिन शनि चालीसा पाठ करें और शनि देव के मूल मंत्र ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप करें. आरती के साथ पूजा का समापन करें. मान्यता है कि 7 शनिवार ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं साथ ही उनकी टेढ़ी दृष्टि भी कभी नहीं पड़ती है.

  • शुजालपुर में बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन ने दिलाया स्कूल बैगपुलिस ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला

    शुजालपुर में बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन ने दिलाया स्कूल बैगपुलिस ने 24 घंटे में ढूंढ निकाला


    इंदौर। मध्यप्रदेश के शुजालपुर में एक तीसरी कक्षा की छात्रा की मासूम जिद और पढ़ाई के प्रति गहरी लगन ने पुलिस को भी भावुक कर दिया। मामला शुजालपुर मंडी थाना क्षेत्र का हैजहां सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ाई करने वाली चेरी नायक का स्कूल बैग ऑटो में छूट गया। बैग में उसकी किताबें और वर्कबुक थींजिन्हें लेकर बच्ची बेहद चिंतित थी।

    गुरुवार को चेरी अपनी मां पूजादादी कृष्णा और बुआ रंजना के साथ स्कूल गई थी। घर लौटते समय उसका स्कूल बैग ऑटो में ही छूट गयाऔर जब वह घर पहुंची तो बैग नहीं मिला। यह देखकर चेरी फूट-फूटकर रोने लगीक्योंकि उसे इस बात की चिंता थी कि उसकी सारी किताबें और वर्कबुक उसी बैग में थीं।

    बच्ची की जिद ने पुलिस को प्रेरित किया

    परिवार ने चेरी को नया बैग और किताबें दिलाने का भरोसा दियालेकिन चेरी नहीं मानी। उसने कहा कि उसे वही बैग चाहिए और इसके लिए पुलिस से मदद लेनी होगी। उसकी यह मासूम जिद और पढ़ाई के प्रति प्यार ने उसके पिता संदीप नायक और दादा अशोक नायक को भी प्रेरित कियाऔर वे उसे शुजालपुर मंडी थाने ले गए।

    चेरी ने थाने में जाकर एसडीओपी निमिष देशमुख को अपनी परेशानी बताई। उसकी आंखों में आंसू देखकर एसडीओपी ने तुरंत कार्रवाई का आदेश दिया और बैग ढूंढने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    सीसीटीवी और ऑटो चालक से मिली मदद

    पुलिस ने शहर भर के सीसीटीवी कैमरे खंगालने की प्रक्रिया शुरू की। सीसीटीवी फुटेज में चेरी एक ऑटो में बैठी दिखीलेकिन समस्या यह थी कि ऑटो की नंबर प्लेट नहीं थी। हालांकिपुलिस ने हार नहीं मानी और ऑटो पर लिखे नाम और उसके डिजाइन के आधार पर तलाश जारी रखी।

    कुछ पूछताछ और जांच के बाद पुलिस ने ऑटो चालक परवेज की पहचान की और उससे संपर्क किया। परवेज ने बताया कि उसे ऑटो में एक स्कूल बैग मिला थाजिसे वह सुरक्षित घर ले गया था। पुलिस ने परवेज से संपर्क किया और अगले दिन शुक्रवार सुबह वह बैग लेकर थाने पहुंचा।

    बच्ची की खुशी और पुलिस की मदद

    जब बैग पुलिस थाने में पहुंचातो चेरी को बुलाया गया। चेरी ने बैग देखकर खुशी से पुलिस को थैंक यू कहा। उसकी मुस्कान देखकर पुलिस टीम को भी संतोष मिला। बैग के मिलने से बच्ची के चेहरे पर चमक आ गईऔर उसकी पढ़ाई में रुकावट नहीं आई।

    पुलिस ने दी सीख

    एसडीओपी निमिष देशमुख ने बताया कि बच्ची की पढ़ाई के प्रति लगन देखकर पूरी पुलिस टीम ने इस काम में बेहद मेहनत की। उन्होंने आगे कहा कि यह घटना समाज के लिए एक संदेश है कि हमें अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से लेना चाहिएचाहे वह किसी छोटी बच्ची की पढ़ाई के प्रति हो या किसी अन्य समाजिक काम में। साथ हीपुलिस ने ऑटो चालक परवेज को समझाइश दी कि यदि भविष्य में किसी को कोई सामान मिले तो वह उसे पुलिस के पास सौंपे।

  • पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर जरूर करें ये काम जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि

    पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर जरूर करें ये काम जीवन में बनी रहेगी सुख-समृद्धि


    नई दिल्ली । पुत्रदा एकादशी 2025 प्रत्येक महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष को एकादशी का व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती। इस व्रत करने से व्यक्ति के घर में सदैव मां लक्ष्मी का वास रहता है और उनके घर में सदैव धन समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। साल 2025 की आखिरी एकादशी का व्रत 30 दिसंबर को रखा जाएगा। तो आइए जानते हैं कि साल की आखिरी एकादशी के दिन क्या-क्या करना चाहिए। साथ ही जानेंगे कि इस दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
    पुत्रदा एकादशी 2025
    पुत्रदा एकादशी का व्रत साल में दो बार रखा जाता है एक सावन मास में दूसरा पौष माह में। पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत 30 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा। पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से संतान को लंबी तरक्की और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है। वहीं जिन दंपतियों की कोई संतान नहीं है उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत जरूर करना चाहिए। इस व्रत के प्रभाव से उनके घर जल्द ही किलकारी की गूंज सुनाई देगी।

    पुत्रदा एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त

    पौत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 30 दिसंबर को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि का समापन 31 दिसंबर को सुबह 5 बजे होगा। पुत्रदा एकादशी का पारण का 31 दिसंबर को किया जाएगा। पारण के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 26 मिनट से दोपहर 3 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।

    साल की अंतिम एकादशी के दिन करें ये काम

    एकादशी के दिन पीपल पेड़ के नीचे तेल का दीया जलाएं और ऊँ नमो नारायणाय नमः मंत्र का जाप करें। ऐसा करने से जीवन में समृद्धि और खुशहाली आती है।  एकादशी के दिन भगवान विष्णु को केले का भोग लगाएं और घी वाली रोटी पर गुड़ रखकर गाय को खिला दें। एकादशी के दिन ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। इस उपाय को करने से तरक्की और व्यापार में मुनाफा मिलता है। साथ ही हर तरह की बाधाएं भी दूर हो जाती हैंएकादशी के दिन शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाएं। ऐसा करने से आपके धन-संपत्ति में बरकत होती है।

  • लाभ दृष्टि योग 2026: 15 जनवरी को विशेष योग, इन राशियों को मिलेगा लाभ

    लाभ दृष्टि योग 2026: 15 जनवरी को विशेष योग, इन राशियों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली: ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, साल 2026 का पहला महीना विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहेगा। 15 जनवरी 2026 को शुक्र और शनि की दृष्टि से लाभ दृष्टि योग बनेगा। इस योग का असर सभी राशियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह योग आर्थिक, करियर और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब गुरु, शुक्र, बुध या चंद्रमा जैसे शुभ ग्रह किसी भाव पर अनुकूल दृष्टि डालते हैं, तो इसे लाभ दृष्टि योग कहा जाता है।

    राशियों पर असर:

    वृषभ: इस योग के प्रभाव से वृषभ राशि वालों को कमाई के नए रास्ते मिल सकते हैं। नौकरी में तारीफ, वेतन वृद्धि या नया ऑफर मिलने की संभावना है। व्यापार में अटके हुए पैसे भी वापस आ सकते हैं।

    मिथुन: मिथुन राशि के लिए यह योग आर्थिक मजबूती और निवेश से लाभ का संकेत देता है। परिवार का सहयोग बढ़ेगा और सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी बढ़ोतरी, बोनस या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

    तुला: तुला राशि वालों को काम और नेटवर्किंग से फायदा मिलने की संभावना है। दोस्तों और संपर्कों की मदद से बड़ा अवसर मिल सकता है। मीडिया, सेल्स और व्यापार से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल रहेगा।

    मकर: मकर राशि के लिए यह योग करियर ग्रोथ का संकेत देता है। मेहनत का फल मिलेगा। प्रमोशन या जिम्मेदारी बढ़ सकती है। आय स्थिर रहेगी और खर्चों पर नियंत्रण रहेगा।

    कुंभ: कुंभ राशि वालों के लिए यह योग भाग्य को मजबूत करेगा। धन लाभ, नई योजनाओं की शुरुआत और धार्मिक व शैक्षणिक कार्यों में सफलता मिलने के संकेत हैं। पुराने निवेश, शेयर या किसी योजना से फायदा मिल सकता है। दोस्तों और बड़े भाई-बहनों का सहयोग काम को आसान बनाएगा।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लाभ दृष्टि योग का असर सही समय पर किए गए निर्णय, मेहनत और नेटवर्किंग पर निर्भर करेगा, और यह योग आर्थिक और करियर संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकता है।

  • पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर विष्णु जी को कैसे करें प्रसन्न जानें 5 सरल उपाय

    पुत्रदा एकादशी 2025 साल की आखिरी एकादशी पर विष्णु जी को कैसे करें प्रसन्न जानें 5 सरल उपाय


    नई दिल्ली । पुत्रदा एकादशी 2025 हिंदू धर्म में सभी तिथियों का विशेष महत्व माना गया है। हालांकि इनमें प्रत्येक महीने की ग्यारहवीं तिथि अधिक महत्वपूर्ण होती हैं। मान्यता है कि इस दिन एकादशी व्रत किया जाता है जो सृष्टि के पालनहार विष्णु जी को समर्पित है। इस दिन उनकी पूजा-अर्चना दान-दक्षिणा या भजन-कीर्तन जैसे शुभ कार्य करने से प्रभु शीघ्र प्रसन्न होते हैं। इसके प्रभाव से घर से लेकर साधक के निजी जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं यही नहीं धन की माता लक्ष्मी जी भी अपनी असीम कृपा बरसाती हैं।
    वर्तमान में पौष महीना जारी है और इस माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर पुत्रदा एकादशी मनाई जाती है। इस वर्ष 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह साल 2025 की आखिरी एकादशी होगी। ऐसे में इस दिन कुछ सरल उपाय करने से प्रभु प्रसन्न हो सकते हैं। साथ ही कार्यों में आ रही रुकावटें विवाह मार्ग बाधाएं और करियर में अच्छे रिजल्ट मिल सकते हैं। ऐसे में आइए इन उपायों को जानते हैं।

    पुत्रदा एकादशी 2025

    इस वर्ष पौष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 30 दिसंबर 2025 को सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन अगले दिन 31 दिसंबर की सुबह 5 बजे होगा। इसलिए 30 दिसंबर 2025 को पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पुत्रदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें। यह सरल उपाय करियर में तरक्की प्रमोशन के योग और व्यापार विस्तार की बाधाओं को दूर करता है। साथ ही मानसिक शांति भी बनी रहती हैं।

    पुत्रदा एकादशी के दिन आप पान के पत्ते पर ‘ॐ विष्णवे नमः’ लिखकर विष्णु जी के चरणों में चढ़ाएं। यह शुभ होता है। मान्यता है कि इस सरल उपाय से प्रभु प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पूजा के बाद इस पत्ते को आप अपनी तिजोरी में रख लें। इससे आर्थिक उन्नति भी होती हैं।एकादशी के दिन विष्णु जी को केले का भोग लगाएं। इसके बाद गाय को घी चुपड़ी हुई रोटी पर गुड़ रखकर खिला दें। मान्यता है कि यह सरल उपाय संतान के जीवन में सुख-समृद्धि से लेकर उनकी खुशियों में वृद्धि करता है।

    पुत्रदा एकादशी पर आप तीन तुलसी के पत्ते पर 11 बार श्री का जाप करके भगवान विष्णु को अर्पित करें। इस इसके बाद शाम को तुलसी के पास दीपक जलाकर उनकी पूजा भी करें। यह सरल उपाय बरकत के योग का निर्माण करता है एकादशी पर आप पीपल के पेड़ के नीचे तेल का एक दीपक जलाएं। इसके बाद पूजा करते हुए आप ऊँ नमो नारायणाय नमः मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु की कृपा मिलती हैं। साथ ही व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त- सुबह में 5:24 से 06:19
    प्रातः सन्ध्या- सुबह में 5:51 से 07:13
    अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:3 से 12:44
    विजय मुहूर्त- दोपहर में 2:07 से 02:49
    निशिता मुहूर्त- रात 11:57 से सुबह 12:51

  • विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    विघ्नेश्वर चतुर्थी 2025: गणेश जी के मंत्र पूजा विधि और शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली । आज 24 दिसंबर को विघ्नेश्वर चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है जो विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा से जुड़ा हुआ है। यह पर्व पौष माह की विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है और इसे विघ्नेश्वर चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सारे विघ्न दूर होते हैं और समृद्धि सफलता और सिद्धि की प्राप्ति होती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का शुभ मुहूर्त चतुर्थी मध्याह्न पूजा मुहूर्त

    सुबह 11:19 बजे से दोपहर 1:11 बजे तक वर्जित चंद्रोदय काल सुबह 10:16 बजे से रात 9:26 बजे तक इस दौरान चंद्र दर्शन न करें

    गणेश जी की पूजा विधि

    ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। पूजा की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करके पंचामृत से भगवान गणेश का अभिषेक करें। इसके बाद वस्त्र जनेऊ चंदन दूर्वा फूल धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक गुड़ या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करें।

    गणेश जी के मंत्र:
    ॐ गण गणपतये नमः कम से कम 108 बार जाप करें श्री गणेशाय नम: ऊं गं गणपतये नमः वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥

    गणेश गायत्री मंत्र:

    ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभः। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
    गणेश जी की आरती
    जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।
    एक दंत दयावंत चार भुजा धारी माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी। यह आरती भगवान गणेश के गुणों और उनकी कृपा के बारे में है जो भक्तों के जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाती है।

    विघ्नेश्वर चतुर्थी का महत्व

    इस दिन का व्रत रखने और गणेश जी की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से नौकरी व्यापार शिक्षा और वैवाहिक जीवन में आने वाली समस्याओं से राहत मिलती है और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। आज के दिन गणेश जी की पूजा विधि और मंत्रों के जाप से न केवल आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है।