Category: Religious Astrology

  • पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर

    पुरुषोत्तम मास में सावधानी: घर में न रखें ये वस्तुएं, सुख-शांति पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग में Purushottam Maas को अत्यंत पवित्र और विशेष महीना माना जाता है। यह अवधि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जिसमें श्रद्धालु पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करते हैं। मान्यता है कि इस महीने किए गए शुभ कार्य कई गुना फल देते हैं, लेकिन इसी के साथ वास्तु शास्त्र में कुछ विशेष सावधानियां भी बताई गई हैं।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, पुरुषोत्तम मास के दौरान घर में रखी कुछ वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं और परिवार की सुख-शांति पर असर डाल सकती हैं। इसलिए इस अवधि में विशेष रूप से घर की सफाई और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया जाता है।

    सबसे पहले जिन चीजों से बचने की सलाह दी गई है, वे हैं टूटी हुई देवी-देवताओं की मूर्तियां। घर में किसी भी प्रकार की खंडित मूर्ति रखना वास्तु दोष का कारण माना जाता है। ऐसी मूर्तियां नकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं और पारिवारिक शांति को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन्हें नदी या पवित्र जल में विसर्जित करने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा सूखे या मुरझाए हुए पौधे भी इस पवित्र माह में अशुभ माने गए हैं। घर में रखे सूखे पौधे न केवल वातावरण की ताजगी को कम करते हैं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा को भी बढ़ाते हैं। इसके स्थान पर हरे-भरे पौधे, विशेषकर तुलसी का पौधा, अत्यंत शुभ माना गया है क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाता है।

    वास्तु शास्त्र में टूटे-फूटे कांच के बर्तनों को भी अशुभ बताया गया है। ऐसे बर्तन घर में रखने से आर्थिक परेशानियों और बाधाओं का संकेत मिलता है। इसलिए पुरुषोत्तम मास में इन्हें तुरंत घर से बाहर कर देना चाहिए ताकि घर में समृद्धि और स्थिरता बनी रहे।

    इसी तरह बंद पड़ी या खराब घड़ियां भी नकारात्मकता का प्रतीक मानी जाती हैं। समय रुकना प्रगति में बाधा का संकेत माना जाता है, और वास्तु के अनुसार यह परिवार के विकास और तरक्की को प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसी घड़ियों को या तो ठीक करवा लेना चाहिए या फिर घर से हटा देना चाहिए।

    पुरुषोत्तम मास में धार्मिक आस्था के साथ-साथ घर के वातावरण को भी शुद्ध और सकारात्मक बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इस अवधि में किया गया हर छोटा सुधार भी जीवन में बड़े बदलाव ला सकता है।

    कुल मिलाकर यह पवित्र महीना भक्तों के लिए भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का अवसर है, और साथ ही यह समय घर को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करने और सकारात्मकता बढ़ाने का भी संदेश देता है।

  • Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट

    Sawan 2026: इस बार कब-कब पड़ेंगे सावन सोमवार, नोट कर लें पूरी लिस्ट


    नई दिल्ली। भगवान शिव की भक्ति का सबसे पावन और महत्वपूर्ण महीना Shravan Month हर साल श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दौरान शिवभक्त उपवास रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के जरिए भोलेनाथ की कृपा पाने का प्रयास करते हैं। साल 2026 में भी सावन का यह पवित्र महीना भक्तों के लिए विशेष महत्व लेकर आ रहा है।

    पंचांग गणना के अनुसार सावन 2026 की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी, जब सावन कृष्ण प्रतिपदा तिथि का आरंभ होगा। वहीं यह पावन महीना 28 अगस्त 2026 को श्रावण पूर्णिमा के साथ समाप्त हो जाएगा। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस धार्मिक काल में वातावरण पूरी तरह शिवमय हो जाता है और हर तरफ “ॐ नमः शिवाय” के जयकारे गूंजने लगते हैं।

    इस बार सावन के दौरान कुल 4 सावन सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें शिवभक्त अत्यंत शुभ मानते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। खासकर कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और श्रद्धालु अपने कष्टों के निवारण के लिए व्रत रखते हैं।

    सावन 2026 के सावन सोमवार इस प्रकार रहेंगे-
    पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026
    दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026
    तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026
    चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026

    इन सभी सोमवारों पर देशभर के शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलेगी। भक्त सुबह से ही शिवलिंग पर जल, दूध और गंगाजल अर्पित कर पूजा-अर्चना करेंगे। कई स्थानों पर रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस समय भगवान शिव पृथ्वी पर अपने भक्तों के अधिक करीब माने जाते हैं। इसी कारण इस महीने को शिव कृपा प्राप्ति का सबसे उत्तम समय माना गया है।

    पूजा विधि की बात करें तो श्रद्धालु शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करने के बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और चंदन चढ़ाते हैं। इसके बाद “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है। अंत में शिव चालीसा और आरती के साथ पूजा संपन्न की जाती है।

    कुल मिलाकर सावन 2026 शिवभक्तों के लिए आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक विशेष संगम लेकर आ रहा है, जिसका इंतजार हर श्रद्धालु पूरे वर्ष करता है।

  • इस दिन रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे सूर्य देव…. नौतपा में पड़ेगी प्रचंड गर्मी

    इस दिन रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे सूर्य देव…. नौतपा में पड़ेगी प्रचंड गर्मी


    नई दिल्ली।
    ज्येष्ठ महीने (Jyeshtha month) के शुरू होते ही गर्मी अपना प्रचंड (Extreme Heat) रूप दिखाने लगी है. लेकिन अब नौतपा (Nautapa) के चलते सूरज आग के गोले की तरह तपने वाला है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 25 मई 2026 को दोपहर 03:37 बजे ग्रहों के राजा सूर्य देव अपने मित्र चंद्रमा के नक्षत्र ‘रोहिणी’ (Nakshatra ‘Rohini’) में प्रवेश कर रहे हैं. सूर्य का यह नक्षत्र परिवर्तन (Surya Nakshatra Parivartan 2026) प्रकृति और मानव जीवन पर बड़ा असर डालेगा. सूर्य के रोहिणी में आते ही 25 मई से 2 जून 2026 तक ‘नौतपा’ रहेगा, जिसके कारण उत्तर और मध्य भारत में भीषण हीटवेव (लू) की स्थिति बनेगी।

    वैदिक ज्योतिष के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जो शीतलता के प्रतीक हैं. जब अग्नि तत्व सूर्य देव इस नक्षत्र में आते हैं, तो वे इसकी शीतलता को सोख लेते हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाता है. सूर्य का यह उग्र रूप 8 जून 2026 तक रहेगा, लेकिन शुरुआती 9 दिन यानी नौतपा का समय सबसे ज्यादा कष्टप्रद होगा. सूर्य के इस गोचर से जहां कुछ राशियों को लाभ होगा, वहीं 4 विशेष राशियां ऐसी हैं जिन्हें इस दौरान आर्थिक, मानसिक और स्वास्थ्य के मोर्चे पर भारी नुकसान और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


    1. वृषभ राशि (Taurus)

    चूंकि सूर्य देव आपकी ही राशि में रहते हुए रोहिणी नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, इसलिए इसका सबसे सीधा और गहरा प्रभाव आप पर पड़ेगा. इस अवधि में आपके स्वभाव में बेवजह का गुस्सा, अहंकार और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों या बिजनेस में पार्टनर के साथ गंभीर विवाद हो सकते हैं. 25 मई से 8 जून के बीच पार्टनरशिप के कामों में कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें. अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा बनते काम बिगड़ सकते हैं.


    2. मिथुन राशि (Gemini)

    मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर आपकी राशि से बारहवें भाव यानी व्यय और हानि के भाव में होने जा रहा है. इस दौरान आपके खर्चों में अप्रत्याशित रूप से भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे बजट पूरी तरह बिगड़ जाएगा. धन हानि के प्रबल योग बन रहे हैं. किसी कानूनी मामले या कोर्ट-कचहरी के चक्कर में दौड़भाग और मानसिक तनाव बढ़ सकता है. इस समय अवधि में किसी को भी बड़ा कर्ज या उधार देने से बचें. पैसों के लेनदेन में पूरी सतर्कता बरतें.


    3. वृश्चिक राशि (Scorpio)

    सूर्य देव आपकी राशि से सातवें भाव (साझेदारी और वैवाहिक जीवन) में गोचर करेंगे, जो सीधे आपके रिश्तों को प्रभावित करेगा. दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ गलतफहमियां और तनाव बढ़ सकता है. व्यापार में यदि पार्टनरशिप है, तो वहां भी मतभेद उभर सकते हैं. कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिष्ठा को थोड़ी ठेस पहुंचने की आशंका है. जीवनसाथी के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. किसी भी व्यावसायिक दस्तावेज पर बिना अच्छी तरह पढ़े हस्ताक्षर न करें.


    4. कुंभ राशि (Aquarius)

    कुंभ राशि के जातकों के लिए सूर्य का यह गोचर चौथे भाव में होने जा रहा है, जिसे सुख, संपत्ति और माता का भाव माना जाता है. पारिवारिक सुख-शांति में कमी आ सकती है और घरेलू मोर्चे पर वाद-विवाद की स्थिति बन सकती है. भूमि, मकान या वाहन से जुड़े मामलों में अचानक रुकावटें आ सकती हैं. इसके अलावा, सेहत में गिरावट आ सकती है. अपनी माता के स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें. सीने में तकलीफ या हाई ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) के मरीज इस दौरान अपनी दवाइयां समय पर लें और धूप में निकलने से बचें.

  • वैभव लक्ष्मी व्रत कथा: जानें शुक्रवार के दिन क्यों माना जाता है खास

    वैभव लक्ष्मी व्रत कथा: जानें शुक्रवार के दिन क्यों माना जाता है खास


    नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसी दिन विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने का भी विधान है, जिसे करने से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, वैभव और शांति का संचार होता है। मान्यता है कि यह व्रत न केवल आर्थिक समस्याओं को दूर करता है, बल्कि दांपत्य जीवन में भी खुशहाली लाता है।

    इस व्रत की शुरुआत संकल्प लेकर की जाती है, जिसमें श्रद्धालु 11, 21 या अपनी इच्छा अनुसार जितने शुक्रवार तक व्रत रखने का निर्णय लेते हैं। हर शुक्रवार को पूरे नियम और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है और वैभव लक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। व्रत के दौरान भक्त मां लक्ष्मी को लाल फूल, मिठाई और विशेष रूप से खीर का भोग अर्पित करते हैं।

    व्रत कथा के अनुसार, एक समय एक शहर में लोग भक्ति और धर्म से दूर होकर भोग-विलास में डूब गए थे। उसी शहर में शीला नाम की एक धार्मिक और संतोषी स्त्री अपने पति के साथ रहती थी। समय के साथ उसका पति बुरी संगत में पड़कर अपना सारा धन गंवा बैठा और जीवन संघर्षों से भर गया।

    शीला ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद भगवान पर आस्था बनाए रखी। एक दिन उसके घर एक दिव्य तेज से युक्त वृद्ध महिला आई, जिन्होंने शीला को मां लक्ष्मी का व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि यह व्रत सरल है और श्रद्धा से करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    उनके मार्गदर्शन पर शीला ने पूरे विश्वास के साथ यह व्रत प्रारंभ किया। हर शुक्रवार वह पूरी विधि से पूजा करती और कथा सुनती। धीरे-धीरे उसके जीवन में परिवर्तन आने लगा। उसके पति का स्वभाव सुधरने लगा और वह मेहनत करके व्यापार करने लगा। कुछ समय बाद घर में फिर से धन-समृद्धि लौट आई और सुख-शांति स्थापित हो गई।

    कथा के अनुसार, व्रत के अंतिम चरण में उद्यापन किया जाता है, जिसमें सात सुहागिन महिलाओं को पूजा सामग्री या व्रत कथा की पुस्तक भेंट की जाती है। यह प्रक्रिया व्रत को पूर्ण करने के लिए आवश्यक मानी जाती है।

    धार्मिक विद्वानों के अनुसार, मां लक्ष्मी की आराधना से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मकता का संचार होता है। विशेष रूप से मां वैभव लक्ष्मी का व्रत करने से आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और जीवन में स्थिरता आती है।

    आज के समय में भी हजारों श्रद्धालु इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा के साथ करते हैं और इसे अपने जीवन में सुख-समृद्धि का माध्यम मानते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती और मां लक्ष्मी अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखती हैं।

  • शुक्रवार के ये वास्तु उपाय बदल देंगे घर की किस्मत, आएगी बरकत

    शुक्रवार के ये वास्तु उपाय बदल देंगे घर की किस्मत, आएगी बरकत


    नई दिल्ली। शुक्रवार का दिन हिंदू धर्म में धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विशेष माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि इस दिन कुछ सरल उपाय अपनाए जाएं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक समस्याएं धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। मुख्य द्वार को हमेशा साफ और आकर्षक रखना चाहिए क्योंकि इसे ऊर्जा प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। दरवाजे पर हल्दी या कुमकुम से स्वस्तिक और लक्ष्मी चरण चिह्न बनाना शुभ माना जाता है। इससे घर में शुभ ऊर्जा का प्रवेश होता है और नकारात्मकता दूर होती है।

    शुक्रवार के दिन घर में घी का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से पूजा स्थल और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। साथ ही, घर में सुगंधित अगरबत्ती या धूप का प्रयोग करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा बनी रहती है।

    वास्तु के अनुसार शुक्रवार को घर में सफेद या गुलाबी रंग के फूलों का उपयोग करना चाहिए। यह रंग शांति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, घर के उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए क्योंकि यह दिशा धन और ज्ञान की मानी जाती है।

    शुक्रवार को घर में तुलसी के पौधे की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। तुलसी में जल अर्पित कर दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। इसे घर की समृद्धि के लिए अत्यंत प्रभावी उपाय माना गया है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में टूटे-फूटे सामान या अनावश्यक कबाड़ को शुक्रवार से पहले ही हटा देना चाहिए। इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और नए अवसरों के मार्ग खुलते हैं।

    इसके अलावा, शुक्रवार के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। सफेद वस्त्र, मिठाई, या जरूरतमंदों को भोजन कराने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में स्थायी सुख-समृद्धि का वास होता है।

    कुल मिलाकर, शुक्रवार के ये सरल वास्तु उपाय न केवल घर के वातावरण को सकारात्मक बनाते हैं, बल्कि आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं। श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाए गए ये उपाय जीवन में स्थिरता और खुशहाली ला सकते हैं।

  • नौतपा में तपेगा मौसम ही नहीं, बदल सकती है जीवन की दिशा

    नौतपा में तपेगा मौसम ही नहीं, बदल सकती है जीवन की दिशा

    नई दिल्ली। साल 2026 में Nautapa की शुरुआत 25 मई से होने जा रही है। इस अवधि को हिंदू पंचांग और ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और पृथ्वी पर उनकी ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों के दौरान भीषण गर्मी अपने चरम पर होती है और लू चलने की संभावना अधिक रहती है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नौतपा केवल मौसम का बदलाव नहीं बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष समय भी होता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करने से तापमान में वृद्धि होती है और यह समय साधना, दान और आत्मशुद्धि के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में किए गए दान और धार्मिक कार्य सूर्य देव को प्रसन्न करते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।

    नौतपा के दौरान सबसे अधिक महत्व जल दान को दिया गया है। इस समय राहगीरों को पानी पिलाना, प्याऊ लगवाना और मिट्टी के घड़े में ठंडा पानी वितरित करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके साथ ही शरबत, छाछ, तरबूज और अन्य शीतल पेय पदार्थों का दान भी विशेष फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि ऐसे कार्य न केवल लोगों को गर्मी से राहत देते हैं बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी शुभ परिणाम देते हैं।

    इसके अलावा अन्न दान को भी इस अवधि में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। गेहूं, चावल, दाल और गुड़ जैसे खाद्य पदार्थों का दान करने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता आती है और कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और आर्थिक समस्याओं में धीरे-धीरे कमी आती है।

    नौतपा के दौरान वस्त्र दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। सूती कपड़े, चप्पल, छाता और तौलिया जैसी आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंदों को देने से सेवा भाव बढ़ता है और समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है। इसे पुण्य और कल्याणकारी कार्य माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय सुबह सूर्य को जल अर्पित करना और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ होता है। कई लोग इस अवधि में उपवास भी रखते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक शुद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य मजबूत होने से व्यक्ति के नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति में वृद्धि होती है।

    कुल मिलाकर नौतपा 2026 केवल भीषण गर्मी का संकेत नहीं, बल्कि एक ऐसा समय है जिसे सही दिशा में उपयोग करके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, स्वास्थ्य लाभ और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त की जा सकती है।

  • 22 मई 2026: तुला राशि वालों की चमक सकती है किस्मत, सैलरी बढ़ने के योग

    22 मई 2026: तुला राशि वालों की चमक सकती है किस्मत, सैलरी बढ़ने के योग



    नई दिल्ली। तुला राशि वालों के लिए कल का दिन काफी सकारात्मक और लाभदायक रहने के संकेत दे रहा है। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर उनकी मेहनत का अच्छा परिणाम मिल सकता है। लंबे समय से जिस वेतन वृद्धि या प्रमोशन का इंतजार था, उससे जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है।

    ऑफिस में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आपकी कार्यशैली की सराहना हो सकती है। नए प्रोजेक्ट या जिम्मेदारियां मिलने के भी योग हैं, जो भविष्य में करियर ग्रोथ का रास्ता खोल सकती हैं।

    व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी समय अनुकूल रहेगा। रुके हुए काम पूरे होने की संभावना है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। निवेश से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के संकेत हैं।

    पारिवारिक जीवन में खुशियों का माहौल बना रहेगा। परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। किसी करीबी से शुभ समाचार मिलने की संभावना है।

    स्वास्थ्य सामान्य रहेगा, लेकिन गर्मी के मौसम को देखते हुए खानपान और पानी का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है। मानसिक रूप से भी आप आत्मविश्वास और ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे।

    प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी और रिश्तों में मजबूती आएगी। छात्रों के लिए भी दिन अच्छा रहेगा और पढ़ाई में मन लगेगा।

  • आज का राशिफल 22 मई 2026: तुला राशि वालों को मिल सकता है आर्थिक लाभ

    आज का राशिफल 22 मई 2026: तुला राशि वालों को मिल सकता है आर्थिक लाभ


    नई दिल्ली। 22 मई 2026 का राशिफल कई राशियों के लिए शुभ संकेत लेकर आया है। खासतौर पर तुला राशि वालों को नौकरी और आय में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, जबकि अन्य राशियों को भी करियर, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में नए अवसर मिल सकते हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए दिन ऊर्जा से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। परिवार का सहयोग मिलेगा और रुके काम पूरे होने के संकेत हैं।

    वृषभ राशि
    वृषभ राशि वालों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। निवेश सोच-समझकर करें। किसी पुराने मित्र से मुलाकात मन प्रसन्न करेगी।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि वालों के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। नौकरी में प्रशंसा मिल सकती है। छात्रों के लिए समय अनुकूल रहेगा।

    कर्क राशि
    कर्क राशि वालों को भावनात्मक फैसले लेने से बचना होगा। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि वालों के लिए करियर में उन्नति के संकेत हैं। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से मुलाकात भविष्य में लाभ दिला सकती है।

     कन्या राशि
    कन्या राशि वालों को कार्यक्षेत्र में मेहनत का पूरा फल मिलेगा। स्वास्थ्य का ध्यान रखें और खानपान संतुलित रखें।

     तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए कल का दिन बेहद शुभ रहने वाला है। नौकरीपेशा लोगों को सैलरी बढ़ने या प्रमोशन की खुशखबरी मिल सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि वालों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। यात्रा के योग बन रहे हैं और परिवार में शुभ कार्य की चर्चा हो सकती है।

    धनु राशि
    धनु राशि वालों के लिए नए अवसरों का दिन रहेगा। व्यापार में लाभ के संकेत हैं और आत्मविश्वास बढ़ेगा।

     मकर राशि
    मकर राशि वालों को कार्यक्षेत्र में संयम बनाए रखना होगा। किसी पुराने विवाद का समाधान निकल सकता है।

     कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों को पारिवारिक मामलों में समझदारी से काम लेना होगा। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
     

    मीन राशि
    मीन राशि वालों के लिए दिन लाभकारी रहेगा। रुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं और मानसिक तनाव कम होगा।
  • गुरुवार व्रत गाइड: उद्यापन कब और कैसे करें, जानें पूरी प्रक्रिया

    गुरुवार व्रत गाइड: उद्यापन कब और कैसे करें, जानें पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार व्रत करने से गुरु दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख, समृद्धि, संतान सुख तथा वैवाहिक जीवन में स्थिरता आती है।

    गुरुवार व्रत की शुरुआत किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से की जा सकती है। इस व्रत को सामान्यतः 16 गुरुवार तक विधि-विधान से किया जाता है और इसके बाद उद्यापन किया जाता है। उद्यापन का अर्थ है व्रत का समापन पूर्ण धार्मिक विधि के साथ करना।

    व्रत की शुरुआत के लिए ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा स्थल को स्वच्छ कर गंगाजल से शुद्ध करना शुभ माना जाता है। इसके बाद चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के दौरान केले के पौधे की जड़ में चने की दाल, गुड़ और मुनक्का अर्पित करने की परंपरा है।

    इसके बाद दीपक जलाकर गुरुवार व्रत कथा का श्रवण किया जाता है और भगवान बृहस्पति की आरती की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पीले वस्त्र धारण करना और पीले फल-फूलों का दान करना अत्यंत शुभ फल देता है। साथ ही भगवान विष्णु को हल्दी अर्पित करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

    दान का विशेष महत्व भी इस व्रत में बताया गया है। किसी गरीब या जरूरतमंद को अन्न और धन का दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    मान्यता है कि केले के पौधे में भगवान विष्णु का वास होता है, इसलिए गुरुवार को इसकी पूजा करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

  • अधिक मास 2026: 15 जून तक थमेंगे शुभ कार्य, जानें क्यों इसे कहा जाता है ‘पुरुषोत्तम मास’

    अधिक मास 2026: 15 जून तक थमेंगे शुभ कार्य, जानें क्यों इसे कहा जाता है ‘पुरुषोत्तम मास’



    नई दिल्ली(New Delhi)। सनातन परंपरा में समय को केवल तारीखों का क्रम नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। इसी परंपरा में एक विशेष अवधि होती है जिसे अधिक मास कहा जाता है, जो इस वर्ष 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। इसे अधिक ज्येष्ठ मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लगभग 30 दिनों तक चलने वाले इस अतिरिक्त महीने में शुभ और मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है। विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे संस्कार इस अवधि में नहीं किए जाते। माना जाता है कि इस समय किए गए सांसारिक कार्य अपेक्षित शुभ फल नहीं देते।

    अधिक मास का आधार हिंदू पंचांग की खगोल गणना में छिपा है। सौर वर्ष लगभग 365 दिनों का होता है, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का होता है। दोनों के बीच हर वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर बनता है, जो तीन वर्षों में लगभग 33 दिनों तक पहुंच जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब यह अतिरिक्त महीना अस्तित्व में आया तो किसी भी देवता ने इसे स्वीकार नहीं किया। सभी महीनों के अपने-अपने अधिपति थे, लेकिन इस अतिरिक्त मास का कोई स्वामी नहीं था। दुखी होकर यह मास भगवान विष्णु के पास पहुंचा, जहां उन्होंने इसे “पुरुषोत्तम मास” का नाम दिया और इसे अपना संरक्षण प्रदान किया। तभी से यह महीना विशेष और अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यह समय सांसारिक कार्यों की बजाय आत्मिक उन्नति और साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस अवधि में पूजा-पाठ, जप, तप, दान और व्रत को अत्यधिक फलदायी बताया गया है। वहीं व्यापार, निवेश या नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है।

    शास्त्रों में वर्णन है कि इस मास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है। इसलिए इसे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है, जहां भक्ति और आत्मचिंतन को सर्वोच्च महत्व दिया गया है।

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