Category: Religious Astrology

  • गणेश जी ने तुलसी को क्यों दिया असुर से विवाह का श्राप? जानिए गणेश चतुर्थी पर तुलसी न चढ़ाने की वजह

    गणेश जी ने तुलसी को क्यों दिया असुर से विवाह का श्राप? जानिए गणेश चतुर्थी पर तुलसी न चढ़ाने की वजह


    नई दिल्ली। गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना और उनके स्वागत का विशेष अवसर माना जाता है। इस दिन घरों और पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और विधि विधान से पूजा अर्चना की जाती है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में माना जाता है इसलिए 14 सितंबर को ही गणेश चतुर्थी का मुख्य पर्व मनाया जाएगा।

    भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा घास मोदक लाल फूल और कई तरह की पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। लेकिन एक ऐसी पवित्र मानी जाने वाली चीज भी है जिसे गणेश जी को चढ़ाना वर्जित माना गया है और वह है तुलसी। तुलसी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र पौधा माना जाता है और भगवान विष्णु की पूजा में इसका विशेष महत्व है। इसके बावजूद गणेश जी की पूजा में तुलसी पत्र नहीं चढ़ाया जाता। इसके पीछे एक रोचक पौराणिक कथा बताई जाती है।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान गणेश नदी के किनारे गहरे ध्यान में लीन होकर तपस्या कर रहे थे। उसी दौरान देवी तुलसी वहां से गुजरीं। उन्होंने तपस्या में लीन गणेश जी के तेजस्वी और आकर्षक स्वरूप को देखा तो उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा उत्पन्न हो गई। देवी तुलसी ने गणेश जी के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा। उस समय गणेश जी ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए उनके प्रस्ताव को स्वीकार करने से विनम्रता से इनकार कर दिया।

    गणेश जी के इनकार से देवी तुलसी नाराज हो गईं। क्रोध में उन्होंने गणेश जी को श्राप दे दिया कि उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह होगा। देवी तुलसी के श्राप से गणेश जी भी क्रोधित हो गए और उन्होंने तुलसी को जवाब में श्राप दिया कि उनका विवाह किसी देवता से नहीं बल्कि एक असुर से होगा। यह सुनकर तुलसी जी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गणेश जी से क्षमा मांगी।

    देवी तुलसी की प्रार्थना सुनकर गणेश जी ने उन्हें क्षमा कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में तुलसी भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय होंगी और उनकी पूजा में तुलसी का विशेष महत्व होगा। हालांकि गणेश जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी कथा के कारण आज भी गणेश जी को तुलसी पत्र अर्पित करना वर्जित माना जाता है।

    गणेश चतुर्थी पर भक्त भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए उनकी पूजा में विशेष रूप से दूर्वा अर्पित करते हैं। मान्यता है कि दूर्वा गणेश जी को अत्यंत प्रिय है और इसे अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करते समय तुलसी की जगह दूर्वा लाल फूल मोदक और अन्य प्रिय सामग्री अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है। हालांकि ये बातें धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं।

  • मंगल गोचर से इन 3 राशियों की बढ़ेगी टेंशन करियर से वैवाहिक जीवन तक आ सकती हैं चुनौतियां

    मंगल गोचर से इन 3 राशियों की बढ़ेगी टेंशन करियर से वैवाहिक जीवन तक आ सकती हैं चुनौतियां


    नई दिल्ली। मंगल गोचर 2026 ज्योतिष की दुनिया में ग्रहों की चाल को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है और जब मंगल अपनी राशि बदलते हैं तो इसका प्रभाव अलग अलग राशियों के जातकों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। 18 सितंबर 2026 को मंगल कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं और 12 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार कर्क राशि में मंगल नीच के माने जाते हैं। मंगल को ऊर्जा साहस क्रोध और आक्रामकता का कारक माना जाता है जबकि चंद्रमा भावनाओं और मन से जुड़े ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में इन दोनों की अलग प्रकृति के कारण कुछ राशियों के लिए यह अवधि चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

    कर्क राशि के जातकों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कार्यक्षेत्र में विरोधियों या गुप्त शत्रुओं से परेशानी हो सकती है और किसी काम में बाधा आने की आशंका बनी रह सकती है। छोटी छोटी बातों को लेकर तनाव बढ़ सकता है इसलिए किसी भी परिस्थिति में जल्दबाजी से फैसला लेने से बचना बेहतर होगा। स्वास्थ्य के मामले में भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। रिश्तों में संदेह की स्थिति पैदा हो सकती है जिससे आपसी तालमेल प्रभावित हो सकता है। धन से जुड़े मामलों में भी सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है।

    तुला राशि के जातकों के लिए भी मंगल का यह गोचर कुछ परेशानियां बढ़ा सकता है। मंगल तुला राशि के दशम भाव में गोचर करेंगे जिससे करियर और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में दबाव बढ़ने की संभावना बताई गई है। नौकरी करने वाले लोगों को काम का तनाव महसूस हो सकता है जबकि कारोबार से जुड़े लोगों को नए फैसले लेते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी। इस अवधि में साझेदारी से जुड़े कामों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। कोई नया काम शुरू करने से पहले उसके हर पहलू पर विचार करना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला भविष्य में परेशानी खड़ी कर सकता है। वैवाहिक जीवन में भी मतभेद की स्थिति बन सकती है इसलिए बातचीत के दौरान संयम बनाए रखना जरूरी होगा।

    मकर राशि के लिए भी मंगल का कर्क गोचर चुनौतीपूर्ण बताया गया है। मंगल इस राशि के सप्तम भाव में गोचर करेंगे जिसके कारण जीवनसाथी के साथ मतभेद या विवाद की स्थिति बन सकती है। इस दौरान आत्मविश्वास में कमी महसूस हो सकती है और छोटी बातों पर गुस्सा आने की संभावना भी बढ़ सकती है। ऐसे में क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा। किसी भी तरह के विवाद और लड़ाई झगड़े से दूरी बनाए रखना आपके लिए बेहतर रहेगा। कला से जुड़े क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

    कुल मिलाकर मंगल का कर्क राशि में यह गोचर कुछ राशियों के लिए सावधानी बरतने का समय माना जा रहा है। नौकरी कारोबार स्वास्थ्य धन और रिश्तों से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचना और सोच समझकर कदम उठाना बेहतर रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव डाल सकती है हालांकि वास्तविक जीवन में किसी भी बड़े फैसले के लिए केवल ज्योतिषीय भविष्यवाणी पर निर्भर रहने के बजाय व्यावहारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

  • हरतालिका तीज की ऐसी है पौराणिक कथा माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए किया था कठोर तप सहेली के साथ चली गई थीं जंगल

    हरतालिका तीज की ऐसी है पौराणिक कथा माता पार्वती ने शिव को पाने के लिए किया था कठोर तप सहेली के साथ चली गई थीं जंगल


    नई दिल्ली। हरतालिका तीज हिंदू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और दांपत्य जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं माता पार्वती की तरह अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत रखती हैं। इस पर्व की सबसे खास बात इसकी पौराणिक कथा है जिसमें माता पार्वती के कठोर तप और उनके अटूट संकल्प की कहानी सुनाई जाती है। मान्यता के अनुसार हरतालिका तीज की कथा स्वयं भगवान शिव ने माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म के शैलपुत्री रूप की याद दिलाते हुए सुनाई थी।

    कथा के अनुसार माता पार्वती ने राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था। बचपन से ही उनके मन में भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा थी। उन्होंने भगवान शिव की प्राप्ति के लिए कठिन तपस्या शुरू कर दी। धार्मिक मान्यता के अनुसार पार्वती ने लंबे समय तक भगवान शिव का ध्यान किया और कठोर तप करते हुए अपनी इच्छा पर अडिग रहीं। उनकी तपस्या का उद्देश्य केवल भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करना था।

    इसी दौरान एक दिन नारद मुनि राजा हिमालय के पास पहुंचे। उन्होंने पार्वती के विवाह के लिए भगवान विष्णु का प्रस्ताव रखा। राजा हिमालय ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करने का मन बना लिया। जब माता पार्वती को इस बात का पता चला तो वह बहुत दुखी हुईं क्योंकि वह मन से भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं।

    पार्वती ने अपनी व्यथा अपनी सखी को बताई। सखी ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उन्हें घने जंगल में ले जाने का निर्णय लिया ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न हो। पार्वती अपनी सखी के साथ जंगल में चली गईं और एक गुफा में रहकर भगवान शिव की आराधना करने लगीं। उन्होंने कठोर तप किया और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखा।

    माता पार्वती की तपस्या से भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने पार्वती को दर्शन देकर उनकी इच्छा पूरी होने का आशीर्वाद दिया और उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वचन दिया। इसके बाद पार्वती की सखी उन्हें लेकर वापस लौटीं। राजा हिमालय अपनी पुत्री के अचानक गायब होने से चिंतित थे और उन्हें लगा कि किसी ने पार्वती का अपहरण कर लिया है। काफी खोजबीन के बाद जब उन्हें पार्वती और उनकी सखी मिलीं तो उन्होंने बेटी से वापस घर चलने को कहा।

    पार्वती ने पिता के सामने अपनी इच्छा रखी कि वह तभी घर लौटेंगी जब उनका विवाह भगवान शिव से कराने का वचन दिया जाएगा। राजा हिमालय ने बेटी की इच्छा स्वीकार कर ली। इसके बाद उचित समय आने पर माता पार्वती का विवाह भगवान शिव के साथ हुआ। इसी पौराणिक प्रसंग से हरतालिका तीज का संबंध माना जाता है।

    हरतालिका नाम भी इसी कथा से जुड़ा माना जाता है। हरत और आलिका शब्दों से मिलकर बने हरतालिका का अर्थ सखी द्वारा पार्वती को अपने साथ ले जाना और उनके लिए रास्ता बनाना माना जाता है। इसीलिए हरतालिका तीज पर महिलाएं माता पार्वती के तप और उनके अटूट संकल्प को याद करती हैं। मान्यता है कि इस दिन शिव पार्वती की पूजा और व्रत कथा का श्रवण करने से दांपत्य जीवन में सुख और सौभाग्य की कामना की जाती है।

    इस कथा का सबसे बड़ा संदेश यही माना जाता है कि माता पार्वती ने अपने संकल्प को पूरा करने के लिए कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं छोड़ा। हरतालिका तीज इसलिए केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं बल्कि प्रेम आस्था तपस्या और दृढ़ संकल्प का प्रतीक भी माना जाता है।

  • हरतालिका तीज की तैयारी शुरू जानिए कब रखना है व्रत कैसे करें पूजा और किस विधि से मिलेगा शिव पार्वती का आशीर्वाद

    हरतालिका तीज की तैयारी शुरू जानिए कब रखना है व्रत कैसे करें पूजा और किस विधि से मिलेगा शिव पार्वती का आशीर्वाद


    नई दिल्ली। हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में शामिल है और सुहागिन महिलाओं के बीच इसका विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और सुखी वैवाहिक जीवन पति की लंबी आयु तथा परिवार की सुख समृद्धि की कामना करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए यह व्रत रखने की परंपरा निभाती हैं। हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। 2026 में हरतालिका तीज को लेकर पंचांगों में स्थानीय समय के आधार पर तारीख में अंतर दिखाई दे रहा है। दिल्ली के अनुसार यह पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा।

    हरतालिका तीज के दिन महिलाएं प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। कई महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत भी रखती हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी स्थिति के अनुसार व्रत रखने का निर्णय लेना उचित है। पूजा के लिए घर में साफ स्थान पर चौकी लगाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पारंपरिक रूप से मिट्टी या बालू से शिव पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने की भी मान्यता है।

    पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से की जा सकती है। इसके बाद शिवलिंग और माता पार्वती को जल अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा फूल और जल चढ़ाने की परंपरा है जबकि माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। महिलाएं माता को सिंदूर चूड़ी बिंदी मेहंदी चुनरी और अन्य सुहाग सामग्री अर्पित कर सकती हैं। इसके बाद दीपक और धूप जलाकर भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा की जाती है।

    हरतालिका तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने या पढ़ने का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि माता पार्वती की सहेली उन्हें अपने साथ वन में ले गई थी ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से न हो। इसी प्रसंग से हरतालिका नाम जुड़ा माना जाता है। बाद में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया।

    पूजा के दौरान महिलाएं शिव पार्वती के मंत्रों का जाप कर सकती हैं और आरती करने के बाद परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। पूजा के अंत में हरतालिका तीज की कथा का श्रवण किया जाता है। जिन स्थानों पर सुबह पूजा संभव नहीं हो वहां प्रदोषकाल में शिव पार्वती की पूजा करने की भी मान्यता बताई गई है। दिल्ली के पंचांग में 2026 के लिए प्रातःकालीन पूजा का समय 6 बजकर 5 मिनट से 7 बजकर 6 मिनट तक बताया गया है। स्थानीय शहर के अनुसार यह समय बदल सकता है।

    हरतालिका तीज केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं बल्कि शिव और पार्वती के अटूट संबंध तथा समर्पण का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं नए कपड़े पहनती हैं और परिवार के साथ मिलकर पर्व मनाती हैं। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की कथा सुनती हैं और भजन कीर्तन करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विधि विधान से शिव पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख शांति और प्रेम बना रहता है।

  • Plant Vastu: छत पर पौधे लगाने से पहले जान लें वास्तु के ये जरूरी नियम, सही दिशा और देखभाल से बनी रहे सकारात्मकता

    Plant Vastu: छत पर पौधे लगाने से पहले जान लें वास्तु के ये जरूरी नियम, सही दिशा और देखभाल से बनी रहे सकारात्मकता


    नई दिल्ली ।
    घर की छत को पौधों और गमलों से सजाकर खूबसूरत बनाने का चलन बढ़ा है। कई लोग छत पर अलग-अलग तरह के पौधे लगाकर उसे छोटे गार्डन का रूप देते हैं। वास्तु शास्त्र में भी पौधों को लेकर कई नियम बताए गए हैं। इनके अनुसार पौधों की दिशा, आकार, संख्या और रखरखाव का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि सही दिशा में लगाए गए पौधे घर के वातावरण में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि से जुड़ी ऊर्जा बनाए रखने में सहायक होते हैं।

    छत पर गमले रखने से पहले सबसे जरूरी बात उनकी दिशा को लेकर बताई गई है। वास्तु के अनुसार छोटे, हल्के और फूल वाले पौधों को पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में रखना शुभ माना जाता है। तुलसी, गेंदा, पुदीना और अन्य औषधीय पौधों को भी इन दिशाओं में रखने की सलाह दी गई है।

    वहीं, बड़े और ऊंचे पौधों के लिए दक्षिण और पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना गया है। भारी गमलों वाले पौधों को भी इन दिशाओं में रखने की बात कही गई है। वास्तु के अनुसार दक्षिण और पश्चिम दिशा में भारी वस्तुएं रखने से स्थिरता बनी रहने की मान्यता है और इसे नकारात्मक ऊर्जा को रोकने से भी जोड़ा जाता है।

    छत के बीच के हिस्से को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। वास्तु में इस स्थान को ब्रह्मस्थान कहा जाता है और इसे खुला तथा साफ रखना बेहतर माना जाता है। इसलिए छत के बिल्कुल बीच में भारी गमला या बड़ा पौधा रखने से बचने की सलाह दी गई है।

    पौधों के चुनाव में भी सावधानी जरूरी बताई गई है। छत पर कैक्टस या दूसरे कांटेदार पौधे लगाने से बचने की सलाह दी गई है। गुलाब को इसका अपवाद बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार कांटेदार पौधों को तनाव और नकारात्मकता से जोड़ा जाता है।

    इसके अलावा छत को जरूरत से ज्यादा गमलों से भरने से भी बचना चाहिए। बहुत अधिक संख्या में गमले रखने या भारी गमलों की भीड़ लगाने को वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना गया है। पौधों के बीच पर्याप्त खुली जगह रखना बेहतर बताया गया है। इससे छत पर पौधों को व्यवस्थित रखने में भी आसानी रहती है।

    सूखे, टूटे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक छत पर नहीं रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र में ऐसे पौधों को नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसलिए पौधों की नियमित देखभाल करने और किसी पौधे के सूखने या खराब होने पर उसे तुरंत हटाने की सलाह दी गई है।

    छत पर पौधे लगाते समय केवल वास्तु नियमों का ही नहीं, बल्कि पौधों की जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी बताया गया है। ऐसे पौधों का चुनाव करना चाहिए जिन्हें पर्याप्त धूप मिल सके और जिनकी देखभाल आसानी से की जा सके। बहुत अधिक फैलने वाले या भारी होने वाले पौधों को लगाने से पहले उनकी बढ़त और छत पर पड़ने वाले भार का ध्यान रखना चाहिए। इस तरह पौधों की दिशा, संख्या, आकार और नियमित देखभाल पर ध्यान देकर छत को व्यवस्थित रखा जा सकता है।

  • गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को: जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, मूर्ति से लेकर पूजा-विधि तक पूरी जानकारी

    गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को: जानें गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त, मूर्ति से लेकर पूजा-विधि तक पूरी जानकारी


    नई दिल्ली। गणेश उत्सव को लेकर इस बार तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है कि गणपति की स्थापना 14 सितंबर को होगी या 15 सितंबर को। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष गणेश उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 से होगी। इसी दिन घरों और पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उत्सव का समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा और इसी दिन गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

    भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला यह पर्व धार्मिक आस्था में विशेष महत्व रखता है। श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं। घरों में गणपति को अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार 3, 5, 7 या 10 दिनों तक विराजमान रखा जाता है।

    गणपति स्थापना का शुभ समय

    14 सितंबर को भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने के लिए सुबह 11:03 बजे से दोपहर 1:31 बजे तक का समय शुभ बताया गया है। इसी अवधि में गणपति स्थापना और पूजा की जा सकती है।

    पहली बार गणपति ला रहे हैं तो ऐसे करें तैयारी

    गणपति स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर लें। जिस जगह प्रतिमा रखनी है, वहां चौकी स्थापित करें और उस पर साफ लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं।

    भगवान के स्वागत के लिए घर को फूलों, पत्तियों और तोरण से सजाया जा सकता है। मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने की भी धार्मिक परंपरा है।

    कैसी प्रतिमा घर लाना शुभ माना जाता है?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणपति की प्रतिमा चुनते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है। मिट्टी से बनी प्रतिमा को शुभ माना जाता है और पर्यावरण की दृष्टि से भी यह बेहतर विकल्प है।

    घर में स्थापना के लिए बैठे हुए गणेश की प्रतिमा को शुभ माना जाता है। प्रतिमा की सूंड बाईं ओर मुड़ी हुई हो, इसका भी ध्यान रखने की परंपरा है। पूजा स्थल के लिए घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को भी शुभ माना जाता है।

    पूजा की थाली में ये सामग्री रखें

    गणपति स्थापना से पहले पूजा की सभी सामग्री तैयार कर लेना सुविधाजनक रहेगा। इसके लिए चौकी, लाल या पीला कपड़ा, कलश, आम के पत्ते, सुपारी, अक्षत, फूल, फल, नारियल, धूप, कपूर और घी का दीपक रखें।

    भगवान गणेश की पूजा में दूर्वा का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए पूजा सामग्री में दूर्वा जरूर रखें। इसे माला के रूप में भी गणेश जी को अर्पित किया जा सकता है।

    भोग में मोदक को विशेष रूप से शामिल किया जाता है। इसके अलावा लड्डू, फल और अन्य मिठाइयां भी अर्पित की जा सकती हैं।

    इस क्रम से करें गणपति की पूजा

    सबसे पहले पूजा स्थल पर चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध करने के बाद तिलक लगाएं और फूल व अक्षत अर्पित करें।

    इसके बाद धूप और दीप जलाएं। भगवान गणेश को दूर्वा, फल और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। अपनी श्रद्धा के अनुसार प्रार्थना और गणेश जी की आरती करें। पूजा के दौरान अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखकर सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जा सकती है।

    गणेश जी का सरल मंत्र

    पूजा के दौरान श्रद्धालु गणेश जी के सरल मंत्र का जाप कर सकते हैं—

    ‘ॐ गं गणपतये नमः।’

    धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से मंत्र जाप और पूजा करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और अन्य लोगों में वितरित करें।

    कितने दिन रखें गणपति?

    घर में गणपति को कितने दिन विराजमान रखना है, यह परिवार की परंपरा, श्रद्धा और सुविधा पर निर्भर करता है। आमतौर पर 3, 5, 7 या 10 दिनों तक गणपति की स्थापना की जाती है।

    जितने दिन भगवान गणेश घर में विराजमान रहें, नियमित रूप से पूजा-अर्चना करें। इसके बाद शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से विसर्जन किया जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, विसर्जन के दौरान अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की जाती है।

  • रविवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां घर की खुशहाली के लिए अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय

    रविवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां घर की खुशहाली के लिए अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय


    नई दिल्ली। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है और धार्मिक मान्यताओं में सूर्य को ऊर्जा आत्मविश्वास मान सम्मान और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से रविवार के दिन पूजा पाठ के साथ घर की साफ सफाई और वास्तु से जुड़े कुछ आसान उपाय करने की परंपरा भी रही है। वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि घर का वातावरण व्यवस्थित और स्वच्छ रहने से सकारात्मक माहौल बना रहता है। रविवार को किए जाने वाले कुछ छोटे उपाय इसी सोच से जुड़े हुए हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए।

    रविवार की सुबह सबसे पहले घर की साफ सफाई पर ध्यान देना अच्छा माना जाता है। घर में लंबे समय से पड़े अनुपयोगी सामान को हटाने से जगह व्यवस्थित रहती है। वास्तु मान्यताओं में भी टूटे फूटे और बेकार सामान को घर में जमा करके रखने से बचने की सलाह दी जाती है। हालिया वास्तु सलाहों में भी घर को साफ रखने और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया गया है।

    रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि तांबे के पात्र में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य देने और मन में सकारात्मक विचार रखने से आत्मविश्वास बढ़ता है। कई धार्मिक परंपराओं में रविवार को सूर्य उपासना के लिए विशेष दिन माना गया है। ऐसे में सुबह का समय पूजा और ध्यान के लिए उपयोग किया जा सकता है।

    घर के मुख्य द्वार की सफाई पर भी रविवार को विशेष ध्यान दिया जा सकता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसलिए दरवाजे के आसपास गंदगी कबाड़ या अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। मुख्य द्वार साफ और व्यवस्थित रखने से घर का वातावरण भी बेहतर नजर आता है। रविवार की सुबह यहां दीपक जलाने की परंपरा भी कई घरों में देखने को मिलती है।

    पूजा स्थान को साफ रखना भी रविवार के आसान उपायों में शामिल किया जा सकता है। मंदिर में जमा धूल और पुराने फूल हटाकर भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर में पूजा का सकारात्मक वातावरण बनता है और परिवार के लोगों को भी कुछ समय ध्यान और प्रार्थना के लिए मिल सकता है।

    रविवार के दिन घर में टूटे हुए शीशे और खराब सजावटी सामान को हटाना भी बेहतर माना जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में टूटे शीशे को शुभ नहीं माना जाता और शीशे को साफ तथा सही स्थिति में रखने की सलाह दी जाती है। उत्तर और पूर्व दिशा में शीशे को शुभ मानने की परंपरा है जबकि मुख्य दरवाजे के ठीक सामने शीशा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा घर में पौधे रखना भी सकारात्मक वातावरण बनाने का एक सरल तरीका माना जाता है। तुलसी जैसे पौधों को धार्मिक रूप से विशेष महत्व दिया जाता है जबकि मनी प्लांट और अन्य इनडोर पौधों को वास्तु में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। पौधों की नियमित देखभाल और घर में हरियाली बनाए रखने से वातावरण भी बेहतर महसूस हो सकता है।

    रविवार का दिन केवल उपाय करने के लिए ही नहीं बल्कि पूरे सप्ताह की शुरुआत को व्यवस्थित करने का अवसर भी है। घर की सफाई पूजा स्थान की व्यवस्था मुख्य द्वार की स्वच्छता और सकारात्मक सोच जैसे छोटे कदम परिवार के वातावरण को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग सूर्य देव की उपासना और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद को भी रविवार की दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं। इस तरह रविवार को की गई छोटी शुरुआत पूरे सप्ताह के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन का आधार बन सकती है।

  • आज का राशिफल: रविवार को चमकेगा इन राशियों का सितारा धन से लेकर नौकरी और परिवार तक मिल सकता है फायदा

    आज का राशिफल: रविवार को चमकेगा इन राशियों का सितारा धन से लेकर नौकरी और परिवार तक मिल सकता है फायदा


    नई दिल्ली। 13 सितंबर 2026 रविवार का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीदें लेकर आ सकता है। ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ जातकों को कामकाज में सफलता मिल सकती है तो कुछ लोगों को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस समय बुध कन्या राशि में मजबूत स्थिति में है जबकि शुक्र तुला राशि में बना हुआ है। ऐसे में बुद्धि संवाद कला रिश्तों और निर्णय लेने की क्षमता से जुड़े मामलों में सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि हर राशि के लिए ग्रहों का प्रभाव अलग अलग हो सकता है इसलिए आज का दिन किसी के लिए उपलब्धियों वाला तो किसी के लिए धैर्य और संयम से आगे बढ़ने वाला रहेगा।

    मेष राशि वालों के लिए रविवार का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला रह सकता है। कामकाज से जुड़े किसी महत्वपूर्ण मामले में आपकी सक्रियता नजर आएगी। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और पुराने मतभेद बातचीत के जरिए दूर हो सकते हैं। कारोबार करने वालों को नई योजना पर काम शुरू करने से पहले पूरी जानकारी जुटानी चाहिए।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए आज का दिन आर्थिक दृष्टि से अच्छा रह सकता है। आय के नए रास्ते तलाशने का अवसर मिल सकता है। किसी पुराने निवेश या रुके हुए काम से लाभ मिलने की उम्मीद बन सकती है। रिश्तों में मधुरता रहेगी और परिवार के किसी सदस्य से मिली सलाह भविष्य में उपयोगी साबित हो सकती है।

    मिथुन राशि वालों को आज अपने खर्च और बचत के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। अचानक कोई जरूरी खर्च सामने आ सकता है। नौकरी करने वालों के लिए सहकर्मियों के साथ बेहतर संवाद जरूरी रहेगा। छोटी यात्रा या किसी पुराने संपर्क से जुड़ा काम आगे बढ़ सकता है। जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना आपके लिए बेहतर रहेगा।

    कर्क राशि के लोगों के लिए आज का दिन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला हो सकता है। आप अपने किसी पुराने लक्ष्य को लेकर दोबारा गंभीरता से प्रयास शुरू कर सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना हो सकती है। परिवार में किसी महत्वपूर्ण विषय पर आपकी राय को महत्व मिलेगा।

    सिंह राशि वालों को आज निर्णय लेते समय भावनाओं के बजाय व्यावहारिक सोच को प्राथमिकता देनी चाहिए। नौकरी और कारोबार से जुड़े मामलों में जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। धन के मामले में किसी पर आंख बंद करके भरोसा न करें। प्रेम संबंधों में बातचीत से गलतफहमी दूर हो सकती है।

    कन्या राशि के जातकों के लिए दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण रह सकता है। बुध की मजबूत स्थिति के कारण पढ़ाई लेखन बातचीत योजना बनाने और काम को व्यवस्थित करने में फायदा मिल सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। कारोबारियों को भी किसी नए अवसर पर विचार करने का मौका मिल सकता है।

    तुला राशि वालों के लिए रिश्तों और करियर दोनों मोर्चों पर संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है। काम के सिलसिले में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में स्थिति सामान्य से बेहतर रहने के संकेत हैं लेकिन अनावश्यक खरीदारी से बचना लाभकारी रहेगा।

    वृश्चिक राशि वालों को आज अपनी योजनाओं को गोपनीय रखते हुए धीरे धीरे आगे बढ़ना चाहिए। किसी करीबी व्यक्ति की सलाह काम आ सकती है। नौकरी में बदलाव का विचार कर रहे लोगों को अभी पूरी तरह जांच पड़ताल करने के बाद ही कदम उठाना चाहिए। परिवार में माहौल सामान्य रहेगा।

    धनु राशि के लिए आज का दिन नई संभावनाओं से भरा रह सकता है। यात्रा शिक्षा या नए लोगों से संपर्क के जरिए कोई उपयोगी अवसर सामने आ सकता है। लंबे समय से अटका काम आगे बढ़ सकता है। हालांकि स्वास्थ्य और आराम को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।

    मकर राशि वालों को काम का दबाव महसूस हो सकता है लेकिन मेहनत का परिणाम भी मिलने की संभावना है। आर्थिक मामलों में सोच समझकर फैसला लें। किसी पुराने परिचित से मिलने वाली जानकारी भविष्य में लाभ दे सकती है। परिवार के बुजुर्गों का सहयोग मिलेगा।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए आज सामाजिक और व्यावसायिक संपर्क बढ़ सकते हैं। नई योजना पर काम करने का अवसर मिलेगा। धन से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है। किसी पुराने विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश सफल हो सकती है।

    मीन राशि वालों के लिए रिश्तों और साझेदारी से जुड़े मामलों पर ध्यान देने का दिन है। परिवार और जीवनसाथी के साथ खुलकर बातचीत करने से मन की उलझन कम होगी। कामकाज में दिनचर्या को व्यवस्थित रखना फायदेमंद रहेगा। अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान देंगे तो आने वाले दिनों में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं। ज्योतिषीय फलादेश को निश्चित भविष्यवाणी के बजाय पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के रूप में देखना बेहतर है।

  • वास्तु शास्त्र में नमक रखने की सही दिशा मानी जाती है महत्वपूर्ण, जानिए किचन में नमक रखने से जुड़े खास नियम

    वास्तु शास्त्र में नमक रखने की सही दिशा मानी जाती है महत्वपूर्ण, जानिए किचन में नमक रखने से जुड़े खास नियम

    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की अलग-अलग दिशाओं और उनमें रखी जाने वाली वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि वस्तुओं को सही दिशा में रखने से घर के वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसी तरह नमक को लेकर भी वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं। नमक सामान्य तौर पर हर रसोई का जरूरी हिस्सा होता है, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार इसे रखने की दिशा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    कई बार परिवार में कमाई अच्छी होने के बावजूद बचत नहीं हो पाती। पैसा आता है, लेकिन किसी न किसी वजह से खर्च हो जाता है। ऐसी स्थिति को लेकर वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और वस्तुओं की स्थिति पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। नमक को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार नमक को किचन में उचित स्थान पर रखना चाहिए। रसोई घर का ऐसा हिस्सा है जहां भोजन तैयार होता है और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण वस्तुएं रखी जाती हैं। इसलिए नमक रखने के स्थान को लेकर भी वास्तु के नियमों का पालन करने की बात कही जाती है।

    नमक को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में इसे नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने वाला माना जाता है। इसी वजह से घर में नमक के इस्तेमाल और उसके रखरखाव को लेकर कई तरह के उपाय बताए जाते हैं।

    वास्तु के अनुसार किचन में नमक को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां वह साफ-सुथरा और व्यवस्थित रहे। नमक का डिब्बा खुला छोड़ने के बजाय उसे अच्छी तरह बंद करके रखने की सलाह दी जाती है। इससे नमक नमी से भी बचा रहता है और रसोई में साफ-सफाई बनी रहती है।

    घर में नमक रखने को लेकर दिशाओं का भी उल्लेख किया जाता है। वास्तु मान्यताओं में कुछ दिशाओं को नमक रखने के लिए अनुकूल माना जाता है, जबकि कुछ स्थानों पर इसे रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इन नियमों का उद्देश्य घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना बताया जाता है।

    नमक को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे बिखरा हुआ नहीं रखना चाहिए। यदि नमक गिर जाए तो उसे तुरंत साफ कर देना चाहिए। वास्तु में नमक के बिखरने को अच्छा संकेत नहीं माना जाता। हालांकि, ये बातें धार्मिक और वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं और इनका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    इसी तरह नमक का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी रखने की सलाह दी जाती है। रसोई में जरूरी सामान को व्यवस्थित तरीके से रखने से रोजमर्रा के काम आसान होते हैं। नमक जैसी नियमित उपयोग की वस्तु को निर्धारित स्थान पर रखने से किचन भी व्यवस्थित रहता है।

    पैसे के टिकने और आर्थिक स्थिति को लेकर वास्तु में बताए गए इन उपायों को मान्यता के रूप में ही देखा जाना चाहिए। केवल नमक को किसी विशेष दिशा में रखने से धन दोगुना होने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है। आर्थिक स्थिति पर आय, खर्च, बचत और वित्तीय प्रबंधन जैसे वास्तविक कारकों का प्रभाव पड़ता है।

    इसलिए यदि कोई व्यक्ति वास्तु मान्यताओं का पालन करता है तो नमक रखने से जुड़े इन नियमों को अपनी आस्था के अनुसार अपना सकता है। साथ ही आर्थिक स्थिरता के लिए आय और खर्च का संतुलन बनाए रखना तथा नियमित बचत पर ध्यान देना भी जरूरी है।

  • सूर्य गोचर 2026: 17 सितंबर के बाद वृश्चिक और धनु राशि वालों के करियर में बन सकते हैं सफलता के नए योग

    सूर्य गोचर 2026: 17 सितंबर के बाद वृश्चिक और धनु राशि वालों के करियर में बन सकते हैं सफलता के नए योग


    नई दिल्ली । 17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। अब कन्या राशि में पहुंचने के बाद सूर्य केतु के प्रभाव से अलग हो जाएंगे। ऐसे में कुछ राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से परिस्थितियां बेहतर होने के संकेत हैं। आइए जानते हैं ये लकी राशियां कौन सी हैं।

    ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, नेतृत्व, पद-प्रतिष्ठा और करियर का प्रमुख कारक माना जाता है। जब सूर्य की चाल बदलती है, तो इसका असर व्यक्ति के कार्यक्षेत्र और उपलब्धियों पर भी देखने को मिल सकता है। सितंबर के मध्य में सूर्य एक बार फिर राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 17 सितंबर को सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि सिंह राशि में सूर्य की केतु के साथ युति बन रही थी, जिससे कुछ राशियों को कार्यक्षेत्र में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता था। अब कन्या राशि में पहुंचने के बाद सूर्य केतु के प्रभाव से अलग हो जाएंगे। ऐसे में कुछ राशि के जातकों के लिए करियर के लिहाज से परिस्थितियां बेहतर होने के संकेत हैं। आइए जानते हैं ये लकी राशियां कौन सी हैं।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश लाभ के नए अवसर लेकर आ सकता है। सूर्य आपके एकादश भाव में गोचर करेंगे, जिसे आमदनी, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति से संबंधित माना जाता है। ऐसे में कारोबार से जुड़े लोगों को अपने प्रयासों का अच्छा परिणाम मिल सकता है। व्यापार में नए संपर्क बनने और आर्थिक लाभ के अवसर बढ़ने की संभावना है।

    जो लोग लंबे समय से अपना काम शुरू करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। नौकरी करने वाले जातकों के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है। आय में बढ़ोतरी के साथ करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भी अच्छी खबर मिल सकती है।

    धनु राशि

    सूर्य का राशि परिवर्तन धनु राशि के जातकों के करियर के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आपके लिए सूर्य का गोचर कर्म भाव यानी दसवें भाव में होने जा रहा है। यह स्थान नौकरी, पेशा, प्रतिष्ठा और कार्यक्षेत्र से जुड़ा माना जाता है। इसलिए इस दौरान करियर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ऑफिस में आपके काम और मेहनत की सराहना हो सकती है।

    लंबे समय से पदोन्नति की उम्मीद कर रहे जातकों को अच्छी खबर मिल सकती है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी समय उत्साह बढ़ाने वाला रह सकता है। यदि आप नौकरी बदलने के बारे में विचार कर रहे हैं, तो 17 सितंबर के बाद नए अवसर मिल सकते हैं। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे धनु राशि के जातकों को भी सफलता की दिशा में आगे बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं।