Category: Religious Astrology

  • बुधवार व्रत विधि: कब और कैसे शुरू करें, जानें पूरी पूजा प्रक्रिया

    बुधवार व्रत विधि: कब और कैसे शुरू करें, जानें पूरी पूजा प्रक्रिया


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और सनातन परंपरा में सप्ताह के हर दिन का विशेष महत्व बताया गया है। बुधवार का दिन विशेष रूप से भगवान श्री गणेश और नवग्रहों के राजकुमार बुध देवता को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में बुद्धि, विवेक, धन, करियर और कारोबार में सकारात्मक परिवर्तन आता है।
    बुधवार व्रत कब और कैसे शुरू करें
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार व्रत की शुरुआत किसी भी हिंदी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले बुधवार से करना शुभ माना जाता है। यदि उस दिन बुध ग्रह का विशेष नक्षत्र हो, तो इसका फल और भी अधिक बढ़ जाता है। व्रत को कम से कम 21 या 45 बुधवार तक रखने की परंपरा बताई गई है। यदि किसी कारणवश व्रत टूट जाए, तो आगे से फिर नियमपूर्वक इसे जारी रखा जा सकता है और अंत में उद्यापन करना आवश्यक माना जाता है।

    बुधवार व्रत की पूजा विधि
    व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ या हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान में भगवान गणेश और बुध देव की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर विधिवत पूजा की जाती है। गणपति को दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी गई है, इसलिए 21 गांठों वाली दूर्वा अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। इसके साथ ही बुध देवता को हरे रंग की वस्तुएं, हरी मूंग दाल या हरे वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान बुध मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी बताया गया है। अंत में गणेश जी और बुध देव की आरती कर व्रत पूर्ण किया जाता है।

    व्रत के प्रमुख लाभ और धार्मिक महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार व्रत करने से व्यक्ति की बुद्धि तेज होती है और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। करियर और व्यवसाय में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना गया है जो नौकरी, व्यापार या शिक्षा में प्रगति चाहते हैं।

    बुधवार व्रत का उद्यापन कैसे करे
    व्रत अवधि पूरी होने के बाद उद्यापन करना आवश्यक माना जाता है। उद्यापन के दिन सुबह स्नान कर गणेश और बुध देव की विशेष पूजा की जाती है। इसके बाद बुध मंत्रों का अधिक संख्या में जाप और हवन करने की परंपरा है। अंत में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को दान दिया जाता है। इससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
  • जून 2026 वाहन खरीद मुहूर्त: 17 से 29 तक 7 दिन रहेंगे सबसे शुभ, जानें पूरी डिटेल

    जून 2026 वाहन खरीद मुहूर्त: 17 से 29 तक 7 दिन रहेंगे सबसे शुभ, जानें पूरी डिटेल




    नई दिल्ली। जून 2026 में नई गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए पंचांग के अनुसार खास शुभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक इस समय अधिक मास (मलमास) का प्रभाव चल रहा है, जिसकी वजह से मई 2026 में वाहन खरीदने जैसे मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जा रहा है। ऐसे में अब लोगों की नजर जून महीने के शुभ मुहूर्तों पर टिकी है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जून 2026 में 17 जून से 29 जून के बीच कुल 7 ऐसे दिन हैं, जब वाहन खरीदना शुभ फल देने वाला माना गया है। इन दिनों में अलग-अलग नक्षत्रों का शुभ संयोग बन रहा है, जो नई शुरुआत और समृद्धि के लिए अनुकूल माने जाते हैं।

    जून 2026 के शुभ वाहन खरीद मुहूर्त इस प्रकार हैं:
    17 जून (बुधवार) – पुनर्वसु नक्षत्र
    19 जून (शुक्रवार) – आश्लेषा नक्षत्र
    21 जून (रविवार) – पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र
    22 जून (सोमवार) – उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र
    24 जून (बुधवार) – चित्रा नक्षत्र
    27 जून (शनिवार) – अनुराधा नक्षत्र
    29 जून (सोमवार) – मूल नक्षत्र

    इन तारीखों को वाहन खरीदना विशेष रूप से शुभ माना गया है क्योंकि इन दिनों में नक्षत्रों का ऐसा संयोग बनता है, जो नए कार्यों की शुरुआत के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।

    विशेष मुहूर्त की खास बातें:
    17 जून को पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग वाहन खरीद के लिए बेहद अनुकूल रहेगा।
    19 जून को आश्लेषा नक्षत्र के दौरान सुबह का समय खास शुभ बताया गया है।
    21 और 22 जून को लगातार शुभ नक्षत्रों का प्रभाव रहेगा, जिससे इन दिनों में खरीदारी लाभकारी मानी गई है।
    27 और 29 जून को अंतिम शुभ संयोग बन रहा है, जो वाहन खरीद के लिए उत्तम अवसर माना जा रहा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन शुभ मुहूर्तों में खरीदी गई नई गाड़ी जीवन में सुख, समृद्धि और प्रगति का संकेत देती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि वाहन खरीदते समय केवल मुहूर्त ही नहीं, बल्कि अपनी आवश्यकता, बजट और उपयोगिता का भी ध्यान रखना जरूरी है।

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  • बुधवार के उपाय: धन-वैभव और करियर में तरक्की पाने के आसान टोटके

    बुधवार के उपाय: धन-वैभव और करियर में तरक्की पाने के आसान टोटके


    नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार बुधवार का संबंध भगवान गणेश और बुध ग्रह से माना गया है। बुध ग्रह को बुद्धि, व्यापार, वाणी और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में बुध कमजोर हो, तो व्यक्ति को आर्थिक परेशानी, मानसिक तनाव और करियर में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन कुछ सरल उपाय अपनाकर जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता पाई जा सकती है।

    बुध ग्रह को मजबूत करने के उपाय
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बुधवार के दिन बुध ग्रह से जुड़े मंत्रों का जाप बेहद लाभकारी माना गया है।

    बीज मंत्र:
    “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः”
    इस मंत्र का श्रद्धा के साथ जाप करने से बुद्धि तेज होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है।

    धन-समृद्धि के लिए करें ये उपाय
    बुधवार के दिन हरे रंग की वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। विशेष रूप से—
    हरी मूंग दाल का दान करें
    जरूरतमंदों को हरी वस्तुएं दें
    मान्यता है कि इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

    कर्ज और आर्थिक संकट से मुक्ति का उपाय
    यदि कोई व्यक्ति आर्थिक तंगी या कर्ज से परेशान है, तो बुधवार के दिन ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
    यह उपाय जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने और आर्थिक स्थिरता देने में सहायक माना जाता है।

    गणपति बप्पा को प्रसन्न करने के सरल उपाय
    बुधवार के दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए ये उपाय करें-
    गणेश जी को 11 या 21 दूर्वा अर्पित करें
    “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें
    गणेश जी की विधिवत पूजा करें
    इन उपायों से जीवन में रुकावटें दूर होने और कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।

    गौ सेवा से मिलेगा सौभाग्य
    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन गाय को हरी घास खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे-
    सौभाग्य में वृद्धि होती है
    मानसिक शांति मिलती है
    जीवन की परेशानियां कम होती हैं

     बुध दोष से मुक्ति के उपाय
    यदि कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो तो माता दुर्गा की उपासना करना लाभकारी माना जाता है।

    मंत्र:
    “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”
    इस मंत्र का नियमित जाप करने से बुध दोष कम होता है और जीवन में सकारात्मकता बढ़ती है।

    बुधवार के दिन किए गए ये सरल उपाय जीवन में धन, बुद्धि और सफलता के मार्ग खोल सकते हैं। श्रद्धा और नियमितता के साथ इन उपायों को अपनाने से करियर और कारोबार में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं।

  • मीन राशिफल (20 मई 2026): मिला-जुला रहेगा दिन, सेहत और खर्च पर रखें ध्यान

    मीन राशिफल (20 मई 2026): मिला-जुला रहेगा दिन, सेहत और खर्च पर रखें ध्यान


    नई दिल्ली। मीन राशि के जातकों के लिए 20 मई 2026 का दिन मिश्रित परिणाम लेकर आ सकता है। दिन की शुरुआत थोड़ी सामान्य रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ेगा, कामकाज में अतिरिक्त दबाव महसूस हो सकता है।

    Pisces वालों को आज अपनी ऊर्जा सकारात्मक दिशा में लगाने की जरूरत होगी। मन में उत्साह रहेगा, लेकिन काम की अधिकता के कारण थकान भी महसूस हो सकती है।

    आर्थिक मामलों में किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-विचार करना जरूरी होगा। अनावश्यक खर्च बढ़ सकता है, इसलिए बजट पर नियंत्रण रखें। निवेश या लेन-देन में जल्दबाजी नुकसानदायक हो सकती है।

    सेहत को लेकर भी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बदलते मौसम या तनाव के कारण हल्की परेशानी हो सकती है, इसलिए आराम और संतुलित दिनचर्या अपनाएं।

    परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी और दिन के तनाव में कमी आएगी।

    मीन राशि वालों के लिए यह दिन न तो बहुत अच्छा और न ही बहुत खराब रहेगा। धैर्य और संतुलन से दिन को बेहतर बनाया जा सकता है।

  • नारद पुराण: मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा और पाप-पुण्य के फल का रहस्य, जानिए आत्मा को कैसे मिलते हैं परिणाम

    नारद पुराण: मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा और पाप-पुण्य के फल का रहस्य, जानिए आत्मा को कैसे मिलते हैं परिणाम



    नई दिल्ली। नारद पुराण में जीवन, मृत्यु और परलोक से जुड़े गहरे रहस्यों का वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि मृत्यु के बाद आत्मा अपने कर्मों के अनुसार यमलोक की यात्रा करती है और वहीं उसे पाप और पुण्य का फल प्राप्त होता है। शास्त्रों के अनुसार यह यात्रा साधारण नहीं होती, बल्कि यह पूरी तरह व्यक्ति के जीवन में किए गए कर्मों पर निर्भर करती है।

    नारद पुराण के अनुसार यमलोक का मार्ग अत्यंत लंबा बताया गया है, जिसे छियासी हजार योजन तक फैला हुआ कहा गया है। मान्यता के अनुसार एक योजन लगभग 13 किलोमीटर के बराबर होता है, ऐसे में यह दूरी अत्यंत विशाल मानी जाती है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में धर्म, दान और पुण्य कर्म करता है, उसकी यह यात्रा सरल और सुखद होती है, जबकि पाप कर्म करने वालों को इस मार्ग में कठिनाइयों और कष्टों का सामना करना पड़ता है।

    पुराणों में वर्णन मिलता है कि यमलोक के मार्ग में अनेक प्रकार की बाधाएं आती हैं, कहीं कीचड़, कहीं अग्नि, कहीं तीखी धार वाली शिलाएं और कहीं कांटों से भरे मार्ग मिलते हैं। पाप कर्म करने वाले जीवों को यमदूत विभिन्न प्रकार की पीड़ाओं के बीच यमलोक तक ले जाते हैं। वे भय और कष्ट के साथ अपनी यात्रा पूरी करते हैं और अपने जीवन के पापों का फल भोगते हैं।

    इसके विपरीत, जो लोग अपने जीवन में दान-पुण्य और धर्म का पालन करते हैं, उन्हें इस मार्ग में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ता। ऐसे जीवों को उत्तम भोजन, वस्त्र, आभूषण और सुख-सुविधाएं प्राप्त होती हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि अन्न दान करने वाले को उत्तम भोजन, जल दान करने वाले को शीतल पेय, वस्त्र दान करने वाले को दिव्य वस्त्र और गोदान करने वाले को विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

    नारद पुराण में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है, ब्राह्मणों का सम्मान करता है, धर्म का पालन करता है और सदैव ईश्वर के ध्यान में लीन रहता है, उसे यमलोक की यात्रा में विशेष सम्मान मिलता है और वह सुखपूर्वक धर्मराज के लोक तक पहुंचता है।

    अंत में धर्मराज जीवों को उनके कर्मों के अनुसार निर्णय देते हैं। पुण्यात्माओं को स्वर्ग और सुखमय लोक प्राप्त होता है, जबकि पापियों को उनके कर्मों के अनुसार कष्टदायक फल भोगना पड़ता है। पुराणों में यह संदेश दिया गया है कि मानव जीवन दुर्लभ है और इसे धर्म, सत्य, दान और अच्छे कर्मों में लगाना चाहिए, क्योंकि अंततः हर जीव को अपने कर्मों का ही फल प्राप्त होता है।

  • गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख और स्नान मुहूर्त को लेकर असमंजस खत्म

    गंगा दशहरा 2026 की सही तारीख और स्नान मुहूर्त को लेकर असमंजस खत्म


    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मनाया जाने वाला पावन पर्व Ganga Dussehra इस वर्ष 2026 में 24 मई की शाम से शुरू होकर 25 मई की दोपहर तक रहेगा। इसी कारण इसकी सही तिथि को लेकर श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी कि पर्व 24 मई को मनाया जाए या 25 मई को।

    पंचांग गणना के अनुसार उदया तिथि को महत्व देते हुए इस बार गंगा दशहरा 25 मई 2026, सोमवार को मनाना ही शास्त्रसम्मत और शुभ माना जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और इसी कारण इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। इसी वजह से देशभर में प्रयागराज, वाराणसी और हरिद्वार जैसे तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

    इस वर्ष गंगा स्नान के लिए दो प्रमुख शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:40 से 05:23 बजे तक और अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:17 से 01:10 बजे तक। इसके अलावा सूर्योदय के समय 06:06 बजे स्नान और सूर्य अर्घ्य देना भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस बार हस्त नक्षत्र और रवि योग का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि यह पर्व धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार

    बड़ा मंगल का शुभ योग, इन 5 राशियों के लिए खुलेंगे धन और सफलता के द्वार



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बड़ा मंगल का दिन इस बार बेहद खास माना जा रहा है क्योंकि इस दिन Gajakesari Rajyog का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस योग का निर्माण तब होता है जब गुरु ग्रह और चंद्रमा एक ही राशि में आकर युति करते हैं। 19 मई 2026 को यह संयोग मिथुन राशि में बन रहा है, जिससे इसका प्रभाव और अधिक शक्तिशाली माना जा रहा है।

    ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार यह योग व्यक्ति के जीवन में धन लाभ, सफलता, मान-सम्मान और रुके हुए कार्यों में प्रगति का संकेत देता है। विशेष रूप से कुछ राशियों पर इसका प्रभाव अधिक शुभ बताया जा रहा है। मेष राशि के जातकों के लिए कार्यस्थल पर सराहना और आर्थिक लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि उन्हें क्रोध और फिजूलखर्ची से बचने की सलाह दी गई है।

    वृषभ राशि वालों के लिए यह समय करियर में उन्नति और पारिवारिक सुख लेकर आ सकता है, वहीं मिथुन राशि के जातकों के लिए यह योग सबसे अधिक फलदायी माना जा रहा है क्योंकि यह युति उनकी ही राशि में बन रही है, जिससे जीवन में सकारात्मक बदलाव और आर्थिक मजबूती के संकेत हैं। सिंह राशि वालों के लिए अचानक धन लाभ और प्रमोशन के अवसर बन सकते हैं, जबकि मीन राशि के जातकों के लिए सुख-सुविधाओं में वृद्धि और रुका हुआ धन मिलने की संभावना बताई जा रही है।

    हालांकि यह ज्योतिषीय मान्यता पर आधारित भविष्यफल है और वास्तविक परिणाम व्यक्ति के कर्म और परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।

  • शरीर पर छिपकली गिरना शुभ या अशुभ? सामुद्रिक शास्त्र में जानें हर अंग का संकेत

    शरीर पर छिपकली गिरना शुभ या अशुभ? सामुद्रिक शास्त्र में जानें हर अंग का संकेत



    नई दिल्ली। प्राचीन मान्यताओं और ज्योतिषीय ग्रंथ Samudrik Shastra में शरीर पर छिपकली गिरने को केवल एक सामान्य घटना नहीं बल्कि एक संकेत के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर छिपकली गिरने का अर्थ अलग-अलग फल देता है, जो व्यक्ति के जीवन में शुभ या अशुभ घटनाओं की ओर इशारा कर सकता है।

    सिर पर छिपकली गिरना अत्यंत शुभ माना जाता है और इसे धन, सम्मान या बड़े अवसर की प्राप्ति का संकेत बताया गया है। वहीं माथे पर गिरना किसी पुराने परिचित से मुलाकात या सामाजिक मान-सम्मान बढ़ने का संकेत देता है। नाक पर छिपकली गिरने को स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें रोग से राहत मिलने की संभावना बताई जाती है।

    कान पर छिपकली गिरना शुभ समाचार या लाभ का संकेत माना जाता है, जबकि आंख पर गिरना मानसिक तनाव से मुक्ति का प्रतीक बताया जाता है। होंठों पर इसके प्रभाव को आर्थिक स्थिति से जोड़ा गया है, जिसमें ऊपर के होंठ पर गिरना नुकसान और नीचे के होंठ पर गिरना लाभ का संकेत माना जाता है।

    हाथों पर छिपकली गिरने के भी अलग अर्थ बताए गए हैं—दाहिने हाथ पर गिरना सफलता और सम्मान का संकेत है, जबकि बाएं हाथ पर इसे सावधानी का संकेत माना गया है। पेट और नाभि क्षेत्र पर गिरना सुख-समृद्धि और संतान सुख से जुड़ा शुभ संकेत माना जाता है।

    पीठ पर छिपकली गिरना आमतौर पर अशुभ माना जाता है, जबकि पैर या जांघ पर इसका गिरना यात्रा, स्थान परिवर्तन या वाहन सुख से जुड़ा संकेत बताया जाता है।

    हालांकि यह सभी मान्यताएं पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं और इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, फिर भी लोग इन्हें लोक आस्था और ज्योतिषीय संकेत के रूप में देखते हैं।

  • वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

    वास्तु और शास्त्रों की चेतावनी, दरवाजे के पीछे लटकाई ये चीजें रोक सकती हैं सुख-समृद्धि का रास्ता

    नई दिल्ली ।  Shakun Apshakun: अधिकांश घर में लोग जगह की बचाने के लिए दरवाजे के पीछे, बैग, कपड़े, इत्यादि सामान लटाका देते हैं. वैसे तो लोग इस आदत पर बहुत ध्यान नहीं देते, लेकिन शास्त्रों में इसके बड़े नुकसान बताए गए हैं. शास्त्रों की मानें तो दरवाजे के पीछे सामान लटकाना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है.
    ऐसा इसलिए क्योंकि शास्त्रों में इसे अशुभ माना गया है. मान्यता है कि कुछ चीजों को दरवाजे के पीछे लटकाने से निगेटिव एनर्जी बढ़ने लगती है. साथ ही परिवार की आर्थिक तरक्की में अनेक प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होने लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक, घर के मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को बेहद साफ-सुथरा रखना चाहिए. आइए, अब जानते हैं कि दरवाजे के पीछे किन चीजों की लटकाना अशुभ माना गया है.

    दरवाजे के पीछे ना लटकाएं कपड़े

    शास्त्र-पुराणों के अनुसार, दरवाजे के पीछे कभी भी सूखे या भींगे कपड़े नहीं लटकाना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना गया है. दरवाजे के पीछे टंगे भींगे कपड़े भयानक वास्तु दोष उत्पन्न करते हैं. इसकी वजह से सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है. कहा जाता है कि लगातार ऐसा करने से तनाव, कलह और आर्थिक नुकसान की संभावना बढ़ जाती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो ऐसा करने से राहु दोष भी उत्पन्न हो सकता है.

    पुराने बैग और दवाइयां
    वास्तु शास्त्र की मानें तो दरवाजे के पीछे दवाइयों का थैला, पुराने बैग इत्यादि टांगने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ने लगता है. वास्तु एक्सपर्ट के मुताबिक, ऐसा करने से परिवार के सदस्य बीमारियों से घिरे रहते हैं. कमाई का अधिकांश हिस्सा इलाज पर खर्च होता है. इसके अलावा दरवाजे के पीछे पुराने कैलेंडर को भी लटकाने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि इससे करियर में तरक्की रुक जाती है

    जूते और चप्पल
    शकुन शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे जूते-चप्पल इत्यादि के थैले को भी नहीं टांगना चाहिए. मान्यता है कि इससे घर में दरिद्रता का प्रवेश होने लगता है. इस स्थिति में अच्छी कमाई के बावजूद भी धन नहीं टिकता है. इसलिए, दरवाजे के पीछे भूलकर भी जूते-चप्पल ना लटकाएं

    कैसे दूर होगी निगेटिव एनर्जी?
    वास्तु और ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, दरवाजे के पीछे का हिस्सा बिल्कुल साफ और खाली रखना चाहिए. इसके साथ ही वास्तु दोष को दूर करने के लिए वहां स्वास्तिक का चिह्न बनाना शुभ होता है. ऐसा करने से घर की निगेटिव एनर्जी दूर होने लगती है.

  • Adhik Maas 2026: अधिकमास में करें 33 देवों का पूजन, गंगा दशहरा पर मिलेगा महापुण्य

    Adhik Maas 2026: अधिकमास में करें 33 देवों का पूजन, गंगा दशहरा पर मिलेगा महापुण्य



    नई दिल्ली। सनातन परंपरा में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसी दौरान गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में पूजा-पाठ, स्नान, दान और भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों का स्मरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

    ज्योतिष और धर्म ग्रंथों के अनुसार, गंगा दशहरा का दस दिवसीय पर्व 17 मई 2026 से प्रारंभ होकर 26 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य और विशेष पूजन करेंगे। निर्णयसिंधु ग्रंथ में उल्लेख मिलता है कि जब ज्येष्ठ मास में अधिकमास पड़ता है, तब गंगा दशहरा का पर्व उसी अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में मनाना शास्त्र सम्मत माना जाता है।

    इस बार गंगा दशहरा 26 मई 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह दिन अत्यंत शुभ माना जा रहा है। हस्त नक्षत्र, कन्या राशि का चंद्रमा और वृष राशि में सूर्य का विशेष संयोग इस पर्व को महापुण्यकारी बना रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इसी प्रकार के योग में मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था।

    अधिकमास में 33 देवों की पूजा का महत्व
    अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। प्राचीन ग्रंथों में इस मास में भगवान विष्णु के 33 स्वरूपों के पूजन और नामस्मरण का विशेष महत्व बताया गया है।

    इन 33 देव स्वरूपों में विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, केशव, माधव, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, नारायण, त्रिविक्रम, वासुदेव, शेषशायी, दामोदर और श्रीपति जैसे दिव्य नाम शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन नामों का श्रद्धा से जप करने पर जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

    अधिकमास में करें ये विशेष उपाय
    धर्माचार्यों के अनुसार, अधिकमास में दान और सेवा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस अवधि में 33 पुए कांसे के पात्र में रखकर घी सहित ब्राह्मण को दान करने से 33 प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    इसके अलावा गंगा स्नान, विष्णु सहस्रनाम का पाठ, दीपदान, अन्नदान और जरूरतमंदों की सहायता करने से भी विशेष पुण्य मिलता है।

    क्यों खास माना जाता है पुरुषोत्तम मास?
    अधिकमास हर तीन वर्ष में एक बार आता है। हिंदू पंचांग में चंद्र और सौर गणना के संतुलन के लिए इसे जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब किसी मास का कोई स्वामी ग्रह नहीं होता, तब भगवान विष्णु उसे अपना नाम देकर पुरुषोत्तम मास का दर्जा देते हैं। इसी कारण यह महीना भक्ति, तप और दान के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है।