Category: Religious Astrology

  • चैत्र नवरात्र 2026: डोली में आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर होगा प्रस्थान; 72 साल बाद बन रहा विशेष संयोग

    चैत्र नवरात्र 2026: डोली में आएंगी मां दुर्गा, हाथी पर होगा प्रस्थान; 72 साल बाद बन रहा विशेष संयोग

    नई दिल्ली । शक्ति उपासना का महान पर्व चैत्र नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार नवरात्र की शुरुआत गुरुवार से हो रही है जिसके कारण शास्त्रीय मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का आगमन डोली पर माना जा रहा है। धार्मिक ग्रंथों में डोली में माता के आगमन को महामारी संघर्ष या प्राकृतिक चुनौतियों का संकेत माना गया है जो समाज को सावधान और सतर्क रहने का संदेश देता है। हालांकि इस बार माता रानी का प्रस्थान हाथी पर होगा जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। हाथी पर माता का गमन अच्छी वर्षा समृद्ध कृषि आर्थिक उन्नति और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि कई विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि लगभग 72 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है जब अमावस्या तिथि के साये में ही कलश स्थापना की जाएगी। सामान्यतः प्रतिपदा तिथि में घट स्थापना का विधान होता है लेकिन इस बार सूर्योदय अमावस्या तिथि में होने के कारण शास्त्रों के अनुसार उसी समय विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य भोला पंडित के अनुसार यह दुर्लभ संयोग आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी। हालांकि उस समय सूर्योदय अमावस्या तिथि में रहेगा इसलिए शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार उसी अवधि में कलश स्थापना करना शुभ माना जाएगा। इस दिन शुक्ल योग ब्रह्म योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का त्रिवेणी संगम भी बन रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह महासंयोग भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। गुरुवार से पर्व शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन डोली पर होगा जिसे चुनौतियों का संकेत माना गया है लेकिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन में सुख शांति और समृद्धि के द्वार खोल सकती है।

    नवरात्रि के पहले दिन यानी 19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला श्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 2 मिनट से 8 बजकर 40 मिनट तक रहेगा जबकि दूसरा शुभ समय सुबह 9 बजकर 16 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इन स्थिर लग्नों में घट स्थापना करने से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    नवरात्र पर्व को लेकर धार्मिक स्थलों और मंदिरों में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी अंजोरा से लेकर डोंगरगढ़ तक भक्तों की सुविधा के लिए सेवा पंडाल लगाए जाएंगे। मंदिर समितियों और सेवादारों द्वारा व्यवस्थाएं की जा रही हैं ताकि दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। वहीं जिला प्रशासन ने भी बैठक कर सुरक्षा यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं।

    इस तरह चैत्र नवरात्र का यह पावन पर्व न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है बल्कि विशेष ज्योतिषीय संयोगों के कारण इस वर्ष इसे और भी अधिक महत्वपूर्ण और फलदायी माना जा रहा है।

  • Fridge Vastu Tips: फ्रिज के ऊपर भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष

    Fridge Vastu Tips: फ्रिज के ऊपर भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना घर में बढ़ सकता है वास्तु दोष


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की हर वस्तु के स्थान दिशा और उसके उपयोग को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि यदि घर में चीजें सही स्थान और संतुलन के साथ रखी जाएं तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। खासतौर पर रसोईघर को घर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है क्योंकि यह स्वास्थ्य और समृद्धि से जुड़ा होता है। रसोई में रखे फ्रिज का भी वास्तु के अनुसार विशेष महत्व बताया गया है। कई लोग जगह की कमी या सुविधा के कारण फ्रिज के ऊपर विभिन्न प्रकार की वस्तुएं रख देते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें फ्रिज के ऊपर रखना अशुभ माना जाता है।

    सबसे पहले बात करें भारी सामान की। अक्सर देखा जाता है कि लोग फ्रिज के ऊपर बड़े बर्तन डिब्बे या अन्य भारी सामान रख देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना ठीक नहीं माना जाता। फ्रिज पहले से ही एक भारी और स्थिर ऊर्जा वाला उपकरण होता है ऐसे में उसके ऊपर अतिरिक्त वजन रखने से घर की ऊर्जा का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे परिवार के सदस्यों के बीच तनाव या असहजता का माहौल बन सकता है। इसलिए बेहतर माना जाता है कि फ्रिज के ऊपर ज्यादा भारी सामान न रखा जाए और उस स्थान को हल्का रखा जाए।

    दूसरी महत्वपूर्ण चीज है दवाइयां। कई घरों में दवाइयों का डिब्बा ऐसी जगह रखा जाता है जहां वह आसानी से मिल सके। इसी कारण लोग उसे फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। हालांकि वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। फ्रिज ठंडक और स्थिर ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है जबकि दवाइयां बीमारी और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ी मानी जाती हैं। ऐसे में दोनों को एक साथ रखने से घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ने की संभावना मानी जाती है।

    इसके अलावा फ्रिज के ऊपर इलेक्ट्रॉनिक सामान रखना भी सही नहीं माना जाता। कई लोग चार्जर एक्सटेंशन बोर्ड एडेप्टर या छोटी इलेक्ट्रॉनिक लाइट्स फ्रिज के ऊपर रख देते हैं। लेकिन फ्रिज स्वयं एक शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा उत्पन्न करता है। ऐसे में उसके ऊपर अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने से ऊर्जा का असंतुलन बढ़ सकता है। वास्तु के अनुसार इससे घर में चिड़चिड़ापन तनाव और आपसी मतभेद बढ़ने की संभावना रहती है।

    धार्मिक वस्तुओं को भी फ्रिज के ऊपर रखना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना गया है। कई लोग भगवान की तस्वीर पूजा से जुड़ी सामग्री या धार्मिक पुस्तकें फ्रिज के ऊपर रख देते हैं लेकिन ऐसा करना धार्मिक दृष्टि से भी सही नहीं माना जाता। फ्रिज एक सामान्य घरेलू उपकरण है इसलिए इसके ऊपर धार्मिक वस्तुएं रखने से उनका सम्मान कम माना जाता है। पूजा से संबंधित वस्तुओं को हमेशा घर के मंदिर या किसी पवित्र स्थान पर ही रखना चाहिए।

    इसी तरह कुछ लोग सजावट के लिए फ्रिज के ऊपर छोटा पौधा या पानी से भरा बर्तन भी रख देते हैं। वास्तु के अनुसार यह भी उचित नहीं माना जाता। फ्रिज बिजली से चलने वाला उपकरण है और उसके ऊपर पानी या पौधा रखने से ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसलिए बेहतर माना जाता है कि फ्रिज के ऊपर का स्थान साफ हल्का और लगभग खाली रखा जाए ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।

  • रहस्यमयी बुढ़िया माई मंदिर: अनहोनी से पहले मिलती है चेतावनी, कुसम्ही जंगल में आस्था का अद्भुत केंद्र

    रहस्यमयी बुढ़िया माई मंदिर: अनहोनी से पहले मिलती है चेतावनी, कुसम्ही जंगल में आस्था का अद्भुत केंद्र


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व 19 मार्च से शुरू होने जा रहा है। इस दौरान देशभर के शक्तिपीठों और सिद्धपीठ मंदिरों में मां दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना व्रत हवन और कन्या पूजन के आयोजन किए जाते हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित कुसम्ही जंगल का बुढ़िया माई मंदिर भी इन दिनों विशेष चर्चा में रहता है। घने जंगल के बीच स्थित यह मंदिर अपनी रहस्यमयी मान्यताओं और चमत्कारी कथाओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह मंदिर भक्तों को होने वाली अनहोनी से पहले चेतावनी देता है इसलिए इसे काल से जुड़ा मंदिर भी माना जाता है।

    बुढ़िया माई मंदिर गोरखपुर शहर से लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर कुसम्ही जंगल के भीतर स्थित है। जंगल के बीच होने के बावजूद नवरात्रि के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। दूर दराज से भक्त यहां मां के दर्शन करने और आशीर्वाद प्राप्त करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मां भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और संकटों से रक्षा करती हैं। कई श्रद्धालु यह भी मानते हैं कि मां की कृपा से अकाल मृत्यु जैसे बड़े संकट भी टल सकते हैं इसलिए इस मंदिर को सिद्धपीठ के रूप में पूजा जाता है।

    मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित लोककथा भी इसकी रहस्यमयी पहचान को और मजबूत करती है। बताया जाता है कि बहुत समय पहले इस स्थान पर एक बड़ा नाला हुआ करता था जिस पर लकड़ी का एक पुल बनाया गया था। एक दिन एक बारात इसी रास्ते से गुजर रही थी। जब बारात पुल के पास पहुंची तो वहां खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने बारातियों को पुल पर जाने से मना करते हुए चेतावनी दी। हालांकि बारातियों ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और पुल पार करने लगे। जैसे ही बारात पुल के बीच पहुंची वह अचानक टूट गया और अधिकांश बाराती नाले में गिर गए। इस दर्दनाक घटना के बाद लोगों को एहसास हुआ कि वह बुजुर्ग महिला साधारण इंसान नहीं बल्कि देवी का रूप थीं जिन्होंने पहले ही खतरे की चेतावनी दी थी।

    इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने उस स्थान को पवित्र मानते हुए वहां पूजा अर्चना शुरू कर दी। धीरे धीरे यह स्थान बुढ़िया माई मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया और समय के साथ यहां श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी होती चली गई। आज भी कई लोग मानते हैं कि मां अपने भक्तों को संकट आने से पहले संकेत देती हैं और उन्हें बड़े हादसों से बचाती हैं।

    नवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा भंडारा और धार्मिक आयोजनों का भी आयोजन किया जाता है। जंगल के बीच स्थित यह मंदिर भले ही रहस्यमयी कथाओं से जुड़ा हो लेकिन भक्तों के लिए यह आस्था विश्वास और शक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

  • खरमास 2026: 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, जानिए धार्मिक मान्यता, महत्व और क्या करना माना जाता है शुभ

    खरमास 2026: 15 मार्च से 14 अप्रैल तक मांगलिक कार्यों पर विराम, जानिए धार्मिक मान्यता, महत्व और क्या करना माना जाता है शुभ


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म और ज्योतिष में समय और ग्रहों की स्थिति को विशेष महत्व दिया गया है। इन्हीं ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर वर्ष में दो बार आने वाले खरमास को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में खरमास की शुरुआत 15 मार्च से होने जा रही है और यह अवधि 14 अप्रैल तक रहेगी। इस दौरान विवाह गृह प्रवेश मुंडन कर्ण छेदन जैसे कई मांगलिक कार्यों पर परंपरागत रूप से विराम लग जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय किए गए शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देते इसलिए लोगों को इन्हें टालने की सलाह दी जाती है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार 14 मार्च की रात 1 बजकर 8 मिनट के बाद सूर्य देव कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेंगे। जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि यानी धनु या मीन में प्रवेश करते हैं तो उनकी स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और इस दौरान मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता। इस बार मीन संक्रांति के साथ शुरू होने वाला खरमास 14 अप्रैल को समाप्त होगा जब सूर्य देव सुबह 9 बजकर 31 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा विराम भी समाप्त हो जाएगा।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास में विवाह गृह प्रवेश नए घर के निर्माण की शुरुआत मुंडन संस्कार और कर्ण छेदन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है कि इस समय शुरू किए गए दीर्घकालिक कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं या अपेक्षित सुख समृद्धि नहीं मिलती। यही कारण है कि लोग इस अवधि में नया व्यवसाय शुरू करने या बड़े निवेश करने से भी बचते हैं। हालांकि यह समय पूरी तरह निष्क्रिय रहने का नहीं माना जाता बल्कि इसे आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत श्रेष्ठ बताया गया है।

    खरमास के दौरान दान पुण्य जप तप पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। ब्राह्मणों गुरुजनों गायों और साधु संतों की सेवा करना भी पुण्यदायी माना गया है। इसके अलावा तीर्थ यात्रा करना धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करना और भगवान के नाम का स्मरण करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

    खरमास से जुड़ी एक प्रचलित कथा भी बताई जाती है। कथा के अनुसार सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। लगातार चलते रहने से उनके घोड़े थक जाते हैं और प्यास से व्याकुल हो जाते हैं। ऐसे में सूर्य देव उन्हें विश्राम देने के लिए रथ को एक तालाब के पास रोकते हैं और घोड़ों को पानी पिलाते हैं। इस दौरान रथ को चलाने के लिए वे दो ‘खर’ यानी गधों को रथ में जोड़ देते हैं।

    गधों की गति धीमी होने के कारण रथ की चाल भी धीमी हो जाती है लेकिन इस बीच सूर्य के घोड़े आराम कर लेते हैं। इसी कारण इस अवधि को खरमास कहा जाता है और मान्यता है कि इस समय सूर्य के घोड़े विश्राम करते हैं। इस प्रकार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खरमास का समय भले ही मांगलिक कार्यों के लिए उपयुक्त न माना जाता हो लेकिन इसे आध्यात्मिक साधना दान पुण्य और भगवान की भक्ति के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी समय माना गया है।

  • सूर्य का मीन राशि में होने जा रहा गोचर, बन रहे 2 राजयोग, 4 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ

    सूर्य का मीन राशि में होने जा रहा गोचर, बन रहे 2 राजयोग, 4 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ


    नई दिल्ली। ग्रहों के राजा सूर्य 15 मार्च 2026 को मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। इस दौरान शनि और शुक्र ग्रह पहले से ही मीन राशि में स्थित हैं, जिससे दो खास राजयोग बनेंगेत्रिग्रही योग और शुक्रादित्य राजयोग। इन योगों का चार राशियों पर विशेष असर होने की संभावना है और यह समय उनके लिए काफी लाभकारी साबित हो सकता है।

    गोचर और योग का असर
    सूर्य, शनि और शुक्र की युति से मीन राशि में त्रिग्रही योग बन रहा है। वहीं सूर्य और शुक्र की युति से शुक्रादित्य राजयोग का निर्माण होगा। शुक्र मीन राशि में 26 मार्च तक रहेंगे और इसके बाद मेष राशि में गोचर करेंगे, जबकि सूर्य और शनि की युति 14 अप्रैल तक प्रभाव में रहेगी।

    4 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ

    मेष राशि:
    मेष राशि वाले जातकों के लिए यह समय पुराने रुके हुए काम पूरे होने, फंसा पैसा मिलने और नए अवसर पाने का संकेत देता है। शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण पूरा होने के बाद अब 2 राजयोग के बनने से लाभ मिलेगा।

    वृषभ राशि:
    वृषभ राशि के जातकों को करियर और आय में वृद्धि का मौका मिलेगा। वरिष्ठ अधिकारियों से सहयोग, काम की तारीफ और नए स्रोतों से धन लाभ संभव है। पदोन्नति और मान-सम्मान मिलने की संभावना भी बढ़ जाएगी।

    मिथुन राशि:
    मिथुन राशि के कारोबारियों और पेशेवरों के लिए यह समय लाभकारी रहेगा। डील फाइनल होने, कामकाज में यात्रा और धन लाभ के योग बन रहे हैं। साथ ही भविष्य के लिए बचत करने में सफलता मिलेगी।

    तुला राशि:
    तुला राशि के जातकों को सूर्य और शुक्र की युति से बड़ा लाभ मिलने वाला है। व्यापार का विस्तार, नौकरी में प्रमोशन और सैलरी वृद्धि की संभावना है। इससे आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

    (Disclaimer: यह खबर केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते है।)

  • 13 March 2026: तुला राशि- सेहत को लेकर सतर्क रहना होगा,एक्स्ट्रा इनकम के भी योग बनेंगे

    13 March 2026: तुला राशि- सेहत को लेकर सतर्क रहना होगा,एक्स्ट्रा इनकम के भी योग बनेंगे


    नई दिल्ली। तुला राशि :- रा , री , रु , रे , रो , ता , ती , तू , ते

    धन लाभ: आर्थिक मामलो में आपके लिए संतोषजनक समय रहेगा। एक्स्ट्रा इनकम के भी योग बनेंगे। परिवार और मित्र: घरेलू जीवन के लिए यह अवधि बहुत ही उत्तम रहने की संभावना है।पारिवारिक लोगों में आपको सद्भावना व प्रेम देखने को मिलेगा। परिवार के साथ आप घूमने-फिरने की योजना बना सकते हैं।

    रिश्ते और प्यार: काम की अधिकता होने की वजह से प्रेमी के साथ प्रत्यक्ष मुलाक़ात होना मुश्किल लग रहा है। स्वास्थ्य: सेहत को लेकर आपको थोड़ा सतर्क रहना होगा। शारीरिक थकान से बचने के लिए काम के साथ-साथ आराम करना भी आपके लिए ज़रुरी होगा। करियर और शिक्षा: नौकरीपेशा वालों का रुका हुआ प्रमोशन उन्हें मिल सकता है।

    बिज़नेस/स्टॉक/प्रॉपर्टी: व्यापार करने वालों को कोई बड़ी सफलता मिलने के आसार रहेंगे। आर्थिक मामलों के लिए यह समय प्रगतिकारक रहेगा। बिज़नेस करने वालों के लिए यह अवधि विशेष धनदायी हो सकती है। आज के दिन को शुभ बनाने के लिए ज्योतिष उपाय। ॐ शुं शुक्राय नम: मंत्र का जाप करें ।

    आज अगर सफलता चाहते हैं तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें, लाभ होने की संभावना है।
    आज का शुभ अंक 6 है

  • 13 मार्च 2026 का अंक ज्योतिष: मूलांक 4 के अटके काम पूरे होंगे, मूलांक 6 को आर्थिक लाभ..

    13 मार्च 2026 का अंक ज्योतिष: मूलांक 4 के अटके काम पूरे होंगे, मूलांक 6 को आर्थिक लाभ..

    नई दिल्ली। आज 13 मार्च 2026 अंक ज्योतिष के अनुसार मुख्य रूप से मूलांक 4 की ऊर्जा से प्रभावित है। यह अंक अनुशासन, मेहनत और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। ब्रह्मांडीय अंक 8 आज करियर और आर्थिक उन्नति के अवसर दे रहा है। यह दिन भावनाओं में बहने की बजाय ठोस योजना और जिम्मेदारी निभाने का है। जो लोग महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर काम कर रहे हैं उनकी मेहनत आज भविष्य में मजबूत परिणाम दे सकती है।

    मूलांक 1 के लिए आज का दिन योजना बनाने और नई जिम्मेदारियां संभालने का है। पैसों से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचें। आज की सीख है कि अनुशासन और जिम्मेदारी ही नेतृत्व को मजबूत बनाती है।

    मूलांक 2 वाले लोगों के लिए दिन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सहयोग करने की क्षमता सफलता दिलाएगी। छोटी बातों पर अधिक सोचने से बचें। आज की सीख है कि संतुलित मन कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय दिलाता है।

    मूलांक 3 वाले लोग अपने विचारों को अनुशासन के साथ लागू करें। काम और निजी जीवन में संतुलन बनाना जरूरी है। मनोरंजन में समय ज्यादा खर्च करने से बचें। रचनात्मकता तब सफल होती है जब उसमें अनुशासन जुड़ा हो।

    मूलांक 4 वाले लोगों के लिए आज विशेष दिन है। रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है और योजना बनाने की क्षमता मजबूत रहेगी। व्यवहार में अत्यधिक कठोरता से बचें। निरंतर प्रयास ही स्थायी सफलता का आधार है।

    मूलांक 5 वाले लोगों को माहौल सीमित लग सकता है लेकिन जरूरी कार्यों को पूरा करने के लिए समय अनुकूल है। जोखिम भरे निवेश से बचें। अनुशासन भविष्य की आजादी को मजबूत करता है।

    मूलांक 6 वालों के लिए आज आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं। व्यावहारिक सोच नई जिम्मेदारी और अवसर दिला सकती है। सारी जिम्मेदारियां अकेले उठाने से बचें। अपनों का साथ जीवन में स्थिरता लाता है।

    मूलांक 7 के लिए दिन शांत होकर योजना बनाने का है। करियर से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लें और परिवार के साथ संवाद बनाए रखें। जरूरत से ज्यादा विश्लेषण करने से बचें। ज्ञान तभी उपयोगी है जब इसे व्यवहार में उतारा जाए।

    मूलांक 8 वाले लोगों के लिए आज प्रभावशाली दिन है। बिजनेस और वित्तीय योजनाएं सफल हो सकती हैं। केवल धन पर ध्यान केंद्रित करने से बचें। सफलता में करुणा और संतुलन भी जरूरी है।

    मूलांक 9 के लिए आपकी मेहनत और सकारात्मक सोच दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकती है। परिवार और दोस्तों के साथ संबंध मजबूत होंगे। पुरानी बातों में उलझने से बचें। अच्छे उद्देश्य से किया गया काम ही सच्ची संतुष्टि देता है।

    आज का दिन सभी मूलांकों के लिए अनुशासन मेहनत और संतुलित निर्णयों से सफलता और समृद्धि लाने वाला है।

  • शुक्रवार का विशेष दिन: लक्ष्मी और संतोषी माता की विधिपूर्वक आराधना से घर में आए सकारात्मक ऊर्जा

    शुक्रवार का विशेष दिन: लक्ष्मी और संतोषी माता की विधिपूर्वक आराधना से घर में आए सकारात्मक ऊर्जा


    नई दिल्ली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और संतोषी माता की आराधना के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि धन और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे वातावरण शुद्ध होता है और देवी लक्ष्मी का आगमन होता है।

    पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाना अत्यंत फलदायी होता है। कमल के फूल या मोगरा का इत्र अर्पित करने से देवी की कृपा और धन-धान्य की वृद्धि होती है। कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना भी इस दिन विशेष रूप से लाभकारी है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है।

    घर में स्थापित श्री यंत्र की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। दूध और गंगाजल से इसकी आराधना करने से धन, वैभव और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाना विशेष रूप से सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाने वाला उपाय है।

    संतोषी माता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। माता को गुड़ और चने का भोग अर्पित करने की परंपरा इस दिन विशेष रूप से प्रचलित है। उनकी चालीसा का पाठ करने से परिवार में सौहार्द और मानसिक शांति बनी रहती है।

    दान का महत्व भी इस दिन बढ़ जाता है। सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही, चीनी या सफेद कपड़े का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। दान से न केवल जीवन में सकारात्मकता आती है बल्कि आर्थिक समृद्धि के मार्ग भी खुलते हैं।

    इस प्रकार शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी और संतोषी माता की पूजा, कनकधारा स्तोत्र का पाठ, दीपदान और दान के उपाय से घर में सुख-शांति धन-संपत्ति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। यह दिन अपने धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के कारण जीवन में समृद्धि और खुशहाली लाने वाला माना गया है।

  • आज का पंचांग 13 मार्च 2026 चैत्र कृष्ण दशमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त राहुकाल और ग्रहों की स्थिति

    आज का पंचांग 13 मार्च 2026 चैत्र कृष्ण दशमी तिथि, जानें शुभ मुहूर्त राहुकाल और ग्रहों की स्थिति

    नई दिल्ली। आज शुक्रवार 13 मार्च 2026 चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। इस दिन दशा माता व्रत भी रखा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आज का दिन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन चंद्रमा धनु राशि में पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में स्थित रहेगा जिससे आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि होगी और नेतृत्व क्षमता प्रबल होगी।

    आज की तिथि कृष्ण दशमी है जो पूर्ण रात्रि तक रहेगी। प्रातः 10:32 बजे तक व्यक्तिपात योग रहेगा। करण वणिज सायं 07:23 बजे तक प्रभावी रहेगा और इसके बाद विश्टि करण पूरी रात रहेगा। सूर्योदय प्रातः 06:33 बजे और सूर्यास्त सायं 06:28 बजे होगा। चंद्रमा 14 मार्च को रात्रि 03:30 बजे उदय होगा और दोपहर 12:54 बजे अस्त होगा।

    ग्रहों की स्थिति देखें तो सूर्य कुंभ राशि में और चंद्रमा धनु राशि में स्थित है। आज का नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र है जो 14 मार्च रात्रि 03:03 बजे तक प्रभावी रहेगा। यह नक्षत्र धनु राशि के 13°20’ से 26°40’ तक फैला है और इसके स्वामी शुक्र हैं जबकि राशि स्वामी बृहस्पति हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र व्यक्ति में साहस आत्मविश्वास उदारता और सामाजिक लोकप्रियता बढ़ाता है। हालांकि अहंकार और खर्चीले स्वभाव से बचने की सलाह भी दी जाती है।

    आज के शुभ मुहूर्त में अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 से 12:55 बजे तक रहेगा। यह समय पूजा, नया कार्य शुरू करने और महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा अमृत काल रात्रि 09:47 से 11:32 बजे तक प्रभावी रहेगा। वहीं आज के अशुभ समय में राहुकाल प्रातः 11:01 से 12:31 बजे तक रहेगा। इसके अतिरिक्त गुलिकाल प्रातः 08:03 से 09:32 बजे तक और यमगंड दोपहर 03:29 से सायं 04:59 बजे तक रहेगा। राहुकाल में किसी भी नए कार्य की शुरुआत से बचना चाहिए।

    धार्मिक दृष्टि से आज दशा माता व्रत रखने वाले श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए व्रत रखते हैं। अभिजीत मुहूर्त में किए जाने वाले कार्य शुभ और फलदायी माने जाते हैं। इस दिन चंद्रमा की स्थिति आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि के साथ-साथ समाज में प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता को भी बढ़ाती है।

    इस प्रकार 13 मार्च 2026 का पंचांग सभी धार्मिक कर्मों और महत्वपूर्ण कार्यों के लिए मार्गदर्शक साबित होता है। सुबह के शुभ समय से लेकर दोपहर के अभिजीत मुहूर्त और शाम के राहुकाल तक की जानकारी का पालन करने से दिन की सफलता और शुभता सुनिश्चित होती है। आज का दिन अपने आत्मविश्वास और साहस को बढ़ाने के लिए भी अनुकूल है।

  • शुक्रवार व्रत का महत्व: मां लक्ष्मी की कृपा से मिलता है धन और वैवाहिक सुख, जानिए पूजा विधि और उपाय

    शुक्रवार व्रत का महत्व: मां लक्ष्मी की कृपा से मिलता है धन और वैवाहिक सुख, जानिए पूजा विधि और उपाय


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह के हर दिन का संबंध किसी न किसी देवी-देवता और ग्रह से माना गया है। शुक्रवार का दिन विशेष रूप से धन और ऐश्वर्य की देवी देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन-धान्य तथा सुख-समृद्धि की कमी नहीं रहती।

    धार्मिक ग्रंथों जैसेब्रह्म वैवर्त पुराण और मत्स्य पुराण में भी शुक्रवार व्रत का उल्लेख मिलता है। इन ग्रंथों में बताया गया है कि इस दिन देवी लक्ष्मी के साथ-साथ संतोषी माता की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। माना जाता है कि शुक्रवार व्रत करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और वैवाहिक जीवन में भी मधुरता बनी रहती है।

    शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा विधि

    शुक्रवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके वहां गंगाजल छिड़कें। इसके बाद लाल कपड़े पर देवी लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। दीपक जलाकर फूल, चंदन, अक्षत, कुमकुम और मिठाई का भोग अर्पित करें। इस दौरान Lord Vishnu की स्तुति के साथ श्री सूक्त और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करना भी शुभ माना जाता है।

    ज्योतिष में शुक्र ग्रह का महत्व

    ज्योतिष शास्त्र में शुक्र को प्रेम, वैवाहिक सुख, सौंदर्य, कला और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक ग्रह माना गया है। कुंडली में शुक्र मजबूत होने से जीवन में ऐश्वर्य, प्रेम और वैवाहिक सुख प्राप्त होता है।

    16 शुक्रवार व्रत का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लगातार 16 शुक्रवार तक व्रत रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है। इससे विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और अच्छे जीवनसाथी के योग बनते हैं। साथ ही आर्थिक उन्नति और सुख-समृद्धि भी बढ़ती है।

    विवाह के लिए शुक्रवार को करें ये उपाय

    शुक्रवार के दिन देवी दुर्गा या संतोषी माता की पूजा करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सफेद वस्तुओं जैसे दूध, दही और इत्र का दान करना, जरूरतमंद महिलाओं को वस्त्र देना, राधा-कृष्ण मंदिर में मिश्री का भोग लगाना और गाय को हल्दी लगा आलू खिलाना भी लाभकारी माना गया है।धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।