Category: Religious Astrology

  • Ekadashi March 2026: कब है पापमोचनी और कामदा एकादशी? जानें सही तिथि और मुहूर्त

    Ekadashi March 2026: कब है पापमोचनी और कामदा एकादशी? जानें सही तिथि और मुहूर्त


    नई दिल्ली। चैत्र मास सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। यह महीना जहां आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना का प्रतीक है, वहीं हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी इसी मास से होती है। इसी दौरान चैत्र नवरात्र का पर्व मनाया जाता है और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव भी धूमधाम से आयोजित होता है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना साधना, उपवास और पूजा-अर्चना के लिए विशेष फलदायी माना गया है।

    चैत्र मास में दो प्रमुख एकादशी व्रत-पापमोचनी एकादशी और कामदा एकादशी-का विशेष महत्व है। मान्यता है कि पापमोचनी एकादशी के व्रत से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है, जबकि कामदा एकादशी सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली मानी गई है। इन दोनों व्रतों में भगवान Vishnu तथा Lakshmi Narayan की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

    पापमोचनी एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
    वैदिक पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 14 मार्च 2026 को सुबह 08 बजकर 10 मिनट पर प्रारंभ होगी और 15 मार्च 2026 को सुबह 09 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पापमोचनी एकादशी का व्रत 15 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 16 मार्च 2026 को किया जाएगा।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है। इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु का ध्यान, मंत्र जाप और कथा श्रवण करना विशेष फलदायी माना गया है।

    कामदा एकादशी 2026: तिथि और महत्व
    चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में एकादशी तिथि 28 मार्च को सुबह 08 बजकर 45 मिनट से प्रारंभ होकर 29 मार्च 2026 को सुबह 07 बजकर 46 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामदा एकादशी 29 मार्च 2026, रविवार को मनाई जाएगी। व्रत का पारण 30 मार्च 2026 को किया जाएगा।मान्यता है कि कामदा एकादशी का व्रत करने से साधक की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि एवं सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी अर्पण और सात्विक आहार का विशेष महत्व है। धर्माचार्यों के अनुसार चैत्र मास में पड़ने वाली ये दोनों एकादशी आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना सिद्धि के लिए अत्यंत शुभ मानी गई हैं।

  • Papmochani Ekadashi 2026: तुलसी चालीसा का पाठ करें, भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करें

    Papmochani Ekadashi 2026: तुलसी चालीसा का पाठ करें, भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करें


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में एकादशी व्रत का अपना विशेष महत्व है। इसमें कृष्ण पक्ष की एकादशी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। इसी श्रेणी में पापमोचनी एकादशी का व्रत आता है। इस वर्ष यह व्रत 15 मार्च 2026 रविवार को रहेगा और इसका पारण 16 मार्च को किया जाएगा।

    इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। तुलसी तुल्य सामग्री के साथ पूजा करने से जिसे भगवान विष्णु प्रिय माना गया है विशेष लाभ की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन तुलसी चालीसा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    पूजा विधि

    स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद घर के पूजा स्थान या मंदिर में भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। पूजा में धूप दीप फूल फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर भक्त चालीसा का पाठ और व्रत कथा सुनते हैं।

    तुलसी चालीसा का महत्व
    चालीसा में तुलसी माता का गुणगान किया गया है और इसे पाठ करने वाले को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। शास्त्रों के अनुसार इस चालीसा के पाठ से जीवन के संकट समाप्त होते हैं सुख समृद्धि आती है और भक्त अपने पापों से मुक्ति पाते हैं।

    व्रत के नियम

    पापमोचनी एकादशी के दिन व्रत रखने वाले को भोजन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कथा और पूजा के बाद ही भोजन करें। दिन भर में जल और फल का सेवन किया जा सकता है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी 16 मार्च 2026 को किया जाता है।

    चालीसा के कुछ प्रमुख दोहे और चौपाई

    नमो नमो तुलसी महारानी महिमा अमित न जाय बखानी।
    दियो विष्णु तुमको सनमाना जग में छायो सुयश महाना।

    तुलसी मैया तुम कल्याणी तुम्हरी महिमा सब जग जानी।
    भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे गा गाकर मां तुझे रिझावे।

    भक्त इस चालीसा का पाठ करते हुए मन वचन और कर्म से माता तुलसी की सेवा करें। ऐसा करने से जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और परम सुख की प्राप्ति होती है।

  • दशा माता व्रत 2026: तिथि, पूजा विधि और व्रत की महिमा

    दशा माता व्रत 2026: तिथि, पूजा विधि और व्रत की महिमा


    नई दिल्ली । दशा माता व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसे विधिपूर्वक करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और परिवार में सुख शांति और समृद्धि आती है। दशा माता माता पार्वती का ही एक स्वरूप मानी जाती हैं।

    तिथि
    साल 2026 में दशा माता व्रत 13 मार्च, शुक्रवार को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, दशमी तिथि 13 मार्च की सुबह 6 28 बजे से शुरू होकर 14 मार्च की सुबह 8 10 बजे तक रहेगी।

    पूजा विधि

    व्रत के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं। इसके बाद घर के पूजा स्थल या किसी पवित्र स्थान पर दशा माता की पूजा की जाती है। पूजा में धूप, दीप, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर महिलाएं व्रत कथा भी सुनती या पढ़ती हैं। पूजा के दौरान परिवार की सुख समृद्धि और कठिन समय से मुक्ति की कामना की जाती है।

    डोरा पहनने का महत्व

    दशा माता व्रत के दौरान महिलाओं को 10 धागों का डोरा बनाकर उसमें 10 गांठें लगाकर पहनना अनिवार्य होता है। यह डोरा जीवन में सुख शांति और समृद्धि लाने का प्रतीक माना जाता है। डोरा पूजा के बाद माता के सामने रखा जाता है और आशीर्वाद लेकर गले में पहन लिया जाता है।

    व्रत के नियम

    दशा माता व्रत का पालन शुरू करने के बाद इसे नियमित रूप से करना होता है। व्रत वाले दिन सिर्फ एक बार भोजन किया जा सकता है, और वह भी कथा सुनने के बाद। इस दिन नमक का सेवन वर्जित होता है, लेकिन गेहूं का उपयोग किया जा सकता है। व्रत के समापन पर दशा माता की प्रतिमा का विसर्जन नदी में किया जाना चाहिए। दशा माता व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाएं अपने परिवार की सुख समृद्धि के लिए रखती हैं। यह व्रत पारिवारिक कल्याण और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का प्रभावशाली साधन माना जाता है।

  • आज का राशिफल 12 मार्च 2026: व्यापार में होगा लाभ, धन की होगी वर्षा; पढ़ें सभी राशियों की स्थिति

    आज का राशिफल 12 मार्च 2026: व्यापार में होगा लाभ, धन की होगी वर्षा; पढ़ें सभी राशियों की स्थिति


    नई दिल्ली । 12 मार्च 2026 का दिन ग्रह नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कई राशियों के लिए शुभ और लाभदायक है। व्यापार करियर और आर्थिक मामलों में कुछ राशियों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं जबकि कुछ को स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मेष

    आज का दिन शुभ रहेगा। स्वास्थ्य में सुधार होगा और परिवार में तालमेल बना रहेगा। रुके हुए कार्य पूरे होंगे और सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में सम्मान बढ़ेगा। आर्थिक स्थिति अच्छी रहेगी।

    वृषभ

    जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो सकती है। परिवार में मतभेद संभव हैं। कार्यस्थल पर विरोधियों से सावधान रहें। व्यापार सामान्य रहेगा।

    मिथुन

    मन प्रसन्न रहेगा। किसी पुराने परिचित से मुलाकात हो सकती है। कार्यक्षेत्र में बदलाव लाभदायक साबित होगा। शेयर मार्केट से जुड़े लोगों के लिए दिन अनुकूल है।

    कर्क

    जीवनशैली में बदलाव करेंगे। व्यापार में लाभ की संभावना है। नई पार्टनरशिप के योग बन सकते हैं। यात्रा में सावधानी रखें।

    सिंह

    पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के योग हैं। व्यापार में सफलता मिलेगी। नई शुरुआत के लिए दिन अच्छा है। वाणी से रुके कार्य पूरे होंगे।

    कन्या

    दिन सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में कुछ बाधाएं आ सकती हैं। स्वास्थ्य का ध्यान रखें। यात्रा में सतर्क रहें।

    तुला

    स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। नया कार्य शुरू करने से पहले सोच समझकर निर्णय लें। व्यापार और नौकरी में स्थिति सामान्य रहेगी।

    वृश्चिक

    नई योजनाएं बन सकती हैं और मित्रों का सहयोग मिलेगा। किसी खास व्यक्ति से मतभेद हो सकता है। स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

    धनु

    नई योजनाओं पर कार्य करेंगे। यात्रा के योग हैं। व्यापार में नए प्रयोग लाभ देंगे और अधिकारियों से सहयोग मिलेगा।

    मकर

    अपने विचार स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में कठिनाई हो सकती है। अनावश्यक धन हानि की संभावना रहेगी। सोच समझकर निर्णय लें।

    कुंभ

    महत्वपूर्ण निर्णय लेने का दिन है। नौकरीपेशा लोगों को लाभ मिलेगा। भूमि संबंधी मामलों में धन खर्च हो सकता है।

    मीन

    अपने विचारों से लोगों को प्रभावित करेंगे। व्यापार में लाभ और नौकरी में पदोन्नति के योग हैं। किसी की बातों में आकर जल्दबाजी में निर्णय न लें।

    आज का राशिफल यह संकेत देता है कि आर्थिक मामलों और व्यापार में सफलता पाने के लिए समझदारी और धैर्य जरूरी है। स्वास्थ्य और पारिवारिक मामलों में सतर्क रहने से दिन बेहतर तरीके से बीतेगा।

  • बुध देव के उदय से इन 5 राशि वालों की चमकेगी किस्मत, धन लाभ और गोल्डन पीरियड की होगी शुरुआत

    बुध देव के उदय से इन 5 राशि वालों की चमकेगी किस्मत, धन लाभ और गोल्डन पीरियड की होगी शुरुआत

    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में बुध देव को बुद्धि, तर्कशक्ति, संवाद और व्यापार का कारक माना गया है। जब बुध देव अपनी चाल बदलते हैं, तो इसका असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता और आर्थिक स्थिति पर दिखाई देता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 18 मार्च 2026 को बुध देव उदित अवस्था में लौट रहे हैं और यह स्थिति 27 अप्रैल 2026 तक रहेगी। इस अवधि में बुध देव किन 5 राशि वालों की किस्मत संवारेंगे, जानिए।

    मेष राशि
    मेष राशि वालों के लिए बुध देव का उदय शुभ प्रभाव लाएगा। इस दौरान कार्यक्षेत्र में आपकी बुद्धिमत्ता और वाकपटुता की सराहना होगी। नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। फंसा हुआ धन वापस मिलने के योग हैं और निवेश से लाभ होने की संभावना है। भाई-बहनों के साथ रिश्तों में सुधार आएगा और घर का माहौल शांतिपूर्ण रहेगा।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों के लिए बुध देव का उदय अत्यंत प्रभावशाली रहेगा। छात्रों और लेखकों के लिए यह समय स्वर्णिम है। आपकी रचनात्मकता अपने चरम पर होगी। व्यापारियों को नए सौदे मिल सकते हैं, जिससे मुनाफा बढ़ेगा। मानसिक तनाव कम होगा और आप ऊर्जावान महसूस करेंगे।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए बुध देव का उदय खुशहाली लेकर आएगा। भाग्य स्थान में बुध की मजबूती से अटके हुए काम तेजी से पूरे होंगे। परिवार के साथ धार्मिक स्थल की यात्रा के योग बन रहे हैं। समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और लोग आपकी सलाह को महत्व देंगे।

    धनु राशि
    धनु राशि वालों के लिए यह समय साझेदारी और रिश्तों को मजबूत करने वाला है। जीवनसाथी के साथ पुराने विवाद सुलझेंगे और तालमेल बढ़ेगा। साझेदारी में काम करने वालों के लिए बड़ी व्यावसायिक डील फाइनल होने के योग हैं। यदि कोई कोर्ट-कचहरी का मामला चल रहा है, तो फैसला आपके पक्ष में आने की संभावना है।

    कुंभ राशि
    कुंभ राशि वालों के लिए बुध देव का उदय धन और ज्ञान में वृद्धि करेगा। शेयर बाजार या पैतृक संपत्ति से अचानक लाभ मिलने के संकेत हैं। नई चीजें सीखने या नया स्टार्टअप शुरू करने के लिए यह समय सबसे उपयुक्त है। शिक्षा के क्षेत्र में संतान की उपलब्धि से मन प्रसन्न रहेगा।

    नोट: यह जानकारी ज्योतिषीय गणनाओं और सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करते हैं।

  • आज का दिन निवेश, शिक्षा और यात्रा के लिए अनुकूल – 12 मार्च 2026 पंचांग

    आज का दिन निवेश, शिक्षा और यात्रा के लिए अनुकूल – 12 मार्च 2026 पंचांग


    नई दिल्ली।12 मार्च 2026, बुधवार का दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश के साथ शुरू होगा। इस दिन का वार बुधवार है, जो बुध देवता और व्यापार, ज्ञान तथा बुद्धिमत्ता का प्रतीक माना जाता है। योग वैधृति और करण गर हैं, जो विशेष रूप से नए कार्यों की शुरुआत और मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं।

    सूर्योदय और सूर्यास्त
    आज सूर्योदय सुबह 6:25 बजे होगा, जो दिन के आरंभ में सकारात्मक ऊर्जा का संकेत देता है। सूर्यास्त शाम 6:25 बजे तक रहेगा, जिससे दिनभर की गतिविधियों में संतुलन और नियमितता बनी रहेगी।

    चंद्र उदय और नक्षत्र प्रभाव
    चंद्रमा सुबह 6:50 बजे उदय होगा। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र की विशेषता है कि यह मानसिक स्थिरता, अध्ययन और रणनीतिक कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। इस नक्षत्र में किए गए धार्मिक, शिक्षा और निवेश संबंधी कार्य सफलता की ओर बढ़ते हैं।

    अमृतकाल और शुभ समय
    आज का अमृतकाल सुबह 9:30 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा। यह समय स्वास्थ्य, शिक्षा, पूजा-पाठ और धन संबंधी कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक का समय भी शुभ है। इस समय नई योजनाओं की शुरुआत और महत्वपूर्ण बैठकें लाभकारी साबित हो सकती हैं।

    राहु काल और अशुभ समय
    आज दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक का राहु काल है। इस अवधि में किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय, निवेश या यात्रा को टालना बेहतर रहेगा। साथ ही रात 8:00 बजे से 9:30 बजे तक का समय अशुभ माना गया है, इसलिए व्यक्तिगत और व्यापारिक निर्णय इस समय से परहेज करें।

    गुलिक काल
    सुबह 10:00 बजे से 11:30 बजे तक का गुलिक काल है। इस समय कुछ सीमित और सावधानीपूर्वक कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन निवेश या बड़े फैसले टालना हितकर रहेगा।

    विशेष टिप्स और सावधानियां
    बुधवार का दिन बुद्ध और व्यापार से जुड़े कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। आज शिक्षा, निवेश, यात्रा, नए प्रोजेक्ट्स और पूजा-पाठ में लाभ मिलने की संभावना अधिक है। वहीं राहु काल और अशुभ समय में कोई भी महत्वपूर्ण कार्य या यात्रा टालना लाभकारी रहेगा। ध्यान रखें कि स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन बनाए रखना भी इस दिन आवश्यक है।

    आर्थिक और व्यक्तिगत निर्णय
    आज निवेश, व्यापारिक सौदे या नए आर्थिक कार्य शुरू करना शुभ रहेगा। किसी भी नई योजना में भागीदारी के लिए सुबह के शुभ समय का लाभ उठाना चाहिए। शिक्षा के क्षेत्र में अध्ययन और नए विषय सीखना लाभकारी रहेगा।

    सामाजिक और धार्मिक गतिविधियां
    इस दिन पूजा, धार्मिक अनुष्ठान और सामाजिक कार्यों में भाग लेने से मानसिक संतोष मिलेगा। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाएगा।

    12 मार्च 2026 का दिन न केवल कार्य और निवेश के लिए शुभ है, बल्कि शिक्षा, यात्रा और धार्मिक गतिविधियों में सफलता के संकेत भी देता है। शुभ समय का पालन करते हुए महत्वपूर्ण कार्य करना लाभकारी रहेगा, जबकि राहु काल और अशुभ समय में सतर्क रहना आवश्यक है। आज का दिन संतुलन, सोच-समझ और सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए अनुकूल है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: जानिए 9 दिनों में किस दिन कौन सा रंग पहनना है शुभ, पूरी लिस्ट यहां देखें

    चैत्र नवरात्रि 2026: जानिए 9 दिनों में किस दिन कौन सा रंग पहनना है शुभ, पूरी लिस्ट यहां देखें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व बेहद श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च गुरुवार से हो रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन पर्व में मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त इन दिनों व्रत रखते हैं पूजा अर्चना करते हैं और मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न धार्मिक नियमों का पालन करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में हर दिन एक विशेष रंग पहनने की परंपरा भी है। माना जाता है कि उस दिन से जुड़े शुभ रंग को पहनने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    नवरात्रि का पहला दिन सफेद

    नवरात्रि के पहले दिन का रंग सफेद माना जाता है। यह पवित्रता शांति और नई शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन देवी शैलपुत्री की पूजा की जाती है जो पर्वतराज हिमालय की पुत्री मानी जाती हैं।

    दूसरा दिन लाल

    नवरात्रि के दूसरे दिन लाल रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग प्रेम शक्ति और उत्साह का प्रतीक है। इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है जो तपस्या और भक्ति की देवी मानी जाती हैं।

    तीसरा दिन रॉयल ब्लू
    तीसरे दिन का रंग रॉयल ब्लू होता है। यह दिव्य ऊर्जा स्थिरता और आत्मविश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है जिनका स्वरूप साहस और वीरता का प्रतीक है।

    चौथा दिन पीला

    नवरात्रि के चौथे दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह उत्साह उल्लास और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन देवी कुष्मांडा की पूजा की जाती है जिन्हें ब्रह्मांड की सृष्टि करने वाली देवी माना जाता है।

    पाँचवाँ दिन हरा

    पाँचवें दिन का रंग हरा होता है जो उर्वरता विकास और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है जो भगवान कार्तिकेय की माता हैं।

    छठवाँ दिन ग्रे

    छठे दिन स्लेटी यानी ग्रे रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह संतुलन शक्ति और धैर्य का प्रतीक है। इस दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है जिन्हें शक्ति और साहस की देवी माना जाता है।

    सातवाँ दिन नारंगी

    सातवें दिन का रंग नारंगी है जो ऊर्जा उत्साह और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है जो दुर्गा का उग्र रूप मानी जाती हैं और बुराई का नाश करती हैं।

    आठवाँ दिन पीकॉक ग्रीन

    आठवें दिन का रंग पीकॉक ग्रीन यानी मोर हरा होता है। यह सुंदरता शालीनता और सकारात्मकता का प्रतीक है। इस दिन देवी महागौरी की पूजा की जाती है जिन्हें पवित्रता और शांति की देवी माना जाता है।

    नौवाँ दिन गुलाबी

    नवरात्रि के अंतिम दिन गुलाबी रंग पहनना शुभ माना जाता है। यह प्रेम करुणा और सद्भाव का प्रतीक है। इस दिन देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है जो भक्तों को ज्ञान सिद्धि और सफलता का आशीर्वाद देती हैं। इस प्रकार नवरात्रि के नौ दिनों में निर्धारित रंग पहनकर मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों को आध्यात्मिक शांति सकारात्मक ऊर्जा और देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के साथ घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, मां दुर्गा की कृपा से दूर होगी आर्थिक तंगी

    चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के साथ घर लाएं ये 5 शुभ चीजें, मां दुर्गा की कृपा से दूर होगी आर्थिक तंगी


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र महीने का विशेष महत्व माना जाता है। इस महीने में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं जिनमें चैत्र नवरात्रि का स्थान सबसे खास है। वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि का आरंभ 19 मार्च से होने जा रहा है। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्तगण मां दुर्गा के नौ अलग अलग स्वरूपों की पूजा अर्चना करते हैं और उपवास रखकर देवी की आराधना करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा भूमिलोक पर आती हैं और नौ दिनों तक भक्तों के बीच निवास करती हैं। यही कारण है कि इस अवधि में देवी को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा पाठ भजन कीर्तन और मंदिरों में भव्य सजावट की जाती है।

    ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ कुछ शुभ वस्तुएं घर लाना बेहद फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इन पवित्र चीजों को घर में लाने और पूजा करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है सोई हुई किस्मत जागती है और घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

    सबसे पहले केला का पेड़ लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि आपके घर में पहले से केला का पेड़ नहीं है तो नवरात्रि के पहले दिन इसे लगाना अच्छा माना जाता है। हिंदू धर्म में केला का पेड़ पूजनीय माना जाता है और इसकी पूजा करने से घर में समृद्धि सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    इसके साथ ही लाल गुड़हल का फूल भी विशेष महत्व रखता है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा को लाल गुड़हल का फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह फूल देवी मां को अत्यंत प्रिय है और इसे चढ़ाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

    नवरात्रि के अवसर पर हरसिंगार का पौधा घर में लगाना भी शुभ माना जाता है। यह पौधा सुख शांति और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसे घर में लगाने से परिवार में समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    इसी प्रकार शंखपुष्पी का फूल भी देवी मां को अर्पित करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन देवी को शंखपुष्पी का फूल चढ़ाने से भक्तों की हर कामना पूर्ण होती है और जीवन में सफलता के मार्ग खुलते हैं।

    इसके अलावा तुलसी का पौधा भी बेहद पवित्र माना जाता है। अगर घर में तुलसी का पौधा नहीं है तो नवरात्रि के शुभ अवसर पर इसे लगाना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। तुलसी की प्रतिदिन पूजा और जल अर्पित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और देवी देवताओं की कृपा प्राप्त होती है। इस प्रकार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन इन पवित्र चीजों को घर में लाकर विधि विधान से पूजा करने से जीवन में सुख समृद्धि शांति और खुशहाली का वास होता है तथा मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • 12 मार्च 2026 के लिए राशिफल अपडेट: प्यार, पैसा और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी

    12 मार्च 2026 के लिए राशिफल अपडेट: प्यार, पैसा और स्वास्थ्य की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली।आज का दिन सभी राशियों के लिए संतुलन और अवसर का संकेत देता है। आत्मविश्वास, संयम और सकारात्मक सोच से कार्य, परिवार और स्वास्थ्य में सुधार संभव है। आर्थिक मामलों में सतर्कता और निवेश में सोच-समझकर कदम उठाना लाभकारी रहेगा।
    मेष (Aries) – आत्मविश्वास और सफलता का दिन
    आज मेष राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ा रहेगा। कामकाज में मन लगेगा और नए प्रोजेक्ट्स में सफलता मिलने की संभावना है। किसी नई योजना की शुरुआत करना लाभकारी हो सकता है। हालांकि, आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है, अनावश्यक खर्च से बचें। छोटे निवेश और व्यावसायिक लेन-देन सोच-समझकर करें।

    वृषभ (Taurus) -रिश्तों में मधुरता और स्वास्थ्य पर ध्यान
    वृषभ राशि के लिए आज का दिन सुखद रहेगा। सकारात्मक सोच के कारण रिश्तों में मधुरता आएगी। लंबित कार्य पूरे होंगे और घर-परिवार का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान देना आवश्यक है। हल्का व्यायाम और संतुलित आहार आपके शरीर और मन को स्वस्थ बनाए रखेंगे।

    मिथुन (Gemini) -परिवार और व्यापार में संतुलन
    आज मिथुन राशि के जातकों के लिए परिवार के साथ समय बिताना लाभकारी रहेगा। व्यापारिक मामलों में नई योजनाओं पर ध्यान दें। अचानक खर्च की संभावना बनी हुई है, इसलिए बजट का ध्यान रखें। परिवार और व्यापार दोनों में संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें।

    कर्क (Cancer) -शिक्षा और कार्यक्षेत्र में सफलता
    कर्क राशि के लोगों के लिए शिक्षा और कार्यक्षेत्र में सफलता के योग हैं। ध्यान और योग के माध्यम से मानसिक तनाव कम होगा। निवेश और आर्थिक निर्णय सोच-समझकर लें। नई योजनाओं और अवसरों में लाभ मिलेगा।

    सिंह (Leo) -सहयोग और संयम आवश्यक
    सिंह राशि के जातकों को आज साथियों और मित्रों का सहयोग मिलेगा। कार्यस्थल पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। धैर्य बनाए रखें और निर्णय सोच-समझकर लें।

    कन्या (Virgo) -मेहनत रंग लाएगी और यात्रा लाभकारी
    कन्या राशि के लोगों की मेहनत आज रंग लाएगी। स्वास्थ्य ठीक रहेगा और ऊर्जा बनी रहेगी। यात्रा के योग हैं, यात्रा में लाभ मिलने की संभावना है। नए कार्य या व्यवसायिक अवसर लाभकारी साबित हो सकते हैं।

    तुला (Libra) -पारिवारिक सहयोग और वित्तीय लाभ
    तुला राशि के जातकों के लिए पारिवारिक सहयोग मिलेगा। किसी पुराने मित्र से मुलाकात सुखद अनुभव देगी। वित्तीय मामलों में लाभ के अवसर बन सकते हैं। परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना मानसिक संतोष देगा।

    वृश्चिक (Scorpio) -संयम और स्वास्थ्य पर ध्यान
    वृश्चिक राशि के लोगों को आज मानसिक शांति के लिए समय निकालना चाहिए। कार्यस्थल पर विरोधी बाधा डाल सकते हैं, इसलिए संयम बनाए रखें। स्वास्थ्य पर ध्यान दें और मानसिक तनाव कम करने के उपाय अपनाएं।

    धनु (Sagittarius) -आर्थिक सुधार और सामाजिक गतिविधियां
    धनु राशि के जातकों के लिए आर्थिक मामलों में सुधार होगा। सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से मानसिक संतोष मिलेगा। पुराने संपर्क और दोस्ती मजबूत होंगी।

    मकर (Capricorn) -मेहनत का परिणाम और विवाद से बचें
    मकर राशि के लोगों के लिए आज मेहनत का प्रतिफल मिलेगा। स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। परिवार में किसी विवाद से बचें और महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लें।

    कुम्भ (Aquarius) -सोच-समझकर निर्णय लें
    कुम्भ राशि के जातकों के लिए आज निवेश और पैसों के मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता है। मित्रों और परिवार के साथ समय बिताने से खुशी और मानसिक संतोष मिलेगा।

    मीन (Pisces) -रचनात्मक कार्य और सहयोग
    मीन राशि के लिए रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। परिवार और मित्रों का सहयोग मिलेगा। स्वास्थ्य पर ध्यान दें और हल्का व्यायाम करें। नए अवसरों और संपर्कों से लाभ मिलने की संभावना है।

  • शीतला अष्टमी 2026 कल: भूलकर भी न करें ये गलतियां, मां शीतला की कृपा से मिलती है रोगों से रक्षा

    शीतला अष्टमी 2026 कल: भूलकर भी न करें ये गलतियां, मां शीतला की कृपा से मिलती है रोगों से रक्षा


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में चैत्र माह की शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से मां शीतला की पूजा के लिए समर्पित होता है जिन्हें रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। साल 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व 11 मार्च बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रद्धालु मां शीतला की पूजा अर्चना कर परिवार के स्वास्थ्य सुख और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं। मान्यता है कि मौसम बदलने के समय कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है ऐसे में मां शीतला की पूजा करने से परिवार को रोगों से सुरक्षा और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है।

    शीतला अष्टमी से एक दिन पहले शीतला सप्तमी मनाई जाती है। इस दिन घरों में अलग अलग प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। परंपरा के अनुसार दाल भात पूरी दही लस्सी और हरी सब्जियां जैसे कई व्यंजन तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि इन सभी पकवानों को अगले दिन यानी शीतला अष्टमी के दिन ठंडा और बासी रूप में खाया जाता है। इस दिन घर में चूल्हा या गैस नहीं जलाया जाता। धार्मिक मान्यता के अनुसार ठंडा और बासी भोजन मां शीतला को प्रिय होता है और इससे शरीर को ठंडक भी मिलती है। इसलिए अष्टमी के दिन सबसे पहले इन व्यंजनों का भोग मां शीतला को लगाया जाता है और उसके बाद परिवार के लोग प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करते हैं।

    शीतला अष्टमी के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना भी जरूरी माना गया है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और उसके बाद मां शीतला के मंदिर जाकर दर्शन करने चाहिए। पूजा के दौरान मां शीतला को हल्दी दही और बाजरे का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर नीम के पत्तों का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नीम स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है और यह कई रोगों से बचाने में सहायक होता है। इसलिए पूजा के दौरान नीम की पत्तियां चढ़ाने की भी परंपरा है।

    धार्मिक दृष्टि से यह पर्व केवल पूजा अर्चना तक सीमित नहीं है बल्कि यह हमें स्वास्थ्य और स्वच्छता का संदेश भी देता है। मान्यता है कि शीतला अष्टमी के दिन आखिरी बार बासी भोजन किया जाता है और इसके बाद लंबे समय तक बासी भोजन करने से बचना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि अधिक समय तक बासी भोजन करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। यह पर्व हमें मौसम बदलने के समय साफ सफाई संतुलित भोजन और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सीख भी देता है।

    इसके अलावा शीतला अष्टमी के दिन घर में पूजा करने के साथ साथ शीतला माता के मंदिर जाकर दर्शन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। कई जगहों पर इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का भी विधान बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा से की गई पूजा से मां शीतला प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को रोगों से रक्षा का आशीर्वाद देती हैं। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में यह पर्व बड़ी आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।