हार्दिक का शानदार प्रदर्शन
भारत के लिए दूसरा सबसे तेज अर्धशतक
माहिका और हार्दिक का प्यार

ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच एशेज सीरीज लगभग 100 सालों से खेली जा रही है और पिछले कुछ दशकों से इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने में कठिनाइयाँ आ रही हैं। पनेसर के अनुसार इंग्लैंड की मौजूदा टीम भी उस चुनौती से जूझ रही है। वर्तमान में एशेज सीरीज के तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम 86 रनों से पीछे है और सीरीज के हारने का खतरा तीसरे टेस्ट में ही मंडरा रहा है।
पनेसर ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा ऑस्ट्रेलिया में जीतना बहुत कठिन है। इंग्लैंड के लिए यह शायद हर 20 साल में एक बार होता है। उन्होंने इंग्लैंड के पिछले एशेज विजेता अभियान की भी चर्चा की जिसमें 2010-11 की एशेज सीरीज इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया में जीत हासिल की थी। पनेसर ने उस सीरीज में अपनी भागीदारी का अनुभव भी साझा किया और बताया कि उस समय इंग्लैंड की टीम को वार्म-अप मैच खेलने का अवसर मिला था जिससे उन्हें परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में मदद मिली थी।
पनेसर ने आगे कहा ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच खेलना एक अलग स्तर की चुनौती है। इंग्लैंड की टीम को अब समझना होगा कि यहाँ की तेज और बाउंसी पिचों पर खेलने के लिए विशेष रणनीति की जरूरत होती है। इंग्लैंड की टीम के आक्रामक खेल को लेकर भी पनेसर ने अपनी राय व्यक्त की और कहा कि इस तरह की पिचों पर आक्रामक खेल अधिक मुश्किल हो जाता है। इंग्लैंड के बल्लेबाज जब शुरुआत में ही आक्रामक हो जाते हैं तो वह खुद को परेशानी में डाल लेते हैं पनेसर ने कहा।
उनके मुताबिक इंग्लैंड की टीम को अपनी गलतियों से सीखने की आवश्यकता है ताकि आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया जैसी कठिन परिस्थितियों में वे सफल हो सकें। पनेसर ने यह भी बताया कि हालात में ढलने के लिए इंग्लैंड को अपनी तैयारी को और बेहतर बनाना होगा।
पनेसर ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज जीतने की कठिनाई को ओलंपिक गोल्ड जीतने से भी अधिक चुनौतीपूर्ण करार देते हुए कहा यह लगभग तीन या चार ओलंपिक खेलों में मुकाबला करने और फिर अंत में गोल्ड जीतने जैसा है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंग्लैंड ने शायद इसे थोड़ा कम आंका है लेकिन उम्मीद है कि उन्होंने अपनी गलतियों से सीख लिया होगा और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

यह बयान ऐसे समय में आया है जब साउथ अफ्रीका से भारत की टेस्ट सीरीज में 0-2 से हार के बाद गौतम गंभीर की कोचिंग रणनीतियों पर सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर उनकी रणनीति जिसमें उन्होंने लगातार खिलाड़ियों को रोटेट किया और कामचलाऊ खिलाड़ियों पर निर्भर रहने की कोशिश की को लेकर आलोचनाएं हो रही हैं। कपिल देव ने इस मुद्दे पर और भी खुलकर बात करते हुए कहा आज के दौर में कोच वह नहीं होता जिसे आप स्कूल और कॉलेज में सीखते थे बल्कि यह एक प्रकार का प्रबंधन कार्य है। आपको खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उनके मनोबल को बढ़ाने की भूमिका निभानी होती है।
कपिल ने यह भी कहा कि यदि सुनील गावस्कर आज के दौर में खेल रहे होते तो वह टी20 क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज होते। उनका मानना था कि जिन खिलाड़ियों का डिफेंस मजबूत होता है वे आसानी से आक्रामक खेल सकते हैं क्योंकि उनके पास अधिक समय होता है। इस टिप्पणी में कपिल ने क्रिकेट के आधुनिक रूपों जैसे टी20 और टी10 के बारे में भी अपनी राय दी और यह बताया कि वे इन सभी प्रारूपों में रुचि रखते हैं।
कपिल देव की यह टिप्पणी भारतीय क्रिकेट में नई बहस का कारण बन सकती है क्योंकि गंभीर की कोचिंग शैली और उनके द्वारा उठाए गए कदमों को लेकर कई पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों ने विरोध जताया है। वहीं मिताली राज भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान ने भी क्रिकेट के इस नए युग को लेकर अपनी राय साझा की। उन्होंने हाल ही में भारत के स्वदेश में हुए महिला विश्व कप जीतने के बारे में याद किया और बताया कि कैसे इंडिया नाम के साथ ट्रॉफी हासिल करना उनके लिए एक खास अनुभव था।
गौतम गंभीर की कोचिंग को लेकर चल रही बहस को लेकर कपिल देव के बयान ने अब इसे और भी गंभीर बना दिया है। कई क्रिकेट विशेषज्ञ अब इस मुद्दे पर विचार कर रहे हैं कि क्या गंभीर को आगे चलकर टीम का मुख्य कोच बनने की भूमिका निभानी चाहिए या फिर उनके लिए यह और भी बेहतर होगा कि वे किसी अन्य भूमिका में खेल जगत की सेवा करें।

पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन के सचिव राणा सरवर ने बताया कि फेडरेशन चेयरमैन चौधरी शफाय हुसैन के निर्देश पर 27 दिसंबर को आपात बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में उबैदुल्लाह राजपूत समेत उन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगाजिन्होंने बिना अनुमति इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया। सरवर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी राष्ट्रीय खिलाड़ी का विदेशी टीम की जर्सी पहनना और उसका झंडा लहराना अस्वीकार्य है। उन्होंने इसे पाकिस्तान के खेल नियमों और राष्ट्रीय गरिमा का गंभीर उल्लंघन बताया।
सरवर के अनुसारबहरीन गए कुल 16 पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन या पाकिस्तान स्पोर्ट्स बोर्ड से कोई एनओसी या पूर्व अनुमति नहीं ली थी। इनमें राष्ट्रीय और नेशनल लेवल के खिलाड़ी शामिल थे। उन्होंने कहा कि यह कोई आधिकारिक पाकिस्तानी टीम नहीं थीलेकिन पाकिस्तान के नाम और पहचान का इस तरह इस्तेमाल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। फेडरेशन अब इन सभी खिलाड़ियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर विचार कर रही है।फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि क्लब स्तर पर विभिन्न देशों के खिलाड़ी एक साथ खेल सकते हैंलेकिन किसी अन्य देश का प्रतिनिधित्व करना और उसका राष्ट्रीय ध्वज लहराना पूरी तरह गलत है। इसके साथ हीफेडरेशन ने स्वघोषित प्रमोटर्स और आयोजकों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की बात कही हैताकि भविष्य में पाकिस्तान के नाम का इस तरह दुरुपयोग न हो।
विवाद बढ़ने के बाद उबैदुल्लाह राजपूत ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर माफी मांगी। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट हर साल बहरीन में आयोजित होता है और वह पहले भी इसमें हिस्सा ले चुके हैं। इस बार उनकी पुरानी टीम ने उन्हें नहीं बुलायालेकिन दूसरी टीम के निमंत्रण पर वह खेलने चले गए। राजपूत के मुताबिकउन्हें पहले से जानकारी नहीं थी कि टीमें भारत और पाकिस्तान के नाम से बनाई जाएंगी।राजपूत ने दावा किया कि मैदान में उतरते समय दोस्तों ने उन्हें बताया कि वह भारतीय नाम वाली टीम का हिस्सा हैं। इसके बाद उन्होंने कमेंटेटर से यह अनाउंस भी करवाया कि यह भारत-पाकिस्तान मैच नहींबल्कि एक स्थानीय कप प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि नारेबाजी और झंडे लहराने की उन्हें कोई उम्मीद नहीं थी।
अपने बयान में राजपूत ने कहायह सिर्फ एक कप थाकोई विश्व कप नहीं। अगर यह आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट होतातो मैं केवल पाकिस्तान के लिए ही खेलता। मैं पाकिस्तानी हूं और मेरा जीवन पाकिस्तान पर कुर्बान है।उन्होंने फेडरेशनकोचप्रशंसकों और शुभचिंतकों से माफी मांगते हुए अपील की कि इस मामले को जरूरत से ज्यादा तूल न दिया जाए।अब सभी की नजरें 27 दिसंबर को होने वाली पाकिस्तान कबड्डी फेडरेशन की बैठक पर टिकी हैंजहां यह तय होगा कि उबैदुल्लाह राजपूत और अन्य खिलाड़ियों के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

इस मुकाबले की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया की टीम के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी थी। हालांकि, शुरुआत अच्छी नहीं रही थी, लेकिन एलेक्स कैरी ने 106 रनों की पारी खेलकर ऑस्ट्रेलिया की वापसी करा दी। कैरी के अलावा उस्मान ख्वाजा ने भी दमदार 82 रन बनाए, जो स्टीव स्मिथ की जगह खेल रहे थे। स्मिथ मैच से ठीक पहले अनफिट पाए गए थे। ऐसे में ख्वाजा को खेलने का मौका मिला। मिचेल स्टार्क ने भी 54 रनों की पारी खेली, जिससे इंग्लैंड की टीम बैकफुट पर चली गई। 32 रन जोश इंग्लिस ने भी बनाए।
उधर, इंग्लैंड के लिए मैच के दूसरे दिन की सुबह जोफ्रा आर्चर ने फाइव विकेट हॉल प्राप्त किया। वहीं, 2-2 विकेट ब्रायडन कार्स और विल जैक्स को मिले। ऑस्ट्रेलिया को 371 पर आउट करने के बाद इंग्लैंड ने बल्लेबाजी शुरू की। ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की टीम पहली पारी में बड़ा स्कोर बनाएगी, लेकिन जैसे ही 37 रन पर पहला विकेट गिरा तो अगले 5 रनों के भीतर दो और विकेट गिर गए। इस तरह इंग्लैंड की टीम पर एशेज सीरीज को गंवाने का खतरा मंडरा रहा है।
सीरीज हार का खतरा
इंग्लैंड की टीम पहले ही दो मैच हार चुकी है और अब अगर एडिलेड में जारी इस मैच को भी हार जाती है तो फिर सीरीज 3-0 से गंवा देगी। सीरीज के दो मुकाबले बाकी रहेंगे, लेकिन उन मैचों के नतीजों का असर सीरीज की हार-जीत पर नहीं पड़ेगा। जरूर स्कोरलाइन में बदलाव हो सकता है, लेकिन एशेज ट्रॉफी मेजबान ऑस्ट्रेलिया के पास ही रहेगी। ऐसे में इसी मैच में इंग्लैंड को दमदार वापसी करते हुए मैच जीतने के बारे में सोचना होगा।

डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से उबरने में आमतौर पर समय लगता है और इसका सीधा असर खिलाड़ी की फिटनेस और स्टैमिना पर पड़ता है। ऐसे में चहल की वापसी को लेकर कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि अब उनकी नजरें विजय हजारे ट्रॉफी पर होंगी, जिसकी शुरुआत 24 दिसंबर से हो रही है। हालांकि, इसमें उनका खेलना पूरी तरह उनकी फिटनेस रिपोर्ट पर निर्भर करेगा।गौरतलब है कि युजवेंद्र चहल पिछले काफी समय से भारतीय सीनियर टीम से भी बाहर चल रहे हैं। अगस्त 2023 के बाद से उन्होंने भारत के लिए कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला है। टी20 वर्ल्ड कप के बाद उन्हें राष्ट्रीय टीम में मौका नहीं मिला, हालांकि इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट और विदेशी लीगों में उनका प्रदर्शन सराहनीय रहा है।
बीमारी से पहले चहल इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेलते हुए नजर आए थे। उन्होंने नॉर्थम्पटनशायर की ओर से वनडे कप और काउंटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था। सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी गेंदबाजी किफायती रही, जबकि रेड बॉल क्रिकेट में उन्होंने तीन मैचों में 12 विकेट लेकर अपनी उपयोगिता साबित की थी। उनके इस प्रदर्शन ने यह दिखाया था कि वह अभी भी लंबे फॉर्मेट में प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।फिलहाल, चहल का पूरा फोकस अपनी सेहत पर है। फैंस और क्रिकेट जगत को उम्मीद है कि वह जल्द ही इन बीमारियों से पूरी तरह उबरकर मैदान पर वापसी करेंगे और एक बार फिर अपनी लेग स्पिन से बल्लेबाजों को परेशान करते नजर आएंगे।

सेमीफाइनल की पूरी तस्वीर
फाइनल में क्या दांव पर होगा?

नाथन लियोन का ऐतिहासिक मील का पत्थर
नाथन लियोन ने एडिलेड टेस्ट मैच में बेन डकेट को क्लीन बोल्ड करते हुए अपना 564वां विकेट लिया। इससे पहले ग्लेन मैक्ग्रा के पास यह रिकॉर्ड था जिन्होंने 563 विकेट हासिल किए थे। लियोन ने इंग्लैंड के खिलाफ जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे मुकाबले में पहले ओली पोप को आउट किया और फिर डकेट को बोल्ड करके इतिहास रच दिया। यह महत्वपूर्ण पल उस समय और भी खास हो गया जब ग्लेन मैक्ग्रा खुद स्टेडियम में मौजूद थे और कमेंट्री कर रहे थे। उनके रिऐक्शन ने दर्शकों को भी खुश कर दिया।
ग्लेन मैक्ग्रा का मजाकिया रिऐक्शन
जब नाथन लियोन ने रिकॉर्ड तोड़ा तो ग्लेन मैक्ग्रा ने मजाकिया अंदाज में अपनी कुर्सी उठाकर अपने साथी कमेंटेटर के पास मारने की कोशिश की। यह दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और फैंस ने इस मजाकिया पल का आनंद लिया। मैक्ग्रा का यह रिऐक्शन दर्शाता है कि उनके बीच कितना सम्मान और दोस्ती है।
नाथन लियोन का सफर और आगे का रास्ता
नाथन लियोन अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में छठे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे आगे मुथैया मुरलीधरन 800 विकेट शेन वॉर्न 708 विकेट जेम्स एंडरसन 704 विकेट अनिल कुंबले 619 विकेट और स्टुअर्ट ब्रॉड 604 विकेट हैं। हालांकि लियोन को इन महान गेंदबाजों के रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए अब भी काफी विकेट और कुछ सालों तक खेलना पड़ेगा। लेकिन यदि वह फिट रहते हैं और आने वाली सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो वह कुंबले और ब्रॉड के रिकॉर्ड को तोड़ने की ओर बढ़ सकते हैं।
नाथन लियोन का यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट के लिए भी गर्व का क्षण है। उन्होंने ग्लेन मैक्ग्रा के रिकॉर्ड को तोड़कर एक नई उपलब्धि हासिल की है और अब वह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में अपनी जगह मजबूत कर रहे हैं। अगर उनका प्रदर्शन इस तरह जारी रहता है तो लियोन भविष्य में और बड़े रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं।

नाथन लियोन ने जैसे ही बेन डकेट को क्लीन बोल्ड किया, वैसे ही टेस्ट क्रिकेट में उनके विकेटों की संख्या 564 हो गई और वे ऑस्ट्रेलिया के लिए दूसरे सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट निकालने वाले गेंदबाज बन गए। इस मैच से पहले तक ग्लेन मैक्ग्रा के पास ये रिकॉर्ड था, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया के लिए 563 विकेट निकाले थे। नाथन लियोन ने इंग्लैंड के खिलाफ जारी पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के तीसरे मुकाबले में पहले तो ओली पोप को चलता किया और फिर डकेट के स्टंप्स बिखेरकर इतिहास रच दिया। इस दौरान ग्लेन मैक्ग्रा ने कुर्सी उठाई और अपने पास के कमेंट्री बॉक्स में मारने की कोशिश की। हालांकि, ये सब मजाकिया अंदाज में उन्होंने अपने एक साथी कमेंटेटर के लिए किया। वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल है।
महान स्पिनर नाथन लियोन अब टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में छठे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। उनसे आगे इस लिस्ट में श्रीलंका के महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन, ऑस्ट्रेलिया के शेन वॉर्न, इंग्लैंड के जेम्स एंडरसन, भारत के अनिल कुंबले और इंग्लैंड के स्टुअर्ट ब्रॉड शामिल हैं। मुरलीधरन ने 800, वॉर्न ने 708, एंडरसन ने 704, कुंबले ने 619 और ब्रॉड ने 604 विकेट टेस्ट क्रिकेट में चटकाए हुए हैं। नाथन लियोन टॉप 5 में शामिल होने से अभी 40 विकेट दूर हैं। हाल-फिलहाल में तो ऐसा होने वाला नहीं है, लेकिन कुछ और सीरीज वे खेलते हैं तो जरूर उस उपलब्धि तक पहुंच सकते हैं। कुछ नहीं तो स्टुअर्ट ब्रॉड और अनिल कुंबले के रिकॉर्ड को जरूर धराशायी कर सकते हैं।

एडिलेड में खेले जा रहे इस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के कप्तान पैट कमिंस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। हालांकि ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत अच्छी नहीं रही लेकिन एलेक्स कैरी 106 और उस्मान ख्वाजा 82 की शानदार पारियों ने ऑस्ट्रेलिया को 371 रनों के स्कोर तक पहुंचाया। इस बीच मिचेल स्टार्क 54 और जोश इंग्लिस 32 ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जिससे इंग्लैंड की टीम को कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा।
इंग्लैंड के लिए जोफ्रा आर्चर ने मैच के दूसरे दिन जबरदस्त गेंदबाजी की और पांच विकेट हॉल लिया लेकिन इसके बावजूद इंग्लैंड को ऑस्ट्रेलिया के विशाल स्कोर का पीछा करने में मुश्किलें आ रही हैं। इसके अलावा ब्रायडन कार्स और विल जैक्स ने भी 2-2 विकेट हासिल किए लेकिन इंग्लैंड की टीम ने जल्द ही अपने सभी विकेट गंवा दिए और 371 रनों के स्कोर पर आउट हो गई।
इंग्लैंड के लिए अब संघर्ष और भी बढ़ गया क्योंकि पहली पारी में बल्लेबाजी करते हुए उनकी शुरुआत खराब रही। 37 रन पर पहला विकेट गिरने के बाद इंग्लैंड की स्थिति और भी नाजुक हो गई। इंग्लैंड ने अगले 5 रनों में 2 और विकेट खो दिए जिससे उनकी पारी पर संकट मंडराता दिख रहा है।
इस सीरीज में इंग्लैंड पहले ही दो मैच हार चुका है और यदि वे इस टेस्ट मैच में भी हार जाते हैं तो वे एशेज ट्रॉफी हारने के कगार पर पहुंच जाएंगे। इस स्थिति में इंग्लैंड के लिए सीरीज को बचाने के लिए इस मैच में दमदार वापसी करना आवश्यक होगा। हालांकि दो मुकाबले अभी बाकी हैं लेकिन ऑस्ट्रेलिया के पास 3-0 की बढ़त के साथ एशेज ट्रॉफी की ओर कदम बढ़ाए हुए हैं।