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  • वेस्टइंडीज दौरे के लिए न्यूजीलैंड की वनडे टीम घोषित, मैथ्यू फिशर को पहली बार मिला मौका; मिशेल सेंटनर संभालेंगे कमान

    वेस्टइंडीज दौरे के लिए न्यूजीलैंड की वनडे टीम घोषित, मैथ्यू फिशर को पहली बार मिला मौका; मिशेल सेंटनर संभालेंगे कमान

    नई दिल्ली । इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला में शानदार प्रदर्शन के बाद न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम अब वेस्टइंडीज दौरे की तैयारी में जुट गई है। 12 से 22 जुलाई के बीच खेली जाने वाली पांच मैचों की वनडे सीरीज के लिए न्यूजीलैंड क्रिकेट ने 16 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है। टीम की कमान ऑलराउंडर मिशेल सेंटनर को सौंपी गई है, जबकि अनुभवी बल्लेबाज टॉम लैथम विकेटकीपर की भूमिका निभाएंगे।

    घोषित टीम में सबसे अधिक चर्चा तेज गेंदबाज मैथ्यू फिशर के चयन को लेकर है। 28 वर्षीय दाएं हाथ के गेंदबाज को पहली बार न्यूजीलैंड की वनडे टीम में शामिल किया गया है। घरेलू लिस्ट-ए क्रिकेट में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन का उन्हें इनाम मिला है। फिशर ने अब तक 35 लिस्ट-ए मुकाबलों में 32 विकेट हासिल किए हैं और निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी करने की क्षमता भी रखते हैं, जिससे टीम को अतिरिक्त संतुलन मिलने की उम्मीद है।

    टीम में तेज गेंदबाज जैकब डफी की भी वापसी हुई है। उनके अलावा क्रिस्टियन क्लार्क, बेन सियर्स और नाथन स्मिथ तेज गेंदबाजी आक्रमण का हिस्सा होंगे। वहीं स्पिन विभाग की जिम्मेदारी माइकल ब्रेसवेल, जेडन लेनोक्स और डीन फॉक्सक्रॉफ्ट संभालेंगे। बल्लेबाजी क्रम में मार्क चैपमैन, डेरिल मिशेल, हेनरी निकोलस, विल यंग और निक केली जैसे खिलाड़ी टीम को मजबूती देंगे।

    मुख्य कोच रॉब वाल्टर ने मैथ्यू फिशर और जैकब डफी के चयन पर संतोष जताते हुए कहा कि दोनों खिलाड़ियों ने घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन के दम पर यह अवसर अर्जित किया है। उनके अनुसार फिशर ने अपनी गेंदबाजी की गति और विविधता पर लगातार काम किया है, जिससे वह पारी के अलग-अलग चरणों में प्रभावी साबित हो सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह दौरा उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की मजबूत शुरुआत साबित होगा।

    कोच ने जैकब डफी की भी सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सभी प्रारूपों में लगातार प्रभाव छोड़ा है। उनका अनुभव और कौशल टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा और वह गेंदबाजी आक्रमण को अतिरिक्त मजबूती प्रदान करेंगे।

    इस दौरे में न्यूजीलैंड के कई नियमित खिलाड़ी उपलब्ध नहीं रहेंगे। तेज गेंदबाज काइल जैमीसन, मैट हेनरी और विल ओ’रूर्के को कार्यभार प्रबंधन के तहत आराम दिया गया है। वहीं बल्लेबाज डेवोन कॉनवे अपने दूसरे बच्चे के जन्म के कारण इस श्रृंखला से बाहर रहेंगे। स्टार ऑलराउंडर रचिन रवींद्र भी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मेजर लीग क्रिकेट में भाग लेने के कारण इस दौरे का हिस्सा नहीं होंगे।

    न्यूजीलैंड की टीम नए और अनुभवी खिलाड़ियों के संतुलित संयोजन के साथ वेस्टइंडीज के खिलाफ उतरने जा रही है। चयनकर्ताओं को उम्मीद है कि युवा खिलाड़ियों को मिला यह अवसर भविष्य की टीम निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जबकि अनुभवी खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करेगी।

  • फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    फीफा विश्व कप से बाहर होते ही इक्वाडोर में बड़ा फैसला, मेक्सिको से हार के बाद हेड कोच सेबेस्टियन बेकासे ने दिया इस्तीफा

    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में मेक्सिको के हाथों राउंड ऑफ 32 में मिली हार के बाद इक्वाडोर फुटबॉल टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के मुख्य कोच सेबेस्टियन बेकासे ने अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि विश्व कप में तय लक्ष्य हासिल नहीं हो सके, इसलिए पद छोड़ना उचित निर्णय है। उनके अनुसार विश्व कप अभियान की समाप्ति के साथ ही उनका अनुबंध भी समाप्त होना था और इसी कारण उन्होंने अपने कार्यकाल का समापन करने का फैसला लिया।

    मेक्सिको के खिलाफ खेले गए नॉकआउट मुकाबले में इक्वाडोर को 2-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ टीम का विश्व कप अभियान समाप्त हो गया। मैच के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में बेकासे ने कहा कि वह इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ और उसके नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया। उन्होंने खिलाड़ियों, सहयोगी स्टाफ और पूरे देश का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह उनके लिए यादगार अनुभव रहा और टीम के साथ बिताया गया समय हमेशा विशेष रहेगा।

    कोच ने स्वीकार किया कि नॉकआउट मुकाबले में मेक्सिको ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि उनकी टीम अपने स्वाभाविक खेल का स्तर नहीं दिखा सकी और प्रतिद्वंद्वी जीत का हकदार था। उनके अनुसार विश्व कप जैसे बड़े मंच पर छोटी-छोटी गलतियां भी भारी पड़ती हैं और इस मुकाबले में टीम अपेक्षित प्रदर्शन करने में सफल नहीं रही।

    सेबेस्टियन बेकासे ने अगस्त 2024 में इक्वाडोर की जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय टीम दक्षिण अमेरिकी क्वालीफाइंग अभियान में कठिन दौर से गुजर रही थी। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने शानदार वापसी करते हुए क्वालीफाइंग तालिका में अर्जेंटीना के बाद दूसरा स्थान हासिल किया। टीम ने पूरे अभियान में मजबूत रक्षात्मक प्रदर्शन किया और 18 क्वालीफाइंग मुकाबलों में केवल पांच गोल खाए। इस दौरान उसने कोलंबिया, उरुग्वे और ब्राजील जैसी मजबूत टीमों से बेहतर प्रदर्शन कर अपनी क्षमता का परिचय दिया।

    बेकासे के कार्यकाल का रिकॉर्ड भी संतुलित और प्रभावशाली रहा। उनके नेतृत्व में इक्वाडोर ने 24 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में नौ जीत दर्ज की, 12 मैच ड्रॉ रहे और केवल तीन मुकाबलों में हार मिली। विश्व कप से पहले टीम लगातार 19 मैचों तक अपराजित रही थी, जिससे उससे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं।

    विश्व कप अभियान की शुरुआत हालांकि उम्मीद के अनुरूप नहीं रही। शुरुआती मुकाबले में आइवरी कोस्ट से हार और कुराकाओ के खिलाफ ड्रॉ के बाद टीम की आलोचना हुई। इसके बावजूद इक्वाडोर ने अंतिम ग्रुप मैच में जर्मनी को 2-1 से हराकर शानदार वापसी की और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में शामिल होकर राउंड ऑफ 32 में जगह बनाई। टीम की इस उपलब्धि पर इक्वाडोर सरकार ने राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा भी की थी।

    हालांकि नॉकआउट चरण में मेक्सिको के खिलाफ हार के साथ अभियान समाप्त हो गया और इसके तुरंत बाद मुख्य कोच ने पद छोड़ने का फैसला लिया। अब इक्वाडोर फुटबॉल महासंघ के सामने नए मुख्य कोच की नियुक्ति और आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए टीम की नई रणनीति तैयार करने की चुनौती होगी।

  • रणनीति, संयम और दमदार बल्लेबाजी से ऑस्ट्रेलिया फाइनल में, शिखा पांडे ने गिनाईं जीत की बड़ी वजहें

    रणनीति, संयम और दमदार बल्लेबाजी से ऑस्ट्रेलिया फाइनल में, शिखा पांडे ने गिनाईं जीत की बड़ी वजहें

    नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने वेस्टइंडीज को आठ विकेट से हराकर एक बार फिर अपनी मजबूत दावेदारी साबित कर दी। मुकाबले के बाद भारत की पूर्व तेज गेंदबाज शिखा पांडे ने ऑस्ट्रेलियाई टीम की रणनीति, अनुशासित बल्लेबाजी और परिस्थितियों के अनुसार खुद को तेजी से ढालने की क्षमता को इस जीत का सबसे बड़ा कारण बताया। उनका मानना है कि ऑस्ट्रेलिया ने मैच के हर अहम मोड़ पर बेहतर फैसले लिए और इसी वजह से वह रिकॉर्ड आठवीं बार टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने में सफल रहा।

    शिखा पांडे ने विशेष रूप से सलामी बल्लेबाज बेथ मूनी की बल्लेबाजी की सराहना की। उन्होंने कहा कि मूनी की सबसे बड़ी ताकत केवल रन बनाना नहीं, बल्कि गेंदबाजों की लाइन और लेंथ को लगातार बिगाड़ना है। क्रीज पर उनकी मूवमेंट, फील्ड के अनुसार शॉट चयन और विकेटों के बीच तेज दौड़ उन्हें महिला क्रिकेट की सबसे चुनौतीपूर्ण बल्लेबाजों में शामिल करती है। उनके अनुसार, मूनी बिना अनावश्यक जोखिम उठाए तेजी से स्कोर बढ़ाने की कला में माहिर हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।

    पूर्व भारतीय गेंदबाज ने कहा कि मूनी की 36 गेंदों में 61 रन की पारी इस बात का उदाहरण है कि कोई बल्लेबाज बिना आक्रामक दिखे भी किस तरह मैच पर पूरी तरह नियंत्रण स्थापित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं का संतुलित संयोजन ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। बेथ मूनी के साथ जॉर्जिया वोल और फोएबे लिचफील्ड जैसी युवा बल्लेबाजों की मौजूदगी टीम को मजबूत आधार देती है।

    शिखा पांडे ने एश्ले गार्डनर की पारी को भी निर्णायक बताया। उनके मुताबिक गार्डनर ने परिस्थितियों के अनुरूप बल्लेबाजी करते हुए बड़े शॉट खेलने की जल्दबाजी नहीं दिखाई। उन्होंने फील्ड में मौजूद खाली स्थानों का प्रभावी इस्तेमाल किया, स्ट्राइक रोटेट की और विकेटों के बीच शानदार दौड़ लगाकर दबाव लगातार वेस्टइंडीज पर बनाए रखा। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने एक-एक रन को दो रन में बदलने की कोशिश की, जिससे विपक्षी टीम पर अतिरिक्त दबाव बना।

    उन्होंने वेस्टइंडीज की रणनीतिक गलतियों का भी उल्लेख किया। शिखा के अनुसार गेंदबाजी में बदलाव के दौरान कुछ फैसले टीम के खिलाफ गए। विशेष रूप से जहजारा क्लैक्सटन को पावरप्ले के महत्वपूर्ण चरण में गेंदबाजी सौंपना महंगा साबित हुआ, क्योंकि उस ओवर में ऑस्ट्रेलिया ने तेजी से रन बटोरकर मैच का रुख अपनी ओर मोड़ लिया। उनका कहना था कि छोटे लक्ष्य का बचाव करते समय शुरुआती ओवरों में अतिरिक्त रन देना किसी भी टीम के लिए नुकसानदायक साबित होता है।

    पूर्व तेज गेंदबाज ने यह भी कहा कि वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी काफी हद तक कप्तान हेली मैथ्यूज पर निर्भर दिखाई दी। शुरुआती बल्लेबाजों के संघर्ष और मध्यक्रम पर बढ़ते दबाव का ऑस्ट्रेलिया ने पूरा फायदा उठाया। जैसे ही ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों को पिच से स्पिन और अतिरिक्त मदद मिलने लगी, उन्होंने अपनी रणनीति में तुरंत बदलाव किया। कप्तान सोफी मोलिनक्स ने भी गेंदबाजी संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए विपक्षी बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया।

    सेमीफाइनल मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट पर 125 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने केवल 13 ओवर में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलियाई टीम ने रिकॉर्ड आठवीं बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश कर अपनी लगातार सफलता और बड़े मैचों में दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया।

  • भारत बनाम इंग्लैंड टी20 सीरीज का आगाज आज श्रेयस अय्यर की टीम के सामने जीत की चुनौती जानें पूरी लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल

    भारत बनाम इंग्लैंड टी20 सीरीज का आगाज आज श्रेयस अय्यर की टीम के सामने जीत की चुनौती जानें पूरी लाइव स्ट्रीमिंग डिटेल


    नई दिल्ली । भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का रोमांच बुधवार से शुरू होने जा रहा है। दोनों टीमों के बीच पहला मुकाबला इंग्लैंड के चेस्टर ली स्ट्रीट स्थित रिवरसाइड ग्राउंड में खेला जाएगा। भारतीय टीम हाल ही में आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज गंवाने के बाद मैदान पर उतर रही है ऐसे में कप्तान श्रेयस अय्यर की अगुआई में टीम इंडिया की कोशिश जीत के साथ नई शुरुआत करने की होगी। वहीं मेजबान इंग्लैंड अपने घरेलू हालात का पूरा फायदा उठाकर सीरीज में बढ़त हासिल करना चाहेगा।

    इस मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर हो रही है। 15 वर्षीय प्रतिभाशाली खिलाड़ी के अंतरराष्ट्रीय टी20 डेब्यू का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है लेकिन टीम प्रबंधन के संकेत बताते हैं कि पहले मुकाबले में उन्हें मौका मिलना आसान नहीं होगा। आयरलैंड दौरे पर भी उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली थी जबकि सूर्यांश शेडगे और प्रिंस यादव को डेब्यू का अवसर दिया गया था। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल बना हुआ है कि क्या वैभव को इंतजार करना पड़ेगा या टीम कोई बड़ा फैसला लेगी।

    भारतीय बल्लेबाजी पिछले कुछ समय से कठिन और तेज पिचों पर संघर्ष करती नजर आई है। इंग्लैंड की परिस्थितियां भी आयरलैंड जैसी मानी जा रही हैं जहां गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और स्विंग मिलती है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को अपनी रणनीति में बदलाव करना होगा। इंग्लैंड के पास जोफ्रा आर्चर जोश टंग साकिब महमूद और सोनी बेकर जैसे तेज गेंदबाज हैं जबकि स्पिन विभाग में आदिल रशीद और रेहान अहमद जैसे अनुभवी खिलाड़ी मौजूद हैं जो किसी भी बल्लेबाजी क्रम को परेशानी में डाल सकते हैं।

    रिवरसाइड ग्राउंड की पिच भी गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती है। यहां खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में औसत स्कोर करीब 138 रन रहा है जबकि सर्वोच्च स्कोर 195 रन का है। ऐसे आंकड़े बताते हैं कि बल्लेबाजों को शुरुआत से ही संभलकर खेलना होगा और छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं।

    श्रेयस अय्यर के लिए यह सीरीज काफी अहम मानी जा रही है क्योंकि लगातार दूसरी टी20 सीरीज हारने से टीम पर दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर इंग्लैंड अपनी मजबूत गेंदबाजी और घरेलू परिस्थितियों के दम पर सीरीज का विजयी आगाज करना चाहेगा। ऐसे में पहले मुकाबले में दोनों टीमों के बीच कड़ा संघर्ष देखने की पूरी उम्मीद है।

    भारत और इंग्लैंड के बीच पहला टी20 मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 10 बजे शुरू होगा जबकि टॉस रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा। मुकाबले का सीधा प्रसारण सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के चैनलों पर किया जाएगा जबकि लाइव स्ट्रीमिंग सोनीलिव एप पर उपलब्ध रहेगी। क्रिकेट प्रशंसकों को एक रोमांचक मुकाबले की उम्मीद है जहां दोनों टीमें जीत के साथ सीरीज की शुरुआत करने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।

  • फीफा विश्व कप 2026 में एल्डोर शोमुरोदोव का बड़ा धमाका ग्रुप स्टेज के बेस्ट गोल की रेस में मेसी और विनीसियस को छोड़ा पीछे

    फीफा विश्व कप 2026 में एल्डोर शोमुरोदोव का बड़ा धमाका ग्रुप स्टेज के बेस्ट गोल की रेस में मेसी और विनीसियस को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली । फीफा विश्व कप 2026 में जहां दुनिया की नजरें लियोनेल मेसी किलियन एमबाप्पे एरलिंग हालंद और विनीसियस जूनियर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों पर टिकी हुई हैं वहीं उज्बेकिस्तान के कप्तान एल्डोर शोमुरोदोव ने अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया है। भले ही उज्बेकिस्तान की टीम ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ सकी लेकिन उसके कप्तान ने ऐसा गोल दागा जिसने दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया। फीफा की ओर से आयोजित ग्रुप स्टेज गोल ऑफ द टूर्नामेंट की शुरुआती वोटिंग में शोमुरोदोव का गोल सबसे अधिक पसंद किया गया और उन्होंने मेसी तथा विनीसियस जूनियर जैसे सुपरस्टार खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया।

    डीआर कांगो के खिलाफ ग्रुप स्टेज के आखिरी मुकाबले में शोमुरोदोव ने बेहद कठिन कोण से शानदार लॉब शॉट लगाकर ऐसा गोल किया जिसे पूरे टूर्नामेंट के सबसे खूबसूरत गोलों में शामिल किया जा रहा है। इस गोल को फैंस से 36 प्रतिशत वोट मिले और वह पहले स्थान पर रहे। हैती के विल्सन इसिडोर 26.5 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे जबकि बोस्निया और हर्जेगोविना के केरिम अलाजबेगोविच को 24.9 प्रतिशत वोट मिले। इस नतीजे ने यह साबित कर दिया कि शानदार प्रदर्शन किसी बड़े नाम का मोहताज नहीं होता।

    31 वर्षीय एल्डोर शोमुरोदोव का जन्म उज्बेकिस्तान के छोटे से कस्बे जारकुरगान में हुआ था। विश्व कप से पहले उन्होंने कहा था कि वह इस टूर्नामेंट में अपने देश को नई पहचान दिलाना चाहते हैं। भले ही टीम नॉकआउट चरण तक नहीं पहुंच सकी लेकिन उनके इस शानदार गोल ने उज्बेकिस्तान को वैश्विक फुटबॉल मंच पर नई पहचान दिला दी है।

    फीफा ने गोल ऑफ द टूर्नामेंट चुनने के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाई है। सबसे पहले ग्रुप स्टेज के गोलों पर 48 घंटे तक फैंस से वोटिंग कराई गई। इसके बाद राउंड ऑफ 32 राउंड ऑफ 16 क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल के बाद भी इसी तरह मतदान होगा। टूर्नामेंट समाप्त होने के बाद अंतिम वोटिंग के आधार पर पूरे विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ गोल चुना जाएगा।

    दूसरी ओर विश्व कप के 20वें दिन भी कई बड़े सितारों ने अपनी चमक बिखेरी। नॉर्वे के स्टार स्ट्राइकर एरलिंग हालंद ने आइवरी कोस्ट के खिलाफ निर्णायक गोल कर अपनी टीम को 2-1 से जीत दिलाई। इस जीत के साथ नॉर्वे पहली बार विश्व कप के नॉकआउट मुकाबले में जीत दर्ज कर राउंड ऑफ 16 में पहुंच गया जहां उसका सामना ब्राजील से होगा। हालंद ने इस टूर्नामेंट में अब तक हर मैच में गोल करने का अपना शानदार रिकॉर्ड भी कायम रखा है।

    उधर फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे ने स्वीडन के खिलाफ दो गोल दागकर अपनी टीम को 3-0 की शानदार जीत दिलाई। एमबाप्पे के विश्व कप करियर में अब 18 गोल हो चुके हैं और वह लियोनेल मेसी के 19 गोल के रिकॉर्ड से सिर्फ एक कदम दूर हैं। इसके साथ ही वह मौजूदा विश्व कप में गोल्डन बूट की दौड़ में भी सबसे आगे निकल चुके हैं। विश्व कप 2026 लगातार नए रिकॉर्ड शानदार मुकाबलों और यादगार गोलों का गवाह बन रहा है और एल्डोर शोमुरोदोव का यह गोल लंबे समय तक फुटबॉल प्रेमियों की यादों में दर्ज रहेगा।

  • रिकॉर्ड और ट्रॉफियां नहीं वापसी की ताकत बनाती है महान युवराज सिंह का बेन स्टोक्स के लिए भावुक संदेश

    रिकॉर्ड और ट्रॉफियां नहीं वापसी की ताकत बनाती है महान युवराज सिंह का बेन स्टोक्स के लिए भावुक संदेश


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के स्टार ऑलराउंडर बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भारतीय टीम के पूर्व दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने उन्हें भावुक अंदाज में विदाई दी है। युवराज ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लंबा संदेश साझा करते हुए स्टोक्स के शानदार करियर के साथ उनकी संघर्ष से उबरने की क्षमता की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी की महानता केवल रिकॉर्ड या ट्रॉफियों से नहीं बल्कि हर कठिन दौर के बाद फिर मजबूती से खड़े होने की ताकत से तय होती है।

    युवराज सिंह ने अपने संदेश में स्टोक्स के करियर के कई यादगार पलों का जिक्र किया। उन्होंने विश्व कप फाइनल में खेली गई ऐतिहासिक पारी और हेडिंग्ले टेस्ट में नाबाद 135 रन की पारी को क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक बताया। युवराज ने कहा कि इन पारियों ने यह साबित कर दिया कि असंभव दिखने वाली परिस्थितियों में भी जीत हासिल की जा सकती है।

    युवराज ने स्टोक्स की मानसिक मजबूती की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर खुलकर बात करने का साहस हर खिलाड़ी में नहीं होता लेकिन स्टोक्स ने इसे पूरी ईमानदारी से दुनिया के सामने रखा। इसके अलावा अपने पिता को खोने जैसे निजी दुख के बावजूद उन्होंने जिस तरह हर बार खुद को संभाला और मैदान पर वापसी की वह प्रेरणादायक है।

    पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ने लिखा कि वह खुद भी अपने करियर में सफलता और संघर्ष के कई दौर से गुजर चुके हैं इसलिए वह स्टोक्स के सफर को अच्छी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के शिखर पर पहुंचने और फिर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का अनुभव उन्होंने भी किया है और स्टोक्स में उन्हें वही जज्बा दिखाई दिया।

    युवराज ने कहा कि यही गुण किसी अच्छे खिलाड़ी को महान खिलाड़ी बनाता है। रिकॉर्ड टूटते रहते हैं ट्रॉफियां भी समय के साथ इतिहास का हिस्सा बन जाती हैं लेकिन मुश्किलों के बाद दोबारा उठ खड़े होने की क्षमता हमेशा याद रखी जाती है। उन्होंने स्टोक्स को दो विश्व कप जीतने वाला खिलाड़ी और ऐसा कप्तान बताया जिसने अपनी टीम में यह भरोसा जगाया कि कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।

    35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने वर्ष 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। अपने 15 साल लंबे करियर में उन्होंने इंग्लैंड के लिए 122 टेस्ट 114 वनडे और 43 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। टेस्ट क्रिकेट में उनके नाम 7273 रन और 252 विकेट दर्ज हैं जबकि वनडे में उन्होंने 3463 रन बनाने के साथ 74 विकेट भी हासिल किए। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उन्होंने 585 रन बनाए और 26 विकेट अपने नाम किए।

    स्टोक्स इंग्लैंड के सबसे प्रभावशाली ऑलराउंडरों में गिने जाते हैं। दो विश्व कप जीतने के अलावा एशेज सीरीज में उनके कई यादगार प्रदर्शन और कप्तान के रूप में इंग्लैंड की टेस्ट टीम में लाए गए बदलाव उन्हें आधुनिक दौर के महान क्रिकेटरों में शामिल करते हैं। युवराज सिंह का संदेश भी इसी बात का प्रमाण है कि स्टोक्स का प्रभाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं बल्कि क्रिकेट जगत के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

  • महिला टी20 विश्व कप भारत को हराने के बाद ऑस्ट्रेलिया का बढ़ा हौसला लूसी हैमिल्टन ने सेमीफाइनल से पहले भरी हुंकार

    महिला टी20 विश्व कप भारत को हराने के बाद ऑस्ट्रेलिया का बढ़ा हौसला लूसी हैमिल्टन ने सेमीफाइनल से पहले भरी हुंकार


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया की युवा तेज गेंदबाज लूसी हैमिल्टन ने कहा है कि भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ मिली जीत ने पूरी टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी है। उनका मानना है कि बड़े मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करने से खिलाड़ियों का भरोसा बढ़ता है और यही आत्मविश्वास अब वेस्टइंडीज के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल में भी टीम की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।

    क्रिकेट डॉट कॉम डॉट एयू से बातचीत में हैमिल्टन ने कहा कि नई गेंद के साथ गेंदबाजी करना उनके लिए हमेशा रोमांचक अनुभव रहता है। विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में नई गेंद संभालना बड़ी जिम्मेदारी होती है लेकिन भारत के खिलाफ सफल प्रदर्शन के बाद उनका आत्मविश्वास काफी मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि टीम ने उस मुकाबले में जिस तरह दबाव झेलते हुए जीत हासिल की उससे सभी खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ा है।

    हैमिल्टन ने स्वीकार किया कि विश्व कप जैसे बड़े मंच पर खेलते समय दबाव महसूस होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान के दौरान हर खिलाड़ी के मन में घबराहट होती है लेकिन जैसे ही पहला ओवर शुरू होता है पूरा ध्यान सिर्फ खेल पर केंद्रित हो जाता है। उनके मुताबिक लगातार बड़े मुकाबले खेलने से मानसिक मजबूती भी बढ़ती है और खिलाड़ी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से बेहतर तरीके से निपटना सीखते हैं।

    ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाज ने कहा कि भारत के खिलाफ प्रदर्शन ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वे बड़े मैचों में भी अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। यही अनुभव सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबले में उनके लिए काफी उपयोगी साबित होगा। उन्होंने कहा कि टीम का लक्ष्य पिछले मैचों की लय को बरकरार रखते हुए आक्रामक क्रिकेट खेलना है।

    हैमिल्टन ने मैचों के बीच कम अंतराल को भी टीम के लिए सकारात्मक बताया। उनके अनुसार लगातार मुकाबले खेलने से खिलाड़ियों की लय बनी रहती है और टीम का मोमेंटम भी कायम रहता है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया हाल के मैचों में जिस गुणवत्ता का क्रिकेट खेल रहा है उसे सेमीफाइनल में भी दोहराने की पूरी कोशिश की जाएगी।

    द ओवल मैदान पर पहली बार खेलने जा रहीं हैमिल्टन ने कहा कि मैच से पहले मैदान का निरीक्षण करने से परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने माना कि हालात तेजी से बदल सकते हैं इसलिए टीम का फोकस जल्द से जल्द खुद को परिस्थितियों के अनुरूप ढालने पर रहेगा।

    उन्होंने वेस्टइंडीज को भी बेहद खतरनाक प्रतिद्वंद्वी बताया। हैमिल्टन का कहना है कि अंडरडॉग के रूप में उतरने वाली टीमों पर अतिरिक्त दबाव नहीं होता और वे खुलकर खेलती हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतेगा। दोनों टीमों के बीच होने वाले इस सेमीफाइनल की विजेता फाइनल में जगह बनाएगी जहां विश्व कप खिताब के लिए मुकाबला होगा।
  • 'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ

    'मेसी-रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता फिर शायद कभी नहीं दिखेगी' ओलिवर कान ने दोनों दिग्गजों की जमकर की तारीफ


    नई दिल्ली। जर्मनी के पूर्व कप्तान और दिग्गज गोलकीपर ओलिवर कान का मानना है कि फुटबॉल इतिहास में लियोनेल मेसी और क्रिस्टियानो रोनाल्डो जैसी प्रतिद्वंदिता दोबारा देखने को मिलना बेहद मुश्किल है। उनके अनुसार दोनों खिलाड़ियों ने लगभग दो दशकों तक लगातार एक-दूसरे को बेहतर बनने की प्रेरणा दी और अपने शानदार प्रदर्शन से विश्व फुटबॉल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। कान ने कहा कि उनकी प्रतिस्पर्धा केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रही बल्कि मैदान पर प्रदर्शन और निरंतर उत्कृष्टता के दम पर इतिहास रचा गया।

    फीफा विश्व कप 2026 के दौरान विशेषज्ञ के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे ओलिवर कान ने कहा कि मेसी और रोनाल्डो ने हर सीजन में एक-दूसरे को चुनौती देते हुए अपने खेल का स्तर लगातार ऊंचा किया। यही वजह है कि दोनों खिलाड़ियों ने वर्षों तक दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलरों की सूची में अपना दबदबा बनाए रखा। कान के मुताबिक उनकी प्रतिद्वंदिता व्यक्तिगत उपलब्धियों से कहीं आगे थी क्योंकि इसने पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रशंसकों को लंबे समय तक रोमांचित किया।

    उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता लेकिन मेसी और रोनाल्डो ने अपनी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण से यह कर दिखाया। दोनों ने क्लब फुटबॉल में कई रिकॉर्ड बनाए और एक-दूसरे को लगातार चुनौती देते हुए नए कीर्तिमान स्थापित किए। कान का मानना है कि इसी कारण यह प्रतिद्वंदिता खेल इतिहास की सबसे यादगार प्रतिस्पर्धाओं में गिनी जाएगी।

    ओलिवर कान ने अपने करियर के सबसे यादगार पल के रूप में 2002 फीफा विश्व कप का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस टूर्नामेंट में जर्मनी को फाइनल तक पहुंचाना उनके जीवन का सबसे बड़ा अनुभव था। हालांकि फाइनल में हार का दर्द आज भी उनके मन में है क्योंकि हर खिलाड़ी का सपना विश्व कप जीतना होता है। उन्होंने स्वीकार किया कि गोलकीपर के रूप में गोल्डन बॉल जीतना उनके लिए गर्व की बात थी लेकिन यदि मौका मिले तो वह इस व्यक्तिगत सम्मान के बदले विश्व कप ट्रॉफी लेना पसंद करेंगे।

    दिग्गज गोलकीपर ने मौजूदा विश्व कप में खेल रहे युवा खिलाड़ियों और खासकर गोलकीपरों को भी महत्वपूर्ण सलाह दी। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होनी चाहिए। खिलाड़ियों को लगातार अपने खेल में सुधार करते रहना चाहिए और बड़े मंच पर दबाव से घबराने के बजाय उसका आनंद लेना चाहिए। उनके अनुसार विश्व कप ऐसा मंच है जहां पूरी दुनिया की नजर खिलाड़ियों पर होती है और कई बार एक पल या एक फैसला पूरे टूर्नामेंट का भविष्य तय कर देता है। इसलिए हर खिलाड़ी को हर क्षण पूरी एकाग्रता के साथ खेलना चाहिए।

    मेसी और रोनाल्डो को आधुनिक फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में गिना जाता है। दोनों ने क्लब फुटबॉल में वर्षों तक शानदार मुकाबले खेले और अनगिनत रिकॉर्ड अपने नाम किए। हालांकि विश्व कप में दोनों कभी आमने-सामने नहीं आ सके। माना जा रहा है कि फीफा विश्व कप 2026 दोनों दिग्गजों का आखिरी विश्व कप हो सकता है। ऐसे में दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजर एक बार फिर इन दोनों खिलाड़ियों पर रहेगी, जो अपने करियर के इस अहम पड़ाव पर यादगार प्रदर्शन कर इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे।

  • फुटबॉल वर्ल्ड कप में बड़ा उलटफेर: जर्मनी का सफर राउंड ऑफ 32 में समाप्त, रोमांचक मुकाबले में जापान को हराकर अंतिम-16 में पहुंचा ब्राजील

    फुटबॉल वर्ल्ड कप में बड़ा उलटफेर: जर्मनी का सफर राउंड ऑफ 32 में समाप्त, रोमांचक मुकाबले में जापान को हराकर अंतिम-16 में पहुंचा ब्राजील

    बोस्टन: फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में फुटबॉल जगत का एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही चार बार की विश्व विजेता जर्मनी का सफर इस बार बेहद निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। पराग्वे की टीम ने मैदान पर शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से शिकस्त देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पराग्वे ने प्री-क्वार्टर फाइनल यानी अंतिम-16 में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है। दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय और एक्स्ट्रा टाइम तक मुकाबला 1-1 की बराबरी पर छूटा था।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। गेंद पर अधिकांश समय जर्मनी के खिलाड़ियों का नियंत्रण रहा, लेकिन पराग्वे के मजबूत डिफेंस और सटीक रणनीति के आगे जर्मनी की आक्रामक पंक्ति पूरी तरह बेअसर साबित हुई। मैच के पहले हाफ के अंतिम क्षणों में पराग्वे को एक कॉर्नर मिला, जिस पर जर्मनी के गोलकीपर ने गेंद को रोकने की कोशिश की, मगर पराग्वे ने दोबारा गेंद पर नियंत्रण पा लिया। मटियास गलार्सा के बेहतरीन क्रॉस पर जूलियो एनसिसो ने एक शानदार हेडर लगाकर अपनी टीम को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी। विश्व कप के नॉकआउट चरण में पराग्वे का यह पहला गोल भी दर्ज हुआ।

    एक गोल से पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में जर्मनी ने अपनी रणनीति बदली और अधिक आक्रामक होकर मैच में वापसी की। खेल के 54वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के बाएं छोर से आए एक सटीक क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने दमदार हेडर लगाकर स्कोर को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। इस बराबरी के बाद जर्मनी ने विजयी गोल की तलाश में पराग्वे के पाले पर लगातार कई तीखे हमले किए, लेकिन पराग्वे की रक्षात्मक पंक्ति दीवार की तरह डटी रही और उन्होंने जर्मनी को बढ़त बनाने का कोई दूसरा मौका नहीं दिया।

    तय समय तक नतीजा न निकलने पर मुकाबला अतिरिक्त समय में चला गया। जर्मनी के मुख्य कोच ने मैच को पेनल्टी शूटआउट में जाने से रोकने के लिए अपने सभी प्रमुख फॉरवर्ड खिलाड़ियों को मैदान पर उतार दिया। एक्स्ट्रा टाइम के दौरान जर्मनी के जोनाथन ताह ने गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा भी दिया था, लेकिन रेफरी ने उनके साथी खिलाड़ी द्वारा पराग्वे के गोलकीपर पर किए गए फाउल के कारण इस गोल को अमान्य घोषित कर दिया। 120 मिनट के खेल के बाद भी जब स्कोर 1-1 रहा, तो मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट के जरिए करने का निर्णय लिया गया।

    पेनल्टी शूटआउट का रोमांच बेहद चरम पर था। जर्मनी की तरफ से पहली किक लेने आए काई हैवर्ट्ज के शॉट को पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार तरीके से रोककर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। इसके बाद दोनों टीमों की तरफ से गोल करने और चूकने का सिलसिला जारी रहा। अंत में पराग्वे के जोसे कनाले ने बेहद शांत अंदाज में निर्णायक पेनल्टी को गोल में तब्दील कर अपनी टीम को 4-3 से ऐतिहासिक जीत दिला दी। शानदार गोलकीपिंग के लिए ऑरलैंडो गिल को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। अब पराग्वे की टीम चार जुलाई को फिलाडेल्फिया में फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मैच के विजेता से मुकाबला करेगी।

    इसी दौरान टूर्नामेंट के एक अन्य रोमांचक मुकाबले में ब्राजील ने जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की की। इस मैच में जापान ने 29वें मिनट में काइशु सानो के बेहतरीन गोल की मदद से 1-0 की शुरुआती बढ़त बनाकर ब्राजील को संकट में डाल दिया था। इसके बाद ब्राजील ने वापसी करते हुए कासेमिरो के हेडर की मदद से स्कोर बराबर किया। मैच के आखिरी मिनटों तक दोनों टीमें बढ़त बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं, लेकिन इंजरी टाइम में गैब्रियल完整 मार्टिनेली ने ब्राजील के लिए विजयी गोल दागकर अपनी टीम को प्री-क्वार्टर फाइनल का टिकट दिला दिया।

  • वर्ल्ड कप में मिली मायूसी ओलंपिक से आई बड़ी खुशखबरी भारतीय महिला टीम ने LA28 के लिए किया क्वालिफाई

    वर्ल्ड कप में मिली मायूसी ओलंपिक से आई बड़ी खुशखबरी भारतीय महिला टीम ने LA28 के लिए किया क्वालिफाई


    नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अभियान उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और टीम ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई। हालांकि इस निराशा के बीच हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई कर लिया है और अब पहली बार ओलंपिक क्रिकेट में पदक जीतने का सपना साकार करने का मौका मिलेगा।

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने क्रिकेट की 128 साल बाद ओलंपिक में वापसी के लिए क्वालिफिकेशन प्रक्रिया का एलान कर दिया है। इसी के साथ महिला क्रिकेट की पहली चार क्वालिफाई करने वाली टीमों के नाम भी तय हो गए हैं जिनमें भारत भी शामिल है। भारत को एशिया का एकमात्र सीधा कोटा मिला क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली एशियाई टीमों में उसका प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।

    आईसीसी के नए नियमों के अनुसार अफ्रीका एशिया यूरोप और ओशिनिया से एक एक टीम को सीधे ओलंपिक का टिकट दिया गया है। इसी आधार पर भारत एशिया से ऑस्ट्रेलिया ओशिनिया से दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका से और ग्रेट ब्रिटेन यूरोप से लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली चार टीमें बन गई हैं।

    छह टीमों वाले महिला क्रिकेट टूर्नामेंट में पांचवां स्थान मेजबान अमेरिका को मिल सकता है। इसके लिए अमेरिका को इस साल के अंत तक आईसीसी महिला टी20 रैंकिंग में शीर्ष 15 में जगह बनानी होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो यह स्थान आईसीसी रैंकिंग में सबसे ऊंची रैंकिंग वाली गैर क्वालिफाई टीम को मिलेगा। वहीं छठी और अंतिम टीम का फैसला 2027 में होने वाले आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर से होगा जिसमें आठ टीमें हिस्सा लेंगी।

    आईसीसी ने वेस्टइंडीज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। चूंकि ओलंपिक में अलग अलग देशों का प्रतिनिधित्व होता है इसलिए यदि वेस्टइंडीज पात्र होता है तो कैरेबियाई देशों के बीच अलग क्वालिफाइंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।

    पुरुष क्रिकेट स्पर्धा के लिए भी छह टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें से चार महाद्वीपों की शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें सीधे क्वालिफाई करेंगी जबकि मेजबान अमेरिका के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है। यदि अमेरिका निर्धारित अवधि में शीर्ष 15 रैंकिंग में जगह नहीं बना पाता है तो उसका स्थान किसी अन्य पात्र टीम को दिया जाएगा।

    आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने क्रिकेट की ओलंपिक में वापसी को ऐतिहासिक अवसर बताया है। उनके अनुसार यह फैसला दुनिया भर में क्रिकेट के विस्तार और नए देशों तक इस खेल को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। वहीं आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता का कहना है कि नया क्वालिफिकेशन मॉडल प्रतिस्पर्धा और वैश्विक प्रतिनिधित्व के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करता है।

    गौरतलब है कि क्रिकेट आखिरी बार 1900 के पेरिस ओलंपिक का हिस्सा था। अब 128 साल बाद लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की वापसी होगी। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में छह छह टीमें हिस्सा लेंगी और पहली बार क्रिकेट में ओलंपिक पदक के लिए मुकाबला होगा।