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  • रविचंद्रन अश्विन बोले-सही शॉट चयन ही दिलाएगा रुतुराज गायकवाड़ को सफलता

    रविचंद्रन अश्विन बोले-सही शॉट चयन ही दिलाएगा रुतुराज गायकवाड़ को सफलता


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में Chennai Super Kings की जीत के बावजूद कप्तान Ruturaj Gaikwad की बल्लेबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। मंगलवार को चेपॉक में खेले गए मुकाबले में सीएसके ने Kolkata Knight Riders को 32 रन से हराकर सीजन की लगातार दूसरी जीत दर्ज की। इस जीत से टीम अंकतालिका में 10वें से 8वें स्थान पर पहुंच गई, जिससे कप्तान गायकवाड़ को थोड़ी राहत जरूर मिली, लेकिन उनकी व्यक्तिगत फॉर्म अब भी टीम के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।

    बल्लेबाजी में लगातार फ्लॉप, टीम को नहीं मिल रही ठोस शुरुआत

    केकेआर के खिलाफ मैच में भी गायकवाड़ महज 6 गेंदों में 7 रन बनाकर आउट हो गए। यह प्रदर्शन उनके मौजूदा फॉर्म को दर्शाता है, जहां वह रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पूरे सीजन में अब तक 5 मैचों की 5 पारियों में वह सिर्फ 63 रन ही बना सके हैं। उनकी इस खराब फॉर्म का असर टीम की शुरुआत पर साफ दिखाई दे रहा है, जिससे सीएसके को कई मैचों में दबाव का सामना करना पड़ा।

    अश्विन की सलाह: सही शॉट सिलेक्शन है सफलता की कुंजी

    पूर्व भारतीय स्पिनर और एक्सपर्ट Ravichandran Ashwin ने गायकवाड़ की बल्लेबाजी पर अहम टिप्पणी करते हुए सुधार की सलाह दी। उन्होंने कहा कि टी20 क्रिकेट में इंटेंट जरूरी है, लेकिन सही शॉट का चयन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। अश्विन के अनुसार, गायकवाड़ शुरुआत में जल्दबाजी दिखा रहे हैं और गेंद की लाइन से बाहर जाकर शॉट खेलने की कोशिश में कैच आउट हो रहे हैं।

    उन्होंने उदाहरण देते हुए Sanju Samson और Ayush Mhatre का जिक्र किया, जिन्होंने हाल के मैचों में बेहतर शॉट चयन दिखाया। अश्विन ने सुझाव दिया कि गायकवाड़ को शुरुआत में थोड़ा संयम बरतना चाहिए, गेंद को अच्छी तरह टाइम करना चाहिए और ज्यादा “डाउन द ग्राउंड” शॉट्स खेलने चाहिए।

    ओपनिंग में बदलाव की उठ रही मांग

    गायकवाड़ की खराब फॉर्म के चलते अब टीम कॉम्बिनेशन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कई क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी जगह Ayush Mhatre को Sanju Samson के साथ ओपनिंग का मौका दिया जाना चाहिए। इससे टीम को बेहतर शुरुआत मिल सकती है और मिडिल ऑर्डर पर दबाव कम होगा।

     कप्तानी में राहत, बल्लेबाजी में चुनौती

    हालांकि बतौर कप्तान गायकवाड़ ने टीम को लगातार दो जीत दिलाकर आलोचकों को कुछ हद तक शांत किया है, लेकिन एक बल्लेबाज के रूप में उनकी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। अगर उन्हें टीम को प्लेऑफ की दौड़ में बनाए रखना है, तो जल्द ही अपनी फॉर्म में वापसी करनी होगी।

  • ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट विक्टर एक्सेलसन ने करियर को कहा अलविदा

    ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट विक्टर एक्सेलसन ने करियर को कहा अलविदा


    नई दिल्ली। दुनिया के दिग्गज बैडमिंटन खिलाड़ियों में शुमार डेनमार्क के स्टार शटलर Viktor Axelsen ने बुधवार को प्रोफेशनल बैडमिंटन से संन्यास का ऐलान कर खेल जगत को चौंका दिया। महज 32 साल की उम्र में लिया गया यह फैसला उनके शानदार करियर के लिहाज से जितना चौंकाने वाला है, उतना ही भावुक भी। एक्सेलसन ने अपने संन्यास के पीछे लगातार बनी रहने वाली पीठ की गंभीर समस्या को वजह बताया है, जिसने पिछले कुछ समय से उनके प्रदर्शन और ट्रेनिंग दोनों पर गहरा असर डाला था।

    ⚕ चोट बनी करियर की सबसे बड़ी बाधा
    एक्सेलसन लंबे समय से पीठ दर्द से जूझ रहे थे। पिछले साल अप्रैल में उनकी सर्जरी भी हुई थी, जिसके बाद उन्होंने लंबा रिहैबिलिटेशन किया। हालांकि वापसी के बाद अक्टूबर में उन्हें फिर झटका लगा और तब से वह पूरी क्षमता के साथ कोर्ट पर नहीं लौट पाए। उन्होंने बताया कि दर्द इतना ज्यादा था कि वह न तो ट्रेनिंग कर पा रहे थे और न ही मैच खेल पा रहे थे। डॉक्टरों की सलाह और संभावित दूसरी सर्जरी के जोखिम को देखते हुए उन्होंने आखिरकार रैकेट रखने का फैसला कर लिया।

     सुनहरे करियर पर एक नजर
    2010 में प्रोफेशनल डेब्यू करने वाले एक्सेलसन ने अपने करियर में लगभग हर बड़ा खिताब जीता। उन्होंने Tokyo 2020 Olympics और Paris 2024 Olympics में लगातार दो बार गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इससे पहले Rio 2016 Olympics में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया था। वह ओलंपिक इतिहास में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाले पुरुष बैडमिंटन खिलाड़ियों में शामिल हैं।

    इसके अलावा, उन्होंने 2017 और 2022 में वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर खुद को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में स्थापित किया। खास बात यह है कि वह दो बार वर्ल्ड चैंपियन बनने वाले गिने-चुने नॉन-एशियन खिलाड़ियों में से एक हैं। यूरोपियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने तीन बार खिताब अपने नाम किया और टीम इवेंट में थॉमस कप जीतकर अपने देश को गौरवान्वित किया।

    भावुक बयान: “मेरा शरीर अब रुकने को कह रहा है”
    संन्यास की घोषणा करते हुए एक्सेलसन ने कहा कि यह फैसला लेना उनके लिए बेहद कठिन था, लेकिन शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं था। उन्होंने कहा, “डॉक्टरों ने बताया कि मौजूदा दर्द के लिए शायद एक और सर्जरी करनी पड़ सकती है, और अगर वह सफल नहीं हुई तो स्थिति और बिगड़ सकती है। ऐसे में मेरा शरीर मुझे रुकने का इशारा दे रहा है।” उनके इस बयान से साफ झलकता है कि उन्होंने मजबूरी में यह फैसला लिया।

    बैडमिंटन जगत में छोड़ी अमिट छाप
    एक्सेलसन का नाम उन खिलाड़ियों में लिया जाएगा जिन्होंने बैडमिंटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी फिटनेस, अनुशासन और आक्रामक खेल शैली ने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाया। उन्होंने न सिर्फ एशियाई दबदबे को चुनौती दी, बल्कि यूरोप से एक नई पहचान भी बनाई।

  • शतक से छाए Sanju Samson, Dale Steyn बोले-टीम का माहौल पूरी तरह बदला

    शतक से छाए Sanju Samson, Dale Steyn बोले-टीम का माहौल पूरी तरह बदला


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में शुरुआत में लड़खड़ाने वाली Chennai Super Kings अब शानदार वापसी करती नजर आ रही है। टीम की इस वापसी का बड़ा कारण बने हैं विकेटकीपर बल्लेबाज Sanju Samson, जिनके शतक ने पूरे कैंप का माहौल बदल दिया।
    लगातार हार के बाद मुश्किल में थी टीम
    सीजन की शुरुआत में CSK को लगातार तीन मैचों में हार झेलनी पड़ी थी। इससे टीम का मनोबल काफी गिर गया था। लेकिन इसके बाद टीम ने जोरदार वापसी करते हुए लगातार दो मुकाबले जीत लिए और अंकतालिका में Kolkata Knight Riders और Mumbai Indians से ऊपर पहुंच गई।
    सैमसन का शतक बना टर्निंग पॉइंट
    दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज Dale Steyn का मानना है कि यह बदलाव सैमसन की शानदार पारी के बाद आया। दिल्ली के खिलाफ खेले गए मैच में सैमसन ने 56 गेंदों पर नाबाद 115 रन ठोक दिए, जिसमें 15 चौके और 4 छक्के शामिल थे। स्टेन ने कहा कि एक जीत टीम के आत्मविश्वास को पूरी तरह बदल देती है और वही CSK के साथ हुआ।
    जीत से बढ़ा आत्मविश्वास
    स्टेन के मुताबिक, “आईपीएल में मैच जीतना आसान नहीं होता। लेकिन जब टीम एक मैच जीतती है, तो खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे बेहतर प्रदर्शन करने लगते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि सैमसन टीम के बदलाव को लीड कर रहे हैं।
    चेपॉक में दिखी CSK की ताकत
    घरेलू मैदान चेपॉक में CSK ने 20 ओवर में 212 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया और मुकाबला 23 रन से जीत लिया। इसके बाद टीम ने Kolkata Knight Riders को भी 32 रन से हराकर अपनी लय बरकरार रखी। इस मैच में भी सैमसन ने अहम 48 रन की पारी खेली।
    गायकवाड़ से भी बड़ी उम्मीद
    स्टेन ने कप्तान Ruturaj Gaikwad की भी तारीफ करते हुए कहा कि वह शानदार बल्लेबाज हैं और आने वाले मैचों में टीम के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।
  • हार के बाद खुलासा: KKR की नाकामी पर कप्तान अंजिक्य रहाणे का बड़ा बयान

    हार के बाद खुलासा: KKR की नाकामी पर कप्तान अंजिक्य रहाणे का बड़ा बयान

    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) का खराब प्रदर्शन जारी है। चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के खिलाफ 32 रन की हार के बाद टीम को इस सीजन में चौथी हार झेलनी पड़ी, जबकि एक मैच बारिश के कारण बेनतीजा रहा। इस हार के बाद कप्तान अजिंक्य रहाणे ने टीम की असफलता की असली वजह साफ तौर पर बताई।
    रहाणे ने बल्लेबाजी को बताया सबसे बड़ी कमजोरी
    मैच के बाद रहाणे ने माना कि KKR की हार की सबसे बड़ी वजह बल्लेबाजी रही। उन्होंने कहा कि गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए CSK को 200 रन से नीचे रोक दिया, जो इस पिच पर अच्छा प्रयास था। लेकिन बल्लेबाजी यूनिट इसका फायदा नहीं उठा पाई।
    पावरप्ले में धीमी शुरुआत बनी हार की वजह
    KKR की पारी की सबसे बड़ी समस्या पावरप्ले में धीमी शुरुआत रही। टीम शुरुआती ओवरों में सिर्फ 36-37 रन ही बना सकी, जिससे रनचेज का दबाव लगातार बढ़ता गया। रहाणे के मुताबिक बल्लेबाजों को न तो मोमेंटम मिला और न ही कोई साझेदारी बन पाई, जो हार का मुख्य कारण बना।
    गेंदबाजों की तारीफ, लेकिन बल्लेबाजों पर सवाल
    जहां कप्तान ने गेंदबाजों के प्रदर्शन की सराहना की, वहीं बल्लेबाजी यूनिट पर सीधा सवाल उठाया। उनका कहना था कि जब गेंदबाजों ने टीम को मुकाबले में बनाए रखा, तब बल्लेबाजों को जिम्मेदारी लेनी चाहिए थी।
    टीम का मनोबल बनाए रखने की अपील
    लगातार हार के बावजूद रहाणे ने खिलाड़ियों से सकारात्मक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह कठिन समय है, लेकिन टीम को हर मैच में सुधार करते हुए आगे बढ़ना होगा और आत्मविश्वास बनाए रखना होगा।
    कार्तिक त्यागी की जमकर तारीफ
    हार के बीच रहाणे ने युवा तेज गेंदबाज कार्तिक त्यागी की विशेष तारीफ की। उन्होंने कहा कि त्यागी लगातार मेहनत कर रहे हैं और 148 किमी प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं, जो टीम के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
    CSK की रणनीति और मजबूत गेंदबाजी
    दूसरी ओर CSK के कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ ने टीम की जीत पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि टीम धीरे-धीरे अपनी लय में आ रही है और खिलाड़ी अपने रोल को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं। गेंदबाज नूर अहमद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट झटके और KKR की रनचेज को पूरी तरह रोक दिया।
    KKR का लगातार गिरता प्रदर्शन
    इस हार के साथ KKR का सीजन बेहद खराब चल रहा है। टीम 5 में से 4 मैच हार चुकी है, जबकि एक मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया है। लगातार खराब प्रदर्शन ने टीम की प्लेऑफ उम्मीदों को भी मुश्किल में डाल दिया है।

  • संघर्ष से सफलता तक: प्रफुल हिंगे की कहानी और हार्दिक पांड्या का खास मैसेज

    संघर्ष से सफलता तक: प्रफुल हिंगे की कहानी और हार्दिक पांड्या का खास मैसेज


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के 21वें मैच में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के युवा तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे ने अपने डेब्यू से ही क्रिकेट जगत में सनसनी मचा दी। अपने पहले ही मैच में उन्होंने शानदार गेंदबाजी करते हुए 34 रन देकर 4 विकेट हासिल किए, जिसमें पहले ही ओवर में 3 विकेट लेकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी। इस बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया।

    पिता का वादा बना करियर की नींव
    प्रफुल्ल हिंगे की कहानी सिर्फ क्रिकेट नहीं, बल्कि संघर्ष और परिवार के सपोर्ट की मिसाल है। उन्होंने बताया कि जब वह छठी क्लास में थे, तब उन्होंने अपने पिता से क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई थी। उस समय उनके पिता ने उन्हें तुरंत मैदान में उतारने के बजाय एक साल रुकने को कहा, लेकिन साथ ही उन्हें टेनिस बॉल से खेलने के लिए एक बैट दिलाया। यही छोटा सा कदम आगे चलकर उनके बड़े क्रिकेटर बनने की नींव बन गया।

    समर कैंप से शुरू हुआ असली सफर
    एक साल बाद उनके पिता ने उनका एडमिशन एक समर कैंप में कराया, जहां से उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखनी शुरू कीं। प्रफुल्ल ने बताया कि शुरुआत में उन्हें सीजन बॉल क्रिकेट की समझ नहीं थी, लेकिन मेहनत और लगन से उन्होंने खुद को धीरे-धीरे तैयार किया।
    पिता ने साफ कहा था कि पढ़ाई, स्कूल और क्रिकेट—तीनों को साथ संभालना होगा, और प्रफुल्ल ने यह चुनौती स्वीकार की।

    चोट और MRF अकादमी का कठिन दौर
    प्रफुल्ल के करियर में मुश्किल समय भी आया, जब MRF पेस अकादमी में ट्रेनिंग के दौरान उनकी पीठ में स्ट्रेस फ्रैक्चर की समस्या सामने आई। करीब 7–8 महीने का समय उनके लिए बेहद कठिन रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने अंडर-23 क्रिकेट में 25 से ज्यादा विकेट लेकर जोरदार वापसी की।

    ऑस्ट्रेलिया ट्रेनिंग और बड़े गेंदबाजों से सीख
    MRF अकादमी के जरिए उन्हें ऑस्ट्रेलिया में ट्रेनिंग का मौका मिला, जहां उन्होंने दिग्गज तेज गेंदबाज जोश हेजलवुड और झाय रिचर्डसन से मुलाकात की। वहां उन्होंने फिटनेस, डाइट और मैच मैनेजमेंट को लेकर कई अहम बातें सीखीं।

    हार्दिक पांड्या से खास पल
    विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान हार्दिक पांड्या के खिलाफ गेंदबाजी करते समय प्रफुल्ल शुरुआत में घबराए हुए थे, लेकिन पहली गेंद के बाद उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। हार्दिक ने भी उनकी गेंदबाजी की तारीफ करते हुए कहा था

    “बहुत बढ़िया गेंदबाजी।”
    यह बात उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई।

     IPL में बड़ा सपना
    प्रफुल्ल हिंगे का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ आईपीएल खेलना नहीं बल्कि अपनी टीम को चैंपियन बनाना है। इसके अलावा वह बेस्ट फील्डर बनने और सबसे शानदार कैच लेने का सपना भी देखते हैं।

  • वंदना कटारिया: ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली इकलौती भारतीय खिलाड़ी

    वंदना कटारिया: ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली इकलौती भारतीय खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारतीय महिला हॉकी की स्टार खिलाड़ी वंदना कटारिया का नाम देश के खेल इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 15 अप्रैल 1992 को रोशनाबाद (उत्तराखंड) में जन्मी वंदना ने फॉरवर्ड पोजीशन पर खेलते हुए भारतीय टीम को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई और महिला हॉकी को नई पहचान दी।
    शुरुआती करियर और पहचान
    वंदना कटारिया को साल 2006 में भारतीय जूनियर टीम में जगह मिली और 2009 में उन्होंने सीनियर टीम में कदम रखा। 2013 जूनियर वर्ल्ड कप में वे भारत की टॉप स्कोरर रहीं, जहां टीम ने कांस्य पदक जीता। इसी प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
    एशियाई खेल और अंतरराष्ट्रीय सफलता
    2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का वह अहम हिस्सा थीं। इसी साल उन्हें हॉकी इंडिया की ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ भी चुना गया। 2014-15 में एफआईएच हॉकी वर्ल्ड लीग में उन्होंने 11 गोल कर टूर्नामेंट की टॉप स्कोरर बनने का रिकॉर्ड बनाया।

    ओलंपिक में ऐतिहासिक हैट्रिक
    वंदना कटारिया ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में इतिहास रच दिया, जब वह ओलंपिक हॉकी में हैट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इस उपलब्धि ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई और भारतीय महिला हॉकी को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
    सम्मान और उपलब्धियां
    वंदना को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए कई बड़े सम्मान मिले, जिनमें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री शामिल हैं। 2022 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, वहीं उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर बनकर समाजिक स्तर पर भी योगदान दिया।
    शानदार अंतरराष्ट्रीय करियर
    अपने करियर में वंदना कटारिया ने 320 अंतरराष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 158 गोल दागे। उनकी आक्रामक खेल शैली और लगातार गोल करने की क्षमता ने उन्हें भारतीय हॉकी की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल किया।
    संन्यास और विरासत
    1 अप्रैल 2025 को वंदना कटारिया ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास की घोषणा की। हालांकि मैदान से दूर होने के बावजूद उनकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी।

  • सब जूनियर मेन्स हॉकी में यूपी की जीत, कप्तान केतन कुशवाहा की कप्तानी रही खास

    सब जूनियर मेन्स हॉकी में यूपी की जीत, कप्तान केतन कुशवाहा की कप्तानी रही खास


    नई दिल्ली। सब-जूनियर मेन्स नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। फाइनल में यूपी ने हॉकी मध्य प्रदेश को 5-2 से हराकर ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। पूरी चैंपियनशिप में टीम अपराजेय रही और हर मैच में दमदार खेल दिखाया।
    “खुली बातचीत और भरोसा ही जीत की कुंजी”
    टीम के कप्तान केतन कुशवाहा ने जीत का राज बताते हुए कहा कि टीम के अंदर खुली बातचीत और एक-दूसरे पर भरोसा ही सबसे बड़ी ताकत रही। उन्होंने बताया कि हर खिलाड़ी अपनी गलतियों पर चर्चा करता था और उन्हें सुधारने की कोशिश करता था, जिससे टीम लगातार बेहतर होती गई।
    शुरुआती गोल से मिला आत्मविश्वास
    केतन कुशवाहा ने कहा कि फाइनल में शुरुआती गोल ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ा दिया। इसके बाद टीम ने पूरे मैच में दबाव बनाए रखा और विपक्षी टीम को वापसी का मौका नहीं दिया।
    कोच और सिस्टम की बड़ी भूमिका
    उत्तर प्रदेश हॉकी के अध्यक्ष डॉ. आरपी सिंह ने इस जीत को राज्य की मजबूत हॉकी प्रणाली का नतीजा बताया। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों को समय रहते पहचानकर उन्हें सही कोचिंग और माहौल देना इस सफलता की असली वजह है। कोच रजनीश मिश्रा के योगदान की भी उन्होंने सराहना की।
     लगातार बेहतर हो रहा यूपी हॉकी का प्रदर्शन
    यूपी हॉकी ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। 2021 से अब तक राज्य की टीमों ने विभिन्न कैटेगरी में 13 पदक जीते हैं, जिनमें 5 गोल्ड शामिल हैं। यह दिखाता है कि राज्य में हॉकी का मजबूत आधार तैयार हो रहा है।
  • क्रिकेट इतिहास के खास खिलाड़ी Manoj Prabhakar: जानिए उनके विश्व रिकॉर्ड के बारे में

    क्रिकेट इतिहास के खास खिलाड़ी Manoj Prabhakar: जानिए उनके विश्व रिकॉर्ड के बारे में


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट इतिहास के बेहतरीन तेज गेंदबाजी ऑलराउंडरों में गिने जाने वाले मनोज प्रभाकर का जन्म 15 अप्रैल 1963 को गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और गेंदबाजी के साथ-साथ निचले क्रम में उपयोगी बल्लेबाजी से भी टीम को कई बार संभाला।
    शानदार इंटरनेशनल करियर
    मनोज प्रभाकर ने 1984 में वनडे क्रिकेट से श्रीलंका के खिलाफ डेब्यू किया, जबकि उसी साल इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भी कदम रखा। वह 1996 तक भारतीय टीम का हिस्सा रहे और इस दौरान उन्होंने कई यादगार प्रदर्शन किए। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 39 मैचों में 96 विकेट लिए, जबकि बल्ले से 1600 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 9 अर्धशतक शामिल रहे। वनडे में उन्होंने 157 विकेट झटके और 1858 रन बनाए, जिसमें 2 शतक और 11 अर्धशतक शामिल थे।
    अनोखा विश्व रिकॉर्ड
    मनोज प्रभाकर के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का एक खास रिकॉर्ड दर्ज है उन्होंने सबसे ज्यादा बार ओपनिंग करने का कारनामा किया। उन्होंने 45 वनडे और 20 टेस्ट मैचों में पारी की शुरुआत की, यानी गेंदबाजी और बल्लेबाजी दोनों ही भूमिकाओं में उन्होंने टीम की शुरुआत की। उनकी खासियत स्विंग गेंदबाजी, धीमी गेंद और सटीक लाइन-लेंथ मानी जाती थी, जिससे वे कई बड़े बल्लेबाजों के लिए चुनौती बन जाते थे।
    बड़ी उपलब्धियां
    मनोज प्रभाकर 1984 एशिया कप, 1985 वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ क्रिकेट, 1990-91 और 1995 एशिया कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। उनके ऑलराउंड प्रदर्शन ने कई मौकों पर भारत को मजबूती दी।
    घरेलू क्रिकेट में भी दमदार रिकॉर्ड
    घरेलू क्रिकेट में उन्होंने दिल्ली के लिए खेलते हुए 154 प्रथम श्रेणी मैचों में 385 विकेट और 7,000 से ज्यादा रन बनाए। लिस्ट ए क्रिकेट में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने 200 से ज्यादा मैचों में 269 विकेट लिए।
     करियर और विवाद
    मनोज प्रभाकर का करियर जितना शानदार रहा, उतना ही विवादों से भी जुड़ा रहा। उन पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगे और बाद में वे कोचिंग भूमिकाओं में भी नजर आए—दिल्ली, राजस्थान, अफगानिस्तान और नेपाल टीम के साथ उन्होंने काम किया।

  • भारतीय क्रिकेट को बड़ी खुशखबरी: Sanju Samson को ICC का बड़ा सम्मान

    भारतीय क्रिकेट को बड़ी खुशखबरी: Sanju Samson को ICC का बड़ा सम्मान


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर मार्च महीने के लिए International Cricket Council (ICC) के ‘प्लेयर ऑफ द मंथ’ का खिताब अपने नाम कर लिया। यह सम्मान उन्हें टी20 विश्व कप 2026 में भारत को चैंपियन बनाने में निभाई गई अहम भूमिका के लिए दिया गया। सैमसन ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन पारियां खेलीं और टीम को मुश्किल हालात से निकालते हुए खिताब दिलाया। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके व्यक्तिगत करियर के लिए बड़ी है, बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी गर्व का क्षण है।
    विश्व कप जीत में निभाई निर्णायक भूमिका
    टी20 विश्व कप 2026 में संजू सैमसन का बल्ला जमकर बोला। उन्होंने लगातार तीन मैचों में मैच जिताऊ पारियां खेलकर टीम इंडिया को खिताब तक पहुंचाया। क्वार्टर फाइनल में वेस्टइंडीज के खिलाफ नाबाद 97 रन बनाकर उन्होंने टीम को जीत दिलाई। इसके बाद सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 89 रन की शानदार पारी खेली और फिर फाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 89 रन बनाकर भारत को विश्व चैंपियन बनाया। उनके इस लगातार प्रदर्शन ने उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ भी बनाया और अब उसी का इनाम ICC के इस प्रतिष्ठित अवॉर्ड के रूप में मिला है।
     अवॉर्ड मिलने पर बोले सैमसन
    इस सम्मान को हासिल करने के बाद संजू सैमसन ने कहा कि यह उनके करियर का सबसे खास पल है। उन्होंने बताया कि विश्व कप जीत में योगदान देना किसी सपने के सच होने जैसा था और इस उपलब्धि को समझने में उन्हें थोड़ा समय लगा। सैमसन ने टीम के साथियों और कोचिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि उनके भरोसे और समर्थन ने ही उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ देने की प्रेरणा दी।
    कड़ी टक्कर में जीता खिताब
    इस अवॉर्ड की दौड़ में जसप्रीत बुमराह और दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज कॉनर एस्टरहुइजन भी शामिल थे। बुमराह ने फाइनल में शानदार गेंदबाजी करते हुए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का खिताब जीता था, वहीं एस्टरहुइजन ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। इसके बावजूद सैमसन ने अपने लगातार मैच-विनिंग प्रदर्शन के दम पर दोनों को पीछे छोड़ दिया।
    भारतीय क्रिकेट के लिए सुनहरा दौर
    संजू सैमसन की यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। टीम में युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलन बना हुआ है, जो बड़े मंच पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। सैमसन जैसे खिलाड़ियों का उभरना आने वाले समय में टीम इंडिया को और मजबूती देगा।

  • विवाद के बीच AIFF ने दी सफाई, खेल भावना बनाए रखने की अपील

    विवाद के बीच AIFF ने दी सफाई, खेल भावना बनाए रखने की अपील


    नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल में नस्लवाद को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। इंडियन सुपर लीग के एक मैच के बाद सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक फैन को खिलाड़ी पर नस्लवादी टिप्पणी करते देखा गया। यह घटना श्री कांतीरावा स्टेडियम में खेले गए मुकाबले के दौरान हुई।

    AIFF ने दिखाई सख्ती, जांच के आदेश
    ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि खेल में किसी भी तरह के भेदभाव के लिए कोई जगह नहीं है। फेडरेशन ने मामले को अपनी अनुशासन समिति को सौंप दिया है, जो स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।

    खिलाड़ी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी
    यह विवाद केरला ब्लास्टर्स एफसी के डिफेंडर फालू नदिये को लेकर सामने आया। वीडियो में एक दर्शक द्वारा उन पर नस्लवादी टिप्पणी किए जाने का आरोप है, जिससे पूरे फुटबॉल समुदाय में आक्रोश फैल गया।

    AIFF की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
    AIFF ने अपने बयान में कहा कि वह नस्लवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाता है।
    “जो लोग हमारे स्टेडियम में नफरत लाते हैं, उनके लिए हमारे खेल में कोई जगह नहीं है।”
    फेडरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक इस मामले पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं की जाएगी।

    क्लब ने भी जताई कड़ी आपत्ति
    केरला ब्लास्टर्स ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे “घिनौना” बताया। क्लब ने कहा कि खिलाड़ियों की गरिमा और सम्मान की रक्षा करना उनकी प्राथमिकता है और मामले की जानकारी आधिकारिक रूप से लीग और फेडरेशन को दे दी गई है।

    खिलाड़ियों की सुरक्षा और फैंस के व्यवहार पर सवाल
    इस घटना ने एक बार फिर भारतीय फुटबॉल में खिलाड़ियों की सुरक्षा और दर्शकों के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोक सकती है।