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  • Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर

    Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावे की निगरानी करेंगी 8 लोगों की टीम… 360 डिग्री वाले कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर


    अयोध्या।
    राम मंदिर (Ram Mandir) में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद के बाद अब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra) ने अपना सर्विलांस सिस्टम बेहद सख्त कर दिया है। राम मंदिर में श्रद्धालु बड़ी संख्या में आ रहे हैं और दान भी कर रहे हैं। 25 जुलाई से दान पेटियों की पूरी वीडियोग्राफी शुरू कर दी गई है। ट्रस्ट के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि दान पात्र के मैनेजमेंट से लेकर दान की गिनती तक की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने के लिए 8 सदस्यीय मॉनिटरिंग टीम बनाई गई है। इसके अलावा 360 डिग्री और एसएलआर कैमरे लगाए गए हैं जो कि चप्पे-चप्पे की पल-पल वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे हैं।


    दो फोटोग्राफर भी रखे गए

    दान पेटी में दान आने से लेकर उनकी गिनती तक पूरी नजर रखी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य दान में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और जिम्मेदारी लाना है। ट्रस्ट ने कहा कि पहले 40 दान पेटियों में से कई पेटियां एक साथ भी खली जाती थीं। हालांकि अब ऐसा नहीं होगा। अब इसकी निगरानी की जाएगी और एक दिन में एक ही पेटी खोली जाएगी। इस सारी प्रक्रिया पर नजर रखने के लिए दो प्रोफेशनल फोटोग्राफर भी रखे गए हैं। इसके अलावा गिनती दो बैंक अधिकारियों की उपस्थिति में होगी।

    अधिकारी ने कहा कि जब एक बॉक्स की काउंटिंग हो जाएगी तभी दूसरा खोला जाएगा और इसे एसबीआई के अधिकारी सील कर देंगे। बता दें कि पुलिस ने चढ़ावा चोरी के आरोपों में कई लोगों को गिरफ्तार किया है। अब ट्रस्ट का कहना है कि बैंक के अधिकारियों की उपस्थिति, कई एजेंसियों की निगरानी और वीडियोग्राफी से आगे ऐसी कोई गुंजाइश ही नहीं रहेगी। न्यास के महंत दिनेन्द्र दास ने कहा, ‘एक दान पेटी खाली करने से पूर्व गणना कक्ष से एक खाली पेटी लाने, उसे रखने और सीलबंद बेटी को गणना कक्ष में ले जाने की संपूर्ण प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाती है।’

    उन्होंने कहा, “वहीं निगरानी टीम में दो बैंक कर्मचारी, न्यास के दो प्रतिनिधि, दो निजी सुरक्षा कर्मी और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। दान से भरी पेटी जब गणना कक्ष में पहुंचाई जाती है तो भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारी उस पर सील लगाते हैं जिससे यह प्रक्रिया अधिक विश्वसनीय बन जाती है।”

    उन्होंने कहा, ”दान की गणना वाले कक्ष में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। अब राम मंदिर में एक पैसा भी इधर से उधर नहीं जा सकता.. सबकुछ सुरक्षित है। न्यास आगे भी इस व्यवस्था में सुधार करना जारी रखेगा।” उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन सख्त हो जाए तो चोरी अपने आप रुक जाएगी।

    न्यास में हाल ही में हुए बदलाव पर दास ने कहा कि न्यास की बैठक में लिए गए सभी निर्णय सभी को स्वीकार होंगे। उन्होंने कहा कि सावन मास में झूला उत्सव सहित धार्मिक परंपराएं पूर्व की तरह जारी रहेंगी। राम मंदिर में चढावे की कथित चोरी की घटना के बाद विशेष जांच टीम का गठन किया गया। पुलिस ने इस मामले में आरोपी कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है।

  • UP : मुरादाबाद में मोमबत्ती गोदाम में लगी भीषण आग… 6 जिलों की दमकल मौके पर, खाली कराए आसपास के घर

    UP : मुरादाबाद में मोमबत्ती गोदाम में लगी भीषण आग… 6 जिलों की दमकल मौके पर, खाली कराए आसपास के घर


    मुरादाबाद।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुरादाबाद (Moradabad) के सागर सराय (Sagar Sarai) की कुटिया वाली गली में शिव मंदिर के पास शनिवार तड़के मोमबत्ती के गोदाम में भीषण आग (Massive fire Candle Warehouse) लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और गोदाम से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं। आग की तपिश और धुआं आसपास के घरों तक पहुंचने लगा तो इलाके में अफरातफरी मच गई। लोगों में दहशत फैल गई और कई परिवार घरों से बाहर निकल आए।

    आग राजन अग्रवाल की मोमबत्ती की फैक्ट्रीऔर गोदाम में लगी । आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरा गोदाम इसकी चपेट में आ गया। आसपास के मकानों में आग पहुंचने की आशंका को देखते हुए पुलिस और दमकल विभाग ने तत्काल बचाव कार्य शुरू कर दिया।

    आग की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के मकानों को खाली करा दिया। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया। घरों में रखे गैस सिलेंडरों को भी एहतियात के तौर पर बाहर निकलवाया गया, ताकि आग की लपटें वहां तक पहुंचने की स्थिति में कोई बड़ा हादसा न हो। कई लोग घरों से बाहर सड़क पर बैठे नजर आए। करीब तीन घंटे तक लोग आग बुझने का इंतजार करते रहे।

    आग पर काबू पाने के लिए मुरादाबाद के अलावा आसपास के जिलों से भी दमकल की गाड़ियां मंगाई गईं। रामपुर, संभल, अमरोहा, बिजनौर और बरेली से दमकल वाहन बुलाए गए। मुरादाबाद समेत अलग-अलग स्थानों से करीब 10 से 12 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुटीं। दमकल कर्मियों ने चारों ओर से पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोकने का प्रयास किया।


    इलाके में पुलिस बल तैनात किया

    आग की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। एसएसपी ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पुलिस और दमकल कर्मियों से जानकारी ली। आसपास के इलाके में पुलिस बल तैनात कर दिया गया, ताकि भीड़ को आग के नजदीक जाने से रोका जा सके और राहत एवं बचाव कार्य में कोई बाधा न आए।

    मोमबत्ती के गोदाम में लगी आग के कारण आसपास के लोग काफी देर तक दहशत में रहे। गोदाम में रखे ज्वलनशील सामान के कारण आग तेजी से फैलती रही। आग की लपटें और धुआं दूर तक दिखाई दे रहा था। आसपास के मकानों में रहने वाले लोग अपने परिवार और जरूरी सामान के साथ घरों से बाहर निकल आए। पुलिस ने लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की हिदायत दी।

    करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दमकल कर्मियों ने आग पर लगभग काबू पा लिया। इसके बाद भी गोदाम के अंदर अलग-अलग स्थानों पर आग और धुआं उठने की आशंका के चलते दमकल कर्मी लगातार पानी डालते रहे। आग लगने की वजह और नुकसान का आकलन आग पूरी तरह बुझने के बाद किया जाएगा।

  • J&K: गांदरबल जिले में हादसा….अमरनाथ यात्रियों से भरी बस खाई में पलटी, 10 से अधिक घायल

    J&K: गांदरबल जिले में हादसा….अमरनाथ यात्रियों से भरी बस खाई में पलटी, 10 से अधिक घायल


    गांदरबल।
    अमरनाथ यात्रा (Amarnath Yatra) के श्रद्धालुओं को ले जा रही एक बस गांदरबल जिले (Ganderbal district) के गुंड के हरिगनीवान (Hariganiwan) इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह बस ‘एस-मोड़’ नामक तीखे मोड़ के पास अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। इस भीषण हादसे में दर्जनों यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

    दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन हरकत में आ गया। थाना प्रभारी रईस अहमद ने तुरंत बचाव दल को घटनास्थल पर रवाना किया। गुंड पुलिस ने बिना किसी देरी के बचाव अभियान शुरू कर दिया। घायल यात्रियों को बस से बाहर निकालने का काम चुनौतीपूर्ण था।

    पुलिस कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। बचाव कार्य में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त बल भी मौके पर पहुंचे। सभी घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार प्रदान किया गया। उन्हें आगे के इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भेजा गया है। कई यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है।


    बचाव अभियान में विभिन्न बलों का सहयोग

    इस बचाव अभियान में कई सुरक्षा एजेंसियों ने मिलकर काम किया। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवानों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 118 बटालियन ने भी महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। 2 असम राइफल्स और 21 राष्ट्रीय राइफल्स (RR) के कर्मी भी मौके पर मौजूद थे। यात्रा पुलिस ने भी यात्रियों की पहचान और सहायता में सहयोग किया।

    दुर्घटनास्थल से निकाले गए सभी घायल यात्रियों को तुरंत अस्पतालों में भर्ती कराया गया। चिकित्सक उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, जबकि अन्य को गंभीर चोटें लगी हैं। प्रशासन ने घायलों के परिजनों को सूचित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी का अभी इंतजार किया जा रहा है।

  • 3 दशक बाद कावेरी जल विवाद पर चर्चा की तैयारी…..तमिलनाडु-कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के बीच जल्द होगी बैठक

    3 दशक बाद कावेरी जल विवाद पर चर्चा की तैयारी…..तमिलनाडु-कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों के बीच जल्द होगी बैठक


    चेन्नई।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) और कर्नाटक (Karnataka) के मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार (Chief Minister D.K. Shivakumar) के बीच जल्द ही एक बैठक हो सकती है। कावेरी जल विवाद (Kaveri Water Dispute) को लेकर बुलाई गई यह बैठक काफी चर्चा में है। दरअसल मुख्यमंत्री थलपति विजय का यह कदम तमिलनाडु के तीन दशक पुराने रुख से बिल्कुल अलग है। इससे पहले तमिलनाडु हमेशा से बातचीत के बजाय अदालती फैसलों और ट्रिब्यूनल पर भरोसा करता आया है और राज्य के मुख्यमंत्री सीधी बातचीत से दूर ही रहे हैं। लेकिन अब विजय लीक से हटकर राह पकड़ रहे हैं। तमिलनाडु का मानना रहा है कि कावेरी विवाद दो मुख्यमंत्रियों की मेज पर बैठकर नहीं सुलझ सकता। हालांकि सीएम विजय सीधे संवाद का रास्ता अपना रहे हैं।

    विजय ने पानी के संकट को हल करने के लिए शिवकुमार के साथ 31 जुलाई से 3 अगस्त के बीच सीधी बातचीत का प्रस्ताव रखा है। अगर यह मुलाकात होती है, तो पिछले 14 सालों में यह पहला मौका होगा जब दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री कावेरी मुद्दे पर आमने-सामने बैठकर द्विपक्षीय बातचीत करेंगे।


    लीक से हटकर चल रहे विजय

    इससे पहले पिछले 30 से अधिक सालों से चेन्नई का मानना रहा है कि यह विवाद इतिहास, फसलों और चुनावी भावनाओं जैसे जटिल मुद्दों से जुड़ा हुआ है। इसलिए इसे किसी बैठक में सुलझाने के बजाय कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA), ट्रिब्यूनल के फैसले और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के जरिए ही लागू किया जाना चाहिए। वहीं विजय कानूनी अधिकारों को छेड़े बिना, दोनों राज्यों के बीच संवाद का रास्ता खोलना चाहते हैं ताकि संकट की स्थिति में पानी की आपूर्ति जारी रहे।


    क्यों पड़ी बातचीत की जरूरत?

    तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा के किसानों के सामने इस समय संकट बेहद गंभीर है। ट्रिब्यूनल के आदेश के तहत 1 जून से 23 जुलाई के बीच तमिलनाडु को लगभग 32 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी मिलना चाहिए था। लेकिन उसे केवल 3.5 TMC पानी ही मिला है। तमिलनाडु का मानना है कि कमजोर मॉनसून के बावजूद, कर्नाटक को कम से कम 3 TMC अतिरिक्त पानी तुरंत छोड़ना चाहिए था। पानी की कमी के कारण कावेरी डेल्टा में खड़ी फसलें सूखने की कगार पर हैं।


    क्यों उठ रहे सवाल?

    विजय की इस सीधी बातचीत की पहल पर विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने कुछ चिंताएं जताई हैं। आलोचकों को डर है कि सीधी बातचीत से कर्नाटक को ‘कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण’ को दरकिनार करने का मौका मिल सकता है। यह शक भी है कि कर्नाटक पानी छोड़ने के बदले तमिलनाडु पर मेकेदातु में प्रस्तावित डैम के निर्माण पर विरोध वापस लेने का दबाव बना सकता है। इस मामले पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के कन्नन का कहना है कि मुख्यमंत्रियों की बातचीत आपसी सहयोग का माहौल बना सकती है, लेकिन यह ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए अधिकारों की जगह नहीं ले सकती।


    क्या है राजनीतिक समीकरण?

    राजनीतिक रूप से विजय के पास एक फायदा यह है कि कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, जो तमिलनाडु में विजय की सरकार की सहयोगी भूमिका में है। राहुल गांधी विजय के शपथ ग्रहण में शामिल हुए थे और डीके शिवकुमार से भी उनके मधुर संबंध हैं। ऐसे में विजय के लिए राह आसान हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि जल विवादों में पार्टी लाइनें अक्सर बेअसर हो जाती हैं, क्योंकि दोनों राज्यों के नेताओं को अपने-अपने किसानों और स्थानीय जनता को जवाब देना होता है। अगर विजय बेंगलुरु में वार्ता से अपने राज्य के लिए तुरंत कावेरी का पानी लाने में सफल रहते हैं और मेकेदातु पर तमिलनाडु के रुख से समझौता नहीं करते, तो यह उनकी बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जाएगी। वहीं, अगर यह बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म होती है, तो आलोचक इसे राजनीतिक अपरिपक्वता करार देंगे।

  • हिमाचल के चम्बा में मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही… घर में घुसा मलबा…कई वाहन दबे

    हिमाचल के चम्बा में मूसलाधार बारिश ने मचाई तबाही… घर में घुसा मलबा…कई वाहन दबे


    चंबा।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के चंबा जिले (Chamba district) में सोमवार रात मूसलाधार बारिश (Torrential Rain) ने भारी तबाही मचाई। बारिश की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने व्यापक स्तर पर नुकसान पहुंचाया। इस प्राकृतिक आपदा के बावजूद, राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि, जिले के कई इलाकों में आवासीय घरों, व्यावसायिक दुकानों और निजी वाहनों को भारी क्षति पहुंची है।

    जिले के उदयपुर, घोलटी, नवोदय मार्ग और भरियाड जैसे क्षेत्रों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर रही। इन इलाकों में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे बड़ी मात्रा में मलबा सड़कों और आवासीय क्षेत्रों में आ गया। मलबे की चपेट में आकर करीब 12 वाहन दब गए।

    इन दबे हुए वाहनों में निजी कारें, मालवाहक ट्रक, दोपहिया बाइक और स्कूटियां शामिल थीं। भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित तडोली नाला भी बारिश के कारण उफान पर आ गया। नाले का बहाव इतना तेज था कि वह अपने साथ बड़े-बड़े पत्थर और मिट्टी का मलबा बहाकर लाया।


    संपत्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान

    तडोली नाले के तेज बहाव में आया मलबा और पत्थर एक स्टोर में घुस गए। इससे वह स्टोर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अतिरिक्त, आसपास के कई घरों में भी मलबा घुस गया, जिससे निवासियों को काफी परेशानी हुई। सुल्तानपुर नाले ने भी रौद्र रूप धारण कर लिया, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं।

    इस नाले के तेज बहाव में भी कई बाइक और स्कूटियां बहकर क्षतिग्रस्त हो गईं। भरियाड गांव में पानी का रुख अचानक बदल गया, जिससे स्थिति और भी भयावह हो गई। मलबा सीधे कई घरों तक पहुंच गया, जिससे पूरे गांव में दहशत का माहौल बन गया।


    जनजीवन पर गहरा असर

    बारिश और नाले के उफान से उत्पन्न खतरे को देखते हुए कई परिवारों ने अपने मकान खाली कर दिए। इन प्रभावित परिवारों ने अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रातों-रात पड़ोसियों के घरों में शरण ली। यह विस्थापन अचानक आई आपदा के कारण हुआ।


    चमोली

    घरों में मलबा घुसने से लोगों की दैनिक दिनचर्या बाधित हुई। संपत्ति के नुकसान से आर्थिक चुनौतियां भी पैदा हुई हैं। स्थानीय निवासियों को अब अपने घरों की मरम्मत और सफाई का सामना करना पड़ेगा।

  • UP: कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे उद्घाटन के 13वें दिन ही धंसा, जर्मनी की वर्ल्ड क्लास सड़कों से हो रही थी तुलना

    UP: कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे उद्घाटन के 13वें दिन ही धंसा, जर्मनी की वर्ल्ड क्लास सड़कों से हो रही थी तुलना


    उन्नाव।
    जिस कानपुर-लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे (Kanpur-Lucknow Elevated Expressway) का 13 जुलाई को बड़े जोर-शोर से उद्घाटन हुआ था और जिसकी क्वालिटी की तुलना जर्मनी की वर्ल्ड क्लास सड़कों (Germany’s World-class Roads) से की जा रही थी, वह उद्घाटन के महज 13 दिनों के भीतर ही बड़े विवादों में घिर गया है. लगातार हो रही बारिश के बीच उन्नाव जिले के कोरारी के पास 6-लेन सड़क का एक बड़ा हिस्सा कई मीटर तक धंस गया।

    घटना के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने धंसे हुए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. देखते ही देखते इस वीडियो को लेकर मुख्य विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने BJP सरकार और एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए हमला बोल दिया।


    4200 करोड़ की लागत

    करीब 4200 करोड़ रुपये की लागत से बने 63 किमी लंबे इस 6-लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण PNC कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था, जिसे निर्माण कार्य पूरा होने के बाद NHAI को सौंपा गया था।

    घटना के बाद स्थानीय जनता और सोशल मीडिया पर यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि लाखों रुपये का वेतन लेने वाले NHAI के विशेषज्ञ इंजीनियरों की निगरानी के बावजूद इतनी कम अवधि में सड़क का हिस्सा कैसे धंस गया? क्या निर्माण के दौरान सामग्री की क्वालिटी से समझौता किया गया था?


    सपा-कांग्रेस का सरकार पर तीखा प्रहार

    समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर धंसी हुई सड़क की तस्वीरें और वीडियो शेयर करते हुए सरकार को आड़े हाथों लिया. विपक्ष का कहना है कि 13 दिन पहले जिस सौगात का ढिंढोरा पीटा गया था, वह पहली ही बारिश में जनता के पैसों की बर्बादी का सबूत बन गई।


    मचा बवाल तो जागी NHAI

    मामले के तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी PNC तुरंत मौके पर मरम्मत कार्य में जुट गई. वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर सफाई जारी कर दी। अथॉरिटी ने लिखा, ”NHAI आपको अवगत कराना चाहता है कि कानपुर से लखनऊ की ओर किमी 64 के पास ‘स्लिपेज’ यानी सड़क का हिस्सा धंसका हुआ है, जिस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक मरम्मत की कार्रवाई जारी है।

  • UP: हरदोई में हाई-प्रोफाइल चोरी… खाने में नींद की दवा मिलाकर घर में रखे 1.29 करोड़ कैश उड़ा ले गए नौकर, 16 पकड़ाए

    UP: हरदोई में हाई-प्रोफाइल चोरी… खाने में नींद की दवा मिलाकर घर में रखे 1.29 करोड़ कैश उड़ा ले गए नौकर, 16 पकड़ाए


    हरदोई।
    17 जुलाई की रात… घर के लोग गहरी नींद (Deep sleep) में सो रहे थे. अलमारी की चाबी तकिए के नीचे रखी थी. घर के अंदर आने-जाने वाले लोगों को सब पता था. कुछ घंटों बाद अलमारी खाली थी और नोटों से भरे 8 बैग गायब. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हरदोई (Hardoi) में हुई करोड़ों की इस चोरी ने पुलिस के भी होश उड़ा दिए थे. लेकिन अब पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल चोरी (High-profile theft) की गुत्थी सुलझाने का दावा किया है।

    हरदोई पुलिस ने दो बाल अपचारियों समेत 16 लोगों को पकड़ लिया है और उनके कब्जे से करीब 1 करोड़ 29 लाख रुपये की नकदी बरामद की है. पुलिस का कहना है कि अभी कुछ आरोपी फरार हैं. यह वारदात शहर कोतवाली के रेलवेगंज इलाके में रहने वाले थोक परचून कारोबारी पंकज अग्रवाल के घर हुई थी. शुरुआत में शक घर में काम करने वाले तीन नौकरों पर गया और पुलिस की जांच भी वहीं से शुरू हुई।

    जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि घर में काम करने वाले दो नाबालिग नौकर और एक कर्मचारी शोभित ही पूरी साजिश की पहली कड़ी थे. उन्हें मालूम था कि घर में कितनी नकदी रहती है, अलमारी की चाबी कहां रखी जाती है और परिवार की दिनचर्या क्या है. यही जानकारी उन्होंने बाहर बैठे अपने साथियों तक पहुंचाई।

    पुलिस के मुताबिक, प्लानिंग के तहत परिवार के खाने में कथित तौर पर नींद की गोलियां मिला दी गईं. जब पूरा परिवार गहरी नींद में सो गया तो आरोपी छत के रास्ते घर में दाखिल हुए. पंकज अग्रवाल के कमरे में जाकर तकिए के नीचे रखी अलमारी की चाबी निकाली गई, अलमारी खोली गई और नोटों से भरे आठ बैग बाहर खड़े वाहन में लाद दिए गए. कुछ ही मिनटों में करोड़ों रुपये लेकर पूरा गिरोह फरार हो गया।


    चोरी के बाद कैसे खुलती गईं परतें?

    पुलिस ने एसओजी, स्वाट और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम बनाकर जांच शुरू की. सर्विलांस और पूछताछ के दौरान एक-एक कर आरोपियों की कड़ियां जुड़ती चली गईं. जांच में सामने आया कि चोरी की रकम इतनी ज्यादा थी कि उसे छिपाने के लिए कई और लोगों को भी शामिल किया गया।

    पुलिस ने अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि दो बाल अपचारियों को हिरासत में लिया. इनके पास से 1 करोड़ 28 लाख 99 हजार 310 रुपये बरामद किए गए. पुलिस का कहना है कि गिरोह के कुछ सदस्य अभी भी फरार हैं. उनकी तलाश जारी है और उम्मीद है कि पूछताछ के बाद बाकी नकदी भी बरामद हो सकती है।

    इस पूरे मामले में एक और पहलू चर्चा में है. जिस घर से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिली, उसने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि डिजिटल लेनदेन के दौर में आखिर इतना कैश घर में क्यों रखा गया था? इतनी बड़ी नकदी सामने आने के बाद अब आयकर विभाग और जीएसटी विभाग की नजर भी इस मामले पर टिक सकती है।

    व्यापारी ने केस दर्ज कराते समय चोरी की रकम नहीं दर्ज कराई थी. बाद में पुलिस की जांच में पूरी कहानी सामने गई गई. पुलिस का कहना है कि घर में काम करने वाले दो नाबालिग और शोभित को यह जानकारी थी कि घर में कितना पैसा रहता है. चाबी कहां रखी जाती है, जबकि टडियांवा थाने के बेलाहा गांव का रहने वाला अजय शुक्ला, शिवम और बदन जो शहर कोतवाली का रहने वाले है और उसी इलाके में मजदूरी करते हैं. इन लोगों ने घर में चोरी की प्लानिंग की और घरेलू नौकरों से दोस्ती कर पूरी रेकी कराई।

    घरेलू नौकरों ने खाने में कथित तौर पर नींद की गोलियां मिलाईं. जब पूरा परिवार सो गया तो अजय शुक्ला और बदन तीनों नौकरों के साथ मकान में दाखिल हुआ. शिवम् बाहर खड़ा रहा. इसके बाद नोटों से भरे बैग वाहन में लादे और फरार हो गए. रकम छिपाने और ठिकाने लगाने के लिए गैंग ने कई अन्य लोगों को भी शामिल कर लिया. इनमें लखनऊ के मड़ियावा का दीपक साहू, सनी गुप्ता, अमान, हरदोई जिले के परम किशोर, केशव, शिवम, सनी बाल्मीकि, नीरज, प्रिंस और महफूज को कैश दे दिया था।

    एएसपी पूर्वी हरदोई सुबोध गौतम ने कहा कि 16-17 जुलाई की रात को रेलवेगंज के व्यवसायी पंकज अग्रवाल के घर में चोरी हुई थी. उन्होंने नामजद तहरीर दी कि उनके तीन नौकरों ने अलमारी में रखे पैसों के बैग चोरी कर लिए हैं. इस मामले की तफ्तीश करते हुए पुलिस ने लगभग 1 करोड़ 29 लाख रुपये बरामद किए हैं. 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. दो बाल अपचारी हिरासत में हैं. कुछ आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

  • UP: टीचर ने पेंट में पेशाब करने पर बच्चे को दी खौफनाक सजा…. चाकू से दागा प्राइवेट पार्ट

    UP: टीचर ने पेंट में पेशाब करने पर बच्चे को दी खौफनाक सजा…. चाकू से दागा प्राइवेट पार्ट


    वाराणसी।
    यूपी (UP) के वाराणसी (Varanasi) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक बच्चे के पैंट में पेशाब (Peeing in Pants) करने पर टीचर (Teacher) ने खौफनाक सजा दे डाली। टीचर ने मासूम के प्राइवेट पार्ट को गर्म चाकू से दाग दिया। उधर, बच्चे के परिजन ने अब इस घटना की शिकायत थाने में की है। वहीं, ये घटना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। उधर, पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

    ये मामला अकथा के जेडी नगर कॉलोनी का है। यहां रहने वाले अधिवक्ता केशरी जायसवाल ने शनिवार को शिक्षिका, प्रधानाचार्य और प्रबंधक के खिलाफ लालपुर पांडेयपुर थाने में तहरीर दी। आरोप है कि उनके पांच साल के बेटे ने पैंट में पेशाब कर दिया। इससे गुस्साई शिक्षिका ने चाकू गरम कर प्राइवेट पार्ट दाग दिया। तहरीर में बताया है कि बेटा नर्सरी का छात्र हैं। वह अकथा स्थित एक स्कूल में पढ़ता है। शनिवार को स्कूल में उसने अपनी शिक्षिका से बाथरूम जाने के लिए कहा। टीचर ने मना किया तो बच्चे ने पैंट में ही पेशाब कर दिया। जिससे टीचर नाराज हो गई।

    आरोप है कि बच्चे को दूसरे कमरे में ले जाकर गैस जलाकर चाकू लाल करके उसके प्राइवेट पार्ट को दाग दिया। मारपीट कर धमकी दी कि दोबारा पैंट में पेशाब की तो इससे भी बुरा हाल करेगी। घर आने के बच्चे ने सारी बात बताई। शिकायत करने पर प्रधानाचार्य हेमलता सिंह और प्रबंधक ने भी धमकी दी। पुलिस ने मेडिकल परीक्षण कराते हुए केस दर्ज कर लिया है। घटना को लेकर दर्जनों अधिवक्ता थाने पर जुट गए थे।

    छात्र के बाल न कटवाने पर केवीएस ने नाम काटा
    उधर, कानपुर में बाल न कटवाने पर एक छात्र का नाम स्कूल से ही काट दिया गया। जब परिजन की शिकायत लेकर स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने टीसी काटकर थमा दिया। जिसके बाद परिजन बच्चे को लेकर डीएम ऑफिस पहुंचे और जिलाधिकारी से इस बात की शिकायत की। वहीं, ये मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    पहले पढ़ाई के दौरान लंबे बालों को लेकर स्कूल की टीचर और प्रबंधन काफी नाराज हुआ करते थे। बदलते दौर में ऐसी शिकायतें होना बंद हो गई लेकिन फिर भी कुछ स्कूल ऐसे हैं जो आज भी बच्चों को अनुशासन में रखना पसंद करते हैं। ऐसे ही एक मामले में स्कूल ने छात्र को लंबे बाल काटने को कहा। छात्र ने चेतावनी के बाद भी ऐसा नहीं किया तो स्कूल ने छात्र का नाम ही काट दिया। अब छात्र के परिजन कानपुर प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। शुक्रवार को डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह का जनता दर्शन चल रहा था। उसी दौरान मीरपुर कैंट की रहने वाली एक महिला अपने बेटे के साथ पहुंची।

  • गुजरात में रिकॉर्ड तोड़ बारिश…..बलसाड़ में एक दिन में गिरा 906 मिमी पानी, इतना दिल्ली में सालभर में भी नहीं गिरता

    गुजरात में रिकॉर्ड तोड़ बारिश…..बलसाड़ में एक दिन में गिरा 906 मिमी पानी, इतना दिल्ली में सालभर में भी नहीं गिरता


    अहमदाबाद।
    गुजरात (Gujarat) में इस बार मॉनसून (Monsoon) ने रिकॉर्ड तोड़ बारिश (Record-Breaking Rainfall) की है. 22 जुलाई सुबह 6 बजे से 23 जुलाई सुबह 6 बजे के बीच वलसाड जिले (Valsad district) के उंबरगांव में 906 मिमी बारिश दर्ज की गई. यह दिल्ली में पूरे साल होने वाली औसत 700 से 800 मिमी बारिश से भी ज्यादा है. यानी उंबरगांव में सिर्फ 24 घंटे में उतनी बारिश हो गई, जितनी दिल्ली में पूरे साल होती है।

    इतनी ज्यादा बारिश के कारण दक्षिण गुजरात के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए. सड़कें, घर, दुकानें और रेलवे ट्रैक पानी में डूब गए. कई जगहों पर लोगों के घरों में पानी घुस गया और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह रुक गई. प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान चलाकर करीब 1,200 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया।

    मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि अरब सागर से लगातार आ रही नमी वाली हवाएं और मजबूत दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वजह से इतनी ज्यादा बारिश हुई. बारिश का असर सिर्फ उंबरगांव तक सीमित नहीं रहा. वलसाड और आसपास के कई इलाकों में लगातार कई घंटों तक तेज बारिश होती रही। इससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया. कई जगहों पर पानी सड़कों पर आ गया, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया. कुछ इलाकों में वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए. रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।

    प्रशासन, NDRF और दूसरी बचाव टीमों ने लगातार राहत का काम किया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया. स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के मुताबिक, उंबरगांव में सबसे ज्यादा 906 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसके अलावा कपराडा में 731 मिमी, नानापोंधा में 643 मिमी, धरमपुर में 499 मिमी, पारडी में 448 मिमी, वांसदा में 435 मिमी, वापी में 413 मिमी और वलसाड शहर में 403 मिमी बारिश हुई. तापी जिले के डोलवन में 378 मिमी और डांग जिले के वघई में 369 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

    इन आंकड़ों से साफ है कि दक्षिण गुजरात के कई हिस्सों में एक ही दिन में बहुत ज्यादा बारिश हुई. IMD के मुताबिक, इस समय दक्षिण-पश्चिम मॉनसून गुजरात के ऊपर काफी मजबूत बना हुआ है. अरब सागर से लगातार नमी से भरी हवाएं गुजरात की तरफ आ रही हैं। इसके साथ पश्चिम भारत के ऊपर बना मौसम का सिस्टम भी लंबे समय तक एक ही इलाके में बना रहा. इसी वजह से बादल लगातार उसी इलाके में बरसते रहे और कुछ ही घंटों में बहुत ज्यादा बारिश हो गई।

    जब कम समय में इतनी ज्यादा बारिश होती है, तो नदियां और नाले जल्दी भर जाते हैं. शहरों में पानी निकालने की व्यवस्था भी इतना पानी एक साथ नहीं संभाल पाती. इसी कारण सड़कों पर तेजी से पानी भर जाता है. अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है. दक्षिण गुजरात में भी यही हुआ।

    मौसम विभाग के मुताबिक, अगर 24 घंटे में 204.5 मिमी या उससे ज्यादा बारिश हो, तो उसे “अत्यधिक भारी बारिश” माना जाता है. लेकिन गुजरात के कई इलाकों में इससे दो, तीन और कुछ जगहों पर चार गुना तक ज्यादा बारिश हुई. सबसे ज्यादा 906 मिमी बारिश उंबरगांव में दर्ज की गई, जो सामान्य सीमा से कई गुना ज्यादा है।

    IMD ने अगले कुछ दिनों तक गुजरात के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है. हालांकि सबसे तेज बारिश का दौर धीरे-धीरे कम हो सकता है. लेकिन जिन इलाकों में पहले से पानी भरा हुआ है, वहां थोड़ी और बारिश भी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए लोगों से कहा गया है कि पानी भरे रास्तों से बचें, नदियों और नालों के पास न जाएं और मौसम विभाग व स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

    इस बार गुजरात में मॉनसून ने दिखा दिया कि कुछ घंटों की बारिश भी कितनी बड़ी मुसीबत बन सकती है. एक दिन में हुई रिकॉर्ड बारिश ने बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि पहले से पानी से भरे इलाकों में थोड़ी और बारिश भी हालात बिगाड़ सकती है।

  • गुजरातः नाले में गिरी कार, अहमदाबाद के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 2 को बचाया गया

    गुजरातः नाले में गिरी कार, अहमदाबाद के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 2 को बचाया गया


    खेड़ा।
    गुजरात के खेड़ा जिले में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच मातर के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। खेड़ा–मातर हाईवे पर मोतीपुरा गांव के निकट अहमदाबाद के एक ही परिवार की कार अनियंत्रित होकर पानी से भरे नाले (गरनाला) में जा गिरी। कार में कुल छह लोग सवार थे, जिनमें से चार की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार मोतीपुरा गांव के पास से गुजर रही थी। इसी दौरान भारी बारिश के कारण पानी से भरे नाले में कार अनियंत्रित होकर गिर गई। तेज बहाव के कारण कार पलट गई और पानी में बहने लगी, जिससे उसमें सवार लोग अंदर ही फंस गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस व प्रशासन को सूचना दी। खेड़ा के नायब कलेक्टर सूरज बारोट, मातर मामलतदार और खेड़ा फायर ब्रिगेड की टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने कार से दो लोगों को जीवित बाहर निकाला। घायलों को 108 एंबुलेंस की मदद से खेड़ा सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

    रेस्क्यू अभियान के दौरान कार में फंसे अन्य लोगों की तलाश की गई। काफी प्रयास के बाद चार शव बरामद किए गए। इस हादसे में अहमदाबाद के एक ही परिवार के चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    प्रारंभिक जांच में भारी बारिश, सड़क पर जलभराव और कम दृश्यता को हादसे का संभावित कारण माना जा रहा है। पुलिस ने बताया की उनके द्वारा मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन मृतकों के परिजनों को सूचना देने के साथ दुर्घटना के सटीक कारणों की भी जांच कर रहा है।