Category: State

  • शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा…. कई इलाके बेहद संवेदनशील

    शिमला में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा…. कई इलाके बेहद संवेदनशील


    शिमला।
    राजधानी शिमला (Shimla) पर भूकंप (Earthquake) ही नहीं अब भूस्खलन (Landslides) और फ्लैश फ्लड (Flash Floods) जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नगर निगम की ओर से कराए गए मल्टी-हैजार्ड क्लाइमेट रिस्क एंड वल्नरेबिलिटी असेसमेंट (सीआरवीए) (Multi-Hazard Climate Risk and Vulnerability Assessment – CRVA) अध्ययन में भूस्खलन को एक बढ़ते खतरे के रूप में शामिल किया है।

    दूसरी ओर इन आपदाओं से बचाव के लिए नगर निगम ने स्ट्रॉम वाटर मैनेजमेंट प्लान तो तैयार किया है, लेकिन इसे धरातल पर उतारने के लिए बजट नहीं मिल रहा है। निगम का अपना खजाना भी खाली पड़ा है। ऐसे में तीन साल से 77 करोड़ रुपये का यह प्लान फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रहा है। नगर निगम शिमला ने इस साल पहली बार 75 करोड़ रुपये का जलवायु बजट पेश किया था। इसके तहत शहर में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान का अध्ययन करवाया है।

    करीब दस वर्षों के आंकड़ों और प्राकृतिक आपदाओं के विश्लेषण पर आधारित इस अध्ययन में सुझाव दिया गया है कि शिमला के लिए नई आपदा प्रबंधन नीति तैयार की जाए, जिसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को प्राथमिकता दी जाए। रिपोर्ट के अनुसार भविष्य में बादल फटना, अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड), भूस्खलन और अनियोजित निर्माण शहर के लिए बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं। इनसे निपटने के लिए मास्टर प्लान तैयार करना जरूरी है।

    77 करोड़ का मास्टर प्लान फाइलों में बंद
    शहर में भूस्खलन का एक बड़ा कारण बारिश के पानी की निकासी बाधित होना है। शहर में बढ़ते निर्माण के चलते अंग्रेजों के समय बनाए गए कई नाले बंद हो चुके हैं। बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था बेहतर करने के लिए नगर निगम ने शहर के नालों का सर्वे करवाया है। इसके आधार पर 77 करोड़ रुपये की योजना तैयार की है। निगम ने बजट जारी करने के लिए केंद्र सरकार को इसका प्रस्ताव भेजा था, लेकिन तीन साल से इसे मंजूरी नहीं मिली है। निगम का अपना खजाना भी खाली है। ऐसे में भूस्खलन के खतरे को स्वीकार करने के बावजूद इससे बचाव की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि शहर में जल निकासी व्यवस्था बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वार्डों, खासकर संवेदनशील इलाकों में नालों और नालियों को व्यवस्थित करने के लिए उनका चैनलाइजेशन किया जा रहा है।

    शहर में यह हैं भूस्खलन के संवेदनशील इलाके
    भूस्खलन के लिहाज से शहर के कृष्णानगर, शिव बावड़ी, फागली, लोअर कैथू, अपर कैथू, समरहिल, बालूगंज, टूटीकंडी, संजौली, ढली, भराड़ी, जाखू की ढलानें और नवबहार के कुछ हिस्से सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं। इन इलाकों में खड़ी ढलानें, कमजोर भूगर्भीय संरचना, अनियोजित निर्माण, पहाड़ियों की कटिंग और खराब जल निकासी व्यवस्था जोखिम को और बढ़ा रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वर्ष 2023 में समरहिल, शिव बावड़ी, कृष्णानगर और फागली, जबकि वर्ष 2025 में बैनमोर, कृष्णानगर, हिमलैंड, पंथाघाटी और न्यू शिमला में जमीन धंसने की घटनाएं हो चुकी हैं।

  • मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके

    मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके


    इम्फाल। पू
    र्वोत्तर राज्य मणिपुर (Northeastern State of Manipur) में एक बार फिर से हिंसा हुई है. नगा और कुकी समुदाय (Naga and Kuki Communities) के बीच हुए हिंसक टकराव में पिछले 24 घंटे में 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि 14 घरों में आग लगा दी गई है. इस घटना के बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है और कांगपोकपी ज़िले में शटडाउन करना पड़ा है।

    अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि हिंसा के शिकार लोगों में कामजोंग ज़िले में गोलीबारी के दौरान मारी गई एक कुकी महिला शामिल है. इसके अलावा कामजोंग और कांगपोकपी में अलग-अलग हमलों का शिकार बने नागा विलेज गार्ड और उखरुल ज़िले में घात लगाकर किए गए हमले में फंसे एक आम नागरिक की मौत हुई है।

    इस हिंसा के कारण कामजोंग ज़िला प्रशासन ने चसाड पुलिस स्टेशन के 400 मीटर के दायरे में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी. इस बीच, कुकी संगठन ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (CoTU) ने कांगपोकपी ज़िले में शनिवार शाम 6 बजे से 24 घंटे के बंद का आह्वान किया।

    यह हिंसा शुक्रवार रात तब भड़की जब चसाड पुलिस स्टेशन के पास गोलीबारी में 42 वर्षीय कुकी महिला और पांच बच्चों की मां, डोमखोनी टौथांग की मौत हो गई. पुलिस के अनुसार सिविल पुलिस, इंडिया रिज़र्व बटालियन और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस स्टेशन के पास कथित अवैध बंकरों के निर्माण की खबरों के बाद उन्हें हटाने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया था।

    इस दौरान जब अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाई और सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, तो कथित तौर पर स्थानीय महिलाओं ने इस ऑपरेशन में बाधा डालने की कोशिश की. पुलिस ने बताया कि टौथांग की गर्दन के पास बाईं ओर छाती के ऊपरी हिस्से में गोली लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    यह घटना 9 अक्टूबर को रात करीब 9.35 बजे हुई, जब चसाड गांव के वॉलंटियर्स की कथित मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था. इस हत्या के बाद आगजनी हुई और हथियारबंद समूहों और सुरक्षाकर्मियों के बीच फिर से गोलीबारी हुई. हिंसा के दौरान दोनों समुदायों के सदस्यों के कम से कम 14 घरों में आग लगा दी गई. अधिकारियों ने बताया कि उपद्रवियों ने चसाड पुलिस स्टेशन में भी आग लगाने की कोशिश की, जिससे उसके प्रवेश द्वार के पास बनी कुछ लकड़ी की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। शनिवार सुबह करीब 5 बजे फिर से गोलीबारी शुरू हुई और लगभग सुबह 7 बजे तक जारी रही।

    कुकी विमेन यूनियन के हेडक्वार्टर ने दावा किया कि 23 साल के माइकल न्गाममिनलेन हाओकिप की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई. आरोप है कि यह हत्या नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालिम (इसक-मुइवा) यानी NSCN-IM और उसके ईस्टर्न फ्लैंक गुट के लोगों ने की. इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी. एक और घटना में पुलिस ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे कामजोंग ज़िले के निंगचो चिंगडोंग गांव में हुए हमले में दो नागा विलेज गार्ड – 30 साल के न्गाचान्सो निंगशेन और 50 साल के लीशिशन हंग्यो मारे गए। यह गांव चसाड पुलिस स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

    एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय हथियारबंद गुट इस हमले में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच चल रही है। कांगपोकपी जिले में, हथियारबंद कुकी उग्रवादियों के संदिग्ध गुट द्वारा किए गए घात लगाकर किए गए हमले में एक नागा विलेज वॉलंटियर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. यह हमला सुबह करीब 6 बजे इम्फाल-तामेंगलोंग रोड पर मकुई और तापोक गांवों के बीच हुआ, जो चालवा पुलिस स्टेशन से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।

    पुलिस ने मृतक की पहचान तमेई सब-डिविजन के थालोन गांव के 35 वर्षीय माचुंगवांगबोउ के रूप में की. घायलों में एल पाब्रम गांव के 29 वर्षीय नहासोन और काडी गांव के 30 वर्षीय माथांगाम्बोउ शामिल थे।

    पुलिस के अनुसार, चार नागा विलेज वॉलंटियर यह जानकारी मिलने के बाद तापोन गांव से मकुई के लिए निकले थे कि मकुई गांव पर हमला हुआ है घात लगाकर बैठे हथियारबंद लोगों ने तापोन से लगभग 2 किलोमीटर दूर उन पर हमला कर दिया. माचुंगवांगबोउ की मौके पर ही मौत हो गई. नहासोन के दोनों पैरों में गोली लगी, जबकि माथांगाम्बोउ के दोनों पैरों और हाथों में चोटें आईं. घायलों को इलाज के लिए सेनापति ज़िला मुख्यालय ले जाया गया है।

    एक अलग घटना में 30 साल के संदीप राय की मौत हो गई. उन पर नेशनल हाईवे 202 पर कोंजांग गांव के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया. यह हाईवे इम्फाल को उखरुल होते हुए नागालैंड से जोड़ता है।

    पुलिस ने बताया कि यह हमला शनिवार सुबह करीब 5.30 बजे लिटन पुलिस स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में हुआ. सेनापति ज़िला मुख्यालय के पास तापहोउ सेनापति नेपाली गांव में रहने वाले राय अपनी कार से जा रहे थे तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया.

    पुलिस ने शव बरामद कर मामला दर्ज कर लिया है. बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज की मोर्चरी में रखवाया गया. हत्या की वजह और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बढ़ती हिंसा के बीच CoTU ने शनिवार शाम 6 बजे से कांगपोकपी ज़िले में 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की।

  • झारखंड के 2.5 लाख कोयला कर्मियों के PF के 727 करोड़ डूबने के मामले की 'CBI' करेगी जांच, HC ने दिए निर्देश

    झारखंड के 2.5 लाख कोयला कर्मियों के PF के 727 करोड़ डूबने के मामले की 'CBI' करेगी जांच, HC ने दिए निर्देश


    रांची।
    कोल माइंस प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (Coal Mines Provident Fund Organisation- CMPFO) के निवेश में 727.67 करोड़ रुपये डूबने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने CBI जांच का आदेश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक (Chief Justice MS Sonak) की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कोल इम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन के संजीव कुमार श्रीवास्ताव द्वारा 2022 में दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह आदेश दिया। अदालत ने सीबीआई जांच का निर्देश देते हुए जनहित याचिका निष्पादित कर दी।

    मामला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में CMPFO के 1300 करोड़ रुपये के निवेश से जुड़ा है। DHFL के दिवालिया होने के बाद इसमें से 727.67 करोड़ राशि डूब गई। CMPFO के फंड मैनेजर एसबीआई और यूटीआई ने 24 जून 2019 को ही रेड अलर्ट जारी कर DHFL की खराब आर्थिक स्थिति की जानकारी दी थी। फंड मैनेजरों ने CMPFO को निवेश की रकम निकालने की सलाह भी दी थी।

    फंड मैनेजरों की चेतावनी के बावजूद तत्कालीन ट्रस्टी ने समय रहते कदम नहीं उठाया और दिवालिया होने के करीब छह महीने बाद 20 दिसंबर 2019 को रकम वापस निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया। 22 नवंबर 2021 को बोर्ड की सब-कमेटी ने 727.67 करोड़ को राइट ऑफ करने का प्रस्ताव रखा, जिसका कर्मचारियों ने कड़ा विरोध किया। बाद में कोल इंडिया ने भरपाई के लिए कोयला उत्पादन पर 10 रुपये प्रति टन सेस लगाने का प्रस्ताव भी लाया था।

    मामले में तत्कालीन कोल सेक्रेटरी अनिमेष भारती के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई थी, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही सीएमपीएफओ ने शपथपत्र दाखिल कर अपने पदाधिकारियों को क्लीन चिट दे दी। हाईकोर्ट ने इस पहलू को गंभीरता से लेते हुए सीबीआई जांच का आदेश सुनाया। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह ने पक्ष रखा।

    JSSC की CGL परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जांच में प्रश्नपत्र लीक के साक्ष्य मिले हैं। ऐसे में दोषी व निर्दोष अभ्यर्थियों में अंतर करना कठिन है। इसी वजह से केवल कुछ अभ्यर्थियों की परीक्षा या परिणाम रद्द करने के बजाय पूरी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

  • CM फडणवीस से बैठक के बाद MPSC छात्रों का 2 अक्टूबर का आंदोलन स्थगित, ऑफलाइन परीक्षा और जांच की मांग पर बनी सहमति

    CM फडणवीस से बैठक के बाद MPSC छात्रों का 2 अक्टूबर का आंदोलन स्थगित, ऑफलाइन परीक्षा और जांच की मांग पर बनी सहमति

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC के छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच 30 सितंबर 2026 को हुई बैठक के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित छात्रों का आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई और मुख्यमंत्री की ओर से कई मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया। इस दौरान फडणवीस ने स्पष्ट किया कि MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही आयोजित की जाएंगी। परीक्षा प्रणाली में किसी तरह का बदलाव सभी छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से चर्चा किए बिना नहीं किया जाएगा। छात्रों की ओर से आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों को हटाने की मांग भी रखी गई थी।

    बैठक में MPSC सचिव के तबादले और आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि MPSC अध्यक्ष का पद संवैधानिक है और राज्य सरकार या राज्यपाल को अध्यक्ष को हटाने का अधिकार नहीं है। अध्यक्ष को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है और यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की सलाह के आधार पर होती है। छात्रों ने आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के आचरण को लेकर शिकायतें रखी थीं। इन शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस तरह छात्रों की ओर से उठाए गए पदाधिकारियों के आचरण और आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दे पर जांच का आश्वासन दिया गया।

    MPSC छात्रों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी MPSC परीक्षाएं ऑफलाइन ही होंगी और परीक्षा के तरीके में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। भर्ती को लेकर भी सरकार की ओर से अधिक संख्या में रिक्त पदों को भरने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आगामी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर रिक्तियों को शामिल करने और रिकॉर्ड संख्या में पद भरने का आश्वासन दिया है। विशेष रूप से 3 जनवरी को होने वाली ग्रुप सी परीक्षा में बड़ी संख्या में रिक्त पद शामिल किए जाने की बात कही गई। छात्रों की मांग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में रिक्तियों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की योजना बनाई गई है। सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी गई। बैठक के दौरान छात्रों की उन मांगों पर भी चर्चा हुई, जिनका संबंध आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट तरीके से आगे बढ़ाने से है। छात्रों ने पूर्व और वर्तमान MPSC अध्यक्षों तथा सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी, जबकि सरकार की ओर से इस मामले में न्यायिक जांच के बाद निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

    मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक के बाद MPSC छात्र प्रतिनिधिमंडल ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया। बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर चर्चा और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस दौरान परीक्षा प्रणाली को ऑफलाइन रखने, आयोग के पदाधिकारियों के आचरण की तीन महीने में न्यायिक जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में रिक्त पदों को बड़े स्तर पर शामिल करने जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया गया। छात्रों की ओर से रखी गई मांगों और मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद 2 अक्टूबर का प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल टाल दिया गया है।

  • Kedarnath : बासुकीताल ट्रेक पर गया पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता… दो जवान भी शामिल

    Kedarnath : बासुकीताल ट्रेक पर गया पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता… दो जवान भी शामिल


    रुद्रप्रयाग।
    केदारनाथ (Kedarnath)- बासुकीताल ट्रेक (Vasuki Taal Trek) पर गए पांच सदस्यीय ट्रेकिंग दल लापता हो गया। इनमें दो पीएसी जवान (Two PAC personnel) भी शामिल हैं। दल से संपर्क टूटने के बाद मंगलवार को रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया है। इनमें से एक ट्रेकर के परिजन यशवंत सिंह चौहान (Yashwant Singh Chauhan) ने जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र रुद्रप्रयाग (Rudraprayag) को सूचना दी कि उनका भाई प्रवेश चौहान अपने पांच साथियों के साथ 25 सितंबर को केदारनाथ-बासुकीताल ट्रेक पर गए थे। दल की योजना ओडिन कॉल होते हुए गंगोत्री पहुंचने की थी। परिजनों का उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।

    जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस नियंत्रण कक्ष और वन्यजीव प्रभाग गोपेश्वर को अवगत कराया गया। साथ ही 40वीं वाहिनी पीएसी से समन्वय स्थापित किया गया।


    कौन-कौन हैं लापता

    लापता ट्रेकर्स में अमित फर्सवाण (40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार), नवीन रावत (40वीं वाहिनी पीएसी रुद्रप्रयाग), प्रवेश चौहान (फॉरेस्टर, उत्तरकाशी), विवेक (निवासी जग्गी बगवान) और संजय सिंह रावत (पशुपालन विभाग केदारनाथ) शामिल हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और वन विभाग की टीमों ने खोजबीन शुरू कर दी है। हेलीकॉप्टर से भी सर्च अभियान चलाया गया किन्तु कम दृश्यता से अभियान स्थगित करना पड़ा।


    कालिंदी पास पर रेस्क्यू पूरा, 67 ट्रेकर्स निकाले

    उत्तरकाशी। कालिंदी पास और ओडिन कॉल क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी के बीच फंसे 139 पर्वतारोही, ट्रेकर्स और सहयोगी स्टाफ की सुरक्षित वापसी के लिए मंगलवार को रेस्क्यू अभियान चलाया गया। दूसरे दिन भी 27 पर्वतारोही, ट्रेकरों और पोर्टर्स को हेलीकॉप्टरों से सुरक्षित निकाला गया। इसके साथ मंगलवार दोपहर तक तक यह अभियान पूरा हो गया है। दूसरी ओर क्षेत्र में पर्वतारोहण अभियानों पर गए 72 पर्वतारोहियों और ट्रेकरों ने अभियान जारी रखने का निश्चय किया है।

    उनका कहना है कि वे स्वयं वापस लौट जाएंगे। अभियान में अब तक कुल 67 सदस्यों को हेलीकॉप्टरों से निकाला जा चुका है। इनमें ओडिन कॉल पास से 29, जोगिन वन से आठ, सतोपंथ से 08, कालिंदी पास से 19 और वासुकीताल से तीन लोग शामिल हैं। सभी को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। बता दें कि गत सप्ताह बारिश-बर्फबारी से 139 ट्रेकर फंस गए थे।


    सुरक्षित निकाले गए 27 ट्रेकर्स

    सोमवार को पहले दिन 40 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। मौसम अनुकूल न होने पर अभियान रोकना पड़ा। मंगलवार को मौसम साफ होने पर सुबह से फिर अभियान शुरू किया गया। इस दौरान कालिंदी पास से आठ, जोगिन वन से आठ और सतोपंथ पीक बेस कैंप से नौ ट्रेकर्स को हेलीकॉप्टर से सुरक्षित हर्षिल लाया गया। वासुकीताल क्षेत्र से दो आर्मी पोर्टर्स को भी रेस्क्यू किया गया।

  • देहरादून बना देश में सबसे कम AQI वाला शहर…. दो दिन की बारिश से साफ हुई शहर की हवा

    देहरादून बना देश में सबसे कम AQI वाला शहर…. दो दिन की बारिश से साफ हुई शहर की हवा


    देहरादून।
    दो दिन की बारिश (Rain) ने देहरादून (Dehradun) की हवा को बेहद साफ कर दिया। सोमवार को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) (Air Quality Index – AQI) न्यूनतम चार और औसत करीब 11 दर्ज किया गया। इसके साथ देहरादून देश में सबसे कम एक्यूआई वाला शहर बन गया। पीएम-10 की मात्रा भी 170 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से घटकर करीब 20 माइक्रोग्राम रह गई। दिल्ली और बरेली में एक्यूआई कितना दर्ज हुआ?

    बारिश से पहले देहरादून की हवा काफी खराब हो गई थी। पिछले दिनों एक्यूआई करीब 200 तक पहुंच गया था। सड़कों की धूल, निर्माण कार्य और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक कणों के कारण पीएम-10 की मात्रा भी बढ़ी थी। लगातार दो दिन हुई बारिश ने वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषणकारी कणों को काफी हद तक साफ कर दिया। ताजा वायु गुणवत्ता आंकड़ों में देहरादून का एक्यूआई देश के सभी शहरों में सबसे कम रहा।


    दूसरे नंबर पर कौन, दिल्ली-बरेली में कितना AQI

    सिक्किम के गंगटोक का एक्यूआई 15 दर्ज हुआ और वह दूसरे स्थान पर रहा। दिल्ली में 53, आगरा में 46 और बरेली में 60 एक्यूआई दर्ज किया गया। अधिकांश प्रमुख शहरों में एक्यूआई 50 के आसपास या इससे अधिक रहा। पीसीबी के सदस्य सचिव डॉ.पराग मधुकर धकाते के अनुसार प्रदूषण कम करने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसका नतीजा भी एक्यूआई में दिख रहा है। हालांकि, इसमें बारिश की भी बड़ी भूमिका है।


    बारिश से बैठी धूल

    देहरादून विवि के पर्यावरण विभाग की एचओडी डॉ. विजय श्रीधर के मुताबिक बारिश के दौरान वातावरण में मौजूद धूल और महीन कण बारिश की बूंदों के साथ नीचे आ जाते हैं। इससे हवा में तैरने वाले पीएम-10, पीएम-2.5 और अन्य कणों की मात्रा तेजी से घटती है। बारिश थमने के बाद सड़कों पर जमा मिट्टी सूखने, वाहनों की आवाजाही और निर्माण गतिविधियां बढ़ने से दोबारा धूल उड़ सकती है। ऐसे में एक्यूआई फिर बढ़ने की आशंका है। हाल के दिनों में देहरादून का एक्यूआई 40 से 200 तक पहुंचा है। इससे हवा की गुणवत्ता पर मौसम और धूल के असर का पता चलता है।

  • बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?

    बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने ‘गुंडा रोधी विधेयक’ को पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। शुभेंदु ने कहा कि प्रस्तावित कानून फिलहाल गृह मंत्रालय के विचाराधीन है। मीडिया के एक वर्ग में खबर आई थी कि राष्ट्रपति ने विधेयक के एक प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए इसे लौटा दिया है, जो केंद्र के एक मादक पदार्थ रोधी कानून के साथ ओवरलैप कर सकता है।

    शुभेंदु ने देर शाम राज्य सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फर्जी खबर है। इसका कोई आधार नहीं है। यह विधेयक अभी राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है और विचार-विमर्श के लिए गृह मंत्रालय के पास ही है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूद मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक पूर्ण रूप से स्पष्ट है और उन्होंने इसके राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई।

    जून में पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य संगठित अपराध, बार-बार अपराध करने वालों और सार्वजनिक अव्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को व्यापक अधिकार प्रदान करना है। इस कानून के माध्यम से निवारक हिरासत और संपत्ति जब्ती जैसे उपायों के जरिए सिंडिकेट, जबरन वसूली रैकेट, भूमि कब्जा, अवैध खनन और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया है।

    इससे पहले खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति ने एंटी-गुंडा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा बिना मंजूरी के वापस लौटा दिया है। ऐसी भी खबरें आई थीं कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बयान दिया है कि अब इसके कानूनी प्रावधानों की जांच करेगी और नए मसौदे पर काम करेगी। इसमें कहा गया था कि एंटी-गुंडा कानून चार अन्य राज्यों में अस्तित्व में है। हम कानूनी तरीकों से काम करेंगे। कोई कठिनाई नहीं होगी।

  • छत्तीसगढ़: बालोद जिले में ट्रक-पिकअप के बीच जोरदार टक्कर, 6 लोगों की मौत, 7 घायल

    छत्तीसगढ़: बालोद जिले में ट्रक-पिकअप के बीच जोरदार टक्कर, 6 लोगों की मौत, 7 घायल


    बालोद।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बालोद जिले (Balod district) में नेशनल हाईवे-30 (National Highway 30) पर शुक्रवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया. धमतरी से कांकेर के बीच मरकटोला घाट में डीजे सिस्टम लेकर जा रही पिकअप और धान से भरे ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई. हादसा इतना भीषण था कि पिकअप और डीजे सिस्टम के परखच्चे उड़ गए।

    हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई, जबकि 7 अन्य घायल बताए जा रहे हैं. सभी घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

    हादसा बालोद जिले के पुरुर थाना क्षेत्र में हुआ. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है. एडिशनल एसपी चन्द्रकान्त गवर्ना ने 6 लोगों की मौत और 7 के घायल होने की पुष्टि की है।

  • राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी हार…. 7 में से एक पर निर्दलीय और 6 पर BJP का कब्जा

    राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी हार…. 7 में से एक पर निर्दलीय और 6 पर BJP का कब्जा


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में हाल ही में हुए चुनावों (Elections) में बीजेपी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 में से 6 निकायों में अपना कब्जा जमा लिया है. वहीं, एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार (Independent candidate) ने बाजी मारी है. इस तरह इन चुनावों में कांग्रेस (Congress) को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

    निकायों से सामने आए चुनावी नतीजों के मुताबिक, उदयपुर में बीजेपी के दिनेश भट्ट को डिप्टी मेयर चुना गया है. इसके अलावा अजमेर में बीजेपी के हेमंत सांखला, अलवर में बीजेपी के अजय पुनिया और बीकानेर में बीजेपी के पंकज गहलोत को जीत मिली है।

    भीलवाड़ा में बीजेपी के राधेश्याम सोमानी, भरतपुर में बीजेपी की अंबिका सैनी और पाली में निर्दलीय प्रत्याशी महबूब टी को डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष पद की कुर्सी मिली है।

    अजमेर और पाली में मुकाबला इतना कड़ा था कि हार-जीत का फैसला पर्ची यानी लॉटरी सिस्टम से करना पड़ा. अजमेर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों को बराबर यानी 40-40 वोट मिले थे. वहीं इसके उलट, भीलवाड़ा में बीजेपी के राधेश्याम सोमानी ने निर्विरोध जीत हासिल की।


    बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत को लगा झटका

    चुनावों के बीच सबसे बड़ा उलटफेर बीकानेर नगर निगम में देखने को मिला. यहां कांग्रेस पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत था, इसके बावजूद उसे हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस पार्षदों की ओर से की गई क्रॉस वोटिंग के कारण बीजेपी के पंकज गहलोत डिप्टी मेयर बने. खास बात ये है कि इसके ठीक एक दिन पहले ही चुनाव में कांग्रेस ने बीकानेर में अपना मेयर बनाया था, लेकिन उपमहापौर चुनाव में बाजी पलट गई।

    इसके अलावा, बारां नगर परिषद के उपसभापति चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ी जीत मिली. बारां में ‘आप’ के तेजस सुमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 50 वोटों में से 31 वोट हासिल किए और कांग्रेस उम्मीदवार नवीन को 19 वोटों से हरा दिया. जोधपुर की मथानिया नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के जितेंद्र देवड़ा ने 18 वोट पाकर जीत दर्ज की। इस दौरान कांग्रेस नेत्री दिव्या मदेरणा भी खासी चर्चा में रहीं, जो सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सिर पर हेलमेट पहनकर मतदान केंद्र पहुंची थीं।


    जीत की खुशी में दंडवत होकर मंदिर पहुंचे महेंद्र समरिया

    राजस्थान के इन चुनावों में हंगामे और रोमांच की कोई कमी नहीं थी. कोटा की रामगंज मंडी नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी के महेंद्र समरिया निर्विरोध चुने गए, जिसके बाद वो अपनी जीत की खुशी में दंडवत करते हुए करीब 500 मीटर दूर गोवर्धन नाथ मंदिर पहुंच गए।

    वहीं, सवाई माधोपुर नगर परिषद में उपसभापति पद के नामांकन के दौरान बीजेपी चुनाव प्रभारी मदन प्रजापत और पुलिस के बीच तीखी नोकझोक और धक्का-मुक्की देखने को मिली. सीकर में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई, जहां पूर्व सभापति और कांग्रेस पार्षद ने बीजेपी प्रत्याशी रेखा विचारणीय के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।

    बीकानेर में वोटिंग के दौरान विधायक जेठालाल विकास की गाड़ी रोके जाने पर हल्का विवाद हुआ, जिसे बाद में महापौर प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह ने बीच-बचाव कर शांत कराया. उदयपुर की फतेह नगर पालिका में बीजेपी के बागी पार्षद राजेश चपलोद को अध्यक्ष चुनाव के दौरान एससी-एसटी एक्ट के मामले में पुलिस कस्टडी में वोट डालने लाया गया।


    बीजेपी का जलवा

    भरतपुर संभाग के 32 निकायों में से 22 स्थानों पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार निर्वाचित हुए, जबकि कांग्रेस को 7 और निर्दलीयों को 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा. भरतपुर नगर निगम में महापौर अनुराधा सिंह की जीत के बाद उपमहापौर पद पर अंबिका सैनी ने जीत दर्ज की. डीग जिले के सभी छह निकायों में पूरी तरह बीजेपी का दबदबा देखने को मिला, जहां डीग नगर परिषद में तो बीजेपी प्रत्याशी को शून्य वोट मिलने की भी चर्चा रही।

    दूसरी ओर, करौली जिले के 6 निकायों में समीकरण थोड़े अलग रहे, जहां बीजेपी को 1, कांग्रेस को 2 और निर्दलीयों को 3 पदों पर सफलता मिली. धौलपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी का रहा, जबकि सवाई माधोपुर के 6 निकायों में उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी ने 4 और कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • राजस्थान में कड़ी सुरक्षा के बीच आज हो रहा निकाय प्रमुखों का चुनाव…. भारी सुरक्षा बल तैनात

    राजस्थान में कड़ी सुरक्षा के बीच आज हो रहा निकाय प्रमुखों का चुनाव…. भारी सुरक्षा बल तैनात


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में नगरीय निकाय प्रमुखों के चुनाव (Urban Local Bodies Heads Elections ) से पहले कई जगहों पर सामने आई हिंसा, पार्षदों पर दबाव और राजनीतिक खींचतान के बीच पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सोमवार को होने वाले नगर निगम मेयर, नगर परिषद सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के चुनाव को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया जा रहा है।

    चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए जिला पुलिस से लेकर रेंज और कमिश्नरेट स्तर तक सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पुलिस बल के साथ राजस्थान आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी (RAC) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की अतिरिक्त कंपनियां भी उपलब्ध कराई गई हैं।


    हिंसा और राजनीतिक खींचतान के बीच पुलिस अलर्ट

    निकाय चुनाव के वार्ड परिणाम आने के बाद कई जगहों पर बोर्ड बनाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जोरदार खींचतान चल रही है। निर्दलीय पार्षदों की महत्वपूर्ण भूमिका वाले निकायों में जोड़तोड़ और क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच दोनों दल अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं।

    इसी दौरान कुछ स्थानों पर पार्षदों को धमकाने, दबाव बनाने और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे घटनाक्रम को देखते हुए पुलिस ने अध्यक्ष पद के चुनाव वाले निकायों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया है।


    एसपी, रेंज आईजी और पुलिस कमिश्नरों को विशेष निर्देश

    अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून एवं व्यवस्था) वीके सिंह की ओर से सभी जिला पुलिस अधीक्षकों, रेंज आईजी और पुलिस आयुक्तों को चुनाव के लिए पुख्ता सुरक्षा प्रबंध करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्देशों के तहत जिला स्तर पर उपलब्ध पुलिस बल की समीक्षा कर जरूरत वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त बल लगाया जा रहा है। संवेदनशील निकायों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए RAC और STF की कंपनियां भी तैनात की जा रही हैं।


    शांतिपूर्ण मतदान की अपील

    पुलिस प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा या कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होने देने के लिए स्थानीय स्तर पर भी आवश्यक इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कानून एवं व्यवस्था) वीके सिंह ने लोगों से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव कराने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है। आज सोमवार को होने वाले निकाय प्रमुखों के चुनाव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर पुलिस की विशेष नजर रहेगी। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल की तैनाती के साथ पुलिस अधिकारी मौके की स्थिति के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा सकेंगे।