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  • उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र: अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर लंबी चर्चा की योजना

    उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र: अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर लंबी चर्चा की योजना


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज 19 दिसंबर से शुरू हो गया है और यह 24 दिसंबर तक चलेगा। इस सत्र में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने वाली है जिसमें दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर विशेष चर्चा प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी राजनीतिक दलों से इस सत्र के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की है और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी का आश्वासन दिया है।

    शीतकालीन सत्र का प्रारंभ

    सत्र के पहले दिन 19 दिसंबर को दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य विधानसभा में योगदान देने वाले उन नेताओं को सम्मानित करना है जिनका हाल ही में निधन हुआ था। इसके बाद 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा। 22 दिसंबर को सत्र का मुख्य कार्यक्रम शुरू होगा जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा।

    अनुपूरक बजट और वंदे मातरम् पर चर्चा

    सत्र के दौरान 22 दिसंबर को अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा जिसमें राज्य सरकार की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों के लिए प्रस्तावित खर्चों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा उसी दिन वंदे मातरम् पर पांच घंटे की विशेष चर्चा आयोजित की जाएगी। यह चर्चा भारतीय राष्ट्रवाद और संस्कृति को बढ़ावा देने के संदर्भ में होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विधानसभा जन आकांक्षाओं का महत्वपूर्ण मंच है और इस चर्चा के माध्यम से सरकार सभी मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी करेगी।

    ‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शीतकालीन सत्र के उद्घाटन से पहले प्रदेश के ‘विकसित उत्तर प्रदेश विजन डॉक्यूमेंट-2047’ पर बात की। उन्होंने पिछले सत्र में इस विषय पर हुई 27 घंटे लंबी चर्चा का हवाला दिया। इस दौरान राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश से लगभग 98 लाख सुझाव प्राप्त किए थे जिनका उपयोग आईआईटी कानपुर के सहयोग से अंतिम रूप देने में किया जाएगा। यह डॉक्यूमेंट उत्तर प्रदेश के 2047 तक के विकास का रोडमैप तय करेगा।

    एसआईआर अभियान और वीर बाल दिवस

    मुख्यमंत्री ने निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर स्पेशल इन्फॉर्मेशन रिवाइज अभियान की सराहना की। इस अभियान के माध्यम से मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाएगा जिससे लोकतंत्र को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस मनाने की घोषणा की गई है। यह दिन भारतीय संस्कृति और राष्ट्र के प्रति बच्चों को प्रेरित करने के लिए मनाया जाएगा।

    विधायी कार्य और आगामी कार्यक्रम

    सत्र के अंतिम दो दिनों यानी 23 और 24 दिसंबर को विधायी कार्य और विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएं आयोजित की जाएंगी। इन दो दिनों में विभिन्न विधेयकों पर विचार किया जाएगा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री ने इस बात को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की प्राथमिकता हमेशा जनहित में निर्णय लेना और समस्याओं का समाधान करना रहेगा।

    संपूर्ण सत्र में राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने यह भी कहा कि इस सत्र के दौरान जनोपयोगी मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दलों के सहयोग से विधानसभा का संचालन सुचारु रूप से होगा और प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।

  • हादसे में एयरबैग न खुलने पर टोयोटा पर 61 लाख का जुर्माना CG राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला

    हादसे में एयरबैग न खुलने पर टोयोटा पर 61 लाख का जुर्माना CG राज्य उपभोक्ता आयोग का फैसला


    रायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी पर 61 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है और कंपनी को मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह आदेश उस समय आया जब एक गंभीर सड़क दुर्घटना में कंपनी की इनोवा कार के एयरबैग न खुलने की वजह से चालक को गंभीर चोटें आईं। आयोग ने इस मामले को विनिर्माण दोष और सेवा में कमी की श्रेणी में माना है क्योंकि एयरबैग की कार्यशीलता एक सुरक्षा मानक है जो कार दुर्घटनाओं में जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

    यह मामला 23 अप्रैल 2023 का है। कोरबा निवासी व्यापारी अमित अग्रवाल और उनके भाई सुमित अग्रवाल रायपुर से कोरबा लौट रहे थे जब तरदा गांव के पास सामने से आ रहे वाहन से बचने के प्रयास में उनकी इनोवा कार अनियंत्रित हो गई और पेड़ से टकरा गई। हादसा बेहद गंभीर था और इस दौरान कार का कोई भी एयरबैग नहीं खुला जिससे चालक अमित अग्रवाल को गंभीर चोटें आईं।

    अमित अग्रवाल ने इलाज के दौरान कुल 36.83 लाख रुपये खर्च किए क्योंकि उन्हें रायपुर और हैदराबाद में इलाज कराना पड़ा। इसके बाद सुमित अग्रवाल ने टोयोटा किर्लोस्कर मोटर कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग कोरबा में शिकायत दायर की। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि कार में एयरबैग की तकनीकी खराबी के कारण गंभीर दुर्घटना के दौरान चालक को बचाया नहीं जा सका।

    जब कंपनी की ओर से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में उपस्थित नहीं हुआ तो जिला उपभोक्ता आयोग ने एकपक्षीय निर्णय लेते हुए टोयोटा को नया वाहन या उसके बराबर राशि देने का आदेश दिया। इसके अलावा उन्होंने चिकित्सा खर्च की भरपाई भी करने के निर्देश दिए।

    टोयोटा ने इस फैसले के खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की जिसमें उन्होंने बीमा भुगतान और विशेषज्ञ रिपोर्ट के अभाव जैसे तर्क प्रस्तुत किए। हालांकि राज्य उपभोक्ता आयोग ने कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए जिला आयोग के फैसले को सही ठहराया। आयोग ने कहा कि वाहन के एयरबैग का न खुलना एक गंभीर लापरवाही और खराब निर्माण का उदाहरण है जो उपभोक्ता के जीवन को खतरे में डालता है।

    यह मामला उपभोक्ता सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि कार निर्माता कंपनियों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को सुनिश्चित करना चाहिए। अगर कोई उपभोक्ता सुरक्षा मानक में कमी की वजह से नुकसान उठाता है तो कंपनी को जिम्मेदारी लेनी चाहिए और उपभोक्ता को उचित मुआवजा देना चाहिए। यह फैसला उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करता है और यह संदेश देता है कि कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर ध्यान देना चाहिए।

  • विधानसभा सत्र के कारण लखनऊ में ट्रैफिक डायवर्जन, 24 दिसंबर तक कई प्रमुख रास्ते रहेंगे बंद

    विधानसभा सत्र के कारण लखनऊ में ट्रैफिक डायवर्जन, 24 दिसंबर तक कई प्रमुख रास्ते रहेंगे बंद


    नई दिल्ली।लखनऊ /उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के मद्देनज़र राजधानी लखनऊ में यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए गए हैं। शुक्रवार 19 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र को लेकर शहर के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू कर दिया गया है जो 24 दिसंबर तक प्रभावी रहेगा। ट्रैफिक पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले बदले हुए रूट की जानकारी जरूर लें ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके। डीसीपी ट्रैफिक कमलेश दीक्षित ने जानकारी दी कि विधानसभा सत्र के दौरान विधायकों विधान परिषद सदस्यों और अन्य विशिष्ट अतिथियों की आवाजाही के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सत्र के चलते विधानसभा भवन और उसके आसपास के इलाकों में वाहनों की आवाजाही सीमित रहेगी।

    ट्रैफिक पुलिस के अनुसार बंदरियाबाग चौराहे से राजभवन डीएसओ चौराहा हजरतगंज चौराहा जीपीओ मोड़ और विधानसभा की ओर जाने वाले सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। इन मार्गों की ओर जाने वाले वाहन अब लालबत्ती चौराहा कैंट रोड गोल्फ क्लब चौराहा और 1090 चौराहे के रास्ते अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।इसी तरह डीएसओ चौराहे से हजरतगंज जीपीओ पार्क और विधानसभा की ओर जाने वाले रास्तों को भी बंद रखा जाएगा। इस रूट पर चलने वाले वाहनों को पार्क रोड और मेफेयर तिराहे से होकर जाने की सलाह दी गई है। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि इन वैकल्पिक मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि यातायात सुचारु रूप से चलता रहे।

    इसके अलावा रॉयल होटल चौराहे से विधानसभा के सामने होकर हजरतगंज चौराहे की ओर जाने वाला मार्ग पूरी तरह से बंद रहेगा। इस रास्ते से गुजरने वाले वाहनों को कैसरबाग चौराहा परिवर्तन चौक सुभाष चौराहा चिरैया झील या बर्लिंगटन चौराहा सदर ओवरब्रिज और कैंट रोड के जरिए डायवर्ट किया जाएगा।विधानसभा सत्र का असर सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ेगा। रोडवेज और सिटी बसों के कई रूट में बदलाव किया गया है। संकल्प वाटिका पुल के नीचे स्थित तिराहे से महानगर की ओर से आने वाली बसें अब सिकंदरबाग हजरतगंज और विधानसभा मार्ग से नहीं गुजरेंगी। इन बसों को बैकुंठ धाम 1090 गांधी सेतु बंदरियाबाग लालबत्ती चौराहा और कैंट के रास्ते संचालित किया जाएगा।

    गौरतलब है कि विधानसभा का शीतकालीन सत्र 19 दिसंबर से 24 दिसंबर तक प्रस्तावित है। हालांकि 20 और 21 दिसंबर को अवकाश रहेगा लेकिन इसके बावजूद 22 23 और 24 दिसंबर को भी ट्रैफिक डायवर्जन की यही व्यवस्था लागू रहेगी। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से समय से निकलने ट्रैफिक नियमों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर नजदीकी ट्रैफिक कर्मियों से सहायता लेने की अपील की है

  • तेजस एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश नाकाम, उन्नाव में ट्रैक पर मिला सीमेंटेड स्लीपर

    तेजस एक्सप्रेस को पटरी से उतारने की साजिश नाकाम, उन्नाव में ट्रैक पर मिला सीमेंटेड स्लीपर


    नई दिल्ली ।लखनऊ /उत्तर प्रदेश में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा को चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। लखनऊ-कानपुर रेल रूट पर उन्नाव जिले के मगरवारा रेलवे स्टेशन के पास तेजस एक्सप्रेस को पलटाने की कथित साजिश का मामला सामने आया है। डाउन ट्रैक पर एक सीमेंटेड स्लीपर रखे जाने से हड़कंप मच गया। गनीमत रही कि समय रहते स्थिति को भांप लिया गया और बड़ा हादसा टल गया।यह घटना बुधवार रात करीब पौने नौ बजे की हैजब स्थानीय लोगों ने मगरवारा स्टेशन के पास डाउन लाइन की एक पटरी पर सीमेंटेड स्लीपर रखा हुआ देखा। लोगों ने तुरंत स्टेशन मास्टर को इसकी सूचना दीजिसके बाद रेलवे कंट्रोल रूम को अलर्ट किया गया। सूचना मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल RPF-राजकीय रेलवे पुलिस GRP- और अन्य रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच गए।

    इसी दौरान नई दिल्ली से लखनऊ जा रही तेजस एक्सप्रेस को एहतियातन गंगाघाट रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया। ट्रेन करीब 27 मिनट तक वहां खड़ी रही। इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर कई अन्य ट्रेनों को भी रोक दिया गयाजिससे कुछ समय के लिए इस रूट पर रेल यातायात प्रभावित हुआ।रेलवे अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ट्रैक की जांच की और सीमेंटेड स्लीपर को हटवाया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद रात लगभग 9:19 बजे ट्रैक को पूरी तरह क्लियर कर दिया गयाजिसके बाद तेजस एक्सप्रेस समेत अन्य ट्रेनों को रवाना किया गया।

    आरपीएफ इंस्पेक्टर हरीश कुमार मीणा ने बताया कि मगरवारा स्टेशन के पास गिट्टी उतारने का कार्य चल रहा है। संभव है कि ट्रेनों की तेज धमक के कारण सीमेंटेड स्लीपर ट्रैक पर आ गया हो। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह किसी अराजक तत्व की शरारत हो। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है।वहीं मगरवारा स्टेशन मास्टर शिव बहादुर ने बताया कि डाउन लाइन पर स्लीपर पड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि यह निर्माण कार्य के दौरान अपनी जगह से खिसक सकता हैलेकिन साजिश की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पीडब्ल्यूआई स्थायी मार्ग निरीक्षक- की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए स्लीपर हटाया और ट्रैक को सुरक्षित घोषित किया।

    इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेजस एक्सप्रेस जैसी हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेन को निशाना बनाए जाने की आशंका ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। रेलवे अब आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रहा है और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।उधरप्रदेश के कई हिस्सों में घने कोहरे का असर भी रेल यातायात पर साफ दिखाई दिया। मुरादाबाद मंडल समेत उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में कोहरे के कारण ट्रेनों की रफ्तार धीमी रही और कई प्रमुख ट्रेनें घंटों की देरी से चलीं। दृश्यता कम होने के चलते लोको पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।

    बुधवार को 20505 डिब्रूगढ़-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस करीब सवा दो घंटे की देरी से मुरादाबाद पहुंची। वहीं जम्मूतवी-कोलकाता एक्सप्रेसदुर्गियाना एक्सप्रेसअमरनाथ एक्सप्रेस और जनसाधारण एक्सप्रेस सहित कई ट्रेनें एक से सात घंटे तक लेट रहीं। ट्रेनों के विलंब से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और जंक्शनों पर वेटिंग हॉल यात्रियों से भरे नजर आए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी जरूर लें। साथ ही ट्रैक की सुरक्षा को लेकर निगरानी और गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैंताकि भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।

  • दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: आज से वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, बिना PUC पेट्रोल पर रोक और वाहनों पर सख्त पाबंदियां

    दिल्ली में बढ़ता प्रदूषण: आज से वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य, बिना PUC पेट्रोल पर रोक और वाहनों पर सख्त पाबंदियां

    नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली एक बार फिर गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में है। लगातार बिगड़ते एयर क्वालिटी इंडेक्स AQI के कारण लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया है। हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने आज से कई सख्त पाबंदियां लागू कर दी हैं जिनका असर आम नागरिकों से लेकर दफ्तरों, ट्रांसपोर्ट और निर्माण कार्यों तक साफ तौर पर देखने को मिलेगा। ये सभी कदम GRAP-IV ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लानके तहत उठाए गए हैं ।

    सबसे बड़ा फैसला दफ्तरों को लेकर लिया गया है। दिल्ली सरकार ने सभी सरकारी और निजी संस्थानों में वर्क फ्रॉम होम को अनिवार्य कर दिया है। श्रम मंत्री कपिल मिश्रा ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाएगी। आदेश के मुताबिक, निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारी एक साथ ऑफिस में मौजूद नहीं हो सकते। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करना होगा। हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं और फ्रंटलाइन वर्कर्स को इससे छूट दी गई है। इसमें अस्पताल, स्वास्थ्य सेवाएं, फायर डिपार्टमेंट, प्रदूषण नियंत्रण, ट्रांसपोर्ट और सैनिटेशन जैसी जरूरी सेवाएं शामिल हैं।

    प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए निर्माण गतिविधियों पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। सरकार का कहना है कि GRAP-IV लागू रहने तक सभी तरह के निर्माण और तोड़-फोड़ के काम बंद रहेंगे। इससे प्रभावित होने वाले मजदूरों के लिए राहत की घोषणा भी की गई है। दिल्ली सरकार ऐसे पंजीकृत मजदूरों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी, ताकि उनकी आजीविका पर तत्काल असर न पड़े। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

    वाहनों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बिना PUC पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट के पेट्रोल और डीजल देने पर रोक लगा दी है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि अब पेट्रोल पंपों पर PUC सर्टिफिकेट की जांच की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों को ईंधन नहीं मिलेगा। PUC सर्टिफिकेट अधिकृत केंद्रों पर वाहन की उत्सर्जन जांच के बाद जारी होता है। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए इसकी फीस 60 रुपये, चारपहिया के लिए 80 रुपये और डीजल वाहनों के लिए 100 रुपये तय की गई है। BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए इसकी वैधता 12 महीने की होती है।

    इसके अलावा, निर्माण सामग्री ढोने वाले ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड BS-6 से नीचे के सभी वाहनों को GRAP-3 और GRAP-4 के दौरान राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बाहर से आने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे केवल BS-6 मानक वाले वाहन ही दिल्ली लाएं।दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की टीमें पेट्रोल पंपों, प्रमुख सड़कों और बॉर्डर पॉइंट्स पर तैनात की गई हैं, ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके। साथ ही, सरकार वाहन प्रदूषण कम करने के लिए एक कारपूलिंग ऐप लॉन्च करने की योजना पर भी काम कर रही है।सरकार का मानना है कि ये कड़े फैसले अस्थायी हैं लेकिन इनका मकसद दिल्ली के लोगों को साफ और सुरक्षित हवा देना है। यदि हालात में सुधार होता है तो पाबंदियों में ढील दी जा सकती है, लेकिन फिलहाल सभी नागरिकों से नियमों का पालन करने और सहयोग करने की अपील की गई है।

  • यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज

    यूपी में जल्द कैबिनेट विस्तार! छह नए मंत्रियों की एंट्री और तीसरे उपमुख्यमंत्री की संभावना तेज


    नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार होने की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच संतुलन बनाने के लिए कैबिनेट में बड़े बदलाव कर सकती है। सूत्रों के अनुसारइस विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है और साथ ही प्रदेश को तीसरा उपमुख्यमंत्री भी मिल सकता है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकवर्तमान में उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैंजबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों की अनुमति है। ऐसे में छह पद खाली हैंजिन्हें भरने की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में केवल नए चेहरों की एंट्री ही नहीं होगीबल्कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है। इसका उद्देश्य सरकार के कामकाज को अधिक प्रभावी बनाना और आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को मजबूत करना है।

    तीसरे उपमुख्यमंत्री की चर्चा क्यों?

    इस बार कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री को लेकर है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री हैं-केशव प्रसाद मौर्यओबीसी वर्ग और बृजेश पाठकब्राह्मण वर्ग। सूत्रों के अनुसारतीसरे उपमुख्यमंत्री का पद अनुसूचित जातिSC समुदाय को दिए जाने की संभावना हैजिससे सामाजिक संतुलन को और मजबूत किया जा सके। इस पद के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद साध्वी निरंजन ज्योति का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। यदि उन्हें यह जिम्मेदारी मिलती हैतो यह भाजपा की सामाजिक समरसता की राजनीति को और मजबूती देगा। साथ ही दलित समुदाय में पार्टी के संदेश को भी बल मिलेगा।

    सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस

    भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ओबीसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय को साधने के लिए भी सरकार कैबिनेट में कुछ बड़े चेहरे शामिल कर सकती है। इस संदर्भ में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी चर्चा में है। वे पहले योगी सरकार में पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना भाजपा के लिए रणनीतिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।

    बागी नेताओं को भी मिल सकता है मौका

    सूत्रों के मुताबिकइस कैबिनेट विस्तार में भाजपा के कुछ बागी नेताओंसमाजवादी पार्टी से अलगहोकर आएनेताओं और सहयोगी दलों-राष्ट्रीय लोक दलRLDऔर अपना दल-के प्रतिनिधियों को भी जगह दी जा सकती है। संभावित नामों में पूजा पालमनोज पांडेय और महेंद्र सिंह जैसे नेताओं की चर्चा है।राजनीतिक विश्लेषकों कामानना है कि बागीनेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल कर भाजपा न सिर्फ विपक्ष की धार कमजोर करना चाहती हैबल्कि अपने राजनीतिक आधार को भी व्यापक बनाना चाहती है।

    चुनावी रणनीति से जुड़ा है विस्तार

    विशेषज्ञों के अनुसारयह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। इससे सरकार को आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में सामाजिकक्षेत्रीय और जातिगत संतुलन साधने में मदद मिलेगी। नए चेहरों को मौका देकर संगठन के भीतर भी उत्साह बढ़ाया जा सकता है।हालांकिमंत्रिमंडल विस्तार की आधिकारिक तारीख अभी तय नहीं हुई हैलेकिन राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में इस पर मुहर लग सकती है। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

  • Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक

    Maharashtra Politics Alert: BMC चुनाव से पहले माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे को लेकर सियासी उठापटक


    मुंबई/महाराष्ट्र की राजनीति में BMC चुनाव से पहले सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ है। खेल मंत्री माणिकराव कोकाटे को सदनिका घोटाला मामले में नासिक जिला न्यायालय द्वारा दो साल की सजा सुनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। अदालत ने 16 नवंबर को सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद पुलिस ने कोकाटे की गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और किसी भी समय उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी होने की संभावना बनी हुई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर वारंट जारी हुआ, तो पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ऐसे में एनसीपी प्रमुख अजित पवार को यह निर्णय लेना होगा कि कोकाटे इस्तीफा दें या हाई कोर्ट की रोक तक अपने मंत्री पद को बरकरार रखें। इस राजनीतिक पेंच ने सत्तारूढ़ दल और पार्टी नेतृत्व दोनों के लिए रणनीति बदलने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    अजित पवार और देवेंद्र फडणवीस की अहम बैठक
    हालिया राजनीतिक चर्चाओं के बीच अजित पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से ‘वर्षा’ निवास पर मुलाकात की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग के आवंटन पर विस्तृत चर्चा हुई। फडणवीस ने साफ कहा कि कोकाटे के इस्तीफे का निर्णय पार्टी नेतृत्व और अजित पवार पर निर्भर करेगा। बैठक में विभाग आवंटन पर भी बात हुई। फडणवीस ने अजित पवार से राय मांगी कि किसे विभाग सौंपा जाए। इससे पहले इसी तरह के हालात में धनंजय मुंडे को इस्तीफा देना पड़ा था।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि कोकाटे के इस्तीफे से एनसीपी की अंदरूनी राजनीति प्रभावित हो सकती है और आगामी BMC चुनाव में इसका असर भी देखने को मिल सकता है।

    हाई कोर्ट की रोक और मंत्री पद की स्थिति
    माणिकराव कोकाटे का मंत्री पद केवल हाई कोर्ट की रोक पर सुरक्षित रह सकता है। अगर कोर्ट रोक नहीं लगाती है, तो उनके इस्तीफे की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। विभाग आवंटन के मामले में पार्टी नेतृत्व को नई रणनीति तैयार करनी होगी। विश्लेषकों का मानना है कि BMC चुनाव से पहले यह मामला पार्टी और सरकार दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। अदालत का फैसला और अजित पवार के अगले कदम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी को इसी समय रणनीति बदलकर चुनावी समीकरणों को मजबूत करना होगा।

    मंत्रिपद और BMC चुनाव रणनीति पर असर
    कुल मिलाकर, माणिकराव कोकाटे के इस्तीफे और विभाग आवंटन के फैसले से महाराष्ट्र में सियासी उठापटक बढ़ सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़ी नई रणनीतियों और संभावित बदलावों पर चर्चाएं तेज हो सकती हैं।BMC चुनाव के नजदीक आने के कारण यह मामला सिर्फ एनसीपी के आंतरिक समीकरण तक सीमित नहीं रहेगा। इसके प्रभाव से सरकार की सियासी छवि, गठबंधन की स्थिति और चुनावी रणनीति भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए पार्टी के नेताओं और सियासी विश्लेषकों की निगाहें लगातार इस मामले पर बनी हुई हैं।

  • BMC चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर आमने-सामने शिंदे गुट और BJP, आज की बैठक में तय होगी रणनीति

    BMC चुनाव 2025: सीट बंटवारे पर आमने-सामने शिंदे गुट और BJP, आज की बैठक में तय होगी रणनीति


    मुंबई /महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों का ऐलान होते ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका BMC चुनाव 2025 को लेकर राजनीतिक दल पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। देश की सबसे अमीर नगर निगम मानी जाने वाली बीएमसी पर कब्जे की जंग इस बार और भी दिलचस्प होने वाली है। इसी कड़ी में आज शिवसेना एकनाथ शिंदे गुट और भारतीय जनता पार्टी BJP के बीच सीट बंटवारे को लेकर पहली औपचारिक बैठक होने जा रही है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।मुंबई में होने वाली यह बैठक इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि यह तय करेगी कि महायुति के सहयोगी दल चुनावी मैदान में किस रणनीति के साथ उतरेंगे। बैठक में उप मुख्यमंत्री शिवसेना शिंदे गुट की ओर से मंत्री उदय सामंत, पूर्व सांसद राहुल शेवाळे और राज्यमंत्री योगेश कदम शामिल होंगे। वहीं बीजेपी की तरफ से मंत्री आशिष शेलार, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम, विधायक प्रविण दरेकर और अतुल भातखळकर बैठक में मौजूद रहेंगे।

    सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना शिंदे गुट इस बातचीत की शुरुआत 50-50 सीट बंटवारे के फार्मूले के साथ करेगी। पार्टी का तर्क है कि 2012 और 2017 के बीएमसी चुनावों को मिलाकर शिवसेना के कुल 125 पार्षद रह चुके हैं, जबकि बीजेपी ने 2017 के चुनाव में अपने दम पर 82 सीटें जीती थीं। दूसरी ओर बीजेपी इस बार और आक्रामक रुख में है और उसने 100 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य तय किया है। यही वजह है कि दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर कड़ा मंथन तय माना जा रहा है। इस सियासी समीकरण के बीच यह भी साफ हो गया है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे का गठबंधन आगामी चुनावों में एकजुट रहेगा, जिससे मुकाबला और ज्यादा त्रिकोणीय और रोचक बन सकता है।

    ठाणे में भी चुनावी हलचल तेज
    मुंबई के साथ-साथ ठाणे महानगरपालिका चुनाव को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे आज ठाणे में पार्टी पदाधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में सभी पुराने हेड्स, डिपार्टमेंट हेड्स, ब्रांच हेड्स, विधायक, सांसद और पूर्व कॉर्पोरेटर्स शामिल होंगे। इस बैठक को ठाणे चुनाव के लिए शुरुआती रोडमैप माना जा रहा है। यहां सीट बंटवारे, प्रचार रणनीति, बड़ी जनसभाओं और इच्छुक उम्मीदवारों को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। चूंकि ठाणे में भी बीजेपी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा जाना है, इसलिए दोनों दलों के बीच तालमेल और रणनीति पर विशेष जोर रहेगा। यह बैठक आज शाम ठाणे के टिप टॉप प्लाजा में आयोजित की गई है।

    कांग्रेस और अन्य दल भी सक्रिय
    महायुति की बैठकों के बाद अब कांग्रेस ने भी महानगरपालिका चुनावों को लेकर कमर कस ली है। नगर निगम क्षेत्रों के जिला कांग्रेस अध्यक्षों और विधानसभा प्रभारियों की बैठक आज 16 दिसंबर को दोपहर 1 बजे प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की अध्यक्षता में होगी। इस बैठक में संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति पर चर्चा की जाएगी।

    वहीं बीजेपी ने भी बीएमसी चुनाव के लिए अपने घटक दलों के साथ बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। पार्टी आज आरपीआई आठवले गुट और शिवसेना के साथ अलग-अलग बैठकें करेगी। ये सभी बैठकें दादर स्थित वसंत स्मृति कार्यालय में होंगी, जहां से महायुति की चुनावी दिशा और दशा तय होने की उम्मीद है।कुल मिलाकर, बीएमसी और ठाणे चुनावों को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल अपने चरम पर है। आज होने वाली बैठकें यह तय करेंगी कि आने वाले दिनों में सियासी समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।

  • पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक

    पंजाब सरकार का बड़ा फैसला: अमृतसर, आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो बने ‘पवित्र शहर’, शराब-मांस पर लगेगी सख्त रोक


    चंडीगढ़/पंजाब सरकार ने राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो श्री दमदमा साहिबको आधिकारिक रूप सेपवित्र शहर घोषित कर दिया है। इस फैसले के बाद इन तीनों धार्मिक नगरीयों में शराब तंबाकू नशीले पदार्थों और मांस की बिक्री व उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस संबंध में पंजाब सरकार की ओर से एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है जिसे राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। अधिसूचना के मुताबिक यह फैसला इन शहरों के धार्मिक महत्व आस्था और पवित्रता को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

    पंजाब सरकार के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक शेखर द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है कि राज्यपाल को यह घोषणा करते हुए प्रसन्नता हो रही है कि जिला अमृतसर का चारदीवारी क्षेत्र वॉल्ड सिटीजिला रूपनगर का श्री आनंदपुर साहिब नगर और जिला बठिंडा का तलवंडी साबो नगर अब पंजाब राज्य के पवित्र शहर घोषित किए जाते हैं। यह दर्जा मिलने के बाद इन इलाकों में कई तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण लागू होगा।सरकार ने सबसे पहले आबकारी विभाग को निर्देश जारी किए हैं। विभाग को कहा गया है कि इन तीनों पवित्र शहरों की नगरपालिका सीमाओं के भीतर शराब और उससे जुड़े सभी उत्पादों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के आदेश तुरंत जारी किए जाएं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में मौजूद शराब के ठेकों को बंद करने या उन्हें शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने को लेकर भी कार्रवाई की जाएगी।

    इसके अलावा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। विभाग से अनुरोध किया गया है कि इन पवित्र शहरों में सिगरेट तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री व उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए आवश्यक आदेश जारी किए जाएं। सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ धार्मिक वातावरण शुद्ध रहेगा बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।सरकार ने पशुपालन विभाग को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमृतसर की वॉल्ड सिटी श्री आनंदपुर साहिब और तलवंडी साबो की नगरपालिका सीमाओं के भीतर मांस और उससे जुड़े उत्पादों की बिक्री व उपयोग पर रोक लगाने के आदेश जारी किए जाएं। इस कदम को खास तौर पर धार्मिक भावनाओं के सम्मान और पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए स्थानीय सरकार विभाग को भी अधिसूचना भेजी गई है। साथ ही अमृतसर रूपनगर और बठिंडा के उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में इस निर्णय को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थानीय प्रशासन विस्तृत दिशा-निर्देश और नियमावली जारी करेगा।सरकार के इस फैसले को सिख धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। अमृतसर सिख धर्म का सबसे बड़ा केंद्र है जहां श्री हरमंदिर साहिब स्थित है। वहीं श्री आनंदपुर साहिब सिख इतिहास में खालसा पंथ की स्थापना का साक्षी रहा है जबकि तलवंडी साबो जिसे श्री दमदमा साहिब भी कहा जाता है सिखों के पांच तख्तों में से एक है। पंजाब सरकार का कहना है कि इन ऐतिहासिक और धार्मिक शहरों की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए यह फैसला समय की जरूरत था।

  • भोग व्यवस्था पर संकट: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं लगा बाल और शयन भोग टूटी सदियों पुरानी परंपरा

    भोग व्यवस्था पर संकट: वृंदावन बांके बिहारी मंदिर में पहली बार नहीं लगा बाल और शयन भोग टूटी सदियों पुरानी परंपरा


    मथुरा । वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आईजिसने न केवल मंदिर की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिएबल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को भी गहरी ठेस पहुंचाई। मंदिर के इतिहास में यह पहली बार हुआजब ठाकुर श्री बांके बिहारी जी को बाल भोग और शयन भोग अर्पित नहीं किया जा सका। यह स्थिति हलवाई को समय पर वेतन न मिलने के कारण उत्पन्न हुईजिसके चलते भोग का निर्माण ही नहीं हो पाया।
    श्री बांके बिहारी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहींबल्कि सनातन परंपराओं और भक्ति भावना का जीवंत केंद्र है। यहां प्रतिदिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु ठाकुर जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को दिन में चार बार भोग अर्पित किया जाता है। इसमें सुबह का बाल भोगदोपहर का राजभोगशाम का उत्थापन भोग और रात्रि का शयन भोग शामिल है। लेकिन सोमवार को सुबह और रात के दो प्रमुख भोग न लग पाने से यह परंपरा पहली बार टूटी।
    भोग न लगने के बावजूद मंदिर के पट खुले रहे और ठाकुर जी ने भक्तों को दर्शन दिए। यह दृश्य कई श्रद्धालुओं को भावुक कर गया। भक्तों का कहना था कि ठाकुर जी के दर्शन तो हुएलेकिन बिना भोग के सेवा अधूरी प्रतीत हुई। कई श्रद्धालुओं ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। मामले की जड़ में भुगतान की समस्या सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मंदिर की व्यवस्थाओं के संचालन के लिए गठित हाई पावर कमेटी के अंतर्गत भोग एवं प्रसाद निर्माण की जिम्मेदारी तय की गई है। ठाकुर जी के लिए भोग तैयार करने वाले हलवाई को प्रतिमाह लगभग 80 हजार रुपये वेतन दिया जाता है। जानकारी के अनुसारपिछले कुछ महीनों से इस भुगतान में देरी हो रही थी। अंततः हलवाई ने वेतन न मिलने के कारण भोग बनाने से इनकार कर दियाजिससे यह अभूतपूर्व स्थिति उत्पन्न हुई।
    इस घटना के बाद मंदिर के गोस्वामियों में भारी आक्रोश देखने को मिला। गोस्वामियों का कहना है कि ठाकुर जी की सेवा सर्वोपरि है और उसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अक्षम्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अव्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण मंदिर की गरिमा और परंपराओं को नुकसान पहुंचा है। गोस्वामियों ने मांग की है कि भविष्य में इस तरह की चूक न होइसके लिए ठोस और स्थायी व्यवस्था की जाए।
    हाई पावर कमेटी की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिलीतुरंत संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति से बातचीत की गई। हलवाई के लंबित भुगतान को शीघ्र करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ हीभविष्य में भोग व्यवस्था बाधित न होइसके लिए कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है।
    यह मामला केवल एक प्रशासनिक चूक भर नहींबल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। बांके बिहारी मंदिर में भोग को ठाकुर जी की सेवा का अभिन्न अंग माना जाता है। ऐसे में इस परंपरा का टूटना भक्तों के लिए अत्यंत पीड़ादायक है। अब सभी की नजरें मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी पर टिकी हैं कि वे इस घटना से सबक लेकर व्यवस्था को कैसे मजबूत करते हैंताकि भविष्य में आस्था और परंपरा पर दोबारा कोई संकट न आए।