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  • मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव

    मप्रः अब भोपाल में पर्यटकों को मिलेगा कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव


    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया 20 नवीन शिकारा नाव सेवा का शुभारंभ

    भोपाल। मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राजा भोज की नगरी भोपाल में लगभग एक हजार साल पहले बने बड़े तालाब में ‘शिकारा नाव’ सेवा का शुभारंभ ऐतिहासिक अवसर है। इन नवीन 20 शिकारों के माध्यम से पर्यटकों को कश्मीर की प्रसिद्ध डल झील का आनंद, झीलों की नगरी भोपाल में ही मिल जाएगा।

    यह बात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को भोपाल के बोट क्लब पर ‘शिकारा नाव’ सेवा को झंडी दिखाने के बाद कही। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, विधायक एवं अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।

    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शिकारों में पर्यटकों के लिए खान-पान एवं आरामदायक बैठक व्यवस्था की गई है। ये शिकारे प्रदेश के जल-पर्यटन (वॉटर टूरिज्म) को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलवाएंगे। प्रदेशवासी पर्यटन सेवा का लाभ उठाने के लिए आगे आएं। एम.पी. टूरिज्म, वॉटर स्पोर्ट्स गतिविधियों को भी आगे बढ़ा रहा है। शिकारा सेवा का आनंद उठाते हुए पर्यटक स्वदेशी उत्पादों की खरीद भी कर पाएंगे। उन्हाेंने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन्य जीवों के पुनर्वास में भी इतिहास रचा है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में वन्य जीव पर्यटन को लेकर आपार संभावनाएं विद्यमान हैं। नर्मदा वैली सहित प्रदेश की बड़ी-बड़ी जल परियानाओं के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गतिविधियां को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार पर्यटन क्षेत्र में विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। पिछले एक साल में उज्जैन आने वाले पर्यटकों की संख्या 7 करोड़ के पार पहुंच गई।

    शिकारे की सैर का लिया आनंद

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शिकारों को झंडा दिखाने के बाद बड़े तालाब में शिकारे की सैर का आनंद लिया और उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गणमान्य नागरिकों ने शिकारा बोट रेस्टोरेंट से चाय, पोहा, समोसे एवं फलों का जायका लिया। साथ ही फ्लोटिंग बोट मार्केट से मुख्यमंत्री ने प्रदेश की पारम्परिक कला बाघ और बटिक वस्त्रों, जैविक उत्पादों आदि की खरीदारी भी की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोट क्लब पर मौजूद छात्र-छात्राओं के साथ सेल्फी ली और अथितियों के साथ टेलीस्कोप से सूर्य के दर्शन किए। टेलीस्कोप की बोट क्लब पर व्यवस्था वैज्ञानिक पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से आंचलिक विज्ञान केंद्र भोपाल द्वारा की गई थी।

    विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि राजधानी की इतनी बड़ी झील में शिकारा सेवा की शुरुआत बहुत आकर्षक है। इससे प्रदेश में पर्यटन के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी तो स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध होंगे।

    देश के दिल भोपाल का विशेष दर्जा है : हरियाणा वि.स. अध्यक्ष हरविंदर

    शिकारा सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में हरियाणा के विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण भी शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भोपाल सभी भारतवासियों के दिल के करीब है, यह शहर देशभर में अलग दर्जा हासिल किए हुए है। बड़े तालाब में शिकारे चलते देखने का दृश्य अविस्मरणीय है। वरिष्ठ विधायक हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेशवासियों को कश्मीर की डल झील जैसा अनुभव भोपाल में होगा। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव, डल झील के शिकारों के माध्यम से कश्मीर को मध्यप्रदेश ले आएं हैं। मध्यप्रदेश टूरिज्म की यह पहल सराहनीय है।

    उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर शिकारों का संचालन किया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी 20 शिकारों का निर्माण प्रदूषण रहित आधुनिक तकनीक से किया गया है। इनका निर्माण ‘फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीयूरिथेन’ और उच्च गुणवत्ता वाली नॉन-रिएक्टिव सामग्री से हुआ है, जो जल के साथ किसी भी प्रकार की रासायनिक क्रिया नहीं करती। इससे बड़े तालाब की पारिस्थितिकी और जल की शुद्धता पूर्णतः सुरक्षित रहेगी। ये शिकारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्था द्वारा निर्मित किए गए हैं, जिनके द्वारा निर्मित शिकारे केरल, बंगाल और असम में भी पर्यटकों द्वारा अत्यंत पसंद किए जा रहे हैं। भोपाल का बोट क्लब इन आकर्षक शिकारों के साथ पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार है। शिकारों पर नौकायन का आनंद लेने के साथ पर्यटक बर्ड वाचिंग, हैंडीक्रॉफ्ट प्रोडक्ट, स्थानीय व्यंजन, आर्गेनिक वेजिटेबल्स और फ्रूट्स आदि भी खरीद सकेंगे।

    इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार, महापौर भोपाल श्रीमती मालती राय, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, जिलाध्यक्ष रवींद्र यति सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में पर्यटन प्रेमी उपस्थित थे।

  • मप्रः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तीन नेताओं को मानहानी मामले में कोर्ट का नोटिस

    मप्रः नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत तीन नेताओं को मानहानी मामले में कोर्ट का नोटिस


    जबलपुर।
    विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डीपी सूत्रकार की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मध्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक अजय सिंह राहुल और लखन घनघोरिया को नोटिस जारी किए हैं। यह कार्रवाई नेशनल हेल्थ मिशन के जिला प्रोग्राम (डीपीएम) विजय पांडे द्वारा दायर मानहानि केस के बाद हुई है। कोर्ट ने तीनों नेताओं को 16 जनवरी को पेश होने के आदेश दिए हैं।

    दरअसल, कांग्रेस नेताओं ने नेशनल हेल्थ मिशन के जिला प्रोग्राम मैनेजर विजय पांडे पर फर्जी अंकसूची के सहारे नौकरी पाने का आरोप लगाया था। अगस्त 2025 में इस मुद्दे पर न केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, बल्कि विधानसभा में भी हंगामा कर कांग्रेस विधायकों ने वॉक आउट किया था। विधानसभा में हंगामे के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक सलोनी सिडाना ने उन्हें पद से हटा दिया था।

    हालांकि. विभागीय जांच में पांडे पर लगाए गए आरोप झूठे पाए गए। मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल ने भी अंकसूची को सही बताया और किसी तरह की गड़बड़ी न मिलने की पुष्टि की। इसके बाद पांडे ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ मानहानि का मामला दर्ज कराया था। इसके बाद विभागीय जांच और एमपी शिक्षा बोर्ड की जांच रिपोर्ट में उनकी अंकसूची सही पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष के आरोप तथ्यहीन थे और गलत जानकारी के आधार पर सरकार को घेरने की कोशिश की गई थी। कोर्ट के नोटिस के बाद अब सभी तीन नेताओं को 16 जनवरी को एमपी-एमएलए कोर्ट में पेश होकर अपना पक्ष रखना होगा।

    इस मामले में कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने गुरुवार को कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना हमारा काम है। किसी विभाग में अगर अराजकता की स्थिति बन रही है तो उसे उठाना हमारा काम है, जनता से हमें शिकायत मिली तो हमने उसका विरोध किया अब कोई अगर मानहानि करता है तो कोर्ट के समक्ष जाकर देखेंगे।

  • पूनम के भीतर किसी और की आवाज आत्मा आने’ और अजीब हरकतों पर परिवार ने बताए डरावने किस्से

    पूनम के भीतर किसी और की आवाज आत्मा आने’ और अजीब हरकतों पर परिवार ने बताए डरावने किस्से


    हरियाणा । हरियाणा के पानीपत जिले के भावड़ गांव में एक खौ़फनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है जहां एक साधारण और शांत बहू पूनम ने चार मासूमों की हत्या की। इस दिल दहला देने वाले मामले ने न केवल उसकी परिवारिक छवि को ध्वस्त किया बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया कि क्या वह मानसिक रूप से अस्वस्थ थी या फिर उसकी यह हिंसक प्रवृत्ति कुछ और ही थी।

    पूनम जो 2023 से पहले तक एक सामान्य महिला मानी जाती थी, के व्यवहार में अचानक बदलाव आया था। उसके परिवार के सदस्य बताते हैं कि कभी-कभी पूनम का चेहरा और आचरण बिल्कुल बदल जाता था, और वह गुस्से में कहती सबका नाश कर दूंगी जैसे उसके अंदर कोई और बोल रहा हो। उसकी इस अजीब हरकत को देखकर परिवार को लगता था कि शायद वह मानसिक असंतुलन का शिकार हो रही है। हालांकि उस समय किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

    पूनम की मानसिक स्थिति के बारे में उसके परिवार के लोग अब खुलकर बयान दे रहे हैं। पूनम ने अपनी जेठानी की छह साल की बेटी विधि को जानबूझकर गर्म चाय गिराकर घायल कर दिया था और जब इस बारे में पूछताछ की गई तो उसने कहा ये बड़ी होकर बहुत खूबसूरत हो जाती इसलिए इसका चेहरा जला दिया। इसके बाद वह अपनी हरकतों को छिपाने की बजाय एक सामान्य व्यक्तित्व दिखाती थी जिससे परिवार और आसपास के लोग उसे कभी भी शक की निगाह से नहीं देख पाए।

    पूनम की पढ़ाई भी काफी अच्छी थी, उसने एमए पॉलिटिकल साइंस और B.Ed किया था। लेकिन उसकी बाहरी छवि के विपरीत वह अंदर से हिंसक और अस्वस्थ मानसिकता की हो गई थी। 2023 में उसने अपनी ननद की 11 साल की बेटी इशिका को पानी में डुबोकर मार डाला, और उसके बाद अपने बेटे शुभम को भी उसी तरह डुबोकर हत्या कर दी। पूनम ने इसे हादसा बताकर सबको गुमराह किया लेकिन किसी को यह अंदाजा नहीं था कि एक मां अपने ही बच्चे की जान ले सकती है।

    इसके बाद 2025 में पूनम ने अपनी मायके गई भतीजी जिया और फिर जेठानी की बेटी विधि की हत्या की। जिया को पूनम ने पानी से भरे टब में दबाकर मार डाला और विधि की हत्या भी उसी तरीके से की। पुलिस ने जब घटना की जांच शुरू की, तो कई चीजें संदिग्ध लगीं। विशेष रूप से, यह तथ्य कि हर बार हत्या के समय पूनम ही आसपास थी और उसकी हरकतें बहुत अजीब थीं।

    पुलिस की पूछताछ में पूनम ने कबूल किया कि उसे सुंदर बच्चों से जलन होती थी, और वह उन्हें मारकर शांति महसूस करती थी। उसने यह भी कहा कि किसी और की आत्मा उसके शरीर में सवार हो जाती थी, जिससे वह यह घिनौनी हत्या करने पर मजबूर हो जाती थी। पूनम ने पुलिस को बताया कि उसने चार हत्याएं कीं इशिका ननद की बेटी शुभम अपना बेटा जिया मायके की भतीजी और विधि जेठानी की बेटी।

    पूनम के परिवार में लोग अब भी यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि उनके बीच की शांत और समझदार बहू इतनी निर्दयी हो सकती थी। उसकी सास का कहना है कि उन्होंने हमेशा उसे बेटी की तरह प्यार किया था और अब वह खुद को दोषी महसूस कर रही हैं कि उन्होंने उसके मानसिक असंतुलन को समय रहते नहीं पहचाना। गांव के लोग भी बताते हैं कि पूनम के चेहरे पर अक्सर एक अजीब सा बदलाव आ जाता था जैसे किसी और की आत्मा उस पर सवार हो जाती थी।

    पुलिस ने पूनम की मानसिक स्थिति का मेडिकल परीक्षण कराने की योजना बनाई है लेकिन उसकी बाद हत्या के बाद का शांत और सामान्य व्यवहार एक खतरनाक मानसिक बीमारी या सायकोसिस जैसी स्थिति का संकेत देता है। इस मामले में अभी भी कई सवाल उठते हैं और जांच जारी है ताकि यह पता चल सके कि पूनम के अपराध के पीछे का असली कारण क्या था।

  • मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार

    मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार


    – मुख्यमंत्री ने की जल संसाधन विभाग की समीक्षा, कहा- प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति और केंद्र सरकार के सहयोग को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

    बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि इस दिशा में राज्य में अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।

    राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने भोपाल के इस मॉडल का प्रदर्शन करने के निर्देश भी विभाग को दिए। मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    प्रमुख बिन्दु

    – प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित।
    – प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी।
    – प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य।
    – प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।
    – राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश।
    – राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया।
    – सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।
    – इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपये होगी।
    – सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।
    – सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।

  • मप्र के दमोह में अरंडी के बीज खाने से 30 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में भर्ती

    मप्र के दमोह में अरंडी के बीज खाने से 30 बच्चे बीमार, जिला अस्पताल में भर्ती


    दमोह।
    मध्य प्रदेश के दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक के किशनगंज गांव में मंगलवार शाम स्कूल में खेलते समय कुछ बच्चों ने अरंडी के बीज खा लिए। इसके बाद घर लौटते ही बच्चों को उल्टियां शुरू हो गईं। एक के बाद एक 30 बच्चे बीमार हो गए, जिससे गांव में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों ने तुरंत सभी बच्चों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया।

    एक बच्चे की मां जानकी पटेल ने बताया कि बच्चे मूंगफली जैसी दिखने वाली बीज खाने के बाद बीमार हुए। सभी बच्चों को ऑटो और एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका उपचार जारी है। अस्पताल के चिकित्सक डॉ सुनील जैन ने बताया कि फिलहाल बच्चों की हालत स्थिर है।

    कलेक्टर के निर्देश पर छह से अधिक डॉक्टरों की टीम ने बच्चों का इलाज शुरू किया। जिला अस्पताल में डॉक्टर विक्रांत चौहान, डॉक्टर सोनू शर्मा और सिविल सर्जन डॉक्टर प्रहलाद पटेल की मौजूदगी में सभी बच्चों का उपचार किया गया। इलाज के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार बताया जा रहा है।

    घटना की जानकारी लगते ही एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी और पथरिया एसडीएम निखत चौरसिया जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने बच्चों और उनके परिजनों से स्थिति के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम को किशनगंज गांव भेजकर स्थिति का जायजा लेने के निर्देश दिए गए। एसपी श्रुत कीर्ति सोमवंशी ने निर्देश पर पुलिस गांव में मुनादी कर बीमार बच्चों को अस्पताल भेजने की अपील कर रही है।

    एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने बताया कि चंपत पिपरिया गांव में अरंडी के बीज खाने से 30 से अधिक बच्चे बीमार हुए हैं। जिनको जिला अस्पताल लाया गया है। वह अस्पताल पहुंचे हैं और परिजनों से जानकारी ली है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की एक टीम भी गांव भेजी गई है। वहीं, एसडीएम निखत चौरसिया ने बताया कि बच्चों की सेहत में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। कल स्वास्थ्य विभाग की टीम स्कूल और उसके आसपास का निरीक्षण करेगी। यदि स्कूल परिसर में अरंडी के पौधे पाए गए, तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। साथ ही परिजनों को विषैले पौधों और उनके फलों के खतरों के बारे में जानकारी दी जाएगी।

  • SIR: गणना पत्रकों का शत प्रतिशत डिजिटलाइजेशन करने वाला मप्र का चौथा जिला बना मंडला

    SIR: गणना पत्रकों का शत प्रतिशत डिजिटलाइजेशन करने वाला मप्र का चौथा जिला बना मंडला

    भोपाल। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक संचालित मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत मंडला जिले ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए शत प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के मामले में प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त किया है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सोमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले में चल रहे पुनरीक्षण कार्य को विशेष प्राथमिकता दी गई। यह उपलब्धि उनके निर्देशन में टीम की तकनीकी दक्षता, बेहतर समन्वय, समयबद्ध कार्यप्रणाली और निरंतर प्रगति समीक्षा का प्रत्यक्ष परिणाम है।

    मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में मंडला जिले ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली का परिचय देते हुए प्रदेश का पहला आदिवासी जिला बनने का गौरव प्राप्त किया है, जिसने इस कार्य में शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। शनिवार की शाम 6 बजे तक जारी रिपोर्ट के अनुसार, जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों—105 बिछिया, 106 निवास और 107 मंडला ने गणना पत्रकों के डिजिटलाइजेशन कार्य में 100 फीसदी लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।

    कलेक्टर मिश्रा ने बताया कि घने वन क्षेत्रों, दुर्गम भौगोलिक स्थिति और सीमित नेटवर्क सुविधाओं वाला जिला है, वहाँ यह सफलता कोई सामान्य उपलब्धि नहीं है। नेटवर्क समस्या, कठिन भू-भाग, दूरदराज़ के गांव और लगातार फील्ड में कार्यरत टीमों के सामने अनेक बाधाएँ थीं, लेकिन इसके बावजूद जिला प्रशासन की टीम ने दिन-रात मेहनत कर यह मुकाम हासिल किया।टीम ने अदम्य जज़्बे के साथ क्षेत्रीय कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए काम किया।यहाँ तक की रात के समय में भी ऑनलाइन डेटा फीडिंग और दस्तावेज़ अपलोड का कार्य जारी रहा, जिससे जिले ने डिजिटाइजेशन कर शत प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की।

    एसआईआर कार्य में मिली इस शानदार सफलता पर कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी सोमेश मिश्रा ने सभी ईआरओ, एईआरओ, बीएलओ, सुपरवाइजर सहित इस कार्य में जुटे सभी कर्मचारियों और टीमों को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।जिले के इस सामूहिक प्रयास ने यह सिद्ध कर दिया है कि बेहतर नेतृत्व, समर्पित टीम और समयबद्ध कार्ययोजना से किसी भी लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकता है।

  • बिहार: CM नीतीश आज 10 लाख महिलाओं के खाते में भेजेंगे 10-10 हजार रुपये

    बिहार: CM नीतीश आज 10 लाख महिलाओं के खाते में भेजेंगे 10-10 हजार रुपये


    पटना।
    बिहार (Bihar) की 10 लाख महिलाओं (10 lakh Women) के खाते में शुक्रवार को 10-10 हजार रुपये (10-10 thousand rupees) की राशि भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना (Chief Minister Mahila Rojgar Yojana) के तहत जीविका दीदियों के बैंक खाते में यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी। चयनित महिलाओं में 9.50 लाख ग्रामीण क्षेत्र में जबकि 50 हजार शहरी क्षेत्र की महिलाएं शामिल हैं। ग्रामीण विकास विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है।

    बिहार सरकार 14 दिसंबर तक सभी पात्र महिलाओं को रोजगार के लिए 10-10 हजार रुपए की राशि दे देगी। अब तक 1.40 करोड़ महिलाओं के खाते में यह राशि भेजी जा चुकी है। बता दें कि नीतीश सरकार यह योजना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लाई थी। इसके तहत महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए 10-10 हजार रुपये की मदद की जा रही है। 6 महीने बाद समीक्षा कर इस पैसे रोजगार शुरू करने वाली महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की मदद और दी जाएगी।

    इस योजना का लाभ लेने के लिए सरकार द्वारा जीविका समूह से जुड़ने की शर्त रखी है। बताया जा रहा है कि पूर्व से जीविका समूह से जुड़ीं महिलाओं को पैसा भेजा जा चुका है। अब उन लाभार्थियों को राशि भेजी जानी है, जो यह योजना शुरू होने के बाद जीविका दीदी बनी हैं। साथ ही इस योजना के लिए ऑनलाइन मोड में आवेदन करने वालीं लगभग 13 लाख महिलाओं के खाते में भी पैसा आना बाकी है। उनके आवेदन की जांच की जा रही है। जल्द विभाग का कहना है कि जल्द ही उन्हें भी पैसा भेज दिया जाएगा। सरकार ने 14 दिसंबर से पहले सभी लाभार्थियों को 10-10 हजार खाते में भेजने का लक्ष्य रखा है।

    मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के लिए बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं से ऑफलाइन आवेदन मांगे गए थे। जबकि शहरी क्षेत्र की महिलाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा रखी।

  • SIR पर बवाल: बंगाल में BLOs का चुनाव आयोग के सामने प्रदर्शन, ममता बनर्जी ने किया समर्थन

    SIR पर बवाल: बंगाल में BLOs का चुनाव आयोग के सामने प्रदर्शन, ममता बनर्जी ने किया समर्थन


    नई दिल्ली/कोलकाता।पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक घमासान और तनाव चरम पर पहुंच गया है। सोमवार को बूथ स्तरीय अधिकारियों BLO ने कोलकाता के मुख्य निर्वाचन अधिकारी CEO कार्यालय के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया, जो देर रात तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़ने और दफ्तर में घुसने की कोशिश की, जिसके दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई भी हुई।

    पुलिस से झड़प और दफ्तर में घुसने की कोशिश

    बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्य उत्तरी कोलकाता के कॉलेज स्क्वायर से जुलूस निकालते हुए CEO कार्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय के मुख्य द्वार को घेर लिया और प्रतीकात्मक रूप से ताले व बेड़ियां लगाईं। पुलिस ने बैरिकेड लगाकर दफ्तर की सुरक्षा की, लेकिन प्रदर्शनकारी BLO ने अवरोधक तोड़ने की कोशिश की। इस दौरान तीखी झड़प हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण बन गया।

    प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निर्वाचन आयोग BLO पर अत्यधिक और अमानवीय कार्य दबाव डाल रहा है। समिति ने बताया कि तनाव के कारण कई BLO बीमार पड़ रहे हैं और दो ने तो आत्महत्या तक की। मुर्शिदाबाद से आए एक प्रदर्शनकारी ने कहा, पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया, जो आमतौर पर दो साल में पूरी होती है, अब केवल दो महीनों में पूरी कराई जा रही है। अगर सीओ ने हमारी बात नहीं सुनी, तो हम पूरी रात विरोध करेंगे और कल फिर आएंगे।

    ममता बनर्जी ने दिया BLO का समर्थन

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस संवेदनशील मामले पर सीधे हस्तक्षेप किया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर SIR प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की। ममता ने इसे अनियोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक बताते हुए कहा कि प्रशिक्षण की कमियों, दस्तावेजीकरण की अस्पष्टता और मतदाताओं तक पहुंचने में कठिनाई ने BLO पर दबाव बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री ने चेताया कि यदि BLO को उचित समय और संसाधन नहीं मिले तो मतदाता सूची का पुनरीक्षण विवाद और तनाव का कारण बन सकता है।

    BJP ने लगाया TMC के गुंडों का आरोप
    वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस विरोध प्रदर्शन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उत्तर कोलकाता ज़िला अध्यक्ष तमोघना घोष ने कहा कि जो लोग सीईओ कार्यालय में घुसने की कोशिश कर रहे थे, वे वास्तविक BLO नहीं थे बल्कि टीएमसी के गुंडे थे। उनका दावा है कि ये लोग आधी रात को कार्यालय में छेड़छाड़ और भय फैलाने आए थे।

    SIR प्रक्रिया देशभर में जारी

    सचेत रहना यह आवश्यक है कि यह SIR कवायद केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में घर-घर जाकर मतदाता सूची की जांच और अद्यतन का काम 4 नवंबर से शुरू हुआ है और 4 दिसंबर तक चलेगा। अंतिम सूची 7 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।BLO अधिकार समिति ने चेताया है कि यदि कार्य की समय-सीमा नहीं बढ़ाई गई या सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो वे निरंतर विरोध और प्रदर्शन कार्यक्रम शुरू करने के लिए बाध्य होंगे।
    इस प्रदर्शन ने SIR प्रक्रिया की संवेदनशीलता को उजागर किया है और दिखा दिया कि BLO की मुश्किलें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि जीवन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी हैं। अब सबकी निगाहें निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार पर टिकी हैं कि वे इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं।