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  • SIR: बंगाल में 37 लाख अपील, 5 माह में निपटी मात्र 1.26 लाख, इस स्पीड से सभी के निपटारे में लगेंगे 12 साल

    SIR: बंगाल में 37 लाख अपील, 5 माह में निपटी मात्र 1.26 लाख, इस स्पीड से सभी के निपटारे में लगेंगे 12 साल


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में गहन पुनरीक्षण अभियान (Intensive Review Campaign- SIR) में नाम कटने के बाद वोटर लिस्ट में दोबारा नाम शामिल करने वाली इतनी अपील आ गई हैं कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा बनाया गया ट्राइबन्यूनल (Tribunal) अगले 12 साल में भी इनका निपटारा नहीं कर पाएगा। चुनाव आयोग ने ही सुप्रीम कोर्ट में जवाब देते हुए बताया है कि पिछले पांच महीने में 1 लाख 26 हजार मामलों का निपटारा हो पाया है। वहीं 37 लाख से ज्यादा अपील ट्राइबन्यूल में आई हैं। ऐसे में अगर यही स्पीड रही तो सारी अपील निपटाने में 12 साल का समय लग जाएगा।


    एक महीने में कितने केस सुलझाए जा रहे

    अगर आंकड़ों पर और ट्राइब्यूनल के काम करने की स्पीड पर कौर करें तो एक महीने में लगभग 25 हजार 238 मामलों का निपटारा हो रहा है। इसमें शनिवार और रविवार को छुट्टी के तौर पर नहीं गिना गया है। वहीं 16 सितंबर तक कुल 37,05,235 केस पेंडिंग हैं। ऐसे में अगर ट्राइबन्यूल सातों दिन लगातार काम करता है और कोई छुट्टी नहीं करता है तो कम से कम 146 महीने लग जाएंगे।

    ऐसे में चुनवा आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर और कर्मचारियों की संख्या इतने सारे केस निपटाने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में ट्राइबन्यूनल की संख्या बढ़ाकर 24 से 42 की जा सकीत है। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों को अगर घर से काम करने की भी सुविधा दी जाए तो काम में तेजी आएगी।

    टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने अपील निपटाने को लेकर एक याचिका फाइल की थी। इसपर जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने बताया कि अगर न्यायिक अधिकारियों को घर से भी काम करने की छूट मिलती है तो केस निपटाने में आसानी होगी।


    कांग्रेस का चुनाव आयोग पर निशाना

    कांग्रेस ने रविवार को निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि एसआईआर वास्तव में मतदाताओं के नाम हटाने की एक बड़े पैमाने की ”शाह इंस्टीगेटेड रिमूवल” (शाह के इशारे पर मतदाताओं के नाम हटाने की) प्रक्रिया तथा ”संविधान पर हमला” है। कांग्रेस ने कहा कि इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर हटाए गए नामों में सबसे अधिक संख्या समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से सबसे कमजोर तथा वंचित वर्गों से आने वाले मतदाताओं की है।

  • बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज

    बंगाल: CID का दावा- जमीन घोटाले के 7 करोड़ TMC के खाते में आए…. अभिषेक बनर्जी के PA ने उगले राज


    कोलकाता।
    ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल (West Bengal) में हुए साल्बोनी जमीन घोटाले (Salboni land scam) में अब अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) और तृणमूल यूथ कांग्रेस का नाम भी शामिल हो गया है। इस मामले में आरोपियों से पूछताछ कर रही सीआईडी ने कोर्ट को बताया था कि जमीन घोटाले से मिली रकम तृणमूल के खातों में जमा की गई थी। एजेंसी का दावा है कि डायमंड हार्बर से सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के कहने पर ही ये पैसे टीएमसी के खाते में डाले गए। सीआईडी का दावा है कि अभिषेक के पर्सनल असिस्टेंट सुमित रॉय ने पूछताछ के दौरान यह जानकारी दी है।

    आपको बता दें कि इस मामले में सुमित को तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा और कई अन्य लोगों के साथ पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमित को शनिवार को मिदनापुर कोर्ट में पेश किया गया।


    बेच दी गई सरकारी जमीन

    सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी की ओर से कोर्ट में जमा किए गए दस्तावेजों से पता चला कि पूछताछ के दौरान सुमित ने बताया कि अभिषेक के कहने पर सांसद के ट्रेजरर टी. घोष नाम के एक व्यक्ति ने उसे तृणमूल कांग्रेस पार्टी फंड में जमा करने के लिए पैसे दिए थे। सुमित ने दावा किया कि उसने वह पैसा बैंक में जमा कर दिया था। उसने कहा कि उसे जमीन घोटाले से कोई पैसा नहीं मिला। आपको बता दें कि इस मामले में फर्जी कागजात का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन बेची गई थी।

    इस महीने की शुरुआत में, तृणमूल के पूर्व MLA सुजय हाजरा के खिलाफ दायर चार्जशीट में CID ने एक पब्लिक सेक्टर बैंक अकाउंट नंबर का जिक्र किया और कोर्ट को बताया कि सुमित ने 2018 और 2021 के बीच उस खाते में किश्तों में लगभग 7 करोड़ जमा किए थे। CID ने चार्जशीट के साथ इससे जुड़े जरूरी दस्तावेज भी कोर्ट में जमा किए। जांच में पता चला कि कोलकाता की हरीश मुखर्जी रोड ब्रांच में मौजूद वह खाता पश्चिम बंगाल तृणमूल यूथ कांग्रेस के नाम पर रजिस्टर्ड था। सुमित ने उस खाते में इतनी बड़ी रकम क्यों जमा की? शनिवार को कोर्ट में इस बारे में पूछे जाने पर सुमित ने दावा किया कि उसने सांसद अभिषेक बनर्जी के कहने पर पार्टी फंड में पैसे जमा किए थे।


    अभिषेक बनर्जी से भी हो सकती है पूछताछ

    CID अधिकारियों का दावा है कि साल्बोनी में जमीन का फ्रॉड 2018 और 2021 के बीच हुआ था। चार्जशीट में CID ने अभिषेक के बॉडीगार्ड और सुजय के ड्राइवर के बयानों के आधार पर कहा है कि इन गवाहों ने सुजय और सुमित के बीच पैसों के लेन-देन को देखा था। CID का कहना है कि सुमित का अपना कोई ऑफिस नहीं है। वह अभिषेक बनर्जी के दफ्तर में ही रहता था। सुमित ने अपने बयान में सात करोड़ रुपये के लेन-देन के लिए अभिषेक बनर्जी को ही जिम्मेदार ठहराया है। CID अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर उसका बयान सही साबित होता है तो पैसे के स्रोत का पता लगाने के लिए अभिषेक बनर्जी से भी इस मामले में पूछताछ की जा सकती है।

  • मणिपुर में उग्रवादियों की गतिविधियों पर एजेंसियों की कड़ी नजर…. हो सकती है बड़ी कार्रवाई

    मणिपुर में उग्रवादियों की गतिविधियों पर एजेंसियों की कड़ी नजर…. हो सकती है बड़ी कार्रवाई


    इम्फाल।
    मणिपुर (Manipur) में हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के बीच उग्रवादी संगठनों (Militant Organizations) की गतिविधियां लगातार केंद्रीय एजेंसियों की निगरानी के दायरे में हैं। सुरक्षा एवं प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, विभिन्न उग्रवादी समूहों व उनके कैडरों की गतिविधियों को लेकर केंद्रीय एजेंसियां (Central agencies) स्थानीय खुफिया तंत्र के साथ लगातार सूचनाएं जुटा रही हैं। इसके आधार पर संवेदनशील और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों के अभियान तेज किए जा सकते हैं।

    अफसरों के मुताबिक, एनएससीएन (आईएम) समेत अन्य उग्रवादी संगठनों से जुड़े कैडरों की भूमिका को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के पास लगातार सूचनाएं पहुंच रही हैं। जमीनी स्तर पर तैनात सुरक्षा बलों के कमांडरों को हिंसक समूहों के खिलाफ पहले की तुलना में अधिक आक्रामक रणनीति अपनाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। पहले सुरक्षा बलों का जोर मुख्य रूप से निवारक कार्रवाई और क्षेत्र में तनाव को नियंत्रित करने पर रहा था, पर मौजूदा परिस्थितियों में रणनीति में बदलाव किया जा रहा है।


    कोबरा कमांडो भी तैनात

    अभियान को मजबूत करने के लिए कोबरा कमांडो बल के जवानों को भी लगाया गया है। इनकी तैनाती का उद्देश्य संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई को मजबूत करना तथा उग्रवादी नेटवर्क की गतिविधियों पर अंकुश लगाना है। केंद्रीय और स्थानीय खुफिया एजेंसियों से उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों, संभावित ठिकानों और हिंसा में कथित भूमिका को लेकर अधिक से अधिक सूचनाएं जुटाने को कहा गया है। इस का विश्लेषण कर यह तय किया जा रहा है कि किन इलाकों में लक्षित अभियान चलाने की जरूरत है।


    कुकी-नगा तनाव की आशंका

    अधिकारियों का कहना है कि मणिपुर की सुरक्षा स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लंबे समय से जारी कुकी-मैतेई संघर्ष के बीच अब कुकी-नगा तनाव की आशंका भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रही है। विभिन्न संगठनों से जुड़े कुछ कैडरों की हिंसा और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों में कथित संलिप्तता की जानकारी सामने आई है।


    सीमावर्ती इलाकों में अभियान तेज किए गए

    हाल के दिनों में इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, बिष्णुपुर, थौबल और काकचिंग जिलों के संवेदनशील एवं सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा अभियान तेज किए गए हैं। अभियान के दौरान अलग-अलग इलाकों से हथियार, विस्फोटक बरामद किए जाने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। अधिकारियों के मुताबिक, एनएससीएन (आईएम) से जुड़े लोग पकड़ में आए हैं।

  • Rajasthan : निकाय चुनावों में BJP का परचम…. 41% वार्ड जीतकर मजबूत की स्थिति, कांग्रेस 35% पर सिमटी

    Rajasthan : निकाय चुनावों में BJP का परचम…. 41% वार्ड जीतकर मजबूत की स्थिति, कांग्रेस 35% पर सिमटी


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) के नगर निकाय चुनावों (Municipal body elections) में बीजेपी (BJP) ने 41% वार्ड जीतकर राज्य में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है, जबकि कांग्रेस (Congress) 35% वार्डों पर सिमट गई है. BJP के लिए ये पिछले निकाय चुनावों के मुकाबले 5% की बढ़त है, जबकि कांग्रेस के हिस्से में लगभग 5% की गिरावट आई है. हालांकि, परिसीमन के कारण इस बार सीटों की तुलना करना थोड़ा मुश्किल है, क्योंकि परिसीमन (वार्डों की सीमा तय करने) की प्रक्रिया के कारण राजस्थान में नगर निकायों की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है।


    309 निकाय में हुआ चुनाव

    राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव तीन स्तरों- नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका/नगर पंचायत पर आयोजित किए गए. नगर निगम बड़े शहरों का संचालन करते हैं, जबकि परिषद और पालिकाएं कस्बों का प्रशासन देखती हैं. इस चुनाव में 40 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा शामिल था. 14 सितंबर की शाम 7 बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, 10,244 में से 10 वार्डों के नतीजे आने बाकी थे. बीजेपी ने कांग्रेस पर 566 वार्डों की बढ़त हासिल की, जबकि निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीत लिए हैं।

    परिसीमन के बाद जुड़े 2,770 नए वार्ड
    साल 2019 और 2021 के बीच चार चरणों में हुए पिछले निकाय चुनावों की तुलना में इस बार चुनावी नक्शा काफी बड़ा था. परिसीमन प्रक्रिया की वजह से राज्य में 2,770 नए वार्ड जुड़े, जिससे कुल वार्डों में 37.1% की भारी वृद्धि हुई. पिछले चुनाव चक्र में कुल लगभग 7,474 वार्ड थे. जिनकी संख्या अब लगभग 10,244 हो गई है.


    BJP की 56.8% की जबरदस्त छलांग

    पिछले निकाय चुनाव में कांग्रेस के पास लगभग 3,042 वार्ड थे, बीजेपी के पास 2,666 और निर्दलीयों के पास 1,672 वार्ड थे. ताजा नतीजों में बीजेपी की सीटों की संख्या 2,666 से बढ़कर 4,179 हो गई, जो 56.8% की वृद्धि दिखाता है. वहीं, कांग्रेस की सीटें 3,042 से बढ़कर 3,613 हुईं, जिसमें केवल 18.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. उधर, निर्दलीयों की संख्या भी 1,672 से बढ़कर 2,273 हो गई, जो 35.9% की वृद्धि है।


    RLP और माकपा को भी मिला फायदा

    ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन चुनावों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड (40.8%) जीतकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने 3,613 वार्ड (35.3%) जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया है. जबकि AAP, CPI (M) और हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी जैसे कई दलों ने भी अच्छी बढ़त हासिल की है।

    इन निकाय चुनाव में क्षेत्रीय दलों ने भी अपने आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार किया है. नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) 14 से बढ़कर 63 वार्डों पर पहुंच गई, जिसमें 350% का भारी उछाल आया. आरएलपी का प्रभाव मुख्य रूप से जाट बहुल पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में है. उधर, माकपा (CPI-M) 8 से बढ़कर 38 वार्डों पर पहुंची, जिसमें 375% की बढ़त रही. इसके विपरीत बहुजन समाज पार्टी (BSP) 24 से घटकर 19 वार्डों पर आ गई जो 20.8% की गिरावट है।


    कांग्रेस को 5.4% का नुकसान

    कुल वार्डों के अनुपात की बात करें तो तस्वीर बिल्कुल साफ है कि पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास कुल वार्डों की 40.7% हिस्सेदारी थी जो अब गिरकर 35.3% रह गई है. यानी कांग्रेस को करीब 5.4 प्रतिशत अंकों का नुकसान हुआ है। वहीं, बीजेपी की हिस्सेदारी 35.7% से बढ़कर 40.8% हो गई है, यानी उसे 5.1 प्रतिशत लाभ मिला है. निर्दलीयों की हिस्सेदारी 22.4% से मामूली गिरकर 22.2% रही है।

    ये अंतर इसलिए बेहद अहम है, क्योंकि बीजेपी की बढ़त को सिर्फ नए वार्ड बनने से नहीं जोड़ा जा सकता. राज्य में कुल वार्डों की संख्या में 37.1% का इजाफा हुआ, लेकिन बीजेपी ने 56.8% की दर से सीटें बढ़ाईं. दूसरी तरफ, कांग्रेस की सीटों में बढ़ोतरी की दर सिर्फ 18.7% रही जो वार्ड विस्तार की दर से आधी थी. इसी कारण सीटों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद कुल हिस्सेदारी में कांग्रेस काफी पीछे छूट गई।

    वहीं, दिसंबर 2023 के विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सरकार के लिए ये नतीजा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. भारत के अधिकांश राज्यों की तरह राजस्थान में भी सत्ताधारी दल को प्रशासनिक मशीनरी, संगठन और राज्य स्तरीय विकास के प्रचार का स्वाभाविक लाभ मिलता है. निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवार चयन, आरक्षण, गुटबाजी और निर्दलीयों के प्रभाव से तय होते हैं।


    स्विंग स्टेट रहा है राजस्थान

    विधानसभा स्तर पर राजस्थान पारंपरिक रूप से एक ‘स्विंग स्टेट’ रहा है. पिछले निकाय चुनावों के वक्त राज्य में अशोक गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. इस बार स्थिति पूरी तरह उलट गई और सत्ता में मौजूद बीजेपी सबसे आगे निकल गई. इसके बावजूद 3,613 वार्ड जीतकर कांग्रेस ने दिखाया है कि उसका जमीनी संगठन अभी-भी राज्य में पूरी तरह बरकरार है।

    बता दें कि शहरी इलाकों को पारंपरिक रूप से बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. केंद्र सरकार के यूजीसी इक्विटी विनियमों के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की सक्रियता के चलते ये चुनाव बीजेपी के लिए एक कठिन परीक्षा माना जा रहा था. इन तमाम राजनीतिक गतिविधियों के बावजूद बीजेपी ने अपने शहरी आधार को बचाते हुए अपनी स्थिति को और ज्यादा मजबूत किया है।

  • बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….

    बिहार में UCC को लेकर एनडीए के घटक दलों का अलग-अलग रुख….


    पटना।
    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister Amit Shah) के समान आचार संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड- Uniform Civil Code- UCC) को लेकर की गई घोषणा के बाद बिहार (Bihar) में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (National Democratic Alliance) के दलों का अलग-अलग रुख सामने आ रहा है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) साथ देने के मूड में है तो उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने ड्राफ्ट देखने के बाद फैसले की बात कही है। चिराग पासवान ने भी ड्राफ्ट देखने पर ही बात रखने का एलान किया है। लेकिन, सबसे बड़ा और कड़ा रुख जनता दल यूनाईटेड का है। जदयू ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के पुराने स्टैंड का हवाला देते हुए यूसीसी के खिलाफ बयान दिया है।


    जदयू विधायक बोले- लागू नहीं होने देंगे

    जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा या राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद का अब तक सीधा बयान नहीं आया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने सिर्फ इतना कहा है कि इसपर कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात करेंगे। लेकिन, जनता दल यूनाईटेड के विधायक और पूर्व मंत्री श्याम रजक ने साफ शब्दाें में एलान किया कि इसे बिहार में लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में एनडीए की सरकार है और जदयू के मुखिया नीतीश कुमार ने शुरुआत से ही यूसीसी का विरोध किया है। इसलिए, एनडीए सरकार में जदयू इसे लागू नहीं होने देगा।


    चिराग पासवान को देखना है ड्राफ्ट, तब बोलेंगे

    चिराग पासवान ने केंद्र की अपनी एनडीए सरकार और गृह मंत्री अमित शाह पर आंख बंद कर भरोसा नहीं है। एनडीए शासित 21 राज्यों में यूसीसी लागू करने के अमित शाह के बयान के बाद चिराग ने कहा कि वह ड्राफ्ट देखे बगैर कुछ नहीं कह सकते। चिराग ने कहा कि उनकी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) समानता और विविधता दोनों के प्रति प्रतिबद्ध है। प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा पहले सार्वजनिक किया जाए, उसके सभी हितधारकों पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन किया जाए और व्यापक विमर्श के बाद ही पार्टी अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेगी।


    उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी के अंदर विमर्श करना है

    केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके और इस समय राज्यसभा के सांसद उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अंदर यूसीसी पर विचार-विमर्श करना है। उन्होंने अमित शाह के बयान के बाद कहा कि क्या प्रस्ताव आता है, वह देखकर ही निर्णय होगा। मतलब, वह सीधे तौर पर अमित शाह के फैसले पर मुहर लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ड्राफ्ट आने के बाद वह पार्टी के अंदर उसपर विमर्श करेंगे, फिर निर्णय लेंगे।


    मांझी की पार्टी का रुख साफ, हम शाह के साथ

    केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का रुख इसपर सामने नहीं आया है, लेकिन उनके बेटे, बिहार सरकार के मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष डॉ. संतोष सुमन ने कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान दिया है तो वह हितकारी ही होगा। उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू करने में हर्ज तो नहीं दिखता है, बस घटक दलों से इसपर विमर्श कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता देश के लिए दूरगामी तौर पर बेहतर ही होगा।


    गिरिराज सिंह के बयान से तल्खी, बाकी मौन स्वीकृत

    बिहार में यूसीसी लागू हो या नहीं, इसपर प्रदेश के पार्टी नेता चुप्पी साधे हैं। मौन स्वीकृति की बड़ी वजह यह है कि एनडीए के घटक दलों से तकरार न हो। चूंकि पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और देश के मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह का बयान है तो इसपर सभी की स्वीकृति स्वाभाविक है। इस बीच, हंगामा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुख को लेकर है। एनडीए के घटक दलों के अलग-अलग सुर के बीच गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस ने तुष्टीकरण की नीति के तहत इसे आजादी के समय लागू नहीं होने दिया। गिरिराज ने कहा कि यूसीसी को लागू होने से रोक कर कांग्रेस ने देश को गर्त में धकेल दिया। गिरिराज सिंह के इस बयान के बाद यूसीसी के खिलाफ बोलने वाले एनडीए के दल असहज महसूस कर रहे हैं। इसलिए, ड्राफ्ट देखने की बात पर जोर दिया जा रहा है।

  • पश्चिम बंगाल में भूकंप…. अलीपुरद्वार में सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके, 3.0 रही तीव्रता

    पश्चिम बंगाल में भूकंप…. अलीपुरद्वार में सुबह-सुबह महसूस किए गए झटके, 3.0 रही तीव्रता


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के अलीपुरद्वार (Alipurduar) में आज सुबह हल्के भूकंप (Earthquake) के झटके महसूस किए गए. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Center for Seismology-NCS) के मुताबिक यह भूकंप सुबह 6 बजकर 56 मिनट पर आया. भूकंप की तीव्रता (Earthquake intensity) रिक्टर पैमाने पर 3.0 मापी गई, जिसे मामूली श्रेणी में रखा जाता है. फिलहाल किसी तरह के जान माल के नुकसान की खबर नहीं है।

    नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने अपने आधिकारिक हैंडल से इस भूकंप की जानकारी साझा की. एजेंसी के अनुसार भूकंप का केंद्र अक्षांश 26.445 उत्तर और देशांतर 89.560 पूर्व पर स्थित था. भूकंप की गहराई जमीन से करीब 9 किलोमीटर नीचे बताई गई है. भूकंप का केंद्र अलीपुरद्वार जिले में ही रहा, जो पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित है और भूटान तथा असम की सीमा के करीब पड़ता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक 3.0 तीव्रता का भूकंप हल्का माना जाता है और इससे आमतौर पर किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती. ऐसे झटके अक्सर सिर्फ हल्की कंपन के रूप में महसूस होते हैं और कई बार लोगों को इनका एहसास भी नहीं होता. कम गहराई वाले भूकंप जमीन के करीब होने की वजह से थोड़ा ज्यादा महसूस हो सकते हैं, भले ही उनकी तीव्रता कम हो. अलीपुरद्वार और आसपास का इलाका हिमालय की तलहटी में आता है, जहां भूगर्भीय हलचल की वजह से समय समय पर हल्के भूकंप आते रहते हैं।

    फिलहाल प्रशासन की तरफ से किसी नुकसान या एहतियाती कदम को लेकर कोई अलग बयान नहीं आया है. मौसम और भूकंप एजेंसियां इलाके की निगरानी करती रहती हैं ताकि किसी भी आगे की गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

  • तमिलनाडु में CM विजय के खिलाफ एकजुट हो रहे सारे विपक्षी दल…. सरकार गिराने की हो रही तैयारी!

    तमिलनाडु में CM विजय के खिलाफ एकजुट हो रहे सारे विपक्षी दल…. सरकार गिराने की हो रही तैयारी!


    चेन्नई। त
    मिलनाडु (Tamil Nadu) में मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय (Chief Minister C. Joseph Vijay) के विरोधी एकजुट होने की तैयारी कर रहे हैं। AIADMK यानी अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम ने एमके स्टालिन (M.K. Stalin) की डीएमके (DMK) को साथ आने का चैलेंज दे दिया है। साथ ही कहा है कि विजय की तमिलागा वेत्री कझगम (TVK) के खिलाफ नई पार्टियां भी साथ आ सकती हैं। हालांकि, इसपर डीएमके ने अब तक कोई रिप्लाई नहीं किया है।

    मंगलवार को पूर्व सीएम एडापड्डी के पलनीस्वामी से जब पूछा गया कि क्या टीवीके के खिलाफ गठबंधन तैयार हो रहा है या नहीं। इसपर उन्होंने कहा, ‘हां। हम भी टीवीके खिलाफ हैं। अगर कोई दूसरी पार्टी शामिल होना चाहती है, तो हम उनका स्वागत करेंगे। हमारा गठबंधन जैसा है, वैसा रहेगा। अगर दूसरी पार्टियां आना चाहती हैं, तो वो शामिल हो सकती हैं।’


    DMK को दिया चैलेंज

    इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के प्रमुख विपक्षी दल डीएमके को भी चैलेंज दे दिया है। उन्होंने कहा, ‘अगर नई पार्टियां हमारे साथ आना चाहती हैं, तो आ सकती हैं। क्या डीएमके… क्या डीएमके आएगी। क्या आप यह सवाल पूछ सकते हैं।’


    6 विधायक टूटे

    खास बात है कि तमिलनाडु विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अन्ना द्रमुक के 6 विधायक टूट गए थे। सभी विजय के साथ चले गए थे और बचे हुए भी दो गुटों में बंट गए थे। इधर, डीमके नेता आरएस भारती जून में दोनों दलों के साथ आने से इनकार कर चुके हैं, लेकिन कहा था कि अगर DMK और AIADMK भविष्य में साथ आते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।


    DMK चेता चुकी

    अगस्त में स्टालिन ने कहा था कि नकी पार्टी राजनीतिक वापसी करने में सक्षम है और वह पूरे राज्य में मतदाताओं का समर्थन फिर से हासिल करने पर ध्यान लगाएगी। स्टालिन ने यहां द्रमुक मुख्यालय अन्ना अरिवलयम में पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक को संबोधित करते हुए कहा, ‘वह (विजय) विधानसभा को फिल्म का सेट समझते हैं और डायलॉग बोलते हैं।’

    स्टालिन ने कहा कि द्रमुक की नींव तत्काल राजनीतिक जीत या हार से कहीं आगे की है। उन्होंने कहा, ‘हम राजनीति में इसलिए नहीं आए क्योंकि हम ऊब गए थे। हम लड़ने के लिए आए थे। हमारे आंदोलन का जीवन केवल सफलता या विफलता तक सीमित नहीं है। चुनाव हारने के बाद अगले चुनाव तक सोए रहना अन्य दलों की आदत है। विपक्ष में रहते हुए भी हमारी पार्टी लोगों के लिए बिना सुस्ती के असाधारण रूप से काम करने के लिए अपने प्रतिद्वंद्वियों के बीच जानी जाती है।’

    उन्होंने कहा, ‘हम वापसी करने में माहिर हैं और हम इसे अच्छी तरह करेंगे।’ उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर पर जनसंपर्क मजबूत करने की अपील की।


    TVK की बैठक पर लेफ्ट दूर

    टीवीके बुधवार को चेन्नई में सहयोगी दलों के साथ दूसरी समन्वय बैठक करेगी, लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और भाकपा ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। टीवीके मुख्यालय में होने वाली बैठक का उद्देश्य गठबंधन को औपचारिक रूप देना, साझा न्यूनतम कार्यक्रम तैयार करना, संचालन समिति गठित करना और गठबंधन का आधिकारिक नाम तय करना है। कांग्रेस, वीसीके, आईयूएमएल और एमडीएमके के बैठक में शामिल होने की संभावना है। वहीं वाम दलों ने बैठक से दूरी बनाई हैं।


    मतभेदों के बीच मीटिंग

    इस बीच, 2029 के लोकसभा चुनाव में विजय को प्रधानमंत्री पद का संभावित चेहरा बनाए जाने की टीवीके नेताओं की मांग को लेकर कांग्रेस के साथ भी मतभेद सामने आए हैं। कांग्रेस ने राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का प्रमुख चेहरा बताया है। हालांकि, टीवीके ने ‘विजय फॉर पीएम’ की मांग को व्यक्तिगत राय करार दिया है।

  • मॉनसून ने बढ़ाई मुश्किलें…. केदारनाथ मार्ग पर पत्थर गिरने से 1 महिला की मौत, सैकड़ों यात्री फंसे

    मॉनसून ने बढ़ाई मुश्किलें…. केदारनाथ मार्ग पर पत्थर गिरने से 1 महिला की मौत, सैकड़ों यात्री फंसे


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मॉनसून (Monsoon) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को भारी बारिश (Heavy rain) के चलते केदारनाथ (Kedarnath) पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने ( Landslide) से महिला यात्री की मौत हो गई। खतरे को देखते हुए पुलिस ने केदारनाथ यात्रा को दिनभर रोके रखा। सैकड़ों यात्री अलग-अलग जगहों पर रोके जाने फंस गए। जल्द यात्रियों की आवाजाही शुरू कराई जाएगी।

    रविवार को पुलिस ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड से 11 बजे बाद यात्रियों की आवाजाही रोकी। हालांकि इससे पहले चार हजार से अधिक यात्री केदारनाथ के लिए रवाना हो गए थे। लगभग 2500 यात्री केदारनाथ से वापस लौट गए थे। पैदल मार्ग पर जो भी यात्री आवाजाही कर रहे थे उन्हें पुलिस, एसडीआरएफ, वाईएमएफ और डीडीआरएफ के जवानों की मौजूदगी में सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचा दिया गया। दिनभर बारिश के चलते यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें सोनप्रयाग से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। कोतवाली प्रभारी सोनप्रयाग सुरेश चन्द्र बलूनी ने बताया कि चीरबासा और अन्य स्थानों में पत्थर गिरते रहे।


    पत्थर की चपेट में आने से महिला यात्री की मौत

    गौरीकुंड से केदारनाथ जा रहे महाराष्ट्र के यात्री जैसे ही चीरबासा के पास पहुंचे तो पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरे और इसकी चपेट में आने से एक महिला यात्री की मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के अनुसार 60 वर्षीय मंगल अपाराव सिंधे पत्नी अपाराव सिंधे निवासी निम गांव जिला सोहलपुर महाराष्ट्र की मौत हो गई।


    आज पौड़ी समेत छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। सोमवार को छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, यूएसनगर और चमोली में कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार हैं। बाकी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती हैं। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने आमजन से बारिश के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।


    बदरीनाथ-हेमकुंड में बर्फबारी

    गढ़वाल में हो रही बारिश के बीच रविवार को बदरीनाथ-हेमकुंड की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी हुई। बदरीनाथ धाम के नर-नारायण और नीलकंठ पर्वत हिमपा हुआ। इसके अलावा हेमकुंड साहिब की पहाड़ियों, फूलों की घाटी, चिनाप वैली, सोना शिखर और वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क के कुंठखाल व टिपरा खरक की ऊंची पहाड़ियों पर इस साल की पहली बर्फबारी हुई।

  • Mumbai : गोरेगांव ईस्ट मेट्रो स्टेशन के नीचे पर्यटक बस में लगी आग, सभी यात्री सुरक्षित

    Mumbai : गोरेगांव ईस्ट मेट्रो स्टेशन के नीचे पर्यटक बस में लगी आग, सभी यात्री सुरक्षित


    मुंबई।
    मुंबई (Mumbai) में शुक्रवार शाम एक पर्यटक बस (Tourist bus) में अचानक आग (Fire) लग गई. हादसा गोरेगांव ईस्ट मेट्रो स्टेशन (Goregaon East Metro Station) के नीचे हुआ. आग लगते ही बस से धुआं निकलने लगा और कुछ ही देर में पूरा वाहन आग की लपटों में घिर गया। घटना के वक्त बस गुजरात की ओर जा रही थी. राहत की बात रही कि बस में सवार सभी पांच यात्री और ड्राइवर सुरक्षित हैं. हादसे में किसी के घायल होने या जान जाने की खबर नहीं है।

    जानकारी के मुताबिक, घटना शुक्रवार शाम करीब 6.15 बजे चेकनाका सिग्नल के पास हुई. यह जगह ओबेरॉय गार्डन सिटी मेट्रो स्टेशन के नीचे है. आग लगने वाली बस की पहचान महादेव ट्रैवलर के रूप में हुई है. इसका रजिस्ट्रेशन नंबर MJ 01 AN 1695 बताया गया है. बस में पांच यात्री सवार थे. ड्राइवर निजार कपाड़िया भी बस में मौजूद थे।


    किडनी इंफेक्शन के बाद अन्ना हजारे का हेल्थ अपडेट

    अचानक बस में आग भड़क उठी. देखते ही देखते आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया. मौके से सामने आए वीडियो में बस धू-धूकर जलती नजर आ रही है. आग से निकलता घना धुआं भी काफी दूर तक दिखाई दिया. घटना के कारण सड़क पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।


    फायर ब्रिगेड और पुलिस मौके पर पहुंची

    बस में आग की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड की टीम को मौके पर भेजा गया. पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची. इसके अलावा 108 एंबुलेंस सेवा और मेट्रो प्रशासन की टीमों को भी मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने तुरंत आग बुझाने का काम शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया. इसके बाद सड़क से जली हुई बस को हटाया गया. प्रभावित हिस्से को साफ किया गया. इसके बाद वहां ट्रैफिक फिर से शुरू हो गया।

    शुरुआती जांच में बस में आग लगने की वजह तकनीकी खराबी बताई जा रही है. हालांकि अभी आग लगने का सही कारण साफ नहीं हुआ है. पुलिस और फायर विभाग मामले की जांच कर रहे हैं. अधिकारियों की ओर से बस की विस्तृत जांच की जाएगी. इसके बाद पता चलेगा कि आग किस वजह से लगी. फिलहाल इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. पुलिस और दमकल विभाग की शुरुआती जांच पूरी होने के बाद मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

  • वार्ड सदस्य से राष्ट्रपति तक 280 चुनाव लड़ चुके धरतीपकड़ नहीं रहे…. 97 साल की उम्र में निधन

    वार्ड सदस्य से राष्ट्रपति तक 280 चुनाव लड़ चुके धरतीपकड़ नहीं रहे…. 97 साल की उम्र में निधन


    भागलपुर।
    वार्ड सदस्य (Ward Member) से राष्ट्रपति (President) तक चुनाव लड़ने का रिकॉर्ड बनाने वाले नागरमल बाजोरिया (Nagarmal Bajoria) उर्फ धरतीपकड़ (Dhartipakad.) नहीं रहे। पटना में इलाज के दौरान गुरुवार को 97 साल की उम्र में निधन हो गया। एमपी द्विवेदी रोड स्थित देवी बाबू धर्मशाला के समीप के रहने वाले नागरमल बाजोरिया ने कुल 280 चुनाव लड़कर रिकॉर्ड (Record Contesting 280 Elections) कायम किया था। नगर निकाय (वार्ड) से लेकर तमाम चुनावों में पर्चा दाखिल कर वे चर्चा में आए थे। इंदिरा गांधी के खिलाफ रायबरेली से, राजीव गांधी के खिलाफ अमेठी से, संजय गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और एलके आडवाणी जैसे राजनीतिक दिग्गजों के खिलाफ भी उन्होंने चुनाव लड़ा।

    धरतीपकड़ ने वर्ष 2012 में प्रणब मुखर्जी के खिलाफ राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए दाखिल किया लेकिन, उनका पर्चा खारिज हो गया था। पारिवारिक सदस्यों ने बताया कि वर्ष 1969 में तत्कालीन राष्ट्रपति उम्मीदवार वीवी गिरि के खिलाफ नामांकन किया था और उन्होंने अपना आखिरी चुनाव 2019 में लड़ा था। हालांकि उन्हें किसी भी चुनाव में जीत नहीं मिली। मनिहारी का व्यापार करने वाले बाजोरिया समाजसेवा से भी जुड़े रहे।


    पीएमसीएच में चल रहा था इलाज

    परिजन आलोक कुमार अग्रवाल ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर गुरुवार रात नौ बजे पटना से भागलपुर लाया गया। जिले के पवित्र बरारी घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। चार पुत्र और एक पुत्री के पिता धरतीपकड़ के परिवार में एक बेटे विजय बाजोरिया की मृत्यु हो चुकी है। शेष सतीश बाजोरिया, अजय बाजोरिया और दिलीप बाजोरिया व्यापार से जुड़े हैं। सतीश पिता की बनाई मनिहारी दुकान गोविंद चूड़ी भंडार में बैठते हैं। दिलीप पटना और अजय दिल्ली के कारोबार देखते हैं। बेटी मंजू देवी का पटना में ससुराल है। पौत्र सौरव बाजोरिया ने बताया कि करीब 10 से 15 दिनों से उनकी तबीयत खराब थी और उनका इलाज पीएमसीएच, पटना में चल रहा था।


    पाकिस्तान के लाहौर में जन्म, भागलपुर में बस गए

    चांद झुनझुनवाला ने बताया कि नागरमल बाजोरिया का जन्म वर्ष 1930 में पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। देश की आजादी से पहले ही उनका परिवार भागलपुर आकर बस गया था। वह पूरे देश में 280 बार चुनाव लड़ चुके हैं। उनकी समाजसेवा, कन्या विवाह के प्रति लगन, गरीब महिलाओं के प्रति सेवा की लगन, बच्चों की पढ़ाई के प्रति इनका समर्पण पूरी दुनिया में सबसे अनोखा है। चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रहे रामगोपाल पोद्दार ने बताया कि नागरमल बाजोरिया की खासियत यह थी कि चुनाव उनके लिए सिर्फ जीत-हार का माध्यम नहीं था, बल्कि लोकतंत्र में भागीदारी का एक जरिया था। बढ़ती उम्र के साथ नागरमल बाजोरिया पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे थे।


    गधों के गले में तख्तियां डाल निकाली थी नामांकन रैली

    नागरमल बाजोरिया का चुनावी अभियान अनोखा रहा। उनकी पोषाक, उनके कपड़ों पर लिखे श्लोगन और उनकी नामांकन रैली सभी लोगों को ध्यान आकर्षित करने वाली होती थी। वर्ष 2005 के एक चुनाव के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार पर निशाना साधते हुए नामांकन रैली निकाली थी। स्टेशन चौक पर उनकी इस रैली को देखने वालों की भीड़ लगी थी। रैली में कुछ राजनीतिक टिप्पणी वाली तख्तियां गधों के गले में डालकर निकले थे, खूब सुर्खियां बनी थीं।


    निधन पर व‍िधायक ने जताया शोक

    भागलपुर व‍िधानसभा के भाजपा व‍िधायक रोह‍ित पांडेय ने नागरमल बाजोरिया के न‍िधन पर दुख जताया है। उन्‍होंने कहा क‍ि- नागरमल जी का जीवन प्रेरणादायी था। वहीं भाजपा की प्रदेश महामंत्री और पार्षद डॉ. प्रीति शेखर और मोंटी जोशी ने भी शोक जताया है।