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  • UP: शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट आया परिवार, 5 लोगों की मौत

    UP: शाहजहांपुर में रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट आया परिवार, 5 लोगों की मौत


    शाहजहांपुर।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) में दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया है. यहां रोजा रेलवे स्टेशन (Roza Railway Station) के आउटर इलाके में रेलवे ट्रैक पार करते समय गरीब रथ ट्रेन (Garib Rath Train) की चपेट में आने से पांच लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्य और उनका एक रिश्तेदार शामिल है. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई. हादसे के बारे में पता चलते ही स्टेशन पर मौजूद लोग सन्न रह गए।

    हादसा उस समय हुआ, जब हरिओम नाम का युवक अपने रिश्तेदार सेठपाल, उसकी पत्नी पूजा और उनके दो बच्चों को रेलवे स्टेशन छोड़ने आया था. दोनों परिवार एक ही बाइक पर सवार होकर रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे. यह रास्ता आमतौर पर रेलवे कर्मचारियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन ट्रैक पार करते समय बाइक सवार ट्रेन की दिशा का सही अंदाजा नहीं लगा सके. इसी दौरान तेज रफ्तार में गरीब रथ ट्रेन आ गई और पांचों लोग चपेट में आ गए.

    हादसा इतना भीषण था कि दो पुरुष, एक महिला और दो बच्चों की मौके पर ही ट्रेन से कटकर मौत हो गई. घटना की सूचना मिलते ही स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई. आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी. कुछ ही देर में जीआरपी पुलिस और रेलवे अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए। जीआरपी ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    मृतकों के परिजन लालाराम ने कहा कि हमारा लड़का हरिओम अपनी मां को छोड़ने शहर आया था. उसके बाद वह अपने साढू के परिवार के साथ लौट रहा था. रास्ते में हादसा हो गया. वहीं जीआरपी एसओ मदनपाल ने कहा कि यहां एक रास्ता है, जिस पर रेलवे कर्मचारी निकलते हैं, वहां से यह परिवार बाइक से निकल रहा था. यह जज नहीं कर पाया कि किधर से ट्रेन आ रही है, तभी यह हादसा हो गया।

    एसपी राजेश द्विवेदी ने कहा कि शाहजहांपुर के रोजा स्टेशन के आउटर पर एक बाइक से पति-पत्नी उनके दो बच्चे और उनका एक साढू रेलवे ट्रैक पार कर रहे थे, हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. जीआरपी आगे की कार्रवाई कर रही है।

  • संभल में 'मुस्कान कांड' की पुनरावृत्ति: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को उतारा मौत के घाट शव के किए कई टुकड़े

    संभल में 'मुस्कान कांड' की पुनरावृत्ति: पत्नी ने प्रेमी संग मिलकर पति को उतारा मौत के घाट शव के किए कई टुकड़े


    संभल । उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुए सनसनीखेज ‘मुस्कान कांड’ की खौफनाक यादें अभी जनता के मानस पटल से धुंधली भी नहीं हुई थीं कि संभल जिले के चन्दौसी क्षेत्र में वैसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ एक पत्नी ने अपने प्रेम संबंधों में बाधक बन रहे पति को न केवल रास्ते से हटाया बल्कि हत्या के बाद उसके शव के साथ जो दरिंदगी की उसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। आरोपी महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति के शव को कसाई की तरह टुकड़ों में काटा और उन्हें पॉलीथिन में भरकर शहर के विभिन्न हिस्सों में ठिकाने लगा दिया।

    ईदगाह के पास मिले मांस के लोथड़े फैली सनसनी

    वारदात का खुलासा सोमवार को तब हुआ जब पतरोआ रोड स्थित ईदगाह के बाहर लावारिस पॉलीथिन बैग्स मिले। जब स्थानीय लोगों ने उन्हें देखा तो उनमें मानव शरीर के कटे हुए हिस्से और मांस के लोथड़े थे। सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। हत्यारों ने पहचान छुपाने के उद्देश्य से सिर हाथ और पैरों को बड़ी ही बेरहमी से काटकर अलग कर दिया था। पुलिस के लिए बिना सिर वाले धड़ और अंगों की शिनाख्त करना एक बड़ी चुनौती बन गई थी।

    हाथ पर गुदे ‘नाम’ और झूठी ‘गुमशुदगी’ ने खोला राज

    अंधे कत्ल की इस गुत्थी को सुलझाने में मृतक के हाथ पर लिखा उसका नाम संजीवनी साबित हुआ। पुलिस ने जब जिले में दर्ज हालिया गुमशुदगी की रिपोर्टों को खंगाला तो कड़ियाँ जुड़ने लगीं। जांच में सामने आया कि मोहल्ला चुन्नी निवासी राहुल मृतक की पत्नी रूबी ने ही 18 नवंबर को कोतवाली जाकर पति की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
    पुलिस को रूबी की बातों पर संदेह तब हुआ जब उसके बयानों में लगातार विरोधाभास मिला। कड़ाई से पूछताछ और मोबाइल सर्विलांस की मदद से पुलिस जब रूबी के प्रेमी गौरव तक पहुँची तो पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया। रूबी ने स्वीकार किया कि उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

    मेरठ के ‘मुस्कान कांड’ की तर्ज पर रची गई खूनी साजिश

    यह मामला पूरी तरह से मेरठ के सौरभ हत्याकांड मुस्कान कांड की कार्बन कॉपी नजर आता है। जिस तरह मेरठ में मुस्कान ने अपने प्रेमी साहिल के साथ मिलकर पति के टुकड़े किए थे ठीक उसी तरह रूबी और गौरव ने राहुल की हत्या घर के भीतर ही की। हत्या के बाद आरी या धारदार हथियार से शव को काटा गया और साक्ष्यों को मिटाने के लिए टुकड़ों को पॉलीथिन में भरकर अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया गया।

    गायब अंगों की तलाश और पुलिस की कार्रवाई

    पुलिस की फोरेंसिक टीम ने आरोपी के घर से साक्ष्य जुटाए हैं जहाँ खून के धब्बे और हत्या में प्रयुक्त सामान मिलने की संभावना है। हालांकि पुलिस के लिए अब भी सबसे बड़ी चुनौती राहुल के ‘सिर’ और शरीर के अन्य लापता हिस्सों को बरामद करना है जिन्हें आरोपियों ने कहीं दूर ठिकाने लगाया है। कोतवाली प्रभारी के अनुसार दोनों आरोपियों रूबी और गौरव को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनसे गहन पूछताछ जारी है ताकि हत्या में प्रयुक्त हथियार और शेष अंगों को बरामद किया जा सके। इस घटना ने समाज में पनप रहे अपराध और रिश्तों के कत्ल की भयावह तस्वीर पेश की है।

  • यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क

    यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क


    मेरठ । भोजपुर उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के भोजपुर क्षेत्र के रानी नागल गांव में सरकारी योजनाओं का गड़बड़ तरीके से वितरण किए जाने का मामला सामने आया है। गांव में रह रहे घूमंतू परिवारों को बिना उचित प्रक्रिया के मुफ्त राशन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और वोटर बनाने की कोशिश की गई है। इन परिवारों में से कुछ को रोहिंग्या माना जा रहा है जिनके खिलाफ खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब तेज़ हो गई है।

    सरकारी योजनाओं का बंदरबांट

    रानी नागल में कुछ परिवारों को सरकारी योजनाओं का फायदा गलत तरीके से दिया गया है। यह परिवार मूलतः घूमंतू समुदाय से हैं और इनका नाम असल में रजिस्टर्ड वोटर सूची में नहीं था। शिकायतों के बाद यह सामने आया कि इन परिवारों को राशन कार्ड प्रधानमंत्री आवास योजना का घर और आधार कार्ड भी जारी कर दिया गया था। इसके अलावा वोटर लिस्ट में इनका नाम जोड़ने के लिए फर्जी तरीके से प्रक्रिया की जा रही थी जिसमें केवल महिलाओं ने ही अपनी गणना प्रपत्र भरे थे।

    गांव छोड़ने पर मजबूर हुए लोग

    गांव में हो रही इस गड़बड़ी के उजागर होते ही कई परिवारों ने गांव छोड़ दिया और भागने को मजबूर हो गए। इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद खुफिया विभाग की टीम गांव में पहुंची और मामले की गहन जांच शुरू की। रानी नागल के पूर्व प्रधान सईदुल ने डीएम अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल से इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद एसडीएम सदर डॉ. राम तोहन मीणा द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2018 में कुल 92 घूमंतू लोग गांव में पहुंचे थे और इनकी फर्जी वोटर बनने की प्रक्रिया चल रही थी।

    किसी और के नाम पर आवास देना

    इन घूमंतू परिवारों में से दस परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में रह रहे हैं। इस योजना के तहत ये आवास ग्राम समाज की भूमि पर बने थे लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन आवासों का नाम इन परिवारों के नाम पर दर्ज किया गया या फिर किसी और के नाम पर इन्हें आवास दिया गया। यह मामला अब जांच का विषय बन चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि इन परिवारों के पास राशन कार्ड भी हैं और उनके आधार कार्ड भी बनवाए गए हैं। इस संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खुफिया विभाग ने तुरंत अपनी टीम भेजी और मामले की गहरी जांच शुरू कर दी।

    पुलिस और खुफिया विभाग की जांच

    भोजपुर पुलिस ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस गड़बड़ी में किसकी भूमिका है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई बयान दिया जा सकेगा। फिलहाल खुफिया विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पूरी स्थिति की जांच कर रहे हैं और मामले के सभी पहलुओं को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं।

    फर्जी वोटर बनाने की कोशिश

    गांव में फर्जी वोटर बनाने की प्रक्रिया का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने यह पुष्टि की कि 92 लोगों में से केवल 10 परिवारों ने ही वोटर बनने के लिए अपना गणना प्रपत्र भरा था और इन सभी ने इसे केवल महिलाओं के नाम से भरा था। इस प्रक्रिया में भी कई असंगतियां पाई गईं और यही कारण है कि जांच की दिशा और तेज़ कर दी गई है। रानी नागल गांव में हो रही इस सरकारी योजनाओं की गड़बड़ी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारियों ने इन गतिविधियों पर सही समय पर नजर नहीं रखी। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार और सरकारी प्रणाली की नाकामी को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि गलत तरीके से योजनाओं का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि इन गतिविधियों में कितनी साजिश शामिल थी और इसके पीछे कौन लोग थे।

  • CG: बाघ के शिकार मामले में महिला सरपंच समेत 7 गिरफ्तार… खोजी कुत्ते ने आरोपियों तक पहुंचाया

    CG: बाघ के शिकार मामले में महिला सरपंच समेत 7 गिरफ्तार… खोजी कुत्ते ने आरोपियों तक पहुंचाया


    रायपुर।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के सूरजपुर जिले (Surajpur district) में बाघ का शिकार (Tiger hunting) करने के आरोप में वन विभाग ने एक महिला सरपंच (Woman Sarpanch) समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इस बारे में जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि शिकार की यह घटना सूरजपुर जिले के घुई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत भैंसामुंडा गांव के जंगल में हुई थी और पुलिस के खोजी कुत्ते की मदद से हम आरोपियों तक पहुंच सके। घटना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि जंगली जानवरों का शिकार करने के लिए आरोपियों ने जंगल में बिजली का जाल बिछाया था, और उसी की चपेट में आकर बाघ की मृत्यु हो गई।

    इस दौरान नर बाघ का शिकार करने के आरोप में वन विभाग के दल ने गांव की सरपंच सिस्का कुजूर और उनके पति दिनेश के अलावा ईश्वर कुजूर, अभिषेक रोशन बड़ा, मिथिलेश सिंह, रामनाथ सिंह और भोला प्रसाद को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बताया कि इनमें से चार आरोपी सिस्का कुजूर, दिनेश, ईश्वर कुजूर और अभिषेक रोशन बड़ा भैंसामुंडा गांव के निवासी हैं तथा मिथिलेश और रामनाथ कैलाशपुर गांव के निवासी हैं। वहीं भोला प्रसाद जिले के बर्तिकाला गांव का निवासी है।

    अधिकारियों ने बताया कि 15 दिसंबर को जिले के घुई वन रेंज के तहत भैंसामुंडा में नर बाघ का शव बरामद किया गया था, जिसके कुछ अंग गायब थे। उन्होंने बताया कि बाघ के शव का पोस्टमार्टम करने के बाद वन विभाग ने जांच शुरू की और जांच के लिए एक खोजी कुत्ते को भी लगाया गया।

    अधिकारियों ने बताया, ‘तलाशी के दौरान खोजी कुत्ता सरपंच सिस्का कुजूर के घर तक जा पहुंचा। तब जांच अधिकारियों ने बुधवार को सिस्का के घर की तलाशी ली, जहां से बाघ के दो नाखून, बालों का गुच्छा और मांस के टुकड़े तथा बिजली और जीआई का तार बरामद किया गया।’ आगे उन्होंने बताया, ‘सिस्का से पूछताछ के आधार पर अगले दिन, छह अन्य लोगों को पकड़ा गया। उनके पास से बाघ के दांत, बालों के गुच्छे, नाखून, बिजली और जीआई तार, लकड़ी का खूंटा और रस्सी का फंदा बरामद किया गया।’

    उन्होंने बताया कि आरोपियों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया तथा उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उन्हें 30 दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

  • यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

    यूपी में शराब पीने वालों के लिए बड़ी खबर नई आबकारी नीति लागू होते ही महंगी हो जाएगी बोतल

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    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में एक अप्रैल से नई आबकारी नीति लागू होने जा रही है और इसके साथ ही शराब पीने वालों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है. प्रस्तावित नीति के तहत अंग्रेजी शराब की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. विभागीय सूत्रों के अनुसार लाइसेंस शुल्क में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी का मसौदा तैयार कर मुख्यालय से लखनऊ भेज दिया गया है. इस प्रस्ताव को जनवरी महीने में मंजूरी मिलने की उम्मीद है.

    नई नीति में इस बार भी शराब दुकानों के नवीनीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. यानी मौजूदा लाइसेंसधारकों को राहत देते हुए टेंडर प्रक्रिया नहीं कराई जाएगी. इससे व्यापारियों को निरंतरता मिलेगी लेकिन बढ़ी हुई लाइसेंस फीस का असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. विभाग का मानना है कि शुल्क बढ़ोतरी से राजस्व में इजाफा होगा.

    पिछली नीति से अलग होगा असर

    गौरतलब है कि पिछले वर्ष लागू की गई आबकारी नीति में शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. लाइसेंस नवीनीकरण शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव के चलते शराब के दाम बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है. आबकारी विभाग की बैठकों में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है.

    शराब की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी

    अनुमान लगाया जा रहा है कि नई नीति लागू होने के बाद अंग्रेजी शराब के क्वार्टर की कीमत में 15 से 20 रुपये तक का इजाफा हो सकता है. वहीं हाफ बोतल करीब 50 रुपये और फुल बोतल 100 रुपये तक महंगी हो सकती है. हालांकि अंतिम फैसला शासन की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा.

    राजस्व बढ़ेगा उपभोक्ता पर असर

    आबकारी विभाग का कहना है कि बढ़े हुए शुल्क से राज्य के राजस्व को मजबूती मिलेगी. वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह नीति खर्च बढ़ाने वाली साबित हो सकती है. अब सभी की निगाहें जनवरी में होने वाले फैसले पर टिकी हैं.

  • मंत्रियों के विवादों पर घिरी महाराष्ट्र सरकार सुप्रिया सुले बोलीं- यह राज्य की छवि के लिए बुरा

    मंत्रियों के विवादों पर घिरी महाराष्ट्र सरकार सुप्रिया सुले बोलीं- यह राज्य की छवि के लिए बुरा


    नई दिल्ली । महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी अजित पवार गुट के दो मंत्रियों पर लगे गंभीर आरोपों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है एनसीपी शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने इस पूरे मामले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रम महाराष्ट्र की छवि के लिए बुरा है और दिल्ली तक में लोग सवाल पूछ रहे हैं कि राज्य में आखिर चल क्या रहा है ।
    सुप्रिया सुले ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार में शामिल दो बड़े नेताओं पर गंभीर आरोप लगे हैं उन्होंने बताया कि दिल्ली में उनसे लोग पूछ रहे थे कि महाराष्ट्र में एक और मंत्री का विकेट गिर गया उनके मुताबिक इस तरह की बातें राज्य की छवि को खराब करती हैं और जनता में गलत संदेश जाता है उन्होंने साफ कहा कि यह स्थिति किसी भी तरह से अच्छी नहीं कही जा सकती  ।
    माणिकराव कोकाटे मामले पर चिंता
    पूर्व मंत्री माणिकराव कोकाटे को लेकर सुप्रिया सुले ने कहा कि किसानों के बारे में जिस तरह की बातें कही गईं वह दुर्भाग्यपूर्ण हैं फिलहाल कोकाटे अस्पताल में भर्ती हैं और उन्हें सही इलाज मिलना चाहिए यह जरूरी है
    मनरेगा के नाम को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाने का फैसला गलत है उनका कहना है कि इससे न सिर्फ प्रतीकात्मक नुकसान हुआ है ।
    बल्कि आगे चलकर राज्यों को मिलने वाली फंडिंग पर भी असर पड़ेगा उन्होंने आरोप लगाया कि इस फैसले से राज्य सरकारों को नुकसान होगा और गरीबों से जुड़ी योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है एनसीपी अजित पवार गुट और शरद पवार गुट के संभावित गठबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में स्थानीय नेता ही फैसला लेंगे उन्होंने बताया कि पवार साहब पहले ही कह चुके हैं कि इस पर निर्णय जमीनी स्तर पर लिया जाएगा ।

    नीतीश कुमार के बुर्का विवाद पर प्रतिक्रिया
    बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े बुर्का विवाद पर सुप्रिया सुले ने संवेदनशील रुख अपनाया उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार की परंपरा और पहनावा उसका निजी विषय होता है घूंघट लेना हो या बुर्का पहनना यह परिवार की अपनी परंपरा है नीतीश कुमार एक वरिष्ठ नेता हैं और इस तरह के विवादों से हमें दुख होता है ।
  • हिजाब विवाद नुसरत परवीन को झारखंड ने दिया नौकरी का ऑफर बिहार में जॉइनिंग के दिन आया नया ट्विस्ट

    हिजाब विवाद नुसरत परवीन को झारखंड ने दिया नौकरी का ऑफर बिहार में जॉइनिंग के दिन आया नया ट्विस्ट


    पटना । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हिजाब हटाने पर चर्चित हुईं डॉक्टर नुसरत परवीन को अब झारखंड सरकार से एक आकर्षक नौकरी का ऑफर मिला है। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उन्हें 3 लाख रुपये प्रतिमाह की सरकारी नौकरी देने का प्रस्ताव दिया है। इस ऑफर के साथ नुसरत को एक सरकारी फ्लैट और पूरी सुरक्षा का आश्वासन भी दिया गया है।
    इस बीच नुसरत को बिहार में आज जॉइनिंग के दिन कुछ नई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हिजाब विवाद के बाद नुसरत ने बिहार में जॉइनिंग से मना कर दिया था। लेकिन उनके करीबी दोस्तों का कहना है कि नुसरत इस पूरे मामले से भावनात्मक रूप से आहत हुई थीं लेकिन वह तय समय पर ड्यूटी जॉइन करने के लिए तैयार हैं।

    झारखंड सरकार का प्रस्ताव

    झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान में कोई समझौता नहीं करेगी। बिहार में डॉक्टर नुसरत परवीन के साथ हुई घटना को लेकर उनकी पार्टी ने कहा कि यह केवल एक महिला का अपमान नहीं बल्कि संविधान और मानवता का उल्लंघन था। डॉ. इरफान अंसारी ने कहा झारखंड में महिलाओं का सम्मान किया जाता है और नुसरत परवीन को सम्मान देने के लिए 3 लाख रुपये महीने की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया है।

    नुसरत का फैसला और विवाद

    डॉ. नुसरत परवीन पिछले चार दिनों से पटना के सरकारी तिब्बी कॉलेज में नहीं आईं जिसके बाद यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह इस विवाद से मानसिक रूप से आहत हैं। हालाँकि उनके करीबी दोस्त और सहपाठी बिलकिस ने पुष्टि की है कि नुसरत 20 दिसंबर को अपना कार्यभार संभालने के लिए तैयार हैं। नुसरत परवीन के हिजाब को लेकर यह विवाद तब शुरू हुआ जब बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने एक सार्वजनिक समारोह में उनके हिजाब को हटा लिया गया था। यह घटना एक वीडियो क्लिप के जरिए सामने आई जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाए कि उन्होंने एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का अपमान किया है।

    कॉलेज की स्थिति

    पटना के सरकारी तिब्बी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. महफूजुर रहमान ने कहा कि नुसरत परवीन पिछले सात वर्षों से हिजाब पहनकर कॉलेज आ रही थीं और वह एक होशियार और अनुशासित छात्रा थीं। हालांकि इस घटना के बाद उन्होंने चुप्पी साध ली थी लेकिन अब वह अपने पेशेवर जिम्मेदारियों को फिर से शुरू करने का फैसला कर चुकी हैं। नुसरत परवीन के हिजाब विवाद ने न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। हालांकि झारखंड सरकार द्वारा दिए गए इस सम्मानजनक प्रस्ताव ने इस विवाद को एक नया मोड़ दिया है। अब यह देखना होगा कि नुसरत अपने करियर और व्यक्तिगत निर्णयों में किस दिशा में आगे बढ़ती हैं।

  • रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी 56 घंटे में 6 लोगों की मौत 2 और मरे

    रामगढ़ में हाथियों का आतंक जारी 56 घंटे में 6 लोगों की मौत 2 और मरे


    रामगढ़ । झारखंड के रामगढ़ जिले में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को दो और लोगों की जान चली गई जिससे पिछले 56 घंटों में यहां हाथियों के हमले में मरने वालों की संख्या 6 हो गई है। शुक्रवार की घटनाओं में एक व्यक्ति का नाम लोकनाथ मुंडा था जो कुजू ओपी क्षेत्र के सुगिया गांव का निवासी था। वह अपनी पत्नी के साथ जलावन के लिए कोयला चुनने सीसीएल के करमा परियोजना की ओर जा रहे थे तभी उनका सामना हाथियों के झुंड से हो गया। हाथियों ने उन्हें पटककर मार डाला जबकि उनकी पत्नी किसी तरह भागकर अपनी जान बचाने में सफल रही।

    दूसरी घटना रामगढ़ प्रखंड के कुंदरूकलां पंचायत में हुई जहां काजल देवी नाम की महिला ईंट भट्ठे में काम करने आई थी। जब वह रात में शौच के लिए बाहर गई तो हाथियों ने उसे घेर लिया और उसे पटक-पटककर मार डाला। इस दौरान वहां मौजूद आधे दर्जन से अधिक लोग बाल-बाल बच गए। इसके अलावा हाथियों ने पास में मौजूद फसलों को भी नुकसान पहुंचाया। वन विभाग अब इस नुकसान का मूल्यांकन करने में जुटा है।

    इन घटनाओं से पहले मंगलवार को भी रामगढ़ जिले के घाटो थाना क्षेत्र के आरा सारूबेड़ा में हाथियों के हमले में चार लोग मारे गए थे जिनमें एक सीसीएल का सुरक्षाकर्मी और तीन अन्य स्थानीय लोग शामिल थे।स्थानीय लोगों और वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथियों के आक्रामक होने का मुख्य कारण उनके पारंपरिक रास्तों में बढ़ती मानवीय गतिविधि और जंगलों का सिमटना है। इसके कारण हाथी भोजन और पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में घुसने पर मजबूर हो रहे हैं।

    वर्तमान में वन विभाग ने क्षेत्र में हाथियों से बचाव के लिए निगरानी बढ़ा दी है और उनके मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान और मुआवजे के साथ-साथ हाथियों के सुरक्षित मार्ग को बहाल करने की अपील की है। तोपा माइनस कॉलोनी उखरबेड़वा और हरवे क्षेत्र में हाथियों का झुंड खुलेआम विचरण कर रहा है जिससे ग्रामीणों में चिंता का माहौल है।प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता राशि दी है और मुआवजे के रूप में 3 लाख 75 हजार रुपये 10 दिनों के अंदर भुगतान करने का आश्वासन दिया है।

  • बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी माओवादी ढेर

    बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, 5 लाख का इनामी माओवादी ढेर


    बीजापुर ।छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच एक बड़ी मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में एक 5 लाख रुपये का इनामी माओवादी फागनू माडवी मारा गया। मुठभेड़ सुबह भैरमगढ़ थाना क्षेत्र के आडवाड़ा-कोटमेटा वन क्षेत्र में शुरू हुई जब जिला रिजर्व गार्ड डीआरजी की एक टीम को माओवादियों की उपस्थिति की सूचना मिली और उन्होंने ऑपरेशन चलाया।

    मारे गए नक्सली की पहचान 35 वर्षीय फागनू माडवी के रूप में हुई है। वह भैरमगढ़ क्षेत्र समिति का सक्रिय सदस्य था। मुठभेड़ के बाद उसका शव घटनास्थल पर पाया गया। मौके से एक .303 राइफल एक 9 मिमी पिस्टल दो स्कैनर सेट एक रेडियो और एक मेडिकल किट बरामद किया गया। इस घटना को लेकर बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण बस्तर में माओवादी नेटवर्क काफी कमजोर हो चुका है। उन्होंने बाकी माओवादी कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे हिंसा छोड़कर सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करें।

    इस वर्ष छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ों में कुल 285 माओवादी मारे गए हैं जिनमें से 256 माओवादी बस्तर मंडल के सात जिलों में मारे गए जिनमें बीजापुर भी शामिल है। शेष माओवादी रायपुर मंडल के गरियाबंद जिले और दुर्ग मंडल के मोहला-मनपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में मारे गए। यह मुठभेड़ सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों का परिणाम है जो छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से बस्तर में माओवादी गतिविधियों को नष्ट करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

  • पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक

    पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक


    बहराइच । उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हाल ही में एक घटना ने विवाद को जन्म दिया जब पुलिस ने एक निजी कार्यक्रम के दौरान युवा कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और कई लोग इसे लेकर सवाल उठाने लगे कि क्या एक निजी आयोजन में पुलिस का इस प्रकार का सम्मान देना उचित था। पुलिस की इस अति भक्ति पर राज्य के डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

    कौन हैं पुंडरीक गोस्वामी

    पुंडरीक गोस्वामी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं जो वृंदावन से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1988 को हुआ था और उन्होंने मात्र सात साल की उम्र से कथा सुनानी शुरू कर दी थी। वे उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए थे और वहां से अपनी शिक्षा पूरी की। पुंडरीक गोस्वामी श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पुत्र और प्रसिद्ध संत अतुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पौत्र हैं। पुंडरीक गोस्वामी विश्व भर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रचार कर रहे हैं। वे श्री कृष्ण श्रीमद्भागवतम भगवद गीता चैतन्य चरितामृत और राम कथा पर प्रवचन देते हैं। इसके अलावा वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं और वंचितों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करते हैं। साथ ही वे गरीब बच्चों को शिक्षा भी प्रदान करते हैं।

    युवाओं के प्रेरणास्त्रोत

    पुंडरीक गोस्वामी ने गोपाल क्लब और निमाई पाठशाला जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है जिनके माध्यम से वे युवाओं को भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनके परिवार में 38 पीढ़ियों से भागवत कथा की परंपरा चली आ रही है जो उनके आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का कारण बनती है। ऑक्सफोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखी और अब वे श्रीमद माधव-गौडेश्वर पीठम के 38वें आचार्य के रूप में कार्यरत हैं।

    विवाद का केंद्र: गार्ड ऑफ ऑनर

    यह घटना उस समय सामने आई जब पुलिस ने पुंडरीक गोस्वामी को बहराइच में एक निजी कार्यक्रम के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं जिससे यह मामला विवाद का विषय बन गया। पुलिस की इस कार्रवाई ने कई सवाल उठाए जिनमें यह प्रमुख था कि क्या एक निजी व्यक्ति को पुलिस द्वारा इस तरह का सम्मान देना उचित था।

    यह घटना राज्य की पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच कुछ असहमति का कारण बन गई और डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे पुलिस की अति भक्ति और अनुशासनहीनता का उदाहरण मान रहे हैं। कई लोगों ने इस सवाल को उठाया कि क्या धार्मिक या सामाजिक व्यक्तित्वों को इस प्रकार का सरकारी सम्मान देना सही है।

    समाज में पुंडरीक गोस्वामी का योगदान

    पुंडरीक गोस्वामी का समाज में योगदान और धार्मिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता सराहनीय है। उन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति भक्ति परंपरा और समाज सेवा में अपनी भूमिका निभाई है। उनका प्रयास युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान से जोड़ने का है जो समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।  हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने का तरीका विवादास्पद हो सकता है लेकिन पुंडरीक गोस्वामी की व्यक्तिगत भूमिका और उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। वे आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं जो धार्मिक कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं।

    इस विवाद के बावजूद पुंडरीक गोस्वामी का योगदान समाज और धर्म के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और समाज सेवा के माध्यम से बहुत से लोगों की मदद की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।