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  • MP में मौसम का बदला मिजाज: सीजन का पहला घना कोहरा, मुरैना-रीवा में विजिबिलिटी 50 मीटर; 14 जिलों में अलर्ट

    MP में मौसम का बदला मिजाज: सीजन का पहला घना कोहरा, मुरैना-रीवा में विजिबिलिटी 50 मीटर; 14 जिलों में अलर्ट


    मध्यप्रदेश में ठंड ने अब अपना असली असर दिखाना शुरू कर दिया है। सोमवार की सुबह प्रदेश के कई हिस्सों में इस सीजन का पहला घना कोहरा देखने को मिला। हालात सबसे ज्यादा खराब रीवा में रहे, जहां विजिबिलिटी घटकर महज 50 मीटर रह गई। मुरैना और रायसेन में भी यही स्थिति रही जिससे सुबह के समय सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और ड्राइवरों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा। राजधानी भोपाल में भी कोहरे का असर साफ दिखा। यहां दृश्यता 500 मीटर से 1 किलोमीटर के बीच दर्ज की गई। कई इलाकों में सुबह 11 बजे तक भी 2 से ढाई किलोमीटर दूर तकसाफ नजर नहीं आ रहा था। मौसम विभाग के अनुसार ठंड के इस सीजन में यह पहली सुबह रही, जब प्रदेश के इतने बड़े हिस्से में एक साथ घना कोहरा छाया।

    मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, रीवा के अलावा छतरपुर के खजुराहो में विजिबिलिटी 50 से 200 मीटर रही। भोपाल, ग्वालियर, दतिया और सीधी में दृश्यता 500 से 1000 मीटर के बीच दर्ज की गई। वहीं इंदौर, नर्मदापुरम, सागर, रतलाम, दमोह और मंडला में 1 से 2 किलोमीटर तक विजिबिलिटी रही। अशोकनगर, पचमढ़ी, टीकमगढ़, विदिशा, शाजापुर, सीहोर और देवास में भी सुबह कोहरे की चादर छाई रही। कोहरे के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में भोपाल सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इंदौर में 6.6 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9.3 डिग्री और जबलपुर में 9.4 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान रहा।

    प्रदेश में सबसे ठंडे स्थान पचमढ़ी और राजगढ़ रहे, जहां पारा 5.4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। बैतूल में 5.8 डिग्री, उमरिया में 7 डिग्री, रीवा में 7.5 डिग्री, रायसेन में 7.6 डिग्री, मलाजखंड और नौगांव में 7.8 डिग्री, खजुराहो में 8.1 डिग्री और नरसिंहपुर में 8.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने प्रदेश के 14 जिलों में कोहरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि राहत की बात यह है कि अगले तीन दिनों तक शीतलहर चलने की संभावना कम है। लेकिन 17 दिसंबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय होने जा रहा है जिसका असर मध्यप्रदेश में भी देखने को मिलेगा। इसके चलते ठंड फिर से तेज हो सकती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय जेट स्ट्रीम भी सक्रिय है। यह जमीन से करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर लगभग 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही है। यही तेज ऊंची हवाएं उत्तर भारत और मध्य भारत में ठंड बढ़ाने का काम कर रही हैं। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के साथ जब जेट स्ट्रीम सक्रिय होती है, तो ठंड का असर दोगुना हो जाता है।इस बार नवंबर में ही सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। भोपाल में लगातार 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे लंबा दौर माना जा रहा है। 17 नवंबर की रात भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया था, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

    मौसम विभाग का कहना है कि दिसंबर और जनवरी ठंड के लिहाज से सबसे अहम महीने होते हैं। आने वाले दिनों में ग्वालियर-चंबल, उज्जैन, भोपाल, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों के मुताबिक, दिसंबर और जनवरी में 20 से 22 दिन तक कोल्ड वेव चल सकती है। कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश में ठंड का असली दौर अब शुरू हो चुका है। कोहरा, गिरता तापमान और आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के संकेत बताते हैं कि अगले कुछ हफ्तों में लोगों को ठिठुरन के लिए तैयार रहना होगा।

  • ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद

    ग्वालियर व्यापार मेले में इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर में भी दिखेगी 'चमक', जीएसटी कटौती से बढ़ेगी बिक्री की उम्मीद


    ग्वालियर । देश के सबसे बड़े और 120 साल से अधिक पुराने ग्वालियर व्यापार मेले में इस साल कारोबार के रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद है। इस बार मेला केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि इलेक्ट्रॉनिक सामानों सहित अन्य सेक्टरों में भी जबरदस्त बिक्री होने की संभावना है। यह मेला अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है जहाँ घर में उपयोग होने वाली छोटी सुई से लेकर मोटर कार तक हर चीज़ छूट के साथ उपलब्ध होती है। यही कारण है कि देश भर से खरीदार इस मेले का इंतज़ार करते हैं।

    जीएसटी लागू होने के बाद बदला परिदृश्य

    1 जुलाई 2017 को जब वस्तु एवं सेवा कर GST लागू हुआ उत्पादों पर 50% वाणिज्यकर में छूट मिलती थी। जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर को रोड टैक्स में 50% की छूट देकर राहत दी। इस छूट के कारण ऑटोमोबाइल सेक्टर में तो शानदार कारोबार होता रहा 2024-25 मेले में ₹900 करोड़ से अधिक का कारोबार लेकिन इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों को वह फायदा नहीं मिला।

    इस बार इलेक्ट्रॉनिक सेक्टर क्यों चमकेगा

    इस वर्ष, स्थिति बदलने की उम्मीद है। सरकार ने 22 सितंबर से जीएसटी की दरों में कमी की है, जिसका असर कारोबार के सभी सेक्टरों पर दिख रहा है और चीजें सस्ती हुई हैं।दोहरी छूट का फायदा: ऑटोमोबाइल सेक्टर को तो पहले से ही रोड टैक्स में 50% की छूट मिल रही है।इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टर: जीएसटी दरों में कमी आने से इस बार इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों पर भी अपने प्रोडक्ट्स पर तगड़ी छूट देने का दबाव और अवसर दोनों हैं। उपभोक्ताओं को लाभजीएसटी कम होने के कारण चीज़ें पहले ही सस्ती हुई हैं और अब कंपनियों की अतिरिक्त छूट से खरीदारी करने वालों को बड़ा फायदा होगा।

    पिछले 2024-25 के मेले में कुल ₹3327 करोड़ से अधिक का कारोबार हुआ था। जानकारों का मानना है कि इस बार इलेक्ट्रॉनिक और अन्य सेक्टरों के चमकने से यह कारोबार का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है। यह उम्मीद है कि इस साल का मेला ग्राहकों और व्यापारियों दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित होगा।

  • महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत

    महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत


    महाराष्ट्र। के कल्याण, मोहने गांव के लहूजीनगर इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक छोटी सी बात पर शुरू हुई पड़ोसियों की लड़ाई ने एक मासूम की जान ले ली। आरोप है कि लड़ाई रोकने गई एक गर्भवती महिला पर हमला कर उसके पेट में लात मारी गई, जिसके परिणामस्वरूप गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।

    मामूली बहस बनी जानलेवा हमला
    जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक पड़ोसी द्वारा दूसरे के सिर से टोपी उतारने को कहने जैसी मामूली बात पर हुई। यह बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इसी दौरान, जब एक गर्भवती महिला ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो कथित तौर पर आरोपी ने उसके पेट में जोरदार लात मार दी। इस क्रूर हमले के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके गर्भस्थ शिशु की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई।

    पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
    इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। साथ ही, क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं के कारण स्थानीय पुलिस की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर पहुँचकर जाँच शुरू कर दी है।

    अतिरिक्त खबर का अंश (संबंधित जानकारी)
    राजनीतिक बयान: इसी बीच, महाराष्ट्र में राजनीतिक गलियारों से एक खबर यह भी है, जहाँ शिवसेना नेता उदय सामंत ने उद्धव ठाकरे से सवाल किया है, “क्या आपमें कांग्रेस के उपमुख्यमंत्रियों से इस्तीफा मांगने की हिम्मत है?”

    सड़क हादसा: महाराष्ट्र के बीड में एक डीजल टैंकर से कार टकराने के बाद हाइवे पर धुएं का गुबार छा गया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा।

  • नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा में मॉब लिंचिंग की दर्दनाक घटना: अतहर हुसैन की पत्नी ने सुनाई दिल दहला देने वाली कहानी

    नवादा । बिहार के नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र में 5 दिसंबर की रात को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी जब 35 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन को धर्म के नाम पर बेरहमी से मार डाला गया। यह घटना उस वक्त हुई जब अतहर डुमरी गांव से लौट रहे थे और भट्टा गांव के पास छह-सात नशे में धुत युवकों ने उन्हें रोक लिया। बाद में नाम और धर्म का पता चलने के बाद अतहर पर हमला किया गया। उनकी हत्या के बाद परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए इसे सिर्फ एक हत्या नहीं बल्कि एक सांप्रदायिक हत्या करार दिया है।

    घटना का विवरण

    अतहर हुसैन जब घर लौट रहे थे तब कुछ युवकों ने उन्हें घेर लिया। उन्हें साइकिल से उतारकर हाथ-पैर बांधकर एक कमरे में घसीटा गया। वहां पर अतहर के साथ बर्बरता की सारी सीमाएं पार की गईं। पैंट खोलकर उनके धर्म की पहचान की गई फिर करंट लगाया गया उंगलियां तोड़ी गईं कान काटे गए और शरीर पर गर्म लोहे की रॉड से चोटें दी गईं। इस पूरी घटना को सहते हुए भी अतहर ने पुलिस को अपनी जान बचाने के लिए मदद मांगी।

    इलाज के दौरान अतहर की मौत

    अतहर हुसैन को गंभीर अवस्था में नवादा सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां 7 दिसंबर को उन्होंने कांपती आवाज में इस दिल दहला देने वाली घटना की पूरी कहानी सुनाई थी। हालांकि उनके शरीर पर लगी गहरी चोटों ने उनका साथ नहीं दिया और 12 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस दौरान उन्होंने एबीपी संवाददाता को अस्पताल में अपनी आपबीती सुनाई और पूरी घटना के बारे में जानकारी दी।

    पोस्टमॉर्टम और पुलिस कार्रवाई

    अतहर की मौत के बाद उनका पोस्टमॉर्टम नालंदा सदर अस्पताल में फॉरेंसिक टीम और मजिस्ट्रेट की निगरानी में किया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों—सोनू कुमार रंजन कुमार सचिन कुमार और श्री कुमार को गिरफ्तार किया है। हालांकि अन्य आरोपी अभी फरार हैं।

    रोह थाना प्रभारी रंजन कुमार ने इस मामले में गिरफ्तारी की पुष्टि की है लेकिन परिजनों का कहना है कि उन्हें सिर्फ गिरफ्तारी से संतुष्टि नहीं है। वे चाहते हैं कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई हो और अतहर हुसैन के हत्यारों को सजा मिले। उनके बेटे इस्तेखार हुसैन ने प्रशासन से सिर्फ एक बात कही हमारे पिता के हत्यारों को सजा मिलनी चाहिए।”

    मॉब लिंचिंग पर बढ़ते सवाल

    इस दर्दनाक घटना ने बिहार और खासकर नवादा जिले में बढ़ती मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धर्म के नाम पर हिंसा और इस तरह के अपराधों का बढ़ता चलन समाज के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह घटना केवल एक हत्या नहीं है बल्कि यह हमारे समाज के उन गंभीर मुद्दों को उजागर करती है जिनमें धार्मिक सहिष्णुता की कमी और सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियां दिखाई देती हैं।

    अतहर के परिजनों का दर्द इस बात को साफ तौर पर दर्शाता है कि समाज और प्रशासन को सिर्फ अपराधियों को गिरफ्तार करने से अधिक कुछ करना होगा। समाज में धार्मिक सहिष्णुता और समानता की आवश्यकता को बल देने के साथ साथ हमें ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जरूरत है ताकि भविष्य में कोई और अतहर हुसैन जैसे व्यक्ति की हत्या न हो।

    मॉब लिंचिंग की घटनाएं एक बहुत बड़ा सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दा बन चुकी हैं। अतहर हुसैन की दर्दनाक मौत ने यह सवाल खड़ा किया है कि हमें समाज में आपसी सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता की आवश्यकता को समझना होगा। केवल गिरफ्तारी से इन घटनाओं का समाधान नहीं होगा बल्कि इसके लिए समाज के सभी हिस्सों को एकजुट होकर काम करना होगा।

  • सुकमा में एम्बुलेंस के अभाव में युवक की मौतशव खाट पर लेकर घर पहुंचे परिजन

    सुकमा में एम्बुलेंस के अभाव में युवक की मौतशव खाट पर लेकर घर पहुंचे परिजन


    सुकमा । सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में एक दर्दनाक घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के निवासी 40 वर्षीय युवकबारसे रामेश्वरमकी तबीयत बिगड़ने के बाद एम्बुलेंस का इंतजार करते-करते उसकी मौत हो गई। सबसे अधिक आश्चर्य की बात यह है कि न सिर्फ युवक की मौत के समयबल्कि बाद में शव को ले जाने के लिए भी परिजनों को एम्बुलेंस नहीं मिली। परिणामस्वरूपपरिजनों को शव को खाट पर लेकर घर जाना पड़ा। इस घटना ने न केवल जगरगुंडा क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कियाबल्कि पूरे सुकमा जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर स्थिति को भी सामने ला दिया है।

    क्या है पूरा मामला

    मृतक युवक बारसे रामेश्वरमजगरगुंडा इलाके का निवासी था। बताया जाता है कि युवक को हाथ-पैर में सूजन और पेट दर्द की शिकायत थी। पहले उसे जगरगुंडा के सरकारी अस्पताल में इलाज दिया गयालेकिन अचानक उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को कॉल कियालेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी कोई वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया।बार-बार एम्बुलेंस के लिए संपर्क करने के बावजूदजब कोई राहत नहीं मिलीतो परिजनों ने खुद ही अस्पताल पहुंचने की कोशिश की। लेकिन तब तक युवक की हालत और अधिक बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया।

    स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

    यह घटना न केवल इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को उजागर करती हैबल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह से नदियोंपहाड़ियोंऔर अन्य दूरस्थ इलाकों में रह रहे लोगों के लिए मेडिकल सहायता तक पहुंच प्राप्त करना कितना कठिन हो सकता है। जगरगुंडा जैसे इलाकों मेंजहां तक पहुंचने के लिए भी बेहद कठिन रास्तों से गुजरना पड़ता हैएम्बुलेंस का समय पर उपलब्ध न होना गंभीर समस्या बन चुकी है।मृतक के परिजनों ने एम्बुलेंस का इंतजार कियालेकिन जब कोई मदद नहीं मिलीतो शव को खाट पर लादकर घर ले जाना पड़ा। यह घटना न केवल सुकमा जिले के चिकित्सा प्रशासन के लिए एक शर्मनाक स्थिति हैबल्कि यह स्वास्थ्य सेवाओं की अत्यधिक कमी को भी दर्शाती हैजो गंभीर स्वास्थ्य संकटों से निपटने के लिए बिल्कुल असमर्थ है।

    समाजसेवी और स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया

    स्थानीय समाजसेवियों और कुछ ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनका कहना है कि सुकमा जिले में कई गांवों में एम्बुलेंस की कमी लंबे समय से बनी हुई हैऔर प्रशासन इसे नजरअंदाज करता आ रहा है। जब भी किसी को मेडिकल सहायता की जरूरत होती हैतो इन गांवों में लोग अक्सर चिकित्सा सेवा की अनुपलब्धता से जूझते हैं।कई बार एम्बुलेंस को बुलाने पर वह समय पर नहीं पहुंच पातींजिससे लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इस घटना के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सुकमा प्रशासन इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देगा या यह मुद्दा ऐसे ही उपेक्षित रहेगा।

    आगे की राह और सुधार की आवश्यकता

    यह घटना सुकमा और अन्य ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवा की स्थिति में सुधार की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट करती है। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हर गांव में एम्बुलेंस की उपलब्धता होऔर मेडिकल सहायता समय पर मिले। इसके अलावाएम्बुलेंस कर्मचारियों और चिकित्सा उपकरणों का उचित प्रबंध भी किया जाएताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

    साथ हीग्रामीण इलाकों के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाएं और सुविधाएं बनाई जाएं ताकि वहां रहने वाले लोग भी बेसिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठा सकें। सुकमा जिले के जगरगुंडा इलाके में हुई यह घटना न केवल इस क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर करती हैबल्कि यह पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता को भी दिखाती है। जब तक प्रशासन और सरकार इस दिशा में कदम नहीं उठातीतब तक ऐसे हादसे होते रहेंगेजो न केवल जिंदगियां ले सकते हैंबल्कि लोगों के विश्वास को भी तोड़ सकते हैं।

  • नवादा मॉब लिंचिंग: 'मुस्लिम होने के कारण' युवक की पीट-पीटकर हत्या; दर्दनाक आपबीती

    नवादा मॉब लिंचिंग: 'मुस्लिम होने के कारण' युवक की पीट-पीटकर हत्या; दर्दनाक आपबीती


    नवादा। बिहार: नवादा ज़िले में 5 दिसंबर को मॉब लिंचिंग की एक भयावह घटना में गंभीर रूप से घायल हुए 40 वर्षीय मोहम्मद अतहर हुसैन की शुक्रवार देर रात इलाज के दौरान मौत हो गई। नालंदा निवासी अतहर, जो पिछले 20 सालों से घूम-घूमकर कपड़े बेचते थे, की मृत्यु से पहले की गई गवाही ने इस बर्बरतापूर्ण कृत्य की गहराई को उजागर किया है।

    मौत से पहले अतहर हुसैन का दर्दनाक बयान
    मृतक मोहम्मद अतहर हुसैन ने 7 दिसंबर को रिकॉर्ड कराए अपने बयान में बताया कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे मुस्लिम थे। उनकी आपबीती के कुछ अंश:

    धर्म की पहचान: “4-5 लोगों ने घेरकर मारपीट की और मुझे एक कमरे में ले गए। वहाँ पैंट उतारकर चेक किया गया कि मैं मुस्लिम हूँ या नहीं।”

    असहनीय यातना: धर्म की पुष्टि होने के बाद, हमलावरों ने उन्हें गर्म रॉड, स्टील के रॉड, लाठी-डंडे और ईंटों से बुरी तरह पीटा।

    अमानवीय कृत्य: “किसी ने प्लायर से मेरे कान काटे, उंगलियां तोड़ीं, और नाखून तक उखाड़ लिए। मुझ पर चढ़कर गला दबाया गया, जिससे मेरे मुँह से खून आने लगा।”

    प्राइवेट पार्ट पर हमला: उन्होंने बताया कि हमलावरों ने उनके प्राइवेट पार्ट की जाँच की, वहाँ रॉड डाला गया और पेट्रोल डाला गया। गर्म लोहे की रॉड से शरीर के कई हिस्सों को दागा गया, जिससे चमड़ी निकल गई।

    लूटपाट: रोह थाना क्षेत्र के भट्ठापर गाँव से लौटते समय, नशे में धुत 6-7 युवकों ने नाम पूछने के बाद उनसे 8,000 रुपये लूट लिए। बाद में हमलावरों की संख्या 15-20 तक हो गई थी।

    पुलिस कार्रवाई और एफआईआर
    अतहर हुसैन की मौत के बाद उनकी पत्नी शबनम परवीन ने 10 नामजद और 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है, जिसमें अब हत्या की धाराएँ भी जोड़ी गई हैं।

    नामजद आरोपी: सत्यनारायण कुमार, मंटू यादव, सोनू कुमार, सतीश कुमार, सिकंदर यादव, रामस्वरूप यादव, रंजन कुमार, विपुल कुमार, सचिन कुमार, और सुगन यादव।

    गिरफ्तारी: रोह थाना पुलिस ने अब तक चार आरोपियों – सोनू कुमार, रंजन कुमार, और श्री कुमार सहित – को गिरफ्तार कर लिया है। शेष आरोपियों की तलाश जारी है।

    पोस्टमॉर्टम: मृतक का पोस्टमॉर्टम मजिस्ट्रेट और फोरेंसिक टीम की मौजूदगी में कराया गया।

    चोरी का आरोप: यह भी सामने आया है कि 5 दिसंबर को ही सिकंदर यादव ने मो. अतहर पर घर में घुसकर सोने के कंगन, मंगलसूत्र और अन्य सामान चोरी करने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के चलते डायल 112 अतहर की तलाश में थी, और पुलिस ने उन्हें देर रात कमरे से घायल अवस्था में बरामद कर अस्पताल पहुँचाया था।

    मृतक का परिचय
    मोहम्मद अतहर हुसैन मूल रूप से बिहारशरीफ के गगनदीवान के रहने वाले थे, लेकिन नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के बरुई गाँव में अपने ससुराल में रहकर कपड़े फेरी का काम करते थे। उनकी मौत के बाद उनकी साइकिल और कपड़े का कोई पता नहीं चल पाया है।

    क्या आप इस मामले से संबंधित कोई और जानकारी जानना चाहेंगे, या मैं आपके लिए नवादा क्षेत्र की अन्य खबरें देख सकता हूँ?

  • भिलाई में बोरी में बंद मिली अज्ञात महिला की लाश पुलिस ने शुरू की जांच

    भिलाई में बोरी में बंद मिली अज्ञात महिला की लाश पुलिस ने शुरू की जांच

    भिलाई । भिलाई के चंद्रा मौर्या अंडरब्रिज के पास शुक्रवार सुबह एक बोरी में बंद अज्ञात महिला की लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। यह घटना उस समय घटी जब सुबह के समय अंडरब्रिज से गुजर रहे लोगों की नजर बोरी से बाहर लटकते एक हाथ पर पड़ी। स्थानीय नागरिकों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी जिसके बाद घटनास्थल पर पुलिस और जांच एजेंसियां पहुंची। पुलिस को मौके पर पहुंचते ही शव की स्थिति को देखकर यह साफ हो गया कि महिला की मौत किसी हिंसक तरीके से हुई हो सकती है। बोरी में बंद महिला का शव बहुत बुरी तरह से सड़ चुका था जिससे उसकी पहचान करना फिलहाल संभव नहीं हो सका है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मर्ग कायम कर लिया और घटनास्थल की छानबीन शुरू कर दी।

    पुलिस की जांच और फॉरेंसिक टीम की मदद

    पुलिस ने शव की जांच के लिए फॉरेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड को भी घटनास्थल पर बुलाया। डॉग स्क्वायड के साथ पुलिस ने आसपास के इलाके की तलाशी ली ताकि किसी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन की पहचान की जा सके। साथ ही आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस का कहना है कि महिला की पहचान के लिए आसपास के सभी गांवों और इलाकों में तफ्तीश की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा कि शव मिलने के बाद घटनास्थल के पास के लोग भी चौंक गए हैं। फिलहाल आसपास के लोगों से पूछताछ जारी है ताकि कोई सुराग मिल सके। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है जहां विशेषज्ञ इसकी मौत के कारणों का पता लगाएंगे।

    अज्ञात महिला की पहचान में मुश्किलें

    पुलिस को शव से कोई ऐसी पहचान संबंधी दस्तावेज या अन्य सुराग नहीं मिले हैं जिससे महिला की पहचान हो सके। शव की स्थिति को देखकर माना जा रहा है कि महिला की मौत कुछ दिनों पहले ही हुई होगी। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह भी पता चला है कि महिला का शव बोरी में बंद होने के कारण उसे यहां लाकर फेंका गया हो सकता है। इस मामले में पुलिस ने हत्या की आशंका जताई है और जांच की दिशा में विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जा रहा है।

    इलाके में बढ़ी सुरक्षा जांच में सहयोग की अपील

    इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें घटनास्थल या किसी अन्य स्थान पर इस संदर्भ में कोई जानकारी मिले तो वे तत्काल पुलिस से संपर्क करें। साथ ही पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले में जल्द ही कुछ ठोस सुराग मिल सकते हैं और जांच जारी रहेगी। चंद्रा मौर्या अंडरब्रिज के आसपास के इलाके में पहले भी छोटी-मोटी घटनाएं घटित हो चुकी हैं लेकिन इस प्रकार का गंभीर अपराध इलाके में पहली बार हुआ है। स्थानीय नागरिकों में इस हत्या के बाद भय और चिंता का माहौल है और पुलिस को उनके सहयोग की उम्मीद है।

    निवारण के उपाय और पुलिस की ओर से कदम

    इस घटना के बाद पुलिस ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को कड़ा किया है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वे जनता से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं और जो भी व्यक्ति किसी संदिग्ध गतिविधि को देखे उसे तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इलाके में सीसीटीवी कैमरों की मदद से हर अपराधी तक पहुंच बनाई जा सके।

  • CG सरकार ने शुरू की 24×7 तूहर टोकन ऐप सुविधा अब किसानों को मिलेगा बिना समय की बाध्यता के टोकन

    CG सरकार ने शुरू की 24×7 तूहर टोकन ऐप सुविधा अब किसानों को मिलेगा बिना समय की बाध्यता के टोकन


    रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के किसान बिना किसी निर्धारित समय की बाध्यता के दिन-रात कभी भी अपनी पसंदीदा समय में तूहर टोकन ऐप के माध्यम से टोकन बुक कर सकेंगे। यह निर्णय किसानों के हित में लिया गया है जिससे उन्हें धान विक्रय की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।

    राज्य सरकार ने घोषणा की है कि तूहर टोकन ऐप को अब 24×7 उपलब्ध करवा दिया जाएगा। पहले किसानों को केवल निर्धारित समय में ही टोकन बुक करने की अनुमति थी लेकिन अब यह सुविधा उन्हें किसी भी समय उपलब्ध होगी। यह कदम धान खरीदारी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

    मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को लेकर कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। उन्होंने बताया कि यह कदम किसानों को अपनी सुविधानुसार टोकन बुक करने की स्वतंत्रता देगा और इससे उनकी दिनचर्या में कोई भी व्यवधान नहीं होगा। इसके अलावा इस बदलाव से धान विक्रय के दौरान होने वाली भीड़ और तकनीकी दबाव की समस्या भी कम होगी जो पहले किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण थी।

    अब किसान 13 जनवरी तक आने वाले 20 दिनों के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे जिससे उन्हें धान विक्रय की योजना बनाने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे किसानों को टोकन काटने में किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं होगी।

    एक और महत्वपूर्ण कदम के तहत राज्य सरकार ने 2 एकड़ या उससे कम रकबा वाले छोटे किसानों के लिए भी अतिरिक्त राहत दी है। ये किसान अब 31 जनवरी तक तूहर टोकन ऐप के माध्यम से अपना टोकन बुक कर सकेंगे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर यह सुविधा लघु किसानों को विशेष रूप से प्रदान की गई है ताकि वे भी समय पर धान विक्रय कर सकें।

    राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक सहकारी समिति को केवल उसकी निर्धारित सीमा के भीतर ही टोकन आबंटित किए जाएंगे। इस प्रकार से व्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी और योजनाबद्ध रहेगी। सरकार ने किसानों से यह अपील की है कि वे समय रहते तूहर टोकन ऐप के माध्यम से अपना टोकन प्राप्त करें ताकि वे किसी भी असुविधा से बच सकें और धान विक्रय में कोई परेशानी न हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठा रही है और उनकी मेहनत का पूरा सम्मान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को धान विक्रय की प्रक्रिया में कोई भी कठिनाई न हो और वे बिना किसी दबाव के अपनी फसल को उचित मूल्य पर बेच सकें।

    छत्तीसगढ़ राज्य में कृषि और धान की खेती महत्वपूर्ण है और यह फैसला किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और उनकी मेहनत को उचित मान्यता देने की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। किसानों की सुविधा के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में धान खरीदी में पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों का समय भी बच सकेगा।

  • उत्तर प्रदेश राजनीति में हलचल: नए डिप्टी सीएममंत्री विस्तार और पंकज सिंह सहित चर्चित चेहरों की मंत्री पद की दौड़

    उत्तर प्रदेश राजनीति में हलचल: नए डिप्टी सीएममंत्री विस्तार और पंकज सिंह सहित चर्चित चेहरों की मंत्री पद की दौड़


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदलनए डिप्टी सीएम की संभावनाएं और योगी सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। ऐसे में यह बदलाव आगामी राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दे सकते हैं।

    सूत्रों के मुताबिकबीजेपी की ओर से उत्तर प्रदेश को नया डिप्टी सीएम मिलने की संभावना जताई जा रही हैऔर इस रेस में सबसे मजबूत नाम साध्वी निरंजन ज्योति का है। उनके नाम को जातीय और सामाजिक समीकरणों के मद्देनज़र सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। यदि उन्हें उप मुख्यमंत्री बनाया जाता हैतो यह पार्टी के भीतर नए संतुलन और संगठनात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है।

    योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएँ भी तेज हो गई हैंजिसमें 6 नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश कैबिनेट में अभी 54 मंत्री हैंजबकि अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इन नई नियुक्तियों में क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा। मंत्रिमंडल में बदलाव केवल नए चेहरों की एंट्री तक सीमित नहीं रहेगा। कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी की भी संभावना जताई जा रही हैताकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले नेताओं को मौका मिल सके। पार्टी नेतृत्व प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन के आधार पर संभावित मंत्रियों की सूची तैयार कर रहा है।

    इस बीचकुछ समाजवादी पार्टी के बागी विधायकों को भी मंत्री पद मिल सकता हैजो पार्टी के भीतर राजनीतिक रणनीति के हिस्से के रूप में देखी जा रही है। प्रमुख नामों में पूजा पाल और मनोज पांडेय शामिल हैं। इसके अलावाबीजेपी के वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह का नाम भी चर्चा में है। पंकज सिंहजो नोएडा के विधायक हैंको भी इस बार मंत्री बनाए जाने की संभावना है। उनका संगठनात्मक अनुभवक्षेत्रीय पकड़ और केंद्रीय नेतृत्व के साथ उनकी विश्वसनीयता उन्हें इस महत्वपूर्ण भूमिका के लिए एक मजबूत दावेदार बनाती है।

    यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी के मंत्रिमंडल में शामिल होने की भी पूरी संभावना हैक्योंकि वह पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं। उनके मंत्री पद पर शामिल होने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल मजबूत हो सकता है। इस मंत्रिमंडल विस्तार के दौरानबीजेपी अपने सहयोगी दलों को भी उचित हिस्सेदारी देने का विचार कर रही है। राष्ट्रीय लोकदल और अपना दल के नेताओं को भी मंत्री बनाने की चर्चा हैजिससे NDA के भीतर साझेदारी और संतुलन को मजबूत किया जा सके। यूपी बीजेपी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा है कि संगठन एक बड़ी जिम्मेदारी हैऔर संगठनात्मक बदलावों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उनके बयान से यह स्पष्ट है कि जल्द ही अहम फैसले लिए जाएंगे।

  • अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात

    अखिलेश यादव का 40,000 रुपये देने का वादा: अयोध्या की महिलाओं ने की ये बड़ी बात


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले नेताओं के घोषणाएं और वादे चर्चा का विषय बन जाते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिलाओं को सालाना 40,000 रुपये देने का वादा किया है। उन्होंने इसे बीजेपी के बिहार चुनाव में दिए गए 10,000 रुपये के वादे का जवाब बताया। इस घोषणा पर अयोध्या की महिलाओं की क्या राय है, यह जानने के लिए यूपी Tak की टीम ने गांव में जाकर उनकी प्रतिक्रिया ली।

    महिलाओं ने की उम्मीदें जाहिर

    अयोध्या के ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने इस योजना पर अपनी राय दी और अपनी उम्मीदों का इज़हार किया। एक स्थानीय महिला सुंदर कली ने कहा, अखिलेश यादव का यह प्रस्ताव अच्छा है, हम लोग मजदूरी करते हैं, इससे अच्छा होगा कि हमें पैसा मिले। अभी सरकार की तरफ से हमें कुछ नहीं मिलता, केवल मजदूरी करते हैं। अगर अखिलेश यादव देंगे तो ठीक है, नहीं तो हम अपना काम करते रहेंगे।

    विकास की उम्मीदें भी बनीं मुद्दा

    वहीं कश्मीरा देवी ने कहा, हम लोग मजदूरी करके अपना पेट पालते हैं। अगर सरकार कुछ मदद करेगी तो अच्छा रहेगा, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। सरकार बढ़िया नहीं काम कर रही है, जो विकास करेगा हम उसके साथ रहेंगे। विमला देवी ने भी कहा, समाजवादी सरकार के समय पेंशन मिलती थी और सड़कें बनती थीं। अब कुछ नहीं मिल रहा है। हमें विकास और रोजगार दोनों चाहिए।

    महिलाओं की मांग-पैसा नहीं, विकास और रोजगार भी चाहिए

    ममता नाम की महिला ने कहा, यह अच्छा है कि पैसा मिलेगा, इससे हमारी रोज़ी-रोटी में मदद होगी। गरीब बच्चों को भी फायदा होगा, लेकिन सिर्फ पैसा नहीं, हमें काम भी चाहिए। अगर पैसा मिलेगा तो वोट देंगे, नहीं मिला तो कोई बात नहीं। वहीं अन्य महिलाओं ने भी इस योजना का स्वागत किया, लेकिन साफ किया कि अगर वादा पूरा नहीं हुआ तो वे वोट नहीं देंगी।

    योगी सरकार से तुलना

    महिलाओं ने योगी सरकार की योजनाओं के बारे में भी बात की। उन्होंने बताया कि उन्हें विधवा पेंशन के रूप में 2,000 रुपये मिलते हैं, लेकिन इसके बावजूद गांव में विकास की कमी महसूस हो रही है। रोज़मर्रा की सुविधाओं और रोजगार के मामले में उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

    समाजवादी पार्टी और बीजेपी का मुकाबला

    अखिलेश यादव का यह वादा महिलाओं के बीच उम्मीद और नाखुशी का मिश्रित असर छोड़ रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि वे सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि स्थिरता, रोजगार और विकास के लिए भी वोट देंगे। यह साफ है कि महिलाएं अपनी जिंदगी में सुधार और अपने गांव के विकास को भी उतना ही महत्व देती हैं जितना कि चुनावी वादों को।